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यह मेरे सबसे पसंदीदा क्षणों में से एक: बेयर ग्रिल्स ने शेयर की PM मोदी के साथ ‘फेवरेट’ तस्वीर

दुनिया के सबसे मशहूर एडवेंचर विशेषज्ञ बेयर ग्रिल्स ने एक तस्वीर शेयर कर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिताए अपने पलों को याद किया है। उन्होंने ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ के उस एपिसोड की तस्वीर शेयर की, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के साथ उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट पार्क में एडवेंचर किया था। बेयर ग्रिल्स ने जो तस्वीर शेयर की है, उसमें पीएम मोदी और वे चाय की चुस्की लेने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

उन्होंने फेसबुक पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि ये उनकी सबसे पसंदीदा क्षणों में से एक है। उन्होंने बताया कि ये डिस्कवरी जंगल एडवेंचर के बाद ली गई तस्वीर है, जिसमें दोनों नदी किनारे बैठे हुए हैं। भींग जाने के कारण दोनों का शरीर भी नम था। फिर दोनों ने गर्म-गर्म चाय पी। उन्होंने तस्वीर में पीछे दिख रही हाथ से बनाई गई नौके की तरफ भी लोगों का ध्यान दिलाया।

बेयर ग्रिल्स ने कहा कि उन्होंने नदी पार करने के लिए उसे तैयार किया था, लेकिन जैसे ही पीएम नरेंद्र मोदी उस पर चढ़े- वो लगभग पलटने लगी। उन्होंने उसे दोनों के साथ नदी पार करने के लिए तैयार किया था। बेयर ग्रिल्स ने बताया कि इसके बाद वो नौका पर चढ़ने की बजाए साथ में तैर कर उस पार गए। ग्रिल्स ने लिखा, “मैंने भारतीय एजेंसियों से वादा किया था कि प्रधानमंत्री का पाँव तक नहीं भींगेगा। लेकिन, ये उतने अच्छे से संभव नहीं हो सका।”

सर्वाइवल एक्सपर्ट ने आगे लिखा, “ये क्षण मुझे इस बात की हमेशा याद दिलाता है कि ये जंगल चीजों को समतल करने का सबसे बड़ा माध्यम है। पदों और मुखौटों के पीछे हम सब सामान हैं। यहाँ दो लोग साथ में चाय की चुस्की ले रहे हैं और खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा ‘नेवर गिव अप’ जल्द ही आएगी, जिसमें इस तरह की कई कहानियाँ होंगी।

बेयर ग्रिल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिताए अपने क्षणों को याद किया

आपको याद होगा कि अगस्त 2019 में आया ये एपिसोड केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग टीवी शो बन गया था। ये शो अगस्त 12, 2019 को डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित हुआ था और फिर दूरदर्शन द्वारा भी प्रसारित किया गया था। इसके बारे में कुछ ही दिनों ने 360 करोड़ लोगों ने ऑनलाइन चर्चा की थी, जो किसी भी शो के लिए सर्वाधिक था। बेयर ग्रिल ने भारत में पीएम मोदी के अलावा सिर्फ सुपरस्टार रजनीकांत के साथ ही शूट किया है।

26 जनवरी की हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट, चक्का जाम से निपटने को 50 हजार जवान तैनात

दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे कथित ‘किसानों’ ने आज (6 फरवरी 2021) ‘चक्का जाम’ का आह्वान किया है। यह चक्का जाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर पूरे देश में दोपहर 12 से 3 बजे के बीच करने का ऐलान है। किसान संगठन के नेताओं ने कहा था कि चक्का जाम ‘शांतिपूर्ण’ होगा, लेकिन 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की आड़ में हुए उपद्रव के बाद को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाबल पूरी तरह मुस्तैद हैं। 

कृषि संगठनों द्वारा आज आयोजित किए गए चक्का जाम के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के कर्मचारी तैनात किए गए हैं। क़ानून-व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त रखने के लिए दिल्ली-एनसीआर के तमाम इलाकों में पुलिसकर्मियों के अलावा अर्धसैनिक बल (Paramilitary Forces) भी तैनात किए गए हैं। 

राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 50000 दिल्ली पुलिस के कर्मचारी और अर्धसैनिक बल मुस्तैद हैं। दिल्ली के लगभग 12 मेट्रो स्टेशन एलर्ट पर रखे गए हैं। 26 जनवरी को ‘किसान आंदोलन’ की आड़ में हुई हिंसा और उपद्रव को मद्देनज़र रखते हुए इस बार पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई ट्रैक्टर रैली में लगभग 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 

बीते दिन चक्का जाम से जुड़ी एक और अहम ख़बर सामने आई थी, जिसके मुताबिक़ केवल दो राज्यों में चक्का जाम नहीं होगा। ये 2 राज्य- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा था, “उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं है, बाकी दिल्ली के बाहर पूरे देश में रोड ब्लॉक की जाएँगी। इसका कारण है कि दिल्ली में उन लोगों को कभी भी जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सकता है।”

6 फरवरी को किसानों द्वारा किए जाने वाले चक्का जाम को कॉन्ग्रेस ने अपना समर्थन दे रखा है। वहीं हरियाणा में राज्य सरकार ने स्थिति को देखते हुए हर तरह के इंटरनेट को बंद कर रखा है। सरकार ने वॉयस कॉल को छोड़कर इंटरनेट सेवाओं (2जी/3जी/4जी/सीडीएमए/जीपीआरएस), एसएमएस सेवाओं (केवल ब्लक एसएमएस) और मोबाइल नेटवर्क पर दी जाने वाली सभी डोंगल सेवाओं को बंद करने की अवधि 6 फरवरी, 2021 शाम 5 बजे तक के लिए बढ़ा दी है।

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने समर्थकों से अपील करते हुए कहा था कि जो लोग प्रदर्शन स्थल पर नहीं आ सकते हैं, वह जहाँ कहीं भी हैं वहाँ रह कर ‘शांतिपूर्ण तरीके’ से चक्का जाम करें।

‘हिन्दू की हत्या पर संभोग जैसा सुख’: प्रोपेगेंडाबाज गायिका ने अपने नाम से वायरल हो रहे ट्वीट को नकारा

दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में लगातार प्रोपेगेंडा फैला रही गायिका कारालीसा मोंटेरियो के नाम से एक ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस ट्वीट में लिखा है, “जब भी किसी हिन्दू की हत्या होती है, मुझे संभोग जैसा सुख प्राप्त होता है। मोदी भले कॉन्ग्रेस मुक्त भारत का सपना देखते हों, लेकिन हम जल्द ही हिन्दू मुक्त भारत बनाएँगे। आमीन।”

वायरल स्क्रीनशॉट के मुताबिक कारालीसा ने यह ट्वीट 1 जनवरी 2021 को किया था। हालॉंकि हमने जब उसके ट्विटर हैंडल पर सर्च किया तो इस तारीख को ऐसा कोई ट्वीट मौजूद नहीं था। आज (6 फरवरी 2021) उसने खुद ट्वीट कर इसे फेक बताया है और इसको लेकर शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।





वायरल हो रहे ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वैसे कारालीसा खुद फेक न्यूज फैलाने में माहिर है। इतना ही नहीं अपने दावों की पोल खुलने के बावजूद वह ट्वीट डिलीट तक नहीं करती।

उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अगस्त 2020 में तब फेक न्यूज़ शेयर की थी, जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। उसने पीएम मोदी की एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो लॉन में बैठ कर अख़बार पढ़ रहे हैं और आसपास कुछ बत्तख घूम रहे हैं। उसने दावा किया था कि जब देश महामारी के संकट से जूझ रहा है, तब पीएम मोदी आराम फरमा रहे हैं।

असल में वह तस्वीर 2013 की थी, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। इसी तरह कारालीसा ने ऑपइंडिया को लेकर भी झूठे दावे किए थे। हाल ही में उसने ऑपइंडिया का एक फेक स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें बताया गया था कि ग्रेटा थनबर्ग का असली नाम गजला भट्ट है, और वो एक कश्मीरी कारोबारी की बेटी है। वो स्क्रीनशॉट फर्जी थी और ऑपइंडिया ने कभी ऐसा कुछ लिखा ही नहीं।

कारालीसा ने एक और फेक न्यूज़ शेयर की थी कि जिसमें राफेल को लेकर चल रहे विवाद को लेकर दावा किया गया था कि हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के दावे को सार्वजनिक रूप से नकार दिया है। इसमें दावा किया गया था कि निर्मला ने HAL को राफेल एयरक्राफ्ट के निर्माण के लिए अयोग्य बताया था, जिसके जवाब HAL ने उन एयरक्राफ्ट्स की सूची बना कर दिए जो उसने बनाए थे। बाद में HAL ने इस खबर को फेक बताया था। दिलचस्प यह है कि 2018 का यह दावा फेक साबित होने के बावजूद आज तक उसके ट्विटर हैंडल पर मौजूद है।

अपने नाम से वायरल हो रहे ट्वीट को फेक करार देते हुए कारालीसा ने कहा है कि वह कभी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करती। उसने इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। साथ ही उद्धव कैबिनेट में कॉन्ग्रेस के मंत्री असलम शेख को टैग भी किया।

इस बात की भी गुंजाइश है कि ट्वीट कर उसने डीलीट कर दिया हो। लेकिन हमने Cache और अन्य तरीके से इसकी सत्यापन करने की कोशिश की और हम इस नतीजे पर पहुॅंचे की ये ट्वीट कभी किया ही नहीं गया था।

बता दें कि ‘किसान आंदोलन’ के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा का बाजार गर्म है और रिहाना से लेकर ग्रेटा तक ने इसके लिए ट्वीट्स किए। खबर आई थी कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।

असम में CM ने 29701 शिक्षकों को दिया नियुक्ति पत्र, 5 साल में 71000 की बहाली

असम में अब तक का सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती अभियान चलाया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. हिमांत बिस्वा सरमा ने इस व्यापक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाई। इस प्रक्रिया के तहत लगभग तीस हज़ार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया। 

गुवाहाटी के सोरूसजाई स्टेडियम में आयोजित समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सोनोवाल ने 29,701 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किया। मुख्यमंत्री सोनोवाल ने ट्वीट करते हुए इस भर्ती प्रक्रिया की जानकारी भी दी। 

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “हम अपने वादे पूरे करते हैं। 4260 विद्यालयों का सरकारीकरण और 29,701 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। यह सरकार का अब तक का सबसे बड़ा शिक्षक भर्ती अभियान है। यह जनता के प्रति हमारा समर्पण दर्शाता है। मेरा मानना है कि ये भर्तियाँ इस सार्थक पेशे के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएँगी।” 

इसके बाद असम के शिक्षा मंत्री ने भी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर ट्वीट किया। 

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “अब तक की सबसे बड़ी भर्ती! यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमने 29,701 शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों (non teaching staff) की नियुक्ति की है। प्रदेश में पहली बार इतने व्यापक स्तर का अभियान चलाया गया है। चयनित किए गए सभी कर्मचारियों को शुभकामनाएँ।”

मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत शिक्षा विभाग में रिक्त लगभग सभी पदों पर नियुक्ति पूरी कर दी गई है। पिछले 5 सालों में प्रदेश सरकार ने 71,000 शिक्षकों की नियुक्ति की है।  

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 16,484 शिक्षक जो शिक्षण संस्थानों में पहले से कार्यरत थे, उनको नियमित कर नियुक्ति पत्र दिया गया है। इसके अलावा 13, 217 नए शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया गया है। इसमें प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक के शिक्षक शामिल हैं।    

शबीना, नजमा, नीलोफर, महमूदा, फातिमा… मुंबई की महिला ड्रग्स माफिया जो झुग्गियों से चलाती हैं साम्राज्य

जहाँ एक तरफ मुंबई पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ ड्रग्स के सौदेबाजों की पकड़ में लगी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ इस आपराधिक दुनिया में कुछ महिलाएँ भी सक्रिय हैं, जिनके बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है। हाल के दिनों में मुंबई पुलिस ने कई महिला ड्रग्स पेडलर्स को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इसमें महिलाओं के अच्छी-खासी संख्या में शामिल होने की आशंका जताई गई है। अब पुलिस की नजर भी उन पर है। सुशांत सिंह राजपूत मामले में NCB की कार्रवाई के बाद भी कई नाम सामने आए। जानिए कौन हैं मुंबई की प्रमुख महिला ड्रग्स माफिया कारोबारी।

‘Mid Day’ ने 5 ऐसी महिला ड्रग्स पेडलर्स के बारे में बताया है, जिन्हें हाल के दिनों में गिरफ्तार किया गया है। महिला ड्रग्स माफिया मुंबई की झुग्गियों से इस आपराधिक इंडस्ट्री को चलाती रही हैं, जो रेंट पर अथवा खुद के होते हैं।

शबीना खान के शौहर सरफराज पर जब मुंबई पुलिस ने शिकंजा कसा तो उसकी बीवी ने कारोबार का जिम्मा सँभाल लिया। शबीना ने इसके बाद 20-25 ड्रग्स पडलेर्स के साथ अपने शौहर के इस आपराधिक कारोबार को आगे बढ़ाना शुरू किया। ANC (एंटी नारकोटिक्स सेल) की वर्ली यूनिट ने उसे कुर्ला से गिरफ्तार किया, जहाँ वो रह रही थी। उसके पास किसी और के नाम से रजिस्टर्ड कार भी मिली।

ड्रग्स का पूरा कारोबार कैश से ही चलता आ रहा है और इसमें शायद ही ऑनलाइन लेन-देन होते हों। कैश के बदले ड्रग्स माफिया संपत्ति खरीदते रहते हैं, लेकिन वे अपने नाम से ऐसा नहीं करते। वे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति रजिस्टर कराते हैं। वे झुग्याँ खरीदते हैं, जिनके स्वामित्व के दस्तावेज भी पुष्ट और स्पष्ट नहीं होते। वहाँ उन्हें अपनी अवैध आय को छिपाने में आसानी होती है।

ANC की घाटकोपर यूनिट ने ऐसी ही एक ड्रग्स माफिया नजमा अहमद शेख को गिरफ्तार किया। जहाँ शबीना 50 लाख रुपए के ड्रग्स के साथ गिरफ्तार की गई थी, नजमा के पास से 73 लाख रुपए के ड्रग्स बरामद हुए। माहिम में रहने वाली नजमा का शौहर अहमद शेख हत्या के आरोप में जेल में बंद है। वो भी ड्रग्स का कारोबार कुर्ला से ही चलाती थी। वर्ली से अँधेरी तक 35-40 ड्रग्स पेडलर्स उसके अंदर काम करते थे।

उसके पास एक कार भी थी, जिसके उपयोग ड्रग्स की डिलीवरी के लिए किया जाता था। इसी तरह बांद्रा की झुग्गियों से नीलोफर शेख को गिरफ्तार किया गया। वो शबीना के साथ मिल कर काम करती थी। उसका शौहर 20 साल पहले मर चुका है, जिसके बाद उसने ड्रग्स की दुनिया में कदम रखा था। उसके पास से MD और हीरोइन नाम की 306 ग्राम ड्रग्स मिले, जिनकी कीमत 6 लाख रुपए आँकी गई थी।

पुलिस का कहना है कि ये महिला पुलिसकर्मियों के हमेशा उपलब्ध न होने के कारण उनकी तलाशी एक मुश्किल काम होती है। ‘चेम्बूर की खाला’ कही जाने वाली फातिमा शेख को भी गिरफ्तार किया गया। उसके पति पर मुंबई के कई थानों में मामले दर्ज हैं। उसके पास से 25 ग्राम हेम्प नामक ड्रग्स मिला। हालाँकि, कोरोना होने के कारण मेडिकल ग्राउंड पर वो जमानत पाने में कामयाब रही।

वो खुद ठीक से चल नहीं सकती, उसके अंदर कितने ही ड्रग्स पेडलर्स काम करते हैं। भिवंडी में उसके गैंग ने काई झुग्गी-झोंपड़ियों को अपना अड्डा बनाया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट नंबर 4 ने इसी तरह महमूदा कदर शेख वाकड़ी को कुछ महीनों पहले पी डिमेलो रोड से 20 लाख रुपए की हेरोइन के साथ दबोचा था। महमूदा अपने शौहर कादर के साथ मिल कर ये कारोबार चलाती थी। बांद्रा स्टेशन की झुग्गी में रहने वाली महमूदा का शौहर पहले से ही जेल में था।

इसी तरह एक ड्रग्स पेडलर का नाम है शशिकला, जिसे बेबी पाटणकर नाम से भी जाना जाता है। 2015 में जब एक मामले में 114 किलो सफ़ेद ड्रग अजीनोमोटो बरामद हुआ था, तब पुलिस को उसके बारे में पता चला था। सतारा पुलिस के अधिकारियों पर इसके लिए गाज भी गिरी थी। पुलिस ने बताया कि रात का फायदा उठा कर ये महिला ड्रग्स माफिया अक्सर पुलिस को चकमा दे दे देती हैं। ANC का कहना है कि एक ड्रग्स माफिया की गिरफ़्तारी के बाद उसके किसी परिजन द्वारा कारोबार सँभालने की कई घटनाएँ सामने आई हैं।

बजाज को लगता है कोरोना हो जाए, पर स्वदेशी वैक्सीन नहीं लेनी हैः NDTV पर कॉन्ग्रेस के करीबी उद्योगपति का प्रलाप

आपको याद होगा कि ‘बजाज ऑटो’ के प्रबंध निदेशक (MD) राजीव बजाज ने कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को गलत ठहराया था। अब उन्होंने फिर से NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन जैन से बात करते हुए अपने भारत-विरोधी रुख को प्रदर्शित किया है। उन्होंने यहाँ कोरोना लॉकडाउन और वैक्सीन पर नकारात्मकता फैलाई।

NDTV ने अपने शो में उन्हें बतौर गेस्ट स्पीकर बुलाया था, जहाँ उनसे भारत में बनी कोरोना की दोनों वैक्सीन, हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2021 और Q3FY21 में उनकी कम्पनी ‘बजाज ऑटो’ को हुए रिकॉर्ड आर्थिक लाभ के सम्बन्ध में कई सवाल पूछे गए। इस दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के करीबी बताए जाने वाले राजीव बजाज ने मोदी सरकार को भी लपेटे में लिया।

भारत विरोधी और पीएम मोदी की आलोचना करने वाले गिरोह के सदस्य के रूप में पहचाने जाने वाले राजीव बजाज ने दावा किया कि भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अनपढ़, जाहिल और अनुशासनहीन है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो लॉकडाउन पर दिए अपने बयान पर कायम हैं, तो उन्होंने कहा कि भारत सरकार कोरोना महामारी से निपटने में और इसके बाद आई आर्थिक गिरावट को ठीक करने में विफल रही है।

एक तरफ जहाँ ‘बजाज ऑटो’ रिकॉर्ड प्रॉफिट कमा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके MD ने भारत की अर्थव्यवस्था के खस्ताहालत में होने की बात कही। उन्होंने भारत को एक ‘युवा और स्वस्थ’ देश बताते हुए कहा कि लॉकडाउन की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को एक सोची-समझी और परिस्थितियों के हिसाब से तैयार की गई रणनीति अपनानी चाहिए थी। राजीव बजाज लॉकडाउन को खतरनाक भी बता चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इससे संक्रमण का ग्राफ नहीं गिरा बल्कि अर्थव्यवस्था का ग्राफ फ्लैट हो गया। उन्होंने दोनों स्वदेशी वैक्सीन के बारे में कहा कि उनसे जुड़े रिस्क ज्यादा हैं और फायदे कम। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के समर्थन और विरोध की बजाए बीच में खड़े होकर इसकी समीक्षा करनी चाहिए कि क्या इसके नुकसान, इसके फायदों को दबा देते हैं? उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में बनाए गए ये वैक्सीन सुरक्षित नहीं हैं।

इस पर पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने भी कहा कि जहाँ वैक्सीन 99% सुरक्षित है, 1-2% मामलों में इससे जुड़ा बड़ा खतरा भी हो सकता है। बजट पर टिप्पणी करते हुए बजाज ने कहा कि अपने 30 वर्ष के करियर में उन्होंने कभी बजट को सुना तक नहीं है।

यहाँ ये आश्चर्य की बात है कि जब वो बजट के बारे में कुछ जानते ही नहीं हैं, फिर इस मामले पर उन्हें ‘एक्सपर्ट’ बनाकर NDTV अपने शो में क्यों लेकर आया? अपनी कम्पनी को हो रहे बड़े लाभ पर उन्होंने कहा कि इसका देश की अर्थव्यवस्था के अच्छे या बुरे होने से कोई लेना-देना नहीं है। मोदी विरोधी रुख को देखते हुए उनके ये बयान आश्चर्यचकित करने वाले नहीं हैं, लेकिन अब उन्होंने भारत का नाम दुनिया में बदनाम करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

दिसंबर 2019 में राजीव बजाज ने एक वाकया सुनाया था कि कैसे भाजपा सरकार ने उनकी मदद की थी। बजाज की कार प्रोजेक्ट Qute 8 सालों से केंद्र सरकार अनुमोदन के लिए पड़ी हुई थी। राजीव ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 8 सालों से लंबित बजाज के ऑटो व्हीकल Qute को अप्रूवल दिया। राजीव ने इसके लिए नीति आयोग को भी धन्यवाद दिया था। उनके पिता राहुल बजाज भी मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।

4 साल के बच्चे को चू#$* कहने वाली स्वरा भास्कर आज रो रही ग्रेटा की उम्र का रोना, लिबरल गैंग भी पीछे-पीछे

विदेशी प्रोपेगेंडा में भारत सरकार के हस्तक्षेप ने लेफ्ट-लिबरलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तिलमिला कर अब वह राष्ट्रवादियों पर गुस्सा उतार रहे हैं। जैसे ही सरकार ने विदेशी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की, देश के कई अन्य लोगों को हिम्मत मिली। नतीजतन उन्होंने भी आगे आकर पूरे पाखंड की निंदा की। उनकी यह नाराजगी पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण और संवैधानिक थी। लेकिन कुछ अन्य ‘भारतीयों’ से यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

बॉलीवुड में कभी एक्ट्रेस के तौर पर काम करने वाली फुल टाइम ट्रोल स्वरा भास्कर का भी कुछ यही हाल था। उन्होंने गायिका रिहाना, प्रोटेस्टर ग्रेटा और पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा के पुतले जलाए जाने की घटनाओं की निंदा की। ग्रेटा की तो उम्र का हवाला देकर उसका विरोध कर रहे लोगों को चुप कराने की कोशिश हुई।

स्वरा के अनुसार ग्रेटा सिर्फ़ 18 साल की है और यह लोगों को अधिकार नहीं देता कि उसका पुतला जलाया जाए।

ध्यान रहे कि ये वही स्वरा भास्कर हैं जिन्होंने यूट्यूब के कॉमेडी शो ‘SON OF ABISH’ के एपिसोड में एक बाल कलाकार को चू#&% कह दिया था। स्वरा ने बताया था कि अपने एड शूट में उनकी मुलाकात 4 साल के बाल कलाकार से हुई, जिसने उन्हें आंटी कहा और उसे सुन उन्होंने बच्चे को चू*&^ कहा। शो में स्वरा ने बच्चों की तुलना शैतान से की थी और शो के होस्ट ने इस पर सहमति भी जताई थी।

इसके अलावा बच्चों की डॉक्सिंग करने वाले ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के लिए भी स्वरा ने खूब आवाज उठाई थी। पिछले साल जुबैर पर ट्विटर यूजर जगदीश सिंह ने अपनी पोती के साथ वाली फोटो को हाइलाइट करने का इल्जाम लगा था, जिस पर कट्टरपंथी बलात्कार की धमकी दे रहे थे। ऐसे में स्वरा ने निंदा करने की बजाय जुबैर को समर्थन दिया था।

स्वरा की तरह कई अन्य लिबरल ट्विटर यूजर भी ग्रेटा की उम्र पर प्रोपेगेंडा चलाते दिखे। पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी ग्रेटा की उम्र को हाइलाइट किया और सरकारी तंत्र को कोसा। 

एनडीटीवी के एंकर विष्णु सोम ने भी ग्रेटा को 18 साल का बता कर दिल्ली पुलिस की एफआईआर को हाइलाइट किया है और उसके लिए संवेदना जगाने की कोशिश की है।

ध्रुव राठी और वामपंथी वकील प्रशांत भूषण भी इसमें कैसे पीछे छूट सकते हैं।

बता दें कि आज ये सब लिबरल सिर्फ़ इसलिए बिदके हुए हैं, क्योंकि विदेशी षड्यंत्र के ख़िलाफ़ देश ने एकजुटता दिखाई है। ग्रेटा की उम्र पर रोना रोने वाले ये वही लोग हैं, जिन्होंने एक 16 साल की लड़की को टारगेट बना लिया था क्योंकि उसने जेएनयू के भारत विरोधी प्रोपेगेंडेबाज कन्हैया कुमार को खुली डिबेट की चुनौती दी थी।

याद हो तो साल 2016 में जाह्नवी ने जेएनयू के कन्हैया कुमार को खुली डिबेट के लिए ललकारा था। उस समय कन्हैया ने पीएम पर इल्जाम लगाए थे। इसके बाद जाह्नवी को बुरी तरह ट्रोल किया गया था।

यही सब देख कर पता चलता है कि स्वरा जैसों के लिए ग्रेटा जैसे बाल प्रोटेस्टर्स की उम्र से कोई लेना-देना नहीं है जब तक वह उनके एजेंडे पर फिट न बैठे। आज जब भारतीय उसकी निंदा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उसने भारत के खिलाफ़ माहौल बनाने वालों का खुल कर साथ दिया, तब ये गिरोह उसकी उम्र का उदाहरण देकर लीपापोती करने में लगा है।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे गिरोह को सिर्फ़ एक उम्र ही ऐसा फैक्टर लग रहा है, जिसकी वजह से ग्रेटा की आलोचना नहीं होनी चाहिए। वह ये भूल गए हैं कि हाल में विदेशी षड्यंत्र की पोल खोलने वाले टूलकिट को ग्रेटा ने ही अपने ट्विटर पर साझा किया था।

‘किसान आंदोलन से ₹1,00,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान’: यूपी-उत्तराखंड में चक्का जाम से टिकैत पीछे हटे

दिल्ली की सीमाओं पर ढाई महीने से चल रहे किसान आंदोलन के बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार (6 फरवरी 2021) को पूरे देश में 3 घंटे के लिए चक्का जाम का ऐलान किया है। इस बीच केवल दो राज्यों में चक्का जाम नहीं होगा। ये 2 राज्य- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया, “उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं है, बाकी दिल्ली के बाहर पूरे देश में रोड ब्लॉक की जाएँगी। इसका कारण है कि दिल्ली में उन लोगों को कभी भी जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सकता है।”

6 फरवरी को किसानों द्वारा किए जाने वाले चक्का जाम को कॉन्ग्रेस ने अपना समर्थन दिया है। वहीं हरियाणा में राज्य सरकार ने स्थिति को देखते हुए हर तरह के इंटरनेट को बंद कर दिया है। सरकार ने वॉयस कॉल को छोड़कर इंटरनेट सेवाओं (2जी/3जी/4जी/सीडीएमए/जीपीआरएस), एसएमएस सेवाओं (केवल ब्लक एसएमएस) और मोबाइल नेटवर्क पर दी जाने वाली सभी डोंगल सेवाओं को बंद करने की अवधि 6 फरवरी, 2021 शाम 5 बजे तक के लिए बढ़ा दी है।

इस बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक बयान में किसान आंदोलन के कारण होने वाले नुकसान के बारे में बताया है। CAIT के अनुसार, 70 दिनों के किसान आंदोलन से व्यापार में 1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इसमें से 70,000 Cr माल से संबंधित है जो दूसरे राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले थे। वही 40 हजार करोड़ बाहर जाने वाले थे।

संघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि आंदोलन से मुख्य रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के थोक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। व्यावसायिक नुकसान झेलने वाली प्रमुख वस्तुओं में FMCG उत्पाद, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, आयरन एंड स्टील, टूल्स, पाइप एंड पाइप फिटिंग्स, मशीनरी इक्विपमेंट्स एंड इम्प्लीमेंट्स, मोटर्स एंड पंप्स, बिल्डर हार्डवेयर, केमिकल्स, फर्नीचर और फिक्स्चर, लकड़ी और प्लाईवुड, खिलौने, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम आदि शामिल हैं।

CAIT के महासचिव ने दिल्ली उपराज्यपाल अनिल बैजल को भी पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने 26 जनवरी को किसानों का हिंसक रवैया याद दिलाते हुए अपील की है कि सुरक्षा सुनिश्चित की जाए कि दोबारा वह सब दोहराने की गुंजाइश ही न रहे।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने की जिद्द की थी। जब बहुत समझाने पर वह नहीं माने तो उन्हें तय रूट बताकर अनुमति दी गई। लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में कथित प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह हिंसा की। लाल किले पर धार्मिक झंडा फहरा दिया। इन घटनाओं में 300 से अधिक पुलिस वाले घायल हुए थे।

जम्मू-कश्मीर में 4G मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल, केंद्र सरकार ने लिया फैसला

जम्मू-कश्मीर में करीब डेढ़ साल बाद 4G मोबाइल इंटरनेट सेवा फिर से बहाल कर दी गई है। प्रधान सचिव रोहित कंसल (बिजली और सूचना) ने बताया कि पूरे जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने का फैसला लिया गया है।

बता दें कि जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद 5 अगस्‍त, 2019 से इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई के मद्देनज़र भारत सरकार ने यह फैसला लिया है। संसद ने पिछले साल 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को रद्द कर जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया था।

370 हटने के बाद कश्मीर में इंटरनेट सेवाएँ सस्‍पेंड कर दी गई थीं। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रतिबंधित करने के पीछे कथित रूप से अलगाववादियों और पाकिस्तानी आतंकवादियों को वजह बताया था, जोकि किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते थे।

गौरतलब है कि 2जी इंटरनेट सेवा को 25 जनवरी 2020 को बहाल किया गया था। इसके बाद उधमपुर और गांदरबल में 16 अगस्त 2020 को हाई स्पीड इंटरनेट सेवा ‘ट्रायल बेसिस’ पर शुरू की गई थी, जिसे आज भी बरकरार रखा गया है। लेकिन बाकी जिलों में 2जी इंटरनेट सेवा ही जारी थी।

देश के लिए खड़े हुए सचिन तेंदुलकर तो युवा कॉन्ग्रेसियों ने पोती कालिख: कॉमरेड और इस्लामी ट्रोल भी एक्टिव

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे कथित किसान आंदोलन के नाम पर विदेशी प्रोपेगेंडा को हवा मिलने के बाद भारत की कई नामी हस्तियों ने विदेशी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ होकर देश के साथ एकजुटता दिखाई। बुधवार को इसी लिस्ट में एक नाम क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर का जुड़ा। सचिन ने भी फर्जी प्रोपेगेंडा के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद की थी।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। बाहरी ताकत दर्शक हो सकते हैं, लेकिन भागीदार नहीं। भारतीय नागरिक भारत के बारे में जानते हैं। हम एक राष्ट्र के तौर पर एकजुट रहें।”

अब बाहरी ताकतों के ख़िलाफ़ सचिन के आवाज उठाते ही कुछ लोगों में हलचल मच गई। सोशल मीडिया पर केरल वाले यूजर्स का एक धड़ा तो खुलकर न केवल सचिन का विरोध करने लगा, बल्कि देश के साथ खड़े होने के लिए उनका अपमान भी किया जाने लगा।

केरल के कोच्चि में शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सचिन तेंदुलकर के कट आउट पर कालिख पोत दी। इसके बाद जमकर नारेबाजी की।

इस बीच कई यूजर्स ने रूस की टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा से माफी माँगनी शुरू कर दी है, जिसने एक दफा ये कहा था कि वह सचिन तेंदुलकर को नहीं जानती। शारपोवा ने 7 साल पहले एक प्रश्न के जवाब में अपनी बात कही थी, जब उनसे उनके मैच के दौरान सचिन की उपस्थिति पर पूछा गया था। 

इस घटना के बाद वर्चुअल स्पेस पर कई लोगों ने मारिया शारापोवा को उलटा सीधा बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लोगों ने पूछा था कि आखिर सदी से महान क्रिकेटर को कैसे वह जानने से इनकार कर सकती हैं। दिलचस्प बात यह थी कि ये धड़ा केरल से ही था।

अब यही वजह है कि मात्र सचिन के देश के साथ खड़े भर हो जाने से यही केरल वाले अपनी गलती का पश्चताप कर रहे हैं। तेंदुलकर पर नाराजगी दिखाने के लिए इन्होंने शारापोवा से माफी माँगी है। हैरानी की बात यह है कि भारत के तमाम मीडिया हाउसों ने ऐसी हरकत की निंदा करने की बजाय अप्रत्यक्ष रूप से उनको सराहते हुए अपनी रिपोर्ट पब्लिश की है।

नीचे कुछ रिपोर्ट के शीर्षक उदाहरण के साथ हैं।

द हिंदू

इंडियन एक्सप्रेस

सीएनएन न्यूज 18

क्या शारापोवा को माफी दिलवाने में कॉमरेडों, कॉन्ग्रेस समर्थकों और इस्लामी ट्रोल का हाथ है?

भारत में हो रही घटनाओं के बीच मारिया शारापोवा पर केरल के सोशल मीडिया यूजर्स के ऐसे पोस्ट साफ तौर पर बताते हैं कि ये सब भारत के खेल जगत दिग्गजों  को निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा अभियान है, खासकर सचिन को, क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

पूरा पैटर्न देखें तो ये सोशल मीडिया यूजर्स ज्यादा से ज्यादा शारापोवा की टाइमलाइन पर जाकर सचिन की छवि मटियामेट करने में लगे हैं। खास बात यह है कि इनमें कुछ कॉमरेड हैं, कुछ कॉन्ग्रेस समर्थक और कई केरल के इस्लामी ट्रोल हैं।

यहाँ कुछ सोशल मीडिया अकाउंट हैं, जिन्होंने शारापोवा से गिड़गिड़ा कर माफी माँगी। 

 कॉमरेड

केरल में वामपंथी पार्टियों में से एक दल लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के समर्थक सचिन तेंदुलकर पर निशाना साधने वाले पहले थे। हमने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि इस सूची में कई और नाम हैं।

ये कुछ माफी हैं, जो एलडीएफ समर्थकों ने शारापोवा के अकाउंट पर उनसे माँगी:

एक अन्य मुस्लिम यूजर व एलडीएफ के सक्रिय कार्यकर्ता ने शारापोवा को सॉरी कहा।

उबैद को देख पर भी ऐसा लगा कि वह भी इन वामपंथियों में से एक है।

आशिक इब्न ने तो तेंदुलकर को जोकर कहकर रूसी ख़िलाड़ी से माफी माँगी।

कॉन्ग्रेस समर्थक

इस सूची में केरल में विपक्ष में बैठी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट भी शामिल है, जिसका नेतृत्व कॉन्ग्रेस करती है। देश को शर्मसार करते हुए इसके लोगों ने मारिया के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगी।

एक समर्थक ने लिखा कि शारापोवा सही कह रही थी कि वो सचिन को नहीं जानती। नियत ने इसे सही साबित कर दिया कि लोगों को सचिन को नहीं जानना चाहिए था।

लतीफ ने तो यहाँ तक कहा कि सचिन हर किसान को खारिज कर चुके हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने इस मुद्दे पर एक भी पोस्ट नहीं किया।

कई आप समर्थक भी शारापोवा की टाइमलाइन पर माफी माँगते दिखे।

इसके बाद इस्लामी ट्रोल्स ने भी सचिन के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने से गुरेज नहीं किया।

अब उक्त ट्वीट्स से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि केरल में अधिकतर सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से खुश नहीं है भारतीय खेल के दिग्गज देश के साथ खड़े हों। उनका ये रवैया बताता है कि वह अपने राजीतिक नैरेटिव को बढ़ाने के लिए अपने देश के आत्मसम्मान के साथ भी खिलवाड़ कर सकते हैं।