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जो कहते थे रूस-यूक्रेन का युद्ध रुकवा दें नरेंद्र मोदी, होली पर उनका मुँह राष्ट्रपति पुतिन ने पोत दिया: कहा- Thank You पीएम मोदी, 30 दिन के सीजफायर पर जताई सहमति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ 30 दिन के युद्ध विराम के अमेरिकी योजना पर सहमति जताई है। वहीं, यूक्रेन ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। इस प्रस्ताव को लेकर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित दुनिया के तमाम नेताओं का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने इस मामले पर बहुत ध्यान दिया।

पिछले महीने व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ बैठक के दौरान पीएम मोदी ने ने कहा था कि वे रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का समर्थन करते हैं। पीएम मोदी ने कहा था, “मैं हमेशा रूस और यूक्रेन के साथ करीबी संपर्क में रहा हूँ। मैंने दोनों देशों के नेताओं से मुलाकात की है। कई लोगों को गलतफहमी है कि भारत तटस्थ है, लेकिन भारत तटस्थ नहीं है। हम एक पक्ष में हैं और वह है शांति।”

पुतिन ने युद्ध विराम योजना पर गुरुवार (13 मार्च 2025) को सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने यूक्रेन के साथ 30 दिन के युद्ध विराम वाले इस अमेरिकी प्रस्ताव को ‘महान और सही’ बताया। इसके साथ पुतिन इस बात पर जोर दिया कि रूस सैद्धांतिक रूप से इसका समर्थन करता है।

पुतिन ने कहा, “मैं यूक्रेन समझौते पर इतना ध्यान देने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति श्री ट्रम्प को धन्यवाद देकर शुरुआत करना चाहूँगा। हम सभी के पास अपने घरेलू मामलों को निपटाने के लिए पर्याप्त समय है। हालाँकि, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका गणराज्य के राष्ट्रपति सहित कई वैश्विक नेता इस मुद्दे पर अपना बहुमूल्य समय दे रहे हैं।”

आभार व्यक्त करते हुए पुतिन ने कहा, “इसके लिए हम इन सभी के आभारी हैं, क्योंकि इस गतिविधि का उद्देश्य एक महान मिशन को प्राप्त करना है और यह उद्देश्य है- शत्रुता और जानमाल के नुकसान को समाप्त करना।” पुतिन ने आगे कहा, “हम शत्रुता समाप्त करने के प्रस्ताव से सहमत हैं, लेकिन हम इस धारणा से आगे बढ़ रहे हैं कि इससे दीर्घकालिक शांति और संकट के मूल कारणों का खात्मा होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब में जेद्दा शांति वार्ता के बाद यूक्रेन द्वारा युद्ध विराम पर सहमति जताने का स्वागत किया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस भी इस पर सहमत होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि इस ‘भयानक युद्ध’ में दोनों पक्ष अपने सैनिकों को खो रहे हैं और युद्ध विराम बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बाद अब रूस ने भी इसे स्वीकार कर लिया है।

₹1 लाख लो, ईसाई बनो: मध्य प्रदेश से हिंदुओं को ट्रेन में लादकर ले जा रहे थे पंजाब के चर्च, धर्मांतरण करने पर विदेश में नौकरी-बच्चों की क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ाई का दिया था लालच

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक बड़ा धर्मांतरण रैकेट पकड़ा गया है। बुधवार (12 मार्च 2025) की देर रात पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन में पुलिस ने 18 यात्रियों को हिरासत में लिया। ये सभी गरीब मजदूर वर्ग से थे, जिन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच दिया गया था।

पुलिस के मुताबिक, छिंदवाड़ा के सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार नाम के दो लोग इन मजदूरों को पंजाब के जालंधर ले जा रहे थे। इन्हें कहा गया था कि अगर वे ईसाई बन जाएँगे, तो एक-एक लाख रुपए मिलेंगे। साथ ही उनके बच्चों को अच्छे क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ाया जाएगा और विदेश में नौकरी का मौका भी दिया जाएगा। इसी लालच में ये लोग ट्रेन से रवाना हुए थे।

पुलिस को बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सूचना दी थी कि छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए जालंधर के चर्च ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। सबसे पहले विदिशा के गंजबासौदा स्टेशन पर ट्रेन को रोका गया और 11 यात्रियों को उतारा गया। इसके बाद बीना स्टेशन पर चार और यात्रियों को पकड़ा गया।

पूछताछ में पता चला कि कोच एस-1 में तीन लोग और हैं। फिर ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को 30 मिनट तक रोककर सघन जाँच की गई। यहाँ से रितेश प्रकाश (37), माना विश्वकर्मा (45) और राकेश (41) को पकड़ा गया। ग्वालियर जीआरपी ने इन्हें गंजबासौदा पुलिस को सौंप दिया।

पकड़े गए यात्रियों ने बताया कि सेजनाथ और विजय कुछ महीने पहले उनसे मिले थे। उन्होंने कहा था कि ईसाई धर्म अपनाने पर उन्हें कई फायदे मिलेंगे। एक लाख रुपए के अलावा बच्चों की पढ़ाई और विदेश में नौकरी का वादा किया गया था। आरोपितों ने ये भी खुलासा किया कि पहले उन्हें फिरोजपुर के चर्च ले जाया गया था।

ग्वालियर जीआरपी के मुताबिक, बजरंग दल ने बताया कि सेजनाथ और विजय इन लोगों को ट्रेन के कोच एस-1, एस-2, एस-3, एस-4 और एस-5 में बिठाकर ले जा रहे थे। भोपाल पुलिस को सूचना मिली, लेकिन ट्रेन निकल चुकी थी। इसके बाद गंजबासौदा और बीना में कार्रवाई हुई। ग्वालियर में रात 11:30 बजे ट्रेन रुकी, तो पुलिस ने कोच-कोच छान मारा और तीनों को पकड़ लिया।

पुलिस ने बताया कि ये लोग कोच बदलकर छिपने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन 30 मिनट की तलाशी में पकड़े गए। रितेश प्रकाश के पिता का नाम जन प्रकाश, माना विश्वकर्मा के पिता फगुनलाल और राकेश के पिता विजय नागवंशी हैं। ये सभी छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं। पुलिस इस मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

स्टालिन ने जिस ‘₹’ को मिटाया उसे तमिलनाडु के धर्मलिंगम ने ही देश को दिया, पिता रहे हैं DMK के MLA: कहा- ऐसी कल्पना नहीं थी, सीतारमण बोलीं- इससे बढ़ेगा अलगाववाद

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के बजट से ‘₹’ चिह्न हटाने के निर्णय की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि यह कदम अलगाववाद की भावना को बढ़ाने वाला है। वित्त मंत्री ने स्टालिन सरकार के इस फैसले की टाइमिंग पर भी प्रश्न उठाए हैं। वहीं ‘₹’ चिह्न डिजाइन करने वाले तमिल प्रोफ़ेसर डी उदय कुमार ने इस विवाद पर आश्चर्य प्रकट किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के इस कदम को लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी राय रखी है। उन्होंने पूछा है कि DMK सरकार ने अब ‘₹’ को हटाया है लेकिन उसने 2010 में प्रश्न क्यों नहीं उठाए थे जब कॉन्ग्रेस की केंद्र सरकार ने इसे अपनाया था। वित्त मंत्री ने कहा कि तब तो DMK इस सरकार का हिस्सा भी थी।

उन्होंने कहा, “₹ चिह्न पूर्व DMK विधायक एन. धर्मलिंगम के पुत्र उदयकुमार द्वारा डिजाइन किया गया था। अब इसे हटाकर DMK ना केवल एक राष्ट्रीय प्रतीक को अस्वीकार कर रही है, बल्कि तमिलनाडु के एक युवा के काम को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही है।”

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा है कि रुपया शब्द संस्कृत से आया है और इस शब्द का उपयोग तमिल संस्कृति में लम्बे समय से होता आया है। उन्होंने श्रीलंका, सेशेल्स, मॉरीशस समेत और कई देशों के उदाहरण दिए जहाँ रुपया या इससे मिलता-जुलता शब्द मुद्रा के नाम के लिए उपयोग में लाया जाता है।

उन्होंने इसे दक्षिण एशिया की सांझी विरासत बताया है। DMK सरकार पर वित्त मंत्री ‘₹’ चिह्न हटा कर राष्ट्र की अखंडता कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह कदम अलगाव की भावना भड़काने वाला है और इससे देश की एकता को खतरा है।

वहीं ‘₹’ चिह्न को डिजाइन करने वाले डॉ उदय कुमार धर्मलिंगम ने इस पूरे विवाद पर हैरानी जताई है। वह स्वयं तमिलनाडु के रहने वाले हैं और DMK के पूर्व विधायक के ही बेटे हैं। वर्तमान में धर्मलिंगम IIT गुवाहाटी में प्रोफ़ेसर हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे विवाद की कभी कल्पना नहीं की थी।

धर्मलिंगम ने 2010 में ‘₹’ डिजाइन किया था। तब की UPA सरकार ने इसके लिए एक प्रतियोगिता करवाई थी। इसमें 3300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। इनके बीच से धर्मलिंगम के डिजाइन को मंजूरी मिली थी। तब से यह चिह्न उपयोग में है। भारतीय मुद्रा के साथ ही इसे बजट और यहाँ तक कि रिजर्व बैंक के डिजिटल रुपया में भी उपयोग किया गया है।

DMK सरकार के इस कदम पर तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष K अन्नामलाई ने कहा है कि उदयकुमार के डिजाइन को स्टालिन के पिता करूणानिधि ने सराहा था लेकिन उनके बेटे अब इसे नकार रहे हैं। उन्होंने इसे तमिलनाडु के बेटे का अपमान बताया है।

कभी डाला खौलता पानी, कभी मस्जिद से चलाए पत्थर, कभी होली मनाने पर लाश बिछाने की धमकी: 20 घटनाएँ जब रंगों के त्योहार पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने मचाया उत्पात

होली का त्योहार हिंदुओं के लिए जितना खास है, मजहबी कट्टरपंथियों के लिए उतना ही आँख में खटकने वाला… इस वर्ष की ही बात करें तो होली आने से पहले ही खबरें आने लगी थीं कि कहीं हिंदुओं को होली की प्लानिंग करने पर जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं, तो कहीं उन्हें होली खेलने की अनुमति ही नहीं मिल रही।

ऐसा नहीं है कि मुस्लिम बहुल इलाकों या संस्थानों से ऐसे मामले पहली बार सुनाई पड़े हों, पिछले कुछ सालों में हिंदुओं को और उनके त्योहारों का निशाना बनाने का काम खूब जमकर हुआ है। सिर्फ होली की बात करें तो आज हम आपको पिछले कुछ साल में ही इस त्योहार पर हुई ऐसी 20 घटनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जब कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को प्रत्यक्ष तौर पर निशाना बनाया और हिंदू धर्म के प्रति अपनी घृणा दिखाई।शुरुआत ताजा मामलों से करते हैं…।

‘होली मनाई तो लाशें बिछा देंगे’

उत्तर प्रदेश के बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र से 22 फरवरी 2025 को खबर आई थी कि वहाँ कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू युवकों को धमकी दी कि अगर उन्होंने होली मनाई तो उनकी लाशें बिछा दी जाएँगी। जब मामला उठा तो पुलिस ने मामले की जाँच की और इस केस में अयान, सलमान, अमन, रेहान, समेत कई के खिलाफ एक्शन लिया गया।

AMU में हिंदुओं को होली मनाने से इनकार, बाद में मिली परमिशन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्रों ने होली मनाने की परमिशन माँगी थी, लेकिन प्रशासन ने ये कहकर साफ इनकार कर दिया कि वो नियमों में बदलाव नहीं करेंगे और जिसे होली मनानी है वो हॉस्टल में रहकर मनाए। हालाँकि, बाद में खबर आई कि वहाँ मशक्कत के बाद हिंदू छात्रों को होली खेलने की परमिशन दी गई।

हिंदू पिता और बेटी पर फैजान ने फेंका खौलता पानी

इसी तरह, साल 2024 में मध्यप्रदेश के धार के घाटाबिल्लोद गाँव से होली वाले दिन हिंदू बेटी-पिता पर खौलता पानी डालने का मामला प्रकाश में आया था। दरअसल, गाँव में पायल तिवारी नाम की लड़की और उसके पिता राकेश तिवारी ने अपने पड़ोसी फैजान से रंग धुलने के लिए पानी माँगा था, उस समय फैजान ने पानी देने की बजाए उनके ऊपर खौलता पानी डाल दिया था।इस घटना में लड़की का चेहरा बुरा तरह जल गया था।

‘नमाज के वक्त नहीं बज सकते गाने’

एक अन्य घटना 25 मार्च 2024 की है। तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी जिले के चेंगिचेरला इलाके में होली का त्योहार मनाते समय हिंदुओं पर मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोल दिया था और धमकी देकर हिंदुओं को कहा गया था कि नमाज के वक्त कोई गाने नहीं बजा सकते। इस हमले के वक्त भीड़ ने महिलाओं को भी निशाना बनाया था।

होली के वक्त पथराव

साल 2024 में होली पर हिंदुओं को निशाना बनाने का एक मामला आगरा के रकाबगंज से भी आया था। इस घटना में मुस्लिम समुदाय के लगभद दो दर्जन उपद्रवियों ने जमील नामक व्यक्ति के नेतृत्व में हिंदुओं पर पथराव किया था जिसमें कई लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमील, सलीम, रहीस, शौकत समेत 34 नामजद और 50 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

AMU में होली पर हमला

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इस बार हिंदुओं को जहाँ पहले होली मिलन समारोह आयोजित करने से ही मना कर दिया गया था। वहीं, 2024 में 21 मार्च को जब एएमयू में हिंदुओं ने परिसर में होली खेलने का प्रयास किया था तो उस दिन उनपर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा बड़ा हमला कर दिया गया था। इस घटना में अलीगढ़ पुलिस ने मिसवा, जाकीउर्ररमान, जैद, शेरबानी, शाहरुख सबरी और अन्य मुस्लिम छात्रों पर एफआईआर भी की थी।

चंदा वसूली के दौरान टूटे इस्लामी कट्टरपंथी

2023 की बात करें तो होलिका दहन के दिन उत्तर प्रदेश के मेरठ में चंदा वसूली के दौरान हालात बिगड़े थे। उस समय चंदा इकट्ठा करने गए हिंदुओं पर मुस्लिम समूह ने न केवल होलिका पर लात मारी थी बल्कि हिंदुओं पर हमला किया था और फिर जमकर पत्थरबाजी हुई थी। पुलिस ने इस विवाद के बाद तीन लोगों को हिरासत में लेकर अपनी कार्रवाई की थी।

रंग लगने पर भड़का शब्बीर, दोस्त को पेट्रोल डाल जलाया

तेलंगाना के मेदक के मारापल्ली गाँव से विवाद 2023 में भी होली पर उठा था। उस समय होली के दिन एक मोहम्मद शब्बीर नामक मुस्लिम व्यक्ति ने रंग लगने से नाराज होकर दोस्त अंजैया को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया था।

होली के दिन मारी गोली

राजस्थान के बीकानेर में 7 मार्च 2023 को कुचीलपुरा इलाके में होली के दिन ही दो मुस्लिम युवकों ने सवाई सिंह नाम के शख्स पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाई थीं। इस घटना में ताहिर, नियाज और अख्तर की गिरफ्तारी हुई थी।

गुलाल खेलने के बहाने उतारा मौत के घाट

उत्तर प्रदेश के दनकौर में होली के दिन मनीष शर्मा की हत्या का मामला सामने आया था। हत्या करने वाले कोई और नहीं मनीष के दोस्त राशिद और सलमान थे। इन्होंने पहले मनीष को गुलाल खेलने के नाम पर बाहर बुलाया और फिर उसकी जान लेली थी।

‘मस्जिद के सामने से गुजरा जुलूस तो होगा फसाद’

साल 2023 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में होली के वक्त ही इमाम मौलाना सदाकत हुसैन ने पीस कमेटी की बैठक के दौरान भड़काऊ बयान दिया था और यहाँ तक कहा था कि अगर होली का जुलूस बाजार वाली मस्जिद के सामने से गुजरा तो दंगा और फसाद होंगे। उनके इस बयान के बाद अधिकारियों ने फौरन भाषण रुकवा दिया था और साथ ही मौलाना के विरुद्ध गंभीर धाराओं में केस हुआ था।

जामिया में हिंदुओं पर हमला, DU में त्योहार पर ही रोक

साल 2023 में होली के वक्त एक विवाद जामिया मिलिया इस्लामिया से भी उठा था। उस समय इस्लामी कट्टरपंथियों ने अपना असली रूप दिखाते हुए कॉलेज परिसर में होली खेलने वाले हिंदुओं पर हमला किया था और नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर जैसे नारे लगाए थे। वहीं डीयू की बात करें तो 2023 में डीयू प्रशासन ने यह आदेश दिया था कि यदि छात्र कैंपस में रंग खेलेंगे तो उनपर एंटी रैगिंग, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी

हिंदू डॉक्टर की हत्या

साल 2023 में होली से ठीक एक दिन पहले यानी छोटी होली के दिन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू डॉक्टर की निर्मम तरीके से हत्या का मामला सामने आया था। मृत डॉक्टर की पहचान 60 वर्षीय धर्म देव राठी के तौर पर हुई थी और उनकी हत्या करने का आरोप किसी और पर नहीं बल्कि उनके अपने ड्राइवर हनीफ लघारी पर लगा था।

पंजाब यूनिवर्सिटी में परमिशन लेने के बाद भी हिंदू छात्रों पर हमला

2023 में ही होली के वक्त पाकिस्तान के पंजाब यूनिवर्सिटी में हिंदुओं पर हमला हुआ था। घटना 6 और 7 मार्च 2023 की थी। हमले के वक्त 30 हिंदू छात्र विश्वविद्यालय परिसर में इकट्ठा होकर होली मना रहे थे। इनके पास त्योहार मनाने की अनुमति भी थी लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी छात्र संगठन, इस्लामी जमीयत तुलबा (IJT) वहाँ आ पहुँचा और उन्होंने सबको होली खेलने से रोका। इस हमले में करीबन 15 छात्र घायल हो गए थे।

बच्चों का झगड़ा… होली पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर लाठी-डंडे से किया हमला

साल 2022 में बिहार के बेगूसराय के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत रजौरा गाँव में होली के पर्व पर ही मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला बोला था। इस दौरान दूसरे समुदाय ने धारधार हथियार समेत लाठी डंडा लेकर हिंदू समुदाय के लोगों पर हमला किया था, जिसमें 20 से अधिक हिंदू घायल हो गए थे। छानबीन में सामने आया था कि पूरा विवाद दो बच्चों के झगड़े के कारण हुआ था और उसके बाद मुस्लिम भीड़ हिंदू पक्ष पर टूट पड़ी।

UP, उत्तराखंड, झारखंड… हर जगह बवाल

इसी प्रकार 2022 में जब होली और जुमा एक दिन पड़ा था। उस वक्त कई जगह से पथराव और मारपीट की घटनाएँ सामने आई थीं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में छंगा दरवाजा क्षेत्र में होली में डीजे बजने पर मुस्लिम भड़क उठी थी और जुमे की नमाज के बाद पथराव शुरू कर दिया था। घटना में 2 हिंदू गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

संभल के खग्गू सराय में मुस्लिम भीड़ ने मस्जिद पर रंग लगाने का आरोप लगाकर होली का माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया था। इस दौरान हिंदुओं पर जमकर पत्थरबाजी हुई थी। अंत में प्रशासन ने 150 अज्ञात पत्थरबाजों पर कार्रवाई की थी।

वहीं उत्तराखंड के हरिद्वार के लालढांदग में नमाज के बाद मुस्लिम लड़कों ने होली मना रहे युवकों पर हमला किया था। इस दौरान सुनील सैनी नाम का लड़का गंभीर रूप से घायल हुआ था।

झारखंड के तोपचांची में भी मुस्लिम भीड़ ने अपनी आबादी की धौंस दिखाते हुए हिंदुओं पर होली खेलने से मना किया था और जब हिंदू इसके बावजूद होली खेलते मिले तो उनपर खूब पत्थर फेंके गए थे।

बांग्लादेश में होली के दिन इस्कॉन पर हमला

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इस्कॉन के राधाकांत जीव मंदिर पर छोटी होली के एक दिन पहले, 17 मार्च 2022 को, इस्लामी कट्टरपंथियों ने बड़ा हमला किया था। इस हमले में लगभग 200 लोगों की भीड़ ने मंदिर परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की और वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं पर हमला किया था।

मालूम हो कि ऊपर दिए गए ये सारे मामले केवल चंद उदाहरण हैं। केवल होली ही नहीं बल्कि अब हर त्योहार पर हिंदुओं को निशाना बनाने का रवायत शुरू हो चुकी है। इन त्योहारों के आते ही ऐसे दर्शाया जाता है जैसे इससे देश में अशांति आ सकती है, हिंसा भड़क सकती है… लेकिन इस दौरान ये नहीं बताया जाता है कि ये सब करने वाला कौन है। ऊपर दिए सारे मामले बीते कुछ सालों के हैं मगर मालूम हो कि होली को बदनाम करने की साजिश सालों पुरानी है। साल 2016 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पोस्टर लगाकर दिखाया गया था कि होली एक महिला विरोधी त्योहार है क्योंकि इसमें दलित महिलाओं का शोषण होता है। इस पोस्ट में ‘होलिका’ को असुर बहुजन समाज की महिला बताकर ये तर्क फैलाया गया था।

नेहरू की भूल, जिन्ना का धोखा, ऑल इंडिया रेडियो का ऐलान, चीनी घुसपैठ… कैसे बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का हुआ कब्जा, क्यों जाफर एक्सप्रेस तक पहुँची आजादी की आग, जानिए सब कुछ

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हाल ही में बलोच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस नाम हाइजैक कर ली। इसमें 400 से ज्यादा यात्री सवार थे। बलोचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे इन लड़ाकों ने दावा किया है कि इस ट्रेन में सवार लोगों में बड़ी संख्या पाकिस्तान के फौजियों की थी। पाक फ़ौज ने इसके बाद एक ऑपरेशन चलाया। लगभग 48 घंटे के बाद ट्रेन रिहा हो सकी। पाक फ़ौज का दावा है कि इस कार्रवाई में 30 से अधिक बलोच विद्रोही मारे गए जबकि अधिकांश लोगों को रिहा करवा लिया गया।

बलोच विद्रोही इस दावे को नकारते हैं। उन्होंने लगभग 100 पाक फौजियों को मारने की बात कही है। बलूचिस्तान में विद्रोही हमले कोई नई बात नहीं है। लेकिन यह हमला विद्रोह कितना बड़ा है, इसको दिखाता है। इस एक हमले के बाद बलूचिस्तान और पाकिस्तान के बीच की लड़ाई, उसका आजादी के लिए संघर्ष, पाकिस्तान की बलूचिस्तान में लूट पर दुनिया की निगाह पड़ी है। इसी के साथ ही बलूचिस्तान के इतिहास पर भी नजर गई है, जिसका एक सिरा भारत, 1947 में मिली आजादी और नेहरू से आकर जुड़ता है। दूसरा सिरा मोहम्मद अली जिन्ना से।

बलूचिस्तान में विद्रोह तो तभी चालू हो गया था जब 1947 के बाद इसे पाकिस्तान में बन्दूक के बल पर मिला लिया गया और इसके राजा के साथ किए गए वादे तोड़े गए। यह विद्रोह कई बार पाकिस्तान खत्म करने का दावा कर चुका है। लेकिन हर कुछ सालों पर यह वापस उठ खड़ा होता है। दरअसल, इस सब की जड़ में जिन्ना का धोखा, बलूचिस्तान के विलय पर नेहरू की गलतियाँ और आल इंडिया रेडियो का एक प्रसारण भी है।

कैसे भारत ने छोड़ दिया बलूचिस्तान?

1947 में अंग्रेज भारत छोड़ कर चले गए। उन्होंने भारत का बँटवारा कर दिया। नया मुल्क पाकिस्तान बन गया। कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ जैसी तमाम रियासतें लेकिन बची रह गईं। इनके सामने भारत या पाकिस्तान में मिले या फिर आजाद रहने का विकल्प था। ऐसी ही एक रियासत कलात थी। कलात में मीर अहमद यार खान का तब शासन था। उन्हें ‘कलात का खान’ कहते थे। बलूचिस्तान ने भारत और पाकिस्तान के बनने के बाद भी निर्णय नहीं लिया था कि उन्हें आजाद रहना है, या किसी एक मुल्क के साथ मिल जाना है।

कलात में आज के बलूचिस्तान का अधिकांश इलाका आता था। तिलक देवाशर की किताब ‘द बलूचिस्तान कोरंड्रम’ के अनुसार, कलात के खान ने अंग्रेजों से कहा था कि वह आजाद रहना चाहते हैं। इसको लेकर दस्तावेज भी अंग्रेजों द्वारा भेजे गए कैबिनेट मिशन को दिए थे। मजे की बात यह है कि इस काम में मोहम्मद अली जिन्ना ने उनकी सहायता की थी। जिन्ना कलात के खान के वकील थे। ‘कलात के खान’ और कलात के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री की 1947 में बलूचिस्तान के भविष्य को लेकर बैठक हुई थी।

इनायतुल्लाह बलूच ने अपनी किताब में इस बातचीत का विवरण दिया है। इस बैठक में पाँच विकल्पों पर चर्चा की गई थी। जिनमें पाकिस्तान में शामिल होना, भारत में शामिल होना, अफ़गानिस्तान में शामिल होना, ईरान में शामिल होना या फिर संरक्षित राज्य का दर्जा पाने के लिए ब्रिटेन में शामिल होने पर बात की गई थी। अहमद यार खान ने कहा कि पाकिस्तान में शामिल होना जनता के विरोध के कारण चुनौतीपूर्ण था। इसके अलावा भारत वाले विकल्प को पाकिस्तान की चिंताओं पर नकार दिया गया था।

अहमद यार खान ने कथित तौर पर दावा किया कि नेहरू उनसे नफरत करते थे और कॉन्ग्रेस ने कभी उन पर भरोसा नहीं किया। कलात के विदेश मंत्री डगलस येट्स फेल ईरान में शामिल होने के पक्ष में थे। उन्होंने इसे बलोच एकता के लिए फायदेमंद करार दिया था। गौरतलब है कि बड़ी बलोच आबादी ईरान में रहती है। हालाँकि, कलात के खान अफगानिस्तान में भी शामिल होने के पक्ष में थे लेकिन इस पर भी नहीं बात बन पाई। अंत में लंदन वाला विकल्प भी नकार दिया गया।

इसके बाद कलात के खान के पास कोई विकल्प नहीं शेष थे। इसी बीच पाकिस्तान ने लासबेला, मकरान और खरान को मिला लिया। अब कलात बीच में फंस गया और उसके पाकिस्तान में मिलने के सिवा कोई चारा ना रहा। बलूचिस्तान के पाकिस्तान में मिलने में आल इंडिया रेडियो के प्रसारण, भारत के तब के रुख और नेहरू के ढीलेपन का भी रोल था।

बलूचिस्तान और नेहरू

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी बलूचिस्तान की अनदेखी की। उनकी बलूचिस्तान पर भूल, ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि चीन और और कश्मीर की विफलता। नेहरू ने तब कलात का समर्थन नहीं करने का विकल्प चुना, जब वह भारत में मिलने को राजी था क्योंकि उसे पाकिस्तान से बचना था। अहमद यार खान ने अंग्रेजों को अपनी माँग पहुँचाने के लिए कॉन्ग्रेस नेतृत्व से भी बात की थी।

कॉन्ग्रेसका समर्थन करने वाले बलूचिस्तान के एक प्रसिद्ध पश्तून सरदार समद खान ने 1946 में कलात की दुर्दशा के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं से बात की थी। हालाँकि, नेहरू ने इसमें भी नहीं दिखाई। ब्रिटिश थिंक टैंक फॉरेन पॉलिसी सेंटर के अनुसार, नेहरू ने 1947 में कलात के विलय के दस्तावेज़ भी लौटा दिए, उन पर खान ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने यह मौक़ा खो दिया। संभवतः, नेहरू प्रशासन स्वतंत्र बलूचिस्तान के भू-राजनीतिक महत्व को नहीं समझता था।

ऑल इंडिया रेडियो प्रसारण ने बढ़ाई समस्या

बलूच इतिहासकारों का कहना है कि कलात के खान के पास दो विकल्प थे, या तो पाकिस्तान में शामिल हो जाएँ या इसे अस्वीकार कर दें और सेना लेकर लड़ाई करें। हालाँकि, 27 मार्च 1948 को ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के प्रसारण के साथ निर्णय लेने से पहले ही बलूचिस्तान की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी, इस प्रसारण में बताया गया था कि कलात के खान ने उसी वर्ष जनवरी में भारत के साथ विलय पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली से संपर्क किया था।

तब सरकार में शामिल वीपी मेनन ने खुलासा किया कि कलात के खान भारत पर कलात के विलय को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहे थे, लेकिन भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं था। गुल खान नसीर की “तहरीख-ए-बलूचिस्तान (बलूचिस्तान का इतिहास)” में भी इसकी पुष्टि की गई थी। इसके अनुसार, 27 मार्च 1948 को, ‘ऑल इंडिया रेडियो’ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रसारित की जिसमें मेनन ने कहा कि दो महीने पहले, कलात के खान ने नई दिल्ली में विलय के लिए अनुरोध प्रस्तुत किया था, लेकिन प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था।

ऑल इंडिया रेडियो ने मेनन के बयान को प्रसारित किया था, इसकी पुष्टि बलूचिस्तान के पूर्व मुख्य सचिव, लेखक और इतिहासकार हकीम बलूच ने की है। उन्होंने इस क्षेत्र पर कई किताबें लिखी हैं। गुल खान नसीर ने कथित तौर पर कलात के खान का हवाला देते हुए कहा कि यह कलात और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी को भड़काने के लिए एक सफेद झूठ था। नसीर खान के अनुसार, इससे पाकिस्तान के नेताओं को बलूचिस्तान पर हमले का एक मौक़ा मिल गया। यहाँ तक बाद में नेहरू ने भी ऐसी बातों से इंकार किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

यहाँ तक कि ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने पाकिस्तान को पत्र लिख का कलात के खान की चुगली की थी। कलात के खान ने भी इस दावे का विरोध किया था। उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अगले दिन स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बात नहीं हुई थी। हालाँकि, नुकसान पहले ही हो चुका था। इसके बाद पाकिस्तान ने सेना भेज कलात कब्जा लिया। कलात के खान को पकड़ कर कराची ले जाया गया और विलय के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।

जिन्ना ने दिया धोखा

कलात के खान के पाकिस्तान में विलय के निर्णय के बाद ही बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार होने लगा। बलूचिस्तान में जनता के मन में खटास विलय के तरीके से ही आ गई थी। जिन्ना ने जिस इज्जत का दावा बलूचिस्तान से किया था, वह उसे नहीं दी गई। यहाँ तक कि पहला विद्रोह ही इसके बाद 1948 में चालू हुआ जब कलात के खान के छोटे भाई ने विद्रोह कर दिया। हालाँकि, पाकिस्तान की सेना ने इसे दबा दिया। जिन्ना की कुछ सालों में मौत हो गई, इसके बाद तो बलूचिस्तान में लूट चालू हो गई।

5 बार उठ चुका विद्रोह

बलूचिस्तान में 5 बार विद्रोह की आग भड़क चुकी है। हर बार इसके पीछे कोई चिंगारी होती है। अगर 1980-90 का दशक छोड़ दिया जाए तो अब तक लगातार हर दशक में बलूच विद्रोही उठ खड़े हुए हैं। वर्तमान में बलूचिस्तान में चल रही लड़ाई की चिंगारी 2005 में भड़की थी। तब बलूचिस्तान में तैनात एक फ़ौज के मेजर ने एक बलोच लड़की के साथ बलात्कार किया। उस पर कार्रवाई करने के बजाय परवेज मुशर्रफ ने उसे बचाया और बलोच लोगों को धमकाया।

पाकिस्तानी फ़ौज ने प्रदर्शन करने वाले निर्दोष बलूचों पर हवाई हमले किए गोलियाँ बरसाईं। इसके बाद जब बलोच सरदार नवाब अकबर बुगती ने विद्रोह किया तो उनकी हत्या कर दी और उनके शव तक को परिवार को नहीं सौंपा। इसके बाद बलोच और भी भड़क गए। तब से लगातार बलूचिस्तान अशांत है। पाकिस्तान बलूचिस्तान के लोगों से बात करने के बजाय सैन्य कार्रवाई से मामला सुलझाना चाहता है। यह अब संभव नहीं है।

गैस लूटी, फिर बंदरगाह बेचा

बलूचिस्तान के सुई इलाके में 1950 के ही दशक में गैस निकल आई। इस गैस की लूट पाकिस्तान के हुक्मरानों ने चालू कर दी। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में इस गैस की सप्लाई नहीं दी बल्कि पंजाब और सिंध पहुँचाई। यहाँ तक कि 1990 का दशक आते-आते यह गैस लगभग खत्म हो गई। इसके बाद पाकिस्तान के हुक्मरानों ने बलूचिस्तान में जमीन बेच दी। वर्तमान में चीन बलूचिस्तान के ग्वादर के बंदरगाह और एयरपोर्ट को चीन को दे दिया है। स्थानीय लोग इसका विरोध करते हैं।

बलूचिस्तान में अयस्क और खनिज भरे हुए हैं। पाकिस्तान ने यह भी चीन को लगभग बेच दिए हैं। इससे भी बलोच लोगों में गुस्सा है। बलूचिस्तान में स्कूल, अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी पाकिस्तान ने नहीं पहुँचाई हैं। ऐसे में विद्रोह के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं। बलोच महिलाएँ भी इस विद्रोह में शामिल हैं।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस आई, हिंदू त्योहार पर ‘तुष्टिकरण वाला फरमान’ जारी करने लगी हैदराबाद पुलिस: कहा- जिनका ‘मन न हो’ उनको रंग न लगाएँ, समूह में न खेलें होली

कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर सीवी आनंद द्वारा होली खेलने को लेकर जारी की गई नोटिस को लेकर विवाद हो गया है। नोटिस में कहा गया है कि होली मनाने वाले हिंदू ‘अनिच्छुक व्यक्तियों, स्थानों और वाहनों’ पर रंग नहीं फेंके। कानून-व्यवस्था का हवाला देकर आदेश में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर समूह में बाइक और अन्य वाहनों की सवारी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पुलिस कमिश्नर द्वारा 11 मार्च 2025 को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, “हैदराबाद शहर में सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अनिच्छुक व्यक्तियों, स्थानों और वाहनों पर रंग-गुलाल या रंगीन पानी फेंकना परेशानी का कारण बन सकता है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर समूहों में दोपहिया और अन्य वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाएँ।”

तेलंगाना के पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किया गया नोटिस

नोटिस में आगे कहा गया है, “इससे शांति व्यवस्था भंग होने और जनता को असुविधा या खतरा होने की आशंका है। होली महोत्सव-2025 के उत्सव के संबंध में यह आदेश 13 मार्च को शाम 6 बजे से 15 मार्च से 6 बजे सुबह तक लागू रहेगा।” नोटिस के अनुसार, इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम 1348 फसली की धारा 76 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

बता दें कि हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम 1348 फसली की धारा 76 में कहा गया है कि जो कोई भी हैदराबाद सिटी पुलिस आयुक्त द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन करता है या पालन करने से इनकार करता है, उसे 50 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा या उसे 8 दिनों तक की कैद या दोनों से दंडित किया जा सकता है। कानून में एक महीने तक की कैद या 100 रुपए तक का जुर्माना या दोनों का भी प्रावधान है।

इस बीच, साइबराबाद पुलिस आयुक्त अविनाश मोहंती ने भी इसी तरह का एक नोटिस जारी किया है। इसमें हिंदुओं को अजनबियों, स्थानों और वाहनों पर रंग या पानी फेंकने और काफिले में वाहनों की आवाजाही के खिलाफ ‘चेतावनी’ दी गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन निर्देशों की आलोचना की है।

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर हिंदुओं के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “ईद के जश्न को कोई रोक नहीं है, कोई प्रतिबंध नहीं है! ऐसा भेदभाव क्यों?”

फ्री की चीजें देकर नहीं हटा सकते गरीबी: ‘रेवड़ी कल्चर’ पर नारायणमूर्ति ने उठाए सवाल, कहा- रोजगार से आएगी समृद्धि, सब्सिडी की हो मॉनिटरिंग

IT क्षेत्र की शीर्ष भारतीय कम्पनियों में शामिल इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने ‘रेवड़ी कल्चर’ पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि देश में मुफ्त चीजें देने से गरीबी नहीं खत्म होने वाली है। उन्होंने गरीबी खत्म करने का तरीका ज्यादा से ज्यादा नौकरियाँ पैदा करना बताया है। उन्होंने इसके साथ ही सरकारी सब्सिडी की कड़ी देखरेख की वकालत की है।

मुंबई में स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर आयोजित एक इवेंट में बोलते हुए नारायणमूर्ति ने कहा, “मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि आप में से हर आदमी आने वाले समय में लाखों नौकरियाँ पैदा करेगा और ऐसे ही आप गरीबी की समस्या का समाधान कर सकते हैं, आप फ्रीबीस (रेवड़ियों) से गरीबी की समस्या का समाधान नहीं कर सकते, कोई भी देश इसमें सफल नहीं हो सका है।”

नारायणमूर्ति ने इस दौरान कहा कि सरकार जो भी सुविधाएँ मुफ्त दे, उनको लेकर कड़ी मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने इसके लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली का उदाहरण दिया। नारायणमूर्ति ने कहा कि जिस भी परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए, 6 महीने बाद उसको लेकर जाँच की जाए कि वह इसका उपयोग कैसे करते हैं।

रेवड़ी कल्चर पर नारायणमूर्ति ने स्पष्ट किया है कि वह किसी पार्टी के वादों पर टिप्पणियाँ नहीं कर रहे बल्कि नीतिगत व्यवस्था पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई फायदा जनता को दिया जा रहा है तो इसके बदले में सरकार को कुछ शर्तें भी लगानी चाहिए।

नारायणमूर्ति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियाँ नकद ट्रांसफर, मुफ्त बिजली, मुफ्त बस यात्रा, राशन या फिर बाकी तरीकों का इस्तेमाल करके चुनाव में उतर रही हैं। बीते कुछ चुनावों में यह चलन तेजी से बढ़ा है।

भारतीय राजनीति में रेवड़ी और मुफ्त में सुविधाएँ दिए जाने का चलन आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में आजमाया था और उसे 2015 तथा 2020 के चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस को भी ऐसे ही वादों के सहारे कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में बड़ी सफलताएँ मिलीं।

रेवड़ी कल्चर का पहला विरोध करने वाली भाजपा ने भी बाद में महिलाओं को नकद राशि जैसे वादे किए हैं। हालाँकि, अर्थशास्त्रियों ने इस चलन को बजट के लिए खतरनाक बताया है और इसे अर्थव्यवस्था पर बोझ बताया है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के रेवड़ी बाँटने के असर बजट पर दिखाई भी दिए हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार दलितों और जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए बनाया गया बजट अपनी ‘गारंटी स्कीम’ में लगा दिया है। हजारों करोड़ रूपए की धनराशि गारंटी स्कीम में लगाई गई है। कर्नाटक ने कई टैक्स भी बढ़ा दिए हैं। हालाँकि, इससे कर्नाटक में गरीबी रेखा पर कोई असर पड़ा हो, ऐसी जानकारी नहीं सामने आई है। नारायणमूर्ति ने इसी से जुड़ी बात कही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी देश इसमें सफल नहीं हुआ है। दरअसल, उनका इशारा वेनेजुएला जैसे देशों की तरफ था। वेनेजुएला ने भी तेल की कमाई के सहारे अपने नागरिकों को रेवड़ियाँ बाँटनी चालू की थी। उसने सरकारी नौकरियाँ आदि भी खूब बाँटी थी। बाद में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई।

शाहिद अफरीदी ने कहा- मुसलमान बन जा, मेरा करियर बर्बाद कर दिया: पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया का US कॉन्ग्रेस में छलका दर्द, बताया पाकिस्तान में हिंदुओं से कैसे होता है भेदभाव

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में पाकिस्तान के पूर्व हिंदू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने डीसी में एक कॉन्ग्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को उजागर किया और बताया कि उनके ऊपर भी धर्मांतरण का दबाव बनाया गया था

कनेरिया ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में समान मूल्य और सम्मान नहीं मिला, जिसके कारण उनका क्रिकेट करियर बर्बाद हुआ। कनेरिया ने पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी पर भी धर्मांतरण का दबाव देने का गंभीर आरोप लगाया।

उन्होंने खुलासा किया कि अफरीदी ने उन्हें इस्लाम कबूलने को कहा था। (वो हिंदू थे इसलिए) अफरीदी और अन्य खिलाड़ी उन्हें सामाजिक रूप से अलग रखते थे। इसके अलावा उन्हें साथ में खाने भी नहीं देते थे। केवल इंजमामुल हक ऐसे कप्तान थे जो उनके समर्थन में बात करते थे।

उन्होंने कहा, “मैंने भी पाकिस्तान में काफी ज्यादा भेदभाव का सामना किया है और इसी वजह से मेरा क्रिकेट करियर पूरी तरह से बर्बाद हो गया। मुझे पाकिस्तान में उस तरह का सम्मान और समान भाव नहीं मिला, जिसका मैं पूरी तरह से हकदार था। पाकिस्तान में हुए उसी भेदभाव की वजह से आज यहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका में हूँ। हमने जागरूकता बढ़ाने के लिए बातचीत की है और संयुक्त राज्य अमेरिका से वो सब बताया जिसे यह पता चल सके कि हमने पाकिस्तान में कितना कुछ सहा है ताकि उस कार्रवाई की जा सके।”

कनेरिया ने कहा कि वो इस ब्रीफिंग के माध्यम से अमेरिका के लोगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को किस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि दानिश कनेरिया पाकिस्तान के पूर्व और अंतिम हिंदू क्रिकेटर हैं। उन्होंने अपने करियर में कुल 61 टेस्ट मैच खेले जबकि वनडे 18 मैच खेले हैं। पिछले कुछ समय से वो लगातार पाकिस्तान में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार पर मुखर होकर अपनी बात कहते आए हैं और इस्लामी कट्टरपंथियों का चेहरा उजागर करते हुए भी आए हैं।

हिरोइन रान्या राव दुबई से लेकर आई थी जो सोना, उसे बेंगलुरु के ऑटो में छोड़ना था: IPS की बेटी ने बताया- YouTube से सीखा छिपाकर कैसे लाते हैं गोल्ड

सोना तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) की पूछताछ में रान्या राव ने बताया है कि उन्हें तस्करी का सोना दुबई एयरपोर्ट पर एक शख्स ने दिया था। रान्या राव ने यह भी बताया है कि उन्हें यह सोना बेंगलुरु में एक ऑटो में रखना था। वहीं बेंगलुरु के एक कोर्ट ने मीडिया संस्थानों पर रान्या राव मामले में आरोप लगाने या अपमानजनक कंटेंट प्रसारित करने पर रोक लगाई है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार रान्या राव ने DRI को सोना मिलने और उसे छुपा कर लाने की कहानी बताई है। रान्या राव ने कहा, “मुझे 1 मार्च को एक विदेशी नंबर से कॉल आया। इसके पहले पिछले दो हफ़्तों से मुझे विदेशी नंबरों से कॉल आ रहे थे। मुझे दुबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 के गेट A पर जाने को कहा गया था। मुझे दुबई एयरपोर्ट पर सोना लेने और बेंगलुरु में उसे डिलीवर करने के लिए कहा गया।”

रान्य राव ने आगे बताया, “यह पहली बार था जब मैंने दुबई से बेंगलुरु सोना लाकर तस्करी की। इससे पहले कभी दुबई से सोना मैंने नहीं खरीदा था… सोना दो प्लास्टिक के पैकेट में था। मैंने एयरपोर्ट के एक कमरे में सोना शरीर से चिपकाया। मैंने सोने को अपनी जींस और जूतों में छिपाया था। ऐसा करना मैंने यूट्यूब से सीखा था।”

रान्या राव ने बताया है कि जिस आदमी ने उनको फ़ोन किया या दुबई एयरपोर्ट पर सोना दिया, उसे वह नहीं जानती। उन्होंने बताया है कि वह एक लम्बा सा आदमी था जो सोना देने के तुरंत बाद ही एयरपोर्ट से बाहर चला गया। यह सोना रान्या राव को सिक्युरिटी चेक पूरा होने के बाद दिया गया था।

DRI पूछताछ में रान्या राव ने बताया है कि उन्हें एयरपोर्ट के बाहर एक जगह ऑटो में सोना रखना था। रान्या के अनुसार, यहाँ एक अनजान आदमी सोना लेने आता। रान्या ने बताया है कि उन्हें आदमी के विषय में कोई जानकारी नहीं थी। रान्या ने यह भी दावा किया है कि सोना तस्करी का यह पहला मौक़ा था और इससे पहले उन्होंने कभी तस्करी नहीं की।

रान्या ने बताया है कि इससे पहले वह अमेरिका, यूरोप और बाकी के खाड़ी देशों में जाती रही हैं लेकिन यह यात्राएँ उनके बाकी कामों के लिए थीं। DRI रान्या राव से बाकी जानकारियाँ निकाल रही है। रान्या राव से अभी यह जानकारी हासिल नहीं हो सकी है कि उनके साथ इस तस्करी के धंधे में और कौन शामिल था।

इसी बीच बेंगलुरु की एक अदालत ने रान्या राव के सौतेले पिता और पूर्व DGP रामचन्द्र राव की याचिका पर आदेश दिया है। बेंगलुरु की अदालत ने कहा है कि अब मीडिया रान्या राव के खिलाफ कोई भी आरोप या अपमानजनक आरोप प्रकाशित या टेलीकास्ट नहीं कर सकता।

रामचन्द्र राव ने दावा किया था कि मीडिया उनकी बेटी का नाम TRP के लिए फर्जी आरोपों में घसीट रहा है। गौरतलब है कि रान्या राव बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 14 किलो तस्करी के सोने के साथ पकड़ी गईं थी।

मीडियाकर्मी कृप्या ध्यान दें, कॉन्ग्रेस शासन में सरकार की आलोचना अपराध है: तेलंगाना में पुलिस ने 2 महिला पत्रकारों को उठाया, सादे कपड़ों में घर पहुँच मोबाइल-लैपटॉप सब किया जब्त

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दो महिला पत्रकारों को गिरफ्तार किया है। पत्रकारों में एक पोगदादंडा रेवती हैं, जो ‘पल्स न्यूज‘ की प्रबंध निदेशक हैं, और दूसरी उनकी सहकर्मी संध्या उर्फ तन्वी यादव हैं।

ये गिरफ्तारी 10 मार्च 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो को लेकर है। इस वीडियो में एक किसान ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अब चूँकि इस इंटरव्यू को ‘पल्स न्यूज’ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, इसीलिए माना गया कि ये सब ‘पल्स न्यूज’ ने मुख्यमंत्री की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया है।

इसके बाद इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई। माना गया कि वीडियो को प्रसारित करने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था, और इसलिए दोनों पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। साथ ही उनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पत्रकारों के घर कुछ लोग सादे कपड़े में आए और उन्हें हिरासत में लिया। रेवती की एक वीडियो से तो पता चलता है कि पुलिस सुबह 5:30 बजे ही उनके यहाँ पहुँच गई थी। पत्रकार ने वीडियो जारी कर बताया कि उन्हें सोकर उठे आधा घंटा भी नहीं हुआ कि पुलिस उन्हें पकड़ने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम रेड्डी उन पर चुप रहने का दबाव बना रहे हैं। वहीं उनके पति और घरवालों के फोन-लैपटॉप जब्त कर लिए गए हैं।

गौरतलब दोनों पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद तेलंगाना सरकार को काफी निंदा झेलनी पड़ रही है। सवाल किया जा रहा है कि क्या यही है कॉन्ग्रेस की मोहब्बत की दुकान। तेलंगाना के भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष ने भी आावाज उठाई है। उन्होंने कहा कि ये देर रात पुलिस की कार्रवाई प्रेस की आजादी पर हमला है। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी इसकी निंदा की है। वहीं सिद्धिपेट से बीआरएस विधायक हरीश राओ थानीरू ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को डरपोक बताया।