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भारत के लिए खतरा है देशद्रोही योगेंद्र यादव: सोसायटी के लोगों ने किया बाहर निकालने के लिए प्रदर्शन

‘देशद्रोही’ योगेन्द्र यादव को उनकी सोसायटी से लोग बाहर निकालने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। इन लोगों ने संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरे योगेंद्र यादव पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया है।

गौतम अग्रवाल ने इसकी जानकारी देते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किसान यूनियन नेता योगेंद्र यादव के निवास के बाहर आईपी एक्सटेंशन दिल्ली के निवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन। लोगों ने अपनी सोसायटी की प्रबंध समिति से कहा है कि वह अपना फ्लैट खाली करवा लें क्योंकि वह भारत के लिए खतरा है।”

प्रदर्शन कर रहे सोसायटी के लोग ‘योगेंद्र यादव मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए उसकी तस्वीरों को जला भी रहे हैं और नारे लगाते हुए उन्हें पैरों से कुचल रहे हैं।

दिल्ली में हुई हिंसा के बाद बृहस्पतिवार (जनवरी 28, 2021) को ही लोगों के विरोध से डरकर योगेंद्र यादव अपने फेसबुक पेज से लाइव कर वीडियो में रोते हुए ये कहते सुने गए थे कि लोग उनके घर पर हमला करने वाले हैं। इस वीडियो में यादव ने कहा कि जो लोग मुझे राष्ट्रवाद पर लेक्चर दे रहे हैं, उन्हें मेरे परिवार की विरासत के बारे में कोई जानकारी नहीं।

उल्लेखनीय है कि किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने योगेंद्र यादव और बलबीर सिंह राजेवाल सहित लगभग 20 किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने उन्हें तीन दिनों के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि इन किसान नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं क्योंकि उन्होंने मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया था।

गणतंत्र दिवस को ट्रैक्टर परेड हिंसक हो पड़ी और किसानों ने दिल्ली पुलिस पर हमला बोलते हुए वाहनों को पलट दिया। यही नहीं, उपद्रवियों ने लाल किले की प्राचीर पर एक धार्मिक झंडा भी फहरा दिया। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कहा कि हिंसा के संबंध में 25 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिसमें 394 पुलिसकर्मी घायल हुए और 30 पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए।

किसान नेताओं के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी: टिकैत भाई ने कहा- UP पुलिस की मार खाने से बढ़िया है कि निकल लेते हैं

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रशासन द्वारा किसानों को रात तक प्रदर्शन साइट खाली करने के आदेश जारी करने के बाद बृहस्पतिवार (जनवरी 28, 2021) शाम से ही दिल्ली की गाजीपुर सीमा पर तनाव बढ़ गया।

शाम होते, जैसे ही दंगा-रोधी दस्ता साइट पर पहुँचने लगा, प्रदर्शनकारी और किसान नेता आपस में बँटने लगे। आंदोलन के नेता विरोध प्रदर्शन के भविष्य की कार्रवाई पर अलग-अलग होते नजर आ रहे हैं। जहाँ एक ओर बीकेयू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भावुक होकर घोषणा की कि गाजीपुर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, वहीं उनके भाई बीकेयू प्रमुख नरेश टिकैत ने कहा कि इस धरना प्रदर्शन को समाप्त कर देना चाहिए।

राकेश टिकैत ने दिल्ली से सटे गाजीपुर में यूपी गेट पर संवाददाताओं से कहा कि वह कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध छोड़ने के बजाय आत्महत्या कर लेंगे। इसके विपरीत, उनके भाई नरेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर में एक सभा में समर्थकों से कहा, “निराश मत हो। आज गाजीपुर में विरोध भी खत्म हो जाएगा। पुलिस से पिटने से बढ़िया इसे खाली करना है।”

गाजियाबाद प्रशासन द्वारा यूपी गेट पर प्रदर्शनकारियों को आधी रात के बाद साइट खाली करने का अल्टीमेटम देने के बाद नरेश टिकैत का यह बयान आया।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस से पहले तक सबके ‘बक्कल उतारने’ की धमकी देने वाले टिकैत ने रोते हुए मीडिया के सामने आत्महत्या करने की बात कही है। साथ ही धरने पर जमा लोगों को दोबारा भड़काऊ स्पीच देकर भी उकसाया।

दिल्ली पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली को लेकर पुलिस के साथ हुए समझौते को तोड़ने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए? इसके अलावा, उनके टेंट पर नोटिस भी चस्पा किया गया है। 

किसानों नेताओं के खिलाफ ‘लुक आउट’ नोटिस जारी

दूसरी ओर, गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के संबंध में दर्ज FIR में नामजद किसान नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस ‘लुक आउट’ नोटिस जारी करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि इसके साथ ही प्राथमिकी में नामजद किसान नेताओं से उनका पासपोर्ट जमा कराने के लिए भी कहा जाएगा।

26 जनवरी के दिन हुई हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सिलसिलेवार बैठकों के बाद यह निर्णय लिए गए। अधिकारी ने कहा कि शाह लगातार दिल्ली की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और उन्होंने बुधवार देर रात और बृहस्पतिवार सुबह भी बैठकें कीं।

उन्होंने कहा कि आरोपित किसान नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए गए हैं। यही नहीं, एक आरोपित को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए उसके विरुद्ध लुक आउट नोटिस जारी किया गया है।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ACP ललित मोहन नेगी करेंगे लाल किले पर हुई हिंसा की जाँच: देखें वायरल हुई सारी वीडियो और तस्वीरें

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले में हुई हिंसा और बर्बरता की घटना की जाँच के लिए कथिततौर पर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को यूएपीए का नया इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। बता दें, 26 जनवरी के दौरान हुए बवाल में शामिल लोगों के खिलाफ यूएपीए और देशद्रोह की कुछ धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

न्यूज़ एजेंसी ANI ने आज लाल किले के अंदर और बाहर की एक वीडियो साझा की है। इसमें आप दंगाइयों के आक्रामक रवैए को देख सकते हैं। वीडियो में सभी प्रदर्शनकारियों के हाथों में डंडे हैं। वहीं कई लोग घोड़े पर सवार देखे जा सकते हैं। कहीं दंगाई पुलिस की गाड़ियों को तोड़फोड़ रहे हैं तो कहीं आक्रामक तरीके से ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

याद दिला दें, लाल किले पर गणतंत्र दिवस के दिन किसान दंगाइयों ने खूब उत्पात मचाया था। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे का अपमान करते हुए वहाँ कथिततौर पर ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराया था। किले के अंदर काफी तोड़फोड़ और तबाही भी मचाई गई थी। धीरे-धीरे किले के अंदर हुए नुकसान की सारी तस्वीरें अब सामने आ रही हैं।

वायरल हो रही तस्वीर और वीडियो ने ट्रैक्टर रैली के दौरान तथाकथित किसानों के रूप में शामिल दंगाइयों की पूरी पोल पट्टी खोल दी है। सामने आई तस्वीरों में किले के अंदर चकनाचूर हुए शीशों, पलटे हुए काउंटर को साफ देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य चीजें भी तितर-बितर हो रखी हैं। इनके साथ लाल किले में पुलिसकर्मियों की टोपियाँ भी पड़ी हैं।

किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए हमले का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें देखा गया कि कैसे भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

एक वायरल वीडियो में यह भी देखा गया कि उपद्रवियों की भीड़ में से लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा लगाने के लिए खम्बे पर चढ़ा और भीड़ में से जब एक आदमी ने उसकी ओर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

एक अन्य वीडियो भी है जिसमें स्पष्टतौर पर फहराए गए ‘खालिस्तानी’ झंडे को देखा जा सकता हैं। वीडियो में तीन युवक लाल किले की प्राचीर पर चढ़े हुए है। वहीं एक युवक नीचे राष्ट्रीय तिरंगे को भी लेकर खड़ा है। ऊपर चढ़ा एक प्रदर्शकारी पहले निशान साहिब के एक झंडे को तिरंगे के पास लगाते हुए नारे लगाता है। उसके बाद वहाँ खड़ा दूसरा आंदोलनकारी खालिस्तानी तिरंगे को ऊपर उठाता है और सिखों के धार्मिक निशान साहिब के झंडे से ठीक ऊपर ‘खालिस्तानी’ झंडे को लहराते हुए दिखाई देता है।

इन सब के अलावा एक और वीडियो वायरल हुई थी जिसमें लाल किले के अंदर घुसे प्रदर्शनकारियों को किले की दीवार पर पेशाब करते हुए भी देखा गया।

मालूम हो कि किसान ट्रैक्टर रैली के बाद जहाँ लाल किला को काफी हानि पहुँची है, वहीं पूरे आयोजन का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 300 से अधिक पुलिसकर्मी इस हिंसा में घायल हुए थे।

गौरतलब है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को लाल किले पर हुई घटना की जाँच के लिए नियुक्त किए जाने की खबर आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर काफी हलचल दिखाई दे रही है। लोग तमाम तरीके के मीम्मस शेयर कर दंगाइयों और उनके सरगनाओं के मजे ले रहे हैं।

महिला सुरक्षा पर देखिए UP पुलिस का नया अंदाज, Video शेयर करके पूछा- ‘किरन की न का मतलब?’

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए यूपी पुलिस ने अब इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। बता दें, हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर अवेयर करने के लिए यूपी पुलिस ने लोकप्रिय विषयों का बहुत ही बेखूबी से उपयोग करते हुए उन्हें अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया, जिसका यूपी पुलिस को काफी अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है।

दरअसल, आज यूपी पुलिस ने महिलाओं की राय का सम्मान करने को लेकर जनता को जागरूक किया। पुलिस ने 90 के दशक की हिट फिल्म ‘डर’ के एक गाने का क्लिप ‘तू हाँ कर या न कर तू है मेरी किरन’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट करते हुए लोगों से पूछा, ‘किरण की ना का मतलब?’ इसके बाद इसी वीडियो में पिंक मूवी में अमिताभ बच्चन के फेमस डायलॉग का इस्तेमाल इस सवाल का जवाब समझाने के लिए किया, जहाँ बच्चन ने कहा है कि, “ना का मतलब ना होता है।”

इस संदेश के जरिए यूपी पुलिस ने कोशिश की, कि जब एक महिला किसी पुरुष की बातों को नहीं मानती है और उससे ना बोलकर अपना जवाब देती है तो उस आदमी को उसका पीछा करना बंद कर देना चाहिए। किसी महिला का जवाब ‘ना’ होंने के बाद भी उसे घूरते रहना सही नहीं है।

बता दें 1993 में आई फिल्म डर में शाहरुख खान, जूही चावला और सनी देओल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। जहाँ राहुल (शाहरुख) किरन (जूही), का पीछा यह जानने के बाद भी करता है कि उसकी शादी सुनील (सनी) के साथ हो चुकी है। आखिर में सुनील राहुल को जान से मार देता है। जो कि यह संदेश देता है कि प्यार की आड़ में लड़कियों को सताना और उन्हें परेशान करना जायज नहीं है।

बता दें कि कल यूपी पुलिस ने सड़क सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए फिल्म शोले की एक क्लिप का इस्तेमाल किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से सड़क सुरक्षा को लेकर एक इनोवेटिव वीडियो जारी किया, जिसमें शोले मूवी का मशहूर गाना ‘ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे’ की क्लिप का इस्तेमाल किया गया है।

ट्विटर पोस्ट पर #UPPKeSholay के साथ जय और वीरु की दोस्ती क्यों टूटी? लिखा गया है और एक वीडिया शेयर किया गया है। वीडियो के माध्यम से ये दिखाने की कोशिश की गई है कि बाइक पर स्टंट करना जानलेवा हो सकता है। न बचेगी जिंदगी, न बचेगी दोस्ती। इसमें साफ किया गया है कि गाड़ी चलाते समय स्टंट करना जुर्म है।

गौरतलब है इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने गब्बर का एक वीडियो शेयर करके लिखा था, “गब्बर को मिली किस बात की सजा?” इस सन्देश में फिल्म के खलनायक गब्बर सिंह को थूकते हुए दिखाया गया था और उसके बाद बताया गया कि उसे किस तरह से इसका अंजाम भुगतना पड़ा।

वीडियो के अंत में गब्बर सलाखों के पीछे दिखाया गया है और एक सन्देश दिया गया, “सार्वजानिक स्थानों पर थूकने से Covid-19 के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। यह एक दंडनीय अपराध है।” उत्तर प्रदेश पुलिस ने वीडियो में एक अंतिम संदेश देते हुए लिखा था, “सार्वजानिक स्थानों पर न थूकें। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ‘जान हित’ में जारी।

उल्लेखनीय है कि यह सब वीडियो अब लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रही हैं और इसे बड़े स्तर पर शेयर भी किया जा रहा है। यूपी पुलिस के नए अंदाज के लिए उन्हें सराहना भी मिल रही है।

Fake News फैलाने वाले पत्रकार भी यूपी पुलिस की रडार पर: राजदीप, थरूर समेत 11 पर देशद्रोह का मामला दर्ज

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में किसान प्रदर्शनकारियों के उत्पात के बाद केवल किसान नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई बल्कि कुछ पत्रकारों पर भी मुकदमे दर्ज हुए हैं। खबर है कि अफवाह फैलाने, हिंसा भड़काने के लिए कई पत्रकार पुलिस की रडार पर हैं। एबीपी पत्रकार विकास भदौरिया ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी है।

अंकित जैन नाम के सक्रिय ट्विटर हैंडल से भी इस संबंध में एक ट्वीट किया गया है। उन्होंने एक एफआईआर की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “फर्जी समाचार साझा करने के लिए महाराज जी के उत्तर प्रदेश में राजदीप, शशि थरूर और अन्य के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा हुआ है।”

अंकित ने ट्वीट में एफआईआर की कॉपी भी शेयर की है। इसमें फर्जी जानकारी साझा करने वालों में कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर का नाम है। इंडिया टुडे न्यूज एंकर राजदीप सरदेसाई का नाम है।

इसके अलावा नेशनल हेराल्ड की वरिष्ठ सम्पादकीय सलाहकार मृणाल पांडे, कौमी आवाज के जफर आगा, कारवा पत्रिका के मुख्य संपादक प्रकाशक परेशनाथ, कारवाँ पत्रिका के अनन्तनाथ व इसी पत्रिका के कार्यकारी संपादक विनोद और एक अज्ञात का नाम शामिल है। 

साझा किए गए फोटो के अनुसार, एफआईआर में आरोपित बनाए गए हस्तियों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295-ए, 298, 504, 506, 505 (2), 124-ए, 34, 120 बी और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत नोएडा सेक्टर 20 थाने में मामला दर्ज हुआ है। 

यहाँ मालूम हो कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में कई जगह पुलिस को नकारात्मक दिखाने के लिए फर्जी जानकारी फैलाई गई थी। इस कड़ी में राजदीप पर पहले ही उनका संस्थान इंडिया टुडे समूह उन्हें दो हफ्तों के लिए ऑफ एयर करके कार्रवाई कर चुका है। वहीं सरदेसाई भी नाराज होकर अपने चैनल को इस्तीफा दे चुके हैं।

राजदीप पर कार्रवाई से अत्यंत कष्ट में लिब्रांडू समुदाय, कहा- अपने सभी एंकरों पर एक्शन लोगे तो बहुत पैसा बचेगा

राजदीप सरदेसाई के ख़िलाफ़ इंडिया टुडे की कार्रवाई से लिबरल गिरोह बिलबिला उठा है। एक ओर जहाँ राजदीप ने स्वयं इस एक्शन से आहत होकर अपना इस्तीफा समूह को सौंप दिया है। वहीं उनकी पत्नी सागरिका घोष समेत कई कॉमरेड भी उनके समर्थन में उतरे हैं।

गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर पलटने से एक किसान प्रदर्शनकारी की मौत हुई और राजदीप ने बिन प्रमाणिकता जाँचे ये फैला दिया कि उस किसान की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। सागरिका ने अब अपने पति राजदीप का इसी एंगल पर बचाव करते हुए समझाया है कि कैसे डेवलवपिंग स्टोरी में सच्चाई हर घंटे बदलती है। 

उन्होंने लिखा, “तेजी से सामने आ रही डेवलपिंग स्टोरी में हर घंटे सच्चाई बदलती है। जानकारी आते ही कहानी बदल दी गई और उसे सही किया गया। दुखद यह है कि पत्रकार के पीछे पड़ने में हम वास्तविक मुद्दों और 24 साल के मृत किसान से ध्यान हटा लेते हैं। वाहक को मत गोली मारिए।”

सागरिका का यह ट्वीट दिलीप शेरीन के ट्वीट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने लिखा था, “राजदीप सरदेसाई को ऑफ एयर करना कुछ ज्यादा है… कल्पना करिए अगर इसे नियम बना दिया गया तो नग्र चैनल कैसे होंगे। एक गलती के बाद भी राजदीप एक ब्रेक डिजर्व करते हैं।”

इसी तरह निखिल वागले लिखते हैं, “अब इंडिया टुडे देखने का एक माह तक कोई मतलब नहीं है जब सबसे विश्वसनीय एंकर ही ऑफ एयर किया जा चुका हो। दर्शकों को भी ब्रेक लेना चाहिए।।”

ऑल्ट न्यूज संस्थापक प्रतीक सिन्हा लिखते हैं, “इंडिया टुडे समूह अपने वेतन बिल पर बहुत बचत कर सकता है अगर वे गलत सूचना के लिए समाचार एंकरों / पत्रकारों को दंडित करने की अपनी नीति को लागू करने में बराबर रहें।”

मोहम्मद थारिक लिखते हैं, “हम आपको मिस करेंगे राजदीप सरदेसाई। चुनावी नतीजों के लिए और विश्लेषण के लिए। आप और प्रणय रॉय मेरी पहली प्राथमिकता हो। नए प्लेटफॉर्म पर जल्दी आओ।”

प्रशांत भूषण ने लिखा, “इंडिया टुडे पूरी तरह बहानेबाजी करते हुए गोदी मीडिया में शामिल हो गया है। राजदीप सरदेसाई को ऑफ एयर, सैलरी में कटौती, वो भी एक वापस लिए जा चुके ट्वीट के लिए। अगर ये पॉलिसी लगातार अपनाए तो ज्यादातर एंकर पर कार्रवाई करनी पड़ेगी।”

पूर्व सांसद शाहिद सिद्दकी लिखते हैं, “इंडिया टुडे/आजतक फ्री में अपना चैनल चला सकते हैं अगर गलत समाचार और झूठी खबरों पर इसी तरह सैलरी काट लें। मुफ्त में मौज ही मौज।”

बता दें कि इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई को आज इंडिया समूह के प्रबंधन ने दो हफ्ते तक के लिए ऑफ एयर कर दिया। इसके अलावा उनकी एक माह की सैलरी भी काटे जाने का निर्णय लिया गया। सरदेसाई पर यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर उनके कुछ पोस्ट्स को लेकर की गई। इसके बाद उनके इस्तीफे देने की बात सामने आई और लिबरल गिरोह सोशल मीडिया पर उनके लिए बिलबिलाता दिखा।

हरियाणा कॉन्ग्रेस MLA प्रदीप चौधरी समेत 15 को 3-3 साल की सज़ा: जानिए क्या है बद्दी कांड

हरियाणा स्थित कालका से कॉन्ग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी को 3 साल जेल सज़ा सुनाई गई है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला स्थित नालागढ़ की निचली अदालत ने जारी किया है। कॉन्ग्रेस विधायक समेत कुल 15 लोगों को 3-3 वर्ष का कारावास और 85-85 हज़ार रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने 2011 के मामले में सभी आरोपितों को सज़ा सुनाई है, जिसमें एक युवक की मौत के बाद बद्दी रेडलाइट चौक पर जाम लगाया गया था और सरकारी काम में रुकावट पैदा की गई थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस घटना पर सहायक जिला न्यायवादी गौरव अग्निहोत्री ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 31 मई 2011 को थाना बरोटीवाना के अंतर्गत यातायात विभाग वाहन चेकिंग अभियान चला रहा था। पप्सोहा निवासी सुच्चा सिंह पुलिस को देख कर घबरा गया और उसने अपना बचाव करने का प्रयास किया। ऐसा करते हुए वह ट्रांसफार्मर की चपेट में आ गया और इसके बाद उसे चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। 

मृत्यु की घटना से आक्रोशित होकर मृतक के परिजनों समेत कई लोगों ने बद्दी रेडलाइट चौक पर शव रख कर विरोध प्रदर्शन दिया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर डंडे और रॉड से हमला कर दिया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तमाम सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था, नतीजतन 13 जून 2011 को बद्दी थाने में कई लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में हरियाणा के कालका से कॉन्ग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी समेत कुल 15 आरोपितों को सज़ा सुनाई गई है। 

नालागढ़ की न्यायिक दंडाधिकारी जितेंदर कुमार की अदालत ने आरोपितों को 3-3 साल की सज़ा और 85-85 हज़ार रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया है। विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कालका से कॉन्ग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी, महेश कुमार, मलकीत सिंह, संजीव कुमार, संदीप कुमार, भूपेंद्र धीमान, रूप लाल, हिम्मत सिंह, अवतार सिंह, जीत राम, जोगेंद्र सिंह, भाग चंद, महेश कुमार, गुलजार और अमरनाथ कर रहे थे। इसमें ज़्यादातर लोग पंचकूला और कालका के रहने वाले हैं। इस पूरे प्रकरण की तफ्तीश तत्कालीन थाना प्रभारी करमदीन और डीएसपी प्रवीण धीमान ने की थी। 

लाल किले की दीवारों पर खुलेआम पेशाब किया ‘किसान’ दंगाइयों ने: देखें Video

गणतंत्र दिवस के मौके पर तथाकथित किसानों ने दिल्ली में जमकर बवाल किया। किसानों की आड़ में हिंसक दंगाइयों ने लाल किले पर धावा बोला, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और स्मारक में भी तोड़फोड़ की। यहीं नहीं दंगाइयों ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर खूब उत्पात मचाया और राष्ट्रीय ध्वज को बदनाम करते हुए देश के खिलाफ विद्रोह को अंजाम दिया। इसके अलावा अब उन्हें राष्ट्रीय स्मारक की दीवारों पर पेशाब करते हुए भी पाया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दंगाइयों की करतूतों का एक चौकाने वाला वीडियो सामने आया है। दरअसल, जिन दंगाइयों ने लाल किले पर कथित तौर पर तिरंगे की जगह खालिस्तान का झंडा फहराया था, उन्होंने स्मारक की दीवारों पर पेशाब कर उसे अपवित्र भी कर दिया है।

हिंसक प्रदर्शनकारियों के इस करतूत का वीडियो इंटरनेट पर अब वायरल हो गया है। सोशल मीडिया यूजर बीफटिंग फैक्ट्स ’द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो के अनुसार, दंगाइयों के एक समूह को लाल किले की दीवारों पर पेशाब करते हुए देखा गया था।

वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कैसे अन्य दंगाइयों ने अपराधियों के इस वीभत्स करतूत को देखने के बाद भी उन्हें रोका नहीं, बल्कि वे उनका उत्साह बढ़ाते और इस कारनामें पर खुशी जताते हुए नजर आ रहे है। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों में से एक को प्रधानमंत्री मोदी के मुँह में पेशाब करने के लिए कहते हुए भी सुना जा सकता है।

वीडियो बनाते हुए एक दंगाई कहता है कि, “हम मोदी के मुँह में पेशाब करेंगे।”

गौरतलब है कि किसानों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर शांतिपूर्ण ट्रैक्टर रैली की अनुमति दिल्ली पुलिस से ली थी, लेकिन शर्तों को नहीं माना गया। किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर बैरिकेड्स को तोड़कर राजधानी में प्रवेश किया और जगह-जगह उपद्रव किया।

वहीं अब दिल्ली पुलिस ने इस पूरी घटना को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था। जिसमें पुलिस ने बताया कि दिल्ली के लोगों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि कुछ नियम और शर्तों के साथ यह किसानों को लिखित रूप में दिया गया था – रैली दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी, इसका नेतृत्व किसान को करना था नेताओं को अपने समूहों के साथ रहना होगा। लेकिन इसके बावजूद किसानों ने तय रूट की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि जो हिंसा हुई, वह नियम और कानूनों की अनदेखी करने के कारण हुई।

पुलिस ने कहा प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा था कि कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए लेकिन उह्नोने संयम बरते रखा।

  • ◆किसानों ने अवरोध तोड़े और धार्मिक झंडे भी लहराए, हिंसा और पुरातत्व विभाग की सम्पत्ति पर फहराए गए झंडे को हम गम्भीरता से ले रहे हैं।
  • ◆हिंसा के वीडियो हमारे पास हैं, और उनके आधार पर एक्शन लिया जाएगा।
  • ◆25 से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज हो चुके हैं।
  • ◆कोई भी अपराधी छोड़ा नहीं जाएगा, जो भी किसान नेता हैं और वो दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
  • ◆अगर हमारी प्रोसेज में कोई कमी होती तो हम ट्विटर पर मिले एकाउंट्स को पहचान नहीं पाते, लेकिन हमारे बीच समझौता हुआ था और उसके अनुसार चलना था, लेकिन समझौता तोड़ा गया ।
  • ◆ पुलिस ने संयम बरतकर परिस्थितियों को संभाला और जो लोग इसके पीछे थे उनके बारे में जानकारी मिल रही है।

राकेश टिकैत पर लगा UAPA: मीडिया के सामने रोते हुए बोले- गिरफ्तारी हुई तो आत्महत्या कर लूँगा

कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन की आग भड़काने वाले भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत के सुर बदलने लगे हैं। गणतंत्र दिवस से पहले तक सबकी बकल उतारने की धमकी देने वाले टिकैत ने रोते हुए मीडिया के सामने आत्महत्या करने की बात कही है। साथ ही धरने पर जमा लोगों को दोबारा भड़काऊ स्पीच देकर उकसाया है।

उन्होंने मीडिया से कहा, “मेरे किसान को मारने की कोशिश की जा रही है। मैं यहाँ से खाली नहीं करूँगा। बिलकुल खाली नहीं होगा। यहाँ लोगों को मारने की साजिश की जा रही है। ये वैचारिक लड़ाई है। किसानों के साथ अत्‍याचार किया जा रहा है… अगर कानून वापस नहीं हुआ तो राकेश आत्‍महत्‍या करेगा।”

मीडिया के सामने सुबक-सुबक कर रोते हुए टिकैत ने बार-बार कहा, “किसान को बर्बाद नहीं होने दूँगा, भाजपा विधायक यहाँ मौजूद है, किसानों को मारने की साजिश हो रही है। मैं किसानों को बर्बाद नहीं होने दूँगा।” उन्होंने अपनी बात कहते हुए कई बार भाजपा पर आंदोलन बदनाम करने के आरोप लगाए। साथ ही पूछा कि हंगामा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

एबीपी लाइव के मुताबिक टिकैत ने कहा, “हम बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन हमें पता है क्या होगा। अगर मेरे साथियों या मुझे गिरफ्तार किया गया तो मैं खुद फाँसी लगा लूँगा।”

बता दें कि दिल्ली में हुई अराजकता के बाद दिल्ली पुलिस ने 37 किसान नेताओं के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। इसमें राकेश टिकैत का भी नाम शामिल है। ताजा सूचना के अनुसार उनके व उनके साथियों के ऊपर UAPA एक्ट लगा दिया है। अब इसी के अनुरूप आगे कार्रवाई होगी।

इस बीच भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता ने प्रदर्शनस्थल पर धरना जारी करने के संबंध में कहा कि यदि यहाँ कुछ भी हुआ तो उसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। राकेश टिकैत ने जिला प्रशासन से अल्टीमेटम व पुलिस से नोटिस मिलने के बावजूद कहा कि कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। अगर हुई तो पुलिस जिम्मेदार होगी। यहाँ गोली चलेगी।

उल्लेखनीय है कि किसान आंदोलन का अराजक चेहरा देखने के बाद यूपी पुलिस एक्शन मोड में है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम दिया है। कहा गया है कि जल्द ही जगह को खाली कर दिया जाए। मौके पर जिला मजिस्ट्रेट अजय शंकर पांडेय समेत प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी मौजूद हैं। उनके अलावा भारी मात्रा में सुरक्षा बल की तैनाती हो गई है। दोपहर को फ्लैग मार्च भी किया गया है।

जिलों के डीएम-एसपी से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में धरने पर बैठे किसानों से अपील करें कि वे अपने-अपने घरों को लौट जाएँ। प्रशासन की ओर से किसानों के घर लौटने के लिए बस की व्यवस्था किए जाने की भी बात कही जा रही है।

वैक्सीन विकसित करके भारत ने दुनिया को मुश्किलों से उबारा, आर्थिक मोर्चे पर भी बेहतर हो रहे हालात: दावोस में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को विश्व आर्थिक मंच के ‘दावोस एजेंडा’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के विकास संबंधी विभिन्न पहलुओं और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की इस हजारों वर्ष पुरानी प्रार्थना, ‘सर्वे सन्तु निरामयाः‘ पूरा संसार स्वस्थ रहे, पर चलते हुए संकट के इस समय में भारत ने अपनी वैश्विक जिम्मेदारी को भी शुरू से निभाया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, “आशंकाओं के बीच मैं आपके सामने आत्मविश्वास, सकारात्मकता और दुनिया के लिए उम्मीद के साथ 130 करोड़ से अधिक भारतीयों का संदेश लेकर आया हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना से लड़ाई में भारत के प्रत्येक व्यक्ति ने धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया। पीएम ने कहा कि 12 दिन में 23 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया। और आने वाले कुछ महीनों में हम देश में 30 करोड़ बुजुर्ग और अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को कोरोना वायरस का टीका लगाने का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।”

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज भारत उन देशों में है जो कोरोना से अपने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचाने में सफल रहे और जहाँ कोविड मामलों की संख्या लगातार घट रही है। भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू किया है।”

डिजिटल माध्यम से हुए इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अभी तो 2 मेड इन इंडिया वैक्सीन दुनिया में आई हैं, आने वाले समय में कई और वैक्सीन बनकर आने वाली हैं। ये वैक्सीन दुनिया के देशों को और ज्यादा बड़े स्तर पर, ज्यादा गति से मदद करने में सहायता करेंगी।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “जब दुनिया के अनेक देशों में एयरस्पेस बंद था तब 1 लाख से ज्यादा नागरिकों को उनके देश पहुँचाने के साथ ही भारत ने 150 से ज्यादा देशों को जरूरी दवाइयाँ भी भेजी। अब भारत अपने 1.3 बिलियन नागरिकों को हेल्थ केयर तक आसान पहुँच के लिए यूनिक हेल्थ आईडी देने का काम शुरू कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “भारत के 1.3 बिलियन लोगों के पास यूआईडी – आधार है, जो उनके खातों से जुड़ा हुआ है। दिसंबर 2020 में, UPI से 4 ट्रिलियन रुपए के लेन-देन किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र के लोग जानते हैं कि दुनिया भर के देश भारत द्वारा विकसित UPI प्रणाली को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना संकट के दौरान अनेक देश परेशान थे कि अपने नागरिकों तक सीधे आर्थिक मदद कैसे पहुँचाएँ? आप ये जानकर चौंक जाएँगे कि इसी दौरान भारत ने 760 मिलियन से ज्यादा लोगों के बैंक खातों में 1.8 ट्रिलियन रुपए से अधिक सीधे ट्रांसफर किए हैं।”

उन्होंने बताया, “COVID संकट ने हमें मानवीय मूल्यों की मूल बातें सिखाई हैं। उद्योग 4.0 मनुष्यों के लिए है, न कि रोबोटों के लिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी जीवन जीने में आसानी के लिए एक उपकरण बन जाए, न कि एक जाल। सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हमने नई उत्पादन इकाइयों के लिए कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 15 फीसदी कर दिया और जीएसटी दरें घटा कर व्यवस्था आसान की है।