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हिंदी से नफरत, उर्दू से प्यार: DMK की भाषा सियासत पर BJP ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन से माँगा जवाब, दोहरा चरित्र किया बेनकाब

तमिलनाडु में भाषा को लेकर राजनीति हमेशा से गर्म मुद्दा रही है। एक तरफ डीएमके हिंदी के खिलाफ नारे लगाती है, तो दूसरी तरफ उर्दू को बढ़ावा देने की बात करती है। उसकी ये दोहरी नीति दशकों से चली आ रही है। वो उर्दू को लेकर स्वीकार्यता दिखाती है, लेकिन हिंदी का नाम लेते ही भौंहे टेढ़ी करने लग जाती है। इस पूरे मुद्दे पर अब बीजेपी फ्रंट पर आ रही है और डीएमके को घेरने की कोशिश कर रही है।

उर्दू, हिंदू को लेकर डीएमके के दोहरे चरित्र को लेकर बीजेपी नेता के अमित मालवीय ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर सवाल उठाए। अमित मालवीय ने स्टालिन के 2015 के उस वादे को याद दिलाया, जिसमें डीएमके नेता ने कहा था कि सत्ता में आने पर स्कूलों में उर्दू को अनिवार्य करेंगे और इसके लिए कानून बनाएँगे। मालवीय ने इसे ढोंग करार देते हुए पूछा कि जब हिंदी, मलयालम, कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाओं का विरोध हो रहा है, तो उर्दू को थोपना कहाँ तक ठीक है? उनका कहना था कि तमिलनाडु के युवाओं को मौके चाहिए, न कि भाषाई राजनीति।

डीएमके का हिंदी विरोध पुराना है। 1965 की हिंदी विरोधी आंदोलन की यादें आज भी ताजा हैं, जब द्रविड़ आंदोलन ने हिंदी को राज्य में लागू होने से रोका था। स्टालिन ने हाल ही में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के त्रिभाषा फॉर्मूले का विरोध करते हुए कहा कि तमिलनाडु फिर से भाषा युद्ध के लिए तैयार है। उनका तर्क है कि हिंदी जबरदस्ती थोपी जा रही है, जो तमिलों के सम्मान के खिलाफ है।

लेकिन सवाल यह है कि हिंदी को लेकर इतना हंगामा करने वाली डीएमके उर्दू को बढ़ावा देने में क्यों लगी है? क्या यह मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने की चाल नहीं?

साल 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि ने भी उर्दू को बचाने के लिए कदम उठाने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यक भाषाओं की रक्षा होगी। तब डीएमके ने मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन में यह बात कही थी। आज स्टालिन उसी रास्ते पर चलते दिख रहे हैं। हिंदी को ‘बाहरी’ बताकर खारिज करने वाली पार्टी उर्दू को लेकर इतनी नरम क्यों है? यह दोहरा रवैया साफ दिखता है। एक तरफ तमिल और अंग्रेजी को पर्याप्त बताकर त्रिभाषा नीति को ठुकराया जाता है, दूसरी तरफ उर्दू को लाने की बात होती है। यह तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई कम, राजनीतिक फायदे की रणनीति ज्यादा लगती है।

बीजेपी का आरोप है कि डीएमके भाषा के नाम पर तुष्टिकरण कर रही है। मालवीय ने पूछा कि अगर हिंदी थोपना गलत है, तो उर्दू को बढ़ावा देना सही कैसे? तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य दाँव पर है, जो हिंदी जैसी भाषा सीखकर राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन डीएमके की राजनीति उन्हें पीछे धकेल रही है।

स्टालिन कहते हैं कि वो हिंदी के खिलाफ नहीं, बस इसे थोपे जाने के खिलाफ हैं। पर उर्दू को लेकर उनकी चुप्पी और पुराने वादे इस दावे को खोखला बनाते हैं। क्या यह सिर्फ वोट की खातिर नहीं हो रहा?

जितनी पूरे अमेरिका की आबादी, उससे दो गुना ज्यादा लोगों ने 45 दिन में ही प्रयागराज महाकुंभ में लगा ली डुबकी: समापन पर खुद CM योगी ने की संगम की सफाई, त्रिवेणी की पूजा-अर्चना

प्रयागराज महाकुंभ 2025 का आज गुरुवार (27 फरवरी 2025) को आधिकारिक रूप से समापन हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान पूजा-अर्चना की। दुनिया का सबसे बड़ा यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक 45 दिन चला। इस दौरान 50 लाख से अधिक विदेशी सहित 66.21 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी पर स्नान किया। यह अमेरिका की जनसंख्या से दोगुना है।

महाकुंभ के आखिरी दिन महाशिवरात्रि को 1.44 करोड़ लोगों ने स्नान किया। वहीं, एक दिन में सबसे अधिक रिकॉर्ड 7.64 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या को स्नान किया था। गुरुवार को योगी आदित्यनाथ त्रिवेणी तट पर अपने दोनों उपमुख्यमंत्रियों- केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक एवं अन्य मंत्रियों के साथ वैदिक रीति-रिवाज से माँ गंगा, यमुना और सरस्वती का पूजा-पाठ किया। इस दौरान उन्होंने पक्षियों को दाना भी खिलाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस भव्य एवं दिव्य महाकुंभ के सफल समापन पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “यूपी का सांसद होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूँ कि योगी जी के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया। केंद्र हो या राज्य हो, यहाँ ना कोई शासक था और ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था।”

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “सनातन संस्कृति की दिव्य आभा से दीप्त इस विराट आयोजन ने सबसे ज्यादा लोगों द्वारा एक साथ नदी की सफाई करने, सबसे ज्यादा कार्यकर्ताओं द्वारा एक साथ एक जगह पर सफाई करने तथा 8 घंटे में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा हैंड प्रिंट पेंटिंग करने का कीर्तिमान ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में स्थापित कर एक नया इतिहास रचा है।”

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “महाकुम्भ में जनसहभागिता और स्वच्छता एवं कला के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक प्रयासों को रेखांकित करती यह उपलब्धियां स्वच्छता, सुरक्षा व सुव्यवस्था का दीर्घकालिक प्रतीक बनकर हम सभी को निरंतर प्रेरणा प्रदान करती रहेंगी। ‘एकता के महाकुम्भ’ को ‘रिकॉर्ड का महाकुम्भ’ बनाने वाले सभी कार्मिकों एवं महानुभावों का हार्दिक अभिनंदन!”

महाकुंभ समापन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सफाईकर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने गंगा तट पर झाड़ू लगाकर और गंगा से कूड़ा-कचड़ा निकालकर साफ-सफाई भी की। इसके बाद उनके साथ सहभोज किया। उस दौरान उनके मंत्रिमंडल के साथी भी मौजूद रहे। इसके साथ ही राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज महाकुंभ से जुड़े स्वच्छता कर्मियों को 10,000 रुपए का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रदेश के स्वच्छता कर्मियों को भी बड़ा उपहार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिन स्वच्छता कर्मियों को 8 से 11 हजार रुपए महीना मिलते थे, उन्हें अप्रैल से कम-से-कम 16,000 मिलेंगे। इसके साथ ही उन्हें आयुष्मान योजना से भी जोड़ा जाएगा।

इस आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार ने कड़ी मेहनत की थी। लगभग 4,000 हेक्टेयर (15,947 बीघा) में था फैला हुआ था। व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को 25 सेक्टर बाँटा गया था। इसके लिए अस्पताल, विश्राम गृह, शौचालय, पेयजल आदि की व्यवस्था की गई थी। लगभग 13 किलोमीटर के क्षेत्र में 10 पक्के घाट सहित कुल 42 घाट बनाए गए थे।

सुरक्षा के लिए 50,000 से अधिकार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। मेला क्षेत्र में 56 थाने और 144 चौकियाँ बनाई गई थीं। इसके अलावा 2 साइबर थाने भी बनाए गए थे। सुरक्षा को देखते हुए कमांडो, फायर ब्रिगेड, गोताखोर, जल पुलिस, नाव आदि की भी व्यवस्था की गई थी। गंगा और यमुना नदी को पार करने के लिए 30 पांटून पुल तैयार किए गए थे।

दरगाह की डेग से चर्च की वाइन तक में दिखती है ‘सेवा’, पर नजर नहीं आता संतों-मंदिरों का परोपकार… क्योंकि हम मजहब देख नहीं करते इलाज, मदद के नाम पर नहीं करते धर्मांतरण

दरगाह की बड़ी डेग में बनने वाले ‘मीठे राइस’ और चर्च में दी जाने वाली ‘लाल वाइन’ तो सोशल मीडिया पर अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं लेकिन क्या कभी आपको इन जगहों पर मंदिर में बँटने वाले भंडारों के बारे में सुनने को मिलता है? अगर हाँ, तो क्या आप इन भंडारों के महत्व को समझ पाते हैं या आपके लिए ‘भूखे का पेट’ भरने का मतलब केवल ‘फीड द हंग्री’ को समझने तक ही सीमित है? पूरी बात का मतलब क्या है, ये नीचे आपको पढ़ने पर समझ आता जाएगा।

हाल में मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम में 252 करोड़ रुपए की लागत से 2.37 लाख वर्ग फीट में बनने वाले कैंसर हॉस्पिटल का शिलान्यास हुआ। इसके कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए और यहाँ उन्होंने हमारे धार्मिक स्थलों को लेकर जो कहा वो सुनने के साथ समझने योग्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- “साथियों, आज कल नेताओं का एक दल ऐसा है, जो धर्म का मजाक उड़ाने में और लोगों को तोड़ने में लगा है। वे हिंदुओं की आस्था से नफरत करने वाले लोग हैं। ये हमारी मान्यताओं, संस्कृति और मंदिरों पर हमला करते हैं और हमारे पर्व और परंपराओं को गाली देते हैं…हमारे मंदिर पूजा के केंद्र होने के साथ ही सामाजिक चेतना के भी केंद्र रहे हैं। हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद और योग का विज्ञान दिया… दूसरों की सेवा करना और दूसरों के दुख दूर करना ही धर्म है।”

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नें पंडित धीरेंद्र शास्त्री को ‘मेरा छोटा भाई’ बताते हुए कहा ता- “मेरे छोटे भाई धीरेंद्र शास्त्री लोगों को जागरूक करते रहते हैं। एकता का मंत्र भी देते हैं। अब उन्होंने एक और संकल्प लिया है- इस कैंसर हॉस्पिटल के निर्माण की जिम्मेदारी। यानी अब बागेश्वर धाम में भजन, भोजन और निरोगी जीवन तीनों का आर्शीवाद मिलेगा। इस कार्य के लिए मैं धीरेंद्र शास्त्री का अभिनंदन करता हूँ।”

हर ओर बागेश्वर धाम के अस्पताल की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस शुभ अवसर पर पहुँचने से पूरे देश की नजर बागेश्वर धाम में खुले कैंसर अस्पताल पर गई। मीडिया में हर जगह इसकी चर्चा हुई। बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘कट्टर धार्मिक नेता’ के तौर पर पेश किया जाता है, उनकी इस पहल को हर समुदाय ने सराहा… लेकिन ऐसा नहीं है कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री या किसी हिंदू संस्थान द्वारा समाज की भलाई के लिए सोचा गया कोई पहला कार्य है।

कई दशकों से हिंदू संस्थान लोगों के स्वास्थ, शिक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरा करने की दिशा में काम करते आए हैं, मगर कभी उन्हें वो नाम और सम्मान नहीं मिला जितने के वो हकदार थे। खुद बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री लंबे समय से गरीब परिवार की बेटियों की शादी कराते रहे, लेकिन उनके इस कार्य की चर्चा आज जाकर हो रही है जब वहाँ राष्ट्रपति मुर्मू मौजूद हैं, जिनकी नजर में ये कार्य पुण्य का है, न कि कोई प्रोपगेंडा।

बागेश्वर धाम की तरह तमाम धार्मिक स्थल हैं और पंडित धीरेंद्र शास्त्री जैसे कई संत समाज के लोग, जो समय-समय पर संबल होने पर समाज के लिए ऐसे परोपकारी कदम उठाते आए हैं। उदाहरण तमाम हैं, लेकिन यहाँ चर्चा कुछ चंद की करते हैं…

परोपकार में जुटे हिंदू मंदिर

आपने पटना के महावीर मंदिर के बारे में सुना होगा। 1730 में बना महावीर मंदिर, न जाने कितने सालों से रोजाना 3000-4000 लोगों का पेट भरता है। मंदिर की ओर से राम-रसोई, सीता रसोई चलाई जाती है जो हर श्रद्धालु का पेट भरने के लिए 10-10 तरीके के व्यंजन बनाती है। इसके अलावा इस मंदिर से तीन अस्पतालों के मरीजों के लिए भी तीनों समय का भोजन निशुल्क जाता है।

इसी तरह गोरखनाथ मंदिर। यहाँ के महंत स्वयं यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ हैं। इस मंदिर द्वारा गोरखनाथ चिकित्सालय विभिन्न प्रकार की चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता है, जिसमें सामान्य OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट), पैथोलॉजी, ब्लड बैंक, डायलिसिस विभाग और विभिन्न विशेषज्ञताओं जैसे हृदय रोग, चर्म रोग, बाल रोग, मानसिक रोग आदि शामिल हैं। यहाँ पर मरीजों को मात्र 30 रुपए की फीस पर इलाज किया जाता है, जो इसे आर्थिक रूप से सुलभ बनाता है।

इसके बाद मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर। इस मंदिर का ट्रस्ट केवल धार्मिक गतिविधियों को नहीं देखता बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय है। सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित फ्री कैंसर चिकित्सालय का उद्देश्य उन मरीजों को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करना है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यहाँ केवल मरीजों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं बल्कि यहाँ पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम काम करती है जो नवीनतम तकनीकों और उपचार विधियों का उपयोग करती है। इनका एक डायलिसिस केंद्र भी है उन रोगियों के लिए आवश्यक सेवाएँ प्रदान करता है जिन्हें किडनी संबंधी समस्याओं के कारण नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है। 

धार्मिक संगठन होते हुए सामाजिक कार्यों के लिए बढ़-चढ़कर योगदान देने वाली संस्थाओं में एक नाम इस्कॉन का भी है। इस्कॉन में न केवल जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण कार्यक्रम चलाया जाता है, बल्कि इस्कॉन द्वारा समय-समय मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उपचार, स्वास्थ्य जाँच आदि भी कराई जाती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी ये संगठन बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाता है। युवाओं को नैतिकता और जीवन के उद्देश्यों के बारे में बताता है।

कोविड काल में सहायक हुए थे हिंदू मंदिर

कोविड काल में भी हिंदू मंदिरों ने आगे आ आकर जरूरतमंदों की सहायता की थी और सरकार का काम आसान करने का पूरा प्रयास किया था।  महावीर मंदिर से मुफ्त में कोविड संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन देने का काम शुरू हुआ था। मुंबई के जैन मंदिर ने अपने मंदिर को ही कोविड सेंटर में परिवर्तित करवा दिया था। महाराष्ट्र के संत गजानन मंदिर में 500-500 बेड के आइसोलेशन सेंटर बनाए गए थे। वाराणसी के काशी मंदिर ने मुफ्त में लोगों को दवाएँ वितरित की थीं। इस्कॉन मंदिर ने गर्भवती, बुजु्र्ग और बच्चों के लिए फ्री में खाने घर तक पहुँचाने की व्यवस्था की थी। इंदौर के राधास्वामी सत्संग व्यास को कोविड के समय में दूसरा सबसे बड़ा कोविड सेंटर बनाकर ऱखा गया था।

आर्थिक सहायता की बात करें तो इसमें भी हिंदू मंदिर कभी पीछे नहीं रहे। सोमनाथ मंदिर और गुजरात के अंबाजी मंदिर ने कोविड काल से निपटने के लिए 1-1 करोड़ रुपए सीएम राहत कोष में दिए थे। सिद्धिविनायक मंदिर ने कोरोना काल के वक्त महाराष्ट्र सरकार को 10 करोड़ की मदद की थी। शिरडी साई बाबा मंदिर ने भी मुख्य राहत कोष में 51 करोड़ रुपए देने का निर्णय लिया था। इसी तरह गोरखनाथ पीठ और उससे संबंधित कुछ संस्थाओं और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् ने ‘पीएम केयर फंड’ एवं ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में अब तक 51,00000 रुपए का योगदान भी दिया।

इसके अलावा बाहरी देशों में स्थित हिंदू मंदिरों ने भी संकट के काल में न केवल अपने देश के लोगों की सहायता की बल्कि भारत की मदद करने के लिए भी आगे आए। थाईलैंड के बैंकॉक में हिंदू समाज मंदिर ने भारत को कोरोनावायरस की दूसरी लहर से लड़ने में मदद करने के लिए समर्थन जुटाया। जॉर्जिया के ब्लूमिंगडेल में श्री राधेश्याम मंदिर सहित अमेरिका में कई हिंदू मंदिरों ने अहमदाबाद, भारत में एसजीवीपी होलिस्टिक अस्पताल को चिकित्सा सहायता के लिए सीधे धन जुटाया। लंदन में BAPS स्वामीनारायण मंदिर ने भी भारत के लिए 8 लाख 30 हजार डॉलर की की धनराशि जुटाई।

निस्वार्थ भाव से करते हिंदू संत सेवा

दिलचस्प बात ये हैं कि हिंदू मंदिरों, संगठनों, संस्थाओं ने ये सारे काम बिना किसी गुप्त उद्देश्य के किए। उन्होंने कभी कोई प्रलोभन देकर या अपना प्रचार करके ये नहीं दिखाया कि वो जगत में कल्याण के लिए क्या-क्या कर रहे हैं। बागेश्वर धाम में बना कैंसर अस्पताल बस एक और बड़ा उदाहरण है जो हिंदू संतों के उन प्रयासों को उजागर करता है जिन्हें वामपंथी हमेशा से दबाने की कोशिश करते रहे।

उन्हें हमेशा अगर परोपकार दिखा तो ईसाई मिशनरियों के कार्य में। उन्होंने मदर टेरेसा को ‘मसीह’ बता बताकर प्रमोट किया बिना ये देखे कि जिन्होंने भोपाल त्रासदी का समर्थन किया हो, इमरजेंसी में सुख खोजा हो, जिनकी शुरू की गई संस्था में लड़कियों के शोषण के मामले दर्ज होते रहे, वो- मसीह कैसे हो सकता है।

बड़ी चालाकी से वामपंथियों ने टेरेसा को ‘मदर’ की उपाधि दे दी, लेकिन साध्वी ऋतम्भरा की छवि कट्टर हिंदू से ऊपर नहीं उठने दी। वामपंथियों ने कभी साध्वी ऋतम्भरा जैसी सनातनी महिलाओं के बारे में दुनिया को ये बताना जरूरी नहीं समझा कि वह कैसे- वात्सल्य ग्राम के जरिए अनाथ बच्चों एवं परित्यक्त महिलाओं को आवास, भोजन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा का प्रबन्ध करवाती हैं।

वामपंथियों ने आगे बढ़ाया पादरी बिजेंद्र जैसे लोगों का नाम जो खुलेआम लोगों को लालच देकर धर्मांतरित होने के लिए आकर्षित करते हैं और छवि बिगाड़ने की कोशिश की अनिरुद्ध आचार्य महाराज जैसे लोगों की, जो गौरी गोपाल आश्रम में वृद्धों के लिए आश्रम चलाते हैं, रोजाना न जाने कितनों को भोजन कराते हैं।

आज खोजेंगे तो ऐसे तमाम उदाहरण मिल जाएँगे, लेकिन पहले ऐसा संभव नहीं था। पहले हिंदू धर्म की बात करने वाला और प्रचार-प्रसार करने वाला कट्टर धर्मनेता की गिनती में आता था और जाकिर नाइक जैसे लोग समाज में शांति का संदेश देने वाले माने जाते थे।

आज स्थिति बदली है तो मालूम होना चाहिए कि हिंदुओं के सारे धार्मिक संगठन बिना लोगों की जाति-धर्म-पंथ-वर्ग देखे ये परोपकार करते हैं। वह गरीब का पेट भरने के लिए उसके दरवाजे पर आने का इंतजार नहीं करते, या अपनी रसोइयाँ दिखाकर प्रचार नहीं करते। वह इलाज का लालच देकर लोगों का धर्मांतरण नहीं कराते, बेघरों को आश्रय देने के लिए उनका धर्म नहीं जाँचते, शिक्षा के नाम केवल शिक्षा देते हैं, अपना कोई मिशन पूरा नहीं करते।

संभल का ढाँचा नहीं है मस्जिद, हाई कोर्ट ने भी आदेश में कहा ‘कथित मस्जिद’: रंगाई-पुताई पर बनाई कमेटी, ASI करेगी निरीक्षण; हिंदुओं ने बताया था मंदिर के निशान मिटाने की साजिश

संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया कि वो मस्जिद में जाकर देखे कि रमजान से पहले सफेदी और सजावट की कितनी जरूरत है। इसके लिए ASI की तीन लोगों की टीम बनाई गई है, जो मस्जिद का मुआयना करेगी और शुक्रवार (28 फरवरी 2025) सुबह 10 बजे तक कोर्ट में रिपोर्ट देगी।

यह फैसला जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने मस्जिद की प्रबंधन समिति की अर्जी पर सुनाया। समिति चाहती थी कि रमजान की तैयारी के लिए मस्जिद में रंगाई-पुताई और दूसरा काम हो, लेकिन पुलिस और ASI ने इसे रोक दिया था।

रमजान के मौके पर मरम्मत-सफेद की जरूरत

मस्जिद कमेटी का कहना है कि रमजान 1 मार्च से शुरू हो रहा है, इसलिए मस्जिद को तैयार करना जरूरी है। वे हर साल सफेदी, सफाई, टूटी चीजों की मरम्मत और लाइटिंग का काम करते हैं ताकि नमाजियों को परेशानी न हो। कमेटी ने कहा कि अजान और ये काम उनकी धार्मिक आजादी का हिस्सा हैं, जो संविधान के आर्टिकल 25 और 26 में मिली है। लेकिन ASP नॉर्थ संभल ने 11 फरवरी को चिट्ठी लिखकर कहा कि मस्जिद संरक्षित स्मारक है, इसलिए ASI की इजाजत चाहिए।

कमेटी को ये बात गलत लगी, क्योंकि उनका दावा है कि सालों से वे खुद ये काम करते आए हैं और पहले कोई दिक्कत नहीं हुई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान कमेटी के वकील SFA नकवी ने कहा कि ASI को खुद ये काम करना चाहिए, लेकिन वो बेवजह रोक रहे हैं।

मस्जिद नहीं, ‘कथित’ मस्जिद

ASI के वकील मनोज कुमार सिंह ने जवाब दिया कि कमेटी उनके लोगों को मस्जिद में घुसने नहीं दे रही। दूसरी तरफ, हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने विरोध किया। उनका कहना था कि पुताई के बहाने मस्जिद में मौजूद कथित हिंदू निशान मिटाए जा सकते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि कोर्ट इसे सिर्फ मस्जिद न माने, जिसके बाद जस्टिस ने ऑर्डर में ‘कथित मस्जिद’ लिखवाया।

कोर्ट के फैसले के अहम बिंदु

  • कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रमजान में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहना चाहिए और दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाए।
  • ASI को मस्जिद की जाँच करने को कहा गया, ताकि ये पता चले कि काम जरूरी है या नहीं।
  • ASI ने अपनी टीम के लिए सुरक्षा माँगी, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि इसकी जरूरत नहीं।
  • हरिशंकर जैन की चिंता पर कोर्ट ने भरोसा दिया कि हिंदू निशानों को नुकसान नहीं होगा।

अब सबको ASI की रिपोर्ट का इंतजार है, जो बताएगी कि मस्जिद में काम हो सकता है या नहीं। बता दें कि इसी मस्जिद के सर्वे के दौरान इस्लामी भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसके बाद तनाव फैल गया था। संभल में दंगाइयों के निशाने पर हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन थे।

योनि में लिंग का प्रवेश ही नहीं बलात्कार, वीर्य न भी गिरे तो भी यौन उत्पीड़न: केरल हाई कोर्ट ने POCSO के मामलों में ‘रगड़-स्पर्श-वीर्यपतन’ का दायरा बाँधा

केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में POCSO एक्ट के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़िता के बाहरी जननांग (लेबिया मेजोरा या वल्वा) के साथ मामूली शारीरिक संपर्क भी यौन हमला माना जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा कि यह क्रिया यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO अधिनियम) की धारा 3 के तहत प्रवेशात्मक यौन हमले का अपराध होगा। इसके साथ ही आरोपित की सरकार को बरकरार रखा।

जस्टिस पीबी सुरेश कुमार और जोबिन सेबेस्टियन की खंडपीठ ने इस परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा, “स्त्री के बाहरी जननांग लेबिया मेजोरा या वल्वा में पुरुष जननांग का प्रवेश, चाहे वो आंशिक हो या मामूली हो, POCSO अधिनियम के तहत प्रवेशात्मक यौन हमले का अपराध होगा।” हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस दौरान चाहे वीर्य का उत्सर्जन हुआ हो या नहीं, यह मायने नहीं रखता।

याचिका दायर करने वाले आरोपित का तर्क था कि अभियोजन पक्ष IPC की धारा 376 में बलात्कार को साबित करने के लिए बताए गए जरूरी घटक लिंग के प्रवेश को साबित नहीं कर पाया। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने पीड़िता की मेडकिल रिपोर्ट का भी हवाला दिया और कहा कि उसकी हाइमन बरकरार थी। इसलिए इसे बलात्कार की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।

हालाँकि, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज करते कहा कि अगर हाइमन नहीं टूटा, इसका मतलब ये नहीं है कि बलात्कार या प्रवेशात्मक यौन हमले का अपराध नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा कि साल 2013 में संशोधित IPC की धारा 375 (बलात्कार) में प्रवेशात्मक हमला सिर्फ योनि में पुरुष जननांग के पूरी तरह प्रवेश तक सीमित नहीं है। इसमें बाहरी महिला जननांग और उसके आसपास का प्रवेश भी शामिल है।

कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट में प्रवेशात्मक यौन हमले की परिभाषा में ‘योनि’ को साफ तौर परिभाषित नहीं किया गया है। इसलिए यहाँ IPC की परिभाषा को लागू किया जा सकता है, जिसमें आंशिक प्रवेश भी प्रवेशात्मक यौन हमला माना जाएगा। कोर्ट ने योनि में पूर्ण लिंग के प्रवेश को ही अपराध बनाने की आवश्यकता के तर्क को नकार दिया। इस तरह हाई कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को 25 साल के कठोर कारावास में बदल दिया।

दरअसल, केरल के कासरगोड में अपीलकर्ता ने 4 साल की बच्ची का अपने घर पर बार-बार बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया था। अपीलकर्ता पीड़िता का पड़ोसी है। कुछ समय के बाद बच्ची ने अपनी माँ से बताया कि उसके जननांग में दर्द हो रहा है। उस उसकी माँ उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई तो डॉक्टर को यौन शोषण का संदेह हुआ और उसने पुलिस को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद पुलिस ने मेडिकल के आधार पर SC/ST Act और POCSO Act सहित रेप एवं IPC की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान कासरगोड की निचली अदालत ने आरोपित को रेप का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सुनाई। इसके साथ ही उस पर 25,000 रुपए का जुर्माने भी लगाया। इस फैसले के खिलाफ आरोपित केरल हाई कोर्ट गया था।

केरल हाई कोर्ट ने इस केस के तमाम पहलुओं एवं साक्ष्यों को देखने-सुनने और विचार करने के बाद आरोपित की अपील याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उसके आजीवन कारावास की सजा को 25 साल की कठोर कारावास में बदल दिया। न्यायालय ने कहा कि पीड़िता द्वारा दोषी को जानबूझकर फँसाने के संकेत नहीं हैं, क्योंकि दोनों के बीच किसी तरह की दुश्मनी नहीं है।

योनि, गुदा, मुँह में प्रवेश ही नहीं… जाँघों पर लिंग रगड़ना भी रेप

ऐसे ही एक मामले में केरल हाई कोर्ट ने 4 अगस्त 2021 को कहा था कि आरोपित को महिला के किसी भी अंग के साथ छेड़छाड़ करने से यौन संतुष्टि मिलती है तो ये भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार माना जाएगा। चाहे उसने अपने लिंग को महिला की योनि में प्रवेश कराया हो या नहीं कराया हो। दरअसल, बच्ची से रेप के आरोपित ने याचिका दायर कर कोर्ट से यह जाँचने की माँग की थी कि बच्ची की जाँघों के बीच लिंग रगड़ना बलात्कार है या नहीं।

कोर्ट ने कहा था कि IPC की धारा 375 में बलात्कार की परिभाषा में पीड़िता की जाँघों के बीच जननांग में प्रवेश कराना यौन हमला है। हाई कोर्ट कहा था, “आईपीसी की धारा 375 में योनि, मूत्रमार्ग, गुदा और मुँह (मानव शरीर में ज्ञात छेद) में लिंग के प्रवेश के अलावा यौन संतुष्टि के लिए अगर आरोपित कल्पना करके पीड़िता के शरीर के अन्य अंगों को ऐसा आकार दे कि उसे लिंग के रगड़े से यौन सुख मिले और वीर्य स्खलन हो तो यह बलात्कार की श्रेणी में आएगा।”

अंडरवियर हटाए बिना भी लिंग का स्पर्श बलात्कार

मेघालय हाई कोर्ट ने मार्च 2022 में एक नाबालिग से रेप के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि पीड़िता की अंडरवियर पर लिंग का स्पर्श भी बलात्कार माना जाएगा। अदालत ने कहा था कि अगर यह मान भी लिया जाए कि आरोपित ने चड्डी पहने हुए ही पीड़िता की योनि या फिर उसके मूत्रमार्ग में जबरन अपना लिंग प्रवेश कराने की कोशिश की तो भी यह IPC की धारा 375 (B) के तहत रेप होगा।

कोर्ट ने कहा था, “23 सितंबर 2006 की घटना में एक सप्ताह बाद 10 साल की पीड़िता का मेडिकल टेस्ट किया गया तो उसकी योनि कोमल और लाल पाई गई थी। उसका हाइमन (कौमार्य झिल्ली) टूटा हुआ था। जाँच करने वाले डॉक्टर का भी कहना था कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है। पीड़िता ने भी कहा था कि आरोपित ने उसकी चड्डी को नीचे खींचा था।”

UNHRC में पाकिस्तान ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, तो भारत ने रगड़ दिया : कहा – ‘भीख पर जीने वालों को लेक्चर देने का हक नहीं’

पाकिस्तान को एक बार फिर भारत से मुँह की खानी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की जिनेवा बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का राग अलापा, लेकिन भारत ने उसे ऐसा जवाब दिया कि उसकी बोलती बंद हो गई। पाकिस्तान के कानून मंत्री अजम नजीर तरार ने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और आत्मनिर्णय के अधिकार की बात उठाई, लेकिन भारत के डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी ने उसे जमकर लताड़ लगाई। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान खुद एक असफल देश है, जो अंतरराष्ट्रीय भीख (मदद) पर जीकर आतंकवाद को पालता है। ऐसे में उसे दूसरों को लेक्चर देने का कोई हक नहीं है।

अपने लोगों की जिंदगियाँ सुधारे पाकिस्तान

UNHRC में भारत ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा उसके अभिन्न हिस्से रहेंगे। त्यागी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में इन इलाकों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तरक्की हुई है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव दिखाते हैं कि वहाँ के लोग सरकार पर भरोसा करते हैं, जो पाकिस्तान के आतंकवाद से जख्मी इस इलाके में शांति लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान को नसीहत दी गई कि उसे भारत पर कीचड़ उछालने की बजाय अपने लोगों को इंसाफ और बेहतर जिंदगी देने पर ध्यान देना चाहिए।

मानवाधिकारों की रक्षा में हिंदुस्तान आगे

भारत ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा कि वहाँ मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों पर जुल्म और लोकतंत्र का गला घोंटना आम बात है। त्यागी ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान का बड़बोलापन ढोंग से भरा है और उसकी हरकतें अमानवीय हैं। उन्होंने ये भी कहा कि भारत लोकतंत्र और अपने लोगों की गरिमा को मजबूत करने में जुटा है, जो पाकिस्तान को सीखना चाहिए। इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी UN में कहा था कि भारत मानवाधिकारों की रक्षा और आतंकवाद से लड़ाई में हमेशा आगे रहा है।

पाकिस्तान की इस हरकत से साफ है कि वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए कश्मीर का मुद्दा उठाता रहता है। लेकिन भारत हर बार उसे आईना दिखाने में कामयाब रहा है। त्यागी ने ये भी कहा कि पाकिस्तान ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का गलत इस्तेमाल कर रहा है और उसका मजाक बना रहा है। भारत का कहना है कि उसे इस तरह की बकवास पर वक्त बर्बाद करने की बजाय अपने देश की बदहाली सुधारने की ओर ध्यान देना चाहिए।

काम धाम कुछ नहीं, प्रचार पर पानी की तरह बहाया पैसा: 5 साल में विज्ञापन पर 1200% बढ़ाया खर्च, CAG रिपोर्ट से दिल्ली की AAP सरकार की एक और करतूत आई सामने

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने विज्ञापनों पर बेतहाशा रुपये खर्च किए। CAG यानी Comptroller and Auditor General द्वारा सरकारी खर्चों पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि AAP सरकार ने 2018 से 2022 के बीच विज्ञापनों पर खर्च 1200% बढ़ा दिया। यानी 2018 में जहाँ 46.90 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, वो 2022 तक बढ़कर 612.80 करोड़ रुपये हो गए। इस तरह 5 साल में 1200 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि ये खर्च सुप्रीम कोर्ट के नियमों को तोड़ते हुए किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CAG ने पाया कि विज्ञापनों के लिए कोई ठीक प्लानिंग नहीं हुई। न तो ये तय किया गया कि विज्ञापन किसे दिखाना है, न ही बाद में चेक किया कि इसका असर क्या हुआ। पैसे देने में भी लापरवाही हुई। कई एजेंसियों को बिना जाँच के पेमेंट कर दी गई। यहाँ तक कि 2015-17 के विज्ञापनों के लिए 2020-22 में 57.90 करोड़ रुपये दे दिए गए, जो सुप्रीम कोर्ट के नियमों के खिलाफ है। दिल्ली से बाहर भी ढेर सारे विज्ञापन चलाए गए, जो गलत माना गया।

रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ कि दिल्ली सरकार की पब्लिसिटी देखने वाली संस्था ‘शब्दार्थ’ में भी गड़बड़ियाँ थीं। वहाँ काम करने वाले कुछ लोग टेंडर देने में दखल दे रहे थे और बिना ठीक जाँच के एजेंसियाँ चुन ली गईं। खर्च का हिसाब-किताब भी साफ नहीं था। DIP यानी Department of Information and Publicity ने पुराने पेमेंट्स का डेटा तक ठीक से नहीं दिया। इससे सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

AAP पर ये भी इल्जाम है कि उसने सरकारी विज्ञापनों के नाम पर अपनी पार्टी का प्रचार किया। इसके लिए 97 करोड़ रुपये वसूलने की बात हुई, जिसमें से 42 करोड़ रुपये चुका दिए गए, बाकी बचे पैसों की वसूली अभी बाकी है। इस बीच, विज्ञापन देने वाली एजेंसियों ने कई कोर्ट्स, ट्रिब्यूनल में आम आदमी पार्टी/सरकार के खिलाफ केस दर्ज कराए हैं, जिसमें विज्ञापन सेवा के बदले भुगतान न किए जाने की बात है। इन सभी मामलों की जाँच के लिए दिल्ली के L-G वीके सक्सेना ने आदेश भी दिए थे, इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए जमकर विज्ञापन जारी किए।

इस बीच, मोहल्ला क्लीनिक पर आई रिपोर्ट में भी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। खास बात ये है कि 2016 से 23 के बीच 35.16 करोड़ रुपये मोहल्ला क्लीनिक को बनाने के लिए रखे गए थे, लेकिन सिर्फ 28% राशि ही खर्च की गई। AAP सरकार मोहल्ला क्लीनिक को लेकर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करती रही। यही नहीं, पर्यावरण प्रदूषण को लेकर हल्ला मचाने वाली दिल्ली सरकार ने सिर्फ 7 जगहों पर प्रदूषण की जाँच की व्यवस्था की, जबकि दिल्ली में 128 एंट्री प्वॉइंट्स हैं।

‘मजहब’ के नाम पर मुस्लिम लड़कों को जोड़ा, ब्यावर में खड़ा कर दिया रेप-धर्मांतरण गैंग: पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी है सरगना, पीड़िताओं से कहता था- डरो मत, इससे कुछ नहीं होगा

राजस्थान के बिजयनगर रेप कांड मामले में नए खुलासे हुए हैं। अभी तक जहाँ सिर्फ ये कहा जा रहा था कि कुछ मुस्लिम युवकों ने मिलकर हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए, उनका धर्मांतरण कराने के लिए अपनी गैंग बनाई तो अब पता चला है इस पूरे नेटवर्क के तार इलाके के पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी से जुड़े थे।

हकीम कुरैशी ने ही अपने साथ अलग-अलग मुस्लिम लड़कों को जोड़ा था। इनमें कोई वेल्डिंग का काम कर रहा था तो कोई पेंटिंग का कर रहा था। किसी का काम टेंपो चलाना था तो किसी का गैराज में गाड़ी बनाना था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 23 फरवरी को पुलिस ने इस हकीम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उन्हें पता चला है कि पहले भी एक पीड़िता अपनी शिकायत में इसका नाम ले चुकी थी। पीड़िता ने बताया था कि हकीम ने उसे कहा था कि ये सब करना गलत नहीं है और इससे कुछ नहीं होगा, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा। पुलिस अब इस पड़ताल में जुटी है कि कहीं हकीम इन सबके जरिए कोई अन्य प्लानिंग तो नहीं कर रहा था।

बता दें कि इस केस में गिरफ्तार आरोपितों के नाम हकीम कुरैशी के अलावा, सोहेल, रेहान, करीम, आशिक, लुकमान, अफराज, श्रवण जाट हैं। इनमें आशिक बिजयनगर का ही रहने वाला है जो इलाके में रहकर टेंपो चलाता है। इसी ने हिंदू लड़कियों को फँसाने का काम चालू किया था। इसने अपने टेंपो में बिठाकर छात्रा से दोस्ती की थी और बाद में उसे कीपैड फोन दिलाकर उससे बातें करने लगा। जब लड़की पूरी तरह जाल में फँस गई तो उसने लड़कियों से फोटो-वीडियो मँगा ली और बाद में उसे दोस्तों में साझा कर दिया।

इसके बाग सोहेल मंसूरी, रिपोर्ट बताती हैं कि ये पीड़िताओं को सबसे ज्यादा धमकाने का काम करता था। ये एक के बाद दूसरी और दूसरी के बाद तीसरी लड़की फँसा रहा था और उन्हें सबसे ज्यादा धमकाता भी यही थी। करीम खां भी टेंपो चलाता था, साथ ही लड़कियों को फँसाकर उनके साथ अश्लील चैटिंग करता था।

लुकमान वेल्डिंग का काम करता था, वहीं रेहान हमाली का काम करता था… ये लोग इतने पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन लड़कियों को फँसाने के काम में माहिर थे। इनके जैसा ही अफराज भी था जिसने प्राथमिक शिक्षा भी नहीं ली थी और गैराज में काम करके गुजर-बसर करता था, मगर बात जब लड़कियों को धमकाने की आती थी तो ये लड़कियों को धर्मांतरण के लिए मजबूर करता था। इन सारे आरपितों के अलावा तीन अन्य नाबालिग और भी हैं। पुलिस ने इन सबके साथ उन्हें भी हिरासत में लिया है।

पुणे इंटरनेशल एयरपोर्ट की बाउंड्री वाल से सटकर रातोंरात उग गई मजार, इस्लामी ढाँचे के लिए दीवार ने बदला रास्ता-सड़क हुई सँकरी: नागरिक उड्डयन मंत्री से शिकायत

पुणे के लोहगाँव में स्थित पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बाउंड्री वॉल को एक कथित अवैध मजार की वजह से बदलना पड़ा है। सड़क के किनारे चल रही दीवार मजार के पास अंदर की ओर मुड़ जाती है, ताकि इस इस्लामी ढाँचे को जगह मिल सके। इस मजार को लेकर शिकायत दर्ज की गई है कि ये अवैध है और पहले यहाँ नहीं थी।

शिकायत नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के दफ्तर में दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस अवैध मजार की वजह से सड़क पर ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है, और इसे हटाने की माँग की गई है।

पुणे एयरपोर्ट की बाउंड्री वाल के पास बनी अवैध मजार

इस सड़क से रोजाना आने-जाने वाले शख्स ने बताया कि ये मजार अचानक से बन गई, जिसके बाद हवाई अड्डे की दीवार को मोड़ना पड़ा। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि रातों-रात मजार न सिर्फ बनकर खड़ी हुई, बल्कि एयरपोर्ट की बाउंड्री भी टेढ़ी कर दी गई, ये कोई छोटा काम नहीं है। ऑपइंडिया से बात करते हुए एक सूत्र बताया कि इसकी शिकायत मंत्री तक पहुँच गई है, जल्द ही एक्शन हो सकता है।

ये मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी अवैध धार्मिक संरचनाएँ आए दिन बनती जा रही हैं। नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक या प्रतिबंधित जमीन पर बिना इजाजत कोई ढाँचा नहीं बन सकता, लेकिन फिर भी ये मजार जैसे ढाँचे बन रहे हैं, जिससे चिंता बढ़ रही है।

बॉक्सिंग-कबड्डी चैंपियन की शादी बनी ‘अखाड़ा’: स्वीटी बूरा बोली- दहेज के लिए पीटता है, दीपक हुड्डा बोले- प्रॉपर्टी हड़पना चाहती है; जानिए FIR-तलाक की नौबत क्यों आई

विश्व चैंपियन बॉक्सर स्वीटी बूरा ने कबड्डी खिलाड़ी अपने पति दीपक हुड्डा पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने पति से अलग होने का भी निर्णय लिया है। स्वीटी ने अपने पति और ननद पर एक करोड़ रुपया माँगने और मारपीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, दीपक हुड्डा ने स्वीटी पर जान से मारने की धमकी देने और उनके परिवार की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है।

हरियाणा की रहने वाली स्वीटी ने इस संबंध में अपने पति दीपक हुड्डा के खिलाफ 11 फरवरी को हिसार पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में स्वीटी ने कहा है कि 7 जुलाई 2022 को दीपक के साथ उनकी शादी हुई थी। शादी में उनके परिजनों ने एक करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए खर्च किए थे और लोन पर लेकर फॉर्च्यूनर कार दी थी। इसके बाद भी दीपक और उनकी बहन पूनम कम दहेज लाने का ताना मारती थीं।

स्वीटी का कहना है कि शादी के बाद उन पर बॉक्सिंग छोड़ने का दबाव बनाया जाने लगा। उनसे कहा जाता कि घर का काम करो। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपक की बहन ने कहा कि कई परिवार थे, जो दीपक से अपनी बेटी की शादी होने पर 2 करोड़ रुपए तक खर्च करने को तैयार थीं। पूनम कहती थीं कि दीपक हुड्डा की शादी में कम खर्च की वजह से इलाके में उनकी इज्जत कम हो गई है।

स्वीटी ने कहा कि शादी के बाद दीपक घर से बाहर रहने लगे और 5-6 दिन पर घर आते। इसके बारे में जब स्वीटी पूछती तो दीपक हुड्डा गुस्से में आ जाते। वह कहते, “मैं बहुत बड़ा नेता हूँ। बड़ा नाम हूँ। मुझे कई कार्यक्रमों में जाना पड़ता है। इसलिए घर नहीं आ सकता। तुम्हारे साथ सिर्फ शारीरिक जरूरत को पूरा करने के लिए शादी की है।” बता दें कि 2015 से स्वीटी और दीपक लिव-इन रिलेशन में रहते थे।

स्वीटी का आरोप है कि दीपक हुड्डा ने 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा की टिकट पर महम से चुनाव लड़ा था। इसके लिए स्वीटी से एक करोड़ रुपए लाने के लिए कहा। जब उन्होंने अपने मायके से रुपए माँगने में असमर्थता जताई तो अक्टूबर 2024 में उनके साथ मारपीट करके उन्हें घर से निकाल दिया गया। बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले फरवरी में दोनों पति-पत्नी ने भाजपा ज्वॉइन की थी।

नवभारत टाइम्स से बातचीत में स्वीटी ने कहा, “मन होता है पीट देता है। साँस रुकने तक मारता है। कई दिनों तक घर में बंद कर देता है। जिसके लिए सब कुछ छोड़ा वो पति असल में कसाई निकला।” स्वीटी के एक करीबी ने NBT को बताया, “दोनों के बीच लंबा अफेयर चला था। फिर उनकी शादी कर दी गई। शादी के चार दिन पहले तक सब कुछ ठीक था। फिर दीपक पैसे माँगने लगा।”

इस करीबी ने बताया कि दहेज माँगने पर स्वीटी ने शादी से इनकार कर दिया था। उस समय इज्जत की दुहाई देकर दीपक के पिता ने उसे समझाया और समझौता कराया। तब जाकर स्वीटी शादी के लिए तैयार हुई थी। शादी के बाद कुछ दिन तक सब ठीक रहा। उसके बाद दीपक उसे मारने-पिटने लगा। इसके बाद पंचायत बैठी। पंचायत में दीपक बात मान जाता और फिर वही हरकत करने लगता।”

इस व्यक्ति ने बताया कि जब दीपक हुड्डा का समय गरीबी में बीत रहा था और नके पास घर तक नहीं था तो स्वीटी और उन्होंने सपोर्ट किया था। स्वीटी के इस रिश्तेदार ने कहा, “वह कच्चे घर में रहता था। हमने उसे अपनाया। इसके बाद वह बड़ा नाम बना। अब वह हमारी ही बेटी पर ज्यादती कर रहा है।” इस शख्स ने कहा कि दीपक हुड्डा अपनी अमीर पत्नी से तलाक नहीं लेना चाहता है।

वहीं, स्वीटी ने दीपक के साथ अपनी शादी से लेकर उनके साथ तक की सारी फोटो सोशल मीडिया से हटा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी बूरा ने कोर्ट में अपने पति से तलाक और खर्चे के लिए मामला भी दायर किया है। उन्होंने 50 लाख रुपए मुआवजा और 1.5 लाख रुपए महीना खर्च की माँग की है। गौरतलब है कि स्वीटी बूरा और उनके पति दीपक हुड्डा, दोनों अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित हैं।

उधर, दीपक हुड्डा ने भी अपनी पत्नी स्वीटी बूरा के खिलाफ रोहतक के थाने में शिकायत दी है। दीपक ने स्वीटी के माता-पिता पर पैसे ठगने और शादी तोड़ने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही हुड्‌डा ने भी स्वीटी और उसके परिवार पर संपत्ति हड़पने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। दीपक ने कहा कि शादी के पहले से ही स्वीटी के परिजनों की नजर उनकी संपत्ति पर थी।

दीपक हुड्डा ने कहा, “उसके माता-पिता नजर मेरी प्रॉपर्टी पर है, इसका मुझे पता नहीं था। मेरे माता-पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। इस वजह से मुझे समझाने वाला कोई नहीं था। मैंने उसके माता-पिता को अपना माता-पिता माना था। मैंने हिसार में एक प्लॉट लिया था और इसकी सारी पेमेंट मैंने की थी। प्लॉट सिर्फ मेरे नाम के बजाय मेरे और स्वीटी के नाम पर ले लिया गया।”

हुड्डा ने कहा कि उनसे झूठ बोलकर स्वीटी के परिजनों ने 25 लाख रुपए नगद ले लिए। उन्होंने कहा कि ब्याज पर दूसरों को रुपए देने के नाम पर स्वीटी के पिता ने उनसे लाखों रुपए ले लिए। उन्होंने स्वीटी के भाई पर भी 12 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है। ये सारे उन्हें कभी नहीं मिले। हुड्डा ने यह सब एक साजिश के तहत करने का आरोप लगाया है।

दीपक हुड्डा ने स्वीटी पर चाकू से हमला करने का भी आरोप लगाया है। हुड्डा ने कहा, “एक बार छोटी-सी बहस होने पर उसने मुझे चाकू मार दिया था। इससे मुझे टाँके लगे थे। एक बार उसने सोते हुए हमला कर दिया। इसमें मेरा सिर फट गया था। मैंने उसकी माँ को फोटो भेजी तो उन्होंने कहा कि गृहस्थी में ये सब चलता रहता है। मेरी बेटी ऐसी ही है। घर बसाना है तो देख लो।”

बता दें कि स्वीटी की शिकायत मिलने के बाद हिसार पुलिस ने दीपक हुड्डा को नोटिस भेजकर बुलाया था और जाँच में सहयोग करने के लिए कहा था। हालाँकि, दीपक हुड्डा ने हिसार पुलिस के सामने नहीं गए। हिसार के पुलिस अधीक्षक शशांक कुमार सावन ने इस बात की जानकारी दी है।