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BARC भी पकड़ चुका है व्यूअरशिप में इंडिया टुडे की गड़बड़ी, ₹5 लाख जुर्माना भी लगाया था: एक्सक्लूसिव डिटेल

‘TRP स्कैम’ मामले में कल (अक्टूबर 9, 2020) एक बेहद दिलचस्प मोड़ आया, जब मुंबई पुलिस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फर्जी टीआरपी का इल्जाम रिपब्लिक टीवी पर लगाया और FIR में नाम इंडिया टुडे का निकल आया। इसके बाद रिपब्लिक टीवी के पत्रकार व एक मुख्य गवाह के बीच बातचीत में भी यह खुलासा हुआ कि उस गवाह के बेटे को इंडिया टुडे देखने को कहा गया था ताकि अवैध रूप से इंडिया टुडे की TRP बढ़ सके।

इंडिया टुडे ने इस बीच खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के आधार पर रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी पर खूब वार किया। हालाँकि ये बात और थी कि वह खुद का बेवकूफ ही बनाते रहे। उन्होंने उन गवाहों के बयानों को झूठा कहा और तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिन्होंने यह खुलासा किया था कि इंडिया टुडे ने खुद को सही साबित करने के लिए सारा ठीकरा रिपब्लिक टीवी पर फोड़ा।

अब, हमारे सूत्रों ने हमें जानकारी दी है कि इंडिया टुडे को 5 लाख रुपए का फाइन भरने को कहा गया था, क्योंकि उन्होंने अपनी व्यूअरशिप बढ़ने के पीछे जो स्पष्टीकरण BARC Disciplinary Council (BDC) को सौंपा, वह उन्हें संतोषजनक नहीं लगा। 

व्यूअरशिप में नजर आ रही गड़बड़ी (malpractice) के संबंध में टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड और BARC को 27 अप्रैल 2020 को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था। इसके बाद टीवी टुडे द्वारा दिया गया जवाब BARC डिसिप्लिनरी काउंसिल को संतोषजनक नहीं लगा। बीडीसी ने इंडिया टुडे की प्रतिक्रिया पर कहा, “चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों (मुंबई और बेंगलुरु) में इंडिया टुडे चैनल की व्यूअरशिप में इतने उछाल के संबंध में दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं है।”

इसके अलावा, BARC डिसिप्लिनरी काउंसिल ने कहा, “BARC Measurement Science Team द्वारा उपलब्ध कराए गए स्टैस्टिकल डेटा (statistical data) से पता चलता है कि व्यूअरशिप में असामान्य और सोच से परे वृद्धि हुई है।”

अपने आदेश में बीडीसी ने कहा कि, “सब्सक्राइबर के जवाब ने असामान्य वृद्धि के ऊपर संतोषजनक जवाब नहीं दिया।” बता दें कि यहाँ सब्सक्राइबर का अर्थ इंडिया टुडे से है, जिन्हें BARC Disciplinary Council ने कारण बताओ नोटिस भेजा था।

आगे आदेश में जो कहा गया वह भी बेहद चौंकाने वाला है। उसमें लिखा है:

“उपरोक्त के मद्देनजर, काउंसिल को लगता है कि सब्सक्राइबर ने EULA की धारा 7 में निहित प्रावधनाओं का उल्लंघन किया और व्यूअरशिप में गड़बड़ी की, जिसका जिक्र कारण बताओ नोटिस में है। साथ ही BARC Vigilance team टीम द्वारा जमा की गई रिपोर्ट में भी है। CCRVM की धारा 14 (ए) के तहत, यह सब्सक्राइबर का पहला अपराध है। इसलिए काउंसिल इस बात पर सहमति दे रही है कि वर्तमान मामले में सिर्फ़ सब्सक्राइबर को चेतावनी जारी की जाएगी और उसे 5,00,000 रुपए की पेनाल्टी BARC को भरनी होगी।”

बता दें कि BARC ने अपने एंड यूजर लाइसेंस एग्रीमेंट को चैनलों (सब्सक्राइबर) के साथ बेहद सख्त बना दिया है और अगर व्यूअरशिप को लेकर उन्हें कोई गड़बड़ लगती है तो वह उसके साथ अपने समझौते को भी समाप्त कर लेते हैं।

इस आदेश के मुताबिक, इंडिया टुडे ने EULA की धारा 7 का उल्लंघन किया है और व्यूअरशिप में गड़बड़ी करने का अपराध भी किया है, जिसका जिक्र कारण बताओ नोटिस में है और BARC Vigilence Team द्वारा सबमिट की गई रिपोर्ट में भी है।

हालाँकि, ऐसा अपराध इंडिया टुडे ने पहली बार किया, इसलिए उन्हें बस चेतावनी दी गई हैं और उनका लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा रहा। मगर उन्हें 5 लाख का जुर्माना भरना ही होगा।

खासबात यह है कि यह आदेश 31 जुलाई को जारी किया गया है। मगर इंडिया टुडे ने अभी तक इसका फाइन नहीं भरा है। संभवत: इंडिया टुडे आदेश के ख़िलाफ़ अपील करे, इसलिए इसकी डिटेल्स के बारे में ऑपइंडिया पुष्टि नहीं करता है।

अब इसी संदर्भ में, यह बात विदित है कि इंडिया टुडे अपने ऊपर लगे इस जुर्माने से बेखबर नहीं होगा कि उन्हें खुद BARC को व्यूअरशिप में गड़बड़ी (Malpractice) को लेकर 5 लाख रुपए का जुर्माना भरने को कहा गया है व BARC की डिसिप्लिनरी काउंसिल ने उन्हें टीआरपी स्कैम में दोषी ठहराया है।

सब कुछ जानते हुए कि इंडिया टुडे खुद व्यूअरशिप गड़बड़ी का दोषी है, यह बड़ी अजीब बात है कि इंडिया टुडे ने मुंबई पुलिस के आरोपों के आधार पर अर्नब गोस्वामी पर सारा ठीकरा फोड़ने की कोशिश की। जबकि वास्तविकता में दायर एफआईआर में नाम इंडिया टुडे का नाम है। रिपब्लिक टीवी का उसमें कहीं उल्लेख तक नहीं है।

इन सबको देख कर तो यही लगता है कि रिपब्लिक टीवी से व्यूअरशिप मामले में पिछड़ते हुए और इंडिया टुडे की घटती टीआरपी देखते हुए चैनल के राहुल कंवल, राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार झूठा इल्जाम लगाने में जुटे, वो भी बिना ये एहसास किए कि सोशल मी़डिया के दौरा में उनका झूठ ज्यादा देर नहीं टिक पाएगा।

बता दें कि ऑपइंडिया ने इस पूरे केस में राहुल कंवल से उनकी राय जानने के लिए संपर्क किया था। मगर हमें अभी उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अगर राहुल कंवल सवालों का जवाब हमें देते हैं तो इस खबर को उनके पक्ष के साथ अपडेट किया जाएगा। 

(नुपूर जे शर्मा की मूल रूप से ​अंग्रेजी में लिखी गई यह रिपोर्ट यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

5 साल के थे कांता और 3 साल की थी बादामी देवी, जब हुई शादी: ‘बाबा का ढाबा’ वाले दम्पति की पूरी कहानी

सोशल मीडिया की दुनिया मिजाज़ के लिहाज़ से बेहद प्रतिक्रियावादी है। किसी भी घटना पर हर व्यक्ति प्रतिक्रिया देता है और कभी-कभी इन प्रतिक्रियाओं के नज़ारे बेहद खूबसूरत और भावुक होते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ जब दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बुजुर्ग दम्पति का निराश अवस्था में वीडियो वायरल हुआ

इस वीडियो ने कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी की ज़िन्दगी बदल दी। एक से दो दिनों में इतने लोग मदद के लिए आगे आए कि बुजुर्ग दम्पति के लिए जीवन की परिभाषा बदल गई। अब उन्होंने लोगों की जताई संवेदना और स्नेह के लिए आभार प्रकट किया है। अपनी ज़िन्दगी से जुड़े हर छोटे-बड़े पड़ाव का ज़िक्र किया है। 

कांता प्रसाद बताते हैं, “मेरी जब इससे शादी हुई तब मैं सिर्फ 5 साल का था और वह (बादामी देवी) 3 साल की थी। उस दौर में अंग्रेज़ गैर शादीशुदा महिलाओं का उत्पीड़न करते थे, इसलिए शादियाँ जल्दी करा दी जाती थीं। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, मुझे इसे पसंद करना था और उसे भी मुझसे लगाव रखना था। यह एक ‘मोहर’ जैसा था, हम पर सिर्फ 5 साल की उम्र में एक साथ रहने का स्टाम्प लग गया था। 1961 में उसके परिवार वालों ने उसे मुझे सौंप दिया, मैं बहुत खुश था और उसे घर लेकर आया। हम 21 साल की उम्र में बेहतर अवसरों की आशा में उत्तर प्रदेश से दिल्ली आया।”

दिल्ली की अपनी जिंदगी के बार में वे बताते हैं, “हम यमुना किनारे रहा करते थे। फिर समय बीता और यहाँ आ गए। मैंने फल के ठेले से शुरुआत की थी। लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तब मैंने कुछ बेहतर करने का सोचा और हमने ‘बाबा का ढाबा’ शुरू किया। हमारी शुरुआत बहुत धीमी हुई थी, हम बस ज़रूरत पूरी करने भर की कमाई कर पाते थे और यह सिलसिला लगभग 30 सालों तक चला। कल जब मैंने लोगों, नेताओं, अभिनेताओं और मशहूर लोगों की भीड़ देखी तब मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। मैं 21 साल की उम्र में इस बात के सपने देखा करता था और बीते दिन मैंने अपने सपने को सच होते देखा। ईश्वर हमारी सुनता है, आज नहीं तो शायद 30, 40, 50 या मेरी तरह 80 साल की उम्र में। एक न एक दिन हमारा सपना सच होता ही है, मैं अब और जीना चाहता हूँ। अपनी पत्नी को भी यूँ ही मुस्कुराते देखना चाहता हूँ। उसे बहुत जल्दी समझ आ गया कि कैमरा के सामने कैसे मुस्कुराना है, लेकिन मुझे समय लगा। अब हम अपनी दुकान पर जाना चाहते हैं, अमीरों की तरह दुकान पर किसी काम करने वाले को रखना चाहते हैं। फिर मैं अपनी पत्नी को पुराने दिनों की तरह चाय पिलाने के लिए लेकर जाऊँगा, यह सब देख कर ऐसा लगता है जैसे बस शुरुआत है।”  

इस मामले में एक और अच्छी बात यह है कि खुद ज़ोमैटो ‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाले दम्पति की मदद के लिए आगे आया है। ज़ोमैटो ने कहा है कि अब इस ढाबे का खाना ज़ोमैटो (फ़ूड डिलीवरी एड) पर भी उपलब्ध है। साथ ही ज़ोमैटो ने इंटरनेट यूज़र्स का शुक्रिया कहा है कि वह ऐसे किसी ज़रूरत मंद को सामने लेकर आए। बहुत जल्द ज़ोमैटो पर ‘बाबा का ढाबा’ में तैयार किए जाने वाले पकवान उपलब्ध होंगे।

वृद्ध दम्पति दिल्ली स्थित मालवीय नगर में एक छोटा सा ढाबा चलाते हैं और उस पर सामान्य भोजन देते हैं। वह आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र रहे थे और तभी किसी इंटरनेट यूज़र ने उनका वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ बूढ़े दम्पति के लिए मदद माँगने का सिलसिला, जिसके तहत सोशल मीडिया पर मौजूद लाखों लोग वीडियो साझा करते हुए उनकी मदद के लिए आगे आए। 

एक ही दिन के भीतर बूढ़े दम्पति का वीडियो लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँच गया। बहुत से लोगों ने उनका निजी तौर पर सहयोग किया जिससे उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में ग्राहक मिलें। देखते ही देखते महज़ एक से दो दिनों में कुछ ऐसा हुआ जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की हो, हज़ारों लोग कांता प्रसाद और बादामी देवी की मदद के लिए आगे आए।

हाथरस के पीड़ित परिवार का कोरोना टेस्ट कराने से भी इनकार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाथरस घटना को लेकर पीड़िता के परिजनों की तरफ से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। पीड़िता के परिजनों ने दाखिल याचिका में प्रशासन पर जबरन घर में कैद करने का आरोप लगाया था। वहीं अब मृतका के परिजनों ने कोरोना टेस्ट कराने से भी मना कर दिया है। बता दें इससे पहले नार्को टेस्ट और सीबीआई जाँच के लिए भी इनकार कर चुके हैं।

हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुरक्षा दी गई है। ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने मृतका के पिता ओम प्रकाश और 6 अन्य की याचिका पर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि परिवार को कोई शिकायत है तो वे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर कर ने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लेने पहुँची टीम को भी पीड़ित परिवार ने इनकार कर दिया। दरअसल परिवार के पास बिटिया की मृत्यु के बाद से ही नेताओं और मीडिया का आना-जाना लगा हुआ है, जिससे परिवार को कोरोना का खतरा है।

हाल ही में आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद पीड़ितों से मिलने पहुँचे थे। जिस कारण संक्रमण का खतरा बढ़ चुका है। यही वजह है कि प्रशासन इनकी कोरोना जाँच कराना चाहता है। साथ ही मृतका की बहन को कुछ दिनों से खाँसी की शिकायत भी है।

हाथरस कांड

गौरतलब है कि 19 वर्षीय पीड़िता का उसके गाँव में 14 सितंबर को चार लोगों द्वारा कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार और हमला किया गया था। हालाँकि, आरोपितो ने इससे इनकार किया था और फोरेंसिक रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई है।

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ की अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

राहुल-प्रियंका की उल्टी समेटने के चक्कर में मोहम्मद जुबैर-प्रतीक सिन्हा के ऑल्टन्यूज ने फिर रायता फैलाया

सोशल मीडिया पर राहुल-प्रियंका के ठहाकों का वीडियो के वायरल होते ही सबसे पहले ‘इंडिया टुडे’ अपने आकाओं को ‘क्लीनचिट’ देने के लिए मैदान में उतरा तो कुछ ही दिन बाद उसी सामंतशाही विचारधारा से जन्मे गैंग ऑल्टन्यूज वाले ‘आतापी-वातापी’ यानी, प्रतीक-जुबैर की जोड़ी भी अब भाई-बहन की जोड़ी की बची हुई इमेज बचाने मैदान में उतर पड़ी।

इस प्रतीक-जुबैर की ‘ऑल्टन्यूज़ ब्रदर्स’ वाली जोड़ी की उपलब्धि ये है कि इन्होंने फैक्टचेक में भी धूर्तता की गुंजाइश तलाश की थी। इस तरह से इन्हें वैज्ञानिक फैक्टचेकर्स भी कह सकते हैं।

नाबालिग बच्ची की जानकारी और तस्वीर सार्वजानिक कर उसे लोगों की घृणा का शिकार बनाने के आरोप के चलते NCW की फटकार खाने वाले ऑल्टन्यूज़ का सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर सोशल मीडिया पर वापस लौटा और लौटकर उसने ‘धमाकेदार वापसी’ की। वास्तव में, इस बात से शायद ही कोई इनकार करेगा कि कुख्यात और ‘नौटी’ होना ही ऑल्टन्यूज के लिए ‘धमाकेदार वापसी’ हो सकता है।

हाथरस मामले पर हो रही राजनीति के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को कार से हाथरस जाते हुए देखा जा सकता है, जहाँ वह कथित तौर पर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए जा रहे थे। वीडियो में दोनों भाई-बहनों के ठहाके की आवाज सुनाई देती है।

इंडिया टुडे के बाद अब ऑल्टन्यूज़ ने कुछ साबित नहीं, बल्कि सीधा क्लीनचिट करने का करिश्मा किया है। इस बार राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा के ठहाकों का ‘फैक्ट-चेक’ करने की जिम्मेदारी ऑल्टन्यूज़ ने उठाई।

फीचर फोटो में ‘हाथरस वाले ठहाके’ और फैक्टचेक लोकसभा चुनाव का

ऑल्टन्यूज़ ने ‘इंडिया टुडे’ से एक कदम आगे जाते हुए पूरी धूर्तता के साथ शीर्षक तो ‘हाथरस जाते हुए वीडियो’ का रखा लेकिन अपने आकाओं की जिस तस्वीर का फैक्टचेक किया है वह राहुल-प्रियंका के हाथरस जाते समय की नहीं बल्कि 2019 के आम चुनावों से पहले की है। जबकि इस कथित फैक्टचेक की फीचर फोटो में प्रियंका और राहुल गाँधी की वही विवादित तस्वीर इस्तेमाल की है, जिसमें उन्हें हाथरस जाते समय ठहाके लगते देखा गया था और जिसमें फैक्टचेक की कोई गुंजाइश ही मौजूद नहीं है।

ऑल्टन्यूज़ के इस कथित फैक्टचेक में यह समस्या है कि यदि वह प्रियंका गाँधी वाड्रा और राहुल गाँधी के हाथरस जाते वक्त सामने आए वीडियो का फैक्टचेक करने का दावा कर रहे हैं तो उन्हें उन दोनों भाई बहनों यानी राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी की 2019 के लोकसभा चुनावों की तस्वीर का फैक्ट चेक करने की आवश्यकता क्यों हुई?

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के हाथरस जाते समय कार में हँसने वाले वीडियो की सच्चाई से पूरी दुनिया वाकिफ है कि वह फेक वीडियो नहीं था लेकिन ‘ऑल्टन्यूज़ ब्रदर्स’ उसके बजाय पुरानी और ऐसी तस्वीर का फैक्टचेक क्यों कर रहे हैं जिस तस्वीर का लोगों को ध्यान तक नहीं? असल में यहाँ पर मंशा सिर्फ और सिर्फ राहुल-प्रियंका को यह क्लीनचिट देने की ही थी कि हाथरस की घटना में पीड़ित परिवार को मिलने जाते समय दोनों बेहद शालीन और दुःख के सागर में डूबे हुए थे।

निष्कर्ष तो यही निकलता है कि दोनों कथित गाँधियों को हाथरस के पीड़ित परिवार से कोई सहानुभूति थी नहीं, लेकिन ऑल्टन्यूज को इनके डूबते करियर से जरुर सहानुभूति है।

इस बार ऑल्टन्यूज़ ने किसी ‘वायरल’ दावे का इन्तजार करना भी जरुरी नहीं समझा बल्कि मात्र एक ट्वीट (जो कि इसलिए संदेहास्पद है क्योंकि वह भी अब डिलीट कर दिया गया है) के आधार पर इसका फैक्ट चेक करना जरुरी समझा। अब इस रिपोर्ट में कहीं दावे नहीं बल्कि सिर्फ एक यूआरएल और कुछ धूर्तता के प्रमाणपत्र ही शेष हैं।

हाथरस पीड़ित परिवार से मिलने जाते वक्त प्रियंका-राहुल के वीडियो की सच्चाई उनके मास्क और कुर्ते बयाँ कर ही रहे हैं –

‘India Today’ ने इस बात से इनकार नहीं किया था कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा, दोनों ही कार में सबसे आगे बैठे हैं, लेकिन उनका कहना था कि चूँकि दोनों के चेहरे नहीं दिख रहे थे इसलिए यह नहीं बताया जा सकता है कि कौन हँस रहा है।

इंडिया टुडे की मक्कारी की हद यहीं तक सीमित थी लेकिन ऑल्टन्यूज़ ने जो कारनामा किया है उसने साबित कर दिया है कि कॉन्ग्रेस को अपनी लाज बचाने के लिए और बड़े स्तर के धूर्त अब मिल चुके हैं। इनके टेलेंट पर शक करना और उसे कम समझना उचित भी नहीं है क्योंकि ये वही लोग हैं जो दिल्ली दंगों के प्रमुख आरोपित ताहिर हुसैन के वीडियो में ‘फैक्ट्स’ तलाश रहे थे, जामिया में पत्थरों को बटुआ बता रहे थे।

ऐसा क्यों करता है ऑल्टन्यूज

ऑल्टन्यूज धूर्त तो है लेकिन इंटरनेट के समय में धूर्तता कई बार मूर्खता में परिवर्तित हो जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि राहुल और प्रियंका गाँधी के ऊपर हाथरस जाते हुए ‘कार में हँसने’ की बातें सामने आई थी, जो कि सबने देखा और सुना।

ऑल्टन्यूज ने चालाकी से मुद्दा तो हँसने का उठाया, लेकिन फैक्टचेक किसी और फोटो का किया जो एक दो लोग, इस कारण ही शेयर कर रहे थे कि उन्हें भी पता चला राहुल-प्रियंका हँसते हुए जा रहे थे।

ऐसे में, सत्य यही है कि दोनों नकली गाँधियों को हाथरस के पीड़ित परिवार से कोई सहानुभूति थी नहीं, लेकिन ऑल्टन्यूज को इन दोनों के डूबते करियर से बहुत सहानुभूति है। हो भी क्यों नहीं, ऑल्टन्यूज के कुख्यात जुबैर-सिन्हा का जोड़ा भी राहुल-प्रियंका के जोड़े की ही तरह गायब होने की कगार पर है।

बाहरहाल, चालाकी यह की गई कि ऑल्टन्यूज के दो-चार-दस पाठकों को यह जताने के लिए राहुल और प्रियंका हँस नहीं रहे थे, पत्रकारिता के साथ यह दुष्कर्म किया गया। फैक्टचेकिंग सत्य को सामने लाने के लिए किया जाता है, शेयर करने वाले की मंशा भी देखी जाती है। यहाँ राहुल-प्रियंका के हँसने की भी बात सही है, और वो वीडियो भी सबके सामने है।

इतना ही नहीं, ऑल्टन्यूज ने अपने नासा वाले सॉफ्टवेयर से यह पता लगा लिया कि ये फोटो गलत है, लेकिन मंगल ग्रह पर दिमाग रख कर भूल आए जुबैर-सिन्हा की जोड़ी से यह पूछा जाना चाहिए कि फीचर्ड इमेज में वीडियो का स्क्रीनशॉट किस आधार पर लगाया है?

क्या हाथरस केस ‘ऑनर किलिंग’ का मामला है?| Ajeet Bharti on honour killing angle in Hathras case

हाथरस केस में लगातार नई बातें निकलकर सामने आ रही हैं। गाँव वालों की प्रतिक्रिया, परिजनों के बयान, स्टिंग ऑपरेशन से हो रहे खुलासे, मिलाकर सबकुछ इस मामले को नया एंगल दे रहे हैं।

अभी तक सामने आए सबूत इस मामले में यही इशारा कर रहे हैं कि यह गैंगरेप की घटना नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत आपसी रंजिश से हुई। फिर चाहे फॉरेंसिक रिपोर्ट्स को देखा जाए, चाहे तो मृतका की माँ के शुरूआती बयान को सुना जाए या स्थानीय मीडिया की कवरेज से इसका आँकलन किया जाए। सबसे बस यही मालूम पड़ रहा है कि केस वो नहीं है जिसे अब तक मीडिया ने परोसा।

आरोपित पक्ष के लोग लगातार इस मामले में जाँच करवाने की बात कर रहे हैं। नार्को टेस्ट की माँग कर रहे हैं। वहीं पीड़ित पक्ष इन सबसे इंकार कर रहा है। आरोपितों ने जेल से पत्र भी लिखा है कि उन्होंने लड़की के साथ कोई गलत काम नहीं किया।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग को माना गलत, लेकिन देर हो चुकी है | Ajeet Bharti on SC Shaheen Bagh verdict

साल 2019 के दिसंबर माह में जामिया नगर दंगों के साथ शुरू हुए शाहीन बाग प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल में टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ही उचित है, जगह घेर कर बैठ जाना गलत है क्योंकि लोगों को इससे परेशानी होती है।”

सोचने वाली बात है कि समय-समय पर कालजयी निर्णय देने वाली यही संस्था दिवाली आने पर वक्त से पहले निर्देश जारी कर देती है और यह भी तय करती है कि दही हाँडी की ऊँचाई कितनी होगी। इसके अलावा कौन सी फिल्म बिना कटे-छँटे रिलीज होगी, इसको भी एक दिन की आपाताकालीन सुनवाई में तय कर लिया जाता है। लेकिन, शाहीन बाग जैसी प्रायोजित नौटंकी पर इनको अपना निर्णय देने में अक्टूबर 2020 तक का समय लग जाता है।

ऐसे में सवाल तो उठता है कि इतने महीनों बाद इस निर्णय के क्या मायने हैं? क्या इससे यह सुनिश्चित होगा कि आगे कोई शाहीन बाग पैदा नहीं होगा और ये कट्टरपंथियों का समूह दोबारा पूरे भारत को हिन्दूविरोधी दंगों की आग में नहीं झोंकेगा?

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‘TMC एक्टिविस्ट’ सुबोध राय के घर पर की गई मनीष शुक्ला मर्डर की प्लानिंग, शॉर्पशूटरों को भी दी पनाह

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के टीटागढ़ में भाजपा नेता मनीष शुक्ला की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में अपराध जाँच शाखा (CID) ने तीसरे आरोपित को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान सुबोध यादव उर्फ ​​सुबोध राय के रूप में की गई है। उस पर हमले में शामिल छह संदिग्धों को आश्रय देने का आरोप है।

रिपोर्टों के मुताबिक सुबोध TMC का कार्यकर्ता है। वह बैरकपुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के पूर्व चेयरमैन उत्तम दास का करीबी बताया जाता है। मनीष शुक्ला की हत्या की जाँच शुरू होने के तुरंत बाद पुलिस ने मोहम्मद खुर्रम खान और गुलाब शेख को गिरफ्तार किया था। जाँचकर्ताओं ने उन्हें 14 दिनों के लिए हिरासत में ले लिया है। तृणमूल नेता नजीर खान को बुधवार (अक्टूबर 07, 2020) को गिरफ्तार किया गया।

मनीष शुक्ला की रविवार (अक्टूबर 04, 2020) शाम करीब 8:30 बजे मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमलावरों ने शुक्ला को बेहद करीब से गोली मारी थी। मारे गए भाजपा नेता के पिता चंद्रमणि शुक्ला द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में टीएमसी नेता और टीटागढ़ नगरपालिका के पूर्व महापौर प्रशांत चौधरी, बैरकपुर नगरपालिका के निवर्तमान मेयर उत्तम दास, और मोहम्मद खुर्रम खान सहित कुल आठ लोगों को आरोपित के तौर पर नामजद किया गया है।

सीआईडी की एक टीम ने उस स्थान का दौरा किया जहाँ मनीष शुक्ला को गोली मारी गई थी। वे गिरफ्तार कारोबारी खुर्रम की भी जाँच कर रहे हैं। इस बीच, जाँच में कुछ सनसनीखेज जानकारी सामने आई हैं।

सुबोध के घर पर बनी थी हत्या की रणनीति

अधिकारियों को पता चला है कि बदमाशों ने तीन महीने पहले ही हत्या की साजिश रची थी। सीआईडी ​​अधिकारियों ने बताया कि भाजपा पार्षद को मारने की योजना बैरकपुर में सुबोध के आवास पर बनाई गई थी।

घटना से कुछ दिन पहले, बैरकपुर नगरपालिका के में निर्माणाधीन एक मकान की दूसरी मंजिल पर एक फ्लैट में चार युवक रहने लगे। वहाँ से वो इलाके में रेकी करने लगे और नजर रख रहे थे। पुलिस ने फ्लैट को भी सील कर दिया है। वहीं, पुलिस ने कई स्थानीय लोगों से पूछताछ की।

एक अधिकारी के अनुसार, “मनीष शुक्ला को खत्म करने की पूरी योजना सुबोध के आवास पर बनाई गई थी। उसने शॉर्पशूटरों को पनाह दी जो कम से कम चार की संख्या में थे और हत्या से कुछ दिन पहले बैरकपुर आए थे।”

बताया जा रहा है कि मनीष शुक्ला की हत्या के लिए रची गई साजिश की पूरी जानकारी सुबोध को थी। वही उक्त निर्माणाधीन मकान के दूसरी मंजिल पर फ्लैट में ठहराए गए 6 शॉर्पशूटर के खाने-पीने का इंतजाम देखता था।

स्थानीय लोग उसे फ्लैट में आते-जाते देखते थे। सीआईडी ने बृहस्पतिवार को सुबोध को बैरकपुर कोर्ट में पेश किया जहाँ कोर्ट ने उसे 12 दिनों की सीआईडी ​हिरासत में भेज दिया है।

CID ने बरामद किए कार्बाइन, बाइक और ‘साजिश का सामान’

सीआईडी ने बुधवार देर रात को ही बैरकपुर पालिका के 4 नंबर वार्ड से अभियुक्त सुबोध यादव को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार को सीआईडी की एक टीम ने सोदपुर रेलवे ब्रिज के नीचे से मनीष की हत्या के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए कार्बाइन को बरामद कर लिया है। वहीं, टीम ने 3 मोटरसाइकिलें भी जब्त की हैं जिस पर अभियुक्त सोदपुर की ओर भागे थे।

TMC शक के दायरे में

भाजपा ने पहले भी तृणमूल कॉन्ग्रेस पर इस हत्या का आरोप लगाया था। मृतक के पिता ने पुलिस के पास अन्य टीएमसी नेताओं जैसे प्रशांत चौधरी और उत्तम दास की हत्या में शामिल होने के लिए शिकायत दर्ज की थी।

इस बीच, बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने दावा किया था कि मुख्य आरोपित मोहम्मद खुर्रम, जो पहले सीआईडी ​​द्वारा गिरफ्तार किया गया था, के टीएमसी मेंबर्स फिरदाह हकीम, निर्मल घोष, मदन मित्रा, दिनेश त्रिवेदी, और बतिआ बासु के साथ संबंध हैं। भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मनीष शुक्ला को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।

टीआरपी को तरसता NDTV, प्राइम टाइम में ‘TRP’ पर खूब नाचा; हाथरस की दलित मृतका को सब बिसरे

जनता के साथ कौन है? स्वाभाविक सी बात है, मीडिया! आम नागरिकों को राष्ट्रीय संकट से जुड़े मुद्दे पर ‘मिनट टू मिनट’ जानकारी उपलब्ध कराना। मुद्दों पर बात करने वाले किरदारों में ऐसे लोगों की गिनती करिए जिन्हें (बीते दशकों में) वाकई मीडिया की समझ है। 

एनडीटीवी के पत्रकार संकेत उपाध्याय का ट्वीट

ऑर्डर-ऑर्डर! पैनल का आरम्भ हो चुका है। आज का एजेंडा क्या है? 

भारत में कोरोना वायरस के 70 लाख मामले सामने आ चुके हैं?

चीन की लद्दाख में घुसपैठ?

हाथरस मामले में दलित पीड़िता? 

बिलकुल नहीं! अब उनके पास बात करने के लिए एक और अहम मुद्दा है। जैसा कि संकेत ने ऊपर बता ही दिया है, “यह 9 बजे होने वाली मेरे जीवन सबसे बेहद अहम बहस है।” तुम्हारी ज़िन्दगी के अहम मुद्दे पर कोई और क्यों बात करना चाहेगा संकेत और तुम इसे प्राइम टाइम में क्यों लेकर आ रहे हो? 

मज़े की बात है कि जब भी उत्साह या चिंता अपने चरम पर होती है, वैसे ही एनडीटीवी के कर्मचारियों की व्याकरण की खिचड़ी बन जाती है। बहुत पहले की बात नहीं है, तमाम मीडिया मसीहा निराशा वश अपना सिर हिला रहे थे। क्यों देश असल मुद्दों पर चर्चा नहीं कर रहा है? मीडिया में होने वाले विमर्शों को हो क्या गया है? वही धीर गम्भीर मीडिया अपने प्राइम टाइम पर टीआरपी के मुद्दे से बाहर ही नहीं आ पा रही है। 

हमें इस बात पर गौर करना होगा कि इस तरह के तुच्छ टीआरपी विमर्शों ने हाथरस मामले को टीवी स्क्रीन्स से गायब कर दिया। मीडिया में आम नागरिकों के लिए बस इतनी ही इंसानियत और संवेदना है। मीडिया को बस इतनी फ़िक्र है सामाजिक न्याय की, दलितों की, महिलाओं की और देश की। 

अगर आप मीडिया को उसके सबसे निचले दर्जे पर देखना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे अच्छा दिन कल ही था। 

क्या आप इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि महाराष्ट्र ही कोरोना वायरस के मामले में पहले पायदान पर क्यों है? 

क्या आप जानते थे कि ठीक एक दिन पहले मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री शरद पवार को महाराष्ट्र स्टेट कॉरपोरेटिव बैंक 25 हज़ार करोड़ घोटाला मामले में क्लीनचिट दे दी?

लेकिन किसे फर्क पड़ता है? मुंबई पुलिस इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता कर रही है कि टीवी की टीआरपी बढ़ाने के लिए कौन 500 रुपए दे रहा है और कौन नहीं। और यह एक ख़बर भी है न कि 25 हज़ार करोड़ के घोटाला मामले में दी गई क्लीनचिट। न तो महाराष्ट्र के 15 लाख कोरोना वायरस से प्रभावित मरीज ख़बर हैं, न ही हाथरस की दलित पीड़िता और न ही एलएसी में चीन की घुसपैठ। ख़बर सिर्फ एक है ‘टीआरपी।’

बहुत साल पहले भारत की संसद पर आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले में भारतीय लोकतंत्र की सबसे पवित्र इमारत की रक्षा कर रहे 9 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए थे। एक मशहूर मीडिया कर्मी ने इस दिन को शानदार बताया था। क्यों? टीआरपी की वजह से। 

यही इनकी असलियत है। 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमलों से लेकर हाथरस मामले तक, यह सिर्फ और सिर्फ गिद्ध ही साबित हुए हैं। यह खुद को इंसान कहते हैं, लेकिन यह असल में गिद्ध ही हैं। यही असल ख़तरा है कि उन्हें कुछ महसूस नहीं होता है। वह ऐसा दिखाते हैं कि वे सब कुछ महसूस करते हैं। 

गिद्ध बने रहना भी गलत नहीं है, आखिर संविधान इन्हें गिद्ध बने रहने की आज़ादी देता है। हमें अपनी भलाई के लिए इन गिद्धों से सतर्क रहना होगा, जो कहीं और नहीं बल्कि हमारे बीच रहते हैं। हमारे देश के बारे में बहुत सी अच्छे बातें हैं, लेकिन मीडिया उनमें से एक बिलकुल नहीं है। उदाहरण के लिए, क्या आपको यूपीए सरकार का कार्यकाल याद है जब 2 लाख करोड़ रुपए का घोटाला, 1.76 लाख करोड़ का घोटाला सुनाई देता था? वह घोटालों के इस कदर भूखे हैं कि अब यह 400-500 रुपए पर आ गिरे हैं। विडंबना है कि यह ऐसी बात है जिस पर हम खुश हो सकते हैं।

(अभिषेक बनर्जी द्वारा मूल रूप से ​अंग्रेजी में लिखे गए इस लेख को यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

व्यंग्य: कन्हैया कुमार का इंटरव्यू, बिहार चुनाव में टिकट नहीं मिला | Ajeet Bharti roasts Kanhaiya

बिहार चुनाव में टिकट न मिल पाने के कारण लाल सलाम वाले कन्हैया कुमार का कहना है कि वह किसी विचारधारा का चेहरा नहीं हैं जबकि ये बात जगजाहिर है कि जेएनयू में ‘आजादीईईई’ के नारे लगाने से लेकर वामपंथी पार्टी से चुनाव लड़ने तक उन्होंने किस आइडियोलॉजी का समर्थन किया।

आज उनकी ऐसे ही ‘दोगलेपन’ के कारण उन्हें केवल कामभक्त माओवंशी लमप्ट समुदाय और गिरोह विशेष के पत्रकार और R&Dtv जैसे संस्थान ही इज्जत देते हैं।

यही कारण है जब ऑपइंडिया संपादक ने उनसे बातचीत की तो उन्हें कई दफा शर्मिंदा होना पड़ा। कभी उन्होंने ‘संघी-संघी’ कहकर जवाब देने में टाल-मटोल किया, तो कभी स्थान विशेष का ही मतलब पूछ लिया।

साक्षात्कार में अजीत भारती ने उन्हें निर्दलीय चुनाव ल़ड़ने की सलाह भी दी, मगर लिंगलहरी बनकर मूत्र विसर्जन करने वाले कन्हैबा ने साफ कहा कि वो अब जिला परिसद का चुनाव देखेंगे और पंचायत चुनावों को ही अपना टारगेट लेकर चलेंगे।

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₹122 करोड़ से सँवरेगा गोरखपुर, CM योगी ने 177 परियोजनाओं की रखी नींव

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार के तहत विकास गतिविधियों में तेजी देखी गई है। गोरखपुर को ‘स्मार्ट सिटी’ में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए CM योगी ने 122 करोड़ रुपए की 177 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनता को परियोजना के बारे में बताया।

शिलान्यास की गईं परियोजनाएँ जनपद के सदर, ग्रामीण और सहजनवा विधानसभा क्षेत्र में अच्छी सड़कों, व्यवस्थित नालियों के निर्माण से जुड़ीं हैं।

इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “एम्स जैसे अत्याधुनिक सुविधायुक्त चिकित्सा संस्थान के बाद अब इस साल चिड़ियाघर की सौगात मिलेगी। अगले साल की शुरुआत में खाद कारखाने की बहुप्रतीक्षित आस पूरी होगी। कला, संस्कृति, आध्यात्म के महत्वपूर्ण केंद्र गोरखपुर में विकास की हर आस पूरी होगी। विकास की रोशनी से गोरखपुर की हर गली को रोशन किया जाएगा।”

गोरखपुर में आने वाले विकास और बदलते भविष्य पर बोलते सीएम ने लोगों से याद करने को कहा कि आज से 20-25 साल पहले गोरखपुर के बारे में लोगों की धारणा क्या थी। अराजकता और बदहाली यहाँ की पहचान बन गई थी, लेकिन आज जनसहयोग से जन आकांक्षाओं के अनुसार नए गोरखपुर का निर्माण हो रहा है।

योगी ने कहा कि खाद कारखाने का पुनर्संचालन यहाँ के लोगों का बहुप्रतीक्षित सपना था, जो अब जल्द ही एक वास्तविकता बन जाएगा। उन्होंने याद किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसका शिलान्यास कर इस बात पर जोर दिया था कि इस कदम से 4,000 नौकरियों का सृजन होगा और उत्तर प्रदेश में किसानों को पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी। सीएम ने कहा कि अगले वर्ष इसका शुभारंभ होगा। उन्होंने कहा कि बॉयोफ्यूल प्लांट, वाटर स्पोर्ट पार्क, आयुष विश्वविद्यालय, वेलनेस सेंटर, वेटनरी कॉलेज, पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, महिला पीएसी की एक वाहिनी की स्थापना ‘नए गोरखपुर’ को समृद्ध करेगी।

गोरखपुर के अंदरूनी इलाकों में बदहाल सड़कें और दुर्व्यवस्थित नालियों से जूझते लोगों के लिए बोलते हुए सीएम ने घोषणा की कि इसे मिटाने के लिए ही इन सड़क और नाली निर्माण की परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है। उन्होंने मण्डलायुक्त गोरखपुर को निर्देश दिया कि हर एक परियोजना के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए और सभी कार्य मानक के अनुसार समय से पूरे होने चाहिए।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन उद्देश्य के लिए गोरखपुर जिले को विकसित करने में राज्य सरकार के प्रयासों पर बोलते हुए कहा कि सरकार रामगढ़ झील को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर भौगोलिक रूप से बौद्ध सर्किट के केंद्र में है। कुशीनगर, कपिलवस्तु और लुम्बिनी जाने वाले बौद्ध पर्यटक गोरखपुर होकर ही जाते हैं। वह गोरखपुर में रुकें, इसके लिए सरकार द्वारा रामगढ़ ताल को विश्व स्तरीय आकर्षण के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का कोई विकल्प नहीं है और उनकी सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश को ‘एंटरप्राइज स्टेट’ में बदलने के लिए काम कर रही है। यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास से न केवल रोजी-रोजगार की संभावनाएँ बढ़ती हैं, बल्कि सम्बंधित शहर व प्रदेश के बारे में लोगों का नजरिया भी बदलता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम उत्तर प्रदेश को ‘उद्यम प्रदेश’ बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि शहर में झूलते-लटकते बिजली के तार शहर की सुंदरता तो खराब करते ही हैं, आम नागरिकों को बड़ी असुविधा होती है। इन्हें भूमिगत करने की प्रक्रिया तेज की जाए। स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता और स्वच्छता के लिए विशेष अभियान के बारे में बोलते हुए, सीएम ने कहा कि, “10 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। गोरखपुर के लोगों से मेरी खास अपील है कि इस अभियान को सफल बनाएँ। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत कूड़े निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एन्टी लार्वा तथा चूने इत्यादि का छिड़काव हो। इससे डेंगू व अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी।”

शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों से बदलती तस्वीर की झलक पेश करती एक लघु फ़िल्म भी देखी। इस मौके पर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने गोरखपुर के लोगों की ओर से एम्स, खाद करखाने, रामगढ़ झील परियोजना और गोरखपुर में चिड़ियाघर के विकास का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। वहीं सहजनवां से विधायक शीतल पांडेय ने कहा कि राजनैतिक उपेक्षा के कारण विकास की दौड़ में मीलों पीछे छूट गया गोरखपुर अब बड़े महानगरों से होड़ ले रहा है। यह क्षेत्र आज राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर गरिमा प्राप्त कर रहा है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, सूचना नवनीत सहगल ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश विकास के नए आयाम रच रहा है। विकास के यूपी मॉडल की महत्ता पूरा देश महसूस कर रहा है।