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इंडिया टुडे से लेकर द वायर तक, सबके झूठ का ED ने किया पर्दाफाश, कहा- PFI और भीम आर्मी के लिंक की हो रही पड़ताल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब मीडिया के गढ़े झूठों का भी पर्दाफाश करना शुरू कर दिया है। हाल में न्यूज 18 ने एक खबर चलाई थी कि केंद्रीय जाँच एजेंसी ने दावा किया है कि कट्टरपंथी समूह पीएफआई और भीम आर्मी के बीच कोई लिंक नहीं है। अब इसी खबर को शेयर करते हुए ईडी ने साफ किया है कि यह खबर सरासर झूठ है।

ईडी ने अपने ट्विटर पर खबर के संबंध में लिखा, “ये खबर गलत है। वास्तविकता में ईडी, पीएफआई अधिकारियों से बरामद विश्वनीय सबूतों के आधार पीएफआई और भीम आर्मी के फाइनेंशिल लिंक्स की पड़ताल कर कर रही है।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट, जिसे अब डिलीट किया जा चुका है, में दावा किया गया था, “प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली भीम आर्मी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच कोई संबंध नहीं है। एजेंसी ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि हाथरस मामले के जरिए हिंसा भड़काने के लिए कथित विदेशी फंडिंग के 100 करोड़ रुपए बरामद किए गए।”

गौरतलब है कि केवल न्यूज 18 ने ही नहीं बल्कि कई मीडिया चैनल ने यह झूठा दावा अपनी रिपोर्ट्स में किया था। इस सूची में एक नाम इंडिया टुडे का भी है। इंडिया टुडे ने अपनी 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा था कि प्रवर्तन निदेशायलय को भीम आर्मी और पीएफआई के बीच लिंक नहीं मिले हैं, जिन्हें सीएए विरोधी आंदोलनों में हिंसा भड़काने वाला कहा जा रहा था।

इस रिपोर्ट में भी यह लिखा था कि ईडी ने 100 करोड़ बरामद होने वाले दावों को झूठा कहा है। उनका यह बयान यूपी डीजीपी ब्रिज लाल के दावों के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भीम आर्मी समेत कई बाहरी हाथरस मृतका के परिवार को बरगलाना चाहते हैं।

इसके बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर ने भी इस मामले में जमकर झूठ फैलाया। उन्होंने भी पीएफआई और भीम आर्मी के लिंक को खारिज किया।

बता दें कि इस संबंध में रिपोर्ट्स अक्टूबर माह की शुरुआत में आई थी और कई संस्थानों ने इसे कवर किया था, लेकिन ईडी के खुलासे के बाद भी हमारे खबर लिखने तक सिर्फ न्यूज 18 ने इसे डिलीट किया है।

हाथरस केस

पिछले दिनों यूपी के हाथरस में 14 सितंबर को 19 साल की युवती के साथ हुई बर्बरता के कारण उसने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपना दम तोड़ा था। मृतका के घरवालों ने उसके साथ बलात्कार का आरोप लगाया था। हालाँकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस एंगल को खारिज किया गया था। वहीं इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टि से भी खूब भुनाया गया था।

मामले में जाँच के दौरान पीएफआई और नक्सल कनेक्शन सामने आए थे। पुलिस ने जाँच में पाया था कि जो महिला लड़की की भाभी बनकर मीडिया से बात कर रही थी, उसे वास्तविकता में कैमरे में बोलने के लिए पहले से तैयार किया गया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग उठी थी और राज्य सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे केस को सीबीआई को सौंप दिया था।

कर्नाटक: होयसल काल की महाकाली की मूर्ति को किया खंडित

कर्नाटक के हसनपुर जिले में स्थित डोड्डागडावल्ली मंदिर (Doddagaddavalli Temple) में शुक्रवार (नवंबर 20, 2020) को होयसल काल (Hoysala-era) में बनी महाकाली की मूर्ति खंडित कर दी गई। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसल वंश ने करवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसकी देखरेख करता है।  

कथित तौर पर, यह मामला शुक्रवार की सुबह संज्ञान में आया जब स्थानीय लोग मंदिर पहुँचे और उन्होंने महाकाली की प्रतिमा टूटी पाई। आशंका जताई जा रही है कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए होंगे और सुरक्षा की कमी का फायदा उठाते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

बेंगलुरु सर्कल के पुरातत्वविद अधीक्षक (Superintending Archaeologist of Bengaluru Circle) शिवकांत बाजपेई ने द हिंदू को बताया, “मैंने हसन एसपी आर श्रीनिवास गोड़ा (R. Srinivasa Gowda) से घटना के संबंध में बात की है और जिसने भी यह किया है हम उसके ख़िलाफ़ निश्चित तौर पर एक्शन लेंगे।” 

बता दें कि महाकाली की मूर्ति को हुए नुकसान के लिए एएसआई को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ, डॉ. शाल्वपिल अयंगर (Dr Shalvapille Iyengar) ने हसन न्यूज़ को बताया :

“डोड्डागडावल्ली चतुशकुता मंदिर की भद्रकाली या दक्षिणा काली प्रतिमा को उपद्रवियों द्वारा नष्ट कर दिया गया है। यह हमारी विरासत को बड़ा नुकसान है। इस मंदिर का निर्माण 1113 ई0 में होयसल वंश के विष्णुवर्धन के शासनकाल में हुआ था। यह महालक्ष्मी का एक अनूठा मंदिर है और भद्रकाली की प्रतिमा दक्षिण गर्भगृह में रखी गई है।”

उन्होंने आगे मंदिर की महत्ता पर बात करते हुए कहा, “सरकार को उपद्रवियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। इस समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हेरीटेज वीक मना रहा है, लेकिन उसी समय यह विरासत क्षतिग्रस्त हो गई है। यह हमारी विरासत और इतिहास का बहुत नुकसान है। एएसआई को इस बड़े नुकसान का जवाब देना चाहिए और उन्हें ही इस अपूरणीय क्षति के लिए जिम्मेदार होना चाहिए।”

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सीटी रवि ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “डोड्डगडावल्ली के महालक्ष्मी मंदिर में इस अभद्रता को देखकर भीतर से अशांत और व्याकुल हूँ। मुझे अच्छे से वहाँ की अपनी यात्रा याद है।” आगे उन्होंने कर्नाटक के गृहमंत्री से इस मामले में स्पेशल टीम गठित करके मामले में पड़ताल करके दोषियों को सजा दिलाने की बात कही।

बता दें कि डोड्डागडावल्ली गाँव में स्थित लक्ष्मी देवी मंदिर वास्तुशिल्प के लिहाज से बेहद हैरान करने वाला मंदिर है। इसका निर्माण चतुरस्कुटा शैली में हुआ है। इसे होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1113 ई0 में बनवाया गया था।

‘सब सुख लहै तुम्हारी सरना…’: IAS टॉपर टीना डाबी और उनके शौहर अतहर खान ने तलाक की दी अर्जी

साल 2015 में UPSC की टॉपर रहीं टीना डाबी (Tina Dabi) और उनके शौहर अतहर खान (Athar Khan) ने जयपुर की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की है। अतहर खान ने टीना डाबी के साथ ही UPSC परीक्षा पास में दूसरा स्थान हासिल किया था। दोनों की शादी साल 2018 में हुई थी। टीना और अतहर दोनों राजस्थान कैडर के अधिकारी हैं और फिलहाल इन्हें जयपुर में पोस्टिंग मिली हुई है।

IAS टॉपर टीना डाबी और उनके पति अतहर खान की मर्जी से दायर इस अर्जी में कहा गया, “हम आगे साथ नहीं रह सकते। ऐसे में कोर्ट हमारी शादी को शून्य घोषित करें।”

उल्लेखनीय है कि टीना डाबी और अतहर आमिर-उल-शफी खान के बीच ट्रेनिंग के दौरान नजदीकियाँ बढ़ी थीं। इसके बाद इन्होंने साल 2018 में शादी कर ली। इसके बाद टीना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खान लिखने के साथ-साथ ‘कश्मीरी बहू’ का टैग भी लगा लिया था।

हालाँकि, अभी कुछ दिन पहले टीना के फैंस ने नोटिस किया कि उन्होंने अपने अकाउंट से न केवल ‘कश्मीरी बहू’ का टैग हटाया है, बल्कि उसके साथ-साथ अपने पति को भी ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया है। इंस्टास्टोरी पर भी जय श्रीराम लिखते हुए हनुमान चालीसा की चौपाई- “सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना। जय श्रीराम” लिखी थी।

इस बीच यह भी देखा गया कि अतहर खान ने भी टीना को इंस्टाग्राम से अनफॉलो कर दिया। इसके बाद अटकलें लगने लगी कि दोनों जल्द ही अलग हो सकते हैं। तलाक की अर्जी दाखिल किए जाने की खबर आने के बाद भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे स्पष्ट तौर पर लव जिहाद से जोड़ा और यह कदम उठाने के लिए टीना की सराहना की। वहीं, कुछ यूजर्स का यह भी कहना था कि पति-पत्नी में झगड़े होते हैं, लेकिन इसमें अलग होने वाली बात नहीं है।

मुश्किल में इंडिया टुडे? टीआरपी स्कैम में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच करेगी ED, मूल FIR में नहीं था रिपब्लिक का नाम

टीआरपी (TRP) स्कैम में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) करेगी। ईडी ने इस संबंध में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट यानी ECIR दर्ज कर ली है। ECIR पुलिस एफआईआर के समतुल्य होती है। रिपब्लिक टीवी के अनुसार ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और उन सभी चैनल की जाँच करेगी, जिनका उल्लेख ओरिजनल एफआईआर (FIR) में किया गया है।

इस मामले की सीबीआई जाँच भी चल रही है। कहा जा रहा है कि पूरे केस में मुंबई पुलिस की पड़ताल की भी जाँच की जा सकती है। रिपब्लिक टीवी ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मुंबई में ईडी टीआरपी स्कैम से संबंधित सभी मामलों की एक साथ पड़ताल करेगी।

यहाँ बता दें कि टीआरपी मामले में ईडी दूसरी केंद्रीय जाँच एजेंसी है, जिसने केस दर्ज किया है। इससे पहले सीबीआई ने पूरे मामले पर एफआईआर रजिस्टर की थी।

टीआरपी केस

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को पैसे दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह उनका चैनल चलाकर अपना टीवी ऑन रखें।

हालाँकि, उसी दिन देर शाम तक रिपब्लिक टीवी ने सबूतों के साथ अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि असली रिपोर्ट में उनके चैनल का नाम कहीं भी नहीं है, बल्कि उन पर सवाल उठाने वाले इंडिया टुडे का नाम ओरिजनल एफआईआर में है। इसके बाद इंडिया टुडे और मुंबई पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए। बाद में मुंबई पुलिस कमिशनर को मानना भी पड़ा था कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है।

‘लव जिहाद’ पर सख्त कानून से क्यों बढ़ जाता है अशोक गहलोत जैसे नेताओं का राजनीतिक रक्तचाप?

देश में लव जिहाद के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई राज्य सरकारों ने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए सख्त क़ानून बनाने का ऐलान किया है। इनमें बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें शामिल हैं। दूसरी तरफ अशोक गहलोत जैसे कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भी हैं जो इसे समस्या मानने से इनकार कर रहे हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने लव जिहाद के मुद्दे पर बयान देते हुए कहा है कि भाजपा ने यह शब्द साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए गढ़ा है। विवाह निजी स्वतंत्रता का विषय है। उस पर अंकुश लगाने के लिए क़ानून बनाना असंवैधानिक है।   

सही बात है। विवाह देश के हर नागरिक का नितांत निजी मसला है। इसमें कोई सरकार क़ानून बनाकर दखल कैसे दे सकती है? लेकिन पहचान छुपा कर, प्रेम का ढोंग करना और भावनात्मक आधार पर दोनों पक्षों की सहमति होने के बाद अपना मज़हब थोपने का प्रयास करना, इसे न्यायसंगत कहा जा सकता है क्या? ऐसे मुद्दों की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मूल समस्या एड्रेस होने से पहले अशोक गहलोत सरीखे नेता पूरा मुद्दा दिग्भ्रमित करने की कोशिश में लग जाते हैं हैं। दलील खुद में कितनी स्पष्ट है कि यहाँ क़ानून दो अलग धर्मों के विवाह को रोकने एक लिए नहीं, बल्कि अपनी असलियत छुपाकर प्रेम के पाखंड के ज़रिए विवाह करने वालों के लिए बनाया जा रहा है। 

न जाने किस सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में इस तरह की प्रक्रियाओं को उचित माना जाता होगा। बयान राजस्थान के मुख्यमंत्री का है इसलिए कालांतर के कुछ मामले उठा कर देखे जाएँ तो वहाँ के हालात भी इस मुद्दे पर अत्यंत दयनीय हैं। राजस्थान के कई बड़े शहरों में लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। लेकिन माननीय गहलोत सरकार के अनुसार यह शब्द एक राजनीतिक दल का सृजित शब्द है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सांप्रदायिकता फैलाना है। जबकि राजस्थान में पिछले कुछ ही समय में लव जिहाद की तमाम भयावह घटनाएँ सामने आई हैं, जिन पर न तो कोई सुनवाई होती है और न ही कार्रवाई। फिर भी सूबे के मुख्यमंत्री इस शब्द की प्रासंगिकता को खारिज करते हैं।

इसी साल के अगस्त महीने में ही राजस्थान के जोधपुर में लव जिहाद की एक घटना हुई थी। इस घटना में शाहरुख नाम के युवक ने अपना नाम छुपा कर एक महिला से मित्रता की। उसने प्रेम का झाँसा देकर महिला के साथ संबंध बनाए और तीन साल तक उसका यौन शोषण करता रहा। जब महिला को यह बात पता चली कि उसका असल नाम शाहरुख है, तब उसने युवक से दूरी बनाना शुरू किया और इस बात पर युवक ने महिला की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी दे डाली। 

एक और मामला सामने आया था राजस्थान के उदयपुर शहर से। जून 2020 के दौरान हुई इस घटना में हनीफ़ नाम का युवक वीर सिंह बन कर विवाहित महिला से मित्रता की। इसके बाद बहला-फुसलाकर उसे बाड़मेर ले गया और वहाँ उस महिला को बंधक बना कर उसका जबरन धर्मांतरण कराया। इसके अलावा आरोपित हनीफ़ ने विवाहित महिला की तीन साल की बेटी को जान से मारने की धमकी देकर दो महीने तक लगातार उसके साथ दुष्कर्म किया।

इस साल के जून महीने में ही लव जिहाद की एक और घटना राजस्थान के राजसमंद में हुई थी। इस घटना का प्रारूप भी कुछ अलग नहीं था। रियाज़ नाम के युवक ने पिंटू बन कर एक नाबालिग लड़की से बातचीत शुरू की। फिर रियाज़ ने लड़की को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसके साथ बलात्कार किया। रियाज़ ने लड़की को धमकी तक दी कि इसके बारे में उसने कुछ भी कहा तो उसके वीडियो क्लिप्स वायरल कर देगा।

2019 के जून महीने में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। राजस्थान के सीकर का रहने वाला इमरान भाटी कबीर शर्मा बना, ब्राह्मण युवती से विवाह रचाया और दहेज में 11 लाख नगद और 5 लाख जेवर लेकर युवती के साथ फ़रार हो गया। जबकि इमरान नाम का यह युवक पहले से शादीशुदा था, इसके 3 बच्चे भी थे। उसने विवाह करने के लिए नकली रिश्तेदार तक बुलाए थे। हालाँकि घटना के कुछ ही समय बाद आरोपित इमरान को गिरफ्तार कर लिया गया था। 

यह ऐसे मामले थे जिनका ज़िक्र किया जा रहा है, इसके अलावा न जाने कितने मामले हैं जिनका उल्लेख नहीं किया जा रहा है और न जाने कितने ऐसे मामले होंगे जो दर्ज तक नहीं किए जाते हैं। बड़े विवादों के साथ समस्या का दायरा भी बड़ा होता है। फिर किसी मुख्यमंत्री के लिए यह किसी का निजी मसला कैसे हो सकता?

ऐसा भी नहीं है कि लव जिहाद कोई नए स्वभाव का षड्यंत्र है। यह पिछले काफी समय से हो रहा है। फिर भी सरकारें इस मुद्दे पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मौन थीं। अब कुछ राज्य सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाना चाहती हैं तो उसका विरोध भी इसी सियासी लाभ के लिए किया जा रहा।   

लिबरलों का लाडला बनने के एक कदम और करीब कुणाल कामरा, गालीबाज ‘कॉमेडियन’ पर केस चलाने की मंजूरी

गालीबाज ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा द्वारा हाल में किए गए विवादित ट्वीट को लेकर अटॉर्नी जनरल ने अवमानना का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह अनमुति इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अनुज सिंह की शिकायत के आधार पर दी है। 

अनुमति देते हुए एजी वेणुगोपाल ने कहा कि कुणाल कामरा के ट्वीट में जान-बूझकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) के अपमान का प्रयास किया गया। यह उस न्यायपालिका के अपमान के समान है, जिसका सीजेआई नेतृत्व करते हैं। कामरा के ट्वीट को अश्लील और बेहूदा बताते हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट की अवमानना कानून 1975, की धारा 15 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी है।

बता दें कि कुणाल कामरा ने अपने हालिया ट्वीट में एयरपोर्ट पर दो ऊँगलियाँ दिखाते हुए लिखा था, “इन दो ऊँगलियों में से एक सीजेआई अरविंद बोबडे है।” आगे उसने यह साफ बताते हुए कि बीच वाली ऊँगली सीजेआई के लिए है। उसने कहा, “ठीक है चलो मैं आपको कन्फ्यूज नहीं करता, वो बीच वाली ऊँगली है।” 18 नवंबर को इसी ट्वीट के सामने आने बाद वकील अनुज सिंह ने अटॉर्नी जनरल के पास शिकायत भेजी थी।

यहाँ याद दिला दें कि सोशल मीडिया पर आई कुणाल कामरा की टिप्पणियों पर एक बार पहले भी अटॉर्नी जनरल कामरा के खिलाफ़ अवमानना का केस चलाने की बात अनुमति दे चुके हैं।

कामरा के ख़िलाफ़ अपना फैसला सुनाते हुए एजी केके वेणुगोपाल ने कहा था,

“लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”

कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए अपनी मँजूरी देते हुए उन्होंने लिखा था कि उन्होंने कामरा के ट्वीट देखे हैं, जो बहुत आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कुछ ट्विट्स का जिक्र करते हुए लिखा कि ये न केवल खराब हैं, बल्कि व्यंग्य की सीमा लाँघ रहे हैं और कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।

इसके बाद पिछले सप्‍ताह कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने वाले अपने ट्वीट्स के लिए अवमानना के आरोपों का सामना करते हुए माफी माँगने से मना कर दिया था।

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए अपना एक पत्र ट्वीट किया था, जिसमें उसने लिखा था,: “मैं अपने ट्वीट वापस लेने या उनके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता। मेरा मानना है कि वे खुद के लिए बोलते हैं।”

हिंदू कुरीति पर ज्ञान, मुस्लिमों का बहुविवाह ‘रिश्ते की खूबसूरती’: जानें, दैनिक भास्कर पाठकों को कैसे बनाता है बीमार

मीडिया का एक वर्ग लंबे समय से पाठकों और दर्शकों को शब्दों का खेल कर किस तरह से बरगला रहा है, वह छिपा नहीं है। दो समुदायों से संबंधित खबर को कवर करते हुए अधिकतर संस्थानों का यह दोहरा रवैया देखने को मिल जाता है। 

हालिया मामला खुद को देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर 1 अखबार बताने वाले दैनिक भास्कर से जुड़ा है। दैनिक भास्कर में दो अलग-अलग दिनों पर प्रकाशित दो खबरों से आप समझ सकते हैं कि कैसे हिंदू धर्म की कुरीति पर बात करते हुए ज्ञानी हो जाने वाला अखबार, दूसरे मजहब की बात आते ही किसी कुरीति को भी ऐसे परोसते हैं, जैसे मामला हँसी-ठिठोली का हो।

19 नवंबर को दैनिक भास्कर में राजस्थान के कुछ हिस्सों में चलने वाली ‘कोना प्रथा’ की कुरीति पर छपती है। अखबार ने जायज सवाल उठाया है कि आखिर पति की मौत के 6 महीने बाद भी एक विधवा को क्यों कोने में सिमटकर रहना पड़ रहा है? क्यों प्रथा के नाम पर उसे उजाला होने से पहले घर के हर काम करवाए जाते हैं और बाद में उसे अंधेरे में ढकेल दिया जाता है।

दैनिक भास्कर की यह कवरेज सराहनीय है। उनका सवाल कि एक विधवा को कोने में डाले रखना प्रथा है या सजा, बिलकुल जायज है। उनका आरोप कि स्त्री के ऊपर इतना अत्याचार पुरूष प्रधान समाज के कारण हो रहा है, बिलकुल सटीक है।

साभार: दैनिक भास्कर

कोना प्रथा की कुरीति पर वार करने के अगले ही दिन 20 नवंबर को इसी अखबार में एक और खबर प्रकाशित होती है। इस खबर के अनुसार पाकिस्तान में 22 साल के शौहर के लिए 3 बीवियाँ मिलकर चौथी बेगम खोज रही हैं। गड़बड़ हेडलाइन में नहीं है। अखबार इस खबर को ‘रिश्ते की खूबसूरती’ मानता है। इस खबर को लिखने की शुरुआत से ही अखबार का दोहरा मापदंड झलकने लगता है और पता चलता है कि कैसे वे अपने पाठकों की सोच को बीमार करते हैं।

साभार: दैनिक भास्कर

इस खबर की शुरुआत में ही इस बात को लिख दिया गया है कि मुस्लिम समुदाय में एक से अधिक बार शादी को जायज माना जाता है। पुरुष एक साथ कई बीवियों को रख सकते हैं। यानी पाठक इस खबर को पढ़े तो वह युवक के चौथे निकाह को गलत नहीं समझे, बल्कि उसे अधिकार समझे और हो सकता है कि कभी हँसी-मजाक में दोस्तों के बीच इस युवक की किस्मत की तुलना अपनी किस्मत से कर दे या हो सकता है अपनी बीवियों से भी यही अपेक्षा रखना शुरू कर दे कि उसके लिए वह भी नई बीवी खोजें।

एक विशुद्ध पाठक आपकी खबर को कैसे ग्रहण करेगा, इसका दारोमदार आपके शब्दों पर ही होता है। जिस तरह कोना प्रथा एक कुरीति है, वैसे ही बहुविवाह भी। यह दूसरी बात है कि शरिया कानून इसे जायज मानता है। इसकी आड़ लेकर अख़बार हिंदुओं की कुरीति पर कवरेज करते हुए सवाल करता है कि आखिर क्यों पुरुष प्रधान समाज में महिला को अंधकार में धकेल दिया गया। यह बताता है कि अपनी औरतों पर अत्याचार करने वाले इन पुरुषों पर कोई पाबंदी नहीं होती ये जहाँ चाहे आ जा सकते हैं, जिससे चाहे शादी कर सकते हैं। लेकिन वही अख़बार मजहब का हवाला देकर 22 साल के शौहर की 3 शादियों को जायज ठहरा देता है।

पूरी खबर में एक बार भी इसका जिक्र नहीं किया गया है कि मुस्लिमों में बहुविवाह की रीत महिलाओं के लिए अभिशाप है, जो न केवल उनसे अधिकार छीन रही है बल्कि उनके सोचने समझने की क्षमता को भी शून्य कर रही है।  विचार करिए, तीन महिलाएँ अपने एक पति का ख्याल रखने के लिए यह बोल रही हैं कि वह तीनों बच्चों के कारण अपने पति का ध्यान नहीं रख पाती, इसलिए चौथी बेगम आएगी तो उनका ख्याल रखेगी।

क्या औचित्य होता है ऐसी खबरों का? समुदाय विशेष में बहुविवाह को प्रोत्साहन देना या मजहब विशेष के प्रति लोगों को आकर्षित करना? ऊपर से उसे ‘रिश्ते की खूबसूरती’ बताकर प्रचारित करना।

दैनिक भास्कर जैसे अखबारों को समझना चाहिए कि एक मुद्दे पर खबरों को अलग-अलग तरीके से पेश करना आपके पाठक की सोच को निर्मित नहीं करता, बल्कि आपके प्रति उसके उस विश्वास को मारता है कि आप उसे खबर के नाम जागरुक बनाएँगे, उसकी सोच को पहले से बेहतर और समझदार बनाएँगे। आपके ये हथकंडे उसे कुंद मानसिकता में जकड़ते जाते हैं, वह चाहते न चाहते हुए खुद को गर्त में पाता है और फिर आपके दिए तर्कों से वह कुरीतियों को भी जस्टिफाई करना सीख जाता है। 

अंत में हम ही हैरान होते हैं कि आखिर हिंदुओं के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाने वाले इतनी बड़ी संख्या में हिंदू ही क्यों हैं? वास्तविकता में ऐसे लोग दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के स्थायी पाठक हैं जो खुद में रिफॉर्म के लिए अखबार पर पूर्ण रूप से आश्रित हैं और अखबार उन्हें अपनी दोहरी मानसिकता में बीमार बनाता रहता है।

‘बौनी आतंकी’ ने कैदी को चाकू मारा, ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए मकान मालिक को भी गोद दिया था

ऑस्ट्रेलिया की जेल में बंद बांग्लादेशी आतंकी मोमेना शोमा ने साथी कैदी पर चाकू से हमला किया। इस घटना के बाद उस पर आतंकवाद का एक और आरोप लगाया गया है। शोमा आतंकवाद के मामले में 42 साल जेल की सजा काट रही है और मेलबर्न के महिला कारागार में बंद है। उसकी लंबाई 150 सेमी ही है, जिसके कारण उसे ‘बौनी आतंकी’ भी कहते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रावेनहॉल के डेम फेलिस फ्रॉस्ट सेंटर में 30 अक्टूबर को जेल के अंदर 27 वर्षीय दो कैदियों के बीच झगड़ा हो गया। इसी दौरान शोमा ने चाकू से हमला किया। पीड़िता कैदी हाथ पर चोट लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया। इस हमले के बाद आतंकवाद निरोधी पुलिस ने मोमेना शोमा पर हमले का आरोप लगाया। उसे नए आतंकी आरोपों के चलते मेलबर्न मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने वीडियो लिंक के जरिए पेश किया गया।

अदालत ने उसे 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तक हिरासत में भेज दिया। कोरोना वायरस महामारी के चलते मामले की अगली सुनवाई में एक साल से भी अधिक समय लग सकता है।

बता दें फरवरी 2018 में अपने मकान मालिक को चाकू घोंपने के बाद मोमेना को जून 2019 में आतंकी आरोपों में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मोमेना आतंकी हमले को अंजाम देने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया आई थी। ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के आठ दिन बाद ही उसने अपने मकान मालिक पर हमला किया था।

मोमेना ने ‘अल्लाहु अकबर’ बोलते हुए अपने मकान मालिक पर चाकू से कई बार तब वार किया था, जब वह अपनी 5 साल की बच्ची के साथ सो रहा था। वह इस हमले में बच गया था। हमले के बाद पीड़ित और उसकी बेटी दोनों ही पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से पीड़ित थे।

पूछताछ के दौरान, टेररिस्ट मोमेना शोमा ने पुलिस से कहा था कि वह आईएसआईएस के नाम पर आतंकी हमले करने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया आई थी। उसने पुलिस को यह भी बताया था कि उसने पहले एक अलग परिवार के साथ रहने के दौरान एक गद्दे पर छुरा घोंपकर हमले का अभ्यास किया था, और उसने रोजर को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह कमजोर था।

गौरतलब है कि जाँच के बाद शोमा दोषी करार दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि वह हिंसक जिहाद के कारण आतंक को आगे बढ़ाने के लिए आईएसआईएस से प्रेरित आतंकी हमले में लिप्त है। उसने ला ट्रोब विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति पर ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। लेकिन उसकी यात्रा का असली उद्देश्य आतंकवादी हमलों को अंजाम देना था।

अदालत ने उसे उसे दोषी ठहराते हुए आदेश दिया कि 2013 में सीरिया और इराक में ISIS के वृद्धि के दौरान ही मोमेना शोमा कट्टरपंथी बन गई थी। हमले के दिन भी उसने आईएसआईएस मीडिया सेंटर से एक वीडियो डाउनलोड किया था। अदालत ने उसे आतंकी आरोपों में दोषी ठहराते हुए 42 साल की सजा सुनाई थी।

‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह के लिए ‘प्राइज फॉर करेज’ चाहता है RSF, यौन शोषण का है आरोपित

द कश्मीर वाला (The Kashmir Walla) के संपादक फहद शाह को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders) ने ‘प्राइज फॉर करेज’ के लिए नामित किया है। पत्रकारों का ऐसा समूह जिसकी फंडिंग अमेरिकी सरकार करती है, उसने कश्मीरी पत्रकार को तमाम ‘अत्याचारों’ के बावजूद अपनी पत्रकारिता जारी रखने के लिए नामित करने का निर्णय लिया है।    

शाह को नामित करते हुए कहा गया है, “खोजी पत्रकारिता वेबसाइट द कश्मीर वाला के संपादक फहद शाह पर दबाव बनाने और धमकाने के मकसद से पुलिस उनकी रिपोर्ट्स को लेकर समन भेजती रहती है। सूत्रों के बारे में जानकारी देने का दबाव भी बनाती है, जिनकी किसी भी स्थिति में जानकारी देने से उन्होंने मना कर दिया। इसके अलावा उनका शारीरिक उत्पीड़न भी किया जाता है।” 

साथ ही कहा गया है, “उनके द्वारा चलाए जा रहे वेबसाइट ने प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं जब से जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया गया है, तब से यहाँ के लोग बाहरी दुनिया से कटे हैं। ऐसे में फहद ऐसे रचनात्मक तरीकों का उपयोग करते हैं ताकि 80 लाख कश्मीरों नागरिकों को बाहरी दुनिया की घटनाओं और ख़बरों से अवगत कराया जा सके।”

जिस पत्रकार का इतना महिमांडन किया गया है उस पर कई महिलाओं के यौन शोषण का आरोप है। द आउटलुक और द हिन्दू की कंट्रीब्यूटर रमा द्विवेदी ने साल 2018 में आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पूर्व पाटर्नर फहद शाह ने बीते साल एक पार्टी के दौरान उन्हें और उनकी दोस्त का शोषण करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, “उसने पार्टी के दौरान कई बार मुझे गलत तरीके से छुआ। जब मैंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हमारे बीच जो भी था वह गुजरे कल की बात है तो शाह ने ढिठाई से कहा- तुम ऐसा नहीं कह सकती कि यह सब तुम्हें पसंद नहीं है।”  

रमा द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरोप

ररमा द्विवेदी ने यह भी बताया था कि रोके जाने पर भी शाह नहीं सॅंभला। उसने उनकी दोस्त आकांक्षा नारायण के साथ खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया था। अगले दिन शाह यह कहकर चलते बना कि वह नशे में था। मशहूर फोटो जर्नलिस्ट शाहिद तांत्रे के अलावा फहद के तमाम दोस्त जो इस दौरान वहाँ मौजूद थे ने भी उसे रोकने की कोशिश नहीं की। उलटे सभी ने हालात सामान्य करने का प्रयास किया, जैसे वहाँ कुछ हुआ ही नहीं। 

रमा द्विवेदी ने बताया था, “अगले दिन वह मेरे घर आया और उसने पूरे घटनाक्रम को नज़रंदाज़ करने का प्रयास करते हुए कहा, चलो जो हो गया भूल जाओ।” इसके बाद फहद ने रमा और उनकी दोस्त से निवेदन किया कि वह इस मामले में किसी भी तरह की शिकायत नहीं दर्ज कराएँ। अगर ऐसा हुआ तो वह सभी के लिए बेहद शर्म की बात होगी। 

यानी ऐसी हरकतें करने वाला व्यक्ति बिना किसी परेशानी के आज़ाद घूमने लगा और रमा द्विवेदी का जीवन नरक बन गया। रमा द्विवेदी ने यह भी बताया था कि इसके बाद उन्हें ही भ्रष्ट, चरित्रहीन, राजनीतिक रूप से बिकी हुई दिल्ली की लड़की घोषित कर दिया गया था, जिसने जान-बूझकर फहद शाह को एक ‘लिबरल कश्मीरी पत्रकार’ होने के नाते नीचा दिखाने का प्रयास किया था। 

रमा द्विवेदी के आरोपों को तमाम समाचार समूहों ने प्रकाशित किया था, जिसमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया, एशिया टाइम्स और स्क्रॉल तक शामिल थे। फिर भी कश्मीरी पत्रकार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कुल 3 महिलाओं ने फहद पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, लेकिन उसने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

नगरोटा में ढेर हुए आतंकी 26/11 की बरसी पर करने आए थे बड़ा ‘धमाका’: PM मोदी ने समीक्षा बैठक के बाद जताया सेना का आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (नवंबर 20, 2020) गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक की जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी। एजेंसी ने बताया कि नगरोटा में मारे गए आतंकी 26/11 की बरसी पर एक बार फिर से कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे।

पीएम मोदी ने इस समीक्षा बैठक के बाद सेना को उनकी सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,

“पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 4 आतंकवादियों का ढेर होना और उनके पास भारी मात्रा में हथियारों और विस्फोटकों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि तबाही मचाने और विनाश करने की उनकी कोशिशों को विफल कर दिया गया है।”

आगे पीएम लिखते हैं, “हमारे सुरक्षाबलों ने एक बार फिर अपनी बहादुरी और प्रतिबद्धता दिखाई है। उनकी सतर्कता का आभार जो उन्होंने जम्मू कश्मीर में डेमोक्रेटिक एक्सरसाइज को लक्षित करने वाली नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है।”

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल को बड़े हमले की जानकारी कल नगरोटा में आतंकियों को ढेर करने के साथ मिली थी। जैश- ए- मोहम्मद के चार आतंकियों को बन टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान सुरक्षाबलों ने एन-44 पर ढेर किया था। चारों आतंकी एक चावल के ट्रक में छिपकर आ रहे थे और चेकिंग के लिए रोके जाने पर इन्होंने फायरिंग शुरू कर दी थी।

जवाबी कार्रवाई के दौरान जवानों ने ट्रक को विस्फोट से ही उड़ा दिया, जिसके बाद आतंकी पास में जंगल की तरफ भागने लगे। 3 घंटे तक चले ऑपरेशन में सभी आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। इस मुठभेड़ में एक जवान भी घायल हुआ था।

पुलिस ने इनके पास से 11 एके-24 राइफल, 3 पिस्टल, 29 ग्रेनेड आदि उपकरण भारी मात्रा में बरामद किए थे। पाकिस्तानी दवाइयों से पता चला था ये सभी पाकिस्तान के हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में हथियार और दवाइयों से यह जानकारी भी हुई कि यह लोग घुसपैठ करके आए थे और आत्मघाती हमलावर हैं।