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मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह ने बोला था झूठ, BARC के ईमेल से खुलासा: अर्नब गोस्वामी ने कहा – माफी माँगिए

पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर खुलासा किया है कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह ने ‘रिपब्लिक’ चैनल को लेकर झूठ बोला। उन्होंने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया (BARC)’ के इमेल्स के हवाले से ये दावा किया है। BARC ने अपने ईमेल में कहा था कि FIR में ‘इंडिया टुडे’ का नाम है, न कि ‘रिपब्लिक’ का। इस मामले में साजिश का खुलासा करने के लिए ‘रिपब्लिक’ ने इन इमेल्स को जारी किया है।

अक्टूबर 17, 2020 को भेजे गए ईमेल में BARC ने कहा कि अगर ‘ARG Outlier Media Pvt Ltd’ के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत की गई होती, तो इस बारे में ‘BARC India’ सम्बंधित दस्तावेजों के साथ आपसे संपर्क करता, और प्रतिक्रिया लेता। अर्नब गोस्वामी ने पूछा है कि क्या अब परमवीर सिंह इस मामले को बंद करेंगे? अर्नब ने कहा कि BARC ये चीजें सार्वजनिक रूप से नहीं बोल रहा है, इसलिए वो उन इमेल्स को सार्वजनिक रूप से रिलीज कर रहे हैं।

‘रिपब्लिक पर कोई आरोप नहीं’: BARC का ईमेल

अर्नब गोस्वमी ने बताया कि BARC ने कहा है कि उसके पास ‘रिपब्लिक’ या उससे जुड़ी किसी भी कम्पनी के खिलाफ गड़बड़ी के लिए न कोई केस है और न गड़बड़ी की कोई शिकायत है। उन्होंने परमवीर सिंह को ‘झूठा’ बताते हुए कहा कि BARC ने अपने ईमेल में बताया है कि उसे ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ द्वारा किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी किए जाने की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि जिन एजेंसी के कंधे पर बंदूक रख कर परमवीर सिंह ने ‘रिपब्लिक’ पर गोली चलाने की कोशिश की, वो 100% झूठ निकला।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है लेकिन मुंबई पुलिस कमिश्नर ने जिस तरह से उनके और उनके चैनल के खिलाफ ‘फर्जी कैम्पेन’ चलाया, उसके लिए देश की जनता के सामने वो दोषी हैं। साथ ही ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है:

  1. BARC ने हमें भेजे गए इमेल्स में बताया है कि न तो हमारे खिलाफ और न ही हमारी किसी कम्पनी या चैनल के खिलाफ गड़बड़ी की कोई बात पता चली है।
  2. इसके साथ ही मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह द्वारा चलाया जा रहा ‘फेक न्यूज़ कैम्पेन’ का खत्म हो गया है।
  3. ‘रिपब्लिक’ के CEO विकास खानचंदानी को भेजे ईमेल में BARC ने इसकी पुष्टि की है। इससे पता चलता है कि पिछले 9 दिनों से विभिन्न समाचार चैनलों पर भी झूठ फैलाया जा रहा था।
  4. ईमेल में कहा गया है कि ‘रिपब्लिक’ के खिलाफ एक भी शिकायत नहीं मिली है। इससे पता चला है कि परमवीर सिंह ने झूठ बोला और उनके आरोप राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित थे।
  5. हमने जनता और देश को हमेशा पहली प्राथमिकता दी है, जिससे हमारे दोनों चैनल अंग्रेजी और हिंदी समाचार चैनलों में अग्रणी बन कर उभरे हैं।
  6. हमारा मानना है कि सच्चाई कैसे भी बाहर आएगी, चाहे उसे कितना भी दबाया जाए। यह मामला इसी का एक उदाहरण बन रहा है।
  7. हम इस मामले में अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे। क़ानूनी रूप से हम यहाँ के नियम-कायदों और पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए अपना काम करेंगे, भले ही मुंबई पुलिस हमें कितना भी प्रताड़ित करे।

अर्नब गोस्वामी ने ‘इंडिया टीवी’ के रजत शर्मा से भी कहा कि उन्होंने इतने बड़े झूठ को मंच दे दिया, अब उन्हें फिर से अपने शो में चीजें स्पष्ट करनी चाहिए। मेजर गौरव आर्या ने कहा कि परमवीर सिंह ने इस मामले में नैतिकता का भी उल्लंघन किया है। अर्नब गोस्वामी ने परमवीर सिंह से कहा कि वो सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जनता से हाथ जोड़ कर माफ़ी माँगें। उन्होंने कहा कि वो ‘रिपब्लिक’ पर आकर भी सवालों के जवाब दें, लेकिन उनके पास हिम्मत नहीं है।

ज्ञात हो कि मुंबई पुलिस आयुक्त ने अपने बयान में रिपब्लिक मीडिया पर टीआरपी में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि रिपब्लिक टीवी ने कई घरों में पैसे देकर अवैध रूप से फर्जी टीआरपी के लिए खेल रचा। बाद में ज्वाइंट कमिश्नर ने भी इस बात को स्वीकारा था कि ‘इंडिया टुडे’ का नाम एफआईआर में है। अर्नब गोस्वामी ने खुलासा किया था कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम 6 बार लिखा हुआ है।

देश का पहला ऐसा सांसद जिसे मिली फाँसी की सजा… उस बाहुबली का बेटा-बीवी दोनों RJD से लड़ रहे चुनाव

बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का दबदबा कितना है, ये किसी से छिपा नहीं है। जिस पूर्व दिशा से सूरज उदय होता है, भारत के उसी पूर्वी हिस्से में बिहार बसा है। लेकिन इस राज्य ने विकास कम और बाहुबली नेताओं का उदय ज्यादा देखा है। वर्षों तक कितने ही दबंग इसकी मिट्टी को खून से लाल करते आ रहे हैं।

बिहार की राजनीति ने जमकर बाहुबलियों को पनाह दी है। अपनी काली करतूतों पर सफेद पोशाक का पर्दा डाल बाहुबली नेताओं की तूती बिहार की सियासत में खूब बोली है। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने जातीय समीकरणों को साधने के लिए इन्हें दिल खोलकर अपनाया, क्योंकि ये खुद को किसी ना किसी जाति के ‘मसीहा’ के तौर में पेश करते आ रहे हैं। 

अनंत सिंह, सूरजभान सिंह, सुनील पांडेय और रामा सिंह जैसे बाहुबली नेताओं के नाम से आज भी बिहार के लोगों में सिरहन पैदा हो जाती है। इन्हीं बाहुबलियों के बीच एक नाम है दबंग और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह का, जो अभी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वो आजाद भारत का पहला ऐसा राजनेता है, जिसे फाँसी की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में उसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया।

कहानी कुछ ऐसे शुरू होती है…

कोसी की धरती पर पैदा हुआ आनंद मोहन सिंह बिहार के सहरसा जिले के पचगछिया गाँव से आता है। उसके दादा राम बहादुर सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे। आनंद सिंह का 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन के दौरान राजनीति से परिचय हुआ, जिसके कारण उसने अपना कॉलेज तक छोड़ दिया। इमरजेंसी के दौरान उसे 2 साल जेल में भी रहना पड़ा। कहा जाता है कि आनंद मोहन सिंह ने 17 साल की उम्र में ही अपना सियासी करियर शुरू कर दिया था।

स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर समाजवादी नेता परमेश्वर कुंवर उसके राजनीतिक गुरु थे। बिहार में राजनीति जातिगत समीकरणों और दबंगई पर चलती है। आनंद मोहन ने इसी का फायदा उठाया और राजपूत समुदाय का नेता बन गया। साल 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जब भाषण दे रहे थे तो आनंद ने उन्हें काले झंडे दिखाए थे।

आनंद मोहन सिंह 1980 में बाहुबली के तौर पर उभरा। इसी साल उसने समाजवादी क्रांति सेना की स्थापना की, जो निचली जातियों के उत्थान का मुकाबला करने के लिए बनाई गई थी। इसके बाद से तो उसका नाम अपराधियों में शुमार हो गया और वक्त-वक्त पर उनकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित होने लगे। उस दौरान उसने लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन जीत नहीं पाया। साल 1983 में आनंद मोहन को पहली बार 3 महीने की कैद हुई थी।

राजनीति में ऐसे हुई एंट्री

साल 1990 में जनता दल (JD) ने उसे माहिषी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। इस दौरान उसे जीत मिली। उसने कॉन्ग्रेस के लहटन चौधरी को 62 हजार से अधिक मतों से हराया। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधायक रहते हुए भी वो एक कुख्यात सांप्रदायिक गिरोह की अगुवाई कर रहा था, जिसे उसकी ‘प्राइवेट आर्मी’ कहा जाता था। ये गिरोह उन लोगों पर हमला करता था, जो आरक्षण के समर्थक थे।

आनंद मोहन की 5 बार लोकसभा सांसद रहे राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के गैंग के साथ लंबी अदावत चली। उस वक्त कोसी के इलाके में गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। जब सत्ता में बदलाव हुआ खासकर 1990 में, तो राजपूतों का दबदबा बिहार की राजनीति में कम हो गया।

बनाई खुद की पार्टी

साल 1990 में सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को 27 फीसदी आरक्षण की सिफारिश मंडल कमीशन ने की थी, जिसे जनता दल ने अपना समर्थन दिया। लेकिन आरक्षण के विरोधी आनंद मोहन को ये कदम कैसे सुहाता। उसने अपने रास्ते अलग कर लिए। साल 1993 में आनंद मोहन ने अपनी खुद की पार्टी बिहार पीपुल्स पार्टी (BPP) बना ली। फिर बाद में समता पार्टी से हाथ मिलाया।

उसकी पत्नी लवली आनंद ने 1994 में वैशाली लोकसभा सीट का उपचुनाव जीता। 1995 में एक वक्त ऐसा आया, जब युवाओं के बीच आनंद मोहन का नाम लालू यादव के सामने मुख्यमंत्री के तौर पर भी उभरने लगा था। 1995 में उसकी बिहार पीपुल्स पार्टी ने समता पार्टी से बेहतर प्रदर्शन किया था।

लेकिन खुद तीन सीटों से खड़े हुए आनंद मोहन को हार मिली थी। आनंद मोहन साल 1996 के आम चुनावों में शिवहर लोकसभा सीट से खड़ा हुआ। उस वक्त आनंद मोहन जेल में था, लेकिन बावजूद इसके चुनाव जीत गया। इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनावों में भी आनंद मोहन इसी सीट से जीता। उस वक्त वह राष्ट्रीय जनता पार्टी का उम्मीदवार था, जिसे राष्ट्रीय जनता दल ने समर्थन दिया था।

साल 1999 में आनंद मोहन का मूड बदला और बीपीपी ने लालू यादव की आरजेडी को छोड़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ पकड़ा। मगर उसे आरजेडी के अनवरुल हक ने मात दे दी। इसके बाद आनंद मोहन की बीपीपी ने कॉन्ग्रेस से हाथ मिला लिया ताकि शिवहर से फिर से चुनाव लड़ा जा सके। लेकिन कॉन्ग्रेस ने उन्हें ज्यादा भाव नहीं दिया।

दलित IAS की हत्या में हुई उम्रकैद की सजा

यूँ तो आनंद मोहन सिंह पर कई मामलों में आरोप लगे। अधिकतर मामले या तो हटा दिए गए या वो बरी हो गया। लेकिन 1994 में एक मामला ऐसा आया, जिसने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के दलित आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की भीड़ ने पिटाई की और गोली मारकर हत्या कर दी। जी कृष्णैया उस वक्त गोपालगंज के DM थे। इस भीड़ को आनंद मोहन ने उकसाया था। कृष्णैया तब मात्र 35 वर्ष के थे।

इस मामले में आनंद, उसकी पत्नी लवली समेत 6 लोगों को आरोपित बनाया गया था। साल 2007 में पटना हाईकोर्ट ने आनंद मोहन को दोषी ठहराया और फाँसी की सजा सुनाई। आजाद भारत में यह पहला मामला था, जिसमें एक राजनेता को मौत की सजा दी गई थी। हालाँकि 2008 में इस सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। साल 2012 में आनंद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सजा कम करने की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

2009 में छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि आजीवन कारावास की स्थिति में किसी सजायाफ्ता को न्यूनतम 14 साल की कैद काटनी होगी और उसे 14 साल बाद खुद-ब-खुद रिहा किए जाने का कोई अधिकार नहीं होगा। जाहिर है, आनंद मोहन का कई साल के लिए सार्वजनिक जीवन से दूर रहना तय है। 

जेल में रहते हुए भी बरकरार था रसूख

आनंद मोहन और लवली आनंद की शादी 1991 में हुई थी। जेल में रहते हुए भी वो साल 2010 में अपनी पत्नी लवली को कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव और 2014 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़वाने में कामयाब रहा। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार दिए जा चुके अपराधियों के चुनाव लड़ने में रोक लगा दी हो लेकिन बिहार में आनंद मोहन का दबदबा आज भी कम नहीं हुआ है।

आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद होंगी सहरसा से RJD उम्मीदवार

बिहार में अब बाहुबलियों की राजनीतिक विरासत की कमान उनके पत्नियों और बेटे को सौंपी जा रही है। इस बार के विधानसभा के चुनाव में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद सहरसा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। राजद ने उनके सहरसा सीट से लड़ने पर मुहर लगा दी है। इससे पहले खबर थी कि लवली आनंद के सुपौल विधानसभा सीट से लड़ने चाह रही थी, लेकिन कॉन्ग्रेस इस सीट से पूर्व सांसद रंजीत रंजन को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है। रंजीत रंजन पाँच बार के सांसद और बाहुबली नेता पप्पू यादव (Pappu Yadav) की पत्नी हैं।

वहीं आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद शिवहर विधानसभा सीट से राजद के ही टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। पिछले महीने ही पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद ने राजद की सदस्यता ग्रहण की थी।

पूर्व सांसद लवली आनंद के पति आनंद मोहन सिंह और रंजीत रंजन के पति पप्पू यादव के बीच वर्चस्व के टकराव की कहानी से पूरा बिहार वाकिफ है। दोनों के गुटों के बीच चले टकराव के चलते कोसी के इलाके में लंबे समय तक दहश्त फैली रही। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इनकी पत्नियों में से किसका पलड़ा भारी रहता है।

लवली आनंद ने अपने राजनीतिक सफर का आगाज अपने पति आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी से की थी। 1994 में वैशाली संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा को मात दी थी। आनंद मोहन की तरह लवली आनंद जल्दी-जल्दी पार्टियाँ बदलती रही हैं। लवली आनंद पहली बार 1994 में उपचुनाव जीतकर सांसद बनी। इसके बाद बिहार पीपुल्स पार्टी, कॉन्ग्रेस, सपा, HAM और नीतीश कुमार के भी साथ रहकर चुनाव लड़ चुकी हैं। हालाँकि इस बार राजद में शामिल हो गई हैं।  

एक समय बिहार का दिग्गज चेहरा थीं लवली आनंद 

बताने की जरूरत नहीं कि शिवहर में लवली आनंद का कद किस स्तर का है। एक जमाने में जब आनंद मोहन ने अपनी पार्टी बनाई, उनकी पत्नी को सुनने के लिए रैलियों में बेतहाशा भीड़ जुटती थी। यहाँ तक कि 1995 के चुनाव में लालू यादव जैसे दिग्गज भी लवली आनंद के सामने फेल थे। 2015 में माना जा रहा था कि लंबे समय से चुनावी जीत का इंतजार कर रहे आनंद परिवार को शिवहर निराश नहीं करेगा।

गढ़ में 461 वोटों से मिली हार 

लेकिन नतीजे लोगों की उम्मीदों से बिल्कुल अलग नजर आए। सैफुद्दीन ने लवली आनंद को काँटे की टक्कर दी। मतगणना खत्म होने तक सैफुद्दीन 44,576 वोट पाकर जीतने में कामयाब हुए। जबकि लवली आनंद को 44,115 वोट मिले। वो 461 मतों से अपने ही गढ़ में चुनाव हार चुकी थीं। किसी को इस बात का भरोसा नहीं हो रहा था। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार था, जिसे 22 हजार से ज्यादा वोट मिले।

अब सवाल उठता है कि क्या आनंद मोहन बिहार की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं? क्या उस नेता के लिए सारे रास्ते खत्म हो चुके हैं, जिसके लिए उसके समुदाय में अब भी सहानुभूति है? इसका जवाब हाँ में भी है और ना में भी। मोहन का राजनैतिक करियर अब खत्म हो चुका है। उसे सुनाई गई सजा उसे पहले ही चुनाव लड़ने के अयोग्य बना चुकी है।

अब, अंतिम फैसले से यह पक्का हो गया है कि वे आने वाले कई साल के लिए चुनाव प्रचार करने लायक भी नहीं रह गया है। राजनीति जैसे क्रूर पेशे में सहानुभूति अल्पजीवी होती है और वफादारी (अगर आपकी बहुत अच्छी हैसियत नहीं है) भी समय के साथ घटती चली जाती है। लेकिन बाहुबली नेताओं की बिहार में अब भी एक ब्रांड वैल्यू है।

बिहार के विषम और गुटों में बँटे समाज में, जहाँ जाति ही अक्सर राजनीति का सबसे बड़ा निर्णायक पहलू होती है, आनंद मोहन अब भी अपनी पत्नी और राजनैतिक आकाओं के लिए कुछ वोट इकट्ठा करने के लिए अपनी लाचारी की दुहाई दे सकता है। अगर उसे बिहार के राजनैतिक परिदृश्य में खुद के लिए कोई भी उम्मीद नजर आती है तो वह यह अच्छी तरह जानता होगा कि उसकी भूमिका एक मोहरे भर की ही रहेगी। वे सिर्फ भावनाओं को उकसाएगा, और उम्मीद करेगा कि आँसू वोट में बदल जाएँ। तभी तो कहते हैं कि न्याय की चक्की धीमे पीसती है पर अक्सर बेहद महीन पीसती है।

‘बीच सड़क पर रेप होना चाहिए’: कंगना रनौत के नवरात्रि पोस्ट पर वकील मेहंदी रेजा, बोला – ‘अकाउंट हैक हो गया था’

सोशल मीडिया पर एक अधिवक्ता ने न सिर्फ कंगना रनौत के लिए अपनी घृणित मानसिकता का परिचय दिया, बल्कि महिलाओं के प्रति अपनी ओछी सोच का भी नंगा प्रदर्शन किया। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के फेसबुक पोस्ट पर कमेंट करते हुए अधिवक्ता मेहंदी रेजा (Mehendi Reza) ने लिखा, “बीच सड़क पर इसके साथ बलात्कार किया जाना चाहिए“। एक वकील द्वारा इस तरह की टिप्पणी से लोग भी हतप्रभ नज़र आए।

दरअसल, शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को नवरात्रि का पहला दिन था और इस दिन देवी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस मौके पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने पारम्परिक भारतीय परिधान में अपनी 3 तस्वीरें शेयर की और और पूछा कि मेरे अलावा और कौन-कौन नवरात्रि के अवसर पर उपवास कर रहा है? तस्वीरों के बारे में उन्होंने बताया कि इन्हें नवरात्रि के पहले दिन के अवसर पर क्लिक किया गया है।

बॉलीवुड अभिनेत्री ने इस दौरान कहा कि वो भी फास्टिंग कर रही हैं। हाँ, इस पोस्ट में वो महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को भी लताड़ लगाना नहीं भूलीं और अपने खिलाफ एक और FIR दर्ज किए जाने की चर्चा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की ‘पप्पू सेना’ उन्हें लेकर इतनी चिंतित क्यों है, वो जल्द ही उनसे मिलने वाली हैं। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो कुछ ही दिनों में मुंबई का रुख करने वाली हैं।

कंगना रनौत के पोस्ट पर मेहंदी रेजा (Mehendi Reza) का कमेंट

इसी फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए अधिवक्ता मेहंदी रेजा (Mehendi Reza) ने ‘बीच सड़क पर कंगना रनौत का बलात्कार किया जाना चाहिए‘ वाली टिप्पणी की। उससे एक व्यक्ति ने पूछ डाला कि क्या वो सच में अधिवक्ता है? उसके फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, वो ओडिशा के झारसुगुडा डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट में बतौर अधिवक्ता काम करता है। उसने भुवनेश्वर स्थित ‘आर्या स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस’ से पढ़ाई की है।

स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद कर रहा है आईडी हैक होने का दावा

जैसे ही उसकी ओछी टिप्पणी का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, उसने दावा किया कि ये उसने नहीं लिखा है। उसने दावा किया कि शनिवार को उसकी फेसबुक आईडी हैक हो गई थी और उसका प्रयोग करते हुए किसी ने आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट कर दी। उसने सफाई देते हुए कहा कि किसी भी महिला या समुदाय को लेकर उसके ऐसे विचार नहीं हैं। उसने दावा किया कि वो काफी शॉक्ड है और माफ़ी माँगता है।

वकील मेहंदी रेजा (Mehendi Reza) ने लिखा, “मैं लोगों से अपील करता हूँ कि वो मेरी माफ़ी स्वीकार करें और मुझे क्षमा कर दें। इससे जिन लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं, उसके लिए मैं शर्मिंदा हूँ।” उसके फेसबुक पोस्ट्स को भी देखें तो वो विदेशी मीडिया की खबरों का सहारा लेकर भारत में कोरोना के मामलों को लेकर निशाना साध रहा था। अब कंगना पर टिप्पणी के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद उसने इन आरोपों से इनकार कर दिया है।

बता दें कि बॉलीवुड कलाकार कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के ट्वीट और इंटरव्यू के माध्यम से कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा फैलाने के लिए दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मुंबई की बांद्रा कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद FIR दर्ज की गई। मुन्नवर अली और साहिल अशरफ सैयद नामक दो व्यक्तियों ने मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।

शादीशुदा इस्माइल से करती थी प्यार, 2 लाख रुपए और गहने लेकर भागी… जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक डॉक्टर द्वारा जहर का इंजेक्शन देकर अपनी प्रेमिका को मौत की नींद सुला देने का मामला सामने आया है। आरोपित डॉक्टर इस्माइल ने अपनी प्रेमिका से पीछा छुड़ाने के लिए ऐसा किया। मसूरी इलाके के इस मामले में पुलिस ने शादीशुदा डॉक्टर इस्माइल को अपनी प्रेमिका की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को इस हत्याकांड का खुलासा करने में 40 दिन का वक़्त लग गया।

सितम्बर 7, 2020 को खबर आई थी कि एक महिला संदिग्ध हालत में गुमशुदा हो गई है। पुलिस ने काफी खोजबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। हाल ही में पुलिस को सूचना मिली कि वो महिला पास के ही डॉक्टर इस्माइल के साथ संपर्क में रहती थी। पुलिस ने और छानबीन की तो पता चला कि डॉक्टर इस्माइल ने कुछ ही दिनों पहले अपना फोन नंबर भी बदल लिया था। पुलिस ने पुराने नंबर की खोज कर ली।

‘आजतक’ की खबर के अनुसार, इसके बाद लोकेशन की जाँच की गई और आरोपित को हिरासत में ले लिया गया। कड़ाई से पूछताछ के बाद डॉक्टर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपित ने पूछताछ में उगला कि वो अपनी प्रेमिका को हरियाणा लेकर गया था और वहीं उसकी हत्या कर दी। डॉक्टर इस्माइल ने अपनी प्रेमिका की जहर का इंजेक्शन देकर हत्या के बाद उसकी लाश को भी कुरुक्षेत्र में ही ठिकाने लगा दिया।

साथ ही वारदात को अंजाम देने के बाद उसने अपने फोन नंबर भी बदल लिया था, जिससे पुलिस को इस हत्याकांड का खुलासा करने में इतने दिन लग गए। ‘नवभारत टाइम्स’ की खबर के अनुसार, इस्माइल भी असली डॉक्टर नहीं है, बल्कि वो झोलाछाप डॉक्टर है। वो अपनी प्रेमिका को ‘मौजमस्ती’ के लिए चंडीगढ़ लेकर गया था। वहाँ उसकी प्रेमिका ने उस पर शादी के लिए दबाव बनाया। आरोपित द्वारा इनकार करने के बावजूद वो जिद करती रही, जिससे उसने उसकी हत्या की साजिश रची।

पीड़िता का नाम शबाना है और उसके गुमशुदा होने के बाद उसके शौहर ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी। उसके शौहर ने बताया है कि वो अपने साथ दो लाख रुपए नकद और कुछ गहने भी लेकर भागी है। एसपी देहात नीरज कुमार जादौन ने आरोपित की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। आरोपित ने प्रेम-प्रसंग की बात भी कबूल कर ली है। अब उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है। उसे जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा।

₹4000 करोड़ का इस्लामी बैंकिंग घोटाला: IG से लेकर SP तक की मिलीभगत, CBI ने दायर की सप्लीमेंट्री चार्जशीट

इस्लामी नियम-कायदों का हवाला देकर निवेश की धोखाधड़ी के मामले में CBI ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। ये मामला ‘आई-मॉनेटरी एडवाइजरी (IMA)’ बैंकिंग घोटालों से जुड़ा है, जिसके तहत 4000 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई थी। अब इस मामले में शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को CBI ने पूरक आरोप-पत्र दायर किया है। इस्लामी बैंक घोटाले के आरोपितों में कई बड़े अधिकारियों के नाम हैं।

आइजी हेमंत निंबालकर और एसपी अजय हिलोरी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम भी इस चार्जशीट में बतौर आरोपित शामिल किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कर्नाटक सरकार के राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर IMA के खिलाफ आई शिकायतों को नज़रअंदाज कर दिया था और इस मामले में की जा रही जाँच-पड़ताल बंद कर दी थी। साथ ही इस मामले में चल रही पूछताछ भी बंद कर दी गई थी।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, IMA में ‘I’ की व्याख्या नहीं की गई है लेकिन इसे ‘Islamic’ के रूप में ही प्रचारित किया गया है। CBI के अधिकारियों के अनुसार, आरोप-पत्र में IMA के प्रबंध निदेशक मोहम्मद मंसूर खान और बेंगलुरु नॉर्थ सब डिवीजन के तत्कालीन सहायक आयुक्त एलसी नागराज को भी आरोपित बनाया गया है। इन सभी ने रिजर्व बैंक और आयकर विभाग द्वारा बार-बार चेताए जाने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी।

तत्कालीन डीएसपी (सीआइडी) ईबी श्रीधर, कॉमर्शियल स्ट्रीट पुलिस थाने के तत्कालीन एसएचओ एम रमेश और तब थाने के सब-इंस्पेक्टर रहे पी गौरीशंकर का नाम भी आरोपितों में शामिल है। कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस थाने में स्थित IMA इस्लामी बैंक के मुख्यालय को भी बंद कर दिया गया था। इसके निदेशकों निजामुद्दीन, नसीर हुसैन, नवीद अहमद, वसीम, अरशद खान और अफसर पाशा को भी आरोपित बनाया गया है।

आरोपित अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाए कम्पनी को क्लीन चिट दे दी थी और साथ ही कहा था कि ये किसी भी गैर-क़ानूनी गतिविधि में लिप्त नहीं है। अपनी अवैध गतिविधियों को कम्पनी ने बेख़ौफ़ जारी रखा और दुष्परिणाम ये हुआ कि निवेशकों के हजारों करोड़ रुपए डूब गए। आरोपित अधिकारियों ने इस वित्तीय धोखाधड़ी को जारी रखने की अनुमति देने के एवज में रिश्वत भी ली थी। CBI इस्लामी बैंकिंग घोटाले में 2 आरोप-पत्र पहले ही दायर कर चुकी है।

ये घोटाला 2018 में सामने आया था। पता चला था कि ज्यादा ब्याज का प्रलोभन देते हुए कम्पनी मासिक योजना, शिक्षा योजना और विवाह योजना जैसी कई पोंजी स्कीमों में जरिए लोगों से धन इकट्ठा कर रही थी। वहीं जब बात इसका रिटर्न देने की आई तो मंसूर खान सब कुछ छोड़-छाड़ कर दुबई भाग गया था। हालाँकि, जुलाई 2019 में भारत को उसके प्रत्यर्पण में सफलता मिली। फ़िलहाल वो गिरफ़्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में है।

पिछले साल ही खबर आई थी कि एसआईटी को दिए बयान में मंसूर खान ने कहा है कि उसने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक के पूर्व सीएम को 5 करोड़ रुपए भिजवाए थे। कयास लगाए गए थे कि मंसूर जिस पूर्व सीएम की बात कर रहा है, वह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया हो सकते हैं। उनकी कैबिनेट में शामिल रहे रोशन बेग से इस मामले में पूछताछ भी हो चुकी है। उसे कई नेताओं को रिश्वत देने की बात कबूली थी।

एक स्कूली लड़की, उसका बाप और IS आतंकी फुआ… पैगम्बर मोहम्मद पर कार्टून दिखाने वाले टीचर के हत्या की कहानी

फ्रांस में इतिहास के एक शिक्षक की गला काट कर हत्या कर दी गई। दोष सिर्फ इतना कि उन्होंने क्लास में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। अब इस पूरी घटना के पीछे कई और बातें खुल कर सामने आई हैं। फ्रांस के आतंकवाद-रोधी अभियोजक ने शनिवार (17 अक्टूबर, 2020) को कहा कि इस मामले में शिक्षक के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चलाया गया था, जिसके तहत उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं।

समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक ने क्लास में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। इससे नाराज एक स्कूली छात्रा के पिता ने 47 वर्षीय शिक्षक सैमुअल पैटी को बर्खास्त करने की माँग की थी।

स्थानीय टीवी समाचार में बताया गया कि छात्रा के पिता ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर बच्चों को भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर मृत शिक्षक के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। छात्रा के पिता ने शिक्षक पैटी पर “अश्लील साहित्य” प्रसारित करने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर लोगों को बरगलाने वाले छात्रा के पिता, एक ज्ञात इस्लामी आतंकवादी और अन्य 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। बताया गया कि इस घटना से पहले अक्टूबर की शुरुआत से ही स्कूल सहित मृत शिक्षक को ऑनलाइन धमकियाँ मिलनी शुरू हो गई थीं।

मामले की शुरुआत में छात्रा और उसके पिता ने शिक्षक के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। जिसके खिलाफ शिक्षक ने भी मानहानि की शिकायत दर्ज की। इसके बाद शिक्षक के रवैये से नाराज पिता ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर शिक्षक का नाम और स्कूल के पते के साथ वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि इस्लाम और पैगंबर का स्कूल में “अपमान” किया गया। बता दें कि इस पोस्ट के वायरल होने के बाद ही शिक्षक की हत्या को अंजाम दिया गया।

चश्मदीदों के अनुसार बताया गया कि शुक्रवार (16 अक्टूबर) दोपहर हमलावर को स्कूल में विद्यार्थियों से शिक्षक पैटी के बारे में पूछते और उसे ढूँढते हुए देखा गया था। वहीं पुलिस को पैटी की एक तस्वीर और हमलावर के मोबाइल फोन पर उसकी हत्या की बात स्वीकार करते हुए एक संदेश भी मिला है।

हमलावर चाकू, एक एयरगन और पाँच कनस्तरों से लैस था। बचने के लिए उसने पुलिस पर हमला भी किया था। बताया गया है कि गिरफ्तार लोगों में संदिग्ध के चार करीबी परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। साथ ही पुलिस ने स्कूली छात्रा के पिता के एक दोस्त को भी गिरफ्तार कर लिया है, जो कि पैटी को बर्खास्त करने की माँग करने के लिए प्रिंसिपल से उसके साथ मिलने गया था।

जानकारी के अनुसार, छात्रा के पिता का दोस्त एक ज्ञात इस्लामी आतंकवादी है। जो पहले से ही फ्रांसीसी खुफिया सेवाओं के रडार पर था। वहीं सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के फाइटर्स में शामिल होने वाले छात्रा के पिता की सौतेली बहन के लिए भी गिरफ्तारी वारंट जारी है।

गौरतलब है कि पेरिस में एक शिक्षक ने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। जिसके बाद सिर कलम कर के उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने बाद में हत्यारे को मार गिराया। उसने एक किचेन नाइफ का प्रयोग करते हुए शिक्षक का सिर कलम किया। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस घटना की जाँच एंटी-टेरर जज द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने बताया कि हत्यारा मॉस्को चेचन्या मूल का मुस्लिम था।

‘एक्के केस में बाभन का रिहाई और यादव को सजा, मोदी उसको सड़ा दिया जेल में’ – ‘विकास’ के बाद भी जातीय गोलबंदी

लखीसराय जिले में विधानसभा की दो सीटें हैं। लखीसराय और सूर्यगढ़ा। दोनों सीटों पर 28 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे। दोनों सीटों पर बीजेपी नीत एनडीए और राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है।

दोनों क्षेत्रों में जातीय आधार पर मतदाताओं की गोलबंदी भी साफ दिखती है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे मतदाताओं के एक वर्ग के लिए विकास से महत्वपूर्ण अपनी जाति का नेता हो जाता है।

उम्मीदवार

लखीसराय से बीजेपी के उम्मीदवार लगातार दो बार से चुनाव जीत रहे राज्य के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा हैं। कॉन्ग्रेस ने यहाँ जदयू से आए अमरेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है। सूर्यगढ़ा से जदयू ने रामानंद मंडल को तो राजद ने निवर्तमान विधायक प्रह्लाद यादव को मैदान में उतारा है।

‘इधर 75 से 80 प्रतिशत यादव लालटेन के साथ है’

लखीसराय विधानसभा का ​बिलौरी पंचायत जिला मुख्यालय से सटा हुआ है। इस पंचायत में बिलौरी, ओफहापुर, करौता, पचैता जैसे गॉंव आते हैं। यादव बहुल इस पंचायत में मुस्लिम, कुर्मी और महादलित वोटर भी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत में करीब 10 हजार वोटर हैं और 50 प्रतिशत के करीब मतदान होता है। इस बार मतदान बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि काफी संख्या में लोग लॉकडाउन के दौरान घर लौटे हैं।

लखीसराय से बिलौरी को जोड़ने वाली सड़क अच्छी स्थिति में नहीं है। लेकिन गॉंव में प्रवेश करते ही छह बीघे में फैला तालाब है। इस तालाब की जमीन अतिक्रमण मुक्त है, जो अमूमन कम देखने को मिलता है। सरकारी योजना से तालाब के घाट बने हैं। स्थानीय विधायक विजय सिन्हा के कोष से तालाब के एक किनारे पर शेड का निर्माण भी करवाया गया है, जहाँ अमूमन दोपहर के वक्त ताश खेलने के लिए जमावड़ा लगा रहता है। तालाब के ही एक किनारे पर मंदिर तो दूसरे किनारे पर सरकारी अस्पताल तथा प्लस टू स्कूल है। गॉंव के बगल से नहर गुजरती है। बिजली भी है और ‘हर घर नल जल योजना’ का पानी भी पहुँच चुका है। बावजूद यहाँ के लोग बदलाव की बात कर रहे हैं।

राम ​चरित्र यादव ने बताया, “हमलोग खेती और पशुपालन पर आश्रित हैं। कुछ आदमी कमाने बाहर भी जाता है। पंजाब-​हरियाणा में मजूदरी करने। सरकार का कोई काम नहीं है हमारे गॉंव में। रोड जर्जर है, आप देख ही रहे हैं। बिजली दिया भी है तो लाइन कटता रहता है।” बिहारी यादव ने बताया, “हॉस्पिटल का खाली भवन बना है। सुविधा कोई नहीं है।” कंचन कुमार का कहना है, “नीतीश कुमार 24 घंटा बिजली देने का बात करते हैं। मेरे गॉंव में ठीक से 6 घंटा भी बिजली नहीं मिल पाता है। मंत्री महोदय (विजय कुमार सिन्हा) को कई बार आवेदन दिए हैं, पर ध्यान नहीं देते। मंत्री महोदय पिछड़ा सबके गॉंव पर ध्यान नहीं देते हैं।”

जेपी यादव का कहना है, “कुछ-कुछ लोग को इंदिरा आवास और शौचालय मिला है। नल जल का काम आधा हुआ है। बाकी पैसा सब खा गया।” उनके अनुसार, “लालू यादव महारथी है। लालटेन को वोट पड़ता है। मोदिया (नरेंद्र मोदी) उसको सड़ा दिया जेल में। एक्के केस है लालू और जगन्नाथ मिश्रा पर। बाभन का रिहाई और यादव को सजा। हम लोग सॉलिड हैं, लालू के साथ।” ब्रह्मदेव यादव भी सरकार से नाराज हैं। उनका कहना है, “आठ महीना से रेल बंद है। कोरोना जानकर फँसाया है। मोदी सरकार जनता को धुर (मूर्ख) समझता है। इधर जहाँ जाइएगा, खाली तेजस्वी यादव का वोट है।”

राजद के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार यादव का दावा है, “हमारे गॉंव में जो भी सरकारी काम हुआ है, सब मुखिया के जरिए हुआ है। विधायक-सांसद कोई काम नहीं कर रहा है। इधर महागठबंधन का वोट है। एकमुश्त वोट देंगे लोग। छिटपुट लोग इधर-उधर वोट करेंगे।” हरिहर यादव का दावा है, “इधर 75 से 80 प्रतिशत यादव लालटेन के साथ है।”

‘लालू का आदमी है इसलिए प्रह्लाद यादव जीत जाता है’

इसी तरह सूर्यगढ़ा के महिसोना पंचायत का खैरी गॉंव भी यादव बहुल और जिला मुख्यालय से सटा है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 1500 वोटर हैं, जिनमें हजार के करीब यादव हैं। इनकी भी गोलबंदी राजद उम्मीदवार के पक्ष में स्पष्ट दिखती है। इसको लेकर सबके अपने-अपने कारण हैं। विकास कुमार कहते हैं, “इधर नेता लोग हुलकी मारने नहीं आता है। लेकिन प्रह्लाद यादव लालू का आदमी है, इसलिए जीत जाता है।” रामजी यादव का कहना है, “हम लोगों का लालू के शासन में बात सुनता था। कोई कार्यकर्ता ऑफिस में जाकर कुछ कह देता था तो अधिकारी काम करता था। नीतीश कुमार के सरकार में अफसरशाही है। अब कोई नेता ऑफिस जाकर दिखाए, उसको फँसा देगा।”

रामजी विकास के दावों को भी खारिज करते हुए कहते हैं, “पहले भी सड़क था। कच्चा था, अब पक्का हो गया है। लालू यादव ने सड़क का ढाँचा तैयार कर दिया था, नीतीश कुमार ने उसको पक्का कर दिया। आज जो सड़क दो लेन का है उसको कल कोई चार लेन कर देगा तो उसको विकास थोड़े कहेंगे। मेन ढाँचा होता है जो लालू यादव ने बनाया।”

रामाश्रय यादव ने बताया, “शौचालय का लाभ मिला है। लेकिन घूस खुलेआम होता है। इंदिरा आवास 30 हजार लेकर दिया जाता है। नल जल का काम हुआ है, पर पानी कभी आता है, कभी नहीं। बेचन यादव ने बताया, “नल जल का काम आधा गॉंव में ही हुआ है। दू-चार महीना से पानी का सप्लाई हो रहा है। सबको पता है इधर लालटेन को वोट पड़ेगा इसलिए काम आधा पर ही रुकवा दिया है।” गॉंव में ही चाय की दुकान चलाने वाले मन्नू यादव का कहना है, “सरकारी स्कूल तो है, लेकिन वहाँ कोई अपना बच्चा को नहीं पढ़ाता है। हमारा चार बच्चा है। सब प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। सरकारी स्कूल में कोई देखने वाला नहीं है। बच्चा-बुतरु माथ-कपार फोड़ लेता है।” उन्होंने बताया, “सदर अस्पताल बगल में है। लेकिन वहाँ न डॉक्टर रहता है, न कोई सुविधा है। कुल लोग प्राइवेट में जाता है। सरकारी अस्पताल को बस नाम का अस्पताल मानकर चलिए।

बालू का कितना असर

इन लोगों की नाराजगी किउल नदी से बालू उत्खनन बंद होने को लेकर भी है। रामजी यादव का कहना है, “मेन समस्या यही है। बालू का साइट बंद कर दिया। हम लोग जेतना आदमी हैं, उसको इस सरकार ने पीस (परेशान) दिया है। पहले का सरकार ठीक था।” उत्खनन बंद होने से ट्रक, ट्रैक्टर, पिक अप वैन आदि वाहन कारोबार से जुड़े भी प्रभावित हैं। मजदूरों को भी स्थानीय स्तर पर काम मिलना बंद हो गया है। इसकी वजह से हाल के समय में इस इलाके से पलायन भी बढ़ा है। जैसा कि तेतरहाट के प्रवेश महतो कहते हैं, “काम तो काफी हुआ है, लेकिन बालू उत्खनन पर रोक से लोग बहुत प्रभावित हुए हैं।”

…और भी हैं समीकरण

हालाँकि माई (मुस्लिम+यादव) समीकरण के मजबूत होने का मतलब यह नहीं है कि विपक्ष के सारे समीकरण इन दोनों सीटों पर दुरुस्त हैं। कॉन्ग्रेस के खाते में लखीसराय की सीट जाने से राजद के कोर वोटरों में निराशा है। 2005 में इस सीट से विजय कुमार सिन्हा को राजद के टिकट पर हराने वाले फुलैना सिंह का मैदान में होना भी एनडीए के पक्ष में बताया जा रहा है। मैदान में बीजेपी और जदयू के भी बागी हैं।

इसी तरह सूर्यगढ़ा में लोजपा के टिकट पर लड़ रहे रविशंकर सिंह उर्फ अशोक सिंह जदयू के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। टिकट नहीं मिलने पर दलबदल करने वाले रविशंकर सिंह स्थानीय सांसद और नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले ललन सिंह के खास रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 1995 में निर्दलीय जीतकर राजद में शामिल हुए प्रह्लाद यादव 2000 और फरवरी 2005 के चुनाव में भी जीते थे। लेकिन, उसके बाद दो बार उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी। पिछली बार उन्हें दोबारा जीत तब मिली, जब राजद को जदयू का समर्थन भी हासिल था।

यही कारण है कि जब 15 अक्टूबर को नीतीश कुमार ने सूर्यगढ़ा में सभा की तो जंगलराज की याद दिलाने के साथ इस इलाके से अपने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “बाढ़ का सांसद रहते और समता पार्टी के गठन के समय से ही मेरा सूर्यगढ़ा और लखीसराय से नाता रहा है। मैं काम में विश्वास रखता हूँ। 2005 से सिर्फ काम किया। जंगलराज को खत्म किया। बिहार आगे बढ़ा है। 15 साल तक पति-पत्नी की सरकार थी, लेकिन किसी के कल्याण का काम नहीं किया। पहले शाम होते लोग घर से नहीं निकलते थे, लेकिन अब बेफ्रिक हैं।”

वैसे इन दो सीटों का भविष्य पिछले साल ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने वाले बिलौरी के प्रवीण कुमार यादव के कहे में छिपा है। उन्होंने बताया, “सबको लगता है कि इस बार परिवर्तन होना चाहिए। लेकिन, इससे बीजेपी को घाटा नहीं है। यदि बीजेपी इस बार नीतीश कुमार से अलग लड़ती तो उसको ज्यादा फायदा होता।”

प्रदीप भंडारी 10 घंटे की अवैध हिरासत के बाद खार पुलिस स्टेशन से आए बाहर, मुंबई पुलिस ने कहा- ऊपर से आदेश था

रिपब्लिक के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी से कई घंटों तक पूछताछ करने के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें आज खार पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया। हिरासत से बाहर आने के बाद भंडारी ने रिपब्लिक चैनल के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से बताया कि पुलिस ने उनकी अग्रिम जमानत को नजरअंदाज कर दिया और उन्हें 8 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखा।

अर्नब गोस्वामी द्वारा पुलिस से सवाल करने के लिए कई रिपब्लिक पत्रकारों को भेजे जाने के बाद आखिरकार भंडारी को दिन भर की पूछताछ के बाद पुलिस ने रिहा कर दिया । रिपोर्टर सिर्फ यह पूछने गए थे कि भंडारी को इतने लंबे समय के लिए हिरासत में क्यों रखा गया है। जैसे ही रिपब्लिक के कम से कम पाँच पत्रकारों ने लाइव टीवी पर पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की, प्रदीप भंडारी को पुलिस स्टेशन से जाने की अनुमति दे दी गई।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि जब उन्होंने पुलिस से पंचनामा माँगा, तो पुलिस ने उन्हें वह देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि वह आगामी विधानसभा चुनावों को कवर करने के लिए पटना गए थे। लेकिन अदालत द्वारा समन मिलने के बाद उन्हें वापस मुंबई आना पड़ा। भंडारी ने कहा कि समन की आड़ में मुंबई पुलिस ने कस्टोडियल पूछताछ का सहारा लिया, जो अदालत के जमानत आदेश का उल्लंघन था।

भंडारी ने यह भी खुलासा किया कि पुलिस ने उनके तीन मोबाइल फोन जब्त कर लिए और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो पुलिस ने कहा कि उनके फोन को जब्त करने के लिए उनके पास ऊपर से आदेश थे। जब भंडारी ने फोन अनलॉक करने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने फोन को अनलॉक करने के लिए एक तकनीकी विशेषज्ञ को भी बुलाया। उन्होंने कहा कि उन तीनों फोन में से एक उनके दोस्त का है, लेकिन पुलिस ने उस फोन को भी देने से इनकार कर दिया।

पत्रकार प्रदीप भंडारी ने कहा कि वह पूरे दिन पुलिस से घिरे हुए थे। इतना ही नहीं उन्हें बाथरूम जाने या पानी पीने की भी अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें 10 घंटे तक बिना पंखे के एक कमरे के अंदर रखा गया था और जब उन्होंने सिर्फ 5 मिनट के लिए बाहर आने का अनुरोध किया, तो पुलिस द्वारा उन्हें अनुमति नहीं दी गई।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पुलिस ने उन्हें धक्का दिया था और उनकी रिहाई से कुछ मिनट पहले उनका शारीरिक शोषण करने का प्रयास किया गया था, लेकिन कैमरों के साथ रिपब्लिक पत्रकारों के आगमन ने पुलिस को उनके साथ मारपीट करने से रोक दिया।

गौरतलब है कि प्रदीप भंडारी को गैर-जमानती शिकायत के खिलाफ अग्रिम जमानत दिए जाने के एक दिन बाद, उन्हें एक बार फिर मुंबई पुलिस ने 22 अक्टूबर से पहले अदालत में पेश होने के लिए बुलाया था।

हाल ही में भंडारी के खिलाफ़ पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा), 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और बॉम्बे पुलिस कानून की धारा 37 (1), 135 के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसी के बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाने में हाजिर होने को कहा गया था और प्रदीप भंडारी ने केस दर्ज होने के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर को निशाने पर लिया था।

इससे पहले मुंबई पुलिस ने एक बार फिर प्रदीप भंडारी को समन जारी कर किया था। उन्हें 22 अक्टूबर को 4 बजे तक कोर्ट में पेश होने को कहा गया था। प्रदीप भंडारी ने पुलिस कमिश्नर को उनके राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने और पुलिस की वर्दी का सम्मान नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी और उनका इस्तीफा माँगा था। उन्होंने यह भी कहा था कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास में है, इसके लिए उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत आरोप दायर करने की योजना बना रही है। जो आज सच होता दिखाई दिया।

भारत अपनी एक-एक इंच जमीन के लिए जागरूक, इसे कोई छीन नहीं सकता, सेना युद्ध के लिए सदैव तैयार: अमित शाह

गृहमंत्री अमित शाह ने चीन की चालबाजियों पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए कहा है कि अपने देश की एक-एक इंच जमीन के लिए जागरूक हैं और इसको कोई छीन नहीं सकता। न्यूज 18 को दिए अपने इंटरव्यू में अमित शाह ने हाथरस, चीन और बिहार चुनाव के मुद्दे को लेकर विस्‍तार से बातचीत की है।

शनिवार को दिए अपने इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा, “हर राष्ट्र हमेशा (युद्ध के लिए) तैयार है। सेनाओं को तैयार रखने का उद्देश्य- आक्रामकता के किसी भी रूप का जवाब देना है। मैं यह किसी विशेष टिप्पणी के संदर्भ में नहीं कह रहा हूँ, लेकिन भारत की रक्षा सेना हमेशा तैयार है।”

भारत और चीन के बीच जून में हुए झड़प के बाद दोनों देशों के राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों के बीच कई बार चर्चाएँ हुई। अभी हाल ही में इस मुद्दे पर 13 अक्टूबर को भी एक बैठक हुई थी। लेकिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी मरीन कॉर्प्स के निरीक्षण के दौरान चीन के राष्ट्रपति के हालिया बयानों ने दुश्मनी को और हवा दी है। सैनिकों को संबोधित करते हुए, शी जिनपिंग ने सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा था।

न्यूज़ 18 के द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे के जवाब में भारत को तिब्बत और ताइवान के प्रति अपनी कूटनीतिक नीति बदलनी चाहिए? जिस पर जवाब देते हुए शाह ने कहा, “इस मुद्दे पर यहाँ चर्चा करना सही नहीं है। यह दूरगामी निहितार्थों के साथ एक बहुत ही जटिल मुद्दा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के पटल पर भारत की स्थिति (चीन को लेकर) साफ़ कर दी है। मुझे लगता है कि वह पर्याप्त है। चीन के साथ हमारी बातचीत चल रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत को ग्लोबल कम्युनिटी का समर्थन प्राप्त है। हमारे इरादे नेक और मजबूत हैं। 130 करोड़ लोगों का देश किसी के सामने नहीं झुकेगा। हम सही भी है और अधिकांश देशों का हमारे साथ समर्थन है।”

अमित शाह ने बिहार चुनाव और नीतीश को लेकर एक और बयान दिया, “जब मैं पार्टी अध्यक्ष था तब मैंने कहा था और अब जब जेपी नड्डा हैं तो उन्होंने भी कहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार चुनाव लड़ा जा रहा है। और जीतने पर नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री बनेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं है, कोई दो मत नहीं है। जो कोई भी भ्रांतियां फैलान की कोशिश कर रहा है, मैं आज उसपर फुलस्टॉप लगाने जा रहा हूँ।”

शाह ने कहा, नीतीश कुमार ही बिहार के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे। इससे पहले, 1 जून को मीडिया से खास बातचीत में अमित शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव पर कहा था कि एनडीए की ओर से नीतीश कुमार ही मुख्‍यमंत्री का चेहरा रहेंगे।”

एनबीटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी की ज्यादा सीटें आती हैं तब भी क्या नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे, इस सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर मगर का कोई सवाल ही नहीं है। कुछ कमिटमेंट इस तरह के होते हैं जिन्हें सार्वजनिक रूप से किया जाता है और उनका पालन किया जाता है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले 15 साल में जो विकास हुआ है वो जारी रहे। ऊपर मोदी जी, नीचे नीतीश जी, बिहार में डबल इंजन वाली सरकार, बिहार को विकसित राज्य की ओर तेज गति से आगे ले जाएगी।

वहीं हाथरस केस पर अमित शाह ने कहा कि हाथरस में भी रेप होता है और राजस्‍थान में भी रेप होता है। तूल क्‍यों सिर्फ हाथरस को मिलता है। कारण क्‍या है कि किसी दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना को राजनीतिक रंग देना कितना उचित है?

बिहार चुनाव: नामांकन दाखिल न कर पाने पर पुष्पम प्रिया के प्लूरल्स पार्टी के उम्मीदवार ने मचाया हंगामा, पुलिस से की हाथापाई

3 चरणों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में प्रतिदिन कुछ नया घट रहा है। इसी बीच आज दूसरे चरण के नामांकन का अंतिम दिन था, लिहाज़ा पर्चा दाखिल करने वाले उम्मीदवारों की संख्या काफी ज़्यादा थी। कई उम्मीदवार तो नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ही नहीं पाए और ऐसे सभी उम्मीदवार काफी गुस्से में नज़र आए। सबसे ज़्यादा उठा पटक नज़र आई बिहार के हाजीपुर में जहाँ पुलिस ने प्लूरल्स पार्टी के प्रत्याशी के साथ धक्का मुक्की के बाद जम कर पिटाई कर दी।

अन्नू कुमार सिंह हाजीपुर स्थित राघोपुर से प्लूरल्स पार्टी के उम्मीदवार हैं। आज तक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नामांकन के अंतिम दिन वह पर्चा दाखिल करने पहुँचे थे लेकिन वह ऐसा करने में असफल रहे। नामांकन नहीं कर पाने के बाद उन्होंने मौके पर ही विरोध करना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में विवाद अच्छे भले बवाल में तब्दील हो गया। उन्होंने पुलिस से हाथापाई की फिर कोई विकल्प नहीं बचने की सूरत में पुलिस ने उनकी जम कर पिटाई कर दी। 

दरअसल, बिहार चुनाव में अपनी कार्यप्रणाली और शैली को लेकर चर्चा में बनी रहने वाली पुष्पम प्रिया के राजनीतिक दल प्लूरल्स के उम्मीदवार अन्नू कुमार सिंह नामांकन नहीं कर पाए। इस बात से नाराज़ होकर वह मौके पर धरना देने के लिए बैठ गए, वह इतने पर ही रुके नहीं बल्कि शोर मचा कर नारे भी लगाने लगे। उनका कहना था कि वह समय से ही नामांकन दाखिल करने मुख्यालय पहुँचे थे फिर भी उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं से पूरे घटनाक्रम पर विवाद शुरू हुआ। 

पुलिस ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा। पुलिस का कहना है कि प्लूरल्स पार्टी के प्रत्याशी ने बिना किसी ठोस वजह के ही बवाल शुरू कर दिया। बात करने का प्रयास किया गया लेकिन तब उन्होंने हाथापाई शुरू कर दी, नतीजतन पुलिस को कठोर होना पड़ा। इसके बाद पुलिस अन्नू सिंह को अपने साथ पकड़ कर ले गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान घटनास्थल पर काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग भी करना पड़ा था। इस दौरान वहाँ आम लोग और दूसरे राजनीतिक दलों के उम्मीदवार भी मौजूद थे।