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हजारीबाग की जामा मस्जिद के पास मंगला जुलूस पर पत्थरबाजी, हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को करनी पड़ी हवाई फायरिंग: महाशिवरात्रि-होली पर भी झारखंड में हिंदुओं पर हुआ था हमला

झारखंड के हजारीबाग में हिंदुओं के लिए त्योहार मनाना मुश्किल होता जा रहा है। मंगलवार (25 मार्च 2025) देर रात रामनवमी की तैयारी में निकाले गए मंगला जुलूस पर कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर दी। ये सब सदर थाना क्षेत्र में जामा मस्जिद चौक के पास हुआ, जहाँ हिंदू अपने अखाड़ों के साथ शांति से जुलूस निकाल रहे थे। लेकिन अचानक पत्थर चलने शुरू हो गए, जिससे पूरा इलाका तनाव में आ गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को चार राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हर साल होली के बाद मंगलवार को हजारीबाग में मंगला जुलूस निकलता है। इस बार भी अखाड़ों के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ चौक-चौराहों से गुजर रहे थे। जुलूस में कुछ गाने बज रहे थे, जिन पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। बस इसी बात पर पहले बहस हुई, फिर पत्थरबाजी शुरू हो गई।

हिंदुओं का कहना है कि उनका जुलूस शांतिपूर्ण था, लेकिन असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ा। पत्थरबाजी के साथ तोड़फोड़ भी हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, फायरिंग की, तब जाकर भीड़ भागी। अब इलाके को छावनी बना दिया गया है और पुलिस हर तरफ नजर रख रही है।

हजारीबाग की डिप्टी कमिश्नर नैंसी सहाय ने कहा कि अब हालात काबू में हैं। उन्होंने बताया कि रामनवमी से पहले निकाले जा रहे दूसरे मंगला जुलूस पर पथराव किया गया। ये जगह झंडा चौक के पास है। जुलूस में गाना बजाने का विरोध करते हुए हमला किया गया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।

हजारीबाग के एसपी अरविंद कुमार सिंह मौके पर पहुँचे और लोगों से शांति की अपील की। अब FIR दर्ज की जा रही है और पुलिस दोनों पक्षों को समझाने में लगी है। लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बना हुआ है।

महाशिवरात्रि पर भी हिंदुओं पर हुआ था हमला

बता दें कि हजारीबाग में ये कोई नई बात नहीं। अभी फरवरी 2025 में महाशिवरात्रि के दिन हजारीबाग के इचाक में झंडा लगाने को लेकर हिंदुओं पर हमला हुआ था। पत्थरबाजी और आगजनी में कई लोग घायल हुए थे, वाहनों को जलाया गया था। तब भाजपा नेता संजय सेठ ने इसे घुसपैठियों की साजिश बताया था और हेमंत सोरेन सरकार पर हिंदुओं की सुरक्षा में नाकाम रहने का इल्जाम लगाया था।

यही नहीं, अभी 14 मार्च 2025 को गिरिडीह में होली के दिन भी हिंदुओं पर पत्थरबाजी हुई थी। हजारीबाग में त्योहारों पर हिंदुओं को टारगेट करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। लोग अब हर जुलूस और उत्सव में डर के साथ शामिल हो रहे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा स्तन दबाना-पायजामा खोलना ‘रेप का प्रयास’ है या नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का शीर्ष न्यायालय ने लिया संज्ञान: जानिए क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में एक मामले में की गई टिप्पणी ‘स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खोलना रेप या रेप का प्रयास का अपराध नहीं है’ का स्वत: संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज की पीठ द्वारा की जाएगी। इससे पहले जस्टिस बेला त्रिवेदी और प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने इस मामले में याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया था।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने 14 मार्च को कासगंज में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई के दौरान यह विवादित टिप्पणी की थी। जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि किसी लड़की का स्तन पकड़ना, उसके पायजामे के नाड़े तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना… रेप या रेप के प्रयास वाले अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

जस्टिस मिश्रा ने अपने फैसले में इसके पीछे यह तर्क दिया था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपितों की कार्रवाई अपराध करने की तैयारी से आगे बढ़ चुकी थी। अदालत ने कहा था कि बलात्कार के प्रयास और अपराध की तैयारी के बीच अंतर को सही तरीके से समझना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करने का भी निर्देश दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का देश भर में जमकर आलोचना हुई थी। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की वकील अंजलि पटेल ने याचिका दाखिल करके हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज कुछ टिप्पणियों को हटाने और उसे रद्द करने की माँग की गई थी। याचिका में यह भी माँग की थी कि हाल के कुछ मामलों में हाई कोर्ट के जजों ने अनुचित टिप्पणियाँ की हैं। इसलिए जजों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी की जाए।

इस मामले पर 24 मार्च को पेश वकील ने जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ के समक्ष दलीलें शुरू करते हुए ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ की बात कही। इसके तुरंत बाद जस्टिस बेला त्रिवेदी ने वकील को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके साथ ही कहा कि कहा कि कोर्ट में ‘लेक्चरबाजी’ की अनुमति नहीं होनी चाहिए। इसके बाद जस्टिस बेला त्रिवेदी ने याचिका को खारिज कर दी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और इसकी सुनवाई बुधवार (26 मार्च) को तय कर दी। बता दें कि यह मामला 11 वर्षीय पीड़िता से संबंधित है, जिसके साथ 10 नवंबर 2021 को आरोपित पवन, आकाश और अशोक ने पुलिया के नीचे खींचकर लेकर जाने की कोशिश करते हुए यौन उत्पीड़न की थी। आरोपितों में एक बच्ची के स्तन दबाए थे

वहीं, दूसरे आरोपित ने पीड़िता के पायजामे का नाड़ा तोड़ा था। जब शोर बढ़ा तो वहाँ से गुजर रहे लोगों ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद आरोपित फरार हो गए। बाद में पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज हुआ। निचली अदालत ने इसको लेकर समन जारी किया। इसके बाद आरोपित पक्ष इसके खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँचा। यहाँ इन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने रेप नहीं किया।

मुझे हरामखोर कहा, कोर्ट खुलने से पहले मेरा घर तोड़ दिया: कुणाल कामरा के ‘हमदर्द’ हंसल मेहता को कंगना रनौत ने दिया करारा जवाब, याद दिलाए उद्धव सरकार के अत्याचार

कुणाल कामरा के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहने के बाद हो रही कार्रवाई को लेकर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रया दी है। कंगना रनौत ने कहा है कि उद्धव सरकार के दौरान उनके दफ्तर पर अवैध रूप से कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब कामरा पर हो रही कार्रवाई कानूनन रूप से ठीक है। कंगना रनौत के दफ्तर पर BMC ने उद्धव सरकार के दौरान बुलडोजर चलाया था।

कंगना रनौत ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “जिस तरह से वो मेरे साथ अवैध रूप से किए गए काम का मजाक उड़ा रहे थे, मैं उसे वर्तमान से बिलकुल नहीं जोडूंगी। मेरे साथ जो किया गया वह पूरी तरह से अवैधानिक था, ये जो किया गया है वह कानूनी रूप से की गई प्रक्रिया है।”

कंगना ने आगे कहा, “आप कोई भी हो, किसी का अपमान करना, किसी की अपकीर्ति करना सही नहीं है। आप कॉमेडी के नाम पर किसी की इज्जत उछाल रहे हैं। उनके काम को आप धूमिल कर रहे हैं। शिंदे जी एक जमाने में रिक्शा चलाया करते थे। आज वो अपने दम पर इतना आगे तक आ पाए हैं।”

कंगना रनौत ने आगे कुणाल कामरा की योग्यता पर प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा, “इनकी (कुणाल) की क्या योग्यता है? कौन हैं ये लोग? ये जिंदगी में कुछ कर नहीं पाए, अगर लिख सकते हो तो साहित्य में या कॉमेडी में कुछ लिखते। कॉमेडी के नाम पर हमारे ग्रंथों का मजाक बनाना, लोगों का मजाक उड़ाना कितना सही है?”

कंगना रनौत ने फिल्म निर्माता हंसल मेहता को भी करारा जवाब दिया है। हंसला मेहता ने एक्स (पहले ट्विटर) पर कुणाल के पक्ष में ट्वीट किया था और कंगना पर निशाना साधा था। कंगना ने इसी ट्वीट का जवाबी दिया है।

कंगना ने लिखा, “उन्होंने मुझे हरामखोर जैसे नाम दिए, धमकी दी, देर रात मेरे वॉचमैन को नोटिस थमाई और सुबह कोर्ट खुल पाता उससे पहले ही बुलडोजर से मेरा पूरा घर गिरा दिया। हाईकोर्ट ने इस पूरी तोड़-फोड़ की कार्यवाही को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया।”

कंगना ने लिखा, “वो इस पर हँसे और मेरे दर्द और जगहँसाई पर जश्न मनाया। ऐसा लगता है कि आपकी असुरक्षा और ओछापन न केवल आपके भीतर कड़वापन और बेवकूफी को बढ़ा रहा है बल्कि उसने आपको अंधा भी कर दिया है। ये आपकी बनाई हुई घटिया सीरीज या फिल्मों की तरह नहीं है, अपने झूठ और एजेंडे को यहाँ बेचना बंद कीजिए और मेरे मामलों से दूर रहिए।”

गौरतलब है कि रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

इसके बाद BMC ने उस हैबिटेट क्लब पर कार्रवाई की थी, जहाँ यह कार्यक्रम हुआ था। कुणाल कामरा के विरुद्ध भी इस मामले में FIR दर्ज करके नोटिस भेजी गई है। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कुणाल के खातों और कॉल रिकॉर्ड की जाँच करने को कहा है।

JNU वाली बकलोली बंद करो कन्हैया कुमार! सड़कों से पानी की नहीं होती चोरी, आता है विकास: अपने मालिक (राहुल गाँधी) से पूछो उसके पुरखों ने क्यों उजाड़ा बसा-बसाया बिहार?

वैसे तो वामपंथी होना कोई ख़ास बुरी बात नहीं है, लेकिन किसी का मूर्ख और वामपंथी एक साथ होना ऐसा दुर्लभ संयोग बनाता है कि देवता भी हैरत में पड़ जाते हैं। ‘आजादी-आजादी’ फेम कॉन्ग्रेसी हो चुके वामपंथी कन्हैया कुमार एक ऐसे ही दुर्लभ व्यक्ति हैं। वह ये बात समय-समय पर सिद्ध भी करते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने अपने गृहराज्य बिहार पर एक बयान दिया है।

कन्हैया कुमार ने एक नई थ्योरी गढ़ी है। कन्हैया कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि बिहार में भारतमाला परियोजना की सड़कें राज्य का पानी लूटने को बनाई जा रही हैं। कन्हैया का पूछना है कि बिहार में पहले उद्योग क्यों नहीं आए और अब छोटे निवेश आ रहे हैं। कन्हैया ने कहा है कि सड़कों की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने सड़कें बनाने को एक साजिश करार दिया है।

मूर्खता की वैसे तो कोई सीमा नहीं होती लेकिन दो-तीन ऐसी बातों के बाद आदमी को चुप हो जाना चाहिए। हालाँकि, कन्हैया कॉन्ग्रेसी हैं और उनसे ऐसी कोई भी उम्मीद बेकार है। आगे कन्हैया एकाध कारोबारियों का नाम लिया और बिहार के खिलाफ साजिश रचने की बात कही।

कन्हैया का कहना है कि बिहार के पास बहुत पानी है, इसलिए यहाँ सड़कें बनाई जा रही हैं। पहली बात तो यह बचकाना तर्क है। और अगर आँकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2023 में सामने आई जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में अभी 44% भूजल का दोहन हो चुका है, जबकि बिहार में कोई बड़ा औद्योगिक आधार नहीं है।

बिहार कन्हैया कुमार
बिहार में अब तक 44% पानी का दोहन ही हुआ है

यही रिपोर्ट बताती है कि गुजरात, जहाँ औद्योगिक ढाँचा मजबूत है, वहाँ भी यह स्तर 51% तक ही पहुँचा है। केवल हरियाणा, पंजाब और राजस्थान ही ऐसे राज्य हैं, जहाँ भूजल का दोहन 100% से अधिक हुआ है। ऐसे में कोई बिहार के पानी पर क्यों नजर डालेगा। एकाध राज्यों को छोड़ दिया जाए, तो पूरे देश की ही स्थिति एक सी ही है।

भारत में वामपंथियों का प्रिय शगल रहा है कि वह किसी भी तरह के विकास को गाली दें। इसी क्रम में कन्हैया ने भारतमाला परियोजना के तहत बनी सड़कों को भी कोसा और प्रश्न पूछा है कि यह क्यों बन रही हैं और इससे बिहार में कोई इंडस्ट्री नहीं आएगी।

कन्हैया को पता होना चाहिए कि बिहार ही नहीं बल्कि किसी भी जगह उद्योग-धंधे लगने की कुछ शर्तें होती हैं। जैसे जहाँ उद्योग-धंधा लगना है, वहाँ के लिए एक सड़क होनी चाहिए और आज के समय में तो हाइवे होना चाहिए। बिजली की सप्लाई होनी चाहिए, स्थायी नीतियाँ होनी चाहिए और क़ानून व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। लेकिन सबसे पहली शर्त सड़क है।

जब सड़क नहीं होगी तो भला फैक्ट्री लगाने वाले कैसे पहुँचेगें, माल कैसे पहुँचेगा। और किसी तरह फैक्ट्री लग भी जाए तो उसका माल कैसे बाहर जाएगा। कन्हैया कुमार का कहना है कि जब फैक्ट्री लगनी थी, तब नहीं लग पाई। क्या वह यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि इस ‘तब’ में बिहार में कौन राज कर रहा था।

तब यानी 1950-2005 तक तो मोटे तौर पर कॉन्ग्रेस और लालू का ही शासन बिहार में था। कॉन्ग्रेस ने ही बिहार के उद्योग धंधों की दुर्दशा की है। ना कॉन्ग्रेस बड़े उद्योग धंधे बिहार लाई और जिसकी संभावना भी थी, उसे भी छीन लिया। कॉन्ग्रेस ही वह पार्टी थी, जिसने भाड़ा सामान्यीकरण क़ानून लागू किया।

इस कानून के तहत जितने भाड़े में राँची से निकला खनिज पटना आता, उतने में ही वह मद्रास पहुँचता। समुद्र तट का लाभ लेते हुए इसी के चलते तमाम उद्योग-धंधे दक्षिण के राज्य चले गए। कहते हैं इस कानून के चलते ₹10 लाख करोड़ का बिहार को हुआ।

यह कानून भी 1990 में जाकर खत्म हुआ। और यह कोई रोना रोने वाली बात नहीं है, इसकी आँकड़े तस्दीक करते हैं। प्रधानमंत्री को आर्थिक सलाह देने वाली एक कमिटी की रिपोर्ट बताती है कि बिहार का देश की जीडीपी में हिस्सा 1960-61 में 7.8% हुआ करता था, वह आज 2.8 पर खड़ा है। अगर इसमें झारखंड को भी मिला लें तो यह 4.3% पहुँचता है।

कन्हैया कुमार बिहार
देश में बिहार की जीडीपी का हिस्सा हर दशक के साथ नीचे जाता गया है

कन्हैया को कॉन्ग्रेस से प्रश्न पूछना चाहिए कि आखिर यह नीति क्यों लाई गई थी और क्यों उद्योग धंधे तबाह किए गए। आजादी के बाद तो बिहार में कोई नए उद्योग नहीं लगे, जो पहले से थे भी, कॉन्ग्रेस ने उन्हें भी बर्बाद किया। उन्हें कॉन्ग्रेस ने मरणासन्न कर दिया।

लालू प्रसाद यादव की सरकार के जंगलराज, रंगदारी और अपहरण उद्योग ने इन धंधों और पूंजीपतियों को राज्य बाहर भगाने में मदद की। यह मरणासन्न धंधों का क्रियाकर्म करने जैसा था। कॉन्ग्रेस और RJD, दोनों ही साथी रहे हैं। उद्योग-धंधे ना होने के अपराध में दोनों भागीदार हैं।

हाँ! ये बात ठीक है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने बिहार में उद्योग-धंधे लाने में कोई ख़ास सफलता नहीं हासिल की। नीतीश कुमार की सरकार कि उपलब्धि सड़कें और बिजली-पानी ही है। लेकिन बात ये है कि बिहार को इस जंगलराज ने उस गर्त में धकेल दिया था कि सड़क-पानी जैसी आधारभूत सुविधाएँ भी लोगों को मयस्सर नहीं थीं।

छोटे निवेश आने पर रोने वाले कन्हैया कुमार ये बात नहीं जानते क्या कि पहले किसी भी राज्य में छोटे ही निवेश आते हैं, क्या पहले दिन ही आने वाला निवेश ₹50 हजार करोड़ का आने लगेगा। कन्हैया की असल समस्या सड़क, उद्योग और पानी नहीं हैं। बात ये है कि उनका खुदका विकास नहीं हो रहा।

एक समय था कि मजदूरों को पूंजीपतियों और विकास के विरुद्ध भड़का कर कम्युनिस्ट नेतागिरी चमकाया करते थे। कन्हैया को बार-बार बिहार ने नकार दिया है। क्योंकि JNU में ढपली बजाना एक बात है, और चुनावी रण में उतर कर जीतना अलग बात। अच्छा होगा कि अपने राज्य के भले के लिए कन्हैया विकास के और प्रोजेक्ट माँगे, ना कि जो आ रहा है उसका भी विरोध करें।

सनातन अपनाया तो अपने ही समुदाय (मुस्लिमों) के लोगों ने तोड़ दिया घर, 4 दिनों तक भूखा रहा मेरा परिवार: मंच से भजन गायिका ने सुनाई प्रताड़ना की दास्तान, कहा- आज भी मिलती है धमकी

उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित बांदा महोत्सव में भजन गायिका शहनाज अख्तर ने अपनी भक्तिमयी प्रस्तुति से लोगों का दिल जीत लिया। हालाँकि इसके बाद उन्होंने अपनी आपबीती भी बताई, जिसकी वजह से उन्हें पूरी जिंदगी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहनाज ने कहा, “मेरी पहचान सनातन धर्म से है। मैं हिंदू देवी-देवताओं के भजन गाती हूँ, उनकी पूजा करती हूँ, लेकिन इसके लिए मुझे और मेरे परिवार को बहुत कुछ सहना पड़ा।”

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट में मुस्लिम परिवार में जन्मीं शहनाज की जिंदगी तब बदल गई, जब बचपन में वो गणेश मंदिर में लड्डू लेने गईं। वहाँ भजन-कीर्तन सुनकर उनका मन सनातन धर्म की ओर खिंच गया। 10 साल की उम्र से ही उन्होंने माता के भजन गाने शुरू कर दिए थे।

शहनाज अख्तर ने बताया कि जब उन्होंने सनातन धर्म को अपनाया और भजन गाना शुरू किया, तो मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों ने इसका विरोध किया। हालात इतने बिगड़ गए कि उनके घर पर हमला हुआ। उनके परिवार को बेरहमी से पीटा गया। वो कहती हैं, “हम चार दिन तक अस्पताल में रहे। भूखे-प्यासे तड़पते रहे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।”

समाज के कुछ लोगों ने उन्हें धमकियाँ दीं कि हिंदू देवी-देवताओं के भजन गाने से वो नर्क में जाएँगी। शहनाज कहती हैं कि अगर मैं हिंदू धर्म की भक्ति से नर्क में जाऊँगी, तो आपके अब्बा ने कौन सी जन्नत पेश कर रखी है। आज वो गर्व से कहती हैं, “मैं भगवा रंग में रंग चुकी हूँ। सनातन धर्म ही मेरी पहचान है।”

सोशल मीडिया पर भी शहनाज को ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ता है। हाल ही में एक रील वायरल हुई, जिसमें उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई। इसके खिलाफ उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई। वो कहती हैं, “मैंने अपना नाम नहीं बदला, क्योंकि मेरी शख्सियत सनातन धर्म ने बनाई है। जो मुझे परेशान करेंगे, उनके खिलाफ कानून का सहारा लूँगी।”

बांदा महोत्सव में भगवा ड्रेस पहने, माथे पर त्रिपुंड लगाए और साध्वी की तरह केश सजाए शहनाज पूरी तरह सनातनी नजर आईं। अब तक वो 75 से ज्यादा भजन एल्बम रिलीज कर चुकी हैं। उनका पहला एल्बम 2005 में आया था और तब से ही वो सुर्खियों में बनी रहती हैं।

फरमानी नाज को भी झेलनी पड़ी थी कट्टरपंथियों की लानत, खूब मिली थी गालियाँ

शहनाज की कहानी अकेली नहीं है। साल 2022 में फरमानी नाज भी ऐसी ही मुश्किलों से गुजरीं। मुजफ्फरनगर की रहने वाली फरमानी ने जब शिव भजन ‘हर हर शंभू’ गाया और यूट्यूब पर अपलोड किया, तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें निशाना बनाया। फरमानी की जिंदगी पहले से ही मुश्किलों से भरी थी। शौहर इमरान ने बिना तलाक दिए दूसरा निकाह कर लिया था। बेटे की गले की बीमारी के इलाज के लिए ससुराल वाले मायके से पैसे माँगते थे। प्रताड़ना से तंग आकर वो मायके लौट आईं। वहाँ उनकी मुलाकात राहुल मुलहेड़ा से हुई, जिन्होंने उनकी आवाज को पहचान दी।

फरमानी ने बताया, “मैं अपने बच्चे का पेट पालने के लिए गाती हूँ। जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, वो तब कहाँ थे जब मेरे शौहर ने मुझे छोड़ दिया?” राहुल ने 2017 में एक यूट्यूब चैनल शुरू किया था, जिसमें फरमानी की आवाज लोगों तक पहुँची। साल 2020 में उनका चैनल ‘फरमानी नाज सिंगर’ बन गया। अब इस चैनल का नाम ‘नाज म्यूजिक’ है, जिसके 1.71 मिलियन फॉलोवर्स हैं।

‘हर हर शंभू’ गाने पर उन्हें नेहा कक्कड़ की तारीफ मिली, लेकिन कट्टरपंथियों ने फतवा जारी कर दिया। उन्हें गालियाँ और धमकियाँ मिलीं। एक यूजर मोहम्मद अमजद ने लिखा, “शर्म करो फरमानी, अखिरियत का खौफ करो।” फिर भी फरमानी डटी रहीं। गानों से मिले पैसों से उन्होंने 8 लाख का कर्ज चुकाया और घर ठीक करवाया।

शहनाज और फरमानी की कहानी एक जैसी है। दोनों ने सनातन के प्रति अपनी भक्ति दिखाई, लेकिन अपने ही समुदाय के कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार हुईं। एक तरफ फरमानी मुस्लिम होकर भी भजन गा रही हैं, तो शहनाज ने सनातन का हाथ थामने के बाद भी अपना नाम नहीं बदला। जो ये बताता है कि सनातन में सभी की स्वीकार्यता है, लेकिन दूसरी तरफ के कट्टरपंथियों को दिक्कत कुछ ज्यादा ही होती है।

जैन, बौद्ध, सिख… सब पर लागू है हिंदू मैरिज एक्ट, इसके तहत ही मिलेगा तलाक: MP हाई कोर्ट, कहा- ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ मिलने से नहीं हो जाते बाहर

हिंदू मैरिज एक्ट जैन, बौद्ध और सिखों पर भी लागू होता है। इनसे जुड़े विवाह और तलाक के मामले में भी इसी कानून के दायरे में आते हैं। ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ मिलने के कारण ये इस अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं होते। यह बात मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक फैसले में कही है।

जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और संजीव एस कलगाँवकर की बेंच ने सोमवार (24 मार्च, 2025) को एक जैन दंपति के तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शादी 2017 में हुई थी। बाद में दंपति अलग रहने लगे। उन्होंने तलाक के लिए हिंदू मैरिज एक्ट के तहत फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया।

उनकी याचिका पर 8 फरवरी को इंदौर फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई की। उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक देने की अर्जी को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि जैन एक अल्पसंख्यक समुदाय में आता है। इस धर्म से जुड़े किसी व्यक्ति को विपरीत मान्यता रखने वाले धर्म के कानून का लाभ देना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि जैन समुदाय को 2014 से ही अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 की धारा 2 खंड सी की शक्तियों के अनुसार जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया है। लेकिन इसके तहत जैन समुदाय के सदस्यों को किसी भी वर्तमान कानून के दायरे से बाहर करने का संशोधन नहीं किया गया है।

इसके बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाई कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि उन्होंने हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया था। उनकी इस अपील पर जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और संजीव एस कलगाँवकर की पीठ ने सुनवाई करते हुए माना कि जैन भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में आते हैं।

पीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट के जज ने यह कहकर गंभीर गलती की है कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के प्रावधान जैन समुदाय पर लागू नहीं होते। यह आदेश विवादित है। लिहाजा इसे रद्द किया जाता है। हाई कोर्ट ने 13-बी के तहत दायर याचिका को वापस कर फैमिली कोर्ट अधिनियम धारा 7 के तहत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

‘रेखा दीदी’ की सरकार ने पेश किया पहला बजट, ₹1 लाख करोड़ से विकसित होगी दिल्ली: साफ पानी पर फोकस, महिला समृद्धि के लिए ₹5100 करोड़

दिल्ली में भाजपा सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है। यह बजट मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पेश किया है। ₹1 लाख करोड़ के इस बजट में भाजपा के संकल्प पत्र की झलक दिखी है। सरकार ने कई वादों को इस बजट के जरिए पूरा करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। बजट का फोकस दिल्ली में इन्फ्रा के विकास और साफ़ पानी तथा यमुना की सफाई पर रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (25 मार्च, 2025) को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 सरकार का पहला बजट पेश किया। CM रेखा गुप्ता द्वारा पेश किया गया यह बजट ₹1 लाख करोड़ का है। दिल्ली का बजट इस बार 31% बढ़ा है। CM रेखा गुप्ता ने कहा है कि बीते वर्ष का बजट घटा कर ₹69 हजार करोड़ कर दिया गया है।

CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार ₹28 हजार करोड़ दिल्ली में कैपिटल एक्सपेंडिचर होगा। इससे दिल्ली में इन्फ्रा का विकास किया जाएगा। इसी बजट के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना लागू कर दी गई है। इसके तहत अब दिल्ली के नागरिकों को ₹10 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।

इसमें ₹5 लाख केंद्र सरकार जबकि बाकी ₹5 लाख दिल्ली सरकार देगी। इसके लिए ₹2144 करोड़ दिल्ली के बजट में दिए गए हैं। वहीं दिल्ली में झुग्गी झोपड़ी के विकास के लिए ₹696 करोड़ दिए गए। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा है कि झुग्गी झोपड़ी के विकास के लिए पहले सिर्फ बाते होती थीं।

भाजपा सरकार के इस पहले बजट का फोकस दिल्लीवासियों को साफ़ पानी दिलाने पर भी है। दिल्ली के बजट में ₹9000 करोड़ साफ़ पानी की सप्लाई के लिए दिए गए हैं। दिल्ली में पानी सप्लाई करने वाले टैंकरों में जीपीएस लगाया जाएगा। दिल्ली में यमुना सफाई भी इस बार सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर है।

दिल्ली सरकार ने ₹500 करोड़ राज्य में गंदे पानी की ट्रीटमेंट के लिए दिए हैं। यह क्षमता बढ़ने के बाद यमुना में गंदा पानी नहीं मिल सकेगा। वहीं पीने के पानी की को साफ़ करने के लिए भी क्षमता बढ़ाई जाएगी, इस पर भी ₹250 करोड़ खर्च की जाएगी। ₹500 करोड़ यमुना की सफाई के लिए दिए जाएँगे।

दिल्ली में स्वास्थ्य के लिए ₹6847 करोड़ का बजट रखा जाएगा। CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि सरकार 10वीं पास करने वाले 750 बच्चों को लैपटॉप देगी। यह लैपटॉप 1200 बच्चों को दिए जाएँगे। दिल्ली में भाजपा सरकार ने अपने चुनावी वादों पर भी काम चालू कर दिया है।

CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि ₹5100 करोड़ का धनराशि महिला समृद्धि योजना के लिए दिए जाएँगे। इसके तहत महिलाओं को ₹2500/माह दिए जाएँगे। सरकार ने इसी के साथ बजट में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली पेंशन भी बढ़ा कर ₹3000 कर दी है।

बजट में दिल्ली में ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में सुधार के लिए भी पैसा दिया गया है। दिल्ली में ₹12,952 करोड़ परिवहन क्षेत्र के लिए दिए गए हैं। मेट्रो के विकास के लिए भी ₹2929 करोड़ दिए गए हैं। CM रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि दिल्ली के भीतर 5000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएँगी।

दिल्ली में महिला एवं बाल विकास कल्याण के लिए ₹10 हजार करोड़ दिए गए हैं। दिल्ली में गर्भवती महिलाओं को भी ₹21 हजार दिए जाएँगे। CM रेखा गुप्ता ने साफ़ किया है कि उन्होंने इस बजट से जो लक्ष्य तय किए हैं, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा।

5% (₹400 करोड़) कमीशन माँगने वाले IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ ED जाँच शुरू, लखनऊ की कोठी-खेती की जमीन सब रडार पर: यूपी इन्वेस्ट के CEO को सस्पेंड कर चुकी है योगी सरकार; जानिए क्या है मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन्वेस्ट यूपी के पूर्व CEO अभिषेक प्रकाश पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में जाँच चालू कर दी है। लखनऊ स्थित ED के अधिकारियों ने इस मामले में लखनऊ पुलिस से FIR, जाँच की जानकारी और दलाल निकांत जैन के विषय में सूचना तलब की है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED दलाल निकांत जैन और उसके भाई की कम्पनियों और बाकी निवेश सम्बन्धित जानकारी भी जुटा रही है। वह आने वाले दिनों में निकांत जैन को पूछताछ के लिए हिरासत में भी ले सकती है। ED द्वारा अभिषेक प्रकाश का बयान दर्ज करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। 

ED इस मामले में शिकायत करने वालों से भी जानकारी जुटा सकती है और उस प्रक्रिया पर भी जानकारी इकट्ठा कर सकती है, जिसके तहत IAS अभिषेक प्रकाश पर रिश्वत माँगने का आरोप है। ED जाँच के दायरे में इस प्रक्रिया में शामिल दूसरे अधिकारियों को भी ले सकती है। उसने भी पूछताछ की जा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ED रिश्वत के मामले के साथ ही अभिषेक प्रकाश की संपत्तियों पर भी जाँच करने वाली है। जाँच एजेंसी का फोकस उन जिलों पर रहेगा, जहाँ अभिषेक प्रकाश जिलाधिकारी के तौर पर रहे हैं। उनकी खेती और बाकी जमीनों पर भी जानकारी इकट्ठा की जाएगी।

अभिषेक प्रकाश के लखनऊ के घर के विषय में भी ED जानकारी जुटा रही है, यह घर दो प्लाट को मिला कर बनाया गया था। घर एक महंगी सोसायटी में स्थित है। इस पूरे मामले पर एजेंसी ने अभी आधिकारिक तौर कोई जानकारी नहीं दी है।

IAS अभिषेक प्रकाश वर्ष 2022 में यूपी इन्वेस्ट के CEO बने थे। वह 20 मार्च, 2025 तक इस पद पर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में निवेश लाने के बनाई गई इस नोडल एजेंसी ने इस दौरान काफी सफलता भी पाई है लेकिन इस 3 वर्ष में कई निवेश के प्रस्ताव खारिज भी किए गए हैं।

बताया गया है कि अब इस दौरान खारिज किए गए सभी प्रस्तावों की फाइलें दोबारा खोली जाएँगी। इस पर जाँच होगी कि आखिर निवेश प्रस्ताव को सही कारणों के तहत खारिज किया गया या फिर उसमें भी कोई भ्रष्टाचार का एंगल शामिल था।

गौरतलब है कि 20 मार्च, 2025 को SAEL Solar P6 नाम की कंपनी के विश्वजीत दत्ता ने IAS अभिषेक प्रकाश के संबंध में शिकायत की थी। कंपनी ने कहा था कि यूपी इन्वेस्ट के तहत उन्होंने Letter of Comfort (LOC) के लिए आवेदन किया था लेकिन उनकी फाइल अटकी हुई थी। 

कंपनी ने आरोप लगाया कि मंजूरी के एवज में IAS अभिषेक प्रकाश ने दलाल निकांत जैन के जरिए पूरे प्रोजेक्ट का 5% (₹400 करोड़) कमीशन माँगा। शिकायत सामने आने के बाद निकांत जैन के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया थी। वहीं IAS अभिषेक प्रकाश को योगी सरकार सस्पेंड कर दिया था।

 

CPM छोड़ BJP में शामिल होने की सजा- बम मारा, फिर कुल्हाड़ी से काट डाला: 8 वामपंथियों को उम्रकैद, एक केरल CM के प्रेस सेक्रेटरी का भाई

बीजेपी कार्यकर्ता एलाम्बिलई सूरज की केरल के कन्नूर में 7 अगस्त 2005 को निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कन्नूर की थालासरी जिला सत्र न्यायालय ने सत्ताधारी वामपंथी दल के 9 कार्यकर्ताओं को दोषी माना है। इनमें से 8 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

आजीवन कारावास के साथ ही इन सभी 8 लोगों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा एक अन्य दोषी को तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लागाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उम्रकैद पाने वालों में मनोज नारायण भी शामिल है। वह केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के प्रेस सचिव पीएम मनोज का भाई है। एक अन्य दोषी टीके राजेश 2012 में हुई टीपी चंद्रशेखरन की हत्या के आरोप में पहले से ही जेल में है।

इनके अलावा ईवी योगेश, के शामजिथ, नेयोथ सजीवन, प्रभाकरन, केवी पद्मनाभन, राधाकृष्णन और पुथियापुरइल प्रदीपन को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इन सबकी उम्र 45 से 70 के बीच है। वहीं, नागाथनकोटा प्रकाशन को इस मामले में गवाह के मुकरने के कारण बरी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि सीपीएम छोड़कर सूरज भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद राजनीतिक दुश्मनी के चलते 7 अगस्त 2005 को उनकी हत्या कर दी गई। राजेश, योगेश, शामजिथ, सजीवन और प्रभाकरन को उनकी हत्या का दोषी पाया गया है। वहीं पद्मनाभन, राधाकृष्णन, प्रकाशन को हत्या की साजिश रचने और प्रदीपन को आरोपितों को भगाने और अंडरग्राउंड करने के जुर्म में सजा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या से छह माह पहले भी सूरज पर हमला हुआ था। इसमें उनके पैर में गंभीर चोटें आई थी और कई महीनों तक उन्हें बेड रेस्ट और मेडिकल केयर की जरूरत पड़ी थी। ठीक होने के बाद दोबारा हमला कर उनकी हत्या कर दी गई। 7 अगस्त 2025 की सुबह मुजप्पिलंगड टेलीफोन एक्सचेंज के सामने कुछ लोग एक ऑटोरिक्शा से उतरे। उन्होंने पहले सूरज पर बम फेंका और फिर कुल्हाड़ी और धारदार हथियारों से उन्हें मार डाला।

बहन को चर्च जाने से रोकता था, इसलिए पादरी बजिंदर सिंह ने युवक को पीटा: वायरल की जाँच शुरू, पुलिस ने बताया- महिला पादरी को भी किया अपमानित, मारे थप्पड़

पंजाब में चंगाई सभाएँ करवाने वाले पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस ने एक नए मामले में जाँच चालू की है। पादरी बजिंदर सिंह का एक महिला और एक पुरुष को दफ्तर के भीतर पीटने का वीडियो सामने आया था। इस वीडियो के पीड़ितों के बयान भी पुलिस ने दर्ज कर लिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजिंदर सिंह जिस युवक को CCTV फुटेज में पीटता दिखाई दे रहा है, वह अपनी बहन को चर्च आने से रोकता था। बजिंदर सिंह के खिलाफ रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता ने बताया है कि इस युवक की बहन को बजिंदर सिंह छेड़ता था।

पीड़िता ने बताया है कि बजिंदर सिंह से यह युवक अपनी बहन को छोड़ देने के लिए कह रहा था और इसी लिए इसकी पिटाई बजिंदर सिंह ने कर दी। वहीं जिस महिला पर कॉपी फेंकते और पीटते बजिंदर सिंह दिख रहा है, वह मोहाली की रहने वाली है।

अब पुलिस ने पिटाई के इस मामले में जाँच भी चालू कर दी है। बताया गया है कि वायरल हुई पिटाई की वीडियो मोहाली स्थित चर्च ऑफ़ ग्लोरी एंड विजडम की हैं। यह वीडियो 13 फरवरी, 2025 की बताई जा रही हैं। मोहाली पुलिस ने इस मामले के पीड़ितों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “कुराली और आस-पास के इलाकों के कुल चार पादरियों ने हमारे पास अपनी शिकायतें दर्ज करवाई। वे पिछले कई सालों से बजिंदर के साथ काम कर रहे थे और अब अलग काम करना चाहते थे, जिसके कारण विवाद हुआ।”

पुलिस अधिकारी ने बताया, “महिला पादरी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बजिंदर ने अपने दफ्तर में उसे लगातार अपमानित किया और थप्पड़ जड़े। एक और महिला पादरी ने भी यही बात अपनी शिकायत में कही है।” पुलिस ने कहा है कि शिकायत के बाद वह बजिंदर के खिलाफ एक्शन लेगी।

गौरलतब है कि हाल ही में वायरल हुई वीडियो में बजिंदर सिंह एक महिला और एक पुरुष को पीटते हुए दिखा थी। वीडियो में दिखा था कि पादरी पहले युवक के ऊपर पन्ने फेंकता है और उसके बाद उसे मारता है। बीच में महिला आती है तो उससे भी उलझता है और थोड़ी कहासुनी के बाद महिला को भी मारता है।

बता दें कि पादरी बजिंदर के खिलाफ कुछ दिन पहले ही कपूरथला पुलिस ने 22 वर्षीय महिला की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354-ए, 354-डी और 506 के तहत यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज की थी।