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अरुणाचल में जब 1% थे ईसाई तब बना धर्मांतरण रोकने का कानून, अब 30% के हुए पार तो लागू हो रहा: जानिए अब मिशनरी क्यों कर रहे विरोध

अरुणाचल प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किए जाने का ईसाई विरोध कर रहे हैं। प्रदेश की जनसंख्या में एक तिहाई हिस्सा रखने वाले ईसाई समुदाय के कई संगठन इसको लेकर सड़क पर उतर आए हैं। यह कानून बीते 5 दशक पहले अरुणाचल विधानसभा की मंजूरी पा चुका है लेकिन अब तक लागू नहीं हो सका है। इस बीच राज्य में ईसाई आबादी 30 गुना बढ़ चुकी है। लेकिन अब भाजपा सरकार इस कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह काम गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद हो रहा है।

क्यों हो रहा प्रदर्शन?

6 मार्च, 2025 को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में लाखों ईसाई सड़कों पर उतरे। इन्हें अरुणाचल क्रिश्चियन फोरम (ACF) नाम के एक संगठन ने इकट्ठा किया था। यह ईसाई अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम कानून (APFRA) वापस लेने की माँग कर रहे हैं। यह कानून अरुणाचल प्रदेश के जनजातीय समुदाय के संरक्षण के लिए बनाया गया था।

ईसाई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह क़ानून उनके धार्मिक अधिकारों पर हमला करता है और सरकार इसे लागू ना करे। इससे पहले फरवरी, 2025 में भी उन्होंने इस कानून के विरोध में एक बार भूख हड़ताल भी की थी। ACF ने दावा किया है कि यह क़ानून ईसाई समुदाय को लक्ष्य बनाकर लागू किया जाएगा।

ACF ने अरुणाचल प्रदेश के बाकी संगठनों से भी इस क़ानून का विरोध करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि इससे राज्य की लगभग एक तिहाई ईसाई जनसंख्या को नुकसान होगा। राज्य में विपक्षी कॉन्ग्रेस ने भी ईसाई संगठनों का समर्थन किया है और कहा है कि सरकार यह कानून लागू करके जबरदस्ती बवाल खड़ा करना चाहती है।

क्या कहता है यह क़ानून?

ईसाई समूह वर्ष 1978 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए गए अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (APFRA) कानून को लागू ना करने की माँग कर रहे हैं। यह कानून लालच या दबाव से करवाए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया था।

इस कानून के अंतर्गत बौद्ध धर्म (मोनपा, मेम्बा, शेरदुकपेन, खम्बा, खम्पति और सिंगफोस द्वारा प्रचलित), वैष्णव (नोक्टेस द्वारा प्रचलित), आका और प्रकृति पूजक (दोन्यी-पोलो उपासक) को स्थानीय धर्म का दर्जा दिया गया था। यानी यह राज्य में पहले से मौजूद धर्म माने गए थे।

यह कानून कहता है, “कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्षत रूप से या किसी भी व्यक्ति को शक्ति, लालच किसी और झाँसे में लेके धार्मिक आस्था से किसी अन्य धार्मिक आस्था में परिवर्तित नहीं करेगा या परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा और ना ही कोई व्यक्ति ऐसे किसी धर्म परिवर्तन के लिए उकसाएगा।”

इसका उल्लंघन करने वाले को 2 साल की सजा और ₹10 हजार तक का जुर्माना झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा कानून में यह भी स्पष्ट किया गया था कि राज्य में यदि कोई धर्मांतरण करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन को सूचित करना पड़ेगा। ऐसा ना करने पर 1 वर्ष तक की सजा या फिर ₹1000 का जुर्माना झेलना पड़ेगा।

1978 में पास हुआ, अब हो रहा लागू

अरुणाचल प्रदेश में यह कानून 1978 में जनता पार्टी के शासनकाल में लाया गया था। तब प्रेम खांडू थान्गुन यहाँ के मुख्यमंत्री थे। उनकी सरकार ने राज्य के जनजातीय समूहों की संस्कृति का संरक्षण करने और उन्हें धर्मांतरण के जाल से बचाने के लिए यह कानून पारित किया था। लेकिन बाद में लम्बे समय तक राज्य में कॉन्ग्रेस सरकारें रहीं और इसे लागू नहीं किया गया।

अरुणाचल प्रदेश में यह कानून इसलिए लाया गया था क्योंकि इससे पहले मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्य में बड़ी आबादी ईसाई हो चुकी थी। हालाँकि, यह कानून 1978 के बाद से 2025 तक लागू नहीं हो सका। इसके पीछे राज्य में ईसाई समूहों का दबाव था।

अब यह कानून गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश के बाद लागू किया जा रहा है। सितम्बर, 2024 में हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह इसे लागू करने के लिए मसौदा तैयार करें। इसकी डेडलाइन मार्च में खत्म हो रही है, ऐसे में राज्य सरकार इस पर कदम बढ़ा रही है। वहीं इसके विरोध में ईसाइयों ने अपना प्रदर्शन तेज कर दिया है।

क्यों जरूरी है कानून लागू होना?

अरुणाचल प्रदेश में जहाँ दशकों तक इस कानून का विरोध ईसाई करते रहे हैं, वहीं इस बीच राज्य में ईसाइयों की आबादी लगभग 30 गुना बढ़ चुकी है। जनसंख्या के आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 1971 में राज्य में मात्र 0.79% आबादी ही ईसाइयत मानती थी। 2011 की जनसंख्या में यह आँकड़ा 30% के पार पहुँच चुका था।

यह तेज बढ़त तब हुई जब अरुणाचल प्रदेश को इंदिरा गाँधी ने 1971 में केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया। इसके बाद राज्य में राजीव गाँधी के राज के दौरान जब यह राज्य बना तो इसने और भी तेज रफ्तार पकड़ ली। वहीं इसी दौरान हिन्दुओं की आबादी केवल 22% से 29% तक ही पहुँची है।

अरुणाचल प्रदेश में 1971 से 2011 के बीच सबसे तेजी से बौद्धों और स्थानीय मान्यताओं को मानने वाले (अधिकांश दोन्यी पोलो) की संख्या में कमी आई है। जनसंख्या रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1971 में राज्य की 63% आबादी स्थानीय धर्मों को मानने वाली (अधिकांश दोन्यी पोलो) और 13% से अधिक बौद्ध थे।

2011 आते-आते बौद्ध जनसंख्या जहाँ घट कर 11% पर आ गई है तो वहीं दोन्यी पोलो राज्य में मात्र 26% पर आ गए हैं। राज्य में अब आगे और भी धर्मांतरण ना हो सके, इसलिए राज्य में कानून लागू हो रहा है तो ईसाई संगठन विरोध कर रहे हैं। हालाँकि, इस कानून को यहाँ के स्थानीय समूहों ने पूरा समर्थन दिया है।

‘केंद्र का पालतू कु%$ बन गई है ED’ : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे के घर पर छापा, भड़के कॉन्ग्रेसी जाँच एजेंसी को दे रहे गाली

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य के घर पर ED ने 10 मार्च 2025 को छापेमारी की है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों के सिलसिले में की गई। ईडी की टीम ने भिलाई स्थित चैतन्य बघेल के निवास समेत कुल 14 स्थानों पर एक साथ छापे मारे।

ईडी का आरोप है कि भूपेश बघेल के कार्यकाल में 2161 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, जिसमें कई उच्च पदस्थ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। उन्हें संदेह कि इस घोटाले में चैतन्य बघेल भी शामिल हो सकते हैं। टीम अपनी छानबीन कर रही हैं।

इस बीच भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा यह एक झूठा मामला है जो पिछले सात वर्षों से चल रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि कोई पंजाब में कॉन्ग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है।

इस छापेमारी की खबर सुनने के बाद पार्टी सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि ईडी पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री का पालतू कुत्ता बन गई है। वे इस कुत्ते को जहाँ चाहते हैं वहाँ भेज देते हैं। भूपेश बघेल कॉन्ग्रेस के मजबूत नेता हैं और उन्होंने ऐसी जंग लड़ी हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी और छत्तीसगढ़ के लोग उनके साथ खड़े हैं हम सभी जानते हैं कि भाषा और आरएसएस की गढ़ी झूठी बातें हारेंगी।”

बशीरहाट में काली माता मंदिर पर हमला कर कट्टरपंथियों ने मूर्तियाँ तोड़ी, उपद्रवियों की अगुवाई कर रहा था TMC नेता शाहनूर: BJP बोली- बंगाल को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ बना रहीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर हिंदू मंदिरों पर हमले की खबर सामने आई है। रविवार (9 मार्च 2025) को बशीरहाट शहर के शंखचूरा बाजार में काली माता के मंदिर में कट्टरपंथियों ने तोड़फोड़ की और काली माता की मूर्ति को खंडित कर दिया गया। इस भीड़ की अगुवाई स्ठानीय टीएमसी नेता शाहनूर मंडल कर रहा था।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि माँ काली की मूर्ति को नुकसान पहुँचाया गया। उनके मुताबिक, ये हमला स्थानीय टीएमसी नेता शाहनूर मंडल के नेतृत्व में हुआ, जो निंदरिया पंचायत से हैं। दिलीप घोष ने लिखा, “बशीरहाट पुलिस स्टेशन के तहत शंखचूरा बाजार के काली मंदिर में मूर्ति तोड़ी गई। ये शाहनूर मंडल के इशारे पर हुआ।”

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी इस घटना पर गुस्सा जताया। उन्होंने कहा, “जादवपुर के बाद अब बशीरहाट दक्षिण विधानसभा के शंखचारा बाजार में काली माता की मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई। टीएमसी विधायक इसे भाजपा की साजिश बता सकते हैं या कह सकते हैं कि हिंदुओं ने खुद ऐसा किया। ममता बनर्जी पिछले पाँच दिनों से हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार पर चुप क्यों हैं?”

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार ने भी टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “साकचुरो बाजार में मंदिर में घुसकर माँ काली की मूर्ति के हाथ, पैर और सिर तोड़ दिए गए। शाहनूर मंडल के कट्टरपंथी गुट ने हिंदुओं को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस खामोश है। ममता बनर्जी, बहुत हो गया! अगर आप पश्चिम बंगाल को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ समझती हैं, तो गलतफहमी में हैं। हम हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। भाजपा इसका जवाब देगी।”

ये पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में मंदिरों पर हमले हुए हैं। भाजपा ने ममता सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।

बांग्लादेश में हिंसा करते रहे इस्लामी कट्टरपंथी, UN ने बाँध रखे थे फौज के हाथ: जानिए एक्शन में आते ही कैसे रुक जाती सालाना ₹2600 करोड़ की फंडिंग

बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट करने में बड़ा हाथ संयुक्त राष्ट्र (UN) था। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNCHR) के कमिश्नर ने खुद यह बात कबूली है। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन के दौरान फ़ौज के हाथ बाँध दिए थे।

BBC के साथ एक इंटरव्यू में हाई कमिश्नर वोल्कर तुर्क ने यह बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा है कि UN ने फ़ौज को ISIS, अल कायदा और हरकत उल अंसार जैसे इस्लामी कट्टरपंथियों पर एक्शन लेने से मना किया था। उन्होंने बांग्लादेशी फ़ौज को धमकाया भी था।

क्या कहा वोल्कर तुर्क ने?

5 मार्च, 2025 को BBC के हार्डटॉक कार्यक्रम में तुर्क से गाजा, सूडान, यूक्रेन समेत बाकी इलाकों पर बात की। इस दौरान BBC ने कहा कि इन सभी इलाकों में UN एकदम निष्प्रभावी रहा है। तुर्क ने इसके बाद बांग्लादेश का उदाहरण दिया।

वोल्कर तुर्क ने कहा, “मैं आपको पिछले साल बांग्लादेश का उदाहरण दे रहा हूँ। जुलाई-अगस्त के दौरान, छात्रों द्वारा वहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। वह शेख हसीना सरकार से तंग आ चुके थे, वहाँ बड़े पैमाने पर दमन हो रहा था।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके लिए (प्रदर्शनकारियों) सबसे बड़ी उम्मीद वास्तव में हमारी आवाज़, मेरी आवाज़ और हम जो कर पाए, वह थी। हमने स्थिति पर ध्यान दिया और फ़ौज को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोका, तो उन्हें शांति अभियानों में सैनिक नहीं भेजने दिए जाएँगे। इसके बाद फ़ौज के रुख में बदलाव आया।”

क्यों UN की धमकी से डरी बांग्लादेशी फ़ौज

गौरतलब है कि बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है। वर्तमान में बांग्लादेश ने लगभग 5000 सैनिक UN मिशन में भेजे हुए हैं। UN मिशन में गए सैनिकों को औसत तनख्वाह से अधिक पैसा मिलता है और फ़ौज को भी इससे कमाई होती है।

बांग्लादेश को शान्ति मिशन से हर साल लगभग ₹2600 करोड़ की कमाई होती है। इनमें से आधा ही वह अपने सैनिकों को देता है। बाकी पैसा फ़ौज के हिस्से जाता है। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी जगह मिलती है।

ऐसे में UN की यह धमकी फ़ौज पर काम कर गई और उन्होंने अंत समय में शेख हसीना के आदेश मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और दंगाइयों ने हिंसा जारी रखी। मोहम्मद यूनुस ने इसके बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया था।

यूनुस और UN किस तरह आपस में मिले हुए थे, इसकी सच्चाई भी तुर्क ने बता दी। उन्होंने बताया कि मोहम्मद यूनुस ने सत्ता संभालते ही UN से एक जाँच कमिशन बनवाया। इसके लिए उन्होंने तुर्क से सम्पर्क किया। तुर्क ने बताया कि उन्होंने यूनुस की पूरी मदद की।

उन्होंने यह भी बताया कि मोहम्मद यूनुस ने तुर्क से फ़ौज पर नियंत्रण करने को कहा था। UN अब शेख हसीना के शासन के दौरान हुए कथित दमन को लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। वहीं अभी तक UN की तरफ से यह नहीं पूछा गया हैकि बांग्लादेश में यूनुस किस हैसियत से सत्ता पर काबिज हैं।

आगरा में चैंपियंस ट्रॉफी मैच देख रहे युवक की चाकू घोंपकर हत्या: दोस्त बोले- इंडिया को लेकर हुई थी दोनों पक्षों में कमेंटबाजी, पुलिस जाँच में जुटी

उत्तर प्रदेश के आगरा में चैंपियंस ट्रॉफी का मैच देख रहे एक युवक की हत्या कर दी गई। बाइक पर आए कुछ लोगों ने उसकी चाकू गोदकर हत्या कर दी। हत्यारे इसके बाद फरार हो गए। पुलिस अब मामले की जाँच में जुटी है। वहीं हरियाणा के रोहतक में पुलिस ने चैंपियंस ट्रॉफी मैच के बाद जीत का जश्न मना रही भीड़ को तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगरा के आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले सिद्धांत शर्मा की रविवार (9 मार्च, 2025) को हत्या की गई है। सिद्धांत इस दौरान अपने तीन दोस्तों के साथ एक जगह खड़े होकर चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल देख रहा था। उसके साथ मौजूद दोस्तों ने बताया कि मैच देखने के दौरान ही तीन युवक बाइक पर आए।

पहले उन्होंने इन लोगों पर रौब जमाया और गालीगलौज की। इसके बाद उन्होने सिद्धांत से पैसे माँगे। इस बीच इंडिया टीम को लेकर भी कुछ टिप्पणियाँ हुईं। जब विवाद बढ़ा तो हमलावरों ने चाकू निकाल लिया और सिद्धांत की उससे गोद कर हत्या कर दी। उन्होंने बाकियों के साथ भी मारपीट की।

सिद्धांत के दोस्तों ने इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच चालू की। सिद्धांत बीटेक का छात्र था और अपने पिता के साथ व्यापार में भी हाथ बटाता था। पुलिस को घटना स्थल से बीयर के कैन वगैरह मिले हैं। पुलिस पुरानी रंजिश के एंगल से भी जाँच कर रही है। अभी हमलावर पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस आसपास CCTV जाँच रही है।

वहीं हरियाणा के रोहतक में चैंपियंस ट्रॉफी में जीत के बा एक चौराहे पर इकट्ठा हुए युवकों पर पुलिस लाठियाँ चलाईं। मैच में जीत के बाद देर रात तक रोहतक में जीत का जश्न चल रहा था। इसी दौरान पुलिस भीड़ को हटाने पहुँची, यहाँ किसी बात पर तकरार हुई और पुलिस को भीड़ तितर करने के लिए लाठी चलानी पड़ी।

गुलमर्ग फैशन शो से आहत हो गया इस्लाम: हुर्रियत नेता मीरवाइज बोला- रमजान के पाक महीने में ऐसा अश्लील काम, CM उमर ने कहा- आपका गुस्सा पूरी तरह जायज…

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में बर्फ के बीच फैशन शो आयोजित होने से इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हैं। हाल में हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि पर्यटन के नाम पर अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं उमर अब्दुल्ला ने उन्हें तसल्ली देते हुए अपने ट्वीट में लिखा कि वो इस मामले पर लोगों का गुस्सा समझते हैं इसलिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन से इस मामले पर रिपोर्ट तलब करने को कहा है।

बता दें कि ये फैशन शो लक्जरी ब्रांड Elle India की 15वीं वर्षगाँठ के अवसर पर शुक्रवार (7 मार्च) को गुलमर्ग के स्काइ रिसॉर्ट के पास खुले आसमान के नीचे आयोजित किया गया था। इसकी एक वीडियो सामने आई थी, जिसे देखने के बाद मीरवाइज उमर फारूक समेत कई मजहबी नेता भड़क उठे।

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा, “बेहद शर्मनाक! रमज़ान के पाक महीने में गुलमर्ग में एक अश्लील फैशन शो आयोजित किया गया। इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए हैं, जिससे लोगों में गुस्सा है और वो सदमे में हैं।” फारूक ने आगे कहा कि सूफी-संत संस्कृति और लोगों की गहरी मजहबी आस्था वाली इस घाटी में ये सब कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है?

फारूक के इसी ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला का ट्वीट आया। उन्होंने मीरवाइज के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “आपका गुस्सा पूरी तरह जायज है। मैंने जो तस्वीरें देखी हैं उसमें स्थानीयों की पूरी तरह से उपेक्षा दिखाई देती है और वह भी इस पाक महीने में…। मेरा कार्यालय स्थानीय लोगों के संपर्क में है। अगले 24 घंटे के भीतर एक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि मीरवाइज अकेला नहीं है जिसे इसे फैशन शो से समस्या हुई हो। आवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने भी गुलमर्ग में हुए फैशन शो की निंदा की। खुर्शीद ने पूछा, “रमज़ान के पाक महीने में गुलमर्ग में इस शर्मनाक फैशन शो की अनुमति किसने दी? बर्फ पर अर्धनग्न पुरुषों और महिलाओं के साथ, क्या पर्यटन विभाग और गुलमर्ग विकास प्राधिकरण (GDA) के सीईओ अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे? आप हमारे नैतिक, सांस्कृतिक और मजहबी मूल्यों को नष्ट करने पर इतने क्यों तुले हुए हैं?”

चैंपियंस ट्रॉफी में जीत का मना रहे थे जश्न, हैदराबाद-करीमनगर में पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा: BJP ने पूछा- कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का ये कैसा तरीका, कहाँ जश्न मनाएँ भारतीय?

भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर देश को जश्न का मौका दिया, लेकिन कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में क्रिकेट प्रशंसकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पूरे देश में लोग जीत की खुशी मना रहे थे, वहीं तेलंगाना के शहरों करीमनगर और हैदराबाद के दिलसुखनगर में तिरंगा लिए फैंस को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदराबाद के दिलसुखनगर में भीड़ जश्न मना रही थी, लेकिन पुलिस ने लाठियाँ भाँजकर उन्हें खदेड़ दिया। करीमनगर में भी तिरंगे के साथ जश्न मनाने वालों को रोक दिया गया और झंडा लहराने तक की इजाजत नहीं दी। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि कॉन्ग्रेस सरकार भारत की जीत पर जश्न को क्यों रोक रही है, जबकि पाकिस्तान की जीत पर कुछ नहीं कहती। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस मुद्दे पर तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा।

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “हैदराबाद पुलिस ने दिलसुखनगर में लाठीचार्ज किया। लोग भारतीय टीम की जीत का जश्न मना रहे थे। करीमनगर में भी ऐसा ही हुआ। कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का ये नया तरीका है? वे किसे खुश करना चाहते हैं? भारतीय कहाँ जश्न मनाएँ?”

करीमनगर के बीजेपी सांसद बंदी संजय कुमार ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “तेलंगाना के गृह मंत्री रेवंत रेड्डी बताएं- करीमनगर पुलिस किस देश का समर्थन कर रही है? भारत की जीत का जश्न नहीं मना सकते, लेकिन पाकिस्तान का नाम लिखी फ्लेक्सी हटाई जाएगी? जीत का उत्सव सांप्रदायिक कैसे हो गया? तेलंगाना डीजीपी और खुफिया विभाग बताएँ कि पुलिस कानून-व्यवस्था क्यों बिगाड़ना चाहती है? युवा कॉन्ग्रेस को इसका जवाब देंगे।”

लोगों में नाराजगी है कि अपनी ही जीत पर खुशी मनाने की आजादी छीनी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कॉन्ग्रेस की ऐसी मानसिकता क्यों है।

बता दें कि दिलसुखनगर वही इलाका है, जो 2 बार आतंकी हमलों का शिकार रहा है। साल 2002 में सिमी आतंकियों ने टाइम बॉम्ब का इस्तेमाल करके धमाका किया था, तो साल 2013 में इंडियन मुजाहिद्दीन के दोहरे धम धमाकों में 17 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हुए। इस मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकियों को सजा भी सुनाई गई थी।

चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत का जश्न मना रहे थे लोग, अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ ने कर दिया हमला: महू में आगजनी-पत्थरबाजी के बाद बुलानी पड़ी सेना

मध्य प्रदेश के इंदौर में चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाते लोगों पर मस्जिद से निकली मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। रमजान में मस्जिद में मौजूद लोगों ने चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाने वालों पर पथराव किया। इंदौर के कुछ इलाकों में कई गाड़ियों में आग लगाई गई। इस घटना के कई वीडियो भी वायरल हुए हैं।

रविवार (9 मार्च, 2025) को भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था और चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली थी। इसके बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था। इंदौर में भी युवा इसका जश्न मना रहे थे। उन्होंने बाइक पर बैठ कर इंदौर के अलग-अलग इलाकों में जुलूस निकाला।

जब यह सभी इंदौर के महू शहर में जामा मस्जिद रोड पर पहुँचे तो मस्जिद के सामने विवाद हो गया। एक वायरल वीडियो में दिखता है कि जुलूस के यहाँ पहुँचते ही मस्जिद से मुस्लिम भीड़ निकल आती है। इसके बाद शोर मचने लगता है। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग टीम की जीत पर नारे लगा रहे होते हैं।

कुछ ही देर में यहाँ जुलूस पर हमला हो जाता है। वायरल वीडियो में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के शोर भी सुनाई पड़ते हैं। इसके बाद लोग इधर उधर भागते हैं और पथराव होने लगता है। एक और वीडियो में दिखाई पड़ता है कि अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती भीड़ एक स्कूटी तोड़ रही है।

इसके बाद यह पथराव जामा मस्जिद के अलावा पत्ती बाजार, सब्जी मार्केट, गफ्फार होटल समेत कई इलाके हिंसा की चपेट में आ गए। यहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के फैन्स पर जम कर पथराव हुआ। इस पथराव के बाद दंगाई भीड़ ने कई गाड़ियों में आग भी लगा दी।

पेट्रोल बम भी चलाए जाने की सूचना है। दंगाई भीड़ ने कई जगह काफी गाड़ियाँ तोड़ी भी हैं। पथराव-आगजनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दंगे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी शहर में अलग-अलग जगह भेजी गईं।

इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने इस घटना के बारे में कहा, “इंडिया न्यूजीलैंड मैच के बाद जुलूस निकल रहे थे, इसमें मस्जिद के बाहर पटाखे चले तो विवाद हो गया। इसके बाद दो पक्षों के बीच पथराव हो गया। पुलिस बल अब मौजूद है। स्थिति नियंत्रण में है। अभी कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है। रात को ही उनको पकड़ा गया है।”

एसपी ने अपील की कि लोग अफवाह ना फैलाएँ और उन पर विश्वास भी करें। एसपी वत्सल के अनुसार, 3 लोग इस पथराव में घायल हुए हैं। पुलिस ने घटना के बाद महू में लाठीचार्ज भी किया है। 300 से अधिक पुलिसवाले यहाँ तैनात किए गए हैं।

महू, भारतीय सेना का भी एक प्रमुख केंद्र है। इसके चलते प्रशासन ने सेना की भी त्वरित कार्यवाही बल (QRT) की 8 टुकडियां भी बुला लीं। सेना ने भी शहर में फ्लैग मार्च किया। पथराव करने वालों कड़ी कार्रवाई की माँग कई संगठनों ने की है।

चैंपियंस ट्रॉफी का चैंपियन बना भारत, न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया: जिस रोहित की कॉन्ग्रेसी कर रहे थे बुराई, तूफानी पारी खेलकर दिलाई जीत, स्पिनरों का शानदार प्रदर्शन

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 जीत ली है। 9 मार्च को दुबई में खेले गए फाइनल में भारत ने चार विकेट से जीत हासिल की। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन बनाए, जिसे भारत ने 49वें ओवर की आखिरी गेंद पर चेज कर लिया। रोहित शर्मा फाइनल मुकाबले में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने।

बता दें कि चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान ही कॉन्ग्रेस पार्टी की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने बॉडी शेमिंग करते हुए रोहित शर्मा को निशाने पर लिया था। शमा मोहम्मद ने रोहित शर्मा को ‘मोटा’ और ‘भारत का सबसे बेकार कप्तान’ कहकर तंज कसा था।

ऐसा रहा फाइनल मुकाबले का हाल

भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने 76 रनों की तूफानी पारी खेली और शुभमन गिल के साथ 105 रनों की ओपनिंग साझेदारी की। गिल ने 31 रन बनाए, लेकिन मिचेल सेंटनर ने उन्हें आउट किया। इसके बाद विराट कोहली (1) और रोहित आउट हुए, फिर श्रेयस अय्यर (48) और अक्षर पटेल (29) ने पारी संभाली। आखिर में केएल राहुल और रवींद्र जडेजा ने भारत को जीत दिलाई। जडेजा ने चौका मारकर मैच खत्म किया। यह भारत की तीसरी चैम्पियंस ट्रॉफी है- 2002, 2013 के बाद अब 2025।

न्यूजीलैंड के लिए डेरिल मिचेल (63) और माइकल ब्रेसवेल (53*) ने अर्धशतक जड़े। रचिन रवींद्र (37) और विल यंग (15) ने अच्छी शुरुआत दी, लेकिन वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव ने दो-दो विकेट लेकर कीवी टीम को रोका। मोहम्मद शमी और जडेजा को एक-एक विकेट मिला।

खिलाड़ियों ने भी जीत पर खुशी जाहिर की। हार्दिक पांड्या ने कहा, “ICC इवेंट जीतना हमेशा खास होता है। 2017 में हार याद है, इस बार खुशी है। केएल ने शानदार खेल दिखाया।” जडेजा बोले, “कभी हीरो, कभी जीरो। विकेट मुश्किल था, लेकिन हार्दिक और केएल ने कमाल किया।” केएल राहुल ने हँसते हुए कहा, “डर लग रहा था, पर संयम रखा। टीम में स्किल है, BCCI ने हमें तैयार किया।”

रोहित शर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच मिला। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है। हमने पूरे टूर्नामेंट में शानदार क्रिकेट खेला। नतीजा हमारे हक में आना कमाल का अहसास है।”

आक्रामक खेल पर पूछे सवाल पर उन्होंने कहा, “ये मेरा नेचुरल स्टाइल नहीं है, पर मैं ऐसा करना चाहता था। जब कुछ अलग करते हो, तो टीम और मैनेजमेंट का साथ चाहिए। मैंने पहले राहुल भाई से बात की, अब गौती भाई से भी। ये मेरा मन था। मैंने सालों तक अलग तरीके से खेला, अब इस स्टाइल से नतीजे मिल रहे हैं। हमें पिच को समझना पड़ता है। मैं शुरू के पाँच-छह ओवर कैसे खेलना चाहता हूँ, ये मेरे दिमाग में साफ था। पहले आउट भी हुआ, पर सही तरीके से खेलना जरूरी है। टीम में गहराई होने से आजादी मिलती है। जडेजा जैसे खिलाड़ी 8 नंबर पर हों, तो ऊपर से तेज खेलने का भरोसा रहता है। जब तक मेरा दिमाग साफ है, सब बढ़िया है।”

मैच के बाद भारतीय खिलाड़ी जश्न में डूबे। जडेजा, हर्षित राणा और अर्शदीप ने गंगनम डांस किया, तो रोहित-कोहली ने डांडिया। वरुण चक्रवर्ती की तारीफ हुई, जिन्होंने टूर्नामेंट में कमाल किया। भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा और लगातार दूसरा ICC खिताब जीता।

बता दें कि रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने लगातार दूसरी आईसीसी ट्रॉफी जीती है। वो दुनिया के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने बतौर कप्तान आईसीसी के सभी टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेला है। बतौर कप्तान उन्होंने 2 आईसीसी ट्रॉफी जीती है।

₹55 लाख देकर ‘डंकी रूट’ से अमेरिका गया ‘गरीब’ सतपाल सिंह, इंडिया टुडे के मंच से उसे ‘बेचारा’ दिखा रहे थे राजदीप सरदेसाई: नेटिजन्स ने रगड़ कर ‘इमोशन’ का भूत उतारा

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सतपाल सिंह नाम के एक शख्स को बुलाया, जो अमेरिका से डिपोर्ट हुआ था। सतपाल ने 55 लाख रुपये खर्च कर गैरकानूनी तरीके से अमेरिका जाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे वापस भेज दिया गया। इस इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। लोग राजदीप पर गैरकानूनी इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं।

सतपाल ने बताया कि उसने पंजाब के फिरोजपुर से अमेरिका जाने के लिए अपनी जमीन बेची। उसका कहना था कि गरीबी की वजह से ऐसा किया, क्योंकि पिता की किडनी फेल हो गई थी और माँ की हार्ट सर्जरी हुई थी। उसने ट्रैवल एजेंट को 55 लाख दिए, जो उसे सूरीनाम ले गया। एजेंट ने वादा किया था कि वो फ्लाइट से अमेरिका जाएगा, लेकिन बाद में गैरकानूनी रास्ता अपनाने को कहा। सतपाल ने कहा, “मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मजबूरी थी।”

सतपाल ने अपनी आपबीती सुनाई कि अमेरिका में उसे ठंडे कमरों में रखा गया, बीमार होने पर दवा नहीं दी गई और डिपोर्टेशन के दौरान 15 दिन पनामा और 5 दिन सैन डिएगो में हथकड़ियों में रखा गया। उसने कहा, “हमें जानवरों की तरह ट्रीट किया गया।” उसने पंजाब सरकार से फर्जी एजेंट्स पर कार्रवाई और नौकरी देने की गुहार भी लगाई। लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने सतपाल को ही कटघरे में खड़ा किया।

पॉपुलर एक्स यूजर @GabbbarSingh ने ट्वीट कर पूछा कि 55 लाख खर्च करने वाला शख्स पीड़ित कैसे हो सकता है? उन्होंने तंज कसा कि क्या इंडिया टुडे अब ‘डंकी विकास योजना’ शुरू करेगा?

पद्मश्री से सम्मानित मोहनदास पई ने भी राजदीप को लताड़ा और कहा, “आप गैरकानूनी काम को ग्लोरिफाई क्यों कर रहे हैं? ये लोग जानते थे कि ये गलत है, फिर भी 55 लाख खर्च किए। इसे यहाँ इन्वेस्ट करते तो बेहतर जिंदगी होती।”

राजदीप ने जवाब में कहा, “मैं किसी को ग्लोरिफाई नहीं कर रहा। डंकी रूट लेने वालों की कहानी सुनना जरूरी है। ये एजेंट्स के शिकार हैं, विलेन नहीं। सवाल ये है कि लोग जमीन बेचकर विदेश क्यों जाना चाहते हैं? हम अपने आरामदायक जीवन से गरीबों को निशाना बनाना बंद करें। इन्हें रिहैबिलिटेट करें, जज न करें।” लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि 55 लाख रुपये वाला शख्स ‘गरीब’ कैसे हो सकता है? कुछ ने सतपाल को ‘भोला’ नहीं, बल्कि ‘दिल से पागल’ बताया, जो अमेरिकी सपने के पीछे सब कुछ दाँव पर लगा बैठा।

ये विवाद तब और बढ़ा, जब हाल ही में अमेरिका से कई भारतीयों को हथकड़ियों में डिपोर्ट किया गया। सतपाल की कहानी ने इस बहस को हवा दी। पहले भी अमेरिका गैरकानूनी इमिग्रेंट्स को वापस भेजता था, लेकिन इस बार तस्वीरों ने सनसनी मचा दी। कुछ लोगों ने इसे मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश माना। कुल मिलाकर सतपाल की कहानी और राजदीप का उसे मंच देना लोगों को पसंद नहीं आया। लोग कह रहे हैं कि गैरकानूनी काम को जायज ठहराना गलत है, चाहे मजबूरी हो या एजेंट की धोखेबाजी।