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बंगाल में 1 अक्टूबर से खुलेंगे सिनेमा हॉल, थिएटर; CM ममता बनर्जी ने दी इजाजत

कोरोना संकट के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने अगले महीने से सिनेमा हॉल, संगीत और नृत्य शो के संचालन को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। ममता सरकार द्वारा यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में कोरोना वायरस का प्रसार अपने चरम पर है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में कुल संक्रमितों का आँकड़ा 2 लाख पार गया, जिसमें 27 सितंबर तक के आँकड़ों के हिसाब से 25,374 एक्टिव केस है। वहीं, मरने वालों की संख्या बढ़कर 4,665 हो गई है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि यह कदम राज्य की स्थिति को वापस बहाल करने के लिए है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “सामान्य परिस्थितियों की ओर लौटते हुए जटरास, प्ले, ओएटी, सिनेमा, म्यूजिकल और डांस कार्यक्रम तथा मैजिक शो को 1 अक्टूबर से 50 या इससे कम लोगों के साथ खोलने की अनुमति होगी। इस दौरान लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा, मास्क लगाना होगा व अन्य प्रोटोकॉल को फॉलो करना होगा।”

बता दें कि कोरोना संकट की तेज होती दस्तक के साथ ही केंद्र सरकार ने मार्च में सिनेमाघरों को बंद करने का आदेश दिया था। लेकिन पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से ही फिल्म, वेब सीरीज और टीवी सीरियल शूटिंग शुरू करने की अनुमति दे दी थी। सरकार ने फिल्म सेट पर 35 से लोगों से ज्यादा की उपस्थिति की अनुमति नहीं दी थी। संक्रमण के बढ़ाते मृत्यु दर के बीच पश्चिम बंगाल फिल्म थिएटरों को फिर से शुरू करने वाला भारत का पहला राज्य बना गया है।

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MAI) और ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (EIMPA) ने पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से जून में सिनेमा घरों को फिर से खोलने का अनुरोध किया था। बंगाल फिल्म इंडस्ट्री में कई अभिनेताओं द्वारा इसी तरह की माँग की गई थी, जिसमें टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहाँ भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया था कि सिनेमाघरों व अन्य मनोरंजन क्षेत्रों के बंद होने से कारोबारियों व कर्मचारियों को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है।

ट्रायल पूरा हुए बिना ही हजारों को कोरोना वैक्सीन दे रहा है चीन, चुप रहने की चेतावनी भी दी

कोरोना वायरस के पैदा होने से लेकर फैलने तक चीन की भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है। इस मुद्दे पर चीन हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। ताज़ा मामले में इस महामारी पर चीन की हरकतों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ख़बरों के मुताबिक़ चीन अपने देश के लोगों को कोविड 19 की वैक्सीन शॉट्स दे रहा है जबकि इस वैक्सीन का परीक्षण पूरा नहीं हुआ है। यानी, वैक्सीन कितनी असरदार है या उसके दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं, इस बात की पुष्टि भी नहीं हुई है। 

जिन लोगों को इस वैक्सीन की डोज दी जा रही है उनसे एक समझौते पर हस्ताक्षर भी कराया जा रहा है कि वह किसी से भी इस बात की चर्चा नहीं कर सकते हैं। जो लोग खतरे के दायरे में आते हैं उनमें सरकारी समूहों के कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, वैक्सीन कंपनी के कर्मचारी और शिक्षक शामिल हैं। इन लोगों को यह वैक्सीन सबसे पहले दी जा रही है। इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य जानकार सवाल खड़े कर रहे हैं कि ऐसा करने के पहले उन लोगों से सहमति दर्ज कराई जा रही है या नहीं। 

चीन ने अपनी इस हरकत का बचाव भी किया है। उसका कहना है कि सब कुछ शोध कार्य पूरा होने के बाद ही किया गया है। चीन ने दावा किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने उसके प्रायोगिक वैक्सीन कार्यक्रम का समर्थन किया है। यह कार्यक्रम जुलाई में शुरू किया गया था और चीन ने इस इस संबंध में जून के दौरान डब्ल्यूएचओ को सूचित कर दिया था। इस बात की जानकारी नेशनल हेल्थ मिशन की अधिकारी ज्हेंग जोंगवी ने रायटर्स को दी थी। 

डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात कही है। उन्होंने कहा, “कोई भी देश किसी मेडिकल उत्पाद को सिर्फ अपनी सीमा के भीतर की मान्यता दे सकता है। ऐसा सिर्फ आपातकाल जैसे हालातों में अस्थायी समाधान के तौर पर ही किया जा सकता है।” 

फिलहाल चीन में कुल 11 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल फेज़ में हैं और लगभग 4 वैक्सीन तीसरे चरण के ट्रायल में हैं। इसमें से दो वैक्सीन ऐसी हैं जो चीन सरकार द्वारा समर्थित कंपनी ने तैयार की हैं, पहली कंपनी है चाइना नेशनल बॉयोटेक ग्रुप और दूसरी सिनोवाक बॉयोटेक। अन्य प्रायोगिक वैक्सीन कैनसिनो बॉयोलॉजिक्स द्वारा तैयार की जा रही हैं। इसे जून में सेना के इस्तेमाल के लिए स्वीकृति दी गई थी।    

इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि अभी तक दुनिया के किसी भी देश ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। किसी भी देश ने अपने लोगों को इतने बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल की वैक्सीन नहीं दी है। चीन ऐसा कुछ करने वाला पहला देश है। इस तरह की वैक्सीन से बड़े पैमाने पर संक्रमण या दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। लिहाज़ा दुनिया के तमाम जानकार चीन की इस हरकत से चिंतित हैं। 

चीन की निजी स्वास्थ्य कंपनी सिनोवाक ने सिर्फ बीजिंग में ही लगभग 10 हज़ार लोगों को इस वैक्सीन के शॉट्स दिए हैं। इसी तरह सिनोफ़ार्म नाम की एक कंपनी ने भी हज़ारों लोगों को ट्रायल वैक्सीन के शॉट्स दिए हैं। इसके अलावा चीन की सरकार के तहत काम करने वाली कंपनी से संबंधित स्पष्ट जानकारी तक नहीं उपलब्ध है।    

‘संयुक्त राष्ट्र का काम प्रोपेगेन्डा फैलाना, ‘फ्रीडम फाइटर्स’ कहता है आतंकियों को’ – आखिर UN अब कितना विश्वसनीय?

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के तौर पर हुई थी। जिसके प्रमुख उद्देश्यों में उसके सदस्य देशों के मध्य पारस्परिक सहयोग, शांति और मित्रतापूर्ण व्यवहार को शामिल किया गया था।

इस साल यह संस्था 75 साल पूरे कर चुकी है और अगर इस उपलब्धि पर समीक्षा करें कि क्या यह अपने उपरोक्त उद्देश्यों को पूरा करने तो सफल रही है, तो इसका जवाब नकारात्मक ज्यादा मिलेगा। कोई भी जागरूक व्यक्ति जो प्रतिदिन देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर नजर रखता होगा, वह इस बात की गवाही दे सकता है कि पिछले सात दशकों में दुनिया भर में युद्ध, तनाव, और आतंकवाद अपने चरम पर पहुँच गया है।  

इसी दौरान, हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सयुंक्त राष्ट्र की स्थापना से लेकर 90 के दशक तक दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर बैठी थी, जिसे कोल्ड वॉर यानी शीत युद्ध का नाम दिया गया था। इस दौर में वैश्विक अशांति और आपसी दुश्मनी इतनी बढ़ चुकी थी कि इसका फायदा अमेरिका (यूएस) और सोवियत यूनियन (यूएसएसआर) ने हथियारों की होड़ को बढ़ावा देकर उठाना शुरू कर दिया।

आज हालात इतने बिगड़ गए हैं कि दुनिया के तानाशाह, आतंकवाद और कट्टरपंथ से ग्रषित देश अपने नागरिकों की भलाई के स्थान पर हथियारों की खरीद एवं विस्तार पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसमें चीन, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और ईरान जैसे संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश शामिल हैं।

इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ के पहले लगभग 40 साल तो उसके उद्देश्यों के विरुद्ध ही निकल गए। इस सम्बन्ध में कहा जाता है, “शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र का काम सिर्फ दोनों महाशक्तियों – अमेरिका (यूएस) और सोवियत यूनियन (यूएसएसआर) के लिए प्रचार (प्रोपेगेन्डा) फैलाना था।”

इस कथन को कहने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजदूत, डोर गोल्ड थे। उन्होंने “Tower of Babble: How the United Nations Has Fueled Global Chaos” नाम से एक पुस्तक लिखी है, जिसमें वे संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए लिखते हैं, “इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि संयुक्त राष्ट्र पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद के समाधान के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता।” 

दूसरी ओर, शीत युद्ध समाप्ति के बाद वर्तमान परिदृश्य में भी संयुक्त राष्ट्र की शैली में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि इतिहास विषय पर केन्द्रित एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल ‘हिस्ट्री’ ने की है। दरअसल, चैनल ने अपनी वेबसाइट पर संयुक्त राष्ट्र संघ को उत्तेजक नीतियों का समर्थक, विवादास्पद स्वास्थ्य विकल्प प्रदान करने, और नौकरशाह होने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए संबोधित किया है।

वास्तव में, यह कोई नाममात्र की आलोचना नहीं बल्कि एक वास्तविकता है। जिसका प्रमाण “The Case for Peace: How the Arab-Israeli Conflict can be Resolved” नाम से प्रकाशित एक पुस्तक में मिलता है। इसके लेखक, एलन देरशोवित्ज़ के मुताबिक, “कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र संघ आतंकवाद को प्रमुखता से बढ़ावा देता रहा है और मासूम लोगों की हत्या करने वालों को वहाँ ‘फ्रीडम फाइटर्स’ तक कहकर परिभाषित किया जाता है।” वे आगे लिखते है,

“विश्व में आज संयुक्त राष्ट्र को छोड़कर ऐसी कोई संस्था नहीं है, जोकि आतंकवाद को इस हद तक मान्यता देती हो!”

संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक तनाव और आतंकवाद को लेकर जो लचीला रवैया है, वैसा ही उसके वैचारिक स्तर पर भी देखने को मिलता है। जब साल 2011 में उत्तर कोरिया के क्रूर तानाशाह किम जोंग-इल का निधन हुआ तो जनरल असेम्बली में कुछ क्षणों के लिए मौन रखा गया था। जबकि खुद संयुक्त राष्ट्र सहित मानवाधिकारों की लगभग अन्य सभी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने किम के शासन को दुनिया का सबसे ज्यादा निर्दयी, दमनकारी और मानवता के खिलाफ अपराधी बताया था।

इसी तरह पिछले कुछ सालों से कट्टरपंथी देशों विशेषकर पाकिस्तान और टर्की के प्रभाव में आकर संयुक्त राष्ट्र ‘इस्लामोफोबिया’ नाम से एक काल्पनिक शब्दावली को स्थापित करने में लगा हुआ है। जिसके अनुसार समुदाय विशेष का गैर-मुस्लिम देशों में धर्म के आधार पर कथित उत्पीड़न किया जाता है। हालाँकि, यह अपने गुनाहों को छुपाने की साजिश के साथ-साथ एक भ्रमजाल है।

इसके विपरीत, बांग्लादेश के गठन के समय हिन्दुओं के नरसंहार और पाकिस्तान में आज गैर-मुसलमानों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह एक विडम्बना है कि हिन्दुफोबिया की सच्चाई को यह अंतरराष्ट्रीय संस्था जानबूझकर नजरअंदाज कर देती है।  

इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र संघ का दोहरा चरित्र भी सामने आता है। दरअसल, जब इस्लामी शरणार्थियों – ईराक, ईरान, दक्षिण सूडान, सीरिया, यमन, यूक्रेन और रोहिंग्या की बात होती है, तो संयुक्त राष्ट्र की तरफ से विशेष सहायता और उनके मानवाधिकारों की चिंता की जाती है। जबकि यूरोप और एशिया में गैर-मुस्लिम देशों में यह शरणार्थी अराजकता फ़ैलाने और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के चलते बदनाम हैं।

इस तथ्य के सैकड़ों उदाहरणों में से एक – सितम्बर 2020 में स्वीडन के दंगों को लिया जा सकता है, क्योंकि उन उपद्रवों में मुख्य भूमिका वहाँ के मजहबी शरणार्थियों की थी। वहीं म्यांमार ने तो रोहिंगियाओं के एक संगठन को आतंकवाद की श्रेणी में रखा हुआ है। जबकि कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का विस्थापन और पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में गैर-मुसलमानों पर हमले होते है, तो संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया तक भी नहीं होती है।

संयुक्त राष्ट्र की असवेंदनशीलता और वैचारिक भ्रष्टाचार का स्तर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक क्षेत्रों में फैला हुआ है। आज जब पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है तो भी संयुक्त राष्ट्र आलोचनाओं से घिरा हुआ है। दरअसल, जब कोरोना महामारी चीन से निकल कर दूसरे देशों में फैलने लगी तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानबूझकर इसकी जानकारी को कई दिनों तक छुपाए रखा था।

अगर समय रहते महामारी पर नियंत्रण के उपाय किए जाते तो शायद इतनी भयावह स्थिति न होती। अब इस फ़ैल चुकी अव्यवस्था के लिए भी संयुक्त राष्ट्र को ही जिम्मेदार माना जाता है। इस सन्दर्भ में, अप्रैल 2020 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक खबर “U.N. Security Council ‘Missing In Action’ in Coronavirus Fight” हेडलाइन के साथ प्रकाशित भी की थी।

समाचारपत्र ने संयुक्त राष्ट्र के सबसे शक्तिशाली सह-संगठन सिक्यॉरिटी काउंसिल के बारे में लिखा, “जब विश्व की बहुत बड़ी आबादी लॉकडाउन में है और हमारे सामने वैश्विक सुरक्षा का सबसे बड़ा मुद्दा सामने है, ऐसे में सिक्यॉरिटी काउंसिल कुछ भी करने में असमर्थ है।” पहले की तरह इस बार भी आलोचना किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं की बल्कि संयुक्त राष्ट्र में ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक लुई कारबोन्यू ने की थी।   

इन हालातों को देखते हुए, भारत सहित अन्य देशों द्वारा संयुक्‍त राष्‍ट्र की व्‍यवस्‍था में बदलाव की वकालत होने लगी है। कुछ दिनों पहले जनरल असेम्बली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसके प्रति कम होते भरोसे को भी दुनिया के सामने रखा था। उन्‍होंने स्पष्ट किया कि अगर बड़े पैमाने पर सुधार नहीं किए गए तो दुनिया का संयुक्त राष्ट्र पर से भरोसा उठने लगेगा।

अतः प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल समय की माँग है। उन्होंने जोर देते हुए कहा भी है:

“ऐसे में विश्व कल्याण की भावना के साथ जिस संस्था का गठन हुआ, वो भी उस समय के हिसाब से ही थी। आज हम बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, भविष्य की आवश्यकताएँ और चुनौतियाँ अलग हैं। आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तबकी परिस्थतियों में हुआ था, वह आज भी प्रासंगिक है। सब बदल जाए और हम ना बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है”।

इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि आज इस अंतरराष्ट्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर परिवर्तन की जरूरत है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ सहित उसके सभी सह-संगठनों को गंभीर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

BJP नेता ने ‘मथुरा मुक्ति’ का किया समर्थन तो भड़का इकबाल अंसारी, कहा- ये हिंदुस्तान की तरक्की रोक रहे

अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन होने के बाद मथुरा कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए दायर हुई याचिका को लेकर सियासत गरमा रही है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विनय कटियार और अयोध्या मामले में बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसार ने इसे लेकर अपनी-अपनी बात रखी है। पूर्व सांसद विनय कटियार ने ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की तरफ से दायर की गई याचिका का स्वागत किया है।

विनय कटियार ने ये भी कहा कि इस विषय में क़ानूनी रास्ता अख्तियार करना है या फिर आंदोलन चला कर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराना है, इस पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। वहीं इक़बाल अंसारी ने इस याचिका से निराशा जताते हुए कहा कि अगर हिंदुस्तान को विकास करना है तो मंदिर-मस्जिद की राजनीति से ऊपर उठना पड़ेगा।

‘बजरंग दल’ के संस्थापक विनय कटियार ने स्पष्ट किया कि जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, मथुरा में उसी जगह पर आज मस्जिद खड़ी है। उन्होंने कहा कि उस मस्जिद का रास्ता श्रीकृष्ण जन्मभूमि से होकर जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पर दूसरे संप्रदाय के लोगों ने बलपूर्वक कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आंदोलन के प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी, इसीलिए इसकी रूपरेखा बनानी पड़ेगी।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, विनय कटियार ने कहा कि इस कार्य के लिए व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल होने के नाते भाजपा भी इस आंदोलन में अपना काम करेगी और बाकी संगठन भी अपना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा को मुक्त कराने का भाजपा का वादा काफी पुराना है, जिसमें से अयोध्या में विजय प्राप्त हो चुकी है और अब काशी व मथुरा में से पहले किसके लिए आंदोलन चलाया जाए, इसके लिए विचार-विमर्श होगा।

बौखलाए इकबाल अंसारी ने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति करने वाले इस मामले को तूल दे रहे हैं। उसने कहा कि चंद लोग मंदिर-मस्जिद विवाद को अपनी रोजी-रोटी के लिए चलते रहने देना चाहते हैं। उसने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम न किया जाए तो हिंदुस्तान दुनिया में शिखर पर होगा। इसके लिए उसने बाबरी मस्जिद मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कोर्ट में 50 वर्ष चला। उसने मथुरा की मुक्ति की बात करने वालों को हिंदुस्तान की तरक्की रोकने वाला करार दिया।

बता दें कि अब यूपी के मथुरा की अदालत में 13.37 एकड़ की श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर सिविल सूट याचिका दायर की गई है। इसमें शाही ईदगाह मस्जिद को हटा कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मथुरा में स्थित पूरी भूमि को खाली कराने की माँग की गई है। इस याचिका को ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की तरफ से विनीत जैन ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि कटरा केशव देव की पूरी भूमि के प्रति हिन्दुओं की आस्था है।

स्वस्थ हुए अभिनेता अनुपम श्याम ओझा, CM योगी को पत्र लिख कहा- आपका सहयोग सेवाभाव का प्रतीक

अभिनेता अनुपम श्याम ओझा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संकट की घड़ी में आर्थिक मदद के लिए धन्यवाद देते हुए पत्र लिखा है। योगी आदित्यनाथ ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अभिनेता अनुपम श्याम ओझा के इलाज के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 20 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की थी। इलाज के बाद अब वे ठीक हो गए हैं। स्वस्थ होने के बाद वरिष्ठ अभिनेता ने यूपी सीएम को पत्र लिख कर आभार जताया है।

अनुपम श्याम ओझा ने उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा का भी स्वागत किया और कहा कि एक अभिनेता होने के नाते वे इसके लिए आत्मीय साधुवाद ज्ञापित करते हैं और धन्यवाद अर्पण करते हैं। उन्होंने ‘नई चेतना के संचार’ के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। इस पत्र के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जमकर तारीफ की। इस पत्र में अभिनेता ने लिखा है:

“मैं हृदयतल से झंकृत उद्धगार भरे शब्दों से आपका परस्पर आभार व्यक्त करता हूँ। मेरी अस्वस्थता के दौरान आपके द्वारा दिया गया आर्थिक सहयोग दयालुता और जनमानस के प्रति जागरूक सेवाभाव को इंगित करता है। मैं आपके सहयोग से उस अवांछित संकट की घड़ी में संघर्ष कर अब सामान्य दैनिक जीवन क्रिया को करने में सक्षम होने के लिए कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। मैं फ़िलहाल डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजर रहा हूँ और पूर्णरूपेण स्वस्थ होते ही आपका दर्शन लाभ कर सकूँ, ऐसी कामना करता हूँ।”

अभिनेता अनुपम श्याम ओझा ने सीएम योगी को पत्र लिख जताया आभार

‘मन की आवाज़- प्रतिज्ञा’ जैसे लोकप्रिय टीवी सीरियल और ‘रक्तचरित्र’ जैसे फिल्म में काम कर चुके अनुपम श्याम ओझा किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। तंगी से जूझ रहे अनुपम श्याम के परिवार ने उनके इलाज के लिए आर्थिक मदद की अपील की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई और उनके इलाज के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए कवायद तेज हो गई है और इसके लिए ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहल कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास से ही भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों से बातचीत की थी, जिनमें कई फिल्म निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री और संगीतकार शामिल थे। सीएम योगी ने इस दौरान फिल्म सिटी को लेकर सभी की राय जानी और सभी को काफी ध्यान से सुना। अनुपम श्याम ओझा ने इसके लिए भी सीएम को धन्यवाद दिया है।

अलकायदा का 10वां आतंकी शमीम अंसारी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार, पाकिस्तान से था लगातार संपर्क में

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) और पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने शनिवार (26 सितंबर 2020) को अलकायदा के आतंकवादी शमीम अंसारी को गिरफ्तार किया। शमीम अंसारी को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से गिरफ्तार किया गया। ख़बरों में यह बात सामने आई है कि वह पाकिस्तान से लगातार संपर्क में था और राजधानी समेत कई अन्य इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। 

शमीम मुर्शिदाबाद स्थित जलंगी पुलिस थाने के अंतर्गत नंदपारा कालीगंज का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद उसे मुर्शिदाबाद सीजेएम के सामने पेश किया गया और उसके बाद ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है। ख़बरों की मानें तो इसके बाद उसे दिल्ली की एनआईए अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उससे आतंकी गतिविधों से संबंधित अन्य मामलों पर विस्तार से पूछताछ की जाएगी। 

अभी तक हुई पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि शमीम अंसारी अलकायदा मोड्यूल का दसवां आतंकवादी है। इसके पहले एनआईए ने केरल के एर्नाकुलम जिले और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से 19 सितंबर को कुल 9 आतंकवादी गिरफ्तार किए थे।

ख़बरों की मानें तो यह सारे आतंकवादी पाकिस्तान से लगातार संपर्क में थे। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए आतंकवादी नई दिल्ली समेत देश के कई सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे। 

एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक़ आतंकवादियों पास भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। इसमें विस्फोटक बनाने की सामग्री, स्वदेशी आग्नेयास्त्र, शरीर कवच, जिहादी साहित्य और हथियार शामिल हैं। इस घटना पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसटीएफ) विनीत गोयल ने भी जानकारी दी।

उन्होंने कहा, “एनआईए और एसटीएफ की टीम कई दिन से इस अभियान में लगी हुई थी। दोनों ने मिल कर शमीम अंसारी (25) को गिरफ्तार किया है। एनआईए की टीम इस पूरे मामले में शमीम से आगे की पूछताछ करेगी। शमीम अलकायदा के आतंकवादी इआई मैमून से लगातार संपर्क में था। उसे हाल ही में गिरफ्तार किया गया था।”

ख़बरों के मुताबिक़ शमीम ने केरल में दो साल बतौर निर्माण मजदूर भी काम किया था। एक साल पहले वह अपने गाँव लौट कर चला आया था। गाँव में उसकी पत्नी और उसका परिवार भी साथ रहता था।         

पंचतंत्र और कताकालक्षेवम् का देश है भारत, कहानी कहने-सुनने के लिए समय निकालें: ‘मन की बात’ में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (सितम्बर 27, 2020) को ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया अभी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, वहीं संकट काल में लोग परिवार के साथ मिल कर काम भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधाएँ बनाई थीं, वो आज कितनी महत्वपूर्ण हैं – ये अब पता चल रहा है। इस विधा के अंतर्गत उन्होंने ‘कहानी सुनाने की कला (Story Telling)’ का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हर परिवार में कोई-न-कोई बुजुर्ग, बड़े व्यक्ति परिवार के, कहानियाँ सुनाया करते थे और घर में नई प्रेरणा, नई ऊर्जा भर देते थे। हमें ज़रूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधायें बनाई थी, वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी ही एक विधा है, कहानी सुनाने की कला, अर्थात स्टोरी टेलिंग। पीएम मोदी ने कहा कि कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी मानव सभ्यता।

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने बताया कि कहानियाँ, लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई माँ अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिलाने के लिए कहानी सुना रही होती है, तब देखें। उन्होंने बताया कि उनके जीवन में बहुत लम्बे अरसे तक एक परिव्राजक (घुमन्तु) के रूप में रहे। घुमंत ही उनकी जिंदगी थी। हर दिन नया गाँव, नए लोग, नए परिवार, लेकिन, जब मैं परिवारों में जाता था, तो वो बच्चों से ज़रूर बात किया करते थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो कभी-कभी बच्चों को कहते थे कि चलो भाई, मुझे कोई कहानी सुनाओ। वो तब हैरान हो जाते थे, जब बच्चे उनसे कहते थे कि नहीं अंकल, कहानी नहीं, हम चुटकुला सुनाएँगे और उन्हें भी, वो यही कहते थे कि अंकल आप हमें चुटकुला सुनाओ। बकौल पीएम मोदी, उन बच्चों का कहानी से कोई परिचय ही नहीं था। उनमें से ज्यादातर, उनकी जिंदगी चुटकुलों में समाहित हो गई थी।

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत में कहानी कहने की, या कहें किस्सा-गोई की, एक समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने इसे गर्व की बात बताते हुए कहा कि हम उस देश के वासी है, जहाँ, हितोपदेश और पंचतंत्र की परंपरा रही है, जहाँ, कहानियों में पशु-पक्षियों और परियों की काल्पनिक दुनिया गढ़ी गई, ताकि विवेक और बुद्धिमता की बातों को आसानी से समझाया जा सके। हमारे यहाँ कथा की परंपरा रही है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि ये धार्मिक कहानियाँ कहने की प्राचीन पद्धति है। इसमें ‘कताकालक्षेवम्’ भी शामिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि हमारे यहाँ तरह-तरह की लोक-कथाएँ प्रचलित हैं। तमिलनाडु और केरल में कहानी सुनाने की बहुत ही रोचक पद्धति है, जिसे ‘विल्लू पाट्’ कहा जाता है। इसमें कहानी और संगीत का बहुत ही आकर्षक सामंजस्य होता है। पीएम मोदी ने भारत में कठपुतली की जीवन्त परम्परा की भी चर्चा की। इन दिनों विज्ञान और ‘साइंस फिक्शन’ से जुड़ी कहानियाँ एवं कहानी कहने की विधा लोकप्रिय हो रही है। 

पीएम मोदी ने बताया कि उन्हें ‘gaathastory.in‘ जैसी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिली, जिसे, अमर व्यास, बाकी लोगों के साथ मिलकर चलाते हैं। अमर व्यास, IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद विदेश चले गए, फिर वापस आए। इस समय बेंगलुरु में रहते हैं और समय निकालकर कहानियों से जुड़ा, इस प्रकार का, रोचक कार्य कर रहे है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि कई ऐसे प्रयास भी हैं, जो ग्रामीण भारत की कहानियों को खूब प्रचलित कर रहे हैं। वैशाली व्यवहारे देशपांडे जैसे कई लोग हैं, जो इसे मराठी में भी लोकप्रिय बना रहे हैं।

उन्होंने इस दौरान ‘स्टोरी टेलिंग सोसाइटी’ की अपर्णा ऐतरेय और शैलजा पंत के साथ फोन कॉल पर भी बातचीत की। इस दौरान अपर्णा ने एक कहानी भी सुनाई, जो तेनालीरामन से सम्बंधित थी। पीएम ने लोगो से अपील की कि सभी परिवार में, हर सप्ताह, कहानियों के लिए कुछ समय निकालिए, और ये भी कर सकते हैं कि परिवार के हर सदस्य को, हर सप्ताह के लिए, एक विषय तय करें, जैसे, करुणा है, संवेदनशीलता है, पराक्रम है, त्याग है, शौर्य है – कोई एक भाव और परिवार के सभी सदस्य, उस सप्ताह, एक ही विषय पर, सब के सब लोग कहानी ढूँढेंगे और परिवार के सब मिल करके एक-एक कहानी कहेंगे। पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा:

“एक-सौ-एक साल पुरानी बात है। 1919 का साल था। अंग्रेजी हुकूमत ने जलियाँवाला बाग़ में निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया था। इस नरसंहार के बाद एक बारह साल का लड़का उस घटनास्थल पर गया। वह खुशमिज़ाज और चंचल बालक, लेकिन, उसने जलिययाँवाला बाग में जो देखा, वह उसकी सोच के परे था। वह स्तब्ध था, यह सोचकर कि कोई भी इतना निर्दयी कैसे हो सकता है। वह मासूम गुस्से की आग में जलने लगा था। उसी जलियाँवाला बाग़ में उसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ लड़ने की कसम खाई। क्या आपको पता चला कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ? हाँ! मैं, शहीद वीर भगत सिंह की बात कर रहा हूँ। कल, 28 सितम्बर को हम शहीद वीर भगत सिंह की जयन्ती मनाएँगे। मैं, समस्त देशवासियों के साथ साहस और वीरता की प्रतिमूर्ति शहीद वीर भगत सिंह को नमन करता हूँ। क्या आप कल्पना कर सकते हैं, एक हुकूमत, जिसका दुनिया के इतने बड़े हिस्से पर शासन था, इसके बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। इतनी ताकतवर हुकूमत, एक 23 साल के युवक से भयभीत हो गई थी। शहीद भगत सिंह पराक्रमी होने के साथ-साथ विद्वान भी थे, चिन्तक थे। अपने जीवन की चिंता किए बगैर भगत सिंह और उनके क्रांतिवीर साथियों ने ऐसे साहसिक कार्यों को अंजाम दिया, जिनका देश की आज़ादी में बहुत बड़ा योगदान रहा। शहीद वीर भगत सिंह के जीवन का एक और खूबसूरत पहलू यह है कि वे टीम वर्क के महत्व को बख़ूबी समझते थे। लाला लाजपत राय के प्रति उनका समर्पण हो या फिर चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु समेत क्रांतिकारियों के साथ उनका जुड़ाव, उनके लिए, कभी व्यक्तिगत गौरव, महत्वपूर्ण नहीं रहा।”

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में भारत रत्न नानाजी देशमुख को भी याद किया, जिनकी जयंती भी, 11 तारीख को ही है। उन्होंने बताया कि नानाजी देशमुख, जय प्रकाश नारायण जी के बहुत निकट साथी थे। जब जेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जंग लड़ रहे थे, तो, पटना में उन पर प्राणघातक हमला किया गया था। तब, नानाजी देशमुख ने वो वार अपने ऊपर ले लिया था। इस हमले में नानाजी को काफ़ी चोट आई थी, लेकिन, वो जेपी का जीवन बचाने में कामयाब रहे थे।

पीएम मोदी ने कहा कि इस 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की भी जयंती है, उन्होंने, अपना पूरा जीवन, लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि वो एक राज परिवार से थीं, उनके पास संपत्ति, शक्ति, और दूसरे संसाधनों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन, फिर भी उन्होंने अपना जीवन, एक माँ की तरह, वात्सल्य भाव से, जन-सेवा के लिए खपा दिया। उन्होंने कहा कि राजमाता का ह्रदय बहुत उदार था। इससे पहले ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में डिजिटल गेम्स बनाने पर जोर दिया था।

चुनाव से पहले संकट में बिहार कॉन्ग्रेस: अध्यक्ष समेत 107 नेताओं पर FIR, तेजस्वी यादव को अलग गठबंधन में जाने की धमकी

बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान के बाद आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का पहला मामला भी आ गया है। ये मामला पटना के एयरपोर्ट थाने में दर्ज किया गया। इसमें कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा समेत 7 नामजद और 100 अज्ञात कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने राजद को भी सीट शेयरिंग का मसला जल्द तय कर के बिहार चुनाव में उतरने के लिए अल्टीमेटम दिया है।

पटना में कॉन्ग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ एयरपोर्ट के बाहरी परिसर में 100 से अधिक लोगों की भीड़ जुटाने, जुलूस निकालने, नारेबाजी करने, धारा-144 का उल्लंघन और कोरोना के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। मदन मोहन झा के अलावा कांग्रेस स्क्रीनिंग कमिटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय, बिहार प्रभारी अजय कपूर, सचिव देवेंद्र यादव, मो. निजामुद्दीन, अखिलेश सिंह और दीपक नेगी नामजद आरोपित हैं।

‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, इन सभी आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 तथा महामारी एक्ट 1897 के अलावा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जा रही है। एयरपोर्ट थानाधिकारी अरुण कुमार ने जानकारी दी है कि शनिवार (सितम्बर 26, 2020) को सुबह 11 बजे प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष एयरपोर्ट पर उतरे, जहाँ जमा भीड़ फूल-मालाओं से उनका स्वागत करने के बाद जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ी।

मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम खुद दल-बल के साथ एयरपोर्ट पहुँचे। उन्होंने एयरपोर्ट पर सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा भी लिया। डीएम ने एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना का दिशा-निर्देश पालन कराने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कहीं से भी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। साथ ही धारा-144 का भी उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इसके बाद वहाँ सुरक्षा भी चुस्त कर दी गई है।

इधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने राजद के तेजस्वी यादव का नेतृत्व तो स्वीकार कर लिया है लेकिन पार्टी का कहना है कि सीट शेयरिंग के मामले में अब सालों से चले आ रहे फॉर्मूले को हटा कर उसे कुछ फायदा मिलना चाहिए। कॉन्ग्रेस ने राजद को 75 सीटों की सूची भी सौंप दी है और उन सभी पर अपने उम्मीदवार उतारने की वकालत की है। मुद्दा संख्या नहीं है बल्कि कुछ ऐसी खास सीटें हैं, जिन पर कॉन्ग्रेस दावा ठोक रही है।

राजद को लगता है कि कॉन्ग्रेस द्वारा माँगी गई कुछ ऐसी सीटें भी हैं, जहाँ राजद काफी मजबूत है और वहाँ जीत भी सकता है। वहीं कॉन्ग्रेस का मानना है कि अगर उसे राजद की मजबूती से फायदा नहीं मिलता है तो फिर गठबंधन का क्या फायदा? कॉन्ग्रेस ने माँगें न मानी जाने पर अलग गठबंधन में जाने की धमकी दी है। सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकिन अंतिम नतीजे पर पहुँचने के लिए सितम्बर के अंत तक का समय तय किया गया है।

उधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने रालोसपा, मुकेश साहनी की वीआईपी, यशवंत सिन्हा और एनसीपी के साथ बातचीत शुरू कर दी है। एक और ध्यान देने वाले बात ये भी है कि अभी तक कॉन्ग्रेस-राजद का कोई साझा बयान भी जारी नहीं किया है। अब देखना ये है कि राजद ही उन सीटों को छोड़ता है या कॉन्ग्रेस समझौता करेगी। राजद को ये भी डर है कि कॉन्ग्रेस को ज्यादा सीटें देने पर महागठबंधन के बाकी दल भी ऐसी माँगें कर सकते हैं।

उधर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने इशारा कर दिया कि वो महागठबंधन से अलग होंगे। वहीं राजग से भाव न मिलने के बाद वो कह रहे हैं कि अगर राजद में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो वो पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो सकते हैं। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने यहाँ तक कह डाला कि राजग में जिन लोगों को दुत्कारा गया, उन्हें राजद ने सम्मान दिया, आज वही लोग तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे।

UP पुलिस ने अपने ही सिपाही सेराज को किया अरेस्ट, मुख्तार अंसारी के करीबी अपने भाई मेराज को दिलवाया था शस्त्र

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाहुबलियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। ताज़ा मामले में योगी सरकार ने मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के नज़दीकियों पर कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश पुलिस थाने की फर्जी मुहर तैयार करके शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण करने के आरोपित मेराज अहमद को खोज रही है। उसकी तलाश में पुलिस ने शनिवार (26 सितंबर 2020) को उसके भाई सेराज अहमद को गिरफ्तार किया। 

सेराज अहमद प्रयागराज के सरायनाइक थाने में बतौर सिपाही तैनात है। पुलिस ने 5 सितंबर 2020 की रात जैतपुरा थाने (वाराणसी) में मेराज के विरुद्ध शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज किया था। इसके बाद से ही मुख्तार अंसारी का सहयोगी और हिस्ट्रीशीटर मेराज फरार चल रहा है। इस मुद्दे पर जैतपुरा थाने के इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने मीडिया वालों से बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने कहा, “अदालत की तरफ से आदेश जारी होने के बाद मेराज के दो घरों पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। पहला घर वाराणसी के अशोक विहार कॉलोनी फेज़ वन में स्थित है और दूसरा गाजीपुर के करीमुद्दीन थाना अंतर्गत महेन गाँव में स्थित है।” इसके बाद उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस मेराज को गिरफ्तार करने के लिए लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर सहित अन्य इलाकों में दबिश दे रही है। 

वहीं गिरफ्तार किए गए सिपाही सेराज पर आरोप था कि उसने फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण मामले में मेराज अहमद का सहयोग किया था। जिसके बाद पुलिस ने अशोक विहार फेज़ 1 स्थित घर पर दबिश दी और वहाँ से सेराज को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस को सूचना मिली थी कि सेराज वहीं पर मौजूद था, जिसके बाद पुलिस ने वहाँ की घेराबंदी की। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की सूचना प्रयागराज पुलिस को दे दी है, जहाँ वह बतौर सिपाही तैनात था। फिलहाल पुलिस मेराज अहमद की तलाश में लगी हुई है।     

बेहोश कर पति शादाब के गुप्तांग पर डालती थी Harpic, वसीम के साथ मनाती थी रंगरेलियाँ: आरोपित चाँदनी हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित टीपे नगर थाना क्षेत्र से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ प्रेमी के चक्कर में एक महिला ने अपने पति के ही गुप्तांग पर टॉयलेट क्लीनर डाल कर जला डाला। वहीं क्षेत्रवासियों ने उस महिला को एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक अवस्था में धर लिया। महिला ने अपने प्रेमी के साथ रंगरेलियाँ मनाने के लिए अपने पति और तीनों बच्चों को बेहोश कर के एक कमरे में डाल दिया था।

महिला ने अपने पूरे परिवार को ही नशीली गोलियाँ दे डाली थी। अस्पताल में होश में आने के बाद पति ने आरोप लगाया कि वो आए दिन उन लोगों को नशीली गोलियाँ देकर अपने प्रेमी के साथ मिलती थी। पति ने कहा कि उसके गुप्तांग पर हार्पिक डाल कर उसे जला दिया, जिससे वो ‘बर्बाद’ हो गया है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। मलियाना निवासी पीड़ित का नाम शादाब है और आरोपित पत्नी का नाम चाँदनी है।

‘नवभारत टाइम्स’ में प्रकाशित सुधाकर सिंह की खबर के अनुसार, शादाब ने बताया कि डॉक्टर वसीम उसका परिचित है, जो आए दिन उसके घर आता-जाता रहता है। उसने बताया कि सरधना निवासी वसीम जब भी आता था तो साथ में अपने साथ बिरयानी और मिठाई लाता था। इसे खाने के बाद शादाब और उसकी तीनों बेटियाँ बेसुध होकर सो जाया करते थे। उसने आरोप लगाया कि इसके बाद चाँदनी और डॉक्टर वसीम घर में बेफिक्र होकर रंगरेलियाँ मनाते थे।

शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) की शाम भी डॉक्टर वसीम खाने-पीने की चीजें लेकर शादाब के घर पहुँचा था। इसमें बेहोशी की दवा मिला दी गई थी, जिससे परिवार के सभी लोग बेसुध होकर सो गए। फिर वो रात को वापस शादाब के घर में घुस रहा था, तभी ग्रामीणों ने उसे देख कर चोर समझा और शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोगों की इसकी जानकारी दी गई। जैसे ही लोग चोर-चोर का शोर मचाते हुए शादाब के घर में घुसे, चाँदनी ने डॉक्टर वसीम को टॉयलेट में बंद कर दिया।

इधर चांदनी चाकू लेकर अपने हाथ की नस काट डालने की धमकी देने लगी। जब लोगों ने उसे पकड़ा लिया, तो डॉक्टर वसीम भाग खड़ा हुआ। ग्रामीणों की तलाशी के बाद दूसरे कमरे में चाँदनी के पति व बच्चियों को बेसुध पाया गया। शादाब ने बताया कि उसे पहले से शक था कि चाँदनी परिवार को नशे की गोलियाँ देकर अपने प्रेमी से मिलती है। हालाँकि, गुप्तांग वाली साजिश का उसे अंदाज़ा नहीं था।

दरअसल, अपने पति शादाब को बेहोश करने के बाद उसकी पत्नी चाँदनी उसके गुप्तांग पर हार्पिक जैसी कोई चीज डाला करती थी। जिससे उसके गुप्तांग पर बड़े-बड़े जख्म हो गए थे। वह इसका त्वचा रोग समझ कर इलाज करा रहा था। उसने पूरे मामले का खुलासा होने के बाद थाने में अपनी बीवी के खिलाफ तहरीर दी है। आरोपित महिला को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। प्रेमी के साथ मिल कर पति का गुप्तांग जलाने के मामले में महिला से पूछताछ जारी है।