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एनकाउंटर में मारा गया ₹1 लाख का इनामी बदमाश जावेद, दिल्ली पुलिस के जवान की हत्या में था वॉन्टेड

उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। ये मुठभेड़ बिनौली पुलिस चौकी से कुछ दूर स्थित बाईपास पर मंगलवार (फ़रवरी 2, 2021) की देर रात हुई। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में 1 लाख का इनामी बदमाश जावेद मारा गया। बड़ौत क्षेत्र में मारा गया जावेद दिल्ली पुलिस के एक सिपाही की हत्या के मामले में पहले से ही वॉन्टेड था। घटनास्थल से कार्बाइन और पिस्तौल भी बरामद हुई है।

कोतवाल अजय कुमार शर्मा ने जानकारी दी है कि वो पुलिस टीम के साथ रात को बिनौली रोड पर वाहनों की चेकिंग करने में लगे हुए थे। दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर आदेश भी उनके ही साथ थे। तभी वहाँ से एक सेंट्रो कार गुजरी। जब पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया तो उसमें बैठे अपराधी फायरिंग करने लगे। इसके बाद वो कार लेकर आगे भाग गए। पुलिस ने भी जवाबी गोलीबारी की, जिसमें एक अपराधी को गोली लगी और वो घायल हो गया।

घायल अपराधी को पुलिस ने अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके पास से कार्बाइन, पिस्टल और 50 कारतूस बरामद किए गए हैं। इस मुठभेड़ में पुलिस अधिकारी भी बाल-बाल बचे। कोतवाल अजय कुमार शर्मा और सब-इंस्पेक्टर आदेश की बुलेटप्रूफ जैकेट में भी गोली धँस गई। मृत अपराधी जावेद गाजियाबाद के लोनी का रहने वाला था। उस पर कई मामले दर्ज हैं।

बागपत मुठभेड़ में मारा गया जावेद अक्टूबर 2020 में सिंघावली थाना क्षेत्र में दिल्ली पुलिस के सिपाही मनीष यादव की हत्या के मामले में मुख्य आरोपित था। वो मेरठ के जानी थाना क्षेत्र के डालूहेड़ा गाँव के रहने वाले थे। वो दिल्ली से बाइक पर अपने घर लौट रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में जावेद पर 1 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। उस पर 20 मामले दर्ज थे। उसका साथी फरार होने में कामयाब रहा, जिस पर 50 हजार रुपए का इनाम था।

अब मुठभेड़ में मारे गए जावेद के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं उसके साथ की तलाश में पुलिस ने कई जगहों पर दबिश दी है, लेकिन वो अब तक हत्थे नहीं चढ़ सका है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और यूपी पुलिस ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। स्पेशल टीम के भी सभी पुलिसकर्मी मेरठ के ही निवासी हैं। स्पेशल सेल की टीम में इंस्पेक्टर शिव कुमार, दरोगा अनिल ढाका, राजेश शर्मा, आदेश यादव और अनिल चड्ढा शामिल थे।

नंगा करो, हथकड़ी लगाओ, चीनी मर्दों के पास भेजो… गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर करंट: उइगर महिलाओं के साथ हर रात रेप

चीन के शिनजियांग प्रांत में नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर उइगर मुसलमानों पर अत्याचार दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में अभी तक चीनी अधिकारियों की तानाशाही और जुल्म की खबरें आती थीं। मगर, अब पता चल रहा है कि वहाँ किस तरह री-एड्यूकेशन के नाम पर उइगर महिलाओं का एक सिस्टम के तहत बलात्कार किया जाता है और कैसे शीं जिनपिंग के नेतृत्व में चीन का मकसद किसी समुदाय में कोई सुधार करना नहीं बल्कि उन्हें पूरी तरह बर्बाद करना है। 

हाल में बीबीसी में प्रकाशित खबर में उइगर मुस्लिम महिलाओं पर होते जुल्म की विस्तृत चर्चा है। रिपोर्ट में बीबीसी ने कुछ पीड़िताओं का जिक्र किया है, जिन्हें उस डिटेंशन कैंप में महीनों रखा गया। इनमें से तुरसुनय जियावुडुन (Tursunay Ziawudun) आरोप लगाती हैं कि कैंप में चीनी अधिकारी देर रात जेल में आते हैं और अपने लिए एक महिला का चुनाव करते हैं। इसके बाद उसे अंधेरे कमरे में ले जाया जाता है, जहाँ सर्विलांस के लिए कोई कैमरे नहीं होते।

कई रात चीनी पुरूषों के हवस का शिकार हो चुकी जियावुडुन अब अमेरिका में हैं। लेकिन उनके लिए वो समय भुला पाना असंभव है। वह कहती हैं कि महिलाएँ हर रात जेल से निकाली जाती हैं और एक के बाद एक मास्क पहना हुआ चीनी आदमी उनका रेप करता है। वह खुद कई बार प्रताड़ित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 3 मौकों पर उनके साथ गैंग रेप भी हुआ। एक समय में दो या तीन लोग उन पर हावी हुए।

बीबीसी की रिपोर्ट में एक अन्य महिला गुलजिरा ऑलखान (Gulzira Auelkhan) का भी जिक्र है। वह भी कैंप में 18 महीने रही थीं। गुलजिरा बताती हैं कि कैंप में उनसे महिलाओं के कपड़े उतरवा कर उन्हें चीनी मर्दों के पास भेजने को कहा जाता था। जिसके कारण वह महिलाओं को नंगा करती थीं, उन्हें हथकड़ी लगाती थीं और फिर चीनी मर्दों के पास उन्हें कमरे में भेज कर बाहर बैठती थीं। जैसे ही सारे मर्द निकलते थे, वह वहाँ दोबारा जाती थीं। कमरे को साफ करती थीं और महिलाओं को नहलाने के लिए ले जाती थीं।

पीड़िताओं के अनुसार, चीनी पुरूष रात बिताने के लिए सबसे खूबसूरत उइगर महिलाओं को चुनते थे और उसके लिए भुगतान भी करते थे। गुलजिरा इस पूरे तंत्र को संगठित बलात्कार की व्यवस्था कहती हैं। वह बताती हैं कि उन्हें कमरे में अपना काम करने के बाद बाहर लौट आना होता था। वह शक्तिहीन होने के कारण विरोध भी नहीं कर पाती थीं। वहीं जियावुडुन बताती हैं कि जो महिलाएँ सेल से निकलती थीं, उनमें कुछ तो लौट आती थीं और कुछ हमेशा के लिए गायब हो जाती थीं। जो लौटती थीं, उन्हें कुछ भी बताने की मनाही होती थी। 

जियावुडुन के अनुसार, आप किसी को कुछ बता नहीं सकते सिर्फ़ चुपचाप वहाँ जाकर लेट जाना है। पूरी व्यवस्था पर बात करते हुए वह कहती हैं कि ये सब सिर्फ़ हर किसी की आत्मा को मारने के लिए किया जाता है। कई-कई लोगों के सामने एक अकेली महिला का बलात्कार होता है। शरीर के हरेक हिस्से पर दाँतों से काटा जाता है। पता ही नहीं चलता बलात्कार करने वाला इंसान है या जानवर।

शिनजियांग की एक महिला केलबिनूर सेदिक जो कैंप में चीनी भाषा सिखाने के लिए भेजी जाती थीं, वह भी अब चीन से कहीं और जा चुकी हैं और अपने अनुभवों पर खुलकर बताती हैं। उनके अनुसार कैंप में महिलाओं को बहुत नियंत्रित रखा जाता है। उन्हें एक पुलिस महिला ने स्वयं बताया कि वहाँ रेप एक कल्चर बन गया है। महिला पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि बात सिर्फ़ रेप तक सीमित नहीं है। महिलाओं को बिजली के करंट से भी मारा जाता है।

चार तरह से उइगर महिलाओं को बिजली के करंट दिए जाते हैं- पहला चेयर से, दूसरा दस्तानों से, तीसरा हेलमेट से और चौथा गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर। वह कहती हैं कि ये दर्द इतना भयंकर होता है कि क्लास के दौरान भी उन्हें आवाजें सुनाई पड़ती हैं। 

मालूम हो कि पहली बार उइगर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार की कहानी प्रकाश में नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा चुका है कि कैसे वहाँ चीनी अधिकारी मुस्लिम महिलाओं का रेप करते हैं। उनका गर्भ गिरवाते हैं। उनके गुप्तांगों में मिर्ची का पेस्ट आदि डालते हैं

इसके अलावा कॉन्सनट्रेशन कैंप में रह चुके पूर्व बंदी इन बातों को भी बता चुके हैं कि उइगर मुस्लिमों को वहाँ सुअर का माँस जबरन खिलाया जाता है और मंडारिन बोलने का दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं, चीन में जिन मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्प में भेजा जाता है, उनके घर की निगरानी रखने के लिए चीनी नागरिकों को हायर किया गया है। ये चीनी नागरिक उइगर मुस्लिमों के घर पर निगरानी रखते हैं। निगरानी के नाम पर इन उइगरों के घर-परिवार की महिलाओ के साथ जाकर उनके बिस्तर पर भी सोते हैं।

जिसे देने गया था इस्लामी शिक्षा, उसी 6 साल की बच्ची से यौन शोषण: मौलवी शमसुद्दीन गिरफ्तार

मौलवी शमसुद्दीन बरभुइयाँ को असम की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मौलवी 6 दिसंबर 2020 से ही फरार था। मौलवी शमसुद्दीन पर 6 साल की बच्ची का यौन शोषण का आरोप है।

असम के सिलचर सदर थाने की पुलिस ने मौलवी शमसुद्दीन बरभुइयाँ को मेहरपुर के पंचगोरी लेन स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया। मौलवी पिछले 2 महीने से भागा हुआ था। लेकिन असम पुलिस ने उस पर नजर बनाए रखी थी और जैसे ही वो अपने घर के पास दिखा, उसे दबोच लिया गया

इस्लामी शिक्षा के लिए पीड़ित बच्ची की माँ ने ही मौलवी शमसुद्दीन को चुना था। यह मौलवी पीड़ित माँ के भाई के घर उनके बच्चों को पढ़ाने आता था। उसी से अपनी 6 साल की बेटी को भी इस्लाम की शिक्षा के लिए इन्होंने बात की थी।

मौलवी शमसुद्दीन बरभुइयाँ घटना वाले दिन आम दिनों की तरह ही बच्चों को पढ़ाने आया था। लेकिन उस दिन पीड़ित बच्ची भी पढ़ने आई थी। जब परिवार के बड़े लोग बच्चों को मौलवी के पास पढ़ता छोड़ चाय बनाने चले गए तब यौन शोषण को अंजाम दिया गया।

6 दिसंबर को असम के सिलचर सदर थाने में शिकायत दर्ज कराने आई पीड़ित बच्ची की माँ ने बताया कि पढ़ाई वाले कमरे से अचानक बच्ची रोते हुए निकली थी। बाहर आकर भी वो रो ही रही थी, डरी हुई थी। बहुत पूछने पर उसने बताया कि मौलवी उसके गुप्तांगों को छूना चाह रहा था। बच्ची के मना करने पर मौलवी ने जबरदस्ती किया।

पूरा वाकया सुनने के बाद परिवार के लोग जब मौलवी के पढ़ाने वाले कमरे में गए तो वहाँ अन्य बच्चों के अलावा कोई नहीं था। मौलवी शमसुद्दीन बरभुइयाँ वहाँ से भाग चुका था। परिवार वालों ने पहले लोक-लाज के डर से पुलिस के पास जाने से मना किया था। लेकिन कई अन्य बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पीड़िता की माँ ने FIR दर्ज कराई

आंदोलन में मरे किसानों को मुआवजा मिलेगा या नहीं? ‘No Sir’ – लोकसभा में सरकार ने विपक्ष को दिया स्पष्ट जवाब

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को ‘किसान आंदोलन’ के तहत ट्रैक्टर रैली निकाली गई थी। इसमें ट्रैक्टर से स्टंट करते हुए एक ‘किसान’ की मौत हो गई। दिन भर हिंसा हुई। इसके अलावा ‘किसान आंदोलन’ में शामिल संगठन और विपक्षी दलों के नेता अलग-अलग आँकड़े देकर किसानों की मौत की बातें कर रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा है कि ऐसे मृतकों को मुआवजा देने की कोई योजना नहीं है।

पंजाब के ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ ने दावा किया है कि 4 महीने से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में 70 से अधिक किसान मारे गए हैं। संगठन का कहना है कि इनमें अधिकतर ठंड और हार्ट अटैक के कारण मरे हैं। संगठन का कहना है कि कई युवा किसान दुर्घटना में मरे तो बुजुर्गों की मौत का आँकड़ा ज्यादा है। कई किसान संगठनों ने 76-78 का आँकड़ा भी दिया है। बताया गया कि इनमें 65 पंजाब के और 10 हरियाणा के थे।

अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा है कि ‘किसान आंदोलन’ में मरे ‘किसानों’ के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा। लगभग 29 सांसदों ने केंद्रीय किसान एवं कृषि कल्याण मंत्री से ये सवाल पूछा था। पहला सवाल था कि क्या सरकार को पता है कि हजारों किसान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 2 महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर सरकार ने कहा “हाँ, कुछ किसान संगठन और उसके सदस्य इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।”

वहीं दूसरा सवाल था कि इस आंदोलन के दौरान कितने किसानों की मौत हुई है? इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि किसान संगठनों से हुई दर्जन भर दौर की वार्ताओं में कई बार उनसे अपील किया गया कि वो महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इस आंदोलन में न लेकर आएँ। किसान नेताओं को कोरोना संक्रमण और ठंड स्थित अन्य कठिनाइयों की याद दिलाई। हालाँकि, सरकार ने मौत का कोई आँकड़ा नहीं दिया।

तीसरे प्रश्न में मृतकों के परिजनों को मुआवजा सम्बन्धी विवरण माँगे गए थे, जिसके उत्तर में सरकार ने ‘No Sir’ जवाब दिया। किसानों से हुई वार्ताओं के सम्बन्ध में पूछे गए चौथे प्रश्न के जवाब में सरकर ने कहा कि अब तक 11 राउंड की बैठकें हो चुकी हैं। सरकार ने बताया कि किसान नेताओं को एक के बाद एक कई प्रस्ताव दिए गए, ताकि मुद्दे का समाधान हो। इन कानूनों को वापस लेने के बारे में पूछे गए पाँचवें व अंतिम सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन पर रोक लगाई हुई है।

बता दें कि अब इस ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में विदेशी सेलेब्रिटीज से भी ट्वीट्स करवाए जा रहे हैं। गायिका एवं अभिनेत्री रिहाना ने भी CNN की एक खबर का लिंक शेयर करते हुए पूछा कि हम इस पर क्यों बात नहीं कर रहे हैं? इस पर जवाब देते हुए कंगना रनौत ने उन्हें ‘मूर्ख’ के विशेषण से नवाजा और चुप बैठने की सलाह दी। पर्यावरण एक्टिविस्ट कही जाने वाले ग्रेटा थनबर्ग ने भी पराली जलाने वाले प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।

‘चुप बैठो मूर्ख, ये किसान नहीं बल्कि आतंकी हैं’: ₹4400 Cr की संपत्ति वाली रिहाना को कंगना ने लताड़ा

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में अब विदेशी सेलेब्रिटीज भी आगे आने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय गायिका एवं अभिनेत्री रिहाना ने भी CNN की एक खबर का लिंक शेयर करते हुए पूछा कि हम इस पर क्यों बात नहीं कर रहे हैं?

रिहाना ने जिस खबर को शेयर किया था, उसमें दावा किया गया है कि दिल्ली में केंद्र सरकार ने इंटरनेट कनेक्शन काट दिया है और किसानों के साथ पुलिस अत्याचार कर रही है। ग्रेटा थनबर्ग ने भी रिहाना के सुर में सुर मिलाया। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने ‘किसान किसान आंदोलन’ पर रिहाना के सवाल का जवाब दिया है।

उन्होंने कहा, “इसके (किसान आंदोलन) बारे में बात इसलिए नहीं हो रही है, क्योंकि वो किसान हैं ही नहीं। वो ऐसे आतंकी हैं, जो भारत को विभाजित करने के प्रयास में लगे हुए हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि हमारा देश टूट जाए और फिर कमजोर हुए देश पर चीन अपना कब्ज़ा जमा ले। फिर वो इसे अपनी चाइनीज कॉलोनी बना लेगा, USA की तरह।” उन्होंने दिल्ली में हुई हिंसा के प्ररिप्रेक्ष्य में ये बातें कहीं।

कंगना रनौत ने रिहाना को ‘मूर्ख’ की संज्ञा देते हुए उन्हें चुप बैठने की सलाह दी। उन्होंने लिखा, “तुम नकली लोगों की तरह हम अपने देश को कभी नहीं बेच सकते।” लोगों ने कंगना रनौत की इस प्रतिक्रिया पर ख़ुशी जताई और उनकी तारीफ़ की।

बता दें कि रिहाना को फ़ोर्ब्स मैगजीन ने ‘दुनिया की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं’ की सूची में शामिल किया है। उन्होंने ‘फेंटी ब्यूटी’ नामक कॉस्मेटिक्स ब्रांड की भी स्थापना की है।

रिहाना को अमरीका की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं की सूची में 33वाँ स्थान दिया गया था। साथ ही उन्हें ‘पॉवर वुमन 2020′ की सूची में 69वाँ स्थान मिला था। साथ ही सेलेब्रिटी 100 में फ़ोर्ब्स ने उन्हें 60वाँ स्थान दिया था। मैगजीन ने उन्हें 2014 में ’30 अंडर 30’ की सूची में स्थान दिया था। 32 वर्षीय रिहाना की संपत्ति 600 मिलियन डॉलर (4378.11 करोड़ रुपए) की आँकी गई है। वो सबसे अमीर सेलेब्स में शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर लोग ग्रेटा थनबर्ग की भी आलोचना कर रहे हैं क्योंकि जहाँ एक तरफ वो दुनिया भर में पर्यावरण बचाने के नाम पर घूमती रहती हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन किसानों का समर्थन कर रही हैं, जो हर साल पराली जलाते हैं। लोगों ने पूछा कि प्लास्टिक के प्रयोग के खिलाफ अभियान चला रहीं ग्रेटा उन लोगों का समर्थन क्यों कर रही हैं, जिनके कारण पूरी दिल्ली महीनों प्रदूषण में डूबी रहती है? कुछ लोगों ने दोनों के ट्वीट्स को खालिस्तानियों का ‘पेड कैम्पेन’ बताया।

हाल ही में दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने भी कहा है कि वह ये देखकर आश्चर्यचकित हैं कि 26 जनवरी के दिन जब पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़कर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया, उन पर कम सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि 26 तारीख को बैरिकेड तोड़ दिए गए थे, उस पर मीडिया ने कोई सवाल नहीं उठाया। वहीं अब बैरिकेडिंग मजबूत की जा रही है तो सब सवाल पूछ रहे हैं।

आखिर आम आदमी को इस बजट से क्या मिल गया? Just usual promises or realistic vision?

सोमवार (फरवरी 01, 2021) को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2021-2022 पेश किया। इसके बाद हर कोई अपने-अपने तरीके से इस बजट की समीक्षा करने में लगा हुआ है। इस वर्ष बजट में सरकार ने किसानों और खेती से जुड़े सेक्‍टर्स के साथ ही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर भी खासा ध्‍यान दिया है।

ऑपइंडिया ने बजट को सरल भाषा में समझने के लिए के लिए SRCC (दिल्ली विश्वविद्यालय) के Dept of Economics में सहायक प्रोफेसर अभिनव प्रकाश से बात की। इस दौरान हमने उनसे यह जानने की कोशिश की बजट आम आदमी के जीवन को किस तरह से प्रभावित करता है।

बात-चीत की पूरी वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

PM मोदी ने रखी थी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव, ‘आत्मनिर्भरता’ बना 2020 का ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी शब्द

ऑक्सफ़ोर्ड लैंग्वेजेज़ ने ‘आत्मनिर्भरता’ शब्द को वर्ष 2020 के लिए ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी शब्द चुना है। कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘आत्मानिर्भर भारत’ अभियान के लिए की गई महत्वपूर्ण पहल के बाद यह शब्द, ‘आत्मनिर्भरता’ (Aatmanirbharta) प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता रहा है।

ऑक्सफ़ोर्ड लैंग्वेजेज़ के अनुसार, “साल का शब्द किसी ऐसे शब्द को चुना जाता है, जिससे बीते साल का मूड और लोगों की व्यवस्तता झलकती हो और जिसका आने वाले दौर में भी सांस्कृतिक महत्व होता है। आत्मनिर्भरता शब्द का अर्थ और सोच बीते साल अधिकतर भारतीयों की भावना का हिस्सा रहा है।”

ऑक्सफोर्ड ने वर्ष 2020 के हिंदी शब्द (Hindi word of the year 2020) के चुनाव के लिए समिति का गठन किया था। ‘हिंदी वर्ड ऑफ़ द ईयर’ की सलाहकार समिति की विशेषज्ञ कृतिका अग्रवाल ने कहा कि उन्हें चयन के लिए कई शब्द मिले थे, लेकिन ‘आत्मनिर्भरता’ शब्द को इसलिए चुना गया क्योंकि यह शब्द असंख्य भारतीयों की रोजाना के संघर्ष और कोरोना वायरस महामारी के विरुद्ध उनकी लड़ाई को दर्शाता है।

एक प्रेस रिलीज में ‘ऑक्सफ़ोर्ड लैंग्वेजेज़’ ने कहा, “विगत वर्ष भारत के लिए मुश्किलों से भरा था। कोरोना वायरस महामारी के कारण देशव्यापी कठोर लॉकडाउन लगाया गया। लोगों की आवाजाही को लेकर लगाई गई पाबंदियों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए। इस मुश्किल दौर में लोगों ने अपनी कोशिशें जारी रखीं और आत्मनिर्भरता का प्रमाण दिया।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 पैकेज की घोषणा करते हुए ‘आत्मनिर्भरता’ पर विशेष जोर दिया था। आत्मनिर्भर अभियान के तहत ही भारत ने कोविड-19 वैक्सीन निर्माण में बड़ी सफलता हासिल की। एक ओर जहाँ देश में बड़े पैमाने पर कोरोना वैक्सीन का निर्माण हो रहा है, वहीं भारत कई देशों को भी वैक्सीन सप्लाय कर रहा है।

इससे पहले, वर्ष 2017 में ‘आधार’ को ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा हिंदी शब्द चुना गया था। वर्ष 2018 में ‘नारी शक्ति’ और वर्ष 2019 में ‘संविधान’ को चुना गया था।

पुलिस पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिशों पर सन्नाटा, कँटीले बैरिकेड्स पर हंगामे का दिल्ली पुलिस ने दिया जवाब

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच नई दिल्ली की सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। इसे लेकर पुलिस से कई प्रकार के सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को पत्रकारों को संबोधित करते हुए, दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि वह ये देखकर आश्चर्यचकित हैं कि 26 जनवरी के दिन जब पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़कर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया, उन पर कम सवाल उठाए गए।

दिल्ली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि जब ट्रैक्टर का इस्तेमाल पुलिस पर हमला करने के लिए किया गया और 26 तारीख को बैरिकेड तोड़ दिए गए थे, उस पर मीडिया ने कोई सवाल नहीं उठाया। अब हमने क्या किया? हमने सिर्फ बैरिकेडिंग को मजबूत किया है ताकि यह फिर से टूट न जाए।”

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ नई दिल्ली की सीमाओं पर ज्यादा प्रदर्शनकारी किसानों को एकत्र होने से रोकने के लिए, पुलिस ने लोहे की कीलें और लकड़ी के बोर्ड सड़कों पर लगाए हैं। कॉन्सर्टिना के कटीले तारों और कंक्रीट स्लैब की दोहरी परतों से लोहे की बैरिकेड्स को मजबूत किया गया है, जिन पर ​​कि ट्रैक्टरों का भी चलना मुश्किल है। गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 6 फरवरी को राष्ट्रव्यापी ‘चक्का जाम’ की घोषणा की है।

एसएन श्रीवास्तव ने संवाददाताओं से कहा कि कृषि कानूनों के विरोध से जुड़ी हिंसा में 510 पुलिस कर्मी घायल हुए हैं। आंंदोलन को देखते हुए प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) और त्वरित कार्य बल (आरएएफ) सहित सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रखा गया है।

दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कुल 44 FIR दर्ज की हैं और 122 लोगों को गिरफ्तार किया। हिंसा के सम्बन्ध में पुलिस ने 54 से अधिक किसान नेताओं और 200 ट्रैक्टर मालिकों को भी नोटिस भेजे हैं।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि हिंसा के दिन के वीडियो और तस्वीरें भेजने के लिए आम जनता से भी अपील की है और 1,000 से अधिक वीडियो फुटेज के साथ ही फोटो और मेल भी प्राप्त किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें स्कैन किया जा रहा है और एफआईआर के जरिए मामले की जाँच कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में 12 बच्चों को पोलियो ड्रॉप की जगह पिला दिया हैंड सैनेटाइजर, तबियत बिगड़ने पर लापरवाही आई सामने

महाराष्ट्र के यवतमाल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ स्वास्थ्यकर्मियों ने लापरवाही की हद लाँघते हुए 12 बच्चों को पोलियो ड्रॉप की जगह हैंड सेनेटाइजर पिला दिया। बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना रविवार (जनवरी 31, 2021) की है। 

रविवार को घाटांजी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान 12 बच्चों को हैंड सेनेटाइजर पिलाने की घटना सामने आई। जिसके बाद इन बच्चों के परिजनों ने देर रात उल्टी और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की बात कही। तबियत बिगड़ने पर इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। गिरम गेदाम, योगश्री गेदाम, हर्ष मेश्राम, भावना अर्के, वेदांत मेश्राम, राधिका मेश्राम, प्राची मेश्राम, माही मेश्राम, तनुज गेदाम, निशा मेश्राम, आस्था मेश्राम को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इनका इलाज चल रहा है।

यवतमाल जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री कृष्ण पांचाल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती बच्चे अब ठीक हैं और इस घटना से जुड़े तीन कर्मचारियों- एक स्वास्थ्यकर्मी, एक डॉक्टर और एक आशा वर्कर को निलंबित किया जाएगा। 

पांचाल ने कहा कि उन्हें जिला स्वास्थ्य अधिकारी से प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट मिली है जिसमें उन्होंने कहा है कि एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एक आशा कार्यकर्ता और एक आँगनवाड़ीवाड़ी सेविका लापरवाही के लिए दोषी है। उन्हें तत्काल निलंबित किया जाएगा और जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यवतमाल कलेक्टर एम डी सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह घटना रविवार को कापसीकोपरी गाँव के भानबोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई, जहाँ एक से पाँच साल के बच्चों के लिए राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान चल रहा था। घटना की जाँच पूरी कर ली गई है। सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी और राज्य स्तर पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना तब सामने आई है, जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए साल 2021 में नेशनल पोलियो इम्यूनाइज़ेशन ड्राइव लॉन्च किया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत में बीते एक दशक से पोलियो का कोई मामला नहीं आया है। भारत में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी, 2011 को आया था। हालाँकि, देश में पोलियो को दोबारा पैर पसारने से रोकने के लिए सरकार सतर्क है क्योंकि भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान में यह बीमारी अभी भी मौजूद है। इसलिए पोलियो को हराने के लिए साल में दो बार वैक्सीन प्रोग्राम आयोजित होता है।

कृषि कानून विरोधी सिख प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे: देखें वीडियो

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कृषि कानून विरोधी सिख प्रदर्शनकारियों को ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने ‘किसान-मजदूर एकता ज़िंदाबाद’ और मोदी विरोधी नारे भी लगाए गए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर की। वीडियो को देखने से ऐसा लग रहा है कि ये लोग किसी चलती वाहन में बैठे हैं। इन लोगों ने अपने सिर पर पगड़ी या दुपट्टा बाँध रखा है। उन्होंने ‘सत श्री अकाल’ और ‘मोदी सरकार मुर्दाबाद’ सहित कई नारे भी लगाए।

हालाँकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ का है या फिर ये कहाँ पर शूट किया गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह वीडियो संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के दौरान कैप्चर किया गया है। 

सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो 45 सेकंड लंबा है। विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों से चल रहा है और यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि वे कब तक समाप्त होंगे। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों के हंगामे के बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में सीमाओं को मजबूत कर दिया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही थी। इससे पहले पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ में भड़काऊ भाषण दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा था कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया था। योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं।

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे।