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‘वहॉं नुकीले पत्थर निकले हैं… तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा’

आज एनआरसी, सीएए और एनपीआर पर जिस तरह भ्रम पैदा करने की कोशिश हो रही है। समुदाय विशेष को उकसाया जा रहा। विरोध के नाम पर हिंसा हो रही। हिंदुत्व की कब्र खुदेगी जैसे नारे लग रहे हैं। ऐसे वक्त में अटल ​बिहारी वाजपेयी होते तो कॉन्ग्रेसियों और वामपंथियों की साजिश को लेकर क्या कहते?

इसकी झलक राम मंदिर को लेकर संसद में दिए वाजपेयी के एक भाषण में मिलती है। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर भी कभी आज के तरह ही साजिश रची गई थी। बीते साल 16 अगस्त को आखिरी सॉंस लेने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसी ही साजिशों का जवाब देते हुआ सालों पहले बहुसंख्यक हिंदुओं की ओर से एक सपना देखा था। वह सपना था नैतिक विश्वास के बल पर अयोध्या में राम का मंदिर बनाने का। इसी साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस स्वप्न के पूरा होने का रास्ता साफ हुआ है।

हालॉंकि राम मंदिर आंदोलन को लेकर वाजपेयी का जिक्र अक्सर 5 दिसंबर 1992 को लखनऊ की रैली में दिए गए उनके भाषण को लेकर किया जाता है। अयोध्या में कारसेवा से ठीक एक दिन पहले हुई उस रैली में कहा था “वहॉं नुकीले पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा।” इन पंक्तियों का हवाला देकर कुछ लोग वाजपेयी पर कारसेवकों को उकसाने का आरोप भी लगाते रहते हैं।


5 दिसंबर 1992 का वाजपेयी का संबोधन

ऐसा करने वाले वहीं हैं, जो हमेशा से भाजपा पर राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं। जो 6 दिसंबर 1992 को साजिश का हिस्सा बताते हैं। करीब 500 साल से कॉन्ग्रेसियों, वामपंथियों, लिबरलों, समाजवादियों और धर्मनिरपेक्षता के कथित ठेकेदारों का यही गिरोह अयोध्या में इस्लामी अक्रांताओं के गुनाह को महिमामंडित कर रहा था। जब से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या की विवादित जमीन ही रामजन्मभूमि स्थान है, यह गिरोह फिर से जान-बूझकर 6 दिसंबर को उभारने की कोशिश में लगा है।

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर वाजपेयी की सोच क्या थी? बहुसंख्यक हिंदू समुदाय क्या सोचता था? इसकी झलक लोकसभा में 17 दिसंबर 1992 को वाजपेयी के संबोधन से मिलती है। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने कहा था, “राम का मंदिर छल और छद्म से नहीं बनेगा। राम का मंदिर अगर बनेगा तो एक नैतिक विश्वास के बल पर बनेगा। अगर ढॉंचा तोड़ने का इरादा होता, तो ढॉंचा तोड़ने के लिए वहॉं इतने कारसेवक इकट्ठे करने की जरूरत नहीं थी। अयोध्या में तीन महीने में मेले होते हैं। अगर छुपकर काम करना था, अगर चोरी से काम करना था, अगर योजना बनाकर तोड़ना था तो इसके लिए कारसेवा की जरूरत नहीं थी।”

17 दिसंबर 1992 का वाजपेयी का पूरा भाषण पढ़ने के लिए क्लिक करें


वाजपेयी के संबोधन का अंश

उन्होंने यह भी कहा था, “हम यह भी कहते थे कि हम मस्जिद को तोड़ना नहीं चाहते। हम सम्मान के साथ उसे दूसरे स्थान पर ले जाना चाहते हैं, राम जन्मस्थान से अलग। थोड़ा दूर जाकर वहॉं मस्जिद बने। हम उसमें कारसेवा करने के लिए तैयार हैं। हम उसमें योगदान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह नहीं हो सका।”

सुप्रीम कोर्ट के फैसला भी इस भावना के अनुकूल है। सारे सबूत रामलला के पक्ष में थे। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार उस जमीन पर अपने दावे के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर सके। बावजूद इसके शीर्ष अदालत ने उन्हें मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन सरकार को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

राम मंदिर आंदोलन तो भाजपा के एजेंडे में जून 1989 में हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में ​हुए पार्टी अधिवेशन में शामिल हुआ था। आंदोलन को लहर में बदलने वाली लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की प्रसिद्ध रथ यात्रा तो सितंबर 1990 में शुरू हुई। लेकिन, उससे भी करीब दो साल पहले मुंबई की एक जनसभा में वाजपेयी ने कहा था, “एक अच्छी भावना के साथ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की पूरी जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए और इस भावना के बदले में हिंदुओं को मौजूदा ढॉंचे के साथ बिना कोई छेड़छाड़ किए मंदिर बनाना चाहिए।” 1989 में वामपंथी नेता हिरेन मुखर्जी को लिखे पत्र में भी वाजपेयी ने इसका उल्लेख किया है। यह पत्र वाजपेयी ने अपने नाम 5 जून 1989 को लिखे गए हिरेन के खुले खत का उत्तर देते हुए लिखा था।

17 दिसंबर 1992 के भाषण में ही वाजपेयी ने कहा था, “अयोध्या ट्रेजेडी है। आप हम पर जितना दोषारोपण करेंगे हम उतना ही सुर्खरू होंगे।” राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुसंख्यक हिंदुओं की भावना और सुर्खरू हुई है। NRC के मामले में भी छल और छद्म परास्त होंगे, हम और सुर्खरू होंगे!

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

कहानी एक अब्दुल की जिसे टीवी एंकर दंगाई बनाता है… उसकी मौत से फायदा किसको?

2019 की इस मजहबी उन्मादी आग से 2024 में कितनी रोशन होगी भाजपा?

बॉलीवुड माफिया का माउथपीस महेश भट्ट, मेरी 16 साल की बेटी को लगातार धमका रहे थे: जिया खान की माँ

जिया खान के अवसाद में होने की बात कही जा रही थी। इसी मुद्दे पर ‘इंडिया टुडे’ द्वारा जब जिया की माँ से ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल पर सवाल पूछा कि उनकी बेटी के डिप्रेशन में होने की बात महेश भट्ट के अलावा और किसने कही थी? राबिया (जिया खान की माँ) ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के अंतिम संस्कार के वक़्त महेश भट्ट के सामने ही ये बात कही थी कि मुझे माफ़ कीजिएगा लेकिन जिया खान डिप्रेशन में नहीं थी।

इससे पहले भी राबिया ने ध्यान दिलाया था कि किस तरह महेश भट्ट ने सुशांत सिंह राजपूत के मानसिक स्वस्थ्य को लेकर बातें की थीं। राबिया ने महेश भट्ट को बॉलीवुड का माउथपीस बताते हुए कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता है, वो इतने तरस के लायक हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि जब जिया खान मात्र 16 साल की थी और भट्ट कैम्प में काम कर रही थी, तब महेश भट्ट उन्हें धमकाते रहते थे।

साथ ही महेश भट्ट ने राबिया से ये भी कहा था कि वो जिया को अकेला छोड़ दें। उन्होंने पूछा कि आखिर वो अपनी बेटी को अकेला कैसे छोड़ सकती हैं? उन्होंने कहा कि वो न्याय के लिए लड़ती रहेंगी। राबिया ने कहा कि वो दुनिया को इन लोगों की सच्चाई बताते रहेंगी। राबिया ने कहा कि सुशांत की भी जिया की तरह ही हत्या होने के कारण वो असहाय महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को झूठे प्यार के जाल में फँसाया गया।

राबिया खान ने सुशांत और जिया की मौत में बताई समानता

राबिया ने कहा कि जिया और सुशांत, दोनों को ही शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनके रुपयों के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। साथ ही दोनों को ही अपने परिवार और चाहने वालों से दूर कर दिया गया। दोनों को काम की कमी की वजह से मानसिक रूप से अवसादग्रस्त करार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके पार्टनरों का नियंत्रण उन पर से खो गया तो दोनों की हत्या कर दी गई।

ज्ञात हो कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई। इस दरम्यान रिया ने 16 बार महेश के नंबर पर कॉल किया। ईडी सूत्रों के हवाले से रिया के कॉल डिटेल्स के आधार पर यह दावा किया गया है।

13 साल की दलित लड़की से रेप के बाद फोड़ दी आँखें, काट डाला जीभ: UP पुलिस ने गिरफ्तार किए दो आरोपित

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ 13 साल की दलित लड़की के साथ बलात्कार की घटना हुई है। बलात्कार के अलावा भी हैवानियत की सीमाएँ पार की गई, लड़की की आँखें फोड़ दी गई। इसके बाद उसकी जीभ तक काट दी गई। अंत में उसके गले में रस्सी बाँधा गया और गन्ने के खेत में काफी दूरी तक घसीटा गया।    

घटना लखीमपुर, उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा स्थित पकरिया गाँव, ईसानगर थाने के पास हुई है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लड़की घर से निकली थी। इसके बाद वह अपने घर वापस नहीं लौटी। काफी समय बीतने के बाद लड़की के परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। फिर उन्होंने पुलिस से भी इस घटना की शिकायत दर्ज कराई।    

पुलिस द्वारा की गई खोजबीन में लड़की का शव गन्ने के खेत में बरामद हुआ। शव बेहद भयावह स्थिति में था, उसकी आँखें फोड़ दी गई थीं और जीभ तक काट दी गई थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है। मामले में जाँच करते हुए पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।  

लखीमपुर जिले के पकरिया गाँव में रहने वाली 13 साल की लड़की गन्ने के खेत में गई थी। तभी मौके पर गाँव के दो युवक आए और उन्होंने लड़की के साथ बलात्कार किया। इस दौरान क्रूरता की सारी सीमाएँ पार की गई और लड़की को असहनीय पीड़ा दी गई। सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना दोपहर 1 बजे हुई। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ लड़की के घर नहीं लौटने पर उन्होंने तलाश शुरू की।    

खोजने के दौरान उसका शव खेत से बरामद किया गया। जिसके बाद पोस्टमॉर्टम में लड़की के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई। लड़की के परिवार वालों ने गाँव के युवकों (संतोष यादव और संजय गौतम) पर बलात्कार का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों पर लैंगिक अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (POSCO Act), बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया। फिलहाल पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

‘PM मोदी के कार्यकाल में आज का भारत ‘महिलाओं के विकास’ से ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ चला है’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए सबसे पहले कोरोना वायरस से जंग जीतने की बात कही और कोरोना वॉरियर्स को नमन किया। करीब 1 घंटे 27 मिनट लंबे भाषण में प्रधानमंत्री का फोकस कोरोना वायरस, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत पर रहा। 

इस दौरान उन्होंने महिला शक्ति से लेकर डिजिटल इंडिया और लद्दाख में चीनी घुसपैठ से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक पर बात की। उन्होंने चीन और पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि एलओसी से लेकर एलएसी तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आँख उठाई है, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है।

पिछले 6 वर्षों से भारत के प्रधानमंत्री ने अपने प्रयासों को केवल सार्वजनिक भाषण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत के नागरिकों से किए गए हर वादा, हर आशा को पूरा करने के लिए अपनी 6 साल की यात्रा के प्रत्येक दिन को बहुत लगन के साथ उपयोग किया है।

इससे पहले कभी किसी प्रधान मंत्री ने बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, राष्ट्र के आर्थिक उपायों पर राष्ट्र की कल्पना को नई ऊँचाई नहीं दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्यान्वयन करते हुए और डेटा के आधार पर भी शानदार सफलताएँ अर्जित की और सामान्य उपायों के माध्यम से उन कल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रमुखता दी जो आम भारतीय की बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं।

कई महिला राजनेता, कार्यकर्ता जो जेंडर जस्टिस के लेंस से सरकार के प्रत्येक कार्यक्रम का अध्ययन करते हैं, ने प्रधानमंत्री के महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के उद्देश्य वाले योजनाओं में प्रसन्नता जाहिर की है। मुझे याद है, जब लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने महिलाओं, खासकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए शौचालय बनवाने का स्पष्ट आह्वान किया था।

हमारा राष्ट्र 6 दशकों के लोकतांत्रिक मंथन में बुनियादी मानवीय आवश्यकता के समाधान से वंचित था। यह किसी के लिए आश्चर्य की बात नहीं होगी। वास्तव में गरीब लोगों ने इसे जीवन के एक तरीके के रूप में स्वीकार कर लिया था। पिछले 6 वर्षों में बने 11 करोड़ शौचालयों ने गरीबों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक शिथिलता के बीच की खाई को पाट दिया और सम्मान की जिंदगी दी।

आज मैंने प्रधानमंत्री को जनऔषधि केंद्रों द्वारा मासिक स्वच्छता उत्पादों के संबंध में सेवा देने और प्रत्येक 1 रुपए की लागत पर 5 करोड़ सेनेटरी पैड की बिक्री के बारे में सुना। शौचालय से लेकर सेनेटरी पैड तक, सेवाओं की एक सार्वजनिक घोषणा, समर्थन और एक वादा जिसे महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा करने की आवश्यकता है, इस सरकार का मुख्य आधार बन गया है।

सच कहा जाए तो जब भी किसी वामपंथी से दक्षिणपंथी सरकार की प्रशासनिक क्षमता के बारे में पूछा जाएगा तो वो तिरस्कार की भाषा में ही वर्णन करेंगे। झूठी चीज़ों पर ज़ोर देकर कितना ही ये साबित करने की कोशिश की जाए कि दक्षिणपंथी सरकार महिलाओं को लेकर रूढ़िवादी सोच रखती है, लेकिन मोदी सरकार की 6 सालों की यात्रा इसके उलट ही एक कहानी कहती है।

सच्चाई तो ये है कि यह मोदी सरकार के कार्यकाल में ही संभव हुआ कि मासिक धर्म स्वच्छता प्रोटोकॉल को प्रशासनिक इकाईयों के लिए जारी किया गया, लेकिन इस बात को लिंग-आधारित बहस में कहीं जगह नहीं मिलती है लेकिन मैं इससे हैरान बिल्कुल नहीं हूँ। ना ही गर्भावस्था अधिनियम के मेडिकल टर्मिनेशन की कहीं चर्चा होती है जो 21वीं सदी में महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा करती है।

यह मोदी सरकार की ही नेतृत्व क्षमता का कमाल है कि जनता की सेवा के लिए वो नीतियों को इतने बेहतर तरीके से लागू कर पाते हैं भले ही उन्हें लुटियन गैंग की सराहना मिले न मिले। सरकार का संप्रदाय विशेष की महिलाओं की ज़रूरतों को समझना और बड़ी समझदारी से इसका हल निकालना पीएम मोदी की मुश्किल कार्यों को सम्पादन करने की उनकी क्षमता का ही एक नमूना है।

दशकों तक भारतीय राजनीति ने ट्रिपल तलाक के बहाने छोड़ी गई संप्रदाय विशेष की विवाहित महिलाओं को विधायी समाधान प्रदान करने के लिए दृढ़ता से मना कर दिया क्योंकि न्याय प्रदान करने का कार्य चुनावी लाभदायक वोट बैंक पर इसके प्रभाव को देखते हुए खतरे से भरा था। लेकिन लोकतंत्र के दायरे से ट्रिपल तलाक के अन्याय को दूर करने का कानून एक प्रमाण है कि नरेंद्र मोदी वास्तव में सभी के लिए न्याय में विश्वास करते हैं और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहते हैं।

इसके अतिरिक्त, सामाजिक और आर्थिक न्याय देने की भावना के साथ, आज हम गर्व के साथ घोषणा करते हैं कि 25 करोड़ MUDRA ऋणों में से 70% लाभार्थी महिलाएँ हैं। 40 करोड़ जन-धन खातों में से 22 करोड़ खाते महिलाओं के हैं, जब पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 3 दशकों के बाद शिक्षा नीति में संशोधन किया है।

इसमें पहली बार यह पाया गया है कि जेंडर इंक्लूजन फंड के तत्वावधान में हमारी युवा लड़कियों की शैक्षणिक आकांक्षाओं को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने के लिए किए गए एक विशेष प्रयास है, जो देश भर के सरकारी स्कूलों में बेटियों के लिए शौचालय बनवाकर उनके समर्थन में प्रकट हुई, वह भी एक साल से भी कम समय में।

उन्होंने इस तथ्य को न केवल सच साबित किया बल्कि हमारे सशस्त्र बलों में लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं की भूमिका का जश्न मनाया और एक सामाजिक स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त किया कि भारतीय महिलाओं को अब किसी से कम नहीं माना जाता है। वे एक समान भागीदार हैं, हम एक राष्ट्र के रूप में शुरू की गई विकास प्रक्रियाओं में एक समान योगदान देती हैं।

आज जब प्रधानमंत्री जी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर इकट्ठे युवाओं को गुडबाय कहा, मैंने उनमें भविष्य के लिए उम्मीद देखी। एक ऐसा बदलाव देखा, जिसके बाद महिलाएँ प्रशासनिक और सामाजिक तौर पर अपने पुरुष साथियों पर निर्भर नहीं रह जाएँगी। आज का भारत ‘महिलाओं के विकास’ से ‘महिला के नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ चला है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में केंद्रीय कैबिनेट कपड़ा और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा लिखा गया है।

महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्‍यास, कुछ देर बाद रैना ने भी की साथ निभाने की घोषणा: खेलते रहेंगे IPL

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने सोशल मीडिया पर अपने इंटरनेशनल करियर से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। महेंद्र सिंह धोनी ने इंस्टाग्राम में पोस्ट कर खुद के संन्यास लेने का ऐलान किया है। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एमएस धोनी ने लिखा है, “आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद। आज शाम 7.29 बजे के बाद से मुझे रिटायर समझा जाए।” अपने इस पोस्ट के साथ ही धोनी ने एक वीडियो भी शेयर किया है। एमएस धोनी के कुछ देर बाद ही सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास ले लिया है।

4 मिनट 7 सेकेंड के वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी ने अपने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की कई सारी तस्वीरें शेयर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘कभी-कभी’ का मशहूर गीत भी लगाया है, जिसके बोल हैं, ‘मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है, पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है।’ 

एमएस धोनी के बाद सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास ले लिया है। हालाँकि वह आईपीएल के इस सीजन में खेलते नजर आएँगे। रैना ने भी इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट करने अपने संन्‍यास की घोषणा की। रैना ने लिखा कि माही आपके साथ खेलने के अलावा कुछ भी नहीं था। पूरे दिल से गर्व के साथ मैं इस यात्रा में आपसे जुड़ना चाहता हूँ। रैना ने लिखा कि शुक्रिया भारत।

हालाँकि, एमएस धोनी आईपीएल खेलते रहेंगे। ऐसे में उनके प्रशंसक आईपीएल में धोनी को खेलते हुए देख सकते हैं। 39 वर्षीय एमएस धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास का ऐलान कर चुके थे। जबकि, वनडे और टी-20 में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने हुए थे। लेकिन अब धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। धोनी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान भी रह चुके हैं। साथ ही धोनी के नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज हैं। कुछ दिन पहले ही चेन्‍नई सुपर किंग्‍स के सीईओ ने कहा था कि धोनी आईपीएल 2020 और 2021 आईपीएल खेलते रहेंगे और जहाँ तक होगा 2022 में भी नजर आएँगे।

बता दें कि एमएस धोनी ने साल 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। धोनी ने अब तक 90 टेस्ट मैच खेले हैं। इसके अलावा 350 एकदिवसीय और 98 टी-20 मुकाबलों में उन्होंने भारत का नेतृत्व किया है।

साल 2005 में श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में खेले एक मैच में भारत 299 रन के टारगेट का पीछा कर रहा था। एक बार फिर धोनी को नंबर 3 पर मौका मिला और उन्होंने यहाँ 50 ओवर विकेटकीपिंग करने के बाद मैच के अंत तक बैटिंग की और 183 रन ठोक डाले। धोनी का यह वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर है। बता दें कि धोनी काफी दिनों से क्रिकेट से दूर हैं। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच वर्ल्ड कप 2019 सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था।

महेंद्र सिंह धोनी विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर जाने जाते हैं। माही सबसे सफल भारतीय विकेटकीपर भी हैं। उन्होंने टेस्ट में 294, वनडे में 444 और टी-20 में 91 शिकार अपने नाम किए हैं। इसके अलावा अपनी कप्तानी में धोनी ने भारत को साल 2011 में फिर से विश्व विजेता भी बनाया था। इसके अलावा 2007 में धोनी की कप्तानी में ही टीम इंडिया ने टी 20 विश्वकप अपने नाम किया था।

UP: किशोरी से छेड़छाड़, परिवार पर हमले के आरोप में कमरुद्दीन, आलमगीर, अहमद समेत कई अन्य के खिलाफ FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के भिनगा शहर के टंडवा बंकटवा गाँव में संप्रदाय विशेष के कुछ लड़कों द्वारा एक किशोरी से छेड़छाड़ की गई। जब छेड़छाड़ करने वालों का विरोध किया गया और उनके कृत्यों की आलोचना की गई, तो उन्होंने मामले पर हंगामा खड़ा कर दिया।

संप्रदाय विशेष के आरोपितों ने लाठी और धारदार हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घरों में घुसकर उसके रिश्तेदारों पर हमला किया। घटना में लगभग 8 लोग घायल हुए हैं। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिजान, मेराज अहमद, समसुद्दीन, समदुद्दीन, आलमगीर, कमरुद्दीन, मेहताब आलम और गुलजार के अलावा 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, हत्या के प्रयास और कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना तब हुई जब पीड़िता अपने पिता मनोहर लाल यादव के साथ क्लीनिक से घर लौट रही थी। जब वे वापस लौट रहे थे, तो एक चाय की दुकान पर बैठे मेराज और समसूद ने लड़की के लिए भद्दी टिप्पणियाँ कीं। जब उसके पिता ने अपनी बेटी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों का विरोध किया, तो उसने दोनों के साथ गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार और मारपीट की।

हंगामा सुनकर सिपाही, सांवली, दुर्गेश और दिलीप पीड़ित लड़की और उसके पिता को बचाने के लिए अपने घर से भागे। हालाँकि, तब तक संप्रदाय विशेष के लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी। आरोपित ने संप्रदाय विशेष की भीड़ के साथ मिलकर पीड़िता के पिता पर लाठी और अन्य हथियारों से हमला किया। इससे लोगों में दहशत फैल गई और वे हिंसक भीड़ द्वारा मार खाने के डर से अपने अपने घरों में घुस गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

हालाँकि, उग्र भीड़ ने फिर भी उन पर हमला जारी रखा। उन्होंने कुल्हाड़ी व लाठी-डंडा लेकर घरों में घुस-घुस कर लोगों को पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से सांवली पर हमला कर दिया। परिवार के अन्य सदस्यों की भी पिटाई की गई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में किया। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले में बुरी तरह घायल हुए सांवली को लखनऊ के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

जब ऑपइंडिया ने भिनगा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हेड ऑफिसर से संपर्क किया, तो उन्होंने इस घटना के बारे में सवाल पूछने के बाद अचानक फोन काट दिया। जब उनसे दोबारा संपर्क किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि वह इस मामले पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं और हमें पुलिस के मीडिया सेल से संपर्क करने के लिए कहा गया। हालाँकि, पुलिस SHO द्वारा साझा किए गए मीडिया सेल का संपर्क नंबर कवरेज क्षेत्र से बाहर है। जैसे ही हमें मामले का अधिक विवरण मिलेगा हम स्टोरी को अपडेट करेंगे।

नवीन की ‘प्रोफाइल’ के सहारे, इंडिया टुडे बेंगलुरु को जलाने वाली भीड़ का हिस्सा बन गया, जो खून की प्यासी थी: जानिए कैसे

हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगों में जहाँ संप्रदाय विशेष की एक भीड़ पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ एक कथित ईशनिंदा पोस्ट के कारण भड़की थी, उसको लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वो आम लोगों का दुश्मन है। मीडिया जो अब असल अपराधी को छिपाने का काम कर रही है।

ईशनिंदा के आरोपित नवीन के खिलाफ चरित्र हनन का एक ठोस अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उसके कथित आपत्तिजनक पोस्ट को गलत बताते हुए संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा की गई हिंसा को सही ठहराया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि यह पोस्ट हिन्दू घृणा से प्रेरित पोस्ट के कमेंट में लिखा था।

डेक्कन हेराल्ड द्वारा नवीन को ‘सीरियल अपराधी’ के रूप में चित्रित करने के बाद, अब इंडिया टुडे ने दलित कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे की एक ‘कैरेक्टर प्रोफ़ाइल’ प्रकाशित की है, जिसके आधार पर यह दावा किया गया है कि 35 वर्षीय नवीन, सनी लियोन के प्रशंसक हैं। इंडिया टुडे ने इस विशेष तथ्य पर विशेष जोर दिया है कि मंगलवार रात को जो कुछ भी हुआ, उससे सनी लियोन का कोई संबंध नहीं है, कारण इंडिया टुडे को ही बेहतर पता होगा।

Rahul Kanwal tweet sharing the India Today report

चरित्र प्रोफ़ाइल का लहजा और सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि इंडिया टुडे का उद्देश्य क्या है। इसका उद्देश्य नवीन को पूरे प्रकरण के खलनायक के रूप में चित्रित करना है ताकि संप्रदाय विशेष की भीड़ के अपराधों को समाप्त किया जा सके और हिंसा को उचित ठहराया जा सके, जो न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक के परिवार के खिलाफ थी। बल्कि उस क्षेत्र के अन्य आम लोगों के भी भी खिलाफ थी।

चरित्र प्रोफ़ाइल की शुरुआत बुरे तरीके से की जाती है। इसमें लिखा गया है, कॉमर्स ग्रेजुएट पी नवीन पिछले दिनों बेंगलुरु में हुई हिंसा के बाद से ही विवादों में है। जो कि अब गिरफ्तार है। और पूरे रिपोर्ट में, इंडिया टुडे को उनके बारे में एक अच्छी बात नहीं मिली।

इसमें कुछ सबटाइटल्स भी दिए गए हैं। जिसमें ‘किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा से जुड़ाव नहीं’, ‘राजनीतिक महत्वाकांक्षी’, ‘सनी लियोनी का फैन’, ‘विवादों से अजनबी नहीं’, ‘मेधावी छात्र नहीं’ जैसे सब टाइटल्स शामिल हैं।

The post was blasphemous, rules India Today

उदाहरण के लिए, यह दावा किया जाता है कि नवीन की कठोर राजनीतिक विचारधारा नहीं है। इसमें कहा गया है कि वो अपने मामा और कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के साथ संप्रदाय विशेष को ईद की शुभकामनाएँ देने वाली पोस्ट में दिखा।

आगे लिखा गया है कि 5 अगस्त को, अयोध्या में भूमिपूजन वाले दिन नवीन ने राम मंदिर निर्माण के समर्थन में पोस्ट लिखी। इस पर कुछ आलोचनात्मक कमेंट भी आए। लेकिन इंडिया टुडे के ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से इस शख्स के बारे में अधिक खुलासा हुआ। नवीन के फेसबुक हैंडल को बारीकी से खंगालने पर पता चला कि उसकी कोई दृढ़ राजनीतिक विचारधारा नहीं है।

जन्माष्टमी की शुभकामनाओं वाली एक पोस्ट में, भारत की धर्मनिरपेक्षता पर वह गर्व जताता है। इसने ऐसी तस्वीर अपलोड की जिसमें बुर्का पहने एक महिला के साथ राधा-कृष्ण बने बच्चे देखे जा सकते हैं।

ये इंडिया टुडे द्वारा प्रदान किए गए औचित्य हैं जिनसे साबित होता है कि नवीन की कठोर राजनीतिक विचारधारा नहीं है। यह वास्तव में काफी प्रफुल्लित करने वाला है। ये टिप्पणियाँ वास्तव में नवीन को धर्मनिरपेक्ष के रूप में चित्रित करती हैं। इंडिया टुडे जैसे लिबरल मीडिया हाउस को जश्न मनाया जाना चाहिए, न कि आलोचना करना चाहिए।

This was reason enough for India Today to brand Naveen a Sunny Leone fan

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एक्ट्रेस सनी लियोनी नवीन के लिए एक और रोल-मॉडल लगती हैं। 12 मई को, नवीन ने सनी लियोनी की तस्वीर पोस्ट करने के साथ कैप्शन लिखा- “सनी लिओनी ने साबित किया कि हमारा अतीत कभी हमारे भाग्य का फैसला नहीं कर सकता।”

ऐसा प्रतीत होता है कि इंडिया टुडे भी इस बात के लिए इतना उतावला था कि चरित्र प्रोफाइल का एकमात्र उद्देश्य कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे की चरित्र की हत्या के अलावा और कुछ नहीं था। इसमें कहा गया है, “एक दशक से क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर का काम करने वाले एक शख्स ने इंडिया टुडे को बताया कि नवीन को कभी काम पर जाते नहीं देखा, इसके बजाय उन्हें अक्सर “दोस्तों के साथ मस्ती” करते देखा गया था।”

ऐसा मालूम होता है कि इंडिया टुडे ने उस व्यक्ति को चरित्र हनन के माध्यम से दंडित करने की बेबसी महसूस की, जिसने इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया। वैसे तो मुख्यधारा का मीडिया, जो दलितों के बारे में बहुत परवाह करने का दिखावा करता है, मगर संप्रदाय विशेष के भीतर कट्टरपंथी तत्वों के प्रति उनका पूर्णतया समर्पण प्रतीत होता है। डेक्कन हेराल्ड और इंडिया टुडे इसकी अगुवाई करते हुए दिखाई देते हैं।

यूनिवर्सिटी कैंपस कोई एंक्लेव नहीं, जहाँ पुलिस नहीं पहुँच सकती: जामिया हिंसा मामले में हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस

जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान आगजनी व संपत्ति के नुकसान से बिगड़ी स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने जामिया में प्रवेश किया था।

पुलिस के खिलाफ छात्रों पर बल प्रयोग के मामले में दायर याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने यह जानकारी दी।

अमन लेखी ने दलील दी कि जामिया हिंसा से जुड़ी सारी याचिकाएँ एक राय और एजेंडे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने पुलिस पर बर्बरता के आरोपों को सरासर झूठ बताया

उन्होंने दलील दी कि घटना वाली रात पुलिस का वहाँ जाना जरूरी था। इसके पीछे एक मकसद था, जो पूरी तरह से कानूनी था। उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी कैंपस कोई एंक्लेव नहीं है, जहाँ पुलिस नहीं पहुँच सकती।” उन्होंने कोर्ट से कहा कि मामले में दायर सारी याचिकाएँ न्यूज पेपर रिपोर्ट और विडियो फुटेज पर आधारित हैं, जिन पर एविडेंस एक्ट के तहत भरोसा करके अदालत नहीं चल सकती।

कोर्ट को बताया गया कि हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और उसमें चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है। लेखी ने साफ किया कि कानूनन अदालत आने के लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र है, पर मौजूदा मामले में जिन लोगों ने याचिकाएँ दायर की है, वे न तो सीधे तौर पर घटना से जुड़े हैं और न ही पीड़ित हैं।

इसके अलावा उन्होंने दलील दी कि दायर की गई याचिकाओं दो तरह के पक्षकार हैं एक वे हैं जो अखबार में प्रकाशित खबरों के आधार पर अदालत आए हैं। वहीं, दूसरे वे हैं जो हिसा प्रभावित हैं, लेकिन उन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।

अमन लेखी ने कहा कि समाचार रिपोर्टो पर साक्ष्य के तौर पर भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन सटीक नहीं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाएँ आरोप पत्रों का उल्लेख नहीं करती हैं और उनके बारे में पूरी तरह से चुप हैं।

याचिकाकर्ताओं ने जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिसा की जाँच के लिए विशेष जाँच दल गठित करने या फिर जाँच आयोग बनाने की माँग की थी। इस पर अमन लेखी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की कोई भी माँग मंजूर नहीं की जा सकती। मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

इसके अलावा हिंसा के आरोपित जामिया के स्टूडेंट और आरजेडी (RJD) के युवा प्रदेश अध्यक्ष मीरान हैदर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीरान हैदर का कहना है कि हिंसा के लिए उसने करीब 5 लाख रुपए जमा किए थे।

पुलिस के मुताबिक, अपने कबूलनामे में मीरान हैदर ने कहा कि हिंसा की साज़िश पहले से ही रची जा चुकी थी। उसने बताया कि दिल्ली में चलने वाले प्रदर्शन में लोगों की भीड़ इकठ्ठा करने की जिम्मेदारी उसी थी। साथ ही वहाँ के इंतजाम की देखरेख भी वो ही करता था। मीरान हैदर के मुताबिक जामिया में हुई हिंसा के बाद दिल्ली में दंगों की प्लानिंग की गई थी। दिल्ली में हिंसा के लिए PFI ने फंड दिया था।

हैदर ने पुलिस को बताया कि, दिल्ली के जाफराबाद और सीलमपुर इलाकों को सबसे पहले हिंसा के लिए चुना गया था। आरोपित मीरान हैदर के मुताबिक उसने खुद लोगों को चाकू, पेट्रोल, पत्थर आदि इकठ्ठा करने के लिए कहा था। मालूम हो कि हिंसा के आरोपित मीरान हैदर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल UAPA यानी गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

मोतियाबिंद वाले रवीश कुमार: पहलू खान को सौ हिन्दुओं ने मारा, बेंगलुरु के दंगाइयों का मजहब नहीं दिख रहा

इस्लामी हिंसा को लेकर मीडिया का एक बड़ा वर्ग हमेशा ‘दंगाइयों और आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता’ वाला राग अलापता रहता है। लेकिन जैसे ही किसी घटना में एक भी हिन्दू को दोषी करार देने की गुंजाइश हो, तो यही लोग उसका धर्म बता-बताकर पूरे समुदाय को कोसते हैं। बेंगलुरु दंगों के मामले में भी यही हुआ। एनडीटीवी के रवीश कुमार ने भी यही किया।

हालाँकि, रवीश कुमार का ऐसा करना अप्रत्याशित नहीं है। उन्होंने बेंगलुरु दंगों के बारे में क्या कुछ कहा है, उससे पहले हमें ये जानना चाहिए कि पहलू खान और सुबोध सिंह हत्याकांड को लेकर उन्होंने किस तरह हिन्दुओं को निशाना बनाया था। रवीश कुमार के इस वीडियो को ‘मिल्लत टाइम्स’ ने जनवरी 2020 में ‘रवीश कुमार बनाम गोदी मीडिया’ नाम से डाला था। इसमें उन्होंने मोदी सरकार पर जम कर निशाना साधा था।

इस कार्यक्रम में रवीश ने कहा था कि वे एक हिसाब समझा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि एक पहलू खान को मारने के लिए 100 लड़के गए। एक सुबोध सिंह को मारने के लिए 100 लड़के गए। रवीश कुमार ने दावा किया कि दोनों जगह 100-100 लड़के जो हत्या करने गए, वो हिन्दू थे। साथ ही उन्होंने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि ये हिन्दू लड़कों को दंगाई बनाने की साजिश है।

इसके बाद रवीश कुमार ने कहा था, “अब हिन्दू लोग तय कर लें कि वे अपने बच्चों को डॉक्टर बनाना चाहते हैं या फिर दंगाई बनाना चाहते हैं। ये सब आप डिसाइड कर लो, मुझे कोई समस्या नहीं है।” लेकिन, इसी रवीश कुमार के सुर बेंगलुरु दंगों परवे इस्लामी भीड़ का मजहब छिपाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। हिंसा के मामले में बदल जाते हैं और वो संप्रदाय विशेष की भीड़ का मजहब छिपाने के लिए सारी कोशिश करते हैं। बेंगलुरु हिंसा पर रवीश कुमार का क्या कहना है, आइए जानते हैं।

बेंगलुरु हिंसा को लेकर रवीश कुमार ने कहा है कि जो दंगाई होते हैं, वो दंगाई होते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें न तो हिन्दू ‘मजहब’ से कोई मतलब होता है और न ही इस्लाम से कोई मतलब होता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उन्होंने हिन्दू धर्म को भी ‘मजहब’ कह कर सम्बोधित किया। रवीश कुमार ने कहा कि दंगाई मानसिकता हर भीड़ में मौजूद होती है, जिसे भड़कने के लिए किसी चीज का इन्तजार रहता है।

ठीक इसी तरह, बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की 1000 लोगों की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के बारे में मीडिया ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन एक मानव श्रृंखला का भी गुणगान किया गया और बताया कि ये वो संप्रदाय विशेष के लोग हैं, जो मंदिर बचाने के लिए खड़े हैं। हालॉंकि इस मानव श्रृंखला की पोल खुलने में भी वक्त नहीं लगी।

ज्ञात हो कि 1000 के क़रीब की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी, बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा काफी भयावह लग रहा था। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की थी।

अयोध्या में आयोजित होगी दुनिया की सबसे बड़ी रामलीला: रवि किशन बनेंगे भरत तो मनोज तिवारी निभाएँगे अंगद का किरदार

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के बाद अब विश्व के सबसे बड़े रामलीला के आयोजन की तैयारी की जा रही है। इस रामलीला में फिल्म स्टार से लेकर राजनेता तक बड़ी भूमिकाओं में नज़र आएँगे। इसी सिलसिले में भोजपुरी जगत के सुपरस्टार और गोरखपुर के वर्तमान सांसद रवि किशन और बीजेपी के सीनियर नेता मनोज तिवारी का नाम रामलीला के किरदार के लिए सामने आ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में इस बार विश्व के सबसे बड़े रामलीला का आयोजन किया जाना है। इसे लेकर तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसमें सांसद रवि किशन भरत की भूमिका निभाएँगे, तो वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी अंगद के रोल में नजर आएँगे।

बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म स्टार बिंदु दारा सिंह भगवान हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं, तो वहीं शहबाज खान रावण की भूमिका में नजर आएँगे। सीता और राम की भूमिका में बहुत बड़े फिल्म स्टार अयोध्या की रामलीला में नजर आएँगे।

बता दें कि 17 से 25 अक्टूबर के बीच ऐतिहासिक रामलीला होने जा रही है। रामलीला के किरदारों की ड्रेस डिजाइनिंग विष्णु पाटिल करेंगे। वहीं इसे प्रवेश कुमार डायरेक्ट करेंगे। इस राम लीला में जाने माने ऐक्शन डायरेक्टर कुमार देव गोरा भी शामिल होंगे। बॉबी मलिक रामलीला की प्रस्तुति करेंगे

बता दें कि बॉबी मलिक 5 सालों में दिल्ली में दो बार रामलीला कर चुके हैं। मलिक ने कहा, ”मेरी कई सालों से इच्छा थी कि मैं श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में रामलीला करूँ। मुझे बड़ी खुशी हुई, जब मैंने बिंदु दारा सिंह को बताया कि मैं रामलीला करने जा रहा हूँ और हनुमान जी का रोल आप से करवाना चाहता हूँ तो उन्होंने एकदम से हामी भर दी।”

बिंदु दारा सिंह ने कहा, “मुझे राम जन्मभूमि अयोध्या में होने जा रही रामलीला के अंदर हनुमान जी का किरदार निभाने के लिए दिया गया है। इससे बड़ा सौभाग्य मुझे प्राप्त नहीं हो सकता। मेरे पिता दारा सिंह ने कई फिल्मों, टीवी सीरियल के अंदर हनुमान जी की भूमिका निभाई और मैंने भी उनके आशीर्वाद से कई फिल्मों और टीवी सीरियल्स में हनुमान जी की भूमिका निभाई।”

रामलीला के बारे में बात करते हुए रवि किशन ने कहा, ”बॉबी मलिक वह नाम है जिन्होंने अपनी इमेज से कभी समझौता नहीं किया।” वहीं बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, ”बॉबी मलिक पुराने अनुभव धारक है, इन्होंने आज तक जो भी किया है अच्छा किया है और दिल्ली की रामलीला को बनाने वाले बॉबी मलिक ही हैं।”

बता दें कि यह रामलीला ऑनलाइन दिखाई जाएगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दर्शकों को मंच से भी इसको देखने का अवसर मिलेगा। मगर फिलहाल कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए अभी ऑनलाइन टीवी चैनल, इंस्टाग्राम लाइव, यूट्यूब, फेसबुक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।