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बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का राज, पुलिस के पास गए तो मारे जाएँगे: कंगना रनौत ने बताया आउटसाइडर का कैसे ​होता है शोषण

सुशांत सिंह की मौत के बाद लगातार हो रहे खुलासों ने बॉलीवुड की चकमक दुनिया के पीछे छिपी गंदगी को बेपर्दा कर दिया। इंडस्ट्री में नेपोटिज्म से लेकर अंडरवर्ल्ड तक की दखल सब कुछ धीरे-धीरे सामने आ रहा है। अभिनेत्री कंगना रनौत भी लगातार इन मामलों को लेकर मुखर रही हैं।

अब उन्होंने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को दिए इंटरव्यू में बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल और आउटसाइडर के शोषण को लेकर अपनी बात रखी है। सुशांत मामले की मुख्य आरोपित रिया चकवर्ती के व्हाट्स्एप चैट से ड्रग का एंगल सामने आया था और अब नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) इसकी पड़ताल कर रही है।

कंगना ने बताया कि बॉलीवुड में कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार एजेंसियों का कोई दखल नहीं है। इसे माफिया या अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग चलाते हैं। यदि आपने कभी मदद के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया तो वे आपको ‘पागल’ करार देंगे और आपका बहिष्कार या आपकी हत्या कर देंगे। कंगना ने दावा किया कि कई सरकारों ने बॉलीवुड में ड्रग माफिया को मजबूत होने में मदद की है।

इससे पहले कंगना ने ट्वीट कर कहा था कि यदि बॉलीवुड में नॉरकोटिक्स टेस्ट हो गया तो कई सितारे जेल में होंगे। इसके अलावा एक ट्वीट में उन्होंने ये भी बताया था जब वे बॉलीवुड में आईं थी तो उन्हें ड्रिंक में ड्रग्स दिए जाते थे।

उन्होंने कहा था, “अगर नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो बॉलीवुड में आ गया तो कई A लिस्टर जेल में पहुँच जाएँगे। अगर ब्लड टेस्ट हुआ तो कई बड़े खुलासे होंगे। उम्मीद करती हूँ कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बॉलीवुड के इस गटर को भी साफ किया जाए।”

साथ ही कहा था, “मैं तब नाबालिग थी और मेरे मेंटॉर इतने खतरनाक थे कि वह मेरी ड्रिंक में ड्रग्स मिला देते ताकि मैं पुलिस के पास न जा सकूँ। जब मैं कामयाब हो गई और मुझे मशहूर फिल्मों की पार्टियों में एंट्री मिलने लगी और तब मेरा सामना सबसे शॉकिंग और भयानक दुनिया व ड्रग्स, अय्याशी और माफिया जैसी चीजों से हुआ था।” अर्नब को दिए इंटरव्यू में भी कंगना ने विस्तार से इस बारे में बताया है कि कैसे बॉलीवुड के सितारे और उनके परिजन ड्रग्स के इस खेल में लिप्त हैं।

कंगना इससे पहले यह भी बता चुकी हैं कि किस तरह मूवी माफिया अपने इशारों पर नहीं नाचने वाले आउटसाइडर का करियर ख़त्म करते हैं। उन्होंने कहा था, “इनलोगों ने सुशांत सिंह को एक बलात्कारी में तब्दील कर दिया था। वह कैसे अपने घर बिहार वापस जाता? छोटे शहरों में पैसे नहीं देखे जाते, सम्मान देखा जाता है।”

वे इस मामले में मुंबई पुलिस की भूमिका को लेकर भी लगातार सवाल करती रही हैं। देश के जाने-माने वकील हरीश साल्वे भी सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच में मुंबई पुलिस के व्यवहार को संदेहास्पद बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि इस मामले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का पूरी तरह मजाक बना कर रख दिया गया। इसके लिए अगर कोई एक संस्था जिम्मेदार है तो वो है मुंबई पुलिस। साल्वे ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आखिर मुंबई पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक भी क्यों नहीं दर्ज की? साथ ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के समय का ऑटोप्सी रिपोर्ट में जिक्र न होने को भी अजीब बताया।

यह बात भी सामने आई है कि सुशांत ने मौत से पहले ‘पेनलेस डेथ’, सिज़ोफ्रेनिया’ और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसे शब्दों को गूगल पर सर्च नहीं किया था। इन शब्दों को सर्च किए जाने का दावा मुंबई पुलिस के कमिश्नर ने किया था।

दिल्ली में मुश्ताक, सिराज, अनीश और इश्तिहार ने राहुल को पेड़ से बाँध कर लोहे की रॉड, डंडों से पीट-पीट कर मार डाला, गिरफ्तार

पश्चिमी दिल्ली के नारायणा में शुक्रवार को संप्रदाय विशेष के चार युवकों ने एक 32 वर्षीय राहुल को मोबाइल चोरी करने के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला। चारो आरोपितों की पहचान मुश्ताक अहमद, उसके भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार के रूप में हुई है जिन्होंने राहुल को एक पेड़ से बाँधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के डीसीपी दीपक पुरोहित ने बताया सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दरअसल, 28 अगस्त को पीसीआर कॉल से नारायणा के लोहा मंडी के एमसीडी पार्क में एक शख्स की हत्या की सूचना मिली थी। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए नारायणा पुलिस स्टेशन की एक टीम घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें 32 साल के लड़के का शव पड़ा हुआ मिला। लड़के के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को चश्मदीद शेष कुमार ने बताया कि सुबह उसके पड़ोसी मुश्ताक अहमद, उसका भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार (चारो लोहा मंडी के निवासी थे।) पार्क में इस लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर रहे थे। उन्होंने लड़के को पेड़ से बाँधा हुआ था। और लाठी डंडों, पाइप और लोहे की रॉड से उसकी पिटाई कर रहे थे। उन लोगों ने उस व्यक्ति को तब तक मारा जब तक उसकी हालत बदतर नहीं हो गई। उसके बाद वे उसे छोड़ कर भाग गए।

पीड़ित राहुल उर्फ धन्ना, कीर्ति नगर के जवाहर कैंप में रहता था। पुलिस बे घटनास्थल पहुँचते ही राहुल को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि चारो आरोपितों को घटना के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। राहुल और उसके साथियों ने मिलकर शिराज के सेलफोन को उसके ट्रक से चुरा लिया था। जिसके बाद राहुल के दोस्त फ़ोन लेकर भाग गए लेकिन राहुल उन लोगों के हत्थे चढ़ गया। जिसपर चारो आरोपितों ने उसकी इतनी पिटाई की कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा।

गले पर 15-20 निशान, तलवों में सूई चुभोने के निशान: कूपर हॉस्पिटल के स्टाफ ने कहा- सुशांत की हत्या हुई थी

सुशांत सिंह राजपूत मामले में नित नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे इन आरोपों को बल मिल रहा है कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की थी। उनकी मौत के ढाई महीने होने के बावजूद परिवार और प्रशंसकों ने उनके लिए न्याय की माँग जारी रखी है। इसी बीच कूपर हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने चौंकाने वाला बयान देते हुए इसे हत्या बताया है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर की ऑटोप्सी कूपर हॉस्पिटल में ही की गई थी।

कूपर हॉस्पिटल के जिस कर्मचारी ने बयान दिया है, उसके बारे में बताया गया है कि सुशांत के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल और फिर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट लेकर वही गया था। उसने स्पष्ट कहा कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या हुई है। दिवंगत अभिनेता की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर इस खुलासे से लोगों को अवगत कराया है।

हॉस्पिटल स्टाफ ने ‘न्यूज़ नेशन’ से बातचीत करते हुए ये खुलासा किया। कर्मचारी ने कहा कि उसे इतना मालूम है कि ये मर्डर था। उसने गले पर कई निशान होने की बात भी कही। कर्मचारी ने कहा कि सुशांत के गले पर एक सूई का निशान जैसा कुछ था। उसने कहा कि गले पर सेलो टेप जैसा कुछ चिपकाया हुआ था और साथ ही कम से कम 15-20 निशान थे। हॉस्पिटल में रिया चक्रवर्ती के आने की बात भी उक्त कर्मचारी ने बताई है।

कर्मचारी ने कहा कि उसके पास दो लोग आए और पूछने लगे कि क्या उन्हें बॉडी दिखाई जा सकती है। इसके बाद रिया चक्रवर्ती भी आईं, जो हॉस्पिटल स्टाफ के दावे के मुताबिक़ माफ़ी माँग रही थीं। उसने दावा किया कि उसने हॉस्पिटल के बड़े-बड़े डॉक्टरों को चर्चा करते हुए सुना था कि ये आत्महत्या नहीं है, बल्कि हत्या है। कर्मचारी ने दावा किया कि हमलोग बॉडी को देख कर ही अधिकतर चीजें जान लेते हैं।

उसके दावे के अनुसार शव के तलवों में भी सूई चुभोए जाने के निशान थे। सुशांत की बहन श्वेता ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि ऐसे वीडियो देख कर उनका दिल लाख बार टूट जाता है। श्वेता ने पूछा कि उन्होंने उनके भाई के साथ क्या किया। साथ ही उन्होंने सुशांत के दोषियों को गिरफ्तार करने की भी माँग की। लोगों ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग की है।

देवी-देवताओं को गाली देने वाली हीर खान पाकिस्तानी युवकों से करती थी चैट, इस्लामी संगठनों से लिंक: 5 दिन की रिमांड पर

हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने वाली हीर खान उर्फ़ सना को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार किया था और आज (29 अगस्त) से इस घटिया मानसिकता की नफरती यूट्यूबर को अब 5 दिनों के लिए पुलिस रिमांड में ले लिया गया है। हीर खान को उसके यूट्यूब चैनल पर हिंदू विरोधी वीडियो पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। 28 वर्षीय यूट्यूबर (YouTuber) पर धारा 153A / 505 IPC और 66 IT कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इन 5 दिनों में, पुलिस उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सख्ती से पूछताछ करेगा, जो इस यूट्यूबर के संपर्क में थे और जो उसके नफ़रत फैलाने वाले अभियान की फंडिंग कर रहे थे। यह माना जा रहा है कि हीर खान के कई इस्लामिक संगठनों और विदेशी कट्टरपंथी गिरोहों से जुड़ाव हो सकता है, जो भारत और खासतौर पर हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और उसी के लिए हीर जैसी नफरती यूट्यूबर को उकसाते और फँसाते रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (25 अगस्त) को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद खुल्दाबाद के एसएसपी ने खुद हीर खान से पूछताछ की थी। पूछताछ में हीर खान के सहयोग न करने के कारण, आतंकवाद-निरोधी दस्ते (एटीएस) को बुलाया गया, जिसने उससे पूछताछ करने की कोशिश की, इसके बाद भी उसके इस अपराध के पीछे के कारण का पता नहीं चल सका।

गौरतलब है कि हीर खान की गिरफ्तारी के बाद, प्रयागराज पुलिस ने उसके घर से कई भारत विरोधी और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील सामग्री बरामद की थी और प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, उन्होंने उससे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जानकारियाँ हासिल की। पुलिस का मानना ​​है कि कई अन्य चीजें भी हैं, जैसे: कौन हीर खान की राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की फंडिंग कर रहा था? उसके घर से बरामद महँगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स उसे कहाँ से मिले? हर महीने उसके इस नफरत भरे अभियान पर कितना पैसा खर्च हो रहा था? इस्लामिक संगठनों और विदेशी गिरोहों के साथ हीर खान की क्या साँठगाँठ है? ऐसी कई बाते हैं जिसे जानने की जरूरत है।

इसके अलावा, प्रयागराज पुलिस उसके मामा और उसके अन्य सहयोगियों की भी तलाश में है। प्रयागराज पुलिस द्वारा साझा की गई रिपोर्टों में से एक के अनुसार, उसके चाचा, जिनकी इलाहाबाद के रोशन बाग इलाके में कपड़े की दुकान है। ऐसा माना जाता है कि वह वही था जिसने प्रयागराज के मंसूर अली पार्क में हीर खान को सीएए और एनआरसी के विरोध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया था, जहाँ उसने सरकार और उसके फैसले के खिलाफ जहर उगली थी।

उसके चाचा के अलावा, पुलिस उसके एक रिश्तेदार की भी तलाश कर रही है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह जमात-ए-इस्लामी-हिंद से जुड़ा हुआ है और इस रिश्तेदार का बेटा भी है, जो छात्र इस्लामिक संगठन (Student Islamic Organization) का सदस्य है। खबरों के मुताबिक, इस पिता-पुत्र की जोड़ी ने हीर खान को कट्टरपंथी बना दिया था और उसे हिंदुओं, सरकार और भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाले इस अभियान के लिए भड़काया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सऊदी अरब में रहने वाले हीर खान के एक अन्य सहयोगी की तलाश में भी है। वह कथित तौर पर इस घटिया मानसिकता वाली नफरती यूटूबर के लिए धन की व्यवस्था कर रहा था ताकि वह उससे इस तरह का घृणा-अभियान चलवा सके।

अभी तक के जाँच में यह भी पता चला है कि इस्लामिस्ट यूट्यूबर हीर खान सऊदी अरब के कुछ युवाओं के संपर्क में होने के अलावा, व्हाट्सएप पर दो पाकिस्तानी युवकों के साथ नियमित संपर्क में थी। वह हैदराबाद, कानपुर, दिल्ली के कुछ युवाओं के साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्रा और मौलाना के साथ भी नियमित रूप से बातचीत करती रहती थी।

पिछले रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि पिछले दो वर्षों में, हीर खान ने देश भर में आयोजित कई डिबेट, विरोध प्रदर्शनों और भारत विरोधी अभियानों में भाग ले चुकी थी। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और खुफिया एजेंसी जिसने हिरासत में भेजे जाने से पहले यूट्यूबर से पूछताछ की थी, ने यह भी खुलासा किया कि हीर जैश प्रमुख आतंकी मसूद अजहर के वीडियो से प्रेरित होने के बाद सोशल मीडिया पर नफरत और जहर फैलाने में लिप्त हो गई थी।

गौरतलब है कि 23 अगस्त को यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर यह इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया था और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया था। सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रोश के बाद आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की थी। जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाद में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और अब उसे गिरफ्तार कर लिया था।

मौत से पहले गूगल पर प्रॉपर्टी सर्च कर रहे थे सुशांत, मुंबई पुलिस का दावा गलत: रिपोर्ट्स

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर मुंबई पुलिस कमिश्नर ने दावा किया था कि उन्होंने मौत से पहले
‘पेनलेस डेथ’, सिज़ोफ्रेनिया’ और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसे शब्दों को गूगल पर सर्च किया था। लेकिन अब इस मामले में जो नई सूचनाएँ आ रही हैं वो मुंबई पुलिस कमिश्नर द्वारा किए गए दावों से बिल्कुल विपरीत है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय अभिनेता ने मौत से पहले हिमाचल प्रदेश, केरल और कूर्ग में संपत्ति और फार्म सर्च किया था। सीबीआई द्वारा सुशांत सिंह राजपूत के लैपटॉप की जाँच से कथित तौर पर इंटरनेट पर उनकी गतिविधियों का पता चला है।

कथित तौर पर, अभिनेता ऑर्गेनिक खेती करना चाहते थे और इन तीन राज्यों में खेत और रहने के लिए जगह की तलाश कर रहे थे। दिलचस्प बात ये है कि रिया ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान रिया इस बात का खुलासा किया था कि सुशांत किस तरह से कूर्ग शिफ्ट होना चाहते हैं और उसी के बारे में सोचते थे।

इससे पहले, सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने भी उल्लेख किया था कि अभिनेता फिल्मों को छोड़कर कूर्ग में एक किसान के रूप में बसना चाहते थे। अभिनेता के पिता ने खुलासा किया था कि सुशांत ने इस बारे में अपने करीबी दोस्त महेश शेट्टी से बात की थी। कथित तौर पर, शेट्टी भी सुशांत के साथ कृषि गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार थे।

हालाँकि केके सिंह ने यह भी बताया था कि उनके बेटे ने रिया चक्रवर्ती द्वारा आपत्ति जताने के बाद इस योजना को रद्द कर दिया था। रिया ने सुशांत को धमकाया भी था कि वह उसकी बीमारी के बारे में सबको बता देगी।

गौरतलब है कि ताजा खुलासे से मुंबई पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों का खंडन होता है। सिंह ने यह दावा करते हुए लोगों को गुमराह किया था कि सुशांत ने ‘पेनलेस डेथ’, ‘सिज़ोफ्रेनिया’ और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसे शब्दों को मौत से पहले गूगल किया था।

मुंबई पुलिस प्रमुख ने दावा किया था कि दिवंगत अभिनेता बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे और इसके लिए वे दवाइयाँ ले रहे थे। मुंबई पुलिस प्रमुख ने यह भी कहा था कि पुलिस उन सभी मामलों की जाँच कर रही है, जिसके कारण सुशांत की मृत्यु हुई है।

मृतक अभिनेता के खिलाफ इस तरह के दावे करके मुंबई पुलिस ने यह साबित करने का प्रयास किया था कि सुशांत सिंह राजपूत दिमागी रूप से पीड़ित थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की। वहीं अब टाइम्स नाउ की रिपोर्ट मुंबई पुलिस द्वारा किए गए दावों के बिल्कुल विपरीत है। इस नए खुलासे के बाद मुंबई पुलिस की जाँच पर सवाल उठाए जा रहे है। लोगों का कहना है मुंबई पुलिस ने बिना जाँच पड़ताल किए इस मामले को ‘अवसाद’ और ‘आत्महत्या’ करार देने में जल्दबाजी की।

सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस की जाँच को शक के निगाह से देखा जा रहा है। इससे पहले एक और चौंकाने वाले खुलासे में यह बताया गया था कि सुशांत की मौत के तुरंत बाद उनके बॉडी की फ़ोटो इंटरनेट पर इसलिए वायरल की गई थी ताकि लोगों को इस बात का विश्वास दिलाया जा सके कि उन्होंने सच में आत्महत्या कर ली थी।

‘बेगम जान’ के प्रसारण पर असम पुलिस ने लगाई रोक, ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का हिंदू संगठनों ने लगाया था आरोप

असम पुलिस ने ‘बेगम जान’ नामक टीवी सीरियल के प्रसारण पर 2 महीने के लिए प्रतिबन्ध लगाने का आदेश दिया है। ये शो जुलाई 2020 से ही ‘रंगोली टीवी’ पर प्रसारित हो रहा था और काफी विवादों में भी रहा था। असम के टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘बेगम जान’ को लेकर हिन्दुओं में भारी रोष था। हिन्दू संगठनों का आरोप था कि ये शो ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा दे रहा है, इसीलिए इस पर रोक लगनी चाहिए।

असम पुलिस ने केबल टेलीविजन रेगुलेशन एक्ट, 1995 के तहत किसी समुदाय की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में इसके प्रसारण को प्रतिबंधित किया है। गुणजीत अधिकारी और ऑल असम ब्राह्मण यूथ काउंसिल, यूनाइटेड ट्रस्ट ऑफ असम व हिन्दू जागरण मंच ने इस शो को ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

असमिया टीवी शो ‘बेगम जान’ में मुख्य भूमिका निभा रहीं प्रीति कोंगना ने दावा किया कि ये एक ऐसे परेशान हिन्दू महिला की कहानी है, जिसकी मदद के लिए संप्रदाय विशेष का एक युवक आगे आता है। ‘रंगोली टीवी’ के संचालन और प्रबंधन को देखने वाले कम्पनी एएम मीडिया के चेयरमैन और एमडी संजीव नारायण ने ‘लव जिहाद’ वाली बात नकारते हुए कहा कि शो में एक हिन्दू महिला किरदार और एक संप्रदाय विशेष का किरदार मुख्य भूमिका में है, इसीलिए ये बातें की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि अपने राजनितिक एजेंडे के लिए लोग ऐसा आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट उन्हें राहत देती है तो ‘बेगम जान’ का प्रसारण फिर से शुरू हो जाएगा। प्रीति ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि इस शो में अभिनय करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर बलात्कार और जान से मार डालने की धमकियों के साथ-साथ गाली दी जा रही है। वहीं शो के कंटेंट को लेकर सिविल सोसायटी, खासकर हिन्दू संगठन विरोध कर रहे हैं।

असम के तेजपुर सदर थाना को भेजे गए एक पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस शो के माध्यम से हिन्दू धर्म के साथ-साथ असमिया संस्कृति को भी अपमानजनक ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। पत्र में लिखा गया है कि ‘लव जिहाद’ एक ‘त्रासदी’ है, जिसे इस शो में वैध बना कर इसे बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। अंदेशा जताया गया है कि सामाजिक तनाव पैदा करने के लिए टीवी शो के निर्माताओं को इसके लिए फंडिंग मिली थी।

पत्र में माँग की गई है कि शो के निर्माता, निर्देशक और लेखक के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इसे प्रतिबंधित करते हुए जाँच शुरू की जाए। हिन्दू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष मृणाल कुमार लश्कर ने बताया कि इस शो में ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि असम में पहले से ही ‘लव जिहाद’ के मामले आ रहे हैं, जो इस शो से बाद से बढ़ सकते हैं। जुलाई में भी शो के बॉयकॉट के लिए अभियान चला था।

असम पुलिस ने बताया है कि एक जिलास्तरीय मॉनिटरिंग कमिटी के समक्ष इस शो से सम्बंधित शिकायतों को रखा गया, जहाँ बड़े बहुमत से इसे प्रतिबंधित किए जाने का फैसला लिया गया, क्योंकि इससे सामाजिक ताना-बाना पर असर पड़ रहा था। साथ ही निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया गया है। गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर एमपी गुप्ता ने कहा कि पुलिस उन कार्यक्रमों के प्रसारण को रोक सकती है, जो घृणा या अशांति फैलाते हों।

रिया के व्हाट्सएप चैट से दो ड्रग डीलरों तक पहुँची NCB, हिरासत में लेकर पूछताछ

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मुंबई के अंधेरी इलाके से मारिजुआना बेचने के आरोप में दो ड्रग डीलरों को हिरासत में लिया है। इनसे पूछताछ की जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में रिया के व्हाट्सएप चैट से ड्रग एंगल सामने आया था। इसके बाद एनसीबी ने इस मामले की पड़ताल शुरू की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिरासत में लिए गए दोनों लोग करीब 5,000 रुपए प्रति ग्राम की दर से मारिजुआना बेचते थे। वे कथित तौर पर बॉलीवुड कलाकारों को इसकी सप्लाई करते थे। लॉकडाउन के दौरान कूरियन के जरिए यूरोप और अमेरिका से ड्रग्स का इम्पोर्ट करते थे।

एक अधिकारी ने बताया, “ड्रग्स सप्लायर को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। हम उनसे पूछताछ कर यह जानेंगे कि वे किसे ड्रग्स की सप्लाई करते थे और इसमें रिया की भूमिका क्या थी।”

गौरतलब है कि सुशांत की मौत के मामले में ड्रग एंगल तब सामने आया था जब ईडी ने रिया चक्रवर्ती के डिलीट किए हुए व्हाट्सएप चैट को बरामद किया था, जिसमें वे ड्रग्स को खरीदने के लिए अपने परिचितों से सलाह-मशविरा कर रही थी। कथित तौर पर रिया के मोबाइल फ़ोन से भेजे गए अनेको मैसेज के जरिए यह बात सामने आई थी कि रिया अपने परिचितों से एमडीएमए, मारिजुआना जैसे ड्रग्स और उसके इस्तेमाल के बारे में चर्चा कर रही थी। उन चैट में ड्रग डीलर गौरव का नाम भी सामने आया था।

चैट के जरिए अभिनेता के मौत के मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद ईडी ने एनसीबी को पत्र लिख इसकी सूचना दी थी। जिसके बाद एनसीबी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए केस दर्ज किया और जाँच शुरू की। बता दे ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही है।

सुशांत की कथित हत्या के मामले की जाँच कर रही सीबीआई मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री के साथ ड्रग डीलरों के संबंध की जाँच भी कर सकती है।

ऑपइंडिया की खबर का असर: बच्ची के अपहरण और इस्लामी धर्मान्तरण पर एक्शन में NCPCR

बिहार के मधुबनी स्थित हरलाखी थानांतर्गत नरहरियाँ गाँव में एक बच्ची के अपहरण व धर्मान्तरण का मामला सामने आया था, जिसका ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने संज्ञान लिया है। ऑपइंडिया ने पीड़ित पक्ष से बात कर इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी। इसके आधार पर NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी कि इस मामले में आयोग ने संज्ञान लिया है और कार्रवाई की जा रही है।

प्रियंक ने सोशल मीडिया पर ऑपइंडिया की खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने मधुबनी के पुलिस अधीक्षक से बात कर के इस मामले में आवश्यक निर्देश दिए हैं। साथ ही आश्वासन दिया कि NCPCR इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखते हुए इसकी निगरानी करेगा। ऑपइंडिया ने नरहरियाँ में 14 साल की बच्ची का साबिर द्वारा अपहरण और जबरन इस्लामी धर्मान्तरण के आरोपों पर ख़बर प्रकाशित की थी। साबिर चार बच्चों का बाप बताया जाता है।

स्थानीय पंचायत समिति के सदस्य विश्वेश्वर महतो ने बताया कि अब पुलिस-प्रशासन इस मामले में पीड़ितों का पूरा सहयोग कर रहा है। साथ ही उन्होंने ये भी जानकारी दी कि डीएसपी ने घटनास्थल पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की छानबीन की।

ऑपइंडिया ने इस मामले में गायब हुई लड़की के भाई से बात की थी। उन्होंने बताया था कि 20 अगस्त 2020 को उनकी बहन शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। इसके बाद वह लापता हो गई। गाँव भर में उसे ढूँढा गया तो मालूम चला कि गाँव के ही संप्रदाय विशेष के एक युवक ने उसका अपहरण कर लिया है।

शिकायत में लड़की के पिता ने नहरनियाँ गाँव के ही जब्बार के बेटे साबिर उर्फ बबलू पर बेटी को अगवा करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा मो. पप्पू, मो. हदीस के बेटे, मो. आशिक, जब्बार की पत्नी और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के ख़िलाफ़ भी शिकायत की गई है। लड़की के पिता ने बताया था कि जब वह अपनी बेटी को ढूँढने आरोपित के घर गए तो उन लोगों ने जवाब दिया कि तुम्हारी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने ले गए हैं।

शिकायत के अनुसार, लड़की के पिता से कहा गया, “तुमको जो ताकत लगाना है लगाओ। हमने तैयारी कर ली है। तुम्हारी लड़की का धर्मांतरण कर देंगे। तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हम सबका कुछ कर सको। मेरे घर से चले जाओ नहीं तो मारकर फेंक देंगे।”

हमने इस मामले में कुछ ग्रामीणों से भी बात की थी। उनका कहना था कि गॉंव संप्रदाय विशेष बहुल है और पहले भी इस तरह की घटना हो चुकी है। ग्रामीणों ने लड़की को अगवा कर नेपाल ले जाने की आशंका जताई है। यह गॉंव नेपाल की सीमा से सटा है।

साथ ही यह बात भी सामने आई थी कि स्थानीय जदयू विधायक सुधांशु शेखर के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। हालॉंकि अब पुलिस को लेकर ग्रामीणों की शिकायत दूर हो चुकी है। उनका कहना है कि दो लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।

‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर CM योगी सख्त, पुलिस को एक्शन प्लान बनाने के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ की बढ़ती घटनाओं के बीच सख्त हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को इस मामले में कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस से कहा है कि एक कार्ययोजना बना कर ऐसी घटनाओं को चिह्नित किया जाए और फिर कार्रवाई की जाए। लड़कियों को धोखे में डाल कर उन्हें प्रताड़ित किए जाने वाली घटनाओं को रोकने के लिए योगी सरकार ने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं।

निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में पुलिस त्वरित कार्रवाई करे। कानपुर में हाल ही में ‘लव जिहाद’ के 5 मामले सामने आए थे, जिसके बाद ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन ने कमर कस ली है। कानपुर की एक पीड़िता का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। मेरठ में भी एक की हत्या सहित ‘लव जिहाद’ के 5 मामले सामने आए थे, जिन पर योगी सरकार नजर बनाए हुए है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि ‘लव जिहाद’ से न सिर्फ़ सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मामला भी इससे जुड़ा हुआ है। मजहब की आड़ में महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए सरकार सतर्क है। सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने भी ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में नए क़ानून की भी आवश्यकता होगी तो विचार किया जाएगा।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने इसे सामाजिक मुद्दा करार देते हुए कहा कि इसकी रोकथाम के लिए सभी को इसे गंभीरता से लेना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में हमें और सख्त होना होगा। चूँकि अदालतों में ऐसे कई मामले लंबित हैं, अवस्थी ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से भी ऐसे मामलों के निपटारे की सम्भावना जताई।

उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे मामलों में आरोपितों को जमानत बिलकुल भी नहीं मिलनी चाहिए। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस मामले में नए क़ानून की बजाए पुराना क़ानून ही पर्याप्त है, बस उसे ठीक से लागू किए जाने की ज़रूरत है। उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के मामलों पर हिन्दू संगठनों ने भी आपत्ति जताई है और कई इलाक़ों में तो इससे सांप्रदायिक तनाव भी कायम हुआ है, जिसने सरकार के कान खड़े कर दिए।

बता दें कि सिर्फ पिछले 2 महीने में कानपुर से 5 लड़कियाँ घर से भागीं। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं, उनके डिटेल्स खँगालने पर पता चलता है कि सभी दूसरे समुदाय से थे। स्थानीय लोगों ने बताया था कि आरोपित युवकों के कई लड़कियों से संबंध होते हैं। इसी तरह लखीमपुर खेरी से भी आया ‘लव जिहाद’ का मामला चर्चा में है। इस मामले में एनएसए लगाया गया है।

‘UPSC जिहाद’: सुप्रीम कोर्ट ने HC के स्टे से पहले सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट पर रोक लगाने से किया था इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 अगस्त 2020) को ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर आने वाले सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुरेश चव्हाणके ने दावा किया था कि इस कार्यक्रम के जरिए वो ‘UPSC जिहाद’ की पोल खोलते हुए बताएँगे कि कैसे सिविल सेवाओं में संप्रदाय विशेष को एक एजेंडे के तहत घुसाया जा रहा है। बाद में हाई कोर्ट ने एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसफ की पीठ ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर शाम को प्रसारित होने वाले शो ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत को विचारों के किसी प्रकाशन या प्रसारण सम्बन्धी चीजों पर रोक लगाने से पहले सतर्क रहना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्तर पर हम 49 सेकंड के अपुष्ट ट्रांसक्रिप्ट के आधार पर कार्यक्रम के प्रसारण से पहले उसे प्रतिबंधित किए जाने का फैसला देने से बच रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि विचारों के प्रकाशन या प्रसारण के सम्बन्ध में रोक लगाने वाला निर्णय देने से पहले कोर्ट को सतर्कता बरतनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का ये निर्णय हाई कोर्ट द्वारा कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने के कुछ ही घंटों पहले आया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के उक्त एपिसोड पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला देते समय समाजिक समरसता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखने की जिम्मेदारी की बात की। सुप्रीम कोर्ट में फिरोज इक़बाल खान ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस शो से समाज में विभाजन होगा और इसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया है।

वहीं हाई कोर्ट में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने याचिका दायर की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और ‘सुदर्शन न्यूज़’ को नोटिस भी भेजा। जामिया वालों ने इस कार्यक्रम पर संप्रदाय विशेष के प्रति घृणा फैलाने का आरोप लगाया था। सुरेश चव्हाणके ने ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के खिलाफ अभियान शुरू किया है, जिसमें कई सबूतों के आधार पर सच दिखाने का दावा किया जा रहा है।

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?