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‘5 करोड़ रुपए में PM मोदी की हत्या कर दूँगा’: Facebook पोस्ट लिखकर ऑफर देने वाला गिरफ्तार

पुडुचेरी पुलिस ने 43 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का प्रस्ताव दिया था। उसने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को मारने के लिए तैयार है अगर कोई उसे इस काम के लिए 5 करोड़ रुपए दे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित आर्यनकुप्पम गाँव का रहने वाला है। फेसबुक पर विवादित पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गुरुवार (4 फरवरी, 2021) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने अपने पोस्ट में लिखा था कि, यदि कोई उसे 5 करोड़ रुपए दे तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कर देगा।

दरअसल, एक कार चालक ने फेसबुक पोस्ट पढ़ने के बाद तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी थी। जिसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति के फेसबुक अकाउंट को ट्रेस किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। शख्स की पहचान 43 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी सत्यनंदम के रूप में हुई है।

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया। जहाँ कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सत्यनंदम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1) और 505 (2) के तहत सार्वजनिक शरारतों के लिए बयान देने और शत्रुता, घृणा को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

बहिरा नाचे अपने ताल: रिहाना पर रवीश कुमार का तान, कहा- लता मंगेशकर को बुलाना पड़ गया

भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत पालने वाले ‘बुद्धिजीवियों’ की उस लिस्ट में NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार भी शामिल हो गए हैं जो भारत के आंतरिक मामले में रिहाना जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के दखल देने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना, जिसका भारत के साथ कोई संबंध नहीं है, ने पिछले दिनों देश के आंतरिक मामले में नाक घुसेड़ने की कोशिश की थी। पिछले 3 महीनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे तथाकथित किसानों के पक्ष में उनके ट्वीट से यह पता चला कि उनका समर्थन एक समन्वित अभियान का हिस्सा था। जब भारत के खिलाफ चल रहे इस पूरे प्रोपेगेंडा का खुलासा हुआ तो देश के खेल जगत और मनोरंजन जगत के तमाम दिग्गजों ने खुलकर इसका विरोध किया। साथ ही लोगों से ऐसे विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए कहा। जिसके बाद ट्विटर पर #IndiaAgainstPropaganda #IndiaTogether नाम से हैशटैग ने काफी ट्रेंड किया।

इस मसले पर NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार, जिन्होंने अपने शानदार करियर में झूठ के अलावा कुछ नहीं बोला, ने सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में भारत सरकार के समर्थन में खड़े फिल्मी कलाकार और भारतीय क्रिकेटर्स पर भी उन्होंने निशाना साधा। जबकि भारतीय हस्तियों ने वही किया, जो इस स्थिति में प्रत्येक देशवासी को करना चाहिए।

रवीश कुमार का फेसबुक पोस्ट

रवीश कुमार ने लिखा, “एक पॉप स्टार के ट्वीट से क्यों हिल गई भारत सरकार। हमारे फ़िल्म कलाकारों को देखिए। जिन साठ प्रतिशत किसानों से देश बनता है। सीमाएँ सुरक्षित होती हैं। उन किसानों के लिए नहीं बोले। लेकिन रिहाना के ट्वीट से सारे के सारे सरकार को बचाने आ गए। लगता है इन लोगों ने दिल्ली की सीमाओं पर कीलें देखी नहीं हैं, हाइवे के बीच में खोदी जा रही खाई नहीं देखी हैं, वरना वे उसका भी समर्थन कर देते। किसान आंदोलन ने विदेशों में भारत सरकार की छवि खराब की है। आंतरिक मामला बता कर एकजुटता दिखाने का प्रयास घबराहट में लिया गया है। एक पॉप स्टार की इतनी ताकत कि पूरी भारत सरकार अकेली पड़ गई। गोदी मीडिया अकेला पड़ गया तो अक्षय कुमार से लेकर लता मंगेशकर को बुलाना पड़ गया।”

रवीश कुमार विदेशी हस्तियों की निंदा करने वाले भारतीय हस्तियों से नाराज थे

एक अन्य फेसबुक पोस्ट में, रवीश कुमार ने उन भारतीय हस्तियों पर कटाक्ष किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा की गई टिप्पणियों के आलोक में एकता का आह्वान किया और उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में मध्यस्थता करने की निंदा की। उन्होंने लिखा, “लोकतंत्र भीतर पहनने वाला बनियान नहीं है जो अंदर की बात है।” उन्होंने कहा कि इन भारतीय हस्तियों ने इतने लंबे समय तक एक शब्द नहीं बोला, लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने किसानों के साथ एकजुटता दिखाई, वे यह कहने लगे कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

NDTV anchor and veteran fake news peddler Ravish Kumar hails foreign interference in India's internal affairs
रवीश कुमार का फेसबुक पोस्ट

खैर, मोदी सरकार के लिए वामपंथी मीडिया और प्रोपेगेंडा फैलाने वालों की नफरत कोई नई बात नहीं है। NDTV के पत्रकार और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार, जो इस ब्रिगेड का हिस्सा हैं, ने लगातार केंद्र सरकार को एक क्रूर दमनकारी शासन के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है, भले ही इसके लिए उन्हें फेक न्यूज या प्रोपेगेंडा का सहारा ही क्यों न लेना पड़ा हो।

रवीश कुमार ने लाल किले पर हुई हिंसा पर की लीपापोती

हाल ही में, रवीश कुमार ने दंगाइयों द्वारा की गई बेलगाम हिंसा की भयावहता पर लीपापोती करने का प्रयास किया, जिन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगे का अपमान किया। देश के खिलाफ तथाकथित किसानों द्वारा हिंसक अपमान के बावजूद विवादास्पद न्यूज एंकर रवीश कुमार ने उनके हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को ‘शांतिपूर्ण आंदोलन’ का नाम देकर दंगाइयों के करतूत को ढँकने की कोशिश की। इतना ही नहीं, NDTV ने दंगाइयों को यह कहते हुए मानवतावादी दिखाने का भी प्रयास किया कि उन्होंने ट्रैक्टर रैली की हिंसक भीड़ में एंबुलेंस को बाहर जाने का रास्ता दिया।

दिल्ली हिंसा मामले में 3 और को SIT ने किया गिरफ्तार, बुराड़ी और लाल किला बवाल में शामिल थे तीनों

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने 3 और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित बुराड़ी और लाल किले पर हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल थे। बता दें, लाल किला हिंसा मामले की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच अब तक हिंसा में शामिल 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इससे पहले दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हिंसा में शामिल धर्मेंद्र सिंह हरमन को गिरफ्तार किया था। धर्मेंद्र सिंह हरमन ने ही लाल किले के गुंबद पर धार्मिक झंडा लहराने के लिए दंगाइयों को उकसाया था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआइटी द्वारा गिरफ्तार धर्मेन्द्र सिंह हरमन दिल्ली दंगे के दौरान शाहीनबाग में हुए उपद्रव में भी काफी सक्रिय था।

26 जनवरी को लाल किले में वीडियो फुटेज में देखे गए हरमन ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लाल किले पर झंडे को फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का लाइव स्ट्रीम किया था। पुलिस ने कहा कि हरमन सिंघु सीमा पर पिछले दो महीनों से किसानों के आंदोलन में जा रहा था।

दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने वीडियो फुटेज प्राप्त करने के बाद हरमन को गिरफ्तार किया था, जहाँ उसे एक कार के ऊपर बैठे देखा जा सकता है और भीड़ को लाल किले पर सिख झंडा फहराने के लिए उकसा रहा है। एक अन्य वीडियो फुटेज में, हरमन को गणतंत्र दिवस के दंगों में भाग लेते हुए भी देखा गया था, जहाँ दंगाइयों ने उपद्रव किया था।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस लाल किले और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में उत्पात मचाने वालों दंगाइयों की कुंडली खंगालने में जुटी है। 26 जनवरी को भड़की हिंसा में सैकड़ों दंगाइयों ने दिल्ली में प्रवेश किया। उन दंगाइयों में से कई ट्रैक्टर चलाकर लाल किले पर पहुँचे और लाल किले के गुंबदों पर धार्मिक ध्वज फहराया। इन तथाकथित किसानों ने क्रूरता से पुलिस अधिकारियों पर लाठियों, लोहे की छड़ों, ईंटों और पत्थरों से हमला किया था, जिससे लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

एसआईटी इन दंगाइयों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जोर-शोर से कर रही है, और उन्हें दबोचने के लिए मोबाइल का डेटा छान रही है। इसी क्रम में, 3 फरवरी को, SIT ने हिंसा में शामिल लगभग 20 दंगाइयों की तस्वीरें जारी कीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस की हिंसा से संबंधित अब तक जनता से 1,700 से अधिक वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। दिल्ली पुलिस ने अब दंगाइयों को पकड़ने के लिए संबंधित सामग्री का विश्लेषण करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली है।

दिल्ली पुलिस ने अभिनेता-कार्यकर्ता और खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू के ठिकाने की सूचना देने के लिए 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है, जो गणतंत्र दिवस के दंगों का मुख्य आरोपित भी है।

भारत विरोध में बौराई अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भतीजी मीना हैरिस: प्रोपेगेंडा, प्रपंच और अवसरवाद की इंटरनेशनल फेस

ग्रेटा थनबर्ग ने पिछले दिनों गलती से खालिस्तानियों का ‘टूलकिट’ डॉक्यूमेंट लीक कर दिया था। इससे उस वैश्विक षड्यंत्र की पोल खुल गई, जिसका मकसद भारत विरोधी एजेंडे का प्रचार और किसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी जैसी हिंसा को हवा देना था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने भी ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में कई ट्वीट किए हैं। 

मीना हैरिस के साथ-साथ पूर्व ‘पोर्नस्टार’ मिया खलीफा और जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता कही जाने वाली ग्रेटा थनबर्ग और गायिका रिहाना भी इस प्रपंच में शामिल थीं। जब से भारत सरकार ने साजिश के मूर्त रूप लेने से पहले ही हस्तक्षेप कर करारा जवाब दिया है, तब से मीना हैरिस बौखला सी गई हैं। मीना हैरिस इस बात से नाराज हैं कि भारत में उनके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन क्यों हो रहा है। उनके पोस्टर्स क्यों जलाए जा रहे हैं? 

मीना हैरिस और उनके गुट के लोग अभी भी भारत में हिंसात्मक विद्रोह का समर्थन कर रहे हैं और देश को अस्थिर बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। अपने दोहरे रवैये का प्रदर्शन करते हुए हैरिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को विचित्र और भारत के लोगों को कट्टर करार दिया। बनावटी डर जाहिर करते हुए हैरिस ने कहा कि जो लोग उनका पुतला जला सकते हैं, ऐसे ‘कट्टरपंथी’ उनके साथ भारत में क्या करेंगे ये सोचा जा सकता है।  

मीना हैरिस को अपने खिलाफ किया जाने वाला शांतिपूर्ण विरोध ‘कट्टरपंथी’ लगता है। लेकिन यही मीना हैरिस 26 जनवरी को दिल्ली में खेले गए हिंसा के नंगे खेल का समर्थन करती हैं, जिसमें खालिस्तानियों ने 400 पुलिसकर्मियों पर हमला करके उन्हें घायल कर दिया था। इस दौरान दंगाइयों ने तलवार, चाक़ू, पत्थर और डंडों का इस्तेमाल भी किया था और लाल किले पर धार्मिक झंडा भी लहराया था।   

भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट

इसके पहले मीना हैरिस सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाती हुई नज़र आई थीं, जिसमें दावा किया गया था कि 23 साल की लेबर राइट ‘एक्टिविस्ट’ नवदीप कौर को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में उन पर अत्याचार किए गए और उनका ‘यौन शोषण’ हुआ।

मीना हैरिस ने नवदीप कौर की बहन द्वारा वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द क्विंट’ पर किए गए दावे को आगे बढ़ाया था। कौर की बहन ने ‘द क्विंट’ से बात करते हुए बताया था कि उसे पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा और उसके गुप्तांगों पर भी चोट के निशान हैं। हालाँकि, हरियाणा पुलिस ने इन सभी दावों को निराधार बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। 

नवदीप कौर मजदूर अधिकार संगठन यूनियन से जुड़ी हुई हैं जो कि किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 12 जनवरी को हरियाणा पुलिस ने उन्हें सिंघु बॉर्डर स्थित प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार किया था। बाद में अदालत ने 2 फरवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके तुरंत बाद मीना हैरिस ने भी क्विंट द्वारा फैलाया गया प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाने में देरी नहीं की। उन्होंने पुलिस का पक्ष समझना भी ज़रूरी नहीं समझा।

दिलचस्प बात ये है कि कैपिटल हिल में हुई हिंसा के बाद मीना हैरिस और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने पूरी मज़बूती के साथ माँग उठाई थी कि हिंसा को अंजाम देने वालों को जेल भेज देना चाहिए। जब वैसी ही घटना भारत में हुई तब उन्होंने यह समझने का प्रयास नहीं किया कि पुलिस का घटना पर क्या कहना है। इस हरकत के ज़रिए मीना हैरिस ने भारत की न्याय व्यवस्था को नीचा दिखाने का प्रयास किया। 

मीना हैरिस यहीं रुकी नहीं! अपना मिथ्या प्रचार जारी रखते हुए कमला हैरिस की भतीजी ने एक और झूठी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारतीय मीडिया ने उनके खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन का महिमामंडन किया है। हैरिस के मुताबिक़, मीडिया ने एक ‘किसान आंदोलन’ समर्थक महिला के पोस्टर जलाने वालों को बहादुर बना कर प्रदर्शित किया। 

मीना हैरिस का ट्वीट

एक भी मीडिया समूह ने मीना हैरिस का विरोध करने वाले राष्ट्रवादियों के लिए इस तरह का शीर्षक प्रकाशित नहीं किया है, बल्कि वामपंथी मीडिया समूह उन राष्ट्रवादियों के दुष्प्रचार में खुल कर सामने आए जो देशहित के लिए खड़े हुए थे। वामपंथी मीडिया समूह विदेशी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने में ही व्यस्त हैं, जिससे भारतीयों की छवि को ही नुकसान हो रहा है। 

मीना हैरिस ने ट्वीट में लिखा, “बात सिर्फ कृषि कानूनों की नहीं है। ये एक मुखर अल्पसंख्यक समुदाय की प्रताड़ना से जुड़ा मुद्दा है। ये पुलिस की हिंसा, कट्टर व हिंसक राष्ट्रवाद का मुद्दा है। ये मजदूरों के हितों पर हमला का मामला है। ये वैश्विक दादागिरी है। आप इन्हें आंतरिक मुद्दे बना कर मुझे दखल देने से न रोकें। ये हमारे मामले हैं।” 

भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट

एक ऐसी अवसरवादी जिसे कृषि क़ानूनों के बारे में कुछ नहीं पता 

मीना हैरिस को भले भारत सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों के बारे में बुनियादी जानकारी या समझ नहीं हो, इसके बावजूद वह वैश्विक प्रोपेगेंडा प्रचार का हिस्सा बनीं। 

अन्य अंतरराष्ट्रीय चेहरों की तरह मीना हैरिस ने भ्रम फैलाते हुए दावा किया कि दिल्ली में जिस तरह ‘किसानों के साथ अर्धसैनिक बलों ने हिंसा की’, उसकी वजह से उनमें बहुत ज़्यादा गुस्सा है। जबकि आंदोलन की आड़ लेकर हुई अराजकता में साफ़ देखा गया था कि आखिर कैसे दंगाई राजधानी की सड़कों पर उतरे और उन्होंने 400 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। 

भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट

कमला हैरिस के साथ अपने रिश्तों को लेकर अक्सर दिखावा करने वाली मीना हैरिस ने कट्टरपंथी इस्लामियों और भारत विरोधी तत्वों की मदद से भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने का प्रयास करने में लगी हुई हैं। मीना हैरिस की ट्विटर टाइमलाइन ‘किसान आंदोलन’ पर किए गए ट्वीट से भरी पड़ी है जिसके ज़रिए उन्होंने राजधानी दिल्ली में उपद्रव करने वालों का पक्ष लेने का भरपूर प्रयास किया है। 

भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट

कमला हैरिस के सहारे अपने हित साधने वाली मीना हैरिस 

36 वर्षीय मीना हैरिस ने स्टैनफ़ोर्ड और हार्वर्ड (Stanford and Harvard) से वकालत की पढ़ाई की है। इन्हें अमेरिका में पहचान तब मिली जब कमला हैरिस ने कुछ साल पहले उप राष्ट्रपति चुनाव का हिस्सा बनने का फैसला लिया। बीते कुछ सालों में मीना हैरिस पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल करके अपना हित साधने का प्रयास किया है। 

इसके अलावा मीना हैरिस ने दो किताबें भी लिखी हैं, ‘एम्बिशीयस गर्ल (Ambitious Girl)’ और ‘कमला एंड मायाज़ बिग आइडिया (Kamala and Maya’s Big Idea)’। मीना ने अपनी किताबें बेचने के लिए भी कमला हैरिस के नाम का इस्तेमाल किया जो बाद में बेस्टसेलर भी बनी। नवंबर 2020 में हुए चुनाव के बाद हैरिस ने कपड़े की कंपनी और एक प्रोडक्शन कंपनी भी शुरू की। 

‘ताड़ी निकालने वाले कर रहे हेलीकॉप्टर से यात्रा’: कॉन्ग्रेस नेता के CM विजयन पर जातिवादी टिप्पणी से केरल में बवाल

कॉन्ग्रेस सांसद के.सुधाकरन ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मंगलवार (2 फरवरी, 2020) को केरल के मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पिनराई विजयन के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी की। जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।

कॉन्ग्रेस नेता सुधाकरन ने कन्नूर में एक राजनीतिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजयन के हेलीकॉप्टर यात्रा पर कटाक्ष किया था। उन्होंने केरल के सीएम को ताड़ी समुदाय के लोगों से जोड़ते हुए कहा था कि विजयन इतिहास में मजदूर वर्ग के लोगों के ऐसे नेता के रूप में जाने जाएँगे, जिन्होंने एक शानदार जीवन का सुख उठाया है। कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को तय करना है कि यह सम्मान की बात है या अपमान की।

के. सुधाकरन ने कहा, “पिनराई का परिवार क्या है? चेठुकरूदे कुडुम्बम् (Chethukarude kudumbam)। पिनाराई विजयन, ताड़ी-निकालने वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले मजदूर वर्ग में क्रांति भरकर और लाल झंडे को पकड़े हुए आगे बढ़ने वाले, अब वह कहाँ हैं? ताड़ी बनाने वाले परिवार से उठने वाले एक मुख्यमंत्री को यात्रा करने के लिए एक हेलीकॉप्टर की आवश्यकता होती है। वह ऐसा करने वाले केरल के पहले सीएम होंगे।”

गौरतलब है कि पिनाराई विजयन के खिलाफ सुधाकरन द्वारा दिया गया बयान एक जातिवादी टिप्पणी थी। बता दें केरल के सीएम थिया या एझावा (Thiyya or Ezhava) समुदाय के हैं, जिन लोगों को कभी समान अधिकारों से वंचित किया गया था और जिन्होंने परंपरागत रूप से ताड़ी निकालने का काम किया था। भारत सरकार द्वारा ऐसे समुदाय के सदस्यों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि सुधाकरन ग्रामीण विकास और अन्य पिछड़े वर्ग के कल्याण पर संसदीय स्थायी समितियों के सदस्य भी हैं। जिसके चलते उनके जातिसूचक टिप्पणी के लिए उन्हें हर जगह से लताड़ा गया। इसके अलावा लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए यह भी कहा कि वह ताड़ी निकालने वाले लोगों का सहारा लिए बिना केरल के सीएम की शानदार जीवनशैली के बारे में सोच सकते थे।

वहीं उनकी टिप्पणी पर माकपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस नेता का उद्देश्य एक वर्ग के लोगों को नीचा दिखा कर शर्मसार करना था, जिसके चलते वह किसी भी तरह एक सार्वजनिक पद को धारण करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं बढ़ते विवाद को देखते हुए सुधाकरन ने अपनी टिप्पणी पर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा, उनका बयान विजयन की जाति पर लक्षित नहीं किया गया था, बल्कि इसका उद्देश्य उनकी वर्तमान ‘भव्य जीवन शैली’ को इंगित करना था।

बता दें, रमेश चेन्नीथला की अगुवाई वाली ‘‘ऐश्वर्य यात्रा’’ के दौरान कॉन्ग्रेस नेता की ओर से की गई जातिगत टिप्पणी ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। कॉन्ग्रेस विधायक और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता चेन्नीथला ने सुधाकरन की आलोचना की और उनसे व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेज करने को कहा।

वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य विधायक शनीमोल उस्मान ने सुधाकरन द्वारा दी गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा। कॉन्ग्रेस पार्टी मामले को शांत करने की पुरजोर कोशिश में लगी है।

हालाँकि, बाद में चेन्नीथला को अहसास हुआ कि सुधाकरन ने किसी तरह की अभद्र टिप्पणी नहीं की है। इसी तरह अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने भी सुधाकरण को अपना समर्थन दिया है।

हेलीकॉप्टर विवाद के पीछे की कहानी

सुधाकरन के हेलीकॉप्टर टिप्पणी का अंदाजा इस बात से लगाया गया था कि पिनाराई विजयन ने दिसंबर 2017 में केरल के थ्रिशूर (Thrissur)  में सीपीआई (एम) पार्टी की बैठक में भाग लेने के लिए एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया था। केरल आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा पारित एक आदेश में, सरकार ने साइक्लोन ओखी के लिए राज्य राहत कोष का उपयोग करते हुए 8 लाख रुपए, हेलीकॉप्टर से जाने के लिए भुगतान करने की माँग की थी।

गौरतलब है कि इस मामले पर काफी बवाल हुआ था। जिसके बाद सरकार ने आदेश वापस ले लिया और केरल के सीएम ने आश्वासन दिया कि बकाया भुगतान लोक प्रशासन खाते से किया जाएगा। वहीं पिछले साल हेलीकॉप्टर विवाद एक बार फिर से सामने आया था, जिसमें केरल सरकार ने एक हेलीकॉप्टर की खरीद की थी। हालाँकि, बाद में पिनारयी विजयन ने दावा किया कि आपदा प्रबंधन कार्य के लिए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता थी।

‘अन्य धर्मों पर अपमानजनक टिप्पणी का अर्थ है घृणा के बीज बोना’: जहर उगलने वाले ईसाई उपदेशक को माफी के बाद राहत

मद्रास हाई कोर्ट ने ईसाई उपदेशक मोहन सी लाजारूस को कड़ी फटकार लगाते हुए उसके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। जस्टिस आनंद वेंकटेश की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी अन्य धर्म के बारे में अपमानजनक बयान देने का अर्थ है घृणा के बीज बोना। अदालत ने कहा कि एक बहुलतावादी समाज में दूसरे पंथों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान होना चाहिए।

लाजरूस ‘जीसस रेडीमस मिनिस्ट्री’ नामक संस्था का संस्थापक है। उसने अपने बयान के लिए माफी माँगी, जिसके बाद उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किया गया। इस दौरान उसे कोर्ट ने उससे कहा कि अपने मजहब के लिए उपदेश देने का अधिकार है, लेकिन कुछ सीमाएँ भी हैं, ताकि दूसरों का अपमान न हो। कोर्ट ने ईसाई उपदेशक के बयान की भी निंदा की। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:

“किसी धर्म/पंथ के खिलाफ ज़हर उगलना, या फिर किसी एक संप्रदाय के लोगों के मन में दूसरे संप्रदाय के प्रति घृणा फैलाना- ये सब धर्म के उद्देश्य का ही उल्लंघन करते हैं। धर्म को एक ऐसा माध्यम बनाया गया है, जिसके अंतर्गत मनुष्य सत्य के उच्च-स्तर की तरफ बढ़ सके, विकसित हो सके। याचिकाकर्ता दुनिया भर में अपने अनुयायी होने का दावा करता है। ऐसे लाखों लोग हैं, जो उसका अनुसरण करते हुए उसकी बातों को आँख बंद कर के मानते होंगे।”

अदालत ने कहा कि अगर वो कोई ऐसा बयान देता है कि जिसमें किसी दूसरे संप्रदाय के प्रति अपमान का इरादा हो, तो इससे समाज में घृणा फैलेगी। अदालत ने ये भी याद दिलाया कि हर धर्म के प्रभावशाली लोगों के पास क्षमता होती है कि वो व्यक्ति के आंतरिक विकास को प्रभावित कर सकें। कोर्ट ने कहा कि आध्यात्मिकता ये दिखाने की प्रतिस्पर्धा नहीं है कि हमारा धर्म तुम्हारे से श्रेष्ठ है।

इस दौरान जस्टिस आनंद वेंकटेश ने जीसस क्राइस्ट के शब्दों को भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने किसी अन्य संप्रदाय का अपमान न करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि लोग कुछ मजहबी विचारों के प्रति अंधविश्वास पाल लेते हैं और दूसरों को नीचा दिखाते हैं। उन्होंने भारत में धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित करते हुए सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि समाज में कट्टरवादियों और गलतफहमियों का प्रभाव बढ़ रहा है।

मोहन सी लाजारूस ने हिन्दू धर्म और मूर्तिपूजन के खिलाफ विवादित बयान दिया था। ये मामला 2016 में दिए गए उसके बयान से जुड़ा हुआ था। लाजारूस सुनामी को मूर्तिपूजकों के खिलाफ ईश्वर का गुस्सा मानता है। वह भारत में गरीबी के लिए भी मूर्तिपूजा को ही जिम्मेदार ठहराता रहा है। एक हिन्दू परिवार में जन्म लेने वाले मोहन सी लाजारूस का दावा है कि दिल की बीमारी ठीक होने के बाद वो ईसाई बना।

PM मोदी सबसे लोकप्रिय और दूरदर्शी नेताः गुजरात हाई कोर्ट की डायमंड जुबली समारोह में बोले जस्टिस शाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात हाईकोर्ट के 61 साल पूरे होने के मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डायमंड जुबली समारोह को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात हाईकोर्ट के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमआर शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘हमारे सबसे लोकप्रिय, प्यारे, जीवंत और दूरदर्शी नेता’ बताया। उन्होंने कहा, “मुझे गुजरात हाईकोर्ट के 60 साल पूरे होने पर, स्मारक डाक टिकट के विमोचन के इस महत्वपूर्ण समारोह में भाग लेने पर गर्व और खुशी महसूस हो रही है और वह भी हमारे सबसे लोकप्रिय, प्यारे, जीवंत और दूरदर्शी नेता, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा।” जस्टिस शाह ने अपने भाषण में गुजरात उच्च न्यायालय को अपनी ‘कर्मभूमि’ कहा और शक्तियों के पृथक्करण की संवैधानिक अवधारणा के महत्व के बारे में बात की।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट ने सत्य और न्याय के लिए जिस कर्तव्य और निष्ठा से काम किया है, अपने संवैधानिक कर्तव्यों के लिए जो तत्परता दिखाई है उसने भारतीय न्याय व्यवस्था और भारत के लोकतंत्र दोनों को ही मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को दी गई जिम्मेदारी, हमारे संविधान के लिए प्राणवायु की तरह है। हमारी न्यायपालिका ने संविधान की प्राणवायु की सुरक्षा का दायित्व पूरी दृढ़ता से निभाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति भरोसे ने सामान्य नागरिक के मन में एक आत्मविश्वास जगाया है। सच्चाई के लिए खड़े होने की उसे ताकत दी है। प्राचीन ग्रंथों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में रूल ऑफ लॉ, सदियों से सभ्यता और सामाजिक ताने-बाने का आधार रहा है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है- ‘न्यायमूलं सुराज्यं स्यात्’ यानी, सुराज्य की जड़ ही न्याय में है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें अपनी अदालतों पर बहुत गर्व है, खासकर सुप्रीम कोर्ट पर है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी दुनिया में सबसे अधिक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की है। इसके अलावा हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने भी कोरोना काल में अच्छा कार्य किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट ने जिस सत्य निष्ठा से काम किया उससे भारतीय न्याय व्यवस्थाय और लोकतंत्र दोनों को ही मजबूती मिली है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में सरकार और न्यायपालिका दोनों का ही ये कर्तव्य है कि कि हम दुनिया की सर्वोत्तम न्याय व्यवस्था कायम करें। उन्होंने कहा कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जहाँ हर व्यक्ति को न्याय की गारंटी हो और अंतिम व्यक्ति को न्याय मिले।

बता दें कि गुजरात हाई कोर्ट की स्थापना 1 मई 1960 में हुई थी। उस वक्त गुजरात बंबई राज्य से अलग होकर एक नया राज्य बना था। गुजरात हाईकोर्ट पहले नारौल में था, उसके बाद इसे अहमदाबाद के इनकम टैक्स सर्किल में शिफ्ट किया गया था। अब साल 1998 से गुजरात हाईकोर्ट अहमदाबाद के सोला कैंपस से चल रहा है।

पाकिस्तान में PUBG पर ब्लॉक करने की सजा: 15 साल के लड़के की रेप के बाद हत्या, 4 TikTok यूजर्स का भी मर्डर

पाकिस्तान में 15 साल के लड़के से रेप और हत्या के आरोप में चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। मामला लाहौर के रायविंद का है। मीडिया रिपोर्टों के मुख्य आरोपित के एक दोस्त को नाबालिग ने PUBG पर ब्लॉक कर दिया था। इसी खुन्नस में इस घटना को अंजाम दिया गया।

रायविंद पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने नाबालिग को 13 जनवरी को अगवा कर लिया था। उसे लेकर आरोपित नानकाना साहिब गए, जहाँ उसके साथ रेप की वारदात हुई। बाद में शेखपुरा से लाश बरामद हुई। आरोपितों ने बताया है कि पीड़ित ने उनके एक दोस्त को PUBG पर ब्लॉक कर दिया था। आरोपितों का DNA सैम्पल जाँच के लिए भेज दिया गया है।

वहीं एक अन्य घटना में कराची में 4 टिकटॉकर्स की हत्या कर दी गई। यह घटना मंगलवार (फरवरी 2, 2021) को गार्डन एरिया के अंकलेसरिया इलाके में हुई। मृतकों में 3 युवक और एक युवती थी। ये सभी TikTok के अलावा कई अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर भी सक्रिय थे।

मुस्कान ने आमिर को सोमवार की रात मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद दोनों अपने दोस्तों सज्जाद और रेहान के साथ कार से ही शहर में घूमने लगे। मुस्कान ने इस दौरान आमिर के साथ कई TikTok वीडियोज भी शूट किए। लेकिन तड़के सुबह 4:48 के करीब चारों की हत्या कर दी गई। हमलावरों का अब तक पता नहीं चल सका है। जहाँ मुस्कान को कार के भीतर ही मार डाला गया, वहीं अन्य तीनों की हत्या गाड़ी के बाहर हुई। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

कार के पास 9mm पिस्टल्स के खाली शेल्स भी मिले। मृतकों के परिजनों ने थाने में FIR दर्ज कराई है। रेहान और सज्जाद ने शहर के इत्तिहाद टाउन क्षेत्र में एरियल फायरिंग करते हुए TikTok वीडियो भी शूट किया था। पुलिस ने इस वीडियो के आधार पर संज्ञान लेकर FIR भी दर्ज की थी। परिजनों ने आशंका जताई है कि किसी व्यक्तिगत विवाद के आधार पर ये विवाद हुआ हो सकता है, जिसके कारण इनकी मौत हो गई।

बता दें कि पाकिस्तान नेPUBG और TikTok पर प्रतिबंध भी लगा चुका है। इस्लामी एक्टिविस्ट्स ने इन एप्स के खिलाफ अभियान चलाया था। PUBG को इस्लाम विरोधी बताते हुए प्रतिबंध लगाया गया था। हालाँकि कुछ समय बाद बैन हटा लिया गया था।

पाकिस्तान ने भले ही PUBG को फिर से चालू कर दिया हो, लेकिन भारत में यह अभी भी प्रतिबंधित है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने जून 2020 में TikTok समेत 59 चीनी एप्स को नोटिस भेज कर उन्हें भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया था। इन सभी कंपनियों को प्रश्नावली भी सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था।

भारतीय होने पर गर्व, भारत के विकास-समृद्धि में योगदान कर भाग्यशाली, बंद करें अवॉर्ड दिलाने का कैंपेन: रतन टाटा

देश के मशहूर उद्योगपति और टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा के लिए ट्विटर पर चले ‘भारत रत्न फॉर रत्न टाटा’ अभियान को लेकर लगातार ट्वीट किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग रतन टाटा के समर्थन में ट्वीट कर उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की माँग कर रहे हैं। अब इस अभियान को लेकर रतन टाटा ने ट्वीट करते हुए प्रतिक्रिया दी है। टाटा ने खुद ही ट्वीट कर इस तरह के अभियानों को बंद करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि वो भारतीय होने की बात से ही खुद को भाग्यशाली महसूस करते हैं।

 रतन टाटा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “सोशल मीडिया पर लोगों के एक तबके द्वारा एक अवॉर्ड को लेकर व्यक्त की गई भावनाओं की मैं सराहना करता हूँ, लेकिन मैं बेहद नम्रता के साथ अपील करता हूँ कि ऐसे अभियान बंद कर दिए जाएँ। मैं भारतीय होने और भारत के विकास व समृद्धि में योगदान कर सकने पर खुद को भाग्यशाली मानता हूँ।”

सोशल मीडिया पर रतन टाटा को भारत रत्न देने की उठ रही माँग पर टाटा ने जो प्रतिक्रिया दी है, उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। इतने बड़े उद्योगपति होने और देश की ग्रोथ में टाटा ग्रुप का बड़ा योगदान होने के बावजूद रतन टाटा ने संकेत दिया है कि उन्हें अपने कामों के बदले अवाॅर्ड पाने की कोई तमन्ना नहीं है। उन्हें भारतीय होने और भारत की समृद्धि में भागीदार होने पर गर्व है।

इस ट्वीट के बाद हर कोई रतन टाटा की नम्रता की सराहना कर रहा है। नमक से लेकर डिफेंस व्हीकल तक बनाकर देश को आगे ले जाने वाले टाटा ग्रुप के दिग्गज रतन टाटा की इस प्रतिक्रिया पर उनके फैन्स और फाॅलोअर ने उन्हें ट्रू लेजेंड और ट्रू नेशनलिस्ट करार दिया है। कई लोग उन्हें रियल रोल माॅडल और रियल हीरो कह रहे हैं।

रतन टाटा को भारत रत्न दिए जाने की माँग तब शुरू हुई, जब मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विवेक बिंद्रा ने रतन टाटा को भारत रत्न दिए जाने की माँग से संबंधित ट्वीट किया और लोगों से भी इस मुहिम से जुड़ने की अपील की। बिंद्रा ने इस ट्वीट में रतन टाटा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की माँग करते हुए अपने ट्वीट को ज्यादा से ज्यादा रिट्वीट करने की माँग की थी। उन्होंने ट्विटर पर  #BharatRatnaForRatanTata हैशटैग ट्रेंड कराया था। अपने ट्वीट में उन्होंने पीएमओ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति भवन को भी टैग किया था।

ट्विटर पर एक फाॅलोअर ने लिखा कि रतन टाटा की देश के लिए निष्ठा पर गर्व है। वह भारत के रियल हीरो हैं और वास्तव में भारत रत्न के हकदार हैं।

बता दें कि टाटा ग्रुप कंज्यूमर एंड रिटेल, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलाॅजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टील, ऑटोमोटिव, फाइनेंशियल सर्विसेज, एयरोस्पेस व डिफेंस, टूरिज्म एंड ट्रैवल, टेलिकाॅम एंड मीडिया, ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स सेक्टर्स में परिचालन करता है। ग्रुप की आईटी कंपनी टीसीएस दुनिया की तीसरी सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी है।

रिहाना की ‘फेंटी ब्यूटी’ में झारखंड का अभ्रक, बाल मजदूरी को लेकर NCPCR से शिकायत

रिहाना दुनिया की सबसे अमीर गायिका के रूप में जानी जाती हैं। संपत्ति के मामले में वे मडोना और बेयोंसे से भी आगे हैं। 4400 करोड़ रुपए की संपत्ति की मालकिन रिहाना ‘फेंटी ब्यूटी (Fenty Beauty)’ नामक एक कंपनी भी चलाती हैं। उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा इसी से आता है। इस कंपनी के खिलाफ झारखंड से अभ्रक की खुदाई और बाल मजदूरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है।

रिहाना ने फ्रांस की कंपनी ‘LVMH Moet Hennessy Louis Vuitton’ के साथ पार्टनरशिप कर रखी है, जिसे अरबपति बर्नार्ड रनॉल्ट द्वारा संचालित किया जाता है। अब कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि ये कंपनी बाल मजदूरों से काम करवाती है और झारखंड से धातु की खुदाई करने वाली इस कंपनी के पास इसका क्लियरेंस भी नहीं है।

हाल ही में खालिस्तानियों के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए रिहाना ने ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में ट्वीट किया था। इसके बाद से वह विवादों में हैं। भारत में रिहाना के कारोबार के विस्तार पर भी विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में कंपनी ने एक बड़ा निवेश भी जुटाया है।

आरोप लगा है कि कैलिफोर्निया के कानून के हिसाब से बाल मजदूरों के मामले में कुछ नियम-कानून तय हैं, जिसका ये कंपनी पालन नहीं करती। शिकायतकर्ता विनय जोशी द्वारा शेयर की गई IANS की खबर के सूत्रों का कहना है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरों के सम्बन्ध में ज़रूरी ऑडिट भी नहीं कराया जाता, जिससे आशंका है कि यह कंपनी बाल मजदूर करवाती है। आरोप है कि झारखंड में जहाँ से कंपनी अभ्रक (Mica) की खुदाई करती है, वहाँ कई बच्चों को काम पर लगाया जाता है।

जहाँ एक तरफ किसानों की तथाकथित समस्या पर रिहाना ने ट्वीट किया, इस मामले में उनका अब तक कोई बयान नहीं आया है। NGO ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO)’ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। संस्था के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने शिकायत मिलने की पुष्टि भी की है।

LRO ने दावा किया कि रिहाना की कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स कंपनी ‘फेंटी ब्यूटी’ झारखंड के कोडरमा और गिरिडीह से अभ्रक (Mica) लेती है और उसके पास ‘सप्लाई चेन क्लियरेंस सर्टिफिकेट’ भी नहीं है, जो बाल मजदूरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाता है। LRO ने इस सम्बन्ध में जाँच की माँग की है। रेस्पोंसिबल माइका इनिशिएटिव (RPI) ने कहा है कि रिहाना को अभ्रक देने वाली सप्लाई चेन उनसे रजिस्टर्ड भी नहीं है।

बता दें कि ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से लीक किए गए टूलकिट डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि उनके और गायिका रिहाना के ट्वीट पूर्व नियोजित थे और वास्तविक समर्थन से उनका सरोकार नहीं था। शीट में बक़ायदा पूरा प्लान नजर आता है। इसमें बताया गया था कि ट्वीट करते हुए किसे टैग करना है और किसे लक्षित करना है। डॉक्यूमेंट के स्क्रीनशॉट में ग्रेटा और रिहाना के नामों को अलग से देखा जा सकता है।