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पूरे परिवार के इस्लाम छोड़ने पर ₹20 हजार, गैर मुस्लिम लड़के से शादी पर ₹15 हजार… स्कूल-चर्चों की फंडिंग से ‘मिशन मोड’ में चल रहा काम, मस्जिद जाना छोड़ा-घरों में ईसा मसीह की तस्वीर

लालच, ब्लैकमेलिंग तथा अन्य तरीकों से हिंदुओं को धर्मांतरण करने में जुटे ईसाई और मुस्लिमों के बीच अब एक-दूसरे का मजहब बदलवाने की होड़ शुरू हो गई है। पैसों का लालच देकर मुस्लिमों को ईसाई बनाने में मिशनरी जुटे हुए हैं। इसके कारण उत्तर प्रदेश के कई मुस्लिम परिवारों ने मस्जिद जाना छोड़ दिया है। उनके घरों में ईसा मसीह की तस्वीर लग गई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि कोई मुस्लिम परिवार मजहब बदलता है, तो एजेंट को 20 हजार रुपया दिया जाता है। इसी प्रकार यदि कोई मुस्लिम लड़की अपना मजहब बदलकर शादी करती है, तो उसमें सक्रिय एजेंट को 15 हजार रुपये का बोनस दिया जाता है। ये खेल गाँव-गाँव तक फैल गया है, जहाँ मुस्लिम लोग आसानी से इनके झाँसे में आ रहे हैं।

श्रावस्ती, सीतापुर, अंबेडकरनगर और सुल्तानपुर जैसे जिलों में हाल ही में कई मामले सामने आए हैं। फरवरी 2025 में सीतापुर के हरगाँव और सिधौली इलाकों में छह मुस्लिम परिवारों ने ईसाई धर्म स्वीकार किया। अंबेडकरनगर और सुल्तानपुर में भी 10 परिवारों ने ऐसा ही कदम उठाया। इन परिवारों के युवा अब दाढ़ी नहीं रखते और घरों में ईसा मसीह की तस्वीरें सजा रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मिशनरियाँ हवाला के जरिए मोटी रकम भेज रही हैं। चर्चों और बड़े स्कूलों से भी पैसा आ रहा है, जिससे ये गैंग ग्रामीण इलाकों में जाल बिछा रहे हैं। धर्मांतरण के लिए जिला स्तर पर टीमों को सक्रिय किया गया है। इसके लिए सबसे अधिक 443 सक्रिय टीम के संगम नगरी प्रयागराज में काम करने की बात सामने आई है। इसके अलावा महराजगंज में 398, बहराइच में 378, श्रावस्ती में 320, बलरामपुर में 330 और गोंडा में 340 टीमों के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है।

धर्मांतरण का नेटवर्क फैलाने में प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में 333 टमों के जुटे होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अंबेडकरनगर में 347, सीतापुर में 326, सिद्धार्थनगर में 345, अमेठी में 317, रायबरेली में 323 और पीलीभीत में 346 सक्रिय टीमें अभियान में जुटी हैं।

नेपाल सीमा से सटे इलाकों में खासकर देवीपाटन मंडल के श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर और गोंडा जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस को कंवर्जन का मामला आते ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आईजी अमित पाठक का कहना है कि चारों जिलों के एसपी को इस प्रकार के मामलों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ मुस्लिम परिवार अब जुमे की नमाज नहीं पढ़ते और बच्चे मदरसों की जगह कान्वेंट स्कूल जा रहे हैं। महिलाएँ मिशनरी संस्थाओं से जुड़कर पैसे कमा रही हैं।

आईबी के पूर्व अधिकारी सतीश सिंह बताते हैं कि मुस्लिम परिवारों के धर्मांतरण का पहला मामला पीलीभीत में वर्ष 2020 में सामने आया था। इसके बाद नेपाल से सटे गोरखपुर मंडल के महाराजगंज और फिर बस्ती मंडल के सिद्धार्थनगर जिले में भी पाँच मुस्लिम परिवारों ने ईसाई धर्म स्वीकारा। लेकिन इन परिवारों के सदस्यों ने अपना नाम नहीं बदला।

पुलिस और खुफिया विभाग इसे गंभीरता से ले रहे हैं। श्रावस्ती में एक प्रार्थना सभा के बाद एजेंट भाग गया, जिसके बाद जाँच तेज कर दी गई। सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, फिर भी ये गैंग रुकने का नाम नहीं ले रहे। गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाकर मिशनरियाँ अपना नेटवर्क मजबूत कर रही हैं।

‘मेरा समय खराब है, लेकिन मैं खुद समय हूँ’: कनाडा में बकैती करने पर सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना की ली क्लास, कहा- ओवरस्मार्ट मत बनो, सुधर जाओ

इंडियाज गॉट लैटेंट शो चलाने वाले कॉमेडियन समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समय रैना ‘ओवरस्मार्ट’ बन रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ समय रैना के शो पर हुए विवाद के बारे में चल रहे केस में की हैं। समय रैना ने शो पर हुए विवाद और अश्लील टिप्पणियों के बाद कनाडा में कुछ टिप्पणियाँ की थी।

सुप्रीम कोर्ट में पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया की याचिका पर सुनवाई सोमवार (3 मार्च, 2025) को हुई। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “ये युवा और ओवरस्मार्ट लोग सोचते हैं कि वे इस मामले में बहुत कुछ जानते हैं…इनमें से एक कनाडा गया और इस सुनवाई के बारे में बात की।”

जस्टिस सूर्यकांत विवाद के बाद समय रैना द्वारा कनाडा में की गई टिप्पणियों को लेकर बोल रहे थे। दरअसल समय रैना ने कनाडा में कहा था, “मेरा समय जरूर खराब है लेकिन याद रखना कि मैं खुद समय हूँ।” उन्होंने कनाडा में उनका शो देखने आई जनता को मजाकिया अंदाज में वकील की फीस का इंतजाम करने के लिए धन्यवाद भी दिया था।

जस्टिस सूर्यकांत ने चेतावनी देते हुए कहा, “ये लोग नहीं जानते कि सुप्रीम कोर्ट का क्षेत्राधिकार कहाँ तक है… सुधर जाओ वरना हम जानते हैं कि आपसे कैसे निपटना है।” कोर्ट ने कहा कि ये लोग युवा हैं इसलिए कोई एक्शन नहीं ले रहे।

इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को उनका पॉडकास्ट चलाने की इजाजत दे दी। इससे पहले इस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस काम पर 280 लोग निर्भर हैं ऐसे में इसे दोबारा चालू करने की अनुमति दी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबादिया से कहा है कि वह अपने शो में शुचिता बनाए रखें और ऐसा कंटेंट रखें जिसे सभी आयुवर्ग के लोग देख सकें। गौरतलब है कि समय के शो इंडियाज गॉट लैटेंट में रणवीर ने एक अश्लील कमेंट किया था जिसके बाद इसकी क्लिप वायरल हो गई थी।

इसके बाद मुंबई और असम में समय तथा रणवीर के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई थी। हालाँकि, उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई थी। उनके खिलाफ कई जगह प्रदर्शन भी हुए थे। समय रैना ने यह शो यूट्यूब से भी हटा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली सुनवाई में उनको काफी लताड़ा था।

मोदी राज में वन्यजीव संरक्षण में भी मिसाल बना भारत, ‘वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे’ पर गिर-वनतारा में PM: जानिए कैसे बढ़ी लुप्त हो रहे बाघ-शेरों की संख्या, ‘प्रोजेक्ट चीता’ का होगा विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (3 मार्च 2025) को वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर गुजरात के गिर नेशनल पार्क पहुँचे। वहाँ उन्होंने वन्यजीवों को बचाने के लिए कई बड़े ऐलान किए। सुबह-सुबह पीएम ने लॉयन सफारी की, शेर के बच्चों की तस्वीरें खींचीं और सूरज उगते हुए देखकर मजा लिया। इसके बाद उन्होंने नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की सातवीं बैठक की अगुवाई की। इस बैठक में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बाकी बड़े अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक में पीएम ने ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ की तारीफ की, जिसके लिए 2,927 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ये प्रोजेक्ट एशियाई शेरों को बचाने और उनकी तादाद बढ़ाने के लिए है। उन्होंने बताया कि मई में शेरों की 16वीं गिनती होगी। साथ ही जूनागढ़ में नेशनल रेफरल सेंटर-वाइल्डलाइफ की नींव भी रखी गई, जो वन्यजीवों की सेहत और बीमारियों को देखने का बड़ा सेंटर बनेगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि बारदा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में शेरों के लिए खाने की अच्छी व्यवस्था और जंगल को बेहतर करने का काम होगा, क्योंकि वहाँ शेर अब अपने आप पहुँचने लगे हैं। उन्होंने नदी में रहने वाली डॉल्फिन पर एक किताब भी लॉन्च की। इसके अलावा, तमिलनाडु के कोयंबटूर में SACON यानी सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री खोलने का ऐलान किया। ये सेंटर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच होने वाले झगड़ों को सुलझाने में मदद करेगा।

आँकड़ों के मुताबिक, गिर में अभी 674 शेर हैं और ये नंबर बताता है कि शेरों की देखभाल अच्छे से हो रही है। तेंदुओं की संख्या में 75% की बढ़ोतरी हुई है और दुनिया के 75% बाघ अब भारत में रहते हैं। भारत में गैंडों (राइनो) का शिकार भी लगभग बंद हो चुका है। इस दौरान पीएम मोदी ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ को और बड़ा करने की बात कही। अब चीतों को मध्य प्रदेश के गाँधीसागर सैंक्चुअरी और गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी बसाया जाएगा। इसके साथ ही घड़ियाल और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसे जानवरों को बचाने के लिए नए प्रोग्राम शुरू होंगे। टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों की हिफाजत के लिए भी एक योजना बनी।

इस बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलिफेंट और प्रोजेक्ट डॉल्फिन की भी बात हुई। देश में पहली बार नदी की डॉल्फिन गिनी गईं, जिसमें 6,327 डॉल्फिन मिलीं। ये गिनती 28 नदियों में 8,500 किलोमीटर तक चली। सबसे ज्यादा डॉल्फिन उत्तर प्रदेश में मिलीं, फिर बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में। भारत में 106 नेशनल पार्क, 573 वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, 115 कंजर्वेशन रिजर्व और 220 कम्युनिटी रिजर्व हैं। ये सब मिलकर देश की 5.32% जमीन को कवर करते हैं। 2024-25 के बजट में पर्यावरण मंत्रालय को 3,330.37 करोड़ रुपये दिए गए। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी का बजट भी दोगुना होकर 35 करोड़ रुपये हो गया।

मोदी मोदी ने कहा कि स्थानीय लोग और ईको-टूरिज्म वन्यजीवों को बचाने में बड़ी मदद कर सकते हैं। भारत में जंगल का इलाका 16,000 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। 2022 में बाघों की संख्या 3,167 हो गई, जो दुनिया के कुल बाघों की संख्या का 70% से ज्यादा है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ था, जब बाघों की संख्या सिर्फ 1,411 थी। अब ये बाघों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। प्रोजेक्ट एलिफेंट से 2022 तक 29,964 जंगली हाथी हो गए।

पीएम ने जंगल की आग रोकने के लिए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया और BISAG-N को साथ काम करने को कहा। उन्होंने AI और मैपिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए नेशनल एक्शन प्लान लॉन्च हुआ और भारतीय स्लॉथ बेयर को बचाने की भी बात हुई।

मोदी की अगुवाई में भारत का वन्यजीव संरक्षण दुनिया के लिए मिसाल बन रहा है। शेर, बाघ, चीता, हाथी, डॉल्फिन और राइनो जैसे जानवरों की संख्या बढ़ रही है। जंगल और जैव-विविधता को बचाने की ये कोशिशें आगे भी जारी रहेंगी। आने वाले सालों में नए प्रोजेक्ट और तकनीक से भारत और बेहतर करेगा।

जिस अमेरिका के भरोसे जंग में कूद गया यूक्रेन, अब वही निपटाने में जुटा: जेलेंस्की-ट्रंप फाइट के बाद हथियार-पैसा सब बंद, रूस के साथ युद्ध का अब क्या होगा अंजाम?

रूस से बीते तीन वर्षों से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के अड़ियल रवैये के चलते अब उनके देश की मदद रुक गई है। जेलेंस्की के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बहस और झगड़ा करने के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद पर विराम लग गया है। जेलेंस्की लगातार ट्रम्प के दबाव के बाद भी युद्ध जारी रखना चाहते हैं। जेलेंस्की ने सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ही नहीं बल्कि अपने पुराने एक समर्थक सीनेटर से भी झगड़ा कर लिया है।

अमेरिका नहीं देगा अब सैन्य मदद

मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन को जाने वाली सारी सैन्य मदद पर रोक लगाई है। फॉक्स न्यूज को व्हाइट हाउस के एक कर्मचारी ने बताया, “राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि उनका पूरा ध्यान सीजफायर पर है। हमें चाहिए कि हमारे बाकी मित्र देश भी इसी के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं और इसकी समीक्षा भी ताकि शान्ति बहाली का रास्ता आसानी से निकल सके।” व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि मदद अस्थायी तौर पर ही रोकी गई है।

फरवरी, 2022 में युद्ध चालू होने के बाद अमेरिका लगातार यूक्रेन को मिसाइल, छोटे हथियार, टैंक, तोपें, गोला बारूद और बख्तरबंद गाड़ियाँ तक दे रहा था। लेकिन अब इस पर विराम लग गया है। 2022 के बाद से तीन साल के भीतर अमेरिका यूक्रेन को लगभग 175 बिलियन डॉलर (₹15 लाख करोड़ से अधिक) के सैन्य साजोसामान देने की मंजूरी दे चुका है। इसमें से 90% से अधिक मदद दी भी जा चुकी है। यह सारी मदद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के राष्ट्रपति रहते हुए दी गई थी।

बायडेन ने दिसम्बर, 2024 में लगभग ₹50 हजार करोड़ से अधिक की मदद का भी ऐलान किया था। यूक्रेन को लगातार अमेरिकी हथियार भेजे जा रहे थे। कई मौकों पर यूक्रेन की हार को अमेरिकी हथियारों ने ही रोका। जेलेंस्की के नेतृत्व वाला यूक्रेन 2022 में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दम पर ही युद्ध लड़ने गया था। इसमें भी यूरोपियन देशों ने उसके आर्थिक सहायता ज्यादा दी है। हथियार अमेरिका से ही आए हैं। लेकिन अब यह बंद हो गई है। इसका रूस से चल रहे युद्ध पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

ट्रम्प से जेलेंस्की ने की थी खुले में लड़ाई

अमेरिका का यह मदद बंद करने का फैसला जेलेंस्की के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वांस के साथ झगड़ा करने के बाद हुआ है। 28 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में यह झगड़ा मीडिया के सामने हुआ था। बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति वांस ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की प्रोपेगेंडा कर रहे हैं और कैमरा लाकर युद्ध दिखा रहे हैं।

वहीं जेलेंस्की ने कहा था कि रूस कल को अमेरिका पर भी हमला कर सकता है। ट्रम्प ने बैठक में उनसे स्पष्ट कर दिया था कि वह कोई भी डील करने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रम्प ने बैठक में ही जेलेंस्की को कसके लताड़ लगाई थी। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि जेलेंस्की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से इतनी घृणा करते हैं कि कोई डील करना मुश्किल है।

ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की ने अमेरिका सम्मान नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि जेलेंस्की अमेरिकी मदद का फायदा उठाना चाहते हैं। इस तू-तू मैं-मैं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। इसके बाद से साफ़ हो गया था कि अमेरिका अब यूक्रेन को समर्थन नहीं देने वाला और जल्द शांति का पक्षधर है।

पुराने समर्थक सीनेटर से भी कर लिया झगड़ा

जेलेंस्की ने अपने अड़ियल रवैये के चलते सिर्फ ट्रम्प से ही लड़ाई नहीं की। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम से भी झगड़ा मोल ले लिया है। लिंडसे ग्राहम लगातार यूक्रेन के समर्थक रहे हैं। वह रूस के खिलाफ बोलते रहे हैं और जेलेंस्की की प्रशंसा करते रहे हैं। लेकिन उनकी हरकतों पर हाल ही में उन्होंने जेलेंस्की की आलोचना की।

इतनी सी बात पर जेलेंस्की उन पर भड़क गए। उन्होंने लिंडसे ग्राहम की आलोचना कर डाली। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें यूक्रेन की नागरिकता दे सकता हूँ। वह हमारे देश का नागरिक बन जाएँगे, और फिर उनकी बात में दम होगा। और मैं उन्हें यूक्रेन के नागरिक के तौर पर उनसे जानना चाहूंगा कि राष्ट्रपति कौन बने।”

गौरतलब है कि 2015 के एक कानून के अनुसार यूक्रेन में जब तक युद्ध होगा तब तक देश में चुनाव नहीं हो सकते। इसी कानून का सहारा उठा कर जेलेंस्की लगातार राष्ट्रपति बने हुए हैं। उन पर राष्ट्रपति पद हथियाने का आरोप लग रहा है। यूक्रेन में चुनाव की माँग भी तेज हो रही है।

गाँव हिंदू बहुल, पर घर-खेत से लेकर मंदिर-शिवलिंग तक को वक्फ बोर्ड बता रहा अपनी ‘प्रापॅर्टी’: सरकारी जमीन पर भी दावा, मध्य प्रदेश के रायसेन में ग्रामीण हैरान

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में वक्फ बोर्ड की मनमानी ने एक बार फिर लोगों को हैरान कर दिया है। इस बार बोर्ड ने एक हिंदू बहुल गाँव माखनी पर अपना दावा ठोंक दिया है। इतना ही नहीं, गाँव में स्थित शिवलिंग तक को अपनी संपत्ति बता दिया। वक्फ बोर्ड ने गाँव वालों को नोटिस भेजकर कहा है कि वे जिस जमीन पर रह रहे हैं, वो उनकी है और इसे खाली करना होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वक्फ बोर्ड का कहना है कि माखनी गाँव ये जमीन कब्रिस्तान की है। ये अलग बात है कि जमीन पर मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का कोई सबूत नहीं दिखाया गया। गाँव वालों के घर, खेत, चबूतरे और शिवलिंग तक को अपनी संपत्ति बताते हुए वक्फ ने 3 एकड़ जमीन पर भी कब्जे का दावा किया है। वक्फ बोर्ड ने लोगों से कहा है कि वो ये जमीन खाली करके जल्द से जल्द उस पर से हट जाएँ। ऐसे नोटिस ग्रामीणों को मिलने के बाद से लोग परेशान हैं।

हैरानी की बात ये है कि सरकारी रिकॉर्ड में ये जमीन सरकार की दर्ज है, फिर भी वक्फ इसे अपना बता रहा है।

वक्फ बोर्ड का दावा है कि ये गाँव कादर खान नाम के शख्स का था, जिसने जमीन उन्हें दान दी। मगर गाँव वालों का कहना है कि यहाँ कोई कादर खान कभी रहा ही नहीं। कई पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हिंदू परिवारों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे और वक्फ की इस हरकत के खिलाफ लड़ेंगे। लोगों में गुस्सा है, क्योंकि उनके घर और आस्था के प्रतीक शिवलिंग पर भी दावा किया जा रहा है।

बता दें कि भारत सरकार वक्फ बोर्ड में सुधार के लिए वक्फ संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन बोर्ड की मनमानियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

किसी को ‘मियाँ-तियाँ’ या ‘पाकिस्तानी’ कहने से मजहबी भावना को नहीं पहुँचती ठेस: जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं माना अपराध, उर्दू ट्रांसलेटर ने झारखंड में करवाया था केस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी को ‘मियाँ-तियाँ’ और पाकिस्तानी कहना अपराध नहीं है। कोर्ट ने इसे मजहबी भावनाएँ भड़काने वाला भी मानने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह सारी टिप्पणियाँ झारखंड के एक मामले में की हैं। कोर्ट ने ऐसा कहने वाले हिन्दू व्यक्ति को बाइज्जत बरी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस सतीश शर्मा की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने कह़ा, “FIR के अवलोकन से पता चलता है कि आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 353, 298 और 504 के तहत लगाई गई है लेकिन जरूरी सबूत ही नहीं मौजूद हैं। आरोपित ने कोई हमला नहीं किया था, इसलिए IPC की धारा 353 नहीं लगती।”

कोर्ट ने आगे कहा, “ऐसे में, हाई कोर्ट को आरोपित को बरी कर देना चाहिए था। इसके अलावा, अपीलकर्ता पर ‘मियाँ-तियाँ’ और ‘पाकिस्तानी’ कहकर मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है। जरूर ये बातें ठीक नहीं हैं लेकिन यह मजहबी भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाती।”

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही मुस्लिम व्यक्ति की मजहबी भावनाएँ भड़काने के आरोपित हिन्दू व्यक्ति को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की बात कही गई थी। हाई कोर्ट ने यह बातें निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए कही थी।

क्या था मामला?

यह मामला झारखंड के बोकारो का है। यहाँ उर्दू ट्रांसलेटर के तौर पर काम करने वाले एक सरकारी कर्मचारी ने 2020 में एक हिन्दू व्यक्ति हरी नंदन सिंह के विरुद्ध FIR दर्ज करवाई थी। मुस्लिम व्यक्ति ने आरोप लगाया था हरी नंदन सिंह ने उसकी मजहबी भावनाएँ आहत की हैं।

पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट भी लगा दी थी और हरी नंदन सिंह को मजहबी भावनाएँ भड़काने, शान्ति खराब करने समेत कई मामलों में आरोपित बताया था। इसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हरी नंदन सिंह को तलब किया था। मैजिस्ट्रेट ने कहा था कि सिंह के खिलाफ मामला चलाने के लिए काफी सबूत मौजूद हैं।

हरी नंदन सिंह ने इसके खिलाफ जिला कोर्ट में अपील दाखिल की और मामला रद्द करने की माँग की। हालाँकि, बोकारो के कोर्ट ने उनकी यह अपील खारिज कर दी। इसके बाद हरी नदंन सिंह ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया। हालाँकि हाई कोर्ट ने भी यह अपील खारिज कर दी।

हरी नंदन सिंह ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और माँग की कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मामला रद्द किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिला अदालत और हाई कोर्ट ने इस मामले में आरोपित को बरी कर देना चाहिए था लेकिन उन्होंने नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को देखते हुए हरी नंदन सिंह को बरी कर दिया।

संभल के जिस इलाके में ‘शांतिदूतों’ ने की पत्थरबाजी, अब वहाँ बन रही पुलिस चौकी: भूमिपूजन के बाद ASP ने बाँटी मिठाई, यहीं है MP जियाउर्रहमान से लेकर अलकायदा आतंकियों तक के घर

उत्तर प्रदेश के संभल में नवम्बर, 2024 में हुई हिंसा के बाद लगातार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास चल रहा है। इसी कड़ी में पुलिस अब संभल में एक और नई चौकी बना रही है। यह चौकी मुस्लिम बहुल इलाके में बन रही है। विवादित शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान इसी इलाके में पुलिस पर पत्थरबाजी हुई थी और गोलियाँ चली थी।

संभल में यह नई चौकी दीपासराय मुहल्ले में बन रही है। इसके लिए जमीन की पहचान कर काम चालू कर दिया गया है। दीपासराय में यह चौकी बिजली चोरी के आरोपित सपा सांसद जियाउर्रहमान के घर के पास ही बन रही है। इसके लिए सोमवार (3 मार्च, 2025) को भूमिपूजन भी किया गया है।

संभल पुलिस के अधिकारियों ने यहाँ पर जगह पहचान कर खुदाई करवाना चालू कर दिया है। नींव डाले जाने से पहले पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को मिठाई भी बाँटी है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से इस चौकी के संबंध में राय ली है। अभी तक दीपासराय इलाके में पुलिस एक अस्थायी चौकी बना कर कानून व्यवस्था संभाल रही थी।

यह चौकी एक कंटेनर में बनाई गई थी, लेकिन अब यहाँ पक्की पुलिस चौकी बनने जा रही है। पुलिस ने यह कदम दीपासराय की संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया है। विवादित जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान दीपासराय में पथराव और हिंसा हुई थी और इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

इस इलाके में कई अपराधियों के घर भी हैं। संभल हिंसा की साजिश रचने वाला शारिक साठा भी यहीं का रहने वाला है। शारिक साठा वर्तमान में दुबई में रहता है और उस पर भारत में कई मामले दर्ज हैं। वह उत्तर भारत का कुख्यात कार चोर था। कार चोरी के अलावा वह नकली नोट के धंधे में भी शामिल था।

शारिक साठा के ही गुर्गों ने संभल में गोलियाँ चलाई थीं, इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने इन गुर्गों को गिरफ्तार किया था। इनके लिए शारिक साठा ने हथियार भी भिजवाए थे। साठा के अलावा अल कायदा के कई आतंकी तक इसी इलाके के रहने वाले थे। पुलिस ने इसी के चलते यहाँ चौकी बनाने का फैसला किया है।

इससे पहले पुलिस विवादित जामा मस्जिद के सामने भी एक चौकी का निर्माण कर चुकी है।

जिसका अब्बू काटता है मुर्गी, वो राम मंदिर को हैंड ग्नेनेड से उड़ाता: धोखा देने के लिए नाम रख लिया था शंकर, जमात और निजामुद्दीन मरकज से है कनेक्शन

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के पाली गाँव में गुजरात और हरियाणा की एटीएस टीम ने मिलकर एक संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान को पकड़ा है। अब्दुल अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की साजिश रच रहा था। उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड भी बरामद हुए हैं। वो पिछले 10 माह से इस्लामिक स्टेट-ISKP से जुड़ा था, और ऑनलाइन ट्रेनिंग भी ले रहा था। खास बात ये है कि अब्दुल फरीदाबाद में ‘शंकर‘ नाम से छिपा था और उसे आतंकी संगठन के हैंडलर ने 2 हैंड ग्रेनेड मुहैया करा दिए थे।

मरकज में बने आतंकियों से कनेक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल का कनेक्शन जमात और निजामुद्दीन मरकज से भी सामने आया है। करीब छह महीने पहले वह अयोध्या शहर गया था। वहाँ वह मौलाना उस्मान हजरत के संपर्क में आया। इसके बाद वह दिल्ली के मरकज और फिर विशाखापट्टनम तक गया। चार महीने बाद वह गाँव लौटा।

पुलिस को शक है कि मरकज में रहते हुए वह परवेज अहमद उर्फ पीके से मिला। पीके जम्मू में लश्कर और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों के लिए पैसों का इंतजाम करता था। एटीएस ने पीके को 27 फरवरी 2025 को निजामुद्दीन स्थित एक गेस्ट हाउस से पकड़ा था। उससे पूछताछ के बाद रहमान के बारे में पता चला। यहीं उसे दो हैंड ग्रेनेड भी उपलब्ध कराए गए थे।

पुलिस का कहना है कि अब्दुल ISI और ISKP मॉड्यूल से जुड़ा था। ISKP यानी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस एक आतंकी संगठन है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय है। अब्दुल को करीब 10 महीने पहले इस मॉड्यूल ने ऑनलाइन ट्रेनिंग दी थी। वीडियो कॉल के जरिए उसे हथियार चलाने और हमले की प्लानिंग सिखाई गई। राम मंदिर पर हमला उसका सबसे बड़ा टारगेट था।

‘शंकर’ नाम से रह रहा था अब्दुल

गुजरात और हरियाणा की एटीएस ने रविवार (2 मार्च 2025) की शाम फरीदाबाद के पाली गाँव से अब्दुल को पकड़ा। वह वहाँ शंकर नाम से छिपा हुआ था। एक फार्म हाउस के ट्यूबवेल वाले कमरे में रह रहा था। उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड मिले, जो उसे किसी हैंडलर ने दिए थे।

पुलिस का कहना है कि वह राम मंदिर पर ग्रेनेड से हमला करने वाला था। इसके लिए उसने पहले कई बार मंदिर की रेकी भी की थी। वह अयोध्या से ट्रेन से फरीदाबाद पहुँचा था। उसे ग्रेनेड लेकर वापस अयोध्या जाना था, लेकिन उससे पहले ही वह पकड़ा गया।

बाप काटता है मुर्गा, बेटा 5 वक्त का नमाजी

अब्दुल रहमान अयोध्या के थाना इनायतनगर के मंजनाई गाँव का रहने वाला है। उसका जन्म 28 अगस्त 2005 को हुआ था। उसने अपनी पढ़ाई 10वीं तक मनीराम यादव इंटर कॉलेज, मंजनाई से की। गाँव वालों के मुताबिक, अब्दुल पाँच वक्त का नमाजी था। वह रोजाना नमाज पढ़ता था और मजहबी कामों में हिस्सा लेता था। उसकी माँ यास्मीन बताती हैं कि अब्दुल ई-रिक्शा चलाता था। वह गाँव और आसपास के इलाकों में लोगों को ढोने का काम करता था। घर पर भी वह कुछ न कुछ बनाता रहता था। उसका बाप अबू बकर मुर्गा काटता है और घर पर ही चिकन शॉप चलाता है।

इस बीच अब्दुल के ‘दिल में छेद’ की भी बात सामने आ रही है, जो दिक्कत उसे बचपन से थी। अहमदाबाद में उसे ऑपरेशन करके बचाया गया था। अब्दुल की माँ का कहना है कि 1 मार्च को वह दिल्ली किसी दोस्त से मिलने गया था। उसने कहा था कि मंगलवार (4 मार्च 2025) तक लौट आएगा, लेकिन उसकी गिरफ्तारी की खबर आ गई। माँ का दावा है कि उसे झूठे केस में फंसाया गया है। पुलिस अबू बकर को भी ले गई और घर से बैंक पासबुक जैसे कुछ कागजात उठा ले गई।

निशाने पर कई धार्मिक स्थल

अब्दुल की गिरफ्तारी के बाद अयोध्या में भी हड़कंप मच गया। एसटीएफ की टीम उसके गाँव पहुँची और घर की तलाशी ली। वहाँ से कुछ संदिग्ध चीजें मिली हैं। अयोध्या में खुफिया एजेंसियाँ अब हर जानकारी खंगाल रही हैं। फरीदाबाद में भी पुलिस चौकस हो गई है। शक है कि वहाँ आतंकी स्लीपर सेल हो सकते हैं। अब्दुल फरीदाबाद में भी कोई वारदात करने की फिराक में था।

अब्दुल के फोन से कई धार्मिक स्थलों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं। वह चार-पाँच दिन पहले मरकज जाने की बात कहकर घर से निकला था। इस मामले में फरीदाबाद के डबुआ थाने में केस दर्ज हुआ है, जहाँ से अब्दुल रहमान को गुजरात एटीएस उठाकर ले गई है।

न सहरी के लिए मिल रही गैस, न इफ्तार में खाने को सस्ता आटा: रमजान में पाकिस्तान में मची मारामारी, प्रधानमंत्री शहबाज को करनी पड़ी अफसरों संग बैठक

पाकिस्तान में भोजन और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही है। भूख, खाने की कमी और गैस की किल्लत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। खासकर कराची में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। रमजान के महीने में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। सरकार ने आटे और रोटी के दाम तय किए, लेकिन बाजार में ये चीजें तय कीमत से ज्यादा में बिक रही हैं।

रोटी और आटे की कीमतें भी तय कर रही सरकार

ऐसे में पाकिस्तान में अब हर रोज आटे-रोटी की कीमत तय करनी पड़ रही है। इसी कड़ी में कराची के कमिश्नर सैयद हसन नकवी ने नोटिफिकेशन जारी कर आटे की कीमतें तय कीं। नंबर 2.5 आटा थोक में 83 रुपये और खुदरा में 87 रुपये प्रति किलो तय हुआ। फाइन आटा थोक में 88 रुपये और खुदरा में 92 रुपये प्रति किलो रखा गया, जबकि चक्की आटा 100 रुपये प्रति किलो तय किया गया। लेकिन बाजार में फाइन आटा 90 से 100 रुपये और चक्की आटा 110 से 115 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। रोटी 100 ग्राम की 10 रुपये और 120 ग्राम नान 15 रुपये तय हुआ, पर लोग 18 से 20 रुपये में चपाती और 25 से 28 रुपये में नान खरीदने को मजबूर हैं।

रमजान में राहत देने के लिए कमिश्नर ने किराने की चीजों के दाम भी तय किए और हर सुबह नई प्राइस लिस्ट जारी करने का ऐलान किया। शिकायत के लिए हेल्पलाइन शुरू की गई है और दुकानदारों को सख्त हिदायत दी गई कि तय दाम से ज्यादा वसूलने पर जुर्माना और गिरफ्तारी होगी। लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे।

गैस की किल्लत से जूझ रहे लोग, पीएम को करना पड़ा हस्तक्षेप

एक तरफ खाने पीने की चीजों की भयंकर कमी है, तो पाकिस्तानियों को गैस की कमी ने भी परेशान कर रखा है। सहरी और इफ्तार के वक्त गैस नहीं मिल रही, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कराची के कई इलाकों जैसे लियाकताबाद, नॉर्थ नजीमाबाद और गुलशन-ए-इकबाल में लोग गैस कटौती से परेशान हैं।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी खबर लेते हुए गैस कंपनियों के अफसरों के साथ बैठक की और सहरी-इफ्तार के दौरान गैस सप्लाई बढ़ाने के आदेश दिए। सुई सदर्न गैस कंपनी ने गैस प्रेशर 10% बढ़ाने और कंट्रोल रूम बनाने का वादा किया। फिर भी, लोग शिकायत कर रहे हैं कि हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। गैस कंपनी का कहना है कि 95% इलाकों में सप्लाई ठीक है, लेकिन बाकी 5% में दिक्कतें हैं।

हत्या केस में गया जेल तो बना ईसाई, बाहर आकर करवाने लगा धर्मांतरण: जानें ‘यशु-यशु’ गाकर वायरल होने वाले पादरी बजिंदर सिंह की पूरी हिस्ट्री, दूसरी बार हुआ रेप का केस दर्ज

पंजाब के कपूरथला में 22 साल की एक महिला ने पादरी बजिंदर सिंह पर उसकी किशोरावस्था में यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पंजाब की जालंधर पुलिस ने ईसाई प्रचारक बजिंदर के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी देने और पीछा करने का मामला दर्ज कर लिया है। जालंधर पुलिस ने रविवार (2 मार्च) को इसकी जानकारी दी।

पीड़िता का कहना है कि वह दिसंबर 2017 में पादरी बजिंदर सिंह की मंडली में शामिल हो गई थी। इसके बाद 2020 में ‘वर्शिप टीम’ का हिस्सा बन गई। पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान बजिंदर ने उसका फ़ोन नंबर ले लिया और उसे अश्लील मैसेज भेजना शुरू कर दिया। उस समय उसकी उम्र 17 साल थी। पीड़िता का आरोप है कि साल 2022 में बजिंदर ने उसके साथ गलत हरकत की।

FIR में कहा गया है, “साल 2022 में उसने (बजिंदर सिंह ने) मुझे रविवार को अपने केबिन में बैठाने लगा। जब मैं अकेली होती तो वह मुझे जबरन गले लगाता और गंदे तरीके से छूता था। जब मैं कॉलेज जाती थी तो वह अपनी कार से मेरा पीछा करने लगा। वह धमकी देता था कि अगर मैंने उससे शादी नहीं की या इस बारे किसीको बताया तो वह मेरे माता-पिता और भाई को मरवा देगा।”

पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बजिंदर को जुलाई 2018 में पंजाब के जीरकपुर में एक महिला से बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उससे भी पहले वह हत्या के एक मामले में जेल में बंद था।

कहा जाता है कि बजिंदर सिंह हमेशा सूट-बूट में रहता है और 24 घंटे सिक्योरिटी में घिरा रहता है। पादरी बजिंदर सिंह अपने भाषणों के दौरान सुंदर लड़कियों पर नजर रखता था। बाद में उन लड़कियों को अपनी स्पेशल टीम में शामिल करता था। इसके पहले जिस लड़की के साथ उसने बलात्कार किया, वह भी बजिंदरकी सभाओं में जाती थी। वहीं बजिंदर ने उसे देखा और फँसाया था।

कौन है पादरी बजिंदर सिंह?

बजिंदर सिंह मूलत: हरियाणा के यमुनानगर का रहने वाला है। उसका जन्म एक हिंदू जाट परिवार में हुआ था। करीब 15 साल पहले एक हत्या के मामले में वह जेल में बंद हुआ था। इसके बाद उसने ईसाई धर्म अपना लिया और चर्च में पादरी के तौर पर काम करने लगा। बजिंदर ‘चमत्कारी उपचारों’ के नाम पर हजारों लोगों को अपनी सभाओं में बुलाता है। वह ‘यशु यशु’ नाम के अपने वीडियो के कारण चर्चा में आया।

जालंधर के एक चर्च में पादरी के रूप में काम करने के बाद बजिंदर ने साल 2016 में ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ नाम से अपना खुद का चर्च एवं ईसाई मिशनरी बना लिया। उस समय जालंधर चर्च से जुड़ी संस्था के प्रवक्ता फादर पीटर ने कहा था, “बजिंदर और उनके चर्च का हमारी संस्था से कोई लेना देना नहीं है। उसे किसी चर्च से मान्यता भी प्राप्त नहीं है।”

खुद का चर्च बनाकर पादरी बजिंदर सिंह तरह-तरह के दावे करके लोगों को अपने झाँसे में लेने लगा। उसने पूरे पंजाब में खुद को एक चमात्कारिक हीलर के रूप में स्थापित करने में तरह-तरह के हथकंडे अपनाए। उसका दावा है कि उसने HIV-एड्स, कैंसर, गूंगापन, अंधापन सहित कई खतरनाक बीमारियों से पीड़ितों को ठीक किया है। वह मंच पर चमत्कार दिखाता और उसे अपने सोशल मीडिया पर डालता।

हीलर बाबा’ के नाम से मशहूर बजिंदर के यूट्यूब पर 37.40 लाख सब्सक्राइबर हैं। उसके इंस्टाग्राम हैंडल पर उसे ‘पैगंबर बजिंदर सिंह’ बताया गया है। बजिंदर सिंह को कई मशहूर हस्तियाँ द्वारा समर्थन दिया गया है। इसके कारण पादरी बजिंदर सिंह की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। वह मंच पर कथित चमत्कार दिखाने के बाद ईसाइयों के देवता यीशु मसीह के लिए ‘मेरे यशु… मेरे यशु’ नाम से गाना गाता।

उसने सलमान खान सहित कई बड़े फिल्मी सितारों और राजनीतिक हस्तियों को लेकर भविष्यवाणी करता रहा है। हाल ही में उसने दावा किया था कि छत्तीसगढ़ के बिलाईगढ़ विधानसभा से विधायक कविता प्राण लहरे को उसने विधायक बनने की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। कविता का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह बजिंदर को ‘पप्पा जी’ कहते हुए उसका पैर छू रही थीं।

पादरी बजिंदर सिंह का नेटवर्क राजस्थान के भरतपुर सहित देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। इससे जुड़े छोटे-छोटे संस्थान लोगों को बहकाकर उन्हें ईसाई में धर्मांतरण कराने के काम में लगे हुए हैं। कहा जाता है कि बजिंदर सिंह को इटली सहित कई देशों से लोगों को ईसाई में धर्मांतरण के लिए फंडिंग होती है। इस पैसे वह अपने छोटे-छोटे नेटवर्क में बाँटता है।

चंडीगढ़ में फॉलोअर से बलात्कार का आरोप

साल 2018 में एक महिला ने बजिंदर सिंह पर बलात्कार का एक मामला दर्ज कराया था। इस दौरान पीड़िता ने आरोप लगाया था कि बजिंदर ने चंडीगढ़ के सेक्टर 63 स्थित अपने घर में उसका बलात्कार किया था। इस दौरान बजिंदर ने यौन उत्पीड़न का वीडियो भी रिकॉर्ड किया था। लड़की ने आरोप लगाया था कि बजिंदर ने उसे विदेश भेजने के नाम पर झाँसा दिया था और अपने घर पर बुलाया था।

पीड़ित महिला ने बताया था, “उसने (बजिंदर ने) शिकायत करने के जवाब में उसके रेप का वीडियो वायरल कर देने के धमकी दी थी।” उस समय बजिंदर जालंधर के एक चर्च में पादरी था और पीड़ित लड़की बजिंदर फॉलोअर थी। इसके बाद पंजाब की जीरकपुर पुलिस ने बजिंदर को 21 जुलाई 2018 को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया था।

बजिंदर सिंह इंग्लैंड की राजधानी लंदन भागने की फिराक में था। उस पर IPC की धारा 376, 420, 354, 294, 323, 506, 147, 149 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले में वह फिलहाल बेल पर है। बेल पर आने के बाद वह खुलेआम घूम रहा है और अभी भी तरह-तरह की बीमारियों को ठीक करने का दावा कर रहा है। 

नाबालिग बच्चे वाले वीडियो पर NCPCR का एक्शन

अगस्त 2021 में एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक लड़के को रोते हुए दिखाई दे रहा था। फिर एक आदमी (पादरी बजिंदर) उससे पूछता है कि क्या उसकी बहन पहले बोल सकती थी। लड़का ‘नहीं’ में जवाब देता है। फिर उससे पूछा जाता है कि क्या वह अब बोल सकती है और इस बार वह ‘हाँ’ में जवाब देता है। तभी बैकग्राउंड में गाना बजता है, “मेरा यशु यशु।”

अब इस वीडियो पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने संज्ञान लिया था। NCPCR ने कहा था कि उसे एक वीडियो का ट्विटर लिंक मिला है, जिसमें पादरी बजिंदर सिंह को एक नाबालिग लड़के के साथ विचित्र अंधविश्वास का कारनामा करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में बच्चे को रोते हुए देखा जा सकता है।

इसमें बच्चे और पादरी दोनों की बॉडी लैंग्वेज काफी असामान्य लग रही है। इसके बाद आयोग ने CPCR एक्ट 2005 की धारा 13 (1) (j) के तहत संज्ञान लिया और चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर को मामले की जाँच कर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया। उस समय बजिंदर सिंह की उम्र लगभग 39 साल थी।

बजिंदर के ठिकाने पर आयकर की रेड

धोखाधड़ी के आरोप में आयकर विभाग ने जनवरी 2023 में बजिंदर सिंह के चर्च पर रेड डाली थी। इस चर्च के भक्तों ने आरोप लगाया था कि बजिंदर ने उनसे पैसे लिए थे और चमत्कार का वादा किया था, जो कभी पूरा नहीं हुआ। शिकायत मिलने के बाद आयकर विभाग ने जालंधर में बजिंदर के ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ में छापेमारी की और पैसे के लेन-देने को लेकर तमाम दस्तावेज खंगाले।

विभाग ने बजिंदर के बैंक खातों के साथ उसकी चल और अचल सम्पत्तियों की भी तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान आयकर विभाग के साथ पैरामिलिट्री के 50 से अधिक जवान साथ थे। हालाँकि, आयकर विभाग की छापेमारी का बजिंदर के चर्च की महिला भक्तों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। महिला भक्तों का दावा था कि बजिंदर के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर लोकप्रिय पादरी को बदनाम किया जा रहा है।