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शिवसैनिकों की गुंडई के शिकार पूर्व नेवी अफसर मदन शर्मा BJP-RSS में शामिल, कहा- अब महाराष्ट्र में कोई गुंडागर्दी नहीं होने देंगे

मुंबई में रिटायर नेवी अफसर मदन शर्मा की शिवसैनिकों ने बेरहमी से पिटाई की थी। जिसके बाद शिवसैनिकों की गिरफ़्तारी भी हुई लेकिन उन्हें जल्द ही छोड़ दिया गया और उनपर शिवसेना द्वारा लगातार तंज किया जाता रहा। मदन शर्मा ने आज महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है। साथ ही लगातार लग रहे आरोपों के कारण आज उन्होंने कहा कि मैं अब बीजेपी, आरएसएस से जुड़ गया हूँ। अब हम महाराष्ट्र में कोई गुंडागर्दी नहीं होने देंगे।

सेवानिवृत नौसेना ऑफिसर मदन शर्मा ने राज्यपाल के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “अभी से मैं बीजेपी-आरएसएस के साथ हूँ। जब मुझे पीटा गया, तो उन्होंने आरोप लगाया कि मैं भाजपा-आरएसएस से जुड़ा हूँ। इसलिए अब मैं घोषणा करता हूँ कि मैं आज से बीजेपी-आरएसएस के साथ हूँ।”

मदन शर्मा की पिटाई से आहत राष्ट्रीय सैनिक संस्थान भी उनके समर्थन में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वयोवृद्ध संगठन राष्ट्रीय सैनिक संस्थान की मुंबई इकाई के अध्यक्ष पंजाबराव लक्ष्मण मुधाने ने कहा, “अगर उद्धव ठाकरे माफी नहीं माँगते हैं, तो 3 दिन में सभी रिटायर आर्मी अफसर आजाद मैदान में इकट्ठा होंगे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोला था। शिवसेना के 6-7 ‘गुंडों’ ने पूर्व नेवी अधिकारी मदन शर्मा पर हमला किया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर उद्धव सरकार को व्यापक प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी।

बता दें कि कांदिवली से भाजपा विधायक ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए कहा था कि स्थानीय ‘शाखा प्रमुख’ ने पूर्व नेवी अधिकारी को संपर्क किया और उन्हें उनकी बिल्डिंग से नीचे आने को बोला। जैसे ही वो अपनी बिल्डिंग से नीचे उतरे, करीब 8 लोगों ने उन्हें सिर्फ़ इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उद्धव ठाकरे का कार्टून व्हॉट्सएप पर फॉरवर्ड किया था।

कार्टून में भगवा रंग के कपड़े में उद्धव ठाकरे को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार सफेद रंग का कपड़ा पहनाते दिखाई दे रहे थे। पिटाई के बाद मदन शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। मदन शर्मा की शिकायत के बाद समता नगर पुलिस ने शुक्रवार ( सितम्बर 11, 2020) देर शाम चार आरोपितों- शिवसेना प्रमुख प्रधान कमलेश कदम और उनके साथी संजय मंजरे, राकेश बेलवेकर और प्रताप सोंड को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, बाद में उन्हें 12 घंटे के अंदर ही जमानत मिल गई थी।

जिसके बाद, शर्मा के परिवार ने कहा है कि वे अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। पूर्व नौसेना अधिकारी के बेटे सनी शर्मा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मॉंग की थी।

वहीं आरोपित शिवसैनिकों को जमानत मिलने पर पूर्व नेवी ऑफिसर की बेटी शीला शर्मा ने कहा, “एक वरिष्ठ नागरिक पर हमला किया गया है। पुलिस को पता होना चाहिए कि आरोपियों को किन धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्हें हत्या की कोशिश के आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी।”

महज एक कार्टून शेयर करने को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं के हमले का शिकार बने पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा ने भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस्तीफे की माँग की थी। इसी को लेकर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में मदन शर्मा पर निशाना साधा गया था। बता दें कि सामना के संस्थापक संपादक बाल ठाकरे और संपादक रश्मि उद्धव ठाकरे हैं। रश्मि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी हैं।

‘गाँधीवादी, अहिंसा, एकता, प्रेम की बात करने वाला’ – उमर खालिद के लिए कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेसी नेता और सेकुलरों का चालू है राग

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे मामले में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद तथाकथित सेकुलर इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया पर खालिद को रिहाई दिलवाने के लिए बकायादा अभियान चल रहा है। इसमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता से लेकर मीडिया गिरोह के पत्रकार और बुद्धिजीवी भी शामिल हैं।

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकॉउंट पर इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा है, “मोदी सरकार उन सभी धर्मनिरपेक्ष, उदारवादी, आवाजों को कुचलने में विश्वास करती है, जो उन्हें अपने निरंकुश राज्य के कार्यान्वयन में खतरा दिखते हैं।” ट्वीट में आगे लिखा है, “दिल्ली दंगों की जाँच में कई छात्र नेताओं और बुद्धिजीवियों को जेल में डाल दिया गया है, यह इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार अपने विपक्षी को कुचलना चाहती है।”

इसी प्रकार दिग्विजय सिंह अपने ट्वीट में हर्ष मंदर का ट्वीट शेयर करते हैं, जिसमें उमर खालिद के समर्थन की बात है। दिग्विजय सिंह लिखते हैं, “हर्ष मंदर एक बहुत ही कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार मध्य प्रदेश काडर के IAS अधिकारी रहे हैं। मैं उनसे पिछले 35-40 वर्षों से परिचित हूँ। यदि वे उमर ख़ालिद के पक्ष में हैं तो मैं उनके साथ हूँ। गॉंधीवादी कभी हिंसक प्रवृत्ति का नहीं हो सकता। मैं #StandWithUmarKhalid का समर्थन करता हूँ।”

इसी तरह एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया निदेशक बिराज पटनायक लिखते हैं कि उमर खालिद की गिरफ्तारी एक देशद्रोह है। हर दिन जो वो जेल में बिता रहा है, वो बहुत ज्यादा है। ये एक और अध्याय जुड़ा है, दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी खोजी पड़तालों में।

पत्रकार सागरिका घोष लिखती हैं, “मोदी सरकार जितना अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, कवियों को गिरफ्तार कर रही है, भारत का लोकतंत्र उतना ही कमजोर होता जा रहा है और वास्तविक खतरों को पहचानने और उनसे निपटने में असमर्थ हो रहा है। जब हम एक दूसरे पर हमला करने में व्यस्त हैं, तो भारत के असली दुश्मनों को हँसना चाहिए।”

लेखक हुसैन हैदरी लिखते हैं, “उमर खालिद एक शिक्षित और युवा नेता है। उसने खुलेआम कहा कि वह नास्तिक है। उसके भाषण में भी अहिंसा, एकता, प्रेम और भारतीय ध्वज का उल्लेख है। लेकिन ये सब बहुत तुच्छ लगते हैं। काफी सिर्फ़ यही है कि उसका मुस्लिम नाम है और वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ।”

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में रविवार की रात उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने दंगों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित है। पुलिस ने कहा है कि बहुत जल्द इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 

यहाँ बता दें कि लिबरल गैंग की प्रतिक्रिया खालिद गिरफ्तारी के बाद से ही सोशल मीडिया पर दिखने लगी थी। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि उसकी गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि वह मुस्लिम है। लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि बार-बार खुद को नास्तिक कहने वाले उमर खालिद ने पिछले कुछ सालों में अपनी इस तरह की छवि खुद ही बनाई है। 

14 साल की दलित लड़की से गैंगरेप, वीडियो किया वायरल: शिबू गिरफ्तार, नाजिम फरार – UP पुलिस की 7 टीमें तलाश में

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) का मामला सामने आया है। पीड़िता दलित समुदाय की है। ये घटना सितम्बर 7 की है, जब किशोरी सामान लेने बाजार गई थी। उसके साथ 5 युवकों ने न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि इस पूरी वारदात का वीडियो भी बना लिया। पीड़िता ने थाने पहुँच कर पाँचों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसके बाद एक नामजद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप की ये घटना सीतापुर स्थित इमलिया सुल्तानपुर की है। 14 साल की पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि जब वो बाजार गई थी, तब रास्ते में ही 5 लोग मिले और उसे खींच कर जबरन गन्ने के एक खेत में ले गए। वहाँ आरोपितों ने उसका गैंगरेप किया और वीडियो भी शूट कर लिया। साथ ही उन्होंने धमकी दी कि अगर इस घटना के बारे में किसी और को पता चला तो वो इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे।

सीतापुर के एसपी आरपी सिंह को जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, वो कई थानों की पुलिस लेकर इमलिया पहुँचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया। जहाँ एक नामजद आरोपित शिबू को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं नाजिम नामक आरोपित फरार है। एससपी ने एएसपी, सीओ के अलावा खैराबाद, रामकोट, बिसवां, मानपुर, महोली और हरगांव की पुलिस को इस मामले में जाँच के लिए लगाया गया है।

क्राइम ब्रांच भी इस मामले की जाँच में लगी हुई है। बाकी सभी आरोपितों की तलाश जारी है। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, पीड़िता की भाभी की मृत्यु हो चुकी है। उसके भाई के ससुराल वालों ने दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था, जिस मामले में उसका भाई जेल में बंद है। उसके पिता भी इसी मामले में जेल में बंद हैं। ऐसे में दलित समुदाय की पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए यूपी पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में कौशल नामक के एक व्यक्ति का भी नाम सामने आया है, जो पीड़िता का परिचित है। उसे भी इस मामले में नामजद किया गया है। पीड़िता कौशल से काफी पहले से संपर्क में थी और उसके साथ ही बाइक से बाजार जा रही थी। एसपी ने कहा है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाली पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। गैंगरेप के साथ-साथ SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच के लिए 7 टीमें गठित की गई हैं।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, आरोपितों ने पीड़िता का वीडियो बना कर वायरल भी कर दिया। नाबालिग पीड़िता अपने छोटे भाई के साथ अपने चाचा के यहाँ रहती है। जो कौशल उसे घटनास्थल पर छोड़ कर फरार हो गया, वो पीड़िता का रिश्तेदार ही है। पुलिस इस पर भी जाँच कर रही है कि एक सप्ताह बाद तहरीर क्यों दाखिल की गई। प्रशासन ने पीड़िता की आर्थिक मदद के लिए भी आश्वासन दिया है।

कोर्ट की लिखाई में ‘श्रुतिसम भिन्नार्थक’ मिस्टेक! रिया सुशांत के साथ रहती थी या छोड़ने को तैयार थी?

मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ ऐसा लिखा, जिससे चर्चा हो रही है कि इसका अर्थ क्या होगा? या फिर क्या ये किसी प्रकार की गलती है? दरअसल, इस आदेश में लिखा हुआ है कि रिकॉर्ड्स से ऐसा पता चलता है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और आरोपित रिया चक्रवर्ती ‘Leaving In’ रिलेशनशिप में रहते थे। इसका मतलब क्या है, इस पर चर्चा हो रही है।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती के ‘Live In’ रिलेशनशिप में रहने की बातें पहले से ही होती आई हैं। शादी से पहले एक घर में जब दो प्रेमी साथ रहते हैं तो इसे अक्सर ‘Live In’ का नाम दिया जाता है। हालाँकि, कोर्ट के आदेश में ये ‘Leaving In’ का अर्थ यही है या फिर ये है कि रिया अब सुशांत को छोड़ने वाली थी, ये स्पष्ट नहीं हो सका है। या फिर अंदेशा जताया गया है कि ये टाइपिंग मिस्टेक भी हो सकता है।

कोर्ट के आदेश में लिखा है कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स देती थीं और शौविक के जरिए ज़ैद बिलतरा और अब्दुल बासित के जरिए ड्रग्स की व्यवस्था की गई थी। एनसीबी ने जो व्हाट्सप्प चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए हैं, उससे ये पता चलता है। हालाँकि, अजुन केशवानी के घर से हार्ड ड्रग्स मिलने के मामले में कोर्ट ने कहा कि इसका रिया से कनेक्शन के मामले की जाँच अभी शुरुआती स्टेज में है।

कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित को जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने आशंका जताई है कि अगर आरोपित रिया चक्रवर्ती को रिहा किया गया तो वो बाकी आरोपितों को सावधान कर देगी, जिससे उन लोगों को सबूत मिटाने में आसानी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश जारी किया कि इस मामले में रिया चक्रवर्ती को जमानत नहीं दी जा सकती है और उनकी याचिका निरस्त की जाती है।

इधर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल यूनिट ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले से जुड़े ड्रग नेक्सस से संबंधित 6 और लोगों को गिरफ्तार किया है। करमजीत सिंह, ड्वेन फर्नांडिस, संकेत पटेल, अंकुश अरनेजा, संदीप गुप्ता और आफताब फतेह अंसारी को गिरफ्तार किया गया है।  इन सभी 6 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।

‘बेटी श्‍वेता को ड्रग्‍स… बेटा अभिषेक फाँसी से झूलते…’ – जया बच्चन के ‘बॉलीवुड को बदनाम करने’ पर कंगना रनौत की खरी-खरी

समाजवादी पार्टी नेता व अभिनेत्री जया बच्चन ने आज (सितंबर 15, 2020) संसद सत्र के दौरान भोजपुरी अभिनेता व गोरखपुर सांसद रवि किशन पर निशाना साधा। जया बच्चन ने रवि किशन का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। उनके इस बयान के बाद ट्विटर पर लगातार उनका नाम ट्रेंड होना शुरू हो गया। इस बीच रवि किशन ने भी अपने ऊपर लगे इल्जाम का पलटवार किया और कंगना रनौत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।

कंगना रनौत ने जया बच्चन का यह बयान आने के बाद उनकी वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जया जी क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर मेरी जगह पर आपकी बेटी श्‍वेता को युवावस्था में पीटा गया होता, ड्रग्‍स दिए गए होते और शोषण होता। क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार बुलिंग और शोषण की बात करते और एक दिन फाँसी से झूलते पाए जाते? थोड़ी हमदर्दी हमसे भी दिखाइए।”

न्यूज 18 के पत्रकार विक्रांत यादव के मुताबिक रवि किशन ने अपने ऊपर लगे इल्जाम पर जवाब देते हुए कहा, “ना तो हमें किसी ने थाली दी, ना भोजन दिया और ना ही हमने किसी थाली में छेद किया, मैं स्वयंभू हूँ, जिंदगी झंड बा फिर भी घमण्ड बा। अगर ड्रग्स की बुराई इंडस्ट्री में है तो उसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी हमारी है।”

एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार रवि किशन ने यह भी कहा, “मुझे लगा था कि जो भी मैंने कहा, जया जी उसका समर्थन करेंगी। सभी लोग इंडस्ट्री में ड्रग्स नहीं लेते लेकिन जो लोग लेते हैं, वे दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री को खत्म कर देना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क और कंगना रनौत के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई पर अमिताभ बच्चन की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं राज्यसभा में संसद सत्र के दौरान उनकी पत्नी और समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन ने उलटा गोरखपुर के भाजपा सांसद रवि किशन पर ही निशाना साध दिया।

जया बच्चन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। रवि किशन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। साथ ही सरकार पर ऐसी ‘भाषा’ पर लगाम लगाने को भी कहा।

उन्होंने ‘बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश’ पर सदन में जीरो आवर नोटिस भी दिया। जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं।

क्या कहा था सांसद रवि किशन ने?

अभिनेता और सांसद रवि किशन ने कल संसद में बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क का मुद्दा उठाया था। बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमा चुके अभिनेता ने ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा था कि ये पड़ोसी देशों की साजिश है। उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा था कि कई लोगों को पकड़ा भी गया है लेकिन वो केंद्र सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स तस्करी काफी बढ़ गई है, जिससे हमारे युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब और नेपाल के रास्ते भारत में ड्रग्स की अवैध सप्लाई की जा रही है। उन्होंने पड़ोसी देशों की इस साजिश का अंत करने के लिए इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की माँग की थी।

हरामखोर = आलसी, PoK पाकिस्तान का हिस्सा: कॉन्ग्रेसी नेता अर्शी खान ने टीवी डिबेट में दिया ये सारा ज्ञान

बिग बॉस शो से फेम कमा कर साल 2019 में कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ने वाली अर्शी खान ने टीवी डिबेट के दौरान एक हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने ऑन टीवी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बता डाला।

भाजपा नेता संबित पात्रा के साथ डिबेट करते हुए अर्शी खान लगातार PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बताती रहीं। हालाँकि बीच में जब भाजपा नेता ने उनसे पूछा कि क्या वह PoK का मतलब भी जानती हैं? तो उन्होंने सवाल का जवाब देने की बजाय निराधार बहस जारी रखी।

भाजपा नेता संबित पात्रा उन्हें समझाते रहे कि PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी स्थिति में उसे पाकिस्तान का अंग नहीं बताया जा सकता है।

इसके बाद जब पात्रा ने उनसे सवाल किया कि क्या वह शिवसेना नेता संजय राउत के उस बयान का समर्थन करती हैं, जिसमें कंगना रनौत को उन्होंने ‘हरामखोर लड़की’ कहा? तो इस सवाल का जवाब देते हुए अर्शी खान कहती हैं कि हरामखोर कोई गाली नहीं है।

अर्शी खान ने पूरे मुद्दे को ‘हलाल’ और ‘हराम’ से जोड़ते हुए दावा किया कि ‘हलाल’ मतलब ऐसा इंसान जो कड़ी मेहनत करता है और जो ऐसा नहीं करता या आलसी और निकम्मा होता है, उसे ‘हराम’ कहा जाता है।

बता दें, हलाल और हराम अरबी शब्द हैं। इनमें ‘हलाल’ को इस्लाम में जायज माना जाता है और ‘हराम’ को इस्लामी कानून के मुताबिक निषिद्ध माना गया है। इस्लामी कानून के मुताबिक जिन कार्यों को अल्लाह ने गलत बताया है, वो सभी हराम होते हैं यानी अर्शी खान के मुताबिक हरामखोर वो होता है जो ‘हराम’ कार्यों को करता है, जिन्हें अल्ला ने मना किया हुआ है।

कौन हैं अर्शी खान?

गौरतलब है कि बिग बॉस में आने के बाद अर्शी खान ने साल 2019 में कॉन्ग्रेस को ज्वाइन किया था। उससे पहले उनकी एक तस्वीर विवादों का हिस्सा बनी थी। जिसमें उन्होंने अपने शरीर पर पाकिस्तान के झंडे को पेंट करवाकर फोटो खिंचवाई थी

जानकारी के मुताबिक, अर्शी खान अफगानिस्तान में पैदा हुई थीं। लेकिन मात्र 4 साल की उम्र में वह भारत आ गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पाकिस्तान प्रेम को कई बार जाहिर किया है। साथ ही वहाँ की नागरिकता पाने की इच्छा भी जताई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्शी खान ने एक बार पाकिस्तान रिएलिटी शो ‘अर्शी का स्वयंवर’ में भाग लेने का निर्णय भी ले लिया था। जिसके लिए उन्हें 2 करोड़ रुपए ऑफर दिए गए थे। हालाँकि दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी ये नहीं बताया कि उन्हें किस न्यूज चैनल ने ऑफर किया था।

‘जिस थाली में खाते हो…’ – जया बच्चन ने बॉलीवुड में ड्रग्स का मामला स्वीकारने के बजाय BJP सांसद रवि किशन को घेरा

जहाँ एक तरफ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क और कंगना रनौत के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई पर अमिताभ बच्चन की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, राज्यसभा में संसद सत्र के दौरान उनकी पत्नी और समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन ने उलटा गोरखपुर के भाजपा सांसद रवि किशन पर ही निशाना साध दिया। रवि किशन ने बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क को लेकर आवाज़ उठाई थी।

जया बच्चन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। रवि किशन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। साथ ही सरकार पर ऐसी ‘भाषा’ पर लगाम लगाने को भी कहा। उन्होंने ‘बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश’ पर सदन में जीरो आवर नोटिस भी दिया।

जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं। संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही के दौरान जया बच्चन ने ये बातें कही। बता दें कि एनसीबी ने ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक समेत 16 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद ये चर्चा जोरों पर है।

बता दें कि अभिनेता और सांसद रवि किशन ने संसद में बॉलीवुड के ड्रग्स नेटवर्क का मुद्दा उठाया था। बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमा चुके अभिनेता ने ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा था कि ये पड़ोसी देशों की साजिश है। उन्होंने एनसीबी की कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा था कि कई लोगों को पकड़ा भी गया है लेकिन वो केंद्र सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स तस्करी काफी बढ़ गई है, जिससे हमारे युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब और नेपाल के रास्ते भारत में ड्रग्स की अवैध सप्लाई की जा रही है। उन्होंने पड़ोसी देशों की इस साजिश का अंत करने के लिए इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की माँग की थी। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन को ये नागवार गुजरा और इसीलिए उन्होंने गोरखपुर सांसद पर निशाना साधा।

8000 गरीब पुजारियों को ₹1000 का मासिक भत्ता और मुफ्त आवास: चुनाव से पहले ममता बनर्जी की ‘हिंदू राजनीति’

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सियासी खेल शुरू हो गए हैं। हाल में भाजपा अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा ने ममता बनर्जी पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया था। हालाँकि ममता बनर्जी ने आरोपों से मुक्ति पाने के लिए कल ब्राह्मणों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया। ममता सरकार ने साल 2021 के चुनावों से पहले राज्य के 8000 से अधिक गरीब सनातन ब्राह्मण पुजारियों को 1000 रुपए का मासिक भत्ता और मुफ्त आवास देने की घोषणा की।

बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “हमने पहले सनातन ब्राह्मण संप्रदाय को कोलाघाट में एक अकादमी स्थापित करने के लिए भूमि प्रदान की थी। इस संप्रदाय के कई पुजारी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। हमने उन्हें प्रतिमाह 1,000 रुपए का भत्ता प्रदान करने और राज्य सरकार की आवासीय योजना के तहत मुफ्त आवास प्रदान करके उनकी मदद करने का फैसला किया है।”

इसके अलावा उन्होंने हिंदी अकादमी और दलित अकादमी स्थापित करने की भी बात की। उन्होंने हिंदी दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी सरकार सभी भाषाओं का सम्मान करती है और उसमें भाषायी आधार पर पूर्वग्रह नहीं है।

उन्होंने कहा, “हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं। हमने एक नई हिंदी अकादमी स्थापित करने का निर्णय किया है। हमने एक दलित साहित्य अकादमी भी स्थापित करने का निर्णय किया है। दलितों की भाषा का बंगाली भाषा पर प्रभाव है।”

ममता बनर्जी ने सोमवार को जिलों में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे के नवीनीकरण की योजना का भी अनावरण किया। इस दौरान ममता ने अपनी सरकार के ‘सर्व धर्म समन्वय’ प्रस्ताव के तहत बिष्णुपुर के बंकुरा स्थित 14वीं शताब्दी के मंदिरों के जीर्णोद्धार पर विशेष जोर दिया।

यहाँ बता दें कि ममता बनर्जी का यह कदम जेपी नड्डा के आरोप लगाने के बाद आया है। इसलिए इस पर सवाल उठने लाजिमी हैं। ममता सरकार को हमेशा अल्पसंख्यकों के प्रति झुकाव और उनके अनुसार बनाई गई नीतियों के लिए घेरा जाता रहा है। इससे पहले बंगाल में इमाम और मुअज्जिनों को वक्फ स्टेट बोर्ड से इसी तरह का भत्ता मिलता आया है। इसके लिए बोर्ड को टीएमसी सरकार से ग्रांट मिलती है।

क्या कहा था भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने?

आगामी चुनावों के मद्देनजर जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि 5 अगस्त को जब राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ उसी दिन ममता दीदी ने पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन लगा दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा करके उन्होंने करोड़ों लोगों की इच्छाओं को कुचलने का काम किया। ये अलग बात है कि बकरीद में लॉकडाउन हटा लिया गया था। जो यह दर्शाता है कि राज्य सरकार की नीतियाँ हिंदू विरोधी मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित हैं।”

पश्चिम बंगाल में होने वाली राजनीतिक हत्याओं का मुद्दा उठाते हुए नड्डा ने पूछा कि यह जंगलराज नहीं तो क्या है? उन्होंने कहा, “100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को मारा गया है। दुख होता है, यह जो अपने आप को लोकतंत्र के चैंपियन कहते हैं, ऐसे मौकों पर उनकी आवाज नहीं निकलती है। हमें इसी मानसिकता को हटाना है।”

रिया, शौविक पर कसा शिकंजा: ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क के 6 और लोग गिरफ्तार, NCB ने कहा – ‘डायरेक्ट/इनडायरेक्ट लिंक है’

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल यूनिट ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले से जुड़े ड्रग नेक्सस से संबंधित 6 और लोगों को गिरफ्तार किया है। करमजीत सिंह, ड्वेन फर्नांडिस, संकेत पटेल, अंकुश अरनेजा, संदीप गुप्ता और आफताब फतेह अंसारी को गिरफ्तार किया गया है।

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में इन सभी 6 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। NCB ने सोमवार (14 सितंबर, 2020) को कहा कि ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी 6 आरोपित ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा हैं और ये सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रिया चक्रवर्ती, शौविक चक्रवर्ती और सुशांत राजपूत से जुड़े हुए हैं।

NCB ने अपने रिमांड आवेदन में कहा कि रिया चक्रवर्ती, शौविक चक्रवर्ती और अन्य के खिलाफ नशीले पदार्थों की कथित खरीद, सप्लाई करने और उसका उपयोग करने से संबंधित मामले में इन 6 को गिरफ्तार किया गया है। NCB के सूत्रों की मानें तो ड्वेन रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती के सीधे संपर्क में था।

शौविक के स्कूली दोस्त करमजीत पर आरोप है कि उसने सुशांत के कर्मचारी दीपेश सावंत और घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा के माध्यम से 10 से अधिक बार ड्रग्स सप्लाई की थी। करमजीत को NCB ने शौविक को ड्रग्स उपलब्ध कराने के आरोप में हिरासत में लिया।

रिया, उसके भाई शौविक और सुशांत राजपूत से इन ड्रग्स पेडलर का लिंक बताते हुए NCB अधिकारियों ने अदालत को बताया कि अंकुश अर्नेजा ने अनुज केशवानी से हशीश और MDMA खरीदा, जो पश्चिमी मुंबई में ड्रग्स का कारोबार करता है। इतना ही नहीं, NCB ने छापे के दौरान केशवानी से बड़ी मात्रा में नशीले ड्रग्स बरामद किया था।

ड्रग पेडलर केशवानी एक अन्य ड्रग पेडलर काजान इब्राहिम के सीधे संपर्क में था। काजान इब्राहिम इस मामले में अभी जमानत पर बाहर है। इब्राहिम ही वो शख्स है, जिसने दीपेश सावंत को ड्रग्स दिए थे। शौविक चक्रवर्ती के कहने पर दीपेश सावंत रिया चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत के सीधे संपर्क में था।

NCB अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया कि अनुज अरनेजा एक अन्य गिरफ्तार आरोपित करमजीत सिंह के भी संपर्क में था। करमजीत तो डायरेक्टली शौविक के संपर्क में था। ये दोनों (करमजीत और शौविक) व्हाट्सएप चैट से ड्रग्स की खरीद या सप्लाई के बारे में बात करते थे।

आपको बता दें कि शौविक चक्रवर्ती ने NCB के सामने कथित तौर पर स्वीकार कर लिया था कि रिया के कहने पर उसने ड्रग्स खरीदे थे। इतना ही नहीं, शौविक का दावा है कि रिया ने उसके अलावा सुशांत के पूर्व मैनेजर सैमुएल मिरांडा से भी ड्रग्स मँगाए, क्योंकि वह कई ड्रग तस्करों के संपर्क में था।

मीडिया ने तो 5 ही बताए थे… लेकिन लव जिहाद के 12 मामले मिले SIT को कानपुर में: इस्लामी संगठन की भूमिका पर जाँच

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पिछले दिनों लव जिहाद के बढ़ते मामलों की जाँच के मद्देनजर एसआईटी का गठन हुआ था। अब खबर है कि इस एसआईटी ने अपनी पड़ताल में एक दर्जन मामले ऐसे पकड़े हैं, जहाँ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करवाया गया। एसआईटी इनका पता लगाने के बाद ये जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके पीछे किसी संगठन का तो हाथ नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर की अगुवाई वाली एसआईटी ने हाल में ‘लव जिहाद’ के एक दर्जन से ज्यादा मामले पकड़े हैं। इनमें ज्यादातर मामले जूही इलाके से हैं। अब एसआईटी इस बात की जाँच करेगी कि कहीं लव जिहाद रैकेट में किसी कथित इस्लामी संगठन का तो हाथ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों शालिदी यादव से फातिमा बनी युवती के केस का खुलासा होने के बाद से हिंदूवादी संगठनों ने कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल से मिल कर लव जिहाद के मामलों की जाँच की माँग की थी। इसी माँग को पुलिस महानिरीक्षक ने स्वीकारते हुए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था, जिसका नेतृत्व बाद में दीपक भूकर को सौंपा गया।

अपर पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर की अगुवाई वाली इस टीम का काम हिन्दू लड़कियों को बरगलाकर कथित रूप से शादी के बहाने उनका धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह के काम करने के तरीकों तथा अन्य पहलुओं की जाँच करना था।

यहाँ बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कानपुर में विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन कराने की बात जान कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही ये बात स्पष्ट की थी कि सरकार किसी भी तरह का लव जिहाद बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए थे कि कार्ययोजना बना कर ऐसी घटनाओं को चिह्नित किया जाए और फिर कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि ‘लव जिहाद’ से न सिर्फ़ सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मामला भी इससे जुड़ा हुआ है। मजहब की आड़ में महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए सरकार सतर्क है। सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने भी ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि अगर इस मामले में नए क़ानून की भी आवश्यकता होगी तो विचार किया जाएगा।

पिछले दिनों हमने देखा कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके खासकर कानपुर में लव जिहाद के तमाम मामले उजागर हुए। चाहे फिर वह जूही कालोनी की शालिनी यादव का हो या लखीमपुर खेरी की वह 18 वर्षीय दलित जिसके शव को काट कर किसी दिलशाद ने तालाब में फेंक दिया था। इसके बाद पंकी मामला जहाँ मोहसिन और आमिर को मुस्कान केस में गिरफ्तार किया था और फिर गोविंद नगर का केस जहाँ ‘काला जादू करके’ लड़की का ब्रेनवॉश किया और उसका धर्मपरिवर्तन कराया गया। ये सभी मामले कानपुर से आने के बाद इन मामले में एसआईटी की टीम अब वहाँ लव जिहाद मामले की जाँच में जुटी है।

लव जिहाद का ट्रेनिंग ग्राउंड है जूही कॉलनी?

कानपुर की जूही कॉलनी के संप्रदाय विशेष के लड़कों का हिंदू लड़कियों से अफेयर गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन अगर इसमें कोई पैटर्न या ट्रेंड दिखता है तो जरूर सोचनीय है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इस कॉलनी के संप्रदाय विशेष के लड़के संगठित लव जिहाद कर रहे हैं।

पिछले 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से भागी 5 लड़कियाँ। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं, पूरी रिकॉर्ड्स दैनिक जागरण के पास है। जूही कॉलनी में चल रहे लव जिहाद का संगठित नेक्सस या ट्रेनिंग इन्हीं पाँचों भागी लड़कियों के आधार पर समझ सकते हैं।

  • भागी शालिनी यादव – आरोपित मोहम्मद फैसल – रहने वाला जूही कॉलनी का
  • कल्याणपुर के आवास विकास निवासी दो सगी बहनें भागीं – आरोपित शाहरुख (पिता का नाम कमाल) और शाहरुख (पिता का नाम खलील) – रहने वाला दोनों जूही कॉलनी का
  • पनकी रतनपुर कॉलनी निवासी युवती व उसकी छोटी बहन – आरोपित मो. मोसीन, छोटी बहन सतर्क हुई तो मामला खुल गया – रहने वाला जूही कॉलनी का

जिन स्थानीय लोगों से बातचीत पर दैनिक जागरण की 20 दिन पहले आई यह रिपोर्ट आधारित है, उसके अनुसार आरोपित युवकों के कई लड़कियों से संबंध हैं। रिपोर्ट में यह भी संदेह जताई गई है कि अभी तक कुछ ही थानों के मामले निकाले गए हैं और 5 हिंदू लड़कियों के संप्रदाय विशेष के लड़कों से प्रेम-प्रसंग (जो एक ही इलाके से होने के कारण संगठित लव जिहाद की ओर इशारा कर रहे हैं) की बात सामने आई है लेकिन विभिन्न थानों में दर्ज भागने वाली लड़कियों की जाँच अगर अच्छे से की जाए तो यह संख्या एक दर्जन से अधिक होगी और सभी आरोपितों के तार जूही कॉलनी से जुड़े मिलेंगे।

स्पष्ट है कि जिस लव जिहाद की ओर 20 दिन पहले स्थानीय लोग इशारा कर रहे थे, SIT की जाँच में इनकी संख्या दर्जनों में निकलने वाली सच होती दिख रही है।