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गिरिडीह में पत्थरबाजी मुस्लिमों ने की, पर पीठ विकास साह की दागी गई: BJP ने शेयर की झारखंड पुलिस की बर्बरता को बयाँ करती तस्वीर, पूछा- क्या हिंदू होना गुनाह है?

झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थंबा में होली (14 मार्च 2025) जुलूस के दौरान हिंदुओं पर हमले के मामले में जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें 39 हिंदुओं के नाम है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पुलिस हिंदुओं को ही प्रताड़ित भी कर रही है। राज्यसभा सांसद और झारखंड बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने विकास साह नाम के हिंदू युवक की तस्वीर पोस्ट की है, जिसकी पीठ पर पुलिसिया बर्बरता साफ दिख रही है।

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने एक पीड़ित युवक विकास साह की तस्वीर शेयर की, जिसमें उसे पीटे जाने के निशान दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा, “हिंदू होने की वजह से विकास साह को पीटा गया। पत्थरबाजों की जगह हिंदुओं के साथ बेरहमी कर रही हेमंत सोरेन सरकार।” दीपक प्रकाश ने गिरिडीह एसपी को निलंबित करने की माँग की।

इस बीच, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने प्रभावित इलाके का दौरा किया और पीड़ितों से मुलाकात की। पीड़ितों से मुलाकात के बाद रघुबर दास ने प्रशासन पर हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि वो किसी निर्दोष को नुकसान न पहुँचाए और जल्द से जल्द पीड़ितों को रिहा करे।

झारखंड के पूर्व सीएम रघुबर दास ने पीड़ितों से मुलाकात की और कहा कि उनकी बातें सुनकर रूह काँप गई। दुकानें जल गईं, लोग घायल हुए और त्योहार का माहौल खराब हो गया। रघुबर दास ने साफ कहा कि अगर निर्दोष हिंदुओं को रिहा नहीं किया गया, तो बीजेपी सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने डीजीपी और एसपी से फोन पर बात की और न्यायिक जाँच की माँग की। साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी कि वह इस मामले को हल्के में न ले। बीजेपी का कहना है कि हिंदुओं पर हमले बढ़ रहे हैं और सरकार असली उपद्रवियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

रघुबर दास ने X पर लिखा, “सामाजिक सौहार्द का ठेका केवल हिंदू समाज ने नहीं लिया है। क्या अब हिंदू समाज को अपने त्योहारों पर जुलूस निकालने के लिए दूसरे समुदाय से अनुमति लेनी होगी? सड़क किसी की जागीर नहीं है। दूसरे समुदाय के पर्व में कोई हिंसा नहीं होती है, हिंदुओं के पर्व में हर बार हिंसा हो रही है।” उन्होंने कहा कि कभी ताजिया, मोहर्रम या किसी मुस्लिम जश्न पर तो हिंदू समस्या नहीं खड़ी करते, लेकिन हिंदुओं के त्योहारों पर ही हिंसा क्यों होती है?

रघुबर दास ने आगे लिखा, “वोट बैंक के लिए शासन-प्रशासन बैलेंसिंग एक्ट बंद करे। जिन निर्दोष हिंदू लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा करें। नहीं तो भारतीय जनता पार्टी चुपचाप नहीं बैठेगी। पूरे हिंदू समुदाय के साथ सड़क पर उतरकर भाजपा कार्यकर्ता हेमंत सरकार की ईंट से ईंट बजा देगी। गिरिडीह के घोड़थंबा में होली जुलूस पर पथराव और आगजनी की घटना पर झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता और गिरिडीह एसपी बिमल कुमार से टेलीफोन पर बात कर निर्दोषों को रिहा करने और घटना की न्यायिक जांच कराने को कहा। एसडीएम को भी चेतावनी दी।”

क्या हुआ घोड़थंबा में?

14 मार्च 2025 की शाम को होली का जुलूस निकाल रही 15-20 लोगों की टोली मस्जिद वाली गली से गुजरना चाहती थी। लेकिन पुलिस और मुस्लिमों ने उन्हें रोक दिया। हिंदुओं ने उन्हें समझाया कि वे हर साल इसी रास्ते से जाते हैं। इसके बाद जब हिंदुओं की टोली आगे बढ़ी, तो मुस्लिमों ने पेट्रोल बम, बोतल, ईंट और पत्थरों से हमला कर दिया। बाजार चौक के पास दुकानों, बाइकों और गाड़ियों में आग लगा दी गई।

एफआईआर में साफ लिखा है कि हमलावरों ने पीछे की गली में मंदिर पर भी पथराव किया। पुलिस पहुँची तो उसकी गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में चार पुलिसकर्मी घायल हुए। प्राथमिकी धनवार के बीपीओ सह दंडाधिकारी सुरेंद्र कुमार वर्णवाल ने दर्ज की।

एफआईआर में शुरुआती 11 आरोपितों के नाम हिंदुओं के हैं, जबकि हमले का जिक्र मुस्लिम समुदाय की ओर से किया गया है। कुल 39 हिंदुओं और 41 मुस्लिमों के नाम शामिल किए गए हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि यह तुष्टिकरण की नीति का हिस्सा है। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रशासन हिंदुओं को निशाना बना रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी सवाल उठाया कि जब हमला मुस्लिमों ने किया, तो हिंदुओं को क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है? उनका कहना है कि यह ‘बैलेंसिंग एक्ट’ वोट बैंक की राजनीति के लिए हो रहा है।

घोड़थंबा की घटना से साफ है कि झारखंड सरकार न सिर्फ पीड़ित हिंदुओं को ही निशाना बना रही है, बल्कि एफआईआर में दोनों समुदायों के नाम शामिल कर मामले को संतुलित करने की कोशिश भी कर रही है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या वाकई पीड़ित हिंदुओं को इंसाफ मिल पाएगा?

गिरिडीह की मस्जिद रोड पर हुआ हमला, जिन घरों-दुकानों से चले पत्थर वे मुस्लिमों के; फिर भी हिंदू दोषी: FIR की क्या जरूरत थी झारखंड पुलिस, सीधे लिख देते होली मनाना अपराध है

झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित घोड़थंबा में होली (14 मार्च 2025) के दिन जुलूस के दौरान हिंदुओं पर हमला हुआ। ये हमला मुस्जिद वाली गली में हुआ। इस हिंसा के दौरान जिन घरों से पत्थर चले, वो मुस्लिमों के हैं। जिन्होंने हमले किए, वो मुस्लिम थे। चाहे मस्जिद वाली गली में हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाना हो, या फिर पीछे की गली में मंदिर पर हमले-पथराव और पुलिस की गाड़ियों को निशाने बनाने का मामला। इन सभी का सिलसिलेवार तरीके से एफआईआर की कॉपी में भी जिक्र है।

इसके बावजूद आरोपित नंबर 1 से 11 तक हिंदुओं के नाम है। ये एक तरह से तुष्टिकरण है, जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी यही कहा है। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने प्रशासन पर हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

मुस्लिमों ने हिंदुओं पर किया पेट्रोल बम, ईंट-पत्थरों से हमला

एफआईआर के अनुसार, 14 मार्च 2025 की शाम 15-20 लोगों की होली की टोली मस्जिद गली से गुजरना चाहती थी, लेकिन नमाज का समय होने की वजह से उन्हें रोका गया। टोली का कहना था कि वे हर साल इसी रास्ते से जाते हैं। समझाने के बावजूद टोली गली में आगे बढ़ गई। इसके बाद मुस्लिमों ने पेट्रोल बम, बोतल, ईंट और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया। बाजार चौक के पास पेट्रोल बम फेंककर कई दुकानों, बाइकों और गाड़ियों में आग लगा दी गई।

एफआईआर में इस बात का साफ-साफ जिक्र है कि समुदाय विशेष (मुस्लिमों) ने मंदिर पर हमला किया। पत्थर फेंके और पुलिस पहुँची तो उसकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में चार पुलिसकर्मी घायल हुए। प्राथमिकी धनवार के बीपीओ सह दंडाधिकारी सुरेंद्र कुमार वर्णवाल ने दर्ज की है।

खास बात ये है कि पुलिस ने शुरुआती 11 लोगों के नाम आरोपितों के तौर पर शामिल किए हैं, वो सभी हिंदू हैं। जबकि पूरी एफआईआर में हिंदुओं द्वारा कहीं भी हमले का जिक्र नहीं है, बल्कि हमले मुस्लिमों की तरफ से हुए, चाहे वो मस्जिद वाली गली में हिंदुओं के जुलूस पर हमले की बात हो या पीछे की गली में मंदिर पर हमले की।

इसके बावजूद एफआईआर में 39 नाम हिंदुओं के और 41 नाम मुस्लिमों के शामिल करके पूरे मामले को बैलेंस करने की कोशिश की है। साफ है कि यह कार्रवाई उपद्रवियों का मनोबल बढ़ाने और भविष्य में हिंदुओं पर हमले को प्रोत्साहित करने वाली है। क्योंकि हिंदुओं पर त्योहारों के दौरान हमले हो रहे हैं, और बाद में उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है।

नाजायज, गुनहगार… मोहम्मद शमी की बेटी को होली के रंग में रंगा देख भड़का मौलाना शहाबुद्दीन रजवी: वीडियो जारी कर उतारा गुस्सा, परिजनों से बोला- ये हिंदुओं का त्योहार, मुस्लिम न खेलें

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बेटी आयरा को होली के रंग में रंगा देख भड़क उठा। उसने शनिवार (15 मार्च) को एक वीडियो जारी कर कहा कि ये सब शरीयत के खिलाफ है और बच्चों को समझाया जाना चाहिए।

मौलाना शहाबुद्दीन ने वीडियो में कहा,

“पहले भी शमी को नसीहत दी थी, लेकिन उसके बावजूद उनकी बेटी का होली खेलते हुए वीडियो सामने आया। शमी की बेटी का रंग खेलना शरीयत के खिलाफ और नाजायज है। वह छोटी बच्ची है, ना-समझी में होली खेल गई तो यह गुनाह नहीं है। अगर वह समझदार है। इसके बाद भी होली खेलती है तो यह शरीयत के खिलाफ माना जाएगा। शमी समेत सभी परिजनों से यह अपील की है कि शरीयत में जो नहीं है, उसको अपने बच्चों को न करने दें। होली हिंदुओं का बहत बड़ा पर्व है, लेकिन मुसलमान को रंग खेलने से बचना चाहिए। क्योंकि अगर कोई शरीयत को जानते हुए भी होली खेलता है, तो वह गुनाह है।”

गौरतलब है कि मौलाना शहाबुद्दीन रजवी से पहले कई इस्लामी कट्टरपंथी मोहम्मद शमी की बेटी आयरा को ऑनलाइन ट्रोल कर चुके हैं। किसी ने हसीन जहाँ के पोस्ट पर आयरा के लिए लिखा- ‘जुमे की नमाज पढ़वाई या होली ही खिलवा दी।’ किसी ने इस पोस्ट पर चाकू-बंदूक वाले इमोजी डाले और इस्लाम न सिखाने के लिए बेशर्म और जाहिल करार दिया।

वहीं रही बात मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की तो हाल में रजवी का गुस्सा मोहम्मद शमी पर उस समय भी भड़का था जब चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्होंने ग्राउंड पर जूस पी लिया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन पर भड़क गए थे और शहाबुद्दीन रजवी ने उन्हें गुनहगार तक करार दिया था।

मौलाना ने कहा था, “इस्लाम ने रोज़े को फर्ज़ करार दिया है। सभी पर रोज़ा फर्ज़ है। अगर कोई जानबूझकर रोज़ा नहीं रखता, तो वह गुनहगार है। ऐसा ही क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया।” हालाँकि बाद में रजवी ने वीडियो में कहा कि मौलाना शहाबुद्दीन ने टीम इंडिया की जीत पर मुबारकबाद दी। साथ ही कहा कि मोहम्मद शमी के जो रोजे कजा हो गए हैं, नहीं रख सके, वो रोजे रमजान शरीफ के बाद रख लें।

सिक्योरिटी नहीं आई काम, मौके पर ही ढेर हो गया वैष्णो देवी के भक्तों का कातिल: जानिए कौन था आतंकी अबु कताल, कैसे पाकिस्तान में बैठे भारत के दुश्मनों को एक-एक कर ढेर कर रहे ‘अज्ञात’

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु कताल की कल (16 मार्च 2025) पाकिस्तान के झेलम में अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर दी गई। घटना के वक्त अबु कताल अपने सिक्योरिटी गार्ड के साथ जा रहा था तभी, कुछ लोग आए और 15-20 राउंड फायरिंग की। इस हमले में उसके साथ उसका गार्ड भी मारा गया और उसने खुद भी वहीं दम तोड़ दिया।

कौन था अबु कताल?

अबु कताल पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और मोस्ट वांटेड आतंकी था। उसकी संलिप्ता भारत में हुए कई हमलों में थी। वह आतंकी संगठन का मुख्य हैंडलर था जो पुंछ-राजौरी इलाके से एक्टिव था। उसका काम केवल आतंकी साजिश रचना नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर आतंकियों को LET से जोड़ना भी था। उसने सबसे पहली बार साल 2000 में जम्मू में घुसपैठ की थी। हाफिज सई से उसका रिश्ता चाचा-भतीजे वाला था। उसे हाफिज का दाहिना हाथ भी कहा जाता था।

आतंकी गतिविधियों में था शामिल

रिपोर्ट्स बताती हैं कि अबु कताल का नाम 1 जनवरी 2023 को राजौरी जिले के ढांगरी गांव में हुए एक आतंकवादी हमले में भी शामिल था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें अबु कताल सहित अन्य आतंकियों का नाम शामिल किया गया था। इसके अलावा अबु कताल का नाम 9 जून 2024 को शिवखोड़ी में हुए आतंकी हमले भी आया था। उस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

पाकिस्तान में किन-किन आतंकियों को ‘अज्ञात’ ने किया ढेर

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों के मारे जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बड़े-बड़े आतंकियों को अज्ञात द्वारा मारने के मामले सामने आए हैं।

  • साल 2024 में कुछ अज्ञात लोगों ने हाफिज सईद के ही करीबी लश्कर के आतंकी आमिर सरफराज की पाकिस्तान के लाहौर में हत्या कर दी गई थी। अज्ञात हमलावरों ने उसके ठिकाने पर डोरबेल बजाकर उसे मौत के घाट उतारा था।
  • साल 2023 में LeT के अकरम गाजी को खैबर पख्तूनख्वा में मोटरसाइकल पर सवार हमलावरों द्वारा गोली से मार दिया गया था।
  • मौलाना रहीम उल्लाह तरीक को भी 14 नवंबर 2023 को कराची के ओरंगी टाउन में गोली मार दी गई थी।
  • शाहिद लतीफ, भी जैश का मोस्ट वांटेड आतंकी था, उसकी हत्या भी 11 अक्तूबर 2023 को हुई थी।
  • आतंकी सरदार हुसैन अराइन को भी 1 अगस्त 2023 को कराची में उसी दुकान के पास गोली मारी गई थी।
  • ख्वाजा शाहिद, नाम का लश्कर आतंकी भी जो 2019 में जम्मू में सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड था उसकी हत्या भी कश्मीर के पीओके में हुई थी। बाद में उसकी लाश सिर कटी अवस्था में मिली थी।
  • इसी प्रकार साल 2022 में कंधार विमान हाईजैक के आतंकी मिस्त्री जहूर की पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी।

हार्ट अटैक से हुई मौत, शरीर पर चोट के निशान तक नहीं: फिर भी चलाया ‘होली पर मुस्लिम को पीट-पीटकर मार डाला’ का प्रोपेगेंडा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई सच्चाई

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में होली के दिन (15 मार्च 2025) शरीफ नाम के 55 साल के मुस्लिम अधेड़ की मौत ने पूरे इलाके में हंगामा मचा दिया था। शुरुआत में उनके घर वालों ने दावा किया कि कुछ स्थानीय युवकों ने जबरन रंग डाला और मारपीट करके उनकी जान ले ली। इस खबर को कई बड़े मीडिया हाउस जैसे Zee News, Aaj Tak और TV9 Hindi ने बिना पूरी सच्चाई जाने अपने-अपने अंदाज में छाप दिया।

Zee News ने लिखा कि “होली का रंग डालने पर बवाल” हुआ और शरीफ की मौत हो गई।

साभार: Zee News

Aaj Tak ने परिजनों के हवाले से दावा किया कि “जबरन रंग डाला और पीटकर मार डाला, जबड़ा बाहर निकला था।”

आज तक की खबर का स्क्रीनशॉट

TV9 Hindi ने तो इसे ‘खूनी होली‘ तक करार दे दिया।

टीवी9 की खबर का स्क्रीनशॉट

इन खबरों से शहर में तनाव फैल गया, लोग सड़कों पर जमा हो गए और पुलिस को फोर्स तैनात करनी पड़ी। लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सारी कहानी साफ कर दी है।

घटना वाले दिन क्या हुआ था?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार सुबह शरीफ अपने घर से कासिमनगर मोहल्ले में निकले थे। दो महीने पहले सऊदी से लौटे शरीफ रोजा रखे हुए थे और कुछ सामान लेने जा रहे थे। रास्ते में कासिफ अली सराय के पास होली खेल रहे कुछ युवकों ने उन पर रंग डालने की कोशिश की। शरीफ ने मना किया, जिसके बाद थोड़ी बहस हुई। परिजनों का कहना है कि इसके बाद मारपीट हुई और शरीफ गिर पड़े। उनकी बेटी मुस्कान और भतीजे शमीम ने कहा कि युवकों ने उन्हें इतना पीटा कि उनकी जान चली गई।

चश्मदीद शमीम ने दावा किया कि “उनका जबड़ा बाहर निकल गया था।” वहीं, रंग डालने वाले घर की महिलाओं राजकुमारी और मंजू ने कहा कि बच्चों ने रंग डाला, लेकिन कोई हत्या नहीं हुई। शरीफ गाली देने लगे और ई-रिक्शा से आगे चले गए, जहाँ उनकी मौत हुई।

कैसे फैली हत्या की अफवाह?

Zee News ने खबर चलाई कि शरीफ की मौत रंग डालने के विवाद में हुई। Aaj Tak ने परिजनों के बयान छापे कि “जबरन रंग डाला और पीटकर मार डाला।” TV9 Hindi ने इसे मंदिर के पास ‘पीट-पीटकर हत्या’ का मामला बताया।

नतीजा ये हुआ कि कासिमनगर में तनाव फैल गया। मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। हालात बिगड़ते देख अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश सिंह, क्षेत्राधिकारी सोनम सिंह और कोतवाली प्रभारी प्रमोद मिश्रा फोर्स लेकर पहुँचे। शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने भी लोगों से शांति की अपील की।

पुलिस ने शरीफ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों की तहरीर पर जाँच शुरू की। इलाके में गश्त बढ़ाई गई और फोर्स तैनात की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच सामने आया। एएसपी अखिलेश सिंह ने बताया कि शरीफ की मौत हार्ट अटैक (कार्डियक अरेस्ट) से हुई थी। उनके शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं मिला। थाना प्रभारी प्रमोद मिश्रा ने कहा कि शरीफ भागने की कोशिश में गिरे थे, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ी। शनिवार (15 मार्च 2025) की शाम उन्हें दफना दिया गया और अब इलाका शांत है।

मीडिया ने परिजनों के दावों को सच मानकर खबरें चलाईं, लेकिन पोस्टमार्टम ने इन दावों को गलत साबित कर दिया। पुलिस ने भी साफ कहा है कि न मारपीट हुई, न चोट मिली। शरीफ की मौत हार्ट अटैक से हुई, जो शायद भागने के दौरान तनाव से हुआ।

इस घटना ने फिर साबित किया कि बिना पुख्ता सबूत के सनसनीखेज खबरें चलाना कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस अब भी बाकी तथ्यों की जाँच कर रही है, लेकिन सच यही है कि ये हत्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य वजह से हुई मौत थी। बहरहाल, Aaj Tak का ‘जबड़ा बाहर निकला’ और TV9 Hindi का ‘पीट-पीटकर हत्या’ वाला दावा बेबुनियाद निकला है। हालाँकि बाद में आज तक और टीवी9 हिंदी, दोनों ने ही खबर को अपडेट करके नई खबरें प्रकाशित की है, लेकिन पहले की खबरों से जो नुकसान पहुँचना था, वो तो पहुँच ही गया।

9 महीने बाद सुनीता विलियम्स ने सामने से देखा इंसान, 19 मार्च को धरती पर लौट आने की उम्मीद: 4 नए अंतरिक्ष यात्री रिसर्च के लिए ISS पहुँचे, ट्रंप ने मस्क को दी थी जिम्मेदारी

अंतरिक्ष में पिछले नौ महीने से फँसी सुनीता विलियम्स के वापसी धरती पर आने की उम्मीद एक बार फिर से जगी है। इस बार नासा ने क्रू-10 मिशन लॉन्च करके उन तक 4 नए अंतरिक्ष यात्री स्पेश स्टेशन तक पहुँचाए हैं। अब कहा जा रहा है सुनीता विलियम्स और उनके साथ फँसे बुच विल्मर को वापस लाने की प्रक्रिया 19 मार्च से शुरू होगी।

सुनीता विलियम्स कब गई थी अंतरिक्ष में

सुनीता विलियम्स औरअंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर को बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 5 जून 2024 को भेजा गया था। उनका मिशन केवल आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वे वहाँ नौ महीने से अधिक समय तक फँसे रहे।

किस कारण नहीं हुई अंतरिक्ष यात्री की वापसी

इस अंतराल में उन्हें कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। जैसे कभी हीलियम लीक हुई तो कई थ्रस्टर्स ने काम करना बंद कर दिया। कभी प्रोपेलेंट वाल्व में खराबी आ गई जिसकी वजह से दोनों अंतरिक्ष यात्री को इतने समय तक वहीं रुकना पड़ा। इस बीच नासा ने उन्हें वापस लाने की कोशिश की, लेकिन हर बार तकनीकी समस्याओं या मौसम संबंधी कारणों से विफल रहे।

NASA का नया मिशन

आखिर में नासा को सफलता 14 मार्च को मिली जब उन्होंने स्पेस-एक्स के साथ मिलकर क्रू-10 मिशन को लॉन्च किया। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से शाम 7:03 बजे पर शुरू हुआ था। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे-

  1. NASA के एस्ट्रोनॉट ऐनी मैक्लेन (कमांडर)
  2. निकोल आयर्स (पायलट)
  3. जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के ताकुया ओनिशी, और,
  4. रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोसमॉस के किरिल पेस्कोव।

इस लॉन्च का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक नई टीम भेजना था ताकि लगभग 6 महीने तक वहाँ रहकर वैज्ञैनिक अनुसंधान करेगी। पहले इस मिशन को लॉन्च करने की योजना फरवरी 2025 में थी, लेकिन बाद में इसे मार्च 2025 तक स्थगित कर दिया गया।

अब जब नए अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स तक पहुँचे हैं तो वीडियोज सामने आई हैं जिन्हें देख हर कोई भावुक है। सुनीता विलियम्स और उनके साथी के चेहरे पर 9 महीने बाद लोगों से मिलने की खुशी साफ देखी जा सकती है। सब लोग एक दूसरे गले लगते और हाथ मिलाते दिख रहे हैं।

ट्रंप ने मस्क को दी थी जिम्मेदारी

बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में ही एलन मस्क को सुनीता विलियम्स को वापस लाने की जिम्मेदारी दी थी।

ट्रंप ने जनवरी में लिखा था, “मैंने मस्क से उन दो ‘बहादुर अंतरिक्ष यात्रियों’ को वापस लाने को कहा है। इन्हें बाइडेन प्रशासन ने अंतरिक्ष में छोड़ दिया है। वे अंतरिक्ष स्टेशन पर कई महीनों से इंतजार कर रहे हैं। मस्क जल्द ही इस काम को करेंगे।” इस पोस्ट के बाद मस्क ने भी इसपर हामी भरी थी।

भाई सपा से रहे MLA, खुद कई यूनिवर्सिटी का रहा VC… मिलिए फ्रॉड कृष्ण शेखर राणा से, ओमान का उच्चायुक्त बन प्रोटोकॉल माँग रहा था जंतु शास्त्र का प्रोफेसर

खुद को ओमान का उच्चायुक्त बताकर गाड़ी और अन्य सरकारी सुविधा उठाने वाले एक नामचीन शिक्षाविद् कृष्ण शेखर राणा को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित कई विश्वविद्यालयों का कुलपति भी रह चुका है और शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नाम है। दिल्ली के अमर कॉलोनी का रहने वाले आरोपित ने खुद को ओमान का उच्चायुक्त बताकर उत्तर प्रदेश पुलिस से प्रोटोकॉल की माँग की थी।

आरोपित के पीए ने प्रोटोकॉल सेवाओं के लिए गाजियाबाद पुलिस को एक पत्र लिखा था। इसके बाद उसे प्रोटोकॉल सेवा भी दी गई थी। पुलिस के अनुसार, प्रोटोकॉल सेवाओं के लिए दिए गए दस्तावेज़ पुलिस को संदिग्ध लगे। उसके आधार पर आरोपित से पूछताछ की गई तो उसने कबूल किया कि वह ट्रेड कमिश्नर है, ना कि हाई कमिश्नर। उसने बताया कि उसका मकसद सरकारी सेवा हासिल करना था।

66 वर्षीय आरोपित कृष्ण शेखर राणा को गाजियाबाद के यूपी गेट से गिरफ्तार किया है। उसके पास से राजनयिक नंबर वाले काले रंग की एक मर्सिडीज कार, एक पहचान पत्र और 46 विजिटिंग कार्ड बरामद किए गए हैं। ट्रांस हिंडन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निमिष पाटिल ने कहा कि कृष्ण शेखर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

डीसीपी पाटिल ने आगे बताया कि ओमान का उच्चायुक्त होने का दावा करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में पता चला कि वह एक इंडिया-GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) नाम की संस्था के लिए काम करता था। वह ट्रेड कमिश्नर था, लेकिन खुद को हाई कमिश्नर बताकर अपने पद का दुरुपयोग करता रहा था।

इंडिया-GCC का संबंध ओमान से है। संस्था के अधिकारियों के अनुसार, आरोपित ओमान में एक विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहता था। इसके बाद ओमान ने उसे ट्रेड कमिश्नर की मानद उपाधि दी थी। भारत-GCC के वली काशवी ने कहा, “हम उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण उनके साथ काम करना चाहते थे। उन्हें ओमान आने के लिए कई बार निमंत्रण दिया गया, लेकिन वे कभी नहीं गए।”

डीसीपी पाटिल ने बताया कि कृष्ण शेखर आगरा में जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) के अध्यक्ष प्रोफेसर रह चुका है। उसके 100 से अधिक शोध पत्र देश और विदेश के जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। आरोपित के निर्देशन में 50 से अधिक छात्र-छात्राएँ अपना शोध पूरा कर चुके हैं। आरोपित का आगरा में कृष्ण कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी है। साथ ही वह राजस्थान में एक रिसॉर्ट का भी मालिक है।

कभी आगरा के जाट हाउस में रहने वाले आरोपित कृष्ण शेखर ने रिटायरमेंट के बाद साल 2015 से 2018 तक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में अप्रेजल अथॉरिटी के रूप में काम किया। मंत्रालय में उसका काम पर्यावरण संबंधी मंजूरियाँ देना था। इस संबंध में मंत्रालय से जानकारी माँगी गई है। आरोपित को विश्व मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपना शांति दूत (पीस एंबेसडर) भी बनाया था।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है। वह समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक एवं जाट समाज के बड़े नेता विजय सिंह राणा का भाई है। विजय की 2021 में मृत्यु हो गई थी। आरोपित कृष्ण शेखर ने आगरा के बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में तीन दशकों तक पढ़ाया है। साल 1982 में वह लेक्चरर से 2006 में प्रोफेसर बना और साल 2015 में सेवानिवृत्त हुआ।

सेवानिवृत्ति के बाद आरोपित ने कई विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद सँभाले। इनमें कुमाऊँ विश्वविद्यालय, मेवाड़ विश्वविद्यालय और जयपुर तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं। आगरा के अंबेडकर विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “डॉक्टर कृष्ण शेखर राणा एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं और हमने कभी किसी कदाचार के बारे में नहीं सुना। छात्र उन्हें बहुत पसंद करते थे।”

आरोपित की लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसके पास यूके की कॉमनवेल्थ वोकेशनल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री है। इसके साथ ही उसने न्यूयॉर्क में विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग से डी.एल.आई.टी. की डिग्री ली है। दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि अभी तक उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि आरोपित ने पैसे कमाने के लिए नकली पहचान का इस्तेमाल किया हो।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ने पहली बार आगरा में अंबेडकर विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में जाने के दौरान प्रोटोकॉल की माँग की थी। इसके बाद पिछले साल 25 दिसंबर को फरीदाबाद में रोटरी यूथ लीडरशिप अवॉर्ड्स कार्यक्रम के लिए उसने वीआईपी प्रोटोकॉल माँगा। हालाँकि, 22 फरवरी को दिल्ली के एक कार्यक्रम में भाग लेने पर भी उसने यहाँ VIP प्रोटोकॉल की माँग नहीं की।

इसके बाद 8 मार्च को मथुरा में श्री धाम वृंदावन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित होने के बाद आरोपित कृष्ण शेखर ने प्रोटोकॉल की माँग की थी। फिर 11 मार्च को उसने अपने निजी सचिव के द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ एक पत्र गाजियाबाद पुलिस को भेजा। उसमें प्रोटोकॉल का अनुरोध किया गया था। यह प्रोटोकॉल बेटी से मिलने के लिए जाने के दौरान माँगी गई थी।

पाकिस्तान के कॉलेजों में भारतीय गानों पर नहीं होगा डांस, ‘अनैतिक-अश्लील’ बता पंजाब में जारी किया फरमान: होली खेलने पर छात्रों की एंट्री यूनिवर्सिटी ने कर थी बंद

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय गानों पर डांस करने पर प्रतिबंध लग गया। यह आदेश पंजाब उच्च शिक्षा आयोग ने सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेजों के लिए लागू किया। सर्कुलर में कहा गया कि कॉलेजों में ‘अनैतिक और अश्लील’ गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा आदेश जारी किया जा रहा है।

पंजाब के शिक्षा निदेशक सैयद अंसार अजहर द्वारा जारी सभी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि कई मामले आए हैं जब छात्रों को प्राइवेट में और पब्लिकली भी भारतीय गानों पर डांस करते देखा गया। ऐसे में निर्देश दिए जाते हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी हरकतें न की जाएँ। अगर ऐसी गतिविधियाएँ होती हैं तो सख्त कार्रवाई की जाए।

बता दें कि पहला मामला नहीं है जब होली के मौके पर पाकिस्तान के कॉलेजों में ऐसे प्रतिबंध लगाए गए हों…। पाकिस्तान के कराची स्थित दाऊद यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने हाल ही में अपने हिंदू छात्रों को होली मनाने के लिए एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था।

इसके अलावा कैद-ए-आजम यूनिवर्सिटी ने भी छात्रों को परिसर में होली खेलने से मना किया था और कहा था कि होली का उत्सव देश की इस्लामी पहचान को कमजोर करता है। लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में 30 हिंदू छात्रों को होली मनाने से रोकने का काम हुआ। इस घटना में करीबन 15 छात्र घायल हो गए थे।

मालूम हो कि पाकिस्तान में हर साल हिंदू पर्व आने पर इस तरह के प्रतिबंध सुनाई पड़ते हैं। पाकिस्तान का उच्च शिक्षा आयोग मानता है कि होली जैसे समारोह आयोजित होने से देश के सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर असर पड़ेगा। इससे देश की इस्लामी पहचान को नुकसान पहुँच सकता है।

मीडिया का मुँह बंद कराने पर तुली तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार, महिला पत्रकारों पर दबिश के बाद CM ने धमकाया: कहा- नंगा करूँगा, कुटवाऊँगा, परेड निकलवाऊँगा

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दो महिला पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। अब सीएम रेड्डी ने खुलकर धमकी दी है। कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया रेड्डी ने कहा कि उनके खिलाफ अपशब्द वाली टिप्पणी करने वालों को ‘नंगा कर पीटा जाएगा और उसका परेड निकाला जाएगा’। उन्होंने पत्रकारों को दंडित करने के लिए विधानसभा में बिल लाने की भी बात कही है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा, “यह मत सोचिए कि मैं चुप हूँ, क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूँ। मैं आपको नंगा कर दूँगा और आपको पीटूँगा। ऐसे लाखों लोग हैं, जो मेरे आह्वान पर आपको पीटने के लिए सड़कों पर उतर आएँगे। लेकिन, मैं अपने पद के कारण सहनशील बना हुआ हूँ।” हालाँकि, अपनी धमकी को कानूनी जामा पहनाते हुए उन्होंने कहा, “मैं जो भी करूँगा, कानून के दायरे में रहकर करूँगा।”

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले डिजिटल मीडिया पत्रकारों, विशेष रूप से यूट्यूब चैनल चलाने वालों को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहता हूँ कि पत्रकार कौन है? क्या कोई ‘ट्यूब’ (यूट्यूब चैनल) शुरू कर सकता है और किसी की आलोचना करना शुरू कर सकता है? क्या उन्हें पत्रकार माना जा सकता है?”

शनिवार (15 मार्च) को विधानसभा में बोलते हुए सीएम रेड्डी ने कहा कि इसके लिए एक विधेयक लाया जाएगा। रेवंत रेड्डी ने कहा, “हम सार्वजनिक जीवन में हैं और आलोचना के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारे परिवार के सदस्यों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?” रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि पत्रकारिता की आड़ में सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री फैलाने की संस्कृति पनपने तक वे चुप नहीं रहेंगे।

BRS पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों के बारे में अपमानजनक भाषा पोस्ट की थी। मेरे परिवार की महिलाओं के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा पर मेरा खून खौल रहा है। अगर BRS के नेताओं की माताओं, बहनों और पत्नियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाए तो क्या वे चुप रहेंगे?”

पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी BRS पर आरोप लगाते हुए सीएम रेड्डी ने कहा, “वे (बीआरएस) अपने पार्टी कार्यालय में पैसे लेकर आए कलाकारों को लाए, इसे रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। अब, वे परेशान हैं क्योंकि दो महिलाओं के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है।” इन महिलाओं की गिरफ्तारी का BRS ने विरोध किया है।

दरअसल, सीएम रेड्डी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने 10 मार्च को पोगदादंडा रेवती और उनकी सहकर्मी संध्या उर्फ तन्वी यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 12 मार्च को पुलिस ने ‘पल्स न्यूज‘ नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाली दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि दोनों महिलाओं ने BRS ऑफिस में वीडियो शूट किया था।

जिस वीडियो को लेकर सीएम रेड्डी पत्रकारों को धमकी दे रहे हैं, उस वीडियो में एक किसान ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अब चूँकि इस इंटरव्यू को ‘पल्स न्यूज’ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, इसीलिए माना गया कि ये सब ‘पल्स न्यूज’ ने मुख्यमंत्री की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव ने इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई। 

कौन हैं लाचित बरपुखान जिनके नाम पर असम में बनी अकादमी में पुलिसकर्मी पाते हैं प्रशिक्षण, क्यों अमित शाह ने कहा बनेगा देश का नंबर 1: जानिए कैसे इनके ‘त्रिभुज’ में डूब गई औरंगजेब की फौज

असम में पुलिस ट्रेनिंग के लिए लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी का निर्माण बीजेपी सरकार ने कराया। आज असम की लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी में सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों के पुलिस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग मिलती है। एक समय था, जब असम के अधिकारियों को दूसरे राज्यों में ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता था। इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी को लेकर एक ट्वीट किया, जिसके बाद फिर ये इस अकादमी और जिन लाचित बरपुखान के नाम पर ये है, उनकी चर्चा शुरू हो गई।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “एक दौर था जब असम की पुलिस को ट्रेनिंग के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन बीजेपी सरकार ने पिछले 8 साल में ऐसा बदलाव किया कि आज लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी से गोवा और मणिपुर के 2,000 पुलिसवाले ट्रेनिंग लेकर जा चुके हैं।”

असम का नाम सुनते ही अब लाचित बरपुखान का नाम सामने आता है, जिन्होंने मुगलों को धूल चटाई थी। आज उनकी वजह से ही नेशनल डिफेंस अकादमी का बेस्ट कैडेट लाचित बरपुखान गोल्ड मेडल पाता है।

कौन थे लाचित बरपुखान, जिन्होंने मुगलों को बार बार चटाई धूल

लाचित बरपुखान का जन्म 24 नवंबर 1622 को हुआ था। उन्हें पूर्वोत्तर का शिवाजी कहा जाता है। 1671 में सराईघाट के युद्ध में उन्होंने मुगलों की 50,000 से ज्यादा की फौज को हरा दिया। वो भी तब, जब वो बीमार थे। उनकी जलीय युद्ध की रणनीति ने मुगलों को पानी में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

ब्रह्मपुत्र नदी और पहाड़ों को हथियार बनाकर उन्होंने मुगल सेना को तहस-नहस कर दिया। इस जीत के बाद मुगलों ने फिर कभी पूर्वोत्तर की तरफ आँख उठाने की हिम्मत नहीं की। लाचित का ये पराक्रम इतना बड़ा था कि उनकी मृत्यु 1672 में हो गई, पर उनका नाम अमर हो गया।

अहोम साम्राज्य ने 1228 से 1826 तक करीब 600 साल असम पर राज किया। इस दौरान तुर्क, अफगान और मुगलों ने कई बार हमले किए। पहला हमला 1615 में हुआ, जब लाचित सिर्फ 7 साल के थे। 1663 में मुगलों ने अहोम को हरा दिया और घिलाजरीघाट की संधि हुई।

इस संधि में अहोम राजा जयध्वज सिंह को अपनी बेटी और भतीजी मुगल हरम में भेजनी पड़ी। 82 हाथी, 3 लाख सिक्के, 675 बंदूकें और 1000 जहाज भी मुगलों को देने पड़े। राज्य का बड़ा हिस्सा भी चला गया। इस अपमान से जयध्वज टूट गए और जल्द ही उनकी मौत हो गई। उनके बाद चक्रध्वज सिंह ने मुगलों से बदला लेने की ठानी और 1667 में लाचित को सेनापति बनाया।

पानी में मुगलों को दी करारी मात

लाचित बरपुखान सैन्य कौशल में माहिर थे। सेनापति बनने से पहले उन्होंने अहोम साम्राज्य में कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाई थीं। 4 नवंबर 1667 को उनकी सेना ने गुवाहाटी पर कब्जा कर लिया। ये जगह रणनीति के लिहाज से बहुत जरूरी थी।

मुगल शासक औरंगजेब ने गुवाहाटी वापस लेने के लिए राजा राम सिंह को भेजा, जो अंबर के मिर्जा राजा जय सिंह के बेटे थे। कई बार छोटे-मोटे संघर्ष के बाद लाचित ने मुगलों को पानी की तरफ धकेला और 1671 में सराईघाट का युद्ध हुआ। इस युद्ध में लाचित ने सिर्फ 7 नावों से मुगलों की सैकड़ों नावों को हरा दिया। उनकी चालाकी और हिम्मत ने मुगलों को चारों खाने चित कर दिया।

मुगलों ने पूर्वोत्तर की तरफ देखना छोड़ दिया

लाचित बरपुखान की इस जीत का असर इतना गहरा था कि मुगलों ने पूर्वोत्तर पर कब्जे का सपना छोड़ दिया। उनके जाने के बाद भी अहोम साम्राज्य मजबूत रहा। लाचित को आज भी असम में बहुत सम्मान से याद किया जाता है। उनकी 400वीं जयंती पर 23 नवंबर 2022 को दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन का आयोजन हुआ।

असम सरकार ने 2000 में लाचित बरपुखान अवॉर्ड शुरू किया, जो हर साल दिया जाता है। इतिहास में भले ही उन्हें कम जगह मिली, पर मोदी सरकार अब उनके गौरव को वापस लाने की कोशिश कर रही है। बीते साल खुद पीएम मोदी ने लाचित बरपुखान की प्रतिमा का अनावरण किया था।

लाचित का ये पराक्रम हमें याद दिलाता है कि मुगलों को सिर्फ राजपूतों या मराठों ने ही नहीं हराया, बल्कि अहोम योद्धाओं ने भी उन्हें 17 बार धूल चटाई। आज लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी असम की शान है, जहाँ से दूसरे राज्यों के पुलिसवाले भी ट्रेनिंग ले रहे हैं।