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जयपुर पॉलिटेक्निक महिला कॉलेज का प्रिंसिपल रहा मश्कूर अली गिरफ्तार, छात्राओं ने बताया- वॉशरूम में कैमरा लगाकर बनाता था Video, लाइब्रेरी में करता था गंदी हरकतें

जयपुर में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल मश्कूर अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। मश्कूर अली पर यहाँ की छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। उसके खिलाफ छात्राओं ने न प्रदर्शन भी किया था। पुलिस ने उस पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है।

जयपुर पुलिस ने छात्राओं के आरोपों की शुरूआती जाँच के बाद मश्कूर अली को गिरफ्तार कर लिया है। उस के खिलाफ SIT जाँच करवाई गई थी। इसमें आरोप सही पाए गए थे। इस मामले में छात्राओं ने भी बयान दर्ज करवाए थे। छात्राओं ने बताया था कि मश्कूर अली ने वॉशरूम में कैमरा लगा रखा था। उन्होंने बताया था कि इससे वीडियो भी बनाई गईं थी।

दरअसल, इस मामले में छात्राओं और कॉलेज के स्टाफ ने 3 फरवरी, 2025 को तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव से शिकायत की थी। इसके बाद जाँच के लिए एक कमिटी की गई थी। जाँच में दोषी पाए जाने पर मश्कूर को निलंबित कर दिया था। इसके बाद जाँच कमिटी सोमवार (10 मार्च) को जाँच के लिए दोबारा कॉलेज पहुँची थी, इस दौरान छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया था।

छात्राओं का आरोप था कि मश्कूर अली को बचाने के लिए दोबारा जाँच करवाई जा रही है। छात्राओं का कहना है कि मश्कूर अली को साल 2023 में प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। इसके बाद से ही वह छात्राओं से अभद्रता करता था। उनका कहना है कि मश्कूर लाइब्रेरी के कोने में अलमारी के पीछे बैठता था, जो सीसीटीवी कैमरे की रेंज में नहीं आता था।

यहाँ पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करता था। इसके अलावा, पूर्व प्रिंसिपल खुद को छात्राओं के पर्सनल व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़वा कर रखा था। वह लड़कियों को अश्‍लील मैसेज भी करता था। र‍िपोर्ट्स के मुताबिक, वह बड़े-बड़े लोगों से संपर्क होने का झाँसा देकर छात्राओं की अपनी कार में ले जाता था और चलती कार में अभद्रता करता था।

छात्राओं ने आरोप लगाया था कि मश्कूर अली उन्हें धमकी देता था कि अगर किसी ने पुल‍िस या पर‍िजनों से शिकायत की तो वह उनका वीडियो वायरल कर देगा। छात्राओं का कहना है कि वीड‍ियो वायरल होने के डर से किसी ने थाने में र‍िपोर्ट दर्ज नहीं करवाई थी।

अमर उजाला से बातचीत में लड़कियों ने कहा, “प्रिंसिपल मश्कूर अली कहता था कि तुम्हें (लड़कियों से) बाकी लोगों के साथ भी सोना पड़ेगा। वह कहता था कि उसके बड़े-बड़े लोगों से लिंक हैं। वह लड़कियों की सप्लाई भी करता है। बात नहीं मानने पर वह लड़कियों को कॉलेज से निकालने की धमकी भी देता था।”

‘मेरी पहचान भगवा है और एक दिन पूरी दुनिया इसे धारण करेगी’: UP के मुख्यमंत्री ने बताई सनातन परंपरा की पहचान, बोले- मैं योगी और मेरे लिए सब बराबर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (12 मार्च) को कहा कि एक दिन ऐसा आएगा, जब पूरी दुनिया सनातन की विचारधारा अपनाएगी और भगवा पहनेगी। उन्होंने कहा कि भगवा पहनना सनातन की परंपरा है। सीएम योगी बोले, “मेरे बारे चाहे कोई कुछ भी सोचे, लेकिन मैंने तो भगवा धारण किया है। यह सनातन का गौरव है और यह भगवा एक दिन सारी दुनिया धारण करेगी। यह हमारी सनातन परंपरा की भी पहचान है।”

सीएम योगी ने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े मीडिया हाउस पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा। इस दौरान सीएम योगी ने कहा, “मैं एक योगी हूँ। हर पंथ, संप्रदाय, उपासना विधि का सम्मान करता हूँ। कभी गोरखनाथ पीठ आएँगे तो देखेंगे कि वहाँ पर एक पंक्ति में बैठकर हर पंथ, धर्म और जाति के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। कोई भेदभाव नहीं होता है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगल आक्रांता औरंगजेब का गुणगान करने वाले लोगों पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन करना बंद करें, अन्यथा संभल जैसे सच जब सामने आएँगे तो कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।” बता दें कि महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब को एक महान शासक बताया था।

समाजवादी पार्टी सहित पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “‘लैंड जिहाद’ के माध्यम से इस पौराणिक स्थली पर भी कब्जा करवा दिया गया था… ये सब पिछली सरकारें करवा रही थीं…। कोई सोच सकता था कि गुलामी के कालखंड में जिस अक्षयवट का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ललायित रहते थे, लेकिन 500 वर्षों तक वे दर्शन नहीं कर पा रहे थे।” अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती को कैद करके रख दिया गया था।

उन्होंने संभल के मामले पर भी अपनी बात रखी और कहा कि इस्लाम के शुरू से भी बहुत पुराना है संभल का इतिहास। सीएम योगी ने कहा, “संभल एक सच्चाई है। हम जबरन किसी पर कब्जा करके किसी की आस्था को ठेस पहुँचाएँ तो ये स्वीकार्य नहीं होगा। सन 1526 में संभल में श्री विष्णु हरि का मंदिर तोड़ा गया था और 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा गया था। दोनों जगहों पर मीर बाँकी के द्वारा यह कृत्य किया गया था। यह बात जगजाहिर है।”

संभल की प्राचीनता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “संभल के बारे में जो उद्धरण आते हैं वो आज से 5000 साल पहले से लेकर 3500 साल पहले तक रचे गए हमारे पुराणों में आते हैं। उनमें कहा गया है कि यहाँ भगवान विष्णु श्रीहरि का 10वाँ अवतार होगा। इस्लाम का उदय हुए 1400 वर्ष हुए हैं और मैं बात कर रहा हूँ 3500 साल पहले से लेकर 5000 साल पहले की। यानी इस्लाम के उदय के 2000 साल से लेकर 3500 साल पहले की।”

संभल में सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों के बारे में बात करते सीएम योगी ने ऑगर्नाइजर एवं पांच्जन्य के एक कार्यक्रम में कहा, “संभल एक तीर्थ रहा है। 68 तीर्थ थे वहाँ पर। अभी हम केवल 18 निकाल पाए हैं। यहाँ 19 कूप थे। सभी कूपों को हमने खोज लिया है और अब उनका उत्खनन करा रहे हैं। 56 वर्ष के बाद वहाँ भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक हो पाया है।”

1400 साल पुराना इस्लाम, संभल 5000+ साल पुराना: बोले CM योगी- लैंड जिहाद कर पौराणिक स्थलों पर किया कब्जा, होली से पहले मस्जिदों पर चढ़ने लगा ‘पर्दा’

होली के त्योहार के दिन शुक्रवार (14 मार्च) को चौपाई जुलूस वाले परंपरागत रास्तों में पड़ने वाली मस्जिदों। को प्रशासन पन्नी और तिरपाल से ढकेगा। इस दौरान जामा मस्जिद सहित कुल 10 मस्जिदों को ढका जाएगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस्लाम के आने के हजारों साल पहले संभल का पुराणों में वर्णन किया गया था। इस तीर्थ का विकास कराया जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा, “संभल एक सच्चाई है। हम जबरन किसी पर कब्जा करके किसी की आस्था को ठेस पहुँचाएँ तो ये स्वीकार्य नहीं होगा। सन 1526 में संभल में श्री विष्णु हरि का मंदिर तोड़ा गया था और 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा गया था। दोनों जगहों पर मीर बाँकी के द्वारा यह कृत्य किया गया था। यह बात जगजाहिर है।” इसे वीडियो में 53वें मिनट के बाद से सुना जा सकता है।

संभल की प्राचीनता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “संभल के बारे में जो उद्धरण आते हैं वो आज से 5000 साल पहले से लेकर 3500 साल पहले तक रचे गए हमारे पुराणों में आते हैं। उनमें कहा गया है कि यहाँ भगवान विष्णु श्रीहरि का 10वाँ अवतार होगा। इस्लाम का उदय हुए 1400 वर्ष हुए हैं और मैं बात कर रहा हूँ 3500 साल पहले से लेकर 5000 साल पहले की। यानी इस्लाम के उदय के 2000 साल से लेकर 3500 साल पहले की।”

संभल में सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों के बारे में बात करते सीएम योगी ने ऑगर्नाइजर एवं पांच्जन्य के एक कार्यक्रम में कहा, “संभल एक तीर्थ रहा है। 68 तीर्थ थे वहाँ पर। अभी हम केवल 18 निकाल पाए हैं। यहाँ 19 कूप थे। सभी कूपों को हमने खोज लिया है और अब उनका उत्खनन करा रहे हैं। 56 वर्ष के बाद वहाँ भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक हो पाया है।”

सीएम योगी ने कहा, “मैं एक योगी हूँ। हर पंथ, संप्रदाय, उपासना विधि का सम्मान करता हूँ। कभी गोरखनाथ पीठ आएँगे तो देखेंगे कि वहाँ पर एक पंक्ति में बैठकर हर पंथ, धर्म और जाति के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। कोई भेदभाव नहीं होता है। मेरे बारे चाहे कोई कुछ भी सोचे, लेकिन मैंने तो भगवा धारण किया है। यह सनातन का गौरव है और यह भगवा एक दिन सारी दुनिया धारण करेगी।”

समाजवादी पार्टी सहित पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “‘लैंड जिहाद’ के माध्यम से इस पौराणिक स्थली पर भी कब्जा करवा दिया गया था… ये सब पिछली सरकारें करवा रही थीं…। कोई सोच सकता था कि गुलामी के कालखंड में जिस अक्षयवट का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ललायित रहते थे, लेकिन 500 वर्षों तक वे दर्शन नहीं कर पा रहे थे।” अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती को कैद करके रख दिया गया था।

होली के दिन संभल की मस्जिदों को ढका जाएगा

होली को देखते हुए संभल प्रशासन ने कुछ मस्जिदों को ढकने का फैसला लिया है। होली की चौपाई का जुलूस जिन परंपरागत रास्ते से गुजरता है, उन रास्तों में स्थित मस्जिदों को पॉलिथीन और तिरपाल से ढकने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दौरान जामा मस्जिद सहित कुल 10 मस्जिदों को ढका जाएगा। संभल के ASP श्रीशचंद्र ने कहा कि यह निर्णय किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए किया गया है।

Jio-एयरटेल से एलन मस्क की स्टारलिंक का डील, जानिए कब तक सैटेलाइट से मिलने लगेगा इंटरनेट: कैसे करेगा काम, कितना पैसा आपको देना होगा… जानिए सब कुछ

सैटेलाइट के सहारे इंटरनेट देने वाली कम्पनी स्टारलिंक भारत में घुसने के लिए तैयार है। उसने भारत में सेवाएँ देने के लिए देश की दोनों बड़ी टेलीकॉम कम्पनियों, रिलायंस जियो और एयरटेल से समझौता कर लिया है। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि यह जल्द ही भारत में यह ग्राहकों के लिए सेवाएँ चालू करेगी। स्टारलिंक, कारोबारी एलन मस्क की कंपनी है। इसके भारत आने के साथ ही इंटरनेट क्षेत्र में बड़े बदलाव के कयास हैं। इसके साथ ही कुछ सुरक्षा चिंताएँ भी स्टारलिंक के प्रवेश के साथ सामने आई हैं।

क्या है स्टारलिंक?

स्टारलिंक एक अमेरिकी इंटरनेट प्रदाता कंपनी है। इसे अमेरिका के कारोबारी एलन मस्क ने 2019 में चालू किया था। स्टारलिंक की शुरुआत दुनिया के किसी भी कोने में तेज इंटरनेट सेवा देने के लिए चालू की गई थी। स्टारलिंक वर्तमान में विश्व के 100 देशों में इंटरनेट देने में सक्षम है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्टारलिंक चालू करने में ₹85 हजार करोड़ से अधिक का खर्च आया है। वर्तमान में 50 लाख से अधिक लोग स्टारलिंक की मदद से इंटरनेट चलाते हैं। स्टारलिंक किसी के घर या फिर चलती गाड़ी तक पर लगाया जा सकता है। इसे बड़ी कम्पनियों के लिए भी लॉन्च किया गया है।

कैसे करता है काम?

स्टारलिंक के नाम से ही लगता है कि इसका संबंध तारों से है। असल में स्टारलिंक सैटेलाइट के सहारे काम करता है। स्टारलिंक के हजारों सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए गए हैं। यह सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर ऊपर स्थापित हैं और लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाते रहते हैं।

वर्तमान में इन सैटेलाइट की संख्या लगभग 7000 है। स्टारलिंक की इंटरनेट सेवा लेने के लिए इसकी किट लेनी होती है। इसमें सबसे प्रमुख इसका एंटीना है। यह आपकी DTH यानी ‘डिश’ जैसी ही छतरी होती है। सफ़ेद रंग की यह छतरी आकार में चौकोर और पिज्जा के डिब्बे के आकार का होता है।

इसका उपयोग करने के लिए इस एंटीना को सैटेलाईट की तरफ किया जाता है। स्टारलिंक का एप इसमें सहायता करता है। यह एंटीना रेडियो सिगनल पकड़ता है। इससे एक तार निकलता है जो मॉडम में जाकर जुड़ता है। यह मॉडम भी आपके इंटरनेट राऊटर जैसा काम करता है। इसके बाद उस घर में इंटरनेट की सेवाएँ ली जा सकती हैं।

स्टारलिंक का एंटीना

स्टारलिंक का इंटरनेट अन्य किसी मोबाइल इंटरनेट की तुलना में तेज स्पीड देता है क्योंकि इसमें ज्यादा बाधाएँ नहीं होती हैं। कुल मिलाकर इसके काम करने का तरीका कुछ-कुछ DTH टीवी जैसा ही है। इसकी स्पीड लगभग 100 MBPS तक होती है, जो कि सामान्य मोबाइल इंटरनेट की तुलना में कहीं तेज है।

SIM वाले इंटरनेट से कैसे अलग?

वर्तमान में भारत में अधिकांश आबादी मोबाइल SIM का उपयोग करके इंटरनेट एक्सेस करती है। मोबाइल नेटवर्क के साथ कई समस्याएँ हैं। मोबाइल नेटवर्क के लिए सेल टॉवर की आवश्यकता होती है। यह टॉवर उस इलाके में मौजूद मोबाइल यूजर से रेडियो तरंगे लेता है और आगे भेजता है।

इसी माध्यम से मोबाइल फोन यूजर रेडियो तरंगे लेता है। इस प्रकार एक नेटवर्क स्थापित होता है। हर जगह मोबाइल टॉवर पहुँचाना संभव नहीं है। विशेषकर, दुर्गम स्थानों पर। ऐसे में सैटेलाइट वाली व्यवस्था काम आती है। इसके लिए किसी टॉवर की जरूरत नहीं होती है। बल्कि, इनका एंटीना खुद ही एक टॉवर की तरह काम करता है।

सैटेलाइट से सीधे जुड़े होने के चलते इसमें इंटरनेट की गति भी तेज होती है। मोबाइल टॉवर को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता भी होती है, सैटेलाइट में यह समस्या भी नहीं होती। ऐसे में इसे सभी इलाकों में पहुँचाना बड़ा आसान हो जाता है।

जियो और एयरटेल का इसमें क्या रोल?

सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट देने वाले स्टारलिंक ने भारत में सेवाएँ प्रदान करने के लिए एयरटेल और जियो से समझौता किया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब स्टारलिंक को किसी टॉवर की जरूरत नहीं तो वह इनसे क्यों समझौता कर रहा है।

दरअसल, एयरटेल और जियो दोनों ही भारत में स्टारलिंक की बिक्री करेंगी। वह अपने स्टोर के माध्यम से स्टारलिंक की इंटरनेट किट बेचेंगी और साथ ही उनको इंस्टाल करने में भी भूमिका निभाएँगी। इसके अलावा स्टारलिंक की बिक्री के बाद सेवाओं के लिए भी यही कम्पनियाँ काम करेंगी।

जियो और एयरटेल, स्टारलिंक के माध्यम से उन इलाकों में भी अब इंटरनेट पहुँचाने का प्रयास कर सकते हैं, जो काफी दुर्गम हैं। इसके अलावा, जियो अपने बाकी प्रोडक्ट जैसे कि जियोटीवी, जियोसिनेमा, जियोहॉटस्टार एवं जियोफाइबर आदि भी इस स्टारलिंक के साथ जोड़ सकता है। एक तरह से यह कम्पनियाँ स्टारलिंक के डिस्ट्रीब्यूटर की तरह काम करेंगी।

कीमतें क्या होंगी, क्या असर होगा?

विश्व में सबसे इंटरनेट देने वाले देशों में से एक भारत है। स्टारलिंक अभी भारतीय उपमहाद्वीप में भूटान के भीतर काम करता है। यहाँ उसका सबसे सस्ता प्लान ही ₹3 हजार/महीने से शुरू होता है। इसके अलावा दूसरे प्लान ₹4 हजार से ऊपर हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत में भी स्टारलिंक यही कीमतें रख सकती है।

इनमें हल्का-फुल्का बदलाव भी किया जा सकता है। हालाँकि, भारत में मोबाइल डाटा काफी सस्ता होने चलते इसे अपने ग्राहक बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ेगा। स्टारलिंक लगाने के लिए इसका एंटीना और बाकी सामान भी महंगा आता है, उसके लिए भी इसे नई रणनीति अपनानी होगी।

भारत में वर्तमान में अधिकांश कम्पनियाँ मोबाइल डाटा प्लान ₹300 जबकि ब्रॉडबैंड प्लान ₹600 के आसपास देती हैं। इन कीमतों से प्रतिद्वंदिता के लिए स्टारलिंक को भी भारतीय ग्राहकों के अनुसार कीमतें और प्रोडक्ट देने पड़ेंगे। हालाँकि, भारतीय बाजार में स्टारलिंक को एक बढ़त जरूर है।

भारत में वर्तमान 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स है। हालाँकि, बड़ी आबादी अब भी इससे बाहर है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वह इलाके हैं, जहाँ पहुँचना मुश्किल है। स्टारलिंक से यह चुनौती खत्म हो सकती है। इसके अतिरिक्त स्टारलिंक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में भी सहायक हो सकता है।

स्टारलिंक से सुरक्षा चिंताएँ भी

स्टारलिंक के भारतीय बाजार में घुसने के साथ ही सुरक्षा चिंताएँ भी हैं। हाल ही में मणिपुर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से हथियारों के साथ ही एक स्टारलिंक भी मिला था। ऐसे में सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टारलिंक पर नियंत्रण करना मुश्किल होगा।

स्टारलिंक के उपयोग पर एजेंसियों का रोक लगाना भी मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में आतंकियों और उग्रवादियों द्वारा इसका उपयोग किए जाने की आशंका है। स्टारलिंक के भारतीय बाजार में प्रवेश करने में देरी के पीछे भी यही चिंताएँ हैं।

स्टारलिंक को अभी भारत सरकार से सुरक्षा परमिट नहीं मिला है। कयास है कि यह जल्द ही मिल सकती है। हालाँकि, इससे पहले सरकार सारी चुनौतियों का आकलन कर लेगी।

बीजेपी 09, कॉन्ग्रेस 00… हरियाणा निकाय चुनावों में भी खिला कमल, हाथ का सूपड़ा साफ: मानसेर में निर्दलीय बना मेयर

हरियाणा में हुए नगर निगम चुनाव 2025 के नतीजों ने कॉन्ग्रेस को शून्य पर समेट दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 10 में से 9 नगर निगमों पर कब्जा जमाया, जबकि कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। एकमात्र मानेसर में निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. इंद्रजीत यादव ने बाजी मारी। बीजेपी की इस शानदार जीत से पार्टी में खुशी की लहर है, वहीं कॉन्ग्रेस को करारा झटका लगा है। हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ की जीत बताया। उनका कहना है कि जनता ने नायब सैनी और पीएम नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन पर भरोसा जताया है।

नतीजों की बात करें तो पानीपत में बीजेपी की कोमल सैनी ने 1,62,075 वोटों के साथ कॉन्ग्रेस की सविता गर्ग को 1,23,170 वोटों से हराया। गुरुग्राम में राजरानी मल्होत्रा, रोहतक में राम अवतार वाल्मीकि (1,02,269 वोट), हिसार में प्रवीण पोपली (96,329 वोट), करनाल में रेणु बाला गुप्ता (83,630 वोट), अंबाला में शैलजा सचदेवा (40,620 वोट), सोनीपत में राजीव जैन (57,858 वोट), फरीदाबाद में प्रवीन बत्रा जोशी और यमुनानगर में सुमन बहमनी ने जीत हासिल की।

फरीदाबाद में प्रवीन बत्रा जोशी ने 3,16,852 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की, जो देश में अब तक का सबसे बड़ा अंतर है। मानेसर में डॉ. इंद्रजीत यादव ने बीजेपी के सुंदर लाल को 2,293 वोटों से हराया। कॉग्रेस विधायक और पूर्व पहलवान विनेश फोगाट की जुलाना नगर पालिका सीट पर बीजेपी के डॉ. संजय जांगड़ा 671 वोटों से जीते। डॉ. संजय जांगड़ा को 3771 वोट मिले. वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी गल्लू लाठर को 3100 वोट मिले और वो दूसरे स्थान पर रहीं।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये जीत विकास की गारंटी है। मोहन लाल बडौली ने कहा, “कॉन्ग्रेस अब खत्म होने की कगार पर है। हरियाणा में ट्रिपल इंजन सरकार से विकास की रफ्तार तीन गुना होगी।” वहीं, सीएम नायब सैनी ने जनता और चुनाव आयोग को धन्यवाद देते हुए कहा, “ये जीत पीएम मोदी के विजन को पूरा करने में मदद करेगी।”

कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में भी बीजेपी ने झंडा गाड़ दिया है। कॉन्ग्रेस की हार पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, “हम पहले भी इन सीटों पर नहीं थे। हार से फर्क नहीं पड़ता। हमने प्रचार पर जोर नहीं दिया।” लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में मायूसी साफ दिख रही है। दूसरी ओर बीजेपी ने इसे विधानसभा चुनाव के बाद एक और बड़ी कामयाबी बताया। 2 मार्च को हुई वोटिंग में 46% मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। पानीपत में कुछ दिन की देरी से 9 मार्च को वोटिंग हुई थी।

हरियाणा निकाय चुनाव के नतीजे साफ रहते हैं कि फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल जैसे बड़े शहरों में बीजेपी की ‘सुनामी’ ने कॉन्ग्रेस को कहीं नहीं टिकने दिया। इन चुनावों में कॉन्ग्रेस खाली हाथ रही।

जस्टिस मुरलीधर चाहते हैं कि हिंदुओं का होता रहे धर्मांतरण, कानून को बता रहे- दलित और चुनाव की आजादी के विरुद्ध: गौतम नवलखा जैसे ‘अर्बन नक्सल’ पर भी की थी ‘कृपा’

‘अर्बन नक्सल’ गौतम नवलखा को घर में नजरबंदी से रिहा करने वाले पूर्व जज एस मुरलीधर अब धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लालच और जोर-जबरदस्ती से धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया कानून ‘पसंद की आजादी’ के खिलाफ है। उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में बने धर्मांतरण विरोधी कानूनों के मुद्दे पर एक पैनल डिस्कशन के दौरान 28 फरवरी 2025 को ये बातें कही।

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए एस मुरलीधर ने कहा, “ये धर्मांतरण विरोधी कानून किसी जोर-जबरदस्ती के धर्मांतरण के खिलाफ कानून की तरह नहीं, बल्कि ‘फ्रीडम ऑफ च्वॉइस’ के कानून के खिलाफ है।” उन्होंने कहा, “ये कानून जबरदस्ती धर्म बदलवाने से रोकने के लिए कम, बल्कि लोगों की आजादी छीनने के लिए ज्यादा हैं। इन कानूनों में ये मान लिया जाता है कि अगर कोई अपने जन्म के धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपनाता है, तो इसके पीछे जरूर कोई डर या दबाव होगा।”

उनका कहना था कि इन कानूनों में ये साबित करने की जिम्मेदारी उस शख्स पर डाल दी जाती है, जिस पर किसी को जबरदस्ती धर्म बदलवाने का इल्जाम है। उनका आरोप है कि ये कानून दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हैं।

मुरलीधर ने कहा, “अब अगर कोई दलित बौद्ध धर्म अपनाना चाहे, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को बताना पड़ेगा कि वो ऐसा क्यों कर रहा है। पहले उसे पूरी दुनिया को बताना होगा। प्राइवेसी के हक वाले पुट्टस्वामी फैसले के बाद ऐसा कानून कानूनी जाँच में टिक नहीं सकता, क्योंकि ये सीधे पसंद की आजादी, निजता और धर्म चुनने के अधिकार को ठेस पहुँचाता है।”

उन्होंने ये भी कहा कि जबरदस्ती धर्म बदलवाने की शिकायत सिर्फ पीड़ित को ही करनी चाहिए, लेकिन ये कानून किसी को भी शिकायत करने की इजाजत देता है – जैसे कोई रिश्तेदार या दूर का चचेरा भाई। इससे कुछ गुँडागर्दी करने वाले ग्रुप सक्रिय हो गए हैं, जो नोटिस बोर्ड या दफ्तरों में देखते हैं कि कौन अंतर-धार्मिक शादी या धर्म बदलना चाहता है और फिर उस शख्स को डराते-धमकाते हैं।

ये बातें तब सामने आईं, जब अरुणाचल प्रदेश में ‘फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट’ को लेकर बहस चल रही है। ये कानून वहाँ की मूल जनजातियों को बचाने के लिए है, लेकिन ईसाई मिशनरी ग्रुप इसका विरोध कर रहे हैं।

इन्हीं जस्टिस मुरलीधर ने दी थी अर्बन नक्सल गौतम नवलखा को रिहाई

बता दें कि इन्हीं जस्टिस एस मुरलीधर ने दिल्ली हाईकोर्ट में जज रहते ‘अर्बन नक्सल’ गौतम नवलखा की जेल से रिहाई के आदेश दिए थे। ये मामला भीमा कोरेगांव हिंसा केस से जुड़ा था, जिसमें अगस्त 2018 को पुणे पुलिस ने गौतम नवलखा और 4 अन्य ‘अर्बन नक्सलों’ को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना था कि ये लोग ‘जाति विरोधी’ इवेंट के बहाने लोगों को भड़काना चाहते थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे। इसके बाद इन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया था।

नवंबर 2018 में जस्टिस एस मुरलीधर की अगुवाई वाली दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने महाराष्ट्र पुलिस को नवलखा को पुणे ले जाने की इजाजत देने वाले निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। उनका कहना था कि गिरफ्तारी CrPC नियमों के मुताबिक नहीं थी। इसके बाद नवलखा को घर में नजरबंदी से रिहा कर दिया गया।

बताया जाता है कि नवलखा 2010-11 के बीच तीन बार अमेरिका गए थे और उन्होंने एक अमेरिकी जज को चिट्ठी लिखकर ISI और पाकिस्तान सरकार से पैसे लेने के आरोपित फैयाज की सजा माफ करने की माँग की थी।

यही नहीं, गौतम नवलखा से न्यूजक्लिक फंडिंग केस में 31 दिसंबर 2023 को दिल्ली पुलिस मुंबई में पूछताछ भी कर चुकी है। गौतम नवलखा से न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ और कंपनी में उनकी हिस्सेदारी के बारे में सवाल पूछे गए थे।

चेन्नई मेट्रो के लिए ली जाएगी 2 मंदिरों की जमीन: मद्रास हाई कोर्ट ने दी अनुमति, कहा- भगवान सबको माफ करेंगे; जानिए क्यों नहीं माना मौलिक अधिकार का उल्लंघन

मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार (11 मार्च) को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मंदिर की जमीन पर मेट्रो स्टेशन बनाने से भगवान हमें माफ कर देंगे। न्यायाधीश ने कहा कि आखिरकार इससे भगवान के भक्तों को भी लाभ होगा। इस टिप्पणी के साथ ही हाई कोर्ट ने चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) का स्टेशन बनाने के लिए दो हिंदू मंदिरों की जमीन का अधिग्रहण करने की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने कहा कि ऐसी परियोजना, जिससे लाखों लोगों को लाभ हो सकता है, निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा से पूरी होगी। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की भूमि को सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है। न्यायाधीश ने कहा, “राज्य के अधिकार क्षेत्र के तहत धार्मिक संस्थाओं की भूमि का अधिग्रहण संविधान के अनुच्छेद 25 या 26 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है।”

कोर्ट ने बालकृष्ण पिल्लई बनाम भारत संघ मामले में केरल हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए यदि धार्मिक संस्थान प्रभावित होते हैं तो भगवान माफ कर देंगे। न्यायमूर्ति वेंकटेश ने इसे दोहराते हुए कहा कि यदि मंदिर की भूमि का अधिग्रहण मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए किया जाता है तो भगवान माफ कर देंगे, क्योंकि इससे मंदिर के भक्तों को भी लाभ होगा।

न्यायाधीश वेंकटेश ने कहा, “यह न्यायालय यह दृढ़ता से मानता है कि ईश्वर मेट्रो रेल स्टेशन बनाने के लिए अपनी दया और कृपा बरसाएँगे, जिससे समाज के सभी वर्गों के लाखों लोगों को लाभ होगा। इनमें से कुछ भक्त भी हो सकते हैं, जो मंदिर में जाते हैं। भगवान हमें माफ कर देंगे। भगवान याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों और इस फैसले के लेखक की भी रक्षा करेंगे। भगवान हमारे साथ रहेंगे।”

CMRL मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए रतिना विनयागर मंदिर और दुर्गाई अम्मा मंदिर के पास की ज़मीन अधिग्रहित करना चाहता था। इसका मंदिर के भक्तों ने विरोध किया। इसके बाद आलयम कपोम फाउंडेशन ने अधिग्रहण के खिलाफ़ जनहित याचिका (PIL) दायर की। इस पर चेन्नई मेट्रो ने कहा कि वह दूसरी ओर की जमीन अधिग्रहति कर सकता है, जहाँ यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का मुख्यालय है।

इसके बाद मद्रास हाई की पहली पीठ ने CRL के नए प्रस्ताव को देखते हुए PIL को बंद कर दिया। इसी बीच यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस ने उसकी भूमि के अधिग्रहण के प्रस्ताव का विरोध किया और इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि वह जनहित याचिका में पक्षकार नहीं है और उसने CMRL से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने के बाद इस मुख्यालय को बनाने में 250 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने इस बीमा कंपनी के तर्क को वाजिब माना और कहा कि वास्तव में 5वें प्रतिवादी (मंदिर भक्तों का प्रतिनिधित्व करने वाला आलयम कपोम फाउंडेशन), CMRL और राज्य प्राधिकारियों ने बिना मुख्य किरदार (यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस) के ही निर्णय ले लिया। दरअसल, बीमा कंपनी ने कहा कि CMRL ने उसकी जमीन के अधिग्रहण की बात कोर्ट में उसकी जानकारी के बिना ही की थी।

न्यायालय ने बीमा कंपनी की जमीन के अधिग्रहण को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताया। कोर्ट ने कहा, मूल योजना से दुर्गाई अम्मा मंदिर के भक्तों के लिए केवल कुछ जगह की कमी होगी। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान मंदिर के गोपुरम (प्रवेश द्वार) और एक देवता को दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करना होगा, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद गोपुरम और देवता को बहाल किया जा सकता है।

अंत में, कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस की याचिका स्वीकार कर ली और उसकी संपत्ति के विरुद्ध भूमि अधिग्रहण नोटिस को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति वेंकटेश ने प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का हवाला देते हुए हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के निरीक्षण के बारे में तर्क को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सीएमआरएल अपनी मूल अधिग्रहण योजना के साथ आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र है।

महू में मस्जिद से निकलकर किया गया था हमला, लाठी-डंडे से लैस थे हमलवार: नए वीडियो से बेनकाब हुआ मुस्लिम भीड़ का प्लान, अब तक 8 FIR; उपद्रवियों पर NSA भी

मध्य प्रदेश के महू में मुस्लिम दंगाइयों के हमले का एक नया वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा कि मस्जिद से निकले लोगों ने भारत की जीत का जश्न मनाने वालों पर हमला किया। उन पर लाठी डंडे चलाए। पुलिस ने इस वीडियो की जाँच चालू कर दी है। पुलिस ने अब तक महू हिंसा में 8 FIR दर्ज की हैं और बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो मस्जिद के सामने छत पर खड़ी किसी महिला द्वारा बनाया हुआ लग रहा है। इसमें उसकी आवाज भी आ रही है। वीडियो में दिखता है ढोल-ताशे लिए हुए युवक मस्जिद के सामने रास्ते पर जीत का जश्न मनाते हुए निकलते हैं।

इसी दौरान एक युवक मस्जिद के बाहर खड़े बच्चों से कुछ कहता है। इसी के बाद मस्जिद से निकले लोग लाठी डंडे से इन पर हमला कर देते हैं। वीडियो में दिखता है कि बाइक पर सवाल युवकों को मस्जिद से निकले लोग घेर लेते हैं और उनकी गाड़ियाँ तोड़ देते हैं।

इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। पुलिस को भी यह वीडियो मिल गई है। इंदौर के DIG निमिष अग्रवाल ने कहा है कि वह इसकी जाँच करवाएँगे और किसने इसे बनाया इसका भी पता लगाएँगे। वीडियो वायरल करने वाले का भी पता लगाया जाएगा।

इससे पहले एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती भीड़ दिखाई पड़ी थी। पुलिस ने इस बीच मस्जिद में सुतली बम फेंके जाने के दावे को नकार दिया है। उन्होंने इस विषय में कोई भी सबूत ना मिलने की बात कही है।

पुलिस ने बताया है कि अब तक हिंसा के बाद 8 FIR दर्ज हो चुकी हैं। इसमें 100 लोगों को आरोपित बनाया गया है। 13 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। पुलिस ने सोहेल कुरैशी और एजाज खान नाम के दो लोगों पर NSA के तहत कार्रवाई की है।

पुलिस से यह भी माँग की गई है कि वह मस्जिद के काजी की भूमिका की जाँच करे। पुलिस इस बीच CCTV खंगाल रही है और आरोपितों की पहचान कर रही है। इससे पहले एक FIR की और भी जानकारियाँ सामने आई थीं। इसमें बताया गया था कि मुस्लिमों ने इस हमले की पहले से प्लानिंग कर रखी थी।

यह भी बताया गया था कि मुस्लिमों ने हिन्दुओं को दोबारा जुलूस निकालने पर हत्या की धमकी भी दी थी। इस मामले में 17 मुस्लिम नामजद आरोपित बनाए गए थे। महू हिंसा के बाद अब शांति बनी हुई है। पुलिस अब सभी घटनाओं की जाँच कर रही है।

महिला के गाल पर नोट चिपकाया, कहा- रोज लेते हैं चुम्मा, गाया- पानी में बुनका बुनकै छै… नीतीश के MLA गोपाल मंडल के लिए सब माफ, पर होली में बहके बिहारी तो बिहार पुलिस कर देगी डंडा

पूरे देश में फगुआ की बयार चल रही है, लेकिन बिहार के सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक गोपाल मंडल पर इसकी खुमारी कुछ ज्यादा ही है। गोपाल मंडल ने होली मिलन समारोह में माइक लेकर ऐसा जोगीरा गा दिया कि लोगों को त्योहार का नशा ही उतर गया। इसके बाद तो उन्होंने सफाई में ऐसा बयान दे दिया कि राजनीतिक गलियारे से लेकर सोशल मीडिया तक में उनकी थू-थू होने लगी।

भागलपुर के गोपालपुर से विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल का होली मिलन दौरान के वीडियो वायरल हो रहे हैं। दरअसल, नवगछिया हाईस्कूल में 10 मार्च को एनडीए के होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस दौरान लोक गायक छैला बिहारी को बुलाया गया था। छैला बिहारी फागुन के माहौल को देखकर गानों से लोगों को सराबोर कर रहे थे।

इसी दौरान गोपाल मंडल स्टेज के पास आए और उस पर चढ़ गए। छैला बिहारी फाग ‘पानी में बुनका बुनकेय छेय भौजी…’ नाम का फाग गा रहे थे। उस दौरान गोपाल मंडल अपनी कमर लचका कर नाचने लगे। इस दौरान आए लोगों ने जमकर सीटियाँ बजाईं तो वे पूरे जोश में आ गए और छैला बिहारी से माइक लेकर जोगीरा गाने लगे। यह जोगीर पूरी तरह अश्लील था। वहाँ मंच महिलाएँ भी थीं।

गोपाल मंडल ने गाया, “भौजी च$$$$ ले भसुरा से….।” इस अश्लील जोगीरा सुनकर मंच में मौजूद महिला डांसर शर्म से पानी-पानी हो गईं। वहीं, पुरुष भी शर्मा गए और उनके समर्थक हँस-हँस कर उनका जोश बढ़ाने लगे। वहीं, एक वीडियो में दिख रहा है कि महिला डांसर स्टेज पर होली गाने पर डांस कर होती है। उसके बाद गोपाल मंडल उसका हाथ पकड़कर कमर हिलाने लगते हैं।

इसके बाद उसके कंधे पर अपने दोनों हाथ रखकर जोश में नाचते हैं। इससे पहले जोश में आए गोपाल मंडल का एक महिला डांसर को नोट देने के बजाय उसके गाल पर नोट चिपकाते नजर आए। मीडिया रिपोर्ट में चुम्मा लेने की बात भी सामने आ रही है। जोगारी गाकर और नाचकर मन नहीं भरा तो गोपाल मंडल ने मस्ती में चूर होकर कह दिया, “हम रोज डांस करते हैं और रोज चुम्मा लेते हैं।”

गोपाल मंडल स्टेज पर अपनी नेतागिरी की झलकियाँ पेश कर रहे थे और लोग अपने फोन के कैमरे में इसे कैद कर रहे थे। यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर आया तो लोगों ने उसकी जमकर खिंचाई करनी शुरू कर दी। राजनीतिक गलियारे में भी उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। उन पर बिहार के साथ-साथ राजनीतिक मर्यादा को भी तार-तार करने के आरोप लगने लगे, लेकिन मंडल को फर्क नहीं पड़ा।

अपना बचाव करते हुए गोपाल मंडल ने कहा, “मैं एक कलाकार हूँ। नेता के साथ-साथ अभिनेता भी हूँ। मैं रोज चुम्मा लेता हूँ। बच्ची को आगे बढ़ाने के लिए चुम्मा ले लिया तो क्या हुआ? हम चुम्मा लेते रहते हैं। कभी इसको तो कभी उसको। मैंने बच्ची को चुम्मा दिया और उसका उत्साह बढ़ाया है।” उन्होंने कहा कि जिसको जितना वीडियो वायरल करना है, कर दे। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

गोपाल मंडल के पुराने करनामे

नाचने और अश्लीलता फैलाने का गोपाल मंडल पर आरोप बहुत पुराना है। तीन साल पहले भी उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे डांसर के साथ ‘दिलबर-दिलबर’ और ‘बुलेट पर जीजा’ गाने पर नाच करते हुए दिखे थे। भोजपुरी गाने पर डांसर को नाच करते देख वे अपने आपको रोक नहीं सके और कुर्ता उठाकर नाचने लगे थे। वे बार-बालाओं का हाथ पकड़कर और उन्हें फ्लाइंग किस देकर डांस करते रहे।

वे वही गोपाल मंडल हैं, जो साल 2021 में एक ट्रेन की बोगी में चड्डी और गंजी पहनकर टहलते नजर आए थे। विरोधियों ने आरोप लगाया था कि वे नशे में चूर होकर बदतमीजी कर रहे थे, जबकि गोपाल मंडल का कहना था कि उनका पेट खराब था, इसलिए वे बाथरूम की ओर जल्दी से भाग रहे थे। इसको लेकर एक शख्स ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

गोपाल मंडल पर आरोप लगा था कि चलती ट्रेन में उनकी इस हरकत पर आपत्ति जताने वाले एक यात्री से उन्‍होंने गाली-गलौज भी की थी। हालात बिगड़ने पर RPF को हस्‍तक्षेप करना पड़ा था। यात्रियों के साथ इस दौरान धक्‍का-मुक्‍की भी की थी। बाद में विधायक ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि उनका पेट खराब था और जल्‍दबाजी में शौचालय जाने के दौरान वे तौलिया नहीं लपेट सके। 

गोपाल मंडल नाच-गान में ही नहीं, रंगबाजी में भी अव्वल हैं। अक्टूबर 2023 में वे अस्पताल में रिवॉल्वर लेकर घूमते नजर आए थे। इसको लेकर जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो वो भड़क गए। उन्होंने कहा था, “अरे पिस्तौल तो अभियो है मेरे पास। दिखावे। दिखावे पिस्टल… क्या कहना चाहते हो… रखते हैं पिस्टल… तुम लोग हमारे बाप हो?… भक्क साला, भागो।” गोपाल मंडल के ऐसे कई कारनामे हैं।

अश्लील गानों को लेकर बिहार पुलिस का निर्देश

जदयू विधायक गोपाल मंडल का स्टेज से खुलेआम अश्लील जोगीरा गाना, हाल में जारी किए गए निर्देश की धज्जियाँ उड़ाने वाला है। दरअसल 4 मार्च को बिहार पुलिस मुख्यालय ने द्विअर्थी या अश्लील भोजपुरी गानों को सार्वजनिक रूप से बजाने पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। अश्लील गाना बजाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश सभी क्षेत्रीय IG और DIG को दिया गया है।

पुलिस मुख्यालय ने अपने आदेश में कहा था कि आमतौर पर ये देखने में आता है कि सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक या निजी समारोहों में और बस, ट्रक, वैन, ऑटो रिक्शा आदि वाहनों में दोहरे अर्थ वाले अश्लील भोजपुरी गानों को धड़ल्ले से बजाया जाता है। इसका समाज पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे छोटे-छोटे बच्चे गलत दिशा में जाने के लिए प्रेरित होते हैं।

ऐसे अश्लील गानों का सबसे अधिक प्रभाव महिला पर पड़ता है। उनका सार्वजनिक स्थानों पर चलना मुश्किल हो जाता है। पुलिस मुख्यालय की तरफ से आगे कहा गया था कि इस तरह के गीतों को बजाने से महिलाओं की सुरक्षा एवं गरिमा प्रभावित होती है। महिलाएँ लज्जा के साथ-साथ असुरक्षा महसूस करती हैं। इसलिए विशेष अभियान चलाकर ऐसे गाने रोके जाएँ।

इस तरह का बिहार पुलिस की ओर से निर्देश जारी होने के दो दिन बाद ही सत्ताधारी पार्टी के विधायक गोपाल मंडल ने स्टेज पर चढ़कर ना सिर्फ अश्लील गाने गाए, बल्कि अश्लील हरकत की। जिस दौरान गोपाल मंडल ने ऐसी हरकत की, उस समय वहाँ महिलाएँ एवं बुजुर्ग भी शामिल थे। इतना ही नहीं, बच्चे भी थे। अब विपक्षी दल गोपाल मंडल पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

गोपाल मंडल पर होगी कार्रवाई?

गोपाल मंडल जिस समय स्टेज से अश्लील गाने गा रहे थे, उस समय वहाँ एनडीए के जिला स्तर के तमाम महिला-पुरुष नेता मौजूद थे। हालाँकि, किसी ने गोपाल मंडल के इस कारनामे का विरोध नहीं किया। बिहार अश्लील गाने के लेकर पूरे देश में बदनाम है। हालाँकि, अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बॉलीवुड से लेकर तमाम फिल्म इंडस्ट्री में बजते हैं, लेकिन भोजपुरी विशेष रूप से बदनाम है।

ऐसे में जब गोपाल मंडल स्टेज से द्विअर्थी और अश्लीलता की सीमा को पार करते हुए पूरी नग्नता पर उतर कर जोगीरा गाया है, तो क्या बिहार पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया तक पर बिहार से लेकर पूरे देश के लोग इस तरह के सवाल उठा रहे हैं। क्योंकि, चलती ट्रेन में चड्ढी गंजी पहनकर गाली-गलौज करने पर भी उनके खिलाफ FIR हुई, लेकिन आगे क्या हुआ किसी को पता नहींं।

सोशल मीडिया पर कुछ राष्ट्रवादी एवं दक्षिणपंथी समूह के लोग सवाल ये भी उठा रहे हैं कि होली से दो दिन पहले बिहार पुलिस द्विअर्थी एवं अश्लीलता के नाम पर डीजे एवं वाहनों में भोजपुरी गीतों को क्यों रोक रही है? अगर सरकार/पुलिस को अश्लीलता के खिलाफ कार्रवाई करनी ही थी तो होली से बहुत पहले या होली के कुछ दिन बाद भी ये निर्देश दिए जा सकते थे।

सोशल मीडिया के लोगों का कहना है कि दरअसल होली में डीजे पर गाने को रोकने के लिए बिहार पुलिस इस तरह का आदेश जारी की है, जो कि जदयू की मुस्लिम राजनीति से मेल खाती है। कुछ लोगों का यह भी सवाल है कि होली के दौरान बजने वाले गानों को द्विअर्थी कैसे निर्धारित किया जाएगा? उसके लिए बिहार पुलिस क्या मानदंड अपनाएगी, इसको लेकर स्पष्टता नहीं है।

साफ है कि ये पुलिस कर्मी पर निर्भर करेगा कि कौन सा गाना उसे द्विअर्थी या अश्लील लगता है और कौन सही। खैर, जो भी हो अश्लीलता के खिलाफ बिहार सरकार एवं पुलिस का यह कार्य बेहद प्रशंसनीय है, लेकिन लागू करे के समय को लेकर लोगों के मन में आशंका है। वहीं, गोपाल मंडल जैसे विधायक खुले मंच से अश्लील जोगीरा गाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करके बिहार पुलिस संदेश दे सकती है कि ये आदेश आम लोगों के लागू किया गया है, ना कि किसी राजनीतिक लाभ को देखते हुए।

बिहार पुलिस को यह भी चाहिए कि गाने को बजाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाए गानों को लिखने वाले, उसे गाने वाले और उसे रिकॉर्ड करने वाले स्टूडियो के खिलाफ कार्रवाई करे, ताकि बिहार में महिलाओं की गरिमा को सुरक्षित किया जा सके। इससे बिहार पुलिस को अपने संसाधनों का कम-से-कम उपयोग करना पड़ेगा और द्विअर्थी एवं अश्लील गानों पर आसानी से अंकुश भी लग जाएगा।

हिंदू देवी-देवताओं को गाली को जो बताते थे ‘बोलने की आजादी’, अब वही मौलाना का मजाक बनाने पर मुनव्वर फारूकी को बता रहे ‘छपरी’: किसी ने कहा- जाहिल, तो कोई बोला- तू भी तो मुसलमान है…

स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर हिंदू घृणा फैलाने वाले मुनव्वर फारूकी से इस बार इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हैं। कारण है कि एक शो में फारूकी ने एक मौलाना का मजाक उड़ा दिया और उससे इशारों में ये पूछ लिया कि नमाज के वक्त वो शो देखने क्यों आए हैं। इसके बाद उसने मौलाना को देख गाना गुनगुनाया- ‘कन्फर्म जहन्नुमी है-कन्फर्म जहन्नुमी’ है।

फारूकी की यही ‘कॉमेडी’ देख इस्लामी कट्टरपंथी भड़क उठे। देख सकते हैं कि सोशल मीडिया पर फारूकी को गालियाँ दी गईं। उसे ‘छपरी’ करार दिया गया।

उसे बोला गया कि उसे मौलाना से बात करने की तमीज नहीं है। मुसलमान ये बताने भी आ गए कि मौलाना जिस समय शो में आए वो नमाज का वक्त था ही नहीं।

एक यूजर ने लिखा- मुनव्वर फारूकी जाहिलों वाली हरकत कर रहा है।

एक ने कहा- “तू भी तो मुसलमान है न भाई, तू क्यों यहाँ पर झक मार रहा है।”

इतना ही नहीं, कई मुस्लिम यूजर्स ने तो ये भी अपील कर दी कि सारे मुस्लिम मुनव्वर फारूकी को अनफॉलो करें।

दिलचस्प बात ये है कि यही मुनव्वर फारूकी कुछ समय पहले तक जब हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाकर कॉमेडी करता था तो यही लोग इसे सराहते थे। ज्ञान दिया जाता था कि किसी के अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला न हो। हालाँकि, अब मौलाना का मजाक उड़ते ही सबको मजहब की बातें याद आती हैं।

गौरतलब है कि मुनव्वर फारूकी को 2021 में इंदौर में एक स्टैंड-अप शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस शो में उसने भगवान राम और सीता माता पर अभद्र टिप्पणी की थी, जिससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इस घटना के बाद उसके खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।