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मुजफ्फरनगर के GIC में जमावड़ा, पैदल मार्च का हो सकता है ऐलान: नरेश टिकैत ने किया था महापंचायत का आह्वान

मुजफ्फरनगर के सिसौली में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने महापंचायत बुलाई है। यह महापंचायत राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) में होनी है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए वहाँ भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती कर दी है। कहा जा रहा है कि महापंचायत में किसान नेता कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं।

बता दें कि गाजीपुर बॉर्डर पर मीडिया के सामने संगठन प्रवक्ता राकेश टिकैत के रोने के बाद मुजफ्फरनगर की इस महापंचायत की खबर सामने आई थी। स्थल पर कई पड़ोसी राज्यों के किसान जुटने लगे हैं। सब मिल कर सिसौली के राजकीय इंटर कॉलेज ग्राउंड में पहुँच रहे हैं।

यह जगह किसानों के मसीहा कहे जाने वाले महेंद्र सिंह टिकैत की जन्मभूमि है। यहाँ से हो सकता है कि किसान दिल्ली के लिए पैदल मार्च करें। GIC में इस समय टिकैत परिवार की महिलाएँ व कई ग्रामीण किसान पहुँच रहे हैं।

महापंचायत के लिए तैयार होता मंच

कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बीकेयू के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने किसानों को पूरी तरह शांति-व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी है। मगर, सामने आये एक वीडियो में देखा जा सकता है कि नरेश टिकैत जीआईसी ग्राउंड में महापंचायत की बात कर रहे हैं। साथ ही साफ शब्दों में कह रहे हैं कि व्यवस्था बिगड़े या सुधरे इसमें उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

मालूम हो कि गुरुवार को गाजीपुर प्रशासन से अल्टीमेटम मिलने के बाद नरेश टिकैत ने धरना वापस लेने का फैसला किया था। हालाँकि, बाद में अपने भाई व संगठन प्रवक्ता राकेश टिकैत की रोती हुई वीडियो हर जगह वायरल देखने के बाद वह अपने फैसले से पलट गए। उन्होंने देर रात इमरजेंसी में पंचायत बुलाई और गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँचने के लिए लोगों को निर्देश दिए। 

इसके बाद सिसौली पंचायत ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में महापंचायत का ऐलान किया। संगठन अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अगर गाजीपुर में किसी किसान को खरोंच भी आई तो सरकार को सैकड़ों लाशों के ढेर से गुजरना पड़ेगा। कुछ पल बाद ही टिकैत का यह वीडियो वायरल हो गया।

गौरतलब हो कि किसानों को उकसाते हुए उन्हें भारी मात्रा में दोबारा प्रदर्शनस्थल पर इकट्ठा होने को कहा गया है। इसका असर कुछ सीमाओं पर शुरू हुई झड़प के रूप में देखा जा सकता है। उधर, आरएलडी, कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी ने महापंचायत को समर्थन का एलान किया है।

बातचीत की कोशिश करते पुलिसकर्मी

पुलिस लगातार बातचीत के जरिए कोशिश कर रही है कि किसी तरह इलाकों में कानून-व्यवस्था बनी रहे। मगर, राजनीतिक दलों के कुत्सित प्रयास बता रहे हैं कि वो न कानून को उसका काम करने देना चाहते हैं और न ही शांति की बहाली चाहते हैं। किसान आंदोलन की आग में उनका मकसद सिर्फ़ राजनीतिक रोटियाँ सेंकना है।

गाजीपुर बॉर्डर खाली कराने में रोड़ा बने केजरीवाल, देर रात विधायकों को भेजकर की पानी-शौचालय की व्यवस्था

गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलन की आड़ में हुए उपद्रव के बाद यूपी सरकार एक्शन में है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार (28 जनवरी 2021) को गाजीपुर बॉर्डर पर जारी विरोध प्रदर्शन रोकने का आदेश दिया था। योगी सरकार द्वारा जारी किए गए इस आदेश के बाद पुलिस-प्रशासन ने किसानों को देर रात गाजीपुर बॉर्डर खाली करने के लिए कहा था। इसके बाद ही प्रदर्शन स्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई थी। इस कार्रवाई के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक उनकी माँगों का संज्ञान नहीं लिया जाता है, तब तक वह प्रदर्शन स्थल खाली नहीं करने वाले हैं।

टिकैत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से फोन पर बात करते हुए पानी और शौचालय की व्यवस्था करवाने का निवेदन किया था। टिकैत ने इस बारे में कहा था कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री से बात कर ली है, उन्होंने अरविन्द केजरीवाल से पानी और शौचालय की माँग की है। अरविन्द केजरीवाल और राकेश टिकैत के बीच हुई इस बातचीत के बाद कोंडली से आम आदमी पार्टी विधायक कुलदीप कुमार रात के एक बजे पानी का टैंकर लेने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के प्लांट पहुँचे थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कुलदीप कुमार ने बताया था, “राकेश टिकैत ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से पीने की पानी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद किसानों के लिए पानी का टैंकर लेने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के प्लांट आया हूँ।” इसके अलावा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी शुक्रवार (29 जनवरी 2021) को गाजीपुर बॉर्डर पहुँच कर वहाँ की व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।

वहाँ पहुँच कर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे केजरीवाल जी ने यहाँ भेजा है, बीती रात आपकी उनसे बात हुई थी। उसके बाद उन्होंने पानी के टैंकर और अन्य व्यवस्था कराई। उन्होंने मुझसे यहाँ का निरीक्षण करने के लिए भी कहा था। उन्होंने यह भी कहा है कि दिल्ली सरकार आपकी सेवा के लिए मौजूद है।”

मनीष सिसोदिया के अलावा दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन समेत अन्य आप नेता भी गाजीपुर बॉर्डर पहुँचे। 

सत्येन्द्र जैन ने वहाँ पहुँच कर कहा, “हम यहाँ पर अपनी सरकार द्वारा किए गए पानी और शौचालय के इंतज़ाम देखने के लिए आए हैं। पुलिस ने पानी के टैंक को रोकने का प्रयास किया जिससे टैंक तय जगह पर नहीं पहुँच पाएँ। पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें शीर्ष अधिकारियों से आदेश मिला है। हम प्रदर्शन स्थल पर किसी को भूख और प्यास से मरने नहीं देंगे।”

आप सांसद संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था कि राकेश टिकैत से फोन पर बात हुई थी। आम आदमी पार्टी किसानों के साथ है। टिकैत ने उनसे कहा कि प्रशासन ने पानी बंद करवा दिया और वहाँ से शौचालय तक हटवा लिया। आम आदमी पार्टी यह मुद्दा संसद में भी उठाएगी। वहीं दूसरी तरफ किसान भी अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं, फ़िलहाल गाजीपुर बॉर्डर को चारों ओर से बंद कर दिया गया है। दिल्ली से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ जाने वाले रास्तों को डायवर्ट कर दिया गया है। राकेश टिकैत लगातार अपने नजदीकियों से संपर्क में हैं।  

सिंघु बॉर्डर पर SHO को तलवार से किया लहूलुहान, पत्थरबाजी से तनाव बढ़ा

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सिंघु बॉर्डर पर आज फिर स्थानीय लोग रोड खाली कराने के लिए धरनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद किसानों और स्थानीय लोगों के बीच पत्थरबाजी भी शुरू हो गई। जिसके बाद पुलिस ने आँसू गैस के गोले भी दागे।

दिल्ली पुलिस सिंघु सीमा पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले दाग रही है, जिसके बदले में प्रदर्शनकारियों द्वारा उन पर और स्थानीय लोगों पर तलवार और पत्थरों से हमला किया जा रहा है। स्थानीय लोग भी अब इस जगह पर प्रदर्शन करते हुए जगह को खाली करने की माँग कर रहे हैं, जिस कारण किसान और स्थानीय लोग आमने-सामने आ गए हैं।

इस बीच प्रदर्शनकारियों ने अलीपुर के एसएचओ पर तलवार से हमला कर दिया और वो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। समाचार चैनल रिपब्लिक भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे किसानों ने वहाँ मौजूद SHO पर तलवार से हमला कर दिया, जिसमें उनका हाथ जख्मी हो गया है। घायल SHO को अस्पताल ले जाया गया और तलवार को कब्जे में ले लिया गया है।

किसान प्रदर्शनकारी लगातार लोगों और पुलिस बल पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले किसानों ने पत्थरबाजी शुरू की और अब हालात और बिगड़ सकते हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारी किसानों में संघर्ष हो रहा है। और अब पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ रहा है।

सिंघु बॉर्डर से किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि सरकार जो भी करे हम सिंघु बॉर्डर नहीं छोड़ेंगे। जब तक कानून रद्द नहीं हो जाते और MSP पर नया कानून नहीं बन जाता हम यहाँ से नहीं जाएँगे।

जो संविधान अभिव्यक्ति की आजादी देता है, वही हमें कानून का पालन करना भी सिखाता है: राष्ट्रपति ने तिरंगे के अपमान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) को अभिभाषण के साथ ही संसद के बजट सत्र की शुरुआत की। दो हिस्सों में चलने वाला बजट सत्र 8 अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र पहला चरण आज से 15 फरवरी तक, और दूसरा चरण 8 मार्च से 8 अप्रैल तक चलेगा।

हालाँकि, 18 दलों के विपक्षी नेताओं ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों के साथ खड़े होते हुए अभिभाषण के बहिष्कार का फैसला किया है। बजट सत्र के लिए संसद मेंं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह समेत तमाम सांसद मौजूद हैं। 

एक घंटे चले राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रपति ने हाल ही की सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं और उपलब्धियों का ब्यौरा दिया। इसके अलाव, राष्ट्रपति ने सीमा पर चीन के साथ हुए हिंसक झड़प के बारे में बात करते हुए देश के वीर सैनिकों के शौर्य की सराहना की करते हुए बलिदानी जवानों का भी जिक्र किया।

इस दौरान, राष्ट्रपति कोविंद ने गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “पिछले दिनों तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए।”

राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र में अस्थायी सदस्यता, ब्रिक्स में अध्यक्ष बनने से लेकर अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण तक में देश की उल्लेखनीय प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार के उल्लेखनीय गतिविधियो के बारे में भी बात की। राष्ट्रपति ने कहा, “ऐसे अनेक निर्णय हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में लिए गए। मेरी सरकार ने दिखाया है कि नीयत साफ हो, इरादे बुलंद हों तो बदलाव लाया जा सकता है। इन वर्षों में मेरी सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है।”

राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और छह संसद सदस्यों के निधन पर दुख जताया और श्रद्धांजिल अर्पित की। राष्ट्रपति ने सरकार की बैंकिंग व्यवस्था के बारे में भी बात करते हुए कहा, “इसके लिए 41 करोड़ से अधिक गरीबों के जनधन खाते खोले गए। इनमें से आधे से अधिक खाते हमारी गरीब बहनों और बेटियों के हैं।”

कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘‘व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ। छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएँ थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है। बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘वर्तमान में इन कानूनों के क्रियान्वयन देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है। मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी।’’

पिछले वर्ष सितंबर माह में मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच कानून पारित किए गए थे। संसद सत्र 2021 के अंतर्गत सरकार के अजेंडे में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश करने के अलावा कुछ अध्यादेशों को कानून की शक्ल देना भी शामिल है।

इनमें नैशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉज (स्पेशल प्रोविजन) सेकंड (अमेंडटमेंट) ऑर्डिनेंस, 2020, द कमिशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट इन नैशनल कैपिटल रीजन और ऐडजॉइनिंग एरिया ऑर्डिनेंस 2020, द जम्मू ऐंड कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2021, द आर्बिट्रेशन ऐंड कॉन्सिलिएशन (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2020, डेटा प्रॉटेक्शन बिल, डीएनए टेक्नॉलजी बिल शामिल हैं। जबकि, आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।

वैश्विक कोविड वैक्सीनेशन में भारत की अहम भूमिका, क्षमता दुनिया में सबसे बेहतर: UN चीफ ने भारत की शान में पढ़े कसीदे

भारत में कोरोना वायरस वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत 16 जनवरी 2021 को हुई थी। इस अभियान के अंतर्गत अभी तक लगभग 24 लाख लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इसके अलावा भारत ने कई पड़ोसी देशों को भी कोरोना वैक्सीन की डोज़ प्रदान की है। कोरोना महामारी का सामना करने में भारत की अहम भूमिका पर संयुक्त राष्ट्र (united nation) ने बयान दिया है। 

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (antonio guterres) ने भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता की जम कर प्रशंसा की है। उनके मुताबिक़ भारत कोरोना वैक्सीनेशन के वैश्विक अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। 

एंटोनियो गुटेरेस ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा, “मेरा मानना है कि भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता दुनिया में सबसे बेहतर है। वहाँ बहुत बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है इसलिए हम भारतीय संस्थानों के लगातार संपर्क में हैं। मेरी राय में दुनिया को समझना चाहिए कि इसका पूरी तरह से उपयोग किया जाना चाहिए। भारत के पास ऐसे तमाम उपकरण मौजूद हैं, जो यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाने के लिए ज़रूरी हैं जिससे एक वैश्विक टीकाकरण अभियान सम्भव हो।”      

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का बयान ऐसे वक्त में आया है जब भारत अपने पड़ोसी देशों को कोरोना वैक्सीन की 55 लाख से ज़्यादा डोज़ प्रदान कर चुका है। भारत ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक की दो वैक्सीन को मंज़ूरी दी है। दोनों ही कंपनी बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन कर रही हैं। इसी कड़ी में भारत अभी तक मालदीव, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, मारीशस, श्रीलंका, ब्राज़ील, सेशल्स और अफगानिस्तान को कोरोना वैक्सीन प्रदान कर चुका है। 

इसके अलावा भारत ओमान, कैरीकॉम (caricom) देशों, निकारगुआ, पैसिफिक आइलैंड स्टेट्स को भी वैक्सीन प्रदान करने की तैयार में जुटा हुआ है। वहीं दक्षिण अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्री जवेली मखीज ने भी हाल ही में जानकारी दी थी कि 1 फरवरी 2021 को भारत उन्हें कोरोना वैक्सीन की 10 लाख डोज़ प्रदान करेगा। भारत द्वारा की जाने वाली इस मदद को मद्देनज़र रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उम्मीद जताई है कि भारत वैश्विक वैक्सीनेशन अभियान को सफल बनाने में मदद करेगा।  

60 साल से गुफा में रह रहे 83 साल के इस संन्यासी ने राम मंदिर को दिए ₹1 करोड़: भौचक रह गए बैंककर्मी

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ऋषिकेश नीलकंठ पैदल मार्ग पर गुफा में रहने वाले 83 वर्षीय संत स्वामी शंकर दास ने एक करोड़ रुपये का दान दिया है। स्वामी शंकर दास महाराज भी टाट वाले बाबा के नाम से मशहूर है। स्‍वामी शंकर दास ने अपने गुरु टाट वाले बाबा की गुफा में मिलने वाले श्रद्धालुओं के अनुदान से यह रकम जुटाई थी। स्वामी शंकर दास पिछले 60 वर्षों से गुफा में रह रहे हैं।

जब स्वामी शंकर दास बुधवार (जनवरी 27, 2021) के दिन एक करोड़ रुपए के चेक के साथ ऋषिकेश स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पहुँचे, तो वहाँ के कर्मचारी हैरान रह गए। बैंक कर्मचारियों ने संत स्वामी शंकर दास के खातों की जाँच की तो पाया कि उनके चेक सही थे। दान प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आरएसएस के पदाधिकारियों को बुलाया गया।

बुधवार को स्वामी शंकर दास महाराज ने एक करोड़ रुपये का चेक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ जिला संघचालक सुदामा सिंगल को सौंपा। चेक सौंपते समय स्वामी शंकर दास ने कहा कि उन्होंने यह निधि केवल श्रीराम मंदिर के लिए जमा की थी।

शंकर दास महाराज का जीवन बहुत ही सरल है। उन्होंने अपने जीवन के 60 साल एक गुफा में बिताए हैं। उनके गुरु टाट वाले थे, जो कि महर्षि महेश योगी, विश्व गुरु महाराज और मस्तराम बाबा के समकालीन थे। वेद निकेतन के महामंडलेश्वर स्वामी विजयानंद सरस्वती ने कहा कि बाबा स्वामी शंकर दास महाराज, जिनके पास सिर्फ एक बोरी थी, ने सभी सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था। वह पिछले 40 वर्षों से श्री राम मंदिर के लिए पैसा जुटा रहे हैं।

यमकेश्वर प्रखंड के मणिकूट पर्वत की तलहटी पर बसे हुए पौराणिक नीलकंठ महादेव मंदिर में इस गुफा में कई वर्षों से श्रद्धालु आकर दान और चढ़ावा दिया करते थे। इस दौरान टाट वाले बाबा मंदिर के लिए धन संग्रह करते रहे। अब समय आने पर अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए जा रहे धन में सन्यासी ने एक करोड़ रूपए समर्पण निधि में दान कर दिए।

दीप सिद्धू का एक और वीडियो, कहा- सामने आऊँगा लेकिन सबूत जुटाने के लिए वक्त चाहिए

26 जनवरी के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के नाम पर हुई हिंसा में नाम सामने आने के बाद दीप सिद्धू (Deep Sidhu) लापता चल रहे हैं। हालाँकि, ‘लापता’ होने के बाद दीप सिद्धू ने बृहस्पतिवार (जनवरी 28, 2021) देर रात वो दूसरी बार फेसबुक ‘लाइव’ के जरिए सामने आए और खुद को बेगुनाह बताया। दीप सिद्धू ने कहा कि वो जाँच में सहयोग देने को तैयार हैं लेकिन उन्हें थोड़ा सा समय चाहिए।

दीप सिद्धू ने अपने फेसबुक पेज से लाइव वीडियो में कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और उनके पास कुछ भी छुपाने के लिए नहीं है। सिद्धू ने कहा कि उनके खिलाफ जो लुक आउट नोटिस जारी हुआ है, वो उसकी जाँच में जरूर शामिल होंगे, लेकिन उन्हें एक-दो दिन का समय चाहिए, ताकि वो सच निकाल सकें।

फेसबुक पर जारी वीडियो में दीप सिद्धू ने कहा, “मेरे बारे में लगातार झूठ फैलाया जा रहा है, ऐसे में सच इकट्ठा करना जरूरी है। जो मेरे ऊपर केस लगाए गए हैं, मैं उनको लेकर अपने सबूत पेश करूँगा।” सिद्धू ने कहा कि ये सरकार और पुलिस की कोई साजिश भी लग रही है।

उन्होंने कहा, “जब मैंने कुछ किया ही नहीं है तो मुझे डरने की जरूरत भी क्या है। लेकिन मैं जाँच में भी सहयोग करूँगा। आपको जो इन्वेस्टिगेशन करनी होगी आप कर लेना। लेकिन जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं वो सही नहीं हैं। तुमने FIR दर्ज की, केस किए, वो कोई बड़ी बात नहीं है।”

गौरतलब है कि इससे पहले, पंजाबी अभिनेता से सामाजिक कार्यकर्ता बने दीप सिद्धू ने बृहस्पतिवार (जनवरी 28, 2021) रात डेढ़ बजे फेसबुक लाइव किया और अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। सिद्धू ने किसान नेताओं को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने अंदर की बातें खोलनी शुरू कर दी तो इन नेताओं को भागने की राह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बात को सिर्फ डायलॉग न समझें और उनके पास हर बात की दलील है।

फेसबुक पर लाइव वीडियो में दीप सिद्धू ने कहा था कि मैं गद्दार नहीं हूँ और मैंने लोगों को लाल किले तक नहीं पहुँचाया। पंजाबी कलाकार ने कहा कि यह जनता का निर्णय था जो पंजाब से विरोध करने के लिए सभी तरह से आया था। कोई भी उनका नेतृत्व नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के नेता जिन्होंने उन्हें देशद्रोही कहा, उन्हें शर्म आनी चाहिए क्योंकि वे सरकार की बोली बोल रहे हैं।

गद्दार कहे जाने से नाराज सिद्धू ने कहा कि उनके बारे में कई तरह की बातें कही जा रही हैं, ऐसे में वक्त आ गया है कि कुछ बातें स्पष्ट कर दी जानी चाहिए। दिल्ली में 26 जनवरी को लाल किले पर झंडा लगाने के विषय में दीप सिद्धू ने कहा कि युवाओं को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च की बात कहकर बुलाया गया था। बाद में किसान नेताओं ने दिल्ली में तय रूट पर परेड की बात कह दी, जिस पर युवाओं ने रोष जाहिर किया तो किसान नेता वहाँ से किनारा करने लगे।

डेनियल पर्ल के हत्यारे उमर शेख की रिहाई पर भड़के अमेरिका ने दी पाकिस्तान को चेतावनी, कहा- न्याय सुनिश्चित करो वरना हम देंगे सजा

पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारे अहमद उमर सईद शेख की रिहाई के आदेश पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका ने रिहाई के इस आदेश की आलोचना करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी है। दरअसल, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उमर शेख की रिहाई का आदेश दिया था। इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन का कहना है कि वाशिंगटन एक अमेरिकी नागरिक पर हुए भीषण अत्याचार के लिए उमर शेख पर मुकदमा चलाने के लिए तैयार है। पाकिस्तान को उस पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, उमर शेख अलकायदा का आतंकवादी है। 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा, “हम आशा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए अपनी कानूनी प्रक्रिया और विकल्पों की नए सिरे से समीक्षा करेगी। अमेरिका अटॉर्नी जनरल के उस बयान पर भी मंथन कर रहा है, जिसमें उन्होंने इस आदेश को वापस लेने के लिए समीक्षा याचिका की इच्छा जताई है। कुल मिला कर हम एक अमेरिकी नागरिक के साथ किए गए खौफ़नाक अपराध के लिए उमर शेख को अमेरिका में सज़ा देने के लिए तैयार हैं। हम डेनियल पर्ल के परिवार को न्याय दिलाने और आतंकवादियों को दोषी ठहराए जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” 

इस मुद्दे पर भारत सरकार की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर कहा था, “यह घटना आतंकवाद का सामना करने के लिए पाकिस्तान की नीयत दिखाती है। मैंने पहले भी इस बात का ज़िक्र किया है कि आतंकवाद के आरोपितों के मामले में पाकिस्तान का दोषसिद्धि दर बहुत कम है। आतंकवाद के तमाम मोर्चों पर पाकिस्तान की मानसिकता इस घटना से स्पष्ट हो जाती है। यह मामला एक देश की न्याय व्यवस्था का उपहास है कि उमर शेख जैसे आतंकवादी को उसके जघन्य कृत्यों का दोषी नहीं पाया गया।” 

दरअसल, पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने बीते दिन (28 जनवरी 2021) अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या मामले में ब्रिटिश मूल के अलकायदा आतंकवादी उमर शेख की रिहाई के विरोध में दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। साल 2002 के दौरान कराची में ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख डेनियल पर्ल (38) का अपहरण कर लिया गया था। उस समय वह पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा के बीच रिश्तों पर आधारित एक ख़बर के लिए जानकारी इकट्ठा कर रहे थे।   

टिकैत के ‘घड़ियाली’ आँसुओं ने किया जींद-चंडीगढ़ NH जाम, दिल्‍ली पुलिस के पास 200+ वीडियो फुटेज; उपद्रवियों की तलाश तेज

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान हुई जबरदस्त हिंसा और लाल किले पर निशान साहिब सहित खालिस्तानी झंडा फहराने की घटना के बाद किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ता हुआ दिख रहा है। अब तक चार किसान संगठनों ने अपना धरना खत्म कर दिया है, मगर गाजीपुर बॉर्डर पर संघर्ष तेज करने की तैयारी हो चुकी है। गाजीपुर बॉर्डर पर गुरुवार (जनवरी 28, 2021) देर शाम से आधी रात तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। दिल्ली और उससे सटी सीमाओं पर कल से ही यूपी और दिल्ली पुलिस ने फ्लैगमार्च के साथ ही अपनी हलचल तेज कर दी है।

एक तरफ जहाँ दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पुलिस कर रही है। वहीं एहतियात के तौर पर गाजीपुर बॉर्डर को भी खाली कराने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल कल से ही तैनात है। लेकिन, कल शाम, राकेश टिकैत के रो-रोकर अपील करने के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी सपोर्ट के लिए गाजीपुर बॉर्डर पहुँचने लगे जिससे देर रात पुलिस पीछे हटती नजर आई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उधर जींद में राकेश टिकैत के समर्थन में किसानों ने जींद-चंडीगढ़ हाईवे जाम कर दिया है। कहा जा रहा कि दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस की कार्रवाई से किसानों में काफी नाराजगी है और आज उन्होंने महापंचायत भी बुलाई है।

गौरतलब है, राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर कल शाम रोने-धोने के बाद एक व्यक्ति को थप्पड़ मारकर नया विवाद भी खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान वहाँ मौजूद एक व्यक्ति को टिकैत ने न सिर्फ थप्पड़ मारा बल्कि उसे पकड़कर बार-बार पूछते नजर आए कि तू कौन है? टिकैत ने आप खोते हुए उसका कॉलर पकड़ कर खींचा। बाद में वहाँ मौजूद अन्य लोगों ने उसे छुड़ाया। हालाँकि, उस युवक को पुलिस को सौंपा गया है या फिर उसे वहीं पर रखा गया है इसकी फिलहाल जानकारी है।

इसके पहले राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर शाम को एक सभा को संबोधित किया और भड़काऊ भाषण देते हुए एक बार फिर पास के किसानों को वहाँ पहुँचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यहाँ से कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। यदि कोई गिरफ्तारी होगी तो पता नहीं हमारे साथ क्या होगा। साथ ही उन्होंने एक बार फिर भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि अगर यदि ऐसा हुआ तो गोली चल जाएगी और उसका प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।

बता दें कि किसानों के ट्रैक्टर मार्च के बेकाबू होने के बाद दिल्ली में हुई तोड़फोड़ और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिसवालों के बीच हिंसक झड़पों के साथ ऐतिहासिक लाल किला में भी तोड़फोड़ सहित निशान साहिब और खालिस्तान का झंडा फहराया गया था। साथ ही तिरंगे की बेअदबी की गई थी। इस पूरे मामले में रिपोर्ट के अनुसार, अब दिल्‍ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने हिंसा भड़काने वाले 6 संदिग्‍धों की पहचान करने का दावा किया है।

कहा जा रहा है कि पुलिस ने 200 से ज्‍यादा वीडियो फुटेज के आधार पर इनकी पहचान की है। इन 6 संदिग्धों की फुटेज के आधार पर हिंसा भड़काने को लेकर अहम भूमिका सामने आ रही है। फुटेज के आधार पर इन सभी तलाश तेज कर दी गई है। गौरतलब है कि पुलिस के पास जो तमाम सीसीटीवी और वीडियो मौजूद हैं, उनकी सघन जाँच के बाद इन 6 उपद्रवियों के बारे में पुलिस को पता चला है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान दिल्ली पुलिस ने 10 फोटोग्राफर और 10 वीडियो कैमरा बाहर से निजी तौर पर हायर किए थे। कहा जा रहा है कि गणतंत्र दिवस का प्रोग्राम खत्म होने के बाद इन सभी को हिंसा के दौरान भी काम पर लगा दिया गया था। अब इनसे भी हिंसा के तमाम वीडियो और फ़ोटो लिए गए हैं। इन फ़ोटो और वीडियो के आधार पर भी दिल्ली में हिंसा करने वाले उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

भारत के लिए खतरा है देशद्रोही योगेंद्र यादव: सोसायटी के लोगों ने किया बाहर निकालने के लिए प्रदर्शन

‘देशद्रोही’ योगेन्द्र यादव को उनकी सोसायटी से लोग बाहर निकालने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। इन लोगों ने संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरे योगेंद्र यादव पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया है।

गौतम अग्रवाल ने इसकी जानकारी देते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किसान यूनियन नेता योगेंद्र यादव के निवास के बाहर आईपी एक्सटेंशन दिल्ली के निवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन। लोगों ने अपनी सोसायटी की प्रबंध समिति से कहा है कि वह अपना फ्लैट खाली करवा लें क्योंकि वह भारत के लिए खतरा है।”

प्रदर्शन कर रहे सोसायटी के लोग ‘योगेंद्र यादव मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए उसकी तस्वीरों को जला भी रहे हैं और नारे लगाते हुए उन्हें पैरों से कुचल रहे हैं।

दिल्ली में हुई हिंसा के बाद बृहस्पतिवार (जनवरी 28, 2021) को ही लोगों के विरोध से डरकर योगेंद्र यादव अपने फेसबुक पेज से लाइव कर वीडियो में रोते हुए ये कहते सुने गए थे कि लोग उनके घर पर हमला करने वाले हैं। इस वीडियो में यादव ने कहा कि जो लोग मुझे राष्ट्रवाद पर लेक्चर दे रहे हैं, उन्हें मेरे परिवार की विरासत के बारे में कोई जानकारी नहीं।

उल्लेखनीय है कि किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने योगेंद्र यादव और बलबीर सिंह राजेवाल सहित लगभग 20 किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने उन्हें तीन दिनों के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि इन किसान नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं क्योंकि उन्होंने मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया था।

गणतंत्र दिवस को ट्रैक्टर परेड हिंसक हो पड़ी और किसानों ने दिल्ली पुलिस पर हमला बोलते हुए वाहनों को पलट दिया। यही नहीं, उपद्रवियों ने लाल किले की प्राचीर पर एक धार्मिक झंडा भी फहरा दिया। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कहा कि हिंसा के संबंध में 25 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिसमें 394 पुलिसकर्मी घायल हुए और 30 पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए।