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मथुरा के आश्रम में दो साधुओं की संदिग्ध मौत से सनसनी, तीसरे की हालत गंभीर: भाई ने कहा- ‘जहर देकर की गई हत्‍या’

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन इलाके में शनिवार (नवंबर 21, 2020) को दो साधुओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों साधु गोवर्धन मार्ग पर मौजूद गिरिराज बगीचा के पीछे बने आश्रम में रहते थे। आश्रम में रामायण का पाठ कर रहे दोनों साधुओं ने अपने एक और साथी के साथ सुबह की चाय पी थी। जिसके बाद तीनों के ही मुँह से झाग निकलता हुआ देखा गया। बताया जा रहा है कि आश्रम में ही मौजूद गाय के दूध से चाय बनाकर इन लोगों ने पी थी, जिसके बाद यह घटना हुई है।

जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जाता, तब तक दो साधुओं की मौत हो गई। जबकि इनमें से एक रामबाबू नाम के साधु को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृत साधुओं का नाम गोपालदास और श्यामसुंदर दास था।

पूरा घटनाक्रम शनिवार की सुबह का है। रामायण का पाठ कर रहे तीनों साधु एक ही आश्रम में रहते थे। चूँकि सुबह की चाय पीने के बाद ही तीनों की तबियत बिगड़ी थी, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि चाय में ही जहरीला पदार्थ मिलाया गया था। मृतक साधु गोपाल दास के भाई टीकम ने भी आरोप लगाया कि साधुओं की जहर देकर हत्या की गई है और आश्रम में जहरीली दवाइयों की बदबू आ रही है।

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि शनिवार सुबह करीब दस बजे आश्रम में चाय पीने के बाद तीनों साधुओं की तबियत बिगड़ गई। जिसके बाद तीनों को अस्पताल ले जाया गया। जहाँ गोपाल दास और श्याम सुंदर दास को मृत घोषित कर दिया गया, वहीं रामबाबू दास की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया।

पुलिस के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर लोगों से बातचीत की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साधुओं को साजिशन जहर दिया गया है और उनकी हत्या की गई है। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में वीडियोग्राफी कराकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। पुलिस टीम ने आश्रम में मिले खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। चाय में मिलाए गए दूध तथा अन्य सामान के भी नमूने लिए हैं। एसएसपी ने कहा कि पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में हुई संतों की हत्या मामले के बाद औरंगाबाद से एक और संत पर हमले की घटना सामने आ गई थी। बताया गया था कि संत प्रियशरण महाराज पर जिले के चौक परिसर के लाडसावंगी मार्ग पर स्थित उनके आश्रम में घुसकर हमला किया गया। हमलावर 7-8 की तादाद में थे। इन्होंने आश्रम में घुसने के लिए पहले उसकी कड़ी तोड़ी और फिर संत से मारपीट करके उनके कंधे पर चाकू से वार भी किया था। 

ड्रग्स केस में कॉमेडियन भारती सिंह को NCB ने किया गिरफ्तार: पति हर्ष से पूछताछ जारी, घर से 86.5 ग्राम गाँजा बरामद

ड्रग्स केस में कॉमेडियन भारती सिंह को एनसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उनके पति हर्ष से पूछताछ जारी है। इससे पहले पकड़े गए ड्रग्स पैडलर की निशानदेही पर एनसीबी ने भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के घर पर छापेमारी की थी। एनसीबी को छापेमारी के दौरान संदिग्ध पदार्थ (गाँजा) मिला था।

NCB ने कॉमेडियन भारती सिंह के प्रोडक्शन ऑफिस और घर पर छापा मारा और दोनों जगहों से 86.5 ग्राम गाँजा बरामद किया गया। घर से गाँजा मिलने के बाद दोनों को एनसीबी ने पहले हिरासत में लिया था। दोपहर तीन बजे से पूछताछ के बाद गिरफ्तारी हुई।

जाँच एजेंसी के सामने भारती और उनके पति हर्ष लिंबाचिया दोनों ने गाँजे का सेवन करने की बात कबूल कर लिया। इसके बाद भारती सिंह को गिरफ्तार कर लिया और हर्ष लिंबाचिया से पूछताछ चल रही है। थोड़ी देर बाद भारती को मेडिकल के लिए ले जाया जाएगा। इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए संभवत: उनकी एनडीपीएस कोर्ट में पेशी होगी। अगर आज रात को संभव नहीं हो पाया तो रविवार (नवंबर 22, 2020) को भारती सिंह को कोर्ट में पेश किया जाएगा। हर्ष पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अभी उनसे पूछताछ चल रही है। उनका बयान लिया जा रहा है।

गौरतलब है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कॉमेडियन भारती सिंह के मुंबई स्थित तीन घरों पर छापेमारी की थी। मुंबई के जोनल डायरेक्टर ऑफिसर समीर वानखेड़े ने बताया था, “भारती और उनके पति दोनों को नशीले पदार्थ रखने के मामले में सवाल-जवाब के लिए हिरासत में ले लिया गया है।”

इससे पहले एनसीबी ने एक्टर और मॉडल अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रेंड गेब्रिएला के घर पर छापा मारा था। बता दें कि 9 नवंबर को अर्जुन रामपाल के घर छापेमारी के दौरान जाँच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त किया था और अर्जुन के ड्राइवर से भी पूछताछ की थी। 

बता दें कि बॉलिवु़ड में ड्रग्स की जाँच के लपेटे में अब तक कई सेलिब्रिटीज के नाम सामने आ चुके हैं। सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती से इसकी शुरुआत हुई और इसके बाद दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, अर्जुन रामपाल की पार्टनर गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स जैसे कई नामों के सामने आने का सिलसिला जारी है।

पंजाब में किसानों के आंदोलन के कारण रेलवे को 2,220 करोड़ रुपए का भारी नुकसान

कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब में पिछले 55 दिनों से जारी किसानों के आंदोलन की वजह से जहाँ स्थानीय उद्योग और व्यापार प्रभावित हुआ है, वहीं भारतीय रेलवे को भारी चपत लगी है। किसानों का आंदोलन पटरियों पर होने की वजह से 2,352 पैसेंजर ट्रेनें या तो रद कर दी गई या उनका रास्ता बदल दिया गया। पंजाब जाने के लिए माल से भरे 230 रैक राज्य के बाहर इधर-उधर खड़े हैं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, पैसेंजर और मालगाड़ियों का संचालन बाधित होने से रेलवे को अब तक कुल 2,220 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

पंजाब में रोजाना 40 रैक की लोडिंग होती है। भारतीय रेलवे को अकेले पंजाब से रोजाना 14.85 करोड़ रुपए का औसत राजस्व प्राप्त होता है। मगर उत्तरी रेलवे को मालगाड़ियों में लोडिंग नहीं होने के कारण नुकसान झेलना पड़ रहा है। केंद्र के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा जारी विरोध के कारण रेलवे को यात्री राजस्व में 67 करोड़ रुपए सहित कुल 2,220 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

मालगाड़ियों की आवाजाही भी पूरी तरह ठप है। प्रतिदिन औसतन 30 रैक का नुकसान सीधे तौर पर होता है, जिनकी लोडिंग पंजाब के विभिन्न स्टेशनों पर की जाती है। बाहर से पंजाब में रोजाना 40 रैक आते हैं, जो नहीं पहुँच पा रहे हैं। इस दौरान कुल 3,850 मालगाड़ियों की लोडिंग नहीं हो सकी है।

आंदोलन के कारण मालगाड़ियों के 3850 रैक पर लदान नहीं हो सकी। आंदोलन के कारण पंजाब के बाहर 230 रैक फँसे रहे। इनमें से 78 रैक कोयला, 34 रैक खाद, आठ रैक सीमेंट, आठ रैक पेट्रोलियम पदार्थो तथा 102 रैक कंटेनर, स्टील एवं अन्य सामग्री के हैं। इसके साथ ही आंदोलन के मद्देनजर, 2352 यात्री ट्रेनों को रद्द करना पड़ा या उनका मार्ग परिवर्तन करना पड़ा।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई कि पंजाब में ‘रेल रोको’ आंदोलन के कारण भारतीय रेलवे को राजस्व में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ऑल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड फोरम के अध्यक्ष बद्रीश जिंदल ने कहा था कि राज्य के कारोबारियों को कुल मिलाकर करीब 5000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, क्योंकि ‘किसानों’ द्वारा रेल लाइन को बंद करने का अभियान जारी है। 

 इस्पात उद्योग से लेकर आवश्यक वस्तुओं तक, पंजाब में लगभग हर चीज की कमी है। पंजाब सरकार की निष्क्रियता के कारण, बिजली स्टेशनों को बिजली उत्पादन के लिए कोयला नहीं मिल पा रहा है, जिससे राज्य भर में बिजली की भारी कमी हो रही है।

टीएमसी MP सौगत रॉय समेत 5 सांसद ज्वाइन कर सकते हैं BJP: अर्जुन सिंह का दावा

जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल में चुनाव की घड़ी नजदीक आ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक पारा बढ़ता जा रहा है। ममता बनर्जी के सबसे करीबी माने जाने वाले दिग्गज टीएमसी नेता शुभेंदु अधिकारी के बीजेपी में शामिल होने की खबरों के बीच एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। अब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह ने दावा किया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पाँच सांसद कभी भी इस्तीफा दे देंगे। बता दें कि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है।

भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने दावा किया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद सौगत राय समेत चार अन्य सांसद जल्द ही पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सौगत रॉय (टीएमसी सांसद) कैमरे के सामने टीएमसी नेता होने का दिखावा करते हैं। 

अर्जुन सिंह ने शनिवार (नवंबर 21, 2020) को दावा किया कि सौगत राय टीएमसी से इस्तीफा देना चाहते हैं। सांसद अर्जुन सिंह ने कहा, “मैं बार-बार कह रहा हूँ कि पाँच टीएमसी सांसद कभी भी इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो जाएँगे।” जब उनसे पूछा गया कि क्या इन 5 नामों में सौगत राय भी शामिल हैं, तो अर्जन सिंह ने कहा, “कैमरे के सामने सौगत राय टीएमसी नेता और ममता बनर्जी का मीडिएटर होने का ढोंग कर रहे हैं। लेकिन एक बार कैमरा घूमेगा, आप इस लिस्ट में उनका नाम भी शामिल कर सकेंगे।”

गौरतलब है कि सौगत राय तृणमूल कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं। भाजपा सांसद का ये बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल का दौरा कर लौटे हैं।

बीजेपी सांसद ने आगे कहा, “शुभेंदु अधिकारी एक बड़े जनाधार वाले नेता हैं। ममता बनर्जी आज बड़ी नेता हैं क्योंकि शुभेंदु अधिकारी और उनके जैसे कई नेताओं ने संघर्ष किया है। पार्टी के लिए अपना खून दिया है, लेकिन अब ममता बनर्जी उन सब का बलिदान भूल कर अपने भतीजे को कुर्सी पर बैठाना चाहती हैं। कोई भी बड़ा नेता यह स्वीकार नहीं कर सकता। जिस तरह से शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं का अपमान किया गया है, उन्हें टीएमसी छोड़ देनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि शुभेंदु एक बड़े नेता हैं, उनका हमेशा भारतीय जनता पार्टी में स्वागत है। बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। शुभेंदु जैसे ही बीजेपी में शामिल होंगे, ममता सरकार ज्यादा दिनों तक प्रदेश में टिक नहीं पाएगी। यह सरकार खत्म हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों तृणमूल कॉन्ग्रेस के लोकप्रिय नेता और परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बगावती तेवर दिखाते हुए नंदीग्राम दिवस पर टीएमसी से अलग रैली की थी। अधिकारी की रैली में सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर भी नहीं थे। यहीं नहीं उन्होंने अपनी रैली में भारत माता की जय के नारे भी लगाए।

फेसबुक के कंटेंट्स की निगरानी का जिम्मा संभालने वाली निकली ‘आतंकी संगठन’ की सदस्य: 20 में 18 जॉर्ज सोरोस के लोग

फेसबुक के ओवरसाइट बोर्ड का जबसे गठन का प्रस्ताव आया, तभी से वो विवादों का हिस्सा बना हुआ है। जब सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर कंटेंट्स को रेगुलेट करने के लिए इस प्लेटफॉर्म का सेटअप किया गया, तभी इसे लेकर खुलासा हुआ कि इसके 20 में से 18 सदस्य अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े हुए हैं। यहूदी मूल के जॉर्ज सोरोस डेमोक्रेट पार्टी के बड़े वित्तीय डोनर भी हैं। ऐसे में निष्पक्षता को लेकर लोगों ने सवाल उठाए। अब फेसबुक का नाम ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से जुड़ा है।

इसके बाद एक और ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सबकी भौहें तान दी हैं। फेसबुक ओवरसाइट बोर्ड का एक सदस्य ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का हिस्सा है। ये एक आतंकी संगठन है, जिसे कई अरब और पश्चिमी देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है। ये विवाद तवक्कुल करमन को लेकर है, जो नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता रह चुकी हैं। हालाँकि, उन्हें ये पुरस्कार मिलने के बाद भी काफी विवाद हुआ था और उँगलियाँ उठी थीं।

हालाँकि, अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा को भी ये पुरस्कार मिला था, जिन्होंने लीबिया पर हमला कर के उसे दासता की एक जंजीर में बाँध दिया और पूरे मध्य-पूर्व को एक तरह से अशांति के बुरे दौर में धकेल दिया। ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का सदस्य होना ही अपनेआप में एक विवाद का विषय है। तवक्कुल इससे पहले वो ‘यमनी इस्लाह पार्टी (ISP)’ की सदस्य थीं, जिसे ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का समर्थन हासिल था।

उन्हें 2011 में नोबेल मिला था। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ क्षेत्र में आधिकारिक अत्याचार और आतंकवाद के पीड़ितों में से एक है। ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ ने भी उनके साथ अपने जुड़ाव को स्वीकारा और नोबेल मिलने पर बधाई भी दी थी। सितम्बर 15, 2013 को बीबीसी अरबिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जनवरी 2011 की मिस्र क्रांति की सबसे बड़ी सफलता थी कि आपातकाल के क़ानून को हटाया गया।

उन्होंने कहा था कि दुर्भाग्य से 2013 में इस क़ानून को फिर से लाया गया। उन्होंने कहा था, “मुस्लिम ब्रदरहुड और इसके कार्यकर्ता व समर्थक सैन्य शासन के खिलाफ रहे हैं और वो एक बड़े युद्ध में हैं, जिसकी कीमत वो अपने खून से चुका रहे हैं। वो अपनी दृढ़ता से ये लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि वो इस क्रांति को सही रास्ते पर लेकर जाएँगे।” अरब में तो उन्हें फेसबुक बोर्ड में शामिल किए जाने के बाद खासा विरोध हुआ था।

राजनीतिक शास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर अब्दुल खलीक अब्दुल्ला का कहना है कि वो फेसबुक के कंटेंट्स को सुपरवाइज करने वाले बोर्ड में रहने की काबिल नहीं हैं। अमीरात के लेखक ओला अल शेख ने कहा कि उनकी नियुक्ति को दुर्गति बताते हुए कहा था कि इससे उन्हें अरब क्षेत्र को लेकर फेसबुक कंटेंट्स में अपने मनमाफिक काम करने की छूट मिलेगी, जो खतरनाक है। मिस्र में तो उनके खिलाफ खूब विरोध हुआ।

डॉक्टर हनी राजी का कहना है कि उनकी नियुक्ति का सीधा अर्थ है इजिप्ट, सऊदी अरब और यूएई में फेसबुक की सारी जिम्मेदारी ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ को दे देना। उन्होंने कहा कि या तो उन्हें कमिटी से निकाला जाएगा, या फिर फेसबुक ही बंद हो जाएगा। उन्होंने तवक्कुल को इन तीनों मुल्कों की सत्ता का घोर विरोधी करार दिया। आतंकवाद और असहिष्णुता के विशेषज्ञ हनी नसीरा ने भी उन्हें लेकर विरोध जताया।

उन्होंने बताया कि तवक्कुल को पहले तो यमनी क्रांति का प्रतीक माना जाता था, लेकिन समय के साथ वो असहिष्णुता, भेदभाव और निष्पक्षता के अभाव की एक पहचान बन गई हैं। नोबेल पुरस्कार जीतने के बाद तवक्कुल करमन को दोहा बुला कर ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के नेता युसूफ अल करदावी ने सम्मानित किया था, ऐसी भी खबरें आई थीं। करदावी आत्मघाती बम हमलों का ऐलान कर चुका है और उसने हिटलर की भी सराहना करते हुए कहा था कि नाजी शासक ने यहूदियों को ‘दंड दिया’।

उनका कहना है कि तवक्कुल की वफादारी उन्हीं सरकारों के प्रति होती हैं, जिन्होंने लोकतंत्र और शासन के सारे नियमों को ताक पर रखा हुआ है, जैसे – तुर्की और क़तर। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही मुल्क वस्तुनिष्ठता और निष्पक्षता के सारे सिद्धांतों को धता बताते हैं। उनका कहना है कि तवक्कुल की राजनीति के हिसाब से विभाजनकारी नीतियों और कट्टरवाद को बढ़ावा मिलता है, साथ ही जो उनसे सहमत नहीं होते उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश होती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर अक्सर ऐसे आरोप लगते रहे हैं और उनका पक्षपाती रवैया सामने आता रहा है। इससे पहले फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लकी ने कहा था कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारों पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इसके चलते कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। साथ ही दावा किया था कि फेसबुक ने सही समय पर कार्रवाई की होती तो म्यांमार जनसंहार और श्रीलंका में हुए दंगों को आसानी से रोका जा सकता था।

हाँ रवीश! सच कहा ‘लव जिहाद’ तो भूत ही है, जिसकी लाश अक्सर सूटकेस में मिलती है

देश में इस समय ‘लव जिहाद’ पर चर्चाओं का दौर चरम पर है। जब से भाजपा शासित राज्यों ने इसे रोकने के लिए क़ानून बनाने का ऐलान किया है तभी से बुद्धिजीवियों के माथे पर चिंता की लकीरें गाढ़ी होती जा रही हैं। बीते दिनों इतने संवेदनशील मुद्दे पर ‘हें हें हें’ करते हुए देश के प्रख्यात लिब्रेश्वर पत्रकार और लघु प्रेमकथाओं (लप्रेक) के सदाबहार लेखक रवीश कुमार ने भी प्राइम टाइम कर ही दिया। किया तो किया लव जिहाद को ‘हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा’ भी बता दिया। लगभग 2 मिनट तक एक साँस में दिए गए अधकचरे प्रोपेगेंडा परस्त ज्ञान में रवीश कुमार ने और भी कई निराधार तर्क पेश किए।

18 नवंबर 2020 को प्रसारित हुए लगभग 34 मिनट की अवधि के प्राइम टाइम के शुरुआती दो मिनट की सभी पक्षपाती दलीलें रवीश कुमार का पूरा एजेंडा साफ़ कर देती है। कार्यक्रम शुरू होने के 13 सेकेंड बाद रवीश कुमार पहली पंक्ति कहते हैं, “भारत का समाज बुनियादी रूप से प्रेम का विरोधी है। किसी को प्रेम न हो जाए, अपनी पसंद से जाति या धर्म के बाहर शादी न हो जाए, इस आशंका में डूबा रहता है और डरा रहता है।” 

वामपंथ के पोलियो से ग्रसित रवीश कुमार को यहाँ समझने की आवश्यकता है कि भारतीय समाज में प्रेम के लिए स्थान हमेशा से रहा है। ऐसा समाज जिसके लिए प्रेम हमेशा से शाश्वत विषय रहा है और इसके जीवंत उदाहरण हैं भारतीय संस्कृति में प्रेम पर रचित अनेक दर्शन। लेकिन एक मज़हब ऐसा है जिसके लिए प्रेम और पाखंड एक ही रास्ते के दो छोर हैं जो अंत तक साथ चलते हैं। किस संभ्रांत समाज में अपना नाम या अपनी पहचान बदल/छुपा कर प्रेम किया जाता है? लेकिन अफसोस इस पहलू के सामने आते ही देश के प्रख्यात लिबरल पत्रकार को सांप्रदायिकता का मोतियाबिंद हो जाता है। 

इसके बाद प्रोपेगेंडा परस्त रवीश कुमार कहते हैं, “भारतीय समाज हिन्दी सिनेमा में सोते-जागते गीतों के नाम पर प्रेम गीत ही सुनता है, वहीं प्रेम से इतना डरता है। इतना डरता है कि डर का भूत खड़ा करता है। उसी एक भूत का नाम है लव जिहाद। वैसे तो यह हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन बेवक्त-बेज़रूरत इसे छेड़ने का मतलब यही है, किसी को यकीन है कि भारत के समाज को हिन्दू बनाम मुस्लिम के भूत से डराया जा सकता है। हें हें हें हें।”

यहाँ भी वैचारिक विकलांगता से मजबूर रवीश कुमार को कई बातें समझने की ज़रूरत है। लव जिहाद कोई आज या कल की समस्या नहीं है। यह पिछले काफी समय से हो रही है फिर भी रवीश कुमार जैसे स्वयंभू बुद्धिजीवी इस तरह के मामलों की सच्चाई को स्वीकारना नहीं चाहते हैं। इन्हें नहीं नज़र आता कि ऐसे मामलों में एक महिला की अस्मिता से खिलवाड़ होता है और उनका शारीरिक तथा मानसिक शोषण होता है। इतना ही नहीं उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता है और इतने से बात नहीं बनती है तो सूटकेस में फिट करने का विकल्प सदाबहार है ही।  

रवीश कहते हैं, “खैर यह किसी की सियासी ज़रूरत हो सकती है लेकिन समाज की सच्चाई भी तो है। उस समाज से आप उम्मीद ही क्या करें जहाँ 90 फ़ीसदी संबंध दहेज़ के सामान से तय होते हों, वहाँ प्रेम कितना ही होगा। इसलिए जिसने प्रेम को कार और वाशिंग मशीन समझा, उससे यही उम्मीद की जा सकती है कि वह लव जिहाद के भूत को खड़ा करेगा।” इसके बाद रवीश कुमार धीरे से लव जिहाद को पितृसत्तात्मक समाज की उपज बता देते हैं। 

2 मिनट के इस प्रोपेगेंडा भरे ज्ञान में न तो पहचान छुपाने का ज़िक्र हुआ और न ही प्रेम के नाम पर बहला-फुसलाकर शारीरिक शोषण करने का ज़िक्र हुआ। न ही सहमति के विरुद्ध महिलाओं को मज़हब कबूल कराने की बात का ज़िक्र हुआ। यानी रवीश कुमार के दृष्टिकोण में मूल समस्या का एक भी बिंदु अहम नहीं है। यह समस्या नई नहीं है और विशेष रूप से रवीश कुमार जैसे पत्रकारों के साथ जो ‘तार्किक’ भी हैं और ‘तजुर्बेकार’ भी।

‘गालीबाज’ देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल को ‘टोरंटो लिटरेचर फेस्टिवल’ में मंच देने पर भारतीय दूतावास पर फूटा लोगों का गुस्सा

कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा 27-29 नवंबर को होने वाले तीन दिवसीय जेएलएफ टोरंटो लिटरेचर फेस्टिवल के लिए देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल जैसे विवादास्पद ‘इतिहासकारों’ को आमंत्रित करने के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

कनाडा के महावाणिज्य दूतावास के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा विभिन्न हस्तियों द्वारा हिस्सा लेने वाले सत्रों के विवरण के बारे में एक ट्वीट शेयर किया गया। इस दौरान देवदत्त पटनायक 29 दिसंबर को ‘महाभारत: आधुनिक रंगमंच के लिए प्राचीन मिथक को अपनाना’ विषय पर बोलने वाले हैं।

शेयर किए गए ट्वीट में कहा गया, “27-29 नवंबर से @JLFLitfest पर हमारे समय के कुछ महान लेखकों, कवियों, इतिहासकारों, पत्रकारों के बीच बातचीत का अनुभव।”

‘इतिहासकार’ देवदत्त पट्टनायक को आमंत्रित किए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स का फूटा गुस्सा

इस ट्वीट के पोस्ट किए जाने के तुरंत बाद, उग्र नेटिजन्स ने देवदत्त पट्टनायक जैसे व्यक्तियों को मंच प्रदान करने के लिए कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास को आड़े हाथों लिया। बता दें कि देवदत्त पटनायक का सोशल मीडिया वेबसाइटों पर लोगों को गाली देने का इतिहास है। इसके अलावा उन्हें अक्सर मान्यताओं को लेकर झूठ बोलते हुए पाया गया है।

एक ट्विटर यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देवदत्त सबसे बद्तमीज़ ‘विशेषज्ञ’ में से एक था जिसके साथ उन्होंने बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि पटनायक ने उन्हें बीमार कर दिया। उन्होंने कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास की निंदा की, जिन्होंने महिलाओं के लिए गाली-गलौच की भाषा का इस्तेमाल करने वालों को मंच प्रदान किया।

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा, “देवदत्त पटनायक को बुलाने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए, इसे तो लेखक कहना भी शर्म की बात है।”

एक ट्विटर यूजर ने कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा डाले गए ट्वीट का जवाब देते हुए उस अपमानजक ट्वीट का उदाहरण दिया जब देवदत्त पट्टनायक ने सोशल मीडिया यूजर्स को बहुत गंदा ट्वीट किया था।

ट्विटर यूजर्स ने हैरानी जताई कि क्या भारत सरकार महाभारत को मिथक मानती है, क्योंकि “देवदत्त जैसे हिंदू हिंदू विरोधी” ऐसा ही मानते हैं।

सोशल मीडिया पर आम सहमति यह है कि देवदत्त पटनायक हिंदू विरोधी, सीरियल गालीबाज और हिंदू ग्रंथों के गलत व्याख्याकार हैं। लोगों ने उन्हें जेएलएफ टोरंटो लिटफेस्ट के लिए आमंत्रित करने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों की आलोचना की।

देवदत्त पट्टनायक- गालियाँ, विकृतियाँ और झूठ का पुलिंदा

देवदत्त पट्टनायक का उन लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का इतिहास रहा है जो उनके विचार के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब तथाकथित इतिहासकार ने सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट और अभद्र गालियों का सहारा लिया है। पटनायक ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में भी झूठे दावे किए थे और हिंदुओं और हिंदुत्व का उपहास करने और उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके घृणित अपमानजनक व्यवहार और हिंदू विरोधी होने के कारण, सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने पर नाराजगी व्यक्त की है।

इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल को भारत सरकार के कार्यक्रम में आमंत्रित करने पर भड़के नेटिजन्स

पटनायक के अलावा, जेएलएफ टोरंटो लिटफेस्ट के लिए भारत सरकार द्वारा एक और विवादास्पद शख्सियत, इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल को दिए गए निमंत्रण ने सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स के नाराजगी का कारण बना। उनमें से कई लोग इस बात से हैरान हैं कि विलियम डेलरिम्पल जैसे ‘इंडिया हेटर और ब्रेकर’ जिसने अनुच्छेद 370 हटाए जाने और सीएए लागू करने का विरोध किया, उसे क्यों सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में बुलाया गया।

कई सोशल मीडिया यूजर्स देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल के स्पीकर के रूप में बुलाए जाने से इतने खिन्न थे कि उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर को टैग करके यह निवेदन करने लगे कि वो हिन्दू घृणा से सने ऐसे ‘इतिहासकारों’ को हिंदू के महाकाव्य महाभारत पर बोलने के लिए भेजे गए आमंत्रण को अपनी स्वीकृति न दें।

एक सोशल मीडिया यूजर ने हैरानी जताई कि भारतीय वाणिज्य दूतावास विलियम डेलरिम्पल को एक मंच क्यों प्रदान कर रहा है, जिसे दिल्ली दंगों पर ब्लूम्सबरी इंडिया की पुस्तक के प्रकाशन को रोकने के लिए जाना जाता है। यूजर ने सवाल किया, “@IndiainToranto भारतीय हितों के लिए काम करता है या फिर अपने निजी लोगों के लिए काम करता है?”

जिसने दिल्ली दंगों की सच्चाई बताने वाली पुस्तक का प्रकाशन रुकवा दिया

माना जाता है कि इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने ब्लूम्सबरी इंडिया को दिल्ली के दंगों पर किताब के प्रकाशन को वापस लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बता दें कि दिल्ली दंगों पर आधारित किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने रोक दिया था। ऐसा करने के लिए वामपंथी, लिबरल और इस्लामी समूह ने सबसे ज़्यादा दबाव बनाया था।

इस्लामी कट्टरवादी आतिश तासीर ने खुलासा किया था कि स्कॉटिश इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिम्पल ही वो व्यक्ति है, जिसने इस पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगवाई थी। आतिश तासीर ने मोनिका अरोड़ा की दिल्ली दंगों पर आने वाली पुस्तक को सत्ता का प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि विलियम डेलरिम्पल ने इसके प्रकाशन पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके लिए वो उनके आभारी हैं। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि स्कॉटिश लेखक के बिना ये संभव नहीं हो पाता। 

जिस AIADMK ने रोकी थी BJP की यात्रा, उसके ही हजारों कार्यकर्ताओं ने किया अमित शाह का स्वागत: तमिलनाडु की राजनीति गरमाई

तमिलनाडु में जिस AIADMK के नेता भाजपा की ‘वेल यात्रा’ का विरोध कर रहे थे और सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही थी, उसी पार्टी के नेताओं ने चेन्नई एयरपोर्ट पर पहुँचकर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया। शनिवार (नवंबर 21, 2020) की दोपहर के बाद से ही मीनामबक्कम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर सरगर्मी तेज़ हो गई थी और इसके साथ ही पूरे तमिलनाडु में भी अमित शाह के आगमन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

न सिर्फ भाजपा, बल्कि AIADMK के हजारों कार्यकर्ता भी अपनी पार्टी के पोस्टर-बैनरों और झंडों के साथ एयरपोर्ट कूच कर गए और अमित शाह का स्वागत किया। मुख्यमंत्री पलानिस्वामी ने खुद एयरपोर्ट जाकर अमित शाह का औपचारिक स्वागत किया। एयरपोर्ट रूट को राज्य सरकार ने फूलों और हरियाली से सजाया हुआ था। पराई बीट्स सहित अन्य क्लासिकल म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स की मदद से संगीत का माहौल तैयार किया गया।

इन सबके अलावा एयरपोर्ट रूट से जाने वाली बसों के रास्ते को भी बदल दिया गया था। सिटी पुलिस ने चेन्नई को फ़िलहाल एक किले में बदल दिया है और सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस के अलावा सीआरपीएफ और एसटीएफ के कुल मिला कर 3000 जवानों को मोर्चेबंदी पर लगाया गया है। थ्री लेयर सिक्योरिटी के साथ बम स्क्वाड भी मौके पर तैनात है। होटल में बड़े नेताओं के साथ मिलने के बाद अमित शाह को कलेवणार आरंगम में कई प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करना है।

अमित शाह का ये दौरा यूँ तो कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए है, लेकिन इस दौरान वो राज्य की राजनीतिक हालात का भी जायजा लेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कई दौर की बैठकों के अलावा वो NDA की अपनी सहयोगी पार्टी AIADMK के बड़े नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। मई 2021 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा चाहती है कि वो इस बार बड़ी ताकत बनकर उभरे।

अमित शाह AIADMK के दोनों दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्रियों एमजी रामचंद्रन (MGR) और जयललिता की समाधि स्थल पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके अलावा उन्हें चेन्नई मेट्रो के फेज-3 का भी उद्घाटन करना है। भाजपा के सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक के दौरान चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। सुपरस्टार रजनीकांत के साथ भी उनकी बैठक की चर्चा है, लेकिन इसे लेकर कोई पुष्ट खबर अब तक नहीं आई है।

2019 लोकसभा चुनावों के परिणाम को देख कर अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि राज्य में DMK इस बार पूरी तैयारी के साथ उतरने वाली है, क्योंकि वो लगातार तीसरा विधानसभा चुनाव नहीं हारना चाहती। पार्टी सुप्रीमो एमके स्टालिन भी पहली बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। AIDMK में वर्तमान सीएम पलानिस्वामी और पूर्व सीएम पन्नीरसेल्वलम, इन दोनों की एकता पर सब निर्भर करता है। रजनीकांत ने अपने पत्ते अब तक नहीं खोले हैं।

इससे पहले अपने मुखपत्र के माध्यम से AIADMK ने कहा था कि राज्य में जाति-धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित करने वाली यात्रा नहीं निकालने दी जाएगी। उसने कहा था कि सभी सम्बंधित लोगों को समझ लेना चाहिए कि तमिलनाडु के लोगों ने बार-बार साबित किया है कि द्रविड़ प्रदेश में धर्म मानवता के लिए दिशा-निर्देशक प्रकाश-पुँज हैं, न कि घृणा और विभाजन का माध्यम। उसने कहा था कि सही मजहब शांति और प्यार का ही सन्देश देते हैं।

‘अपनी भूमि का भारत के खिलाफ इस्तेमाल तुरंत बंद करो’: भारत ने Pak के राजदूत को किया तलब, JeM की बड़ी साजिश का खुलासा

नगरोटा में आतंकियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को समन किया है। भारत ने जिस तरह से एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया, वो राहत की बात है। लेकिन, अब भारत ने पाकिस्तान को आइना दिखाना भी शुरू कर दिया है, जिसने इस पूरे आतंकी हमले की साजिश रची थी। जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में आतंकियों के साथ ये मुठभेड़ गुरुवार (नवंबर 21, 2020) को हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जानकारी दी है कि ये सभी आतंकी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्य थे, ऐसा शुरुआती जाँच में पता चला है। इसे संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। भारत सरकार ने जैश-ए-मुहम्मद द्वारा भारतीय सरजमीं पर लगातार किए जा रहे आतंकी हमलों के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए याद दिलाया कि फ़रवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले सहित कई वारदातों में इसकी भूमिका रही है।

भारत सरकार ने कहा है कि जिस तरह से बड़ी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद जब्त हुए हैं, उससे पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शांति और सुरक्षा को अस्थिर करने की एक सम्पूर्ण साजिश थी। बकौल भारतीय विदेश मंत्रालय, इसका एकमात्र उद्देश्य ये था कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय जिला विकास परिषद (DDC) के चुनावों के रूप में जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है, उसे पटरी से उतारा जाए।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राजदूत को समन कर उसकी इस करतूत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने कहा कि इस संभावित हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण ही रोका जा सका। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वो न सिर्फ आतंकियों को समर्थन देना बंद करे, बल्कि अपनी जमीन से दूसरे देशों में हमला करने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर पूरे आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूत करे।

भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को किया समन

साथ ही भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय नियमों की याद दिलाते हुए कहा कि वो द्विपक्षीय समझौतों का पालन करे और किसी भी हालत में भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करना बंद करे। साथ ही भारत सरकार ने दोहराया कि वो पूरी मजबूती से और सख्ती के साथ, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाजत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ये भी खुलासा हुआ है कि ख़ुफ़िया सूचनाओं के आधार पर हुए ऑपरेशन में जिन 4 आतंकियों को मार गिराया गया, वो मसूद अजहर के भाई मुफ़्ती रउफ असगर के साथ संपर्क में थे। साथ ही वो JeM के सरगना कारी जरार के साथ भी संपर्क में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई थी। ये बता भी पता चली है कि बालाकोट में आतंकियों की ट्रेनिंग का पूराइंफ्रास्ट्रक्चर अब JeM के हवाले ही कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 20, 2020 को गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर समीक्षा बैठक की थी। नगरोटा में मारे गए आतंकी 26/11 की बरसी पर कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे। पीएम मोदी ने इस समीक्षा बैठक के बाद सेना को उनकी सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया था।

चोट्टानिकारा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बेंगलुरु के व्यापारी ने किया ₹700 करोड़ का दान, होंगे हॉस्पिटल सहित कई अन्य निर्माण

बेंगलुरु के गाणाश्रवण (Gaanasravan) नाम के एक स्वर्ण व्यापारी ने केरल के कोच्चि में प्रसिद्ध चोट्टानिकारा मंदिर को 700 करोड़ रुपए दान करने की पेशकश की है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सोमवार (नवंबर 16, 2020) को ‘स्वामीजी ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के अधिकारियों के साथ मंदिर का दौरा किया था।

उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार और इसे अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल में बदलने के लिए 300 करोड़ रुपए की राशि देने का वादा किया है। उन्होंने गर्भगृह को सोने की प्लेटों से ढँकने का वादा किया है। इसके अलावा उन्होंने 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, गेस्ट हाउस, ऑडिटोरियम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर सप्लाई स्कीम और रिंग रोड के निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपए देने का वादा किया है। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल दक्षिण भारत में मुफ्त इलाज देने वाला सबसे बड़ा अस्पताल साबित हो सकता है।

अपने फैसले के बारे में बात करते हुए, गाणाश्रवण ने कहा, “मैं बेंगलुरु से लगभग 80 किलोमीटर दूर एक गाँव में संगीतकारों के परिवार में पैदा हुआ था। पाँच साल पहले, मेरे गुरु ने मुझे चोट्टानिकारा मंदिर में प्रार्थना करने के लिए कहा, जिससे मेरी किस्मत बदल गई। मेरा स्वर्ण व्यवसाय फल-फूल रहा है और दुनिया भर में व्यापार को बढ़ा दिया। मेरा मानना ​​है कि यह अम्मा का आशीर्वाद है जिसने मुझे ऐश्वर्य दिया। इसलिए मैंने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इस मंदिर के विकास के लिए खर्च करने का फैसला किया।”

उन्होंने बताया, “चोट्टानिकारा में 500-बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा और बिना धर्म, जाति और पंथ के सभी को मुफ्त इलाज किया जाएगा। हम एक वीआईपी गेस्ट हाउस के अलावा 300 कमरों वाले 7 गेस्ट हाउस बनाने की योजना बना रहे हैं।”

गाणाश्रवण ने आगे कहा, “एक वृद्धाश्रम भी बनाया जाएगा, जिसमें 200 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा 5,000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक अनाथालय और एक ऑडिटोरियम होगा। हम तिरुपति की तर्ज पर चोट्टानिकारा को एक अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करेंगे।”

उन्होंने यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों को चौड़ा करने और दो रिंग रोड को विकसित करने की योजना बनाई है। साथ ही, मंदिर के पूर्वी और पश्चिमी प्रवेश द्वार पर लेटराइट पत्थरों का उपयोग करते हुए दो बड़े गोपुरम बनाए जाएँगे। उन्होंने कीझकवु मंदिर के सामने मंदिर के तालाब का जीर्णोद्धार करने की कसम खाई है और 3 करोड़ रुपए में अन्नदानम बनाए जाएँगे। इसके अलावा वह 50 करोड़ रुपए के लिए पास की भूमि का अधिग्रहण करके एक पार्किंग लॉट प्रदान करेंगे।

प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है

कोचीन देवास्वोम बोर्ड (CBD) एम के शिवराजन ने बताया, “यह कार्य कोचीन देवस्वाम बोर्ड की देखरेख में गाणाश्रवण की कंपनी के कंस्ट्रक्शन विंग द्वारा निष्पादित किया जाएगा। स्वामीजी ग्रुप और सीडीबी के नाम से एक संयुक्त खाता खोला जाएगा और काम शुरू होने से पहले प्रत्येक चरण के लिए पूरी राशि इस खाते में स्थानांतरित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सीडीबी कार्यों की निगरानी के लिए एक चीफ इंजीनियर की नियुक्ति करेगा। वे प्रारंभिक कार्य के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद सीडीबी को 5 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए सहमत हुए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि कोचीन देवस्वोम बोर्ड ने केरल उच्च न्यायालय से मंजूरी के लिए अपील की है और अदालत की मंजूरी के एक महीने के भीतर काम शुरू हो जाएगा। कार्य जनवरी 2021 में शुरू होने और 2027 तक समाप्त होने की उम्मीद है।