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कृषि कानून विरोधी सिख प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे: देखें वीडियो

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कृषि कानून विरोधी सिख प्रदर्शनकारियों को ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने ‘किसान-मजदूर एकता ज़िंदाबाद’ और मोदी विरोधी नारे भी लगाए गए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर की। वीडियो को देखने से ऐसा लग रहा है कि ये लोग किसी चलती वाहन में बैठे हैं। इन लोगों ने अपने सिर पर पगड़ी या दुपट्टा बाँध रखा है। उन्होंने ‘सत श्री अकाल’ और ‘मोदी सरकार मुर्दाबाद’ सहित कई नारे भी लगाए।

हालाँकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ का है या फिर ये कहाँ पर शूट किया गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह वीडियो संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के दौरान कैप्चर किया गया है। 

सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो 45 सेकंड लंबा है। विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों से चल रहा है और यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि वे कब तक समाप्त होंगे। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों के हंगामे के बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में सीमाओं को मजबूत कर दिया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही थी। इससे पहले पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ में भड़काऊ भाषण दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा था कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया था। योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं।

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। 

AAP नेता संजय सिंह को SC से नहीं मिली अग्रिम जमानत, यूपी पुलिस की गिरफ़्तारी का सता रहा डर!

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजय सिंह के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट से सांसद को सुरक्षा देने से मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को इनकार कर दिया। सिंह ने पिछले साल 12 अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश सरकार समाज के एक विशेष वर्ग का समर्थन कर रही है, जिसके बाद लखनऊ में यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

आप नेता ने संवाददाता सम्मेलन के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकियों को रद्द किए जाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये प्राथमिकियाँ ‘दुर्भावनापूर्ण तरीके से राजनीतिक बदले की भावना के तहत दर्ज’ की गई थीं।

सिंह ने एक अन्य याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 21 जनवरी के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने 12 अगस्त, 2020 के संवाददाता सम्मेलन के बाद लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन किए बिना कोई आदेश पारित नहीं करेगी।

न्यायालय ने सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा और वकील समीर सोढी से कहा कि वे उच्च न्यायालय के फैसले की प्रति उसे मुहैया कराएँ। जब तन्खा ने शीर्ष अदालत से अपील की कि सिंह को लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, तो पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के समक्ष पेशी से छूट का अनुरोध कर सकते हैं

पीठ ने सिंह की याचिका पर फिलहाल कोई भी नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया और मामले की आगे की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए टाल दी। सिंह ने याचिका में कहा है, “संबंधित संवाददाता सम्मेलन में याचिकाकर्ता ने केवल निश्चित सामाजिक मुद्दे और बिना नाम लिए सरकार द्वारा समाज के एक विशेष वर्ग के प्रति सहानुभूति रखने जैसे सवाल उठाए थे।” आप नेता ने कहा है कि संवाददाता सम्मेलन के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के थानों में भाजपा के सदस्यों के इशारे पर उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई।

चौरी चौरा शताब्दी समारोह पर वंदे मातरम गायन के 50000 विडियो अपलोड कर योगी सरकार बनाएगी वर्ल्ड रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ऐतिहासिक चौरी-चौरा घटना के शताब्दी वर्षगांठ समारोह पर एक विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। योगी सरकार एक निश्चित समायावधि में वंदे मातरम गायन के 50 हजार विडियो अपलोड कर इसे गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराएगी। इस पूरे कार्यक्रम पर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम नजर रखेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य का संस्कृति विभाग अपने सभी जिलों में 3 फरवरी की सुबह 10 बजे से लेकर 4 फरवरी दोपहर 12 बजे तक वंदे मातरम गाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए रिहर्सल मंगलवार (फरवरी 02, 2021) से आयोजित की जा रही है।

शिक्षा विभाग के साथ-साथ सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि चौरी-चौरा घटना और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए वंदे मातरम का पहला भाग गाते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा।

प्रत्येक जिला एक शैक्षणिक संस्थान या अन्य इंटरनेट सुविधा वाले उपयुक्त स्थानों को चुनेगा। प्रत्येक केंद्र के लिए एक नोडल अधिकारी होगा। कार्यक्रम के अंतर्गत, 3 फरवरी की सुबह 10 से 4 फरवरी की दोपहर 12 बजे के बीच गायन का विडियो अपलोड कराया जाएगा। इसके लिए 3 फरवरी की सुबह 9:00 बजे से गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड वेबसाइट/लिंक उपलब्ध करवाएगा।

राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, एक वीडियो में केवल एक व्यक्ति ही सैल्यूट की मुद्रा में होना चाहिए। वीडियो कम से कम 20 सेकंड का होना चाहिए, जिसमें उच्चारण पूरी तरह से स्पष्ट हो। शब्द या अक्षर उच्चारण बाधित होने पर पूरी प्रविष्टि रद कर दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व, चीन के बीजिंग में दिसंबर 25, 2019 को सैल्यूट करते हुए 10,369 विडियो अपलोड कर रिकॉर्ड बनाया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को चौरी-चौरा के इतिहास से संबंधित साहित्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शताब्दी वर्ष के दौरान वर्ष भर की गतिविधियों पर बेसिक, उच्च, माध्यमिक, कृषि और चिकित्सा शिक्षा विभागों से विवरण भी माँगा।

समारोह के लिए स्कूलों में निबंध लेखन, वाद-विवाद, कविता पाठ, चित्रकला और अन्य प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, प्रदर्शनी, पुस्तक मेले और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे। समापन समारोह में विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।

कोर्ट ने ‘द कारवाँ’ के पत्रकार मनदीप पुनिया को जमानत दी, बिना अनुमति के देश छोड़ने की इजाजत नहीं

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को फ्रीलांस जर्नलिस्ट मनदीप पुनिया को जमानत दे दी। पुनिया द कारवाँ और जनपथ के लिए काम करता है। शनिवार (जनवरी 30, 2021) रात सिंघू बॉर्डर पर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के साथ दुर्व्यवहार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने मनदीप पुनिया को हिरासत में लिया था। 

25,000 के निजी मुचलके पर दी गई जमानत

न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता, पीड़ित और गवाह सभी पुलिसकर्मी हैं। इसलिए इस बात की कोई संभावना नहीं है कि आरोपित / प्रार्थी किसी पुलिस अधिकारी को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद अदालत ने उसे 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। वहीं पुलिस ने उस पर लोगों को भड़काने व कामकाज में बाधा पहुँचाने का आरोप लगाते हुए जमानत आवेदन पर विरोध जताया था। रोहिणी अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला मंगलवार को सुनने का निर्णय किया था, जिस पर फैसला सुनाते हुए उन्होंने मनदीप को जमानत दे दी।

अदालत ने पुनिया को उनकी पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, “आरोपित जमानत पर रिहाई के दौरान इस प्रकार का कोई अपराध या कोई अन्य अपराध नहीं करेगा। आरोपित किसी भी तरह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।” अदालत ने निर्देश दिया कि जब जाँच एजेंसी को आवश्यकता होगी, तब आरोपित पेश होगा।

वहीं अभियोजन पक्ष ने उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसने अपनी पहचान छुपाई और अपने सहयोगियों के साथ जबरन बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। आरोपित अपने सहयोगियों के साथ नारेबाजी करता रहा। 

इस दौरान हुई हिंसा व मारपीट में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाए क्योंकि वह साक्ष्य को मिटाने की कोशिश कर सकता है और फिर से गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हो सकता है।

मनदीप पुनिया की रिहाई के लिए ‘पत्रकारों’ का पुलिस मुख्यालय पर जेएनयू टाइप स्टंट

पुनिया की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में ‘पत्रकारों’ को रविवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में नारेबाजी करते हुए देखा गया। वो लोग ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगा रहे थे। पुनिया कथित तौर पर बैरिकेड हटाने की कोशिश कर रहा था और उसने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके कारण उसे हिरासत में लिया गया था।

गिरफ्तारी के बारे में बताते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुनिया प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा था और उसके पास प्रेस आईडी कार्ड नहीं था। वह उन बैरिकेड के माध्यम से जाने की कोशिश कर रहा था जो सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और उनके बीच विवाद शुरू हो गया। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर के विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया कि कुछ ‘पत्रकारों’ के लिए, पुलिस के साथ दुर्व्यवहार ‘प्रेस स्वतंत्रता’ के दायरे में आता है।

राम मंदिर के चंदे से नदी किनारे दारू पीते हैं भाजपा नेता: कॉन्ग्रेस MLA ने लगाया अनर्गल आरोप

अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में चलाए जा रहे अभियान को लेकर कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि भाजपा वाले दान के रुपयों से नदी किनारे जाकर दारू पीते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के झाबुआ से कॉन्ग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया ने कहा है कि भाजपा के नेता राम के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं और दारू खरीद रहे हैं।

सोमवार (फरवरी 01, 2021) को पत्रकारों से चर्चा करते वक़्त श्रीराम मंदिर चंदे पर सवाल उठाते हुए कॉन्ग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया ने यह भी कहा कि भाजपा ने उनके द्वारा एकत्र किए गए दान का हिसाब नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि भाजपा को इसका खुलासा करना चाहिए और इसे मंदिर के खाते में जमा करना चाहिए।

उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए हो रहे धनसंग्रह को लेकर भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले भी राम मंदिर के नाम पर हजारों, लाखों, करोड़ों, अरबों का चंदा इकट्ठा किया गया, उसका कोई हिसाब नहीं दिया और अब फिर से राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने कॉन्ग्रेसी विधायक कांतिलाल के इस आरोप पर कहा है कि कॉन्ग्रेस इस तरह के बयान देकर श्रीराम का अपमान करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कॉन्ग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि वो राम भक्तों को बदनाम ना करें और शांति से राम मंदिर का निर्माण करने दें।

भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए जा रहे चंदे का पूरा हिसाब ट्रस्ट द्वारा रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के ही नेता दिग्विजय सिंह ने भी चंदा दिया है, तो कांतिलाल उस पर क्या कहेंगे? रामेश्वर शर्मा ने अपने बयान में कहा कि मजारों के नाम पर जो चंदा माँगा जाता है, वह देश विरोधी गतिविधियों में लगाया जाता है।

इसके अलावा, भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांतिलाल भूरिया शराब की बात नहीं करें तो अच्छा है क्योंकि वो बेहतर जानते हैं कि उनकी पार्टी में कौन कितने पैग लगाता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भाजपा द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नामों में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी एक हैं।

यहाँ पर यह जिक्र करना भी आवश्यक है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी की नजर कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में लोगों द्वारा पीएम केयर्स में दान किए गए फंड पर भी थी। इस पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से लेकर राहुल गाँधी और तमाम पार्टी नेता लगातार सवाल पूछते रहे।

पीएम केयर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च, 2020 में स्थापित किया था, ताकि कोरोना काल के दौरान की आपातकालीन जरूरतों को पूरा किया जा सके।

अब आदिवासी बच्चों को मिलेगा शिक्षा का नया आयाम, 4 जिलों में जल्द खुलेंगे एकलव्य स्कूल: योगी सरकार ने भेजा प्रस्ताव

केन्द्रीय बजट में शिक्षा और विद्यार्थियों का खास खयाल रखा गया है। एक तरफ जहाँ पीपीपी (सार्वजनिक-निजी-भागीदारी) मोड पर 100 सैनिक स्कूल खोलने की बात कही गई है, वहीं देश भर में 750 एकलव्य स्कूल खोले जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जन जाति बाहुल्य इलाकों में शिक्षा की दिशा में यह बेहतरीन कदम बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी चार एकलव्य स्कूल अगले वित्तीय वर्ष में और खोले जाएँगे। केन्द्र सरकार के पास इस आशय का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। ये विद्यालय सोनभद्र के दुद्घी के अलावा लखनऊ, बिजनौर और श्रावस्ती में खोले जाएँगे।

यूपी सरकार के अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग के उप निदेशक आरपी सिंह ने मीडिया से बताया है कि सोनभद्र में एक एकलव्य स्कूल खुलने वाला है, जबकि ललितपुर में निर्माणाधीन है और वहाँ काम तेजी से जारी है। इसके अलावा बहराइच और लखीमपुर खीरी में एकलव्य विद्यालय पहले से चल रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक सोनभद्र जैसे पहाड़ी इलाकों में एकलव्य स्कूल के निर्माण में करीब 48 से 50 करोड़ रुपए और मैदानी इलाकों में निर्माण पर करीब 38 करोड़ रुपए के आसपास खर्च आता है। सहशिक्षा वाले ये विद्यालय आश्रम पद्धति की तर्ज पर संचालित होते हैं। हालाँकि, इनके निर्माण और संचालन के मानक आश्रम पद्वति विद्यालयों से ज्यादा बेहतर होते हैं। इनमें 90 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होती हैं।

बता दें कि एकलव्य विद्यालय नि:शुल्क आवासीय विद्यालय होते हैं, जिनमें नब्बे प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। यह सह शिक्षा वाले विद्यालय होते हैं। यह आश्रम पद्धति की तर्ज पर संचालित होने वाले विद्यालय होते हैं, मगर इनके निर्माण व संचालन के मानक आश्रम पद्वति विद्यालयों से ज्यादा बेहतर होते हैं।

दरअसल, एकलव्य स्कूलों की स्थापना आदिवासी बहुल ब्लॉकों में की जाती है (जहाँ 50% से ज्यादा की जनसंख्या आदिवासी समुदाय की होती है)। सरकार चाहती है कि आदिवासी इलाकों से आने वाले बच्चे अपने ही परिवेश में एक अच्छी शिक्षा पा सकें। गौरतलब है कि आदिवासी समुदाय के लिए बनाए गए बहुत से विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे ही चल रहे हैं।

यहाँ संसाधनों की भी कमी है। लेकिन सरकार की इस नई योजना से आदिवासी अंचल में अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के प्रयासों को गति मिलेगी। इसके साथ ही, बच्चों को स्थानीय कला सीखने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, देश की संस्कृति, खेलों और कौशल को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

ममता बनर्जी ने मंच से दी ‘बहन वाली गंदी गाली’, सोशल मीडिया पर लोग ताबड़तोड़ शेयर कर रहे वीडियो: Fact Check

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर ये बताने की कोशिश की है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छी हिंदी जानती है। हालाँकि, ये बात और है कि जनता के बीच हिंदी बोलने की उनकी कोशिश ने उनकी जगहँसाई करवा दी है। कुछ यूजर्स तो ये तक कह रहे हैं कि उन्होंने गंदी गाली दी है।

जी हाँ, सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने ममता बनर्जी की वायरल क्लिप देख कर दावा किया कि उन्होंने क्लिप में केम छो के बाद ‘बैं%&” कहा। इसे सुन कई लोगों ने चुटकी ली। 

हमने भी सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो को ध्यान से सुना। पड़ताल में पाया कि मुख्यमंत्री बनर्जी ने किसी तरह की कोई अभद्र बात नहीं कही है। मगर फिर भी वह लोगों के बीच हँसी का पात्र बन गई।

अपनी स्पीच में सीएम बनर्जी ने जताया कि वह गुजराती भाषा में भी पारंगत है। इसके बाद अपनी बात के सबूत देने के लिए वह कहने लगी, ‘केम छो? भाल छो।’ अब ये शब्द गुजराती के ही हैं। ‘केम छो’ का अर्थ होता है कि आप कैसे हो? जबकि भाल छो शब्द सुन कर लगता है कि उन्होंने खुद के गुजराती प्रवाह को साबित करने के लिए इसका प्रयोग किया।

बंगाली में भालो का अर्थ ‘बढ़िया’ होता है। तो, ‘आप कैसे हैं’ -सवाल का अर्थ बंगाली में ‘आमी भालो आछी’ कहकर ही दिया जाता है। जिसका अनुवाद होता है- ‘मैं बढ़िया हूँ’, ‘मैं अच्छे से हूँ’। गुजराती में इसी सवाल का अर्थ ‘माजामा’ होता है।

यानी ये तो स्पष्ट है कि जनता के सामने गुजराती भाषा में खुद को निपुण दिखाने के लिए सीएम ने बंगाली शब्द का प्रयोग गुजराती भाषा के साथ मिलाकर किया। शायद इसी कारण यूजर भी कन्फ्यूज हो गए और उस 2 मिनट 20 सेकेंड की वीडियो में 0.59 सेकेंड पर कहे गए शब्द पर हँसी उड़ाने लगे।

बता दें कि जनता के सामने खुद के भाषाई ज्ञान की जानकारी देते हुए सीएम बनर्जी ने पीएम मोदी पर कई बार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम टेलीप्रॉम्पटर से पढ़कर स्पीच देते हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने पंजाबी भाषा के ज्ञान से भी जनता को अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि वह बहुत समय पहले पंजाब गई थी। वहाँ वह मुश्किल से ही लोगों को पहचान पा रही थीं। उन्हें सब एक से लग रहे थे। मगर वहाँ गुरुद्वारे में उन्होंने हलवा माँग के खाया। अपनी जनता को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे बिहारियों के यहाँ लिट्टी मशहूर है, वैसे ही गुरुद्वारे में हलवा बहुत अच्छा मिलता है।

सबसे हास्यास्पद बात यह है कि ममता बनर्जी ने अपनी स्पीच में इतनी दफा हिंदी की गड़बड़ी की, लेकिन फिर भी आत्मविश्वास से वो शब्द दोहराती रहीं। उन्होंने एक जगह तो हिंदू धर्म में पूजनीय विष्णु भगवान के लिए माता शब्द का प्रयोग किया और कहा जय बिष्णु माता।

‘BJP में दम है तो आए इस गाँव में’: गली-गली घूम कर आ गए भाजपा नेता

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शनकारी किसान डटे हुए हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश राज्य में स्थानीय स्तर पर भी विपक्षी राजनीतिक दल किसानों के बहाने अपने राजनीतिक लाभ साधने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे।

ऐसे में, उत्तर प्रदेश स्थित बागपत में 31 जनवरी को सर्वखाप की महापंचायत बुलाई गई थी, जिसमें कृषि कानून को लेकर भाजपा के खिलाफ जमकर बयानबाजी हुई। साथ ही, कथित किसान नेताओं द्वारा इस मंच से घोषणा की गई कि अगर भाजपा का कोई भी नेता निरपुड़ा गाँव में आया तो, उसका विरोध किया जाएगा।

समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके साथ ही, एक वीडियो में इस गाँव के कुछ लोग हाथों में काले झंडे लेकर भाजपा नेता को चुनौती दे रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि कोई भाजपा नेता गाँव आया, तो उसका स्वागत काले झंडे दिखाकर किया जाएगा। यही नहीं, भाजपा नेताओं के खिलाफ यह भी एलान कर दिया गया कि उन्हें गाँव से वापस भेज दिया जाएगा।

ऐसे में, इस वीडियो के वायरल होते ही एक भाजपा नेता अमित राणा ने चैलेंज स्वीकार किया और गाँव पहुँच गए। कथित किसान नेताओं द्वारा काले झंडे दिखाए जाने की चुनौती स्वीकार करते हुए नगर पालिका परिषद के चेयरमैन और भाजपा नेता अमित राणा चौगामा क्षेत्र के निरपुड़ा गाँव गए।

भाजपा नेता सिर्फ उस गाँव ही नहीं गए बल्कि ग्रामीणों के बीच कुछ घंटे रुके भी और उनसे भाजपा के मुद्दों और रणनीति पर चर्चा की। अमित राणा ने कहा कि उन्हें विरोधियों द्वारा भाजपा नेताओं को काले झंडों से विरोध करने की चेतावनी के बारे में पता चला था, मगर जब वो गाँव गए तो विरोध करने वाले ढूँढकर भी नहीं मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, निरपुड़ा गाँव से भाजपा नेताओं के बहिष्कार की घोषणा करने वाले व्यक्ति का नाम बिजेंद्र राणा बताया जा रहा है। बिजेंद्र राणा ने ही सर्वखाप महापंचायत के मंच से घोषणा कि थी कि वे अपने गांव में किसी भी भाजपा नेता को नहीं घुसने देंगे। इस चुनौती के बाद ही भाजपा नेता अमित राणा गाँव गए और ग्रामीणों से मुलाकत की।

राजस्थान: 35 में से 17 सीटें जीतने वाली NCP के सभी पार्षद BJP में शामिल, कॉन्ग्रेस चारो खाने चित्त

राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम जारी हाेने के 24 घंटे बाद ही टाेंक की निवाई नगर पालिका से एनसीपी के टिकट पर जीते सभी 17 पार्षदाें ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजेपी ऑफिस में प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में इन सभी ने पार्टी ज्वाइन की। ऐसे में अब निवाई में बीजेपी का बाेर्ड बनना तय माना जा रहा है।

राजस्थान में बीते दिनों हुई 90 निकायों के चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद से ही कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच ज्यादा से ज्यादा निकायों में बोर्ड बनाने की जंग छिड़ी हुई है। राजनीतिक शह और मात के इस खेल में कब कौन बाजी पलट जाए कहना मुश्किल है। बात की जाए टोंक के निवाई नगर पालिका (Niwai Municipality) हॉट सीट की तो यहाँ पर जीत कर सबसे ज़्यादा सीटें लाने वाली एनसीपी (NCP) ने पाला बदलकर सबको चौंका दिया है। दरअसल, इनमें से अधिकतर पार्षद वो हैं, जो कॉन्ग्रेस से बगावत कर एनसीपी के टिकट पर चुनाव जीते हैं।

पहले तो यहाँ से कॉन्ग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले दिलीप इसरानी (Dilip Israni) सहित कई दिग्गज कॉन्ग्रेसियों ने एनसीपी के बैनर से चुनाव लड़ा और जब एनसीपी के 17 उम्मीदवार जीत गए तो उन्होंने बाज़ी पलटते हुए भाजपा की सदस्यता लेकर सबको हैरत में डाल दिया। 

ज़िले और प्रदेश स्तर के भाजपा नेताओं ने इसरानी सहित एनसीपी से जीत कर आए 17 नव निर्वाचित पार्षदों को भाजपा की सदस्यता दिलाकर जो मास्टर स्ट्रोक खेला है। उससे कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव और निवाई विधायक प्रशांत बैरवा राजनीतिक कूट स्तर पर चारों खाने चित्त हो गए हैं।

बता दें कि टोंक में कॉन्ग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जाती है। टोंक जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट का गढ़ माना जाता है। वहीं यहाँ कॉन्ग्रेस विधायक प्रशांत बैरवा और हरीश चंद्र मीना जैसे विधायक भी है। 

एनसीपी से जीत कर आए सभी 17 पार्षदों ने एनसीपी नेता और चेयरमेन पद के दावेदार दिलीप इसरानी के नेतृत्व में जयपुर में भाजपा कार्यालय में भाजपा की सदस्यता लेकर सभी को हैरान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद एक बार फिर से निवाई नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय हो गया है। मंगलवार (फरवरी 2, 2021) को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने की अंतिम तिथि है ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि दिलीप इसरानी आज भाजपा की ओर से निवाई नगरपालिका के अध्यक्ष पद के लिए अपना दावा ठोक देंगे।

बता दें कि निवाई नगर पालिका में 35 वार्डो में 29 वार्डो में एनसीपी ने अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे। जिसमें से कुल 17 पार्षदो ने जीत का परचम लहराया। वहीं, भाजपा के सीट पर चुनाव लड़ने वाले 9 उम्मीदवार यहाँ से जीते जबकि कॉन्ग्रेस के खाते सिर्फ 8 सीटें ही आई थी। एक निर्दलीय प्रत्याशी भी जीता। ऐसे में अब इसरानी ने बड़ा सियासी उलटफेर कर सबको चौंका दिया है।

निवाई नगर पालिका में सत्ता धारी पार्टी कॉन्ग्रेस की कूटनीतिक स्तर पर हुई किरकिरी की प्रदेश भर में चर्चा हो रही है। ऐसे में अब देखना यह होगा पूरे मामले को लेकर कॉन्ग्रेस आलाकमान किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।

मुख्तार अंसारी को कॉन्ग्रेस द्वारा ‘राज्य अतिथि’ बनाने पर बिफरीं BJP विधायक, प्रियंका गाँधी को पत्र लिख पूछा सवाल

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से भारतीय जनता पार्टी विधायक अलका राय ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को चिट्ठी लिखकर बाहुबली मुख्तार अंसारी को बचाने का आरोप लगाया है। अलका राय, पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी हैं, जिनकी हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था।

बीजेपी विधायक अलका राय ने अपनी चिट्ठी में कहा कि आपने (प्रियंका गाँधी वाड्रा) और आपकी (पंजाब) सरकार ने मेरे पति के हत्यारे मुख्तार और वांछित चल रहे उसके बेटे अब्बास को राज्य अतिथि के रूप में शरण दी है। इसके साथ ही अलका राय, मुख्तार अंसारी के बेटे की राजस्थान में भव्य शादी पर दुख जताया है।

बीजेपी विधायक अलका ने प्रियंका वाड्रा से भावनात्मक सवाल पूछा कि आपकी सरकार द्वारा हत्यारे को क्यों बचाया जा रहा है? अलका ने प्रियंका को कार्रवाई करने और एक महिला होने के नाते उनके दुख को समझने के लिए कहा है। 

पत्र में अलका राय ने लिखा है, “आपसे मुझे शोक के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके नेतृत्व में पंजाब और राजस्थान की सरकार ने मेरे पति के हत्यारे कुख्यात अपराधी मुख्तार अंसारी और उसके इनामिया बेटे अब्बास अंसारी को राज्य अतिथि का दर्जा दे रखा है। इसका प्रमाण है अखबार में छपी तस्वीरें, जिससे स्पष्ट है कि सरकारी संरक्षण में राजस्थान सरकार ने मुख्तार के इनामिया बेटे अब्बास की धूमधाम से शादी कराई।”

अलका राय ने प्रियंका गाँधी को लिखा पत्र

उन्होंने आगे लिखा, “प्रियंका जी, ये तस्वीरें देखकर मुझे और मेरे परिवार को कष्ट हुआ। इससे पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की अदालतों में वांछित अपराधी मुख्तार अंसारी को लाने के लिए 32 बार अपने वाहन भेज चुके हैं लेकिन आप और आपकी पंजाब सरकार मुख्तार को बचाने में लगी है। एक महिला होने के नाते मुझे एक उम्मीद थी कि आप मेरे दर्द को समझेंगी।”

पत्र में लिखा है, “आप आए दिन अपराध और अपराधियों के खिलाफ दावे करती रहती हैं परन्तु इंसाफ माँग रही मुझ जैसी अनेकों पीडि़ताओं का एक भी पत्र का न तो आपने जवाब देना उचित समझा और न ही हमें इंसाफ दिलाने की कोशिश की। उल्टे यह बात स्पष्ट है कि आप और आपकी सरकार पूरी तरह मुख्तार और उसके अपराध के पीछे खड़ी है। आपके जवाब का इंतजार रहेगा।”

बता दें कि अलका राय कई बार प्रियंका गाँधी वाड्रा को चिट्ठी लिख चुकी हैं। पिछली बार बीजेपी विधायक अलका राय ने अपनी चिट्ठी में लिखा था, “मैं विधवा हूँ और विगत 14 वर्षों से मैं अपने पति व लोकप्रिय विधायक रहे स्वर्गीय कृष्णानंद राय की नृशंस हत्या के विरुद्ध इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हूँ। उस जुल्मी के खिलाफ जिसे आज आपकी पार्टी और पंजाब राज्य में आपकी सरकार खुला संरक्षण दे रही है।”

बीजेपी विधायक अलका राय ने लिखा, “उत्तर प्रदेश की तमाम अदालतों से मुख्तार अंसारी को तलब किया जा रहा है, परंतु पंजाब सरकार उसे उत्तर प्रदेश भेजने को तैयार नहीं है। हर बार कोई ना कोई बहाना बनाकर मुझे और मुझ जैसे सैकड़ों लोगों को इंसाफ से वंचित किया जा रहा है।”

बताते चलें कि अलका राय के पति कृष्णानंद राय गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद के बीजेपी विधायक थे। कृष्णानंद राय की साल 2005 में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। अलका राय ने मुख्तार अंसारी के खिलाफ कृष्णानंद की हत्या का मामला दर्ज कराया था। कई सालों तक चले इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को निर्दोष करार दिया था। फिलहाल, मुख्तार अंसारी रंगदारी के एक केस में पंजाब की रोपड़ जेल में बंद है।

योगी सरकार बाहुबली मुख्तार अंसारी को पंजाब से उत्तर प्रदेश लाने की तैयारी में है। सरकार मुख्तार को लाने के लिए कानूनी विकल्पों का सहारा ले रही है। यूपी पुलिस मुख्तार को किसी भी कीमत पर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश से कई बार पुलिस टीम पंजाब मुख्तार को लाने गई, लेकिन हर बार मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर मुख्तार को यूपी पुलिस को नहीं सौंपा गया। जब रोपड़ जेल पर दबाव बनाया गया, तो जेल अधिकारियों ने मुख्तार की मेडिकल रिपोर्ट यूपी पुलिस को दे दी।

आरोप है कि पंजाब सरकार मुख्तार अंसारी को बचाने की कोशिश कर रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद जब यूपी सरकार मुख्तार को प्रदेश लाने में विफल रही तो अंत में यूपी सरकार को इस मामले कानूनी विकल्पों का सहारा लेना पड़ा।