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500 साल के इंतजार के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर होगा दीपोत्सव, भव्य तैयारियों में जुटी है अयोध्या, देखें तस्वीरें

अयोध्या (Ayodhya) में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के बाद इस बार की दीवाली को और ज्यादा खास बनाने की तैयारी है। आज धनतेरस के अवसर से ही अयोध्या को भव्य तरीके से सजाया गया है। साथ ही साथ 13 नवंबर को होने वाले दीपोत्सव को लेकर अयोध्या में तैयारियाँ भी जोरों पर हैं। राम की पैड़ी पर दीपोत्सव के खास इंतजाम किए जा रहे हैं। यह दीपावली इस कारण भी ऐतिहासिक है क्योंकि 500 साल के इन्तजार के बाद इस धरती पर दीपोत्सव होने जा रहा है।

शुक्रवार, 13 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राम कथा पार्क पर भगवान श्री राम, लक्ष्मण और सीता पुष्पक विमान हेलीकॉप्टर से अयोध्या पहुँचकर दीप प्रज्ज्वलित करेंगे।

आइए देखते हैं दीपवाली के लिए किस तरह सजी है श्रीरामचंद्र की जन्मभूमि अयोध्या –

MP: उपचुनाव के साथ शर्त हारने पर कॉन्ग्रेस नेता ने किया चौराहे पर मुंडन, फेसबुक पर दिया था ‘ओपन चैलेंज’

हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव पूरे हुए और इसी दौरान देश के कई राज्यों में उपचुनाव भी सम्पन्न हुए। उन तमाम राज्यों में एक ऐसा ही राज्य था मध्य प्रदेश, जहाँ की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में 19 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कई दिलचस्प किस्से हुए।

इसी तरह के एक किस्से में कॉन्ग्रेस पार्टी की हार के बाद कॉन्ग्रेस के दो लोगों को अपना मुंडन कराना पड़ गया। इसके पीछे की वजह यह थी कि इन दो लोगों ने एक चैलेंज स्वीकार किया था जिसमें उनकी हार हुई थी, नतीजतन उन्हें अपने सर से बाल उतारकर गंजा होना पड़ा। 

पंजाब केसरी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, घटना मध्य प्रदेश स्थित अशोक नगर की है जिसमें चुनाव से ठीक कुछ दिनों पहले युवा कॉन्ग्रेस जिला महामंत्री हेमंत रघुवंशी ने एक फेसबुक चैलेंज दिया था। जिसमें उन्होंने साफ़ तौर पर कहा था कि अगर उनके क्षेत्र में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी/पार्टी की हार होती है तो वह अपना सिर टकला कर लेंगे।

10 नवंबर को नतीजे आए और उनके लिए नतीजा हैरान कर देने वाला था, कॉन्ग्रेस चुनाव हार गई। बल्कि नतीजों के मुताबिक़ भाजपा ने कुल 28 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें जीती। ऐसे में हेमंत रघुवंशी शहर को तुलसी पार्ट में अपना सर मूडना पड़ा। 

इसके बाद उन्होंने चुनाव परिणामों को लेकर बात भी की, उन्होंने कहा कि उपचुनावों में हमारी (कॉन्ग्रेस) बुरी तरह हार हुई है। इसके लिए पूरी तरह हम कार्यकर्ता ही ज़िम्मेदार हैं, चुनाव के दौरान बने माहौल से हमें ऐसा अनुमान लगा था कि सब हमारे पक्ष में है और हमें जनता का समर्थन मिल रहा है। 

इन तमाम बातों को मद्देनज़र रखते हुए पार्टी के तमाम लोग जीत को लेकर सुनिश्चित थे। अंत में कॉन्ग्रेस नेता हेमंत रघुवंशी ने कहा कि वह अपनी बात पर टिके रहने वाले व्यक्ति हैं इसलिए उन्होंने चौराहे पर अपना मुंडन कराया। हेमंत रघुवंशी के साथ ही साथ उनके साथी नीरज रघुवंशी ने चौराहे पर उनके साथ मुंडन कराया। पिछले एक दो दिनों से यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का कारण बनी हुई थी। मध्य प्रदेश की कुल 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कॉन्ग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था।

पंजीकृत गोशालाओं के रखरखाव के लिए केंद्र सरकार देगी ₹900 करोड़, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सूचना

गोशालाओं के प्रबंधन और गाय के रखरखाव के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। गोशालाओं के समर्थन में केंद्र वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बना रहीं है। मोदी सरकार की नई योजना के तहत पंजीकृत गोशालाओं के लिए 900 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की जाएगी। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल दिल्ली पहुँचे पेजावर मठ के श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी के साथ यह जानकारी साझा की है।

खबरों के मुताबिक, श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी ने अगस्त के महीने में वित्त मंत्री को पत्र लिखकर वित्तीय संकट से जूझ रहे गोशालाओं के रखरखाव के लिए 200 करोड़ रूपए आवंटित करने का आग्रह किया था। कल अपने दिल्ली दौरे के दौरान, स्वामी विश्वप्रसन्न ने सीतारमण को अपने अनुरोध के बारे में याद दिलाया। जिस पर उन्होंने स्वामीजी को सूचित किया कि 900 करोड़ रुपए की राशि पहले ही संबंधित मंत्रालय को ट्रांसफर कर दी गई थी।

वित्त मंत्री ने कहा कि योजना के अनुसार उक्त राशि राज्य सरकारों के माध्यम से पंजीकृत गोशालाओं में बाँटा जाएगा और वित्त मंत्रालय सभी राज्य सरकारों को योजना का विवरण प्रदान करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वित्तीय सहायता गोशालाओं तक पहुँचे। साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि धन वितरण प्रणाली की पारदर्शिता को सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं, गोशालाओं को लेकर सरकार की इस योजना पर खुशी जाहिर करते हुए स्वामीजी ने उडुपी बुनकर सहकारी समिति द्वारा दीपावली उपहार के रूप में सीतारमण को दो हैंडलूम साड़ियाँ भेंट कीं। इसके अलावा उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का प्रसाद और चांदी की थाली में फल भी दिया। गौरतलब है कि इस पूरी बातचीत के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जमीन पर बैठी थी, जबकि स्वामीजी कुर्सी पर विराजमान थे।

गो-सुरक्षा को लेकर सीएम योगी ने अपनाया था सख्त रुख

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोहत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कहीं थी। गौरक्षा को सुनिश्चित करते हुए उन्होंने कहा था, “इस तरह के कृत्य में शामिल लोगको जेल जाएँगे। हम किसी भी कीमत पर गाय की रक्षा करेंगे। सीएम योगी ने कहा कि गौरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है और राज्य सरकार के सहयोग के साथ गोवंश की सुरक्षा के लिए हर जिले में गो-आश्रयों का निर्माण किया जा रहा है।

झारखंड: निकाह का प्रस्ताव ठुकराने पर हजरत खान युवती को चाकू से अधमरा कर फरार, पीड़िता की हालत नाजुक

झारखंड के गढ़वा जिले में हजरत खान ने एक युवती पर चाकू से हमला कर उसे अधमरा सिर्फ इस कारण कर दिया क्योंकि युवती ने हजरत से निकाह करने से मना कर दिया था। हजरत धारदार चाकू लेकर युवती के घर में घुसा और उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। युवती द्वारा निकाह से इनकार करने से नाराज आरोपित हजरत खान उसे जान से मारना चाहता था। युवती की हालत गंभीर बताई जा रही है और वह अस्पताल में भर्ती है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मझियाओ थाना क्षेत्र के लकड़ही की है, जहाँ आरोपित हज़रत कथित तौर पर लंबे समय से युवती पर शादी करने का दबाव बना रहा था। हालाँकि, युवती हज़रत से नहीं बल्कि किसी और से शादी करना चाहती थी। जिससे नाराज हो सिरफिरे हज़रत ने उसे जान से मारने की प्लानिंग की।

प्लानिंग के तहत हज़रत ऐसे समय पर युवती के घर पहुँचा जब उसके माँ-बाप घर पर नहीं थे। हमले के दौरान युवती की चीख सुन घर में मौजूद उसका 10 वर्षीय भाई दौड़ता हुआ उसके पास पहुँचा। बहन को खून से लथपथ देख उसने घर में काम कर रहे मजदूरों को आवाज दी। जिसके बाद गंभीर हालत में युवती को मझियाओ रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लेकिन युवती की बिगड़ती हालत को देखते हुए डॉक्टर ने उसे गरवा अस्पताल शिफ्ट कर दिया। और बाद में राँची रेफर किया गया। पुलिस ने मामले में पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है। साथ ही मामले की जाँच पड़ताल में जुट गई है। आरोपित हजरत की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

युवती ने पूछताछ में बताया कि फरीद खान का बेटा हजरत खान उस पर निकाह करने के लिए दबाव बना रहा था और इनकार करने पर उसने धारदार हथियार से हमला कर घायल कर दिया और फरार हो गया।

इमरान खान सरकार वोट नहीं बूट के लायक, ये चुनावों में कर सकते हैं गड़बड़ी: मरयम नवाज

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष और नवाज शरीफ की बेटी मरयम नवाज (Maryam Nawaz) ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ पर निशाना साधा है। गुलाम कश्मीर में चुनाव से पहले होने वाली सभाओं में सरकार पर हमलावर होते हुए मरयम नवाज ने कहा, “इमरान सरकार को वोट की जरूरत नहीं, वह बूट के लायक है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, गिलगिट-बाल्टिस्तान के नगर में उन्होंने कहा कि इमरान सरकार उनकी पार्टी के प्रमुख नवाज शरीफ के कार्यकाल में हुए कामों का श्रेय लेना चाहती है और इमरान खान सरकार उन्हें अपना बताकर जनता में भ्रम पैदा कर रही है।

मरयम नवाज ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव की गड़बड़ियों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि पीटीआई सरकार के मंत्री यहाँ पर चुनावों में गड़बड़ी करना चाहते हैं। उनके इरादों को सफल नहीं होने देना है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव में मतों की पहरेदारी करने का आग्रह भी किया।

पीएमएल-एन नेता मरयम नवाज ने आगे कहा की इस चुनाव में जनता को उनके कारनामों का जवाब देना है। वहीं, इस मामले में उन्होंने चुनाव आयोग को भी संदेश देते हुए कहा कि वे पीएमएल-एन पार्टी और जनता के वोट के बीच में न आएँ। और यदि वोटों की चोरी होती है तो जनता उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कठिन समय में पार्टी छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं को लताड़ते हुए यह भी कहा कि अब पार्टी में उनके लिए कोई जगह नहीं है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने हाल ही में घोषणा की थी कि 15 नवंबर को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए चुनाव होंगे। इमरान खान सरकार ने पहले इस क्षेत्र को अंतरिम प्रांत का दर्जा देने की घोषणा की थी, जिसका लोगों ने जमकर विरोध किया था।

इससे पहले एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मरयम ने कहा किइमरान खान को अब घर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए, फर्जी शासकों के दिन पूरे हो चुके हैं और इन्हें सबसे बड़ा झटका 15 नवंबर को लगेगा।

राष्ट्रहित पर राष्ट्र के साथ होनी चाहिए हमारी विचारधारा, राष्ट्र के खिलाफ नहीं- JNU में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण पर PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार (12 नवंबर 2020) को जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा से भी तीन फीट ऊँची बनाई गई है। इस दौरान शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल, जेएनयू के कुलपति, प्राध्यापक और छात्र मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान कई अहम बातें कहीं, उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के विचारों से की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े कई किस्से भी बताए।  

उन्होंने बताया कि हर विचारधारा को देश के साथ जाना चाहिए, खिलाफ नहीं। इसके अलावा उन्होंने आपातकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अन्य विचारधाराओं के लोगों ने एक साथ आकर एकजुटता दिखाई थी। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जेएनयू परिसर में लगी स्वामी विवेकानंद की यह मूर्ति देश के युवाओं को लोगों को कितने विविध पहलुओं को लेकर प्रेरित करेगी। 

अपने भाषण की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “मैं प्रारम्भ में एक नारा बोलने का आग्रह करूँगा, मैं कहूँगा स्वामी विवेकानंद और आप कहेंगे अमर रहें, अमर रहें।” इसके बाद उन्होंने कहा, “उपनिवेशवाद के दौर में जब देश के लोगों पर अत्याचार होता था तब स्वामी विवेकानंद मिशिगन यूनिवर्सिटी गए थे। लगभग पिछली सदी में अंत में जब स्वामी जी वहाँ गए तो उन्होंने कहा कि यह शताब्दी भले आपकी है लेकिन सदी भारत की होगी। हमारे लिए बेहद ज़रूरी है कि हम स्वामी विवेकानंद की इस बात और उनकी दृष्टि को समझें।” 

इसके बाद युवाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि जेएनयू परिसर में स्वामी विवेकानंद की यह मूर्ति युवाओं को प्रेरणा और ऊर्जा देगी। मैं यह भी आशा करता हूँ कि मूर्ति लोगों में वह साहस और उत्साह भरे जिसकी स्वामी विवेकानंद उम्मीद करते थे। उम्मीद है कि यह प्रतिमा लोगों को देश के प्रति स्नेह और त्याग सिखाएगी और यही स्वामी विवेकानंद का सर्वश्रेष्ठ संदेश था। यह प्रतिमा लोगों में ज़रूर एकता का भाव लेकर आएगी। 

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अनेक अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:

“देश का युवा दुनियाभर में ब्रांड इंडिया (Brand India) का ब्रांड एम्बेसडर (Brand Ambassador) है। देश के युवा भारत के संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। आपसे अपेक्षा सिर्फ हज़ारों वर्षों से चली आ रही भारत की पहचान पर गर्व करने भर की ही नहीं है बल्कि 21वीं सदी में भारत की नई पहचान गढ़ने की भी है।”

“आप से (युवा और आम नागरिक) बेहतर ये कौन जानता है कि भारत में बदलावों (Reforms) को लेकर क्या बातें होती थीं। क्या भारत में अच्छे बदलावों को गंदी राजनीति नहीं माना जाता था? तो फिर अच्छे बदलाव, अच्छी राजनीति कैसे हो गए? इसको लेकर आप जेएनयू के साथी ज़रूर शोध करें। “

“आज तंत्र में जितने बदलाव किए जा रहे हैं, उनके पीछे भारत को हर प्रकार से बेहतर बनाने का संकल्प है। आज हो रहे बदलाव के साथ नीयत और निष्ठा पवित्र है। आज जो बदलाव किए जा रहे हैं, उससे पहले एक सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। इस कवच का सबसे बड़ा आधार है-विश्वास। “

“हमारे यहाँ लंबे समय तक गरीब को सिर्फ नारों में ही रखा गया। लेकिन देश के गरीब को कभी तंत्र से जोड़ने का प्रयास ही नहीं हुआ।”

“अब गरीबों को अपना पक्का घर, टॉयलेट, बिजली, गैस, साफ पीने का पानी, डिजिटल बैंकिंग, सस्ती मोबाइल कनेक्टिविटी और तेज़ इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा मिल रही है। यह गरीब के इर्द-गिर्द बुना गया वो सुरक्षा कवच है, जो असल में उसकी आकांक्षाओं की उड़ान के लिए ज़रूरी है।”

“आज हर कोई अपनी विचारधारा पर गर्व करता है, यह स्वाभाविक भी है। फिर भी, हमारी विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में, राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए, राष्ट्र के खिलाफ नहीं।”

“देश के इतिहास में देखिए, जब-जब देश के सामने कोई कठिन समय आया है, हर विचार हर विचारधारा के लोग राष्ट्रहित में एक साथ आए हैं।”

“आपातकाल के दौरान भी देश ने यही एकजुटता देखी थी। आपातकाल के खिलाफ उस आंदोलन में काँग्रेस के पूर्व नेता और कार्यकर्ता भी थे। आरएसएस के स्वयंसेवक और जनसंघ के लोग भी थे, समाजवादी लोग भी थे और वामपंथी भी थे।”

“इस एकजुटता में और इस लड़ाई में भी किसी को अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करना पड़ा था। बस उद्देश्य एक ही था- राष्ट्रहित इसलिए साथियों, जब राष्ट्र की एकता अखंडता और राष्ट्रहित का प्रश्न हो तो अपनी विचारधारा के बोझ तले दबकर फैसला लेने से, देश का नुकसान ही होता है।”

“विचार साझाकरण (Idea sharing) को, नए विचारों के प्रवाह को अविरल बनाए रखना है। हमारा देश वह भूमि है जहाँ अलग-अलग बौद्धिक विचारों के बीज अंकुरित होते रहे हैं और फलते फूलते भी हैं। इस परंपरा को मजबूत करना युवाओं के लिए आवश्यक है। इसी परंपरा के कारण भारत दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र है।”

बता दें कि स्वामी विवेकानंद की मूर्ति जेएनयू के कुछ पूर्व छात्रों के समर्थन से स्थापित की गई है। कुछ समय पहले दिल्ली की सड़कों को जाम करने के बाद यहाँ के कुछ वामपंथी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को अपना निशाना बनाया था। इसी नई स्थापित मूर्ति को बदरंग करते हुए उसके पेडेस्टल पर माओवंशियों ने अपशब्द लिखे थे। “भगवा जलेगा”, “Fu&k BJP” आदि को लाल रंग के पेंट से लिखकर पेडेस्टल को क्षतिग्रस्त किया गया था।   

‘उद्धव ठाकरे ने बोल दिया तो चर्चा की जरूरत नहीं’: BJP नेता ने ऑडियो शेयर कर लगाए शिवसेना MLA पर कांट्रेक्टर को धमकाने के आरोप

भाजपा नेता नीलेश राणे ने ट्विटर पर उद्धव ठाकरे और उनके नेताओं के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता ने ऑडियो टेप शेयर करते हुए एक शिवसेना विधायक पर आरोप लगाया कि उन्होंने कॉन्ट्रैक्टर को हाईवे पर काम रोकने के लिए फोन पर धमकाया

निलेश राणे ने ऑडियो शेयर करते हुए लिखा, “शिवसेना उसी हाईवे के ठेकेदारों को धमकी देकर पैसे वसूलने का काम कर रही है, जिस पर उन्होंने एक बार कड़ी आपत्ति जताई थी। शिवसेना का फॉर्मूला है कि पहले परियोजनाओं का विरोध करें और फिर उन्हीं परियोजनाओं के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर लें।”

भाजपा नेता नीलेश राणे द्वारा साझा किए गए ऑडियो टेप में, कथित तौर पर शिवसेना विधायक और उनके सहयोगी को एक ठेकेदार को धमकी देते हुए सुना जा सकता है। कॉल सुन कर ऐसा लग रहा है जैसे शिवसेना नेत्री और उनके साथी कॉन्फ्रेंस कॉल पर एक साथ कॉन्ट्रैक्टर से बात करते हुए उसे हाईवे का काम रोकने को कह रहे हों।

हालाँकि, कॉन्ट्रैक्टर ने धमकी के बावजूद विधायक की बात को मानने से इंकार कर दिया और खुद को बचाने के लिए कहा कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट कंपनी द्वारा मिला है। काम रोकने के लिए उन्हें निर्देश की जरूरत होगी।

इसके बाद शिवसेना विधायक ने काम रुकवाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नाम लिया और दावा किया कि उन्होंने ही व्यक्तिगत रूप से विधायक से इस काम को रुकवाने के लिए कहा है। मगर, कॉन्ट्रैक्टर तब भी झांसे में नहीं आया। उसने शिवसेना विधायक को अगले दिन इस मामले पर दफ्तर में आकर बात करने को कहा।

ये सुन विधायक बोलीं कि इसमें चर्चा की क्या जरूरत? उद्धव ठाकरे ने कह दिया वही अंतिम और अनिवार्य है। मुख्यमंत्री फाइनल अथॉरिटी है, कोई कंपनी उनके निर्णय के आगे कुछ नहीं कहेगी। इसके बाद उनके साथी ने कॉन्ट्रैक्टर से कहा, “हम शिवसैनिकों को भेजेंगे तुमसे बात करने के लिए। फिर देखेंगे कि कैसे तुम कैसे नहीं मानोगे।”

बीजेपी नेता नीलेश राणे ने इस ऑडियो को शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि यह उद्धव ठाकरे सरकार का मानक तरीका है, इसमें वे पहले निर्माण का विरोध करते हैं और फिर उसके लिए ठेका देते हैं।

बता दें कि ऑपइंडिया ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज की पुष्टि नहीं करता कि ये शिवसेना विधायक या उनके साथी में से किसी की है या इस मामले में पैसे की लेन-देन शामिल है। लेकिन कॉल पर बात कर रहे लोगों को यह कहते साफ सुना जा सकता है कि उद्धव ठाकरे का निर्णय आखिरी और अनिवार्य है। इसके अलावा शिवसैनिक भेजने की बात भी ऑडियो में सुनी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि ठाकरे सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगातार उन पर आम नागरिकों को निशाना बनाने के इल्जाम लग रहे हैं। इससे पहले शिवसैनिकों ने सोशल मीडिया पोस्ट के ऊपर कुछ आम नागरिकों पर हमला किया था। एक पूर्व नेवी अधिकारी मदन शर्मा को सितंबर में शिवसैनिकों द्वारा बुरी तरह पीटा गया था। इसके बाद कंगना रनौत तक के घर पर बीएमसी द्वारा बुल्डोजर चलावाया गया था।

प्रदूषण पर गोवा को सलाह दे रहे केजरीवाल को CM सावंत का संदेश- आपके विवादित स्वभाव की वजह से हम आपकी राय नजरअंदाज करते हैं

तमाम वामपंथी गैर सरकारी संगठनों और समाचारों समूहों ने गोवा के तीन महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को निशाना बनाया है। आरोप है कि इन परियोजनाओं से वन्य जीव (वाइल्ड लाइफ) को नुकसान पहुँचेगा। यह तीन परियोजनाएँ कुछ इस प्रकार हैं: राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 4-ए को चौड़ा करना, ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण और वर्तमान रेलवे लाइन को दोहरा करना। जिसका विरोध कि तमाम सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं।

आरोपों के अनुसार, इन परियोजनाओं के चलते भगवान महावीर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और मल्लेम स्थित नेशनल पार्क का वन्य जनजीवन प्रभावित होगा। विरोध की इस हवा में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी छलांग लगा चुके हैं। नतीजतन गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके बीच वाद-विवाद भी देखने को मिला।

इस प्रकरण की शुरुआत हुई 9 नवंबर को, जब अरविन्द केजरीवाल ने गोवा में पर्यावरण और वन्य जीव की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों को सराहा। इसके साथ ही साथ, केजरीवाल ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज की गई प्राथमिकी के लिए गोवा सरकार की निंदा भी की। केजरीवाल ने प्रमोद सावंत की अगुवाई में गोवा में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जनता के विरोध को दबाने का आरोप लगाया था।

केजरीवाल द्वारा की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने समाचार समूहों के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि गोवा की चिंता करने से पहले अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की स्थिति सुधार लेनी चाहिए। 

इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने गोवा न्यूज़ हब के ट्वीट का उल्लेख करते हुए गोवा के मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह ‘दिल्ली के प्रदूषण बनाम गोवा के प्रदूषण’ के संबंध में नहीं है। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना होगा कि दिल्ली या गोवा कहीं भी प्रदूषण नहीं हो। 

प्रमोद सावंत इस बात से सहमत नज़र आए और उन्होंने कहा कि गोवा की सरकार राज्य में प्रदूषण को समाप्त करने के लिए लगातार कार्यरत है। लेकिन अपनी चतुराई का प्रदर्शन करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इस जवाब का इस्तेमाल करते हुए गोवा के मुख्यमंत्री कहा कि वह प्रदर्शनकारियों की आवाज़ सुनें। फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जानते हैं केंद्र गोवा पर परियोजनाएँ थोप रहा है, उन्हें (प्रमोद सावंत) को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से असहमति जतानी चाहिए और गोवा को कोयले का हब (गढ़) बनने से रोकना चाहिए। 

इसके बाद प्रमोद सावंत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में रेलवे लाइनों को दोहरा किया जा रहा है और इस परियोजना से मोल्लेम को कोई ख़तरा नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि गोवा कोयले का हब नहीं बनेगा। इसके अलावा उन्होंने केंद्र और गोवा सरकार के बीच तनाव पैदा करने का प्रयास करने की बात पर केजरीवाल को तार्किक ढंग से घेरा। उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य के बीच विवाद पैदा करने पर आपकी कुशलता के बारे में हम बखूबी जानते हैं इसलिए हम आपकी सलाह को नज़रअंदाज़ करते हैं।”

लेकिन अरविन्द केजरीवाल की बात ही निराली है, वह लगातार निवेदन करते रहे कि केंद्र सरकार गोवा पर यह परियोजना थोपना चाहती है। गोवा की सरकार को इसका विरोध करना चाहिए। 

दिल्ली का अनियंत्रित प्रदूषण

अरविन्द केजरीवाल ने भले ही गोवा सरकार को सुझावों का एक लंबा पुलिंदा दे दिया हो लेकिन इस बीच वह दिल्ली के पर्यावरण के हालात भूल गए। जिसकी स्थिति सुधारने में वह लगभग नाकामयाब रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में इस वर्ष बेहिसाब प्रदूषण है लेकिन दिल्ली की सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह असफल साबित हुई है। जबकि यह बात सभी जानते थे कि साल के इस वक्त में दिल्ली के भीतर प्रदूषण की मात्रा कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। 

अरविन्द केजरीवाल ने दावा किया था कि पराली जलाना वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण था और वह इस बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह पडोसी राज्यों में किया जाता है। कुल मिला कर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपनी निष्क्रियता और लापरवाही के लिए अन्य मुख्यमंत्रियों को दोषी ठहरा दिया और प्रदूषण के तमाम अहम कारणों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। 

इतना ही नहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री का पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भी इस मुद्दे पर वाद विवाद हो चुका है। इस मुद्दे पर पर्यावरण मंत्री का कहना था कि दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी सिर्फ 4 फ़ीसदी है। जिस पर केजरीवाल ने कहा था कि नकारने से इस समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, फिर उन्होंने दावा किया कि पराली ही दिल्ली के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। आईआईटी कानपुर द्वारा साल 2015 में किए गए एक शोध के अनुसार दिल्ली के 70 फ़ीसदी प्रदूषण का कारण, स्थानीय स्रोत हैं। जिसमें सड़क की धूल, वाहन और घरेलू स्रोत मुख्य रूप से शामिल हैं। यानी केजरीवाल के दावे के अनुसार सिर्फ पराली जलाना दिल्ली के प्रदूषण का एकमात्र सबसे बड़ा कारण नहीं है। 

मूल समस्या का उल्लेख और उसे स्वीकार नहीं करने की वजह से दिल्ली की सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदूषण पर नियंत्रण करने में असफल रही है। दिल्ली की सरकार ने अक्टूबर में ‘ग्रीन वॉर रूम’ इओन (ion) की शुरुआत की थी जिसके तहत तमाम निर्देश जारी किए गए थे। जिसमें सैटेलाइट तस्वीरें, धूल ख़त्म करने के लिए ड्राइव, अलग अलग क्षेत्रों में एंटी स्मोग गन लगाना, दिल्ली में प्रदूषण के 13 हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों के लिए एक्यूआई (AQI) समेत अन्य कई निर्देश। लेकिन इनमें से कोई भी निर्देश प्रभावी साबित नहीं हुआ बल्कि राजधानी के कई क्षेत्रों का एक्यूआई स्तर लगभग 999 रहा जो कि डिवाइस द्वारा मापी जाने वाली सबसे अधिक रीडिंग है। सरल शब्दों में कहें तो दिल्ली का प्रदूषण स्तर इतना है, जितना मशीन की माप से भी ज़्यादा है। 

पटाखों पर प्रतिबंध लगाने और ग्रीन पटाखों का संग्रह करने वालों को गिरफ्तार करने के अलावा (दिल्ली सरकार द्वारा इसके लिए लाइसेंस जारी किए जाने के बाद) प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केजरीवाल सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इतना ही नहीं केजरीवाल ने प्रदूषण के मुद्दे पर गोवा के मुख्यमंत्री से बहस कर ली लेकिन अपने पड़ोसी राज्य पंजाब को पराली जलाने से रोकने के लिए मना नहीं कर पाए जो उनके मुताबिक़ प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। यह बात भी आम लोगों की समझ के दायरे से बाहर है कि पता नहीं कैसे केजरीवाल ने गोवा सरकार के साथ प्रदूषण का सामना करने का प्रस्ताव रख दिया। जो दिल्ली से लगभग 2000 किलोमीटर दूर स्थित है और वहाँ की जलवायु और पर्यावरण कितना अलग है। 

दोहरा करने की परियोजना को लेकर झूठ 

इस परियोजना के तहत कर्नाटक के होसपेट और गोवा के वास्कोडिगामा के बीच रेलवे लाइन को दोहरा किया जाएगा। कुल 342 किलोमीटर की रेलवे लाइन में 252 किलोमीटर रेलवे लाइन का काम पूरा हो चुका है, बचे हुए 90 किलोमीटर में लगभग 70 किलोमीटर गोवा में आता है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की ज़रूरत तब महसूस हुई जब यह बात सामने आई कि 24 कोच की लंबाई वाली पैसेंजर ट्रेन को प्लेटफॉर्म की लंबाई और अन्य पहलुओं की वजह से शुरु नहीं किया जा सकता था। 

तमाम कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इस परियोजना का तमाम पर्यावरण संबंधी कारणों की वजह से विरोध किया। जिसमें नेशनल पार्क को हानि, पुरानी इमारतों को नुकसान, कोयले के आवागमन की वजह से पर्यावरण की हानि। ऐसा भी दावा किया जाता है कि उच्च न्यायालय ने इस परियोजना पर रोक लगाई है और परियोजना को रोकने के लिए रेलवे बोर्ड की तरफ से भी आदेश जारी किया गया था। एक और दावे के अनुसार रेलवे ने इस परियोजना के लिए ग्रामीण प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। 

इसके बाद रेलवे के आईआईएससी, बेंगलुरु की मदद से एक सर्वेक्षण (एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट) कराया। देश का एक ऐसा प्रतिष्ठित संस्थान जो वन विभाग और पर्यवारण मंत्रालय से जुड़ी चीज़ों का विश्लेषण और निगरानी रखता है। उस क्षेत्र में पशुओं की ‘सेफ क्रासिंग’ के लिए 5 नए अंडरपास, 3 नए ओवरपास बनाए जाने की योजना तैयार की गई है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि किसी भी परम्परागत इमारत ट्रैक को दोहरा करने की परियोजना के दौरान नहीं तोड़ा जाएगा। 

इसके अलावा सरकार कोयले के निर्यात पर भी रोक लगाएगी, इसका मतलब रेलवे ट्रैक पर कोयले का आवागमन बढाया नहीं जाएगा। रेलवे ने यह बताया है, ‘हाईकोर्ट ने परियोजना पर रोक लगाई है’ यह बात झूठी है क्योंकि इस मसले पर अभी भी सुनवाई होनी है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किए गए आदेश की बात भी पूरी तरह झूठ है। मंत्रालय के मुताबिक़ क़ानूनी तौर पर अगर रेलवे की ज़मीन पर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी स्थानीय प्रशासन की ज़रूरत नहीं पड़ती है।                                    

‘लेह पर 5 दिन के भीतर जबाव दो’ – भारत के नक्शे से खिलवाड़ पर फँसा ट्विटर, मंत्रालय ने भेजा नोटिस

भारत के आईटी मंत्रालय ने लेह के केंद्र शासित प्रदेश के बजाय जम्मू और कश्मीर का हिस्सा दिखाने के लिए ट्विटर के ग्लोबल वाइस प्रेजिडेंट को बृहस्पतिवार (नवम्बर 12, 2020) को नोटिस भेजा है। नोटिस के अनुसार, ट्विटर को अगले 5 दिनों में समझाने का निर्देश दिया गया है कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए?

इस नोटिस के बाद जिन संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई हैं उनमें से एक यह भी है कि आईटी एक्ट 69 ए के तहत भारत में ट्विटर को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसके अलावा, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जा सकती है, जिसके तहत 6 महीने तक की जेल की सजा का प्रावधान है।

पिछले महीने, सरकार ने ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी को एक पत्र लिखा था, जिसमें लेह की गलत जानकारी देने पर ‘निराशा और नाराजगी’ व्यक्त की गई थी। सरकार के संज्ञान में आते ही इस पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी कि ट्विटर ने लेह की भू-स्थिति को जम्मू-कश्मीर, ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के हिस्से के रूप में दिखाया था।

मंत्रालय की ओर से पहले भेजे गए पत्र के जवाब में, ट्विटर ने मैप के स्थान से ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ का जिक्र हटा दिया था, लेकिन लेह के केंद्रशासित प्रदेश के हिस्से के रूप में लेह को दिखाने के लिए ट्विटर ने अभी तक नक्शे को सही नहीं किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि यह अभी भी जम्मू और कश्मीर के हिस्से के रूप में लेह दिखा रहा है, जो भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति के खिलाफ है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में ट्विटर ने लेह की ‘जियो लोकेशन’ जम्मू कश्मीर, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना में दिखाई थी। सूत्रों के अनुसार सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव अजय साव्हने ने ट्विटर को इस सम्बन्ध में एक पत्र लिखा था कि लेह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का मुख्यालय है। इसके अलावा लद्दाख और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह भारतीय संविधान के अंतर्गत आता है। लिहाज़ा जिस प्रकार का मानचित्र ट्विटर ने पेश किया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य और आपत्तिजनक है।

‘SC जज शैम्पेन पिला रहे, सर्वोच्च न्यायालय सबसे बड़ा मजाक’ – कुणाल कामरा पर चलेगा केस, अटॉर्नी जनरल की मंजूरी

अर्णब गोस्वामी की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर आई कुणाल कामरा की टिप्पणी पर कोर्ट में अब अवमानना का केस चलेगा। यह जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट करके दी है। उन्होंने बताया है कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कुणाल कामरा के आपत्तिजनक ट्वीट पर अवमानना का केस चलाने की मंजूरी दे दी है।

उन्होंने यह मंजूरी देते हुए लिखा, “लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”

कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए अपनी मंजूरी देते हुए उन्होंने लिखा कि कामरा के ट्वीट देखे हैं, जो बहुत आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कुछ ट्विट्स का जिक्र करते हुए लिखा कि ये न केवल खराब हैं बल्कि व्यंग्य की सीमा लाँघ रहे हैं और कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं।

अपने पत्र में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कुणाल कामरा के जिन ट्विट्स का जिक्र किया, उनमें से एक यह था, “देश का सर्वोच्च न्यायालय देश का सबसे बड़ा मजाक है।” एक अन्य ट्वीट, “सम्मान पहले ही इमारत (सुप्रीम कोर्ट) को छोड़ कर चला गया है।”

इसी तरह अर्णब के रिहा होने के बाद कामरा ने लिखा था, “जिस गति से सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को ऑपरेट करती है। यह समय है कि महात्मा गाँधी के फोटो को हरीश साल्वे के फोटो से बदला जाए।”

एक अन्य ट्वीट में कामरा ने लिखा, “डीवाई चंद्रचूड़ एक फ्लाईट अटेंडेंट हैं, जो प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैम्पेन ऑफर कर रहे हैं क्योंकि वो फास्ट ट्रैक्ड हैं। जबकि सामान्य लोगों को यह भी नहीं पता कि वो कभी चढ़ या बैठ भी पाएँगे, सर्व होने की तो बात ही नहीं है।”

बता दें कि इन ट्विट्स के बाद वकील रिजवान सिद्दकी समेत दो वकीलों ने देश के अटॉर्नी जनरल को आवेदन पत्र लिख कर स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ न्यायालय की अवमानना पर आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की सहमति देने को कहा था।