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बागपत: मस्जिद में हनुमान चालीसा पाठ की परमिशन देने से आहत मुस्लिमों ने गुप्त बैठक कर मौलाना को निकाला, हिन्दू करेंगे पंचायत

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सौहार्द का हवाला देते हुए विनयपुर गाँव की मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने की परमिशन देने वाले मौलाना को मस्जिद से निकाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मौलाना अपना पूरा सामान लेकर गाजियाबाद स्थित लोनी चला गया है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा आयोजित की गई गोपनीय बैठक में मौलाना को हटाने का निर्णय लिया गया। वहीं दूसरी तरफ हिन्दू समुदाय के लोग मौलाना को समर्थन देने के लिए पंचायत की तैयार पूरी कर चुके हैं। 

दरअसल बागपत में खेकड़ा क्षेत्र के विनयपुर गाँव में भाजपा की जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल मंगलवार (नंवबर 3, 2020) को मस्जिद में पहुँचे थे। उनका कहना था कि मौलाना अली हसन से इजाजत लेने के बाद उन्होंने भाईचारे के लिए पवित्र स्थान मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान चालीसा के पाठ को फेसबुक पर लाइव किया गया और गायत्री मंत्र का पाठ भी किया गया था। 

इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई थीं। मनुपाल बंसल जिला पंचायत चुनाव की तैयारियाँ में भी जुटे हुए हैं। एसपी अभिषेक सिंह का कहना है कि पुलिस ने जानकारी मिलते ही मामले की जाँच कराई। मौलाना की सहमति ली गई थी। मनुपाल बंसल विनयपुर की मस्जिद में जाते रहते हैं।

इस वीडियो में वह यह भी अपील कर रहे थे कि कोई ऐसे मामलों को तूल न दें और लोग आपसी सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी लोग भाईचारे से रहें। कोई तर्क-वितर्क न करें, हम सब हिंदुस्तानी हैं, कोई किसी पर कटाक्ष न करें।

वहीं, मस्जिद के मौलाना अली हसन ने कहा था कि ऊपर वाले का नाम कहीं भी बैठकर लिया जा सकता है। सब जगह उसकी बनाई हुई है। उन्होंने ही मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठन करने की इजाजत दी थी। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। सभी लोग भाईचारे से काम लें।

हरियाणा: गुंडों ने पुजारी को बल्ले से पीटकर किया अधमरा, गंभीर हालत में मथुरा के अस्पताल में भर्ती

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक वीडियो काफी चर्चा में बना हुआ है, जिसमें एक पुजारी को कुछ लोग क्रिकेट के बल्ले से पीट रहे हैं। घटना हरियाणा, फतेहगढ़ जिले स्थित भट्टू कलाँ ब्लॉक के ढाबी कलाँ गाँव की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पुजारी की पहचान 26 वर्षीय कैलाश शर्मा के रूप में हुई है जो कि मूल रूप से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित एक गाँव के निवासी हैं। वह पिछले दो सालों से अपने भाई रामजी के पास हरियाणा में भट्टू कलाँ गाँव में रह रहे हैं। 

आज से लगभग 6 महीने पहले उन्हें ढाबी कलाँ गाँव के मंदिर का पुजारी बनाया गया था। सोमवार (नवंबर 02, 2020) को गाँव के कई युवाओं ने उस पुजारी पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं, हमलावरों ने इस क्रूर कृत्य का वीडियो भी बना लिया जो पूरे इंटरनेट पर काफी वायरल हो चुका है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि पुजारी को हमलावर क्रिकेट के बल्ले से बुरी तरह पीट रहे हैं और इस दौरान वह पुजारी लगातार खुद पर दया करने की याचना करते नजर आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पुजारी की चीख-पुकार सुनने के बाद गाँव के लोग मौके पर पहुँचे और उसे हमलावरों से बचाया। इसके बाद गाँव वालों ने पुजारी के परिवारों को भी इस मामले की सूचना दी, घटना की जानकारी मिलते ही पुजारी का भाई और उसके पिता चरण दास घटनास्थल पर पहुँचे और उसे अपने साथ गाँव (मध्य प्रदेश) लेकर गए। पुजारी का परिवार घटना का वीडियो देख कर दहशत में था। इतना ही नहीं पुजारी के पिता ने उसका उपचार हरियाणा में कराने के बजाय मध्य प्रदेश के अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय लिया। 

घर जाने के दौरान जब रास्ते में पुजारी कैलाश शर्मा की स्थिति बिगड़ी तब उन्हें मथुरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कैलाश के पिता चरण दास ने इस घटना पर कहा कि उनके बेटे पर बुरी तरह हमला हुआ है और वह हमलावरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

परिवार के लोगों ने कहा कि मेडिकल परीक्षण के आधार पर हमलावरों के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाएगा। वहीं, इस मामले पर पुलिस अधिकारी राजपाल का कहना था कि अभी तक उन्हें इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर मामले की जाँच शुरू कर दी है।   

पंजाब: J&K से लाई गई ₹200 करोड़ कीमत की 34 किलो ड्रग्स बरामद, 3 गिरफ्तार

ड्रग्स के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) ने 34 किलोग्राम ड्रग्स बरामद की है। इस ड्रग्स की कीमत अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में लगभग 200 करोड़ रूपए है। इसके अलावा, एसटीएफ़ ने इस मामले के तहत लुधियाना में तस्करों (स्मगलर्स) को भी गिरफ्तार किया है। 

जब्त की गई ड्रग्स में 28 किलो हेरोइन है और 6 किलो आइस ड्रग्स है। इतनी हेरोइन की कीमत 140 करोड़ रूपए बताई जा रही है। एसटीएफ़ के अधिकारिओं के अनुसार, मामले के आरोपित पूरे देश में ड्रग्स का वितरण (सप्लाई) कर रहे थे और इनके संबंध अंतरराष्ट्रीय तस्करों से भी थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान 30 वर्षीय मंजीत सिंह मन्ना (नया भगवान नगर, जोधवाल), 20 वर्षीय विशाल (बटाला, गुरदासपुर) और 40 वर्षीय अँगरेज़ सिंह (पटियाला) के रूप में हुई है। 

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले के कुछ अन्य आरोपितों की भी पहचान हुई है, जिसमें राजन शर्मा, हैप्पी रंधावा हरमिंदर सिंह, सनी और तनवीर बेदी शामिल हैं। एसटीएफ़ आईजी आरके जायसवाल के मुताबिक़ उन्हें सूत्रों से जानकारी मिली, जिसके बाद सोमवार की शाम उन्होंने साहनेवाल के पास मंजीत मन्ना को गिरफ्तार किया जब वह अपनी एसयूवी में घूम रहा था। खोजबीन के दौरान अधिकारियों ने गाड़ी के बूट स्पेस में बने खुफ़िया कम्पार्टमेंट में बनाई गई जगह के भीतर 18 किलो हेरोइन और 6 किलो आइस ड्रग्स बरामद की। पूछताछ के दौरान मंजीत ने अपने अन्य साथियों के बारे में पूरी जानकारी दी।

मंजीत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर एसटीएफ़ ने छापा मार कर विशाल और अँगरेज़ को फगवाड़ा बंगा रोड स्थित बेहरम प्लाज़ा से गिरफ्तार किया। 3 नवंबर को हुई इस छापेमारी में उनके पास से लगभग 10 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। विशाल और अँगरेज़ सिंह ने अपनी गाड़ी के बूट स्पेस और दरवाजों में ड्रग्स छिपा रखी थी। आरोपित ड्रग्स श्रीनगर, जम्मू कश्मीर से लेकर आए थे जिसे वह पंजाब समेत कई अन्य राज्यों में बेचने वाले थे। 

अधिकारियों ने इस बात का दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपित तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय तस्करों से संबंध होने की बात कही। अँगरेज़ सिंह लुधियाना के किताब बाज़ार की कार पार्किंग में काम करता था। फ़िलहाल इन आरोपितों को 8 नवंबर तक की हिरासत में भेज दिया गया है। पंजाब में पिछले 4 सालों में लगभग 13 बार आइस ड्रग्स पकड़ी गई है लेकिन इस कार्रवाई को अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। 

अर्णब 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, अदालत ने कहा- हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं: आज होगी सुनवाई

मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के लिए मुंबई की अदालत में याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। साथ ही, अर्णब को जल्द ही जमानत मिलने की भी सम्भावना है, जिसका आशय है कि शायद उन्हें न्यायिक हिरासत में भी न रहना पड़े।

मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को बीते दिन एक पुराने ‘बंद मामले’ में गिरफ्तार किया था। आधी रात में चली सुनवाई के बाद अलीबाग न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसका मतलब यह है कि इस दौरान मुंबई पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर पाएगी। 

बुधवार (नवम्बर 04, 2020) की सुबह पुलिसकर्मियों के एक बड़े समूह जिनके पास एके 47 जैसे हथियार तक मौजूद थे, उन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। शुरुआत में अदालत के भीतर पेशी के दौरान, अदालत ने उनके मेडिकल परीक्षण का आदेश दिया क्योंकि पुलिस ने अर्णब गोस्वामी के साथ हिंसा भी की थी। मेडिकल परीक्षण के बाद अर्नब को शाम 4:45 बजे के आस-पास दोबारा अदालत में पेश किया गया था जिसमें 14 दिन की न्यायिक हिरासत की माँग की गई थी। 

मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को साल 2018 के एक बंद मामले में गिरफ्तार किया गया था जिसमें उनके विरुद्ध कोई सबूत नहीं मिला था। इस मामले में साल 2018 के दौरान अन्वय नायक नाम के व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी, उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि कि अर्नब गोस्वामी समेत कुल दो लोगों के पास कुछ रूपए मौजूद हैं और वह वापस करने से इनकार कर रहे हैं। इसकी वजह से उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए वह आत्महत्या कर रहे हैं। रिपब्लिक ने इस तरह के तमाम आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने अनुबंध के मुताबिक़ सारे भुगतान कर दिए थे। 

अदालत द्वारा उल्लेखित बिंदु 

  • पुलिस हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं
  • आत्महत्या और अर्नब गोस्वामी के बीच किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं
  • अदालत की अनुमति के बिना पुराने मामले की फाइल को दोबारा खोला गया

मुंबई पुलिस ने दावा करते हुए कहा था कि जिस मामले को अदालत ने साल 2018 में बंद कर दिया था उसमें पुलिस को नए सबूत हासिल हुए हैं। इसकी वजह से उन्हें मामले की जाँच के लिए अर्णब गोस्वामी को पुलिस हिरासत में रखने की माँग उठाई थी। 6 घंटे की मैराथन सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस हिरासत की माँग को ठुकराते हुए अर्णब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 

अदालत ने कहा इस मामले में पुलिस हिरासत के लिए कोई अर्थपूर्ण आधार नहीं हैं। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि मामले आत्महत्या और अर्णब गोस्वामी की भूमिका के बीच संबंधों की कोई कड़ी नज़र नहीं आती है। न्यायाधीश ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह एक पुराना मामला है जिसकी फाइल बंद हो चुकी थी और इसे बिना अदालत की अनुमति के शुरू किया गया है। 

आधी रात में सुनवाई पूरी होने के और फैसला आने के बाद अर्णब गोस्वामी ने कहा, “पुलिस हार चुकी है।”

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने अर्णब गोस्वामी के वकील को जमानत संबंधी दस्तावेज़ तैयार रखने के लिए कहा है। आज सुबह अलीबाग अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी। इसी दौरान मुंबई उच्च न्यायालय साल अर्नब गोस्वामी द्वारा दायर की गई 2018 के इस मामले को ख़त्म करने की याचिका पर भी सुनवाई करेगी।

इसके अलावा,  मुंबई उच्च न्यायालय रिपब्लिक टीवी की मुंबई पुलिस के विरुद्ध दायर की गई याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने इंडिया टुडे समूह का बचाव करते हुए उन्हें टीआरपी से छेड़छाड़ का आरोपित बताया है। जबकि इंडिया टुडे का नाम इस मामले में प्राथमिक रूप से दर्ज था।  

बार एसोसिएशन ने अर्णब की रिहाई के लिए राज्यपाल को लिखा पत्र, गिरफ्तारी को बताया SC के दिशानिर्देशों का उलंघन

मुंबई पुलिस द्वारा 2018 के एक बंद मामले में गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को देश भर के अलग अलग कोने से समर्थन मिल रहा है। साथ ही, अर्णब गोस्वामी की रिहाई की माँग को लेकर देश में बहुत जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

इसी कड़ी में ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पत्र लिखते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उलंघन करते हुए गोस्वामी की गिरफ़्तारी हुई है।

एआईबीए द्वारा साझा की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एआईबीए के अध्यक्ष डॉ आदिश सिंह अग्रवाल ने राज्यपाल से गोस्वामी को तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के इस कार्रवाई को ‘सत्ता का दुरुपयोग” और ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला’ ठहराया है। प्रेस विज्ञप्ति ने उन दिशानिर्देशों को भी सूचीबद्ध किया जिसका मुंबई पुलिस ने गोस्वामी को गिरफ्तार करने में उल्लंघन किया था।

सुप्रीम कोर्ट के वकील ने CJI को लिखा पत्र

मुंबई पुलिस द्वारा गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक वकील सिद्धार्थ आचार्य ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को पत्र लिखा है।

आचार्य ने CJI से अनुरोध किया कि वह मुंबई पुलिस की कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में वर्णित करते हुए गोस्वामी की गिरफ्तारी का स्वत: संज्ञान लें। उन्होंने लिखा है कि शुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध का लेकर की गई ‘अवैध’ गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है।

आचार्य ने लिखा, “यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि अर्णब को न तो पहले नोटिस दिया गया और न ही उनको अपनी कानूनी टीम से इस बारे में बातचीत करने का मौका दिया गया। अर्णब की गिरफ्तारी करते समय कानून की विधिवत प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया है। यह महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई पुलिस का दुरुपयोग कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा और अभूतपूर्व हमला है ”।

उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत दुश्मनी निकलने के लिए राज्य की शक्ति का घोर दुरुपयोग था। उन्होंने सीजेआई से मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को तत्काल रिहाई के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।

मुंबई पुलिस ने अर्णब, उनकी पत्नी व बेटे पर भी दर्ज की FIR, पुलिस को पीटने का लगाया आरोप

मुंबई पुलिस ने बुधवार (नवंबर 4, 2020) शाम को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी और उनकी पत्‍नी, बेटे और दो अन्‍य के खिलाफ एक ताजा एफआईआर दर्ज की। उन्‍होंने गिरफ्तार करने गए पुलिस अधिकारियों के सामने विरोध दर्ज कराया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353, 504, 506 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

इस एफआईआर में कहा गया है कि जब पुलिस की टीम अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने उनके घर पहुँची तो उस दौरान उन्होंने महिला पुलिस अधिकारी सुजाता तानवडे से मारपीट की। जबकि सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि अर्णब के साथ मुंबई पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

साभार: Live Law

अर्णब गोस्वामी के समर्थन में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी बुधवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पहुँचे और महाराष्ट्र में अर्णब की चौंकाने वाली गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया।

मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा, “अर्नब, फाइट! भारत के दिग्गज आपके साथ हैं, मेरे लड़के! आप एक शेर के बेटे हैं। डरिए मत। क्या आपको लगता है कि हम इस घटना को आसानी से जाने देंगे? उन्होंने उकसाया है! उन्होंने लोगों को उकसाया है। उन्होंने एक सेना अधिकारी के बेटे को उकसाया है।”

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में बुधवार को दिल्‍ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी की तुलना आपातकाल से की। वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र के भाजपा कार्यकर्ता काले बिल्ले या काले कपड़े पहनेंगे, जब तक कि टेलीविजन पत्रकार अर्नब गोस्वामी को पुलिस द्वारा रिहा नहीं किया जाता है।  

महाराष्‍ट्र के भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने रिपब्लिक टीवी के संपादक की आत्महत्या मामले में गिरफ्तारी को ‘आपातकाल की तरह’ करार दिया। उन्‍होंने कहा कि अर्णब की रिहाई तक भाजपा कार्यकर्ता काले बैज या काले कपड़े पहनेंगे। भाजपा नेता ने कहा कि मामला गोस्वामी के खिलाफ था, एक राजनीतिक स्कोर को सुलझाने के लिए फिर से खोल दिया।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष वीडी शर्मा, सांसद साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और भाजपा कार्यकर्ताओं ने टार्च रैली निकाली। बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “सत्य की बात जो भी करेगा हम उसके साथ हैं। अर्णब के साथ गलत हो रहा है। सच के आवाज से उद्धव सरकार डर गई है। ये लोकतंत्र है, लोग कहते हैं BJP लोकतंत्र की हत्या करती है लेकिन BJP हमेशा लोकतंत्र की रक्षा करती है।”

वहीं ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और मुंबई पुलिस की ‘मनमानी’ पर हैरानी जताई। IDMA ने कहा कि वीडियो में दिख रहे विजुअल्स से ये स्पष्ट है कि पुलिस अर्णब गोस्वामी की पत्नी पर लगातार दबाव बना रही थी और उन्हें जबरन एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कह रही थी, और वो कौन से दस्तावेज थे, ये स्पष्ट नहीं है। IDMA ने इसे ‘महाराष्ट्र सरकार की मनमानी की हैरान कर देने वाली अवस्था’ बताया और कहा कि एक पत्रकार को चुप कराने के लिए स्टेट मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अर्णब ने वीडियो संदेश जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि मुंबई पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। अर्णब ने अपने वीडियो में कहा कि उनके साथ प्रदीप पाटिल समेत 8 पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की है और मारपीट की है। उन्हें धक्का दिया और गले से पकड़ा। उन्होंने कहा, पुलिस द्वारा जबरन उन्हें घर से उठाकर लाया गया है। यहाँ तक कि उनके पैरों में जूते भी नहीं थे। अर्णब ने हाथ में जख्म भी दिखाया और कहा कि उन्होंने डॉक्टरों को अपनी चोट दिखाई, जो कि उनके अनुसार मुंबई पुलिस द्वारा उनके साथ की गई मारपीट में उन्हें लगी है।

अर्णब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने उनके, उनकी पत्नी, बेटे और सास-ससुर के साथ हाथापाई की। रिपब्लिक टीवी ने इस पूरे मामले पर बयान जारी कर अपना पक्ष भी रखा है। पुलिस का कहना है कि अर्णब गोस्वामी को 53 साल के एक इंटीरियर डिज़ाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।

पत्रकारिता से जुड़ी हर बड़ी संस्था बेकार हो चुकी है: अशोक श्रीवास्तव, टीवी पत्रकार (डीडी न्यूज)

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सामने विरोध प्रदर्शन हुआ। यहीं पर हमने टीवी पत्रकार अशोक श्रीवास्तव से इस मुद्दे पर बातचीत की। उनसे जब एक चैनल को टारगेट करके हजारों पत्रकार पर श्रृंखलाबद्ध तरीके से किए गए हमले और बाकी ‘पत्रकारों’ की चुप्पी पर राय पूछी गई तो उन्होंने कहा, “मैं मानता हूँ कि जो लोग आज चुप बैठे हैं, वो पत्रकार नहीं, ‘पत्तलकार’ हैं। जो पत्तल लेकर बैठे रहते हैं कि सरकार उनकी पत्तल में कुछ डाल दे।”

वो आगे कहते हैं कि ये पत्रकार सरकार के पैसे और सहानुभूति पर ही पलते हैं और अभी इसलिए विरोध नहीं कर रहे हैं कि कल को कहीं अगर केंद्र में कॉन्ग्रेस समर्थित सरकार आ गई तो इन्हें बंगले और विदेशी यात्राओं की सुविधा नहीं मिलेगी। उनका कहना था कि एक जज पर हमला होता है, तो पूरे जज एक हो जाते हैं, एक वकील पर हमला होता है, तो पूरे वकील एक हो जाते हैं, लेकिन पत्रकारों की कौम एक साथ नहीं होती, क्योंकि वो सरकार के दम पर पलते हैं।

वहीं, ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ या ‘प्रेस क्लब’ जैसी बड़ी संस्थाओं के बारे में बात करते हुए अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि ये सभी संस्थाएँ अप्रासंगिक हो चुकी है। ये बिकी हुई कलम के लोग हैं। अशोक श्रीवास्तव ने कहा, “बहुत सारे आवाज न उठाने वाले पत्रकार इसलिए भी परेशान हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसने इतनी जल्दी टीआरपी ले ली। इसने हमारी टीआरपी खत्म कर दी। एक साल में 2 चैनल खड़े कर दिए। अगर आप में दम है तो अर्णब से कॉम्पिटीशन कीजिए। आप उससे बड़ा एम्पायर खड़ा कीजिए, लेकिन नहीं कर पाओगे तो कहोगे कि ये तो पत्रकारिता नहीं है। आप कौन हो सर्टिफिकेट देने वाले?”

अशोक श्रीवास्तव ने इण्डिया टुडे के प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप सरदेसाई और एनडीटीवी के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार की पत्रकारिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वो जो कुछ भी कर रहे हैं, वो पत्रकारिता है क्या? पत्रकारिता का सर्टिफिकेट कोई किसी को नहीं दे सकता है।

अशोक श्रीवास्तव के साथ हमारी पूरी बातचीत इस लिंक पर क्लिक करके देखें

बाला साहब की नालायक औलाद ने राष्ट्र का विश्वास तोड़ा: हिमंत बिस्वा सरमा

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की बुधवार (अक्टूबर 04, 2020) सुबह मुंबई पुलिस द्वारा जबरन गिरफ्तारी करने के बाद, बहुत से लोग उनके समर्थन में आए हैं। वहीं असम के शिक्षा और वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उद्धव सरकार को जमकर लताड़ा है। हिमंत बिस्वा सरमा ने उद्धव ठाकरे को बालासाहेब ठाकरे का नालायक बेटा तक कहा।

सरमा ने कहा कि उद्धव ने राष्ट्र के विश्वास के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बाला साहेब ठाकरे का नालायक बेटा करार दिया और कहा कि ठाकरे ने अपने दिवंगत पिता, महाराष्ट्र और देश को बदनाम किया है।

सरमा ने मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह पूरे भारत में सबसे कायर अधिकारी हैं। उन्होंने कहा- “मैंने सुना था कि मुंबई पुलिस कमिश्नर एक मजबूत अधिकारी थे लेकिन अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के लिए उन्हें एके-47 के साथ पुलिस भेजनी पड़ी, इसका मतलब है कि वह पूरे भारत में सबसे कायर अधिकारी हैं।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि महाराष्‍ट्र सरकार को फौरन अर्णब गोस्‍वामी को रिहा करना चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। असम के लोग उनकी करतूत को बारीकी से देख रहे हैं। सीएम को लोकतंत्र की आवाज सुननी चाहिए और एक साधारण पत्रकार को परेशान नहीं करना चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए, असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ कदम बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसा लगता है जैसे ‘महाराष्ट्र में आपातकाल के दिन वापस आ गए हैं।’

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ सत्ता की शक्ति का दुरूपयोग करना व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है। अमित शाह ने गोस्वामी पर कार्रवाई को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला करार दिया।

इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर ‘लेफ्ट-लिबरल’ लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाया। उद्धव सरकार की आलोचना करते और कॉन्ग्रेस को घेरते हुए उन्होंने पूछा,”महाराष्ट्र सरकार आपातकाल को वापस लाने की कोशिश कर रही है।”

उन्होंने उल्लेख किया कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में काफी समय से अपशब्द कहे जाते रहे हैं लेकिन बीजेपी ने दूर-दूर तक भी वो नहीं किया जो कॉन्ग्रेस ने किया है।”

वहीं कंगना रनौत ने महाराष्ट्र की सरकार को ‘सोनिया सेना’ करार देते हुए कहा कि उनसे पहले तो कितने ही बलिदानियों के गले काटे गए और उन्हें लटका दिया गया, सिर्फ फ्री स्पीच के लिए। उन्होंने कहा, “एक आवाज़ बंद करेंगे तो कई आवाज़ें उठ जाएँगी। कितनी आवाजों को बंद करेंगे आप?”

कंगना ने पूछा कि आपको कोई पेंगुइन, पप्पू सेना या सोनिया सेना कहता है तो गुस्सा क्यों आता है? उन्होंने कहा कि आप ये सब हो, तभी कोई कहता है। बता दें कि मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्‍वामी को एक इंटीरियर डिजाइनर की आत्महत्या से जुड़े दो साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया है।

‘मेरे साथ 9 पुलिसवालों ने मारपीट की, मुझे धक्का दिया’: अर्णब ने दिखाए हाथ पर चोट के निशान, कल होगी सुनवाई

मुंबई पुलिस ने आज सुबह रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। कथित तौर पर इस दौरान पुलिस ने उनके और उनके नाबालिग बेटे के साथ हाथापाई की और परिजनों से बदतमीजी भी की। वहीं, अब अर्णब ने वीडियो संदेश जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि मुंबई पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब ने अपने वीडियो में कहा, उनके साथ प्रदीप पाटिल समेत 8 पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की है और मारपीट की है। उन्हें धक्का दिया और गले से पकड़ा। उन्होंने कहा, पुलिस द्वारा जबरन मुझे घर से उठाकर लाया गया है। यहाँ तक कि मेरे पैरों में जूते भी नहीं थे।

अर्णब ने हाथ में जख्म भी दिखाया और कहा कि, मैंने डॉक्टरों को अपनी चोट दिखाई, जो कि उनके अनुसार मुंबई पुलिस द्वारा उनके साथ की गई मारपीट में उन्हें लगी है। इस दौरान आप देख सकते है कि वीडियो में पुलिस उन्हें ले जाती हुई दिख रही और वो पुलिस से लगातार धक्का न देने की बात भी कह रहे हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट कल, बृहस्पतिवार को दोपहर 3 बजे अर्णब गोस्वामी की अवैध गिरफ्तारी की याचिका पर सुनवाई करेगी। पुलिस द्वारा अर्णब के साथ मारपीट करने और उनके शरीर पर चोट लगने के बाद, अलीबाग अदालत ने उनके मेडिकल चेकअप का आदेश दिया था। ये पूरी घटना कैमरे पर कैद हो गई जब पुलिस अर्नब को उनके घर से घसीटकर ले जा रही थी।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर तमाम लोग अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ दिल्ली प्रेस क्लब के बाहर पत्रकार प्रदर्शन करते हुए दिखाई दी, तो वहीं, बीजेपी के बड़े नेता कॉन्ग्रेस और उद्धव की सरकार को घेरते हुए नजर आ रहे।

इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर ‘लेफ्ट-लिबरल’ लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाया। उद्धव सरकार की आलोचना करते और कॉन्ग्रेस को घेरते हुए उन्होंने पूछा,”महाराष्ट्र सरकार आपातकाल को वापस लाने की कोशिश कर रही है”, उन्होंने कहा कि “विदेश में कई मीडिया आउटलेट्स ने राज्य सरकार के हमले को नजरअंदाज कर दिया है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में काफी समय से अपशब्द कहे जाते रहे हैं लेकिन बीजेपी ने दूर-दूर तक भी वो नहीं किया जो कॉन्ग्रेस ने किया है।

उन्होंने कहा, “नापसंद होने पर भी एक स्व-निर्मित पत्रकार का लगातार उत्पीड़न अस्वीकार्य है।” उनके मुताबिक, “अर्णब को गिरफ्तार करने के लिए सशस्त्र पुलिस भेजने से महाराष्ट्र सरकार की असुरक्षा दिख गई।” कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कि उन्होंने पूछा कि क्या सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने इस कार्रवाई को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक के अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार कर मीडिया की आवाज़ को दबाने की कोशिश की है, जिसका मैं विरोध करता हूँ। महाराष्ट्र सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग कर इमरजेंसी जैसे हालात बना दिए हैं, जनता इन्हें इसके लिए कभी माफ़ नहीं करेगी।”

बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “सत्य की बात जो भी करेगा हम उसके साथ हैं। अर्णब के साथ गलत हो रहा है। सच के आवाज से उद्धव सरकार डर गई है। ये लोकतंत्र है, लोग कहते हैं BJP लोकतंत्र की हत्या करती है लेकिन BJP हमेशा लोकतंत्र की रक्षा करती है।”

गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, देश के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले की सच्चाई सामने लाने वाले अर्णब की गिरफ्तारी गलत है। महाराष्ट्र सरकार से उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग करता हूँ।

बाबा का ढाबा: यूट्यूबर ने लगाया मानहानि का आरोप, कांता प्रसाद ने कहा- गलत साबित हुए तो माँग लेंगे माफ़ी

पिछले महीने दिल्ली के जिस ‘बाबा का ढाबा’ ने देशभर में सुर्खियाँ बटोरीं, वह अब फिर से खबरों में है। मगर इस बार गलत कारणों से। बाबा को दुनिया भर में मशहूर करने वाले यूट्यूबर गौरव वासन ने ढाबा मालिक 80 वर्षीय बुजुर्ग कांता प्रसाद पर मानहानि का आरोप लगाया है। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में ‘बाबा का ढाबा’ से जुड़े मामले की जाँच के बीच यूट्यूबर गौरव वासन ने कहा कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है। हालाँकि, बाबा का ढाबा के मालिक का कहना है कि अब अगर वो गलत साबित हुए तो गौरव वासन से माफ़ी माँग लेंगे क्योंकि आखिरकार गौरव ने उनकी मदद की है।

गौरव का दावा है कि उन्होंने ढाबा मालिक को 3.78 लाख रुपए की राशि सौंपी थी। वासन ने ‘बाबा का ढाबा’ के मालिक का वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड किया था जिसके बाद यह वीडियो वायरल हुआ और लोग ढाबा मालिक कांता प्रसाद की मदद के लिए आगे आए थे। हालाँकि वीडियो वायरल होने के करीब एक महीने बाद ढाबा मालिक कांता प्रसाद ने इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर गौरव वासन के खिलाफ पैसों की हेराफेरी की शिकायत दर्ज कराई है।

कांता प्रसाद ने कहा कि उन्हें वासन से 2.33 लाख रुपए का चेक हासिल हुआ। जब उनसे बाकी राशि के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि उनके नाम पर वासन ने कितने रुपए जमा किए, इस बारे में या तो वासन को या फिर देने वाले को ही जानकारी होगी।

‘गलत हुए तो माँग लेंगे माफ़ी’

वहीं, NBT की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाबा का ढाबा के मालिक कांता प्रसाद से जब इस बारे में पूछा गया कि अगर पुलिस की जाँच में गौरव वासन पर उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत साबित हुए तो वो क्या करेंगे? इस पर कांता प्रसाद ने कहा कि समय आने पर देखेंगे कि क्या करना है।

उन्होंने कहा कि अभी इस सम्बन्ध में जाँच हो रही है और उन्हें माफी माँगने में कोई झिझक नहीं होगी, क्योंकि गौरव ने उनका भला ही किया था, लेकिन छोटी सी बात के लिए वो खुद फंस गए। कांता प्रसाद ने कहा कि जाँच में गलत साबित हुए तो वो माफी माँग लेंगे हालाँकि, इस बात का पछतावा रहेगा, क्योंकि अगले व्यक्ति ने मदद ही की थी।

इस आरोप से इनकार करते हुए वासन ने कहा, “झूठे दावे करके वह मुझे बदनाम कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मेरे बैंक खाते में मदद के लिए 25 लाख रुपए आए, जो कि सही नहीं है।” जब उनसे पूछा गया कि उन्हें मदद के लिए कितनी राशि मिली तो वासन ने बताया कि उनके पास इस संबंध में करीब 3.78 लाख रुपए आए जिसमें पेटीएम से मिली राशि भी शामिल है। 

गौरव वासन ने दावा किया कि उन्होंने कांता प्रसाद को दो चेक दिए- एक चेक एक लाख रुपए जबकि दूसरा चेक 2.33 लाख रुपए का था, जबकि 45,000 रुपए प्रसाद को पेटीएम के जरिए दिए।

गौरव वासन पर लगा डोनेशन के दुरुपयोग का आरोप 

बता दें कि सोशल मीडिया पर बुजुर्ग दंपत्ति की वीडियो वायरल होने के कुछ दिन बाद एक अन्य यूट्यूबर लक्ष्य चौधरी ने गौरव वासन पर कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। लक्ष्य का इल्जाम था कि जो पैसे बुजुर्ग दंपत्ति के लिए माँगे गए, वह उन तक नहीं पहुँचे।

ऑनलाइन स्कैमिंग पर बनाई गई वीडियो में लक्ष्य चौधरी ने समझाया था कि कैसे लोग इसी तरह की इमोशनल वीडियो बना कर पैसे ऐंठते हैं। इसके बाद उन्होंने गौरव वासन को लेकर कहा कि उसने बाबा का ढाबा के लिए डोनेशन माँगा लेकिन उन लोगों के साथ पैसे नहीं शेयर किए।

एक इंटरव्यू में भी कांता प्रसाद ने यह स्वीकारा था कि उन्हें अभी तक गौरव से कोई रुपए नहीं मिले हैं। इस पर चौधरी ने गौरव पर फंड गबन करने के आरोप लगाए और कहा कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी कांता प्रसाद को मदद नहीं पहुँचाई गई है। यूट्यूबर लक्ष्य ने कहा था कि गौरव ने कांता प्रसाद की मदद के लिए अपना कॉन्टैक्ट दिया और कांता प्रसाद के बैंक डिटेल्स की जगह अपनी ही अकॉउंट डिटेल्स शेयर की।

कांता प्रसाद ने एक वीडियो में कहा, “मुझे कोई डोनेशन ऑनलाइन नहीं मिली। पैसों की मदद मुझे सिर्फ़ कैश के रूप में मिली है। मुझे अमिताभ बच्चन तक से  डोनेशन मिली है। लेकिन इसके अलावा मुझे कोई ऑनलाइन डोनेशन नहीं मिली।”

आगे वह कहते हैं, “मुझे गौरव ने कहा था कि मैं किसी से अपनी बैंक की जानकारी न साझा करूँ। जब वीडियो वायरल हुई तो मैंने अपना मोबाइल सुशांत को दिया। गौरव ने हमें कोई पैसे नहीं दिए, चाहे कैश हो या ऑनलाइन। जो भी उसने इकट्ठा किया, वह उसी के पास है। मेरा बैंक अकॉउंट बंद हो गया है।”