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भाई सपा से रहे MLA, खुद कई यूनिवर्सिटी का रहा VC… मिलिए फ्रॉड कृष्ण शेखर राणा से, ओमान का उच्चायुक्त बन प्रोटोकॉल माँग रहा था जंतु शास्त्र का प्रोफेसर

खुद को ओमान का उच्चायुक्त बताकर गाड़ी और अन्य सरकारी सुविधा उठाने वाले एक नामचीन शिक्षाविद् कृष्ण शेखर राणा को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित कई विश्वविद्यालयों का कुलपति भी रह चुका है और शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नाम है। दिल्ली के अमर कॉलोनी का रहने वाले आरोपित ने खुद को ओमान का उच्चायुक्त बताकर उत्तर प्रदेश पुलिस से प्रोटोकॉल की माँग की थी।

आरोपित के पीए ने प्रोटोकॉल सेवाओं के लिए गाजियाबाद पुलिस को एक पत्र लिखा था। इसके बाद उसे प्रोटोकॉल सेवा भी दी गई थी। पुलिस के अनुसार, प्रोटोकॉल सेवाओं के लिए दिए गए दस्तावेज़ पुलिस को संदिग्ध लगे। उसके आधार पर आरोपित से पूछताछ की गई तो उसने कबूल किया कि वह ट्रेड कमिश्नर है, ना कि हाई कमिश्नर। उसने बताया कि उसका मकसद सरकारी सेवा हासिल करना था।

66 वर्षीय आरोपित कृष्ण शेखर राणा को गाजियाबाद के यूपी गेट से गिरफ्तार किया है। उसके पास से राजनयिक नंबर वाले काले रंग की एक मर्सिडीज कार, एक पहचान पत्र और 46 विजिटिंग कार्ड बरामद किए गए हैं। ट्रांस हिंडन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निमिष पाटिल ने कहा कि कृष्ण शेखर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

डीसीपी पाटिल ने आगे बताया कि ओमान का उच्चायुक्त होने का दावा करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में पता चला कि वह एक इंडिया-GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) नाम की संस्था के लिए काम करता था। वह ट्रेड कमिश्नर था, लेकिन खुद को हाई कमिश्नर बताकर अपने पद का दुरुपयोग करता रहा था।

इंडिया-GCC का संबंध ओमान से है। संस्था के अधिकारियों के अनुसार, आरोपित ओमान में एक विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहता था। इसके बाद ओमान ने उसे ट्रेड कमिश्नर की मानद उपाधि दी थी। भारत-GCC के वली काशवी ने कहा, “हम उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण उनके साथ काम करना चाहते थे। उन्हें ओमान आने के लिए कई बार निमंत्रण दिया गया, लेकिन वे कभी नहीं गए।”

डीसीपी पाटिल ने बताया कि कृष्ण शेखर आगरा में जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) के अध्यक्ष प्रोफेसर रह चुका है। उसके 100 से अधिक शोध पत्र देश और विदेश के जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। आरोपित के निर्देशन में 50 से अधिक छात्र-छात्राएँ अपना शोध पूरा कर चुके हैं। आरोपित का आगरा में कृष्ण कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी है। साथ ही वह राजस्थान में एक रिसॉर्ट का भी मालिक है।

कभी आगरा के जाट हाउस में रहने वाले आरोपित कृष्ण शेखर ने रिटायरमेंट के बाद साल 2015 से 2018 तक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में अप्रेजल अथॉरिटी के रूप में काम किया। मंत्रालय में उसका काम पर्यावरण संबंधी मंजूरियाँ देना था। इस संबंध में मंत्रालय से जानकारी माँगी गई है। आरोपित को विश्व मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपना शांति दूत (पीस एंबेसडर) भी बनाया था।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है। वह समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक एवं जाट समाज के बड़े नेता विजय सिंह राणा का भाई है। विजय की 2021 में मृत्यु हो गई थी। आरोपित कृष्ण शेखर ने आगरा के बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में तीन दशकों तक पढ़ाया है। साल 1982 में वह लेक्चरर से 2006 में प्रोफेसर बना और साल 2015 में सेवानिवृत्त हुआ।

सेवानिवृत्ति के बाद आरोपित ने कई विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद सँभाले। इनमें कुमाऊँ विश्वविद्यालय, मेवाड़ विश्वविद्यालय और जयपुर तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं। आगरा के अंबेडकर विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “डॉक्टर कृष्ण शेखर राणा एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं और हमने कभी किसी कदाचार के बारे में नहीं सुना। छात्र उन्हें बहुत पसंद करते थे।”

आरोपित की लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसके पास यूके की कॉमनवेल्थ वोकेशनल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री है। इसके साथ ही उसने न्यूयॉर्क में विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग से डी.एल.आई.टी. की डिग्री ली है। दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि अभी तक उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि आरोपित ने पैसे कमाने के लिए नकली पहचान का इस्तेमाल किया हो।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ने पहली बार आगरा में अंबेडकर विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में जाने के दौरान प्रोटोकॉल की माँग की थी। इसके बाद पिछले साल 25 दिसंबर को फरीदाबाद में रोटरी यूथ लीडरशिप अवॉर्ड्स कार्यक्रम के लिए उसने वीआईपी प्रोटोकॉल माँगा। हालाँकि, 22 फरवरी को दिल्ली के एक कार्यक्रम में भाग लेने पर भी उसने यहाँ VIP प्रोटोकॉल की माँग नहीं की।

इसके बाद 8 मार्च को मथुरा में श्री धाम वृंदावन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित होने के बाद आरोपित कृष्ण शेखर ने प्रोटोकॉल की माँग की थी। फिर 11 मार्च को उसने अपने निजी सचिव के द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ एक पत्र गाजियाबाद पुलिस को भेजा। उसमें प्रोटोकॉल का अनुरोध किया गया था। यह प्रोटोकॉल बेटी से मिलने के लिए जाने के दौरान माँगी गई थी।

पाकिस्तान के कॉलेजों में भारतीय गानों पर नहीं होगा डांस, ‘अनैतिक-अश्लील’ बता पंजाब में जारी किया फरमान: होली खेलने पर छात्रों की एंट्री यूनिवर्सिटी ने कर थी बंद

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय गानों पर डांस करने पर प्रतिबंध लग गया। यह आदेश पंजाब उच्च शिक्षा आयोग ने सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेजों के लिए लागू किया। सर्कुलर में कहा गया कि कॉलेजों में ‘अनैतिक और अश्लील’ गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा आदेश जारी किया जा रहा है।

पंजाब के शिक्षा निदेशक सैयद अंसार अजहर द्वारा जारी सभी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि कई मामले आए हैं जब छात्रों को प्राइवेट में और पब्लिकली भी भारतीय गानों पर डांस करते देखा गया। ऐसे में निर्देश दिए जाते हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी हरकतें न की जाएँ। अगर ऐसी गतिविधियाएँ होती हैं तो सख्त कार्रवाई की जाए।

बता दें कि पहला मामला नहीं है जब होली के मौके पर पाकिस्तान के कॉलेजों में ऐसे प्रतिबंध लगाए गए हों…। पाकिस्तान के कराची स्थित दाऊद यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने हाल ही में अपने हिंदू छात्रों को होली मनाने के लिए एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था।

इसके अलावा कैद-ए-आजम यूनिवर्सिटी ने भी छात्रों को परिसर में होली खेलने से मना किया था और कहा था कि होली का उत्सव देश की इस्लामी पहचान को कमजोर करता है। लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में 30 हिंदू छात्रों को होली मनाने से रोकने का काम हुआ। इस घटना में करीबन 15 छात्र घायल हो गए थे।

मालूम हो कि पाकिस्तान में हर साल हिंदू पर्व आने पर इस तरह के प्रतिबंध सुनाई पड़ते हैं। पाकिस्तान का उच्च शिक्षा आयोग मानता है कि होली जैसे समारोह आयोजित होने से देश के सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर असर पड़ेगा। इससे देश की इस्लामी पहचान को नुकसान पहुँच सकता है।

मीडिया का मुँह बंद कराने पर तुली तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार, महिला पत्रकारों पर दबिश के बाद CM ने धमकाया: कहा- नंगा करूँगा, कुटवाऊँगा, परेड निकलवाऊँगा

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दो महिला पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। अब सीएम रेड्डी ने खुलकर धमकी दी है। कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया रेड्डी ने कहा कि उनके खिलाफ अपशब्द वाली टिप्पणी करने वालों को ‘नंगा कर पीटा जाएगा और उसका परेड निकाला जाएगा’। उन्होंने पत्रकारों को दंडित करने के लिए विधानसभा में बिल लाने की भी बात कही है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा, “यह मत सोचिए कि मैं चुप हूँ, क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूँ। मैं आपको नंगा कर दूँगा और आपको पीटूँगा। ऐसे लाखों लोग हैं, जो मेरे आह्वान पर आपको पीटने के लिए सड़कों पर उतर आएँगे। लेकिन, मैं अपने पद के कारण सहनशील बना हुआ हूँ।” हालाँकि, अपनी धमकी को कानूनी जामा पहनाते हुए उन्होंने कहा, “मैं जो भी करूँगा, कानून के दायरे में रहकर करूँगा।”

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले डिजिटल मीडिया पत्रकारों, विशेष रूप से यूट्यूब चैनल चलाने वालों को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहता हूँ कि पत्रकार कौन है? क्या कोई ‘ट्यूब’ (यूट्यूब चैनल) शुरू कर सकता है और किसी की आलोचना करना शुरू कर सकता है? क्या उन्हें पत्रकार माना जा सकता है?”

शनिवार (15 मार्च) को विधानसभा में बोलते हुए सीएम रेड्डी ने कहा कि इसके लिए एक विधेयक लाया जाएगा। रेवंत रेड्डी ने कहा, “हम सार्वजनिक जीवन में हैं और आलोचना के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारे परिवार के सदस्यों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?” रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि पत्रकारिता की आड़ में सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री फैलाने की संस्कृति पनपने तक वे चुप नहीं रहेंगे।

BRS पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों के बारे में अपमानजनक भाषा पोस्ट की थी। मेरे परिवार की महिलाओं के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा पर मेरा खून खौल रहा है। अगर BRS के नेताओं की माताओं, बहनों और पत्नियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाए तो क्या वे चुप रहेंगे?”

पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी BRS पर आरोप लगाते हुए सीएम रेड्डी ने कहा, “वे (बीआरएस) अपने पार्टी कार्यालय में पैसे लेकर आए कलाकारों को लाए, इसे रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। अब, वे परेशान हैं क्योंकि दो महिलाओं के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है।” इन महिलाओं की गिरफ्तारी का BRS ने विरोध किया है।

दरअसल, सीएम रेड्डी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने 10 मार्च को पोगदादंडा रेवती और उनकी सहकर्मी संध्या उर्फ तन्वी यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 12 मार्च को पुलिस ने ‘पल्स न्यूज‘ नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाली दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि दोनों महिलाओं ने BRS ऑफिस में वीडियो शूट किया था।

जिस वीडियो को लेकर सीएम रेड्डी पत्रकारों को धमकी दे रहे हैं, उस वीडियो में एक किसान ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अब चूँकि इस इंटरव्यू को ‘पल्स न्यूज’ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, इसीलिए माना गया कि ये सब ‘पल्स न्यूज’ ने मुख्यमंत्री की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव ने इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई। 

कौन हैं लाचित बरपुखान जिनके नाम पर असम में बनी अकादमी में पुलिसकर्मी पाते हैं प्रशिक्षण, क्यों अमित शाह ने कहा बनेगा देश का नंबर 1: जानिए कैसे इनके ‘त्रिभुज’ में डूब गई औरंगजेब की फौज

असम में पुलिस ट्रेनिंग के लिए लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी का निर्माण बीजेपी सरकार ने कराया। आज असम की लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी में सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों के पुलिस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग मिलती है। एक समय था, जब असम के अधिकारियों को दूसरे राज्यों में ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता था। इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी को लेकर एक ट्वीट किया, जिसके बाद फिर ये इस अकादमी और जिन लाचित बरपुखान के नाम पर ये है, उनकी चर्चा शुरू हो गई।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “एक दौर था जब असम की पुलिस को ट्रेनिंग के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन बीजेपी सरकार ने पिछले 8 साल में ऐसा बदलाव किया कि आज लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी से गोवा और मणिपुर के 2,000 पुलिसवाले ट्रेनिंग लेकर जा चुके हैं।”

असम का नाम सुनते ही अब लाचित बरपुखान का नाम सामने आता है, जिन्होंने मुगलों को धूल चटाई थी। आज उनकी वजह से ही नेशनल डिफेंस अकादमी का बेस्ट कैडेट लाचित बरपुखान गोल्ड मेडल पाता है।

कौन थे लाचित बरपुखान, जिन्होंने मुगलों को बार बार चटाई धूल

लाचित बरपुखान का जन्म 24 नवंबर 1622 को हुआ था। उन्हें पूर्वोत्तर का शिवाजी कहा जाता है। 1671 में सराईघाट के युद्ध में उन्होंने मुगलों की 50,000 से ज्यादा की फौज को हरा दिया। वो भी तब, जब वो बीमार थे। उनकी जलीय युद्ध की रणनीति ने मुगलों को पानी में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

ब्रह्मपुत्र नदी और पहाड़ों को हथियार बनाकर उन्होंने मुगल सेना को तहस-नहस कर दिया। इस जीत के बाद मुगलों ने फिर कभी पूर्वोत्तर की तरफ आँख उठाने की हिम्मत नहीं की। लाचित का ये पराक्रम इतना बड़ा था कि उनकी मृत्यु 1672 में हो गई, पर उनका नाम अमर हो गया।

अहोम साम्राज्य ने 1228 से 1826 तक करीब 600 साल असम पर राज किया। इस दौरान तुर्क, अफगान और मुगलों ने कई बार हमले किए। पहला हमला 1615 में हुआ, जब लाचित सिर्फ 7 साल के थे। 1663 में मुगलों ने अहोम को हरा दिया और घिलाजरीघाट की संधि हुई।

इस संधि में अहोम राजा जयध्वज सिंह को अपनी बेटी और भतीजी मुगल हरम में भेजनी पड़ी। 82 हाथी, 3 लाख सिक्के, 675 बंदूकें और 1000 जहाज भी मुगलों को देने पड़े। राज्य का बड़ा हिस्सा भी चला गया। इस अपमान से जयध्वज टूट गए और जल्द ही उनकी मौत हो गई। उनके बाद चक्रध्वज सिंह ने मुगलों से बदला लेने की ठानी और 1667 में लाचित को सेनापति बनाया।

पानी में मुगलों को दी करारी मात

लाचित बरपुखान सैन्य कौशल में माहिर थे। सेनापति बनने से पहले उन्होंने अहोम साम्राज्य में कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाई थीं। 4 नवंबर 1667 को उनकी सेना ने गुवाहाटी पर कब्जा कर लिया। ये जगह रणनीति के लिहाज से बहुत जरूरी थी।

मुगल शासक औरंगजेब ने गुवाहाटी वापस लेने के लिए राजा राम सिंह को भेजा, जो अंबर के मिर्जा राजा जय सिंह के बेटे थे। कई बार छोटे-मोटे संघर्ष के बाद लाचित ने मुगलों को पानी की तरफ धकेला और 1671 में सराईघाट का युद्ध हुआ। इस युद्ध में लाचित ने सिर्फ 7 नावों से मुगलों की सैकड़ों नावों को हरा दिया। उनकी चालाकी और हिम्मत ने मुगलों को चारों खाने चित कर दिया।

मुगलों ने पूर्वोत्तर की तरफ देखना छोड़ दिया

लाचित बरपुखान की इस जीत का असर इतना गहरा था कि मुगलों ने पूर्वोत्तर पर कब्जे का सपना छोड़ दिया। उनके जाने के बाद भी अहोम साम्राज्य मजबूत रहा। लाचित को आज भी असम में बहुत सम्मान से याद किया जाता है। उनकी 400वीं जयंती पर 23 नवंबर 2022 को दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन का आयोजन हुआ।

असम सरकार ने 2000 में लाचित बरपुखान अवॉर्ड शुरू किया, जो हर साल दिया जाता है। इतिहास में भले ही उन्हें कम जगह मिली, पर मोदी सरकार अब उनके गौरव को वापस लाने की कोशिश कर रही है। बीते साल खुद पीएम मोदी ने लाचित बरपुखान की प्रतिमा का अनावरण किया था।

लाचित का ये पराक्रम हमें याद दिलाता है कि मुगलों को सिर्फ राजपूतों या मराठों ने ही नहीं हराया, बल्कि अहोम योद्धाओं ने भी उन्हें 17 बार धूल चटाई। आज लाचित बरपुखान पुलिस अकादमी असम की शान है, जहाँ से दूसरे राज्यों के पुलिसवाले भी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

स्वाति को प्रेम जाल में फँसा नयाज ने बनाए रिश्ते, फिर गला घोंटकर मार डाला: तुंगभद्रा नदी से मिली थी लाश, पूर्व CM बोले- कर्नाटक में लव जिहाद का चल रहा नेटवर्क

कर्नाटक के हावेरी में एक मुस्लिम युवक ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर एक हिन्दू युवती की हत्या कर दी। हत्या के बाद उसका शव नदी में फेंक दिया। शव बरामद होने के कुछ दिनों बाद आरोपित गिरफ्तार हुआ है। इस मामले में भाजपा ने लव जिहाद का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 6 मार्च को हावेरी में तुंगभद्रा नदी से एक युवती की लाश बरामद हुई थी। पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम करवाया था। इससे पता चला था कि मृतका की गला दबा कर हत्या की गई थी। मृतका की पहचान के लिए पुलिस ने उसके फोटो भी लिए थे।

इसके कुछ ही दिनों के बाद युवती की पहचान मैसुरु की 22 वर्षीय स्वाति के रूप में हुई। स्वाति नर्स के तौर पर काम करती थी। वह इससे कुछ दिन पहले से घर से गायब थी। इसको लेकर उसके परिजन 7 मार्च, 2025 को पुलिस के पास पहुँचे थे और रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी।

पुलिस ने इस मामले में इसके बाद जाँच चालू की। उसे पता चला कि युवती को आखिरी बार नयाज नाम के युवक के साथ देखा गया था। पुलिस ने 13 मार्च को नयाज को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ की तो इस हत्या की पूरी सच्चाई सामने आई।

नयाज ने स्वाति की हत्या की बात कबूल की। नयाज ने बताया कि स्वाति और उसका 2 साल से संबंध था। स्वाति उससे शादी करना चाहती थी। हालाँकि, इसको लेकर बात नहीं बन पाई थी। बीते कुछ समय पहले ही नयाज का निकाह कहीं और तय हो गया था।

स्वाति इसके बाद नयाज पर शादी के लिए दबाव बना रही थी। इसी के चलते नयाज ने स्वाति की हत्या की प्लानिंग की। 3 मार्च को स्वाति को नयाज ने बुलाया था। यह मुलाक़ात एक पार्क में हुई। इसके बाद स्वाति को नयाज अपने 2 और दोस्तों के साथ रत्तिहल्ली में ले गया और यहाँ उसका गला घोंट दिया।

इसके बाद स्वाति की लाश को तुंगभद्रा नदी में फेंक दिया गया। इसके बाद वह गायब हो गया। मृतका के घर वालों ने अब इस मामले में न्याय की माँग की है। वहीं कुछ हिन्दू संगठनों ने इस मामले में लव जिहाद का आरोप लगाया और आरोपित पर कार्रवाई की माँग की।

हावेरी से भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने इस मामले में लव जिहाद का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसका राज्य भर में नेटवर्क चल रहा है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार में महिलाओं की सुरक्षा ना होने की बात कही है। हालाँकि, पुलिस लगातार लव जिहाद का एंगल नकार रही है।

कर्नाटक में सरकारी ठेकों में भी मुस्लिमों को मिलेगा आरक्षण, कॉन्ग्रेस सरकार ने 4% कोटा पर लगाई मुहर: कानून में करेगी बदलाव, BJP ने संविधान पर हमला बताया

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने मुस्लिम आरक्षण के फैसले पर मुहर लगा दी है। कर्नाटक की कैबिनेट बैठक में आरक्षण वाले विधेयक को मंजूरी दी गई है। यह विधेयक जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा। इससे राज्य के भीतर मुस्लिमों को सरकारी ठेकों में आरक्षण मिलेगा।

कर्नाटक सरकार की शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को हुई बैठक में 4% आरक्षण देने का यह प्रस्ताव मंजूर किया गया है। मुस्लिमों को यह आरक्षण देने के लिए 1999 के एक कानून में बदलाव किया जाएगा। कयास हैं इसके लिए विधेयक वर्तमान में चल रहे कर्नाटक विधानसभा सत्र में ही पेश किया जाएगा।

अगर मुस्लिमों के लिए आरक्षण लागू होता है तो राज्य में ठेकों में आरक्षण बढ़कर 47% हो जाएगा। कर्नाटक में अभी SC-ST और OBC को आरक्षण मिलता है। यह आरक्षण वर्गीकृत करके दिया जाता है। ठेकों में आरक्षण सिद्दारमैया ने ही लागू किया था।

उन्होंने 2013-18 की सरकार के दौरान SC-ST जबकि बीते वर्ष OBC को आरक्षण देने का ऐलान किया था। कर्नाटक में सिद्दारमैया की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार कई बार मुस्लिमों को आरक्षण देने का प्रयास कर चुकी है लेकिन विरोध के चलते यह ठंडे बस्ते में चला जाता था। इस बार सरकार इसे विधानसभा तक लाने में सफल रही है।

कर्नाटक सरकार के इस फैसले को लेकर बवाल भी चालू हो गया है। भाजपा ने इस फैसले को देश के संविधान पर हमला बताया है। भाजपा युवा मोर्चा के मुखिया और सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सरकारी ठेकों में मुस्लिमों के लिए 4% कोटा देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी संविधान पर हमला है और धर्मांतरण को प्रोत्साहित करने का कार्य है।”

उन्होंने आगे कहा, “धर्म की बजाय हमेशा से सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन को आगे रखा गया है। चुनावी लाभ के लिए यह नया हथकंडा आरक्षण के असल उद्देश्य को ही खत्म करने के बराबर है। सरकार वोटबैंक की राजनीति के लिए शक्ति और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है और हमारी अर्थव्यवस्था को राजनीति के लिए मैदान में बदल रही है।”

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इसे मुस्लिम लीग और जिन्ना की सोच बताया है। पूनावाला ने पूछा है कि क्या अब पुल और सड़कें गुणवत्ता नहीं धर्म देखकर बनाए जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि इससे नुकसान सिर्फ SC-ST और OBC का ही होगा।

अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया… 41 देशों पर ट्रैवल बना लगा सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के पास बचने के लिए 60 दिन: पिछले कार्यकाल में भी इस्लामी देशों पर लगाई थी पाबंदी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन 41 देशों के लोगों पर ट्रैवल बैन लगाने पर विचार कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी मेमो के हवाले से बताया कि ये लिस्ट अभी पक्की नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इसे अभी यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की मंजूरी भी नहीं मिली है। इस मेमो में 41 देशों को तीन हिस्सों में बाँटा गया है।

पहले ग्रुप में 10 देश हैं- अफगानिस्तान, क्यूबा, ईरान, लीबिया, नॉर्थ कोरिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और यमन। इन पर पूरी तरह से वीजा सस्पेंशन की बात है, यानी इन देशों के लोग अमेरिका नहीं आ सकेंगे। दूसरा ग्रुप पाँच देशों का है- इरिट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और साउथ सूडान। यहाँ टूरिस्ट, स्टूडेंट और कुछ खास तरह के वीजा पर आंशिक रोक लगेगी, लेकिन कुछ छूट भी होंगे।

तीसरे ग्रुप में 26 देश हैं, जिसमें पाकिस्तान, बेलारूस, अंगोला, भूटान, कम्बोडिया, चाड, लाइबेरिया, मॉरीतानिया, तुर्कमेनिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इन देशों को 60 दिन का वक्त दिया जाएगा कि वो अपनी कमियाँ ठीक करें, वरना इनके वीजा पर भी आंशिक पाबंदी लग सकती है।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी ऐसा कुछ किया था। तब उन्होंने सात इस्लामिक देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मंजूरी दे दी थी। उस वक्त खूब विवाद हुआ था। बाद में जो बाइडन ने राष्ट्रपति बनते ही उस बैन को हटा दिया और इसे देश के लिए ‘राजनीतिक दाग’ बताया था।

अब ट्रंप ने दोबारा सत्ता में आते ही 20 जनवरी 2025 को एक ऑर्डर साइन किया, जिसमें विदेशियों के लिए सख्त सिक्योरिटी चेकिंग की बात कही गई। उनका कहना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों को रोका जा सकेगा। ट्रंप ने अक्टूबर 2023 में एक स्पीच में भी इसका जिक्र किया था कि वो गाजा, लीबिया, सोमालिया, सीरिया, यमन जैसे इलाकों से आने वालों पर रोक लगाएँगे।

इस बार की लिस्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले रिपोर्ट किया था। मेमो के मुताबिक, ट्रंप ने अपने मंत्रियों को 21 मार्च 2025 तक ऐसी देशों की लिस्ट देने को कहा था, जहाँ से आने वालों की स्क्रीनिंग में दिक्कत है। स्टेट डिपार्टमेंट ने अभी इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।

दिल्ली में होली पर दो भाइयों पर जानलेवा हमला: एक का फूटा सिर, दूसरे के हाथ में बोर्ड परीक्षा से पहले प्लास्टर चढ़ा: परिवार पूछ रहा- गलती क्या थी

“आपके बच्चे घर से हँसते-मुस्कुराते निकलें और अचानक उनपर कुछ लोग जानलेवा हमला कर दें… ये सोचकर आपको कैसा लगेगा? क्या आपका दिल नहीं काँपेगा जब सारे चश्मदीद आपको ये बताएँ कि हमलावरों के हाथ में लाठी-ंडंडे, चाकू-फरसे सब थे? आप पर क्या बीतेगी अगर आप अपने बच्चों को खून से लथपथ देखें? आपका कितना विश्वास प्रशासन पर बचेगा जब आप अपनी गुहार लेकर पुलिस के पास जाएँ, उन्हें आरोपितों के बारे में बताएँ और फिर भी कोई कार्रवाई न हो?

ये सारे सवाल हैं दिल्ली लक्ष्मीनगर के स्कूल ब्लॉक में रह रहे एक परिवार के, जिनके घर के दो लड़कों पर दिनदहाड़े हमला हुआ। 14 मार्च 2025 को होली मनाने के बाद दोपहर 3:15 बजे दो भाई अपने घर से निकलकर मेट्रो स्टेशन तक जा रहे थे, लेकिन गली से बाहर पहुँचते ही उन्हें 10-12 लड़कों ने घेर लिया और उन्हें तब तक मारा जब तक एक के सिर से खून नहीं निकला। 

पीड़ित लड़कों की पहचान अर्जित (21), हर्षित (17) के तौर पर हुई है। दोनों लड़के घटना में बुरी तरह घायल हो गए। एक के सिर पर चोट आई, जबकि दूसरे का हाथ फ्रैक्चर हो गया। जिस 17 वर्षीय हर्षित के हाथ में चोट लगी वो 12वीं का छात्र है और इस समय उसकी बोर्ड परीक्षा भी चल रही है।

पीड़ित भाइयों के अनुसार, उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और न उनका कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ था। वे अपने एक परिजन को मेट्रो स्टेशन तक छोड़ने जा रहे थे। इसी बीच कुछ लोग आए और कॉलर पकड़कर उन्हें घसीटकर गली के बाहर ले गए। इसके बाद एक के बाद एक 10-12 लड़के आए और दोनों भाइयों को पीटना शुरू कर दिया।

अर्जित, हर्षित ने बचाव का प्रयास किया तो उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए। आसपास किसी ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें चाकू दिखाकर पीछे कर दिया गया। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर जिस तरह मार रहे थे उसमें दोनों लड़कों की जान चली जाती, अगर उन्हें भागना का मौका नहीं मिलता।

हर्षित अब भी इस घटना के बाद डरा-सहमा है। उसे रात भर नींद नहीं आई। वहीं बच्चों के माता-पिता को समझ नहीं आ रहा कि उनके बच्चों की क्या गलती थी? अगर इस घटना में उनकी जान चली जाती तो वो लोग क्या करते?

पिता के मुताबिक, उन्हें घटना की सूचना करीबन 4 बजे मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई, मगर सुनवाई न होने पर उन्होंने खुद सीसीटीवी खँगाले और 4 घंटे की मशक्कत के बाद वह एक आरोपित तक जा पहुँचे। आरोपित ने खुद कबूला कि वो उस भीड़ में था और उनमें से एक के पास चाकू भी था।

पीड़ित परिवार का पूछना है कि आखिर उनके बच्चों की गलती क्या थी जो इतनी बेरहमी से मारा गया? उनका सवाल उन लोगों से भी है कि जो लोग मूकदर्शक बने उनके बच्चों पर होते हमले को देखते रहे? वह कहते हैं कि जो लोग वहाँ मौजूद होकर वीडियो बना रहे थे, कोने में खड़े होकर बच्चों को पिटता देख रहे थे, वे तब भी यही रवैया रखते अगर बच्चा उनके अपने घर का होता?

बता दें कि हमले की सूचना होने के बाद पुलिस से गुहार लगाई जा रही है कि वो इस मामले में सख्त एक्शन लें ताकि इलाके के किसी और बच्चे के साथ ऐसी घटना न घटे। हालाँकि केस में अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिजनों को एफआईआर होने का इंतजार है। स्थानीय भी हैरान हैं, ज्यादातर लोगों का कहना है कि उन्होंने आसपास कभी ऐसा भयानक मंजर नहीं देखा था। वह नहीं चाहते कि उनके इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाए इसीलिए इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।

‘हिम्मत कैसे हुई जय श्रीराम बोलने की’: डोल पूर्णिमा-होली मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, BJP ने शेयर किया बंगाल के बीरभूम का Video

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में होली के दिन शुक्रवार (14 मार्च 2025) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर हमला बोल दिया। मामला बीरभूम जिले के अनाईपुर गाँव का है, जहाँ डोल पूर्णिमा और होली मना रहे हिंदुओं पर इस्लामी भीड़ ने हमला कर दिया। पुलिस की मौजूदगी में भी ये हमले जारी रहे।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “बीरभूम में हिंदुओं पर होली मनाने के लिए हमला हुआ! ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल धीरे-धीरे बांग्लादेश जैसा बनता जा रहा है।” उन्होंने कहा कि इस हमले की अगुआई टीएमसी के पंचायत सदस्य ने की थी। मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर निशाना बनाया और वीडियो में सुना गया कि वे कह रहे थे, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये नारा लगाने की?”

अमित मालवीय ने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने हिंदुओं को हिंसा से बचाने की बजाय हमलावरों को बचाया। उन्होंने कहा, “हैरानी की बात है कि पुलिस मौजूद थी, फिर भी हमले बढ़ते गए। वीडियो में हिंदू कहते दिखे कि पुलिस खड़ी रही और हम पर हमला हुआ।”

इस हिंसक झड़प के बाद बीरभूम जिला प्रशासन ने सैंथिया कस्बे के पास पाँच ग्राम पंचायतों में इंटरनेट और वॉयस ओवर इंटरनेट सर्विस पर सोमवार (17 मार्च 2025) तक पाबंदी लगा दी। प्रशासन ने कहा, “हाल की घटनाओं को देखते हुए इंटरनेट और वॉयस सर्विस का इस्तेमाल अफवाह फैलाने और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए हो सकता है। इसलिए सैंथिया पुलिस स्टेशन के तहत सैंथिया नगर, हटोरा, मठपालसा, हरिसारा, फरियापुर और फुलुर ग्राम पंचायतों में ये सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं।”

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर लगातार बढ़ रहे हमले

बता दें कि पश्चिम बंगाल में मूर्तियों को तोड़ने की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। शुक्रवार (14 मार्च 2025) को अमित मालवीय ने ट्वीट कर बताया कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम ब्लॉक 2 के कमालपुर गाँव में एक हिंदू मंदिर पर हमला हुआ। वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी हुई दिखीं। उन्होंने कहा, “मंगलवार से वहाँ पूजा और राम नारायण कीर्तन चल रहा था, लेकिन कुछ लोग “श्री राम” का नाम बर्दाश्त नहीं कर सके और मूर्तियों को तोड़ दिया।”

वीडियो में एक शख्स कहता सुना गया, “ये गंभीर हालात हैं… पुलिस कुछ नहीं कर रही।” एक पुलिसवाला उस शख्स को डाँटता भी दिखा जो तोड़ी गई मूर्तियों की वीडियो बना रहा था।

इससे पहले 7 मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर शहर में शेख इंदू नाम के एक मुस्लिम शख्स ने माँ शीतला की मूर्ति तोड़कर आग लगा दी।

सोशल मीडिया पर जली हुई मूर्तियों और क्षतिग्रस्त मंदिर की तस्वीरें वायरल हुईं। स्थानीय लोगों ने आरोपी शेख इंदू को पकड़ लिया, जिसने ये तोड़फोड़ और आगजनी की थी। बारुईपुर पुलिस ने 7 मार्च को ट्वीट कर कहा कि आरोपी ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ है और उसे ‘दिमागी परेशानी’ है।

अमेरिका गई पढ़ने, करने लगी ‘हमास आतंकियों’ का समर्थन: ट्रम्प सरकार ने वीजा छीना, अब खुद से डिपोर्ट हुई रंजनी श्रीनिवासन

अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने खुद से निर्वासित किए जाने का विकल्प चुना है। उसकी अमेरिका से वापस होते हुए एक वीडियो भी सामने आई है। रंजनी श्रीनिवासन भारत से पढ़ने के लिए अमेरिका गई थी लेकिन वहाँ जाकर वह फिलिस्तीन और इस्लामी आतंकी संगठन हमास का समर्थन करने लगी। इसके बाद उसका वीजा रद्द हो गया।

अमेरिका में वीजा, आव्रजन और ऐसे ही मामलों पर नजर रखने वाले विभाग डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्युरिटी (DHS) ने रंजनी श्रीनिवासन के विषय में जानकारी दी है। DHS ने बताया है कि रंजनी ने विभाग के एक एप CBP का इस्तेमाल खुद के भारत को निर्वासन के लिए किया है।

DHS ने अपने बयान में कहा, “भारतीय नागरिक रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी नियोजन में डॉक्टरेट की छात्रा के रूप में F-1 छात्र वीज़ा पर अमेरिका आई थी। श्रीनिवासन आतंकवादी संगठन हमास का समर्थन करने वाली गतिविधियों में शामिल थीं। 5 मार्च, 2025 को विदेश विभाग ने उनका वीज़ा रद्द कर दिया था। DHS ने उनके स्व 11 मार्च को खुद से निर्वासन का विकल्प चुनने में CBP एप का इस्तेमाल करने के वीडियो फुटेज प्राप्त किए हैं।”

DHS की मुखिया क्रिस्टी नोएम ने इस मामले पर कहा, “अमेरिका में रहने और पढ़ने के लिए वीजा मिलना एक विशेषाधिकार जैसा है। लेकिन जब आप हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करेंगे तो उस विशेषाधिकार को रद्द कर दिया जाना चाहिए, और आपको इस देश में नहीं रहने दिया जाना चाहिए। मुझे कोलंबिया विश्वविद्यालय के आतंकवाद समर्थकों में से एक को खुद से वापस जाते देख और CBP होम ऐप का उपयोग करते हुए देखकर काफी ख़ुशी हुई है।”

रंजनी श्रीनिवासन की एक वीडियो भी सामने आई है, इसमें काले रंग के कपड़े पहने हुए एयरपोर्ट पर भागते हुए दिखाई देती है। रंजनी श्रीनिवासन के विषय में और भी जानकारी सामने आई है। उसके बायो, लिंक्डइन और बाकी कामों से पता चला है कि वह कोलंबिया विश्वविद्यालय से पहले हार्वर्ड में भी पढ़ाई कर चुकी है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि वह एक कट्टर वामपंथी है जो अमेरिका में रहकर भारत को बाँटने वाले मुद्दों पर लिखती थी।

उसके ऐसे कुछ निबन्ध सामने आए है जहाँ वह कथित ब्राम्हणवादी मानसिकता को कोस रही है। रंजनी श्रीवास्तव अमेरिका जाने से पहले भारत में अहमदबाद के भीतर CEPT विश्वविद्यालय में पढ़ती थी। इसके बाद वह अमेरिका चली गई और यहाँ पढ़ने के साथ ही हमास और इस्लामी आतंकवाद का समर्थन करने लगी। हाल ही में कोलंबिया विश्वविद्यालय के भीतर छात्रों ने कई दिनों तक दफ्तरों पर कब्जा कर लिया था और पुलिस के साथ झड़पें भी की थी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रंजनी इसमें शामिल थी या नहीं।