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नेहरू की भूल, जिन्ना का धोखा, ऑल इंडिया रेडियो का ऐलान, चीनी घुसपैठ… कैसे बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का हुआ कब्जा, क्यों जाफर एक्सप्रेस तक पहुँची आजादी की आग, जानिए सब कुछ

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हाल ही में बलोच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस नाम हाइजैक कर ली। इसमें 400 से ज्यादा यात्री सवार थे। बलोचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे इन लड़ाकों ने दावा किया है कि इस ट्रेन में सवार लोगों में बड़ी संख्या पाकिस्तान के फौजियों की थी। पाक फ़ौज ने इसके बाद एक ऑपरेशन चलाया। लगभग 48 घंटे के बाद ट्रेन रिहा हो सकी। पाक फ़ौज का दावा है कि इस कार्रवाई में 30 से अधिक बलोच विद्रोही मारे गए जबकि अधिकांश लोगों को रिहा करवा लिया गया।

बलोच विद्रोही इस दावे को नकारते हैं। उन्होंने लगभग 100 पाक फौजियों को मारने की बात कही है। बलूचिस्तान में विद्रोही हमले कोई नई बात नहीं है। लेकिन यह हमला विद्रोह कितना बड़ा है, इसको दिखाता है। इस एक हमले के बाद बलूचिस्तान और पाकिस्तान के बीच की लड़ाई, उसका आजादी के लिए संघर्ष, पाकिस्तान की बलूचिस्तान में लूट पर दुनिया की निगाह पड़ी है। इसी के साथ ही बलूचिस्तान के इतिहास पर भी नजर गई है, जिसका एक सिरा भारत, 1947 में मिली आजादी और नेहरू से आकर जुड़ता है। दूसरा सिरा मोहम्मद अली जिन्ना से।

बलूचिस्तान में विद्रोह तो तभी चालू हो गया था जब 1947 के बाद इसे पाकिस्तान में बन्दूक के बल पर मिला लिया गया और इसके राजा के साथ किए गए वादे तोड़े गए। यह विद्रोह कई बार पाकिस्तान खत्म करने का दावा कर चुका है। लेकिन हर कुछ सालों पर यह वापस उठ खड़ा होता है। दरअसल, इस सब की जड़ में जिन्ना का धोखा, बलूचिस्तान के विलय पर नेहरू की गलतियाँ और आल इंडिया रेडियो का एक प्रसारण भी है।

कैसे भारत ने छोड़ दिया बलूचिस्तान?

1947 में अंग्रेज भारत छोड़ कर चले गए। उन्होंने भारत का बँटवारा कर दिया। नया मुल्क पाकिस्तान बन गया। कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ जैसी तमाम रियासतें लेकिन बची रह गईं। इनके सामने भारत या पाकिस्तान में मिले या फिर आजाद रहने का विकल्प था। ऐसी ही एक रियासत कलात थी। कलात में मीर अहमद यार खान का तब शासन था। उन्हें ‘कलात का खान’ कहते थे। बलूचिस्तान ने भारत और पाकिस्तान के बनने के बाद भी निर्णय नहीं लिया था कि उन्हें आजाद रहना है, या किसी एक मुल्क के साथ मिल जाना है।

कलात में आज के बलूचिस्तान का अधिकांश इलाका आता था। तिलक देवाशर की किताब ‘द बलूचिस्तान कोरंड्रम’ के अनुसार, कलात के खान ने अंग्रेजों से कहा था कि वह आजाद रहना चाहते हैं। इसको लेकर दस्तावेज भी अंग्रेजों द्वारा भेजे गए कैबिनेट मिशन को दिए थे। मजे की बात यह है कि इस काम में मोहम्मद अली जिन्ना ने उनकी सहायता की थी। जिन्ना कलात के खान के वकील थे। ‘कलात के खान’ और कलात के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री की 1947 में बलूचिस्तान के भविष्य को लेकर बैठक हुई थी।

इनायतुल्लाह बलूच ने अपनी किताब में इस बातचीत का विवरण दिया है। इस बैठक में पाँच विकल्पों पर चर्चा की गई थी। जिनमें पाकिस्तान में शामिल होना, भारत में शामिल होना, अफ़गानिस्तान में शामिल होना, ईरान में शामिल होना या फिर संरक्षित राज्य का दर्जा पाने के लिए ब्रिटेन में शामिल होने पर बात की गई थी। अहमद यार खान ने कहा कि पाकिस्तान में शामिल होना जनता के विरोध के कारण चुनौतीपूर्ण था। इसके अलावा भारत वाले विकल्प को पाकिस्तान की चिंताओं पर नकार दिया गया था।

अहमद यार खान ने कथित तौर पर दावा किया कि नेहरू उनसे नफरत करते थे और कॉन्ग्रेस ने कभी उन पर भरोसा नहीं किया। कलात के विदेश मंत्री डगलस येट्स फेल ईरान में शामिल होने के पक्ष में थे। उन्होंने इसे बलोच एकता के लिए फायदेमंद करार दिया था। गौरतलब है कि बड़ी बलोच आबादी ईरान में रहती है। हालाँकि, कलात के खान अफगानिस्तान में भी शामिल होने के पक्ष में थे लेकिन इस पर भी नहीं बात बन पाई। अंत में लंदन वाला विकल्प भी नकार दिया गया।

इसके बाद कलात के खान के पास कोई विकल्प नहीं शेष थे। इसी बीच पाकिस्तान ने लासबेला, मकरान और खरान को मिला लिया। अब कलात बीच में फंस गया और उसके पाकिस्तान में मिलने के सिवा कोई चारा ना रहा। बलूचिस्तान के पाकिस्तान में मिलने में आल इंडिया रेडियो के प्रसारण, भारत के तब के रुख और नेहरू के ढीलेपन का भी रोल था।

बलूचिस्तान और नेहरू

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी बलूचिस्तान की अनदेखी की। उनकी बलूचिस्तान पर भूल, ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि चीन और और कश्मीर की विफलता। नेहरू ने तब कलात का समर्थन नहीं करने का विकल्प चुना, जब वह भारत में मिलने को राजी था क्योंकि उसे पाकिस्तान से बचना था। अहमद यार खान ने अंग्रेजों को अपनी माँग पहुँचाने के लिए कॉन्ग्रेस नेतृत्व से भी बात की थी।

कॉन्ग्रेसका समर्थन करने वाले बलूचिस्तान के एक प्रसिद्ध पश्तून सरदार समद खान ने 1946 में कलात की दुर्दशा के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं से बात की थी। हालाँकि, नेहरू ने इसमें भी नहीं दिखाई। ब्रिटिश थिंक टैंक फॉरेन पॉलिसी सेंटर के अनुसार, नेहरू ने 1947 में कलात के विलय के दस्तावेज़ भी लौटा दिए, उन पर खान ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने यह मौक़ा खो दिया। संभवतः, नेहरू प्रशासन स्वतंत्र बलूचिस्तान के भू-राजनीतिक महत्व को नहीं समझता था।

ऑल इंडिया रेडियो प्रसारण ने बढ़ाई समस्या

बलूच इतिहासकारों का कहना है कि कलात के खान के पास दो विकल्प थे, या तो पाकिस्तान में शामिल हो जाएँ या इसे अस्वीकार कर दें और सेना लेकर लड़ाई करें। हालाँकि, 27 मार्च 1948 को ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के प्रसारण के साथ निर्णय लेने से पहले ही बलूचिस्तान की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी, इस प्रसारण में बताया गया था कि कलात के खान ने उसी वर्ष जनवरी में भारत के साथ विलय पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली से संपर्क किया था।

तब सरकार में शामिल वीपी मेनन ने खुलासा किया कि कलात के खान भारत पर कलात के विलय को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहे थे, लेकिन भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं था। गुल खान नसीर की “तहरीख-ए-बलूचिस्तान (बलूचिस्तान का इतिहास)” में भी इसकी पुष्टि की गई थी। इसके अनुसार, 27 मार्च 1948 को, ‘ऑल इंडिया रेडियो’ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रसारित की जिसमें मेनन ने कहा कि दो महीने पहले, कलात के खान ने नई दिल्ली में विलय के लिए अनुरोध प्रस्तुत किया था, लेकिन प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था।

ऑल इंडिया रेडियो ने मेनन के बयान को प्रसारित किया था, इसकी पुष्टि बलूचिस्तान के पूर्व मुख्य सचिव, लेखक और इतिहासकार हकीम बलूच ने की है। उन्होंने इस क्षेत्र पर कई किताबें लिखी हैं। गुल खान नसीर ने कथित तौर पर कलात के खान का हवाला देते हुए कहा कि यह कलात और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी को भड़काने के लिए एक सफेद झूठ था। नसीर खान के अनुसार, इससे पाकिस्तान के नेताओं को बलूचिस्तान पर हमले का एक मौक़ा मिल गया। यहाँ तक बाद में नेहरू ने भी ऐसी बातों से इंकार किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

यहाँ तक कि ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने पाकिस्तान को पत्र लिख का कलात के खान की चुगली की थी। कलात के खान ने भी इस दावे का विरोध किया था। उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अगले दिन स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बात नहीं हुई थी। हालाँकि, नुकसान पहले ही हो चुका था। इसके बाद पाकिस्तान ने सेना भेज कलात कब्जा लिया। कलात के खान को पकड़ कर कराची ले जाया गया और विलय के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।

जिन्ना ने दिया धोखा

कलात के खान के पाकिस्तान में विलय के निर्णय के बाद ही बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार होने लगा। बलूचिस्तान में जनता के मन में खटास विलय के तरीके से ही आ गई थी। जिन्ना ने जिस इज्जत का दावा बलूचिस्तान से किया था, वह उसे नहीं दी गई। यहाँ तक कि पहला विद्रोह ही इसके बाद 1948 में चालू हुआ जब कलात के खान के छोटे भाई ने विद्रोह कर दिया। हालाँकि, पाकिस्तान की सेना ने इसे दबा दिया। जिन्ना की कुछ सालों में मौत हो गई, इसके बाद तो बलूचिस्तान में लूट चालू हो गई।

5 बार उठ चुका विद्रोह

बलूचिस्तान में 5 बार विद्रोह की आग भड़क चुकी है। हर बार इसके पीछे कोई चिंगारी होती है। अगर 1980-90 का दशक छोड़ दिया जाए तो अब तक लगातार हर दशक में बलूच विद्रोही उठ खड़े हुए हैं। वर्तमान में बलूचिस्तान में चल रही लड़ाई की चिंगारी 2005 में भड़की थी। तब बलूचिस्तान में तैनात एक फ़ौज के मेजर ने एक बलोच लड़की के साथ बलात्कार किया। उस पर कार्रवाई करने के बजाय परवेज मुशर्रफ ने उसे बचाया और बलोच लोगों को धमकाया।

पाकिस्तानी फ़ौज ने प्रदर्शन करने वाले निर्दोष बलूचों पर हवाई हमले किए गोलियाँ बरसाईं। इसके बाद जब बलोच सरदार नवाब अकबर बुगती ने विद्रोह किया तो उनकी हत्या कर दी और उनके शव तक को परिवार को नहीं सौंपा। इसके बाद बलोच और भी भड़क गए। तब से लगातार बलूचिस्तान अशांत है। पाकिस्तान बलूचिस्तान के लोगों से बात करने के बजाय सैन्य कार्रवाई से मामला सुलझाना चाहता है। यह अब संभव नहीं है।

गैस लूटी, फिर बंदरगाह बेचा

बलूचिस्तान के सुई इलाके में 1950 के ही दशक में गैस निकल आई। इस गैस की लूट पाकिस्तान के हुक्मरानों ने चालू कर दी। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में इस गैस की सप्लाई नहीं दी बल्कि पंजाब और सिंध पहुँचाई। यहाँ तक कि 1990 का दशक आते-आते यह गैस लगभग खत्म हो गई। इसके बाद पाकिस्तान के हुक्मरानों ने बलूचिस्तान में जमीन बेच दी। वर्तमान में चीन बलूचिस्तान के ग्वादर के बंदरगाह और एयरपोर्ट को चीन को दे दिया है। स्थानीय लोग इसका विरोध करते हैं।

बलूचिस्तान में अयस्क और खनिज भरे हुए हैं। पाकिस्तान ने यह भी चीन को लगभग बेच दिए हैं। इससे भी बलोच लोगों में गुस्सा है। बलूचिस्तान में स्कूल, अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी पाकिस्तान ने नहीं पहुँचाई हैं। ऐसे में विद्रोह के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं। बलोच महिलाएँ भी इस विद्रोह में शामिल हैं।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस आई, हिंदू त्योहार पर ‘तुष्टिकरण वाला फरमान’ जारी करने लगी हैदराबाद पुलिस: कहा- जिनका ‘मन न हो’ उनको रंग न लगाएँ, समूह में न खेलें होली

कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर सीवी आनंद द्वारा होली खेलने को लेकर जारी की गई नोटिस को लेकर विवाद हो गया है। नोटिस में कहा गया है कि होली मनाने वाले हिंदू ‘अनिच्छुक व्यक्तियों, स्थानों और वाहनों’ पर रंग नहीं फेंके। कानून-व्यवस्था का हवाला देकर आदेश में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर समूह में बाइक और अन्य वाहनों की सवारी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पुलिस कमिश्नर द्वारा 11 मार्च 2025 को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, “हैदराबाद शहर में सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अनिच्छुक व्यक्तियों, स्थानों और वाहनों पर रंग-गुलाल या रंगीन पानी फेंकना परेशानी का कारण बन सकता है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर समूहों में दोपहिया और अन्य वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाएँ।”

तेलंगाना के पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किया गया नोटिस

नोटिस में आगे कहा गया है, “इससे शांति व्यवस्था भंग होने और जनता को असुविधा या खतरा होने की आशंका है। होली महोत्सव-2025 के उत्सव के संबंध में यह आदेश 13 मार्च को शाम 6 बजे से 15 मार्च से 6 बजे सुबह तक लागू रहेगा।” नोटिस के अनुसार, इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम 1348 फसली की धारा 76 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

बता दें कि हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम 1348 फसली की धारा 76 में कहा गया है कि जो कोई भी हैदराबाद सिटी पुलिस आयुक्त द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन करता है या पालन करने से इनकार करता है, उसे 50 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा या उसे 8 दिनों तक की कैद या दोनों से दंडित किया जा सकता है। कानून में एक महीने तक की कैद या 100 रुपए तक का जुर्माना या दोनों का भी प्रावधान है।

इस बीच, साइबराबाद पुलिस आयुक्त अविनाश मोहंती ने भी इसी तरह का एक नोटिस जारी किया है। इसमें हिंदुओं को अजनबियों, स्थानों और वाहनों पर रंग या पानी फेंकने और काफिले में वाहनों की आवाजाही के खिलाफ ‘चेतावनी’ दी गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन निर्देशों की आलोचना की है।

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर हिंदुओं के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “ईद के जश्न को कोई रोक नहीं है, कोई प्रतिबंध नहीं है! ऐसा भेदभाव क्यों?”

फ्री की चीजें देकर नहीं हटा सकते गरीबी: ‘रेवड़ी कल्चर’ पर नारायणमूर्ति ने उठाए सवाल, कहा- रोजगार से आएगी समृद्धि, सब्सिडी की हो मॉनिटरिंग

IT क्षेत्र की शीर्ष भारतीय कम्पनियों में शामिल इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने ‘रेवड़ी कल्चर’ पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि देश में मुफ्त चीजें देने से गरीबी नहीं खत्म होने वाली है। उन्होंने गरीबी खत्म करने का तरीका ज्यादा से ज्यादा नौकरियाँ पैदा करना बताया है। उन्होंने इसके साथ ही सरकारी सब्सिडी की कड़ी देखरेख की वकालत की है।

मुंबई में स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर आयोजित एक इवेंट में बोलते हुए नारायणमूर्ति ने कहा, “मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि आप में से हर आदमी आने वाले समय में लाखों नौकरियाँ पैदा करेगा और ऐसे ही आप गरीबी की समस्या का समाधान कर सकते हैं, आप फ्रीबीस (रेवड़ियों) से गरीबी की समस्या का समाधान नहीं कर सकते, कोई भी देश इसमें सफल नहीं हो सका है।”

नारायणमूर्ति ने इस दौरान कहा कि सरकार जो भी सुविधाएँ मुफ्त दे, उनको लेकर कड़ी मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने इसके लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली का उदाहरण दिया। नारायणमूर्ति ने कहा कि जिस भी परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए, 6 महीने बाद उसको लेकर जाँच की जाए कि वह इसका उपयोग कैसे करते हैं।

रेवड़ी कल्चर पर नारायणमूर्ति ने स्पष्ट किया है कि वह किसी पार्टी के वादों पर टिप्पणियाँ नहीं कर रहे बल्कि नीतिगत व्यवस्था पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई फायदा जनता को दिया जा रहा है तो इसके बदले में सरकार को कुछ शर्तें भी लगानी चाहिए।

नारायणमूर्ति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियाँ नकद ट्रांसफर, मुफ्त बिजली, मुफ्त बस यात्रा, राशन या फिर बाकी तरीकों का इस्तेमाल करके चुनाव में उतर रही हैं। बीते कुछ चुनावों में यह चलन तेजी से बढ़ा है।

भारतीय राजनीति में रेवड़ी और मुफ्त में सुविधाएँ दिए जाने का चलन आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में आजमाया था और उसे 2015 तथा 2020 के चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस को भी ऐसे ही वादों के सहारे कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में बड़ी सफलताएँ मिलीं।

रेवड़ी कल्चर का पहला विरोध करने वाली भाजपा ने भी बाद में महिलाओं को नकद राशि जैसे वादे किए हैं। हालाँकि, अर्थशास्त्रियों ने इस चलन को बजट के लिए खतरनाक बताया है और इसे अर्थव्यवस्था पर बोझ बताया है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के रेवड़ी बाँटने के असर बजट पर दिखाई भी दिए हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार दलितों और जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए बनाया गया बजट अपनी ‘गारंटी स्कीम’ में लगा दिया है। हजारों करोड़ रूपए की धनराशि गारंटी स्कीम में लगाई गई है। कर्नाटक ने कई टैक्स भी बढ़ा दिए हैं। हालाँकि, इससे कर्नाटक में गरीबी रेखा पर कोई असर पड़ा हो, ऐसी जानकारी नहीं सामने आई है। नारायणमूर्ति ने इसी से जुड़ी बात कही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी देश इसमें सफल नहीं हुआ है। दरअसल, उनका इशारा वेनेजुएला जैसे देशों की तरफ था। वेनेजुएला ने भी तेल की कमाई के सहारे अपने नागरिकों को रेवड़ियाँ बाँटनी चालू की थी। उसने सरकारी नौकरियाँ आदि भी खूब बाँटी थी। बाद में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई।

शाहिद अफरीदी ने कहा- मुसलमान बन जा, मेरा करियर बर्बाद कर दिया: पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया का US कॉन्ग्रेस में छलका दर्द, बताया पाकिस्तान में हिंदुओं से कैसे होता है भेदभाव

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में पाकिस्तान के पूर्व हिंदू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने डीसी में एक कॉन्ग्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को उजागर किया और बताया कि उनके ऊपर भी धर्मांतरण का दबाव बनाया गया था

कनेरिया ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में समान मूल्य और सम्मान नहीं मिला, जिसके कारण उनका क्रिकेट करियर बर्बाद हुआ। कनेरिया ने पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी पर भी धर्मांतरण का दबाव देने का गंभीर आरोप लगाया।

उन्होंने खुलासा किया कि अफरीदी ने उन्हें इस्लाम कबूलने को कहा था। (वो हिंदू थे इसलिए) अफरीदी और अन्य खिलाड़ी उन्हें सामाजिक रूप से अलग रखते थे। इसके अलावा उन्हें साथ में खाने भी नहीं देते थे। केवल इंजमामुल हक ऐसे कप्तान थे जो उनके समर्थन में बात करते थे।

उन्होंने कहा, “मैंने भी पाकिस्तान में काफी ज्यादा भेदभाव का सामना किया है और इसी वजह से मेरा क्रिकेट करियर पूरी तरह से बर्बाद हो गया। मुझे पाकिस्तान में उस तरह का सम्मान और समान भाव नहीं मिला, जिसका मैं पूरी तरह से हकदार था। पाकिस्तान में हुए उसी भेदभाव की वजह से आज यहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका में हूँ। हमने जागरूकता बढ़ाने के लिए बातचीत की है और संयुक्त राज्य अमेरिका से वो सब बताया जिसे यह पता चल सके कि हमने पाकिस्तान में कितना कुछ सहा है ताकि उस कार्रवाई की जा सके।”

कनेरिया ने कहा कि वो इस ब्रीफिंग के माध्यम से अमेरिका के लोगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को किस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि दानिश कनेरिया पाकिस्तान के पूर्व और अंतिम हिंदू क्रिकेटर हैं। उन्होंने अपने करियर में कुल 61 टेस्ट मैच खेले जबकि वनडे 18 मैच खेले हैं। पिछले कुछ समय से वो लगातार पाकिस्तान में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार पर मुखर होकर अपनी बात कहते आए हैं और इस्लामी कट्टरपंथियों का चेहरा उजागर करते हुए भी आए हैं।

हिरोइन रान्या राव दुबई से लेकर आई थी जो सोना, उसे बेंगलुरु के ऑटो में छोड़ना था: IPS की बेटी ने बताया- YouTube से सीखा छिपाकर कैसे लाते हैं गोल्ड

सोना तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) की पूछताछ में रान्या राव ने बताया है कि उन्हें तस्करी का सोना दुबई एयरपोर्ट पर एक शख्स ने दिया था। रान्या राव ने यह भी बताया है कि उन्हें यह सोना बेंगलुरु में एक ऑटो में रखना था। वहीं बेंगलुरु के एक कोर्ट ने मीडिया संस्थानों पर रान्या राव मामले में आरोप लगाने या अपमानजनक कंटेंट प्रसारित करने पर रोक लगाई है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार रान्या राव ने DRI को सोना मिलने और उसे छुपा कर लाने की कहानी बताई है। रान्या राव ने कहा, “मुझे 1 मार्च को एक विदेशी नंबर से कॉल आया। इसके पहले पिछले दो हफ़्तों से मुझे विदेशी नंबरों से कॉल आ रहे थे। मुझे दुबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 के गेट A पर जाने को कहा गया था। मुझे दुबई एयरपोर्ट पर सोना लेने और बेंगलुरु में उसे डिलीवर करने के लिए कहा गया।”

रान्य राव ने आगे बताया, “यह पहली बार था जब मैंने दुबई से बेंगलुरु सोना लाकर तस्करी की। इससे पहले कभी दुबई से सोना मैंने नहीं खरीदा था… सोना दो प्लास्टिक के पैकेट में था। मैंने एयरपोर्ट के एक कमरे में सोना शरीर से चिपकाया। मैंने सोने को अपनी जींस और जूतों में छिपाया था। ऐसा करना मैंने यूट्यूब से सीखा था।”

रान्या राव ने बताया है कि जिस आदमी ने उनको फ़ोन किया या दुबई एयरपोर्ट पर सोना दिया, उसे वह नहीं जानती। उन्होंने बताया है कि वह एक लम्बा सा आदमी था जो सोना देने के तुरंत बाद ही एयरपोर्ट से बाहर चला गया। यह सोना रान्या राव को सिक्युरिटी चेक पूरा होने के बाद दिया गया था।

DRI पूछताछ में रान्या राव ने बताया है कि उन्हें एयरपोर्ट के बाहर एक जगह ऑटो में सोना रखना था। रान्या के अनुसार, यहाँ एक अनजान आदमी सोना लेने आता। रान्या ने बताया है कि उन्हें आदमी के विषय में कोई जानकारी नहीं थी। रान्या ने यह भी दावा किया है कि सोना तस्करी का यह पहला मौक़ा था और इससे पहले उन्होंने कभी तस्करी नहीं की।

रान्या ने बताया है कि इससे पहले वह अमेरिका, यूरोप और बाकी के खाड़ी देशों में जाती रही हैं लेकिन यह यात्राएँ उनके बाकी कामों के लिए थीं। DRI रान्या राव से बाकी जानकारियाँ निकाल रही है। रान्या राव से अभी यह जानकारी हासिल नहीं हो सकी है कि उनके साथ इस तस्करी के धंधे में और कौन शामिल था।

इसी बीच बेंगलुरु की एक अदालत ने रान्या राव के सौतेले पिता और पूर्व DGP रामचन्द्र राव की याचिका पर आदेश दिया है। बेंगलुरु की अदालत ने कहा है कि अब मीडिया रान्या राव के खिलाफ कोई भी आरोप या अपमानजनक आरोप प्रकाशित या टेलीकास्ट नहीं कर सकता।

रामचन्द्र राव ने दावा किया था कि मीडिया उनकी बेटी का नाम TRP के लिए फर्जी आरोपों में घसीट रहा है। गौरतलब है कि रान्या राव बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 14 किलो तस्करी के सोने के साथ पकड़ी गईं थी।

मीडियाकर्मी कृप्या ध्यान दें, कॉन्ग्रेस शासन में सरकार की आलोचना अपराध है: तेलंगाना में पुलिस ने 2 महिला पत्रकारों को उठाया, सादे कपड़ों में घर पहुँच मोबाइल-लैपटॉप सब किया जब्त

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दो महिला पत्रकारों को गिरफ्तार किया है। पत्रकारों में एक पोगदादंडा रेवती हैं, जो ‘पल्स न्यूज‘ की प्रबंध निदेशक हैं, और दूसरी उनकी सहकर्मी संध्या उर्फ तन्वी यादव हैं।

ये गिरफ्तारी 10 मार्च 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो को लेकर है। इस वीडियो में एक किसान ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अब चूँकि इस इंटरव्यू को ‘पल्स न्यूज’ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, इसीलिए माना गया कि ये सब ‘पल्स न्यूज’ ने मुख्यमंत्री की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया है।

इसके बाद इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई। माना गया कि वीडियो को प्रसारित करने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था, और इसलिए दोनों पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। साथ ही उनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पत्रकारों के घर कुछ लोग सादे कपड़े में आए और उन्हें हिरासत में लिया। रेवती की एक वीडियो से तो पता चलता है कि पुलिस सुबह 5:30 बजे ही उनके यहाँ पहुँच गई थी। पत्रकार ने वीडियो जारी कर बताया कि उन्हें सोकर उठे आधा घंटा भी नहीं हुआ कि पुलिस उन्हें पकड़ने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम रेड्डी उन पर चुप रहने का दबाव बना रहे हैं। वहीं उनके पति और घरवालों के फोन-लैपटॉप जब्त कर लिए गए हैं।

गौरतलब दोनों पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद तेलंगाना सरकार को काफी निंदा झेलनी पड़ रही है। सवाल किया जा रहा है कि क्या यही है कॉन्ग्रेस की मोहब्बत की दुकान। तेलंगाना के भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष ने भी आावाज उठाई है। उन्होंने कहा कि ये देर रात पुलिस की कार्रवाई प्रेस की आजादी पर हमला है। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी इसकी निंदा की है। वहीं सिद्धिपेट से बीआरएस विधायक हरीश राओ थानीरू ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को डरपोक बताया।

जयपुर पॉलिटेक्निक महिला कॉलेज का प्रिंसिपल रहा मश्कूर अली गिरफ्तार, छात्राओं ने बताया- वॉशरूम में कैमरा लगाकर बनाता था Video, लाइब्रेरी में करता था गंदी हरकतें

जयपुर में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल मश्कूर अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। मश्कूर अली पर यहाँ की छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। उसके खिलाफ छात्राओं ने न प्रदर्शन भी किया था। पुलिस ने उस पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है।

जयपुर पुलिस ने छात्राओं के आरोपों की शुरूआती जाँच के बाद मश्कूर अली को गिरफ्तार कर लिया है। उस के खिलाफ SIT जाँच करवाई गई थी। इसमें आरोप सही पाए गए थे। इस मामले में छात्राओं ने भी बयान दर्ज करवाए थे। छात्राओं ने बताया था कि मश्कूर अली ने वॉशरूम में कैमरा लगा रखा था। उन्होंने बताया था कि इससे वीडियो भी बनाई गईं थी।

दरअसल, इस मामले में छात्राओं और कॉलेज के स्टाफ ने 3 फरवरी, 2025 को तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव से शिकायत की थी। इसके बाद जाँच के लिए एक कमिटी की गई थी। जाँच में दोषी पाए जाने पर मश्कूर को निलंबित कर दिया था। इसके बाद जाँच कमिटी सोमवार (10 मार्च) को जाँच के लिए दोबारा कॉलेज पहुँची थी, इस दौरान छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया था।

छात्राओं का आरोप था कि मश्कूर अली को बचाने के लिए दोबारा जाँच करवाई जा रही है। छात्राओं का कहना है कि मश्कूर अली को साल 2023 में प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। इसके बाद से ही वह छात्राओं से अभद्रता करता था। उनका कहना है कि मश्कूर लाइब्रेरी के कोने में अलमारी के पीछे बैठता था, जो सीसीटीवी कैमरे की रेंज में नहीं आता था।

यहाँ पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करता था। इसके अलावा, पूर्व प्रिंसिपल खुद को छात्राओं के पर्सनल व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़वा कर रखा था। वह लड़कियों को अश्‍लील मैसेज भी करता था। र‍िपोर्ट्स के मुताबिक, वह बड़े-बड़े लोगों से संपर्क होने का झाँसा देकर छात्राओं की अपनी कार में ले जाता था और चलती कार में अभद्रता करता था।

छात्राओं ने आरोप लगाया था कि मश्कूर अली उन्हें धमकी देता था कि अगर किसी ने पुल‍िस या पर‍िजनों से शिकायत की तो वह उनका वीडियो वायरल कर देगा। छात्राओं का कहना है कि वीड‍ियो वायरल होने के डर से किसी ने थाने में र‍िपोर्ट दर्ज नहीं करवाई थी।

अमर उजाला से बातचीत में लड़कियों ने कहा, “प्रिंसिपल मश्कूर अली कहता था कि तुम्हें (लड़कियों से) बाकी लोगों के साथ भी सोना पड़ेगा। वह कहता था कि उसके बड़े-बड़े लोगों से लिंक हैं। वह लड़कियों की सप्लाई भी करता है। बात नहीं मानने पर वह लड़कियों को कॉलेज से निकालने की धमकी भी देता था।”

‘मेरी पहचान भगवा है और एक दिन पूरी दुनिया इसे धारण करेगी’: UP के मुख्यमंत्री ने बताई सनातन परंपरा की पहचान, बोले- मैं योगी और मेरे लिए सब बराबर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (12 मार्च) को कहा कि एक दिन ऐसा आएगा, जब पूरी दुनिया सनातन की विचारधारा अपनाएगी और भगवा पहनेगी। उन्होंने कहा कि भगवा पहनना सनातन की परंपरा है। सीएम योगी बोले, “मेरे बारे चाहे कोई कुछ भी सोचे, लेकिन मैंने तो भगवा धारण किया है। यह सनातन का गौरव है और यह भगवा एक दिन सारी दुनिया धारण करेगी। यह हमारी सनातन परंपरा की भी पहचान है।”

सीएम योगी ने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े मीडिया हाउस पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा। इस दौरान सीएम योगी ने कहा, “मैं एक योगी हूँ। हर पंथ, संप्रदाय, उपासना विधि का सम्मान करता हूँ। कभी गोरखनाथ पीठ आएँगे तो देखेंगे कि वहाँ पर एक पंक्ति में बैठकर हर पंथ, धर्म और जाति के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। कोई भेदभाव नहीं होता है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगल आक्रांता औरंगजेब का गुणगान करने वाले लोगों पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन करना बंद करें, अन्यथा संभल जैसे सच जब सामने आएँगे तो कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।” बता दें कि महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब को एक महान शासक बताया था।

समाजवादी पार्टी सहित पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “‘लैंड जिहाद’ के माध्यम से इस पौराणिक स्थली पर भी कब्जा करवा दिया गया था… ये सब पिछली सरकारें करवा रही थीं…। कोई सोच सकता था कि गुलामी के कालखंड में जिस अक्षयवट का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ललायित रहते थे, लेकिन 500 वर्षों तक वे दर्शन नहीं कर पा रहे थे।” अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती को कैद करके रख दिया गया था।

उन्होंने संभल के मामले पर भी अपनी बात रखी और कहा कि इस्लाम के शुरू से भी बहुत पुराना है संभल का इतिहास। सीएम योगी ने कहा, “संभल एक सच्चाई है। हम जबरन किसी पर कब्जा करके किसी की आस्था को ठेस पहुँचाएँ तो ये स्वीकार्य नहीं होगा। सन 1526 में संभल में श्री विष्णु हरि का मंदिर तोड़ा गया था और 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा गया था। दोनों जगहों पर मीर बाँकी के द्वारा यह कृत्य किया गया था। यह बात जगजाहिर है।”

संभल की प्राचीनता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “संभल के बारे में जो उद्धरण आते हैं वो आज से 5000 साल पहले से लेकर 3500 साल पहले तक रचे गए हमारे पुराणों में आते हैं। उनमें कहा गया है कि यहाँ भगवान विष्णु श्रीहरि का 10वाँ अवतार होगा। इस्लाम का उदय हुए 1400 वर्ष हुए हैं और मैं बात कर रहा हूँ 3500 साल पहले से लेकर 5000 साल पहले की। यानी इस्लाम के उदय के 2000 साल से लेकर 3500 साल पहले की।”

संभल में सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों के बारे में बात करते सीएम योगी ने ऑगर्नाइजर एवं पांच्जन्य के एक कार्यक्रम में कहा, “संभल एक तीर्थ रहा है। 68 तीर्थ थे वहाँ पर। अभी हम केवल 18 निकाल पाए हैं। यहाँ 19 कूप थे। सभी कूपों को हमने खोज लिया है और अब उनका उत्खनन करा रहे हैं। 56 वर्ष के बाद वहाँ भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक हो पाया है।”

1400 साल पुराना इस्लाम, संभल 5000+ साल पुराना: बोले CM योगी- लैंड जिहाद कर पौराणिक स्थलों पर किया कब्जा, होली से पहले मस्जिदों पर चढ़ने लगा ‘पर्दा’

होली के त्योहार के दिन शुक्रवार (14 मार्च) को चौपाई जुलूस वाले परंपरागत रास्तों में पड़ने वाली मस्जिदों। को प्रशासन पन्नी और तिरपाल से ढकेगा। इस दौरान जामा मस्जिद सहित कुल 10 मस्जिदों को ढका जाएगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस्लाम के आने के हजारों साल पहले संभल का पुराणों में वर्णन किया गया था। इस तीर्थ का विकास कराया जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा, “संभल एक सच्चाई है। हम जबरन किसी पर कब्जा करके किसी की आस्था को ठेस पहुँचाएँ तो ये स्वीकार्य नहीं होगा। सन 1526 में संभल में श्री विष्णु हरि का मंदिर तोड़ा गया था और 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा गया था। दोनों जगहों पर मीर बाँकी के द्वारा यह कृत्य किया गया था। यह बात जगजाहिर है।” इसे वीडियो में 53वें मिनट के बाद से सुना जा सकता है।

संभल की प्राचीनता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “संभल के बारे में जो उद्धरण आते हैं वो आज से 5000 साल पहले से लेकर 3500 साल पहले तक रचे गए हमारे पुराणों में आते हैं। उनमें कहा गया है कि यहाँ भगवान विष्णु श्रीहरि का 10वाँ अवतार होगा। इस्लाम का उदय हुए 1400 वर्ष हुए हैं और मैं बात कर रहा हूँ 3500 साल पहले से लेकर 5000 साल पहले की। यानी इस्लाम के उदय के 2000 साल से लेकर 3500 साल पहले की।”

संभल में सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों के बारे में बात करते सीएम योगी ने ऑगर्नाइजर एवं पांच्जन्य के एक कार्यक्रम में कहा, “संभल एक तीर्थ रहा है। 68 तीर्थ थे वहाँ पर। अभी हम केवल 18 निकाल पाए हैं। यहाँ 19 कूप थे। सभी कूपों को हमने खोज लिया है और अब उनका उत्खनन करा रहे हैं। 56 वर्ष के बाद वहाँ भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक हो पाया है।”

सीएम योगी ने कहा, “मैं एक योगी हूँ। हर पंथ, संप्रदाय, उपासना विधि का सम्मान करता हूँ। कभी गोरखनाथ पीठ आएँगे तो देखेंगे कि वहाँ पर एक पंक्ति में बैठकर हर पंथ, धर्म और जाति के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। कोई भेदभाव नहीं होता है। मेरे बारे चाहे कोई कुछ भी सोचे, लेकिन मैंने तो भगवा धारण किया है। यह सनातन का गौरव है और यह भगवा एक दिन सारी दुनिया धारण करेगी।”

समाजवादी पार्टी सहित पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “‘लैंड जिहाद’ के माध्यम से इस पौराणिक स्थली पर भी कब्जा करवा दिया गया था… ये सब पिछली सरकारें करवा रही थीं…। कोई सोच सकता था कि गुलामी के कालखंड में जिस अक्षयवट का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ललायित रहते थे, लेकिन 500 वर्षों तक वे दर्शन नहीं कर पा रहे थे।” अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती को कैद करके रख दिया गया था।

होली के दिन संभल की मस्जिदों को ढका जाएगा

होली को देखते हुए संभल प्रशासन ने कुछ मस्जिदों को ढकने का फैसला लिया है। होली की चौपाई का जुलूस जिन परंपरागत रास्ते से गुजरता है, उन रास्तों में स्थित मस्जिदों को पॉलिथीन और तिरपाल से ढकने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दौरान जामा मस्जिद सहित कुल 10 मस्जिदों को ढका जाएगा। संभल के ASP श्रीशचंद्र ने कहा कि यह निर्णय किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए किया गया है।

Jio-एयरटेल से एलन मस्क की स्टारलिंक का डील, जानिए कब तक सैटेलाइट से मिलने लगेगा इंटरनेट: कैसे करेगा काम, कितना पैसा आपको देना होगा… जानिए सब कुछ

सैटेलाइट के सहारे इंटरनेट देने वाली कम्पनी स्टारलिंक भारत में घुसने के लिए तैयार है। उसने भारत में सेवाएँ देने के लिए देश की दोनों बड़ी टेलीकॉम कम्पनियों, रिलायंस जियो और एयरटेल से समझौता कर लिया है। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि यह जल्द ही भारत में यह ग्राहकों के लिए सेवाएँ चालू करेगी। स्टारलिंक, कारोबारी एलन मस्क की कंपनी है। इसके भारत आने के साथ ही इंटरनेट क्षेत्र में बड़े बदलाव के कयास हैं। इसके साथ ही कुछ सुरक्षा चिंताएँ भी स्टारलिंक के प्रवेश के साथ सामने आई हैं।

क्या है स्टारलिंक?

स्टारलिंक एक अमेरिकी इंटरनेट प्रदाता कंपनी है। इसे अमेरिका के कारोबारी एलन मस्क ने 2019 में चालू किया था। स्टारलिंक की शुरुआत दुनिया के किसी भी कोने में तेज इंटरनेट सेवा देने के लिए चालू की गई थी। स्टारलिंक वर्तमान में विश्व के 100 देशों में इंटरनेट देने में सक्षम है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्टारलिंक चालू करने में ₹85 हजार करोड़ से अधिक का खर्च आया है। वर्तमान में 50 लाख से अधिक लोग स्टारलिंक की मदद से इंटरनेट चलाते हैं। स्टारलिंक किसी के घर या फिर चलती गाड़ी तक पर लगाया जा सकता है। इसे बड़ी कम्पनियों के लिए भी लॉन्च किया गया है।

कैसे करता है काम?

स्टारलिंक के नाम से ही लगता है कि इसका संबंध तारों से है। असल में स्टारलिंक सैटेलाइट के सहारे काम करता है। स्टारलिंक के हजारों सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए गए हैं। यह सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर ऊपर स्थापित हैं और लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाते रहते हैं।

वर्तमान में इन सैटेलाइट की संख्या लगभग 7000 है। स्टारलिंक की इंटरनेट सेवा लेने के लिए इसकी किट लेनी होती है। इसमें सबसे प्रमुख इसका एंटीना है। यह आपकी DTH यानी ‘डिश’ जैसी ही छतरी होती है। सफ़ेद रंग की यह छतरी आकार में चौकोर और पिज्जा के डिब्बे के आकार का होता है।

इसका उपयोग करने के लिए इस एंटीना को सैटेलाईट की तरफ किया जाता है। स्टारलिंक का एप इसमें सहायता करता है। यह एंटीना रेडियो सिगनल पकड़ता है। इससे एक तार निकलता है जो मॉडम में जाकर जुड़ता है। यह मॉडम भी आपके इंटरनेट राऊटर जैसा काम करता है। इसके बाद उस घर में इंटरनेट की सेवाएँ ली जा सकती हैं।

स्टारलिंक का एंटीना

स्टारलिंक का इंटरनेट अन्य किसी मोबाइल इंटरनेट की तुलना में तेज स्पीड देता है क्योंकि इसमें ज्यादा बाधाएँ नहीं होती हैं। कुल मिलाकर इसके काम करने का तरीका कुछ-कुछ DTH टीवी जैसा ही है। इसकी स्पीड लगभग 100 MBPS तक होती है, जो कि सामान्य मोबाइल इंटरनेट की तुलना में कहीं तेज है।

SIM वाले इंटरनेट से कैसे अलग?

वर्तमान में भारत में अधिकांश आबादी मोबाइल SIM का उपयोग करके इंटरनेट एक्सेस करती है। मोबाइल नेटवर्क के साथ कई समस्याएँ हैं। मोबाइल नेटवर्क के लिए सेल टॉवर की आवश्यकता होती है। यह टॉवर उस इलाके में मौजूद मोबाइल यूजर से रेडियो तरंगे लेता है और आगे भेजता है।

इसी माध्यम से मोबाइल फोन यूजर रेडियो तरंगे लेता है। इस प्रकार एक नेटवर्क स्थापित होता है। हर जगह मोबाइल टॉवर पहुँचाना संभव नहीं है। विशेषकर, दुर्गम स्थानों पर। ऐसे में सैटेलाइट वाली व्यवस्था काम आती है। इसके लिए किसी टॉवर की जरूरत नहीं होती है। बल्कि, इनका एंटीना खुद ही एक टॉवर की तरह काम करता है।

सैटेलाइट से सीधे जुड़े होने के चलते इसमें इंटरनेट की गति भी तेज होती है। मोबाइल टॉवर को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता भी होती है, सैटेलाइट में यह समस्या भी नहीं होती। ऐसे में इसे सभी इलाकों में पहुँचाना बड़ा आसान हो जाता है।

जियो और एयरटेल का इसमें क्या रोल?

सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट देने वाले स्टारलिंक ने भारत में सेवाएँ प्रदान करने के लिए एयरटेल और जियो से समझौता किया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब स्टारलिंक को किसी टॉवर की जरूरत नहीं तो वह इनसे क्यों समझौता कर रहा है।

दरअसल, एयरटेल और जियो दोनों ही भारत में स्टारलिंक की बिक्री करेंगी। वह अपने स्टोर के माध्यम से स्टारलिंक की इंटरनेट किट बेचेंगी और साथ ही उनको इंस्टाल करने में भी भूमिका निभाएँगी। इसके अलावा स्टारलिंक की बिक्री के बाद सेवाओं के लिए भी यही कम्पनियाँ काम करेंगी।

जियो और एयरटेल, स्टारलिंक के माध्यम से उन इलाकों में भी अब इंटरनेट पहुँचाने का प्रयास कर सकते हैं, जो काफी दुर्गम हैं। इसके अलावा, जियो अपने बाकी प्रोडक्ट जैसे कि जियोटीवी, जियोसिनेमा, जियोहॉटस्टार एवं जियोफाइबर आदि भी इस स्टारलिंक के साथ जोड़ सकता है। एक तरह से यह कम्पनियाँ स्टारलिंक के डिस्ट्रीब्यूटर की तरह काम करेंगी।

कीमतें क्या होंगी, क्या असर होगा?

विश्व में सबसे इंटरनेट देने वाले देशों में से एक भारत है। स्टारलिंक अभी भारतीय उपमहाद्वीप में भूटान के भीतर काम करता है। यहाँ उसका सबसे सस्ता प्लान ही ₹3 हजार/महीने से शुरू होता है। इसके अलावा दूसरे प्लान ₹4 हजार से ऊपर हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत में भी स्टारलिंक यही कीमतें रख सकती है।

इनमें हल्का-फुल्का बदलाव भी किया जा सकता है। हालाँकि, भारत में मोबाइल डाटा काफी सस्ता होने चलते इसे अपने ग्राहक बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ेगा। स्टारलिंक लगाने के लिए इसका एंटीना और बाकी सामान भी महंगा आता है, उसके लिए भी इसे नई रणनीति अपनानी होगी।

भारत में वर्तमान में अधिकांश कम्पनियाँ मोबाइल डाटा प्लान ₹300 जबकि ब्रॉडबैंड प्लान ₹600 के आसपास देती हैं। इन कीमतों से प्रतिद्वंदिता के लिए स्टारलिंक को भी भारतीय ग्राहकों के अनुसार कीमतें और प्रोडक्ट देने पड़ेंगे। हालाँकि, भारतीय बाजार में स्टारलिंक को एक बढ़त जरूर है।

भारत में वर्तमान 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स है। हालाँकि, बड़ी आबादी अब भी इससे बाहर है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वह इलाके हैं, जहाँ पहुँचना मुश्किल है। स्टारलिंक से यह चुनौती खत्म हो सकती है। इसके अतिरिक्त स्टारलिंक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में भी सहायक हो सकता है।

स्टारलिंक से सुरक्षा चिंताएँ भी

स्टारलिंक के भारतीय बाजार में घुसने के साथ ही सुरक्षा चिंताएँ भी हैं। हाल ही में मणिपुर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से हथियारों के साथ ही एक स्टारलिंक भी मिला था। ऐसे में सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टारलिंक पर नियंत्रण करना मुश्किल होगा।

स्टारलिंक के उपयोग पर एजेंसियों का रोक लगाना भी मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में आतंकियों और उग्रवादियों द्वारा इसका उपयोग किए जाने की आशंका है। स्टारलिंक के भारतीय बाजार में प्रवेश करने में देरी के पीछे भी यही चिंताएँ हैं।

स्टारलिंक को अभी भारत सरकार से सुरक्षा परमिट नहीं मिला है। कयास है कि यह जल्द ही मिल सकती है। हालाँकि, इससे पहले सरकार सारी चुनौतियों का आकलन कर लेगी।