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असली किसानों के खाने-पीने की सप्लाई राजीव ने बंद की, लाठियाँ बरसाईः आज दंगाइयों को प्रियंका-राहुल बता रहे ‘किसान’

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2021) पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों का उपद्रव पूरे देश को शर्मसार करने वाला था। लाल किले में तिरंगे के अपमान से लेकर दिल्ली की सड़कों पर पुलिसकर्मियों पर हमला, समेत तमाम घटनाएँ हैं, जिसे देख हर कोई इस प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में प्रियंका गाँधी और उनके भाई राहुल गाँधी कथित किसानों के समर्थन में आए हैं। 

26 जनवरी को हुई हिंसा की एक भी बार निंदा न करने वाली प्रियंका गाँधी ने हालिया ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। इस ट्वीट में प्रियंका लिखती हैं, “किसान का भरोसा देश की पूँजी है। इनके भरोसे को तोड़ना अपराध है। इनकी आवाज न सुनना पाप है। इनको डराना धमकाना महापाप है। किसान पर हमला, देश पर हमला है। प्रधानमंत्री जी, देश को कमजोर मत कीजिए।”

वहीं, राहुल गाँधी ने पूछा है कि आखिर लोगों को लाल किले में जाने की अनुमति कैसे मिली? उन्हें रोका क्यों नहीं गया? पूछिए गृहमंत्री से कि क्या उद्देश्य था कि लोगों को परिसर में जाने दिया गया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष का कहना है, “सरकार को किसानों से बात करके समस्या के हल तक पहुँचना चाहिए। हल सिर्फ ये है कि कानून वापस लिया जाए और उसे कूड़ेदान में डाला जाए। सरकार सोचती होगी कि किसान घर चले जाएँगे। मेरी चिंता है कि ये स्थिति बढ़ेगी। लेकिन हमें वह सब नहीं चाहिए। हमें हल चाहिए।”

अब ‘किसानों’ के हिंसक रूप को देखने के बावजूद उनके समर्थन में आए प्रियंका-राहुल को याद दिलाना जरूरी है कि आज जो वह दोनों किसान समुदाय के हितैषी बनकर कथित किसानों की स्थिति के लिए मोदी सरकार को कोस रहे है, उनके खुद के पिता राजीव गाँधी का रवैया उन असली किसानों के प्रति कैसा था जो न सड़कों पर दंगे कर रहे थे, न खालिस्तानियों का समर्थन।

लगभग 30 साल पहले की बात है। 1988 के अक्टूबर माह में तत्कालीन बीकेयू नेता व राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों के अधिकार के लिए एक प्रदर्शन किया था, जिसे राजीव गाँधी की सरकार ने दबाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। 

किसानों के बीच राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत (साभार: द प्रिंट)

महेंद्र सिंह टिकैत के निर्देशों पर करीब 50 हजार किसानों ने उस समय दिल्ली के उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक के पास बने बोट क्लब और उसके लॉन का घेराव किया था। इस आंदोलन के पीछे मुख्य वजह कृषि संकट, देरी से हो रहे भुगतान, नौकरशाही के जटिल नियम और किसानों के कष्टों के प्रति सरकार की उदासीनता थी।

शुरुआत में तय किया गया कि यह आंदोलन 1 दिन का होगा। मगर देखते ही देखते अवधि एक हफ्ता पार कर गई। धीरे-धीरे सबका ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ। उधर, कुछ दिन में शीतकालीन संसद सत्र शुरू होने वाला था। वीपी सिंह के इस्तीफे और बोफोर्स घोटाले के कारण पहले ही राजीव गाँधी सरकार सबके निशाने पर थी।

साल 1988 में राजपथ पर इकट्ठा हुए किसान (साभार: द प्रिंट)

ऐसे में किसान आंदोलन की भड़की आग को शांत करने के लिए राजीव सरकार ने सबसे पहले किसानों के प्रदर्शन क्षेत्र में पानी की सप्लाई बंद की। फिर खाने की सप्लाई को रोक दिया गया। जब किसान इतने पर भी नहीं हटे तो किसान और उनके मवेशियों को दुखी करने के लिए रात-रात गाने बजाए गए। फिर भी किसान माँग पर अड़े रहे तब राजीव सरकार ने कथित रूप से लाठीचार्ज किया और महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई वाली किसानों की रैली को उसी समय खदेड़ दिया गया। मालूम हो कि यह वही घटना है जब एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में चली गोलियों में दो किसानों की मौत हो गई थी।

आज प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी उन किसानों के लिए सरकार से सवाल कर रहे हैं जिनकी हकीकत और मंशा दोनों जगजाहिर हो गई है। दूसरी ओर स्थानीय भी माँग कर रहे हैं कि प्रदर्शनस्थल खाली करवाए जाएँ और सभी प्रदर्शनकारी अपने-अपने घर लौटें। मगर, इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी दोनों कथित किसानों के कुकर्मों पर लीपापोती करने में जुटे हैं। वो भी ये जानते हुए सरकार द्वारा लाए गए तीनों नए कृषि कानून केवल किसानों के हित में हैं।

अब राहुल गाँधी कह रहे हैं कि सरकार को किसानों से बातचीत करनी चाहिए जबकि सच्चाई यह है कि 11 दौर की बातचीत बेनतीजा सिर्फ़ किसानों की जिद्द के कारण हुई है, जिससे साफ पता चलता है कि उनकी इच्छा सिर्फ़ कृषि कानून पर चर्चा करने की नहीं है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस का किसानों के प्रति बर्बर रवैया सिर्फ़ 1988 में सामने नहीं आया था, बल्कि साल 1997 में भी इसकी पोल खुली थी। तब, मध्यप्रदेश के मुलतई में कॉन्ग्रेस काल में एक और कार्रवाई किसानों के ख़िलाफ़ हुई थी। वहाँ बल का प्रयोग करके लगभग किसान प्रदर्शन पर ओपन फायरिंग करवा दी गई थी। घटना में आधिकारिक तौर पर 19 किसानों की जान गई थी। वहीं 150 से ज्यादा घायल हुए थे। वहीं एक्टिविस्ट कहते हैं कि इस घटना में 24 किसान मरे थे। भाजपा उस समय विपक्ष में थी और उसने पूरी घटना को जलियाँवाला बाग नरसंहार के समकक्ष बताया था।

कॉन्ग्रेस MP शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई समेत 8 पर अब भोपाल में FIR: ट्रैक्टर मार्च के दौरान भड़काऊ ट्वीट का मामला

गणतंत्र दिवस के दिन किसानों के ट्रैक्‍टर मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर भ्रामक और भड़काऊ ट्वीट करने को लेकर कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर समेत कुछ पत्रकारों पर एक और मामला दर्ज किया गया है। भोपाल के मिसरोद थाने में राष्ट्रद्रोह की धाराओं के तहत शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे सहित 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इससे पहले नोएडा में मामला दर्ज हुआ था।

भोपाल के ASP ने बताया कि किसान आंदोलन की आड़ में इन शशि थरूर पर ऐसा ट्वीट करने का आरोप है जिससे दो समुदायों के बीच में अशांति फैले। आरोपितों के खिलाफ धारा 153A (1B) और 505 (2) के तहत FIR दर्ज की गई है। मामले की जाँच की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोपाल के कैलाश नगर निवासी संजय रघुवंशी ने इन सभी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। संजय ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह खुद भी किसान हैं। 26 जनवरी को कॉन्ग्रेस नेता थरूर सहित कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक तथ्य प्रसारित किए। इससे शांति भंग हुई।

बताया जाता है कि ट्विटर पर शशि थरूर ने किसान आंदोलन को लेकर भ्रामक ट्वीट किए थे। शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई और मृणाल पांडे के अलावा जफर आगा, परेश नाथ, अनंत नाथ, विनोद के जोश और एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि कल (28 जनवरी, 2021) इन्हीं धाराओं के तहत इन लोगों पर नोएडा में भी केस दर्ज हुआ है। उत्पात मचाने वाले किसान नेताओं के अलावा कुछ पत्रकारों पर भी मुकदमे दर्ज हुए थे। अफवाह फैलाने, हिंसा भड़काने के लिए कई पत्रकार पुलिस की रडार पर हैं।

ट्विटर पर एक यूजर द्वारा साझा की गई एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, फर्जी जानकारी साझा करने वालों में कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर और राजदीप सरदेसाई के अलावा कुछ लोगों के खिलाफ यूपी में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इसमें नेशनल हेराल्ड की वरिष्ठ सम्पादकीय सलाहकार मृणाल पांडे, कौमी आवाज के जफर आगा, कारवाँ पत्रिका के मुख्य संपादक प्रकाशक परेशनाथ, कारवाँ पत्रिका के अनन्तनाथ व इसी पत्रिका के कार्यकारी संपादक विनोद और एक अज्ञात का नाम शामिल थे।

साझा किए गए फोटो के अनुसार, एफआईआर में आरोपित बनाए गए हस्तियों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295-ए, 298, 504, 506, 505 (2), 124-ए, 34, 120 बी और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत नोएडा सेक्टर 20 थाने में मामला दर्ज हुआ था।

यहाँ मालूम हो कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में कई जगह पुलिस को नकारात्मक दिखाने के लिए फर्जी जानकारी फैलाई गई थी। इस कड़ी में राजदीप पर पहले ही उनका संस्थान इंडिया टुडे समूह उन्हें दो हफ्तों के लिए ऑफ एयर कर कार्रवाई कर चुका है। इसके बाद सरदेसाई ने इस्तीफा दे दिया था।

‘पिंजरा तोड़’ की देवांगना को जमानत देने से कोर्ट का इनकार, कहा- पहली नजर में आरोप सही लगते हैं

दिल्ली की एक अदालत ने जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की ‘छात्रा’ और ‘पिंजरा तोड़’ की सदस्य देवांगना कलिता की दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशन जज) अमिताभ रावत ने देवांगना की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं। 

देवांगना को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे और सीएए-एनआरसी से जुड़े दंगे भड़काने के आरोप में गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगे भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाने के चलते दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 23 मई 2020 को देवांगना कलिता को गिरफ्तार किया था। देवांगना, पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्यों में एक हैं, जो कथित तौर पर लैंगिक समानता के लिए कार्य करता है। देवांगना पर दंगों की साज़िश रचने के लिए यूएपीए के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जमानत पर रिहा होने के ठीक बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने देवांगना को मई में गिरफ्तार किया था। 

जाफराबाद पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के विध्वंस की रोकथाम के अंतर्गत दर्ज एफ़आईआर में भी कलिता का नाम मौजूद है। 28 जनवरी 2021 को दिल्ली की अदालत ने पिंजरा तोड़ की एक अन्य ‘कार्यकर्ता’ नताशा नरवाल की जमानत याचिका खारिज की थी।

इन जमानत याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए अदालत ने कहा कि रास्ते जाम करना जिससे आवश्यक सेवाएँ बाधित होती हैं, पुलिसकर्मियों पर हमला और दंगों को भड़काना यूएपीए के प्रावधानों के अंतर्गत आतंकवादी गतिविधि के दायरे में आता है। 

दंगे भड़काने वाला वामपंथी समूह ‘पिंजरा तोड़’ 

सीलमपुर और जाफराबाद के तमाम निवासियों ने पिंजरा तोड़ समेत तमाम सिविल सोसाइटी समूहों पर देश की राजधानी में दंगे भड़काने का आरोप लगाया था। पिंजरा तोड़ छात्राओं का समूह होने दावा करता है जो विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों और सुविधाओं के लिए लड़ता है, लेकिन ऐसे तमाम प्रदर्शन और अभियान में शामिल रहा है जो उग्रवादी मानसिकता से प्रेरित थे।

मुँह दबाना, कपड़े खोलना, फिर रेप करना… अकेला युवक नहीं कर सकताः बॉम्बे हाई कोर्ट का नया फैसला, आरोपित बरी

यौन हमले के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने पिछले दिनों एक फैसला दिया था। उस पर विवाद चल रहा है। अब एक और फैसला इसी तरह का आया है। 15 साल की लड़की से रेप के आरोपित को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना हाथापाई के बलात्कार नहीं किया जा सकता

अदालत का कहना था कि पीड़िता का मुँह दबाना, फिर उसके और अपने कपड़े उतारना। बाद में जबरन बिना किसी हाथापाई के रेप करना अकेले युवक के लिए संभव नहीं है। स्तन दबाने के मामले में ‘स्किन टू स्किन’ जजमेंट और फिर नाबालिग के सामने जिप खोलने, हाथ पकड़ने को यौन हमले से अलग श्रेणी में बताने वाली जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला ने कहा, 

“अगर यह जबरन रेप का मामला होता, तो हाथापाई होती। मेडिकल साक्ष्य भी लड़की के आरोपों के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी तरह की जबरदस्ती किए जाने के कोई चोट या उसके निशान नहीं पाए गए।”

बता दें कि 6 जुलाई 2013 को सूरज कासरकार नाम के युवक पर लड़की के घरवालों ने रेप का आरोप लगाया था। इसके 6 साल बाद 14 मार्च 2019 को वह रेप करने का दोषी ठहराया गया। सत्र न्यायालय ने मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपित को 10 साल की सजा सुनाई। उस समय उसके ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के साथ आईपीसी की धारा 376(1) और 451 के तहत आरोप तय हुए थे।

सत्र न्यायालय से फैसला आने के बाद युवक ने हाई कोर्ट में अपील की थी। यहाँ युवक ने कहा था कि उसने रेप नहीं किया। दोनों की सहमति से संबंध बने। लड़की अपनी सहमति से घर से भागी थी, जब उसकी माँ को पता चला तो उसके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवा दी। कोर्ट में तब भी कहा गया कि लड़की कई बार शारीरिक संबंध बना चुकी है। वहीं सरकारी वकील एमजे खान ने कहा कि पीड़िता गलत बयान नहीं दे सकती। 

दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ने पाया कि लड़की और उसकी माँ की गवाही से यह साबित नहीं होता कि लड़की की उम्र घटना के दौरान 18 साल से कम थी। वहीं लड़की ने भी दलीलों में स्वीकारा कि उसने खुद को अपनी माँ के कहने पर 15 साल का बताया था। यहाँ तक उसका जन्म प्रमाण पत्र भी उसकी उम्र स्पष्ट नहीं करता।

न्यायाधीश ने कहा कि दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध की बातें सामने आई हैं। ऐसे में अभियुक्त को संदेह का लाभ दे सकते हैं। लड़की ने भी स्वीकारा है कि अगर उसकी माँ वहाँ नहीं पहुँचती तो वह शिकायत नहीं दर्ज करवाती।

इसके बाद सत्र न्यायालय का आदेश खारिज करते हुए कहा गया, “बलात्कार के मामलों में अभियोजन पक्ष की एकमात्र गवाही आरोपितों के खिलाफ आपराधिक दायित्व तय करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन लड़की की निम्न स्तर की गवाही देखते हुए याचिकाकर्ता को 10 साल के लिए सलाखों के पीछे भेजना घोर अन्याय होगा।”

गौरतलब है कि हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक फैसला सुनाया था, जिसके मुताबिक़ सिर्फ ग्रोपिंग (groping, किसी की इच्‍छा के विरुद्ध कामुकता से स्‍पर्श करना) को यौन शोषण नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक इसके लिए शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) होना चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने एक मामले में यह भी कहा था कि यदि किसी नाबालिग के सामने कोई पैंट की जिप खोल दे, तो वो पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा।

गाँव-गाँव घुमाई जाएगी पुरस्कृत राम मंदिर की झाँकी, होगी पुष्प वर्षा: सीएम योगी ने दिया निर्देश

72वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर निकली गई अलग-अलग राज्यों की झाँकियों में इस बार प्रथम स्थान पाने वाली उत्तर प्रदेश की झाँकी को लेकर सूबे की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार द्वारा झाँकी को पुरस्कृत किए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि राम मंदिर मॉडल की झाँकी अब यूपी के गाँव-गाँव में घुमाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झाँकी जहाँ से भी गुजरेगी, लोग गर्व का अनुभव करते हुए इसका स्वागत करेंगे और इस दौरान पुष्पवर्षा भी की जाएगी। बता दें, राम मंदिर मॉडल की झाँकी को प्रथम पुरस्कार मिलने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद ही खुश है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया पुरस्कृत

गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निकाली गई श्रीराम मंदिर मॉडल की झाँकी ने एक तरफ जहाँ सभी का मन मोह लिया, वहीं दूसरी ओर पुरस्कारों में भी सर्वोत्तम रही। गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरण रिजिजू ने उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को यह पुरस्कार सौंपा गया था।

जिसे अब सूचना विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल और सूचना निदेशक शिशिर ने इस पुरस्कार को मुख्यमंत्री योगी को सौंप दिया।

डिफेंस मिनिस्ट्री ने बताया कि, राजपथ पर गणतंत्र दिवस के परेड में जहाँ उत्तर प्रदेश की झाँकी को प्रथम स्थान मिला है, वहीं त्रिपुरा की झाँकी को दूसरा और उत्तराखंड की झाँकी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

राम मंदिर झाँकी का सम्मान

गौरतलब है कि पहली बार यूपी की तरफ से राम मंदिर की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई। अयोध्या में बन रहे भव्य और दिव्य राम मंदिर की झाँकी जैसे ही राजपथ पर निकली उसने गणतंत्र दिवस की परेड में हर किसी का मन मोह लिया था। कई लोग खड़े होकर तालियाँ बजाने लगे तो कई लोग अपनी जगह पर हाथ जोड़कर खड़े हो गए। इस पूरे थीम में रामायण और दीपोत्‍सव की झलक थी। पीएम मोदी के चेहरे पर भी मंदिर का मॉडल देखकर एक अलग ही चमक आ गई थी।

सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर बाद में यूपी के राममंदिर की झाँकी टॉप ट्रेंडिंग पर थी। हर कोई इसे शेयर कर गौरवांवित महसूस कर रहा था। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर खुशी जताते हुए इस तस्वीर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, ‘‘जहाँ अयोध्या सियाराम की देती समता का संदेश.. कला और संस्कृति की धरती धन्य-धन्य उत्तर प्रदेश।’’

कैसी है यूपी की झाँकी

झाँकी के सबसे आगे हिस्से में महर्षि वाल्मीकि की एक बड़ी प्रतिमा नजर आएगी। उनके पीछे मंदिर का मॉडल दिखेगा। यूपी की झाँकी में एक ओर मिट्टी के बने दीये जगमगा रहे। ये दीपक अयोध्या के दीपोत्सव के प्रतीक है। वहीं, अन्य भित्ति चित्रों (वॉल पेंटिंग्स) में भगवान राम द्वारा निषादराज को गले लगाते और शबरी के जूठे बेर खाते, अहिल्या का उद्धार, हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाया जाना, जटायु-राम संवाद, लंका नरेश की अशोक वाटिका और अन्य दृश्यों को दिखाया गया है।

दंगाइयों ने राम मंदिर की झाँकी को भी नहीं बख्शा

हालाँकि, किसान के आड़ में छिपे दंगाइयों ने इसे भी नहीं छोड़ा था। गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने तिरंगा के अपमान के साथ ही राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया था। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ डाला। दंगाइयों ने सुरक्षाकर्मियों के सामने ही केदारनाथ मंदिर की झाँकी को निशाना बनाया और राम मंदिर की प्रतिमा के ऊपर के गुम्बद को तोड़ दिया था।

‘बॉलीवुड माफिया’ को चुनौती देने वालीं कंगना रनौत बनेंगी इंदिरा गॉंधी

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बायोपिक ‘थलाइवी’ के बाद, बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) साईं कबीर द्वारा अभिनीत पॉलिटिकल ड्रामा में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) की भूमिका निभाने जा रही हैं। इसकी जानकारी कंगना रनौत ने अपने ट्विटर अकाउंट से भी दी है।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, खबर की पुष्टि करते हुए कंगना ने एक बयान में कहा कि यह फिल्म बायोपिक नहीं होगी, लेकिन ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार‘ और ‘इमरजेंसी’ सहित भारतीय राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कवर करेगी। कंगना ने कहा कि फिल्म एक किताब पर आधारित है, लेकिन किताब का उन्होंने फ़िलहाल कोई जिक्र नहीं किया है। कंगना फिल्म को प्रोड्यूस करेंगी और साईं कबीर इसके कहानीकार और पटकथा लेखक होने के साथ-साथ इस फिल्म का निर्देशन भी करेंगे।

कंगना रनौत ने एक बयान में कहा, “हाँ, हम इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, और स्क्रिप्ट अंतिम चरण में है। यह इंदिरा गाँधी की बायोपिक नहीं है। यह एक ग्रैंड पीरियड फिल्म है। यह एक पॉलिटिकल ड्रामा है, जो मेरी पीढ़ी को वर्तमान भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को समझने में मदद करेगा।”

कंगना ने अपनी एक पुरानी तस्वीर कंगना ट्वीट करते हुए लिखा, “यह उस प्रतिष्ठित महिला पर किया गया एक फोटोशूट था, जो मैंने अपने करियर की शुरुआत में किया था। तब मुझे नहीं पता था कि एक दिन मुझे पर्दे पर प्रतिष्ठित नेता की भूमिका निभाने को मिलेगी।”

कंगना ने यह भी बताया कि कई प्रमुख कलाकार इस फिल्म का हिस्सा होंगे, जो संजय गाँधी, राजीव गाँधी, मोरारजी देसाई और लाल बहादुर शास्त्री जैसे राजनीतिक नेताओं के रूप में दिखेंगे। फिल्म का शीर्षक अभी तय होना बाकी है।

पिछले कुछ माह पहले ही सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से कंगना रनौत बॉलीवुड दिग्गजों से लेकर राजनीतिक हस्तियों के निशाने पर रही हैं। उन्होंने कहा था कि वो अब उन बॉलीवुड माफियाओं को एक्सपोज करेंगी और बताएँगी कि कैसे मूवी माफियाओं ने सुशांत को न केवल बैन किया, बल्कि चरणबद्ध तरीके से कतरा-कतरा कर उनके माइंड को तोड़ा।

Whatsapp चैट की चिंता? Telegram ने जारी किया यूनिक फीचर: जाने कैसे आसानी होगा हर डेटा ट्रांसफर

Whatsapp की नई पॉलिसी के कारण कई यूजर्स अब टेलीग्राम का रुख कर चुके हैं। ऐसे में मौके का फायदा उठाते हुए टेलीग्राम ने एक नया फीचर ‘माइग्रेशन टूल’ पेश किया है। इसमें आप अपने व्हॉट्सएप की चैट को टेलीग्राम पर ट्रांसफर कर सकते हैं।

जी हाँ, आप यदि पूरी तरह व्हॉट्सएप, लाइक जैसी एप्स को छोड़ने का मन बना चुके हैं लेकिन कुछ जरूरी चैट्स के कारण वहाँ अटके हुए हैं तो ये फीचर आपके लिए मददगार साबित होगा। इसके जरिए आप उन चैट को टेलीग्राम पर ट्रांसफर करके whatsapp या अन्य एप्स को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं।

टेलीग्राम ने इस नए फीचर के बारे में अपने ब्लॉग में विस्तृत जानकारी दी है। मैसेजिंग एप ने यह भी बताया है ‘अधिक गोपनियता और स्वतंत्रता के साथ इस साल जनवरी में Telegram की यूजर्स की संख्या 100 मिलियन से अधिक हो गई है। 

कंपनी ने यह नई सुविधा आईओएस और Android दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध करवाई है। हालाँकि, फिलहाल इसका प्रयोग कुछ लोगों तक सीमित होगा। 

ios की बात करें तो इसके लिए यूजर्स को अपनी व्हाट्सऐप काॅन्टेक्ट इंफो और ग्रुप इंफो में जाना होगा। उसके बाद वहाँ एक्सपोर्ट चैट पर क्लिक कर टेलीग्राम पर जाएँ। इसी तरह एंड्रायड यूजर के लिए व्हॉट्सऐप चैट में मोर और फिर एक्सपोर्ट चैट में जाकर टेलीग्राम पर क्लिक करना होगा। इस प्रक्रिया के बाद आपकी व्हाट्ऐप चैट उसी दिन टेलीग्राम पर ट्रांसफर हो जाएगी। 

अब रही बात एप में स्पेस की। यदि आप whatsapp की चैट ट्रांस्फर करने से पहले इस बात से तंग है कि वह एक्ट्रा स्पेस लेगा। तो बता दें कि टेलीग्राम के पास आपकी इस चिंता का भी निवारण है। दरअसल, जिस तरह मैसेजिंग एप में स्टोर डेटा आपके डिवाइस में जगह घेरता है। टेलीग्राम इस तरह का कोई स्पेस नहीं लेता।

टेलीग्राम ने अपने इस नए फीचर के साथ पुराने कई फीचर की क्वालिटी को भी सुधारा है। इसमें वॉयस चैट, ऑडियो प्लेयर, स्टिकर्स, एनिमेशन को सुधारा गया है। इसके साथ डिजिटल फुटप्रिंट कंट्रोल का अधिकार, फेक चैनल की शिकायत आदि करने की सुविधा भी ये प्लेटफॉर्म देता है।

ओडिशा: खुदाई में मिला 10वीं शताब्दी के मंदिर का अवशेष, दीवारों पर नक्काशीदार मूर्तियाँ

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर के नज़दीक आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) का उत्खनन कार्य जारी है। इस दौरान एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले हैं, जो 10वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। खुदाई में एक शिवलिंग मिला है जिसके कई हिस्सों पर पत्थर की मीनाकारी की गई है।

पुरातत्व विभाग, लिंगराज मंदिर स्थित एकमरा क्षेत्र हेरिटेज प्रोजेक्ट के अंतर्गत सुकरा सारी मंदिर में उत्खनन और सौन्दर्यीकरण कर रहा है। इसी दौरान 10वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिले।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुरातत्व विभाग का मानना है कि सुकरा सारी मंदिर पंचायती मॉडल पर बनाया गया था। मुख्य मंदिर चारों ओर से सहायक मंदिरों से घिरा हुआ था। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यह सोमवंश शासन के दौर का मंदिर है। खुदाई के दौरान दीवारों के कुछ हिस्से मिले हैं जिन पर मूर्तियाँ बनी हुई हैं और उन पर नक्काशी भी हुई है। 

यह मूर्तियाँ पहले ध्वस्त संस्कृत महाविद्यालय के परिसर के नीच दबी हुई थीं। ASI ने वैज्ञानिक शैली का इस्तेमाल करके खुदाई की है, जिससे मूर्तियों का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं हो।

ASI के अधीक्षक अरुण मल्लिक का कहना है, “खुदाई के दौरान हमें प्राचीन मंदिर मिला। फ़िलहाल दूसरे हिस्सों में उत्खनन कार्य जारी है। पूरा ढाँचा निकालने में अभी लगभग 10 दिन का समय और लगेगा। दीवारों के कुछ हिस्सों में राजवंशों की उकेरी हुई मूर्तियाँ भी मिली हैं। यह मूर्तियाँ संस्कृत महाविद्यालय के परिसर के नीचे दबी थीं।” 

पिछले कुछ महीनों में सुकरा सारी मंदिर के आस-पास मौजूद कई हिस्सों को सौन्दर्यीकरण की प्रक्रिया में नुकसान पहुँचा है। ज़मीन के नीचे जो अवशेष मिले हैं वह सारी मंदिर के उत्तर-पश्चिम कोने पर स्थित हैं। इसके अलावा दो और छोटे ढाँचे निकले हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वो भी मंदिर का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट्स में ASI अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि खुदाई में मिले मंदिर के अवशेष नज़दीक स्थित ब्रह्मेश्वर और चित्रकारिनी मंदिरों की तरह ही हैं। चिंता का विषय ये है कि पहले भी काफी बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई है, कहीं उससे ढांचे का अहम हिस्सा प्रभावित नहीं हुआ हो। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं प्राचीन मंदिर का ऊपरी हिस्सा न टूट गया हो और उसके आधार के दो अवशेष बचे हों। 

इस पर इतिहासकार पद्मलोचन मिश्र का कहना है कि भुवनेश्वर की पहचान मंदिर मालिनी के रूप में होती थी, क्योंकि यहाँ पर अलग-अलग प्रकार के 1000 से ज़्यादा मंदिर मौजूद थे। आज की तारीख में इनमें से अधिकांश अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं।

दारू पी पीकर हमारे घरों में झाँकते हैं, फब्तियॉं कसते हैंः बुजुर्ग महिला ने कैमरे पर खोल दी ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की पोल

टिकरी-सिंघु बॉर्डर (Singhu border) पर किसान प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दरअसल, महीनों से सड़क जाम कर बैठे प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ अब स्थानीय महिला और बुजुर्गों ने भी मोर्चा खोल दिया है।

टिकरी बॉर्डर (Tikri border) की बुजुर्ग महिलाओं ने समाचार चैनल रिपब्लिक भारत से बात करते हुए कहा कि ये प्रदर्शनकारी दारू पीकर हमारे घरों में झाँकते हैं और फब्तियाँ कसते हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों के विरोध में उतरे लोगों का कहना है कि लाला किले पर जो तिरंगे का अपमान किया गया, उससे अब बात बहुत बढ़ चुकी है और वो चुप नहीं बैठेंगे।

सिंघु बॉर्डर (Singhu border) पर हालत पर काबू पाने के लिए पुलिस अब आँसू गैस का इस्तेमाल कर रही है और लाठीचार्ज कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय लोगों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, जिसके जवाब में स्थानीय लोग भी पत्थर फेंक रहे हैं।

इसी बीच प्रदर्शनकारी किसानों ने एक एसएचओ पर तलवार से हमला कर दिया, जिसमें वो घायेल हो गए। तलवार से हमला करने वाले इस शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

किसान प्रदर्शनकारी लगातार लोगों और पुलिस बल पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले किसानों ने पत्थरबाजी शुरू की और अब हालात और बिगड़ सकते हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारी किसानों में संघर्ष हो रहा है। और अब पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ रहा है।

शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) दोपहर करीब 1 बजे नरेला की तरफ से आए लोग धरनास्थल पर पहुँचे और नारेबाजी करते हुए किसानों से बॉर्डर खाली करने की माँग करने लगे। इनका कहना था कि किसान आंदोलन के चलते लोगों के कारोबार ठप हो रहे हैं। 

राकेश टिकैत समेत 6 किसान नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाया गया क्राइम ब्रांच, गाजीपुर बॉर्डर पर तनावपूर्ण माहौल

गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली के दौरान देश की राजधानी में घटी हिंसक घटनाओं के बाद से दिल्ली पुलिस सख्त एक्शन में है। दिल्‍ली पुलिस ने आज (29 जनवरी, 2021) क्राइम ब्रांच के दफ्तर में किसान आंदोलन में शामिल 6 किसान नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाया है। बता दें, लाल किले पर दंगाइयों द्वारा किए गए हिंसा और बर्बरता की घटना के जाँच अब दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को सौंप दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन नेताओं को क्राइम ब्रांच में बुलाया गया है उनमें बूटा सिंह बुर्जगिल, दर्शन पाल सिंह, राकेश टिकैत, शमशेर पंधेर, पन्नू पंधेर और सतनाम पन्नू शामिल हैं। हालाँकि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अभी इस जाँच में शामिल होने से मना कर दिया है। 26 जनवरी को हुए बवाल के मद्देनजर मामले में देशद्रोह और UAPA के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।

वहीं भारी संख्‍या में गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस बल, पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात किए गए है। गाजीपुर बॉर्डर पर कल से मचे बवाल को लेकर यूपी पुलिस का कहना है कि किसानों की सुरक्षा के लिए पुलिस लगाई गई। किसानों से संवाद में कमी नहीं होने दी जाएगी। किसी को माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं है।

यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, “हम सभी को विश्वास में लेने के बाद ही अगला कदम उठाएँगे। वहाँ (गाजीपुर सीमा) शांति बनाए रखने के लिए तैनात किए गए बल और किसानों के साथ बातचीत चल रही है। कुछ किसानों ने अपना विरोध वापस ले लिया है। पुलिस कुछ भी अवैध नहीं करेगी, हम बातचीत के माध्यम से सब कुछ कर रहे हैं।”

एडीजी ने कहा, “यूपी सरकार ने शुरू से ही कहा था कि हम किसानों से बात करके इसका हल निकालेंगे। उसी के अनुसार अब तक सब कुछ किया गया है। कल या आज सुरक्षा को मजबूत करना यह देखना था कि कोई उपद्रवी तत्व विरोध में न घुस जाए, जोकि माहौल को बिगाड़े।”

उन्होंने कल फैले अफवाह को लेकर कहा कि, “कुछ लोगों ने आधारहीन संदेह व्यक्त किया और इसे एक दूसरों के बीच फैलाया गया। हम शुरू से कह रहे हैं कि हम केवल बातचीत के माध्यम से एक समाधान की तलाश करेंगे। यूपी में आज भी शांति है। हमारे अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और किसानों से बात कर रहे हैं। बातचीत में कोई कमी नहीं है।”

गौरतलब है कि 26 जनवरी के मौके पर हुए बवाल में शामिल संदिग्धों को पकड़ने के बाद पूछताछ के आधार पर हिंसा भड़काने में शामिल अन्‍य लोगों की भूमिका का भी पता लगाया जा सकेगा। फुटेज के आधार पर भी दंगाइयों की तलाश की जा रही है। दरअसल, पुलिस के पास जो तमाम सीसीटीवी फुटेज और वीडियो मौजूद हैं, उन्हीं की जाँच के बाद इन 6 उपद्रवियों के बारे में पुलिस को पता चला है। अब घटना में शामिल बाकी दंगाइयों की तलाश तेज कर दी गई है।