असम पुलिस ने राज्य के बोंगाईगाँव जिले के जोगीगोपा शहर में 9 साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार करने के आरोप में समीर अली नाम के 58 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
घटना बुधवार (सितंबर 16, 2020) की है। जानकारी के मुताबिक, समीर अली ने पहले बहला-फुसलाकर नाबालिग लड़की को अपने घर में बुलाया और फिर उसके साथ बलात्कार किया। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद से वह पुलिस से भागता फिर रहा था। आखिरकार जोगीगोपा पुलिस ने उसे भरलकुंडी गाँव से गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी पीड़िता का रिश्तेदार है
मामले के संबंध में FIR (No. 306/20) दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित, पीड़िता का दादा है। घटना से इलाके में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना प्रकाश में आई है। इससे पहले असम के डिब्रूगढ़ जिले में रिकी अहमद नाम के युवक द्वारा 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ कई बार बलात्कार करने का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपित रिकी अहमद उर्फ बिक्की को नालीपुल के कावेरी पैटी क्षेत्र से मंगलवार (9 सितंबर, 2020) को गिरफ्तार किया था। परिजनों ने बताया था पीड़िता के साथ 20 बार से ज्यादा दुष्कर्म किया गया था। इसके साथ ही बताया गया था कि आरोपित रिकी अहमद, पीड़िता का मामा था।
डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मनाव बरुआ के अनुसार आरोपित के खिलाफ डिब्रूगढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 448/376 डी (ए) / 506, यौन अपराध अधिनियम से बच्चों की सुरक्षा की धारा 4 के तहत (1513/20) मामला दर्ज किया था।
पुलिस अधिकारी ने बताया था, “इस अपराध में आरोपित ने अपनी भूमिका से इनकार कर दिया है। लेकिन हमारे पास आरोपित के खिलाफ कई सबूत मौजूद हैं। जिसको मद्देनजर रखते हुए रिकी अहमद को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।”
अतिरिक्त एसपी ने कहा था, “एक सप्ताह के भीतर, हम चार्जशीट पेश करेंगे और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की दरख्वास्त करेंगे।” गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान असम में आपराधिक मामलों में काफी बढ़त हुई है।
मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह पहले से ही विवादों में हैं। अब महाराष्ट्र की शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता को पुणे का पुलिस कमिश्नर बनाकर एक और विवाद को न्योता दे दिया है।
#Breaking | Amitabh Gupta who gave the travel permit to Wadhawans during lockdown has been appointed as Pune top cop.
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता पर 8 अप्रैल, 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान घोटाले के आरोपित कपिल वाधवान, धीरज वाधवान सहित पूरे परिवार को यात्रा परमिट प्रदान करके एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करने का आरोप लगाया गया था। इससे पहले वह महाराष्ट्र गृह विभाग के प्रमुख सचिव थे।
लॉकडाउन के नियम तोड़ने पर दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटरों कपिल वाधवान, धीरज वाधवान सहित पूरे परिवार पर केस दर्ज होने के साथ ही उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुणे के निवर्तमान पुलिस आयुक्त के. वेंकटेशम का तबादला अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान) के रूप में मुंबई में किया गया है। वहीं अभिनव देशमुख को पुणे (ग्रामीण) के लिए एसपी के रूप में नियुक्त किया गया है।
अमिताभ गुप्ता द्वारा वाधवान परिवार को मँजूरी देने वाला पत्र भी सामने आया था। जिसमें महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता ने अपने आधिकारिक पत्र पर वाधवा परिवार के सदस्यों को अपना ‘फैमिली फ्रेंड’ बताया था।
वाधवान ने महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (विशेष), गृह विभाग अमिताभ गुप्ता से ‘फैमिली इमरजेंसी’ का हवाला देते हुए खंडाला से महाबलेश्वर तक की यात्रा करने के लिए विशेष पास लिया था। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने डीएचएफएल के प्रवर्तकों कपिल और धीरज वाधवान को उनके परिवार के 22 अन्य सदस्यों, दोस्तों के साथ पाँच कारों में जाने के लिए मँजूरी दी थी।
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अमिताभ गुप्ता ने वाधवान परिवार के लिए जारी पास में लिखा था, ‘‘निम्नलिखित (व्यक्तियों) को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, क्योंकि वे मेरे पारिवारिक मित्र हैं और परिवार में इमरजेंसी के कारण वह पुणे के खंडाला से सतारा के महाबलेश्वर तक की यात्रा कर रहे हैं। इन्हें गंतव्य तक पहुँचने में सहयोग किया जाए।’’ इस पत्र में वाधवान परिवार के 5 वाहनों की डिटेल भी दी गई थी।
बता दें कि वाधवान परिवार 9 अप्रैल की सुबह महाबलेश्वर पहुँचे थे। उन्होंने यह यात्रा ‘फैमिली इमरजेंसी’ की आड़ में की थी। स्थानीय लोगों को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने प्रशासन को इसकी सूचना दी। जिसके बाद तहसीलदार ने फॉर्म हाउस में रहने के दौरान ही उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार द्वारा भारी शर्मिंदगी झेलने के बाद गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया था।
गौरतलब है कि डीएचएफएल के सीएमडी कपिल वाधवान और धीरज वाधवान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जाँच चल रही है। कपिल वाधवान को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल वह जमानत पर हैं। डीएचएफएल ने शेल कंपनियों को लोन-एडवांस देने और दूसरे गलत तरीकों से सार्वजनिक पैसों का अपने लिए इस्तेमाल किया।
आरोप यह भी है कि डीएचएफएल के प्रमोटरों ने संदिग्ध कंपनियों के जरिए पैसा जमा किया और इसे विदेशी संपत्ति हासिल करने के लिए भारत के बाहर भेज दिया। वहीं YES बैंक फर्जीवाड़े मामले में राणा कपूर के खिलाफ जाँच चल रही है, इसमें भी मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दायरे में अब वाधवान बंधु भी ईडी और सीबीआई के रडार पर हैं।
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस की छानबीन अभी जारी है। हाल ही में सीबीआई ने पावना स्थित सुशांत सिंह राजपूत के फॉर्म हाउस के मैनेजर से पूछताछ की थी। मैनेजर ने गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि रिया चक्रवर्ती अपने खर्चे पूरे करने और पार्टियों के लिए सुशांत के पैसे इस्तेमाल करती थी।
फॉर्म हाउस मैनेजर ने इंटरव्यू के दौरान बताया, “सुशांत के सीए रजत मेवाती ने मुझे बताया कि सुशांत सो रहे होते थे और रिया चक्रवर्ती पार्टी कर रही होती थी। मैंने शोविक को जब भी देखा, नशे में ही देखा या स्मोक करते हुए। श्रुति मोदी ने साल 2019 में जुलाई के महीने से आना शुरू किया था, रिया चक्रवर्ती के आने के बाद से उनकी आईलैंड की ट्रिप्स में बढ़ोतरी हुई थी। रिया ही सुशांत के सभी खर्चों को हैंडल करती थीं। जब सुशांत को अपने अकाउंट से रिया द्वारा किए गए खर्चों के बारे में जानकारी मिली तो वो काफी नाराज हुए थे।”
उन्होंने आगे कहा, “रिया अक्सर सुशांत के साथ यहाँ आती थी। पिछले साल रिया के जन्मदिन से एक दिन पहले 8 जुलाई को मैंने रिया के परिवार को देखा था। शोविक चक्रवर्ती के साथ एक लड़की भी थी।”
इसके साथ ही खबर है कि सुशांत की मौत के मामले में गठित मेडिकल बोर्ड अगले सप्ताह सीबीआई को अपनी राय देगा। इस बात की जानकारी एम्स के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख और सुशांत मामले में गथित मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने दी।
Medical Board’s opinion will be given to CBI next week. I hope it will be conclusive without any doubts. Reports can’t be shared since the matter is subjudice: Prof Dr Sudhir Gupta, Head of Forensic Department, AIIMS & Chairman of Medical Board formed in Sushant Rajput death case
डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा, “मेडिकल बोर्ड की राय अगले हफ्ते सीबीआई को दी जाएगी। मुझे उम्मीद है कि बिना किसी संदेह के यह निर्णायक होगा। चूँकि मामला अभी अदालत के अधीन है, इसलिए इससे संबंधित रिपोर्ट साझा नहीं की जा सकती है।”
बता दें कि ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार करने के बाद एनसीबी की टीम पिछले दिनों सुशांत के फॉर्म हाउस पर जाँच करने पहुँची थी। फार्महाउस के मैनेजर रईस ने आज तक को बताया था कि सुशांत के फॉर्म हाउस में पार्टी होती थी, जहाँ कई बॉलीवुड सितारे आते थे। मैनेजर ने सारा अली खान का नाम भी लिया। सारा के बाद ही रिया चक्रवर्ती ज आईं। मैनेजर ने यह भी बताया था कि उन्होंने कभी सुशांत को ड्रग्स लेते नहीं देखा, लेकिन उनकी पार्टियों में स्मोकिंग पेपर मँगाए जाते थे।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के निधन को 3 महीने से ज्यादा का समय गुज़र चुका है लेकिन अब तक उनकी मौत का असली कारण पता नहीं चला है। सीबीआई इस केस की छानबीन में लगी है।
9 सिंतबर को ड्रग्स के मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया था। कथित तौर पर पूछताछ में रिया ने बॉलीवुड से जुड़े 25 लोगों का नाम लिया था, जो ड्रग्स लेते हैं।
उरी में सेना ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स पर हमले (18 सितंबर 2016) की बरसी से पहले सेना ने कश्मीर में बड़े हमले की आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है सेना ने जम्मू-कश्मीर के गडीकल के करेवा इलाके से गुरुवार (सितंबर 17, 2020) को 52 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया।
खुफिया जानकारी के आधार पर 42 राष्ट्रीय राइफल्स ने गुरुवार सुबह 8 बजे करेवा इलाके में एक संयुक्त जाँच अभियान शुरू किया। सर्च के दौरान टीम ने एक पानी टंकी से विस्फोटक से भरे 416 पैकेट बरामद किए। हर पैकेट का वजन 125 ग्राम था, यानी कुल 52 किलोग्राम विस्फोटक था।
Big. 52 kg explosives intercepted in Gadikal area, J&K, possibly averting another Pulwama-style attack, say officials. Found in a dug-in Sintex tank: 416 packets of 125 gram explosives + 50 detonators. Location 9km from general area where 2019 Pulwama attack happened. pic.twitter.com/bOtw0Y4Hzb
सेना की ओर से जारी बयान में यह भी बताया गया कि सर्च ऑपरेशन में ऐसा ही एक और टैंक मिला। उस टैंक में करीब 50 डेटोनेटर्स थे। सेना के अधिकारियों ने बताया कि ये विस्फोटक जिस जगह से बरामद किए गए हैं, वह स्थान साल 2019 में हुए पुलवामा आंतकी हमले की जगह से सिर्फ 9 किलोमीटर दूर है।
#BREAKING: Forces avert another Pulwama type terror attack. In a joint Search op launched at 8am today in Karewa area of Gadikal, a dug in Syntax Tank was spotted. In total 52 Kgs of explosive have been recovered. There were 416 pkts of explosives with each pkt of 125gm. pic.twitter.com/NUTyne95Yp
सेना के एक अधिकारी ने कहा, “हमने पुलवामा जैसा एक और हमला टाल दिया है।’ अधिकारियों ने बताया कि तलाश अभियान के दौरान सुबह करीब आठ बजे पानी की एक टंकी से विस्फोटक बरामद किए गए।” उन्होंने कहा कि इन विस्फोटकों को ‘सुपर-90’ या ‘एस-90’ के नाम से जाना जाता है।
कब हुआ था पुलवामा हमला?
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर बड़ा हमला हुआ था। पुलवामा के अवंतिपोरा में हुए इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने आईईडी से भरी एक कार का इस्तेमाल किया था, जिसे सीआरपीएफ जवानों के काफिले से लड़ा दिया गया था।
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने करवाया था। इस हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया था।
एनआईए ने पुलवामा हमले में आत्मघाती हमलावर के कई साथियों को गिरफ्तार किया था। खबरों की मानें तो एनआईए ने चार्जशीट में बताया है कि हमले में इस्तेमाल किया गया आरडीएक्स (RDX) पाकिस्तान से ही घाटी में लाया गया था। एनआईए ने चार्जशीट में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और उसके भाई अब्दुल रऊफ असगर को आरोपी बनाया है।
इसके अलावा चार्जशीट में मारे गए आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक, आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार और पाकिस्तान से सक्रिय अन्य आतंकवादी कमांडर के नाम भी शामिल हैं। ये सभी नाम अब तक गिरफ्तार किए गए 6 आरोपितों के अलावा शामिल किए गए हैं।
उरी हमला भी जैश के आतंकियों ने ही अंजाम दिया था। इस हमले में 19 सैनिक बलिदान हो गए थे। घंटो चली मुठभेड़ के बाद सेना ने हमला करने वाले आतंकियों को मार गिराया गया था। इस हमले के बाद ही पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।
कॉन्ग्रेस कार्यकाल से लेकर मुलायम, मायावती और अखिलेश यादव के शासन में ऐशोआराम से रहने वाले अतीक अहमद पर योगी सरकार लगातार शिकंजा कसती नजर आ रही है। करोड़ो की संपत्ति को कुर्क करने के बाद यूपी प्रशासन ने अब करोड़ों रुपए की लागत वाले अतीक के कोल्ड स्टोरेज को भी छह-छह जेसीबी मशीनें लगाकर जमींदोज कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार यह कोल्ड स्टोरेज अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन के नाम पर झूंसी के कटका में स्थित था। जिसे अब ध्वस्त कर दिया गया है। डीएम भानुचन्द्र गोस्वामी द्वारा 7 सितम्बर को इस प्रापर्टी को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया था।
दरअसल, 25 सितंबर तक डीएम ने प्रशासन को कुर्की की कार्रवाई पूरी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। लेकिन हजारों किसानों के कई कुंटल आलू रखे होने की वजह से इस काम मे बाधा उत्पन हो गई थी। वहीं प्रशासन ने इसका उपाय निकलते हुए आलुओं को दूसरे कोल्ड स्टोरेज में शिफ्ट करके कुर्की की कार्रवाई का काम पूरा किया।
बता दें प्रयागराज विकास प्राधिकरण की तरफ से बिना स्वीकृत मानचित्र के बने इस कोल्ड स्टोरेज को जमींदोज करने का आदेश जारी किया गया था। इसी आदेश को पूरा करते हुए जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद गुरुवार दोपहर बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पीडीए के जोनल अधिकारी सत शुक्ला और आलोक पाण्डेय के नेतृत्व में की गई। इस मौके पर फूलपुर एसडीएम विवेक चतुर्वेदी और सीओ फूलपुर कई थानों की फोर्स के साथ मौजूद रहे।
इस अवैध कोल्ड स्टोरेज बारे में जानकर आप भी भौचक्के रह जाएंगे। करोड़ों की लागत से बना यह स्टोरेज लगभग दस हज़ार स्क्वायर मीटर की जगह पर बनाया गया था। कुल तीन भूखंडों को मिला कर इसका निर्माण किया गया था। भूमाफियों पर लगातार योगी सरकार नकेल कसती नजर आ रही है। अब तक अतीक की कुल 200 करोड़ की संपत्ति को या तो जब्त या ध्वस्त किया जा चुका है। इतना ही नहीं उसके करीबियों के भी अवैध संपत्तियों को बख्शा नहीं जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा आज ही बाहुबली अतीक अहमद गैंग आईएस-227 के सदस्य और बिजनेस पार्टनर हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद अब्बास खान की सिविल लाइंस में सरदार पटेल मार्ग पर स्थित मैक टावर के खिलाफ की गई है। प्रयागराज विकास प्राधिकारण ने मैक टावर पर नोटिस चस्पा कर सभी दुकानों समेत पूरे टावर को ही सील कर दिया है।
महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से 60 पन्नों का विशेषाधिकार हनन नोटिस रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी को भेजा गया है। सुशांत सिंह मामले में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य सरकार को लगातार घेरने के बाद यह प्रस्ताव राज्य के दोनों सदनों में शिवसेना की ओर से लाया गया था।
नोटिस में कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र विधानसभा के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है, और यदि वह माफी नहीं माँगते हैं, तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। बता दें, विशेषाधिकार प्रस्ताव किसी के ख़िलाफ़ तभी भेजा जाता है जब किसी भी व्यक्ति, प्राधिकरण ने सदन, समिति के सदस्यों, उनके विशेषाधिकार, शक्तियों और प्रतिरक्षा की अवहेलना की होती है।
#BREAKING | Maharashtra Assembly sends a 60-page letter to Arnab Goswami on breach of privilege.
ऐसा करने वाले के ख़िलाफ़ जुर्माना और सजा जो होती है उसका भी सदन में ही निर्णय लिया जाता है। इसके अलावा यह भी ज्ञात रहे कि सदस्यों द्वारा सदन सदन में दिया गया भाषण भी इन्हीं विशेषाधिकार कानूनों के संरक्षण में आते हैं।
अर्नब गोस्वामी ने इसीकी प्रतिक्रिया में एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा ने उन्हें जेल भेजने की धमकी दी है। लेकिन वह सीएम उद्धव ठाकरे और चुने हुएगए प्रतिनिधियों से सवाल पूछना जारी रखेंगे और लड़ना जारी रखेंगे।
पूरा बयान
मैं भारत के लोगों से बात करना चाहता हूँ। महाराष्ट्र विधानसभा ने मुझे एक 60 पन्नों का पत्र भेजा है जिसमें मुझसे पूछा गया है कि मैं मुख्यमंत्री से क्यों सवाल कर रहा हूँ, और मुझे जेल की धमकी और विशेषाधिकार का हनन करने वाला कहा गया है। मैंने इससे लड़ने का फैसला किया है। मैं उद्धव ठाकरे और चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल करता रहूँगा और उनसे लड़ता रहूँगा। मैं उनसे अदालत में लड़ूँगा। संविधान किसी को दिया गया तोहफा नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। मैं उस अधिकार को जारी रखूँगा, अपने प्रश्न पूछूँगा और रिपोर्ट करने के अधिकार का प्रयोग करूँगा।
बता दें, दोनों सदनों में यह विशेषाधिकार प्रस्ताव पहले ही पहुँचा था। यह प्रस्ताव अर्नब गोस्वामी की उन ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणियों के ख़िलाफ़ था जो उन्होंने सुशांत सिंह मामले में सीएम उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद शवार पर की थी।
महाराष्ट्र विधानसभा में प्रस्ताव शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक और विधान परिषद में मनीषा कांडे द्वारा लाया गया था। सरनाईक ने कहा था कि गोस्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बिना किसी सबूत के झूठे आरोप लगाए। सभा को संबोधित करते हुए सरनाईक ने गोस्वामी की कथित टिप्पणियों को लोकतंत्र का ‘मखौल’ बताया था।
वही एक प्रस्ताव अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ भी उनकी टिप्पणी के लिए कॉन्ग्रेस नेता अशोक जगताप द्वारा लाया गया था, जिसमें उन्होंने पीओके के साथ मुंबई की तुलना की थी।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जॉंच आगे बढ़ने के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स का प्रभाव चर्चा में है। रिया चकवर्ती की गिरफ्तारी के बाद से मीडिया रिपोर्टों में लगातार दावा किया जा रहा है कि उन्होंने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के सामने सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और सिमोन खंबोटा जैसों का नाम लिया है। अब बताया जा रहा है कि एनसीबी की जॉंच में एक और हीरोइन का नाम सामने आया है। हालॉंकि यह नाम अब तक स्पष्ट नहीं है।
वैसे बॉलीवुड में ड्रग्स समस्या कोई नई चीज नहीं है। फिल्मी दुनिया के कई सितारे पहले भी ड्रग लेने की बात कबूल चुके हैं। जाहिर है कि फ़िल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स बेहद ही गंभीर समस्या पहले भी थी और अब भी है।
बता दें रणबीर कपूर से लेकर संजय दत्त जैसे कई सितारे इस पर खुल कर अपनी बात रख चुके हैं। वहीं गौरी खान, ममता कुलकर्णी, हनी सिंह से लेकर रणबीर कपूर तक के टॉप सेलिब्रिटीज पर ड्रग्स सेवन का आरोप लग चुका है।
फरदीन खान
फरदीन खान, Image: Stars Unfolded
दिग्गज अभिनेता फ़िरोज़ खान के बेटे फरदीन का बॉलीवुड करियर बहुत ही कम समय का था। उन्हें 5 मई 2001 में मुंबई पुलिस ने कोकीन के साथ गिरफ्तार किया था। इस लत को छुड़ाने के लिए उन्होनें डिटॉक्सिफिकेशन कोर्स भी किया था। 2012 में टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक साक्षात्कार में, फरदीन ने कहा, “कोई भी मन-परिवर्तन करने वाला पदार्थ, चाहे वह मादक पदार्थ हो या शराब या नशे की गोलियाँ, एक घातक निर्भरता पैदा करती है। इससे पहले कि आप इसके बारे में जाने यह आपको ले डूबता है।” नारकोटिक्स डिपार्टमेंट इस मामले में उन्हें चार्ज करने में 10 साल लग गए थे। जिसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी।
संजय दत्त
संजय दत्त, Image: Bollywood Bubble
अनुभवी अभिनेता सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त को 1982 में ड्रग रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में उन्हें पाँच महीने जेल में बिताने पड़े थे। दत्त के नाम कई हाई-प्रोफाइल मामलों में शामिल था। जिसमें 1993 में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट भी शामिल थे। इंडिया टुडे के साथ एक साक्षात्कार में दत्त ने अपनी ड्रग्स लत की समस्याओं के बारे में विस्तार से बात की थी।
उन्होंने बताया कि ड्रग्स का वो फेज उनकी नौ साल की जिंदगी का सबसे बुरा समय था। दत्त ने ड्रग्स समस्या से छुटकारा पाने के लिए अमेरिका में एक रिहैबिलिटेशन केंद्र में समय बिताया। दत्त ने एक बार कहा था, “कोकीन से हेरोइन तक, हर तरह का ड्रग्स मैंने लिया है।”
उन्होंने अपने बॉयोपिक में (जिसमें रणबीर कपूर ने अभिनय किया था) इस बात का खुलासा किया था कि वे एक ड्रग्स के नशे में 2 दिन तक सोते रहे थे। जब वे दो दिन बाद उठे तो उन्हें बहुत भूख लगी थी। उस दिन के बाद उन्होंने अपने पिता कॉन्ग्रेस नेता रहे सुनील दत्त के मदद से ड्रग्स से बाहर निकलने का फैसला किया था।
ममता कुलकर्णी
ममता कुलकर्णीImage: Stars Unfolded
90 के दशक में ममता कुलकर्णी बी-टाउन से शुरुआती जीवन में बड़े सितारों में एक थी। अभिनेत्री पर ड्रग्स मामलों में लिप्त पाए जाने के बाद 2014 केन्या में मामला दर्ज किया गया था। उन्हें केन्या पुलिस ने पति विक्की गोस्वामी और एक अन्य भारतीय नागरिक कुलम हुसैन के साथ गिरफ्तार किया था। कुलकर्णी ने 2000 के दशक में बॉलीवुड छोड़ दिया था। उन्होंने कथित तौर पर कुख्यात अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉर्ड गोस्वामी से शादी की थी। गोस्वामी ड्रग मामले के आरोप में 10 साल दुबई जेल में बंद था। जिसके बाद उन्होंने केन्या आकर रियल एस्टेट में कारोबार शुरू किया था।
हनी सिंह
हनी सिंह Image: Huffpost India
अपने रैप और पंजाबी संगीत के लिए जाने जाने वाले रैपर-कम-स्टार गायक हनी सिंह का शराब के नशे का लंबा इतिहास रहा है। हनी सिंह ने 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी लत की समस्या का खुलासा किया था। जिसके कारण 18 महीने तक इंडस्ट्री से गायब रहे थे। जब वह बिना किसी सूचना के गायब हो गए थे तो यह अफवाहें सामने आई थी कि वह अपनी ड्रग्स की समस्या के लिए रिहैब केंद्र में समय बिता रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने सभी अफवाहों से इनकार करते हुए कहा था कि वह शराब की लत छुड़ाने के लिए इलाज करवा रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर है और वे एक शराबी हैं।
गीतांजलि नागपाल
गीतांजलि नागपाल Image: Indiatimes
फैशन इंडस्ट्री को फॉलो करने वालों को गीतांजलि नागपाल के बारे में पता होगा। सुष्मिता सेन और अन्य प्रसिद्ध मॉडलों के साथ रैंप साझा करने वाली सफल मॉडलों में उन्हें जाना जाता है। नशे की लत ने उनसे काफी कुछ छीन लिया। एक फोटो जर्नलिस्ट ने सितंबर 2007 में उन्हें दिल्ली की सड़कों पर भीख माँगते हुए देखा था। हालाँकि किसी को नहीं पता था कि एक पूर्व-नौसेना अधिकारी की बेटी सड़कों पर रहने के लिए क्यों मजबूर हो गई थी। इस घटना से पहले वह एक ब्रिटिश नागरिक के साथ रिश्ते में थी।
गौरी खान
गौरी खानImage: BW Businessworld
भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान पर आरोप लगा था कि गौरी खान को बर्लिन एयरपोर्ट पर मारिजुआना के साथ पकड़ा गया था। हालाँकि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। हालाँकि बर्लिन या भारत में हवाई अड्डे के अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से उनका नाम जारी नहीं किया गया था। केवल यह बात सामने आई थी कि एक अभिनेता की पत्नी बर्लिन में पकड़ी गई थी।
सुज़ैन खान
सुज़ैन खानImage: Times of India
प्रसिद्ध इंटीरियर डिजाइनर और ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुज़ैन खान को लेकर एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नशे की लत उनके तलाक के पीछे के प्राथमिक कारणों में से एक थी। एक साक्षात्कार में सुज़ैन के पिता अनुभवी अभिनेता संजय खान ने इनडाइरेक्ट तरीके से अपनी बेटी के ड्रग्स की लत के बारे में कहा था। सुज़ैन खान फरदीन खान की चचेरी बहन हैं।
रणबीर कपूर
रणबीर कपूरImage: India.com
दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर और नीतू सिंह के बेटे रणबीर कपूर फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने लोगों में से एक है। उन्हें भी एक मामले में मादक द्रव्यों के सेवन से भी जोड़ा गया था। डेक्कन क्रॉनिकल के साथ अपने एक साक्षात्कार में, उन्होंने कॉलेज के समय में ड्रग्स के सेवन को स्वीकार किया था।
उन्होंने कहा, “मैंने ड्रग्स का इस्तेमाल किया है जब मैं फिल्म स्कूल में था और उस समय बुरे प्रभाव में आ गया था। लेकिन मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं ड्रग्स का सेवन जारी रखता हूँ तो मैं जीवन में कुछ नहीं कर पाऊँगा।” हालाँकि उन्होंने कॉलेज के बाद हार्ड ड्रग्स का सेवन नहीं किया लेकिन उन्हें निकोटिन की लत है।
विजय राज
विजय राज Image: Super Star Bio
अपनी कॉमिक भूमिकाओं के लिए जाने जाने वाले विजय राज को 2005 में अबू धाबी पुलिस ने DJ अकील के साथ ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। राज ने एक सप्ताह जेल में बिताया था। विजय ने दावा किया कि वह निर्दोष थे और उन्हें समझ में नहीं आया कि हवाई अड्डे के अधिकारी अरबी में क्या बता रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि वे कोई नशीला पदार्थ नहीं ले जा रहे थे।
कंगना रनौत
कंगना रनौतImage: Naidunia
कंगना रनौत विवादों से घिरे रहने वालों में कोई नया नाम नहीं हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने दावा किया था कि 90 प्रतिशत बॉलीवुड ड्रग एडिक्ट है। हालाँकि, उन पर पिछले दिनों आरोप लगे थे कि वह ड्रग्स की आदी थी। उन्होंने मार्च में एक IGTV वीडियो अपलोड किया था। जिसमें उन्होंने अपने जीवन के एक समय में ड्रग एडिक्ट होने की बात स्वीकार की थी। उनके पूर्व-प्रेमी अध्यायन सुमन ने भी एक साक्षात्कार के दौरान यह आरोप लगाया था कि वह ड्रग एडिक्ट हैं।
परवीन बॉबी
परवीन बॉबी Image: Patrika
हिंदी फिल्मों में 70 और 80 के दशक की सबसे ग्लैमरस एक्ट्रेस रहीं परवीन बॉबी की जिंदगी भी ड्रग्स के चलते बर्बाद हो गई थी। जानलेवा ड्रग्स और शराब की लत की वजह से उनकी मानसिक हालात बिगड़ गई थी। नशे की लत से मजबूर वह अपने सहयोगियों पर संदेह करने लगी थी। कथित तौर पर उन्होंने दावा किया था कि उनके पास 1993 में हुए मुंबई बम विस्फोट मामले में संजय दत्त के शामिल होने का सबूत है। वह फिल्म निर्माता महेश भट्ट के साथ भी रिश्ते में थीं।
मनीष कोइराला
मनीष कोइरालाImage: DNA
बॉलीवुड में अपनी अदाओं से सबको दीवाना बनाने वाली मनीषा कोइराला को कथित तौर पर एक ड्रग एडिक्ट बताया गया था। कथित तौर पर इसके कारण ही उन्हें कैंसर हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार अपने करियर के चरम पर वह ड्रग्स की आदी हो गई थीं। हालाँकि ड्रग्स के नशे को लेकर मनीषा ने कभी खुलकर बात नहीं कि लेकिन ड्रग्स की लत ने ही उनकी पर्सनल जिंदगी और करियर को भी चौपट कर दिया था।
बॉलीवुड, पार्टी और ड्रग्स
यदि कोई बॉलीवुड में सफल होना चाहता है, तो उसे पार्टियों में शामिल होना पड़ता है। यह फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित नामों से जुड़ने का सबसे अच्छा तरीका है। हालाँकि, ये पार्टियाँ केवल नेटवर्क बिल्डिंग के लिए ही नहीं हैं। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि ऐसी पार्टियों के दौरान ड्रग्स का खुल कर सेवन भी किया जाता है। पार्टी में हर तरीके का ड्रग्स इस्तेमाल होते हुए देखा जा सकता है। कोई ऐसा कोना नहीं बचता, जहाँ नशीली दवाइयाँ पड़ी न हो। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कोकीन और अन्य हार्ड ड्रग्स मुश्किल से ही देख सकते हैं। लेकिन अगर आप पॉट धूम्रपान करना चाहते हैं, तो बॉलीवुड पार्टी में हर तीसरे व्यक्ति के पास कुछ न कुछ मिलेगा ही।
‘कला के नाम पर भोजपुरी फिल्मों में नंगा नाच होता है’- यह कहना एक ऐसे शख्स का है जो खुद ऐसी इंडस्ट्री से ताल्लुक रखता है जहाँ सॉन्ग्स और आयटम सॉन्ग्स के नाम पर लड़कियों के अंगों का व्यापारिकरण दशकों से चला आ रहा है। आपने सही सोचा- ये इंडस्ट्री बॉलीवुड की है और भोजपुरी फिल्मों पर हाय-तौबा मचाने वाले शख्स का नाम अनुभव सिन्हा है, जो पेशे से एक निर्देशक है।
अनुभव सिन्हा के इस बयान का जवाब भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने एक वीडियो जारी करके दिया है। अक्षरा ने अपनी वीडियो में समझाया है कि कैसे छोटे शहर से आने वाले भोजपुरी अभिनेता अपने दमखम से बॉलीवुड में जगह बनाते हैं और फिर राजनीति जैसे क्षेत्रों में भी अपना लोहा मनवाते हैं। वहीं बॉलीवुड ऐसी जगह है जिसकी सच्चाई दुनिया देख रही है, जहाँ हत्याकांड, सुसाइड और ड्रग जैसे मैटर होते रहते हैं।
अब इस पूरे विवाद में कई लोग अपने अपने मत रख रहे हैं। कुछ लोग अनुभव सिन्हा के पक्ष में है और कुछ उनकी आलोचना कर रहे हैं। मगर इस बीच यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि यह केवल किसी ‘एक शख्स’ की भोजपुरी इंडस्ट्री के बारे में सोच नहीं है। यह सोच एक बॉलीवुड निर्देशक की है जिसका काम बड़े पर्दों पर दर्शकों को ऐसी कहानियाँ दिखाने का है, जिसे न केवल लोग मनोरंजन का हिस्सा मानते हैं, बल्कि अपने जीने के तौर-तरीके में भी उसी हिसाब से बदलाव करते हैं।
भारत में फैशन की परिभाषा बॉलीवुड तय करता है। लड़कियों के खुले विचार, उनकी अच्छी- बुरी छवि, सब कुछ बड़े पर्दे पर ही तय होती है। ‘शानदार’ फिल्म में शादी के मंडप पर एक महिला कैरेक्टर शादी का जोड़ा उतारना शुरू नहीं करती कि इधर दर्शकों में बैठे एक तबके के रौंगटे खड़े हो जाते हैं। वह इसी बोल्डनेस को लड़की की आवाज उठाना समझ लेते हैं। उन तमाम मासूमों को यह नहीं पता होता कि मोटी लड़की पर हँसना और समाज में उसे पतली लड़की से कमतर दिखाने का काम भी बॉलीवुड ने अपनी फिल्मों के जरिए ही किया है।
हाल में आई ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म को याद करिए। चार सहेलियों की कहानी। इसमें स्वरा भास्कर जैसी तथाकथित प्रोग्रेसिव अभिनेत्री masturabation करते हुए एक सीन देती हैं और संदेश देने की कोशिश करती हैं कि एक लड़की की इच्छाएँ इन सबके भी इर्द-गिर्द घूमती है, मगर समाज उन्हें पर्दे में रखता है और गलत समझता है, जिसके कारण वह असहज महसूस करके इन्हें छिपाती हैं। इस फिल्म का एक और कैरेक्टर सोनम कपूर हैं जिन्हें फिल्म में यह भी नहीं पता कि उनके साथ सोने वाला लड़का कौन है, कितना पढ़ा-लिखा है… तो ये उदाहरण ये बताने के लिए है कि आखिर बॉलीवुड क्या है और वह दर्शकों को क्या परोस रहा है।
ऐसे में बॉलीवुड से जुड़े लोग जब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री पर सवाल उठाते हैं तो इससे ज्यादा हास्यास्पद क्या बात होगी! लेकिन देखा जाए तो इनका ये रवैया भारतीयों (खासकर एलीट क्लास) के डबल स्टैंडर्ड ने ही तय किया है। भाषा के आधार पर भेदभाव तो यहाँ हमेशा से होता आ रहा है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में यह लड़ाई अंग्रेजी भाषा और हिंदी के बीच होती है। जैसे जो गाली भारतीयों को अंग्रेजी में स्टेटस का सबब लगती है। वही गाली हिंदी में दी जाए तो इंसान आग बबूला हो जाता है।
यही हालत बॉलीवुड इंडस्ट्री की भोजपुरी भाषा के साथ है। मसलन ‘एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे’ इन लोगों के लिए एपिक सॉन्ग्स की लिस्ट में आता है। वहीं ‘एगो चुम्मा दे दो राजा जी’ बहुत अश्लील हो जाता है। एक जनाब अनुभव सिन्हा के ट्वीट पर लिखते हैं कि भोजपुरी में कोई गाना ऐसा नही है जो असभ्य न हो। अगर परिवार के साथ आप कही हों तो आप इन्हें सुन भी नहीं सकते, क्योंकि शर्म आने लगती है।
अब भाषा के आधार पर यदि बात शर्म आने की है तो ‘सरकाई लियो खटिया जाड़ा लगे’; ‘खड़ा है खड़ा है (पॉज के बाद)… दर पे तेरे आशिक खड़ा है’ ; ‘टिप टिप बरसा पानी, पानी में आग लगी’ ;’चोली के नीचे क्या है’ जैसे गाने उस समय के हैं जब भोजपुरी इंडस्ट्री लोगों तक पहुँचनी भी शुरू नहीं हुई थी, फिर भी विजुअल्स के साथ इन गानों के दो मतलब दर्शक तक पहुँचने लगे थे।
भोजपुरी फिल्म ने बॉलीवुड को क्या दिया? ये कहना भले ही मुश्किल है, मगर विचार करने वाली बात यह है कि जिस बॉलीवुड से सीख कर भोजपुरी इंडस्ट्री ने खुद को स्थापित किया और आज भी उनकी तरह प्रसिद्ध होना चाहती है, उस पर बॉलीवुड ही अगर सवाल उठा रहा है तो सोचिए समाज में असल रूप से नंगा नाच कहाँ चल रहा है।
हिंदी एक भाषा है जिसे भारत में कई जगह बोला जाता है, लेकिन भोजपुरी कम जगहों पर बोली जाती और एक संस्कृति का समावेश है। समय के साथ-साथ इसके इर्द गिर्द घूमने वाली भाषाएँ भी आज इसका लुत्फ उठा रही है और ये सब सिर्फ भोजपुरी इंडस्ट्री के कारण हो पाया है। कम पैकेज में बनी फिल्म या एल्बम कैसे कमाल करती हैं, यह भोजपुरी इंडस्ट्री ने ही सिखाया है। वरना अगर बात बॉलीवुड की होती तो अदनान सामी के एवरग्रीन गाने ‘थोड़ी सी लिफ्ट करा दे’ में गोविंदा को अपना चेहरा नहीं दिखाना पड़ता।
भोजपुरी इंडस्ट्री हमें और आपको वही दिखा रही है जो बॉलीवुड सालों से दिखाता आया है। फर्क बस यह है कि वहाँ के कुछ एक्टर्स (जिनके गानों को अश्लील कहा जाता है) भाव दर्शाने में बॉलीवुड अभिनेताओं- अभिनेत्रियों की तरह खरे नहीं उतर पाते, जिससे पूरा गाना थोड़ा अजीब जरूर लगने लगता है मगर उसके कारण हम भोजपुरी भाषा को या उस इंडस्ट्री को दोष नहीं दे सकते।
हिंदी भाषा आज किताबों में पढ़ाई जाती है फिर भी हिंदी का प्रयोग डायलॉग और गानों में जैसे हो रहा है वह शर्मनाक है, लोग धड़ल्ले से उसे बोल रहे हैं और समाज स्वीकार भी कर रहा है। इसलिए, यह समझने की जरूरत है कि भोजपुरी भी बस एक भाषा है और सिर्फ भोजपुरी में गीत होने से ही वो अश्लील नहीं हो जाता। आज भोजपुरी के कारण भारत का लोक संगीत में विश्व ख्याति भी पा रहा है।
वैश्विक स्तर पर बॉलीवुड की तमाम कामयाबी और ऊँचाइयों के बावजूद, छोटी सी भोजपुरी इंडस्ट्री में तसल्ली की बात यह है कि यहाँ पर कलाकार आकर संघर्ष करता है तो उसे खराब एक्टिंग के बावजूद छोटा रोल तो मिल ही जाता है, जिसका बाद में हम और आप जैसे दर्शक खूब मजाक उड़ाते हैं। लेकिन वो छोटा रोल किसी का पहला रोजगार होता है जो बॉलीवुड में मिलना असंभव है।
बॉलीवुड में ग्लैमर के नाम पर जो गंदगी पिछले 15 सालों में दर्शकों को देखने को मिली है। उसका मुकाबला शायद ही भोजपुरी का कोई गाना कर पाए। साल 2005 में आई ‘आशिक बनाया आपने’ का टाइटल सॉन्ग विजुअल्स सहित देखिए कभी। तनुश्री दत्ता का टॉपलेस होने से लेकर पूरे गाने के खत्म होने तक का सीन आज एक कल्चर की तरह दिखने लगा है और गाने में यदि बात भाषा के चुनाव की है तो क्या बुद्धिजीवी लोगों से यह उम्मीद की जाए कि वह शीला की जवानी, जलेबी बाई, चिपका ले सैंया फेविकोल से, मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए, चिकनी चमेली, डैडी मम्मी हैं नहीं घर पे, शेक योर बूटी जैसे आयटम गानों पर अपनी आवाज बुलंद करें? या “आई एम अ हंटर एंड शी वॉन्ट टू सी माय गन” जैसे गानों का मतलब श्रोताओं को समझाएँ कि कैसे इन गानों के जरिए वह सभ्य चीजें बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं?
विचार करिए कि यदि बात नैतिकता दिखाने की है तो भोजपुरी और बॉलीवुड में लड़ाई कैसी? ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भारतीय समाज को यह दोनों कैसे प्रभावित करते हैं ये बात सिर्फ़ इनके दर्शकों पर निर्भर करती हैं। आज की भोजपुरी इंडस्ट्री पुरानी इंडस्ट्री जैसी नहीं रह गई जहाँ बगल फटी शर्ट के साथ मनोज तिवारी ‘ऊपर वाली के चक्कर में’ जैसे हिट गाने दे देंं या सीनरी लगाकर पूरा गाना शूट हो जाए। बात तकनीक की हो, फैशन की हो, एक्शन की हो, या रोमांस की भोजपुरी इंडस्ट्री हर मायने में बॉलीवुड को टक्कर देने में प्रयासरत है। शायद बॉलीवुड को भी इसी लिए इससे दिक्कत हो गई है।
आज की भोजपुरी फिल्मों में भले ही एक देसी टच होता जरूर है, पर फिर भी उसकी कोशिश बॉलीवुड पसंद करने वाले दर्शकों को भी अपनी तरफ आकर्षित करने की होती है। इसलिए केवल भाषा के जुड़ जाने से किसी उद्योग को अश्लील बताना संकीर्ण मानसिकता का प्रदर्शन है। बड़े-बड़े निर्देशक जब पाश्चत्य संस्कृति को बॉलीवुड में दिखाने की कोशिश करते हैं तो वो भारत की आम जनता को परिवार के साथ देखते हुए अभद्र ही लगता है। किंतु अकेले में वह मनोरंजन में तब्दील हो जाती है।
ऐसे में खुद सोचिए भोजपुरी की पहुँच उन लोगों तक है जो इस भाषा को पसंद करते है। वहीं बॉलीवुड के गाने तो ‘गंदगी’ हर जगह पहुँचा रहे हैं। आज छोटे-छोटे बच्चे भी उन्हें देखकर डांस करते हुए अजीब तरह के भाव चेहरे पर लाने लगते हैं फिर वो तो भोजपुरी इंडस्ट्री है जो बॉलीवुड जितना ही नाम कमाना चाहती है।
भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे गतिरोध पर संसद को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन के नियंत्रण में लद्दाख में लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश में भी भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र में 90,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को 1963 के सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया था।
चीन के दुर्भावनापूर्ण इरादों के बारे में बोलते हुए, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच सीमाओं के पारंपरिक और प्रथागत निर्धारण को स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने एलएसी पर तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय सेना के धैर्य के साथ-साथ अदम्य सहस दिखाने के लिए भारतीय सुरक्षाबलों की प्रशंसा की, उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत एलएसी पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। संसद के अन्य सदस्यों ने भी सशस्त्र बलों के साथ एकजुटता दिखाई।
हालाँकि, कुछ कॉन्ग्रेसी नेता और कुछ लगातार फेक न्यूज़ फ़ैलाने वालों ने खुद को लंबे समय तक रोक नहीं पाए और संसद में रक्षा मंत्री के भाषण को घुमाकर चीन के नियंत्रण वाले भारतीय क्षेत्र के बारे में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाना शुरू कर दिया। जाहिर तौर पर यह मानते हुए कि लोग उनके सफ़ेद झूठ के झाँसे में आ जाएँगे। इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने रक्षा मंत्री के शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए कहा कि चीन ने लद्दाख में 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर एलएसी के हालिया गतिरोध के दौरान कब्जा कर लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और उन्हें “डरपोक चौकीदार” भी कहा।
So, India's Defence Minister Rajnath Singh admits in Parliament that China has occupied Indian Land, around 38000 sq kms illegally. PM Modi lied & gave pro-China statement. He is scared to name China. DARPOK CHOWKIDAR!
जल्द ही अन्य दूसरे फेक न्यूज़ पेडलर्स ने भी अपनी मंद बुद्धि को उजागर करते हुए इसी झूठ के दलदल में कूद पड़े और उसी झूठ पर अपना एजेंडा चलाने लगे। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेसी आईटी सेल के सोशल मीडिया विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक गौरव पांधी ने पीएम मोदी को ‘देश का गद्दार’ भी कह दिया।
China invaded our territory & occupied 38000 sq km land in Ladakh
China — we didn't infiltrate, where we are right now is our territory
BJP Govt — China didn't infiltrate, where they are right now is their territory
ट्विटर पर कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल भी कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे झूठ को आगे बढ़ाने में शामिल हो गए और फेक न्यूज़ फैलाने के मुहीम में लग गए।
Happy Birthday to the best Prime Minister in the world, Narendra Modi, Who gifted 38000 sq km of land to the Chinese in #laddakh.#shutupkangana ????
— Red Media Pakistan ?????????????? (@RedStoneProduc4) September 17, 2020
ट्विटर पर एक अन्य फेक न्यूज़ पेडलर ने बड़ी ही धूर्तता के साथ एक ऐस वीडियो क्लिप साझा किया जिसमें चीनी नियंत्रण के तहत भारतीय क्षेत्र के बारे में रक्षा मंत्री का बयान और प्रधान मंत्री का बयान था जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि कोई भी नया क्षेत्र भारत ने नहीं खोया है।
विवादास्पद तथाकथित ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब, जो एक आदतन मशहूर फेक न्यूज़ पेडलर हैं, अब इस मुहीम में कैसे पीछे रह सकती थी। उन्होंने ने भी अपना कर्तव्य निभाते हुए उसी झूठ को आगे बढ़ा दिया और यह एजेंडा भी कि कैसे मीडिया ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाया था। क्या उनको मोदी की जगह पर रखा गया था।
जाहिर है, कॉन्ग्रेस के नेताओं ने अपने साथी फेक न्यूज पेडलर्स के साथ मिलकर लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए जोरदार कोशिश की कि भारत LAC पर हालिया गतिरोध में 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन से हार गया। क्योंकि, जब राजनाथ सिंह 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि के चीन के कब्जे के बारे में बात कर रहे थे, तो वह जवाहरलाल नेहरू के शासन के दौरान चीन के कब्जे वाले लद्दाख के हिस्से अक्साई चिन के बारे में बात कर रहे थे। वास्तव में, नेहरू अवैध कब्जे के बारे में भी कभी चिंतित नहीं थे, खुद का बचाव करने के लिए यह कहते हुए कि घास का एक तिनका भी वहाँ नहीं उगता है।
हालाँकि, अब यह कॉन्ग्रेसी नेताओं और उनके पाले हुए साथी फेक न्यूज़ पेडलर्स की एक पुरानी और उबाऊ चाल है और लोग इसके बारे में काफी अच्छी तरह से वाकिफ़ हैं। कॉन्ग्रेस पिछले लम्बे समय से कभी भी फर्जी समाचार फैलाने और तथ्यों को छिपाने या ट्विस्ट देकर सरकार को निशाना बनाने का एक भी मौका नहीं चूकती है, भले ही उन्हें इस प्रक्रिया में देश के हितों को नुकसान ही क्यों न पहुँचाना पड़े।
बिहार के बेगूसराय से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मोहम्मद मोफिज पर अपनी एक नाबालिग बेटी से रेप और दो अन्य नाबालिग बेटियों के साथ दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगा है।
आरोपित जब दुबई में रहता था तो वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों के सामने अश्लील हरकतें करता और नग्न अवस्था में उन्हें कॉल करता था। वह बेटियों के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें भी साझा करता था। घर आने पर बेटियों का यौन शोषण करता था। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मोहम्मद मोफिज को गिरफ्तार कर लिया है। उसके ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया है।
ऑपइंडिया ने इस संबंध में आरोपित की बड़ी बेटी सलमा (बदला हुआ नाम) से बात की। सलमा ने हमें बताया कि कुछ समय बाद वह 18 साल की होने वाली है, लेकिन पिता उसके साथ ऐसी हरकतें तब से कर रहे हैं, जब वह 12-13 साल की थी।
मोहम्मद मोफिज के खिलाफ बेटी द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत
सलमा के मुताबिक, मोफिज उसके साथ 2-3 बार संबंध बना चुका है और उसकी बहनों 14 वर्षीय बहन नगमा (बदला हुआ नाम) और 12 वर्षीय बहन फरहीन (बदला हुआ नाम) को न जाने कितनी बार संबंध बनाने के लिए अपने सामने नंगा कर चुका है। पीड़ित लड़की की मानें तो उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।
पीड़िता का कहना है कि शुरुआत में उन लोगों ने अपने पिता की हरकतों की शिकायत अपनी माँ से की थी, मगर माँ को लगता था कि शायद बच्चियाँ पिता के दुलार को गलत समझ रही है। हालाँकि, जब यह सब ज्यादा होने लगा तो बेटियों ने अपनी माँ को सबूत दिखाया जिसे देख माँ भी हक्का-बक्का रह गई। माँ ने इस संबंध में अपने शौहर से बात की, लेकिन मोफिज ने अपनी पत्नी की सुनने की बजाय उससे लड़ना शुरू कर दिया।
पीड़िता कहती है कि शुरुआत में तो उनकी माँ ने उनके पिता को कुछ नहीं कहा। बस दोनों के बीच आपसी लड़ाई होती रही। मगर, एक दिन बच्चियों की माँ ने अपने भाई को सारी बात बताने की धमकी उसे दे दी, जिसके बाद मोफिज ने साजिश के तहत उन्हें बलिया के स्टेशन के समीप धकेल दिया और उन्हें मारने की कोशिश की। हालाँकि इतने के बाद भी जब वह ठीक होने लगीं तो उन्हें बेगूसराय लाकर गलत इलाज देकर मार दिया गया।
सलमा के अनुसार, माँ की मृत्यु के बाद से ही मोफिज उस पर शादी का दबाव बना रहा था और उन्हें घर में कैद कर रखा हुआ था। उनके पास कोई फोन भी नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक दिन सारी बातें लड़कियों ने अपनी नानी को बताई। नानी से यह बात उनके मामा को पता चली और उन्होंने आवाज उठाई। बाद में बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज की मदद से मामला थाने पहुँचा और मोफिज को गिरफ्तार किया गया। शुभम के अनुसार, पीड़िताओं द्वारा संपर्क किए जाने के बादे वे उन्हें लेकर थाने गए। वहॉं मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
शुभम भारद्वाज ने बताया, “एक विधर्मी अरब देश में काम करता है। वो पिछले 5 साल से अपनी तीनों बेटियों के साथ गलत काम करता आ रहा है। बड़ी बेटी का वह कई बार बलात्कार कर चुका है। ऐसा उसकी बड़ी बेटी ने ही आरोप लगाया है। थाने में केस धारा 376, 377 और पॉक्सो एक्ट के तहत रजिस्टर हो गया है।”
वे कहते हैं, “लड़की काफी डरी हुई थी। वह कई बार गाँव के मुखिया जैसे लोगों के पास गई लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो वह बजरंग दल के पास आई। इसके बाद हमने एसपी और डीएसपी को जानकारी दी और उन्होंने 24 घंटों के भीतर आरोपित को पकड़कर जेल में डाल दिया। इस घटना की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में होनी चाहिए।”
शुभम भारद्वाज का दावा है कि पीड़िताओं की माँ की हत्या भी उनके पिता ने ही की है। जब लड़कियों के मामा उन्हें बचाने आए तो उसे उनके पिता ने पिस्टल थमा कर जेल भिजवा दिया। जब लड़कियों ने इस बारे में अपने रिश्ते के एक भाई को बताया तो उन्होंने कहा कि अब्बा की बात मानो।