सुशांत सिंह राजपूत के साथ फ़िल्म ‘काई पो छे’ में काम कर चके एक्टर आसिफ बसरा ने भी अपने कुत्ते की रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। 53 साल के अभिनेता ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के धर्मशाला के मैक्लोडगंज में स्थित एक कैफे के पास खुदकुशी की है। फिलहाल आत्महत्या का कारण पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामले में एक विदेशी महिला को हिरासत में लिया है।
Film actor Asif Basra was found hanging in a private complex in Dharamshala. Forensic team is at the spot and police is investigating the matter: SSP Kangra Vimukt Ranjan. #HimachalPradesh (Picture credit: Asif Basra’s website) pic.twitter.com/nxpWNLi8VU
जानकारी के अनुसार, अभिनेता आसिफ बसरा पिछले 5 सालों से मैक्लोडगंज में अपनी एक विदेशी महिला मित्र के साथ लिव इन में किराए के मकान में रह रहे थे। गुरुवार (12 नवंबर, 2020) दोपहर वह अपने पालतू कुत्ते को घुमाने निकले थे। इसके बाद घर वापस आकर उन्होंने पालतू कुत्ते की ही रस्सी को फंदा बनाकर जान दे दी।
अभिनेता आसिफ बसरा का पालतू कुत्ता भी घटना के बाद से गायब है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पहुँच चुकी है और शव को कब्जे में लेकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। आसिफ बसरा कई बॉलीवुड फिल्मों और टीवी शो में नजर आ चुके हैं। इसके अलावा वे कई वेब सीरीज का भी हिस्सा रहे हैं।
1998 से फिल्मों में एक्टिव आसिफ ने ‘वो’ (1998) ‘ब्लैक फ्राइडे’ (2004), ‘जब वी मेट’ (2007), ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ (2010), ‘कृष 3’ (2013) और ‘हिचकी’ (2018) जैसी फिल्मों में काम किया था। उनकी हालिया वेब सीरीज की बात करें तो उन्होंने एमेजॉन प्राइम की वेब सीरीज ‘पाताल लोक’ और डिज्नी प्लस हॉटस्टार की सीरीज ‘होस्टेज’ में भी नजर आ चुके हैं।
पश्चिम बंगाल स्थित अलीपुरदुआर जिला की भारत-भूटान सीमावर्ती शहर जयगाँव में भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के काफिले पर बृहस्पतिवार (12 नवंबर, 2020) को हमला किया गया। दिलीप घोष पर यह हमला तब किया गया, जब वह अलीपुरद्वार जिले से गुजर रहे थे। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने उनके काफिले पर पत्थर फेंके। इस घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई है लेकिन कुछ गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए हैं। BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमले का आरोप लगाया है।
West Bengal: Convoy of state BJP chief Dilip Ghosh was attacked near Alipurduar.
घटना की जानकारी देते हुए, दिलीप घोष ने कहा, “मैं ठीक हूँ। पीएम ने एक दिन पहले ही केंद्रीय कार्यालय से बंगाल के लिए चिंता व्यक्त की थी। हम लोग सभा करके लौट रहे थे। रास्ते में टीएमसी के गुंडे चिल्ला रहे थे। पत्थर फेंक रहे थे। डंडे से भी हमला कर रहे थे। भाजपा के साथ लोग हैं इसलिए कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। वही हमले करवा रहे हैं।”
दिलीप घोष ने कहा कि अलीपुरद्वार क्षेत्र से गुजरते वक्त रास्ते में मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। और जब जब काफिला गुजरने लगा, लोगों ने पथराव करना शुरु कर दिया। पत्थर लगने से गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए हैं। इसके अलावा, गाड़ियों को बुरी तरह नुकसान हुआ है।
बताया जा रहा है कि कालचीनी से विधायक विल्सन चंपामारी की गाड़ी बुरी तरह हमले में क्षतिग्रस्त हुई है। उन्हें भी चोटें आई हैं। ताबड़तोड़ बरसाए गए पत्थरों के साथ ही भीड़ से काफिले को काले झंडे भी दिखाए गए। बीजेपी नेताओं ने ममता सरकार पर हमले का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि इस घटना में कालचीनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विल्सन चंपामारी का वाहन काफी क्षतिग्रस्त हो गया। उन्हें कुछ चोटें भी आई है। हालाँकि, दिलीप घोष बाल-बाल बच गए। साथ ही भाजपा नेता ने बंगाल पुलिस पर आरोपितों का साथ देने का संगीन आरोप भी लगाया है। दिलीप घोष के काफिले पर हुए इस हमले के बाद पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के तगड़े इंतजामात किए हैं।
हमले के बाद एबीपी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए भाजपा नेता ने हमले के पीछे टीएमसी का हाथ बताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि एक दो महीने के बाद टीएमसी और उनके गुंडों की हिम्मत नहीं होगी कि वो बीजेपी पर हमला करें। बिहार तक हम जीत गए हैं, इसलिए उनको लगता है कि अब तो बीजेपी पास आ गई है। उससे घबरा कर और ज्यादा कर रहे हैं। दुर्गा पूजा के वक्त भी 5-7 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। लॉकडाउन में भी हमला हुआ।”
बीजेपी दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ट्वीट कर ममता सरकार पर हमला बोला है। मनोज तिवारी ने कहा है कि दिलीप घोष के काफिले पर हुए हमले से यह स्पष्ट हैं कि अब ममता दीदी को हार का डर सता रहा है।
आज @DilipGhoshBJP जी के क़ाफ़िले पर अलीपुरद्वार में किए हमले से ये स्पष्ट है कि अब हार का डर सता रहा है ममता दीदी को …@BJP4Bengal
वहीं बंगाल बीजेपी ने भी हमले पर नाराजगी जाहिर की है।
The State President Shri @DilipGhoshBJP was attacked again by the incorrigible TMC goons in Alipurduar! BJP cannot not be stopped by these attacks and terror shows! pic.twitter.com/p5iQExhwFX
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज (12 नवंबर 2020) जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण करेंगे। मूर्ति का अनावरण वर्चुअली यानी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से होगा।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए बयान के आधार पर मूर्ति का अनावरण जेएनयू के एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक में लगभग शाम 6:30 बजे होगा। क्योंकि आयोजन जेएनयू परिसर में होगा, इसलिए तथाकथित बुद्धिजीवियों की तरफ से विवाद की नींव रखी जा चुकी है। जेएनयू छात्र संघ ने शाम 5 बजे परिसर के उत्तरी द्वार पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
जेएनयू छात्र संघ द्वारा जारी किए गए एक पोस्टर में ‘मोदी गो बैक’ लिखा है और शिक्षा मंत्रालय से सवाल भी पूछे गए हैं। पोस्टर के मुताबिक़ यह विरोध प्रदर्शन ‘शिक्षा और छात्र विरोधी मोदी सरकार’ के विरुद्ध किया जा रहा है।
इस दौरान एक और उल्लेखनीय बात यह है कि जेएनयू के तमाम तथाकथित बुद्धिजीवी और लिबरल छात्रों का यह समूह (मुख्य रूप से टुकड़े-टुकड़े गैंग) मूर्ति निर्माण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का लगातार विरोध कर रहा था। स्वघोषित सेक्युलर छात्रों के इस समूह के मुताबिक़ यह रुपयों की बर्बादी है। जेएनयू के छात्र सनी धीमन ने टाइम्स नाउ से बात करते हुए कहा:
“आखिरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जेएनयू परिसर आने वाले हैं (आभासी तौर पर)। भाजपा और संघ इसे एंटी नेशनल (देश विरोधी) मानते हैं। अक्टूबर 2016 में हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला जलाया था, आज पूरे देश के किसान उनका पुतला जला रहे हैं। यह स्वामी विवेकानंद की आत्मा के लिए बेहद नकारात्मक होगा, अगर प्रधानमंत्री मोदी किसानों की बात नहीं सुनते हैं।”
वहीं इस मुद्दे पर जेएनयू के ही एक और छात्र ने कहा, “हम स्वामी विवेकानंद की शिक्षा और सीख के विरुद्ध नहीं हैं लेकिन फ़िलहाल प्राथमिकताएँ तय करने की ज़रूरत है। जब से यह सरकार आई है, तब से जेएनयू की अवधारणा पर लगातार हमले जारी हैं। इस सरकार ने शैक्षणिक गतिविधियों के खर्च लगातार बढ़ाए ही हैं। वह निरर्थक चीज़ों में रुपए बर्बाद कर रहे हैं।”
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से इस आयोजन की जानकारी ट्विटर पर साझा की गई। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “आज शाम 6:30 बजे स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण कार्यक्रम होगा, जिसमें अपने विचार भी साझा करूँगा। यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा।”
इसके अलावा जेएनयू के कुलपति ने भी इस आयोजन के संबंध में बयान जारी किया था। बयान में कहा गया था, “स्वामी विवेकानंद देश के उन चहेते बुद्धिजीवियों और धार्मिक गुरुओं में से हैं, जो भारत के लिए बेहद भाग्यशाली हैं। उन्होंने देश के युवाओं को स्वछंदता, विकास, सद्भाव और शांति का संदेश देकर प्रेरित किया। उन्होंने देश के आम नागरिकों को भारतीय सभ्यता को गर्व से अपनाने की सीख दी।”
बता दें कि स्वामी विवेकानंद की मूर्ति जेएनयू के कुछ पूर्व छात्रों के समर्थन से स्थापित की गई है। कुछ समय पहले दिल्ली की सड़कों को जाम करने के बाद यहाँ के कुछ वामपंथी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को अपना निशाना बनाया था। इसी नई स्थापित मूर्ति को बदरंग करते हुए उसके पेडेस्टल पर माओवंशियों ने अपशब्द लिखे थे। “भगवा जलेगा”, “Fu&k BJP” आदि को लाल रंग के पेंट से लिखकर पेडेस्टल को कुरूप बना दिया था।
कल सुबह पक्षकार (पत्रकार होने का दावा करने वाले) चैनलों ने जादव जी के सुपूत का बिहार के मुख्यमंत्री पद पर राज्याभिषेक कर दिया। चिड़िया उड़ – कौआ उड़ खेल कर एग्जिट पोल देने वाले विशेषज्ञों ने भी जूनियर जी पर फूलों की बरसात कर दी।
सूत्रों की मानें तो शाम को एक पत्रकार अपने स्टूडियो में “कजरारे – कजरारे” गाने पर डांस भी पेश करने वाले थे। अफवाहों की माने तो रामनाथ गोयंका अवार्ड के साथ-साथ अब पत्रकारों के लिए “नाच नाथ गोयंका” अवार्ड भी जल्द ही शुरू किया जाने वाला है।
खबरी चैनलों के इस ता ता थइय्या-थइय्या कार्यक्रमों के बीच कट्टा व्यापारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। गौरतलब है कि कट्टा व्यापार पिछले कुछ सालों से बिहार में धूल खा रहा है। और ऊपर से कोविड के चलते एकाएक कट्टा किसी को सटा भी दें तो वो कहता है “हमरे जेब में कुच्छो ना बा।”
कट्टा व्यापार पर पड़ी मार का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि पिछले कुछ सालों से प्रकाश झा ने ऐसी कोई फिल्म नहीं बनाई, जिसमें बिहार के गुण्डाराज का रेखा चरित्र हो। कट्टा बनाने के लिए लोहे की माँग दोपहर तक ही इतनी बढ़ गई कि एक गिरोह ने पाँच किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन तक उखाड़ दी।
कट्टा व्यापार संघ के मुखिया जद्दू भईय्या उर्फ़ पान पसेरी ने हमारे पत्रकार से बात करते हुए कहा कि वो बिहार की जनता को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने एक बार फिर उन्हें सेवा करने का मौका दिया।
जददू भईय्या ने बिहारवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वो बिहार में इतना कट्टा पैदा कर देंगे कि आने वाली गर्मी में पेड़ों पर आम की जगह कट्टा लटकता हुआ मिलेगा। जिसे जो चाहे, जब चाहे प्रयोग में लाकर प्रेम विवाह, क़ानूनी विवाद, गृह कलेश और व्यापार में नुकसान से छुट्टी पा सकता है।
जददू भईय्या ने तो कट्टा प्रचार में यहाँ तक कह दिया कि जो काम एक हजार रुपए के कट्टे से हो जाए, उसके लिए पुलिस से लेकर न्यायालय तक क्यों परेशान किया जाए!
सब कुछ ठीक ही चल रहा था कि दोपहर के बाद जूनियर जी का मुख्यमंत्री वाला ताज थोड़ा-थोड़ा खिसकता हुआ दिखाई दिया। पक्षकारों ने कहा की पगड़ी बाँधकर ताज पहनाओ तो ठीक बैठ जाएगा लेकिन अंतिम परिणाम आने तक पगड़ी और ताज दोनों गायब हो गए।
कट्टा व्यापार इस सदमे को झेल नहीं पाया और आधी रात तक जद्दू भईय्या के घर के बाहर इतना कट्टा चला कि सफाई करने वाले ने गोलियों के खाली खोखे बेच कर अमेरिका शिफ्ट होने का प्लान बना लिया है।
कट्टा व्यापार के एक सदस्य ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि जद्दू भईय्या अपना नाम बदल कर राज्यसभा की सीट के जुगाड़ में लग गए हैं और कट्टा व्यापार अब तभी पनप पाएगा जब लोग “वोकल फॉर लोकल” हो जाएँगे।
तेजस्वी यादव की अगुवाई में बिहार चुनाव लड़ रही राजद को चुनाव के नतीजों से गहरा झटका लगा है। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार को राजद के कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब हिंसा में बदल गया है। बृहस्पतिवार (12 नवंबर, 2020) को राजद कार्यकर्ताओं ने आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे एनएच-30 को जाम कर दिया। खबर है कि सड़क पर विरोध कर रहे सैकड़ों की संख्या में राजद के कार्यकर्ता आगजनी भी कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव परिणामों से आक्रोशित कार्यकर्ता सैकड़ों की संख्या में विरोध करते हुए भोजपुर जिले की सड़क पर उतर आए हैं। इस दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर आगजनी भी की है। सड़क जाम कर रहे राजद कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार के चुनाव परिणाम में धांधली हुई है।
आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार की मिलीभगत से चुनाव का परिणाम घोषित किया गया है, जिसके विरोध में वो सड़क पर उतरे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। उदवंतनगर थाना क्षेत्र के मल्थर गाँव के पास प्रदर्शनकारियों ने जमकर उपद्रव मचाते हुए अपना विरोध दर्ज किया।
हालाँकि, भोजपुर जिले में इस बार महागठबंधन का प्रदर्शन पिछली बार की तुलना में बेहतर रहा है। भोजपुर की 7 सीटों में से 5 पर महागठबंधन के प्रत्याशियों को जीत मिली है। इलाके में अजीब तर्क पर विरोध कर रहे राजद कार्यकर्ताओं सभी की समझ के परे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए को 125 सीटें जबकि महागठबंधन को 110 सीटें मिली हैं। भोजपुर की सात सीटों में से, महागठबंधन ने पाँच सीटें जीतीं, जिनमें से राजद ने तीन सीटें और सीपीआई (एमएल) ने दो सीटें जीतीं। बाकी की दो सीटें बीजेपी के खाते में गई है।
बता दें मतगणना के दिन शुरुआती रुझान आरजेडी के पक्ष में था, लेकिन जैसे ही एनडीए की ओर रुझानों का झुकाव शुरू हुआ विपक्षी दलों ने तुरंत इसे अस्वीकार करते हुए चुनाव परिणाम में धांधली का आरोप लगा दिया। हालाँकि कीर्ति चितम्बरम जैसे कुछ विपक्षी नेताओं ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से ईवीएम को दोष देने के लिए मना भी किया।
बिहार चुनावों के नतीजे आखिरकार हम सबके सामने हैं। मगर कुछ हस्तियाँ ऐसी भी हैं, जिन्होंने इस नतीजे को समय से पहले ही भाँप लिया था। ये हस्तियाँ तमाम एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल और राजनीतिक गुरुओं को हमेशा ही हेय दृष्टि से देखती आई हैं। हम किसी और की नहीं बल्कि मशहूर पत्रकार और युगद्रष्टा बरखा दत्त की बात कर रहे हैं।
विश्वकप फुटबॉल मुकाबलों के नतीजे पहले ही बता देने वाले ‘पॉल दी ऑक्टोपस’ का नाम तो सबने सुना होगा मगर आज हम आपको एक स्वदेशी ‘पॉल दी ऑक्टोपस’ से मिलवा रहे हैं, जिन्हें कि ‘बरखा दी गोविंदा’ के नाम से जाना जाता है। पॉल दी ऑक्टोपस की ही तर्ज पर बरखा दत्त चुनावी खेल के नतीजों को मात्र अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर बता देती हैं। इन तस्वीरों में आगामी चुनाव में हार रहे प्रत्याशी की तस्वीर बरखा दत्त के साथ अपने-आप उभर आती है।
चुनाव चाहे संयुक्त राज्य अमेरिका में हों, उत्तर प्रदेश में हों, बिहार में हों, यूगांडा में हों, या किसी ऐसी आकाशगंगा में जिसका पता लगना अभी बाकी है, ऐसा कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं, जिसके प्रतिनिधि के साथ बरखा दत्त नजर आई और वो चुनाव जीता हो।
उदाहरण के तौर पर, हिलेरी क्लिंटन के साथ बरखा दत्त के नजर आने के बाद हिलेरी अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव हारी थी। 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले उर्मिला मातोंडकर ने कॉन्ग्रेस ज्वाइन की और तुरंत वो बरखा दत्त के साथ नजर आईं। हार ऐसी हुई कि आज उर्मिला ने कॉन्ग्रेस से ही नहीं, राजनीति से भी सन्यास ले लिया है।
उत्तर प्रदेश के टोंटी चोर की कुंडली में बरखा दत्त ऐसे स्थान में बैठी हैं कि उनका राहू ही अस्त हो गया और केतु भी फलदायी साबित नहीं हो पा रहा। जबकि स्वयं लालू प्रसाद यादव के साथ बरखा दत्त की एक दुर्लभ तस्वीर के बाद आज लालू की स्थिति जगजाहिर है।
देश-दुनिया के तमाम दुर्लभ किन्तु विचित्र संयोग
ऐसा ही कुछ इस बार बिहार के विधानसभा चुनावों में भी हुआ। मानो, सौ प्रतिशत नतीजे देने वाली बरखा दत्त ने पहले ही तय कर लिया था कि सत्ता एनडीए को ही दिलानी है। बरखा दत्त नजर आई चारा चोर लालू के पुत्र तेजस्वी यादव के साथ।
बरखा दत्त की निशानदेही और कार्य कुशलता को देखिए, उन्होंने किसी और को नहीं बल्कि सीधे महागठबंधन के नेता और वाम-उदारवादियों के नए मसीहा को चुना, घात लगाकर उसका साक्षात्कार करने पहुँची और नतीजा आपके सामने है।
बिहार चुनाव के नतीजों से कई सौ साल पहले तेजस्वी यादव के साथ बरखा दत्त, जिसे तमाम एग्जिट पोल नहीं देख पाएबरखा दत्त की इसी मुलाकात ने चिराग की उम्मीदों का चिराग भी बुझाया
बरखा दत्त के जीवन से कुछ चुनिन्दा और सबसे बेहतरीन बात जो अपनाने लायक है, वो यह कि इसके लिए उन्होंने कभी राष्ट्रवादियों से किसी प्रकार के ट्रोल भत्ते की अपेक्षा नहीं की और एक तपस्वी की भांति वह कारसेवा कर भाजपा विरोधियों की ईंट से ईंट भी बजा रही हैं।
“किसी को एग्जिट पोल मिला तो किसी के हिस्से EVM आई, मैं सबसे बकैत था, मेरे हिस्से बरखा आई।”
ऐसी ही एक तस्वीर में अब बरखा दत्त बंगाल की दीदी ममता बनर्जी के साथ नजर क्या आई कि अमित शाह ने बंगाल चुनावों के लिए रणनीति बनाने के फैसले को ही टाल दिया है। बिहार के बाद अब बंगाल चुनावों से पहले बरखा दत्त ने चुनाव नतीजों की घोषणा नहीं की बल्कि अपनी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल करवा दी।
बंगाल में होने जा रहे चुनाव के ‘लीक्ड’ नतीजे
राजनीतिक पंडितों ने इस तस्वीर को देखते ही बंगाल चुनाव के फैसले सुना दिए हैं। अब भाजपा समर्थक सड़कों पर नाच रहे हैं और पटाखों की छुच्छी में आग लगा रहे हैं। इसी बीच एक गुप्त सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बूँदी वाले लड्डू के थोक्व विक्रेता और मशहूर हारमोनियम वादक अजीत भारती को बूँदी के लड्डुओं का भी ऑर्डर दे दिया गया है।
सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर भी ‘वायरल’ होकर सामने आई है, जिसमें नरेंद्र भाई मोदी और योगी आदित्यनाथ ठहाके मारते देखे जा रहे हैं। लोग इसे ‘सुपा हॉट फायर’ का स्वदेशी मीम बता रहे हैं।
मोदी और योगी की एक वायरल तस्वीर
कहा जा रहा है कि यह तस्वीर मोदी जी और योगी जी के निजी मीटिंग की है, जब उन्होंने यह तस्वीर देखी तो स्वयं को रोक नहीं पाए। लेकिन कुछ दुष्ट लोग हैं जो इस तस्वीर को फोटोशॉप बता रहे हैं। ऐसे लोगों का नाम जुबैर और प्रतीक बताया जा रहा है।
होलसेल लड्डू विक्रेता अजीत भारती से जब हमने यह तस्वीर दिखा कर पूछा कि क्या वो छः महीने आगे का भी ऑर्डर लेते हैं? तो उन्होंने कहा, “देखिए, हमारे पास तो 2029 की मई का भी ऑर्डर पड़ा हुआ है और हमने केराव का बेसन मँगवा कर रख लिया है। तो छः महीने आगे का तो बिलकुल ले लेंगे।”
आगे हमने बात की कि क्या हमेशा भगवा रंग का ही लड्डू बनाते हैं? तो पूरे बेगूसराय में वर्ल्ड फेमस लड्डू दुकानदार श्री भारती ने कहा, “बनाने का तो हम हरे रंग का भी बनाते हैं, लेकिन कई बार सक्सेस नहीं हो पाता। लोग बियाना (अडवांस) दे कर पूरा पेमेंट नहीं करते। बारूद का लड्डू छोड़ कर हम हर रंग का बनाते हैं। भगवा वाला ज्यादा बिकता है, और प्योर होता है। उसमें रंग नहीं मिलाना पड़ता। बाकी, मोदी जी के आने से ‘बिजनिस’ ठीक जा रहा है।”
बता दें कि श्री भारती जी ने ही इस देश में सबसे पहले भगवा रंग के बूँदी के लड्डू बनाए थे। स्वतन्त्रता दिवस पर स्कूल, विद्यालय, कैंटीन आदि में बंटने वाली बूँदी उन्हीं के द्वारा तैयार की जाती हैं।
उनका लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में वो JNU में भी स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर उन्हीं के द्वारा बनाए जाने वाले बूँदी के लड्डू वितरित किए जाएँ। फ़िलहाल उनका पूरा ध्यान बंगाल में बूँदी के लड्डुओं की सप्लाय पूरी करने पर केंद्रित है।
कोविड महामारी के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत सरकार ने पिछले दिनों कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिनके कारण गिरती अर्थव्यवस्था ने दोबारा से मजबूत वापसी की। आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन सबकी जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार 20 अरब डॉलर के नए प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रही है ताकि दबावग्रस्ट सेक्टरों को राहत मिले।
उन्होंने अपनी बात रखने से पहले कहा, “मैं कुछ नए उपायों की घोषणा करने जा रही हूँ। आप इन्हें स्टीमुलस पैकेज कह सकते हैं।” इसके बाद उन्होंने आत्मनिर्भर 3.0 का ऐलान किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना की शुरुआत की ताकि नए रोजगार पैदा हो सकें। आत्मनिर्भर भारत अभियान 3.0 के तहत 265080 करोड़ रुपए के 12 उपायों की घोषणा भी गई। यह जीडीपी का 15 फीसदी है।
इसमें संगठित क्षेत्र में रोजगार देने के लिए बल दिया जाएगा। लोगों को ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी भविष्य निधि के साथ जोड़ने की सरकार की इसके तहत कोशिश है ताकि लॉकडाउन से अनलॉक की प्रक्रिया में अधिक से अधिक नौकरियों का सृजन हो।
इस योजना का एक लक्ष्य यह भी है कि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी ईपीएफओ से जुड़ें और पीएफ का फायदा उठाएँ। सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐसे कर्मचारी जो पहले पीएफ के लिए पंजीकृत नहीं थे और जिनकी सैलरी 15 हजार से कम है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।
वहीं जिन लोगों के पास अगस्त से सितंबर तक नौकरी नहीं थी लेकिन बाद में पीएफ से जुड़े हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। यह योजना 30 जून 2021 तक लागू रहेगी।
1 अक्टूबर से नौकरी पाने वाले कर्मचारी भी इसका लाभ ले पाएँगे और अगले दो सालों तक इसका लाभ उठा सकेंगे। वित्त मंत्री ने बताया कि जिस संस्था में 1000 या उससे कम कर्मचारी हैं, उसमें कर्मचारी के हिस्से का 12% और काम देने वाले के भी भत्ते का 12% का केंद्र सरकार योगदान देगी। जहाँ 1000 से ज़्यादा कर्मचारी हैं, वहाँ केवल कर्मचारियों का केंद्र सरकार 12% योगदान देगी। ये अगले दो वर्ष तक लागू रहेगा।
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वित्त मंत्री ने कहा कि पहले चरण में घोषित Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS 1.0) को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया जा रहा है। यह स्कीम पूरी तरह से सुरक्षित गारंटी देती है। 26 दबावग्रस्त सेक्टरों और स्वास्थ्य सेक्टर के लिए ईसीजीएलजीएस के तहत लाभ दिया गया है। मूलधन चुकाने के लिए भी 5 साल का समय दिया गया है।
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इसके बाद 10 सेक्टरों के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपए की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव योजना भी लाई गई है, जिससे रोजगार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि पहले यह योजना सिर्फ 3 क्षेत्रों में शुरू हुई थी।
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पीएम आवास योजना शहर के लिए इस पैकेज में 18000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान हुआ है, जिससे देश के गरीबों को फायदा पहुँचेगा। दावा किया जा रहा है कि इससे 78 लाख से अधिक रोजगार पैदा होंगे व गरीब को मकान भी मिलेगा।
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इसके बाद कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगी कंपनियों को कैपिटल और बैंक गारंटी में राहत होगी। 3 फीसद तक परफॉर्मेंस सेक्योरिटी को भी कम किया गया, जिसकी वजह से ठेकेदारों को राहत होगी।
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रियल स्टेट को बूस्ट करने के लिए डेवलपर्स और घर खरीददारों को आयकर में राहत दी जाएगी। सरकार NIIF के डेब्ट प्लेटफॉर्म में भी 6000 करोड़ रुपए इक्विटी के रूप में निवेश करेगी।
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14 करोड़ किसानों को फायदा पहुँचाने के लिए फर्टिलाइजर के लिए 65 हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेजी से सुधारने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
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निर्यात परियोजना को बढ़ाने के लिए EXIM बैंक को 3000 करोड़ रुपए लाइन ऑफ क्रेडिट के लिहाज से दिए जाएँगे।
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रक्षा उपकरण बनाने वाली घरेलू कंपनियों और ग्रीन एनर्जी कंपनियों को फायदा देने के लिए कैपिटल और इंडस्ट्रियल एक्सपेंडीजर के लिए अतिरिक्त 10200 करोड़ रुपए दिए जाएँगे।
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इसके बाद कोरोना वैक्सीन के रिसर्च डेवलपमेंट काम के लिए 900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलिजी को दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने टीवी प्रोडूसर एकता कपूर की एक याचिका बुधवार (11 नवंबर 2020) को ख़ारिज कर दी। इस याचिका में एकता कपूर ने उनकी इरोटिक वेब सीरीज XXX2 में भारतीय सेना का तिरस्कार किए जाने के आरोपों को हटाने की मॉंग रखी थी।
एकता कपूर
रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस शैलेन्द्र शुक्ला का कहना है कि कुछ अश्लील है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए दर्ज साक्ष्य का होना अनिवार्य है। वे कहते हैं, “जहाँ तक इस केस का सवाल है, सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि एपिसोड अश्लील नहीं है।”
एकता कपूर ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अश्लीलता फैलाने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा अपनी वेब सीरीज XXX2 में राष्ट्रीय प्रतीकों का गलत इस्तेमाल करने जैसे खुद पर लगे आरोपों को हटाने की माँग की थी।
एकता कपूर ने अपनी याचिका में कहा था कि चूँकि वो न इसकी निर्माता हैं, न ही निर्देशक, इसलिए उन्हें एपिसोड के विषय-वस्तु का कोई ज्ञान नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था की उनका नाम तो एपिसोड के क्रेडिट्स में भी नहीं आता।
इंदौर में रहने वाले एक शिकायतकर्ता ने कहा था कि इस फिल्म के निर्माताओं ने भारतीय सेना की वर्दी का तिरस्कार किया है। हालाँकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि ऑल्ट बालाजी की मैनेजिंग डायरेक्टर होने के नाते, एकता कपूर को अपने चैनल पर क्या प्रसारित हो रहा है, इसका पूर्ण ‘ज्ञान होना चाहिए’।
एकता कपूर के इस तर्क का कि इंटरनेट इससे कहीं अधिक स्पष्ट अश्लीलताओं से भरा पड़ा है, का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा, “इंटरनेट पर अश्लील चीज़ों की भरमार होने का कारण संबंधित अधिकारियों का इसे रोक पाने में असमर्थता है। यह विफलता किसी याचिका के समर्थन में तर्क के लिए वैध नहीं मानी जा सकती।”
याचिका ख़ारिज करते हुए हाई कोर्ट ने एकता कपूर की इस दलील को भी काट दिया, जिसमें यह कहा गया था कि जिस भी व्यक्ति ने खुद इस सीरीज को देखने के लिए पैसे खर्च किए हों, उसे बाद में कंटेंट के अश्लील होने की शिकायत नहीं करनी चाहिए।
XXX2 में धार्मिक भावनाएँ आहत, भारतीय सेना का तिरस्कार
एकता कपूर और शोभा कपूर के खिलाफ ओटीटी प्लेटफार्म ऑल्ट बालाजी पर स्ट्रीम की गई उनकी वेब सीरीज XXX2 में “अनुचित सेक्स सीन” दिखाने के कई आरोप दर्ज हुए हैं।
एकता कपूर ऑल्ट बालाजी की फाउंडर हैं, जिसका मालिकाना अधिकार उनके ही प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स के पास है। विवादास्पद दृश्य “प्यार और प्लास्टिक” नाम के एक एपिसोड में प्रसारित हुआ था।
सोशल मीडिया सेलेब्रिटी विकास पाठक, जो ‘हिंदुस्तानी भाऊ’ के नाम से भी चर्चित हैं, ने भी एकता कपूर के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत दर्ज करवाई है। हिंदुस्तानी भाऊ के अनुसार, वेब सीरीज का एक एपिसोड यह दिखाता है कि फौजी की पत्नी अपने बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंधों में लिप्त होती है, जबकि उनके फौजी पति अपने परिवार से दूर होते हैं।
हिंदुस्तानी भाऊ कहते हैं कि हमारी सेना हमारा गौरव है और उनकी पत्नी किसी और पुरुष के साथ शारीरिक संबंधों में लिप्त हों, जिसने उनके पति की वर्दी पहन रखी हो, यह दिखाना शर्मनाक है। इसी तर्क को आधार बनाते हुए विकास पाठक का मानना था कि एकता कपूर ने इस वेब सीरीज के जरिए हमारी सेना का मज़ाक बनाया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा वामपंथी लेखिका अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) की किताब के विरोध के बाद इस किताब को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में मनोनयनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय (Manonmaniam Sundaranar University in Tirunelveli) ने अपने पाठ्यक्रम से हटाने का फैसला किया है। दरअसल, अरुंधति रॉय की यह पुस्तक माओवादी ठिकाने की उसकी यात्रा पर आधारित थी। इस किताब में लेखिका ने माओवादियों का महिमामंडन किया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुलपति केपी पिचुमानी (Vice-Chancellor K. Pitchumani) ने कहा कि यह फैसला पिछले सप्ताह एबीवीपी के आयोजकों की शिकायत मिलने के बाद यूनिवर्सिटी द्वारा गठित एक समिति ने लिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपनी शिकायत में कहा था कि पुस्तक ‘Walking with the Comrades’ (वॉकिंग विद दी कॉमरेड्स) में अरुंधती रॉय के माओवादी क्षेत्रों की यात्रा को लेकर विवादास्पद सामग्री को दर्शाया गया है।
इस शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए विश्विद्यालय ने जाँच समिति का गठन किया। जाँच में यह पता चला कि माओवादी और नक्सल विचारधारा पिछले तीन वर्षों से छात्रों पर थोपी गई है। जिस पर तिरुनेलवेली में मनोनयनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय ने बुधवार (11 नवंबर, 2020) को अरुंधति रॉय द्वारा लिखित पुस्तक को अपने पाठ्यक्रम से वापस लेने का फैसला किया।
राफेल को एयरक्राफ्ट वाहक बताने वाली अरुंधती रॉय की एक दशक पुरानी ‘Walking with the Comrades’ में भारतीय राज्य और सशस्त्र गुरिल्ला बल, माओवादियों के बीच मध्य भारत के जंगलों में हुई भिड़त के बारे में बताया गया है। पुस्तक को 2017 में तीसरे सेमेस्टर में बीए अंग्रेजी भाषा और साहित्य के छात्रों के लिए राष्ट्रमंडल साहित्य श्रेणी के तहत विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था।
कुलपति केपी पिचुमानी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि अकादमिक डीन और बोर्ड ऑफ स्टडी के सदस्यों वाली एक समिति ने शिकायत को संज्ञान में लिया और पुस्तक को वापस लेने का फैसला किया क्योंकि छात्रों के लिए विवादास्पद पुस्तक पढ़ाना अनुचित हो सकता है। कुलपति ने बताया कि इसके स्थान पर लेखक एम कृष्णन की “My Native Land: Essays on Nature” पुस्तक को शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि एबीवीपी दक्षिण तमिलनाडु के संयुक्त सचिव सी विग्नेश ने ‘राष्ट्रविरोधी माओवादियों’ द्वारा हत्या के इलाकों और दंगों का खुलकर समर्थन करने की पुस्तक का विरोध किया था। साथ ही इसके खिलाफ कुलपति को एक शिकायत पत्र भी लिखा था। इसके अलावा, विग्नेश ने चेतावनी दी थी कि यदि विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम से पुस्तक को जल्द नहीं हटाया तो एबीवीपी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से मामले से संबंधित कार्रवाई की माँग करेगा।
ऑर्गनाइजर की एक रिपोर्ट के अनुसार, “पुस्तक कथित रूप से नक्सलियों का महिमामंडन करती है, जिन्हें भारत के सबसे आंतरिक सुरक्षा खतरे के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।”
हरियाणा के मेवात में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार सिर्फ़ वहाँ की बहुसंख्यक आबादी का नहीं है बल्कि प्रशासन भी उन्हें उनका हक देने में और उनके साथ सौतेला व्यवहार कर उन्हें पीछे ढकेले जा रहा है। ऐसे ही एक ताजा मामला एक विज्ञापन से उजागर हुआ है। ये विज्ञापन D.ed यानी ‘डिप्लोपा इन एजुकेशन’ कोर्स में एडमिशन हेतु मेवात विकास अभिकरण द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से निकाला गया है।
यह विज्ञापन विवादस्पद इस कारण है कि इसमें 50 सीटों के लिए आवेदन माँगे गए हैं। इनमें 25, यानी कुल सीटों का 50% प्रतिशत मेव मुस्लिम महिलाओं/लड़कियों के लिए आरक्षित है। बाकी बची 25 सीटों को लेकर निर्देश दिए गए हैं कि उन पर आरक्षण हिदायतानुसार होगा और अभ्यर्थी का चयन का आधार मेरिट होगा।
क्या यह विज्ञापन असंवैधानिक, अनैतिक और हिंदू विरोधी नहीं- VHP
इस विज्ञापन को विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। उन्होंने इस विज्ञापन पर अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा, “मेवात में D.Ed प्रवेश में 50% सीटें ‘मुस्लिम अल्पसंख्यक’ के लिए आरक्षित? माननीय मनोहर लाल खट्ट जी, हद हो गई! बहुसंख्यक भी अल्पसंख्यक होते हैं? हिन्दू उत्पीड़कों को धर्माधारित आरक्षण और वह भी भाजपा के शासन काल में।”
वह नूँह के डिप्टी कमीशनर से पूछते हैं, “मेवात विकास प्राधिकरण क्या मुस्लिम विकास प्राधिकरण है @Districtnuh जी। सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों का विकास? क्या यह विज्ञापन असंवैधानिक, अनैतिक और हिंदूद्रोही नहीं लगता आपको? जिले में पहले से ही पीड़ित हिंदू समाज पर क्या यह एक सरकारी हमला नहीं?”
मेवात विकास प्राधिकरण क्या मुस्लिम विकास प्राधिकरण है @Districtnuh जी। सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों का विकास? क्या यह विज्ञापन असंवैधानिक, अनैतिक और हिंदूद्रोही नहीं लगता आपको? जिले में पहले से ही पीड़ित हिंदू समाज पर क्या यह एक सरकारी हमला नहीं? https://t.co/KLriVMs8Ci
ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया तो हमने इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि करने हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय में संपर्क किया। अधिकारी मीटिंग में व्यस्त थे। लेकिन हमारी बात उस शख्स से हुई जिन्हें विज्ञापन की जानकारी थी।
उन्होंने सीटों के इस तरह के बँटवारे पर ऑपइंडिया को बताया कि ऐसा वर्ष 2005 से चला आ रहा है। अन्य जिलों की तुलना में पिछड़ा होने के कारण मेवात में इस नियम को लाया गया था और इसे मुख्यधारा में लाने के लिए ‘मेवात विकास अभिकरण’ (एमडीए) को भी अस्तित्व में लाया गया था।
इसके बाद उन्होंने बताया कि अभी उन्हें 250 लड़कियों के लिए D.ED में 5 बैच की मंजूरी मिली थी। पिछले तीन बैच वह तीन साल में चला चुके हैं। अब एक इस वर्ष होगा और फिर एक अगले साल। पाँच बैच पूरे होने के बाद इसे बंद किया जाएगा।
ऑपइंडिया ने जब कर्मचारी से यह जानना चाहा कि यदि 2005 से ये हो रहा है तो सिर्फ़ 5 बैच ही कैसे पूरे हुए? इस पर उन्होंने बताया कि उन्हें बीच-बीच में परमिशन मिलती है। पिछली बार 5 बैच की मिली थी। कभी-कभी सिर्फ 2 बैच या 3 बैच की मंजूरी मिलती है।
उन्होंने बताया कि मेवात विकास बोर्ड की एक बैठक होती है, उसी में यह निर्णय लिया गया था। आखिरी बार बैठक 2017-18 में हुई थी। कर्मचारी ने यह भी जानकारी दी कि आज सीएम खट्टर के साथ भी बैठक चल रही है। आधिकारिक तौर पर रिजर्वेशन का मसला क्या है इसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी ही बता पाएँगे। उन्हें इस सब पर बताने या कहने की परमिशन नहीं है।
क्या है मेवात डेवलपमेंट एजेंसी का उद्देश्य?
यहाँ बता दे कि यदि हम मेवात डेवलपमेंट एजेंसी यानी मेवात विकास अभिकरण, नूँह की वेबसाइट पर जाकर देखेंगे तो इसका उद्देश्य बताते हुए लिखा गया है कि मेवात विकास बोर्ड का उद्देश्य इस क्षेत्र की गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन की स्थितियों को सुधारना और इस क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना है। साथ ही इसका उद्देश्य मेवात क्षेत्र में विकास की गति को तेज करना है ताकि इस क्षेत्र में विकासात्मक योजनाओं को कार्यान्वित किया जा सके।
http://mda.nic.in/en/about-us/objective
अब सवाल इस विज्ञापन के सामने आने के बाद और पिछले दिनों इस इलाके के अल्पसंख्यक आबादी यानी हिन्दुओं पर हुए तमाम अत्याचारों के मद्देनजर उठता है कि अगर वाकई मेवात विकास अभिकरण का उद्देश्य सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करना है तो फिर यहाँ की अल्पसंख्यक आबादी के साथ इतना भेदभाव क्यों? क्या राष्ट्रीय स्तर पर देश की दूसरी बहुल आबादी यहाँ भी प्रशासन के लिए अल्पसंख्यक ही है? क्या क्षेत्र में अल्प आबादी में रह रहे हिंदुओं के शिक्षा का स्तर सुधारना सामाजिक उत्थान की गिनती में नहीं आता?
गौर करने वाली बात यह है कि एक ओर अल्पसंख्यक आबादी के स्थानीय लोग मीडिया चैनलों के सामने स्पष्ट कहते हैं कि वह अपनी बेटियों को बहुल आबादी के ‘डर’ से ज्यादा पढ़ने नहीं देते, ऐसे में दूसरी ओर प्रशासन का ऐसा रवैया उन्हें क्या संदेश देगा? क्या यह सब क्षेत्र के अल्पसंख्यकों को हताश नहीं करेगा? वह कैसे अपने पिछड़ेपन से उभरेंगे?
आज मुस्लिम महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से किसी को कोई दिक्कत नहीं है, कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मेवात में भी मुस्लिमों को ‘अल्पसंख्यक’ कहकर ऐसा भेदभाव अन्य धर्म जाति की महिलाओं को अधिकार से वंचित करता है और मेवात प्रशासन पर सवालिया चिह्न लगाता है।