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देवबंद में ‘छोटी ट्रेनिंग’, फिर Pak में ‘बड़ी’: दिल्ली से गिरफ्तार आतंकियों का खुलासा – दुनिया भर में फैलाना चाहते थे इस्लाम

दिल्ली से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों का देवबंद कनेक्शन सामने आया है। दोनों आतंकियों से पूछताछ के दौरान कई राज खुले। अब उन दोनों आतंकियों को लेकर दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश के देवबंद रवाना हो गई है, जहाँ उनसे फिर पूछताछ होगी। सोमवार (नवंबर 16, 2020) को बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए दिल्ली पुलिस ने JeM के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उनके मोबाइल फोन्स से कई सबूत भी मिले हैं।

इन आतंकियों ने एक व्हाट्सप्प ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप का नाम ‘जिहाद’ था, जिसमें एक पाकिस्तानी सरगना भी जुड़ा हुआ था। उसके ही निर्देश पर ये यहाँ आतंकी कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे थे। देवबंद, दिल्ली और तेलंगाना के कई लोग इस ग्रुप में जुड़े थे। चूँकि ये आतंकी कई दिनों तक देवबंद में रुके हुए थे, इसीलिए उन्हें वहाँ ले जाया गया है। आतंकी आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मोहम्मद अशरफ खटाना दिल्ली होकर देवबंद जा रहे थे।

उन्हें वहीं पर खतरनाक हथियार चलाने और बम विस्फोट का प्रशिक्षण दिया जाना था। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, आतंकियों को देवबंद में तो ट्रेनिंग दी ही जाती थी, साथ ही इसके बाद उन्हें ‘बड़ी ट्रेनिंग’ के लिए पाकिस्तान भेजा जाता था। उत्तर प्रदेश से लगती नेपाल सीमा का इस्तेमाल कर ये लोग वहीं से पाकिस्तान के लिए रवाना होते थे। स्पेशल सेल को कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे इनके आतंकी होने का पता चलता है।

पाकिस्तान में बैठे बड़े हैंडलर ने ही इन आतकियों को यूपी जाने को कहा था। उसने बताया था कि देवबंद में उसका अपना आदमी है, जो इन आतंकियों को छोटी ट्रेनिंग देगा। यूपी में आतंकी ट्रेनिंग की बात से खलबली मच गई है और प्रशासन एक्टिव हो गया है। पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने हथियार भी यूपी से ही लिए थे। दिल्ली में भी पाकिस्तानी हैंडलर का आदमी होता था, जो इन्हें देवबंद लेकर जाता था।

ये दोनों पिछले 6-8 महीनों से जिहादी बने थे और आतंकी प्रशिक्षण के लिए बेचैन थे। ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से नाराज़ थे और ‘आज़ादी’ के लिए लड़ना चाहते थे। सितम्बर-अक्टूबर में सीमा पर सख्ती होने के कारण ये पाकिस्तान नहीं जा पाए थे। अब पुलिस इनके व इनके साथियों से जुड़े सारे ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है।

आतंकियों ने बताया कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से मौलाना मसूद अजहर को सुनते थे और पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाना चाहते थे। इसके लिए वो मसूद से जुड़ने की फ़िराक में थे। खबर में ये भी बताया गया है कि ये आतंकी देवबंद के अरशद मदनी व मौलाना मुफ्ती फैजुल वाहिद द्वारा दिए गए व्याख्यान और मुफ्ती मुजफ्फर हुसैन व नजीर अहमद साहा काशी को जम्मू कश्मीर में पढ़ते थे। फेसबुक मैसेंजर के जरिए लाहौर का आफताब मलिक इनसे संपर्क में आया।

उसने इन्हें फेसबुक पर मसूद अजहर की तस्वीर प्रोफाइल पिक लगाने को कहा। इसके बाद वो जैश के एक गुर्गे के सम्पर्क में आए और कुपवाड़ा में एक आतंकी के जरिए इनके पास हथियार पहुँचाए गए। उनके पास से ‘जम्मू एंड कश्मीर बैंक’ के कार्ड्स और मदरसा का पहचान-पत्र मिला है। अब्दुल लतीफ़ के अब्बू कोर्ट में मुंशी हैं। जम्मू कश्मीर में दोनों ने कई स्थानीय कट्टरपंथियों की मदद से जिहाद का पाठ पढ़ा।

केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा था कि देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है, सारे बड़े-बड़े दुनियाँ में जो भी पैदा हुए आतंकवादी, चाहे हाफ़िज सईद हो, बगदादी हो, ये सारे के सारे लोग यहीं से शिक्षा लेते हैं। उन्होंने दावा किया था कि दुनिया में आतंकवाद की घटनाओं का जुड़ाव देवबंद से ही रहा है। साथ ही उदाहरण दिया था कि गुरुकुल से आजतक कोई बच्चा आतंकी नहीं निकला, लेकिन देवबंद से निकले हुए लोग देशभक्त का तो पता नहीं, लेकिन आतंकी जरूर बनते हैं।

बलिया में कब्रिस्तान की जमीन बता छठ पूजा का विरोध, तनाव के बीच अर्घ्य: UP पुलिस ने कहा – ‘सब कंट्रोल में है’

उत्तर प्रदेश के बलिया में बिल्थरारोड बिठुआ स्थित पोखरा गाँव में छठ पूजा के दौरान सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने छठ पूजा रोकते हुए कहा कि जिस स्थान पर पूजा हो रही है वह कब्रिस्तान की ज़मीन है। इसको लेकर विवाद बढ़ने पर दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गाँव के ही निवासी तौसीफ़ नाम के युवक ने छठ पूजा पर पाबंदी लगाने का आह्वान किया था। उसने दावा किया कि जिस जगह पर पूजा हो रही है वह कब्रिस्तान की ज़मीन है और इस पर हिन्दू समाज के धार्मिक क्रियाकलाप रोक लगाई जानी चाहिए। विवाद की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने मामले में दखल देते हुए हिंदुओं द्वारा छठ पूजा के लिए लगाए गए टेंट हटा दिए। तनाव के बीच ही व्रतियों ने अर्घ्य दिए। 

इसके बाद ग्राम प्रधान कौशल्या देवी की अगुवाई में ग्रामीणों ने भारी संख्या में इकट्ठा होकर इस मुद्दे को लेकर तहसीलदार जितेन्द्र सिंह से बात की। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि बिठुआ पोखरे के उत्तरी छोर पर बह और भीटा की ज़मीन पर अवैध तरीके से कब्ज़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। 

इसके अलावा ग्रामीणों ने इस मामले की जाँच करने का भी निवेदन किया। जिस पर तहसीलदार जितेन्द्र सिंह ने मामले की जाँच और भू-अभिलेखों के सत्यापन के लिए चार लेखपाल और एक कानूनगो की टीम का गठन कर दिया है। तहसीलदार जितेन्द्र सिंह के मुताबिक़ जाँच टीम दावों की पुष्टि के लिए मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी।   

‘दाऊद के कितने गुर्गे आज सांसद, विधायक, मंत्री बने हुए हैं?’: वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर एक्शन के लिए SC में याचिका

अपराध और राजनीति की मिलीभगत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को लेकर चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया है। शुक्रवार (नवंबर 20, 2020) को अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 1993 की वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर एक्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव एनएन वोहरा की नेतृत्व वाली कमिटी ने आपराधिक नेटवर्कों, सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बीच के नेक्सस की जाँच की थी।

उपाध्याय ने ध्यान दिलाया कि इस रिपोर्ट का 100 पन्नों का एक अपूर्ण वर्जन 1995 में संसद में रखा गया था, जिससे उसकी वैधता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ये जानने का अधिकार है कि किन अपराधियों-अधिकारियों-नेताओं के नेक्सस का पता चला था, ताकि पारदर्शिता बनाई रखी जा सके। उन्होंने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रायल कोर्ट्स के गठन का भी आदेश दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निम्नलिखित निवेदन किए:

  • वोहरा कमिटी की पूर्ण रिपोर्ट सभी जाँच एजेंसियों के निदेशकों को भेजी जाए।
  • एनआईए, सीबीआई, आईबी, ईडी सहित अन्य एजेंसियों को वोहरा कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए कहा जाए, ताकि अपराधी-नेता नेक्सस की पोल खुले।
  • लोकपाल को भी इस रिपोर्ट के आधार पर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जाए।
  • इन जाँच एजेंसियों की जाँच की निगरानी के लिए एक न्यायिक कमिटी का गठन किया जाए।
  • वोहरा कमिटी की रिपोर्ट में जिन नेताओं और सरकारी अधिकारियों के नाम हैं, उन्हें पद्मश्री सहित मिले अन्य सरकारी अवॉर्ड्स को वापस छीन लिया जाए।

‘संडे गार्डियन लाइव’ के एक लेख के अनुसार, वोहरा कमिटी की रिपोर्ट के सामने आने से कई नेताओं-अधिकारियों की पोल खुल सकती है। महाराष्ट्र और गुजरात के तब के कई नेताओं ने अंडरवर्ल्ड, खासकर दाऊद इब्राहिम और इक़बाल मिर्ची के साथ अपने सम्बन्ध बना लिए थे। मार्च 1993 में बॉम्बे बम ब्लास्ट के बाद बनी इस कमिटी ने 3 महीने की जाँच के बाद रिपोर्ट दिए थे। अमित शाह ने भी आरोप लगाया था कि एनसीपी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेमन के साथ वित्तीय लेनदेन किया था।

अमित शाह ने इसे देशद्रोह करार देते हुए कहा था कि इसके दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसे पटेल ने नकार दिया था। 70 के दशक से लेकर 90 के दशक तक दाऊद और इक़बाल की कई नेताओं ने मदद की थी। 1995 में रिपोर्ट के 11 पन्ने सार्वजनिक जरूर किए गए थे, लेकिन इसमें सिर्फ एक ही नाम था और वो भी इक़बाल मिर्ची का। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे 80 के दशक में दारू-सिगरेट की तस्करी करने वाला मिर्ची रियल एस्टेट का बड़ा कारोबारी बन गया।

मिर्ची के न सिर्फ कई बैंक एकाउंट्स थे, बल्कि वो अपने आदमियों को ही लाखों रुपए देता था और उसकी संपत्ति करोड़ों की हो गई थी। साथ ही लिखा था कि कुछ नेताओं के संरक्षण के कारण उसके खिलाफ सरकारी एजेंसियाँ भी कुछ नहीं कर पाती थीं। राज्यसभा सांसद दिनेश त्रिवेदी ने संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग की, लेकिन वो सफल नहीं हुए। कहा जाता है कि उस समय कई नेता दाऊद की मेहरबानी पर थे और उसकी मदद करते थे। अश्विनी उपाध्याय ने कहा:

“दाऊद के गुर्गे सांसद, विधायक और मंत्री हैं। दाऊद के गुर्गों को पद्म अवार्ड मिला है। विश्वास नहीं है तो वोहरा जी बात करिए। वोहरा रिपोर्ट की एक कॉपी उनके पास है। संसद के पटल पर मात्र 11 पेज रखा गया, जबकि वोहरा कमेटी रिपोर्ट 110 पेज की है। वोहरा रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। देश जानना चाहता है कि दाऊद के कितने गुर्गे आज भी सांसद, विधायक और मंत्री बने हुए हैं तथा कितने गुर्गों को अब तक पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण मिल चुका है?”

महाराष्ट्र के एक बहुत बड़े नेता की दाऊद इब्राहिम के साथ नजदीकियों की बात सामने आई थी। उस नेता को 1993 बम ब्लास्ट तक दाऊद इब्राहिम से 70 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। साथ ही एक नेता को 1990 का चुनाव लड़ने के लिए 5 करोड़ रुपए हवाला लेनदेन की मदद से पहुँचाए गए थे। साथ ही एक मुख्यमंत्री के रिश्तेदार को दाऊद द्वारा 10 करोड़ रुपए देने की बात सामने आई थी, जो बाद में खुद भी नेता बन गया।

आईबी के एक सूत्र का कहना था कि इस रिपोर्ट में गुजरात के कई नेताओं के भी नाम थे। एक वरिष्ठ आईबी अधिकारी ने बताया कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री उस रिपोर्ट को देखते हैं तो वो पाएँगे कि इसमें कई परिचित नाम हैं। अब चर्चा हो रही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने या फिर उसके आधार पर कार्रवाई करने की अनुमति देगा, जिससे उन नेताओं की जनता के सामने पोल खुले और उन्हें सज़ा मिले।

जहाँ तक दाऊद इब्राहिम की बात है, फ़िलहाल उसके पाकिस्तान स्थित कराची में रहने की बात सामने आई है। स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट (SAFEMA) के तहत मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम की महाराष्ट्र की 6 प्रॉपर्टी को इसी महीने नीलाम किया गया है। इसमें दाऊद के पैतृक गाँव रत्नागिरी में उसकी सम्पत्ति भी शामिल थी। यह संपत्ति उसकी माँ अमीना बी और बहन हसीना पार्कर के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

डॉक्टर बनने के लिए बाल विवाह से लड़ने वाली ‘द हिन्दू लेडी’, जिनकी वजह से आया ‘सहमति की उम्र का क़ानून’

सभी जानते हैं कि आज से 100 या 120 साल पहले का समाज कैसा था या यूँ कहे उस दौर में समाज के सामने कुरीतियों की सूरत में क्या चुनौतियाँ मौजूद थीं। फिर भी भारतीय समाज का सबसे शाश्वत पहलू यही है कि धारा के विपरीत चलने वाले लोग हमेशा मौजूद रहते हैं, जो आम जनमानस को रास्ते दिखाने वाली सबसे गाढ़ी लकीर खींचते हैं। ऐसा ही एक नाम है रुक्माबाई राउत का, जो भारत की पहली प्रैक्टिसिंग महिला चिकित्सक थीं। उनका विवाह महज़ 11 साल की उम्र में कर दिया गया था, फिर भी उन्होंने वैवाहिक जीवन त्यागते हुए पढ़ाई का रास्ता चुना। 

22 नवंबर 1864 को मुंबई के एक बढ़ई परिवार में जन्मी रुक्माबाई की माँ जयंती बाई थीं और पिता जनार्दन पांडुरंग। उस दौर में बाल विवाह आम बात थी, इसलिए जयंती बाई का विवाह भी 14 वर्ष की उम्र में कर दिया गया। वह सिर्फ 15 साल की थीं जब रुक्माबाई का जन्म हुआ था, इसके दो साल बाद वह विधवा हो गई और फिर उन्होंने सखाराम अर्जुन से दूसरा विवाह किया। इस विवाह को लेकर समाज में काफी बहस भी हुई, लेकिन जयंती बाई ने निर्णय पूरी दृढ़ता के साथ लिया था। सखाराम अर्जुन मुंबई स्थित ग्रांट मेडिकल कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने रुक्माबाई की पढ़ाई जारी रखने में अहम भूमिका निभाई।     

रुक्माबाई की आयु 8 वर्ष थी जब उनकी माँ जयंती बाई ने पूरी संपत्ति उनके नाम कर दी थी। इसके बाद 11 वर्ष की आयु में रुक्माबाई के जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन हुआ और वह था 19 वर्ष के दादाजी भीकाजी से विवाह। रुक्माबाई विवाह के बाद अपने पति के घर नहीं गईं। वह पढ़ने के लिए विद्यालय जाती थीं। एक दिन पति ने घर चलने के लिए कहा और 11 वर्ष की रुक्माबाई ने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया और यहीं से एक और विवाद शुरू हुआ। 

उनके पति भीकाजी ने अपने वैवाहिक अधिकारों का हवाला देते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय में रुक्माबाई के विरुद्ध याचिका दायर की। यह मामला भी ऐतिहासिक था, ‘दादाजी भीकाजी बनाम रुक्माबाई’ और इससे ही निकल कर आया ‘सहमति की उम्र का क़ानून’ 1891 (Age of consent act)। न्यायालय ने रुक्माबाई के समक्ष दो विकल्प रखे, पहला वह अपने पति के साथ रहें या दूसरा वह जेल चली जाएँ। 

इसके बावजूद मामले की सुनवाई के दौरान रुक्माबाई ने इतनी कम उम्र में जो दलीलें पेश की वह खुद में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का ऐतिहासिक दस्तावेज़ बनी। उन्होंने अपनी शिक्षा का हवाला देते हुए न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपने पति के पास नहीं जाएँगी। उनका यह भी कहना था कि उन्हें वैवाहिक जीवन में बँधकर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।             

अंततः न्यायाधीश रोबर्ट हिल पनहे ने इस मामले पर आदेश सुनाया जिसके तहत रुक्माबाई को आर्थिक जुर्माना देना पड़ा और दोनों पक्षों में सहमति बनी। मामला इतना चर्चित हुआ था कि ब्रिटिश प्रेस का ध्यान भी आकर्षित हुआ और 19वीं शताब्दी की शुरुआत होते-होते बाल विवाह और स्त्री अधिकारों पर व्यापक विमर्श की नींव पड़ी। ’रुक्माबाई रक्षा समिति’ का गठन भी हुआ था। इस मुद्दे पर तत्कालीन समाज सुधारक और शिक्षा संबंधी मुद्दों की कार्यकर्ता पंडिता रमाबाई ने एक लेख लिखा था जिसका एक अंश काफी चर्चित हुआ था। 

जिसमें उन्होंने लिखा था, “यह सरकार महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों की वकालत तो करती है, लेकिन जब एक महिला किसी पुरुष की दासी बनने से असहमत होती है तब वही सरकार क़ानून का हवाला देकर महिला को क़ानून की बेड़ियाँ पहना कर लाचार बना देती है।” इसके अलावा खुद रुक्माबाई ने भी ‘द हिन्दू लेडी’ के उपनाम से टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए स्त्री विमर्श पर कई लेख लिखे जिन पर काफी चर्चा हुई थी। 16 जून 1885 को लिखे गए रुक्माबाई के एक लेख का अंश कुछ इस प्रकार है, 

“बाल विवाह की इस कुरीति ने मेरे जीवन की खुशियों को बर्बाद कर दिया है। यह कुप्रथा हमेशा मेरे और उन चीज़ों के बीच में आई जिन्हें मैंने सबसे ऊपर रखा (शिक्षा और मानसिक चिंतन)। मेरी कोई गलती नहीं होने के बावजूद मुझे सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। मेरी बहनें जो हमेशा अपने अधिकारों से वंचित रही हैं, जो जागरूक नहीं हैं उनसे ऊपर उठने की भावना पर संदेह करते हुए मुझ पर तमाम तरह के आरोप लगाए गए।”        

आखिरकार रुक्माबाई साल 1889 में अपनी पढ़ाई के लिए लंदन स्कूल मेडिसिन, इंग्लैंड गई और 1894 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करके वापस लौटीं। इसके बाद वह सूरत में चीफ़ मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुईं और लगभग 35 वर्षों तक इस पेशे से जुड़ी रहीं। इस बीच उन्होंने सामजिक सुधार संबंधी तमाम मुद्दों पर काम किया और 25 सितंबर 1955 को 91 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। निर्देशक अनंत महादेवन ने उनके जीवन से प्रभावित होकर एक फिल्म भी बनाई थी जिसका नाम था, ‘रुक्माबाई भीमराव राउत”।  

केरल में ही सैकड़ों ईसाई युवतियाँ बन चुकी हैं ‘लव जिहाद’ की शिकार, क्रिश्चियन संगठन का दावा- विदेश से आता है पैसा

देश में ‘लव जिहाद’ के लगातार मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन मीडिया का एक वर्ग अभी भी इसे मानने को तैयार ही नहीं है। इसे हिंदुत्व की उपज कहा जा रहा है। रवीश कुमार केरल में ‘लव जिहाद’ के एक भी मामले साबित न होने की बात कह रहे हैं। वहीं ‘Scroll’ इसे कंस्पिरेसी थ्योरी बता रहा है। कमोबेश पूरे वामपंथी मीडिया का यही हाल है। यहाँ हम आपको बताएँगे कि कैसे केरल में ईसाई बड़ी संख्या में ‘लव जिहाद’ का शिकार हुए हैं।

हाल ही में रवीश कुमार ने लव जिहाद को ‘हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा’ भी बता दिया। उन्होंने कहा, “भारत का समाज बुनियादी रूप से प्रेम का विरोधी है। किसी को प्रेम न हो जाए, अपनी पसंद से जाति या धर्म के बाहर शादी न हो जाए, इस आशंका में डूबा रहता है और डरा रहता है। भारतीय समाज हिन्दी सिनेमा में सोते-जागते गीतों के नाम पर प्रेम गीत ही सुनता है, वहीं प्रेम से इतना डरता है। इतना डरता है कि डर का भूत खड़ा करता है। उसी एक भूत का नाम है लव जिहाद। वैसे तो यह हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन बेवक्त-बेज़रूरत इसे छेड़ने का मतलब यही है, किसी को यकीन है कि भारत के समाज को हिन्दू बनाम मुस्लिम के भूत से डराया जा सकता है।”

केरल में कैथोलिक पादरियों के एक संगठन ने कहा कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविक समस्या है। केरल के चर्च ने इसके पीछे ISIS का हाथ बताते हुए कहा था कि ‘लव जिहाद’ के जरिए कई महिलाओं का जबरन धर्मान्तरण हो रहा है। इसके जवाब में PFI जैसे मुस्लिम संगठनों ने पादरियों को चुप रहने की सलाह दी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे CAA के खिलाफ चल रहे उपद्रव को लेकर जोश में कमी आ जाएगी।

केरल के चर्च का कहना था कि कुछ महीनों पहले केरल के जिन 21 लोगों को ISIS में शामिल कराया गया था, उनमें से आधे ईसाई थे। पादरियों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ से सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को ठेस पहुँच रही है। उनका ये भी आरोप था कि केरल का पुलिस-प्रशासन इस खतरे से निपटने को गंभीर नहीं है। लेकिन, कुछ पत्रकारों को ये अब भी हिन्दुओं के दिमाग की उपज लग रहा है।

जब केरल के चर्चों ने ‘लव जिहाद’ को लेकर चर्चा शुरू की तो वामपंथी मीडिया घबरा गया और उसने इसे पादरियों पर ही हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप मढ़ दिया। ‘द फ़ेडरल’ ने अपने लेख में लिखा था कि विहिप ने पादरियों के बयान का स्वागत किया है और कहा है कि ‘लव जिहाद’ को एक बड़ी साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा है। मीडिया संस्थान का कहना था कि नॉर्थ केरल में हिन्दू या ईसाई लड़कियों के किसी मुस्लिम के साथ प्यार करने को ‘लव जिहाद’ कह दिया जा रहा है।

उसका तर्क था कि उत्तरी केरल में मुस्लिमों की जनसंख्या ज्यादा है और राज्य में दशकों से अंतर्जातीय/अंतर्धार्मिक विवाह होते रहे हैं। आज इंटरनेट के युग में एक-दूसरे से लोग ज्यादा और जल्दी सम्पर्क में आते हैं, जिससे नजदीकियाँ बढ़ती हैं। साथ ही आरोप लगाया था कि जब ईसाई/हिन्दू युवक मुस्लिम लड़की से शादी करते हैं तो कोई हंगामा नहीं होता। इस तरह मुस्लिमों के बचाव के लिए ईसाइयों को निशाना बनाया गया।

‘आउटलुक’ ने भी अपने एक लेख में लिखा कि 2009 में केरल और कर्नाटक के मामलों के सामने आने के बाद इस विवाद को बढ़ावा मिला। उसने आरोप लगाया कि कोरोना के समय में ऐसे मामले उठाकर न सिर्फ ध्रुवीकरण किया जा रहा है, बल्कि ‘अंतर्धार्मिक प्यार’ का भी गला घोंटा जा रहा है। उसने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि आर्य समाज जैसे हिन्दू समूहों ने 1920 के दशक में ‘समाज में विभाजन’ के लिए इस मुद्दे को उठाया था।

इसमें ज्ञान बघारते हुए बताया गया था कि जब दो लोग प्यार में होते हैं तो उनका उद्देश्य अलग होता है और वो अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद इसकी परवाह नहीं करते कि कौन सा धर्म क्या कह रहा है। हालाँकि, उसने ये नहीं बताया कि महिला को ही क्यों हमेशा अपना धर्म बदलने को मजबूर होना पड़ता है। साथ ही उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पर ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाने के लिए निशाना साधा।

‘द ग्लोबल काउंसिल ऑफ इंडियन क्रिश्चियन्स’ ने आँकड़ा दिया था कि अब तक 2868 महिलाओं को ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया जा चुका है। दीपा चेरियन नामक महिला की जबरन धर्मान्तरित करने की खबर भी आई, जिसके बाद उसका नाम शाहिना रखा गया। शाहिना को बाद में कोच्चि पुलिस ने लशकर-ए-तैयबा के साथ उसके संबंधों को लेकर गिरफ्तार भी किया। ईसाई काउंसिल ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया।

‘ग्लोबल काउंसिल ऑफ इंडियन क्रिश्चियन्स’ के अध्यक्ष डॉक्टर साजन के जॉर्ज का कहना है कि दीपा की नजदीकियाँ नौशाद नाम के एक ड्राइवर से बढ़ी थी। उनका कहना है कि इसके लिए विदेश से फंड्स आते हैं, जिसके तहत ‘चार्मिंग और हैंडसम’ मुस्लिम युवकों को ईसाई युवतियों को प्रलोभन देने, उनसे प्यार और शादी करने के लिए तैयार किया जाता है।

‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग’ के जॉर्ज कुरियन ने भी ‘लव जिहाद’ को समस्या माना था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर केरल में ईसाई लड़कियों को निशाना बनाए जाने की बात की थी और इसकी जाँच NIA से कराने को कहा था। उन्होंने आँकड़ा दिया था कि 7 साल में केरल में 4000 महिलाएँ ‘लव जिहाद’ की शिकार बनीं। कुरियन ने कहा था कि उन सभी का ब्रैनवॉश हुआ और जबरन इस्लाम में धर्मान्तरित किया गया।

कुरियन ने पत्र में लिखा था कि ऐसा लगता है कि ईसाई समुदाय की लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों का सॉफ्ट टारगेट हैं। उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया था कि सरकार कट्टरपंथी तत्वों की ऐसी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी कानून लाए।

इसी तरह से कोझिकोड में एक 19 साल की लड़की का उसके सहपाठी फैजल ने ही बलात्कार किया। उसने लड़की की नंगी तस्वीरें ले ली और फिर उसे ब्लैकमेल करता रहा। जुलाई 2019 की ये घटना 3 महीने बाद बाहर आई थी, जब पीड़िता ने अपने साथियों को इस बारे में बताया। पीड़िता के पिता ने पुलिस पर भी एक्शन न लेने का आरोप लगाया। कोझिकोड में तो एक महीने में ही ‘लव जिहाद’ के 50 मामले सामने आने की बात कही गई थी।

दिसंबर 2009 में खुद केरल हाईकोर्ट ने सरकार को ‘लव जिहाद’ की रोकथाम के लिए कानून बनाने के लिए कहा था। साथ ही हाईकोर्ट ने दो ऐसे लोगों की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी, जो इसके आरोपित थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि कुछ पुलिस रिपोर्ट्स के हिसाब से ये स्पष्ट है कि इसे लड़कियों के धर्मान्तरण के लिए साजिशन प्रयास किया गया और इसके पीछे कुछ संगठनों का हाथ भी दिख रहा है।

मुफ्ती अनस की बेगम बनी सना खान, ‘जहरीले’ एजाज खान ने करवाई थी मुलाकात

‘अल्लाह के कायदों’ पर चलने की बात कहते हुए बॉलीवुड छोड़ने वाली सना खान ने निकाह कर ली है। उन्होंने सूरत के मुफ्ती अनस से निकाह की है। बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में हिस्सा ले चुकी सना सलमान खान अभिनीत ‘जय हो’ जैसी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक बिग बॉस सीजन 8 का हिस्सा रह चुके एजाज खान ने सना का परिचय मुफ्ती अनस से करवाया था। एजाज खान सोशल मीडिया में सांप्रदायिक तौर पर भड़काऊ पोस्ट करने के लिए जाना जाता है।

सोशल मीडिया में पोस्ट किए वीडियो में सना सफेद रंग के दुल्हन के लिबास में और उनके शौहर भी सफेद कपड़ों में नजर आ रहे हैं। सूरत में एक छोटे समारोह में दोनों ने निकाह की। निकाह के बाद दोनो ने केक भी काटा।

इससे पहले सना कोरियोग्राफर मेल्विन लुइस के साथ रिलेशनशिप में रह चुकी हैं। बाद में उन्होंने लुइस पर धोखा देने और घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। हालाँकि बीते अक्टूबर में अचानक से उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने की घोषणा कर दी। एक इंस्टाग्राम पोस्ट में सना खान ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने की वजह ‘इस्लाम’ को बताया था। उन्होंने कहा था कि वह मानवता की सेवा करना चाहती हैं और अब से वह अल्लाह के आदेशों का पालन करेंगी।

उनसे पहले जायरा वसीम ने भी फ़िल्मी दुनिया को ‘इस्लाम’ की सेवा करने के लिए छोड़ने का ऐलान किया था। ‘दंगल ’और, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ की अभिनेत्री रही जायरा वसीम ने भी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए ही घोषणा की थी कि यह उद्योग उन्हें उनके ईमान से दूर कर रहा है। जायरा ने कहा था कि एक्ट्रेस बनने की वजह से वह इस्लाम से दूर होती जा रही हूँ। इसलिए इस फील्ड से रिश्ता तोड़ रही हैं।

विकिपीडिया ने बलात्कारी, हत्यारे के अपराधों को एडिट कर छुपाया, सिर्फ उसके पक्ष की बातें बताईं

अमेरिका के एक्टिविस्ट जैक पोसोबिक ने विकिपीडिया को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने उस पर एक नृशंस वारदात के अपराधी की करतूतों को छिपाने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि विकिपीडिया एक बलात्कारी व हत्यारे के अपराधों को छिपा रहा है। उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि स्टेसी सिटिस नामक महिला अपनी कम्पनी में अतिरिक्त घंटे काम कर रही थीं, ताकि वो अपनी शादी के लिए एक ड्रेस ले सके। एक बार जॉब से लौटते समय उन्होंने सुबह के साढ़े 3 बजे एक व्यक्ति की मदद के लिए उसे लिफ्ट दिया।

उस व्यक्ति का नाम रोडनी रिड था। अमेरिकी एक्टिविस्ट ने बताया कि स्टेसी ये नहीं जानती थीं कि रोडनी इससे पहले भी कई महिलाओं को इसी तरह से अपना शिकार बना चुका है, जिनमें एक विकलांग और एक 12 साल की बच्ची भी शामिल थी। बाद में स्टेसी की लाश भी एक पेड़ के पास मिली। जैक ने बताया कि रोडनी का सीमेन और थूक स्टेसी के मृत शरीर के हर हिस्से पर पड़ा हुआ था। रिड पर पुलिस का भी शक गया।

उसने शुरू में इस मामले को घुमाने की कोशिश की और दावा किया कि स्टेसी के साथ उसका अफेयर था। उससे पहले वो ट्रायल के दौरान कह रहा था कि वो स्टेसी को जानता ही नहीं है। जबकि स्टेसी की बहन का कहना है कि वो अपने मंगेतर के साथ खुश थी और अतिरिक्त घंटे काम कर रही थी, ऐसे में उसके पास किसी और के साथ अफेयर के लिए समय तक नहीं था। स्टेसी को शादी के ड्रेस में ही दफनाया गया। उसके मंगेतर ने उसे रिंग भी पहनाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब डॉक्टर फिल और किम करदाशियाँ जैसी हस्तियाँ आरोपित के पक्ष में आवाज़ उठा रही हैं। अब खुलासा हुआ है कि विकिपेडिया ने भी रोडनी रिड की सारी आपराधिक करतूतों को छिपा दिया और उसके इतिहास को लेकर सिर्फ वही चीजें बताईं, जो उसके वकीलों ने बताया था। आरोप है कि पीड़िता के पास मिले सीमेन के उसके DNA से मैच होने के बावजूद विकिपीडिया ऐसा कर रहा है।

उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है, उस सम्बन्ध में भी विकिपीडिया पर सब कुछ छिपा लिया गया है। इसमें बताया गया है कि लगभग एक साल तक चली जाँच के दौरान स्टेसी के बलात्कार एवं हत्या के मामले में सैकड़ों लोगों का इंटरव्यू लिया और 28 पुरुषों के DNA के साथ सीमेन के सैम्पल को मैच कराया, लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति से ही ये मैच हुआ। इसे ‘फॉरेन DNA’ को मैच कराना कहते हैं।

इसमें बताया गया है कि इससे पहले भी उसे 19 वर्ष की एक युवती की पिटाई करने और उसके साथ बलात्कार और उसकी हत्या की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। स्टेसी के अलावा एक अन्य महिला भी ठीक इसी समय पर गायब हुई थी और उसकी लाश भी इसी रूट में मिली थी। रिड ने अपनी विकलांग गर्लफ्रेंड के साथ भी बलात्कार किया था। DNA एक्सपर्ट्स के इस क्लेम के बावजूद विकिपीडिया की हरकत शर्मनाक है। अब सवाल उठ रहे हैं कि विकिपीडिया को एक बलात्कारी व हत्यारे के अपराधों को छिपाने की क्या ज़रूरत है?

इसी तरह अगस्त 2020 में बेंगलुरु में हुए दंगों पर दी गई जानकारी के शुरुआती हिस्से में विकिपीडिया में “clash” शब्द का इस्तेमाल किया गया था। विकिपीडिया के अनुसार, यह टकराव था। टकराव के असल मायने यह होते हैं, जब दो अलग धर्म या समुदाय के लोगों के बीच किसी विवाद को लेकर टकराव की स्थिति बनती है। जबकि दंगों के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता था कि हिंसा के दौरान अल्लाह-हु-अकबर के नारे लग रहे थे।  

अमित शाह के तमिलनाडु पहुँचते ही बदले AIADMK के सुर, कहा- BJP के साथ मिलकर लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

ज्यादा दिन नहीं बीते जब तमिलनाडु में AIADMK के नेता भाजपा की ‘वेल यात्रा’ का विरोध कर रहे थे। लेकिन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शनिवार (नवंबर 21, 2020) को प्रदेश में पहुँचते ही सारे समीकरण बदल गए। पहले तो AIADMK के नेताओं ने चेन्नई एयरपोर्ट पर पहुँचकर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया और बाद में बकायदा पार्टी ने बीजेपी के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया। तमिलनाडु में मई 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

बीजेपी के साथ गठबंधन जारी रखने की घोषणा मुख्यमंत्री ई के पलानिस्वामी ने की। इसके बाद पलानीस्वामी और अमित शाह के बीच बैठक हुई। शाह ने तमिलनाडु को देश का सबसे बेहतर गवर्नेंस वाला राज्य बताया। 

इससे पहले हवाई अड्डे पर केंद्रीय गृह मंत्री का भव्य स्वागत हुआ। हवाई अड्डे से लेकर होटल तक पूरे रास्ते में जनसैलाब उमड़ा हुआ था। अमित शाह सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर अपने काफ़िले से बाहर आए और आम जनता से रूबरू भी हुए। इसके कुछ समय बाद कलाईवनर अरंगम में हुए एक समारोह के दौरान उन्होंने कन्ननकोट्टई थेरोवई कांदीगई रिजर्वायर की शुरुआत करने का ऐलान किया और लगभग 67378 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस समारोह के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री पलानिस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने कई अहम बातें कहीं। 

इनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनावों में हमारा गठबंधन भाजपा के साथ जारी रहेगा। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री का कहना था कि तमिलनाडु सरकार को केंद्र सरकार की तरफ से जनहित और विकास संबंधी हर योजना बनाने से लेकर लागू करने तक पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा अमित शाह ने कोरोना महामारी को लेकर तमिलनाडु की राज्य सरकार के प्रबंधन की सराहना भी की जिसके चलते कुछ ही समय में प्रदेश के भीतर प्रभावित मामलों की संख्या में बहुत कमी आई है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि तमिलनाडु का रिकवरी रेट 97 फ़ीसदी है जो कि पूरे देश में सबसे ज़्यादा है। 

इस बीच अमित शाह ने डीएमके को भी जमकर निशाना बनाया जो पूरे 10 साल बाद सत्ता हासिल करने की कोशिश में है। उन्होंने कहा, “डीएमके को चुनावों में हार का सामना करना पड़ेगा और सिर्फ लोकतांत्रिक ताकतें ही उभर कर सामने आएँगी।” इसके बाद 2जी घोटाले की याद दिलाते हुए गृह मंत्री ने कहा, “डीएमके और कॉन्ग्रेस ने 10 वर्षों तक सत्ता में रहते हुए देश और तमिलनाडु के लिए क्या किया है? हमें इस बात की जानकारी दीजिए कि आपने पिछले 10 वर्षों में क्या किया है और फिर हम उस पर सार्वजनिक परिचर्चा करते हैं। मैं इस बात की विस्तार से जानकारी देने के लिए तैयार हूँ कि एनडीए ने तमिलनाडु के लिए क्या किया है।” 

पलानीस्वामी ने भी महामारी की वजह से थमी हुई अर्थव्यवस्था को अनेक क्षेत्रों के लिए आर्थिक राहत पैकेज देकर फिर से गति देने के लिए आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के दौरान, मुझे यह बताते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत सहायता प्रदान करने के मामले में तमिलनाडु दूसरे पायदान पर है। पब्लिक सेक्टर बैंकों ने अभी तक कुल 6980 करोड़ रुपए वितरित किए हैं।” 

तमिलनाडु को निवेश का बड़ा केंद्र बनाने के दृष्टिकोण के साथ अमित शाह ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इसमें चेन्नई मेट्रो रेल का दूसरा चरण, कोयम्बटूर स्थित अविनाशी रोड पर एलिवेटेड राजमार्ग, चेन्नई ट्रेड सेंटर का विस्तार समेत अन्य परियोजना शामिल है। पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम की अमित शाह के साथ लगभग 40 मिनट तक बैठक हुई।

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनेंगी कनिका राणे, पति 2 साल पहले LOC पर हो गए थे वीरगति को प्राप्त

जम्मू-कश्मीर में 29 वर्षीय मेजर कौस्तुभ राणे को वीरगति को प्राप्त हुए लगभग 2 वर्ष हो गए हैं। अब उनकी पत्नी भारतीय सेना में सेवा देने को तैयार हैं। कनिका राणे ने ज़िंदगी की तमाम मुसीबतों से लड़ते हुए और अपने परिवार को सँभालते हुए अथक परिश्रम कर खुद को देशसेवा के लिए तैयार किया है। उन्होंने चेन्नई स्थित भारतीय सेना की ‘ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी’ में अपना प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है।

अब वो भारतीय सेना में शामिल हो गई हैं। कौस्तुभ राणे और उनका परिवार मुंबई के मीरा रोड में रहता था। अगस्त 2018 में वो तीन अन्य भारतीय सैनिकों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए थे। राइफलमैन हमीर सिंह (28), मनदीप सिंह (26) और विक्रमजीत सिंह (25) ने भी देश के लिए बलिदान दिया था। जहाँ हमीर और मनदीप उत्तराखंड से थे, वहीं विक्रमजीत हरियाणा के थे। बाँदीपोरा में ये चारों वीरगति को प्राप्त हुए थे।

LOC के नजदीक गुरेज़ सेक्टर में पाकिस्तान समर्थिक आतंकी वहाँ की फ़ौज की मदद से घुसपैठ कर रहे थे। श्रीनगर से 125 किलोमीटर दूर सीमा पर पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ को नाकाम करते हुए इन चारों ने भारत माता के लिए अपनी जान को न्योछावर कर दिया था। शनिवार (नवंबर 21, 2020) को मुंबई के डिफेन्स PRO ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कनिका राणे बता रही हैं कि कैसे ये सब उनके लिए एक आसान विकल्प नहीं था।

कनिका राणे ने कहा कि उन्होंने तो बस अपने पति के साथ जिम्मेदारियों की अदला-बदली की है, क्योंकि उनकी जगह पर वो भी रहते तो यही करते। उन्होंने कहा कि वो अपने पति के उन स्वप्नों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारतीय सेना में आई हैं, जो वो अपने पीछे छोड़ गए हैं। उनके पति मेजर कौस्तुभ राणे पहले गढ़वाल रायफल्स में थे, लेकिन बाद में वो 36 इंडियन रायफल्स का हिस्सा बन गए थे।

उन्होंने भारतीय सेना में सेवा देते हुए 6 वर्ष पूरे कर लिए थे। वो अपने पीछे अपने माता-पिता, पत्नी और एक बेटे अगस्त्य को छोड़ गए थे। इस वर्ष की शुरुआत में उधमपुर में हुए एक समारोह में अपने पति की तरफ से कनिका ने गैलेंट्री अवॉर्ड रिसीव किया था। कनिका का कहना है कि सेना के प्रशिक्षण के लिए शारीरिक सहनशीलता से भी ज्यादा आवश्यक है मानसिक मजबूती का होना। उनका कहना है कि अगर आपके पास मानसिक ताकत और सहनशक्ति है तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

कनिका बताती हैं कि यहाँ आने से पहले वे कभी 100 मीटर भी नहीं दौड़ी थीं, लेकिन अब वो 40 किलोमीटर की दौड़ लगाती हैं। शनिवार को उनके साथ अकादमी से 181 पुरुष और 49 महिला उत्तीर्ण हुए, जो अब भारतीय सेना में सेवा देंगे। कनिका 9 महीने का कठिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त करेंगी। वो परीक्षा और साक्षात्कार में भी उत्तीर्ण हुई थीं। इन सबके साथ-साथ वो अपने छोटे बेटे की भी देखभाल करती हैं।

कनिका को उनके पति हमेशा उन्हें अपने लक्ष्य, उद्देश्य और स्वप्नों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने कहा कि प्रेरणा के माध्यम से ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये उनकी तरफ से उनके दिवंगत पति को श्रद्धांजलि है। कनिका अभी 29 वर्ष की हैं। उन्होंने कहा कि वो हमेशा से अपने पति के पदचिह्नों का अनुसरण करना चाहती थीं। उन्होंने कहा था कि वो कश्मीर में सेवा देने के लिए भी तैयार हैं।

इसी तरह से सितंबर 2, 2015 को देहरादून के राइफलमैन शिशिर मल्ल बारामुला के राफियाबाद में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान बलिदान होने की खबर से सारा उत्तराखंड शोक में डूब गया था। 9 घंटे चली उस भीषण मुठभेड़ में वीर जवानों ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम के आतंकी को मार गिराया था। उनकी पत्नी संगीता मल्ल भी भारतीय सेना में शामिल हो गई थीं। फ़िलहाल वो शॉर्ट सर्विस कमीशन में लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में कार्यरत हैं। 

मुस्लिम लड़का-हिन्दू लड़की, मंदिर प्रांगण में कई किसिंग सीन, लव जिहाद को बढ़ावा: Netflix के खिलाफ FIR

नेटफ्लिक्स (Netflix) पर एक नई वेब सीरीज आई है, जिसका नाम है ए सूटेबल बॉय (A Suitable Boy)। विक्रम सेठ के लिखे उपन्यास पर आधारित इस सीरीज को डायरेक्ट किया है मीरा नायर ने। फिल्म की कहानी के केंद्र में है 1951 की एक लड़की, जिसके लिए उसकी माँ एक योग्य लड़के की तलाश में है। इस तलाश के दौरान ही सीरीज में भारत विभाजन से उपजी त्रासदी से लेकर धर्म का झगड़ा, मंदिर-मस्जिद, उस वक्त की राजनीति और बड़ी-बड़ी उलझनें लिए बहुत से शेड्स दिखते हैं।

इस वेब सीरीज पर मंदिर प्रांगण में अश्लील दृश्य फिल्माने और लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। यह एफआईआर दर्ज करवाई है गौरव तिवारी नाम के युवक ने। उन्होंने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी भी दी।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “अपने ‘A Suitable Boy’ कार्यक्रम में नेटफ्लिक्स ने एक ही एपिसोड में तीन बार मंदिर प्रांगण में चुंबन दृश्य फिल्माए। पटकथा के अनुसार मुस्लिम युवक को हिंदू महिला प्रेम करती है, पर सभी किसिंग सीन मंदिर प्रांगण में क्यूँ शूट किए गए? मैंने रीवा में इस मामले पर FIR दर्ज करा दी है।”

उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा, “मंदिर का प्रांगण, बैकग्राउंड में आरती और अश्लील दृश्य। क्या मस्जिद में अजान के समय ऐसा शूट करने की ‘क्रीएटिव फ़्रीडम’ है आपको नेटफ्लिक्स? हिंदुओं की सहिष्णुता को उनकी कमजोरी मत समझिए, ये मध्य प्रदेश का नहीं, भगवान शिव और करोड़ों शिव भक्तों का भी अपमान है। माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “रानी अहिल्याबाई होल्कर ने महेश्वर घाट को शिवभक्तों के लिए समर्पित किया। पाषाण युग के हजारों शिवलिंग उसकी पहचान है। पर नेटफ्लिक्स इस पावन धरा का उपयोग लव-जिहाद को बढ़ावा देने और हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए कर रहा है। आज मैं अपने फ़ोन से नेटफ्लिक्स हटा रहा हूँ, और आप?”

उन्होंने एफआईआर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विक्रम सेठ के लिखे उपन्यास पर बनी बेब सीरीज ‘ए सूटेबल बॉय’ कई दिनों से नेटफ्लिक्स पर चल रही है। उसके दूसरे एपिसोड में ऐसे स्थानों पर किसिंग सीन दर्शाए गए हैं, जो बिल्कुल भी सहनीय नहीं हैं। मंदिर में भगवान शिवलिंग के सामने, जब भजन चल रहा है, तब इस सीन को दर्शाया गया है। इसको लेकर हमने माँग की है कि इसे तुरंत हटाया जाए। 

उन्होंने बताया कि नेटफ्लिक्स वीपी कंटेंट मोनिका शेरगिल और डायरेक्टर, पब्लिक पॉलिसीज अंबिका खुराना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। इसके साथ ही उन्होंने माँग की है कि उनके खिलाफ गैर जमानती एफआईआर दर्ज हो। यह पूछे जाने पर कि क्या उनको लगता है कि यह जानबूझकर किया गया है, उनका कहना था कि बिल्कुल ऐसा ही है, क्योंकि एक बार को हो जाता है कि आ जाए, लेकिन एक ही एपिसोड में तीन बार इस तरह के सीन को दिखाना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं इनके इरादे ठीक नहीं हैं। आज के समय में इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।