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पति को छोड़ इस्लाम कबूल कर मेरे साथ रहो… वरना तेरा अश्लील वीडियो वायरल कर दूँगा: UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

गोरखपुर के गीडा इलाके की एक महिला ने अपने ही गाँव के एक व्यक्ति पर जबरन धर्मपरिवर्तन और यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि आरोपित शख्स उसकी अश्लील वीडियो बना कर उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है और ऐसा नहीं करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी भी दे रहा है। इस संबंध में पुलिस ने आरोपित युवक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, महिला का पति शहर से बाहर रहता है। इस दौरान उसकी दोस्ती गाँव के एक युवक से हो गई। जिसका फायदा उठाकर युवक ने मौका देखते ही मोबाइल फोन से महिला का आपत्तिजनक वीडियो बना लिया।

आरोपित पिछले कुछ दिनों से महिला पर दबाव बनाने लगा कि वह अपने पति को छोड़ कर इस्लाम धर्म कबूल करे और उसके साथ रहे। जब महिला ने धर्मपरिवर्तन से इनकार कर दिया, तो उसने उसे धमकी दी कि वह उसका वीडियो वायरल कर देगा।

धमकियों से परेशान हो महिला ने इसकी शिकायत अपने पति से कर दी। मामले के बारे में जानने के बाद पति ने युवक को फोन कर फटकार लगाई। साथ ही धमकियों के बारे में महिला के मायके वालों को भी जानकारी दी।

मामले को गम्भीरता से लेते हुए सोमवार को महिला के परिजनों ने गीडा थाने पहुँच कर इसकी शिकायत दर्ज कार्रवाई। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस से मामले में उचित कार्रवाई करने की माँग भी की।

गौरतलब है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए गीडा थाना प्रभारी डीके सिंह ने कहा कि क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है क्योंकि इस मामले में दो अलग-अलग समुदाय के लोग शामिल हैं।

वो यूनिवर्सिटी जहाँ से निकले ग्रैजुएट्स बनते हैं दुनिया के सबसे बड़े और खूंखार आतंकी

पाकिस्तान का नाम आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए विश्व भर में कुख्यात है। पाकिस्तान लगातार ऐसे इस्लामी आतंक को पनाह देता आया है जिनके निशाने पर भारत, अफगानिस्तान और संयुक्त राष्ट्र जैसे पश्चिमी देश हैं। 

वहाँ अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, तालिबान जैसे आतंकी संगठन बिलकुल आजाद होकर घूमते हैं। इतना ही नहीं राजनीतिक और सेना का संरक्षण भी इन संगठनों को दिया जाता है और इन्हीं को सुरक्षित रख कर या सबकी नजरों से छिपाकर पाकिस्तान अपने गुप्त प्रोपगेंडे को पूरा करता है।

पाक की ऐसी हरकतों के कारण FATF ने उसे साल 2018 से ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है। उस पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह अपनी सरजमीं पर आतंकियों को ऐसा माहौल देते हैं कि उनके संगठन ऑपरेट किए जा सकें।

सोचने वाली बात यह है कि आखिर एक इस्लामिक राष्ट्र इतनी तेजी से आतंकवाद की फैक्ट्री कैसे बन रहा है? क्यों हर आतंकी इस जगह को अपने लिए जन्नत मानता है? क्यों यहाँ 9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पकड़ा जाता है? कहाँ से यह आतंकी संगठन नए लोगों को भर्ती करते हैं? 

दारुल उलूम हक्कानिया- ‘यूनिवर्सिटी ऑफ जिहाद’

एएफपी की हालिया रिपोर्ट ने इन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। इस रिपोर्ट में दारुल उलूम हक्कानिया का जिक्र किया गया है। इसे जिहाद यूनिवर्सिटी बताते हुए कहा गया है कि यही संगठन लोगों में इस्लामी जिहाद के बीज बोता है और बाद में उन्हें आतंकी संगठनों को मुहैया करवाकर उनकी मैनपावर बढ़ाता है।

यहाँ तालिबान से जुड़े आतंकियों का नाम शान से लिया जाता है और बताया जाता है कि इस मदरसे से तालीम लेकर निकले आतंकी कैसे तालिबान में बड़े ओहदों पर पहुँचे है। इसमें इस्लाम के ‘दुश्मनों’ के ख़िलाफ नए जिहादियों को मजहबी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरणा भी दी जाती है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर (35 मील) पूर्व में अकोरा खट्टक में दारुल उलूम हक्कानिया मदरसे का कैंपस बना हुआ है। यहाँ 4000 जिहादियों को पनाह दी जाती है। इन्हें मुफ्त में खाना, आश्रय और पहनने को कपड़े मिलते हैं। इनके भीतर तालीम के नाम पर उग्रवाद और कट्टरपंथ भरा जाता है।

कई तालिबानियों ने ली है दारुल उलूम हक्कानिया से तालीम

इस मदरसे की शुरुआत मौलाना अब्दुल हक ने 1947 में की थी। उनके बाद 81 साल के कट्टरपंथी उलेमा समीउल हक को इसकी देख-रेख की जिम्मेदारी मिली मगर आतंकियों ने साल 2018 में उसे उसके घर पर ही मार डाला।

उसने 1980 के दशक में सोवियत के ख़िलाफ़ अफगान मुजाहिद्दिनों का साथ दिया था और बाद में उस तालिबान का भी समर्थन किया था, जिसने यूएस-नाटो के ख़िलाफ़ अफगान में हमले शुरू किए। कहा जाता है कि पाकिस्तान की पूर्व पीएम बेनेजीर भुट्टो को मारने वाला आतंकी भी इसी यूनिवर्सिटी का ग्रैजुएट था।

इस यूनिवर्सिटी का प्रभाव साल 2014-15 में देखने को मिला था, जब पूर्व पीएम नवाज शरीफ को देश में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए समीउल हक से अनुरोध करना पड़ा था कि वह आतंकी संगठनों पर अपनी आड़ का इस्तेमाल करें। दिलचस्प बात यह है कि यह वो समय था, जब पाकिस्तान के तालिबानियों ने देश के भीतर हमले करने शुरू कर दिए थे। पेशावर आर्मी स्कूल में साल 2014 में हमला हुआ था, जिसे पाकिस्तानी तालिबानियों ने करवाया था।

पाक सरकार देती है हक्कानिया यूनिवर्सिटी को आर्थिक संरक्षण

आज हक्कानिया को इमरान सरकार की ओर से आर्थिक संरक्षण दिया जाता है। साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने दारुल उलूम के लिए 277 मिलियन रुपए अनुदान किए थे। इससे पहले साल 2016-2017 में 300 मिलियन रुपयों की सहायता दारुल उलूम को मिली थी।

इतना ही नहीं, साल 2018 में पीएम इमरान खान ने भविष्य के आतंकी नेताओं को पोषित करने के लिए आर्थिक सहायता का समर्थन किया था। खान ने दावा किया था कि ऐसी मदद से मदरसों के छात्रों को मुख्यधारा में लाने में और कट्टरता से दूर रखने में मदद होगी।

अफगान के नेता भी है पाकिस्तान के इस समर्थन के खिलाफ़

भारत की तरह अफगानिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा ऐसे कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा देने के लिए उन पर निशाना साधता रहता है। हाल में अफगान के नेताओं ने पाकिस्तान द्वारा मदरसे को आर्थिक समर्थन देने पर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि इससे पता चलता है कि पाक तालिबान को समर्थन देता है।

बता दें कि अभी हाल में दारुल उलूम हक्कानिया के नेताओं ने अफगानिस्तान में तालिबान विद्रोह का समर्थन करते हुए गर्व से एक ऑनलाइन वीडियो साझा किया था, जिस पर काबुल की सरकार ने नाराजगी जताई थी।

इस पर अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रवक्ता सादिक सिद्दीकी ने कहा था, “ये संस्थाएँ कट्टरपंथी जिहाद को जन्म देती हैं, तालिबानी पैदा करती हैं और हमारे देश को धमकी दे रही हैं।” 

पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध इमारत पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: गैंग के धंधों को करता है मैनेज

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार मुख्य रूप से मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद की अवैध सम्पत्तियों पर शिकंजा कस रही है। इसी क्रम में अब पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है। मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के अवैध निर्माण पर योगी सरकार का बुलडोजर चला।

अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के जिस अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया, वो 2500 वर्ग गज का है और खुल्दाबाद के चकिया क्षेत्र में बनाया गया था। पीडीए से नक्शा स्वीकृत कराए बिना ही यहाँ अवैध रूप से निर्माण कर दिया गया। इमरान जई ही अतीक अहमद के सारे अवैध कारोबार को संभालता है और उसके धंधों और सम्पत्तियों का प्रबंधन करता है। उस पर कई गंभीर आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं।

हिस्ट्रीशीटर इमरान फ़िलहाल फरार चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की अलग-अलग संस्थाएँ प्रदेश भर के माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई कर रही है, उसी क्रम में इस कार्रवाई को भी अंजाम दिया गया। जिस इमारत को ध्वस्त किया गया, वो इमरान जई का आवास हुआ करता था। पुलिस को उसकी तलाश है और उसकी गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अतीक अहमद गैंग के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई जारी है।

इससे पहले प्रशासन ने अहमद के करीबी जुल्फिकार उर्फ तोता पर भी शिकंजा कसा था। शूटर तोता के तीन मंजिला अवैध मकान को अक्टूबर 2020 में धूमनगंज के कंसारी मसारी में पीडीए में ध्वस्त किया गया था। इस मकान की कीमत करोड़ो में थी। जुल्फिकार का ये अवैध मकान करीब 300 वर्ग गज क्षेत्रफल में बना हुआ था, जिसका नक्शा उसने पास नहीं कराया था। वो फ़िलहाल जेल में बंद है।

अक्टूबर 2020 के अंतिम सप्ताह में खबर आई थी कि अतीक अहमद की अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्तियों को जब्त किया जा चुका है। इसके साथ ही उसके कई गुर्गों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की गई है। उसके गुर्गों की 50 करोड़ रुपए की संपत्ति पर बुलडोजर चला है। इस तरह से कुल आँकड़ा 250 करोड़ रुपए हो जाता है। अभी कार्रवाई रुकी नहीं है और उसकी और सम्पत्तियों को नेस्तनाबूत किया जाना है।

MP में लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने जा रही शिवराज सरकार: दोषी को 5 साल तक की कठोर सजा

मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के मकसद से मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 लाने की तैयारी में है। इस नए अधिनियम में जोर जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर पाँच साल तक की सजा का प्रावधान हेागा।

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (17 नवंबर, 2020) को यह बड़ा बयान दिया है। नरोत्तम मिश्र ने कहा कि जल्द ही हम विधानसभा में लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएँगे। यह गैर-जमानती अपराध होगा। जिसमें दोषियों को 5 साल तक की सजा का प्रावधान होगा।

उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में शिवराज सरकार लव जिहाद को लेकर फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2020 के लिए विधेयक पेश किया जाएगा और कानून बन जाने के बाद गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज कर 5 साल तक की कठोर सजा दी जाएगी।

साभार:जी न्यूज

उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद में किसी भी प्रकार से सहायता करने वालों को भी मुख्य आरोपित की ही तरह सज़ा दी जाएगी और शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कोई भी अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन कर शादी नहीं कर सकता लेकिन अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर शादी करना चाहता हो, तो इसके लिए सम्बंधित शख्स को एक महीने पहले कोर्ट में अर्जी लगानी पड़ेगी। वहीं, बिना आवेदन के अगर धर्मांतरण किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई जोर-जबरदस्ती, बलपूर्वक या धोखे से शादी करता है तो धोखे से पहचान छिपाकर की गई शादी को इस कानून के बाद रद्द माना जायेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने की बात कही थी। बेटियों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सीएम ने कहा था कि कि लव जिहाद के मामलों से सख्ती से निपटा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लव जिहाद के खिलाफ जो कानून बनाया जाना है उसका खाका तैयार कर लिया गया है। बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की बात कह चुके है।

‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

अमित शाह ने गुपकार गठबंधन पर साधा निशाना

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।

‘बचपन से रामायण और महाभारत की कथाएँ सुनते हुए बड़ा हुआ हूँ, भारत से खास लगाव’: बराक ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत में लगातार सुर्ख़ियों में हैं। अब बराक ओबामा ने बताया है कि उनका भारत से हमेशा से अच्छा जुड़ाव रहा है, क्योंकि उनका बचपन इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत की कथाओं को सुनते हुए बीता है। उन्होंने बताया है कि वो ये दोनों हिन्दू धर्मग्रंथों की कथाएँ सुनते हुए बड़े हुए। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ में लिखा है कि भारत जनसंख्या के हिसाब से कितना विशाल राष्ट्र है।

उन्होंने इसमें भारत में हजारों संजातीय समुदाय के लोगों के एक साथ मिल कर रहने और 700 से अधिक भाषाएँ बोले जाने की चर्चा करते हुए इसे खास बताया है। हालाँकि, बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति 2010 में भारत आने से पहले कभी उन्होंने यहाँ का दौरा तो नहीं किया था, लेकिन उन्होंने लिखा कि उनके मन में हमेशा से भारत को लेकर एक खास जगह थी। वो इसके बारे में सोचा करते थे। यहाँ आने की इच्छा रखते थे।

8 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने लिखा कि हो सकता है कि ये सब इसीलिए हुआ होगा क्योंकि अपने बचपन के दिनों में वो इंडोनेशिया में रामायण एवं महाभारत की कथाएँ सुनते हुए बड़े हुए थे और पूर्वी धर्मों के प्रति हमेशा से उनकी रुचि रही है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के रहने वाले उनके कई दोस्त थे जो उन्हें दाल और कीमा बनाना सिखाते थे। इसी दौरान उन्होंने बॉलीवुड की फ़िल्में देखनी भी शुरू कर दी थी।

अपनी पुस्तक ‘A Promised Land’ में बराक ओबामा ने 2008 में बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार अपने चुनावी अभियान से लेकर पाकिस्तान के एबटाबाद में खूँखार आतंकी संगठन अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को मार गिराने तक के सफर का ब्यौरा दिया है। अभी इसका पहला भाग ही प्रकाशित हुआ है। मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को ये दुकानों में उपलब्ध कराया गया। अब इसका दूसरा भाग आएगा।

इसी पुस्तक में ओबामा ने वायनाड के सांसद राहुल गाँधी के लिए लिखा है, “उनमें एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।” इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं व समर्थकों ने उनकी खासी आलोचना की।

तेलंगाना HC ने वक्फ बोर्ड के CEO को पाया कब्रिस्तान के अतिक्रमण में शामिल होने का दोषी: दिया निष्कासन का आदेश

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सोमवार (नवंबर 17, 2020) को वक्फ बोर्ड की निंदा करते हुए राज्य सरकार से तेलंगाना वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को तत्काल बर्खास्त करने का आदेश दिया। अदालत ने सरकार को उनकी जगह पर एक ऐसे अधिकारी को नियुक्त करने के लिए कहा जो इन संपत्तियों की रक्षा कर सके।

आरोप है कि उन्हें भारतीय आपराधिक संहिता प्रक्रिया (सीआरपीसी) के प्रावधानों की जानकारी नहीं थी वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण के मामले में वह भी शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया जब वक्फ बोर्ड के सीईओ मोहम्मद कासिम ने कहा कि उन्हें सीआरपीसी के प्रावधानों की जानकारी नहीं है।

मोहम्मद कासिम ने अदालत से कहा कि उन्होंने सीआरपीसी के प्रावधानों को नहीं पढ़ा था। बता दें कि इस प्रावधान का इस्तेमाल वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए किया जा सकता है। अदालस ने कासिम से पूछा कि उन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क क्यों नहीं किया?

दरअसल, हैदराबाद में मुस्लिम कब्रिस्तानों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए कोर्ट में तीन याचिकाएँ डाली गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, “वह अतिक्रमणकारियों के साथ मिले हुए हैं।” टीओआई ने जुलाई में बताया था कि राज्य में वक्फ के स्वामित्व वाली जमीन की कीमत लगभग 1 लाख करोड़ रुपए है।

न्यायाधीशों ने कासिम से अतिक्रमित संपत्तियों पर कई सवाल पूछे, लेकिन उनका एक ही जवाब था कि पुलिस ये कहते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया कि ये नागरिक विवाद हैं, जिसमें पुलिस के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इससे इतर पीठ ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि हैदराबाद में 86 मुस्लिम कब्रिस्तानों का अतिक्रमण किया गया है, जबकि बोर्ड ने केवल पाँच मामलों में एफआईआर दर्ज करवाया था।

न्यायाधीशों ने कहा कि अगर स्टेशन हाउस अधिकारी ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया, तो सीईओ को पुलिस अधीक्षक से संपर्क करना चाहिए था, जिस पर कासिम ने कहा कि उन्होंने सीआरपीसी नहीं पढ़ा है। इस पर पीठ ने आश्चर्य व्यक्त किया और उसे हटाने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मैं कासिम के रवैये से हैरान हूँ। उसे उसके पद से मुक्त करो। वह अल्लाह के संपत्तियों की रक्षा कैसे कर सकता है? हैदराबाद में कई वक्फ संपत्तियाँ हैं। यह सीईओ उनमें से कई की रक्षा करने में विफल रहा है। राज्य को कासिम द्वारा कर्तव्य के प्रादुर्भाव के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

बिहार चुनाव हार पर कॉन्ग्रेस में रार: 3 साल बड़े कॉन्ग्रेसी नेता पर CM गहलोत का गुस्सा, सलमान भी कूदे

राजस्थान के मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने अपने ही पार्टी नेता कपिल सिब्बल पर तीखा वार किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए अपना कॉन्ग्रेस प्रेम जाहिर किया और कहा कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को कोई जरूरत नहीं है कि वह पार्टी के आंतरिक मामलों की मीडिया में चर्चा करें।

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि कपिल सिब्बल के कदम से देश भर में कई पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। अपने ट्वीट की एक पूरी सीरीज में उन्होंने दावा किया कि आज भी कॉन्ग्रेस पार्टी एक अकेली पार्टी है, जिसने देश को एकजुट किया हुआ है और उसे व्यापाक विकास के रास्ते पर आगे ले जा रही है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “कपिल सिब्बल को कोई जरूरत नहीं थी हमारे आतंरिक मामलों के बारे में मीडिया में चर्चा करने की। इससे देश भर के तमाम पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएँ आहत हुई हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस ने अलग-अलग मुश्किलों का सामना किया है जिसमें 1969, 1977, 1989 और 1996 का समय शामिल है। लेकिन हर बार हम अपनी विचारधारा, आयोजनों, नीतियों, और पार्टी नेतृत्व में दृढ़ विश्वास के कारण और ताकतवर बन कर उभरे हैं।”

उन्होंने कहा, “हमने एक दूसरे के साथ और हर संकट में खुद को सुधारा है और 2004 में सोनिया जी के कुशल नेतृत्व में संप्रग सरकार भी बनाई थी, इस बार भी हम इससे पार पा लेंगे।”

उन्होंने आगे लिखा कि चुनाव हारने के कई कारण थे। लेकिन हर बार कॉन्ग्रेस के लोगों ने अविभाजित और पार्टी नेतृत्व में दृढ़ विश्वास दिखाया जिसके कारण हम हर मुश्किल समय के बाद ताकतवर और एक होकर उभरे।

गौरतलब है कि अशोक गहलोत के यह ट्वीट कपिल सिब्बल के बयान के बाद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लेकर अपनी बात रखी थी। सिब्बल ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ऐसा लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी किस्मत मान लिया है। उन्होंने कहा था कि बिहार ही नहीं, उपचुनावों के नतीजों से भी ऐसा लग रहा है कि देश के लोग कॉन्ग्रेस पार्टी को प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं।

उन्होंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी में बदलाव का सुझाव देते हुए कहा कि सीडब्लूसी के सदस्य नॉमिनेटिड हैं, इसे लोकतांत्रिक बनाना होगा। उन्होंने कहा था कि बिहार और उपचुनावों में हालिया प्रदर्शन पर कॉन्ग्रेस पार्टी (के शीर्ष नेतृत्व) के विचार अब तक सामने नहीं आए हैं। शायद उन्हें लगता हो कि सब ठीक है और इसे सामान्य घटना ही माना जाना चाहिए।

यहाँ बता दें कि सिब्बल के ऐसे तीखे सवालों के बाद केवल सीएम गहलोत ही नहीं सलमान खुर्शीद ने भी उन पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा, जब हम बुरी तरह प्रदर्शन नहीं भी करते, तब भी लोग हमें ढंग से नहीं लेते। इससे पहले उन्होंने कहा था, “मुझे कपिल की बात पर कुछ नहीं कहना है। वो पार्टी के नेता हैं। मैंने उनका बयान पढ़ा, देखा और समझ लिया, लेकिन मुझे उस पर कुछ नहीं कहना।”

‘तुमने काली पूजा में हिस्सा लिया, तुम्हें मार डालूँगा’: धमकी के बाद क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने माँगी माफ़ी, कहा – इस्लाम मेरा मजहब

बांग्लादेश के सिलहट के रहने वाले एक व्यक्ति ने क्रिकेट ऑलराउंडर शाकिब अल हसन को जान से मार डालने की धमकी दी है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कप्तान रहे शाकिब अल हसन ने कथित तौर पर कोलकाता में एक काली पूजा के समारोह का उद्घाटन किया था, जिसके लिए उन्हें धमकाया गया। उक्त व्यक्ति ने एक लाइव फेसबुक वीडियो सेशन के जरिए ये धमकी दी। आरोपित का नाम मोहसिन तालुकदार है, जो तुकेरबाजार के शाहपुर तलुकदारपरा का रहने वाला है

मोहसिन तालुकदार ने फेसबुक पर लाइव वीडियो में आकर शाकिब अल हसन को गालियाँ बकी। कोलकाता के मंडल में काली पूजा के उद्घाटन की बात करते हुए उसने शाकिब अल हसन को जान से मार डालने की धमकी दी। इस दौरान वो अपने हाथ में एक कुल्हाड़ी भी लिए हुआ था, जिसे लहराते हुए वो धमकियाँ दे रहा था। उसने कहा कि शकिबुल हसन ने काली पूजा का उद्घाटन कर के मुस्लिमों की भावनाओं का अपमान किया है, इसीलिए उन्हें मार डाला जाना चाहिए।

उसने दावा किया कि शाकिब अल हसन को मार डाला जाना चाहिए और वो उनसे मिलेगा तो उन्हें काट डालेगा। उसने ‘मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए’ शाकिब अल हसन से माफ़ी भी माँगने को कहा। गुरुवार (नवंबर 12, 2020) को कोलकाता में शाकिब अल हसन ने काली पूजा का उद्घाटन किया था, जिसके बाद से वहाँ के कई मुस्लिम उनसे खासे नाराज हैं। उन्होंने ‘अमरा शोबाई क्लब’ के 59वें श्यामा पूजा में कथित तौर पर हिस्सा लिया।

ये आयोजन ईस्ट कोलकाता के कांकुड़गाछी में हुआ। खबरों में कहा जा रहा है कि दिग्गज क्रिकेटर ने रिबन काट कर और दीपक जला कर समारोह का उद्घाटन किया। शाकिब अल हसन का कहना है कि इस पूजा का उद्घाटन कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने किया और वो वहाँ मुख्य अतिथि नहीं थे, जबकि बांग्लादेश की पूरी मीडिया में यही चलाया जा रहा है। उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा कि वो मुस्लिम हैं और हमेशा अपने मजहब का पालन करते हैं।

शाकिब अल हसन ने काली पूजा के उद्घाटन वाली बात से इंकार किया

धमकी देने वाले मोहसिन ने ये भी कहा कि जब शाकिब अल हसन हज गए थे, तब वो खुश था। अगले दिन फिर से लाइव आकर उसने कहा कि किसी को मार डालने की धमकी देना ठीक नहीं है। उसने माफ़ी माँगते हुए कहा कि वो बस अल्लाह से दुआ कर रहा था कि वो शकिबुल को राह दिखाएँ। उसने कहा कि वो एक्ससाइटमेंट में कुछ ज्यादा बोल गया। परिवार का कहना है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसकी गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने मामला दर्ज कर के टीम को काम पर लगा दिया है।

पश्चिम बंगाल में हिन्दू त्यौहारों में हिस्सा लेने के लिए सांसद एवं अभिनेत्री नुसरत जहाँ को लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों निशाना बनाते रहते हैं। हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान जब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर भी अपनी डांस की वीडियो अपलोड की तो थोड़ी ही देर में कट्टरपंथियों ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ लोग भारत के थे और कुछ बांग्लादेश के भी थे। कट्टरवादियों ने उन्हें हदीस पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि तुम मूर्ति पूजन कर रही हो, तुम्हें शर्म आनी चाहिए।

माँ लक्ष्मी और गणेश जी की विसर्जन यात्रा पर मस्जिद के पास ईंट-पत्थर-धारदार हथियारों से हमला: UP पुलिस ने किए 11 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में शोभायात्रा पर हमले की घटना सामने आई है। पूरा मामला अकबरपुर थाना क्षेत्र के पंहितीपुर बाजार का है। यहाँ रविवार (नवंबर 15, 20020) को लक्ष्मी-गणेश मूर्ति के विसर्जन से पहले समुदाय विशेष के लोगों ने मस्जिद के सामने डीजे बजाने पर अपने घरों की छत से शोभायात्रा पर पथराव किया। साथ ही लाठी-डंडे व धारदार हथियार से यात्रा में शामिल लोगों पर हमला भी किया।

इस पूरी घटना में 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए जबकि 10-12 लोगों को हल्की चोटें आई। पुलिस ने जुबेर, शेरू, शहजादे, शादान खान, फहीम, शब्बर, जीशान खान व अरमान खान समेत 8 को नामजद करके कई लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया है। अभी तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, पंहितीपुर बाजार से सटे औरंगनगर पुरवा में कुछ दिन पहले लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई थी। रविवार को श्रद्धालु शोभायात्रा के बाद नदी में इन्हीं मूर्तियों को विसर्जन करने जा रहे थे, तभी शाम करीब 6:30 बजे यह यात्रा पंहितीपुर बाजार पहुँची।

यह इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। यहाँ शोभायात्रा में बज रहे डीजे पर समुदाय विशेष ने पहले आपत्ति जताई और जब श्रद्धालुओं ने इसका कारण पूछा तो इस पर विवाद शुरू कर दिया। थोड़ी देर में यात्रा को घेर लिया गया। फिर उन पर ईंट, पत्थर, लाठी, डंडे और धारदार हथियारों से भी हमला किया गया।

घटना की सूचना मिलते ही डीएम, एसपी, एएसपी, एसडीएम, सीओ समेत कई आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। फौरन हालात नियंत्रित करने के लिए अकबरपुर, बेवाना, महरुआ, अहिरौली समेत 7-8 थानों की फोर्स बुलवाई गई और इलाकों को छावनी में तब्दील किया गया। अब पुलिस 11 उपद्रवियों को पकड़ कर उनसे पूछताछ कर रही है व सीसीटीवी के जरिए साक्ष्य जुटा रही है।

गंभीर रूप से घायल लोगों की पहचान राज ताड़मली और सचिन गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस ने इन दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था लेकिन हालत गंभीर होने के कारण राज ताड़माली को लखनऊ रेफर कर दिया गया।

एएसपी अवनीश कुमार मिश्रा ने मीडिया को बताया कि दो समुदायों के बीच पूरा बवाल डीजे बजाने को लेकर हुआ। अभी हालात सामान्य है। एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हालत पर नजर बनाए हुए हैं।