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ऑस्ट्रिया: बंद हुईं इस्लामी कट्टरपंथ का गढ़ बन चुकी मस्जिदें, अन्य मस्जिदों पर कार्रवाई की तैयारी

ऑस्ट्रिया के विएना में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) द्वारा आतंकवादी हमले अंजाम दिए गए, जिनमें 4 लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इसके कुछ ही दिन बाद ऑस्ट्रिया की सरकार ने ऐसी मस्जिद को बंद करने का निर्णय लिया है जो कथित तौर पर कट्टरपंथी आतंकवाद का अड्डा बन गई थी। इन आतंकवादी हमलों को 20 वर्ष के मैकडॉनियन (Macedonian), कुज्तिम फेजुलई (Kujtim Fejzulai) ने अंजाम दिया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने मार गिराया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विएना की सरकार दो मस्जिदों पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगाने की तैयारी कर रही है, सरकार को इस बात का संदेह है कि फेजुलई को कट्टरपंथी बनाने में संस्थाओं की भूमिका अहम रही है। ये दो मस्जिद ओट्टाक्रिंग (Ottakring) शहर के मेलिट इब्राहिम (Melit Ibrahim) और दूसरी मेडीइन (Meidling) क्षेत्र की तेवहिद (Tewhid) मस्जिद हैं। जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि आतंकवादियों का इन दो मस्जिदों में आना-जाना अक्सर लगा रहता था। 

जाँच में यह भी पता चला है कि इन दो मस्जिदों में से केवल एक ही आधिकारिक रूप से पंजीकृत मस्जिद है और दूसरी का पंजीकरण बतौर इस्लामी एसोसिएशन हुआ है। इस मुद्दे पर ऑस्ट्रिया के आंतरिक मंत्री कार्ल नेहैमर (Karl Nehammer) ने भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, “हम उन हिंसक अपराधियों का सामना कर रहे हैं जो बेहद गहन रूप से राजनीतिक इस्लाम के तंत्र से जुड़े हुए हैं और विचारधारा की आड़ में आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।”

इस घटना की पुष्टि करते हुए ‘इस्लामिक रिलीजियस कम्युनिटी ऑफ़ ऑस्ट्रिया’ ने बताया कि उनकी अधिकारियों से इस  मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। चर्चा के बाद यह नतीजा निकल कर आया कि वह एक आधिकारिक मस्जिद बंद कर रहे हैं। इस संस्था ने अपने बयान में कहा कि अधिकांश मस्जिद इसलिए बंद की गईं क्योंकि उन्होंने धार्मिक सिद्धांतों और संविधान के नियमों का उल्लंघन किया। इतना ही नहीं, मस्जिद ने इस्लामी कानूनों को क्रियान्वित करने वाले देश के क़ानून की भी अवहेलना की है।

ऑस्ट्रिया सरकार के आंतरिक मंत्रालय ने कहा है कि वह और भी मस्जिदों पर पाबंदी लगाएगी अगर उनके संबंध कट्टरपंथी इस्लामियों से मिलते हैं। इसके अलावा जितनी भी मस्जिदों से राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा होगा उन सभी मस्जिदों को बंद किया जाएगा।

आतंकवादी हमलों के संबंध में अभी तक ऑस्ट्रिया की सरकार ने कुल 15 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आंतरिक मंत्रालय के अधिकारियों ने यहाँ तक बताया कि इन सभी आतंकवादियों का सीधा संबंध कट्टरपंथी इस्लामी वर्ग से था। इसके अलावा, 7 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और 4 को आतंकवाद के आरोप में दोषी घोषित किया गया। 

बकैत की रिपोर्ट: अर्णब के ‘समर्थन’ में रवीश की बकैती | Ravish supports ‘not a journo’ Arnab

रवीश कुमार ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी को लेकर फेसबुक पोस्ट लिखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी क्यों और किस तरह से हुई, इस बारे में आपको पता ही होगा। रवीश कुमार का लेख देर से आया लेकिन उसमें कपड़े धोने से लेकर चाय पीने तक की बातें हैं। उन्होंने वैसे ही लिखा है, जैसे कोई भी वामपंथी तब बोलता है जब उसके मुँह में बाँस डाला जाता है। क्योंकि, उसे भय होता है कि फलाँ विषय पर न बोलने के कारण उसकी रही-सही स्वीकार्यता या लोकप्रियता भी खो जाएगी।

वामपंथी लिखना शुरू ऐसे करते हैं, जैसे किसी को लगे कि रवीश कुमार ने विरोधी खेमे का होते हुए भी कितना बड़ा स्टैंड लिया है। लेकिन, जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे, आपको लगेगा कि इसमें कोई बदलाव नहीं है और ये वही रवीश है, जो मधुर शब्दों में जहर फैला रहा है। पहले पैराग्राफ में ही रवीश ने गिरफ़्तारी के तरीकों पर सवाल करते हुए कानून के जानकारों से हवाले से इसे गलत बताया। लेकिन, दूसरे पैराग्राफ में ‘Whataboutery’ शुरू हो जाती है।

इसके तहत वामपंथी उस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं कि इसके साथ ऐसा हुआ है तो उसके साथ भी भाजपा शासित राज्य में ऐसा हुआ। जब रवीश बार-बार गरीबों और रोजगार की बात करते हैं, लेकिन उन्हें सोचना चाहिए कि जब 1000 पत्रकारों पर FIR हुई, तब क्या उन्होंने कुछ लिखा? अब सारे वामपंथी लिख कर खानापूर्ति कर रहे हैं। रवीश कुमार सहित सारे साथ में लिख रहे हैं कि वो अर्णब गोस्वामी को पत्रकार नहीं मानते।

अगर अर्णब गोस्वामी के दिमाग में जहर था (आपके हिसाब से), तो क्या उन 1000 पत्रकारों के मन में भी जहर भरा था? रवीश कुमार को तो पिछले 6 साल में देश में कुछ अच्छा दिखा ही नहीं। छोटे-छोटे पत्रकारों को निशाना बनाना रवीश कुमार का पेशा है। इस लेख में भी वो पूछ रहे हैं कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो अर्णब गोस्वामी स्टैंड लेंगे? जब ‘पत्रकारिता पर हमला’ होगा तो कोई क्यों नहीं स्टैंड लेगा?

रवीश की इस बकैती पर विस्तृत वीडियो आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

लालू का करीबी जो जेल में रहते MLC बना, रंगदारी की.. जिस BJP नेता की हत्या की, उसी की पत्नी के खिलाफ लड़ रहा चुनाव

बिहार की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं जिन पर अपराधिक आरोप हैं तो कई ऐसे भी हैं जो आपराधिक गतिविधियों में अभी भी शामिल हैं। आतंक ऐसा है कि इनके नाम के पहले ‘बाहुबली’ जोड़ा जाता है। वैसे तो इनका धंधा काला होता है लेकिन अपनी कॉलर को सफेद रखने के लिए ये राजनीति का दामन थाम लेते हैं।

हम बात कर रहे हैं पटना के दानापुर के MLC रीतलाल यादव की, जिसका आतंक पटना समेत पूरे सूबे में कुछ इस तरह कायम है कि जेल में कैद रहने के बावजूद भी लाखों-करोड़ों का हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्‍जा, रंगदारी का काम किया जाता है।

पटना के कोथवाँ गाँव के रहने वाले रीतलाल यादव के नाम का सिक्का कभी रेलवे के ठेकाओं में चलता था। रीतलाल यादव पेशे से ठेकेदार रहे हैं। दानापुर में सड़क और रेल सेवाओं का अच्छा नेटवर्क है। कहा जाता है कि रेलवे के ठेकों ने ही रीतलाल को इतना बड़ा बना दिया कि पूरे इलाके में लोग उसे जानने लगे। 90 के दशक में रीतलाल का खौफ इस कदर था कि उनके रहते रेलवे के टेंडर किसी और को नहीं मिल सकता था। फिर उसका नाम अपराधों में भी आने लगा। इसी तरह धीरे-धीरे रीतलाल पर मुकदमों की संख्या बढ़ती चली गई। 

90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक रीतलाल यादव के नाम की तूती बोलती थी। साल 2015 में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर दानापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुका रीतलाल यादव अभी एमएलसी है। जेल में रहते हुए ही वो स्वतंत्र रूप से एमएलसी चुना गया था।

BJP नेता की हत्या का संगीन आरोप

रीतलाल यादव पर बीजेपी नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या का संगीन आरोप है। इसके अलावा रीतलाल यादव के दूसरे अपराधों की फेहरिस्त काफी लंबी है जिस वजह से वो कई सालों से जेल में ही बंद हैं।

हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्जा और रंगदारी रीत लाल यादव का मुख्य पेशा है और इसी वजह से पूरे राज्य में उनके नाम का दहशत रहा है। रीतलाल यादव पर जेल में रहकर ही इन सभी गोरखधंधे और गैरकानूनी कामों को अंजाम देने का आरोप भी लगता रहा है।

जेल में रहकर वसूली का धंधा

रीतलाल यादव भले कई सालों से जेल में बंद रहे हों लेकिन बाहर उसके गुर्गे उनके नाम पर वसूली का धंधा करते हैं। बीते साल रीतलाल यादव के गुर्गों ने एक कोचिंग संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी थी। गुर्गों को पैसे देने से इनकार करने पर कथित तौर पर जेल से ही रीतलाल यादव ने संस्थान मालिक को पैसे नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

इतना ही नहीं, एक डॉक्टर को बंद लिफाफे में जिंदा कारतूस भेजकर भी रंगदारी माँगने का आरोप रीतलाल यादव और उनके गुर्गों पर हैं। डॉक्टर से रीतलाल यादव के गुर्गों ने कारतूस भेजने के बाद 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगी थी।

लालू के करीबी रह चुके रीतलाल यादव का नाम सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्यानारायण सिंह की हत्या में उछला था। 30 अप्रैल 2003 को जब राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ‘तेल पिलावन-लाठी घुमावन’ रैली कर रहे थे, तब इसी दिन खगौल के जमालुद्दीन चक के पास दिनदहाड़े भाजपा नेता सत्यनारायण सिंह को उनकी ही गाड़ी में गोलियों से भून डाला गया।

शिक्षण संस्थान के संचालक से 1 करोड़ माँगने का आरोप

इस हत्याकांड में रीतलाल यादव का नाम सामने आने के बाद उसे ‘डॉन’ के नाम से जाना जाने लगा। रीतलाल यादव इस वक्त तक मुखिया थे। इस हत्या के बाद काफी हंगामा भी हुआ था। राजद के पूर्व नेता रीतलाल यादव के गुर्गों द्वारा एक बार फिर एक शिक्षण संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रूपए रंगदारी की माँग की गई है थी। यह रंगदारी उस वक्त माँगी गई थी जब रीतलाल यादव पटना के बेऊर जेल में कैद थे।

जब जेल में ही पुलिस को मारनी पड़ी रेड

एक डॉक्टर से भी रीतलाल के गुर्गों ने 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगी थी। यह वर्ष 2015 की बात है। रीतलाल जेल में ही था। उस समय एक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज करवाई कि रीतलाल उन्हें रेलवे टेंडर नहीं डालने के लिए धमका रहे हैं और रंगदारी भी माँग रहे हैं। इसके बाद रात 4 बजे सैकड़ों पुलिस वाले बेउर जेल पहुँचे और रेड मारी। इस रेड में रीतलाल के वॉर्ड से रेलवे टेंडर से जुड़े कागजात मिले थे। मोबाइल भी मिला था। साथ में एक लोहे की रॉड और दो चाकू भी पुलिस ने जब्त किए थे।

हालाँकि, कहा जाता है कि रीतलाल यादव के आपराधिक जीवन की शुरुआत 90 के दशक में हो चुकी थी। बताया जाता है कि 13 सालों में ही रीतलाल यादव का साम्राज्य पटना जिले में तो फैला ही, दानापुर डीवीजन से निकलने वाले हर रेलवे टेंडर पर उसका और उसके गिरोह का साम्राज्य भी स्थापित हो गया। कहा जाता है कि जिसने भी उसके खिलाफ जाने की कोशिश की उसे भून डाला गया।

जिसके पति का कत्ल किया, उसी भाजपा उम्मीदवार के विरोध में लड़ रहा है चुनाव

बिहार विधान सभा चुनाव में आरजेडी इस बार बाहुबलियों के भरोसे अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में जुटी है। इसी कड़ी में राजद ने एक और बाहुबली को टिकट दिया है। रीतलाल यादव RJD के टिकट पर दानापुर चुनाव लड़ रहे हैं। इनके खिलाफ करीब 33 मामले दर्ज हैं।

सबसे बड़ी बात, रीतलाल के खिलाफ जो महिला नेता BJP की टिकट से खड़ी हैं, खुद उनके पति की हत्या का आरोप रीतलाल पर है। रीतलाल को लालू यादव का करीबी माना जाता है और कहा तो यहाँ तक जाता है कि 90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक रीतलाल का सिक्का चलता था।

इस सीट पर जो BJP की उम्मीदवार हैं, उनका नाम है आशा देवी। आशा देवी चार बार विधायक रह चुकी हैं और मौजूदा सीट से BJP की विधायक हैं। आशा देवी के पति सत्यनारायण सिन्हा की 30 अप्रैल, 2003 को कथित तौर पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रीतलाल, आशा देवी के पति की हत्या के मुख्य आरोपित है।

भाजपा नेता की हत्या के बाद रीतलाल तब और चर्चित हो गया, जब उस पर चलती ट्रेन में बख्यिारपुर के पास दो रेलवे ठेकेदारों की हत्या करने का आरोप लगा। इसके बाद रीतलाल ने अपने विरोधी नेऊरा निवासी चुन्नू सिंह की हत्या छठ पर्व के समय घाट पर उस समय कर दी जब वह घाट बनवा रहे थे।

इस घटना के बाद पटना पुलिस और एसटीएफ रीतलाल के पीछे पड़ गई क्योंकि तब चुन्नू को पुलिस का मुखबिर भी माना जा रहा था। पर अपने इलाके में ‘रॉबिन हुड’ की छवि वाले रीतलाल की परछाई भी पुलिस तब तक नहीं पा सकी जब तक वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव के पूर्व उन्होंने खुद अदालत में आत्मसमर्पण नहीं कर दिया।

रीतलाल ने 2010 में जेल में बंद रहते हुए आशा देवी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, हालाँकि वह हार गया। रीतलाल को लोग ‘डॉन’ कहते हैं। वह पहली बार पूरी तरह चर्चा में 2014 के दौरान आया, जब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उसे पार्टी का महासचिव घोषित किया था। लालू ने ऐसा इस वजह से किया, ताकि उसे पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ने से रोका जा सके। दरअसल, उस वक्त लालू की बेटी मीसा भारती इस सीट से चुनाव मैदान में थीं।

बताया जाता है कि खुद लालू प्रसाद यादव अपनी बेटी मीसा भारती को चुनाव जिताने के लिए भी रीतलाल यादव से मदद माँग चुके हैंं। रीतलाल यादव ने लालू प्रसाद को मदद का आश्वासन दिया था हालाँकि मीसा भारती चुनाव हार गई थीं। रीतलाल यादव जेल से दानापुर विधानसभा का चुनाव भी लड़े। बाद में वे एमएलएसी बने। साल 2012 में रीतलाल यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया गया था। 

4 सितंबर 2010 में हुआ था गिरफ्तार

हत्या, हत्या की धमकी, डकैती, और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आपराधिक कृत्यों में नाम आने के बाद 4 सितंबर 2010 से ही रीतलाल यादव ज्यादातर समय जेल में बंद हैं। उसे इसी साल 25 जनवरी को सिर्फ 15 दिनों के लिए बेटी की शादी में पैरोल मिली थी। हालाँकि शादी के बाद उन्हें 10 फरवरी को फिर से सरेंडर करना पड़ा।

चार फरवरी को रीतलाल की बेटी अंकिता की शादी थी। बेटी की शादी में मेहमानों को बुलवाने के लिए छपवाए गए कार्ड में रीतलाल यादव की ओर से एक विशेष अनुरोध किया गया था। जिस कारण उनकी बेटी की शादी का कार्ड सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ। साथ ही, रीतलाल यादव भी अचानक चर्चा में आ गया था। 

रीतलाल यादव ने अपनी बेटी की शादी के कार्ड के कवर पर ही मोटे अक्षरों में एक अनुरोध प्रकाशित करवाया था। अनुरोध था: ‘आवश्यक सूचना- हथियार लाना वर्जित है।’ मतलब यह कि रीतलाल यादव अपनी बेटी की शादी में आने वाले मेहमानों से यह अपील की थी कि वो अंकिता की शादी में हथियार लेकर न आएँ। 

बेऊर जेल से रंगदारी माँगने के बाद दूसरी जेल में किया गया शिफ्ट

पटना की बेऊर जेल में बंद रीतलाल यादव के वहीं से धंधा चलाने और रंगदारी माँगने के कई आरोपों के बाद उन्हें वहाँ से हटाकर भागलपुर के केंद्रीय कारागार में ट्रांसफर कर दिया गया था, जहाँ उन्हें उच्च श्रेणी की जेल में रखा गया था और जेल प्रशासन पर कई तरह की सुविधाएँ देने का आरोप लगा था।

कोरोना काल में फिर तोड़ा कानून, दर्ज हुई एफआईआर

साल 2012 में प्रवर्तन निदेशालय ने रीतलाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था। वो कई सालों से पटना की बेऊर जेल में बंद था। 2020 में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान ही पटना हाईकोर्ट ने उसे इस मामले में तय सजा से ज्यादा समय तक ट्रायल के दौरान ही सजा काटने लेने की वजह से जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया था।

जमानत पर बाहर आते ही रीतलाल यादव ने एक बार फिर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और लॉकडाउन के दौरान ही 30-40 गाड़ियों का काफिला लेकर अपने समर्थकों के साथ अपने क्षेत्र हाथीखाना मोड़ के पास जुट गए। सरकारी आदेशों का उलंघन करने के आरोप में रीतलाल यादव समेत करीब सौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

बता दें कि रीतलाल और उसकी पत्नी के पास दस करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, इसमें आरजेडी प्रत्याशी के पास 350 ग्राम सोना है। उसकी पत्नी और स्कूल टीचर पिंकी यादव के पास 150 ग्राम सोना है। खास बात है कि करोड़ों रुपए की संपत्ति का मालिक होने के बावजूद दोनों के पास कार या मोटरसाइकिल तक नहीं है।

रीतलाल के बैंक में 48,29,053 रुपए जमा हैं और 18.48 लाख रुपए का शेयर व बॉन्ड हैं। उसकी पत्नी के बैंक में 12.90 लाख रुपए जमा है। हलफनामे में रीतलाल ने बताया कि उसकी आय का स्त्रोत एमएलसी का वेतन है। आरजेडी उम्मीदवार रीतलाल के पास कुल 6.4 करोड़ रुपए की जमीन जायदाद है जबकि उसकी पत्नी 4.58 करोड़ रुपए की संपत्ति की मालकिन है।

उमर खालिद पर UAPA के तहत मुकदमे से केजरीवाल पर भड़की आइशी घोष, कहा- ‘ये विश्वासघात नहीं भुलाया जाएगा’

दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार ने यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब यही बात JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष को आहत कर गई। आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी।

आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक यूजर ने आइशी के इस ट्वीट को पढ़कर अरविंद केजरीवाल के पक्ष में अपनी दलील रखी। श्याम नाम के यूजर ने लिखा, “एलजी को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करके केंद्र सरकार ने प्रॉजिक्यूटर्स नियुक्त किए। आप सरकार ने निर्णय का विरोध भी किया और पैनल को खारिज भी किया लेकिन एलजी ने आप सरकार को ओवर रूल कर लिया। आइशी तुम छात्र राजनीति में कभी कन्हैया की जगह नहीं ले पाओगी। अपने फैक्ट्स को सुधारो।”

आइशी के इस ट्वीट पर कई लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने मुख्यमंत्री को सही ठहराया। वहीं कुछ ने पूछा कि केजरीवाल ने कौन सा विश्वासघात कर दिया? इस पर एक यूजर ने लिखा कि पहले चंदा लिया, वोट लिया और फिर मुकदमा चलाने की भी इजाजत दे दी, आखिर ये धोखा नहीं तो क्या है? इसी तरह कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेटिजन्स बोले कि पहले इन्हें मैक्रों ने धोखा दिया अब केजरीवाल ने।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं।

बता दें कि इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।

मुंगेर केस में SP लिपि सिंह सहित 7 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज: आरती के समय भक्तों को बेरहमी से मारने का आरोप

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई एवं पूर्व एसपी लिपि सिंह द्वारा आदेश नहीं मानने पर गोली मारने के आदेश दिए जाने को लेकर स्थानीय अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है। शिकायत में लिपी सिंह और वर्तमान एसडीओ खगेशचंद झा सहित सात पुलिस अधिकारियों का उल्लेख है।

प्रभात खबर के अनुसार, वाद पत्र केलू यादव उर्फ ​​दयानंद कुमार ने अधिवक्ता निर्मल कुमार के माध्यम से दर्ज की है। यादव ने शिकायत दायर करते हुए विजयादशमी की रात हुई घटना और मामले की लीपापोती में लगी तत्कालीन एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों की कारगुजारियों का खुलासा किया है। साथ ही एसपी लिपि सिंह, एसडीओ खगेशचंद्र झा के साथ ही कृष्णा कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कोतवाली थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, कासिम बाजार थानाध्यक्ष शैलेश कुमार, मुफस्सिल थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार को आरोपित ठहराया है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि 26 अक्टूबर को माता रानी का विसर्जन कराने के लिए निश्चित मार्गों से होते हुए एमसीएन चैनल स्थित तिनबटिया पर दुर्गा माता की प्रतिमा को रखा गया। घटना के वक्त भक्तों द्वारा माता की आरती की जा रही थी। उसी दौरान आरोपित वहाँ पहुँचे और कथित तौर पर अभद्रता करते, गाली देते हुए आयोजन को बर्बाद करने की धमकी दी। इतना ही नहीं फिर दुर्गा प्रतिमा को कंधा देने वाले कहार कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बेरहमी के साथ पीटना शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई और लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे।

हालाँकि, थोड़ी देर बाद फिर वहाँ सभी लोग एकत्रित होकर बड़ी दुर्गा प्रतिमा को कंधा देकर किसी तरह बाटा चौक के पास पहुँचे। बाटा चौक पर पर माता दुर्गा की महाआरती का समारोह होने वाला था। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा को वहाँ रखा गया तुरंत ही दीनदयाल चौक से गोलियों की आवाजें आईं और वापस भगदड़ मच गया।

शिकायत पत्र में आगे बताया गया कि आरोपितों ने गाली देते हुए लोगों को मारने और बात नहीं मानने पर गोली मारने को कहा। वे लोग वादी सहित समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पर लाठी-डंडा, बट से जान से मारने की नीयत से मारने लगे। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों को काफ़ी गंभीर चोटें आई। भक्त पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए, चूँकि यह खुद पुलिस से संबंधित था, इसलिए उन्हें वहाँ से भी गालियाँ देते हुए भगा दिया गया। जिसके बाद पीड़ितों ने न्यायालय के अवकाश खत्म होने के बाद न्यायालय में केस दर्ज करवाया। भक्तों ने सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की।

विसर्जन के दौरान मुंगेर में हत्या

दुर्गा पूजा विसर्जन समारोह के दौरान बिहार के मुंगेर शहर में फैली हिंसा में एक भक्त की मौत हो गई। एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने भक्तों पर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता का बचाव किया था। जिसमें दावा किया गया कि भक्तों ने पथराव कर आगामी हिंसा को भड़काया। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ द्वारा किए गए पथराव से 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सिंह ने आगे कहा कि भीड़ में से ही एक सदस्य ने गोलियाँ चलाईं जिस वजह से 18 वर्षीय भक्त की मौत हो गई।

वहीं CISF की रिपोर्ट में बताया गया कि दुर्गा पूजा जुलूस समारोह में उपस्थित लोगों पर पुलिस द्वारा पहली गोली चलाई गई थी। साथ ही दुर्गा पूजा में भाग लेने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने पहले जो दावा किया था, उसके विपरीत CISF की रिपोर्ट सामने है।

WhatsApp में आया UPI के जरिए नया पेमेंट फीचर: जानें कैसे होगा लेन-देन आसान

मैसेजिंग एप वाट्सएप पर अब रुपयों के लेन-देन का काम भी मैसेज भेजने जितना आसान हो गया है। हाल में NCPI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के साथ साझेदारी करने के बाद वाट्सएप ने यूपीआई का उपयोग करते हुए इस फीचर यानी इंडिया-फर्स्ट, रियल टाइम पेमेंट सिस्टम को डेवलप किया है।

न्यूजबाइट के अनुसार इसका परीक्षण दो साल पहले शुरू हुआ था लेकिन तब कुछ बाधाओं और विश्वसनीय न होने के आरोपों के कारण यह विफल रही। मगर अब फेसबुक द्वारा इसे खरीदने के बाद इसे यह भुगतान सेवा चालू करने की अनुमति मिल गई है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उसने फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए ‘गो लाइव ऑन यूपीआई’ को मंजूरी दी है।

आगे बयान में कहा गया है कि वाट्सएप अब अपने यूपीआई यूजरबेस का विस्तार “क्रमबद्ध तरीके से कर सकता है, जिसकी शुरुआत यूपीआई में 20 मिलियन के अधिकतम रजिस्टर्ड यूजरबेस के साथ होती है।”

कंपनी ने इस सर्विस के लिए ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और जियो पेमेंट बैंक के साथ साझेदारी की है। यह सुविधा सभी एप्पल यूजर्स के लिए अब उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं एंड्रॉयड यूजर्स को भी नए अपडेट के साथ इसका लाभ मिलने लगेगा। हालाँकि, शुरू में जब तक यह लॉन्च फेज में है, हर कोई इस फीचर को एक्सेस नहीं कर पाएगा।

वाट्सएप पर इस पेमेंट फीचर का इस्तेमाल कैसे करें?

  • – वाट्सएप पे का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपनी मैसेजिंग एप को अपडेट करें। 
  • – इसके बाद सेटिंग्स पर जाएँ और पेमेंट पर क्लिक करके पेमेंट मैथड एड करें। अब आपको बैंकों की एक लिस्ट मिलेगी।
  • – यहाँ आपको उस बैंक पर क्लिक करना है, जिसका अकाउंट आपको वाट्सएप पेमेंट के लिए एड करना है 
  • – फिर, आपके फोन नंबर का वेरिफिकेशन होगा। इसके लिए आपको ‘वेरीफाई वाया एसएमएस’ टैब पर क्लिक करना होगा। ध्यान रहे कि यह नंबर वही होना चाहिए जिससे आपका बैंक अकॉउंट लिंक है और जिससे वाट्सएप चालू है।
  • – अब आपको अपने डेबिट कार्ड को वेरीफाई करवाना होगा और वेरिफिकेशन के कंप्लीट होते ही आप अन्य यूपीआई एप्स की तरह यहाँ भी पिन सेट करेंगे।
  • – इसके बाद आपको आपका बैंक नजर आने लगेगा।

कैसे करेंगे पेमेंट?

  • – पेमेंट का तरीका वाट्सएप पे में बेहद आसान है बस ये ध्यान रखना है कि जिसे आपको पेमेंट देनी है वो आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में हो। या फिर आपके पास उसकी यूपीआई आईडी हो। 
  • – आपको पैसे भेजने के लिए अटैचमेंट पर क्लिक करना होगा और फिर पेमेंट पर।
  • – इसके बाद आप अमाउंट लिख कर यूपीआई पिन का इस्तेमाल करेंगे और आसानी से पेमेंट कंप्लीट हो जाएगी। जैसे ही ट्रांजैक्शन पूरा होगा आपके ईमेल व फोन पर मैसेज आ जाएगा। 

बिहार चुनाव: अब राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने PM मोदी को कहा- ‘दंगे वाला CM’, भड़के लोग

बिहार में चल रहे चुनावों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पीएम मोदी के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया है। तीसरे चरण के मतदान से पहले एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘दंगेवाला सीएम’ के रूप में संदर्भित किया। जिससे सोशल मीडिया सहित कई जगहों पर लोग भड़क गए हैं।

जनता को संबोधित करते हुए अब्दुल बारी भाजपा के दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ और पीएम मोदी पर हमलावर होते हुए नजर आए। उन्होंने कहा, “हमने अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों को देखा है। जबकि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता हम लोगों से भिन्न थी। लेकिन वह देश को समझते थे, समाज को समझते थे, यहाँ की संस्कृति को समझते थे। यही कारण है कि अल्पसंख्यक आज भी उनका आदर करते हैं। जिन्हें आज भाजपा निशाना बना रही है। लेकिन मोदी जी को यह अहसास नहीं हो रहा है कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें अब भी लग रहा है कि वह गुजरात के वही दंगेवाले सीएम हैं।”

बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और बिहार सरकार के लोक लेखा समिति के अध्यक्ष राजद नेता ने जारी चुनावों के बीच अपने बयानों के कारण नया बवाल खड़ा कर दिया है। बता दें शनिवार को बिहार में कुल 78 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। इस चुनाव में कुल 2.35 करोड़ वोट डालने के योग्य हैं। चुनावों के तीसरे और अंतिम चरण में 1200 उम्मीदवारों के भाग्य का निर्धारण किया जाएगा।

गौरतलब है कि गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से लौट रही साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में एक डिब्बे में आग लगा दी गई थी। अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया था। इन डिब्बों में कई महिलाएँ और बच्चें भी शामिल थे। इस नरसंहार के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। यह याद रखना उचित है कि पीएम मोदी को 2002 के गुजरात दंगों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दे दी गई थी। जो गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के जलने के बाद भड़की थी।

कस्टडी में बीतेगी अर्णब की तीसरी रात, जमानत पर कल होगी सुनवाई: जानिए वकील हरीश साल्वे ने आज कोर्ट में क्या कहा

अर्णब गोस्वामी के वकील की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की डिवीजन बेंच ने फिर से रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की याचिका को स्थगित कर दिया है। बता दें, इस याचिका में 2018 के आत्महत्या मामले को रद्द करने की माँग की गई है। अदालत ने कहा कि, कोर्ट को निष्कर्ष पर आने से पहले दूसरे पक्ष को सुनने की जरूरत है।

अर्णब गोस्वामी ने जेल से अंतरिम रिहाई की भी माँग की थी। वहीं अब अदालत 7 नवंबर (शनिवार) को दोपहर 12 बजे याचिका पर आगे की सुनवाई जारी रखेगी। इसका मतलब यह होगा कि रिपब्लिक टीवी के प्रमुख को एक और रात न्यायिक हिरासत में बिताना पड़ेगा।

रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्णब गोस्वामी द्वारा दायर की गई बंदी की याचिका की सुनवाई हुई थी। अर्णब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने पीठ को बताया कि अलीबाग अदालत द्वारा रिमांड आदेश अर्णब की अवैध गिरफ्तारी को लेकर कई पॉइंट को दर्शाता है। साथ ही लगाए गए आरोपों की योग्यता पर भी सवाल खड़े करता है।

साल्वे ने न्यायालय को विशेषाधिकार संबंधी कार्यवाही के उल्लंघन से अवगत कराया जिसके तहत आत्महत्या के मामले को फिर से खोला गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को एक अवमानना ​​नोटिस भी जारी किया है।

साल्वे का कहना है कि उन्होंने याचिका के साथ धारा 438 के तहत एक आवेदन दायर किया है। “मेरी याचिका में आरोप लगाया गया है कि जो मामला बंद किया गया था उसे दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ फिर से खोला गया है।”

वहीं गोस्वामी की ओर से पेश अधिवक्ता पोंडा ने अदालत के आदेश को पढ़ा, जिसमें CJM ने उल्लेख किया है कि मामले को फिर से खोलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ को 2019 में बंद किए मामले में फँसाने (जिसमें कोई सबूत नहीं मिला था) और महाराष्ट्र सरकार की चाल पर प्रकाश डालते हुए साल्वे ने अदालत को बताया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में आरोप लगाया था कि अर्णब गोस्वामी इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के जिम्मेदार थे। बता दें नाइक ने कथित तौर पर 2018 में आत्महत्या कर ली थी। उन्‍होंने कहा कि पुलिस अर्णब के लिए पुलिस रिमांड को पाने की कोशिश कर रही थी, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया था।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार के निजी प्रतिशोध पर प्रकाश डालते हुए साल्वे ने अदालत को बताया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने असेंबली में आरोप लगाया था कि अर्णब गोस्वामी इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार थे, जिन्होंने 2018 में कथित रूप से आत्महत्या की थी।

साल्वे ने कहा कि सीजेएम ने अपने आदेश में कहा, “ऐसा लगता है कि आरोपित (अर्णब गोस्वामी) की गिरफ्तारी अवैध है।” साथ ही साल्वे ने विधानसभा में किस प्रकार चर्चा की गई इस ओर भी कोर्ट के ध्यान को आकर्षित किया।

मुंबई पुलिस ने हंसा रिसर्च ग्रुप के कर्मचारियों पर रिपब्लिक के खिलाफ बयान देने का बनाया दबाव

साल्वे ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर का जिक्र करते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक को निशाना बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए। साल्वे ने हंसा रिसर्च ग्रुप का भी हवाला दिया, जिसने अदालत में यह दलील दी कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

शिवसेना नेता संजय राउत पर कटाक्ष करते हुए साल्वे ने अदालत से कहा कि कोई भी व्यक्ति जो कानून से परिचित नहीं है, वह भी इन आरोपितों (जो अर्णब गोस्वामी और अन्य दो आरोपियों को आत्महत्या के मामले में 2018 में आत्महत्या के मामले में दोषी ठहराता है) को प्रथम दृष्टया में आरोपित ठहरा रहा है। मतलब अगर किसी का नाम सुसाइड नोट में है तो उसे जेल में डाल देना चाहिए।

साल्वे ने कहा, “बिना किसी सकारात्मक कार्रवाई के उत्पीड़न के आरोप पर कार्रवाई, अभियुक्त की ओर से होने वाली घटना के समय के लिए कोई सकारात्मक कार्रवाई न होना, जिसके कारण व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया हो, धारा 306 आईपीसी के संदर्भ में सजा टिकाऊ नहीं है।” साल्वे ने दोहराया कि अगर अन्वय नायक ने वित्तीय नुकसान के कारण आत्महत्या की, तो उनकी माँ ने अपना जीवन क्यों समाप्त कर लिया? हम आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों को नहीं जानते हैं। किसी ने यह स्थापित नहीं किया कि अवैध कमीशन है। साल्वे ने तर्क देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में अर्नब को हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

साल्वे ने पीठ को बताया कि मजिस्ट्रेट को प्रथम दृष्टया पता चलता है कि गिरफ्तारी गैरकानूनी है और सारा कृत्य आपसी दुश्मनी का है। अर्णब के वकील ने विभिन्न पिछले मामलों का हवाला देते हुए बताया कि उच्च न्यायालय असाधारण परिस्थितियों में अनुच्छेद 226 के तहत भी जमानत दे सकता है।

गौरतलब है कि गोस्वामी को रायगढ़ पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह उनके मुंबई आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अलीबाग के CJM ने उन्हें 18 नवंबर तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

जिस पर HC में दायर याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क यह है कि मजिस्ट्रेट द्वारा 2019 में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक क्लोजर आदेश पारित होने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई पावर नहीं है।

दीदी का उद्देश्य अपने भतीजे को CM बनाना, नहीं भेजे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को 2018 के बाद के रिकॉर्ड: अमित शाह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अगले साल होने वाले हैं लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अभी से प्रदेश में अपना मुआएना करना शुरू कर दिया है। दो दिन का प्रदेश दौरा करने पहुँचे गृहमंत्री ममता सरकार पर जम कर वार कर रहे हैं। कल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बंगाल को एक बार फिर सोनार बांग्ला बनाने का आह्वान किया। वहीं दूसरे दिन की शुरुआत उन्होंने दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा के साथ की।

इसके बाद वह एक स्थानीय कार्यकर्ता नवीन बिस्वास के घर पहुँचे और परंपरागत तरीके से जमीन पर बैठकर भोजन किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि वो नवीन बिस्वास और उनके परिवार के आतिथ्य भाव के लिए उनके आभारी रहेंगे।

फिर, अपने दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमित शाह ने कहा कि टीएमसी सरकार पिछले 10 सालों में उम्मीदो पर खरा नहीं उतर पाई है। जनता से किए वादे भी पूरे नहीं हुए हैं इसलिए लोगों की उम्मीद गुस्से में बदल चुकी हैं।

उन्होंने कहा, “आज मेरा बंगाल का दो दिवसीय दौरा समाप्त हो रहा है। इस दौरे के दौरान भाजपा के 4 विभागों के कार्यकर्ता और समाज के अन्य कार्यकर्ताओं से मिलना हुआ। करीब 180 से ज्यादा संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी संवाद हुआ।”

गृहमंत्री ने कहा कि बंगाल में कम्युनिस्ट शासन से त्रस्त होकर ममता बनर्जी के हाथों में बंगाल की कमान दी गई थी। मगर आज माँ, माटी और मानुष का नारा तुष्टिकरण, तानाशाही और टोलबाजी में परिवर्तित हो गया है।

उनके अनुसार, “बंगाल की जनता में एक अजीब प्रकार का वातावरण दिख रहा है। मैं जहाँ भी गया तो सैकड़ों लोग सड़कों पर आए थे। जब वो भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय श्रीराम के नारे लगाते थे, वो हमारे स्वागत में कम, ममता सरकार के प्रति गुस्से को ज्यादा दिखाते थे।”

बंगाल की जनता को आश्वस्त करते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करने आया हूँ कि आपने कॉन्ग्रेस को भी 1 मौका दिया, कम्युनिस्टों को भी बार-बार मौके दिए और 2 मौके ममता जी को दिए। एक मौका मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को दे दीजिए, हम 5 वर्ष के भीतर सोनार बांग्ला बनाने का वादा करते हैं।”

बंगाल विकास, सुरक्षित सीमा और घुसपैठ नियंत्रण को अपना स्पष्ट लक्ष्य बताते हुए कहा कि TMC और दीदी का एकमात्र लक्ष्य है कि अगले टर्म में भतीजे को मुख्यमंत्री बना देना है। अब बंगाल की जनता को तय करना है कि परिवारवाद चाहिए या विकासवाद चाहिए।  

अमित शाह ने कहा, “मैं ममता जी से पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को 2018 के बाद से पश्चिम बंगाल के अपराध रिकॉर्ड क्यों नहीं भेजे? आप क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं और क्यों? लोग राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं।”

उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल के विधानसभा चुनाव वह 200 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे और प्रदेश में उनकी सरकार ही बनेगी। उनका कहना है कि जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा बंगाल चुनाव को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इससे सरकार की सुरक्षा जुड़ी है, साथ ही अति पिछड़े गरीब लोगों के भले का भी सवाल है। 

ताहिर खान ने भारती को झाँसी से किया था किडनैप, संदिग्ध हालत में भोपाल में हुई मौत: परिवार ने लगाया लव जिहाद का आरोप

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद का शिकार बनी यूपी की लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जून 2019 में झाँसी से ताहिर खान ने मिनी भारती को किडनैप कर लिया था। जिसकी पहचान अब तरन्नुम नाम से हुई है। पुलिस ने मामले में 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के कोलार इलाके के गेहूँखेड़ा में रहने वाला ताहिर खान नाम का युवक डेढ़ साल पहले नाबालिक युवती को बहला फुसलाकर झाँसी से भगाकर भोपाल ले आया था और उसके बाद उसकी कोई खोज खबर नहीं थी। युवती की मौत के बाद परिजनों को भारती के बारे में पुलिस से पता चला।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर खान ने गंभीर अवस्था मे नाबालिग हिंदू युवती को तरन्नुम नाम से चूनाभट्टी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान युवकी की संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने युवती का कनेक्शन यूपी के झाँसी में पाया।

भोपाल पुलिस तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की जानकारी यूपी पुलिस को दी। जिस दौरान पुलिस को मृतक लड़की के असली नाम और परिजनों का पता चला। जिसे अस्पताल में ताहिर खान ने तरन्नुम नाम से अपनी पत्नी रूप में भर्ती करवाया था।

परिजनों का आरोप हैं कि बेटी को बहला फुसलाकर भोपाल लाने के बाद आरोपित ताहिर ने बेटी का नाम बदलकर तरन्नुम कर दिया और उसी नाम से उसको अस्पताल में भर्ती कराया। लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया कि लड़की को बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने इस मामले में अभी कोई भी जानकारी नहीं दी है। हालाँकि, हिंदू संगठनों ने भी घटना पर नाराजगी जताई है और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने कहा, मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। साथ ही धर्म परिवर्तन की बात जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। एसपी साईं कृष्णा एस थोटे ने बताया कि पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की पड़ताल कर रही है।