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17 साल की लड़की को माँ-बेटे ने किया किडनैप, इस्लाम कबूल करा 2 महीने तक 5 लोगों ने बलात्कार किया

साल 2020 के मार्च महीने की 16 तारीख को पाकिस्तान के लाहौर में 17 साल की मूक बधिर लड़की का उसके घर से अपहरण किया गया और पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम युवक के साथ जबरन निकाह कराया गया। ब्रिटिश पाकिस्तानी क्रिश्चियन एसोसिएशन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ 17 मार्च को इस घटना के संबंध में संधा पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की थी।

पुलिस ने इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद स्थानीय विधायक तारिक गिल के दखल देने के बाद पुलिस ने पीड़िता के गायब होने के ठीक पहले उसकी माँ रुबीना के फोन पर आए कॉल को ट्रेस करना शुरू किया। 

जाँच के दौरान पता चला कि संदिग्धों का नाम अली मोबशीर और मोहम्मद अज़ीम है। पुलिस को यह भी पता चला कि जिस वक्त पीड़िता गायब हुई थी, उस वक्त यह दोनों उसके घर के पास ही मौजूद थे। इसके बाद पुलिस ने अज़ीम से संपर्क करने का प्रयास किया और उसने पूछताछ में सहयोग करने पर सहमति भी जताई लेकिन बाद में मोबशीर के साथ 2 महीने तक गायब रहा। 10 अप्रैल को रुबीना के पास एक और कॉल आया, जिसमें उसने कथित तौर पर अपनी बेटी की आवाज़ सुनी। 

इस बात की जानकारी पुलिस को दी जाने के बाद जब नंबर की ट्रेसिंग शुरू हुई तो उसकी लोकेशन पड़ोस में रहने वाले कासिफ़ गुलाम रसूल घर पर मिली। रसूल के अलावा मोहम्मद अज़ीम, मोबशीर अली और अली अब्बास पीड़िता को वैन में लेकर गए थे, जिसमें से एक आरोपित की पहचान नहीं हो पाई है। संधा पुलिस ने तीनों आरोपितों को ओकारा शहर के दीपालपुर से गिरफ्तार कर लिया है जबकि कासिफ गुलाम रसूल अभी फ़रार चल रहा है।

आरोपित के चाचा का दावा, लड़की कासिफ की जायदाद है  

घटना के कुछ समय बाद आरोपित कासिफ का चाचा 5 जून को पीड़िता के साथ पुलिस थाने आया, जो कि 2 महीने से लापता थी। इसके बाद उसने निकाह का फर्ज़ी इस्लामी प्रमाण पत्र और पीड़िता की उम्र 18 वर्ष बताने के लिए फर्ज़ी आयु प्रमाण पत्र दिखाया। इसके अलावा आरोपित के चाचा ने सहमति का दस्तावेज़ भी दिखाया, जिससे वह साबित करना चाहता था लड़की ने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम स्वीकार किया है।

इसके बाद उसने पीड़िता को अपने घर वालों से मिलने के लिए जाने दिया और साथ में यह चेतावनी भी दी कि उसे अपने परिवार के पास वापस नहीं भेजा जाएगा। अंत में उसने दावा भी किया कि लड़की अपने पति की जायदाद है और अपने परिवार से मिलने के बाद उसे अपने पति के पास लौटना होगा। 

पुलिस ने नकारी पीड़िता को परिवार के हवाले करने की बात

अपनी बेटी से मुलाक़ात पर रुबीना ने बताया कि सांकेतिक भाषा में बात करते हुए कोमल बहुत ज्यादा हैरान और परेशान नज़र आ रही थी। पीड़िता ने बताया कि 5 मुस्लिम युवकों ने उसे बंधक बना कर उसके साथ बलात्कार किया और अपहरणकर्ता को हिरासत में लेने की जगह उल्टा उसे बंधक बना कर रखा गया। रुबीना ने यह सारी बातें पुलिस को बताईं, फिर भी पुलिस ने उसकी अपनी बेटी को साथ लेकर जाने से मना कर दिया। 

इसके बाद स्थानीय विधायक तारिक गिल ने पुलिस थाने पहुँच कर पीड़िता को रिहा करने और मामले की जाँच करने की बात कही। 6 जून को डॉक्टर तौकीर आसिफ़ा द्वारा किए गए मेडिकल परीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि पीड़िता का शारीरिक शोषण और बलात्कार हुआ है। पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग में किए गए इस मेडिकल परीक्षण के दौरान पीड़िता के बाएँ पैर और दाहिनी कलाई पर कई घाव मिले। 

कोमल ने सुनाई पूरी घटना 

लाहौर में डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर के सामने सांकेतिक भाषा के माध्यम से घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कोमल ने कहा:

“मैं 1.30 बजे अपने घर का फर्श साफ़ कर रही थी तभी कासिफ गुलाम रसूल और उसकी माँ रकिया अचानक से आए और घसीट कर मुझे बाहर ले गए। क्योंकि मैं मूक-बधिर हूँ, इसलिए मैं शोर मचा कर अपने घर वालों को बता नहीं पाई कि मेरे साथ क्या हो रहा है। इसके बाद उन्होंने मुझे एक कार में बैठाया और रावी नदी के किनारे लेकर गए। 19 मार्च को वह मुझे लाहौर स्थित जामिया नामिया लेकर गए और वहाँ मुझे जबरन इस्लाम कबूल कराया, कासिफ ने यह सब कुछ अंजाम दिया। उसने ही मुझसे जबरन निकाह भी किया, इसके बाद पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए वह मुझे अलग-अलग जगहों पर लेकर गया और इस दौरान वह मुझे पीटता भी था।”

पीड़िता की हालत सुधरी नहीं और मुख्य आरोपित को मिल गई जमानत 

कासिफ और उसकी माँ ने गिरफ्तारी के पहले मिलने वाली एडिशनल सेशन जज ज़ुल्फ़िकर अली के सामने गिरफ्तारी के पहले ही जमानत के लिए याचिका दायर की थी। आखिरकार 30 हज़ार रुपए का बॉन्ड भरने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई। इसके बाद दार-उल-अलूम जामिया नामिया के करी मोहम्मद सईद ने ने बयान दिया था कि कोमल ने बिना किसी डर के इस्लाम कबूल किया था और 19 मार्च को उसका निकाह कानूनी तरीके से किया गया था।

पीड़िता ने पिता पैटरस मसीह ने भी इस मामले में पुलिस की लापरवाही पर दुःख जताया था। लाहौर प्रेस क्लब के सामने हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सीआईए डीसीपी जावेद सादिक ने पीड़िता के परिजनों को भरोसा दिलाया कि पुलिस इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगी। फ़िलहाल पीड़िता को एक खुफ़िया स्थान पर रखा गया है, जहाँ उसकी हालत में सुधार के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। 

ब्रिटिश एशियन क्रिश्चियन एसोसिएशन के चेयरपर्सन जूलियट चौधरी ने बताया, “लड़की पर भयावह और दर्दनाक हमला हुआ था। मेरे उम्र की भी ऐसी शायद ही कोई महिला होगी, जो इस तरह के हमले से उबर पाए, उसने जितनी हिम्मत दिखाई है, वह सराहनीय है। उसने अंत तक ईश्वर से प्रार्थना की और भरोसा बनाए रखा। मेरी बेटी हैना भी ठीक उतनी ही उम्र की है और वह भी ब्रिटिश सांकेतिक भाषा समझती है, जैसे ही कोमल की हालत बेहतर होगी, मेरी बेटी उससे ज़रूर बात करेगी। जैसे ही यहाँ की क्रिश्चियन महिलाओं को इस घटना की पूरी जानकारी मिली कि उस बच्ची ने क्या-क्या झेला, सभी को बहुत कष्ट हुआ। यह घटना हमारे लिए आँख खोलने वाली है लेकिन सवाल यह है कि कितने लोग इस अत्याचार को रोकने के लिए आगे आना चाहते हैं।”                                  

केरल में सिर्फ 1 सोशल मीडिया पोस्ट पर हो सकती है 5 साल की जेल: FOE की रट लगाने वाले वामपंथियों का नया कानून

केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने राज्य की वामपंथी सरकार के उस अध्यादेश को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी किसी को 5 साल की जेल हो सकती है। ‘केरल पुलिस एक्ट’ में संशोधन कर के ऐसा नियम बनाया गया है। अगर पुलिस को लगता है कि कोई सोशल मीडिया पोस्ट आपत्तिजनक या धमकी भरा है, तो उस व्यक्ति को 5 साल की जेल की सजा हो सकती है।

केरल के राजभवन ने बताया कि ‘केरल पुलिस एक्ट’ में धारा 118 (A) जोड़ने वाले आदेश पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिया है। इसके तहत केवल पोस्ट ही नहीं, बल्कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य को भेजे गए कोई भी संदेश, चाहे वो कोई भी डिजिटल माध्यम हो, अगर आपत्तिजनक या धमकी भरे लगते हैं तो उसे या तो 5 साल कारावास होगा या फिर 10,000 रुपए जुर्माना, या दोनों ही सजा दी जा सकती है।

इस कानून से राज्य में फ्री स्पीच को बड़ा धक्का लगना तय है, क्योंकि पुलिस जिसे भी चाहेगी, उसे सिर्फ उसके सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर जेल भेज सकती है। पुलिस के पास इससे अब अतिरिक्त शक्तियाँ आ गई हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोगों को निशाना बना कर उन्हें गालियाँ देने की घटनाएँ बढ़ रही हैं, इसीलिए उन पर लगाम लगाने के लिए ये कानून लाया गया है।

केरल के अधिवक्ता अनूप कुमारण ने कानून के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है। वो इसी एक्ट के एक अन्य सेक्शन 118 (D) के खिलाफ भी हाईकोर्ट गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि इस कानून से लोगों की, खासकर महिलाओं की सोशल मीडिया पर पड़ने वाली गालियों से रक्षा होगी, लेकिन असली बात ये है कि इसका इस्तेमाल पुलिस और सरकार द्वारा उन लोगों को निशाना बनाया जाएगा, जो उनकी आलोचना करते हैं।

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने 118 (D) को भी निरस्त करते हुए इसे अवैध करार दिया था और कहा था कि ये अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है। केरल सरकार का कहना है कि अब हाईकोर्ट ने ही उसे सोशल मीडिया पर चलने वाले हेट कैंपेन्स और हमलों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। सीपीएम सरकार सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने में बढ़ोतरी होने की बात भी कह रही है।

ये वही पिनराई विजयन हैं, जो फ्री स्पीच को बचाने को लेकर ट्वीट्स किया करते थे। वामपंथी खुद को अभिव्यक्ति की आज़ादी का संरक्षक बताते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे दंगा आरोपितों का भी बचाव करते हुए कहते हैं कि इन्हें बोलने के लिए ही गिरफ्तार किया गया है। जबकि उत्तर कोरिया और चीन से लेकर केरल तक, जहाँ-जहाँ वामपंथियों की सरकार है, वहाँ लोगों के अधिकारों को दबा दिया जाता है।

इसी तरह शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस शासित महाराष्ट्र में पत्रकारों को सरकार व पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। एडिटर्स गिल्ड सीएम योगी को यूपी में ‘पत्रकारों की प्रताड़ना’ पर पत्र लिखता है लेकिन कि जब सवाल उठता है कि क्या एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ऐसा ही पत्र महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को लिखा है, जहाँ पर एक मीडिया चैनल और उनके पत्रकारों को बुरी तरह से परेशान किया जा रहा है – तो वो चुप हो जाता है।

तलाक के बाद अब राज्य भी बदलने का मूड, टीना डाबी के शौहर अतहर खान ने लगाई तबादले की अर्जी

हाल ही में साल 2015 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की टॉपर आईएएस अधिकारी टीना डाबी और उनके शौहर अतहर खान ने तलाक लेने के लिए जयपुर की फैमिली कोर्ट में अर्जी दायर की थी। अब ख़बरें आ रही हैं कि अतहर खान ने डेप्यूटेशन के लिए जम्मू कश्मीर जाने के लिए आवेदन किया है। ख़बरों की मानें तो उनका यह आवेदन फ़िलहाल गृह मंत्रालय में लंबित है, उस पर सुनवाई बाकी है। 

टीना और अतहर दोनों ही राजस्थान कैडर के अधिकारी हैं और दोनों को फ़िलहाल जयपुर में नियुक्ति मिली हुई है। आईएएस पति-पत्नी के अलग होने की बात सामने आने के बाद से ही चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। नौकरशाही से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर भिन्न-भिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अतहर खान ने गृह राज्य जम्मू कश्मीर जाने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद ही दोनों के बीच सबसे पहली बार दरार पैदा हुई थी। फ़िलहाल टीना डाबी और अतहर खान जयपुर फैमिली कोर्ड में तलाक की अर्जी देने के बाद से चर्चा में बने हुए हैं। 

इतना ही नहीं, दोनों को मुस्लिम देशों में भी गूगल पर काफी सर्च किया जा रहा है। इसके अलावा शुक्रवार (20 नवंबर 2020) को पूरे दिन दोनों ट्विटर पर ट्रेंड करते रहे। इसके पहले आईएएस पति-पत्नी के बारे में एक और बात सामने आई थी कि आईएएस अधिकारियों के लिए हाउसिंग बोर्ड की तरफ से एक अलग सोसाइटी बनाई गई है। जिसमें प्लॉट के लिए टीना डाबी और अतहर खान ने अलग-अलग आवेदन किया था। इस बात के सामने आते ही दोनों के बीच सब कुछ सामान्य नहीं होने की अटकलें तेज हो गई थीं। 

लगभग दो दिन पहले ही टीना डाबी को श्रीगंगानगर से सचिवालय के वित्त विभाग में स्थानांतरित किया था, इस पर राज्य निर्वाचन आयोग ने रोक लगा दी थी। दरअसल सेन्ट्रल डेप्यूटेशन पर जाने के लिए 9 साल, किसी अन्य केंद्र शासित राज्य में डेप्यूटेशन पर जाने के लिए 7 साल और जम्मू कश्मीर में डेप्यूटेशन पर जाने के लिए सिर्फ 5 साल के अनुभव की आवश्यकता होती है। अतहर खान का 5 वर्ष का अनुभव आगामी दिसंबर महीने में पूरा हो जाएगा, इसके बाद जम्मू कश्मीर में डेप्यूटेशन पर तैनाती के लिए उनकी योग्यता पूरी हो जाएगी।

अतहर खान ने टीना डाबी के साथ ही UPSC परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया था। दोनों की शादी साल 2018 में हुई थी। IAS टॉपर टीना डाबी और उनके पति अतहर खान की मर्जी से दायर इस अर्जी में कहा गया था, “हम आगे साथ नहीं रह सकते। ऐसे में कोर्ट हमारी शादी को शून्य घोषित करें।” उल्लेखनीय है कि टीना डाबी और अतहर आमिर-उल-शफी खान के बीच ट्रेनिंग के दौरान नजदीकियाँ बढ़ी थीं। इसके बाद इन्होंने साल 2018 में शादी कर ली। 

इसके बाद टीना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खान लिखने के साथ-साथ ‘कश्मीरी बहू’ का टैग भी लगा लिया था। हालाँकि, अभी कुछ दिन पहले टीना के फैंस ने नोटिस किया कि उन्होंने अपने अकाउंट से न केवल ‘कश्मीरी बहू’ का टैग हटाया है, बल्कि उसके साथ-साथ अपने पति को भी ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया है। इंस्टास्टोरी पर भी जय श्रीराम लिखते हुए हनुमान चालीसा की चौपाई- “सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना। जय श्रीराम” लिखी थी।

दोनों की शादी को 2018 में कई नेताओं और पत्रकारों सहित लिबरल गिरोह के लोगों ने सेलिब्रेट किया था। सोशल मीडिया पर उन्होंने इसे एक उदाहरण बताते हुए ख़ुशी जताई थी। किसी की शादी का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, लेकिन इन लोगों ने इसे ‘सांप्रदायिक सद्भाव’ की मिसाल के रूप में प्रस्तुत कर अपने एजेंडे के लिए इस मौके का इस्तेमाल किया। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गाँधी सबसे आगे थे।

मलेरिया, डेंगू के बाद कोविड-19 और उसके बाद सांप ने काटा: राजस्थान में फँसे ब्रिटिश नागरिक की कहानी

कोरोना काल से पहले राजस्थान आए ब्रिटिश मूल के एक नागरिक पहले डेंगू और मलेरिया की चपेट में आ गए, फिर कोरोना वायरस ने भी उन्हें अपनी जद में ले लिया। तीनों बीमारियों से जीतने के बाद उन्हें एक जहरीले साँप ने काट लिया। हैरानी की बात यह है कि वह इस जहर को भी मात देने में कामयाब रहे। इयान जोनस को जोधपुर जिले में एक कोबरा साँप ने काट लिया था, जिसके बाद उन्हें जोधपुर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल वो खतरे से बाहर हैं।

अस्पताल के डॉक्टर अभिषेक तातर ने कहा, “इयान जोनस को साँप द्वारा काटे जाने के बाद अस्पताल लाया गया था। शुरुआती जाँच में उनके कोरोना पॉजिटिव (दूसरी बार) होने का भी शक हुआ लेकिन जाँच में वो नेगेटिव पाए गए। उनके अंदर साँप के काटने के सभी लक्षण दिख रहे थे। उनकी दृष्टि कमजोर हो गई थी, वो मुश्किल से चल पा रहे थे। उनका इलाज किया गया। हमें लगता है कि कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होगा। इलाज के बाद जोनस ठीक हो गए और एक हफ्ते के अंदर अस्पताल से उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।”

इस बीच जोनस के बेटे सेब जोनस ने पिता की प्रशंसा करते हुए GoFundMe पर लिखा, “डैड योद्धा हैं, भारत में प्रवास के दौरान पिता कोविड-19 से पहले मलेरिया, डेंगू बुखार से पीड़ित हो चुके हैं।” सेब जोनस ने यह पेज पैसे जुटाने के लिए बनाए हैं, ताकि भारत में उनके मेडिकल बिल को भरा जा सके और उनके वापस इंग्लैंड जाने का भी प्रबंध किया जाए।

बेटे ने बताया कि उनके पिता कोरोना महामारी की वजह से यात्रा कर पाने में सक्षम नहीं थे और परिवार ने लोगों की मदद करने की उनकी इच्छा का सम्मान किया। जोनस राजस्थान के स्थानीय कारीगरों की बनाई पारंपरिक शिल्प को अपनी चैरिटी संस्था के जरिए ब्रिटेन में बिकवाने में मदद करते हैं। उनका मकसद उनके सामान की बिक्री से उनकी गरीबी दूर करने में मदद करना है। वह जल्द अपने देश लौटेंगे।

2 जिले, 3000 गाँव, 41 लाख को स्वच्छ पानी: विंध्याचल की बदल जाएगी तस्वीर, PM मोदी ने दी बड़ी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में ‘हर घर नल योजना’ का शुभारंभ किया। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों को सम्बोधित भी किया। कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। सोमवार (नवंबर 22, 2020) को हुए इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर और सोनभद्र में ‘हर घर नल योजना’ का शुभारंभ किया। 5,555.38 करोड़ रुपए की इस योजना से इन दोनों जिलों के 41 लाख ग्रामीणों के घर स्वच्छ जल पहुँचेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान एक दिलचस्प आँकड़ा देते हुए बताया कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक 398 गाँव ही पाइप वॉटर की सप्लाई से जुड़े हुए थे, लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत 2995 गाँवों को ये सुविधा मिलने जा रही है। मिर्जापुर के 21,87,980 और सोनभद्र के 19,53,458 लोगों तक पीने का पानी पहुँचेगा। जल शक्ति मंत्रालय इस पूरे कार्य की निगरानी कर रहा है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर घर जल पहुँचाने के अभियान को अब डेढ़ साल हो रहे हैं। इस दौरान देश में 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा परिवारों को उनके घरों में नल से शुद्ध पीने का पानी पहुँचाने का इंतजाम किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें लाखों परिवार उत्तर प्रदेश के भी हैं। पीएम ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पाइप से पानी पहुँचने की वजह से हमारी माताओं-बहनों का जीवन आसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा लाभ गरीब परिवारों के स्वास्थ्य को भी हुआ है। इससे गंदे पानी से होने वाली हैज़ा, टायफायड, इंसेफलाइटिस जैसी अनेक बीमारियों में भी कमी आ रही है। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि जब विंध्यांचल के हजारों गाँवों में पाइप से पानी पहुँचेगा, तो इससे भी इस क्षेत्र के मासूम बच्चों का स्वास्थ्य सुधरेगा, उनका शारीरिक और मानसिक विकास और बेहतर होगा। उन्होंने इस योजना के बारे में लोगों को जानकारी दी।

जब अपने गाँव के विकास के लिए, खुद फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलती है, उन फैसलों पर काम होता है, तो उससे गाँव के हर व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गाँव, आत्मनिर्भर भारत के अभियान को बल मिलता है। सीएम योगी सोनभद्र के चतरा ब्लॉक के करमाँव ग्राम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वो मिर्जापुर के लिए निकल गए। अगले दो वर्ष में इस योजना का काम पूरा हो जाएगा।

इसी महीने दीपावली के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को कई बड़े विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी।  उन्होंने 614 करोड़ रुपए की लागत से 30 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया था। उस दिन करीब 220 करोड़ रुपए की 16 योजनाओं के लोकार्पण के साथ, करीब 400 करोड़ रुपए की 14 योजनाओं पर औपचारिक रूप से काम शुरू हुआ।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार जिला मुस्लिम बहुल सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। बीते दिनों बिहार में छठ महापर्व का समापन हुआ, लेकिन कटिहार के रतौरा में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा में घाट पर आकर विघ्न डालने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। वीडियो में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा न करने देने और व्यवस्था को तहस-नहस कर देने के आरोप लगते हुए स्थानीय लोगों ने उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से भी हस्तक्षेप की माँग की।

स्थानीय ग्रामीणों के वीडियो बनाने के बाद सामने आया सच

कटिहार जिला के कोढ़ा प्रखंड के रतौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियादियरा स्थित दिघरि पंचायत के चामापारा गाँव के लोगों को संध्या अर्घ्य के दौरान (नवम्बर 20, 2020) मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा तंग किया गया। उनके अनुसार छठ घाट पर उपद्रव कर घाट पर तोड़फोड़ किया गया, जिसके बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना था कि शाम को तो वो किसी तरह पूजा करने में कामयाब रहे, लेकिन सुबह उनके साथ जिस तरह से व्यवहार किया गया, उससे वो काफी डर गए हैं।

सबसे पहले जो वीडियो सोशल मीडिया पर आया, उसमें कई श्रद्धालु, महिलाएँ एवं पुरुष, खड़े दिख रहे हैं। एक महिला ने बताया कि वो प्रशासन के लिए यहाँ खड़ी हैं। महिलाओं ने बताया कि थोड़े से विवाद के बाद उनके बनाए घाट वगैरह को उजाड़ डाला गया। वहीं एक युवक ने दावा किया कि इलाके में 30 घर हिंदू हैं और 30,000 घर मुस्लिम हैं (हालाँकि, ये दावा अपुष्ट है)। उसने बताया कि यहाँ के कुछ लोग चाहते थे कि सुबह में छठ महापर्व हो ही नहीं।

उसने आगे उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, जो कटिहार के ही विधायक हैं, उनसे निवेदन करते हुए कहा कि वो थाना प्रभारी को निर्देश दें कि वो वहाँ पर आकर अपनी निगरानी में छठ पूजा संपन्न करवाएँ। उस वीडियो में सभी महिलाओं एवं पुरुषों ने उक्त युवक की बात से सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें वहाँ प्रशासन की जरूरत है। उसने हिन्दुओं से अपील की कि इस वीडियो को वो फैलाएँ, जिससे उन्हें न्याय मिले।

एक अन्य महिला ने बताया कि घाट पर जब श्रद्धालु वहाँ अर्घ्य देने गए तो पटाखा उड़ाने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से विवाद हुआ। महिला ने बताया कि वहाँ ‘काफी सारे मुस्लिम समाज के लोग’ थे और शाम को अर्घ्य देने के बाद वो लोग जैसे ही घर लौटे, तभी वहाँ पर केले के सारे थम उखाड़ डाले गए और मुस्लिम समाज के लोगों ने वहाँ मल-मूत्र त्याग कर दिया। साथ ही सजावट को तबाह कर देने और गुब्बारों को फोड़ देने के भी आरोप लगाए।

क्या कहते हैं पीड़ित हिन्दू?

जब हमने स्थानीय लोगों से बात की तो कई चौंकाने वाले विवरण सामने आए। कटिहार के ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में गाँव के स्थानीय मौलाना के दामाद की सहभागिता थी, इसी कारण प्रशासन ने भी उन पर थाने के बाहर ही सुलह कर के मामले निपटाने के लिए कहा। उक्त व्यक्ति ने हमें बताया कि उस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के दबंगों द्वारा हिन्दुओं के खेतों की फसलें काट लेना आम बात है और ये इस तरह की पहली घटना नहीं है।

हमारी बात देवनारायण उराँव से हुई, जो इस घटना के पीड़ित हैं और उनके सामने ही ये सब कुछ हुआ। उन्होंने हमें पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से समझाते हुए बताया कि वो अन्य श्रद्धालुओं के साथ सांध्य अर्घ्य के दिन दोपहर 1 बजे घाट पर गए और पूरे मन से वहाँ पर सजावट की। उन्होंने बताया कि पूरी साफ़-सफाई करने के बाद घाट को चमकाया गया। इसके बाद सारे ग्रामीण लौट आए और स्नान-ध्यान कर के पूजा की तैयारी के साथ वापस घाट के लिए शाम 4 बजे निकले। उन्होंने बताया:

“हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, मुस्लिम समाज के लोग हमें परेशान करने लगे। वो लोग कह रहे थे कि अगर तुम छठ करने गए तो तुम्हें घाट पर से फेंक दूँगा। इसके बाद हम लोग किसी तरह पूजा-पाठ निपटाने के बाद वापस घर आ गए। अभी हमें घर पहुँचे आधे घंटे भी नहीं हुए थे कि सारी सजावट नोच डाली गई थी। धमकियों के बाद हमारे बच्चे घाट देखने गए थे कि सब सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने देखा कि हमारे लगाए हजार गुब्बारों में से एक भी नहीं बचा है। मुझे जैसे ही इसकी सूचना बच्चों ने दी, मैंने अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद मैं सारे ग्रामीणों के साथ थाना गया। वहाँ हमें ही शांतिपूर्वक बैठने को कहा जाने लगा। हमने पूछा कि क्या हम थाना प्रभारी से बात करने में सक्षम नहीं? तत्पश्चात रतौरा थानाध्यक्ष को हमने सारी बात बताई।”

बकौल देवनारायण उराँव, आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने में पूछा कि यहाँ एक मंदिर टूट जाता है, फिर भी आप लोग कुछ क्यों नहीं करते? हमारे आक्रोश के बाद पुलिस हमें लेकर रात के 10 बजे घाट पर गई। वहाँ जाकर पुलिस ने वीडियो बनाया और हमारे दावे सही पाए। उन्होंने ये भी बताया कि पुलिस ने पुनः सजावट के लिए 500 रुपए की मदद की। उन्होंने बताया कि फिर से बाँस वगैरह काटने पड़े और पूरी सजावट भी करनी पड़ी।

क्या वहाँ पहले से भी हिन्दुओं को परेशानी थी? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि स्थानीय हिन्दू ठीक से शादी-विवाह तक नहीं कर पाते हैं और पूजा-पाठ के दौरान भी तनाव का माहौल पैदा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह के अर्घ्य के समय प्रशासन वहाँ मौजूद था, वरना हम छठ ठीक से नहीं कर पाते। उनका कहना है कि स्थानीय हिन्दू अपने धर्म के नियम-कायदे निभाने को भी तरस जाते हैं। साथ ही जानकारी दी कि इन चीजों के सम्बन्ध में पहले भी थाने में आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस अब बड़ी घटना होने के बाद हरकत में आई है।

कई वीडियो में हिन्दू कार्यकर्ता न्याय के लिए नारेबाजी करते हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही पुलिस की गाड़ी के पास जनता मौजूद दिख रही है। घाट पर तहस-नहस स्थिति में चीजें भी दिख रही हैं, जिनसे महिलाएँ खासी आक्रोशित हैं। एक महिला ने बताया कि वहाँ मुस्लिम समाज के लोग इतनी संख्या में जमा हो गए थे, जितने पर्व मनाने के लिए हिन्दू भी नहीं जाते हैं। महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ जबरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है।

महिला ने बताया कि जब तक ग्रामीणों ने थाने पहुँच कर हंगामा नहीं किया, तब तक पुलिसकर्मी नींद से नहीं जागे। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग सोचते हैं कि हिन्दू संख्या में कम हैं, इसीलिए मारपीट कर भगा देंगे। साथ ही ये भी कहा कि जमीन-जायदाद के झगड़े भी वो हिन्दू समाज के लोगों के साथ करते रहते हैं। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग बोलते हैं कि ‘मुस्लिम इलाका बनाएँगे, हिन्दुओं को यहाँ रहने नहीं देंगे और उनकी जमीनें हड़प के उन्हें भगा देंगे’।

उजाड़े जाने के बाद छठ घाट का नजारा

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी हमें ग्रामीण विकास उराँव ने दी, जिन्होंने रुआँसे स्वर में कहा कि गाँव के लोग मीडिया में अपनी बात रखने के लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन एक भी मीडियाकर्मी वहाँ नहीं पहुँचा है। उन्होंने बताया कि वो भी छठ घाट पर हुई इस हरकत के गवाह हैं। साथ ही दावा किया कि मुस्लिम समाज के कुछ असामाजिक तत्व छठ पर्व कर रही महिलाओं का कपड़े बदलते हुए वीडियो बना रहे थे, जिसके लिए मना करने पर हंगामा शुरू हुआ।

विकास उराँव ने बताया, “हम क्या करें? हम शादी-विवाह तक ठीक से नहीं कर पाते। मुस्लिम समाज के युवक जबरदस्ती हमारे शादी समारोह में घुस जाते हैं और नाचने लगते हैं। हमारे घर की लड़कियों का दुपट्टा खींचा जाता है। महिलाओं के साथ छेड़खानी होती है। हम किसी से कुछ कह नहीं सकते।” विकास बार-बार कह रहे थे कि मीडिया उनके गाँव में आए तो हर ग्रामीण अपनी बात रखने के लिए बेचैन है, लेकिन साथ ही सब डरे हुए भी हैं।

क्या है पुलिस का कहना?

वहीं कटिहार के SDPO अमरकांत झा का भी इस मामले को लेकर बयान आया है। उन्होंने बताया कि रौतारा में छठ पूजा में कुछ असामाजिक तत्वों ने हल्का सा विध्वंस किया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई, वो हरकत में आई और दोनों समय की छठ पूजा संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि अब वहाँ शांति है। उनका कहना है कि ये कोई उस तरह की बड़ी घटना नहीं थी, इसीलिए अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

इस मामले में अब तक कोई गिरफ़्तारी भी नहीं हुई है। SDPO शर्मा ने जानकारी दी कि चीजें सुलझा ली गई हैं, क्योंकि थानाध्यक्ष ने त्वरित पहल की, वो खुद भी घटना की निगरानी कर रहे थे और एसपी ने भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे। देर रात की सामने आई कई वीडियो में पीड़ित हिन्दू और पुलिस की गाड़ियाँ घटनास्थल पर जाती हुई दिख रही हैं। साथ ही इसकी सूचना मिलते ही बजरंग दल और विहिप के पदाधिकारी भी वहाँ पहुँचे।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से कहा कि बिहार सरकार को संवेदनशील सीमांचल के इलाके में हिन्दू धर्म स्थलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहाँ हिन्दू डर कर रह रहे हैं। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को वहाँ जाकर लोगों की बातें सुननी चाहिए। बंसल ने कहा कि ये बहुत ही बड़ी घटना है और सीमांचल में बढ़ती इस्लामी कट्टरता खतरनाक है।

बिहार में चुनाव के दौरान दुर्गा पूजा विसर्जन में मुंगेर में हुई घटना को लेकर हिन्दू पहले से ही आक्रोशित हैं। उस घटना में दो युवकों की मौत की बात सामने आई थी। ‘मुंगेर बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ ने ऑपइंडिया को बताया था की उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ कि पूरा मुंगेर देख कर रो पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि फायरिंग प्रशासन ने ही की है और पुलिसकर्मी इंसास राइफल और पिस्टल लहराते नज़र आ रहे थे।

मुंबई से लापता 23 साल की ‘जूही’ लोकल ‘गुंडे’ रहीम शेख के साथ भागी थी, UP में पुलिस ने किया ट्रेस

नोट: स्टोरी नीचे अपडेट की गई है

मुंबई की 23 साल की एक लड़की लापता है। नाम है जूही (बदला हुआ नाम) और 18 नवंबर 2020 से उनके घर वालों का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार का आरोप है कि उनका अपहरण एक लोकल गुंडे रहीम शेख ने किया है।

चेतन शेट्टी लापता लड़की जूही के एक रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस दावा कर रही है कि लड़की सही सलामत है। लेकिन उन्होंने सवाल पूछने के अंदाज में कहा कि अगर जूही ठीक-ठाक हैं तो वे उनसे बात क्यों नहीं कर पा रहे। उनके अनुसार पुलिस ने अभी तक रहीम शेख का भी पता नहीं लगाया है।

लापता लड़की के रिश्तेदारों के अनुसार, 18 नवंबर 2020 को वह अपना लैपटॉप बैग और अन्य चीजें लेकर ऑफिस के लिए निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटीं। वे 18 तारीख को ही पुलिस में शिकायत दर्ज करने गए लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया।

19 तारीख को वे फिर से पुलिस स्टेशन गए, तब जाकर पुलिसवालों ने कथित तौर पर शिकायत दर्ज की। चेतन शेट्टी की मानें तो FIR अभी तक दर्ज नहीं की गई है। उनका कहना है कि पुलिस ने आरोपित लड़के के परिवार से बात भी की है लेकिन लापता जूही से अभी तक उन लोगों को बात नहीं करवाई गई है।

चेतन शेट्टी ने बताया, “लड़का (रहीम शेख) आपराधिक पृष्ठभूमि का है। पुलिस को इसकी जानकारी है। हमेशा उसके खिलाफ कोई ना कोई आपराधिक मामला चलता ही रहता है।”

लापता लड़की के परिवार का कहना है कि जूही और रहीम एक-दूसरे को जानते थे क्योंकि वे एक ही चॉल में पास में रहते थे और आपस में बातचीत करते थे। हालाँकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वह हमेशा ही परिवार के सदस्यों को धमकी और उनसे साथ दुर्व्यवहार करता था।

लापता जूही के परिवार का कहना है:

“हम अब चिंतित हैं क्योंकि पुलिस 5 दिनों से उसका पता लगाने में सक्षम नहीं है। हम नहीं जानते कि हमारी लड़की सुरक्षित है या नहीं।”

परिवार का आरोप है कि पुलिस विक्रोली में कहीं न कहीं रहीम का पता लगाने में सफल रही है, लेकिन उसका पता लगाने और उसे वापस लाने का प्रयास नहीं किया जा रहा। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया, “हमने उन्हें जूही के फोन का IMEI नंबर भी दिया है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया है।”

अपडेट: रिपोर्ट के पब्लिश किए जाने के बाद लापता लड़की को उत्तर प्रदेश में खोज निकाला गया है। लड़की के परिवार वालों का कहना है कि अगर वो स्वेच्छा से घर वापस आती है तो उसका स्वागत है वरना सारे रिश्ते तोड़ लिए जाएँगे।

केरल: ‘लाल किले’ को असम की बेटी मुन्मी की चुनौती, कहा- गाँव-गरीब तक मोदी की योजनाएँ ले जाने के लिए लड़ रही हूँ

वामपंथियों के गढ़ केरल में अगले महीने स्थानीय निकाय के चुनाव होने वाले हैं। स्थानीय निकाय चुनाव 8, 10 और 14 दिसंबर को तीन चरणों में कराए जाएँगे। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये घोषणा की। बताया जा रहा है कि अगर कोविड महामारी नहीं आती, तो 11 नवंबर तक चुनाव संपन्न हो जाना था।

सभी पार्टियाँ चुनाव प्रचार की तैयारियों में व्यस्त है। इस चुनाव में बीजेपी ने मुन्मी शाजी (मुन्मी गोगोई) को भी उतारा है। मुन्मी असम के लखीमपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने केरल के कन्नूर की इरिट्टी पंचायत के एक युवक से शादी की है। अब वह बीजेपी के टिकट पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ रही हैं। 

मुन्मी का कहना है कि वे पीएम मोदी की योजनाओं को गाँव और गरीबों तक पहुँचाने के लिए चुनाव लड़ रहीं हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “पंचायत के लोगों ने मुझे अपने परिवार के रूप में स्वीकार किया है, स्थानीय लोगों ने भी मुझे स्वीकारा है।”

वो आगे कहती हैं, “पीएम मोदी ने हमारे लिए कई योजनाएँ बनाई हैं। इनमें से कुछ योजनाएँ गरीब परिवारों तक नहीं पहुँच रही हैं। मैं भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हूँ और इन योजनाओं को अपने गाँव में लाने के लिए कोशिश कर रही हूँ।”

मुन्मी ने न्यूज 18 से बात करते हुए बताया था, “असम के लखीमपुर में मेरा परिवार कॉन्ग्रेस का समर्थन करता है, लेकिन मैं भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हूँ। मेरे पति कन्नूर में भाजपा कार्यकर्ता हैं और मैं स्थानीय आरएसएस निकाय में शामिल हूँ। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और केरल में गरीबों के लिए भाजपा की योजनाओं और नीतियों से प्रेरित हूँ। मेरे डोर-टू-डोर अभियान के दौरान, मैंने देखा है कि लोगों ने मुझे अपनी बहू के रूप में स्वीकार किया है। मैंने इन सात वर्षों के दौरान मलयालम पर अच्छी पकड़ बना ली है और इससे मुझे अपने मतदाताओं से जुड़ने में मदद मिल रही है।”

मुन्मी गोगोई के भाई गौरव गोगोई को अपनी बहन पर काफी गर्व है। वो कहते हैं, “मुझे अपनी बहन पर गर्व है, जो असम की लड़की होने के नाते, केरल में चुनाव लड़ रही है। बचपन से ही उनमें नेतृत्व के गुण थे जो उनकी खेल गतिविधियों में परिलक्षित होते थे। मैं उसकी शादी के बाद से उसके यहाँ नहीं गया, लेकिन जल्द ही जाने की योजना बना रहा हूँ।”

इसके अलावा राज्य में अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार ‘कोरोना थॉमस’ इन दिनों अपने नाम को लेकर चर्चा में हैं। मैथीलिल वार्ड से भाजपा की उम्मीदवार का नाम ‘कोरोना’ मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय उनके नाम के कारण उन्हें काफी शर्मिंदगी हुई थी, लेकिन चुनाव अभियान में अब वह उनके लिए वरदान साबित हो रहा है।

कोरोना ने कहा, “मेरे नाम की वजह से लोग प्रचार अभियान के दौरान मुझे पहचान रहे हैं। मैं जहाँ भी जाती हूँ लोग हैरानी के साथ मेरा नाम लेते हैं। मैं उम्मीद करती हूँ कि मेरा नाम चुनाव के दिन मतदाताओं को मुझे याद रखने और मेरे पक्ष में वोट डालने में मदद करेगा।”

गौरतलब है कि राज्य में 1,199 स्थानीय निकायों के चुनाव होंगे, जिनमें 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 86 नगर पालिका और छह निगम शामिल हैं। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। पाँच जिले– तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा और इडुक्की में 8 दिसंबर को चुनाव होंगे। 10 दिसंबर को कोट्टायम, एनार्कुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और वायनाड में चुनाव होंगे, वहीं कोझीकोड, मलप्पुरम, कन्नूर और कासरगोड में 14 दिसंबर को मतदान होगा।

राजस्थान के एक ही गोशाला में 94 गायों की मौत, कई की हालत गंभीर: चारे के नमूनों की हो रही जाँच

राजस्थान में चूरू जिले के सरदारशहर में शनिवार (नवंबर 21, 2020) को एक गोशाला में 94 गायों की मौत हो गई। इसके साथ ही कई गायों की हालत गंभीर है, जिनका उपचार किया जा रहा है। गायों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल शुरुआती जाँच में विषाक्त भोजन मौत का कारण माना जा रहा है।

 

यह घटना सरदारशहर में बिल्युबास रामपुरा की श्रीराम गोशाला की बताई जा रही है। गोशाला में गायों की मौत से हड़कंप मच गया है। बताया जाता है कि गोशाला की 100 से भी अधिक गायें बीमार थीं। इधर, गायों की मौत का पता चलते ही गोशाला में काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए।

सूचना मिलने पर पशुपालन विभाग की टीम भी मौके पर पहुँच गई। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि गायों को शुक्रवार शाम बाजरे का चारा खिलाया गया था। इसके बाद ही गायें बीमार पड़ीं और उनकी मौत हो गई है।

विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जगदीश बरबड़ ने बताया कि कुछ और गायें भी बीमार हैं। हालाँकि उनमें से ज्यादातर की हालत ठीक है। उन्होंने बताया कि संभवत: कुछ विषाक्त चीज खाने के कारण ऐसा हुआ। चारे के नमूने लेकर उसे जाँच के लिए भेजा गया है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन उपखंड में किसी असामाजिक तत्व ने गाय को विस्फोटक पदार्थ खिला दिया था, जो कि उसके मुँह में ही फट गया। विस्फोटक पदार्थ के फटने से गाय गंभीर रूप घायल हो गई। विस्फोटक के फटने से गाय के मुँह से खून ही खून बह रहा था।

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले के बरबसपुर गाँव में काँजी हाउस में 10 गायें मृत अवस्था में पाई गई। इन गायों को कमरे के अंदर बंद कर दिया गया था। तब एक अधिकारी ने बताया था कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि गायों की मौत दम घुटने की वजह से हुई।

इससे पहले छत्तीसगढ़ के ही बिलासपुर जिले के एक गाँव में 50 से अधिक गायों को पंचायत भवन में बंद कर रखा गया था। इनमें से 40 की दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। बिलासपुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. शरण मित्तर ने गाँव के सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी थी।

कमांडो ट्रेनिंग लेकर रात के अँधेरे में 30 किमी पैदल चले थे 4 आतंकी… 200 अभी भी LOC पर घुसपैठ की फिराक में

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में 19 नवंबर को हुए एनकाउंटर की जाँच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल कमांडर और 2016 पठानकोट हवाई बेस पर हुए आतंकवादी हमलों के आरोपित कासिम जन के शामिल होने की बात सामने आ रही है। कासिम उन आतंकी कमांडर में से एक है जो जैश के आतंकियों को भारत भेजता है और पूरे दक्षिणी कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों के बीच उसकी पकड़ काफी मज़बूत है। वह सीधे जैश चीफ मुफ्ती रऊफ असगर को रिपोर्ट करता है। 

भारत के आतंकवादी विरोधी अधिकारियों के मुताबिक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटाए जाने के बाद और तालिबान के पुनरुत्थान के साथ जैश जम्मू-कश्मीर की सीमा पर काफी सक्रिय हो चुका है। इसके अलावा कम से कम 14 प्रशिक्षित आतंकवादी गुजरांवाला के ज़रिए भारत में घुसपैठ करने का इंतज़ार कर रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने बताया, “अलग-अलग तंज़ीम (समूह) के लगभग 200 आतंकवादी नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ़ कंट्रोल) के इर्द-गिर्द स्थित लॉन्च पैड पर मौजूद रहकर भारत में घुसपैठ करने का इंतज़ार कर रहे हैं। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है अल-बदर का दोबारा अस्तित्व में आना और लश्कर-ए-मुस्तफ़ा जैसे नए आतंकवादी संगठनों का पैदा होना है, जिसकी अगुवाई हिदायतुल्लाह मलिक कर रहा है। इसके अलावा अन्य आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैय्यबा जो 23 अलग आतंकवादियों को खैबर पख्तूनखवा के जंगल मंगल कैम्प में प्रशिक्षण दे रहा है।”    

ग्लोबल पोजिशनिंग सेट, वायरलेस और रिसीवर्स द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक़ नगरोटा में मारे गए 4 जैश आतंकियों को कमांडो ट्रेनिंग दी गई थी। इन आतंकवादियों ने शकरगाह स्थित जैश कैम्प से संबा बॉर्डर के बीच 30 किलोमीटर की दूरी पैदल पूरी की और अंत में जटवाल स्थित पिकअप प्वाइंट पर गए जो कठुआ से संबा तक 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका मतलब यह है कि सभी आतंकवादियों ने पिक अप प्वाइंट पर पहुँचने के लिए देर रात यात्रा की और इसके बाद वह जम्मू-कश्मीर की तरफ आगे बढ़े।  

एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़, “अंतर्राष्ट्रीय सीमा की पिकअप प्वाइंट से दूरी (एरियल डिस्टेंस) लगभग 8.7 किलोमीटर है और शकरगाह स्थित जैश-ए-मोहम्मद का कैम्प जटवाल से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। संभावित घुसपैठ सांबा सेक्टर में मौजूद मावा गाँव के रास्ते से हुई जो रामगढ़ और हीरानगर सेक्टर के बीच स्थित है। नोनाथ नला के पास कई कच्चे रास्ते हैं जो पिकअप प्वाइंट से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पहुँचते हैं। नला, पाकिस्तानी गाँव चक जमाल के पास बेन नला से मिलता है। माना जा रहा है कि आतंकवादियों ने इन तमाम रास्तों की मदद से यह दूरी 2.5 से 3 घंटे के बीच पूरी की।”

इस बात के सबूत मौजूद हैं कि ट्रक (जेके 01 ए एल 1055) को सुबह के 3.44 पर सरोरे टोल प्लाज़ा पार कर जम्मू की तरफ बढ़ते देखा गया था। इसके बाद नरवल बायपास का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर की तरफ बढ़ते हुए देखा गया, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने 4.45 पर कार्रवाई करते हुए टोल प्लाज़ा बंद कर दिया था। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक़ सारे आतंकवादी आत्मघाती हमलावर थे क्योंकि इनके पेट और जाँघ के बीच का हिस्सा शेव किया गया था, जैसा कि जिहादियों के मामले में पहले भी देखा गया है। असाल्ट राइफल, अंडर बैरल राकेट लांचर और बंदूकों के अतिरिक्त इन चार आतंकवादियों के पास ईंधन के साथ मिला हुआ 6.5 किलो नाइट्रो सेल्यूलोस भी बरामद किया गया था।