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‘वैज्ञानिकों ने पेशाब से बना लिए स्पेस ब्रिक्स’: यूरिया को यूरिन लिखने वाले NDTV को IISC प्रोफेसर ने लताड़ा

बेंगलुरु स्थित ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस’ के एक अस्सिस्टेंट प्रोफेसर ने NDTV के प्रोपेगंडा की पोल खोली है। दरअसल, प्रोपगैंडाबाज मीडिया संस्थान NDTV ने भारतीय वैज्ञानिकों को बदनाम करने के लिए और उनके प्रयासों पर मिट्टी डालने के लिए जानबूझ कर गलत सूचना शेयर की, जिसके बाद उसे तगड़ी लताड़ लगी। NDTV ने खबर फैलाई थी कि भारतीय वैज्ञानिक मूत्र (यूरिन) से ‘स्पेस ब्रिक्स’ बना रहे हैं।

NDTV का दुष्प्रचार,वैज्ञानिकों को किया बदनाम

जबकि सच्चाई ये है कि ये वैज्ञानिक यूरिन नहीं बल्कि यूरिया से स्पेस ब्रिक्स बना रहे थे। इसके बाद ट्विटर पर रोज ज़हर की उलटी करने वाले अशोक स्वाइन ने तो यहाँ तक कह दिया कि मूत्र को लेकर भारत का जुड़ाव अब चाँद तक पहुँच गया है। बता दें कि लिबरल गिरोह अक्सर आयुर्वेद की निंदा करता है और इस चक्कर में गोमूत्र की आलोचना करता है। इसी क्रम में स्वाइन ने एनडीटीवी के खबर के हवाले से तंज कसा।

असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक कुमार ने NDTV की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘स्पेस ब्रिक्स’ बनाने में यूरिन के इस्तेमाल वाली खबर को नकार दिया। साथ ही उन्होंने मीडिया संस्थान को सलाह दी कि वो अपनी गलत हैडलाइन को तो बदले ही, साथ ही अपने कर्मचारियों को इतनी सैलरी दे कि वो प्रेस रिलीज को ठीक से पढ़ सकें। इसके बाद पहली सलाह को गंभीरता से लेते हुए NDTV ने तुरंत हैडलाइन बदल डाली।

बिना जाने-समझे मजे लेने के लिए कूद पड़े अशोक स्वाइन जैसे लिबरल

आलोक कुमार ने एनडीटीवी की हैडलाइन और अशोक स्वाइन की प्रतिक्रिया की तुलना सर्कस से की। ऑपइंडिया से बात करते हुए आलोक कुमार ने बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया में यूरिया का इस्तेमाल किया है, जो कई स्रोतों से आता है। इस प्रक्रिया में आर्टिफीसियल एडिटिव का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ रिसर्च लैब्स यूरिया के सोर्स के लिए यूरिन के अध्ययन की प्रक्रिया में लगे हैं।

बकौल आलोक कुमार, ऐसा इसीलिए किया जा रहा है ताकि अगर भविष्य में चाँद पर मानवों की कोई कॉलनी बसती है तो उनके मल-मूत्र का उपयोग भी कंस्ट्रक्टिव कार्यों के लिए हो सके। हालाँकि, लिबरल गैंग ने इसे मजाक में ले लिया। IISC की प्रेस रिलीज में भी कहा गया है कि यूरिया केवल इसका एक हिस्सा है। चाँद पर ‘ब्रिक लाइक स्ट्रक्चर’ के लिए ISRO और IISC ने साथ मिल कर काम किया था।

कई मीडिया संस्थानों ने चलाई खबर, सिर्फ NDTV ने हैडलाइन में की कारगुजारी

लोड लेने वाली संरचना बनाने के लिए इसमें लूनर मिट्टी के साथ-साथ अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। हालाँकि, इसकी खबर प्रकशित करते समय NDTV ने PTI से सूचना ली थी लेकिन हैडलाइन में उसने खुद से कारगुजारी की थी। वहीं ‘द इकनोमिक टाइम्स’ ने भी PTI की ही खबर डाली लेकिन उसने हैडलाइन में गड़बड़ी नहीं की। इससे NDTV के असली इरादों का पता चलता है।

बेंगलुरु के दंगे: गजवा-ए-हिन्द की वही साजिश, वही मंसूबे

बेंगलुरु में 11 अगस्त 2020 की रात कुछ ही घंटों में सब कुछ खाक हो गया। 60 से अधिक पुलिसकर्मी एवं कई स्थानीय लोग जख्मी हो गए। करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। कथित तौर पर सोशल मीडिया में एक कमेंट की वजह से यह दंगा हुआ।

कॉन्ग्रेस के दलित विधायक आर मूर्ति के भतीजे नवीन पर पैंगम्बर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट करने का आरोप है। इसकी वजह से संप्रदाय विशेष के लोग विधायक के घर के बाहर इकट्ठा होकर हिंसा करने लगे। विधायक ने इस पोस्ट के लिए माफी भी मॉंगी। बावजूद जो कुछ हुआ उससे जाहिर है कि दंगाई तो बस हिंसा का बहाना खोज रहे थे।

देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में दंगाई विधायक के घर के बाहर और केजी हाली पुलिस थाने में जमा हो गए। वे आरोपी को तत्काल फाँसी की मॉंग कर रहे थे। मानो न्यायपालिका वे ही चलाते हों और जो उन्होंने कह दिया वही सच है।

पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की। भरोसा दिलाया कि वे उचित कार्यवाही कर रहे हैं। परंतु भीड़ हिंसक हो गई। वाहनों और थाने को फूॅंक दिया गया। जल्द ही बेंगलुरु से भयावह तस्वीर सामने आने लगी।

सोशल मीडिया पर इस तरह का माहौल बनाया गया कि मानो इस्लाम खतरे में आ गया है। संप्रदाय विशेष के लोगों को जुटने का संदेश दिया गया। बेंगलुरु में हर जगह संप्रदाय विशेष की भीड़ जमा होने लगी। मंदिर के पास भी उन्हीं की भीड़ थी। जिसे बाद में मानव श्रृंखला का नाम देकर बताया गया कि वे तो मंदिर की सुरक्षा कर रहे थे।

ऐसा नहीं है कि किसी धर्म को लेकर टिप्पणी पहली बार हुई थी। इसी हिंदुस्तान में हिन्दू देवी-देवताओं पर अश्लील फब्तियॉं कसी जाती है। उनके अश्लील चित्र बनाए जाते हैं। कॉमेडी शो में हिन्दू संस्कृति, हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया जाता है। माँ दुर्गा को वेश्या तक कहा गया। सीता माता एवं रावण के सम्बंध बताना एवं जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के चरित्र पर सवाल उठाना आम है। हाल ही में असम में एक प्रोफेसर ने भगवान राम पर अश्लील टिप्पणी की थी। लेकिन देश में कहीं भी न हिन्दू धर्म खतरे में आया, न ही कहीं दंगे हुए।

केरल में माँ दुर्गा की नग्न तस्वीर का पोस्टर वामपंथी कई बार लगा चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने माँ दुर्गा को वेश्या तक कह दिया था। अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बकायदा अकाउंट हैं, जिनका काम ही हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक पोस्ट करना है।

ऐसा भी नहीं है कि हाल के दिनों में ही यह देखने को मिला है। कथित पेंटर एमएफ हुसैन हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए हिन्दू देवियों के अश्लील चित्र बनाता था।

लेकिन कभी हिंदू हिंसक नहीं हुआ। य​दि इनके खिलाफ आवाज उठती भी है तो हिंदू अकाउंट की रिपोर्ट कर शांत हो जाते हैं। लेकिन बेंगलुरु में एक फेसबुक कमेंट ने सुनियोजित दंगे का रूप ले लिया।

ऐसे में सवाल उठता है कि ये अचानक हुआ या इसकी पहले से योजना तैयार थी? इसी साल फरवरी में भयानक हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। दंगों के एक आरोपित ताहिर हुसैन ने ने कबूल किया है दंगों की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी। इन्हें विदेशी ताकतों का समर्थन और पैसा भी हासिल था।

दिल्ली दंगों की चार्ज शीट और आरोपित ताहिर हुसैन का बयान

दिल्ली दंगों का कारण वे बड़े फैसले थे जो देश की संसद और न्यायपालिका ने लिए थे। इनमें मुख्य रूप से तीन तलाक, राम मंदिर, नागरिकता संशोधन कानून था। सुनियोजित तरीके से पहले यह दुष्प्रचार किया गया कि ये सब इस्लाम विरोधी हैं। फिर कुछ राजनीतिक संगठन जिनमें वामपंथी एवं कट्टरपंथी ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान से संबंध रखने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे कट्टर इस्लामिक संगठनों ने हिंसा की साजिश रची।

अमेरिका के हालिया दंगों में ANTIFA नामक एक संगठन का हाथ पाया गया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगा यिा। ANTIFA का सम्बन्ध भी दिल्ली दंगों से जुड़ा मिला। वामपंथियों के नेतृत्व में यह संगठन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी ​सक्रिय है।

जेएनयू में ANTIFA

ऐसे में बेंगलुरु में भी जो कुछ हुआ वह सुनियोजित ही लगता है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में अचानक कुछ ही घंटों के भीतर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुट जाना, दंगाई भीड़ के इस्लामी नारे, आगजनी, हिंसा, सब कुछ इसी ओर इशारा करते हैं।

दिल्ली दंगों की जॉंच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे भी जाहिर है कि बेंगलुरु में भी इस तरह की हिंसा बिना योजना के मुमकिन नहीं थी। इस मामले में हैरत की बात यह भी है कि कॉन्ग्रेस विधायक मूर्ति दलित समुदाय से आते हैं। बावजूद न तो कथित दलित हितैषियों ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है और न ही कॉन्ग्रेस ने अपने विधायक और उनके परिवार को निशाना बनाकर किए गए इस हिंसा की निंदा की है।

भारत में आज भी ऐसे लोग हैं जो गजवा-ए-हिन्द का सपना लिए बैठे हैं। 1946 के लेकर आज तक इन दंगों की जगह भले बदली हो पर तरीका आज भी वही है।

सिर्फ इसलिए कि मैं कॉन्ग्रेस से हूँ, क्या मुझे धर्म के बारे में नहीं बोलना चाहिए: बेंगलुरु ‘ईशनिंदा’ आरोपित नवीन

कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी नवीन का कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ उनके संबंधों का खुलासा हुआ है। बता दें कि नवीन पर आरोप है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा फैलाने के लिए संप्रदाय विशेष की भीड़ को भड़काया था।

नवीन इस समय अपने आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर पुलिस हिरासत में है। कन्नड़ दैनिक विजयवाणी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नवीन ने शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को बेंगलुरु दंगों के मामले की पुलिस जाँच के दौरान पूछताछ में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपने जुड़ाव की खुलकर पुष्टि की है।

युवा कॉन्ग्रेस नेता ने पूछताछ के दौरान पुलिस से कहा, “सिर्फ इसलिए कि मैं कॉन्ग्रेस से हूँ, क्या मुझे धर्म के बारे में नहीं बोलना चाहिए।”

कथित तौर पर, कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे ने जाँच के दौरान पुलिस अधिकारियों को बेंगलुरु दंगों से संबंधित सनसनीखेज जानकारी दी है। बेंगलुरु पुलिस ने नवीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए और 295 के तहत मामला दर्ज किया है।

जाँच के दौरान, नवीन ने किसी भी धर्म या आस्था के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने या किसी भी तरह का अपमान करने से इनकार किया है। गिरफ्तार कॉन्ग्रेस पार्टी कार्यकर्ता ने यह भी कहा है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू विरोधी टिप्पणियों का समय-समय पर जवाब दिया है और आरोप लगाया है कि इसी वजह से कुछ लोग उसके खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

नवीन ने पुलिस को यह भी बताया कि इस घटना के बाद से उसे जान से मारने की बहुत सारी धमकियाँ मिल रही है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु के दंगों के बाद, नवीन को इस्लामवादियों, संप्रदाय विशेष की मॉब से इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए धमकियाँ मिल रही हैं। हमने इस बात की सूचना दी थी कि कैसे बेंगलुरु में हुए दंगों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर इस्लामवादियों ने नवीन की मौत की कामना की थी।

आरिफ खान नाम के युवक द्वारा नवीन की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा गया – “यही वो कॉन्ग्रेस MLA का नेफ्यू है, जिसने रसूलल्लाह की शान में गुस्ताखी की है..।”

इस पोस्ट के कमेंट्स में सलमान अंसारी और सरताज ने नवीन को ‘लानत’ दी हैं। अन्सीर बाशा ने लिखा है – “इस को फॉरवर्ड मत करो, सब्र करो और इसका हश्र देखो आगे।”

इससे पहले, पूर्व सपा नेता शाहबेज रिजवी ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस के दलित विधायक आर मूर्ति के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया

बेंगलुरु में इस्लामिक भीड़ का भयावह चेहरा देखने के बाद भी 13 अगस्त को शाहजेब रिजवी ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उसने कहा था, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से नवीन ने हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ। इस युवक का जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा।” इसके लिए रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से मिलकर 51 लाख रुपए जमा करने की भी अपील की थी।

बता दें कि नवीन के कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर बेंगलुरु में दंगे भड़कने बाद उसके राजनीतिक संबंध को लेकर भाजपा और विपक्षी पार्टी में वाकयुद्ध छिड़ गया था। कॉन्ग्रेस ने अपना मुस्लिम तुष्टिकरण कार्ड को संरक्षित रखते हुए पर नवीन पर इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए हमला किया था। ऐसा करने पर, राज्य में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रमुख डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि नवीन भाजपा के समर्थक हैं।

डीके शिवकुमार के राजनीतिक आक्षेप का जवाब देते हुए, उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण ने डीके शिवकुमार और नवीन का पोस्टर शेयर करते हुए सबूत पेश किया था कि ‘ईशनिंदा’ करने वाला आरोपित कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता था।

हालाँकि, नवीन के द्वारा खुद को कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपने संबंधों के बारे में कबूल करने के साथ ही उसके राजनीतिक जुड़ाव को लेकर विवाद अब समाप्त होता दिख रहा है।

सुशांत ने टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी को दिए 62 लाख रुपए, एजेंसी ने रिया चक्रवर्ती को दिए 22 लाख रुपए: ED के सूत्र

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक सुशांत ने कथित रूप से एक टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी को 62 लाख रुपए का भुगतान किया था और बाद में उसी कंपनी ने रिया चक्रवर्ती को 22 लाख रुपए का भुगतान किया। टाइम्स नाउ ने ईडी के सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ये जानकारी दी है।

सुशांत के खातों से बड़ी रकम निकालने वाले कौन लोग थे, ईडी धीरे-धीरे इसकी तह में पहुँच रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की जाँच के दौरान ईडी को पता चला है कि सुशांत के खाते से 14 नवंबर को भी सैमुअल मिरांडा ने 2 लाख रूपए की रकम निकाले थे। दस्तावेजों के मुताबिक सुशांत के बैंक खाते से एटीएम के जरिए 14 नवंबर की रात 8:33 मिनट से 8:48 तक दो लाख रुपए 20-20 हजार रुपए की शक्ल में विड्रॉ किए गए थे।

बता दें कि सैमुअल मिरांडा सुशांत का हाउस मैनेजर था, जिसे रिया ने काम पर लगाया था। वह रिया का करीबी बताया जाता है। सैमुअल मिरांडा का नाम ईडी की एफआईआर में भी है। ईडी सैमुअल मिरांडा से एक बार पूछताछ भी कर चुकी है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिए एक ग्लोबल प्रेयर रखी गई है। इसकी शुरुआत आज 15 अगस्त से हो रही है। फिल्म ‘काई पो छे’ के अभिनेता की बहन श्वेता कीर्ति सिंह ने लोगों से एक पोस्ट के माध्यम से अनुरोध किया है कि सभी लोग 15 अगस्त को होने वाली 24 घंटे की वैश्विक पूजा में शामिल हों। श्वेता के अलावा अंकिता लोखंडे ने भी इस प्रेयर में लोगों ने से जुड़ने की अपील की है।

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में दिवंगत सुशान्त सिंह राजपूत की आत्मा की शांति के लिए हवन किया। बाबा रामदेव ने कहा कि सुशान्त के जीवन को कातिलों ने छीन ली अब कम से कम उसके दिवंगत आत्मा को न्याय मिल जाए।

गौरतलब है कि सुशांत के चचेरे भाई और विधायक नीरज सिंह बबलू ने मुंबई पुलिस पर डायरी के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि डायरी के कुछ पन्ने फाड़ दिए गए हैं।

बबलू का कहना है कि सुशांत की मौत के बाद उन्होंने ही उसकी डायरी पुलिस को सौंपी थी। उन्होंने कहा कि सुशांत लंबे समय से डायरी लिखा करते थे। इसमें सुशांत के करियर प्लानिंग को लेकर सब कुछ था। वो कैसे हॉलीवुड में एंट्री लेते और फिल्में करते, इस बारे में पूरी योजना थी। उन्होंने कहा कि सुशांत हॉलीवुड मे जाने में सक्षम थे और 100 गरीब बच्चों को NASA में भी भेजना चाहते थे।

बंगाल: तिरंगा फहरा रहे BJP कार्यकर्ता की हत्या, TMC के गुंडों पर हमला और बमबारी के आरोप

स्वतंत्रता दिवस के दिन भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का सिलसिला नहीं थमा। कथित तौर पर तिरंगा फहराने को लेकर हुए विवाद में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। घटना हुगली के आरामबाग स्थित खनकुल की है। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर हमला करने का आरोप है।

मृतक भाजपा कार्यकर्ता का नाम सुदर्शन प्रमाणिक है। बताया जा रहा है कि उन पर झंडोत्तोलन के दौरान गुंडों ने धारदार हथियारों से हमला किया। उन्हें स्थानीय हेल्थ सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हत्याकांड के बाद क्षेत्र में तनाव पसर गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का विरोध करने के आरोप लग रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शनिवार (अगस्त 15, 2020) को दौलतचक में भाजपा और तृणमूल के कार्यकर्ता झण्डा फहरा रहे थे। अचानक सुबह 9 बजे दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। बाद में संघर्ष हिंसक हो गया। स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बमबारी भी शुरू हो गई थी। इसी दौरान सुदर्शन प्रमाणिक पर हमला किया गया और वे जमीन पर गिर पड़े।

भाजपा ने इस हिंसा के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा है, “ममता राज में स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना भी अपराध हो गया है। आरामबाग क्षेत्र के भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सुदर्शन प्रमाणिक की इसी मामले में हत्या कर दी गई। शक है कि ये TMC के गुंडों का काम है। आज हमें इस गुंडा राज से मुक्त होने का संकल्प लेना ही होगा।”

वैसे यह पहली घटना नहीं है जब बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या को लेकर सत्ताधारी TMC पर आरोप लगे हों। हाल ही में उत्तरी दिनाजपुर में भाजपा नेता की बहन की कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। घटना के ठीक एक दिन बाद आरोपित फिरोज अली की भी लाश मिली थी। इसके बाद आरोपित की हत्या के आरोप में मृतका के पिता और दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मृतका के परिवार वालों ने हत्या और बलात्कार का आरोप फिरोज अली पर लगाया था, उसका सम्बन्ध तृणमूल कॉन्ग्रेस से था।

स्वतंत्रता दिवस पर मोगा में प्रशासनिक भवन पर फहराया खालिस्तानी झंडा: CM अमरिंदर ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

पंजाब के मोगा में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले खालिस्तानी तत्वों ने मुख्य प्रशासनिक भवन के ऊपर ही खालिस्तान का झंडा फहरा दिया। इतना ही नहीं, खालिस्तान समर्थकों ने वहाँ लगे तिरंगे झंडे को भी हटा दिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस घटना को सख्ती से लिया है और जिला प्रशासन को ऐसा करने वाले असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

घटना मोगा स्थित जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स की है। डीसी दफ्तर के सामने दो खालिस्तान समर्थक युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया है। इन दोनों ने 5वीं मंजिल पर चढ़ कर छत की पाइप पर खालिस्तान का झंडा लगा दिया। इसके बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों ने खालिस्तान का झंडा हटा कर वहाँ फिर से ससम्मान तिरंगा झंडा फहराया। मौके पर एसएसपी और एसडीएम भी पहुँचे।

हिन्दू संगठनों ने भी तिरंगा झंडा उतार कर खालिस्तान का झंडा फहराए जाने को लेकर रोष प्रकट किया है। शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को आयोजित एक बैठक में एंटी खालिस्तान फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशांत शर्मा व राष्ट्रीय चेयमैन अमित घई ने कहा कि रेफरेंडम 2020 के प्रचार के तहत ही उक्त घटना को अंजाम दिया गया है। बता दें कि खालिस्तान गैंग अलग सिख मुल्क के लिए रेफरेंडम की माँग करते हुए दुष्प्रचार कर रहा है।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, पंजाब में खालिस्तान समर्थक तेजी के साथ सक्रिय होने का प्रयास कर रहे है। सभी इसे एक सुर में माहौल बिगाड़ने की साजिश बता रहे हैं।

फ़िलहाल पुलिस ने कॉम्प्लेक्स के सभी सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं। दोषियों के बारे में सूचना देने पर 50,000 रुपए का इनाम रखा गया है। सीएम अमरिंदर ने ‘सिख फॉर जस्टिस’ और आतंकी गोरपतवंत सिंह पन्नी को चुनौती देते हुए कहा कि वे उन्हें अच्छा सबक सिखाएँगे। उन्होंने युवाओं को भारत-विरोधी तत्वों से दूर रहने की सलाह दी है।

बताया गया है कि संदेह पैदा न हो, इसीलिए दोनों युवक कर्मचारियों की एंट्री के समय उनके साथ ही कॉम्पलेस में घुस गए थे। सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा है कि कुछ युवा भारत-विरोधी खालिस्तानी गैंग के जहरीले प्रोपेगेंडा के शिकार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाबी समुदाय भारत में पूरी समृद्धि के साथ रह रहा है और देशविरोधी गतिविधियों का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि खालिस्तानी गैंग भारत-विरोधी तत्वों से रुपए ऐंठने के लिए ऐसी हरकतें कर रहा है।

बता दें कि पाकिस्तान भी सिखों को भड़काने के लिए चालें चल रहा है। खालिस्तान के लिए चलाई जा रही मुहिम रेफरेंडम-2020 को लेकर पाकिस्तान इंटरनेट कॉल के जरिए सिखों को भड़का रहा है और साथ ही ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चला रहा है, जो भारत को बाँटने की एक साजिश है। पंजाब में फिर से माहौल ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

स्वतंत्रता के मायने: एक भारतीय को चाहिए ‘आजादी’ इन 8 तरह के लोगों से…

आजादी का मतलब हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। आज के संदर्भ में यह शब्द अपने आप में एक अलग स्तर की व्यापकता लिए चलता है। वामपंथी गैंग के लिए इसके मायने बिलकुल ही अलग हैं, और गैर-वामपंथियों के लिए अलग। ‘हिन्दुओं से आजादी’ भी इसी एक शब्द में समेट दी गई है, जो बार-बार, रूप बदल कर हमारे कानों तक पहुँचती है। साथ ही, ‘केरल माँगे आजादी’ जैसे संदर्भ भी इसी शब्द में सिमटे हुए हैं। इसे इतनी बार गलत तरीके से समझाने की कोशिशें हुई हैं कि लोग भूल जाते हैं कि पंद्रह अगस्त का दिन क्या है, और स्वतंत्रता दिवस के मायने क्या हैं।

यूँ तो भारतीय राष्ट्र को मिली आजादी एक ‘ट्रांसफर ऑफ पावर’ कही जाती है, क्योंकि यहाँ तमाम संघर्षों के बाद भी देश को बाँट कर एक ऐसी स्थिति बना दी गई जो स्मृति में नासूर की तरह रिसता रहा है। मैं भी, व्यक्तिगत तौर पर, कॉन्ग्रेस की अंग्रेजियत का प्रखर विरोधी रहा हूँ कि आजादी के बाद भी हमने औपनिवेशिक प्रतीकों को ध्वस्त करने की जगह उसी में गौरव क्यों महसूस किया? आजादी के बाद भी जॉर्ज पंचम की मूर्ति दिल्ली में, या क्वीन विक्टोरिया के नाम पर इमारत कोलकाता में क्यों है?

आखिर ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ को ध्वस्त क्यों नहीं किया गया? क्या संसद भवन जैसी इमारतों को डायनामाइट से उड़ा नहीं देना चाहिए था? क्या इनकी दीवारों से गुलामी की बदबू नहीं आती होगी कॉन्ग्रेस के नेताओं को? अंग्रेजों की छाप की हर वैसी चीज को मिटा देना था, जो हम आने वाले समय में बना सकते थे। सड़कें और रेल हमारे काम की हैं, इसलिए उनको रखते, लेकिन मूर्तियों, इमारतों और नामों को ढोने के पीछे ‘श्वेत चमड़ी’ के आकर्षण के अलावा क्या कारण रहे होंगे? क्या कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र अपने आपको गुलाम रखने वाली, हत्यारिन सरकारों की मूर्तियाँ ढोता है?

खैर, जो हो गया, वो तो हो ही चुका है लेकिन पिछले कुछ सालों में स्वतंत्र भारत में शायद पहली बार राष्ट्रवाद को ले कर एक जागरुकता आई है, वो मुझे आशान्वित रखती है। मुझे यह संतुष्टि मिलती है कि अब युवा वर्ग सवाल करने लगा है, दुरात्माओं के मुँह बंद करने लगा है, और वाकई में राष्ट्र को ले कर प्रतिबद्ध दिखता है।

आजादी किसी जंजीर से मुक्त होना भर नहीं, आजादी एक सोच है जो हमें मुक्त करती है। आज़ाद होना, स्वतंत्र होना कोई छूने की बात नहीं है, वो महसूस करने की बात है। इसका मतलब है कि आप वैचारिक रूप से आज़ाद हैं कि आप खुले दिमाग से सोच सकते हैं, आपकी सोच पर पहरा नहीं है। आप अगर ये कह पा रहे हैं कि आपकी सोच पर पहरा है, और वो सुना जा रहा है, तो फिर आपकी सोच स्वतंत्र है।

आज़ाद आप होते हैं, किए नहीं जा सकते। आप अपनी आज़ादी के लिए प्रयत्न करते हैं। वैयक्तिक आज़ादी की भावना सामाजिक आज़ादी की नींव है। आज़ादी एक तरह के सुरक्षा की भावना देता है। आज़ादी का मतलब है बोलने की आज़ादी, सोचने की आज़ादी, आलोचना की आज़ादी, अपने लिए एक बेहतर जीवन के प्रयासरत रहने की आज़ादी। ये आपको दी नहीं जा सकती, ये आप महसूस करते हैं। दी इसलिए नहीं जा सकती क्योंकि वो सैंतालीस में दे दी गई थी। अब आपके ऊपर है कि आप इसको कैसे देखते हैं।

हाँ, सबकी परिभाषाएँ अलग हैं आज़ादी को लेकर। आज़ादी आखिर है क्या? एक सामान्य आदमी के लिए इसके क्या मायने हैं? सबसे निचले तबके के सबसे निरीह भारतीय के लिए आज़ादी का क्या मतलब है? क्या सबसे अमीर और सबसे ग़रीब, सबसे अनपढ़ और सबसे बड़े विश्वविद्यालय से पढ़े नवयुवक, सबसे अनभिज्ञ और सबसे समझदार, एक पुरुष और एक स्त्री, एक भ्रूण और अस्सी-सौ साल के बुज़ुर्ग, के लिए आज़ादी के मायने एक हैं?

आप सवाल उठाइए। वो आपका मौलिक अधिकार है। आप प्रदर्शन कीजिए। आप हंगामा कीजिए। सब कुछ कीजिए जो संविधानसम्मत हैं। लेकिन संविधान की हर बात पर गौर कीजिए। उसका एक हिस्सा अपने हिसाब से प्रयोग में मत लाइए। वही संविधान आपको अपने देश की बेहतरी में योगदान माँगता है। वही संविधान कुछ प्रतीकों का सम्मान खोजता है, क्योंकि उसको लिखने वालों ने वो दौर देखा था जब सोलह साल का खुदी राम बोस फाँसी पर लटका दिया गया था। संविधान निर्माताओं ने बंगाल का अकाल भी देखा जो चर्चिल ने होने दिया, क्योंकि यहाँ का अनाज अंग्रेज़ी जनता के लिए आने वाले दिनों के बफर स्टॉक के रूप में रखवा दिया गया था। उन्होंने लाखों बंगालवासियों को चीलों द्वारा खा जाए जाने की ख़बरें सुनी होंगी। उन्होंने जलियाँवाला बाग देखा होगा, विभाजन में रेलों में भरे आते-जाते डिब्बों से बाहर लटकते हाथ और सर देखे होंगे।

इतनी जल्दी देश नहीं बदलता। आशाएँ बहुत जल्दी बदलती हैं, देश को बनने में समय लगता है। देश को बनने दीजिए। इस आज़ादी के दिन का सम्मान कीजिए। अपने सवालों में विचार लाइए। सवाल पूछने से पहले अपनी ज़मीन तलाश लीजिए कि क्या आप अपना सवाल पूछ रहे हैं, या किसी ‘वाद’ या विचारधारा का।

आजादी को ले कर पिछले सालों में ‘हमको चाहिए आजादी’ की डफली खूब पीटी गई। ऐसी आजादी के केन्द्र में कभी भी भारतीय हिन्दू नहीं रहा। इस पूरी मुहिम का एकमात्र लक्ष्य हिन्दुओं को नीचा दिखाना, या उनके प्रतीकों पर आक्रमण था। इसलिए, मैं नीचे एक लिस्ट देने जा रहा हूँ कि एक भारतीय के तौर पर मुझे किस-किस से आजादी चाहिए।

वामपंथियों से आजादी

वामपंथी इस राष्ट्र का ही नहीं, विश्व के लिए एक कोढ़ के समान है। हर बीमारी की जड़ में यही वामपंथ या ऐसी ही विषैली सोच है जो आतंकियों, नक्सलियों, अपराधियों और आपाराधिक प्रवृत्ति के लोगों और संस्थाओं को प्रश्रय देती है। देशविरोधी ताकतों के ये वामपंथी बचाते हैं, और हर संभव कोशिश करते हैं कि भारत विखंडित हो कर बिखर जाए। इसलिए, इस विचारधारा की जड़ों में कन्सन्ट्रेटेड हायड्रोक्लोरिक अम्ल डालने की आवश्यकता है। इस विचारधारा का खात्मा विश्व कल्याण के लिए अत्यावश्यक है। हमें वामपंथियों से आजादी मिलनी चाहिए।

मीडिया गिरोह से आजादी

मीडिया का एक गिरोह जिस तरह से देश में चल रही हर योजना, हर बात में नकारात्मकता सिर्फ इसलिए खोज लेता है, क्योंकि सरकार उसके मतलब की नहीं है, ऐसे गिरोह से राष्ट्र को आजादी मिलनी चाहिए। दंगाइयों को ‘कवर फायर’ देने से ले कर ‘आपातकाल’ जैसे शब्दों को आवारा सांड के खेत में घुसने जैसा आम बनाने तक इस गिरोह ने जनता को कुछ भी बेहतर नहीं दिया। यह गिरोह सदैव वामपंथियों को एक प्लेटफ़ॉर्म देता रहा है, जहाँ से वो अपने जहर की बिक्री करते रहें। यही मीडिया गिरोह कई संदर्भों में दंगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाता रहा है। एक समुदाय के भीतर ‘तुम्हें देश से भगाने की तैयारी हो रही है’ जैसी भावनाएँ डालने वाले लोग इसी गिरोह के हैं।

लिब्रांडुओं से आजादी

लिबरल ब्रीड ने जिस तरह से ‘लिबरल’ शब्द का गलत फायदा उठाया है, उसके कारण से इस शब्द को गाली की तरह देखा जाने लगा है। वैचारिक रूप से सबसे ज्यादा अनुदार लोग आज लिबरल कहे जाते हैं, जिनके लिए ‘मैं ही सही हूँ, पूरी दुनिया गलत है’ एक ध्येय वाक्य बन चुका है। इन लोगों से बोलने पर प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी ढंग की बात नहीं कहते।

दंगाइयों से आजादी

दंगा करना कई लोगों का मजहबी कर्तव्य बन चुका है। छोटी-सी बात को अपने मन से ही आधार बना कर लोग सड़कों पर उतर आते हैं। पुलिस मजबूर सी दिखती है, क्योंकि उन्हें नेताओं के आदेशों से चलना पड़ता है। नेताओं को वोटबैंक से चलना होता है। दंगाइयों के कारण बंगाल में दो दिन में रेलवे की ₹250 करोड़ की संपत्ति जला दी गई, दिल्ली में कितने करोड़ गए, गिनती नहीं और लाशों की तो बात ही न की जाए। वही काम बेंगलुरु में उसी शैली में हुआ। इस पर सरकारों को सोचना होगा कि एक समुदाय के दंगों को कब तक ‘आहत होने’ के नाम पर झेला जाता रहेगा।

इस्लामी कट्टरपंथियों से आजादी

इस्लामी कट्टरपंथियों ने कई बार देश और दुनिया को धमाकों से ही नहीं, अपने विचारों से भी दहलाया है। छोटे बच्चों में दूसरे मजहब के खिलाफ घृणा भरी जाती है, पत्थर थमा दिए जाते हैं और सड़कों पर पैदल सैनिकों के रूप में उतारा जाता है। इस कट्टरपंथी सोच ने भारत में लाखों जानें ली हैं और सैकड़ों करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान किया है। ऐसी मजहबी संस्थाएँ चिह्नित की जानी चाहिए और उन्हें बंद किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में देश जलने से भी बचे और पुलिस/सेना को छर्रों से उन पर फायरिंग न करनी पड़े।

छद्मसेकुलर लोगों से आजादी

सेकुलर शब्द को गाली बनाने वाले लोगों ने हर हिन्दूफोबिक बात को ही सेकुलर बना दिया है। हिन्दुओं की देवी-देवताओं पर पोस्टर, चुटकुले, सोशल मीडिया पोस्ट आदि बनाए जाते हैं, जो कि काफी घटिया स्तर के और अपमानजनक होते हैं। इसे ‘मतभिन्नता’ या ‘अभिव्यक्ति’ का नाम दे कर यही सेकुलर बचाने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, हिन्दू या जुड़े हुए धर्मों के अलावा किसी और पर किसी ने अलग संदर्भ में भी कुछ कह दिया तो उसके गर्दन उतारने की बात को भी टीवी पर उचित ठहराया जाता है। तब यही सेकुलर गैंग ऐसी हिंसा को उचित ठहराता है कि ‘लिखना नहीं चाहिए था’। ये हर बार बताते हैं कि हिन्दुओं के खिलाफ नीचता चलेगी लेकिन इस्लाम पर एक टिप्पणी भी बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसे सेकुलरों ने शब्द की परिभाषा बदल दी है। हमें इनसे आजादी चाहिए ताकि समाज में समान रूप से विचारों पर सामूहिक सहमति या असहमति बन सके।

टुटपुँजिया कॉमेडियन्स से आजादी

कॉमेडी के नाम पर जो अश्लीलता और हिन्दूघृणा परोसी जा रही है, वो सस्ती लोकप्रियता के लिए भले ही अच्छी हो, पर समाज के लिए नहीं है। भाषा की मर्यादा जैसी कोई चीज वैसे भी नहीं रही ऐसी जगहों पर, क्योंकि सुनने वाले भी कुंठित या अनभिज्ञ लोग होते हैं और सुनाने वालों को लगता है कि लोग उसके चुटकुलों पर हँस रहे हैं। वैसे, होता इसके उलट है कि लोग चुटकुलों पर नहीं, चुटकुलेबाजों द्वारा भरी सभा में माँ-बहन की गालियाँ दे सकने की बात पर हँसते हैं। इसके अलावा देवी-देवताओं और हिन्दू ग्रंथों पर बनते चुटकुलों का कोई ओर-अंत ही नहीं, क्योंकि हिन्दू सहिष्णु होता है और इन बातों को इग्नोर करता रहता है। ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगना चाहिए जिन्होंने हिन्दुओं की आस्था को उपहास का पात्र समझ लिया है। क्योंकि एक दिन हिन्दुओं का धैर्य टूट जाएगा और फिर कुछ ऐसा होगा जो उनकी कल्पना के परे होगी। वैसे कई बार ऐसे नकली चुटकुलेबाज राह चलते पीटे जा चुके हैं।

बोनस: नकली फैक्टचेकरों से आजादी

ऑल्टन्यूज जैसी संस्थाओं ने फैक्टचेक के नाम पर सिर्फ अजेंडा चलाया है। खास मजहब से जुड़ी हर खबर की फैक्टचेक कर के नामोनुरूप ‘ऑल्टरनेट’ फैक्ट पैदा करना इनका पेशा है। जामिया के दंगाइयों के हाथ के पत्थर को वॉलेट कहना हो या तब्लीगी जमात के लोगों द्वारा कोरोना फैलाने और थूकने आदि की खबरें, ऑल्टन्यूज ने पुरजोर कोशिश की कि उनका सत्य सामने न आए। साथ ही, सरकार को घेरने के लिए ऐसी संस्थाएँ किसी मृतक के परिवार को अपने फैक्टचेक का हिस्सा बनाने के लिए कोचिंग तक देते देखे गए हैं। ये लोग फैक्टचेक के नाम पर इस्लामी कट्टरपंथी अजेंडा और वामपंथी विचारों को समाज में डालते रहते हैं। और हाँ, जब कुछ करने को न हो तो ये लोग इंटरनेट पर घूम रहे मीम्स और चुटकुलों का भी फैक्टचेक करते हैं ताकि लोगों को लगे कि ये कुछ कर रहे हैं। ऐसे अजेंडाबाज लोगों से भी राष्ट्र को आजादी मिलनी चाहिए जो नाम में फैक्टचेक लिखते हैं, और कुकर्म से ऑल्टरनेट फैक्ट पैदा करने में व्यस्त रहते हैं।

‘सुशांत की डायरी के कुछ पन्ने फाड़ डाले’: मुंबई पुलिस पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में सबूतों से छेड़छाड़ को लेकर मुंबई पुलिस पर एक और आरोप लगा है। सुशांत के चचेरे भाई और विधायक नीरज सिंह बबलू ने मुंबई पुलिस पर डायरी के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि डायरी के कुछ पन्ने फाड़ दिए गए हैं।

बबलू का कहना है कि सुशांत की मौत के बाद उन्होंने ही उसकी डायरी पुलिस को सौंपी थी। उन्होंने कहा कि सुशांत लंबे समय से डायरी लिखा करते थे। इसमें सुशांत के करियर प्लानिंग को लेकर सब कुछ था। वो कैसे हॉलीवुड में एंट्री लेते और फिल्में करते, इस बारे में पूरी योजना थी। उन्होंने कहा कि सुशांत हॉलीवुड मे जाने में सक्षम थे और 100 गरीब बच्चों को NASA में भी भेजना चाहते थे।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपने सबमिशन में स्पष्ट कर दिया है कि इस केस को मुंबई पुलिस को ट्रांसफर करने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि वहाँ अब कुछ भी पेंडिंग नहीं है। रिया चक्रवर्ती ने इसके लिए याचिका डाली हुई है। मुंबई पुलिस पर ये भी आरोप लगा है कि उसने न सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत के फोन बल्कि अन्य गैजेट्स को भी फोरेंसिक जाँच के लिए भेजने में देरी की।

अब जब उनकी मौत के 2 महीने हो चुके हैं, नित नए खुलासों से मुंबई पुलिस की पोल खुल रही है। उनके फैंस ने आज ‘ग्लोबल प्रेयर्स फॉर SSR’ का भी आयोजन किया। उधर उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे ने इन आरोपों को नकारा है कि सुशांत सिंह राजपूत उनके फ्लैट की EMI भर रहे थे। उन्होंने अपना बैंक स्टैट्मन्ट शेयर कर के दिखाया है कि EMI उनके ही अकाउंट से कट रहा था।

वहीं रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल्स भी सामने आई है। इससे पता चला है कि 13 जून 2020 की रात रिया ने 5 लोगों को कॉल्स किए थे। 13 जून की शाम रिया ने 7:50 में कास्टिंग डायरेक्टर निशा चिटालिया को कॉल किया था। इस दौरान दोनों के बीच 1 मिनट की बात हुई थी। इसके बाद 8:53 पर रिया ने फिर निशा से बात की और इस दौरान दोनों के बीच 57 सेकेंड बातचीत हुई थी। 

रिया ने 9 बजकर 21 मिनट पर रूपा चड्ढा नामक महिला से फोन पर बातचीत की थी और दोनों की 7 मिनट 8 सेकेंड लंबी बात हुई। अंतिम कॉल रिया ने किसी AU नाम से रजिस्टर्ड नंबर पर कॉल की। दोनों की 1 मिनट 38 सेकेंड बात हुई थी। वहीं सुशांत के एक पूर्व ड्राइवर का चौंकाने वाला बयान आया है, जिसमें उसने दावा किया है कि सुशांत के बीमार रहने पर भी रिया पार्टी किया करती थी।

ड्राइवर ने बताया कि ऐसा उसने लोगों से सुना है कि जब सुशांत बीमार रहते थे, तब भी उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती पार्टियों में मशगूल रहती थी। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए लिखा कि ऐसे ही एक समय वे खुद रिया चक्रवर्ती, शौविक और सुशांत की बहन प्रियंका को पार्टी में लेकर गए थे। हालाँकि, प्रियंका इसके बाद दिल्ली चली गई थी। ड्राइवर ने ये भी बताया कि सुशांत अपनी बहन के काफी करीब थे।

उधर जिया खान की माँ राबिया खान ने सुशांत मामले में सीबीआई जाँच का समर्थन किया है। साथ ही महेश भट्ट को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि जिया के अंतिम संस्कार के समय में महेश भट्ट ने उन्हें धमकाने की कोशिश की थी। जिया के अंतिम संस्कार पर भट्ट ने उनको कहा कि उनकी बेटी (जिया) डिप्रेशन में थी। उन्होंने इसका खंडन किया। लेकिन भट्ट ने उनसे कहा, “तुम चुप हो जाओ वरना तुम्हें भी इंजेक्शन देकर सुला देंगे।”

भारत में टेस्टिंग फेज में कोरोना की 3 वैक्सीन, रिकॉर्ड समय में 1400 लैब्स तैयार: लाल किला से PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार को लाल किला की प्राचीर से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत‘ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत हुई है। कोरोना के समय में हमने देख लिया है कि डिजिटल भारत अभियान की क्या भूमिका रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले महीने ही करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन अकेले BHIM UPI से हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत साइबर सुरक्षा के मामले में सचेत और सतर्क है। इन खतरों का सामना करने के लिए नई व्यवस्थाएं लगातार विकसित कर रहा है। देश में नई राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा अनुभव कहता है कि भारत में महिला शक्ति को जब-जब भी अवसर मिले, उन्होंने देश का नाम रोशन किया, देश को मजबूती दी है।

राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में महिलाएँ अंडरग्राउंड कोयला खदानों में काम कर रही हैं तो लड़ाकू विमानों से आसमान की बुलंदियों को भी छू रही हैं। उन्होंने बताया कि देश के जो 40 करोड़ जन-धन खाते खुले हैं, उसमें से लगभग 22 करोड़ खाते महिलाओं के ही हैं। कोरोना के समय में अप्रैल-मई-जून, इन तीन महीनों में महिलाओं के खातों में करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि जब कोरोना शुरू हुआ था तब हमारे देश में कोरोना टेस्टिंग के लिए सिर्फ एक लैब थी, जबकि आज देश में 1400 से ज्यादा Labs हैं। उन्होंने कहा कि आज से देश में एक और बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। ये है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन। पीएम ने विश्वास जताया कि नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा।

बकौल पीएम मोदी, लोगों के हर टेस्ट, हर बीमारी, आपको किस डॉक्टर ने कौन सी दवा दी, कब दी, उनकी रिपोर्ट्स क्या थीं, ये सारी जानकारी इसी एक Health ID में समाहित होगी। उन्होंने बताया कि इस समय भारत में कोरोना की तीन वैक्सीन टेस्टिंग चरण में हैं। वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलते ही देश में बड़े पैमाने पर इन वैक्सीन के प्रोडक्शन की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग जगहों पर विकास की तस्वीर अलग-अलग दिखती है। कुछ क्षेत्र बहुत आगे हैं, कुछ क्षेत्र बहुत पीछे। कुछ जिले बहुत आगे हैं, कुछ जिले बहुत पीछे। ये असंतुलित विकास आत्मनिर्भर भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती है। जम्मू-कश्मीर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा:

ये एक साल जम्मू-कश्मीर की एक नई विकास यात्रा का साल है। ये एक साल जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, दलितों को मिले अधिकारों का साल है! ये जम्मू-कश्मीर में शरणार्थियों के गरिमापूर्ण जीवन का भी एक साल है। लोकतंत्र की सच्ची ताकत स्थानीय इकाइयों में है। हम सभी के लिए गर्व की बात है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय इकाइयों के जनप्रतिनिधि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ विकास के नए युग को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्ष लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर, वहाँ के लोगों की बरसों पुरानी माँग को पूरा किया गया है। हिमालय की ऊँचाइयों में बसा लद्दाख आज विकास की नई ऊँचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है।

स्वतंत्रता दिवस 2020 पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किला से देश को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार से सिक्कम ने ऑर्गैनिक स्टेट के रूप में अपनी पहचान बनाई है, वैसे ही आने वाले दिनों में लद्दाख, अपनी पहचान एक कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र के तौर पर बनाए, इस दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। पीएम ने कहा कि दक्षिण एशिया में दुनिया की एक चौथाई जनसंख्या रहती है। हम सहयोग और सहभागिता से इतनी बड़ी जनसंख्या के विकास और समृद्धि की अनगिनत संभावनाएँ पैदा कर सकते हैं। इस क्षेत्र के देशों के सभी नेताओं की इस विशाल जन समूह के विकास और प्रगति की ओर एक अहम जिम्मेदारी है।

उन्होंने जानकारी दी कि देश के 100 चुने हुए शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए एक holistic approach के साथ एक विशेष अभियान पर भी काम हो रहा है। साथ ही बताया कि हमारे पड़ोसी देशों के साथ, चाहे वो हमसे जमीन से जुड़े हों या समंदर से, अपने संबंधों को हम सुरक्षा, विकास और विश्वास की साझेदारी के साथ जोड़ रहे हैं। बकौल पीएम, 21वीं सदी के इस दशक में अब भारत को नई नीति और नई रीति के साथ ही आगे बढ़ना होगा। अब साधारण से काम नहीं चलेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में 1300 से ज्यादा द्वीप हैं। इनमें से कुछ चुनिंदा द्वीपों को, उनकी भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, देश के विकास में उनके महत्व को ध्यान में रखते हुए, नई विकास योजनाएँ शुरू करने पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगले 1000 दिन में, लक्षद्वीप को भी सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब NCC का विस्तार देश के 173 सीमाओं और समुद्री सीमा वाले जिलों तक सुनिश्चित किया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस अभियान के तहत करीब 1 लाख नए NCC कैडेट्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें भी करीब एक तिहाई बेटियों को ये स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आज भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है। इसी इच्छाशक्ति के साथ प्रत्येक भारतीय को आगे बढ़ना है।

पीएम ने कहा कि कहा कि विकास के मामले में देश के कई क्षेत्र भी पीछे रह गए हैं। ऐसे 110 से ज्यादा आकांक्षी जिलों को चुनकर, वहाँ पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि लोगों को बेहतर शिक्षा मिले, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें, रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने जानकारी दी कि वोकल फॉर लोकल, Re-Skill और Up-Skill का अभियान, गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों के जीवनस्तर में आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का संचार करेगा।

पीएम ने कहा कि मेरा हिंदुस्तान की सोच-अप्रोच पर भरोसा है। इतिहास गवाह है कि भारत एक बार ठान लेता है तो उसे करके रहता है। उन्होंने कहा कि भारत को आधुनिकता की तरफ तेज गति से ले जाने के लिए देश के Overall Infrastructure Development को एक नई दिशा देने की जरूरत है। इसके लिए ‘National Infrastructure Pipeline Project’ की घोषणा की गई।

‘मैंने अपनी माँ और भाई को जिंदा जलते देखा’: विभाजन की वो कहानी जिससे आज भी काँपते हैं बेअंत सिंह

1947 में 15 अगस्त को भारत को सिर्फ आजादी ही नहीं मिली थी, बल्कि विभाजन का एक ऐसा दंश भी मिला था जिससे देश अब तक उबर नहीं पाया है। एक कहानी बेअंत सिंह की भी है, जो मेरठ की गलियों में आपको रिक्शा चलाते दिख जाएँगे। 84 साल के बेअंत सिंह मेरठ के सबसे बुजुर्ग रिक्शा चालक हैं। अब उनके पाँवों ने जवाब देना शुरू कर दिया है, लेकिन वो अभी भी जीविका के लिए रिक्शा चलाते हैं।

‘न्यूज 18’ की खबर के अनुसार, बेअंत सिंह का ब्लड प्रेशर सही नहीं रहता है, उनके फेफड़े अब पहले की तरह नहीं रहे और उनकी आँखों पर सफेद रंग के धब्बे नजर आते हैं। लेकिन, 7 दशक पहले का वो दृश्य उनके सामने ज्यों का त्यों कौंध जाता है, जब उनकी माँ और भाई को उनके सामने ही जला डाला गया था। वह पल आज भी उनकी जेहन में इस तरह कैद है जैसे कल की ही बात हो। उस घटना के बारे में बाते करते हुए वे रो पड़ते हैं।

रिक्शा चालक बेअंत सिंह ने विभाजन को न सिर्फ देखा है. बल्कि उन्होंने और उनके परिवार ने इस त्रासदी को झेला भी था। उनका मानना है कि भारत ने विभाजन की त्रासदी को भुला दिया है। 22 जनवरी 1936 को जन्मे बेअंत सिंह ने जम्मू-कश्मीर में राजा हरि सिंह के राज में अपनी शुरुआती ज़िंदगी बिताई थी। लेकिन आर्थिक संकट और सिखों पर अत्याचार के कारण उनके परिवार को रावलपिंडी शिफ्ट होना पड़ा था।

उस समय के स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के प्रशंसक रहे छोटे बेअंत अक्सर रेडियो पर इन नेताओं को सुन कर स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लेना चाहते थे। आजादी तो आई लेकिन इसके लिए न सिर्फ भारत, बल्कि सिंह को भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब नेहरू आजादी के बाद अपना ऐतिहासिक भाषण दे रहे थे, तब बेअंत सिंह मात्र 11 साल के थे।

जब उनके परिवार पर हमला हुआ था तब वो किसी तरह वहाँ से भागने में कामयाब हुए। इस दौरान उनकी मुलाकात एक सैन्य अधिकारी से हुई जिसने उन्हें अमृतसर की ट्रेन पर बिठा दिया। पाकिस्तान से प्रताड़ित कर भगाए गए शरणार्थियों को अमृतसर में ही रखा जा रहा था। इसके बाद एक भारतीय के रूप में बेअंत सिंह की दूसरी ज़िंदगी शुरू हुई। जब वो दिल्ली पहुँचे तो उन्होंने अजीब ही नजारा देखा।

उन्होंने देखा कि दिल्ली में विभाजन के बाद काफी बुरी स्थिति थी और लोग नई ज़िंदगी व रोजगार के लिए तरस रहे थे। विभाजन का दंश झेलने वालों का कोई माई-बाप नहीं था। वो कहते हैं कि वहाँ भीड़ ही भीड़ थी, लेकिन करने को कोई काम नहीं था, जिससे जीविका चल पाए। इसके बाद वो रावलपिंडी के अपने पुराने दोस्तों से मिले, जो विभाजन के बाद उत्तर प्रदेश में बस गए थे। उन्होंने ही बेअंत को भोजन और छत दिया, जीविका के लिए रिक्शा दिया।

आज 84 साल के बेअंत सिंह रिक्शा चला कर बचाए गए धन से ही अपना गुजारा चलाते हैं। वो बताते हैं कि शुरुआत में उनके पास लाइसेंस नहीं था तो उन्हें रात के अँधेरे में रिक्शा चलाना पड़ता था। वो कहते हैं कि अगर उनके पास रिक्शा नहीं होता तो पता नहीं आज उनकी क्या स्थिति होती। मेरठ में रहने वाले बेअंत सिंह आजकल की खबरों पर भी नजर रखते हैं और हालिया आपराधिक घटनाओं से नाराज भी हैं।

ज्ञात हो कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान अगस्त 1947 से अगले नौ महीनों में 1 करोड़ 40 लाख लोगों की विस्थापन हुआ था। इस दौरान करीब 6,00,000 लोगों की हत्या कर दी गई। बच्चों को पैरों से उठाकर उनके सिर दीवार से फोड़ दिए गए, बच्चियों का बलात्कार किया गया, बलात्कार कर लड़कियों के स्तन काट दिए गए और गर्भवती महिलाओं के आतंरिक अंगों को बाहर निकाल दिया गया।