Home Blog Page 432

मैंने एक शमाँ जलाई है हवाओं के खिलाफ… किरेन रिजिजू ने बताया कैसे जनजातीय संपत्ति का संरक्षण करेगा नया वक़्फ़ बिल, केरल के 600 ईसाई परिवारों की दिलाई याद

लोकसभा में बुधवार (2 अप्रैल, 2025) में वक़्फ़ बिल को पेश करते हुए इस तर्क पर सवाल खड़ा किया कि वक़्फ़ बोर्ड में ग़ैर-मुस्लिम कैसे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इस सवाल पर भी सवाल उठाया कि सरकार मस्जिदें छीन लेंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम सब किसी न किसी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश से आते हैं, लेकिन सब भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को अधिकार दिए गए हैं कि जो संपत्ति पंजीकृत है, उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो विवादित संपत्तियाँ हैं और अदालत में पेंडिंग हैं, उनमें सरकार कैसे हस्तक्षेप कर सकती है?

इसी तरह, उन्होंने याद दिलाया कि कैसे CAA बिल के समय कुछ लोगों ने कहा था कि इसके लागू होने से मुस्लिमों की नागरिकता चली जाएगी, आज ये क़ानून लागू है लेकिन ग़लत साबित होने के बावजूद ऐसी बातें करने वालों ने माफ़ी नहीं माँगी। उन्होंने कहा कि कोई भी मुस्लिम जब वक़्फ़ क्रिएट करता है तो उस परिवार में महिला का अधिकार सुनिश्चित करने के बाद ही वो ऐसा करेगा। उसी प्रॉपर्टी पर वक़्फ़ क्रिकेट किया जा सकता है जिसमें शत-प्रतिशत हिस्सा हो, महिलाओं-बच्चों का अधिकार नहीं छीना जा सकता है।

किरेन रिजिजू ने कहा कि समाज में महिलाओं को दबाने का काम करने वाले यहाँ जोर-जोर से बोल रहे हैं। उन्होंने बताया कि JPC का सुझाव मानते हुए कलक्टर के ऊपर के अधिकारियों को विवादित वक़्फ़ संपत्ति के मामले में जाँच का अधिकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किया गया है कि अनुसूचित जनजाति की संपत्तियों में वक़्फ़ संपत्तियाँ क्रिएट नहीं की जा सकेंगी। वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अब कोर्ट भी जाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी जमीन को वक़्फ़ संपत्ति घोषित करने वाले प्रावधान को हटा दिया गया है। जमीन हड़पने के लिए इस प्रावधान का ग़लत इस्तेमाल किया गया।

किरेन रिजिजू ने कहा कि आज पूरे देश का ईसाई समुदाय और चर्चों के लोग आज कह रहे हैं कि वक़्फ़ संशोधन बिल जल्दी पारित हो, क्योंकि इसके सेक्शन-40 का दुरूपयोग होता था। उन्होंने इस दौरान विपक्षी दलों को याद दिलाया कि इस बिल का विरोध करने पर उन्हें केरल के ईसाईयों का विरोध झेलना पड़ेगा। उन्होंने तमिलनाडु के तिरुचांदुराई स्थित 1500 वर्ष पुराने मंदिर को और यमुनानगर में स्थित एक गुरुद्वारे के अलावा केरल में 600 ईसाई परिवारों की जमीनों को वक़्फ़ संपत्ति घोषित किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें अब जमीन वापस मिल जाएगी।

किरेन रिजिजू ने कहा कि अब भी मौका है, विपक्षी दल इस वक़्फ़ बिल का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जैसे एक साधारण व्यक्ति को इस पुण्यकार्य का मौका दिया है, करोड़ों ग़रीब उन्हें दुआ देने वाले हैं। उन्होंने अपील की कि सब इस दुआ में शामिल हों, ये दुआ उन्हें अकेले क्यों मिले। उन्होंने अंत में एक शेर के साथ अपनी बात खत्म की:

मेरी हिम्मत को तो सराहो, मेरे हमराही बनो
मैंने एक शमाँ जलाई है हवाओं के ख़िलाफ़

मजहब से नहीं है वक़्फ़ बोर्ड का कोई सरोकार, किरेन रिजिजू ने सदन में गिनाए 3 उदाहरण: अब महिलाएँ भी बनेंगी वक़्फ़ बोर्ड का हिस्सा, ग़ैर-मुस्लिम भी

अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने वक़्फ़ बिल पर चर्चा के दौरान संसद में कहा कि वक़्फ़ का मामला संपत्ति का है, इन संपत्तियों का प्रबंधन मुतव्वली करते हैं। उन्होंने इस दौरान सदन में 3 मामलों का जिक्र किया, ताकि समझा सकें कि वक़्फ़ का मजहब से कोई लेना-देना नहीं है।

पहला, सैयद फजल पूकोया थंगल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया। इसमें केरल हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि वक़्फ़ बोर्ड एक नियामक संस्था है, ये मुस्लिमों की प्रतिनिधि संस्था नहीं है। दूसरा, हाफिज ज़फर अहमद बनाम यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि वक़्फ़ बोर्ड का काम सिर्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन है, मुनव्वलियों के कामकाज की प्रकृति सेक्युलर है, मजहबी नहीं। तीसरा, तिलकायत श्री गोविंदलाल जी महाराज बनाम राजस्थान सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार सेक्युलर मामला है, धार्मिक नहीं।

किरेन रिजिजू ने 2014 में हुए संशोधन की बात करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले 123 संपत्तियों को दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया। ये सरकारी संपत्ति थी। उन्होंने कहा कि लोग समझदार हैं, ऐसे काम करने से वोट नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि 1995 में जो प्रावधान नहीं थे, उन्हें 2013 में जोड़ा गया था। इसमें बताया गया है कि वक़्फ़ बोर्ड को जमीन वही व्यक्ति दान कर सकता है, जिसने कम से कम 5 वर्ष इस्लाम की प्रैक्टिस की हो। वक़्फ़ बोर्ड में सब शिया, सुन्नी, बोहरा और पिछड़े मुस्लिम भी रहेंगे, महिलाएँ भी रहेंगी। इसमें मुस्लिम विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘सेन्ट्रल वक़्फ़ काउंसिल’ में 4 ग़ैर-मुस्लिम सदस्य रह सकते हैं और 2 महिलाएँ होनी ही चाहिए। साथ ही किसी भी धर्म/मजहब के 3 सांसद इसमें रहेंगे। इसके अलावा 10 सदस्य मुस्लिम समिति से होंगे, इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के 2 पूर्व जज रहेंगे। एक वकील भी रहेगा। 4 प्रतिष्ठित लोग विभिन्न क्षेत्रों से रहेंगे। एक अधिकारी भी रहेंगे। 10 मुस्लिम सदस्यों में ही 2 महिलाएँ रहेंगी।

किरेन रिजिजू ने बताया कि वक़्फ़ बोर्ड में जो प्रावधान ज़रूरी नहीं थे, उन्हें देश के क़ानून के हिसाब से कर दिया गया है। किरेन रिजिजू ने इस आँकड़े की भी चर्चा की, जिसमें बताया गया है कि रेलवे और डिफेन्स के बाद सबसे अधिक जमीनें वक़्फ़ बोर्ड की है। उन्होंने बताया कि रेलवे की संपत्तियाँ देश की संपत्ति है, इसी तरह डिफेन्स की संपत्ति भी देश की है। वहीं उन्होंने कहा कि वक़्फ़ की प्रॉपर्टी प्राइवेट होती है, दुनिया में सबसे अधिक वक़्फ़ संपत्ति भारत में है।

उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बावजूद देश के मुस्लिम ग़रीब क्यों है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार दलित मुस्लिमों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चंद वोटों और सत्ता के लिए मुस्लिमों को गुमराह किया जा रहा है। किरेन रिजिजू ने कहा कि 2006 में 4.90 लाख वक़्फ़ संपत्तियाँ थीं, जिसकी आय थी 163 करोड़ रुपए। 2013 में बदलाव के बाद भी मात्र 3 करोड़ रुपए ही आय बढ़ी है। उन्होंने आगे कहा कि सच्चर कमिटी ने भी कहा है कि अच्छे से प्रबंधन होता तो उसी वक़्त वक़्फ़ प्रॉपर्टी से 12,000 करोड़ रुपए का राजस्व आता। किरेन रिजिजू ने कहा कि सोचिए इससे कितने मुस्लिमों को फ़ायदा होता। आज कुल वक़्फ़ संपत्तियाँ 8.72 लाख वक़्फ़ संपत्तियाँ हो गई हैं।

‘सुकांत सुरेश ने बेटी का किया यौन उत्पीड़न, ले लिए ₹3.5 लाख’: महिला IB अधिकारी की मौत पर पिता ने सहकर्मी पर लगाए आरोप, कहा- सारा वेतन ले लेता था

तिरुवनंतपुरम में आईबी अधिकारी सुलेखा (बदला हुआ नाम) की आत्महत्या के मामले में परिवार ने उनके दोस्त सुकांत सुरेश का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि सुकांत के यौन उत्पीड़न के बाद सुलेखा ने आत्महत्या कर ली थी। सुकांत उसी के साथ काम करता था। उसके बारे में मृतका ने अपनी माँ को बताया था।

पिता ने बताया कि पिछले साल राजस्थान में ट्रेनिंग के दौरान दोनों का रिश्ता शुरू हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार का आरोप है कि सुकांत सुरेश का उनकी बेटी की आत्महत्या में बड़ा हाथ है। मृतक के पिता ने कहा, “सुकांत ने मेरी बेटी से धोखे से 3.5 लाख रुपए लिए थे। उसकी मौत के बाद हमने उसके बैंक ट्रांजैक्शन जाँच की तो पता चला कि वह अपनी सैलरी सुकांत को भेजती थी।”

पिता ने आगे कहा, “पेट्टा पुलिस को हमने फोन रिकॉर्ड्स के साथ बेटी के बैग से मिले अन्य सुबूत भी दे दिए हैं। सुकांत को एक लुकआऊट नोटिस जारी किया गया है, ताकि वह देश छोड़ कर भाग न सके। पुलिस ने भी हमें बताया है कि मेघा की आत्महत्या में उसकी भूमिका नजर आ रही है, जिस पर वे जाँच कर रहे हैं।”

बता दें कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में मृतका की लाश 24 मार्च 2025 की सुबह रेलवे ट्रैक पर मिली थी। वह आठ महीने पहले ही तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन डिपार्टमेंट में आई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतका सुबह सात बजे की शिफ्ट पूरी करके एयरपोर्ट से निकली। इसके बाद पेट्टा और चकाई के बीच रेलवे ट्रैक पर पुणे-कन्याकुमारी एक्सप्रेस के सामने कूद कर आत्महत्या कर ली।

पुलिस ने बीएननएस की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सुकांत को खोजने के लिए पुलिस ने कोच्चि और मलप्पुरम में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। जाँच को आगे बढ़ाने के लिए पेट्टा पुलिस केरल से बाहर भी जाएगी और सुकांत के परिचितों एवं रिश्तेदारों से पूछताछ करेगी। इसके अलावा महिला आईबी अधिकारी और सुकांत के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।

झारखंड में जनजातीय समाज के त्योहार ‘सरहुल’ पर कट्टरपंथी मुस्लिमों का हमला, पथराव में कई घायल: मरांडी बोले – हेमंत सरकार में बढ़ा एक समुदाय का दुस्साहस

झारखंड की राजधानी राँची में सरना पंथ के त्योहार सरहुल के आयोजन पर इस्लामी हमला किया गया है। बता दें कि सरहुल जनजातीय समाज के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसमें प्रकृति की पूजा की जाती है और स्त्री-पुरुष आग गोल-गोल घूमते हुए नृत्य करते हैं। जहाँ तक ताज़ा घटना की बात है, पिठोरिया थाना क्षेत्र के हेठबालू में मंगलवार (1 अप्रैल, 2025) को शाम क़रीब सधी 4 बजे शोभा यात्रा निकल रही थी, इसी दौरान ये हमला हुआ। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

जनजातीय समाज ने इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की है। घटना का कारण ये है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने सड़क के दोनों तरफ बिजली की लड़ियाँ लगाई हुई थीं। इसी दौरान जनजातीय समाज ने सरहुल के मौके पर वहाँ सरना झंडा लगाया। एक दिन पूर्व भी दोनों पक्षों के बीच इसे लेकर तनातनी हुई थी। मंगलवार को जब सरहुल मनाने के लिए जनजातीय समाज के लोग यहाँ पहुँचे तो एक बार फिर से झड़प हुई। बहस के बाद मारपीट शुरू हो गई। लाठी-डंडे निकल आए, ईंट-पत्थर चलने लगे।

सरहुल शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे पाहन सहित 8 लोग इस हिंसा में घायल हुए हैं। वहीं मुस्लिम समाज का कहना है कि उनकी तरफ भी 4 लोगों को चोटें आई हैं। घायलों में नगदेव पाहन, रवि मुंडा, करण मुंडा, संदीप मुंडा, अरविंद मुंडा, अजय मुंडा और विजय मुंडा शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मारपीट के दौरान आरिफ अंसारी ने हथियार लहराए। उसे पकड़ के पुलिस को सौंप दिया गया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक आरोपों की पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद पंचायत प्रमुख और उप-प्रमुख जैसे नेताओं के अलावा DSP व थाना प्रभारी जैसे पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे।

डीएसपी अमर कुमार पांडेय का कहना है कि साज-सज्जा को लेकर दोनों पक्षों में झड़प हुई थी। उन्होंने समझा-बुझाकर मामले को शांत किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में है। उधर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले को सोशल मीडिया के जरिए उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शासनकाल में समुदाय विशेष का दुस्साहस बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन न तो सरना स्थलों की रक्षा कर पा रहे हैं, न ही सरहुल उत्सव की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी ने कहा, “हेमंत सोरेन जी, फिर एक नौटंकी कीजिए – जैसे आपने पहले सरना स्थल आंदोलनकारियों पर मुक़दमा दर्ज कराया, फिर कारवाई रोक कर वाहवाही बटोरने का प्रयास किया। ठीक उसी तरह अब जनजातियों से से प्राथमिकी दर्ज कराइए, फिर उसे निरस्त कर वाहवाही बटोरिए। और ऐसे ही कुटिल राजनीति के माध्यम से जनजातीय समाज को बेवक़ूफ़ बनाकर भ्रमित करते रहिए।” बाबूलाल मरांडी ने सरहुल जुलूस में बाधा उत्पन्न करने वाले उपद्रवियों पर बिना विलंब सख्त कारवाई करने की अपील राँची पुलिस से की है।

रसोइयों को ₹80 लाख, ₹12 लाख पालतू जानवरों को, ₹350 करोड़ सामाजिक कार्यों के लिए: पढ़िए रतन टाटा की संपत्ति में से किसे क्या मिला

निधन के लगभग 6 महीने बाद टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा की वसीयत को लेकर ख़बर सामने आई है। रतन टाटा की वसीयत में हर किसी के लिए कुछ न कुछ सौगात शामिल है। यहाँ तक कि वसीयत में रसोइया राजन शॉ और सुब्बैया और उनके पालतू कुत्ते टीटो का भी हिस्सा तय किया गया है। उनकी वसीयत 23 फरवरी, 2022 को ही तैयार कर ली गई थी। वसीयत में परिवार, दोस्त, चैरिटिबल फाउंडेशन समेत सभी का हिस्सा तय है।

रतन टाटा की वसीयत के अनुसार, मुंबई के जुहू में स्थित 13 हजार वर्गफुट का दो मंजिला घर, अलीबाग में समुद्र किनारे का बँगला और 350 करोड़ रुपए से अधिक के फिक्स्ड डिपॉजिट को परोपकारी कार्यों में लगाया जाएगा।

इकोनॉमिक टाइम्स‘ की रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा ने अपनी संपत्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा, यानी लगभग 3800 करोड़ रुपए दान कर दिए हैं। इसके अलावा ‘रतन टाटा एडोमेंट फाउंडेशन’ (RTEF) जैसी चैरिटी संगठनों के लिए भी अपनी व्यक्तिगत संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा रतन टाटा ने दिया है। इसमें ‘टाटा संस’ की 0.82% हिस्सेदारी शामिल है।

रतन टाटा की 10,000 करोड़ रुपए की अनुमानित संपत्ति के बँटवारे के लिए प्रोबेट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रोबेट का अर्थ है कि मृत व्यक्ति की वसीयत की वैधता को न्यायालय में प्रमाणित करना और उसके बाद वसीयत के अनुसार संपत्ति के लिए नामित व्यक्ति को उसका अधिकार देना। उनकी मृत्यु 9 अक्टूबर, 2024 को हुई थी।

परिवार को मिला हिस्सा

रतन के भाई जिम अविवाहित हैं। उन्हें जुहू बँगले का एक हिस्सा दिया गया है। उनकी हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा सौतेली बहन शिरीन और डिनना जेजीभॉय को एक अन्य वित्तीय संपत्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा मिला है। इसके तहत लगभग 800 करोड़ रुपए की वैल्यू के बैंक की FD व पेंटिंग्स समेत अन्य चीजें शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वसीयत में टाटा समूह की पूर्व कर्मचारी मोहिनी दत्ता को भी एक तिहाई हिस्सा मिला है। सौतेले भाई नोएल टाटा को ‘टाटा ट्रस्ट’ का चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा रतन टाटा के सबसे करीबी सहयोगी और दोस्त शांतनु नायडू को स्टार्टअप ‘गुडफेलोज’ में टाटा की हिस्सेदारी मिली है। शांतनु, रतन टाटा के निजी सहायक रहे और ‘टाटा ट्रस्ट्स’ में डिप्टी जनरल मैनेजर हैं। रतन टाटा की सेक्रेटरी दिलनाज गिल्डर को ₹10 लाख रुपए मिलेंगे।

पालतू जानवर को भी मिली जगह

रतन टाटा की संपत्ति में से उनके रसोइए सुब्बैया को ₹30 लाख मिलेंगे, वहीं रसोई के ही राजन शॉ और उनके परिवार के लिए ₹50 लाख की राशि नामित की गई है। राजन को ही पालतू कुत्ते टीटो की देखभाल का जिम्मा भी दिया है। इसके अलावा ₹12 लाख रुपए की राशि उनके सभी पालतू जानवरों की देखभाल के लिए दिए हैं। इसमें से हर तीन महीने ₹30 हजार रुपए का खर्च निर्धारित किया गया है।

सरकारी प्रॉपर्टी पर नहीं कर सकेंगे दावा, बोर्ड में होंगे गैर मुस्लिम भी, खैरात देने के लिए इस्लाम का 5 साल पालन जरूरी: जानिए वक्फ बिल में क्या-क्या किए गए हैं प्रावधान

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 लगातार चर्चा में है। संसद में इसके पास होने से पहले यह जान लीजिए कि ये पुराने कानून से किस तरह अलग है और इसमें क्या क्या बड़े बदलाव किए गए हैं।

वक्फ अधिनियम, 1995 और वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, प्रशासन और संरचना में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किए गए हैं।

वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के बीच अंतर

वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम मूल रूप से ‘वक्फ अधिनियम-1995’ था, जो उस समय के कानून की संरचना और सीमित दायरे को प्रतिबिंबित करता था। यह मुख्य रूप से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विनियमन पर केंद्रित था। दूसरी ओर वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 में इस अधिनियम का नाम बदलकर ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995’ कर दिया गया है।

वक्फ की प्रक्रिया में बदलाव

साल 1995 के अधिनियम में वक्फ का गठन तीन तरीकों से संभव था: घोषणा, उपयोगकर्ता (लंबे समय तक उपयोग के आधार पर) और बंदोबस्ती (वसीयत या दस्तावेज के जरिए)। यह प्रावधान लचीलापन प्रदान करता था, लेकिन अस्पष्टता और दुरुपयोग की संभावना को भी बढ़ाता था, जैसे कि बिना औपचारिक दस्तावेज के संपत्तियों को वक्फ घोषित करना। इसके विपरीत, 2024 के संशोधन विधेयक में ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ के प्रावधान को पूरी तरह हटा दिया गया है।

अब वक्फ केवल औपचारिक घोषणा या बंदोबस्ती के जरिए ही बनाया जा सकता है और इसके लिए दानकर्ता को कम से कम पाँच साल से प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होना अनिवार्य है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि पारिवारिक वक्फ में महिला उत्तराधिकारियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यह बदलाव दुरुपयोग को रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक कदम है।

सरकारी संपत्ति पर नहीं हो सकेगा दावा

वक्फ अधिनियम-1995 में सरकारी संपत्तियों को वक्फ के रूप में घोषित करने या उन पर दावे को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस अस्पष्टता के कारण कई सरकारी और निजी संपत्तियों को वक्फ बोर्डों ने अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की कोशिश की, जिससे विवाद बढ़े। उदाहरण के लिए दिल्ली और कर्नाटक में सरकारी भूमि पर दावे देखे गए। वहीं साल 2024 के संशोधन विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी संपत्ति वक्फ के रूप में मान्य नहीं होगी। यदि ऐसी संपत्ति पर वक्फ का दावा किया जाता है, तो जिला कलेक्टर इसकी जाँच करेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट देगा। यह प्रावधान सरकारी संपत्तियों पर अनुचित दावों को रोकने और विवादों को कम करने के लिए लाया गया है।

संपत्तियों के सर्वे की प्रक्रिया में बदलाव

साल 1995 के अधिनियम के तहत वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण सर्वेक्षण आयुक्तों और अपर आयुक्तों की जिम्मेदारी थी। हालाँकि इस प्रक्रिया में देरी, विशेषज्ञता की कमी और समन्वय का अभाव आम समस्याएँ थीं, जिसके कारण कई राज्यों में सर्वे अधूरा रहा। इसके उलट साल 2024 के विधेयक में सर्वेक्षण का दायित्व जिला कलेक्टरों को सौंपा गया है, जो राज्य के राजस्व कानूनों के अनुसार काम करेंगे। यह बदलाव सर्वेक्षण को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए किया गया है, क्योंकि कलेक्टरों के पास पहले से ही भूमि रिकॉर्ड और प्रशासनिक संसाधनों तक पहुँच होती है। इससे सर्वेक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार की उम्मीद है।

केंद्रीय वक्फ परिषद (CWC) की संरचना

1995 के अधिनियम में केंद्रीय वक्फ परिषद के सभी सदस्यों का मुस्लिम होना अनिवार्य था, जिसमें कम से कम दो महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान था। यह संरचना समुदाय-केंद्रित थी, लेकिन इसमें विविधता और बाहरी दृष्टिकोण की कमी थी। 2024 के संशोधन विधेयक में CWC की संरचना में बदलाव करते हुए दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव है। अब सांसदों, पूर्व न्यायाधीशों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा, हालाँकि मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि, इस्लामी कानून के विद्वान और वक्फ बोर्डों के अध्यक्ष जैसे सदस्यों के लिए यह शर्त बरकरार रहेगी। इसके अलावा मुस्लिम सदस्यों में से दो महिलाएँ होना अनिवार्य रहेगा। यह बदलाव समावेशिता और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के लिए किया गया है।

राज्य वक्फ बोर्ड (SWB) की संरचना

साल 1995 के अधिनियम में राज्य वक्फ बोर्ड में दो निर्वाचित मुस्लिम सांसद, विधायक या बार काउंसिल सदस्य शामिल होते थे और कम से कम दो महिलाओं की नियुक्ति अनिवार्य थी। यह संरचना सीमित थी और इसमें विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व नहीं था। 2024 के विधेयक में SWB को अधिक विविध बनाया गया है। अब राज्य सरकार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों, शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी, और पिछड़े वर्ग के मुस्लिम समुदायों से एक-एक प्रतिनिधि को नामित करेगी। साथ ही कम से कम दो मुस्लिम महिलाओं की नियुक्ति की शर्त बरकरार रहेगी। यह बदलाव बोर्ड को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने का प्रयास है, ताकि विभिन्न हितधारकों की आवाज सुनी जा सके।

वक्फ न्यायाधिकरण की संरचना और अपील

1995 के अधिनियम में वक्फ न्यायाधिकरण में एक जज, अपर जिला मजिस्ट्रेट और मुस्लिम कानून का विशेषज्ञ शामिल होता था। इसके फैसलों को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की सीमित संभावना थी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होती थी। 2024 के संशोधन विधेयक में न्यायाधिकरण की संरचना में बदलाव किया गया है। अब इसमें मुस्लिम कानून के विशेषज्ञ को हटाकर जिला न्यायालय के जज (अध्यक्ष) और एक संयुक्त सचिव स्तर के राज्य सरकार के अधिकारी को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा न्यायाधिकरण के फैसलों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की अनुमति दी गई है। यह बदलाव विवाद समाधान को अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के लिए है।

केंद्र सरकार की शक्तियाँ

साल 1995 के अधिनियम में केंद्र सरकार की शक्तियाँ अपेक्षाकृत सीमित थीं। राज्य सरकारें वक्फ खातों का ऑडिट कर सकती थीं, लेकिन केंद्र का कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था। इसके विपरीत, 2024 के संशोधन विधेयक में केंद्र सरकार को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। अब केंद्र को वक्फ पंजीकरण, खातों, और लेखा परीक्षा (CAG या नामित अधिकारी के जरिए) से संबंधित नियम बनाने का अधिकार होगा। यह प्रावधान केंद्रीकृत निगरानी और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है, ताकि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सके।

पुरानी मस्जिदों, दरगाहों, मजहबी स्थलों से छेड़छाड़ नहीं

सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि पुरानी मस्जिदों, दरगाहों या किसी भी मुस्लिम मजहबी स्थल से छेड़छाड़ नहीं होगी। यह सुझाव सहयोगी दल जेडीयू ने दिया था, जिसे बीजेपी ने मान लिया। इसका मतलब है कि यह कानून पुरानी तारीख से लागू नहीं होगा। लेकिन दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ाने का फैसला कई लोगों को नागवार गुजर रहा है। धारा 11 के तहत अब दो गैर-मुस्लिम सदस्य (हिंदू या अन्य धर्मों के लोग) बोर्ड में शामिल हो सकते हैं। साथ ही, राज्य सरकार का एक अधिकारी भी इसमें होगा।

कम से कम 5 साल इस्लाम का पालन

विवाद की एक और बड़ी वजह है बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या का प्रस्ताव, जिसे बिल में शामिल कर लिया गया। इसके मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ में तभी खैरात (दान) कर सकेगा, जब वह कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो। साथ ही दी गई संपत्ति में धोखाधड़ी न हो, इसका सबूत भी देना होगा।

ट्रिब्यूनल में बदलाव

वक्फ ट्रिब्यूनल में भी बदलाव हुआ है। पहले इसमें दो सदस्य होते थे, लेकिन अब तीसरा सदस्य एक इस्लामिक स्कॉलर होगा। पहले कलेक्टर वक्फ संपत्तियों की जाँच करता था, लेकिन अब यह जिम्मा किसी वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाएगा, जिसे राज्य सरकार चुनेगी। वक्फ संपत्तियों की सूची को गजट में छपने के 90 दिनों के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करना होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

जेपीसी की सिफारिशों को किया गया शामिल

इस बिल को तैयार करने में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की सिफारिशों का बड़ा हाथ है। जेपीसी ने 36 बैठकें कीं, 10 शहरों में दौरे किए और 97 लाख से ज्यादा ज्ञापन हासिल किए। मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद से लेकर पटना और लखनऊ तक, समिति ने हर कोने से लोगों की राय ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलमा-ए-हिंद और दारुल उलूम देवबंद जैसे संगठनों से भी बात हुई। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को डिजिटल बनाने, सर्वे को तेज करने और गरीबों के कल्याण के लिए है।

इन सबके बीच सवाल यह है कि क्या यह बिल वाकई वक्फ संपत्तियों का भला करेगा? देश में करीब 5,973 सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के मामले सामने आए हैं। आँकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2024 तक, 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों के आँकड़ों से पता चलता है कि 5,973 सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है। इनमें से कुछ के उदाहरण देख सकते हैं…

सितंबर 2024 में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 108 संपत्तियाँ भूमि और विकास कार्यालय के नियंत्रण में हैं, 130 संपत्तियाँ दिल्ली विकास प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं और सार्वजनिक डोमेन में 123 संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है और मुकदमेबाजी में लाया गया है।

वक्फ घोषित की गई अन्य गैर-मुस्लिम संपत्तियों के उदाहरण

तमिलनाडु: थिरुचेंथुरई गाँव का एक किसान वक्फ बोर्ड के पूरे गाँव पर दावे के कारण अपनी जमीन नहीं बेच पाया। इस अप्रत्याशित आवश्यकता ने उसे अपनी बेटी की शादी के लिए लोन चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचने से रोक दिया।

गोविंदपुर गाँव, बिहार: अगस्त 2024 में, बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड के पूरे एक गाँव पर दावे ने सात परिवारों को प्रभावित किया, जिसके कारण पटना उच्च न्यायालय में मामला चला। मामला विचाराधीन है।

केरल: सितंबर 2024 में, एर्नाकुलम जिले के लगभग 600 ईसाई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति में अपील की है।

कर्नाटक: वक्फ बोर्ड द्वारा विजयपुरा में 15,000 एकड़ जमीन को वक्फ भूमि के रूप में नामित किए जाने के बाद किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। बल्लारी, चित्रदुर्ग, यादगीर और धारवाड़ में भी विवाद हुए। हालाँकि सरकार ने आश्वासन दिया कि कोई बेदखली नहीं होगी। इसके साथ ही कर्नाटक में 40 वक्फ संपत्तियों को अधिसूचित किया गया, जिनमें कृषि भूमि, सार्वजनिक स्थान, सरकारी भूमि, कब्रिस्तान, झीलें और मंदिर शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश और पंजाब: यूपी वक्फ बोर्ड द्वारा कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ शिकायतें की गई हैं। तो पंजाब वक्फ बोर्ड ने पटियाला में शिक्षा विभाग की भूमि पर दावा किया है।

नए बिल में कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी को संपत्तियों की जाँच का अधिकार दिया गया है, ताकि गलत दावों पर लगाम लगे। बहरहाल, गरीबों के लिए भी इस बिल से उम्मीदें हैं। डिजिटल पोर्टल से वक्फ संपत्तियों की निगरानी होगी, जिससे कुप्रबंधन और अतिक्रमण रुकेगा। इससे होने वाली आय को शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसे कल्याणकारी कामों में लगाया जाएगा। लेकिन गैर-मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी और इस्लाम पालन की शर्त जैसे मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है।

Tesla की गाड़ियों पर हमले के पीछे नाजी चिह्न, लेकिन एलन मस्क बता रहे ‘स्वस्तिक’: जानिए हिन्दू प्रतीक से कैसे अलग है ईसाई ‘हेकेनक्रूज़’

अमेरिकी वाहन निर्माता टेस्ला की गाड़ियों और उसके सुपरचार्जर नेटवर्क पर बीते कुछ दिनों से हमले हो रहे हैं। उनको अमेरिका के अलग अलग हिस्सों में निशाना बनाया जा रहा है। यहाँ तक ​​कि यूरोप में भी हमले हुए हैं। मस्क के खिलाफ यह हमले ट्रम्प प्रशासन में सरकारी कामकाज में किफायत लाने वाले (DOGE) के प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका के चलते किए गए हैं।

इन हमलों को मस्क के विरोध का नाम दिया जा रहा है। 31 मार्च को एक्स पहले ट्विटर) पर मस्क ने एक वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। इसमें एक टेस्ला मालिक एक ऐसे आदमी से भिड़ता हुआ दिखाई दे रहा था जिसने उसकी टेस्ला EV पर नाजी चिह्न लगा दिया था।

इसका विरोध करने के लिए किए गए ट्वीट में मस्क ने इसे नाजी निशान हुक्ड क्रॉस बताने के बजाय इसे ‘स्वास्तिक’ कहा। मस्क ने एक्स पर लिखा, “जो कोई भी टेस्ला पर स्वास्तिक बनाता , उसने स्पष्ट रूप से घृणित अपराध किया है।”

बढ़ रहा टेस्ला विरोध का विरोध

टेस्ला कारों पर हमलों का सिलसिला सिर्फ़ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा है। उन पर इटली में भी हमले हुए हैं। हाल ही में रोम में टेस्ला डीलरशिप के भीतर 17 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। एलन मस्क ने इन हमलों की निंदा ‘आतंकवाद’ बता कर किया है।

इसके अलावा स्वीडन के स्टॉकहोम और माल्मो में, दो टेस्ला स्टोर में तोड़फोड़ की गई। फ्रांस में भी हाल ही में सेंट चामोंड में पार्किंग स्थल में 12 टेस्ला इलेक्ट्रिक सुपरचार्जर को आग लगा दी गई। अमेरिका में भी मस्क की कम्पनी की गाड़ियों को तोड़ाफोड़ा है।

इससे पहले भी, टेस्ला को लेकर हमले हुए हैं। ऐसी ही एक घटना में, कोलोराडो में एक महिला को टेस्ला डीलरशिप में आग लगाने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा ओरेगन में टेस्ला के डीलरशिप पर गोलीबारी की गई।

टेस्ला विरोधी आंदोलन को तब और हवा मिली जब मस्क ने यूरोप के देशों में घोर दक्षिणपंथी दलों को समर्थन दिया। इस बीच टेस्ला EV की बिक्री यूरोप में 49% कमी देखी गई है। हाल में मस्क ने आरोप लगाया था कि फंड जुटाने वाला प्लेटफॉर्म एक्टब्लू टेस्ला विरोधी प्रदर्शनों को भड़काने में शामिल था।

नाज़ी हेकेनक्रूज़ और स्वास्तिक के बीच अंतर

हिन्दुओं के लिए पवित्र स्वास्तिक और नाजी घृणा चिह्न हेकेनक्रूज़ के बीच बहुत बड़ा अंतर है। स्वास्तिक में ‘सु’ का अर्थ ‘अच्छा’ और ‘अस्ति’ का अर्थ ‘होना’ होता है। दूसरे शब्दों में, कल्याण। यह लगभग 6,000 साल पहले चट्टान और गुफाओं में बने हुए चित्र से जुड़ा है।

विद्वान भी इस बात पर सहमत हैं कि इसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी। यह चिह्न हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के अलावा वाइकिंग्स और यूनानियों सहित अन्य प्राचीन संस्कृतियों के लिए सौभाग्य, समृद्धि और सभी शुभ चीजों का प्रतीक रहा है।

नाजी निशाना हेकेनक्रूज (बाएँ) और हिन्दू प्रतीक चिह्न स्वास्तिक

हिंदू परंपरा में, स्वास्तिक की भुजाओं के मोड़ के बाद सीधी रेखा को सरूप्य (ईश्वर के जैसा रूप होना), सालोक्य (ईश्वर वाले ही विश्व में होना), सामीप्य (ईश्वर के निकट होना) और सायुज्य (ईश्वर के जैसा रूप होना) कहा जाता है। ये दिव्य मिलन के विभिन्न स्तरों को दर्शाते हैं।

स्वास्तिक का उल्लेख सबसे पहले वेदों में किया गया था और यह सूर्य और सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जैसी चीजों का प्रतीक है। इसे शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और यह सौभाग्य के देवता गणेश का प्रतीक भी है। हिंदू धर्म और जैन धर्म दोनों में, स्वास्तिक का उपयोग खाता बही, दरवाजे और दहलीज के शुरुआती पन्नों को चिह्नित करने के लिए किया जाता है।

2013 में, विश्व के सबसे पुराने यहूदी संगठनों में से एक, अमेरिकी यहूदी समिति ने हिंदू, जैन और बौद्ध संस्कृतियों द्वारा शताब्दियों से उपयोग किए जाने वाले स्वास्तिक और इसके नाजी संस्करण के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया। वर्ष 2021 में, ओरेगन शिक्षा विभाग ने इस अंतर को कानूनी मान्यता दी थी।

पश्चिमी मीडिया लंबे समय से अपनी रिपोर्टों में नाजी हेकेनक्रूज़ के लिए जानबूझकर स्वास्तिक शब्द इस्तेमाल कर रही है, जबकि दोनों एकदम अलग हैं। पश्चिमी मीडिया चाहता है कि हिन्दू निशान को घृणा का प्रतीक माना जाए और इसे हिन्दुओं के विरुद्ध लोगों में क्रोध फैले।

मस्क की गलती का हिन्दुओं को उठाना पड़ सकता है नुकसान

एलन मस्क द्वारा नाजी निशान को स्वास्तिक कहना संस्कृति के विषय में जानकारी ना होने और असंवेदनशीलता का मामला है। एलन मस्क ने उस नाजी हेकेनक्रूज़ को समृद्धि के निशान स्वास्तिक बता दिया, जो यहूदियों के प्रति घृणा और नरसंहार का प्रतीक था। मस्क को टेस्ला वाहनों पर हमले का विरोध करने की पूरी छूट है, लेकिन इसमें स्वास्तिक घसीटना ठीक नहीं है।

एलन मस्क ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब हिंदू और भारतीय अमेरिकी पहले से ही अमेरिका में घृणा का सामना कर रहे हैं। अमेरिका में हिंदूफोबिया भी बीते दिनों में बढ़ा है। अगर हिन्दुओं को लोग धोखे से नाजी समर्थक पाते हैं, तो उन पर खतरा और बढ़ेगा।

‘कमलेश तिवारी मौत का हकदार…’: जिसके Video के बाद रेता गया हिन्दू नेता का गला, नागपुर दंगों का भी वह मास्टरमाइंड: जानिए कौन है सैयद आसिम अली

नागपुर में 17 मार्च, 2025 को हुए दंगे हाल के वर्षों में घटी सांप्रदायिक हिंसा की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक हैं। हंसापुरी में अफवाह उड़ाई गई कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में हिंदू समूह ने कुरान जला दिया है। इसके बाद वहां इस्लामी कट्टरपंथियों ने दंगा शुरू कर दिया। 100 से भी अधिक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हिंदुओं की घरों और दुकानों की पहचान कर उनमें तोड़फोड़ और आगजनी की गई

इस दंगे में सैयद असीम अली का नाम सामने आया है। इसके ऊपर आरोप है कि 2019 में लखनऊ में हिंदू नेता कमलेश तिवारी की हत्या का सूत्रधार था। सीसीटीवी में भी असीम दंगे से जुड़ी गतिविधियों में शामिल दिखा। असीम को पुलिस नागपुर हिंसा का दूसरा मास्टरमाइंड मान रही है। सैयद असीम इस समय फरार है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

नागपुर हिंसा में पुलिस ने माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के शहर अध्यक्ष फहीम शमीम खान को गिरफ्तार किया गया था। उस पर भीड़ को हिंदुओं के खिलाफ भड़काने का आरोप है। जाँच में फहीम खान के सैयद असीम अली के साथ भी संपर्क में रहने के सबूत मिले हैं। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स की मानें तो सैयद असीम अली हिंसा होने से कुछ समय पहले गणेश पेठ पुलिस थाने के आसपास इस्लामी कट्टरपंथियों को इकट्ठा करते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ है।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में सैयद असीम की भूमिका

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18 अक्टूबर, 2019 को हिंदू महासभा के पूर्व नेता व ‘हिंदू समाज पार्टी’ के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की उनके घर पर बने कार्यालय में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कमलेश तिवारी की हत्या के बाद सैयद असीम ने एक वीडियो भी अपलोड किया था। इसमें उसने हत्या को सही ठहराया था। आरोप था कि वह कमलेश के हत्यारों के संपर्क में था। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी।

नागपुर पुलिस आयुक्त रविंद्र कुमार सिंघल ने बताया कि सैयद असीम का इस हिंसा से जुड़ाव के कुछ सुबूत मिले हैं। उसकी तलाश के लिए टीमें बनाईं गईं हैं। नागपुर हिंसा की जाँच जारी है और पुलिस ने अब तक 100 से भी अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा फहीम खान को इस दंगे का मुख्य आरोपित बनाया गया है। उस पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।

कौन है सैयद असीम अली?

सैयद असीम अली एमडीपी का पूर्व प्रत्याशी रह चुका है। 2019 में वह लोकसभा चुनाव में नितिन गडकरी के खिलाफ खड़ा हुआ, लेकिन उसे सिर्फ 600 वोट ही मिले थे। कमलेश तिवारी हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। बाद में 2024 में उसे जमानत मिल गई। अली हमेशा से ही इस्लामी कट्टरपंथियों खासतौर पर मुस्लिम युवाओं को लामबंद करने में सक्रिय रहा। नागपुर हिंसा के बाद वह फरार हो गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2017 में असीम ने ह्यूमैनिटी डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) बनाई। इस बैनर के तले उसने एक वीडियो जारी किया जिसमें उसने कहा था, “कमलेश तिवारी अपनी मौत के करीब है, सिर्फ मौत का हकदार है।” वीडियो के जरिए ईशनिंदा के नाम पर उनकी हत्या के लिए भड़काया गया था। लखनऊ कोर्ट ने असीम को आरोप गंभीर होने और सांप्रदायिक साजिश से गहरा संबंध होने के चलते 2020 में बेल देने से मना कर दिया था।

सेशन कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में सैयद असीम ने ख़ुद को ‘विचारधारा के प्रचारक’ की तरह वर्णित किया। प्रॉसिक्यूशन ने यह भी कहा कि कमलेश के हत्यारे अश्फाक और मोइनुद्दीन वीडियो देखने के बाद उनसे जुड़े।

गंभीर आरोपों के बावजूद मिल गई बेल

असीम ने बेल के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया लेकिन वहाँ भी ‘गंभीर सांप्रदायिक घृणा’ के आरोपों के आधार पर बेल नहीं मिली। इसके बाद जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को नकारते हुए उसे बेल दे दी। सर्वोच्च न्यायालय की जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच का मानना था कि भले ही वह हत्यारों के सीधे संपर्क में रहा हो, उन्हें कानूनी सहायता देना चाहता हो लेकिन उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामले नहीं हैं। ऐसे में उसे बेल दे दी गई।

सोशल मीडिया पर सक्रिया है असीम

बेल मिलने के तीन महीने के अंदर ही 2 अक्बटूर, 2024 को असीम ने वीडियो जारी कर अपनी वापसी की जानकारी दी। अब भी असीम के फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज सक्रिय हैं।

इसके अलावा वह चंद्रशेखर आजाद की ‘आजाद समाज पार्टी’ के संपर्क में था और कयास लगाए जा रहे थे कि वह पार्टी से जुड़ सकता है। 13 जनवरी को उसने खुद वीडियो डालकर चर्चा की पुष्टि की।

ऑपइंडिया ने असीम के फेसबुक पेज का 2018 का वह वीडियो भी खोज निकाला जिसमें उसने कमलेश तिवारी के मर्डर की बात खुलेआम कही थी। हत्या में अहम रोल होने के बावजूद आजाद समाज पार्टी ने उससे जुड़ने का निर्णय लिया।

रोज 10-12 किलोमीटर पैदल चल रहे अनंत अंबानी, 140 km चलकर द्वारकाधीश के करेंगे दर्शन: युवाओं से कहा – आस्था रखिए, सारी बाधा पार होगी

देश के सबसे अमीर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी गुजरात के जामनगर से द्वारकाधीश मंदिर तक पदयात्रा पर हैं। वे रोज़ाना 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलते हैं। रास्ते में मंदिरों के दर्शन भी करते हैं। लगातार पाँच दिन की पदयात्रा कर 60 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। बता दें कि जामनगर में उनके घर से द्वारका की दूरी 140 किमी है।

ANI से बातचीत में अनंत अंबानी ने कहा, “पदयात्रा जामनगर में हमारे घर से द्वारका तक है। यह पिछले 5 दिनों से चल रही है और हम अगले 2-4 दिनों में पहुँच जाएँगे। मेरी पदयात्रा जारी है। भगवान द्वारकाधीश हमें आशीर्वाद दें।”

अनंत अंबानी ने युवाओं के लिए मैसेज भी शेयर किया। उन्होंने कहा, “मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि भगवान द्वारकाधीश में आस्था रखें और कोई भी काम करने से पहले भगवान द्वारकाधीश को याद करें। वह काम बिना किसी बाधा के अवश्य पूरा होगा और जब भगवान मौजूद हैं तो चिंता करने की कोई बात नहीं है।”

रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनंत अंबानी की पदयात्रा की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में अनंत अपनी जेड प्लस सुरक्षा और स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ पैदल चल रहे हैं। इस दौरान अभिनेता शिखर पहाड़िया भी उनके साथ हैं।

जन्मदिन से पहले भगवान का लेंगे आशीर्वाद

गौरतलब है कि अनंत अंबानी आगामी 10 अप्रैल को जन्मदिन मनाएँगे। माना जा रहा है कि जन्मदिन से पहले अनंत भगवान द्वारकाधीश का आशीर्वाद लेना चाहते हैं। अगले पाँच दिन में द्वारका पहुँचकर भगवान के दर्शन करेंगे। भगवान द्वारकाधीश की अंबानी परिवार के प्रति खास आस्था है। शुभ काम से पहले पूरा परिवार भगवान के दर्शन जरूर करता है।

बचपन से बीमारी ने जकड़ा

अंबानी परिवार के छोटे बेटे अनंत अंबानी को बहुत कम उम्र से ही ओबेसिटी ने घेर लिया था। अस्थमा का ट्रीटमेंट लेने की वजह से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। इसके बाद उनका वजन बढ़ता चला गया। हाल ही में हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान नीता अंबानी ने अपनी स्पीच में छोटे बेटे अनंत अंबानी की सेहत का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि अनंत को जीवन भर मोटापे से संघर्ष करना पड़ा। अनंत ने इन चुनौतियों को पूरे आत्मविश्वास के साथ पार किया है।

अनंत अंबानी देश को ‘वनतारा’ दिया

अनंत अंबानी पशु प्रेमी भी हैं। उन्होंने गुजरात के जामनगर में वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर यानी वनतारा की स्थापना की। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वनतारा का उद्घाटन किया। वनतारा को भारत सरकार की ओर से पशु कल्याण के क्षेत्र में ‘कॉरपोरेट’ कैटेगरी में भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘प्राणी मित्र’ राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

बता दें कि अनंत अंबानी मार्च 2020 से जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड, मई 2022 से रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड और जून 2021 से रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड और रिलायंस न्यू सोलर एनर्जी लिमिटेड के बोर्ड में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

‘ये हिंदू है, मारो सा@ को’: VHP कार्यकर्ता को अकेला देख ईद पर शराब पी रहे मुस्लिमों ने चाकुओं से गोदा, अलीगढ़ की घटना- 2 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ईद पर शराब पी रहे मुस्लिमों ने एक विश्व हिन्दू परिषद (VHP) कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला किया। हिन्दू व्यक्ति ने मुस्लिम युवकों को शराब पीने से रोका था। मुस्लिमों ने पूरे शरीर पर चाकू मारे और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। पीड़ित हिन्दू का इलाज चल रहा है। मामले में FIR दर्ज करवाई गई है।

यह घटना अलीगढ़ के छर्रा थाना क्षेत्र के सलगवाँ गाँव में हुई है। इस मामले में पीड़ित विकास सिंह के मामा ने बताया है कि उनका भांजा ईद (31 मार्च, 2025) के दिन काम निपटा कर गाँव आ रहा था। गाँव के ही मोड़ पर उसे 3-4 लोग शराब पीते हुए दिखाई दिए।

विकास ने उन्हें सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने से मना किया। इसके बाद मुस्लिम भड़क गए। उनमें से एक अमन ने विकास का नाम पूछा। विकास ने जब अपना नाम बताया तो अमन ने कहा कि यह व्यक्ति हिन्दू है और इसे मारो। इसके बाद अमन ने अपने साथी फरहत और अरबाज के साथ मिलाकर हमला कर दिया।

उन्होंने विकास को पकड़ कर चाकू मारे। इससे विकास गंभीर रूप से घायल हो गया। विकास इसके बाद किसी तरह यहाँ से बच कर निकला। उसके मामा ने बताया है कि मुस्लिम विकास को जान से मार देना चाहते थे। इसके बाद विकास को अस्पताल ले जाया गया। विकास को इस हमले में गंभीर चोटें आई हैं।

मामले में छर्रा थाने में FIR लिखवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। पीड़ित विकास को गंभीर चोटों के चलते अलीगढ़ के एक अस्पताल रेफर किया गया है। मामले में अब पुलिस कार्रवाई कर रही है। उसने 2 मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।

मामले में छर्रा थाना CO धनंजय कुमार ने बताया है कि इस संबंध में FIR दर्ज कर ली गई है और 2 मुख्य आरोपितों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पुलिस ने बताया है कि वह अब आगे की कार्रवाई कर रही है।

ऑपइंडिया ने इस विषय में विश्व हिन्दू परिषद के बृज प्रांत के मीडिया प्रभारी प्रतीक रघुवंशी से भी बात की। उन्होंने बताया कि पीड़ित विश्व हिन्दू परिषद का कार्यकर्ता है और उस पर हमला करने वाले मुस्लिम उसे पहले से जानते रहे हैं। प्रतीक रघुवंशी ने बताया कि पीड़ित ड्राइवर का काम करता है और मुस्लिम उस पर शराब पीने से रोके जाने के चलते हमला किया।

प्रतीक रघुवंशी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि विश्व हिन्दू परिषद इस मामले में कार्रवाई ना होने पर सड़कों पर भी उतरेगा।