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‘मजहब’ के नाम पर मुस्लिम लड़कों को जोड़ा, ब्यावर में खड़ा कर दिया रेप-धर्मांतरण गैंग: पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी है सरगना, पीड़िताओं से कहता था- डरो मत, इससे कुछ नहीं होगा

राजस्थान के बिजयनगर रेप कांड मामले में नए खुलासे हुए हैं। अभी तक जहाँ सिर्फ ये कहा जा रहा था कि कुछ मुस्लिम युवकों ने मिलकर हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए, उनका धर्मांतरण कराने के लिए अपनी गैंग बनाई तो अब पता चला है इस पूरे नेटवर्क के तार इलाके के पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी से जुड़े थे।

हकीम कुरैशी ने ही अपने साथ अलग-अलग मुस्लिम लड़कों को जोड़ा था। इनमें कोई वेल्डिंग का काम कर रहा था तो कोई पेंटिंग का कर रहा था। किसी का काम टेंपो चलाना था तो किसी का गैराज में गाड़ी बनाना था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 23 फरवरी को पुलिस ने इस हकीम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उन्हें पता चला है कि पहले भी एक पीड़िता अपनी शिकायत में इसका नाम ले चुकी थी। पीड़िता ने बताया था कि हकीम ने उसे कहा था कि ये सब करना गलत नहीं है और इससे कुछ नहीं होगा, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा। पुलिस अब इस पड़ताल में जुटी है कि कहीं हकीम इन सबके जरिए कोई अन्य प्लानिंग तो नहीं कर रहा था।

बता दें कि इस केस में गिरफ्तार आरोपितों के नाम हकीम कुरैशी के अलावा, सोहेल, रेहान, करीम, आशिक, लुकमान, अफराज, श्रवण जाट हैं। इनमें आशिक बिजयनगर का ही रहने वाला है जो इलाके में रहकर टेंपो चलाता है। इसी ने हिंदू लड़कियों को फँसाने का काम चालू किया था। इसने अपने टेंपो में बिठाकर छात्रा से दोस्ती की थी और बाद में उसे कीपैड फोन दिलाकर उससे बातें करने लगा। जब लड़की पूरी तरह जाल में फँस गई तो उसने लड़कियों से फोटो-वीडियो मँगा ली और बाद में उसे दोस्तों में साझा कर दिया।

इसके बाग सोहेल मंसूरी, रिपोर्ट बताती हैं कि ये पीड़िताओं को सबसे ज्यादा धमकाने का काम करता था। ये एक के बाद दूसरी और दूसरी के बाद तीसरी लड़की फँसा रहा था और उन्हें सबसे ज्यादा धमकाता भी यही थी। करीम खां भी टेंपो चलाता था, साथ ही लड़कियों को फँसाकर उनके साथ अश्लील चैटिंग करता था।

लुकमान वेल्डिंग का काम करता था, वहीं रेहान हमाली का काम करता था… ये लोग इतने पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन लड़कियों को फँसाने के काम में माहिर थे। इनके जैसा ही अफराज भी था जिसने प्राथमिक शिक्षा भी नहीं ली थी और गैराज में काम करके गुजर-बसर करता था, मगर बात जब लड़कियों को धमकाने की आती थी तो ये लड़कियों को धर्मांतरण के लिए मजबूर करता था। इन सारे आरपितों के अलावा तीन अन्य नाबालिग और भी हैं। पुलिस ने इन सबके साथ उन्हें भी हिरासत में लिया है।

पुणे इंटरनेशल एयरपोर्ट की बाउंड्री वाल से सटकर रातोंरात उग गई मजार, इस्लामी ढाँचे के लिए दीवार ने बदला रास्ता-सड़क हुई सँकरी: नागरिक उड्डयन मंत्री से शिकायत

पुणे के लोहगाँव में स्थित पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बाउंड्री वॉल को एक कथित अवैध मजार की वजह से बदलना पड़ा है। सड़क के किनारे चल रही दीवार मजार के पास अंदर की ओर मुड़ जाती है, ताकि इस इस्लामी ढाँचे को जगह मिल सके। इस मजार को लेकर शिकायत दर्ज की गई है कि ये अवैध है और पहले यहाँ नहीं थी।

शिकायत नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के दफ्तर में दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस अवैध मजार की वजह से सड़क पर ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है, और इसे हटाने की माँग की गई है।

पुणे एयरपोर्ट की बाउंड्री वाल के पास बनी अवैध मजार

इस सड़क से रोजाना आने-जाने वाले शख्स ने बताया कि ये मजार अचानक से बन गई, जिसके बाद हवाई अड्डे की दीवार को मोड़ना पड़ा। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि रातों-रात मजार न सिर्फ बनकर खड़ी हुई, बल्कि एयरपोर्ट की बाउंड्री भी टेढ़ी कर दी गई, ये कोई छोटा काम नहीं है। ऑपइंडिया से बात करते हुए एक सूत्र बताया कि इसकी शिकायत मंत्री तक पहुँच गई है, जल्द ही एक्शन हो सकता है।

ये मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी अवैध धार्मिक संरचनाएँ आए दिन बनती जा रही हैं। नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक या प्रतिबंधित जमीन पर बिना इजाजत कोई ढाँचा नहीं बन सकता, लेकिन फिर भी ये मजार जैसे ढाँचे बन रहे हैं, जिससे चिंता बढ़ रही है।

बॉक्सिंग-कबड्डी चैंपियन की शादी बनी ‘अखाड़ा’: स्वीटी बूरा बोली- दहेज के लिए पीटता है, दीपक हुड्डा बोले- प्रॉपर्टी हड़पना चाहती है; जानिए FIR-तलाक की नौबत क्यों आई

विश्व चैंपियन बॉक्सर स्वीटी बूरा ने कबड्डी खिलाड़ी अपने पति दीपक हुड्डा पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने पति से अलग होने का भी निर्णय लिया है। स्वीटी ने अपने पति और ननद पर एक करोड़ रुपया माँगने और मारपीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, दीपक हुड्डा ने स्वीटी पर जान से मारने की धमकी देने और उनके परिवार की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।

हरियाणा की रहने वाली स्वीटी ने इस संबंध में अपने पति दीपक हुड्डा के खिलाफ 11 फरवरी को हिसार पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में स्वीटी ने कहा है कि 7 जुलाई 2022 को दीपक के साथ उनकी शादी हुई थी। शादी में उनके परिजनों ने एक करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए खर्च किए थे और लोन पर लेकर फॉर्च्यूनर कार दी थी। इसके बाद भी दीपक और उनकी बहन पूनम कम दहेज लाने का ताना मारती थीं।

स्वीटी का कहना है कि शादी के बाद उन पर बॉक्सिंग छोड़ने का दबाव बनाया जाने लगा। उनसे कहा जाता कि घर का काम करो। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपक की बहन ने कहा कि कई परिवार थे, जो दीपक से अपनी बेटी की शादी होने पर 2 करोड़ रुपए तक खर्च करने को तैयार थीं। पूनम कहती थीं कि दीपक हुड्डा की शादी में कम खर्च की वजह से इलाके में उनकी इज्जत कम हो गई है।

स्वीटी ने कहा कि शादी के बाद दीपक घर से बाहर रहने लगे और 5-6 दिन पर घर आते। इसके बारे में जब स्वीटी पूछती तो दीपक हुड्डा गुस्से में आ जाते। वह कहते, “मैं बहुत बड़ा नेता हूँ। बड़ा नाम हूँ। मुझे कई कार्यक्रमों में जाना पड़ता है। इसलिए घर नहीं आ सकता। तुम्हारे साथ सिर्फ शारीरिक जरूरत को पूरा करने के लिए शादी की है।” बता दें कि 2015 से स्वीटी और दीपक लिव-इन रिलेशन में रहते थे।

स्वीटी का आरोप है कि दीपक हुड्डा ने 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा की टिकट पर महम से चुनाव लड़ा था। इसके लिए स्वीटी से एक करोड़ रुपए लाने के लिए कहा। जब उन्होंने अपने मायके से रुपए माँगने में असमर्थता जताई तो अक्टूबर 2024 में उनके साथ मारपीट करके उन्हें घर से निकाल दिया गया। बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले फरवरी में दोनों पति-पत्नी ने भाजपा ज्वॉइन की थी।

नवभारत टाइम्स से बातचीत में स्वीटी ने कहा, “मन होता है पीट देता है। साँस रुकने तक मारता है। कई दिनों तक घर में बंद कर देता है। जिसके लिए सब कुछ छोड़ा वो पति असल में कसाई निकला।” स्वीटी के एक करीबी ने NBT को बताया, “दोनों के बीच लंबा अफेयर चला था। फिर उनकी शादी कर दी गई। शादी के चार दिन पहले तक सब कुछ ठीक था। फिर दीपक पैसे माँगने लगा।”

इस करीबी ने बताया कि दहेज माँगने पर स्वीटी ने शादी से इनकार कर दिया था। उस समय इज्जत की दुहाई देकर दीपक के पिता ने उसे समझाया और समझौता कराया। तब जाकर स्वीटी शादी के लिए तैयार हुई थी। शादी के बाद कुछ दिन तक सब ठीक रहा। उसके बाद दीपक उसे मारने-पिटने लगा। इसके बाद पंचायत बैठी। पंचायत में दीपक बात मान जाता और फिर वही हरकत करने लगता।”

इस व्यक्ति ने बताया कि जब दीपक हुड्डा का समय गरीबी में बीत रहा था और नके पास घर तक नहीं था तो स्वीटी और उन्होंने सपोर्ट किया था। स्वीटी के इस रिश्तेदार ने कहा, “वह कच्चे घर में रहता था। हमने उसे अपनाया। इसके बाद वह बड़ा नाम बना। अब वह हमारी ही बेटी पर ज्यादती कर रहा है।” इस शख्स ने कहा कि दीपक हुड्डा अपनी अमीर पत्नी से तलाक नहीं लेना चाहता है।

वहीं, स्वीटी ने दीपक के साथ अपनी शादी से लेकर उनके साथ तक की सारी फोटो सोशल मीडिया से हटा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी बूरा ने कोर्ट में अपने पति से तलाक और खर्चे के लिए मामला भी दायर किया है। उन्होंने 50 लाख रुपए मुआवजा और 1.5 लाख रुपए महीना खर्च की माँग की है। गौरतलब है कि स्वीटी बूरा और उनके पति दीपक हुड्डा, दोनों अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित हैं।

उधर, दीपक हुड्डा ने भी अपनी पत्नी स्वीटी बूरा के खिलाफ रोहतक के थाने में शिकायत दी है। दीपक ने स्वीटी के माता-पिता पर पैसे ठगने और शादी तोड़ने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही हुड्‌डा ने भी स्वीटी और उसके परिवार पर संपत्ति हड़पने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। दीपक ने कहा कि शादी के पहले से ही स्वीटी के परिजनों की नजर उनकी संपत्ति पर थी।

दीपक हुड्डा ने कहा, “उसके माता-पिता नजर मेरी प्रॉपर्टी पर है, इसका मुझे पता नहीं था। मेरे माता-पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। इस वजह से मुझे समझाने वाला कोई नहीं था। मैंने उसके माता-पिता को अपना माता-पिता माना था। मैंने हिसार में एक प्लॉट लिया था और इसकी सारी पेमेंट मैंने की थी। प्लॉट सिर्फ मेरे नाम के बजाय मेरे और स्वीटी के नाम पर ले लिया गया।”

हुड्डा ने कहा कि उनसे झूठ बोलकर स्वीटी के परिजनों ने 25 लाख रुपए नगद ले लिए। उन्होंने कहा कि ब्याज पर दूसरों को रुपए देने के नाम पर स्वीटी के पिता ने उनसे लाखों रुपए ले लिए। उन्होंने स्वीटी के भाई पर भी 12 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है। ये सारे उन्हें कभी नहीं मिले। हुड्डा ने यह सब एक साजिश के तहत करने का आरोप लगाया है।

दीपक हुड्डा ने स्वीटी पर चाकू से हमला करने का भी आरोप लगाया है। हुड्डा ने कहा, “एक बार छोटी-सी बहस होने पर उसने मुझे चाकू मार दिया था। इससे मुझे टाँके लगे थे। एक बार उसने सोते हुए हमला कर दिया। इसमें मेरा सिर फट गया था। मैंने उसकी माँ को फोटो भेजी तो उन्होंने कहा कि गृहस्थी में ये सब चलता रहता है। मेरी बेटी ऐसी ही है। घर बसाना है तो देख लो।”

बता दें कि स्वीटी की शिकायत मिलने के बाद हिसार पुलिस ने दीपक हुड्डा को नोटिस भेजकर बुलाया था और जाँच में सहयोग करने के लिए कहा था। हालाँकि, दीपक हुड्डा ने हिसार पुलिस के सामने नहीं गए। हिसार के पुलिस अधीक्षक शशांक कुमार सावन ने इस बात की जानकारी दी है।

क्या है डोनाल्ड ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’, कितनी है इसकी कीमत: अमेरिकी नागरिक बनने के नए ऑफर के बारे में जानिए सब कुछ, EB-5 वीजा प्रोग्राम की लेगा जगह

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (25 फरवरी 2025) को एक नया ‘गोल्ड कार्ड वीजा’ शुरू करने का ऐलान किया है, जो अमीर लोगों को वहां की नागरिकता देने का रास्ता खोलेगा। ये नया प्रोग्राम पुराने EB-5 वीजा की जगह लेगा, जिसके तहत विदेशी लोग अमेरिका में पैसा लगाकर ग्रीन कार्ड पाते थे। ट्रंप ने कहा कि इस गोल्ड कार्ड की कीमत करीब 5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 43 करोड़ रुपये होगी। उनका मानना है कि इससे अमेरिका में अमीर लोग आएँगे, जो ढेर सारा पैसा खर्च करेंगे, टैक्स देंगे और नौकरियाँ पैदा करेंगे। लेकिन ये खबर भारतीयों के लिए अच्छी और बुरी, दोनों तरह की है। आइए समझते हैं कि ये क्या है और हमारे लिए इसका क्या मतलब है।

सबसे पहले EB-5 वीजा को समझें। ये प्रोग्राम 1990 में शुरू हुआ था, ताकि विदेशी लोग अमेरिका में पैसा लगाएँ और वहाँ की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसके तहत आपको कम से कम 8 लाख डॉलर (लगभग 7 करोड़ रुपये) किसी खास इलाके में या 10.5 लाख डॉलर (लगभग 9 करोड़ रुपये) कहीं और निवेश करना होता था। साथ ही, कम से कम 10 अमेरिकी लोगों को नौकरी देनी होती थी। इसके बदले आपको ग्रीन कार्ड मिलता था, यानी अमेरिका में हमेशा रहने और काम करने का अधिकार। खासकर भारतीयों के लिए ये रास्ता फायदेमंद था, क्योंकि H-1B वीजा वालों को ग्रीन कार्ड के लिए दशकों इंतजार करना पड़ता है। लेकिन अब ट्रंप इसे ‘बकवास’ और ‘धोखे से भरा’ बताकर खत्म करने जा रहे हैं। उनकी जगह गोल्ड कार्ड आएगा, जिसमें नौकरी पैदा करने की शर्त नहीं होगी, बस 43 करोड़ रुपये सीधे सरकार को देने होंगे।

अब सवाल ये है कि भारतीयों पर इसका क्या असर होगा? भारत से हर साल लाखों लोग अमेरिका में बेहतर जिंदगी की तलाश में जाते हैं। इनमें से ज्यादातर टेक प्रोफेशनल्स या स्किल्ड वर्कर्स हैं, जो H-1B वीजा पर काम करते हैं। लेकिन ग्रीन कार्ड का इंतजार इतना लंबा है कि कुछ लोग 50 साल तक लाइन में रहते हैं। EB-5 उनके लिए एक उम्मीद था, क्योंकि ये पैसा लगाने वालों को जल्दी रास्ता देता था। मगर गोल्ड कार्ड की कीमत सुनकर आम भारतीय के होश उड़ सकते हैं। 43 करोड़ रुपये सिर्फ बड़े-बड़े बिजनेसमैन या सुपर रिच लोग ही दे सकते हैं। यानी ये प्रोग्राम अंबानी, अडानी जैसे लोगों के लिए तो ठीक है, लेकिन आम स्किल्ड वर्कर के लिए नहीं।

ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिका को फायदा होगा। उनके मुताबिक, गोल्ड कार्ड खरीदने वाले लोग वहाँ ढेर सारा पैसा खर्च करेंगे और देश का कर्ज कम करने में मदद करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि वो 1 करोड़ गोल्ड कार्ड बेच सकते हैं। साथ ही, रूस के अरबपतियों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने हंसी में कहा कि कुछ ‘अच्छे रूसी’ भी इसे खरीद सकते हैं। लेकिन ये योजना सबके लिए अच्छी नहीं है। कुछ लोग इसे ‘पैसों से नागरिकता खरीदने’ का तरीका मानते हैं, जो गलत हाथों में पड़ सकता है। मसलन, अगर कोई आतंकी या अपराधी इतना पैसा दे दे, तो क्या होगा? पहले भी ऐसी योजनाओं से काला धन छिपाने या अपराधियों के बचने की बातें सामने आई हैं।

भारत के नजरिए से देखें तो ये खबर थोड़ी निराश करने वाली है। EB-5 में कम पैसा लगाकर भी ग्रीन कार्ड मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जिन भारतीयों ने EB-5 के लिए पैसे जोड़े थे, उनके सपने टूट सकते हैं। हाँ, बड़े उद्योगपतियों के लिए ये आसान रास्ता है। वो फटाफट नागरिकता ले सकते हैं और अपने परिवार को अमेरिका शिफ्ट कर सकते हैं। लेकिन ज्यादातर स्किल्ड प्रोफेशनल्स, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री को चलाते हैं, उनके लिए ये रास्ता बंद सा हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि दो हफ्ते में पूरी डिटेल आएगी। तब पता चलेगा कि इसमें और क्या-क्या शर्तें होंगी।

हालाँकि दूसरे देशों में भी ऐसी योजनाएँ हैं। माल्टा, सेंट किट्स जैसे छोटे देश कम पैसों में नागरिकता देते हैं, क्योंकि वो टैक्स हेवन हैं। लेकिन अमेरिका जैसे बड़े देश में इतनी मोटी रकम माँगना सवाल उठाता है। क्या ये वाकई अर्थव्यवस्था के लिए है या सिर्फ अमीरों को फायदा देने का तरीका? भारतीयों को अब दूसरा रास्ता ढूँढना होगा, जैसे O-1 वीजा या L-1 वीजा, जो खास टैलेंट या बिजनेस वालों के लिए हैं। कुल मिलाकर गोल्ड कार्ड अमीरों के लिए सुनहरा मौका है, लेकिन आम भारतीय के लिए ये सपना दूर ही रहने वाला है।

बागेश्वर धाम पहुँचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, ‘हनुमान यंत्र’ भेंट कर बोले धीरेंद्र शास्त्री- बेटियों के लिए खोल दें मंदिरों का खजाना: 251 जोड़ों का हुआ पाणिग्रहण संस्कार

छतरपुर के खजुराहो स्थित बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) में 251 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) भी शामिल हुईं और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने राष्ट्रपति को हनुमान यंत्र भेंट किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल (Governor Mangubhai Patel) और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Dr Mohan Singh) भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एयरफोर्स के विशेष विमान से खजुराहो एयरपोर्ट पहुँचीं और वहाँ से हेलिकॉप्टर के जरिए बागेश्वर धाम गईं। उन्होंने धाम में बालाजी के दर्शन किए और सामूहिक विवाह कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संत समाज ने हमेशा सही मार्ग दिखाया है और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इस आयोजन को अनुकरणीय बताया और धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shashtri) का आभार व्यक्त किया।

पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बेटियों को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। उन्होंने मंदिरों की दानपेटियों को गरीब बेटियों की शादी के लिए खोलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब बेटियाँ अपने ससुराल जाएँगी, तो गर्व से कहेंगी कि बालाजी हमारे पिता हैं और राष्ट्रपति के आशीर्वाद से विवाह करके आई हैं।

पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “जिस दिन हमने अपनी बहन का विवाह जैसे-तैसे लोगों से उधार लेकर किया उसी दिन ठान लिया था कि आज हमें बहन के विवाह में इतना निराश होना पड़ रहा है, भगवान ने हमें सामर्थ्यवान बनाया तो भारत में बेटियों के विवाह के लिए किसी को निराश नहीं होना पड़ेगा। बेटियों को बोझ मत मानो, बेटियाँ, बेटों से कम है क्या? बेटियाँ कम होती तो हमारी बेटियाँ बड़े-बड़े शिखर पर नहीं पहुँचतीं।”

कार्यक्रम में नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी के आवश्यक सामान, आटा चक्की और सिलाई मशीनें भेंट की गईं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जोड़ों को 51,000 रुपये की सहायता राशि भी दी गई।

राष्ट्रपति मुर्मू यहाँ करीब चार घंटे तक रुकीं और दोपहर 3:10 बजे वडोदरा के लिए रवाना हो गईं। इस भव्य आयोजन में गायक सोनू निगम, क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, रॉबिन उथप्पा, आरपी सिंह, अभिनेता पुनीत वशिष्ठ और WWE रेसलर द ग्रेट खली भी शामिल हुए। कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाने के लिए 251 घोड़े लाए गए, जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक आयोजन है, जिसने समाज में समरसता और एकता का संदेश दिया है।

मर्द होना आसान नहीं, इसलिए बन जाते हैं औरत: कोई मालदार आदमी से करना चाहता है सेक्स, किसी को चाहिए यौन संतुष्टि तो किसी को लग्जरी लाइफस्टाइल… जेंडर चेंज के अजब-गजब कारण

लिंग परिवर्तन आज के समय में सामान्य होता जा रहा है और विदेशों में तो इसके तमाम उदाहरण दिन पर दिन बढ़ रहे हैं। अजीब बात ये है कि इनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्हें समस्या अपने लड़के होने से नहीं है, उन्हें सिर्फ वो सुविधाएँ चाहिए जो लड़कियों को मिलती हैं।

ये सुविधाएँ अलग-अलग हो सकती हैं- जैसे समृद्ध पुरुष के साथ संबंध बनाना, उनका लाभ उठाना, सस्ते कार इंश्योरेंस पाना, मुफ्त का खाना आदि। आज इन्हीं सबके लालच में कई ऐसे लड़के हैं जो अपना लिंग परिवर्तन करवाकर लड़कियाँ बन रहे हैं।

हाल में डेलीमेल पर इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में ट्रांसमैक्सिंग मेनिफेस्टो-इनसेल का जिक्र है। ये मेनिफेस्टो एक अज्ञात स्वीडिश नेता ‘विंटोलोजी’ ने लिखा था।

इस मेनिफेस्टो में साफ है कि अगर महिला बना जाए तो इससे सामाजिक स्वीकृति में वृद्धि होगी और महिलाओं के लिए आरक्षित स्थानों तक पहुँचा जा सकेग। इसके अलावा पुरुषों को जो डेटिंग के वक्त, रोजगार के वक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उन्हें वो भी नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ जो महिलाओं को विशेषाधिकार मिलते हैं वो उसके भी अधिकारी होंगे।

इस दस्तावेज के अनुसार, महिला बनने से सामाजिक दबाव उनपर हर तरह से कम होगा, दूसरों से सहानुभूति मिलेगी, कानूनी क्षेत्र में हर तरह से उनके साथ उदार व्यवहार किया जाएगा तथा समृद्ध पुरुषों से संबंध बनाकर वो अपना जीवन भी अच्छा कर सकती हैं।

इतना ही नहीं इस मेनिफेस्टो में यौन संतुष्टि का भी जिक्र है। रिपोर्ट बताती है कि जो लोग नए यौन अनुभव करना चाहते हैं और इसका अवसर नहीं मिलता उनके लिए लिंग परिवर्तन अच्छा विकल्प है वो ऐसा करके इन अवसरों को प्राप्त कर सकते हैं।

ये मेनिफेस्टो यही बताता है कि पुरुष से महिला बनने से व्यक्ति विशेष के जीवन में बहुत कुछ बदल सकता है। समाज न केवल इसके बाद उनका साथ देगा बल्कि भावनात्मक तौर पर हमेशा उन्हीं का समर्थन करेगा।

डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांसमैक्सिंग की इस दुनिया में वही पुरुष एंट्री कर रहे हैं जो पुरुष होते हुए अपने जीवन को बेहतर नहीं बना पा रहे, उन्हें अपने न केवल जेंडर आइडेंटिटी से परेशानी है बल्कि वो महिला होने के जो फायदे होते हैं उन्हें लेना चाहते हैं। ऐसा करके इन्हें न केवल महिलाओं के वर्ग में प्रवेश मिलता है बल्कि इनके लिए सब आसान हो जाता है।

उदाहरण के लिए- आज भी अधिकांश जगहों पर ऐसा माना जाता है कि लड़कों का काम मुख्य रूप से कमाना और परिवार पालना है जबकि लड़की ऐसा न भी करे तो चलेगा। मेनिफेस्टो लिखता है- “हर कोई सफल या स्वतंत्र नहीं हो सकता, कुछ व्यक्तियों को बस किसी के अधीन रहने की भी जरूरत होती है, वे उपयोग किए जाने और दूसरों को खुशी देने के लिए होते हैं… यह उन लोगों के लिए बिलकुल अंतिम पड़ाव है जो पुरुष से महिला बन रहे हैं। मुझे लगता है कि यह बेघर होने से बेहतर है।”

रिपोर्ट में कुछ लोगों के उदाहरण भी दिए गए हैं जिनमें एक सैमी भी है। सैमी को कभी अपने पुरुष होने का लाभ नहीं मिला इसलिए वो लड़की बना और अब वह उसके फायदा ले रहा है।

फौज, छात्र, विपक्ष…बांग्लादेश में सबने मिलकर शेख हसीना का तख्ता तो पलट दिया, पर अब एक-दूसरे को निपटाने में लगे: यूनुस सरकार को जनरल ने दी ‘वार्निंग’, नाहिद इस्लाम बनाएगा नई पार्टी

बांग्लादेश एक बार फिर आंतरिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। छात्रों को सड़कों पर उतार कर प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नाहिद इस्लाम ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से इस्तीफा दे दिया है। वे सूचना सलाहकार थे। उन्होंने कहा कि वे नई राजनीतिक पार्टी बनाएँगे। इस बीच बांग्लादेश की फौज ने देश के नेताओं को चेतावनी दी है।

मोहम्मद यूनुस को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद 27 साल के नाहिद इस्लाम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए वे छात्रों के बीच दोबारा लौटना चाहते हैं। इसके लिए एक नई राजनीतिक ताकत का उभरना जरूरी है। मैंने सलाहकार परिषद से इस्तीफा इसलिए दिया है, ताकि मैं सड़क पर रहकर जनांदोलन को मजबूत कर सकूँ।” हालाँकि, पार्टी के नाम का खुलासा नहीं हुआ है।

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में छात्र आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ (SAD) और ‘नेशनल सिटिजन्स कमिटी’ (NCC) मिलकर नए दल का गठन करेंगे। इस नए दल का संचालन नाहिद इस्लाम और सरजिस आलम मिलकर करेंगे। सरजिस आलम ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के कोऑर्डिनेटर हैं। वहीं, नाहिद ने अपने छात्र संगठन से भी इस्तीफा दे दिया है।

नाहिद के संगठन के सहयोगी छात्र संगठन ‘जातीय नागरिक कमिटी’ ने भी इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वो लोग मिलकर एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएँगे। इससे पहले शेख हसीना की प्रतिद्वंद्वी और यूनुस सरकार को समर्थन देने वाली ख़ालिदा ज़िया की ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ समेत कुछ संगठनों ने कहा था कि सरकार में रहते हुए पार्टी नहीं बनाई जा सकती। इसके बाद नाहिद का इस्तीफ़ा आया है।

हालाँकि, शेख हसीना के तख्तापलट के दौरान नाहिद इस्लाम का साथ देने वाले छात्र नेता महफूज़ आलम और आसिफ महमूद सरकार में बने रहेंगे। इस्तीफे के बाद मोहम्मद यूनुस के प्रेस सलाहकार शफ़ीकुल आलम ने नाहिद की जमकर तारीफ़ की और कहा कि वो एक दिन बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं। नाहिद भारत विरोध हैं और कहा जा रहा है कि उन्हें चीन का समर्थन मिल रहा है।

मुल्क में हलचल से वहाँ की फौज भी सतर्क है। बांग्लादेशी फौज के प्रमुख वकार-उज्जमान ने मुल्क के नेताओं को चेतावनी दी है कि नेता आपस में ना उलझें। उन्होंने, “मैं आपको चेतावनी दे रहा हूँ। बाद में मत कहना कि मैंने आगाह नहीं किया था। अगर आप अपने मतभेदों को भूलाकर साथ मिलकर काम नहीं करते हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं तो देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।

बांग्लादेशी फौज के मुखिया ने कहा, “ऐसा कहने के पीछे मेरा कोई निजी एजेंडा नहीं है। मैं बस मुल्क की भलाई चाहता हूँ और इसकी के लिए यह बात कह रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि मुल्क में शांति बने रहे और इसकी संप्रभुता को खतरा ना हो।” इससे पहले उन्होंने कहा कि जब तक बांग्लादेश में चुनी हुई सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक सेना ही कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सँभालेगी।

पुरानी पेंशन का वादा कर चुनाव जीत लिया, पर CM बनने के बाद भी स्टालिन ने नहीं किया लागू: अब तमिलनाडु में हजारों कर्मचारियों ने एक साथ ले ली छुट्टी, कामकाज ठप

तमिलनाडु में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने मंगलवार (25 फरवरी 2025) को सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध जताते हुए एक साथ छुट्टी ले ली। यह विरोध डीएमके सरकार द्वारा चुनावी वादों को पूरा न करने को लेकर किया गया, खासकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की माँग को लेकर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त कार्रवाई परिषद (JACTO-GEO) के नेतृत्व में हजारों कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने हड़ताल करने पर रोक लगाई थी, इसलिए उन्होंने ‘शांतिपूर्ण विरोध’ का रास्ता अपनाया। सोमवार (24 फरवरी 2025) की रात सरकार के चार मंत्रियों के साथ बातचीत फेल होने के बाद कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से छुट्टी लेने का फैसला किया।

कर्मचारियों की अन्य माँगों में वेतन सुधार, माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों और प्राचार्यों के वेतन में बढ़ोतरी शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने डीएमके सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आगामी चुनावों में जवाब देंगे।

जेएसीटीओ-जीईओ के एक पदाधिकारी ने कहा, “डीएमके हमारे समर्थन से सत्ता में आई, लेकिन उन्होंने हमें मझधार में छोड़ दिया है। हमारी कोई भी माँग अब तक पूरी नहीं हुई है। हमें उम्मीद है कि आज के विरोध प्रदर्शन के बाद कम से कम वे हमें नोटिस करेंगे। अगर वे हमसे किए गए वादे पूरे नहीं करते हैं, तो हम उन्हें (अगले चुनावों में) सबक सिखाएँगे।”

सरकारी कर्मचारी दशकों से डीएमके के समर्थक रहे हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से वे सरकार से नाराज हैं। डीएमके ने चुनावों में OPS बहाल करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि डीएमके सरकार ने उन्हें धोखा दिया है।

चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने वरिष्ठ मंत्रियों को बातचीत के लिए भेजा, लेकिन JACTO-GEO ने स्पष्ट कर दिया कि वे OPS के अलावा कोई दूसरा समाधान स्वीकार नहीं करेंगे। डीएमके सरकार अब इस विरोध को शांत करने की कोशिश में जुटी है, क्योंकि बढ़ता आंदोलन सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

जो तमिलनाडु के एक गाँव से चलाते हैं ₹50 हजार करोड़ की कंपनी, उन्होंने कहा- आइए हिंदी सीखें: इंजीनियरों के लिए बताया फायदेमंद, बोले- तमिलों के लिए रोजगार-कारोबार का दायरा बढ़ेगा

तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच भाषा विवाद के बीच Zoho कंपनी के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बु ने तमिल भाषी इंजीनियरों और उद्यमियों से हिंदी सीखने की अपील की है। उनका कहना है कि हिंदी न जानना तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले इंजीनियरों के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है।

श्रीधर वेम्बु ने कहा कि Zoho की तेजी से बढ़ती व्यावसायिक पहुँच मुंबई, दिल्ली और गुजरात तक फैली हुई है। इन शहरों के ग्राहकों के साथ प्रभावी बातचीत के लिए ग्रामीण तमिलनाडु में रोजगार के लिए जरूरी है। हिंदी न आने से कई इंजीनियरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपनी खुद की हिंदी सीखने की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले पाँच सालों में हिंदी पढ़ना सीखा है और अब वे 20% तक समझ सकते हैं।

उन्होंने तमिलनाडु के लोगों को हिंदी सीखने की सलाह दी और कहा कि भाषा सीखने को राजनीति से अलग रखना चाहिए। उन्होंने “आइए हिंदी सीखें!” शब्द के साथ अपने पोस्ट को विराम दिया।

जोहो के प्रमुख श्रीधर वेम्बु का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब डीएमके के शंकरनकोविल विधायक और उनके समर्थकों ने रेलवे स्टेशनों पर लिखे हिंदी शब्दों को काले रंग से मिटा दिया था। यह विरोध तीन-भाषा नीति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के खिलाफ था।

तमिलनाडु की सरकार हिंदी थोपने के आरोप लगाते हुए इसका विरोध कर रही है। वहीं, बीजेपी ने एमके स्टालिन सरकार की आलोचना की है। तमिलनाडु के बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने कहा कि NEP त्रिभाषी मॉडल में हिंदी को अनिवार्य नहीं रखा गया है, इसके बावजूद स्टालिन और डीएमके NEP पर हंगामा कर रहे हैं।

भारत ने सुरक्षा कारणों से किया इनकार, विदेशियों के किडनैप होने का खतरा… फिर भी नहीं अलर्ट पाकिस्तान: मैच के बीच रचिन रविंद्र के पास पहुँचा ‘घुसपैठिया’, 100+ पुलिसकर्मी बर्खास्त

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान सुरक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने ड्यूटी से ही इनकार कर दिया। पुलिसकर्मियों को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम और टीमों के होटल के बीच सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन कई बार वे ड्यूटी पर नहीं पहुँचे या काम करने से इनकार कर दिया।

बता दें कि भारत ने पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों से ही खेलने से इनकार किया था। इस बीच, पाकिस्तान में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें खिलाड़ियों की किडनैपिंग तक का इनपुट मिल चुका है।

पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) उस्मान अनवर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने अतिरिक्त वर्कलोड और लंबी ड्यूटी के कारण काम करने से इनकार किया था।

इस बीच, एक और सुरक्षा चूक सामने आई जब न्यूजीलैंड-बांग्लादेश मैच के दौरान एक दर्शक सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान में घुस गया और कीवी बल्लेबाज रचिन रविंद्र को गले लगाने की कोशिश की। इस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे पाकिस्तान के सभी क्रिकेट स्टेडियमों में बैन कर दिया गया है।

हालाँकि पाकिस्तान सरकार ने देश में चैंपियंस ट्रॉफी की सुरक्षा को लेकर किसी भी खतरे की खबरों को खारिज किया है। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तारड़ ने कहा कि पाकिस्तान में टूर्नामेंट शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है, स्टेडियम खचाखच भरे हैं और दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है।

भारत ने पहले ही सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान में मैच खेलने से इनकार कर दिया था। BCCI ने साफ कर दिया कि भारतीय टीम के मैच तटस्थ स्थान (दुबई/शारजाह) पर कराए जाएँ। 2023 के एशिया कप में भी यही मॉडल अपनाया गया था, जब भारत के मैच श्रीलंका में हुए थे। इसी वजह से भारतीय टीम अपने सारे मैच दुबई में खेल रही है, जहाँ वो 2 मैचों को जीत चुकी है। भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 6 विकेट से हराकर उसे चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया है।