नागपुर दंगों के मुख्य आरोपित फहीम शमीम खान का घर अवैध पाया गया है। उसके घर पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई चालू कर दी है। फहीम खान नागपुर में दंगे के लिए भीड़ इकट्ठा करने और भड़काऊ भाषण देकर पथराव-हिंसा करवाने का आरोपित है।
इस मामले में नागपुर नगर निगम की टीम सोमवार (24 मार्च, 2025) को उसके घर पर पहुँची है। नगर निगम के साथ पुलिस की टीम भी मौजूद है। यहाँ पुलिस ने बुलडोजर लगा कर उसके घर को गिराना चालू कर दिया है। फहीम खान वर्तमान में जेल में बंद है।
फहीम खान के अवैध घर को इससे पहले हटाने की नोटिस दी गई थी। हालाँकि, फहीम खान के परिवार ने इसे खुद नहीं तोड़ा। 20 मार्च, 2025 को नागपुर नगर निगम की एक टीम ने उसके घर का सर्वे किया था। टीम ने बताया था कि फहीम खान का घर बनाने के लिए कोई भी नक्शा नहीं पास करवाया गया था।
VIDEO | Maharashtra: Civic authorities demolish the illegal portions of a house of Fahim Khan, a key accused in the Nagpur violence who has been booked for sedition, after he failed to remove the unauthorised structure.#NagpurViolence#NagpurNews
यह घर फहीम खान की पत्नी ज़हरुन्निशा के नाम पर बना है और लगभग 950 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। इस घर में दो मंजिले हैं। यह भी सामने आया है कि उसके अवैध निर्माण के विरुद्ध पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
अब उसके घर को नगर निगम गिरा रहा है। इससे पहले नगर निगम ने नागपुर में दंगा करने वालों की दो दुकानें भी सीज कर दी थी। पुलिस को पता चला था कि यह दुकानें दंगे के दौरान इस्तेमाल की गई थीं। यह दंगा करने वाले भी फहीम के करीबी थे।
गौरतलब है कि फहीम खान ने सोमवार (17 मार्च, 2025) को नागपुर में मुस्लिमों को इकट्ठा किया था। इसके बाद उसने इनको भड़काने के लिए एक बयान दिया था। उसने पुलिस पर हिन्दुओं की मदद करने के आरोप लगाए थे और कहा था किसी को छोड़ना नहीं है।
इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने नागपुर में खूब उत्पात मचाया था। इस दंगे में 70 लोग घायल हो गए थे। इसमें 30 से अधिक पुलिसकर्मी थे। दंगाइयों ने 50 से अधिक गाड़ियों को जला दिया था। उन्होंने एक DCP को कुल्हाड़ी मार दी थी। एक महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ की थी।
दंगे का मास्टरमाइंड फहीम खान अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी’ का अध्यक्ष है। उसने 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। वह नागपुर से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव में उतरा था और बुरी तरह हार गया था। फहीम खान नागपुर के संजय नगर का रहने वाला है और CCTV मरम्मत करने का काम करता है।
अब उसके खिला राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 100 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। कई विवादित पोस्ट भी हटाई जा चुकी हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अपमान मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ भी शिकायत दी गई है। शिवसेना नेता राहुल कनाल ने इन तीनों नेताओं पर एकनाथ शिंदे की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाल ने अपनी शिकायत में कहा कि एकनाथ शिंदे की प्रतिष्ठा, छवि और साख को धूमिल करने के लिए राहुल गाँधी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत ने यह अपराधिक साजिश रची है और उनके नेता के खिलाफ ‘पेड कैम्पेन’ चलाया है। टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस संबंध में दर्ज FIR में इन तीनों नेताओं का नाम है।
इस शिकायत में कहा गया है, “कुणाल कामरा द्वारा किए गए कृत्य, जिनमें आम जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयान देना, विवादित बातें बोलना और एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाना शामिल हैं, यह अपमानजनक होने के साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के प्रावधानों के तहत गैरकानूनी भी हैं।”
शिवसेना के नेताओं ने कुणाल कामरा के खिलाफ जल्द कार्रवाई की माँग की है। वहीं मुंबई पुलिस ने बताया है कि उसने इस अपमानजनक बयान और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कामरा को ढूँढना चालू कर दिया है। कई शिवसेना नेताओं ने कामरा को धमकी भी दी है। शिवसेना के एक नेता ने कहा है कि कुणाल कामरा का कहीं भी जाना मुश्किल हो जाएगा।
गौरतलब है कि रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।
कामरा ने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।
कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। इसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उस जगह पर तोड़फोड़ की थी, जहाँ कुणाल कामरा ने यह लाइव किया था।
कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ करार दिया है। कामरा ने कहा है कि एकनाथ शिंदे ने ‘किसी का बाप चुरा’ लिया है। यह सब कुणाल कामरा ने एक लाइव कॉमेडी शो में किया है। इस अपमान के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा है।
कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को लेकर यह अपमानजनक टिप्पणियाँ मुंबई में एक लाइव में शो में रविवार (23 मार्च, 2025) को की हैं। उन्होंने लाइव शो के दौरान एक कविता गाई, इसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।
इसी कविता में कामरा ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।
कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। शिवसेना के कार्यकर्ता उस कायर्क्रम स्थल जा पहुँचे, जहाँ कामरा ने यह कविता पढ़ी थी।
कुछ लोगों ने उस जगह पर तोड़फोड़ भी की, इसके वीडियो भी सामने आए हैं। इसमें कुछ लोग कुर्सियाँ एवं बाकी सामान तोड़ते हुए दिखते हैं। शिवसेना ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। शिव सेना के सोशल मीडिया इंचार्ज ने यह शिकायत दर्ज करवाई है।
मैं कुणाल कामरा के ऑफिस तोड़फोड़ की कड़ी चावल निंदा करती हूँ
शिवसेना ने कहा है कि यह शिंदे की छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास है। शिवसेना ने शिकायत में यह भी कहा कि इससे आम जनता की भावना को ठेस पहुँची है। कुणाल कामरा पर सभ्य आलोचना की सीमा लाँघने का आरोप भी शिवसेना ने लगाया है।
कुणाल कामरा को कई शिवसेना नेताओं ने चेतावनी भी दी है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने एक्स (पहले ट्विटर) पर ऐलान किया है कि वह सोमवार (24 मार्च, 2025) को 11 बजे कुणाल कामरा की ‘धुलाई करेंगे।’ हालाँकि, अभी तक कामरा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर मिले भारी नकदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आंतरिक जाँच के लिए तीन जजों की कमिटी बनाई है। इसके साथ जस्टिस वर्मा को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मोबाइल फोन का कोई भी डेटा डिलीट ना करें, चाहे वो फोन कॉल हो या मैसेज। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने CJI को दी गई अपनी रिपोर्ट में गहन जाँच की सिफारिश की है।
दूसरी तरफ, इन सभी आरोपों से जस्टिस यशवंत वर्मा ने इनकार किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को दिए गए बयान में जस्टिस वर्मा ने दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामदगी के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने बताया, “कर्मचारियों में से किसी को भी मौके पर मौजूद नकदी या मुद्रा के अवशेष नहीं दिखाए गए।”
उन्होंने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने कर्मचारियों के साथ मामले की जाँच की। उन्होंने पुष्टि की है कि परिसर में कथित रूप से पाए गए नोटों को हटाया नहीं गया था। केवल मलबा और बचाए जाने योग्य सामान ही हटाए गए थे। इन्हें घर में अलग से रखा गया है और निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं।” हालाँकि, जस्टिस वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड ने घर से मलबा हटाने की बात कही है।
कहा जा रहा है कि दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को बताया है कि जस्टिस वर्मा के आवास पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने 15 मार्च की सुबह कुछ मलबा और आंशिक रूप से जली हुई वस्तुओं को हटाने की बात कही है। जस्टिस उपाध्याय ने घटना का एक वीडियो जस्टिस वर्मा को दिखाया तो उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए साजिश रची गई है।
हालाँकि, जस्टिस वर्मा के आवास के पास जले हुए नोट मिले हैं। इस इलाके में काम करने वाले सफाई कर्मचारी इंद्रजीत ने बताया, “चार-पाँच दिन पहले हम यहाँ सफाई कर रहे थे और कूड़ा इकट्ठा कर रहे थे। उसी दौरान हमें 500 रुपए के जले हुए नोटों के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े मिले। बदा में भी हमें एक-दो और टुकड़े मिले। हमें नहीं पता था कि आग कहाँ लगी थी। हम सिर्फ कूड़ा इकट्ठा करते हैं।”
वहीं, रिपब्लिक भारत ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जिस जगह पर नकदी जल रही थी, वहाँ का दिल्ली पुलिस के जूनियर अधिकारी वीडियो रिकॉर्ड किया था था। हालाँकि, बाद में इसे डिलीट करने के लिए कह दिया गया। शुरू में ये वीडियो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा किया गया था। बाद में सभी लोगों को निर्देश दिया गया के वे सारी फुटेज डिलीट कर दें और उसकी कॉपी ना रखें और ना ही किसी को भेजें।
सामने आए वीडियो में दमकल कर्मियों को बोरे में भरकर रखी हुई नोटों की जलती गड्डियों को बुझाकर हटाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। वीडियो में दिख रहा है कि जस्टिस वर्मा के आवास पर आग बुझाने गए दमकल कर्मियों में से एक नोटों के संदर्भ में ये कहते हुए सुनाई देता है कि ‘गाँधी में आग लग रही है भाई’।
राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ रेप और ब्लैकमेल का मामला पिछले 36 दिनों से लोगों के दिलों में आग बनकर जल रहा है। 15 फरवरी 2025 को जब ये मामला सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया। नाबालिग लड़कियों के साथ हुई इस हैवानियत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। शनिवार (22 मार्च 2025) को एक बार फिर बिजयनगर की सड़कों पर गुस्सा फूट पड़ा।
सर्व समाज संघर्ष समिति ने बिजयनगर बंद का ऐलान किया और लोग सीबीआई जाँच की माँग लेकर सड़कों पर उतर आए। बाजार बंद रहे, दुकानों के शटर डाउन थे और हर तरफ एक ही आवाज गूँज रही थी – इंसाफ चाहिए।
रिपोट्स के मुताबिक, प्रदर्शन कारी लोगों का कहना है कि SIT की जाँच से उन्हें भरोसा नहीं। पहले इस केस को एडिशनल एसपी नेम सिंह देख रहे थे, लेकिन अब अजमेर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश ने जाँच की कमान आईपीएस अभिषेक अंदासु को सौंप दी। अभिषेक IIT बॉम्बे से पासआउट हैं और साइबर क्राइम के एक्सपर्ट माने जाते हैं। फिर भी लोग कह रहे हैं कि SIT की रफ्तार धीमी है और सच को पूरी तरह बाहर लाने के लिए सीबीआई ही सही रास्ता है। प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च निकाला, नारे लगाए और प्रशासन से गुहार लगाई कि इस मामले की गहराई तक जाकर हर दोषी को सजा दी जाए।
ये मामला तब शुरू हुआ, जब 15 फरवरी को एक नाबालिग लड़की ने बिजयनगर थाने में शिकायत की। फिर धीरे-धीरे तीन और पीड़िताओं के परिवार सामने आए। आरोप है कि समुदाय विशेष के युवकों ने इन लड़कियों को पहले दोस्ती के जाल में फँसाया, फिर उनके अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इसके बाद रेप की वारदात को अंजाम दिया और उन्हें जबरन कलमा पढ़ने, रोजा रखने और धर्म बदलने के लिए मजबूर किया।
अब तक पुलिस ने 16 आरोपितों को पकड़ा है। इनमें 11 को जेल भेजा जा चुका है और 5 नाबालिगों को किशोर सुधार केंद्र में रखा गया है। नामजद आरोपितों में रेहान, सोहेल मंसूरी, लुकमान, अफराज, कैफे संचालक श्रवण जाट, आशिक, करीम, हकीम कुरैशी, जावेद, सांवरमल और अमान मंसूरी शामिल हैं।
बिजयनगर में शनिवार (22 मार्च 2025) को हालात तनावपूर्ण रहे। प्रशासन ने कोई रिस्क न लेते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया। DYSP सज्जन सिंह ने खुद मोर्चा संभाला। 8 थानों की पुलिस और RAC का जाब्ता शहर में नजर आया। लेकिन लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। वो चाहते हैं कि सीबीआई इसकी तह तक जाए और पीड़िताओं को पूरा इंसाफ मिले।
नए SIT प्रभारी अभिषेक अंदासु ने कहा, “हम इस केस को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं। कोई लापरवाही हुई तो उसे ठीक करेंगे। जाँच तेज और निष्पक्ष होगी।” उनकी टीम में एडिशनल एसपी ब्यावर, मसूदा सीओ, दो थाना अधिकारी और एक सब इंस्पेक्टर शामिल हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये बदलाव लोगों का भरोसा जीत पाएगा? बिजयनगर के लोग अभी भी परेशान हैं। माँ-बाप अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। हर कोई चाहता है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले कि कोई दोबारा ऐसी हरकत की हिम्मत न करे।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का रविवार (23 मार्च 2025) को आखिरी दिन था। इस मौके पर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और देश के कई बड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने औरंगजेब, दारा शिकोह, भारत की संस्कृति और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा जैसे गंभीर मसलों पर RSS का रुख साफ किया।
दत्तात्रेय होसबले ने कहा, “हमारे देश में कोई भी मुद्दा उठा सकता है। इतिहास में कई घटनाएँ हुई हैं। दिल्ली में औरंगजेब मार्ग था, उसे बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग कर दिया गया। इसके पीछे कोई मकसद तो है न? भारत में औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को कभी आइकॉन नहीं बनाया गया। जो लोग गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं, उन्होंने दारा शिकोह को आगे क्यों नहीं बढ़ाया? सवाल ये है कि क्या भारत की संस्कृति को तोड़ने वाले को आइकॉन बनाना है या जो यहाँ की परंपराओं के साथ रहे, उन्हें सम्मान देना है? औरंगजेब इस कड़ी में नहीं आता, लेकिन दारा शिकोह उस श्रेणी में फिट बैठते हैं।”
आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने आगे कहा, “अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई को तो हम स्वतंत्रता संग्राम कहते हैं। लेकिन उनसे पहले जो आक्रांता आए, उनके खिलाफ जो युद्ध हुए, वो भी आजादी की लड़ाई ही थी। जैसे राणा प्रताप ने जो किया, वो भी स्वतंत्रता संग्राम था। जो लोग आक्रमणकारी मानसिकता रखते हैं, वो देश के लिए खतरा हैं। हमें तय करना है कि अपनी संस्कृति को किसके साथ जोड़ना है। ये देशी-विदेशी धर्म की बात नहीं, बल्कि सोच की बात है। यही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का दृढ़ विचार है। बहन निवेदिता क्रिश्चियन थीं, फिर भी वो भारत की होकर रह गईं।”
Bengaluru, Karnataka* | General Secretary of RSS, Dattatreya Hosabale, says, "… There have been a lot of incidents in the past. There was an 'Aurangzeb Road' in Delhi, which was renamed Abdul Kalam Road. There was some reason behind it. Aurangzeb's brother, Dara Shikoh, was not…
इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने औरंगजेब के खिलाफ बेहद सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा, “भारत के जो विरोधी रहे हैं, उन्हें आइकॉन नहीं बनाया जा सकता। गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वाले दारा शिकोह को याद क्यों नहीं करते? दिल्ली में औरंगजेब रोड को अब्दुल कलाम रोड बनाया गया, तो इसका मतलब समझना चाहिए। जो हमारी संस्कृति की बात करेंगे, उन्हें ही हम फॉलो करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने आक्रमणकारी सोच को देश के लिए खतरा बताया और कहा कि हमें अपने नायकों को चुनना होगा।
जानकारी के मुताबिक, बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। RSS ने इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया। इसमें कहा गया, “बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों पर इस्लामी कट्टरपंथियों की सुनियोजित हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न हो रहा है। ये मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।” होसबले ने कहा कि हिंदुओं को वहाँ से पलायन नहीं करना चाहिए, लेकिन उनकी सुरक्षा जरूरी है।
कर्नाटक सरकार की ओर से सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर चल रही बहस के बीच होसबोले ने कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटा की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आरक्षण हमारे संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर के खिलाफ हैं।
इस दौरान उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक को समाज के हित में बताया और परिसीमन पर भी बोले। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें कम नहीं होनी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे। राम मंदिर पर उन्होंने कहा, “ये RSS की नहीं, पूरे समाज की जीत है।
महाराष्ट्र के नागपुर में 17 मार्च 2025 को इस्लामिक भीड़ ने हिंदुओं और पुलिस के खिलाफ हिंसा की, जिसमें डीसीपी समेत कई पुलिसकर्मी और आम हिंदू घायल हुए। हिंदुओं के घरों को फूँक दिया गया। उनकी कारों को निशाना बनाया। खास बात ये है कि एक भी मुस्लिम घर, मुस्लिम की गाड़ी पर कोई हमला नहीं हुआ।
ये सब तब शुरू हुआ जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के लोग औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। अफवाह उड़ी कि उन्होंने औरंगजेब का पुतला जलाया, जिसमें कुरान की आयतें लिखी थीं। लेकिन पुलिस ने साफ कर दिया कि ये अफवाह गलत थी और दंगा पहले से प्लान किया गया था। फिर भी भारत में इस्लामिक-वामपंथी गिरोह और दुनिया भर में विदेशी मीडिया ने इस हिंसा का ठीकरा हिंदुओं, बीजेपी और फिल्म ‘छावा’ पर फोड़ दिया।
पश्चिमी मीडिया ने हिंदुओं को हिंसा के लिए ठहराया जिम्मेदार, फर्जी नरेटिव गढ़ा
पश्चिमी मीडिया ने इस खबर को ऐसा घुमाया कि सच को ही ढक दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT), एसोसिएटेड प्रेस (AP), बीबीसी और स्काई न्यूज जैसे बड़े नामों ने एक ही सुर में हिंदुओं को विलेन बना दिया। इनका कहना था कि हिंदू संगठनों ने औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग की और फिल्म ‘छावा’ ने लोगों को भड़काया, जिससे दंगे हुए। लेकिन सच ये है कि हिंसा इस्लामिक भीड़ ने शुरू की थी। बीबीसी ने अपनी हेडलाइन में लिखा, “भारत के एक शहर में औरंगजेब की कब्र को लेकर हिंसा के बाद कर्फ्यू”। उसने दावा किया कि नागपुर के महाल इलाके में वीएचपी और बजरंग दल ने औरंगजेब का पुतला जलाया, जिससे गुस्सा भड़का।
बीबीसी का स्क्रीनशॉट
बीबीसी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान को भी तोड़-मरोड़कर पेश किया। उसने लिखा कि फिल्म ‘छावा’ ने लोगों को उकसाया, जिसमें छत्रपति संभाजी महाराज को औरंगजेब के हाथों क्रूर यातनाएँ झेलते दिखाया गया। बीबीसी ने ये साबित करने की कोशिश की कि हिंदू कार्यकर्ताओं की वजह से मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की। लेकिन फडणवीस ने ऐसा कुछ नहीं कहा। उन्होंने विधानसभा में बताया कि ये दंगा पहले से सोचा-समझा था। मौके पर पत्थरों से भरी ट्रॉलियाँ मिलीं, जो साजिश की ओर इशारा करती हैं। बीबीसी ने सच को नजरअंदाज कर हिंदुओं को दोषी ठहराया।
फडणवीस ने साफ कहा कि वो किसी फिल्म को दोष नहीं दे रहे। उन्होंने मराठी में कहा, “‘छावा’ ने छत्रपति संभाजी महाराज की सच्ची कहानी सामने लाई। इससे लोगों में औरंगजेब के खिलाफ भावनाएँ जागीं। कुछ लोग जो औरंगजेब को पसंद करते हैं, वो भी सामने आए।” उनका कहना था कि फिल्म ने इतिहास को लोगों तक पहुँचाया, जिससे औरंगजेब की हकीकत खुली। लेकिन बीबीसी ने उनके बयान के कुछ हिस्सों को चुनकर ये दिखाया कि फिल्म ही हिंसा की जड़ है। ये फडणवीस के बयान को गलत तरीके से पेश करने की हिमाकत थी।
एपी ने भी हिंदुओं को कटघरे में खड़ा किया
अमेरिका की न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने भी हिंदुओं को ही कटघरे में खड़ा किया। उसने अपनी रिपोर्ट में लिखा, “हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग की, जिससे पश्चिमी भारत में सांप्रदायिक झड़पें हुईं।” आर्टिकल के लेखक शेख सलिक तो अलग ही कहानी बताने की कोशिश की, उसके हिसाब से नागपुर में हिंसा तो मुस्लिम भीड़ ने की, लेकिन वो पीड़ित हैं। AP ने ये भी कहा कि कुछ इतिहासकार मानते हैं कि औरंगजेब के हिंदुओं पर अत्याचार की कहानियाँ बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं। जबकि सच ये है कि औरंगजेब ने लाखों हिंदुओं को मारा, मंदिर तोड़े, जजिया टैक्स लगाया-ये सब इतिहास में दर्ज है।
AP ने ये भी लिखा कि पिछले दस साल में पीएम नरेंद्र मोदी के राज में औरंगजेब के खिलाफ नफरत बढ़ी। उसने कहा कि मोदी ने औरंगजेब पर हिंदुओं को सताने का आरोप लगाया, जिससे मुस्लिम अल्पसंख्यक डरे हुए हैं। उसने ये भी जोड़ा कि हिंदू राष्ट्रवादियों की हिंसा से मुस्लिम परेशान हैं। लेकिन AP ने हरियाणा के नूहँ में 2023 की हिंसा, मध्य प्रदेश के मऊ में 2025 के हमले, राम नवमी, होली, दिवाली पर हिंदुओं पर हुए हमले, उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या, उमेश कोल्हे का कत्ल और 2020 के दिल्ली दंगों का जिक्र तक नहीं किया। इन सबमें मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया था।
AP ने फिल्म ‘छावा’ और विक्की कौशल को भी निशाने पर लिया। उसने कहा कि इस फिल्म ने धार्मिक तनाव बढ़ाया। रिपोर्ट में लिखा, “कुछ समीक्षकों ने फिल्म को विभाजनकारी बताया, जो देश में धार्मिक दरार बढ़ा सकती है।” लेकिन सच ये है कि ‘छावा’ ने संभाजी महाराज की बहादुरी और औरंगजेब की क्रूरता को हल्के से दिखाया। फिल्म में कोई ऐसा नरेटिव नहीं था जो लोगों को बाँटे। फिर भी AP ने इसे हिंदुओं के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया। ये साफ था कि वो इस्लामिक हिंसा को छुपाना चाहते थे।
एपी का स्क्रीनशॉट
हर बार जब हिंदू अपनी कहानी फिल्मों के जरिए बताते हैं, जैसे ‘छावा’ में संभाजी महाराज की वीरता या ‘द कश्मीर फाइल्स’ में कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार, तो इस्लामिक कट्टरपंथी और उनके समर्थक हंगामा शुरू कर देते हैं। वो चाहते हैं कि हिंदू अपने अत्याचारों की बात न करें, अपने मंदिरों की माँग न उठाएँ और औरंगजेब जैसे अत्याचारियों की तारीफ को चुपचाप सुनें। AP ने कोर्ट में मंदिरों की माँग करने वाले हिंदुओं को ‘हिंदू चरमपंथी’ कहकर बदनाम करने की एकतरफा कोशिश की।
स्काई न्यूज ने भी अलावा ‘हिंदुओं’ को जिम्मेदार बताने का राग
स्काई न्यूज ने भी वही राग अलापा। उसने कहा कि ‘छावा’ ने महाराष्ट्र में तनाव बढ़ाया। उसने लिखा, “मुस्लिम, जो 14% आबादी हैं, उन्हें लगता है कि हिंदू भीड़ उन पर हमला कर रही है और सरकार चुपचाप समर्थन दे रही है।” स्काई न्यूज ने लव जिहाद को ‘साजिश थ्योरी’ कहकर खारिज कर दिया, जबकि हर दिन ऐसी खबरें आती हैं। उसने ये भी कहा कि बीजेपी सरकार मुस्लिमों के घर बुलडोजर से तोड़ रही है। लेकिन सच ये है कि बुलडोजर सिर्फ दंगाइयों की अवैध संपत्ति पर चलता है, न कि हर मुस्लिम के खिलाफ।
NYT भी फर्जी नरेटिव गढ़ने में रही शामिल
न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने भी हिंदुओं को दोषी ठहराया। उसने लिखा, “एक कट्टर हिंदू समूह की औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग से महाराष्ट्र में तनाव बढ़ा और हिंसा हुई।” NYT ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान को गलत तरीके से पेश किया और ‘छावा’ को जिम्मेदार ठहराया। उसने कहा कि हिंदुओं ने प्रदर्शन किया, जिससे दिक्कत शुरू हुई। लेकिन सच ये है कि हिंदुओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। हिंसा की शुरुआत इस्लामी कट्टरपंथियों भीड़ ने की, जो औरंगजेब को अपना हीरो मानती है।
NYT का स्क्रीनशॉट
NYT ने इतिहासकार सोहेल हाशमी का हवाला दिया, जिसने कहा कि संभाजी और औरंगजेब का झगड़ा धार्मिक नहीं, बल्कि दो राजाओं की लड़ाई थी। लेकिन औरंगजेब के फरमान, मंदिर तोड़ने, हिंदुओं की हत्या और जबरन धर्मांतरण के सबूत मौजूद हैं। NYT चाहता है कि लोग ये मानें कि औरंगजेब हिंदू-विरोधी नहीं था। वो ये भी नहीं चाहता कि लोग जानें कि आज के इस्लामिक कट्टरपंथी औरंगजेब और टीपू सुल्तान जैसे हिंदू-विरोधियों को क्यों पूजते हैं।
नागपुर हिंसा का पूरा घटनाक्रम, हिंदू बने निशाना
अब असली घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। जिसमें 17 मार्च 2025 की शाम को नागपुर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़की। अफवाह फैली कि हिंदुओं ने कुरान जलाई। इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं और पुलिस पर हमला कर दिया। भालदरपुरा इलाके में एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी हुई, उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। पुलिस ने 84 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें मास्टरमाइंड फहीम शमीम खान भी शामिल है। फहीम माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी का शहर अध्यक्ष है और उसने 500 से ज्यादा दंगाइयों को इकट्ठा किया था।
महाराष्ट्र पुलिस को पता चला कि बांग्लादेश से सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई गईं। 97 अकाउंट्स मिले, जिनमें ज्यादातर बांग्लादेशी आईपी से पोस्ट किए गए थे। स्थानीय हिंदुओं ने बताया कि मुस्लिम दंगाइयों ने उनके घरों पर तुलसी के गमले फेंके। एक चश्मदीद ने कहा कि वो गालियाँ दे रहे थे और भड़काऊ नारे लगा रहे थे। दंगाइयों ने हिंदुओं की गाड़ियों को निशाना बनाया, जिनमें स्वास्तिक या हिंदू देवताओं की तस्वीरें थीं।
कई गवाहों ने बताया कि मुस्लिम दंगाइयों ने पेट्रोल बम, तलवारें और बोतलें इस्तेमाल कीं। उनके चेहरे ढके हुए थे। उन्होंने बच्चों पर भी पत्थर फेंके और आसपास के लोगों और संपत्ति पर अंधाधुंध हमला किया। लेकिन मुस्लिम घरों या गाड़ियों को छुआ तक नहीं। ये साफ था कि ये हमला सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ था। फिर भी पश्चिमी मीडिया ने इसे हिंदुओं की गलती बता दिया।
पश्चिमी मीडिया ने इस हिंसा को गलत तरीके से पेश किया। उसने हिंदुओं की माँग और फिल्म ‘छावा’ को हिंसा का कारण बताया, जबकि ये इस्लामिक कट्टरपंथियों की साजिश थी। वो हिंदुओं को आक्रामक और मुस्लिम भीड़ को पीड़ित दिखाना चाहते हैं। ये पक्षपाती रिपोर्टिंग इस्लामिक हिंसा को सही ठहराती है और हिंदुओं को चुप रहने की नसीहत देती है। ये लोग कह रहे हैं कि अगर हिंदुओं ने अपनी कहानी न सुनाई होती, तो ये हिंसा न होती।
मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिएयहाँ क्लिक करें।
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में नोटों से भरे बोरों में आग लगने का वीडियो सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपनी जाँच में इसकी गहन जाँच की सिफारिश की है। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाई है।
इससे पहले जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की FIR और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ECIR में भी आ चुका है। जिस समय उनका नाम इन केंद्रीय एजेंसियों की फाइलों आरोपित बनाया गया था, उससे लगभग चार साल पहले यानी 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज बन गए थे। जज बनने के बाद होने सिंभावली शुगर्स मिल नाम की एक कंपनी में गैर-कार्यकारी निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।
हालाँकि, पिछले साल यानी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई से जाँच कराने के फैसले को खारिज कर दिया था। सीबीआई से जाँच कराने का आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया था। सिंभावली शुगर्स के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने साल 2018 में मामला दर्ज किया था। एफआईआर में जस्टिस वर्मा को फरवरी 2012 में सिंभावली शुगर्स में एक गैर-कार्यकारी निदेशक बताया गया था।
करोड़ों रुपए का गबन करने वाली कंपनी के नन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर थे जस्टिस वर्मा
एजेंसी ने उन्हें आरोपित नंबर-10 बनाया था। इस मामले में सभी आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। कंपनी ने 900 करोड़ का लोन लिया था। यह FIR ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (अब पंजाब नेशनल बैंक का हिस्सा) ने शुगर मिल के खिलाफ दर्ज कराई थी। कंपनी ने किसानों को कृषि उपकरण आदि देने के नाम पर इस बैंक से लगभग 150 करोड़ रुपए ऋण लिया था। वहीं, कुल 7 बैंकों से 900 करोड़ रुपए लोन लिया था।
सीबीआई द्वारा दर्ज FIR की कॉपी, जिसमें 10वें नंबर पर जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम है (साभार: न्यूज 18)
बैंक की शिकायत के अनुसार, जनवरी से मार्च 2012 के बीच ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की हापुड़ शाखा ने 5,762 किसानों को कृषि उपकरण, खाद और बीज खरीदने में मदद करने के लिए 148.59 करोड़ रुपए वितरित किए थे। समझौते के तहत किसानों के व्यक्तिगत खातों में वितरित किए जाने से पहले धनराशि को एस्क्रो खाते में स्थानांतरित किया जाना था।
समझौते के तहत सिंभावली शुगर मिल्स ने ऋण चुकाने और किसानों द्वारा किसी भी चूक या पहचान मे धोखाधड़ी को कवर करने की गारंटी ली थी। कंपनी ने कथित तौर पर फर्जी ‘नो योर कस्टमर (KYC)’ दस्तावेज जमा किए और धन का गबन किया। मार्च 2015 तक बैंक ने लोन को धोखाधड़ी घोषित कर दिया। इसमें कुल 97.85 करोड़ रुपए गबन और 109.08 करोड़ रुपए की बकाया राशि शामिल थी।
FIR में जस्टिस वर्मा का भी नाम
इसके साथ बैंक ने 13 मई 2015 को इसकी सूचना केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी दे दी। इस मामले में CBI ने 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से एक वर्तमान जस्टिस यशवंत वर्मा भी एक थे। एफआईआर में नामजद एक और प्रमुख व्यक्ति गुरपाल सिंह था। वह कंपनी का उप प्रबंध निदेशक और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का दामाद था।
CBI द्वारा एफआईआर दर्ज करने के पाँच दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी 27 फरवरी 2018 को लखनऊ के ED पुलिस स्टेशन में धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 की धारा 3/4 के तहत शिकायत दर्ज की। दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऋण वितरण से जुड़े 7 बैंकों की नए सिरे से सीबीआई जाँच का आदेश दिए। अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी ने न्यायपालिका की ‘अंतरात्मा को झकझोर दिया है’।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI से कहा था कि 7 बैंकों ने सिंभावली शुगर्स को ऋण क्यों दिए, जबकि उन्हें पता था कि कंपनी का लोन नहीं चुकाने का इतिहास रहा है। हाई कोर्ट ने पाया कि कई बैंक अधिकारियों ने 900 करोड़ रुपए के ऋण पास करने में सिंभावली शुगर मिल्स के साथ मिलीभगत की थी। कोर्ट ने कहा था कि ओरिएंटल बैंक ही एकमात्र बैंक था जिसने केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क किया।
अपने आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, “बैंक अधिकारियों ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों और परिपत्रों की पूरी तरह से अनदेखी की। हम सीबीआई को निर्देश देते हैं कि वह जाँच करे कि किन अधिकारियों ने इन ऋणों को मंजूरी दी, बोर्ड या ऋण समिति के किन सदस्यों ने वितरण में मदद की और किन अधिकारियों ने गबन को बिना रोक-टोक जारी रहने दिया।”
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने फरवरी 2024 में एक नई जाँच शुरू की। इस जाँच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि बैंक 2009 से 2017 के बीच सिंभावली शुगर मिल्स को ऋण क्यों देते रहे, जबकि यह कंपनी ऋण डिफॉल्टर थी। जाँच में कंपनी, उसके निदेशकों और अज्ञात बैंक अधिकारियों का नाम शामिल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का CBI जाँच को रोका
मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जाँच को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में सीबीआई जाँच का आदेश देकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गलती की है, क्योंकि इसमें जाँच की कोई जरूरत नहीं थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को कानून के मुताबिक धोखाधड़ी के लिए कार्रवाई करने से नहीं रोका गया है।
सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एफआईआर दर्ज होने के कुछ समय बाद ही सीबीआई ने यशवंत वर्मा का नाम उस एफआईआर से हटा दिया था। इसके बाद इस केंद्रीय एजेंसी ने कोर्ट को बता भी दिया था कि जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम FIR से हटाया जा रहा है। हालाँकि, साल 2014 में जब उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज बनाया गया तो उन्हें शुगर मिल कंपनी से इस्तीफा दे दिया था।
जस्टिस वर्मा ने कई कंपनियों से जुड़े मामलों का निपटारा किया
ये वही जस्टिस यशवंत वर्मा हैं, जिन्होंने एक मामले में ED की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साल 2023 में उन्होंने एक फैसला सुनाया था कि संघीय एजेंसी ED मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा किसी अन्य अपराध की जाँच नहीं कर सकती है और वह यह नहीं मान सकती है कि इसमें कोई अंतर्निहित अपराध है। यह मामला प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े एक मामले से संबंधित था।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 24 जनवरी 2023 को प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा दायर एक मामले में फैसला सुनाया था। दरअसल, प्रकाश इंडस्ट्रीज नवंबर 2018 में ED के कुर्की के एक आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा था। इस मामले की सुनवाई वर्तमान में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ द्वारा की जा रही है।
जस्टिस यशवंत वर्मा 11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2022 तक सार्वजनिक परिसर (अधिनियम) और भूमि अधिग्रहण मामलों से निपटने वाली पीठ की अध्यक्षता की। मार्च 2022 से नवंबर 2022 तक उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में विविध रोस्टर रखा और इसमें RTI, दिल्ली परिवहन निगम और खेल से संबंधित कई मामलों का निपटारा किया।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने नवंबर 2022 से जुलाई 2023 तक मध्यस्थता मामलों को निपटाया। उन्होंने हाई कोर्ट के विविध रोस्टर का नेतृत्व किया। इसके तहत उन्होंने जनवरी 2023 में नेटफ्लिक्स के पक्ष में फैसला सुनाया था। वहीं, साल 1997 में हुए उपहार सिनेमा कांड पर आधारित फिल्म ‘ट्रायल बाय फायर’ की रिलीज़ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
जुलाई 2023 से उन्होंने आयकर अपील, प्रत्यक्ष कर, सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच की अध्यक्षता की। मार्च 2024 में उन्होंने आयकर विभाग द्वारा कॉन्ग्रेस को 2018-19 के लिए 105 करोड़ रुपए के बकाया कर की वसूली के लिए जारी नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इस साल जनवरी में जस्टिस वर्मा ने माना कि दक्षिण कोरिया स्थित सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड भारत में कर का भुगतान करने के योग्य नहीं है। एक महीने बाद उन्होंने कार निर्माता मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा जारी 2,000 करोड़ रुपए के पुनर्मूल्यांकन नोटिस को रद्द कर दिया था।
जस्टिस वर्मा ने ऑक्सफैम इंडिया और केयर इंडिया जैसे गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े कई मामलों में भी फैसला सुनाया था। जनवरी 2024 में उन्होंने ऑक्सफैम इंडिया और केयर इंडिया की कर छूट की स्थिति को रद्द करने वाले आयकर विभाग द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी थी। वहीं, फरवरी 2025 में उन्होंने समाचार पोर्टल न्यूज़ क्लिक द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।
न्यूज क्लिक ने अपनी याचिका में आयकर विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे 2 मार्च को या उससे पहले बकाया कर के रूप में 19 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान वह दिल्ली हाई कोर्ट के मूल पक्ष के प्रभारी न्यायाधीश भी थे। जस्टिस वर्मा का अब तक का 22 का करियर रहा है। अभी 5 साल 9 महीना उनका कार्यकाल बाकी है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि तिरुमाला के भगवान श्री वेंकटेश्वर मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को ही काम करना चाहिए। जो कर्मचारी दूसरे धर्मों में आस्था रखते हैं, उन्हें सम्मान के साथ दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाएगा। ये बातें उन्होंने अपने नाती एन देवांश नायडू के जन्मदिन पर मंदिर दर्शन के दौरान कही।
बता दें कि कुछ महीने पहले ही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) बोर्ड ने 18 कर्मचारियों को ‘गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों’ में हिस्सा लेने के कारण ट्रांसफर कर दिया था। नायडू ने कहा, “अगर ईसाई या मुस्लिम भाई-बहन हिंदू जगहों पर काम नहीं करना चाहते, तो उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें दूसरी जगह भेजा जाएगा।”
नायडू ने ये भी ऐलान किया कि तिरुपति में 35 एकड़ जमीन पर होटल बनाने का फैसला रद्द कर दिया गया है। ये जमीन पिछले वाईएसआर कॉन्ग्रेस सरकार ने देवलोक, एमआरकेआर और मुमताज बिल्डर्स को दी थी। उनका कहना है कि ये कदम मंदिर की पवित्रता बचाने के लिए उठाया गया, क्योंकि लग्जरी होटलों के खिलाफ लोगों ने सख्त विरोध जताया था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि राज्य के कई गाँवों में लोग अपने यहाँ वेंकटेश्वर मंदिर चाहते हैं। इसके लिए एक ट्रस्ट बनाया जाएगा, जो फंड जुटाएगा। नायडू ने कहा, “एनटी रामाराव के समय अन्न दानम शुरू हुआ था, अब प्राण दानम शुरू किया गया है। तीसरे कदम के तौर पर मंदिर बनाएँगे।”
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने देश भर की राजधानियों में भी भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर बनाने का प्लान बताया। इसके लिए सभी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी जाएगी। 1 फरवरी को ट्रांसफर हुए 18 कर्मचारियों में 6 टीटीडी के स्कूलों के टीचर थे। बाकी में एक डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (वेलफेयर), असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, असिस्टेंट टेक्निकल ऑफिसर (इलेक्ट्रिकल), हॉस्टल वर्कर, दो इलेक्ट्रीशियन और दो नर्स शामिल थे।
टीटीडी के एक अधिकारी ने कहा, “सभी को उनकी सहमति से दूसरी जगह भेजा गया। अब तिरुमाला में गैर-हिंदू कर्मचारी नहीं हैं।” ये फैसला टीटीडी बोर्ड की उस बैठक के बाद लिया गया, जिसमें गैर-हिंदुओं को ट्रांसफर करने और राजनीतिक बयानों पर रोक लगाने की बात हुई थी। नायडू का ये कदम भक्तों की भावनाओं और मंदिर की परंपराओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा के घर मिले भारी मात्रा में नकदी को लेकर चीफ फायर ऑफिसर अतुल गर्ग ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है। गर्ग ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मियों को जस्टिस वर्मा के घर कोई नकदी नहीं मिली। दरअसल, अतुल गर्ग के हवाले से न्यूज एजेंसी PTI ने यह रिपोर्ट की थी। इसके बाद कई मीडिया हाउस ने मीडिया रिपोर्ट की थी।
न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए अतुल गर्ग ने कहा कि उन्होंने कभी किसी मीडिया आउटलेट को यह नहीं बताया कि दमकलकर्मियों ने घटनास्थल पर कोई नकदी नहीं मिलने की सूचना दी थी। जब अतुल गर्ग से पूछा गया कि मीडिया रिपोर्ट में उनका नाम क्यों लिया गया उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता क्यों लिया गया।” गर्ग ने कहा कि उन्होंने पहले ही खबर चलाने वाले मीडिया हाउस को स्पष्टीकरण भेज दिया है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इन खबरों पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया साइट X पर बयान दिया है। उन्होंने कहा, “दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से भारी मात्रा में नकदी जब्त किए जाने के बेहद घिनौने मामले में नया मोड़ आया है। कल पीटीआई ने खबर दी थी कि चीफ फायर ऑफिसर अतुल गर्ग ने जज के घर से किसी भी तरह की नकदी जब्त किए जाने से इनकार किया है।”
अपनी पोस्ट में उन्होंने आगे कहा, “आज गर्ग ने इस तरह का बयान देने से इनकार किया है! उनके इनकार के आलोक में पीटीआई की रिपोर्ट फर्जी थी। फर्जी खबर का स्रोत कोई भी हो, वह स्पष्ट रूप से जब्ती की सच्चाई को कमतर आँकने की कोशिश कर रहा था। पीटीआई को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि उसकी रिपोर्ट का स्रोत कौन था, क्योंकि इससे न्याय और सच्चाई, दोनों को बाधित करने की कोशिश करने वालों की पहचान उजागर हो जाएगी।”
The latest twist in the very very sordid matter of the large cash seizure from the residential outhouse of a #delhihighcourtjudge is significant.#PTI reported yesterday that #ChiefFireOfficer#AtulGarg denied that there was any cash seizure from the Judges residence. Today Garg…
बता दें कि इससे पहले PTI और उसके हवाले से कुछ मीडिया हाउस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अतुल गर्ग ने कहा था, “दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर आग बुझाने के अभियान के दौरान अग्निशमन कर्मियों को कोई नकदी नहीं मिली।” अग्निशमन दल ने 14 मार्च को आग बुझाने के बाद पुलिस को घटना के संबंध में सूचित किया था।
गौरतलब है कि होली की छुट्टी में जस्टिस यशवंत वर्मा के बंगले में आग लग गई थी। उस समय जस्टिस वर्मा शहर से बाहर गए हुए थे। परिजनों ने आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को सूचित किया था। अग्निशमन कर्मियों ने आग पर काबू भी पा लिया। राहत एवं बचाव के दौरान अग्निशमन कर्मियों ने एक कमरे में भारी मात्रा में रखी गई नकदी देखी। कहा गया था कि आग भी इस नकदी में ही लगी थी।
इस मामले का संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को रिपोर्ट देने के लिए कहा था। जस्टिस उपाध्याय ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट CJI को सौंप दी है और मामले की गहन जाँच कराने की जरूरत बताई है। वहीं, जस्टिस वर्मा ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है। रिपोर्ट मिलने के बाद CJI ने आंतरिक जाँच के लिए 3 जजों की एक समिति बनाई है।