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दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट, OpIndia के हाथ आए एक्सक्लुसिव सबूत से समझिए क्या हुआ 24 फरवरी को

दिल्ली में हुआ हिंदू विरोधी दंगा स्वतःस्फूर्त नहीं था। इसके लिए साजिश रची गई थी। यह साजिश रची गई थी सड़क पर, घरों में हुए मीटिंग में और डिजिटल मीडियम में भी। ऑपइंडिया को इन दंगों की प्लानिंग को लेकर वॉट्सऐप ग्रुप का एक चैट सबूत कै तौर पर हाथ लगा है।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट-1

विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त इन दो वॉट्सऐप चैट को देख कर यह स्पष्ट है कि दंगों की प्लानिंग की गई थी। स्पष्ट यह भी है कि इसी ग्रुप में कुछ लोग हिंसा और दंगों की प्लानिंग को लेकर नाराज थे और लोगों को समझाने की कोशिश भी कर रहे थे।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट-2

पहले ऊपर के दो स्क्रीनशॉट को देखिए। यह 24 फरवरी 2020 की बातचीत है। इसमें अतहर युसूफजाई नाम का आदमी पहले कह रहा है, “नूर-ए-इलाही एरिया में बुरी तरह दंगा भड़क चुका है, दंगाई बसों में भरकर लोनी और पड़ोस के क्षेत्रों से लाए गए हैं। ‘क्या सभी सोच रहे है कि यह आइडिया (हिंसा का) सही है?’ ‘मुझे नहीं लगता है।” आगे अतहर मैसेज में कह रहा है, “CAA-समर्थक ग्रुप और पुलिस काफी सख्ती दिखा रही है, इसलिए बड़ा नुकसान हो सकता है।”

इसके बाद अनस तनवीर नाम का आदमी भी हिंसा की प्लानिंग को लेकर ग्रुप के अन्य लोगों को समझा रहा है। प्रोटेस्ट और हिंसा की प्लानिंग को लेकर वो एक तरह से लोगों को जगजाहिर कर धमकी भी दे रहा है। पुलिस मुख्यालय को घेरने की बात पर भी अनस तनवीर ने दिल्ली में रेड अलर्ट होने का तर्क देते हुए इसे बढ़िया आइडिया नहीं बताया। अनस की बात पर सहमति जताते हुए चिराग पटनायक ने भी हामी भरी है।

24 फरवरी से पहले वॉट्सऐप ग्रुप में क्या?

24 को हिंसा नहीं करने, हिंसा की प्लानिंग करने वालों को उजागर करने की बात होती है। इसका अर्थ क्या है? स्पष्ट है कि इससे पहले इसी ग्रुप में हिंसा की योजना बनाई गई होगी। जो इससे सहमत होंगे, वो खुश होंगे। जो असहमत रहे होंगे, उनके स्क्रीनशॉट बाहर आ रहे हैं।

दिल्ली दंगों में हिंसा की प्लानिंग इससे पहले भी इन्हीं ग्रुपों में से बाहर आ चुका है। ओवैस सुल्तान खान (Owais Sultan Khan) की एक पोस्ट के मुताबिक, पिंजरा तोड़ की लड़कियों ने वहाँ का महिलाओं को भड़काया कि वो सड़क जाम कर दें। खान ने यह भी लिखा कि वो इसके पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इन लड़कियों ने पहले भी दरियागंज में मजहब विशेष की महिलाओं को विरोध में आगे कर दिया, पुलिस से लड़ गईं और फरार हो गईं, जिस कारण वहाँ की महिलाओं को पुलिस उठा कर ले गई।

ओवैस खान का फेसबुक पोस्ट

इन लड़कियों के समूह को अभिजात्य वर्ग का बताते हुए ओवैस खान ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि इनकी फंतासियों के चक्कर में सीलमपुर और ट्रांस-यमुना का इलाका काफी तनावपूर्ण स्थिति में है। ध्यान रहे कि दंगों की पूरी तैयारी इस समय हो चुकी थी और इन इलाकों में अगले दिन व्यवस्थित तरीके से आगजनी, हत्या और रक्तपात होना तय था।

इसी तरह के एक अन्य चैट में ओवेस सुल्तान खान का मैसेज पढ़कर यही समझ आ रहा है कि ओवेस लगातार साजिशकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं थी।

उक्त अनस तनवीर के बारे में हमारे सूत्र ने बताया कि वह एक वकील है जो कि CAA विरोधी आंदोलनों में आंदोलनकारियों को बचाने में, उन्हें कानूनी सहायता देने में अग्रणी रहा है। यहाँ पर, जब उसे लग गया कि दंगाइयों की योजना बड़ी है, और शायद नियंत्रण से बाहर जा सकती है तब वह बगुला भगत बनने की कोशिश करता पाया गया। यही बात उसके चैट्स में मौजूद है।

ऑपइंडिया लगातार ऐसे सबूत इकट्ठा कर रहा है ताकि लोगों को पता चले कि लाशों की संख्या गिनने वाले लोग सतही तौर पर भले ही हिन्दुओं और दिल्ली पुलिस के ऊपर यह दंगा थोप दें, लेकिन जिस तरह की गहन योजना बन रही थी, वह बताती है कि दंगे पूर्वनियोजित ही नहीं, बल्कि वृहद तौर पर प्लान किए गए थे।

जैसा कि कई चार्जशीटों में खुलासा हुआ है, कि दंगों की प्लानिंग लगातार अलग-अलग जगहों पर चल रही थी। ताहिर हुसैन की चार्जशीट में 8 जनवरी 2020 को उमर खालिद और खालिद सैफी से बातचीत का जिक्र है। उसी तरह भजनपुरा में रतनलाल जी की हत्या वाली चार्जशीट में चाँद बाग वाली मीटिॉग का जिक्र है। हम चार्जशीट पढ़ते जा रहे हैं और पता चलता जा रहा है कि प्लानिंग कई स्तर पर, सटीक और क्लिनिकल तरीके से चल रही थी।

लेकिन, इन स्क्रीनशॉट्स से यह पता चलता है कि वास्तव में ये लोग दंगा करने के लिए आतुर थे और जमीनी मीटिंग से ले कर डिजिटल तक, इनके ग्रुप में बस यही बात चल रही थी कि कैसे दंगे कराने हैं, कैसे पुलिस पर ही ब्लेम डालना है और कैसे लोकल लोगों का उपयोग कर के कुछ लोगों की राजनैतिक, मजहबी और वैचारिक घृणा को अंजाम तक पहुँचाना है। उन्हें यह भी पता होगा कि इस हिंसा में लाशें गिरेंगी। कुछ लोग सँभल गए जब उन्हें इसके विस्तार का पता चला, लेकिन कुछ नासमझ और मजहबी उन्माद से ग्रस्त दंगाई नहीं रुके क्योंकि उन्हें लगा था कि वो दिल्ली में आग लगा कर सत्ता पलट देंगे।

भला हो दिल्ली पुलिस का जिसने समय रहते इन पर काबू पा लिया, वरना यह दंगा क्या रूप लेता, और इसकी विभीषिका कितनों को लील जाती, शायद हम कल्पना नहीं कर सकते।

टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियाँ देती हैं ऑफर, पार्टियों में ट्रे में लेकर घूमते हैं ड्रग्स: मुकेश खन्ना और शिल्पा शिंदे ने किए कई चौकाने वाले खुलासे

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जब से बॉलीवुड और ड्रग्स कनेक्शन का खुलासा किया है तभी से कई सेलेब्रेटी आमने-सामने आ गए हैं। इसी कड़ी में शक्तिमान फेम मुकेश खन्ना और बिगबॉस फेम शिल्पा सिंदे ने ड्रग्स माफियाओं पर खुलकर अपनी राय दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश खन्ना ने युवाओं द्वारा ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर कहा, “न्यू जनरेशन कूल दिखने के लिए ‘ड्रग्स का सेवन’ करते हैं।” बॉलीवुड में ड्रग्स पार्टियों का जिक्र करते उन्होंने बताया, ”मैं कभी उन पार्टियों में गया तो नहीं हूँ लेकिन लोग कहते हैं कि ‘कभी-कभी पार्टियों में ट्रे लेकर घूमते है’ और पूछते हैं कि आपको कौन सा ड्रग्स चाहिए।”

ड्रग्स माफिया गैंग पर खुलासा करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ये 2-4 लोगों का खेल नहीं है, बॉलीवुड में ग्रुप बने हुए है, आज कल पार्टियों में खाना देना बड़ी बात नहीं है, बल्कि बड़ी बात है कौन सा ड्रग्स देते है। कभी-कभी पार्टियों में ट्रे लेकर घूमते है कि आपको कौन सा ड्रग्स चाहिए। ईमानदारी से जाँच हो, ये हमारे यूथ को इफेक्ट कर रहे हैं। इसे छिपाना नहीं जाना चाहिए। आर्टिस्ट को सोचना चाहिए, ये बहुत कड़वी दवाई है।”

मुकेश खन्ना ने आगे कहा, ”शाहरुख ने एक बार कहा था कि हम मसीहा नहीं है, मैं होता तो कहता कि शाहरुख आप मसीहा हो, आपको लोग मानते है फॉलो करते है, लोग गुलशन को नहीं लेकिन शक्तिमान को फॉलो करते है। लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।”

वहीं इस मामले पर पॉपुलर टीवी एक्ट्रेस शिल्पा सिंदे ने टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों और ड्रग्स में उनके रोल को लेकर चौकाने वाली बात कही है। टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में शिल्पा शिंदे ने बताया कि टैलंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ जब किसी आर्टिस्ट को देश के बाहर ले जाती हैं तो उसकी हर जरूरत का ख्याल रखती हैं और क्लाइंट भी उन्हें जॉइन करने से पहले मिलने वाली ‘सुविधाओं’ के बारे में पूछते हैं। शिल्पा ने यह दावा भी किया कि अगर क्लाइंट की डिमांड पूरी न की जाए तो फिर वे किसी और मैनेजमेंट कंपनी के पास चले जाने की बात कहते हैं।

शिल्पा ने कहा, “टैलंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ जब किसी आर्टिस्ट के पास जाती हैं तो आर्टिस्ट पूछता है कि आप मुझे क्या सुविधाएँ दोगे। लेकिन यह पर्सन टु पर्सन पर डिपेंड करता है। ऐसा नहीं है कि कंपनी बोलेगी कि आपको ये-ये चीजें मिलेंगी। वह एक पर्सन की डिमांड पर निर्भर करता है कि डिमांड क्या है। मैं मैनेजिंग कंपनियों को इसके लिए ब्लेम नहीं करना चाहती। अब क्वॉन वाला तो बाहर आ गया है। पर सिर्फ क्वॉन ही नहीं है ना और भी कई मैनेजमेंट कम्पनियाँ हैं जो आर्टिस्ट को अगर इंडिया के बाहर कहीं लेकर जाती हैं तो उन्हें आर्टिस्ट का ख्याल रखना होता।”

उन्होंने खुद इस बात को उजागर किया उन्होंने कई यंग एक्टर्स को गैरकानूनी काम करते हुए देखा है, बॉलीवुड में ऐसा माहौल ही होता है कि हो सकता है लोग वहाँ के लोगों के साथ में आकर वे ड्रग्स का सेवन करने लगते है।

‘ऑपरेशन दुराचारी’ के तहत यौन अपराधियों के सरेआम चौराहों पर लगेंगे पोस्टर: महिला सुरक्षा पर सख्त हुई योगी सरकार

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज (24 सितंबर, 2020) निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं, लड़कियों और बच्चियों से छेड़खानी, दुर्व्यवहार, अपराध, यौन अपराध करने वालों के पोस्टर सरेआम चौराहों पर लगाए जाएँ। सरकार ने इसका नाम ‘ऑपरेशन दुराचारी’ रखा है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिलाओं से किसी भी तरह का अपराध करने वालों को महिला पुलिसकर्मियों से दंडित करवाया जाए साथ ही उनका नाम सार्वजनिक किया जाए।

महिलाओं या बच्चियों के साथ अपराध करने वाले आदतन अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर के बारे में समाज को जानना चाहिए, इसलिए उनके पोस्टर चौराहों-सड़को-दीवारों पर लगाए जाएँ। ताकि उनका समाज से बहिष्कार हो सके। साथ ही सीएम ने ऐसे अपराधियों और दुराचारियों की मदद करने वालों के नाम उजागर करने के भी निर्देश दिए हैं। ऐसा करने से उनके मददगारों में भी बदनामी का डर पैदा होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बलात्कारियों में उन्हीं के नाम का पोस्टर छपेगा जिन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया जाएगा। मिशन दुराचारी के तहत महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मा दिया जाएगा। महिला पुलिस शहर के चौराहों पर नजर रखेगी। इसके अलावा सीएम ने यह भी निर्देश दिया है कि महिलाओं या बच्चियों के साथ किसी भी प्रकार का दुराचार होता है तो इसकी जवाबदेही के लिए संबंधित बीट इंचार्ज, चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और सीओ जिम्मेदार होंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरेराह छेड़खानी करने वाले शोहदों और आदतन दुराचारी के खिलाफ सख्ती से पेश आया जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में महिला अपराध के कई मामले सामने आने के बाद सीएम योगी ने ये फैसला लिया है। ताकि अपराधियों में डर पैदा किया जा सके।

गौरतलब है कि इससे पहले योगी सरकार सीएए के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन करने वालों के पोस्टर भी लखनऊ में लगवाए थे। पिछले साल 19 दिसंबर को लखनऊ के कई स्थानों पर उपद्रवियों ने सीएए विरोध के नाम पर हिंसा की थी, जिसमें करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था। हिंसा में शामिल 57 लोगों के नाम और पते के साथ लखनऊ शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर कुल 100 होर्डिंग्स लगाए गए थे। प्रशासन ने इससे पहले आरोपितों पर 1.55 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी किया है, जिसके तहत 8 अप्रैल तक जुर्माने की रकम को जमा करवाना था।

भड़काऊ भाषण के लिए गए थे कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, कविता कृष्णन: दिल्ली दंगो पर चार्जशीट में आरोपित ने किया बड़ा खुलासा

दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कई बड़े नेताओं का नाम सामने आया है। इसमें कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, सीपीआई – एमएल पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन, छात्र नेता कवलप्रीत कौर, वैज्ञानिक गौहर रज़ा और प्रशांत भूषण का नाम शामिल है। दिल्ली पुलिस ने बेहद स्पष्ट तौर पर इन लोगों को दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोपित बताया है।

दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित खालिद सैफी और पूर्व कॉन्ग्रेस पार्षद इशरत जहाँ द्वारा दिए गए बयान के आधार पर खुर्शीद को आरोपित बनाया गया है। सैफी ने 30 मार्च को दिए गए अपने बयान में कहा था, “प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रखने के लिए मैंने और इशरत ने कई लोगों को बुलाया था जिसमें एक व्यक्ति सलमान खुर्शीद भी थे। इन सभी को वहाँ पर भड़काऊ भाषण देने के लिए बुलाया गया था। जितने भी लोग धरने पर बैठे रहते थे वह सिर्फ और सिर्फ भड़काऊ भाषणों के लिए बैठते थे। इन भाषणों की मदद से ही वह अपने मज़हब को आधार बना कर प्रदर्शन जारी रखने वाले थे।”

सुरक्षा में रखे गए एक चश्मदीद ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था (जिसे सीआरपीसी की धारा 164 के आधार पर तैयार किया गया था)। उसने भी अपने बयान में सलमान खुर्शीद का ज़िक्र किया था और उनके द्वारा दिए भड़काऊ भाषणों के बारे में भी बताया। 

सलमान खुर्शीद ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “अगर आप सब कुछ समेटने जाएँगे तो पूरी चार्जशीट लगभग 17 हज़ार पन्नों की है। एक चार्जशीट विश्वसनीय और प्रभावशाली होनी चाहिए क्योंकि वह किसी अपराध का पुख्ता सबूत होती है। अगर कोई ऐसा कहता है कि 12 लोगों ने आकर भड़काऊ भाषण दिया तो ऐसा संभव नहीं है कि सभी ने एक तरह के भड़काऊ भाषण दिए। उकसावा और लामबंदी हमारे देश में आपराधिक गतिविधि नहीं है।”    

वहीं वैज्ञानिक रज़ा का नाम खुरेजी क्षेत्र के नज़दीक मुस्लिम भीड़ को भड़काने के आरोप में सामने आया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चश्मदीद ने बताया, “रज़ा ने कई अन्य लोगों के साथ मिल कर सीएए और एनआरसी को लेकर कई आपत्तिजनक बातें कहीं। इसके अलावा उन्होंने वर्तमान सरकार को लेकर भी कई गलत बातें कहीं और मुस्लिमों को जम कर भड़काया।”

इन आरोपों पर रज़ा ने कहा था, “मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूँ, मैंने सीएए के विरोध में कुछ भी गलत नहीं कहा। मैं हमेशा इसका विरोध करता रहूँगा क्योंकि यह संविधान पर हमला है। मैंने हमेशा हिंसा का विरोध किया है इसलिए भड़काने का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।” 

इनके अलावा सैफी और इशरत के बयान पर प्रशांत भूषण का नाम भी सामने आया था। प्रशांत भूषण पर भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने खुरेजी क्षेत्र में भड़काऊ भाषण दिया था। इस पर प्रशांत भूषण ने कहा था, “मैं कई जगहों पर गया था और विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। लेकिन मैंने इस तरह का कोई भाषण नहीं दिया था जो लोगों में हिंसा की भावना को बढ़ावा देता हो। हाँ मैंने सरकार के विरोध में बहुत कुछ कहा था और उससे वह भड़क गए तो इसके लिए कुछ नहीं किया जा सकता।” 

25 मई को दिए गए बयान में सैफी ने कवलप्रीत कौर का नाम भी लिया था। उसने यह भी बताया कि वह काफी समय से कौर के संपर्क में था। बयान के मुताबिक़ कौर ने कई लोगों के साथ मिल कर योजना बनाई थी कि वह ट्विटर पर भड़काऊ बातें साझा करेंगे जिससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत हों और वह सरकार के विरुद्ध सड़कों पर उतरें। 

दिल्ली दंगों के कुल 15 आरोपितों में शादाब अहमद ने 27 मई को एक बयान दिया था। उस बयान में कुल 38 लोगों का नाम मौजूद था। इन नामों में मुख्य रूप से कृष्णन, कौर, उमर खालिद के पिता एसक्यूआर इलियास शामिल थे जिन्होंने चाँद बाग़ में भड़काऊ भाषण दिए थे। ख़बरों के मुताबिक़ इसके पहले सीपीआई के जनरल सेक्रेटी सीताराम येचुरी, स्वराज्य इंडिया के मुखिया योगेंद्र यादव, जयती घोष, प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद और फिल्म निर्माता राहुल रॉय जैसे लोगों का नाम भी दिल्ली पुलिस की पूरक चार्जशीट में शामिल है। 

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता अनिल मित्तल ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति को सिर्फ गवाही के आधार पर आरोपित नहीं बना दिया जाता है। हमारे पास लगाए गए आरोपों के अतिरिक्त तमाम ऐसे सबूत हैं जिनके आधार पर हम अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।” 

‘क्रिकेटरों की बीवियों को लेते देखा है ड्रग्स’- शर्लिन चोपड़ा का दावा, बॉलीवुड के बाद अब IPL पार्टी में ड्रग्स का खुलासा

बॉलीवुड और ड्रग्स के बीच संबंधों को लेकर जाँच अभी तक जारी है, रोज़ इस मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। ड्रग्स केवल बॉलीवुड तक सीमित है इस पहलू पर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ था लेकिन अब इस पहलू पर खुलासा हुआ है। मॉडल और अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ड्रग्स सिर्फ बॉलीवुड तक ही सीमित नहीं है। क्रिकेट की दुनिया में भी इसका बराबर चलन है, उन्होंने आईपीएल के दौरान कई खिलाड़ियों की पत्नियों को ड्रग्स का सेवन करते हुए देखा है। 

बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट ने घटना का ज़िक्र किया जो उनके लिए हैरान करने वाली थी। उन्होंने कहा, “मैं एक बार कोलकाता नाईट राइडर्स का मैच देखने के लिए कोलकाता गई थी। मैच ख़त्म होने के बाद एक पार्टी का आयोजन किया गया था जिसमें मुझे भी बुलाया गया था। इस पार्टी में कई दिग्गज खिलाड़ी और उनकी पत्नियाँ भी शामिल हुई थीं। मेरे लिए वह पार्टी शानदार थी, मैंने उस पार्टी में खूब मज़े किए थे और खूब डांस किया जिसकी वजह से मैं बहुत ज़्यादा थक गई थी।” 

शर्लिन ने आगे कहा, “मैं वाशरूम गई और वहाँ मैंने जो नज़ारा देखा वह मेरे लिए हैरान कर देने वाला था। वहाँ कई खिलाड़ियों और अभिनेताओं की पत्नियाँ कोकीन का सेवन (स्नोर्टिंग) कर रही थीं। अचानक मुझे देख कर वह सभी मुस्कराई और बदले में मैंने मुस्करा कर जवाब दिया। एक बार के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी गलत जगह आ गई हूँ और मैं तुरंत बाहर आ गई। एक तरफ आईपीएल की पार्टी जारी थी तो वहीं दूसरी तरफ ड्रग्स की पार्टी भी हो रही थी।” 

शर्लिन का कहना था, “अगर वह जेंट्स वाशरूम में भी गई होती तो वहाँ भी कुछ ऐसा ही नज़ारा होता। हालाँकि, शर्लिन ने अपनी पूरी बात में किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया पर उनका कहना था कि वह एनसीबी की मदद करना चाहती थीं। उन्हें इस बात की ख़ुशी होगी अगर एनसीबी इस मुद्दे पर उनसे पूछताछ के लिए समन भेजती है।” उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई को बढ़ावा देते हुए कहा, “जिस तरह से एनसीबी बॉलीवुड में फैले ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जाँच कर रही है वह सराहनीय है।”   

इसके पहले भी शर्लिन चोपड़ा ने बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर खुलासा किया था। शर्लिन चोपड़ा ने अपने इन्स्टाग्राम पर योग करते हुए एक वीडियो साझा किया था। वीडियो के साथ (कैप्शन में) उन्होंने लिखा, “मैं चेन स्मोकर थी लेकिन साल 2017 में मैंने स्मोकिंग (धुम्रपान) छोड़ दी। ड्रग्स से मैंने हमेशा दूरी बनाई। बॉलीवुड इंडस्ट्री वाले पार्टी में बुला कर ट्रे पर ड्रग्स ऑफर करते हैं मगर लेने का नहीं।” इसके अलावा शर्लिन अपने वीडियो में कहती हैं कि लोग अक्सर उनकी फिटनेस का सीक्रेट पूछते हैं तो सीक्रेट है न्यूट्रीशन, अनुशासन और योगा। योगा से होगा, अवश्य होगा।  

शर्लिन चोपड़ा द्वारा किए गए इस दावे से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। पहले यह सवाल बॉलीवुड तक सीमित थे लेकिन अब यह क्रिकेट की दुनिया पर भी खड़े किए जाएँगे। सबसे पहले एनसीबी इन दावों की पुष्टि करेगी और अगर इनमें सच्चाई होगी तो क्रिकेट और ड्रग्स का रिश्ता भी सामने आएगा। अभी तक ड्रग्स का सेवन करने के मामले में सिर्फ बॉलीवुड से जुड़े लोगों का नाम सामने आ रहा था, यह पहला ऐसा खुलासा है जिसमें किसी और बड़े क्षेत्र के लोगों के बारे में इतना बड़ा दावा किया गया है। 

गौर करने लायक बात यह है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु मामले के बाद से ड्रग्स का एंगल छाया हुआ है। इस मामले को लेकर बॉलीवुड दो हिस्सों में बँट चुका है। धीरे-धीरे काफी बड़े नाम भी अब सामने आ रहे हैं और इसकी गूँज संसद तक में सुनाई दे रही है। ड्रग्स के साथ बॉलीवुड के कुछ बड़े नामों की बात करें तो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी KWAN की इंप्लॉई जया साहा की चैट से दीपिका पादुकोण के अलावा श्रद्धा कपूर, सोनम कपूर, जैकलीन फर्नांडीज, दीया मिर्जा, नम्रता शिरोडकर और फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के प्रोड्यूसर मधु मांटेना का नाम सामने आया है।

दिल्ली दंगा: UAPA के तहत JNU के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद को 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 24, 2020) को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी हिंसा से संबंधित एक मामले में 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद उमर खालिद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ADJ) अमिताभ रावत के सामने पेश किया गया। खालिद को आतंकवाद रोधी कानून, गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

FIR में, पुलिस ने दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा एक ‘पूर्व-निर्धारित साजिश’ थी जो कथित तौर पर उमर खालिद और दो अन्य लोगों द्वारा रची गई थी। उन पर देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने के अपराध के लिए भी मामला दर्ज किया गया है।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उमर खालिद ने कथित रूप से दो अलग-अलग स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिए थे और मजहबी भीड़ से अपील की थी कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरें और सड़कों को अवरुद्ध करें, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करें कि कैसे भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।

एफआईआर में दावा किया गया है कि दंगों की साजिश में कई घरों में आग्नेयास्त्र, पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें और पत्थर जमा किए गए।

पुलिस ने आरोप लगाया कि सह-अभियुक्त दानिश को कथित रूप से दंगों में भाग लेने के लिए दो अलग-अलग जगहों से लोगों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एफआईआर में कहा गया है कि लोगों के बीच तनाव पैदा करने के लिए 23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए महिलाओं और बच्चों को मोहरा बनाया गया था।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

ड्रग्स और बॉलीवुड: बड़े सितारों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है – अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti speaks on Silent Bollywood and drugs case

बॉलीवुड इस समय तरह-तरह के दौर से गुजर रहा है। पहले सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या या हत्या का मामला। फिर ड्रग्स एंगल का खुलासा। बाद में पैट्रियार्की-नेपोटिज्म पर बवाल और अब अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के इल्जाम।

इतनी सब उठा-पटक के बीच देखने वाली बात यह है कि बॉलीवुड के बड़े सितारे इन सब पर बिलकुल चुप हैं। लेकिन, दूसरी ओर बॉलीवुड के नशेड़ियों को सही साबित करने के लिए भगवान शिव पर एक टिप्पणी आई है और इसके जरिए ड्रग्स के सेवन को सही साबित करने का प्रयास हुआ है।

यह पहली बार नहीं है, जब बॉलीवुड में नशे की लत को उचित ठहराने के लिए इस प्रकार का महिमामंडन किया गया हो। शराबी फिल्म को ले लीजिए या ऐसी फिल्मों को देखिए, जिसमें कोई भी दुखी व्यक्ति दारू को अंतिम विकल्प मानता है। बाद में इन फिल्मों का असर असल जीवन में युवाओं पर पड़ता है और धीरे-धीरे वह इनसे प्रभावित होकर नशे के आदी हो जाते हैं।

पूरी वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

‘यदि मैं छत से लटकी मिली, तो याद रखें कि मैंने आत्महत्या नहीं की है’ – पायल घोष का डर इंस्टाग्राम पर

पायल घोष ने एक बार फिर अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम एकाउंट के जरिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इनडायरेक्ट तरीके से सुशांत सिंह राजपूत मामले को खुद से जोड़ते हुए अपनी हत्या की आशंका जताई है। साथ ही उन्होंने एक न्यूज़ पोर्टल और अनुराग के कनेक्शन को लेकर भी खुलासा किया है।

पायल घोष ने अपनी तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा

“मिस्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ मैंने एक जाने-माने पोर्टल को इस घटना से जुड़ा एक इंटरव्यू दिया था और बाद में मुझे पता चला कि उन्हें इसके लिए खुद कश्यप से परमिशन चाहिए थी। मेरे देश के लोग, यदि मैं छत से लटकी हुई पाई जाती हूँ तो याद रखें कि मैंने आत्महत्या नहीं की है। हालाँकि उनके पास डिप्रेशन और ड्रग्स वाले नैरेटिव की कहानी तैयार है।”

इस पोस्ट के साथ ही पायल घोष ने दो हैशटैग भी यूज किया – #NotGoingDown #MeToo

बता दें कि अनुराग कश्यप के खिलाफ सेक्शुअल मिसकंडक्ट का आरोप लगाने वाली पायल घोष ने उनके ख‍िलाफ रेप की श‍िकायत दर्ज करवाई है। मंगलवार को वकील के साथ पुलिस स्टेशन पहुँची ऐक्‍ट्रेस ने लिख‍ित श‍िकायत में डायरेक्‍टर के ख‍िलाफ कई अन्‍य गंभीर आरोप लगाए हैं।

अनुराग कश्यप के खिलाफ शिकायत दर्ज होने की जानकारी पायल के वकील नितिन सतपुते ने दी। नितिन सतपुते ने कहा कि पायल घोष के साथ साल 2014 में छेड़छाड़ की गई और अनुराग कश्यप ने घर पर बुरा व्यवहार किया। ऐक्ट्रेस ने पहले शिकायत दर्ज करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें धमकी दी गई थी। उन पर दबाव डाला गया था कि अगर शिकायत दर्ज करोगी तो बहिष्कार कर दिया जाएगा।

नितिन ने ट्वीट करके बताया था कि अनुराग कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। अब पुलिस द्वारा आगे की जाँच पड़ताल की जा रही है।

अभिनेत्री के वकील नितिन सतपुते ने ट्वीट में लिखा, “कश्यप के खिलाफ दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और अन्य मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (I) बलात्कार, 354 (महिला के साथ मारपीट या शील भंग करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग), 341(किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना), 342 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

कंगना मामले में BMC को बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार, कहा- इतनी फुर्ती दूसरी जर्जर इमारतों को तोड़ने में दिखाते तो कई हादसे टल जाते

हाल ही में बीएमसी ने कंगना के मुंबई स्थित दफ्तर पर तोड़-फोड़ की थी, आज (24 सितंबर 2020) इस मामले में सुनवाई हुई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान बीएमसी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि बीएमसी मुंबई में गिरती इमारतों पर सुस्त रवैया अपना रही है। ख़बरों के मुताबिक़ अदालत ने बीएमसी पर इस बात को लेकर भी सवाल खड़े किए कि वह मानसून के वक्त में टूटी इमारतों को कैसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। 

अदालत ने कहा, “बीएमसी उन इमारतों के लिए कुछ नहीं कर रही है जिनकी हालत पहले ही जर्जर है। उन इमारतों के लिए बीएमसी का रवैया बेहद लापरवाही भरा है। मानसून का मौसम है ऐसे में किसी भी इमारत को नज़रअंदाज़ करना बीएमसी का आलसी रवैया दिखाता है। बीएमसी ने जितनी तेज़ी कंगना का दफ्तर तोड़ने में दिखाई, उतनी ही तेज़ी दूसरे कामों में दिखाई होती तो बहुत से हादसे रोके जा सकते थे। हाल फ़िलहाल में जितनी भी दुर्घटनाएँ हुई हैं वह बीएमसी की लापरवाही का नतीजा है।” 

दरअसल हाल ही में महाराष्ट्र के भिवंडी में एक इमारत गिरी थी और इस दुर्घटना में 35 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी। अदालत ने इस घटना को मद्देनज़र रखते हुए बीएमसी को फटकार लगाई है। जिस वक्त दुर्घटना हुई उस दौरान बहुत से लोग सो रहे थे इसलिए बहुत से लोगों की जान चली गई। इमारत के मलबे में से लगभग 4 दर्जन लोगों लोगों को निकाला भी गया था जिसमें 10 लोग फ़िलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। पूरे बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम, डॉग स्क्वायड और स्थानीय बचाव दल मौजूद था।      

बॉम्बे उच्च न्यायालय में चल रही यह सुनवाई कल तक के लिए टाल दी गई है। कल (25 सितंबर 2020) कंगना रनौत इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखेंगी। कंगना ने इस ख़बर के सामने आते ही रीट्वीट किया और ट्वीट में लिखा ‘सत्यमेव जयते।’

इसके पहले कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया था। ट्वीट करते हुए कंगना ने लिखा था, “उद्धव ठाकरे, संजय राउत @mybmc जब मेरा घर ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से तोड़ रहे थे, उस वक्त उतना ध्यान इस बिल्डिंग पे दिया होता तो आज यह लगभग पचास लोग जीवित होते, इतने जवान तो पुलवामा में पाकिस्तान में नहीं मरवाए जितने मासूमों को आपकी लापरवाही मार गयी, भगवान जाने क्या होगा मुंबई का।”

गौरतलब है कि 8 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के ऑफिस पर नोटिस चिपकाया था और अवैध निर्माण को लेकर 24 घंटे में जवाब माँगा था। लेकिन अगले दिन कंगना के मुंबई पहुँचने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसे लेकर एक्ट्रेस के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब तक कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाई, तब तक बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त कर दिया गया था। 

इसमें झूमर, सोफा और दुर्लभ कलाकृतियों समेत कई कीमती संपत्ति भी शामिल है। कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। 13 सितंबर को उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताया था। 14 सितंबर की सुबह वे मुंबई से मनाली लौट गईं। अपने होमटाउन पहुँचने के बाद भी वे शिवसेना, कॉन्ग्रेस और महाराष्ट्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं।

व्यंग्य: बकैत कुमार कृषि बिल पर नाराज – अजीत भारती का वीडियो | Bakait Kumar doesn’t like farm bill 2020

देश को पहले जीडीपी का सदमा देने के बाद अब नए कृषि कानून को लाकर मोदी सरकार ने किसानों पर हमला बोला है। ऐसे में देश का युवा ‘बकैत कुमार की राय’ पढ़ने की बजाय अब भी गूगल पर IPL के बारे में सर्च करने में लगा है।

बकैत कुमार आए दिन देश के युवाओं के लिए नोट्स बना रहे हैं, तब भी बदले में उन्हें केवल फेसबुक पर गाली सुनने को मिलती है।

साल 2019 में बकैत कुमार ने फेसबुक पोस्ट लिखकर, स्टूडियो से कैंपेनिंग करके, भक्तों से गाली खाकर बहुत कोशिश की थी कि किसी तरह कोई बीजेपी का साथ छोड़कर आए और उनके चैनल को टीआरपी मिले। मगर, हुआ क्या? कुछ नहीं।

अब साल 2020 में किसान के लिए कानून आ गया। इस कानून में ऊपर से सब ठीक है। मगर, बकैत कुमार जैसी रिसर्च करने पर पता चलता है कि सरकार गरीब किसान को कंफ्यूज करना चाहती है।

पूरी वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें