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मेरठ में ढहाई गई जहाँगीर मस्जिद, रात 1.30 बजे चला बुलडोजर: गोरखपुर में भी 3 मंजिला अवैध मस्जिद हटाने के लिए अल्टीमेटम, कहा- खुद हटाओ, वरना प्रशासन करेगा कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में दो मस्जिदों को हटाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई चर्चा में है। मेरठ के दिल्ली रोड पर स्थित जहांगीर खां मस्जिद को शुक्रवार देर रात रैपिड रेल और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत गिरा दिया गया। यह कार्रवाई प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन समिति की सहमति से हुई। वहीं, गोरखपुर में घोष कंपनी चौराहे पर नगर निगम की जमीन पर बनी एक मस्जिद को अवैध निर्माण घोषित कर 15 दिन में खुद हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि बिना स्वीकृत नक्शे के मस्जिद बनाई गई थी।

मेरठ में रैपिड रेल प्रोजेक्ट के तहत हटाई गई जहाँगीर मस्जिद

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिल्ली रोड स्थित जहाँगीर खाँ मस्जिद को शुक्रवार (21 फरवरी 2025) देर रात प्रशासन ने हटा दिया। यह कार्रवाई रैपिड रेल और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के चलते की गई, क्योंकि मस्जिद निर्माण में बाधा बन रही थी। मस्जिद प्रबंधन समिति और प्रशासन के बीच सहमति बनने के बाद यह कार्रवाई हुई।

इससे पहले NCRTC अधिकारी और प्रशासन कई दिनों तक मस्जिद हटाने को लेकर बातचीत कर रहे थे। मस्जिद समिति ने खुद इसे हटाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने रात 1:30 बजे बुलडोजर से इसे गिरा दिया। कार्रवाई के दौरान हरे पर्दे लगाए गए ताकि माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।

रात में इस कार्रवाई को इसलिए अंजाम दिया गया ताकि कोई अप्रिय स्थिति न हो और यातायात प्रभावित न हो। मस्जिद से धार्मिक और कीमती सामान पहले ही हटा लिया गया था। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया सहमति से हुई और अब रैपिड रेल और सड़क चौड़ीकरण का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ाया जाएगा।

गोरखपुर में बिना नक्शा पास कराई मस्जिद को GDA का अल्टीमेटम

गोरखपुर के घोष कंपनी चौराहे पर नगर निगम की जमीन पर बनी एक मस्जिद को गिराने के लिए GDA ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यह मस्जिद बिना स्वीकृत नक्शे के बनाई गई थी, जिस कारण प्रशासन ने इसे अवैध घोषित कर दिया। 15 फरवरी को मुतवल्ली के बेटे शोएब अहमद को नोटिस देकर खुद निर्माण हटाने को कहा गया, अन्यथा प्रशासन इसे गिरा देगा और खर्च वसूलेगा।

इससे पहले नगर निगम ने इसी जगह से 31 दुकानों और 12 आवासीय परिसरों को हटा दिया था, लेकिन मस्जिद का निर्माण विवादित बना रहा। नगर निगम ने मस्जिद निर्माण के लिए 60 वर्ग मीटर जमीन देने की पेशकश की थी, लेकिन निर्माण के दौरान नक्शा पास नहीं कराया गया, जिससे यह अवैध घोषित हुआ।

इस बीच, मस्जिद के मुतवल्ली ने जीडीए के आदेश को कमिश्नर कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन प्रशासन का रुख कड़ा है। पहले भी मस्जिद को नोटिस दिए गए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब 15 दिन में निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा। नगर निगम और जीडीए इस आदेश को सख्ती से लागू करने की तैयारी में हैं।

अवैध मजार को लेकर नासिक में बवाल, हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के ऐलान के बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू: साधु-संत बोले- दरगाह हटाकर कराओ मंदिर का निर्माण

महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित द्वारका के काठे गली इलाके में एक दरगाह के निर्माण को लेकर विवाद हो गया है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह ढाँचा अवैध है और इसे अतिक्रमण करके बनाया गया है। वहीं, इलाके की एक अवैध ढाँचे को हटाने के लिए पहुँची नगर निगम का जमकर विरोध किया गया। इसके बाद पुलिस ने बवाल को देखते हुए इलाके में कर्फ्यू लगा दिया है।

इस कथित अवैध ढाँचे को लेकर सकल हिंदू समाज की माँग की है कि इसे तोड़कर उस जगह पर बजरंग बली का मंदिर बनाया जाए। इसको लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं ने शनिवार (22 फरवरी 2025) बड़े विरोध प्रदर्शन का प्लान बनाया था। इसकी भनक लगते ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दरअसल, काठे गली से नागजी चौक की ओर जाने वाली सड़क पर एक कथित अवैध धार्मिक स्थल के निर्माण का हिंदू संगठनों ने विरोध किया है। हिंदूवादी संगठनों ने कसम खाई है कि जब तक इस अवैध धार्मिक ढाँचे को हटा नहीं दिया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। कहा जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने कुछ साधु-संतों को भी गिरफ्तार किया है।

साधु-संतों की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय और भड़क गया। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए शुक्रवार (21 फरवरी 2025) की रात से ही उस तरफ जाने वाली कई सड़कों को बंद कर दिया है। आवाजाही को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। वहीं, पुलिस उपायुक्त ने मुंबई नाका और भद्रकारी पुलिस सीमा के अंतर्गत की सड़कें भी बंद करा दी है।

यह मामला पिछले 25 वर्षों से चल रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि नासिक नगर निगम ने अवैध धार्मिक स्थल को नहीं हटाया है। इसलिए प्रदर्शन जारी रहेगा। उधर, प्रदर्शन शुरू होने के पहले ही नगर निगम प्रशासन ने काठे गली इलाके में अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दरगाह के पास अतिक्रमण को हटाया गया है, लेकिन हिंदू समुदाय पूरे दरगाह को हटाने की माँग कर रहा है।

भाजपा विधायक देवयानी फरांडे ने घटनास्थल का दौरा करने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक दिया। विधायक देवयानी ने आरोप लगाया है, “नासिक में इस समय अनाधिकृत दरगाह का अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। पूरी दरगाह पर अतिक्रमण है और नगर निगम को इसे हटा देना चाहिए। यह सब (विरोध प्रदर्शन) उनकी (नगर निगम की) लापरवाही के कारण बढ़ रहा है।”

 

AI से बनी फर्जी वीडियो शेयर करके PM मोदी को नीचा दिखा रहे थे दिग्विजय सिंह, पोल खुली तो पोस्ट डिलीट किया: नेटीजन्स बोले- यही है कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं का IQ

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार (22 फरवरी 2025) को एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका ने अपनी कंपनियों को भारतीय कस्टमर केयर कर्मचारियों को नौकरी देने से रोक दिया है। वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और भारतीयों के खिलाफ कथित तौर पर ‘अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल करते दिखाया गया।

दिग्विजय ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस पर जवाब माँगा। लेकिन बाद में पता चला कि ये वीडियो असली नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाया गया एक मजाकिया (सैटायर) वीडियो था। इसके बाद दिग्विजय ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।

दिग्विजय ने अपने पोस्ट में लिखा था, “माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी, हमारे प्रधानमंत्री, जरा देखिए आपके प्यारे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप भारत और भारतीयों के बारे में क्या सोचते हैं। क्या आप इस पर कुछ कहेंगे? अगर नहीं, तो क्या आपके विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को इस पर विरोध नहीं जताना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को ‘दुनिया का सबसे जहरीला देश’ कहा!”

दिग्विजय सिंह ने इस पोस्ट में कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, सुप्रिया श्रीनेत और पवन खेड़ा को भी टैग किया था। ये वीडियो एक एक्स यूजर नसरीम एब्राहिम ने शेयर किया था, जो AI से बना एक नकली सैटायर वीडियो था। वीडियो में नीचे ‘Faux News’ और ‘Sobering Satire’ लिखा था, जो साफ बताता था कि ये मजाक वाला कंटेंट है। ‘Sobering Satire’ एक यूट्यूब चैनल है जो नकली और मजेदार खबरें बनाता है।

ऑपइंडिया की जाँच में पता चला कि इस वीडियो को बनाने वाला शख्स माइकल क्लाइव है, जो 35 साल से वॉइस-ओवर आर्टिस्ट है और ‘द सिम्पसन्स’ जैसे शो के लिए काम कर चुका है। वीडियो में लिखा था कि AI ने सिर्फ चेहरा बदला, बाकी आवाज और परफॉर्मेंस क्लाइव की थी।

इस घटना पर लोगों ने सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रिया दी। एक्स यूजर मनीष रजौरा ने लिखा, “कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं की बुद्धि का यही स्तर है, तभी ये विपक्ष में हैं। भारत को बेहतर विपक्ष चाहिए।”

अंकुर सिंह ने कहा, “कॉन्ग्रेस अब AI से बने फर्जी वीडियो से भारत को बदनाम कर रही है, सिर्फ इसलिए कि भारत राहुल गाँधी को वोट नहीं देता। शर्मनाक!”

एक अन्य यूजर डॉ. अमित सरवाल ने लिखा, “दिग्विजय का फर्जी वीडियो शेयर करना कोई हैरानी की बात नहीं, उनकी अक्ल पर तरस आता है।”

द डेली गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये वीडियो 10 जनवरी 2025 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर बनाया गया था। हालाँकि दिग्विजय ने पोस्ट डिलीट तो कर दिया, लेकिन इसके लिए न तो कोई सफाई दी और न ही माफी माँगी।

पंजाब में जिस डिपार्टमेंट का नामोनिशान नहीं, उसके मंत्री बने बैठे थे कुलदीप सिंह धालीवाल: AAP सरकार को 20 महीने बाद जाकर आया याद, पत्रकार बोले- ‘यहाँ DOGE की जरूरत’

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के एक मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि वो पिछले 20 महीनों से एक ऐसे विभाग को चला रहे थे, जो असल में था ही नहीं।

ये बात तब सामने आई जब पंजाब सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें बताया गया कि कुलदीप को दिया गया प्रशासनिक सुधार विभाग (Administrative Reforms Department) कागजों में तो था, लेकिन हकीकत में इसका कोई वजूद नहीं था। अब कुलदीप सिर्फ NRI अफेयर्स की जिम्मेदारी संभालेंगे। ये फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर 7 फरवरी 2025 से लागू हो गया है।

वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर ने इस घटनाक्रम को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तर्ज पर भारत को भी DOGE विभाग (Department of Government Efficiency) की जरूरत है।

बता दें कि कुलदीप पहले खेती और किसान कल्याण विभाग संभाल रहे थे, लेकिन मई 2023 में हुए कैबिनेट फेरबदल में उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें प्रशासनिक सुधार विभाग दिया गया। सितंबर 2024 में हुए एक और फेरबदल में भी वो इस विभाग में बने रहे, पर अब जाकर पता चला कि ये विभाग कभी था ही नहीं।

सूत्रों का कहना है कि इस विभाग में न कोई स्टाफ था, न ही कोई मीटिंग हुई। कुलदीप ने खुद सरकार से सवाल किया था कि उनके विभाग में सचिव तक नहीं है, फिर ये कैसे चलेगा? हाल ही में वो NRI अफेयर्स मंत्री के तौर पर अमृतसर में अमेरिका से आए डिपोर्टीज के मामले को लेकर भी चर्चा में थे।

विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि 20 महीने तक एक गैर-मौजूद विभाग का पता न चलना पंजाब सरकार की नाकामी दिखाता है। बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे AAP का मजाक बताया।

शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि ये सब दिल्ली से रिमोट कंट्रोल वाली सरकार की वजह से हो रहा है। इस घटना ने AAP की सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर पंजाब में कामकाज कैसे चल रहा है।

‘तख्तापलट’ के लिए बांग्लादेश को दिया करोड़ों टका, भारत को भी ‘वोटर टर्नआउट’ के लिए ₹182 करोड़ भेजे: ट्रंप ने दोहराई फंडिंग की बात, इंडियन एक्सप्रेस के ‘फैक्ट चेक’ पर उठे सवाल

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार (21 फरवरी) को दोहराया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ‘भारत में मतदाता को मतदान के लिए प्रेरित करने’ के लिए 21 मिलियन डॉलर (~ 182 करोड़) की योजना को फंड दे रहा है। व्हाइट हाउस में गवर्नरों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “भारत में मेरे मित्र प्रधानमंत्री मोदी को मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर दिए जा रहे हैं। मैं भी मतदान चाहता हूँ, गवर्नर।”

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे बताया कि कैसे अमेरिकी एजेंसियाँ भारत के पड़ोसी मुल्क ​​बांग्लादेश को 29 मिलियन डॉलर दे रही हैं। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर (लगभग 251 करोड़ रुपए) एक ऐसी फर्म को दिया गया, जिसके बारे में किसी ने कभी सुना ही नहीं था। उसे 29 मिलियन डॉलर मिले।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा, “उन लोगों को एक चेक मिला। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपके पास एक छोटी सी फर्म है और आपको यहाँ-वहाँ से 10,000 डॉलर मिलते हैं। फिर आपको संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार से 29 मिलियन डॉलर मिलते हैं। उस फर्म में दो लोग काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वे बहुत खुश हैं। वे बहुत अमीर हैं। वे बहुत जल्द ही एक बहुत अच्छी बिजनेस पत्रिका के कवर पर होंगे।”

उद्योगपति एलन मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) ने कुछ दिन पहले यह घोषणा की थी कि वे विदेशों में इस तरह की परियोजनाओं को रद्द करके अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचा रहा है। इसके बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। शुक्रवार (21 फरवरी) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मियामी में एक भाषण के दौरान इन आँकड़ों की पुष्टि की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा था, “भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर। हम भारत में मतदान की चिंता क्यों कर रहे हैं? हमारे पास पहले से ही बहुत सारी समस्याएँ हैं। हम अपना खुद का मतदान चाहते हैं, है न? क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इतना सारा पैसा भारत जा रहा है? मुझे आश्चर्य है कि जब उन्हें यह मिलता होगा तो वे क्या सोचते होंगे।”

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अब, यह एक रिश्वत योजना है। आप जानते हैं, ऐसा नहीं है कि उन्हें यह मिलता है और वे खर्च कर देते हैं। वे इसे उन लोगों को वापस देते हैं, जिन्होंने इसे भेजा था। मैं कई मामलों में कहूँगा, जब भी आपको पता नहीं होता कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि यह कोई रिश्वत है, क्योंकि किसी को भी पता नहीं है कि वहाँ क्या हो रहा है।”

इसी तरह बांग्लादेश को दिए जाने वाले फंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। कोई नहीं जानता कि राजनीतिक परिदृश्य से उनका क्या मतलब है।”

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा विवादास्पद ‘तथ्य-जांच’

भारत का अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने शुक्रवार (21 फरवरी) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था- ‘Team Musk flags, Trump waves, but a fact-check: $21 million did not go to India for ‘voter turnout’, was for Bangladesh’.

अखबार ने यह सुझाव देने का प्रयास किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, एलन मस्क और DOGE में उनके दल के सदस्यों ने संख्याओं में गड़बड़ी की और किसी तरह बांग्लादेश को भारत समझ लेने की बड़ी भूल कर दी। उस रिपोर्ट में कहा गया, “इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्राप्त रिकॉर्ड से पता चलता है कि 21 मिलियन डॉलर की राशि 2022 में भारत के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लिए मंजूर की गई थी।”

इंडियन एक्सप्रेस की खबर का स्क्रीनशॉट

अख़बार ने इस तथ्य पर सहमति व्यक्त की कि DOGE के रद्द किए गए अनुदानों की सूची में बांग्लादेश को मिलने वाले $29.9 मिलियन का USAID अनुदान शामिल था (जिसका उल्लेख डोनाल्ड ट्रम्प और DOGE के आधिकारिक ट्वीट दोनों ने किया था)। बाद में इसने दावा किया कि DOGE और ट्रम्प ने $21 मिलियन के अनुदान को लेकर ‘बांग्लादेश’ को ‘भारत’ समझ लिया।

इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि भारत में ‘मतदान बढ़ाने के लिए’ के लिए धन बांग्लादेश को लगभग 2.5 साल पहले दिया गया था। अखबार ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपने ‘फैक्ट-चेक’ का प्रचार किया, वह आश्चर्यजनक है। हालाँकि, अखबार ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण देने में विफल रहा, जिससे इस तथ्य को खारिज किया जा सके कि भारतीय चुनावों के दौरान ‘मतदान बढ़ाने’ के लिए फंडिंग नहीं हुई।

कटा हाथ, सिर का कंकाल और पसलियाँ… उन्नाव में 19 साल की उपासना के टुकड़े मिलने के बाद तौहीद गिरफ्तार, जंगल में ले जाकर की हिंदू युवती की हत्या: UP पुलिस ने मुठभेड़ में दबोचा

उन्नाव जिले के औरास थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 19 साल की हिंदू छात्रा उपासना की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। मुस्लिम युवक तौहीद अली उपासना का पूर्व प्रेमी था। 10 फरवरी को उसने उपासना को ताल्ही गाँव के जंगल में मिलने बुलाया। वहाँ झगड़ा हुआ तो गला दबाकर और चाकू से रेतकर उसकी जान ले ली। पुलिस ने गुरुवार (20 फरवरी 2025) रात मुठभेड़ में तौहीद को गिरफ्तार किया, उसके पैर में गोली लगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपासना के पिता हृदयनारायण गौतम होमगार्ड हैं। 10 फरवरी को उपासना इंटर की परीक्षा के लिए निकली थी, लेकिन घर नहीं लौटी। पिता ने 12 फरवरी को गुमशुदगी दर्ज की। गुरुवार को जंगल में उसका बैग, आईकार्ड, जूते और कटा हुआ हाथ मिला। अगले दिन सिर का कंकाल और पसलियाँ बरामद हुईं। पुलिस का कहना है कि जंगली जानवरों ने शव को नोचा, इसलिए अंग अलग-अलग मिले।

तौहीद ने कबूल किया कि वह उपासना से प्यार करता था। उसने उसे फोन भी दिया था। लेकिन जब उपासना ने व्हाट्सएप पर चंडीगढ़ के प्रदीप नाम के युवक की फोटो लगाई, तो तौहीद को शक हुआ। 10 फरवरी को उसने उपासना को जंगल में बुलाया। उस दिन उपासना अपनी छोटी बहन के साथ थी। तौहीद दोनों को बाइक पर बैठाकर ले गया, लेकिन गाँव से पहले बहन को उतार दिया और उपासना को जंगल ले गया। वहाँ उसने पहले गला दबाया, फिर चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद शव वहीं छोड़कर भाग गया।

हत्या के बाद तौहीद अपने गाँव गोड़वा लौटा। उसकी भाभी ने उसके कपड़ों पर खून देखा और शक हुआ। उपासना की माँ ने तौहीद के नंबर पर फोन किया तो भाभी ने उठाया। उसने बताया कि तौहीद के कपड़े खून से सने हैं और उसने उपासना के घरवालों से झगड़े की बात कही। लेकिन भाभी चुप रही। तौहीद फिर हैदराबाद अपने भाई तौसीफ के पास चला गया। 15 फरवरी को वह गाँव लौटा और पुलिस के संपर्क में रहा।

20 फरवरी को जंगल में उपासना के अंग मिले। उसी रात पुलिस ने चेकिंग के दौरान तौहीद को पकड़ा। उसने पुलिस पर गोली चलाई, जवाबी फायरिंग में वह घायल हो गया। पूछताछ में उसने गुनाह कबूल किया।

पुलिस का कहना है कि तौहीद ने कुछ आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के जरिए उपासना को जंगल आने के लिए मजबूर किया था। उपासना की माँ को प्रेम प्रसंग की जानकारी थी। अब पुलिस प्रदीप से भी पूछताछ कर रही है।

BBC इंडिया पर ED ने ठोंका ₹3.4 करोड़ का जुर्माना, 3 डायरेक्टरों पर भी करोड़ों की पेनल्टी : FEMA उल्लंघन के आरोप में एक्शन, 2023 में हुआ था नोटिस जारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस इंडिया (BBC WS India) पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के आरोप में ₹3.44 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा, कंपनी के तीन निदेशकों- जाइल्स एंटनी हंट, इंदु शेखर सिन्हा और पॉल माइकल गिबन्स पर भी ₹1.14 करोड़ से अधिक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED ने यह कार्रवाई BBC WS India द्वारा 26% विदेशी निवेश (FDI) सीमा का पालन न करने के चलते की है। कंपनी को 15 अक्टूबर 2021 के बाद हर दिन ₹5,000 का अतिरिक्त जुर्माना भी देना होगा, जब तक वह नियमों का पालन नहीं करती।

ED ने 4 अगस्त 2023 को BBC WS India और उसके निदेशकों को FEMA उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया था। जाँच में पाया गया कि 100% विदेशी निवेश वाली यह कंपनी डिजिटल मीडिया पर समाचार और समसामयिक विषयों की स्ट्रीमिंग जारी रखे हुए थी, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित 26% FDI सीमा को नहीं माना गया। यह सीमा सितंबर 2019 में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी प्रेस नोट 4 के तहत लागू की गई थी।

BBC WS India के खिलाफ ED ने अप्रैल 2023 में जाँच शुरू की थी, जो फरवरी 2023 में इनकम टैक्स विभाग द्वारा किए गए सर्वे के बाद सामने आई विसंगतियों के आधार पर हुई। सर्वे में BBC की विभिन्न इकाइयों द्वारा घोषित आय और भारत में उनके वास्तविक संचालन के बीच अंतर पाया गया था, जिससे संभावित कर चोरी का संदेह पैदा हुआ।

इस मामले में बीबीसी के एक प्रवक्ता ने कहा, बीबीसी भारत सहित जिस भी देश में काम करती है उसके नियमों को मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो बीबीसी वर्ल्ड सर्विस इंडिया और न ही इसके निदेशकों को प्रवर्तन निदेशालय से कोई आदेश प्राप्त हुआ है। प्रवक्ता ने कहा, किसी भी आदेश के प्राप्त होने पर हम उसकी सावधानीपूर्वक समीक्षा करेंगे और अगला कदम क्या उठाना चाहिए इस पर विचार करेंगे।

‘मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर मत मारो’: तमिलनाडु के CM स्टालिन NEP के बहाने फिर उतरे ‘हिंदी’ के विरोध में, केंद्रीय मंत्री ने करारा जवाब दिया, PM बोले- गलत धारणा से दूर रहें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाई लाई नई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)’ पर सवाल उठाते हुए इसे हिंदी को बढ़ावा देने वाला साधन बताया है। भाषायी आधार पर घृणा फैलाने की कोशिश पर पीएम मोदी ने कहा कि भाषाओं के बीच कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु सरकार पर सुधारों को राजनीति में बदलने का आरोप लगाया है।

प्रधान ने कहा, “किसी भी राज्य या समुदाय पर कोई भी भाषा थोपने का सवाल ही नहीं है।” वहीं, भाषायी आधार पर राजनीति की जमीन तलाश रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ कि तमिल लोगों को फिर से न भड़काया जाए। मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर न फेंके। जब तक मैं और डीएमके यहांँ हैं, आप (केंद्र सरकार) यहाँ प्रवेश नहीं कर सकते।”

उधर धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर सीएम स्टालिन ने कुड्डालोर में शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को कहा, “केंद्रीय मंत्री का दावा है कि तमिलनाडु को 5,000 करोड़ रुपए नहीं मिले, क्योंकि हमने NEP योजनाओं को लागू नहीं किया। अगर हम तमिलनाडु से एकत्र किए गए करों का भुगतान करने से इनकार करते हैं तो वे क्या करेंगे? संघवाद आपसी सहयोग पर आधारित है, जो हमारे संविधान की नींव है। दुर्भाग्य से, जो लोग इस दर्शन को नहीं समझते हैं वे आज देश पर शासन कर रहे हैं।”

सस्टालिन ने दोहराया कि एनईपी शिक्षा के विकास के लिए नहीं बल्कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पेश की गई थी। उन्होंने कहा, “चूँकि लोग सीधे क्रियान्वयन का विरोध करेंगे, इसलिए वे इसे धीरे-धीरे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री दावा करते हैं कि वे क्षेत्रीय भाषाओं का विकास कर रहे हैं, लेकिन हम तमिल का विकास करना जानते हैं। उनसे पूछिए जिन्होंने हिंदी थोपे जाने के कारण अपनी मातृभाषा खो दी है। तमिल को अपने विकास के लिए उनके समर्थन की आवश्यकता नहीं है।”

स्टालिन का कहना है, “एनईपी के नाम पर वे हमारे बच्चों को पढ़ाई, स्कूलों में प्रवेश और नौकरी पाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। ये ठीक वैसे ही कर रहे हैं, जैसे सौ साल पहले लोगों पर अत्याचार किया जाता था। एनईपी को सामाजिक न्याय को नष्ट करने के लिए पेश किया गया है। यह बीसी, एमबीसी और एससी समुदायों की प्रगति को अवरुद्ध करेगा।”

उधर, केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्टालिन के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोप रही है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया के जरिए मुझे पता चला कि तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने राजनीतिक प्रेरणा से भरे उस पत्र में कुछ काल्पनिक चिंताओं जताई हैं।”

प्रधान ने कहा कि NEP का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा का विश्व मानकीकरण करना और उसे भारतीय जड़ों से जोड़ना था। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु जैसे राज्यों की भाषायी और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है। भारत सरकार सभी प्रवेश परीक्षाएँ सभी प्रमुख 13 भाषाओं में आयोजित कर रही है और उनमें से एक तमिल भी है।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि पीएम मोदी की सरकार तमिलनाडु की भाषा और विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर तमिल विचारों को बढ़ावा देने के लिए सिंगापुर में भारत के पहले तिरुवल्लूर सांस्कृतिक केंद्र की घोषणा की।”

इस बीच पीएम मोदी ने शुक्रवार (21 फरवरी) को कहा कि भारत की भाषाएँ हमेशा से एक-दूसरे के साथ रही हैं। बिना किसी दुश्मनी के वे एक-दूसरे को प्रभावित और समृद्ध करती रही हैं। यह बात उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा। पीएम मोदी ने कहा, “जब भाषाओं के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई तो भारत की साझा भाषायी विरासत ने इसका माकूल जवाब दिया। गलत धारणा से दूर रहें।”

विकिपीडिया ने छत्रपति संभाजी महाराज पर नहीं हटाया विवादित कंटेंट, 4 संपादकों पर केस: ऑपइंडिया के डोजियर में पढ़े इसका काला-चिट्ठा, समझें पूरा मामला

महाराष्ट्र साइबर सेल ने विकिपीडिया के 4 संपादकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन पर मराठा शासक छत्रपति संभाजी महाराज से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट न हटाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, विकिपीडिया पर किए गए संपादन में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई थी, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र साइबर सेल ने इससे पहले अमेरिका स्थित विकिमीडिया फाउंडेशन को नोटिस भेजकर विवादित सामग्री हटाने की माँग की थी। लेकिन विकिपीडिया की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद यह कानूनी कार्रवाई की गई।

बता दें कि फिल्म ‘छावा’ की रिलीज़ के बाद यह विवाद तेज हुआ। यह फिल्म संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है, जिसमें विक्की कौशल ने संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है और रश्मिका मंदाना ने महारानी येसुबाई का किरदार निभाया है। फिल्म के चलते संभाजी महाराज से जुड़ी डिजिटल जानकारी की समीक्षा बढ़ गई, और विकिपीडिया पर गलत तथ्यों की शिकायतें सामने आईं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साइबर सेल को इस मामले में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि भारत में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79(3)(b) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत विकिपीडिया संपादकों पर कार्रवाई की है।

सरकार का कहना है कि संभाजी महाराज मराठा इतिहास का अहम हिस्सा हैं, और उनके बारे में गलत जानकारी फैलने से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, विकिपीडिया पर बिना विश्वसनीय स्रोतों के गलत जानकारियाँ जोड़ी गईं, जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खातीं

महाराष्ट्र साइबर सेल ने विकिपीडिया को भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करने की हिदायत दी है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अगर विकिपीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐतिहासिक विकृति को बढ़ावा देते हैं, तो उनके लिए कड़े नियम बनाए जा सकते हैं।

चूँकि विकिपीडिया एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है और इसका भारत में कोई सीधा कार्यालय नहीं है, इसलिए सरकार कानूनी और नियामक विकल्पों पर विचार कर रही है। इस मामले में विकिपीडिया और संपादकों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे की जाँच जारी है।

ऑपइंडिया के डोजियर में विकिपीडिया का काला-चिट्ठा मौजूद

बता दें कि ऑपइंडिया ने भारत के खिलाफ विकिपीडिया की कार्यशैली को लेकर डोजियर प्रकाशित किया है। इस डोजियर में विकिपीडिया किस तरह से भारतीय हितों के खिलाफ काम कर रहा है, उसे विस्तार से बताया गया है। ऑपइंडिया ने ये भी बताया है कि किस तरह से विकिपीडिया खुद को स्वतंत्र और संपादकीय हस्तक्षेप से मुक्त बताता है, लेकिन वो है नहीं।

बता दें कि विकिमीडिया फाउंडेशन का दावा है कि विकिपीडिया केवल एक मध्यस्थ है, यह पाया गया कि विकिपीडिया “प्रकाशकों” के लिए निर्धारित सभी मानकों को पूरा करता है, जैसा कि आईटी दिशा-निर्देशों में परिभाषित है।

इसका अर्थ यह होगा कि विकिमीडिया फाउंडेशन को विकिपीडिया पर सभी सामग्री के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए और भारतीय कानूनों के अधीन रहने के लिए भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित करनी चाहिए, जिसमें एफसीआरए, एनजीओ, आईटी दिशा-निर्देश, वित्तीय प्रकटीकरण मानक और अन्य कानून शामिल हैं।

हालाँकि अब विकिपीडिया के खिलाफ महाराष्ट्र में चल रही कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि ऑपइंडिया के डोजियर में जो बातें कही गई है, कुछ उसी तर्ज पर ये जाँच आगे बढ़ रही है। ऐसे में इस केस के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

हिंदू बच्चियों का रेप करने वाले ‘मुस्लिम गैंग’ पर फूटा वकीलों का गुस्सा, 4 दिन में दूसरी बार किया हमला: पुलिस से भी धक्कामुक्की, कर रहे फाँसी की माँग

राजस्थान के ब्यावर में अजमेर रेपकांड जैसी वारदात के सामने आने के बाद से लोगों में गुस्सा है। इस बीच, स्कूली छात्राओं से रेप-ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को पुलिस ने अजमेर पॉक्सो कोर्ट में पेश किया, जहाँ वकीलों ने 4 दिन में दूसरी बार आरोपितों पर हमला किया। वकीलों ने आरोपितों को पीटने के क्रम में पुलिस वालों के साथ भी धक्कामुक्की की। वहीं, कोर्ट ने 4 आरोपितों को 5 दिन की रिमाँड पर भेज दिया है। वहीं, दूसरी ओर बिजयनगर (ब्यावर) में रेप-ब्लैकमेल कांड के आरोपितों को फाँसी की सजा देने की माँग करते हुए सर्व समाज संघर्ष समिति ने शहर को बंद करा दिया है। इस मामले में 7 आरोपितों समेत 3 नाबालिग भी आरोपित हैं।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अजमेर पॉक्सो कोर्ट में पेशी के दौरान अजमेर पॉक्सो कोर्ट ने लुकमान उर्फ सोहेब (20), सोहेल मंसूरी (19), रिहान मोहम्मद(20) और अफराज (18) को 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, तो आशिक, कैफे संचालक श्रवण और करीम को 7 दिनों की रिमाँड पर भेजा है। इस पूरे मामले में करीम रेकी का काम करता था। इसके अलावा 3 अन्य आरोपित बाल सुधार गृह भेजे गए हैं। पुलिस ने आरोपितों के फोन, उनकी गाड़ियाँ भी जब्त की है। अब पुलिस आरोपितों के फोन, कैफे की सीसीटीवी की भी जाँच कर रही है।

4 दिन में दूसरी बार फूटा वकीलों का गुस्सा

बता दें कि इस मामले में पुलिस 18 फरवरी 2025 को आरोपितों को लेकर पहली बार कोर्ट में पहुँची थी, जहाँ अजमेर पॉक्सो कोर्ट में वकीलों ने उन पर हमला कर दिया था। और अब शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को भी आरोपितों को देखते ही वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा।

वकीलों ने ASI पर कार्रवाई के लिए एसपी को दी शिकायत

कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिस के बीच मामले में शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को वकीलों ने एसपी से मुलाकात की। वकीलों ने एसपी वंदिता राणा को एएसआई भीम सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा। वकील प्रदीप कुमार ने कहा कि कोर्ट में आरोपितों को लाने के दौरान एएसआई भीम सिंह ने गाली-गलौच की।

बता दें कि इस मामले में रिहान, सोहेन, लुकमान, अरमान, साहिल और अफराज के अलावा 3 नाबालिगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने कोर्ट में पेश कर इनकी रिमांड माँगी थी, जो खत्म हो गई। इसके बाद इन्हें दूसरी बार कोर्ट में पेश किया गया था। गौरतलब है कि ये आरोपित हिंदू लड़कियों को सस्ते मोबाइल फोन देकर अपने जाल में फंसाते थे और फिर उन्हें कैफे-होटल लेकर जाकर उनका रेप कर वीडियो बना लेते थे। इसके बाद उन्हें ब्लैकमेल कर सहेलियों को भी लाने के लिए कहते थे। यही नहीं, आरोपित इन लड़कियों से वीडियो वायरल करने के नाम पर उगाही भी करते थे।

इस घटना ने 1992 के अजमेर सेक्स स्कैंडल की याद ताजा कर दी है। लोग सख्त सजा की माँग कर रहे हैं, ताकि ऐसी वारदात दोबारा न हों। पुलिस का कहना है कि जाँच तेजी से चल रही है और बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है। समाज में तनाव बढ़ता जा रहा है और लोग चाहते हैं कि पीड़ित लड़कियों को जल्द इंसाफ मिले।