Home Blog Page 449

अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया… 41 देशों पर ट्रैवल बना लगा सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के पास बचने के लिए 60 दिन: पिछले कार्यकाल में भी इस्लामी देशों पर लगाई थी पाबंदी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन 41 देशों के लोगों पर ट्रैवल बैन लगाने पर विचार कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी मेमो के हवाले से बताया कि ये लिस्ट अभी पक्की नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इसे अभी यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की मंजूरी भी नहीं मिली है। इस मेमो में 41 देशों को तीन हिस्सों में बाँटा गया है।

पहले ग्रुप में 10 देश हैं- अफगानिस्तान, क्यूबा, ईरान, लीबिया, नॉर्थ कोरिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और यमन। इन पर पूरी तरह से वीजा सस्पेंशन की बात है, यानी इन देशों के लोग अमेरिका नहीं आ सकेंगे। दूसरा ग्रुप पाँच देशों का है- इरिट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और साउथ सूडान। यहाँ टूरिस्ट, स्टूडेंट और कुछ खास तरह के वीजा पर आंशिक रोक लगेगी, लेकिन कुछ छूट भी होंगे।

तीसरे ग्रुप में 26 देश हैं, जिसमें पाकिस्तान, बेलारूस, अंगोला, भूटान, कम्बोडिया, चाड, लाइबेरिया, मॉरीतानिया, तुर्कमेनिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इन देशों को 60 दिन का वक्त दिया जाएगा कि वो अपनी कमियाँ ठीक करें, वरना इनके वीजा पर भी आंशिक पाबंदी लग सकती है।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी ऐसा कुछ किया था। तब उन्होंने सात इस्लामिक देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मंजूरी दे दी थी। उस वक्त खूब विवाद हुआ था। बाद में जो बाइडन ने राष्ट्रपति बनते ही उस बैन को हटा दिया और इसे देश के लिए ‘राजनीतिक दाग’ बताया था।

अब ट्रंप ने दोबारा सत्ता में आते ही 20 जनवरी 2025 को एक ऑर्डर साइन किया, जिसमें विदेशियों के लिए सख्त सिक्योरिटी चेकिंग की बात कही गई। उनका कहना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों को रोका जा सकेगा। ट्रंप ने अक्टूबर 2023 में एक स्पीच में भी इसका जिक्र किया था कि वो गाजा, लीबिया, सोमालिया, सीरिया, यमन जैसे इलाकों से आने वालों पर रोक लगाएँगे।

इस बार की लिस्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले रिपोर्ट किया था। मेमो के मुताबिक, ट्रंप ने अपने मंत्रियों को 21 मार्च 2025 तक ऐसी देशों की लिस्ट देने को कहा था, जहाँ से आने वालों की स्क्रीनिंग में दिक्कत है। स्टेट डिपार्टमेंट ने अभी इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।

दिल्ली में होली पर दो भाइयों पर जानलेवा हमला: एक का फूटा सिर, दूसरे के हाथ में बोर्ड परीक्षा से पहले प्लास्टर चढ़ा: परिवार पूछ रहा- गलती क्या थी

आपके बच्चे घर से हँसते-मुस्कुराते निकलें और अचानक उनपर कुछ लोग जानलेवा हमला कर दें… ये सोचकर आपको कैसा लगेगा? क्या आपका दिल नहीं काँपेगा जब सारे चश्मदीद आपको ये बताएँ कि हमलावरों के हाथ में लाठी-ंडंडे, चाकू-फरसे सब थे? आप पर क्या बीतेगी अगर आप अपने बच्चों को खून से लथपथ देखें? आपका कितना विश्वास प्रशासन पर बचेगा जब आप अपनी गुहार लेकर पुलिस के पास जाएँ, उन्हें आरोपितों के बारे में बताएँ और फिर भी कोई कार्रवाई न हो?

ये सारे सवाल हैं दिल्ली लक्ष्मीनगर के स्कूल ब्लॉक में रह रहे एक परिवार के, जिनके घर के दो लड़कों पर दिनदहाड़े हमला हुआ। 14 मार्च 2025 को होली मनाने के बाद दोपहर 3:15 बजे दो भाई अपने घर से निकलकर मेट्रो स्टेशन तक जा रहे थे, लेकिन गली से बाहर पहुँचते ही उन्हें 10-12 लड़कों ने घेर लिया और उन्हें तब तक मारा जब तक एक के सिर से खून नहीं निकला। 

पीड़ित लड़कों की पहचान अर्जित (21), हर्षित (17) के तौर पर हुई है। दोनों लड़के घटना में बुरी तरह घायल हो गए। एक के सिर पर चोट आई, जबकि दूसरे का हाथ फ्रैक्चर हो गया। जिस 17 वर्षीय हर्षित के हाथ में चोट लगी वो 12वीं का छात्र है और इस समय उसकी बोर्ड परीक्षा भी चल रही है।

पीड़ित भाइयों के अनुसार, उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और न उनका कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ था। वे अपने एक परिजन को मेट्रो स्टेशन तक छोड़ने जा रहे थे। इसी बीच कुछ लोग आए और कॉलर पकड़कर उन्हें घसीटकर गली के बाहर ले गए। इसके बाद एक के बाद एक 10-12 लड़के आए और दोनों भाइयों को पीटना शुरू कर दिया।

अर्जित, हर्षित ने बचाव का प्रयास किया तो उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए। आसपास किसी ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें चाकू दिखाकर पीछे कर दिया गया। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर जिस तरह मार रहे थे उसमें दोनों लड़कों की जान चली जाती, अगर उन्हें भागना का मौका नहीं मिलता।

हर्षित अब भी इस घटना के बाद डरा-सहमा है। उसे रात भर नींद नहीं आई। वहीं बच्चों के माता-पिता को समझ नहीं आ रहा कि उनके बच्चों की क्या गलती थी? अगर इस घटना में उनकी जान चली जाती तो वो लोग क्या करते?

पिता के मुताबिक, उन्हें घटना की सूचना करीबन 4 बजे मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई, मगर सुनवाई न होने पर उन्होंने खुद सीसीटीवी खँगाले और 4 घंटे की मशक्कत के बाद वह एक आरोपित तक जा पहुँचे। आरोपित ने खुद कबूला कि वो उस भीड़ में था और उनमें से एक के पास चाकू भी था।

पीड़ित परिवार का पूछना है कि आखिर उनके बच्चों की गलती क्या थी जो इतनी बेरहमी से मारा गया? उनका सवाल उन लोगों से भी है कि जो लोग मूकदर्शक बने उनके बच्चों पर होते हमले को देखते रहे? वह कहते हैं कि जो लोग वहाँ मौजूद होकर वीडियो बना रहे थे, कोने में खड़े होकर बच्चों को पिटता देख रहे थे, वे तब भी यही रवैया रखते अगर बच्चा उनके अपने घर का होता?

बता दें कि हमले की सूचना होने के बाद पुलिस से गुहार लगाई जा रही है कि वो इस मामले में सख्त एक्शन लें ताकि इलाके के किसी और बच्चे के साथ ऐसी घटना न घटे। हालाँकि केस में अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिजनों को एफआईआर होने का इंतजार है। स्थानीय भी हैरान हैं, ज्यादातर लोगों का कहना है कि उन्होंने आसपास कभी ऐसा भयानक मंजर नहीं देखा था। वह नहीं चाहते कि उनके इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाए इसीलिए इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।

‘हिम्मत कैसे हुई जय श्रीराम बोलने की’: डोल पूर्णिमा-होली मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, BJP ने शेयर किया बंगाल के बीरभूम का Video

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में होली के दिन शुक्रवार (14 मार्च 2025) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर हमला बोल दिया। मामला बीरभूम जिले के अनाईपुर गाँव का है, जहाँ डोल पूर्णिमा और होली मना रहे हिंदुओं पर इस्लामी भीड़ ने हमला कर दिया। पुलिस की मौजूदगी में भी ये हमले जारी रहे।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “बीरभूम में हिंदुओं पर होली मनाने के लिए हमला हुआ! ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल धीरे-धीरे बांग्लादेश जैसा बनता जा रहा है।” उन्होंने कहा कि इस हमले की अगुआई टीएमसी के पंचायत सदस्य ने की थी। मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर निशाना बनाया और वीडियो में सुना गया कि वे कह रहे थे, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये नारा लगाने की?”

अमित मालवीय ने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने हिंदुओं को हिंसा से बचाने की बजाय हमलावरों को बचाया। उन्होंने कहा, “हैरानी की बात है कि पुलिस मौजूद थी, फिर भी हमले बढ़ते गए। वीडियो में हिंदू कहते दिखे कि पुलिस खड़ी रही और हम पर हमला हुआ।”

इस हिंसक झड़प के बाद बीरभूम जिला प्रशासन ने सैंथिया कस्बे के पास पाँच ग्राम पंचायतों में इंटरनेट और वॉयस ओवर इंटरनेट सर्विस पर सोमवार (17 मार्च 2025) तक पाबंदी लगा दी। प्रशासन ने कहा, “हाल की घटनाओं को देखते हुए इंटरनेट और वॉयस सर्विस का इस्तेमाल अफवाह फैलाने और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए हो सकता है। इसलिए सैंथिया पुलिस स्टेशन के तहत सैंथिया नगर, हटोरा, मठपालसा, हरिसारा, फरियापुर और फुलुर ग्राम पंचायतों में ये सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं।”

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर लगातार बढ़ रहे हमले

बता दें कि पश्चिम बंगाल में मूर्तियों को तोड़ने की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। शुक्रवार (14 मार्च 2025) को अमित मालवीय ने ट्वीट कर बताया कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम ब्लॉक 2 के कमालपुर गाँव में एक हिंदू मंदिर पर हमला हुआ। वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी हुई दिखीं। उन्होंने कहा, “मंगलवार से वहाँ पूजा और राम नारायण कीर्तन चल रहा था, लेकिन कुछ लोग “श्री राम” का नाम बर्दाश्त नहीं कर सके और मूर्तियों को तोड़ दिया।”

वीडियो में एक शख्स कहता सुना गया, “ये गंभीर हालात हैं… पुलिस कुछ नहीं कर रही।” एक पुलिसवाला उस शख्स को डाँटता भी दिखा जो तोड़ी गई मूर्तियों की वीडियो बना रहा था।

इससे पहले 7 मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर शहर में शेख इंदू नाम के एक मुस्लिम शख्स ने माँ शीतला की मूर्ति तोड़कर आग लगा दी।

सोशल मीडिया पर जली हुई मूर्तियों और क्षतिग्रस्त मंदिर की तस्वीरें वायरल हुईं। स्थानीय लोगों ने आरोपी शेख इंदू को पकड़ लिया, जिसने ये तोड़फोड़ और आगजनी की थी। बारुईपुर पुलिस ने 7 मार्च को ट्वीट कर कहा कि आरोपी ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ है और उसे ‘दिमागी परेशानी’ है।

अमेरिका गई पढ़ने, करने लगी ‘हमास आतंकियों’ का समर्थन: ट्रम्प सरकार ने वीजा छीना, अब खुद से डिपोर्ट हुई रंजनी श्रीनिवासन

अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने खुद से निर्वासित किए जाने का विकल्प चुना है। उसकी अमेरिका से वापस होते हुए एक वीडियो भी सामने आई है। रंजनी श्रीनिवासन भारत से पढ़ने के लिए अमेरिका गई थी लेकिन वहाँ जाकर वह फिलिस्तीन और इस्लामी आतंकी संगठन हमास का समर्थन करने लगी। इसके बाद उसका वीजा रद्द हो गया।

अमेरिका में वीजा, आव्रजन और ऐसे ही मामलों पर नजर रखने वाले विभाग डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्युरिटी (DHS) ने रंजनी श्रीनिवासन के विषय में जानकारी दी है। DHS ने बताया है कि रंजनी ने विभाग के एक एप CBP का इस्तेमाल खुद के भारत को निर्वासन के लिए किया है।

DHS ने अपने बयान में कहा, “भारतीय नागरिक रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी नियोजन में डॉक्टरेट की छात्रा के रूप में F-1 छात्र वीज़ा पर अमेरिका आई थी। श्रीनिवासन आतंकवादी संगठन हमास का समर्थन करने वाली गतिविधियों में शामिल थीं। 5 मार्च, 2025 को विदेश विभाग ने उनका वीज़ा रद्द कर दिया था। DHS ने उनके स्व 11 मार्च को खुद से निर्वासन का विकल्प चुनने में CBP एप का इस्तेमाल करने के वीडियो फुटेज प्राप्त किए हैं।”

DHS की मुखिया क्रिस्टी नोएम ने इस मामले पर कहा, “अमेरिका में रहने और पढ़ने के लिए वीजा मिलना एक विशेषाधिकार जैसा है। लेकिन जब आप हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करेंगे तो उस विशेषाधिकार को रद्द कर दिया जाना चाहिए, और आपको इस देश में नहीं रहने दिया जाना चाहिए। मुझे कोलंबिया विश्वविद्यालय के आतंकवाद समर्थकों में से एक को खुद से वापस जाते देख और CBP होम ऐप का उपयोग करते हुए देखकर काफी ख़ुशी हुई है।”

रंजनी श्रीनिवासन की एक वीडियो भी सामने आई है, इसमें काले रंग के कपड़े पहने हुए एयरपोर्ट पर भागते हुए दिखाई देती है। रंजनी श्रीनिवासन के विषय में और भी जानकारी सामने आई है। उसके बायो, लिंक्डइन और बाकी कामों से पता चला है कि वह कोलंबिया विश्वविद्यालय से पहले हार्वर्ड में भी पढ़ाई कर चुकी है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि वह एक कट्टर वामपंथी है जो अमेरिका में रहकर भारत को बाँटने वाले मुद्दों पर लिखती थी।

उसके ऐसे कुछ निबन्ध सामने आए है जहाँ वह कथित ब्राम्हणवादी मानसिकता को कोस रही है। रंजनी श्रीवास्तव अमेरिका जाने से पहले भारत में अहमदबाद के भीतर CEPT विश्वविद्यालय में पढ़ती थी। इसके बाद वह अमेरिका चली गई और यहाँ पढ़ने के साथ ही हमास और इस्लामी आतंकवाद का समर्थन करने लगी। हाल ही में कोलंबिया विश्वविद्यालय के भीतर छात्रों ने कई दिनों तक दफ्तरों पर कब्जा कर लिया था और पुलिस के साथ झड़पें भी की थी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रंजनी इसमें शामिल थी या नहीं।

गुलाल लगाकर विमान में यात्रियों का किया स्वागत, केबिन क्रू ने डांस कर मनाया होली का जश्न: स्पाइसजेट का Video देखकर कुढ़ गईं उद्धव ठाकरे की महिला सांसद, कहा- यह ठीक नहीं, हद पार की

देशभर में होली का त्योहार शुक्रवार (14 मार्च 2025) को धूमधाम से मनाया गया। इस बीच, दिल्ली में 13 मार्च 2025 को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली स्पाइसजेट की फ्लाइट में यात्रियों को होली का मजा लेने का मौका मिला। हालाँकि स्पाइसजेट का ये अंदाज शिवसेना-UBT की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी को पसंद नहीं आया, और उन्होंने स्पाइसजेट को निशाने पर ले लिया।

दरअसल, जैसे ही यात्री प्लेन में चढ़े, एयर होस्टेस ने चंदन का टीका लगाकर उनका स्वागत किया। फिर अचानक ‘बलम पिचकारी’ गाना बजने लगा और नीली जींस व सफेद कुर्ते में सजी एयर होस्टेस ने डांस शुरू कर दिया। गुलाल से रंगे चेहरों के साथ उनकी शानदार परफॉर्मेंस ने पूरे माहौल को जश्न में बदल दिया। यात्रियों ने तालियाँ बजाकर उनका हौसला बढ़ाया और कुछ तो खुद भी इस मस्ती में शामिल हो गए।

इसके बाद यात्रियों को गुजिया और मिठाइयाँ बाँटी गईं, जिससे फ्लाइट का सफर और भी मीठा हो गया। स्पाइसजेट ने साफ किया कि यह सब जमीन पर हुआ, जब विमान के दरवाजे खुले थे। एयरलाइन ने कहा, “हमने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। यह परफॉर्मेंस सावधानी से की गई ताकि किसी को परेशानी न हो।” कंपनी का कहना है कि 2014 से वे होली को इस तरह मनाते आ रहे हैं, ताकि यात्रियों को एक यादगार अनुभव मिले। कई यात्रियों ने इसकी तारीफ की और सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए।

लेकिन फ्लाइट में होली का सेलिब्रेशन सबको पसंद नहीं आया। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “ये ठीक नहीं है। लोकप्रियता के लिए हद पार कर दी। एयरलाइंस को सुरक्षा और समय पर उड़ान पर ध्यान देना चाहिए, न कि लाइव मनोरंजन पर।”

प्रियंका की टिप्पणी को लोगों ने हिंदुओं के त्योहार पर निशाना साधने की कोशिश बताया। लोगों ने कहा कि ये महज एक खुशी का मौका था, जिसे गलत तरीके से देखा जा रहा है। इस बीच, स्पाइसजेट ने अपने बयान में दोहराया कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ और यह यात्रियों के लिए एक छोटा सा जश्न था।

जाफर एक्सप्रेस के सभी 214 बंधक मारे गए: BLA का ऐलान, पाकिस्तानी फौज सबको छुड़ाने का कर रही थी दावा; बलूचिस्तान में पुलिस स्टेशन, चेकपोस्ट और कंस्ट्रक्शन कंपनी पर भी अटैक

पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस हाइजैक मामला लगातार उलझता चला जा रहा है। पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावों के उलट बलोच विद्रोहियों ने 200 से अधिक फौजियों की हत्या की बात कही है। वहीं पाक फ़ौज ने दावा किया है कि मात्र 23 ही फौजी इस ऑपरेशन के दौरान मारे गए हैं। पाक फ़ौज के प्रवक्ता ने भारत को इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाली बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को एक बयान जारी किया है। BLA ने कहा है कि उसने ट्रेन हाइजैक करने के बाद 48 घंटे पाकिस्तान सरकार को दिए थे, जिसमें उन्हें बलोच बंदियों को छोड़ना था।

BLA के अनुसार, 48 घंटे के बाद भी यह माँग पूरी ना होने के चलते उन्होंने जाफर एक्सप्रेस से बंधक बनाए गए सभी 214 फौजी मौत के घाट उतार दिए। BLA ने कहा है कि यह पाकिस्तान सरकार और फ़ौज की जिद का नतीजा है जबकि वह हमेशा नियमों से ही लड़ाई लड़ती आई है।

जाफर एक्सप्रेस BLA

ट्रेन हाइजैक और इसके बाद हुई पाक फ़ौज से लड़ाई में BLA के 12 विद्रोही मारे गए हैं, यह भी बयान में बताया गया है। BLA ने कहा कि उन्होंने पकड़े गए फौजियों को एक बोगी में बंद कर रखा था और जब पाक फ़ौज के दूसरे कमांडो उन्हें छुड़वाने के लिए आए तो BLA के फिदायीन लड़ाकों ने उनकी हत्या कर दी।

वहीं पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावे इससे उलट हैं। पाकिस्तान के DG ISPR लेफ्टिनेंट अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि पूरी घटना के दौरान 31 लोगों की मौत हुई जिनमें 23 फौजी थे। DG ISPR ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान 33 बलोच विद्रोही मारे गए हैं।

पाकिस्तान फ़ौज ने दावा किया है कि उसने 350 से अधिक बंधक हाइजैक की गई ट्रेन से मुक्त करवाए थे। हालाँकि, बलोच विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि फौजियों को छोड़ कर उन्होंने बाकी सभी यात्रियों को रिहा कर दिया था। पाक फ़ौज ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए एक बार फिर भारत पर आरोप भी जड़े हैं।

DG ISPR ने आरोप लगाया है कि इस हमले का मुख्य आयोजक उनका पूर्वी पड़ोसी देश (भारत) है। इस हमले में पाक फ़ौज ने अफगानिस्तान का नाम भी घसीटा है। हालाँकि, भारत और अफगानिस्तान पहले ही पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार चुके हैं।

वहीं इस बीच बलूचिस्तान के और भी शहरों में हमले हुए हैं। बलूचिस्तान के क्वेटा, पंज्गूर और खुजदार में हमले गुरुवार रात को हुए हैं। क्वेटा में हमलावरों ने एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया जबकि खुजदार में एक निर्माण कम्पनी पर हमला किया गया और उसके साजोसामान में आग लगा दी गई। पंज्गुर में एक चेकपोस्ट पर हमला हुआ और यहाँ से हथियार लूटे गए।

बलूचिस्तान में बीते कुछ दिनों से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बलोच विद्रोही लगातार फ़ौज पर हमले कर रहे हैं और उन्होंने बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं फ़ौज उनके दावे नकार कर प्रोपेगेंडा करने और इल्जाम भारत तथा अफगानिस्तान पर डालने में जुटी है।

मोहम्मद शमी की बेटी ने खेली होली, रंग-गुलाल वाली तस्वीर देख गाली देने लगे इस्लामी कट्टरपंथी: कहा- जाहिल-बेशर्म… रमजान का महीना है शर्म करो

भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस बार कट्टरपंथियों ने उनकी बेटी को अपना निशाना बनाया है। मोहम्मद शमी की बेटी के होली खेलने को लेकर कट्टरपंथी भड़क गए हैं रमजान, इस्लाम, इल्म आदि का ज्ञान दे रहे हैं। शमी की बेटी से जुमे की नमाज का समय पूछा जा रहा है, उनकी परवरिश पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों का यह गुस्सा मोहम्मद शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहाँ की एक पोस्ट पर निकला है। हसीन जहाँ ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को अपनी बेटी आयरा शमी की एक फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की थी। इसमें दिखता है कि आयरा रंग खेल कर आई हैं।

आयरा के कपड़ों और चेहरे आदि पर रंग-गुलाल लगा हुआ था। हसीन जहाँ ने इसी फोटो के साथ होली की शुभकामनाएँ भी दी। इसी फोटो को देखने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए और हसीन जहाँ तथा उनकी बेटी को लेकर बुरा भला कहने लगे।

जुनैद नाम के एक व्यक्ति ने शमी की बेटी की फोटो पर लिखा, “जुमे की नमाज पहले पढ़ी है या बाद में?”

वहीं एक और अकाउंट ने लिखा, “रमजान मंथ है यार शर्म करो।”

मोहम्मद शमी बेटी होली

इमरान शेख ने हसीन जहाँ पर प्रश्न उठाए और कहा, “वाह क्या तालीम दी है बेटी को!”

कुछ कट्टरपंथियों ने गालियाँ तक लिखीं और चाकू-बन्दूक वाले इमोजी कमेन्ट किए।

शमी की बेटी को इस्लाम सिखाने वालों ने उनकी माँ हसीन जहाँ को भी इसमें घसीट लिया। उनको बेशर्म और जाहिल करार दिया गया।

अब्दुल कलाम ने लिखा, “जाहिल औरत को रमजान महीने में भी शर्म नहीं आई, मैं इसे अभी ब्लॉक कर रहा हूँ।”

मोहम्मद शमी बेटी होली

साकिब आलम ने लिखा, “बेशर्म औरत *सी।’ रहेब नाम के एक शख्स ने यह पूछ लिया कि आखिर वह मुस्लिम हैं भी या नहीं।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मोहम्मद शमी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आए हों। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्होंने ग्राउंड पर जूस पी लिया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए थे। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उन्हें गुनहगार बताया था।

मौलाना ने कहा था, “इस्लाम ने रोज़े को फर्ज़ करार दिया है। सभी पर रोज़ा फर्ज़ है। अगर कोई जानबूझकर रोज़ा नहीं रखता, तो वह गुनहगार है। ऐसा ही क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया। उन्होंने रोज़ा न रखकर बहुत बड़ा गुनाह किया है। शरिया की नज़र में यह कटघरे में खड़े हैं और मुजरिम हैं…।”

झारखंड से पंजाब तक होली का जश्न कट्टरपंथियों को नहीं आया रास: गिरीडीह में दुकानें-गाड़ियाँ फूँकी, लुधियाना की मियाँ मार्केट में ईंट-पत्थर-बोतलें मारी

झारखंड के गिरिडीह जिले में शुक्रवार (14 मार्च 2025) को होली जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच जमकर झड़प हो गई। यह घटना घोरथंबा इलाके में हुई, जहाँ मुस्लिमों ने होली जुलूस के रास्ते का विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते पथराव और हिंसा में बदल गई। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए। गुस्साई भीड़ ने कम से कम तीन दुकानों और कई गाड़ियों में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को काबू में करने की कोशिश की। गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल ने बताया कि दोनों समुदायों और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा, “पहचान होने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। अभी स्थिति नियंत्रण में है और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।” खोरीमहुआ के एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने भी कहा कि शांति बहाल करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

उप विकास आयुक्त स्मिता कुमारी ने इसे कुछ असामाजिक तत्वों की शरारत बताया। उन्होंने कहा, “होली के मौके पर इन लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। कुछ दुकानों और वाहनों में आग लगाई गई, लेकिन अब सब कंट्रोल में है। घटना के कारणों की जाँच चल रही है।” पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

होली के त्योहार को देखते हुए पूरे झारखंड में पुलिस पहले से ही मुस्तैद थी। राँची और बाकी जिलों में भी चौकसी बढ़ाई गई थी।

लुधियाना में दो पक्षों में झड़प, 10 लोग घायल

इस बीच, लुधियाना के फोकल प्वाइंट इलाके में बिहारी कॉलोनी के पास शुक्रवार (14 मार्च 2025) को मस्जिद के आसपास पथराव के बाद दो समूहों में झड़प हो गई। इस घटना में 10 लोग घायल हो गए। पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, झड़प के दौरान दोनों पक्षों ने ईंट-पत्थर और बोतलें चलाईं, जिससे कुछ गाड़ियों में भी तोड़फोड़ हुई। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

सूत्रों के अनुसार, मस्जिद के सामने डीजे बजाने की घटना के बाद झड़प सामने आई है। इसके बाद मस्जिद के बाद पुलिस बल की तैनात की गई है। डीजे बजाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद उन्होंने एक दूसरे पर पत्थर भी फेंके। सूचना मिलते ही पुलिस के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुँचे और हालात को काबू में किया।

एडीसीपी पीएस विर्क ने कहा कि आज होली का त्यौहार है और एक तरफ मस्जिद है। दूसरी तरफ प्रवासी रहते हैं। वे डीजे बजा रहे थे। इसी को लेकर प्रवासियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच कहासुनी हो गई। उन्होंने एक-दूसरे पर पत्थर भी फेंके। पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति नियंत्रण में है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

सड़कों पर बिखरी लाशें, औरतों को नंगा कर घूमा रहे, डर से देश छोड़ भाग रहे लोग… इस्लामी हुकूमत में रहेगा सीरिया, अंतरिम राष्ट्रपति ने 5 साल के लिए किया कबूल

सीरिया में असद अल-बशर की सरकार का तख्तापलट के बाद वहाँ इस्लामवादियों का शासन लागू कर दिया गया है। सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक संवैधानिक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया है। इस घोषणा-पत्र में कहा गया है कि बदलाव के दौर से गुजर रहे देश में पहले पाँच वर्ष इस्लामी शासन रहेगा। दरअसल, सीरिया तख्तापलट के बाद से हिंसा के दौर से गुजर रहा है।

नए संविधान में कहा गया है कि इस्लाम देश के राष्ट्रपति का धर्म है, जैसा कि पिछले संविधान में था। मसौदा समिति के अनुसार, दस्तावेज़ यह भी मानता है कि इस्लामी न्यायशास्त्र यानी शरिया ‘कानून का मुख्य विधायी स्रोत’ है, न कि ‘एक मुख्य स्रोत’। इसमें शक्तियों के पृथक्करण, न्यायिक स्वतंत्रता, मीडिया की स्वतंत्रता, महिला अधिकारों की गारंटी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कही गई है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेइर पेडरसन ने इसका स्वागत किया है और कहा है कि यह कानूनी शून्यता को भरने वाला कदम है। वहीं, उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द नेतृत्व वाले प्रशासन ने संवैधानिक घोषणा की निंदा की है और कहा है कि यह सीरिया की वास्तविकता और इसकी विविधता का खंडन करता है। सीरिया में नया एवं स्थायी संविधान लागू होने तक घोषणा-पत्र वाली व्यवस्था लागू रहेगी।

बता दें कि इस साल जनवरी में विद्रोही सैन्य समूहों के कमांडरों ने शारा को सीरिया का अंतरिम राष्ट्रपति बनाया था। सत्ता में आने के तुरंत बाद शारा ने असद शासन में साल 2012 में बनाए गए संविधान को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उस समय की संसद, सेना और सुरक्षा एजेंसियों को भंग कर दिया था। इस घोषणापत्र से दस दिन पहले शारा ने इसका मसौदा तैयार करने के लिए 7 सदस्यीय समिति गठित की थी।

सुन्नी मुस्लिम अल-शरा के नेतृत्व वाली सरकार का दूसरे इस्लामी समूह समर्थन नहीं करते हैं। इनमें एक अल्पसंख्यक अलावी समूह है, जो पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन करता है। बशर भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। अलावी सहित कई धार्मिक एवं जातीय समूह अल-शरा पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उनका विरोध करते हैं। यही कारण है कि दोनों समूहों के विद्रोही आमने-सामने हैं।

सीरिया वॉर मॉनिटर का दावा किया है कि इन झड़पों में लगभग 1,500 लोग मारे गए हैं। ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने 9 मार्च 2025 चौंकाने वाला आँकड़ा जारी किया। इसमें 745 नागरिकों के अलावा 125 सरकारी सैनिक और असद के वफादार 148 लड़ाके भी मारे गए हैं। ये हिंसा गुरुवार (6 मार्च 2025) से शुरू हुई और अब तक थमने का नाम नहीं ले रही।

फिर से क्यों सुलग रहा है सीरिया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब तब शुरू हुआ जब गुरुवार (6 मार्च 2025) को तटीय शहर जबलेह के पास सुरक्षा बल एक भगौड़े अपराधी को पकड़ने पहुँचे, लेकिन इस दौरान उन पर कथित तौर पर असद के समर्थकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए। नई सरकार का कहना है कि वो असद के बचे हुए लड़ाकों के हमलों का जवाब दे रही है। हालाँकि झड़पें बदले की कार्रवाई में बदल गईं।

सुन्नी लड़ाकों ने 7 मार्च को अलावी गाँवों और कस्बों में घुसकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। अलावी समुदाय के ज्यादातर पुरुषों को सड़कों पर या उनके घरों के बाहर ही गोली मार दी गई। कई जगहों पर घरों को लूटा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया। महिलाओं को नंगा करके सड़क पर घुमाया गया। बनियास जैसे शहरों में हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर शव बिखरे पड़े रहे।

हयात तहरीर अल-शाम के लिए मुसीबत

ये हिंसा उस गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (HTS) के लिए बड़ा झटका है, जिसने असद को हटाकर सत्ता हासिल की थी। HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा किया था, लेकिन अब उनके सामने अपने ही देश को संभालने की चुनौती है। अलावी समुदाय के खिलाफ ये हमले सीरिया में गहरी धार्मिक और जातीय दरार को दिखाते हैं। अगर ये हालात काबू में नहीं आए, तो ये हिंसा और खतरनाक रूप ले सकती है।

होली का जश्न मना रहे हिंदुओं ने मस्जिद पर किया ‘हमला’: रत्नागिरी का जो Video दिखा प्रलाप कर रहे जुबैर-ओवैसी जैसे इस्लामवादी, उसकी हकीकत महाराष्ट्र पुलिस ने बताई

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में होली के मौके पर गुरुवार (13 मार्च 2025) को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में कुछ हिंदू लोग मस्जिद के गेट के पास एक लकड़ी का तना लिए दिखे। इसको लेकर मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और कुछ इस्लामी ग्रुपों ने दावा किया कि हिंदुओं ने मस्जिद पर हमला किया। ऐसा सबकुछ होली के जश्न के दौरान हुआ।

अल्टन्यूज के मोहम्मद जुबैर ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये शर्मनाक वीडियो महाराष्ट्र के राजापुर कस्बे से निकलकर सामने आया है, जिसमें आप लोग देख सकते हैं कि होली के दौरान लोग शिमगा (लकड़ी का टुकड़ा) लेकर मस्जिद के पास पहुँचे और उसे गेट में 3-4 फीट तक घुसाने की कोशिश की, वो भी दो बार। कुछ लोग और पुलिस ने रोकने की कोशिश की, पर कामयाब नहीं हुए।” उसने ये भी कहा कि नेशनल मीडिया हमेशा ऐसी बातों को नजरअंदाज करता है या सही ठहराता है।

जुबैर के पोस्ट के बाद मकतूब मीडिया ने भी ये वीडियो शेयर कर दिया। मकतूब मीडिया अक्सर हिंदुओं को निशाना बनाने और मुस्लिमों के गुनाहों को छिपाने के लिए जाना जाता है।

फिर ऑब्जर्वर पोस्ट नाम का एक और इस्लामिस्ट ग्रुप भी पीछे नहीं रहा और उसने भी वही वीडियो शेयर किया।

इन सबके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके पूछा कि क्या कानून अपना रास्ता खुद बनाएगा। उसने कहा कि पुलिस के सामने मस्जिद पर हमला होना शर्मनाक है।

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हल्ला मचा दिया कि हिंदुओं की भीड़ ने मस्जिद को निशाना बनाया और ये मुस्लिमों पर जुल्म का सबूत है।

रत्नागिरी पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को किया खारिज

हालाँकि रत्नागिरी पुलिस ने इन सारी बातों को साफ नकार दिया। पुलिस ने कहा कि मस्जिद में कोई जबरदस्ती घुसने की बात नहीं हुई, जैसा सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था। जिसने ये गलत वीडियो सबसे पहले डाला, वो पोस्ट अब हट चुकी है। हाँ, कुछ लोग अभी भी गलत बातें फैला रहे हैं, पर उस पर पुलिस ने कुछ नहीं बोला। पुलिस ने बताया कि ये सब कोकण इलाके की पुरानी परंपरा का हिस्सा था, इसमें कुछ गलत नहीं हुआ।

‘The Hindu’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सब बुधवार शाम 7:30 बजे जवाहर चौक में हुआ। वहाँ शिमगा का जुलूस निकला था, जिसमें ‘मडाची मिरवणूक’ नाम की रस्म होती है। ये जुलूस सखालकरवाडी से शुरू होकर 2 किलोमीटर दूर ढोपेश्वर मंदिर तक जाता है। रास्ते में मस्जिद की सीढ़ियों पर लकड़ी का गट्ठा (पेड़ का तना) कुछ देर रखा जाता है। पुलिस ने बताया कि कोकण की परंपराएँ अलग हैं।

SP धनंजय कुलकर्णी ने कहा कि इस रस्म में जुलूस मस्जिद की सीढ़ियों पर रुकता है और लकड़ी को गेट से छुआ जाता है। मुस्लिम लोग नारियल देकर इसका स्वागत करते हैं। उस रात कुछ नारेबाजी और हंगामा हुआ, जिसके लिए महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की धारा 135 में FIR हुई। जाँच चल रही है। हालात शाँत हैं।

खास बात ये कि ‘The Hindu’ ने लिखा कि वहां के मुस्लिमों ने भी इसे परंपरा माना। एक स्थानीय मुस्लिम ने कहा कि हर पाँच साल में होली के वक्त ये जुलूस निकलता है और मस्जिद की सीढ़ियों पर रुकता है। ये नीना देवी की पूजा के लिए होता है। हाँ, उसने ये भी कहा कि इस बार लकड़ी को गेट में ठोका गया, पर पुलिस ने इसे गलत बताया। पुलिस ने साफ किया कि कोई हमला नहीं हुआ, ये बस एक रिवाज था। गलत वीडियो फैलाने की कोशिश हुई, पर सच सामने आ गया।