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‘UPSC जिहाद’: सुप्रीम कोर्ट ने HC के स्टे से पहले सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट पर रोक लगाने से किया था इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 अगस्त 2020) को ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर आने वाले सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुरेश चव्हाणके ने दावा किया था कि इस कार्यक्रम के जरिए वो ‘UPSC जिहाद’ की पोल खोलते हुए बताएँगे कि कैसे सिविल सेवाओं में संप्रदाय विशेष को एक एजेंडे के तहत घुसाया जा रहा है। बाद में हाई कोर्ट ने एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसफ की पीठ ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर शाम को प्रसारित होने वाले शो ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत को विचारों के किसी प्रकाशन या प्रसारण सम्बन्धी चीजों पर रोक लगाने से पहले सतर्क रहना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्तर पर हम 49 सेकंड के अपुष्ट ट्रांसक्रिप्ट के आधार पर कार्यक्रम के प्रसारण से पहले उसे प्रतिबंधित किए जाने का फैसला देने से बच रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि विचारों के प्रकाशन या प्रसारण के सम्बन्ध में रोक लगाने वाला निर्णय देने से पहले कोर्ट को सतर्कता बरतनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का ये निर्णय हाई कोर्ट द्वारा कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने के कुछ ही घंटों पहले आया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के उक्त एपिसोड पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला देते समय समाजिक समरसता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखने की जिम्मेदारी की बात की। सुप्रीम कोर्ट में फिरोज इक़बाल खान ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस शो से समाज में विभाजन होगा और इसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया है।

वहीं हाई कोर्ट में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने याचिका दायर की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और ‘सुदर्शन न्यूज़’ को नोटिस भी भेजा। जामिया वालों ने इस कार्यक्रम पर संप्रदाय विशेष के प्रति घृणा फैलाने का आरोप लगाया था। सुरेश चव्हाणके ने ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के खिलाफ अभियान शुरू किया है, जिसमें कई सबूतों के आधार पर सच दिखाने का दावा किया जा रहा है।

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?

‘अल्लाह हू अकबर’ के नारों के साथ भीड़ ने की हिंसा, पुलिस पर पत्थरबाजी और आगजनी के बाद स्वीडन में दहशत

स्वीडन में सैकड़ों की संख्या में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने सड़क पर उतर कर हिंसा की। ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारों के साथ भीड़ ने पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की। टायर जलाकर आगजनी की और सड़क को जाम करने की कोशिश की। घटना दक्षिणी स्वीडन के माल्मो शहर की है। संप्रदाय विशेष की भीड़ ने स्वीडन के धुर दक्षिणपंथियों की ओर से कुरान बर्निंग रैली आयोजित करने के विरोध में दंगों को अंजाम दिया।

रात के समय अचानक से जुटे दंगाइयों ने मजहबी नारों के साथ हिंसा शुरू कर दी। उनकी संख्या 300 के करीब बताई जा रही है। जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। बता दें कि हाल ही में फार-राइट डेनिश पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद धुर दक्षिणपंथियों ने कुरान जला कर प्रदर्शन किया था।

माल्मो पुलिस का कहना है कि वो अभी भी दंगों को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं। टायर जलाने के बाद पूरे क्षेत्र में धुआँ फ़ैल गया, जो काफी ऊपर तक गया और दूर से ही दिखाई दे रहा था। पुलिस के प्रवक्ता का कहना है कि फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में नहीं है लेकिन इसके लिए प्रयास जारी है। पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि 1 दिन पहले कुरान जलाए जाए के कारण ही ये हिंसा हुई है।

जहाँ कुरान जलाया गया, ठीक उसी जगह से हिंसा भी शुरू हुई। इससे पहले ‘हार्ड लाइन’ के नेता रासमस पालदन को स्वीडन के माल्मो में बैठक में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। उन्हें स्वीडन की सीमा से ही गिरफ्तार किया गया।

वे अक्सर इस्लाम और संप्रदाय विशेष को लेकर दिए गए विवादों के कारण चर्चा में रहते हैं। उन पर 2 साल के लिए स्वीडन में घुसने पर प्रतिबंध लगा था और सीमा पर अंदर घुसने का प्रयास करते वक्त उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि वो क़ानून तोड़ने आ रहे थे, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। साथ ही बताया गया है कि उनका व्यवहार समाज के लिए ख़तरा हो सकता है।

उनके रैली में नहीं पहुँचने के बाद कुरान की प्रति जलाई गई। इसके बाद कट्टरवाद और घृणा फैलाने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दक्षिणपंथी नेता ने कहा कि उन्हें 2 साल के लिए देश-निकाला दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ हत्यारों और बलात्कारियों का स्वागत किया जाता है। स्वीडन में घुसपैठियों की संख्या बढ़ने के कारण लोगों में गुस्सा है।

इससे पहले नवम्बर 2019 में नार्वे में इस्लाम के ख़िलाफ़ हुई रैली में एक व्यक्ति ने कुरान जला दी थी, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया था। प्रदर्शन में लगे एक समूह के नेतृत्व कर रहे लार्स थोर्सन ने पवित्र कुरान की पुस्तक में आग लगा दी थी। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन कर रहे गुट और इस्लाम समर्थक गुट के बीच जम कर झड़प होने के बाद हालात बिगड़ गए थे।  

IMDb पर 1.1 रेटिंग, ट्रेलर को YouTube पर 1.2 करोड़ डिस्लाइक: महेश भट्ट की ‘सड़क 2’ को समीक्षकों ने बताया असहनीय

महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘सड़क 2’ के ट्रेलर के बाद अब फिल्म का भी बुरा हश्र हो रहा है। संजय दत्त और आलिया भट्ट अभिनीत इस फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर 1.2 करोड़ डिस्लाइक्स मिल चुके हैं। IMDb पर भी इसकी स्थिति अच्छी नहीं है। इस पर फिल्म को 10 में से मात्र 1.1 रेटिंग मिला है। अब तक करीब 10,000 लोग इसे रेट कर चुके हैं। समीक्षकों ने भी इसे पूरी तरह नकार दिया है।

बता दें कि ‘सड़क 2’ को हॉटस्टार पर शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को शाम 7:30 बजे रिलीज किया गया। वरिष्ठ फिल्म समीक्षक तरन आदर्श ने ‘सड़क 2’ को असहनीय करार दिया है और कहा कि पहले भाग से इसकी तुलना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका प्लॉट काफी धीमा है, इसकी स्क्रीनराइटिंग सुस्त और निर्जीव है। साथ ही इसका म्यूजिक भी एकदम पकाऊ है।

तरन आदर्श ने इसे ‘प्रतिभाओं की बर्बादी’ करार दिया और कहा कि ये एक ब्रांड को बेकार रूप देने के बराबर है। बता दें कि ‘सड़क 2’ में पूजा भट्ट और आदित्य रॉय कपूर ने भी अभिनय किया है। महेश भट्ट ने इससे पहले ‘कारतूस’ का निर्देशन किया था, जो मई 1999 में रिलीज हुई थी। ‘सड़क 2’ से उन्होंने 21 साल बाद निर्देशन जगत में कदम रखा है, लेकिन नेपोटिज्म विवाद के बीच उनके फिल्म की नैया डूब गई।

महेश भट्ट लगातार विवादों में हैं क्योंकि रिया चक्रवर्ती के साथ उनकी नजदीकियों के कारण लोग उन पर निशाना साध रहे हैं। रिया चक्रवर्ती के साथ वायरल एक वीडियो में वो सुशांत को डिप्रेस्ड कहते नज़र आए थे। चूँकि आरोप है कि सुशांत सिंह राजपूत को जबरदस्ती अवसादग्रसित साबित किया जा रहा है, इसीलिए महेश भट्ट और दीपिका पादुकोण निशाने पर हैं, क्योंकि पहली बार इन दोनों ने ही सुशांत को अवसादग्रसित कहा था।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही लोग फिल्म निर्देशक महेश भट्ट और उनकी बेटी आलिया भट्ट को सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल करते नजर आ रहे हैं। सुशांत के चाहने वाले इन पर नेपोटिज्म का आरोप लगा था। सड़क 2 के लॉन्च के साथ ही लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। सोशल मीडिया यूज़र्स ने ट्विटर पर #Sadak2dislike के साथ इस पर अपना गुस्सा निकाला था।

संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर अभिनीत फिल्म “नकली साधु” के साथ नायक की मुठभेड़ के चारों ओर घूमती है। इस फिल्म में आलिया भट्ट का किरदार एक ऐसी महिला का है, जो एक ‘फेक बाबा’ से पंगा लेती है। दिखाया गया है कि दुनिया के सामने अच्छा बना रहे वाला गुरु कितना बड़ा अपराधी है और उसका असली चेहरा कुछ और है। ये आलिया बनाम एक आश्रम चलाने वाले बाबा की कहानी है। संजय दत्त का किरदार बाबा को ‘एक्सपोज’ करने में आलिया की मदद करता है।

मुंबई पुलिस का व्यवहार संदेहास्पद, उसने जाँच का मजाक बना दिया: हरीश साल्वे को सुशांत की हत्या का अंदेशा

देश के जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच में मुंबई पुलिस के व्यवहार को संदेहास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का पूरी तरह मजाक बना कर रख दिया गया है। इसके लिए अगर कोई एक संस्था जिम्मेदार है तो वो है मुंबई पुलिस।

साल्वे ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आखिर मुंबई पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक भी क्यों नहीं दर्ज की? साथ ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के समय का ऑटोप्सी रिपोर्ट में जिक्र न होने को भी अजीब बताया। भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने मुंबई पुलिस पर ये टिप्पणी ‘टाइम्स नाउ’ के नविका कुमार से बातचीत में की।

उन्होंने ‘प्राइवेसी पर आक्रमण’ वाले आरोप को भी नकार दिया। साल्वे ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में हो रही जाँच ‘इन्वेजन ऑफ प्राइवेसी’ होती है, इसीलिए ये आरोप सही नहीं है। साथ ही उन्होंने जाँच एजेंसी सीबीआई पर भरोसा जताते हुए कहा कि उसके अधिकारी मूर्ख नहीं हैं और वो अपने तरीके से रिया चक्रवर्ती से पूछताछ करेंगे। उन्होंने कहा कि अब भारत में ‘चलता है’ वाला व्यवहार बहुत हो गया। उन्होंने अंदेशा जताया कि सुशांत मामले में हत्या को छिपाने की कोशिश हो सकती है।

उधर, सीबीआई ने भी रिया चक्रवर्ती से शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को 10 घटों तक पूछताछ की। सांताक्रुज स्थित डीआरडीओ गेस्ट हाउस में आरोपितों से पूछताछ कर रही सीबीआई के पास रिया सुबह 10:40 पर पहुँची। इसके बाद रात के करीब 9 बजे वहाँ से निकलीं। उनसे आज भी पूछताछ जारी रहेगी। सीबीआई ने मुंबई पुलिस की जाँच में कई झोल निकाले हैं।

सीबीआई ने पाया है कि मुंबई पुलिस ने कई ऐसे लोगों को भी समन भेज दिया, जिनकी इस मामले में कोई प्रासंगिकता ही नहीं थी। इससे समय भी नष्ट हुआ और जाँच भी सही दिशा में नहीं गई। बॉलीवुड के कई ऐसे लोगों से पूछताछ की गई, जिसकी कोई ज़रूरत नहीं थी। उधर प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स ब्यूरो भी इस मामले की जाँच में लगी हुई है। ड्रग्स सम्बंधित कई चैट्स वायरल होने के बाद इस एंगल से भी जाँच हो रही है।

सुशांत के कुक रहे अशोक ने भी ‘आजतक’ से बातचीत में खुलासा करते हुए कहा कि सुशांत सिंह राजपूत को डिप्रेशन की परिस्थिति में रखा गया था। उसने कहा कि अगर किसी को लगातार एहसास दिलाया जाएगा कि वो बीमार है, तो वो अच्छा महसूस नहीं ही करेगा। उसने कहा कि रिया ने सुशांत को ‘दवाइयों’ पर रखा हुआ था। उन्होंने कहा कि वो लम्बे समय से सुशांत के घर का काम देख रहे थे, लेकिन रिया ने ही उन्हें निकाला।

रिया के साथ साक्षात्कार में राजदीप सरदेसाई ने भी सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया था। इसे ऐसे पेश किया मानो मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है, जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। लोगों ने इसे ‘पीआर स्टंट’ करार दिया है।

आज रिया को ‘पीड़ित’ दिखाने वाले राजदीप के लिए कभी दाऊद इब्राहिम भी था ‘विक्टिम’

फिलहाल रिया चकवर्ती का ‘प्रायोजित साक्षात्कार’ करने को लेकर राजदीप सरदेसाई विवादों में हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया मुख्य आरोपित हैं। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब राजदीप ने अपने पाखंड से आरोपित का इमेज गढ़ने की कोशिश की है।

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए भी वे सालों पहले ऐसी ही दरियादिली दिखा चुके हैं। यह वाकया 1993 का है, जब मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 1,400 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की शह पर दाऊद ने इसे अंजाम दिया था। लेकिन उस वक्त टाइम्स ऑफ इंडिया में काम करने वाले राजदीप ने एक लेख लिखकर उसे ऐसे पेश किया जैसे वह ही पीड़ित हो। ठीक वैसे ही जैसा अभी उन्होंने रिया चकवर्ती के मामले में करने की कोशिश की है।

रिया के साथ साक्षात्कार में राजदीप ने सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया। इसे ऐसे पेश किया मानो मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है, जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था।

सुशांत पर मानिसक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है। इतना ही नहीं इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने रिया को अपनी कहानी सुनाने का भरपूर मौका देते हुए उन सवालों का जिक्र तक नहीं किया जिनके कारण रिया कठघरे में हैं।

इसी तरह 1993 के बम धमाकों के बाद राजदीप ने अपने लेख में लिखा था। जिस पर पूर्व पत्रकार एसजी मूर्ति ने इस मुद्दे को चार साल पहले उठाया था और बताया था साल 1993 में राजदीप ने कैसे अपने लेख में दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताकर उसे बचाने का प्रयास किया था। लेकिन राजदीप ने तब प्रतिक्रिया के रूप में एक वीडियो बना दी और कई कुतर्क करते हुए दोबारा अपने उस दावे को सही ठहराने की कोशिश की, जहाँ उन्होंने दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताया था। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि जिस दोषपूर्ण मानदंडों पर उन्होंने उसे राष्ट्रवादी कहा, उसकी पैरोकारी शिवसेना अध्यक्ष बाला साहब ठाकरे भी किया करते थे।

हालाँकि, यदि राजदीप के उस आर्टिकल पर नजर डाली जाए तो ये मालूम चलता है कि वाकई राजदीप ने दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा था। बल्कि वो आर्टिकल तो पूर्णत: इस बात पर था कि चूँकि भारत में संप्रदाय विशेष को दबाया जाता है, इसलिए दाऊद ने संप्रदाय विशेष से होने के नाते यह ब्लास्ट करवाए।

इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि भले ही राजदीप ने तब दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा, लेकिन अपने कुतर्कों से उसे पीड़ित दिखाने की कोशिश जरूर की और उसको साल दर साल जस्टिफाई करते रहे। साल 2015 में उन्होंने हिंदुस्तान के एक लेख में फिर अपने पुराने प्रश्न का जिक्र किया कि आखिर साल 1992 में भारत-पाक मैच में तिरंगा लहराते हुए, भारतीय टीम को तोहफे देने वाला दुबई का स्मगलर 6 महीने में कराची का आतंकी कैसे बन गया? क्या उसके लिए बाबरी मस्जिद एक टर्निंग प्वाइंट था?

यहाँ बता दें कि राजदीप सरदेसाई के लिए पत्रकारिता का मतलब प्रोपेगेंडा शुरुआत से ही रहा है। उनके लिए गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीनचिट मायने नहीं रखती, लेकिन दूसरी ओर चिदंबरम से माफ़ी माँगते उन्हें देर नहीं लगती। याद दिला दें कि सीएनएन आईबीएन में रहते राजदीप पर कैश फॉर वोट की स्टिंग की सीडी भी डकारने के आरोप लगे थे। इसके अलावा राडिया केस में भी राजदीप का नाम उछल चुका है।

‘शशि थरूर नेता नहीं, वह गेस्ट आर्टिस्ट बनकर कॉन्ग्रेस में आए थे और आज भी गेस्ट आर्टिस्ट ही हैं’

सोनिया गॉंधी के एक बार फिर अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के बावजूद पार्टी का आंतरिक कलह थमता नहीं दिख रहा। पार्टी नेता एक-दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश ने तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर पर निशाना साधा है।

के सुरेश ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2020) को कहा, “शशि थरूर नेता नहीं हैं। वे 2009 में कॉन्ग्रेस में गेस्ट आर्टिस्ट बनकर आए थे। आज भी वे गेस्ट आर्टिस्ट जैसे ही हैं। वे ग्लोबल सिटीजन हो सकते हैं। उनके पास काफी जानकारी है लेकिन उनका रवैया बताता है कि राजनीतिक रूप से वे अपरिपक्व हैं।”

इससे पहले थरूर ने ट्वीट कर कहा था, ‘‘मैं कॉन्ग्रेस में हाल की घटनाओं पर चार दिन से चुप था, क्योंकि जब एक बार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ने कह दिया कि यह अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है, तो हम सभी का कर्तव्य है कि हम साथ मिलकर पार्टी के हित में काम करें। मैं अपने सभी साथियों से इस सिद्धांत को बरकरार रखने और बहस को समाप्त करने का अनुरोध करता हूँ।’’

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस में तत्काल सांगठनिक बदलाव की माँग करते हुए 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था। बताया जाता है कि यह पत्र लिखने का फैसला एक डिनर में हुआ था जिसे थरूर ने पार्टी नेताओं के लिए आयोजित किया था। इस पत्र की टाइमिंग को लेकर राहुल गॉंधी ने भी सवाल उठाए थे।

राम कृष्ण के बाद एक और पत्रकार ने इंडिया टुडे की खोली पोल, राजदीप को बता दिया- दल्ला

आजतक की वेबसाइट में कार्यरत राम कृष्ण ने वामपंथी संपादकों की प्रताड़ना से तंग आकर पीएमओ से गुहार लगाई थी। इसके बाद कई लोग इस संस्थान में काम करने के अपने अनुभवों को लेकर सोशल मीडिया में लिख रहे हैं। इनमें से एक नाम राकेश कृष्णन्न सिम्हा का है। वर्तमान में न्यूजीलैंड में पत्रकारिता कर रहे सिम्हा का दावा है कि वे इंडिया टुडे में काम कर चुके हैं।

उन्होंने इंडिया टुडे और आजतक की स्वामित्व वाले लिविंग मीडिया ग्रुप की कार्यसंस्कृति की पोल खोलते हुए कई आरोप लगाए हैं।

राकेश ने ट्वीट कर दावा किया है कि उन्होंने इस संस्थान में 2 साल कॉपी एडिटर के तौर पर काम किया था। जब वह संस्थान से जुड़े थे तो वहाँ रैकेट शुरू हो गया था, जिसमें संपादक लेखक नहीं फिक्सर हो गए थे। खोजी पत्रकारों की स्टोरी मारी जाती थी ताकि सुमित मुखर्जी जैसे जज बच सकें। उनका दावा है कि उस समय कई संपादकों ने राजनेताओं को ब्लैकमेल करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।

अपने ट्वीट में उन्होंने जस्टिस मुखर्जी पर रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वे कॉल गर्ल्स में भी दिलचस्पी लेते थे। उन्हें ‘लेग पीस’ कहकर बुलाते थे। इतने के बावजूद, इंडिया टुडे को जब जस्टिस के ख़िलाफ़ सबूत मिले तो उसने सबूत सीबीआई को सौंपने की बजाए एक्सक्लूसिव स्टोरी के नाम पर पूरी कहानी को मार दिया।

राकेश ने इंडिया टुडे के चुनावी पोल को फर्जी करार देते हुए कहा है कि उन्हें इंडिया टुडे से जुड़े पोलिंग फर्म ने बताया था कि मनमुताबिक नतीजे दिखाने के लिए उन्हें पैसा दिया जाता है। उनका यह भी दावा है कि जब वे इंडिया टुडे से जुड़े तो उसका सर्कुलेशन सुनकर उन्हें गर्व होता था। संस्थान का कहना था कि उनका सर्कुलेशन 2.5 लाख से 4 लाख तक है। जबकि थॉम्पसन प्रेस से जुड़े उनके एक आंतरिक सूत्र ने इसकी हकीकत बताया कि यह 25 000 से ज्यादा नहीं है। ज्यादा से ज्यादा ये 40,000 पहुँचता है।

सिम्हा कहते हैं कि इंडिया टुडे में कॉपी एडिटर्स से ही एडिटर्स को झूठी चिट्ठियाँ लिखवाई जाती थी। दावा किया जाता था कि लाखों में मैग्जीन का वितरण है, जबकि वास्तविकता में पाठकों से उन्हें 5-6 पत्र ही मिला करते थे। कभी-कभी ये संख्या शून्य होती है। कई बार उन लोगों को यह भी लगता था कि इन 5-6 पत्रों में से 2-3 पत्र तो एक ही इंसान लिखता था। इसके अलावा वहाँ ऐसे संपादकों को काम पर रखा गया जो सरकार को प्रभावित कर सके ताकि कंपनी को एफएम और सैटेलाइट टीवी लाइसेंस मिले।

संस्थान के सर्वेक्षणों पर पत्रकार का कहना है कि वह सब दिखावा होता था। जो मुख्यमंत्री सबसे ज्यादा विज्ञापन दे, वही सबसे बेहतर मुख्यमंत्री होता था और उसका स्थान ही सबसे ऊपर रखा जाता था। राकेश कहते हैं कि वह इंडिया टुडे में इंदरजीत बधवार जैसे लोगों को पढ़कर बड़े हुए। लेकिन जैसे ही संस्थान में गए, उन्हें पता लगा कि वहाँ फिक्सर का राज है। वह कहते हैं कि उन्हें हैरानी नहीं है कि राजदीप को लिविंग मीडिया ने हायर किया, क्योंकि वैसे ही लोग उस संस्थान की जरूरत पूरा कर सकते हैं।

राजदीप पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि उनमें कोई नैतिकता नहीं है। वह कॉन्ग्रेस के चुनाव जीतने पर नाचते हैं। सोनिया गाँधी से इंटरव्यू पर सबसे मुश्किल सवाल के नाम पर उनकी कुकिंग के बारे में पूछते हैं। आगे रिया के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि सरदेसाई कोई पत्रकार नहीं, दल्ला हैं।

लिविंग मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने दावा किया है कि संस्थान का सच्चाई और न्याय से कोई लेना-देना नहीं है। वे सिर्फ हर कीमत पर नकदी चाहते हैं।

बता दें कि आज ऑपइंडिया ने आजतक के ही एक पत्रकार राम कृष्ण की आपबीती पर विस्तृत रिपोर्ट की थी। जिनके आरोपों के बाद इंडिया टुडे को लेकर यह मुद्दा गरमाया। राम कृष्ण का आरोप था कि उनके संपादक उन्हें विचारधारा अलग होने के कारण प्रताड़ित करते हैं और प्रमोशन अप्रेजल भी रोका हुआ है। उनका आरोप है कि जब लॉकडाउन के समय में आर्थिक संकट से जूझते हुए उन्होंने संस्थान से मदद की अपेक्षा की तो संपादक पाणिनि आनंद ने उनसे गाली-गलौच की। उन्हें जान से मारने की धमकी। जिसके कारण अब उन्होंने पीएमओ को पत्र लिखा है।

संदीप सिंह पर कॉन्ग्रेस का सेल्फ गोल: फोटो से BJP को घेरने की कोशिश, शिवसेना-सपा नेताओं संग भी तस्वीरें निकली

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को बीजेपी से जोड़ने की कॉन्ग्रेस ने एक नाकाम कोशिश की। कॉन्ग्रेस नेता सचिन सावंत ने एक तस्वीर जारी की। इसमें बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ संदीप सिंह नजर आ रहा है। सुशांत की मौत के बाद उनके घर सबसे पहले पहुॅंचने वालों में संदीप शामिल है। इस तस्वीर के बहाने कॉन्ग्रेस ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की।

सावंत ने जो तस्वीरें साझा की वह बॉयोपिक फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के एक कार्यक्रम की थी। सावंत ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख से सुशांत के मामले में बीजेपी की भूमिका की जॉंच की मॉंग की।

सावंत ने यह ट्वीट बीजेपी नेता राम कदम की मॉंग के जवाब में की। कदम ने उद्धव ठाकरे से बॉलीवुड में ड्रग नेक्सस की जॉंच की मॉंग की थी। कदम ने अपने पत्र में सुशांत के मामले में ड्रग माफिया का एंगल सामने आने का जिक्र करते हुए जॉंच की मॉंग की थी।

संदीप सिंह फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के निर्माता हैं। अब उनसे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई द्वारा ड्रग नेक्सस के एंगल में पूछताछ की जा रही है। कॉन्ग्रेस नेता सचिन सावंत ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संदीप सिंह द्वारा निर्मित फिल्म के पोस्टर के लॉन्च के लिए अपना बहुमूल्य समय देने के लिए चुना था। जिससे इस बात का पता चलता है कि फिल्म निर्माता और भाजपा के बीच संबंध हैं।

कॉन्ग्रेस नेता के अनुसार सिर्फ पोस्टर को लॉन्च करने के लिए महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फड़नवीस का संदीप के साथ ली गई तस्वीर यह साबित करने के लिए काफी है कि बीजेपी का संबंध सुशांत की दुर्भाग्यपूर्ण निधन से जुड़ा है।

हालाँकि इस फर्जी दावे के बाद कॉन्ग्रेस को खुद मुँह की खानी पड़ी। इस मामले में यह ध्यान रखना उचित है कि संदीप सिंह के साथ अकेले देवेन्द्र फडणवीस ने ही फ़ोटो नहीं खिंचवाई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई प्रमुख हस्तियों की फोटो भी निर्माता संदीप के साथ है। उद्धव ठाकरे के बड़े भाई, जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्नी स्मिता ठाकरे के साथ भी संदीप सिंह की तस्वीरें हैं। स्मिता को संदीप सिंह के साथ बालासाहेब ठाकरे पर एक फिल्म का निर्माण करना था।

संदीप सिंह (बाएँ से दूसरे) और स्मिता ठाकरे (दाएँ से दूसरे)

इसी तरह, सिंह को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ भी देखा गया है, जो समय-समय पर कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ खड़े नजर आते हैं।

सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ संदीप सिंह

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच में भगवा पार्टी को बदनाम करने के लिए भाजपा के साथ संदीप सिंह को जोड़ने के लिए एक बेहद ही तुच्छ प्रयास किया है। यह ध्यान देने योग्य है कि सिंह एक फिल्म निर्माता हैं। फ़िल्म निर्माता अक्सर काम के सिलसिले, फिल्मों की लॉन्च और इवेंट के दौरान राजनेताओं से मिलते रहते है।

भाजपा को बदनाम करने की जल्दबाजी में कॉन्ग्रेस पार्टी यह देखना भूल ही गई कि संदीप के साथ कई विपक्षी नेताओं के फोटो भी सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।

यह बात सबको पता है कि मौजूदा स्थिति में कॉन्ग्रेस पार्टी अपने अस्तित्व पर चल रहे संकट से परेशान है। कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी के मौजूदा कामकाज से नाखुश हैं। साथ ही पार्टी सदस्यों के बीच भी निराशाजनक माहौल बना हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो कॉन्ग्रेस समर्थक दिवंगत अभिनेता की कथित आत्महत्या के साथ बीजेपी को जोड़कर अपनी खंडित पार्टी को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हो।

हालाँकि कॉन्ग्रेस द्वारा की गई इस हरकत के कारन न सिर्फ बीजेपी को निशाना साधा जा रहा, बल्कि यह दिवंगत अभिनेता की मौत के मामले की जाँच को विफल करने का एक बड़ा प्रयास भी है।

‘नौकरशाही में समुदाय विशेष की घुसपैठ’ वाली सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट के प्रसारण पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज की ‘नौकरशाही में समुदाय विशेष की घुसपैठ’ वाली कथित रिपोर्ट के प्रसारण पर रोक लगा दी है। शुक्रवार 28 अगस्त 2020 को रात आठ बजे इसका प्रसारण होना था। जामिया के छात्रों ने इस पर रोक लगाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट समुदाय विशेष के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देती है।

जस्टिस नवीन चावला ने सुनवाई करते हुए इसके प्रसारण को रोकने लगाने के निर्देश दिए। जामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों की ओर से वकील शादान फरसाट ने याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने 25 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुदर्शन न्यूज संपादक सुरेश चव्हाणके के शो का प्रोमो देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चव्हाणके ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और समुदाय विशेष के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और मानहानि की है।

याचिका में कहा गया कि कथित तौर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता “समुदाय विशेष द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश” का प्रतिनिधित्व करती है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सुरेश चव्हाणके ने खुले तौर पर दावा किया है कि जामिया मिल्ल‌िया इस्लामिया के जिहादी या आतंकवादी जल्द ही कलेक्टर और सेक्रेटरी जैसे शक्तिशाली पदों पर आसीन होंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोमो प्रस्तावित प्रसारण केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड 1994 का उल्लंघन करता है।

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित समुदाय विशेष के अभ्यर्थियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है।

उन्होंने घोषणा की थी कि यह ‘नौकरशाही जिहाद’ और ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ चैनल का बड़ा अभियान होगा। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?”

बता दें इस विवादास्पद वीडियो के पोस्ट को विभिन्न पक्षों द्वारा आलोचना की गई थी। विशेष रूप से वामपंथियों और इस्लामवादियों ने इसे निशाना बनाते हुए यह आरोप लगाया कि सुरेश चव्हाणके समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। पीएस एसोसिएशन और इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी इसकी निंदा की थी।

वहीं सुरेश चव्हाणके ने आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी सिविल में चुने गए कुछ श्रेणी के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि के बारे में है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कथित साजिश में आतंकी नेता जाकिर नाइक भी शामिल है। इस मामले पर आगे की सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

UP: माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी रईस कुरैशी के बूचड़खाना पर चला बुलडोजर

यूपी की राजधानी लखनऊ में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके परिवार की तमाम अवैध संपत्तियों को जमींदोज करने के बाद अब प्रशासन ने उसके करीबी रईस कुरैशी के ख़िलाफ़ मऊ में कार्रवाई की है।

मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलाया है। इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है। शुक्रवार को पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया।

एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, मऊ के डीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि मुख्तार अंसारी के खास गैंगस्टर रईस के एक बूचड़खाने को जिला प्रशासन ने बुलडोजर लगवाकर गिरवा दिया है। प्रशासन ने बताया कि यह बूचड़खाना ग्रीन जोन में आने वाली जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।

उधर, लखनऊ में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि इस अवैध बूचड़खाने के तार मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े थे जिसे स्थानीय प्रशासन ने गिरवा दिया है और वहाँ पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले लखनऊ प्रशासन ने गुरुवार (अगस्त 27, 2020) को माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया था।

इसके बाद खबरों में बताया गया था कि अवैध निर्माण को गिराने का खर्च भी यूपी सरकार मुख्तार अंसारी से ही वसूलेगी। अवैध आवासीय परिसर को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था।

बता दें, इन सबसे पूर्व यूपी पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस भी निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाया था।