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यौन शोषण मामले में गिरफ्तार प्यारे मियाँ के अवैध बंगले पर चला बुलडोजर: कई आपत्तिजनक सामान बरामद, देखें वीडियो

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार के तर्ज पर अब मध्यप्रदेश सरकार भी गुंडों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार (20 नवंबर, 2020) को एमपी पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश की राजधानी भोपाल के हाईप्रोफाइल नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपित प्यारे मियाँ के अय्याशी के अड्डे को ध्वस्त कर दिया है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जोनल ऑफिसर नागेंद्र एस भदौरिया ने बताया, “प्यारे मियाँ की दूसरी मंजिल पर बने अवैध बालकनी और पीछे के एरिया को आज ध्वस्त कर दिया गया है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार प्यारे मियाँ के 29 लालाराम नगर स्थित अवैध आलीशान बंगले पर प्रशासन ने सुबह ही पहुँच कर ध्वस्तीकरण का काम चालू कर दिया। प्यारे मियाँ ने ग्राउंड फ्लोर पर कई अवैध बनाए कमरों को दुकानों में तब्दील कर दिया था। जिसे प्रशासन द्वारा बुल्डोजर से ढहा दिया गया।

दूसरे मंजिल पर अमले ने बालकनी और कमरों को भी ध्वस्त किया। यह कमरे बार और अय्याशी के लिए बनाया गया था। पुलिस ने वहाँ से विदेशी शराब की बोतलें, धारदार तलवार समेत कई आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद किए। इसके अलावा अपने काले कारनामों को चोरी-छिपे अंजाम देने और इमरजेंसी के दौरान भागने के लिए प्यारे मियाँ ने एक गोपनीय रास्ता भी बना रखा था।

बता दें प्यारे मियाँ इन दिनों जेल की हवा खा रहा है। वहीं उसके द्वारा अवैध कारनामों से बनाई गई अवैध संपत्तियों पर मध्यप्रदेश प्रशासन की कड़ी नजर है। इसी के चलते इंदौर में प्यारे मियाँ की संपत्तियों को जमींदोज करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इससे पहले भी सरकार ने भोपाल स्थित उसके मैरिज हॉल को ध्वस्त कर दिया गया। आज फिर प्रशासन ने बुलडोजर चला कर उसकी अवैध संपत्ति को जमींदोज कर दिया।

गौरतलब है कि जुलाई में देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।

प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई थी। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी। इसी के चलते प्यारे मियाँ को गिरफ्तार कर प्रशासन लगातार उसके काले कारनामों पर कार्रवाई कर रही है।

जीसस के नाम पर चेतावनी देता हूँ कोरोना वैक्सीन मत लगवाना, ये शैतान का निशान है: भगवा पहन पादरी का प्रोपेगेंडा

कोरोना महामारी के बीच देश के कोने-कोने में कई अफवाहों ने जोर पकड़ा। ऐसे में कई धार्मिक/मजहबी समूह निकल कर सामने आए, जिन्होंने अपने अनुयायियों को न सिर्फ महामारी से बचाने का दावा किया, बल्कि इसकी आड़ में अपना एजेंडा भी जमकर चलाया। 

ताजा मामला तमिलनाडु से सामने आया है, जहाँ एक ईसाई प्रचारक भगवा पहनकर न केवल दर्शकों से झूठ बोल रहा है, बल्कि एंटी वैक्सीनेशन कैंप को भी प्रमोट कर रहा है। प्रदेश में ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले चैनल एंजेल टीवी (ANGEL TV) के संचालक व पादरी सुंदर सेलवराज (Sundar Selvaraj) ने अपनी हालिया वीडियो में दावा किया है कि सरकार द्वारा लाई गई वैक्सीन में चिप होगी।

भगवा पहनकर खुद को ‘साधु’ बताने वाले इस ईसाई धर्म प्रचारक का यह दावा है कि कोरोना वैक्सीन में चिप होगी जो शैतान का निशान है और इसकी चेतावनी बाइबिल में भी दी गई है।

एंजेल टीवी ने ईसाई प्रचारक के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने के लिए बकायदा एक वीडियो बनाया है। इसमें देख सकते हैं कि एक सुमित्रा नाम की हिंदू महिला ईसाई धर्म अपना चुकी है और अपने बेटे के साथ ईसाई प्रचारक सुंदर सेलवराज की यह वीडियो देख रही है, जिसमें वह वैक्सीन के ख़िलाफ़ लोगों को गलत सूचना दे रहा है।

इसमें वह कहता है, “जीसस के नाम पर मैं तुम्हें चेतावनी देता हूँ कोरोना वैक्सीन को कभी मत लगवाना, वह शैतान का निशान (Mark of a beast) है।”

वीडियो के आगे हिस्से में हम देख सकते हैं कि सुंदर को सुनने के बाद महिला उससे इतना प्रभावित होती है कि जब सरकार वैक्सीन देने के लिए कैंप लगाती है तो उसे ईसाई प्रचारक के शब्द सुनाई पड़ने लगते हैं। फिर अचानक उसे प्रभु की आवाज सुनाई देती है कि वह जा जाकर लोगों को वैक्सीन के ख़िलाफ़ सचेत करे और उसे लगवाने से रोके।

सुंदर सेलवराज को सुनने के बाद महिला वैक्सीन को नकार देती है और लोगों को भी बताती है कि जो इसे लेगा वह नरक में जाएगा। वह बताती है कि भगवा चादर ओढ़े एक बुजुर्ग आदमी ने उसे यह बात बताई है। उसी ने उन्हें इसे न लगवाने को कहा है।

यह वीडियो तमिलनाडु के ईसाइयों के बीच घूम रहा है। हम सोच सकते हैं कि इसका असर कम पढ़े-लिखे लोगों पर क्या होगा। इससे पहले मार्च माह में हमने मौलाना साद की ऑडियो सुनी थी। उसने भी इसी प्रकार अल्लाह के नाम पर समुदाय विशेष के लोगों को बरगला कर खतरे में डाला था और बाद में पोल पट्टी खुलने पर खुद अंडरग्राउंड हो गया था। 

वही सब अब दोबारा तमिलनाडु में दोहराया जा रहा है। तमिलनाडु में यह ईसाई प्रचारक और इसका चैनल खुलेआम सरकार के ख़िलाफ़ और वैक्सीन के ख़िलाफ़ लोगों में भय भर रहे हैं, लेकिन तब भी इन पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

यहाँ बता दें कि यह ईसाई धर्म प्रचारक सुंदर सेलवराज अपने दावों के कारण कई बार चर्चा में आया है। इसने एक बार कहा था कि उसे स्वर्ग ले जाया गया था जहाँ प्रभु ने खुद उसके चैनल का वीडियो टेप देखा और उनसे ऐसे प्रोग्राम बनाने को कहा जो हॉलीवुड की क्वालिटी से मेल खाते हों या उससे भी बेहतर हों। इतना ही नहीं सुंदर सेलवराज यह दावा भी कर चुका है कि हिंदू ग्रंथों और ऋगवेद में जीसस के आने की भविष्यवाणी की जा चुकी है।

हाल ही में ऑपइंडिया ने बिहार के मधुबनी जिले के सुदूर देहात के इलाकों में लोगों को बरगला कर धर्मांतरण किए जाने को लेकर खबर की थी। इसमें खुद को पादरी बताने वाले बच्चन शर्मा ने भी रामायण को लेकर इसी तरह के दावे किए थे।

NDTV ने भूटान के भीतर चीन द्वारा एक गाँव की स्थापना को लेकर चलाई फर्जी खबर: वहाँ के राजदूत ने रिपोर्ट किया खारिज

NDTV ने भूटान में चीन के अतिक्रमण को लेकर एक रिपोर्ट की थी, जिसे शुक्रवार (20 नवंबर, 2020) को भारत में भूटान के राजदूत ने स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए उसे फर्जी खबर करार दिया है। दरअसल, NDTV ने कल यह दावा किया था कि चीन ने भूटान के क्षेत्र के भीतर एक गाँव की स्थापना की है। राजदूत ने भूटान में किसी भी चीनी गाँव की उपस्थिति को नकार दिया है।

एनडीटीवी ने गुरुवार को रिपोर्ट किया था कि चीन ने भूटान के इलाके में दो किमी अंदर एक गाँव की स्थापना की है, जो डोकलाम साइट के बहुत करीब है, जहाँ 2017 में चीनी और भारतीय सेना के बीच तनावपूर्ण झड़प हुआ था।

एनडीटीवी के एंकर विष्णु सोम ने गुरुवार को चीनी राज्य मीडिया के एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों को साझा करते हुए ट्विटर पर दावा किया कि यह ‘चीन द्वारा भूटान क्षेत्र की भूमि को हथियाने के स्पष्ट सबूत’ थे।

इसके अलावा सोम ने कई नक्शों की एक सीरीज भी साझा की और दावा किया कि चीन ने भूटानी क्षेत्रों में गहरी घुसपैठ की है, जो रणनीतिक रूप से पूर्वी क्षेत्र में भारतीय सीमाओं के करीब है।

सोम ने कहा कि चीनी गाँव पंगड़ा भूटानी क्षेत्र के भीतर दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह इस बात का एक इंडिकेटर है कि भारत ने हमेशा चीन द्वारा ‘सलामी स्लाइसिंग’ की आशंका जताई है। बता दें ‘सलामी स्लाइसिंग’ बीजिंग के भारतीय और भूटानी क्षेत्र में कटौती के प्रयासों को संदर्भित करता है।

गौरतलब है कि एनडीटीवी ही नहीं बल्कि इंडिया टीवी, मनीकंट्रोल, डीएनए, लॉजिकल इंडियन और विभिन्न अन्य मीडिया नेटवर्क ने भी भूटानी क्षेत्र में चीन की घुसपैठ के बारे में रिपोर्ट की थी।

हालाँकि, भूटानी क्षेत्रों पर चीन के कब्जे वाली मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए भारत में भूटान के राजदूत ने स्पष्ट किया कि भूटान के अंदर चीन द्वारा कोई गाँव स्थापित नहीं किया गया है।

उल्लेखनीय है कि, चीनी पत्रकार शेन शिवेई ने सबसे पहले भूटानी भूमि के अंदर कथित चीनी गाँव की तस्वीरें डाली थीं और गाँव को लेकर उल्लेख किया था। लेकिन विवाद खड़ा खोने के बाद उन्होंने चुपचाप अपने फर्जी दावे वाले पोस्ट को हटा दिया। हालाँकि, चीनी पत्रकार द्वारा किए गए दावे पर NDTV ने भूटान सरकार के स्पष्टीकरण के बावजूद गलत सूचना वाली रिपोर्टिंग को जारी रखा।

CGTN न्यूज़ प्रोड्यूसर शेन श्वेई ने गाँव को दिखाने के लिए एक मानचित्र साझा करते हुए कहा, “हमारे पास नवस्थापित पंगड़ा गाँव में स्थाई निवास हैं। यह यदोंग काउंटी से 35 किमी दक्षिण में घाटी के साथ है।”

बता दें हो सकता है कि चीन जानबूझकर अपनी चालबाजियों को जारी रखते हुए भूटान को लेकर फर्जी दावे करके गंदे राजनीतिक खेल खेल सकता है। और इसी कड़ी में NDTV और अन्य भारतीय मीडिया नेटवर्क चीनी प्रोपेगेंडा का शिकार हो गए और भूटान के अंदर चीनी उपस्थिति पर असत्यापित समाचार रिपोर्ट की रिपोर्टिंग में जुट गए और लोगों को भ्रमित करने लगें।

भारतीय दर्शकों को लुभाने के लिए नेटफ्लिक्स फ्री, 5-6 दिसंबर को बिना भुगतान देख सकेंगे हर प्रोग्राम

स्ट्रीमिंग जायंट नेटफ्लिक्स ने शुक्रवार (20 नवंबर 2020) एक बड़ी घोषणा की। इसके मुताबिक़ ओटीटी कंटेंट प्लेटफॉर्म (OTT content platform) दिसंबर महीने की 5 और 6 तारीख़ (सप्ताहांत) को पूरी तरफ मुफ्त रहेगा। भारत के दर्शक इस दौरान ब्लॉकबस्टर फिल्म, वेब सीरीज़, डॉक्यूमेंट्री, शार्ट फ़िल्म बिना भुगतान किए देख सकते हैं। यह सुविधा 5 दिसंबर की रात 12 बजे से शुरू हो जाएगी और 6 दिसंबर की रात 12 बजे तक जारी रहेगी।  

पिछले महीने नेटफ्लिक्स ने इस संबंध में ऐलान किया था कि वह भारत के दर्शकों के लिए सप्ताह के अंत (वीकेंड) में मुफ़्त स्ट्रीमिंग की सुविधा देने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर हुई बैठक (अर्निंग कॉल) के दौरान नेटफ्लिक्स के सीओओ और चीफ़ प्रोडक्ट ऑफिसर ग्रेग पीटर्स ने विस्तार से जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, “हमें ऐसा लगता है अगर हम किसी देश के लोगों को हफ्ते के अंत में मुफ्त स्ट्रीमिंग की सेवा देते हैं तभी उन्हें पता चल पाएगा कि हमारे पास मनोरंजन के दृष्टिकोण से कितना शानदार कंटेंट उपलब्ध है। लोगों के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हमारे पास क्या है और हम किस तरह काम करते हैं और ऐसा करने का यही तरीका है।” 

इसके बाद ओटीटी कंटेंट प्लेटफॉर्म ने जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह भी कहा था कि हम नेटफ्लिक्स पर भारतीय दर्शकों के लिए दुनिया की सबसे अनोखी और शानदार कहानियाँ लेकर आना चाहते हैं। यही वजह है कि हम ‘स्ट्रीम फेस्ट’ का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें पूरा वीकेंड आम दर्शकों के लिए पूरी तरह मुफ्त होगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए netflix.com/StreamFest पर जाकर अपना नाम, ईमेल आईडी/फोन नंबर और पासवर्ड बनाना होगा। इस दौरान भुगतान के लिए किसी भी तरह की क्रेडिट या डेबिट कार्ड (भुगतान संबंधी जानकारी) की जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

नेटफ्लिक्स इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने भी इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति जो स्ट्रीम फेस्ट में शामिल होने के लिए अपना पंजीयन (sign up) करवाता है वह स्थायी और स्टैण्डर्ड होगा। कोई दूसरा व्यक्ति उस जानकारी का इस्तेमाल कर इस सुविधा लाभ नहीं ले सकता है। एक लॉग-इन नेम से सिर्फ एक ही व्यक्ति ‘फ्री स्ट्रीमिंग’ सुविधा का लाभ ले सकता है।” पिछले महीने ही नेटफ्लिक्स ने यह बात कही थी कि भारत में अपने विस्तार को लेकर उसे बहुत बड़े पैमाने पर काम करने की ज़रूरत है।  

‘विवाद से विश्वास’: मोदी सरकार की योजना से सुलझा टैक्स का झमेला, खजाने में आए ₹72,480 करोड़

केंद्र की मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना ‘विवाद से विश्वास’ के जरिए अब तक 72, 480 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस योजना के अंतर्गत 17 नवंबर 2020 तक 31,734 करोड़ की विवादित टैक्स डिमांड से संबंधित 45,855 घोषणाएँ हुई हैं।

बुधवार (नवंबर 18, 2020) को हुई मीटिंग में वित्त विभाग ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत अब तक कुल 1,00,195 करोड़ रुपए की विवादित रकम से जुड़े मामलों को सुलझाया गया है, जिनकी 72,480 करोड़ रुपए की समझौता टैक्स राशि 17 नवंबर तक जमा कराई जा चुकी थी।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस संबंध में बताया,

“मोदी सरकार की विवाद से विश्वास योजना विवादित कर, विवादित ब्याज, विवादित पेनाल्टी या फीस का निपटान करती है। यह बहुत बड़ी सफलता है, क्योंकि इसके जरिए अभी तक विवादित माँग के ख़िलाफ़ 72,480 करोड़ रुपए का टैक्स सीपीएसयू और करदाताओं द्वारा भुगतान किया जा चुका है।”

बता दें कि इस योजना के तहत करदाताओं को विवादित कर, विवादित ब्याज और विवादित जुर्माने या शुल्क का निपटान करने के लिए 100 प्रतिशत विवादित कर और 25 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क अदा करना पड़ता है। 

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास कानून को 17 मार्च 2020 को लागू किया गया था। इसका उद्देश्य अपीलीय मंचों से बकाया प्रत्यक्ष कर विवादों का निपटान करना है। सरकार ने हाल ही में टैक्स से जुड़े विवाद सुलझाने के लिए शुरू की गई ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम की आखिरी तारीख  को तीसरी बार बढ़ाकर 31 मार्च, 2021 कर दिया था। हालाँकि इसके बारे में घोषणा दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2020 है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले आयकर विभाग की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में करदाताओं को स्कीम के बारे में सूचित करने के लिए ई-कैंपेन लॉन्च करने का निर्णय लिया गया था। इस योजना में उन्हें बताया जाना था कि करदाताओं को विवादित कर, विवादित ब्याज और विवादित जुर्माने या शुल्क का निपटान करने के लिए 100 फीसदी विवादित कर और 25 फीसदी विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क अदा करना पड़ता है।

लव जिहाद पर एक्शन में योगी सरकार, UP में सख्त कानून बनाने का प्रस्ताव गृह विभाग ने भेजा

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के मामलों से निपटने के लिए जल्द ही सख्त कानून आ सकता है। वैसे भी इस तरह के मामलों को लेकर प्रदेश की योगी सरकार का रूख हमेश से कड़ा रहा है। अब सख्त कानून बनाने के लिए उप्र के गृह विभाग ने न्याय व विधि विभाग को प्रस्ताव भेजा है। विधि विभाग प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर सहमति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि महज शादी करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अवैध होगा। न्यायालय के आदेश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी और और फिर ऐसी हरकत करने वालों का ‘राम नाम सत्य’ ही होगा। साथ ही योगी ने ऐसे लोगों को चेतावनी भी दी जो पहचान छिपाकर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।

यूपी में लव जिहाद के नए कानून को लेकर जो बातें अब तक सामने आई है, उसके अनुसार 7 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। यदि दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी करते हैं तो इस बात की जाँच की जाएगी कि यह धोखे से तो नहीं हुआ है।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश सरकार भी जल्द ही लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के मकसद से मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 लाने की तैयारी में है। इस नए अधिनियम में जोर जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर पाँच साल तक की सजा का प्रावधान होगा। वहीं लव जिहाद में किसी भी प्रकार से सहायता करने वालों को भी मुख्य आरोपित की ही तरह सज़ा दी जाएगी और शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा।

लव जिहाद के नए कानून के तहत अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर शादी करना चाहता हो, तो इसके लिए उसे एक महीने पहले कोर्ट में अर्जी लगानी पड़ेगी। वहीं, बिना आवेदन के अगर धर्मांतरण किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जोर-जबरदस्ती, बलपूर्वक या धोखे से शादी करने पर धोखे से पहचान छिपाकर की गई शादी को इस कानून के बाद अवैध माना जाएगा।

लंदन की मस्जिद में ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर चाकू मारने वाला भी निकला मुस्लिम: कुरान पढ़ने के लिए जाना चाहता है जेल

हफिंगटन पोस्ट में फरवरी में प्रकाशित ख़बर में देखा जा सकता है कि मीडिया और मस्जिद के मुखियाओं ने एक घटना को ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर जघन्य अपराध बताने का प्रयास किया था। जबकि इस घटना की पूरी सच्चाई हैरान करने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ परिवर्तित व्यक्ति (मुस्लिम) जिसने लंदन स्थित मस्जिद में भीड़ के सामने इस्लामी ‘प्रेयर लीडर’ (इमाम) के गले में चाक़ू मारा था। वह खुद भी मुस्लिम ही निकला, यहाँ तक कि उसने खुद को जेल भेजे जाने का निवेदन किया है जिससे वह पूरी कुरान शुरू से लेकर अंत तक पढ़ सके। 

30 वर्षीय डेनियल होर्टन (Daniel Horton) ने यह बात स्वीकार की थी कि उसने 70 वर्षीय इमाम राफ़त मगलड (Raafat Maglad) पर चाकू से हमला किया था। यह घटना रीजेंट पार्क स्थित लंदन सेन्ट्रल मस्जिद में अंजाम दी गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि हमले की इस घटना के बाद राफ़त मगलड अपने दाहिने हाथ से खाना तक नहीं खा पाते हैं। इसके अलावा उस स्थान पर सार्वजनिक धार्मिक समारोहों में शामिल होने से भी डरते हैं कि उन पर किसी तरह का हमला न हो जाए। घटना के ठीक कुछ समय पहले की फुटेज में देखा जा सकता है कि लाल रंग की हुड में एक व्यक्ति घुटनों के सहारे झुक कर अजीब तरह से प्रार्थना कर रहा है।

20 फरवरी को अंजाम दी गई इस घटना के बाद पुलिस को मस्जिद की मैट पर खून के निशान और चाक़ू (जो होर्टन के पास हमले के वक्त थी) मिला था। इसके अलावा अदालत में सुनवाई के दौरान होर्टन के वकील ने इस मामले में कई दलीलें पेश की। वकील सैम ब्लोम कूपर ने अदालत में होर्टन का पक्ष रखते हुए कहा, “अब तक मेरी होर्टन से जितनी बार भी बात हुई है उसके आधार पर मैं कह सकता हूँ कि वह इस बात को लेकर स्पष्ट है कि उसे जेल की सज़ा सुनाई जाए। होर्टन चाहता है कि उसने जो अपराध किया है उसे उस बात की पूरी सज़ा मिले।” 

इसके बाद वकील ने कहा कि होर्टन कुरान को पूरे दिल से पढ़ना चाहता है। वह कुरान को समझने के लिए उसे शुरू से लेकर अंत तक पढ़ना चाहता है। इस दलील और होर्टन की मनोवैज्ञानिक स्थिति को मद्देनज़र रखते हुए अदालत ने इस मामले की सुनवाई 10 दिसंबर तक टाल दी है। इस प्रकरण में न्यायालय अगली सुनवाई तक दंड का आदेश सुना सकता है। मुस्लिम वेलफेयर चैरिटी ‘अल खोएइ’ (Al khoei) के निदेशक शौकत वर्राइच (Shaukat Warraich) ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की थी। 

उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं की वजह से मस्जिदों में आने वाले आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा हुआ है। लोग अपने परिवार के साथ ऐसी जगहों पर आते हैं लेकिन इस तरह की घटनाओं के बाद वह घर में ही बने रहना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि मार्च के दौरान न्यूज़ीलैंड स्थित क्राइस्टचर्च में हुई गोलीबारी जिसमें 51 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस घटना की वजह से भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में भय व्याप्त है और उनके लिए समझना मुश्किल है कि क्या किया जाए।      

राहुल गाँधी पर ऊँगली उठाकर बुरे फँसे झारखण्ड के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी: कॉन्ग्रेस ने जारी किया शो कॉज नोटिस

बिहार चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद कॉन्ग्रेस की आलोचना हो रही है। पार्टी नेतृत्व को लेकर कॉन्ग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक दरार के बीच, झारखंड कॉन्ग्रेस ने गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी को राहुल गाँधी और पार्टी के राज्य प्रभारी आरपीएन सिंह की आलोचना करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व सांसद और झारखंड के एक प्रमुख मुस्लिम नेता अंसारी ने राहुल गाँधी से विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार में चुनाव प्रचार के तरीके के बारे में सवाल किया था। पूर्व सांसद ने कहा था कि राहुल गाँधी के इर्द-गिर्द सभी एमबीए डिग्री धारी हैं। एमबीए योग्यता वाले मैनेजमेंट अच्छा कर सकते हैं, न कि राजनीतिक सलाह दे सकते है। उन्होंने कहा राहुल गाँधी को राजनीतिक सलाहकार रखने की जरूरत है।

बिहार के कहलगाँव में राहुल गाँधी द्वारा एक चुनावी रैली का उल्लेख करते हुए, अंसारी ने कहा था कि पूर्व पार्टी प्रमुख लोगों को प्रभावित करने में विफल रहे क्योंकि वे समझ नहीं पाए कि उन्हें क्या बोलना था।

“इसका परिणाम यह है कि वे उसे सही सलाह देने में सक्षम नहीं हैं और न ही चुनावी रैलियों के भाषणों के लिए महत्वपूर्ण बात रखने का सुझाव देते हैं। कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए, राहुल गाँधी के लिए राजनीतिक सलाहकार रखना जरूरी है।

अंसारी ने यह भी कहा कि वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को पत्र लिखेंगे और पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की माँग करेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैं 1980 से कॉन्ग्रेस में रहा हूँ जब इन्दिरा गाँधी भारत की प्रधानमंत्री थी। मुझे यह साबित करने के लिए कोई प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है कि मैं कॉन्ग्रेसी हूँ। लेकिन आज पार्टी की इस हालत को देखकर मुझे दुख होता है।”

झारखंड में स्थानीय नेतृत्व और पार्टी प्रभारी आरपीएन सिंह पर हमला करते हुए फुरकान अंसारी ने कहा, “अगर यह मेरे ऊपर होता तो मैं आरपीएन सिंह को ब्लॉक अध्यक्ष भी नहीं नियुक्त करता।” बता दें अंसारी के बेटे इरफान जामताड़ा से मौजूदा विधायक हैं।

अंसारी के इस विरोध और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को लेकर दिए गए बयान की वजह से कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी। वहीं कई नेताओं के अनुरोधों पर कार्रवाई करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी के झारखंड कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश महतो ने राज्य इकाई के प्रमुख रामेश्वर उरांव की ओर से अंसारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिस पर अंसारी को सात दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी देने को कहा गया है।

गौरतलब है कि फुरकान अंसारी द्वारा दिया गया बयान ऐसे समय में आया जब बिहार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नुकसान की जिम्मेदारी लेने की पेशकश की थी। झा ने कहा कि वह अभी संपन्न विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद को त्याग देंगे।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (एआईसीसी) बिहार शक्तिसिंह गोहिल के साथ गुजरात प्रभारी राजीव सातव ने भी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अपने पद से हटने की पेशकश की है।

उल्लेखनीय है कि अंसारी के अलावा कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने बिहार चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर निराशा व्यक्त की थी और पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बिहार विधान सभा चुनावों में पार्टी के दृष्टिकोण की आलोचना की थी। राज्य में हो रहे विधानसभा चुनावों में हार के बाद से कॉन्ग्रेस के अधिक वफादार अब बागियों को बदल रहे हैं।

मशीन से होगी सीवर की सफाई, नहीं जाएगी सफाईकर्मियों की जान: मोदी सरकार ने लॉन्च किया ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’

केंद्र सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने वालों के लिए ऐतिहासिक ऐलान किया है। इस ऐलान के मुताबिक़ मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट (Manual Scavenging Act) में संशोधन किया जाएगा जिससे सीवर्स और सेप्टिक टैंक की मशीनों के माध्यम से (mechanised) सफाई संभव हो।

इस ऐलान के साथ एक और अहम बात यह है कि मैनहोल (manhole) शब्द को मशीन होल (machine hole) से स्थानांतरित किया जाएगा। इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्र की मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2021 तक इंसानों द्वारा की जाने वाली सीवर की सफाई (मैनुअल स्कैवेंजिंग) ख़त्म कर दी जाए। गुरुवार (19 नवंबर 2020) को इस पहल की घोषणा करते हुए एक ‘चैलेंज’ के बारे में जानकारी भी दी। यह चैलेंज मूलतः देश के सभी राज्यों के लिए है, जिसके तहत अप्रैल 2021 तक 243 शहरों को सीवर सफाई प्रक्रिया पूर्णतः मशीन संचालित करनी होगी।

अगर किसी इंसान को बड़ी समस्या पैदा होने की सूरत में सीवर के भीतर दाखिल होना पड़ता है तो उसे सही गियर (उपकरण) और ऑक्सीजन सिलेंडर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। इस चैलेंज का नाम है ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’। 

इस चैलेंज के अंतर्गत तमाम श्रेणियों में कुल 52 करोड़ रुपए के पुरस्कार भी दिए जाएँगे। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of housing & urban affairs) सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने इस संबंध में कई अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस चैलेंज में हिस्सा लेने वाले शहरों का ज़मीनी विश्लेषण स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा मई 2021 में कराया जाएगा। इसका परिणाम 15 अगस्त 2021 तक सार्वजनिक किया जाएगा।” 

आधिकारिक आँकड़ों की मानें तो मैनुअल स्कैवेंजिंग की वजह से पिछले 5 सालों में कुल 376 मौतें हुई हैं जिसमें सिर्फ 2019 के दौरान 110 मौतें हुई हैं। इसके बाद मंत्रालय के सचिव ने यह भी कहा कि हमने निर्देश जारी किया है कि अब से मैनहोल शब्द का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए और इसके स्थान पर मशीन होल शब्द का इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने वालों और निर्धारित आदेशों की अनदेखी करने वालों की शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन भी बनाई जा रही है। 

उल्लेखनीय है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के अनुसार किसी भी व्यक्ति से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करवाना दंडनीय कृत्य है। इसके लिए जुर्माना और कारावास तक का प्रावधान है। इस क़ानून में किए जा रहे संशोधन के अनुसार सीवर की सफाई करने वालों की पहचान की गई जाएगी और उनको बेहतर सुविधाएँ दी जाएँगी। अभी तक मशीन से की जाने वाली सफाई को वैकल्पिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था लेकिन अब से मशीन द्वारा की जाने वाली सफाई को आगामी कुछ समय के भीतर अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। 

इस मशीन से होने वाली सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के मामले में हैदराबाद नगरपालिका समेत देश के कई शहरों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा किए गए विश्लेषण के मुताबिक़ मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटिज़ एक्ट 1989 की मौजूदगी के बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई लगभग नहीं के बराबर होती है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान भी नहीं किया जाता है।                  

फ्रांस सहित भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला मौलाना खादिम हुसैन रिज़वी हमेशा के लिए खामोश: लाहौर में हुआ निधन

इस्लामिक मज़हबी उपदेशक तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के प्रमुख अल्लामा खादिम हुसैन रिज़वी का गुरुवार रात लाहौर में निधन हो गया। बता दें हाल ही में उसने फ्रांस को परमाणु हमले की धमकी दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 54 वर्षीय पाकिस्तान के विवादित मज़हबी नेता कई दिनों से बुखार से पीड़ित था, जिसके बाद पूर्वी शहर लाहौर के अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। पार्टी के प्रवक्ता हमजा के अनुसार, टीएलपी प्रमुख को सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही थी और सोमवार से बुखार भी था।

पाकिस्तान में ईशनिंदा के नाम पर अपराध करने वालों के पक्ष में खड़े होकर कई बार विवादों को जन्म दे चुका है। टीएलपी ने रिजवी के नेतृत्व में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। जिसमें 2018 में टीएलपी ने पाकिस्तान में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक ईसाई महिला, आशिया बीबी को ईशनिंदा के आरोपों से बरी करने के बाद हुआ हिंसक विरोध प्रदर्शन भी शामिल है। उसने भारत को भी कई मौकों पर धमकी दी थी।

बता दें रिज़वी पाकिस्तान में बेहद ही लोकप्रिय नेता थे, खासकर पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में। खादिम रिज़वी 19 वीं शताब्दी के इस्लामिक धर्मशास्त्री इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी, बरेलवी संप्रदाय के संस्थापक थे। फ्रेंच व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून के प्रकाशन को लेकर रिजवी में फ्रांस में काफी हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था।

इतना ही नहीं इस्लामिक धर्मगुरु ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इस्लामाबाद से फ्रांसीसी राजदूत को वापस भेजने की माँग की थी। साथ ही फ्रांस के खिलाफ परमाणु हमले करने की धमकी भी दी थी।

एक यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा पंजाबी मुल्ला खादिम रिज़वी, पाकिस्तानी पंजाबी सेना के सशस्त्र बलों को फ्रांस पर ‘परमाणु बम’ छोड़ने के लिए कहता है। फ्रांस को फ्रांस और यूरोपीय संघ में रहने वाले पाकिस्तानी लोगों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।

सिर्फ फ्रांस ही नहीं 2018 में पैगंबर मोहम्मद के अपमान को लेकर नीदरलैंड को भी परमाणु बम से उड़ाने की धमकी दी थी। नीदरलैंड को चेतावनी देते हुए रिज़वी ने कहा था कि अगर उसने पैगंबर मोहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टून की एक प्रतियोगिता की अनुमति दी तो वह ‘परमाणु बम’ “इस धरती के चेहरे से हॉलैंड को मिटा देगा। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के संस्थापक ने कहा था, “अगर वे मुझे परमाणु बम देते हैं तो मैं हॉलैंड को धरती से हटा दूँगा।”

रिज़वी, जिनका जन्म 22 जून, 1966 को पंजाब के अटॉक जिले में हुआ था, ने अपनी इस्लामिक शिक्षा हिफ़्ज़ और झेलम मदरसे से प्राप्त की। इसके बाद उसने आगे की धार्मिक शिक्षा लाहौर में जामिया निज़ामिया रिज़विया संस्थान दरस-ए-निज़ामी से प्राप्त किया।

उसने पाकिस्तान के सख्त ईश निंदा कानूनों का विरोध करने वालों के खिलाफ विरोध के लिए 1 अगस्त 2015 को कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान की स्थापना की।