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सुशांत सिंह केस की CBI जाँच की माँग वाली में याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, कहा- बॉम्बे HC जाएँ

सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की जाँच माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस को इस मामले की जाँच करने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अलख प्रिया का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट जाएँ।

इससे पहले बुधवार (जुलाई 29,2020) शाम को महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी इस मामले में साफ शब्दों में यही कहा था कि मुंबई पुलिस ही जाँच करेगी। उन्होंने बुधवार को पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर मीडिया से बातचीत में यह स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि ये केस सीबीआई को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।

बता दें, सुशांत सिंह राजपूत की मौत को 1 महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है लेकिन अब तक मौत के पीछे की वजह सामने नहीं आ पाई है। वहीं हाल ही में राजनेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अभिनेता के असामयिक निधन की सीबीआई जाँच का अनुरोध किया था।

पीएम मोदी के पत्र स्वीकार करने की जानकारी के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कंगना रनौत की टीम ने ट्विटर पर लिखा, “हमारी संवेदनशील और जिम्मेदार सरकार सुशांत को न्याय दिलाने की हमारी एकमात्र आशा है और इसमें उन लोगों की उम्मीद भी शामिल है, जिन्हें अभी भी निशाना बनाकर फिल्म माफिया की ओर से तंग किया जा रहा है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने भी गृहमंत्री अमित शाह से सुशांत के मामले में सीबीआई जाँच की माँग की थी। उन्होंने लिखा, “माननीय अमित शाह सर, मैं सुशांत सिंह राजपूत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती हूँ। अब सुशांत के निधन को एक माह से ज्यादा बीत चुका है। मेरा न्याय के मामले में सरकार पर पूरा विश्वास है। मैं अनुरोध करती हूँ कि इस मामले में सीबीआई जाँच हो।”

हालाँकि, सुशांत के पिता की शिकायत के बाद रिया का रवैया एकदम से बदल गया। अब फिलहाल इस केस में मुंबई पुलिस के साथ बिहार पुलिस भी अपनी जाँच कर रही है। दोनों प्रदेशों की पुलिस ने एक-दूसरे के साथ संपर्क बनाया हुआ है। इस केस में जाँच के लिए सुशांत की बहन मीतू सिंह और उनके दोस्त कृष्णा शेट्टी का बयान भी दर्ज हुआ है। सुशांत के अधिकतर फैन और सितारे इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग कर रहे हैं।

‘हीरो, गाजी, इस्लाम का शेर’: कोर्ट में अहमदिया की हत्या करने वाले खालिद का दीवाना हुआ पाकिस्तान

पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी शहर पेशावर की एक भरी अदालत में कल (जुलाई 29, 2020) ईशनिंदा के आरोपित ताहिर शमीम अहमद को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। ताहिर को मारने वाले का नाम खालिद खान है।

सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने दावा किया कि खालिद ने ताहिर को गोली मार कर कहा कि उसके सपने में पैगंबर आए थे। इसलिए उसने ताहिर को गोली मारी। वहीं पुलिस की हिरासत में खालिद ने ये माना कि उसने ताहिर को इसलिए गोली मारी. क्योंकि वह अहमदिया समुदाय का था।

हैरानी की बात ये है कि भरी अदालत में एक अहमदिया समुदाय के व्यक्ति को मारने के बाद खालिद पाकिस्तान में कट्टरपंथियों का हीरो बन गया। लोगों ने उसकी तरह-तरह से तारीफें करनी शुरू कर दीं और उसे न केवल ‘इस्लाम का शेर’ लिखा बल्कि फेसबुक व ट्विटर पर उसकी डीपी लगाने लगे।

एक सोशल मीडिया यूजर बाली खान ने इस हत्यारे की तारीफ में लिखा, “उसके नाज़ुक चेहरे की मुस्कुराहट और आत्मविश्वास को देखिए, मेरा मतलब है कि वह कितना भाग्यशाली है कि उसे ये मौका मिला। अल्लाह उसकी हिम्मत बढ़ाए और उसे सहारा देने के लिए हमारी हौसला अफजाई करे…।”

वहीं, दूसरे ने लिखा कि हर नायक टोपी में नहीं आता। इसके बाद एक युवक ने लिखा कि जब भी कोई उनके मजहब का मजाक बनाएगा, तब तब अल्लाह किसी हीरो को भेजेगा।

कोर्ट में गोली चलाने वाले खालिद की तारीफ में जहाँ मियाँ अहमद ने उसको इस्लाम का दूसरा हीरो लिखा। वहीं लोगों ने उसकी तुलना उन लोगों से की जिन्होंने बीते समय में इसी प्रकार ईशनिंदा करने वालों को सजा दी थी। इसके लिए पाकिस्तानी लोग खालिद की तुलना आमिर छीमा और इल्मुद्दीन जैसे आतंकियों से करने से भी नहीं चूँके।

बता दें, आमिर छीमा एक पाक आतंकी था जिसने जर्मनी में एक समाचार पत्र के दफ्तर में घुसकर संपादक को चाकू से इसलिए मारने की कोशिश की थी, क्योंकि उसने पैगंबर पर कार्टून छापा था। इसी प्रकार इल्मुद्दीन ने भी ऐसे ही एक किताब प्रकाशक महेश राजपाल पर हमला बोला था।

सबसे हैरानी की बात ये है कि खालिद खान के अपराध का महिमामंडन इमरान खान की पार्टी लीडर हलीम आदिल शेख तक ने किया है। उन्होंने खालिद की फोटो बतौर हीरो सोशल मीडिया पर अपनी डीपी की जगह लगाई। हालाँकि आलोचना के बाद उन्होंने ट्विटर पर ये अलग से सफाई दी है कि वह अपने फेसबुक अकाउंट को मैनेज नहीं करते और ये काम बिना उनके संज्ञान में डाले हुआ है।

गौरतलब है कि खालिद ने जिस आरोपित को भरी अदालत में गोली मारकर मौत के घाट उतारा, उसने खुद के नबी होने दावा किया था। उस पर दो साल पहले ईशनिंदा का आरोप लगा था। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। कल उसके इसी मामले की सुनवाई चल रही थी।

बता दें, पाकिस्तान में ईशनिंदा एक दण्डनीय अपराध है। यहाँ यदि कोई इस अपराध के तहत गिरफ्तार होता है तो उसे आजीवन कारावास की सजा या फिर मौत की सजा सुनाई जा सकती है। लेकिन अगर वह आम जनता के हत्थे चढ़ जाए तो उसे मौके पर मौत दे दी जाती है।

2011 में पंजाब के एक गवर्नर को उसके ही सुरक्षा गार्ड ने मार डाला था। उन्होंने असिया बीबी नाम की एक ईसाई महिला का बचाव किया था। इस महिला पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। असिया बीबी को मौत की सजा सुनाई गई थी।

‘ईशनिंदा’ वालों के हत्यारों की पाकिस्तान में जिन्ना और इकबाल के समय से ही इबादत की जाती है

उल्लेखनीय है कि ऐसी घटनाओं पर इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान के पिता यानी, मोहम्मद अली जिन्ना को याद किया जाना भी जरूरी है, क्योंकि ये सब सितंबर 1929 में, विभाजन के पूर्व लाहौर में शुरू हुआ, जब एक अनपढ़ 19 वर्षीय मुस्लिम युवक इल्म-उद-दीन ने एक हिंदू प्रकाशक महेश राजपाल को पुस्तक ‘रंगीला रसूल’ प्रकाशित करने के लिए चाकू मार दिया था।

यह ईशनिंदा का भारतीय उपमहाद्वीप में पहला मामला था। इससे पहले इस प्रकार की ‘ईशनिंदा’ से संबंधित घटना कभी नहीं घटी थी। हत्यारे इल्मुद्दीन के बचाव पक्ष के वकील मुहम्मद अली जिन्ना थे। इल्मुद्दीन को अक्टूबर, 1929 में मियाँवाली जेल में फाँसी दी गई थी।

यह भी उल्लेखनीय है कि आज लाहौर के मियाँ साहिब कब्रिस्तान में इल्मुद्दीन का मकबरा है। वह ‘गाजी’ और ‘शहीद’ के रूप में पूजा जाता है। हर साल 30 अक्टूबर को वहाँ ‘उर्स’ का आयोजन होता है और हजारों समर्थक एक ऐसे व्यक्ति को अपना सम्मान देने के लिए आते हैं, जिसे वे पैगंबर का सबसे बड़ा ‘प्रेमी’ मानते हैं।

इल्मुद्दीन के शरीर को कब्र में दफनाते समय, ‘सारे जहाँ से हिन्दुस्तान हमारा’ ‘कविता’ को लिखने वाले पाकिस्तान की राष्ट्रीय कवि अल्लामा इकबाल, ने बेहद भावुक होकर कहा था, “यह अशिक्षित नौजवान, हम शिक्षित लोगों से भी कहीं आगे निकला।”

भारत के सहयोग से बनी मॉरीशस की सुप्रीम कोर्ट: PM मोदी ने किया उद्घाटन, कहा – ‘अमर रहे मैत्री’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ (Mauritian PM Pravind Jugnauth) ने बृहस्पतिवार (जुलाई 30, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त रूप से मॉरिशस के सुप्रीम कोर्ट के नए भवन का उद्घाटन किया। मॉरिशस की राजधानी पोर्ट लुई में इस भवन का निर्माण भारत के आर्थिक सहयोग से किया गया है। इस उद्घाटन समारोह में कोर्ट के जज, न्याय विभाग के अधिकारी के अलावा दोनों देशों के गणमान्य ने भी हिस्सा लिया।

वर्ष 2016 में भारत ने मॉरिशस को 35.3 करोड़ डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग इसी कड़ी का हिस्सा है। इसके साथ ही भारत के सहयोग से 100 बेड का एक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भी तैयार किया जा रहा है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस को COVID-19 महामारी के प्रभावी प्रबंधन के लिए बधाई दी और अपनी खुशी का इजहार किया। भारत ने मॉरिशस को दवाइयों की समय पर आपूर्ति और अनुभवों को साझा कर मॉरीशस सरकार की मदद की है।

पीएम मोदी ने कहा- “सबसे पहले, मैं सरकार और मॉरीशस के लोगों को COVID-19 वैश्विक महामारी के प्रभावी प्रबंधन के लिए बधाई देता हूँ। मुझे खुशी है कि भारत समय पर दवाइयों की आपूर्ति और अनुभवों को साझा करके कोरोना प्रबंधन में सहयोग दे सका।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और मॉरीशस दोनों ही हमारी स्वतंत्र न्यायपालिकाओं को, हमारी लोकतांत्रिक प्रणालियों के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में सम्मान देते हैं। यह नई इमारत अपने आधुनिक डिजाइन और निर्माण के साथ इस सम्मान की निशानी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम न केवल हिंद महासागर के जल को मॉरिशस के साथ साझा करते हैं, बल्कि संस्कृति और भाषा की एक साझी विरासत भी है। हमारी दोस्ती अतीत से ताकत लेती है और भविष्य की ओर देखती है। भारत ने मॉरिशस के लोगों की उपलब्धियों पर गर्व किया है।”

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ओर से मॉरिशस को वर्ष 2016 में विशेष आर्थिक पैकेज का सहयोग दिया गया था, जिसके तहत वहाँ 5 इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाना है। इसमें से 2 का शुभारंभ पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

राफेल तो फ्रांस का, भारत ने क्या बना दिया? राफेल पर लोगों की 2 तरह की प्रतिक्रियाएँ

राफ़ेल के भारत आने पर लोग दो तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। एक वो हैं, जिन्होंने राफेल का राजनीतिक खेल देखा है। जिसमें राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस द्वारा इसे एक घोटाला साबित करने की जिद लम्बे समय तक जारी रही।

इसके लिए ‘द हिन्दू’ समाचार पत्र ने आधे-अधूरे कटे दस्तावेज छापे, राहुल गाँधी द्वारा दस से अधिक बार इसके अलग-अलग दाम बताए गए। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट से फटकार खा चुके राहुल गॉंधी राफेल के भारत पहुॅंचने के बाद भी उसी सुर में ट्वीट कर रहे थे। दूसरी प्रतिक्रिया यह है कि राफ़ेल तो फ्रांस का है, भारत ने क्या बना दिया?

राफ़ेल को लेकर भारत की आत्मनिर्भरता का जवाब यह है कि भारत में ऐसा कभी भी सम्भव नहीं था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते, वो कोई जादू की छड़ी घुमाते और बस एक-दो दिन के भीतर ही भारत राफ़ेल तैयार कर देता।

लेकिन इस सरकार के अंतर्गत तमाम वो प्रयास किए जा रहे हैं, जो भारत को रक्षा और सामरिक बढ़त के लिए आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर करेगा। इसी साल के बजट में सरकार ने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए ऑटोमैटिक रूट से एफडीआई की लिमिट 49% से बढ़ाकर 74% करने का फैसला लिया था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार ऐसे हथियार, वस्तुओं, स्पेयर्स को नोटिफाई करेगी, जिसमें आयात को बैन किया जाएगा और उनकी स्वदेशी आपूर्ति की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का कॉर्पोरेटाइजेशन होगा, प्राइवेटाइजेशन नहीं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत सरकार ‘थ्री-पी’ यानी, पॉलिसी, प्रोडक्शन और पार्टनरशिप की नीति पर काम कर रही है, जिससे आने वाले कुछ वर्षों में भारत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा।

हाल ही के कुछ वर्षों में भारत में तेजस आया और अब इसका वर्जन-2 आ रहा है, जो कि 4.5 जेनेरेशन का है। यह अत्याधुनिक फाइटर जेट होगा। भारत 5th जेनेरेशन फाइटर जेट AMCA को विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

इसके अलावा, AK203 राइफल का निर्माण शुरू हो रहा है, डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है और पहले जहाँ भारत में बुलेट प्रूफ जैकेट की कमी के चलते भारतीय सैनिक अपनी जान गँवा दिया करते थे, वहीं, हम आज के समय में इसका एक्सपोर्ट भी कर रहे हैं।

इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया सम्पादक, अजीत भारती का विस्तृत वीडियो आप इस लिंक पर देख सकते हैं –

IPS अधिकारी नागेश्वर राव पर हो कार्रवाई: वृंदा करात ने अमित शाह को लिखा पत्र, दिल्ली पुलिस से शिकायत

कम्युनिस्ट नेता वृंदा करात ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिख आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव पर कार्रवाई की मॉंग की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी शिकायत की है। राव ने पिछले दिनों भारतीय शिक्षा-व्यवस्था के अब्राहमीकरण (इस्लाम और ईसाइयत का प्रभुत्व) और मुगल शासकों के खूनी इतिहास को मिटाने के संदर्भ में ट्वीट किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र में करात ने आरोप लगाया है कि राव ने सर्विस नियमों का उल्लंघन किया है। उनकी टिप्पणियाँ संविधान के खिलाफ हैं और ‘सांप्रदायिक भावनाओं को उकसाती हैं।

करात ने राव के ट्वीट को अल्पसंख्यकों पर हमला बताते हुए कहा है कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को सॅंभाला था, लेकिन उन पर हिंदुत्ववादी विद्वानों को दरकिनार करने का आरोप राव ने मढ़ दिया।

उन्होंने कहा है कि मौलाना आजाद के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर राव दो समुदायों के बीच द्वेष को उकसा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राव को विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित भी बताया है।

कम्युनिस्ट नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राव 31 जुलाई को रिटायर हो रहे है। उन्होंने यह विवादित टिप्पणी इसलिए कि ताकि वे आसानी से बीजेपी और आरएसएस में शामिल हो सके। उन्होंने कहा कि राव ने सेवा में रहते हुए यह ट्वीट किया है जो आईपीएस के नियमों के उल्लंघन है। राव के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा भी चलाया जाना चाहिए।

करात ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस को भी पत्र लिख कर राव के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए और 295 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज करने को कहा। दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीसीपी, और मंडी मार्ग पुलिस स्टेशन के एसएचओ को संबोधित पत्र में कहा गया है, “राव समुदायों के बीच दुश्मनी और खास मजहब के खिलाफ नफरत की भावनाएं को भड़काने का काम कर रहे है।”

गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले IPS अधिकारी एम नागेश्वर राव ने वामपंथियों द्वारा भारतीय इतिहास से किए गए छेड़छाड़ के संबंध में ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने शिक्षा मंत्री रह चुके मौलाना अबुल कलाम आजाद के खिलाफ इस्लामिक आक्रांताओं और मुगल शासकों के खूनी इतिहास को छिपाने और उनका महिमामंडन करने का आरोप लगाया था।

राव ने बताया था कि भारत के इतिहास को बड़ी सफाई से ‘विकृत’ किया गया। ऐसा करने वाले को शिक्षा मंत्री का नाम दिया गया। शिक्षा मंत्री रहते हुए मजहबी नेता 1947-1977 के बीच 20 साल भारतीय मन-मस्तिष्क के प्रभारी बने बैठे थे।

एम नागेश्वर राव ने ट्वीट किया था कि, “मौलाना अबुल कलाम आजाद के 11 साल (1947-58) के बाद, हुमायूँ कबीर, एमसी छागला और फकरुद्दीन अली अहमद- 4 साल (1963-67), फिर नुरुल हसन- 5 साल (1972-77)। शेष 10 साल अन्य वामपंथी जैसे वीकेआरवी राव… ने ये जिम्मेदारी सँभाली।”

बंगाल में पेड़ से लटके मिले BJP नेता पूर्णचंद्र दास, TMC में शामिल होने का बनाया जा रहा था दबाव

पश्चिम बंगाल के ईस्ट मिदनापुर जिले में बुधवार को BJP कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव उनके घर के पास पेड़ से लटकता मिला। पिछले दिनों दिनाजपुर जिले में भाजपा विधायक देबेंद्र नाथ रॉय का शव से लटका मिला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 44 वर्षीय पूर्णचंद्र दास मिदनापुर जिले के रामनगर इलाके में बीजेपी के बूथ अध्यक्ष थे। उनके परिवार ने उनकी हत्या का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। परिवार कहता है कि पूर्णचंद्र दास से टीएमसी में शामिल होने के लिए कहा जा रहा था लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव से मना कर दिया। इसके बाद टीएमसी के लोग उन पर लगातार दबाव बना रहे थे।

परिजन कहते हैं, “आज (घटना वाले दिन) टीएमसी नेताओं की बैठक होने वाली थी। लेकिन बाद में उनका (पूर्णचंद्र दास) शव फँदे पर लटका पाया। हम चाहते हैं इस मामले में सच्चाई सामने आए।”

दास के परिजनों के अलावा स्थानीय भाजपा नेता अनूप चक्रवर्ती ने भी इस मामले पर टीएमसी को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा, “हमें पूरा यकीन है कि इसमे टीएमसी का हाथ है। उनकी पहले हत्या की गई और बाद में उनका शव फंदे पर लटका दिया गया ताकि ये आत्महत्या लगे।”

वहीं, टीएमसी ने आरोपों को खारिज करते हुए निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। टीएमसी के अखिल गिरी कहते हैं, “हमारी पार्टी का इसमें कोई हाथ नहीं है। ऐसा लगता है अवसाद के कारण उन्होंने आत्महत्या की। दास और उनके पड़ोसी के बीच कई समय से एक कानूनी झगड़ा चल रहा था। भाजपा सिर्फ इसका राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।”

गौरतलब है कि बंगाल में राजनीति से जुड़े लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों की मौत की कई घटना पिछले कुछ समय में सामने आई है। खासकर बीजेपी से जुड़े लोगों की। अभी कुछ दिन पहले सुदर्शनपुर के रायगंज में हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता मिला था।

रॉय के परिजनों ने पूछताछ में बताया था कि रात के 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। अगले दिन सुबह कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें फंदे से झूलता हुआ पाया। पुलिस ने बताया था कि विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूल रहा था।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया था कि देबेन्द्र नाथ रॉय की हत्या हुई है। उनका कहना था कि एक साजिश के तहत उन्हें लटका दिया गया। रायगंज के सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री देबाश्री चौधरी ने उनकी मौत की जाँच की माँग की थी।

रिया करती थी सुशांत सिंह का उत्पीड़न, करना चाहते थे ब्रेकअप: पूर्व प्रेमिका ने पुलिस को दिए बातचीत के सारे सबूत

बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अब उनकी एक पूर्व प्रेमिका ने बिहार पुलिस को कुछ ऐसे साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं, जिनसे सुशांत सिंह की मौत के रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। अंकिता लोखंडे ने बताया है कि सुशांत ने उनके जन्मदिन पर बधाई देने के लिए उन्हें मैसेज किया था और उसी चैट के दौरान सुशांत ने रिया चक्रवर्ती द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात भी बताई थी।

इस मामले में बिहार पुलिस ने सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंड़े का बयान दर्ज किया है। सुशांत सिंह और अंकिता लोखंडे एक टीवी धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ में एक साथ थे। इसके बाद दोनों लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे।

इसके बाद ही रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत की जिंदगी में आई थी। सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने हाल ही में रिया चक्रवर्ती और सुशांत के रिश्ते को लेकर कई सवाल उठाते हुए रिया चक्रवर्ती पर FIR भी दर्ज की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अंकिता ने बिहार पुलिस को बताया है कि जब वो ‘मणिकर्णिका: द क्‍वीन ऑफ झांसी’ की शूटिंग कर रहीं थीं, उस दौरान सुशांत ने उन्‍हें बर्थ-डे विश करने के लिए मैसेज किया था। उसी चैट के दौरान ही सुशांत ने रिया चक्रवर्ती द्वारा प्रताड़ना के साथ ही रिया से सम्बन्ध तोड़ने की बात भी कही थी।

सुशांत की मौत के बाद अंकिता दो बार उनके घर जा चुकी हैं। उनके सुशांत की बहन के साथ अच्छे सम्बन्ध बताए जा रहे हैं, इसलिए अंकिता ने उन्हें सुशांत के साथ अपनी चैट के बारे में बताया। अंकिता से सुशांत ने अपनी तत्कालीन गर्लफ्रेंड रिया से ‘परेशान’ होने का जिक्र किया था।

हाल ही में सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीव नगर पुलिस स्टेशन में सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया सहित छह लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज की है।

6 पन्नों की इस एफआईआर में रिया के खिलाफ 16 आरोप हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि उसने जानबूझकर अभिनेता को डिप्रेशन में महसूस करने के लिए मजबूर किया। इसके अलावा सुशांत के सबसे भरोसेमंद को भी निकाल दिया, उन्हें उनके परिवार से दूर रखा और उनके पैसे का इस्तेमाल करने के साथ ही सुशांत के बैंक खाते से 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए।

बुधवार (जुलाई 29, 2020) को, अंकिता ने इन्स्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है। अभिनेत्री ने केके सिंह द्वारा रिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ‘ट्रुथ विन्स’ के सन्देश के साथ एक फोटो शेयर की है।

दिल्ली सरकार के कारनामे: पहले टुकड़े-टुकड़े गैंग को बचाती रही, अब शरजील पर नहीं दे रही इजाजत

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (जुलाई 29, 2020) को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र शरजील इमाम को गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) के तहत अपराधों का संज्ञान लेते हुए, इस साल जनवरी माह में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एक भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दोषी करार दिया है।

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसने शरजील इमाम के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली सरकार से मंजूरी माँगी है लेकिन, अभी तक दिल्ली सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।

जाँच एजेंसी ने अदालत को बताया कि शरजील इमाम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी का अभी तक इंतजार है। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने अन्य सेक्शन का संज्ञान नहीं लिया, जिनमें राजद्रोह (124A) और 153 A (धर्म के खिलाफ की गई सजा या हमले के लिए सजा आदि) शामिल हैं।

दरअसल, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर इन्वेस्टिगेटिंग) के तहत, जाँच एजेंसियों को राजद्रोह के मामलों में आरोप पत्र दाखिल करते समय राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती है।

बुधवार (जुलाई 29, 2020) को, अतिरिक्त सरकारी वकील इरफान अहमद ने अदालत को बताया कि यूएपीए के तहत अभियोजन की मंजूरी दी गई थी, जबकि राजद्रोह के मामले में मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि शरजील इमाम जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर देश विरोधी बयानबाजी कर रहा था। शरजील इमाम ने युवाओं को भड़काने का प्रयास किया था, जिसके बाद ही जामिया में हिंसा हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि शरजील इमाम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के बाहर भी देश के टुकड़े करने की बात कर रहा था। शरजील इमाम के ऐसे कई वीडियो क्राइम ब्रांच को मिले थे। इन वीडियो की वॉयस और शरजील की वॉयस के सैंपल लिए गए थे, जो फॉरेंसिक जांच में मैच कर गए हैं। शरजील इमाम के खिलाफ दिल्ली समेत कई राज्यों में राजद्रोह के मुकदमे दर्ज हैं।

शरजील इमाम को दिल्ली पुलिस ने बिहार के जहानाबाद से 28 जनवरी को गिरफ्तार किया था। 18 अप्रैल को जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस ने इमाम के खिलाफ पहली चार्जशीट दायर की थी, इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए थे।

जिसने किया योगी आदित्यनाथ पर फर्जी केस, उस परवेज को उम्रकैद: रमजान में किया था गैंगरेप

गोरखपुर की अदालत ने एक एक्टिविस्ट परवेज परवाज़ और महमूद उर्फ ​​जुम्मन बाबा को ‘गरीब और असहाय महिला’ को रमज़ान के दौरान झाड़-फूँक के नाम पर अलग-अलग जगह पर ले जाकर उसका बलात्कार करने के आरोप में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2007 में सांसद रहे योगी आदित्यनाथ पर फर्जी एफआईआर दर्ज कराने के बाद परवेज परवाज़ चर्चा में आए थे। अब वो फिर से चर्चा में हैं लेकिन गलत कामों को लेकर, रेप आरोपित से बलात्कारी का ठप्पा लगने को लेकर।

परवेज परवाज़ को सितंबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था। एक स्थानीय महिला ने परवेज और महमूद उर्फ़ जुम्मन बाबा पर आरोप लगाया था कि दोनों ने उनकी पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने में मदद करने के बहाने 3 जून की देर रात पांडेयहाता इलाके के पास एक अलग जगह पर उसे बहला-फुसलाकर ले गए थे।

जून 04, 2018 को राजघाट पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, महिला ने दावा किया था कि वह एक स्थानीय मजहबी जगह पर मुस्लिमों के झाड़-फूँक वाले महमूद के संपर्क में तब आई थी, जब वो अपने पति का वशीकरण करवाने के लिए मगहर मजार गई थी।

पीड़िता ने कहा था कि उसका अपने पति से मनमुटाव चल रहा था। अपने पति को वश में करने के लिए वह मगहर मस्जिद झाड़-फूक कराने जाती थी, जहाँ उसकी मुलाकात आरोपित महमूद उर्फ़ जुम्मन बाबा से हुई।

जून 03, 2018 को 10.30 बजे आरोपित जुम्मन बाबा ने मस्जिद में दुआ करने के बहाने पीड़िता को पांडेयहाता स्थित अपनी दुकान के पास बुलाया। जब वह पहुँची तो अभियुक्‍त रिवाल्वर दिखाकर उसे सुनसान जगह पर ले गए और उसका बलात्कार किया।

परवेज ने वर्ष 2007 में योगी आदित्यनाथ और 11 अन्य लोगों पर धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया था। लेकिन, सबूत के तौर पर कोर्ट में जो डीवीडी पेश की गई थी, उसकी जाँच में पाया गया था कि उसमें छेड़छाड़ की गई थी। यह फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद इस मामले में भी कोर्ट के आदेश पर परवेज परवाज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

बबलू बबलू बबलू… 2+9 होता 5… ‘पीने लगे रवीश, राफेल-राम मंदिर से हिला संतुलन’ – लोगों ने लिए मजे

राफेल विमान आखिरकार भारत पहुँच चुके हैं और अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि पर भूमिपूजन की तारीख नजदीक आती जा रही है। लेकिन इन घटनाओं का कुछ लोगों पर अभी से ही बहुत विपरीत परिणाम देखने को मिल रहे हैं। NDTV के पत्रकार रवीश कुमार भी उन कुछ लोगों में से एक हैं, जिन पर राफ़ेल के भारत पहुँचने का विपरीत असर हुआ है और यह कल के उनके प्राइम टाइम शो में स्पष्ट नजर भी आ रहा। पंचांग और तारीखों ने रवीश को बदलकर रख दिया है।

रवीश कुमार राफ़ेल के भारत पहुँचने से इतने बौखलाए हुए हैं कि लोग उन्हें ‘पीकर’ प्राइम टाइम ना करने तक की सलाह देते नजर आए। जबकि, हकीकत में रवीश कुमार शराब पीकर नहीं बल्कि अपने अंदाज में यह शो करते हुए तारीख, कैलेण्डर, पंचांग, दिन, वार और ब्रह्माण्ड की तमाम चीजों को कोस रहे थे।

अयोध्या श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन की ओर इशारा करते हुए रवीश ने कहा कि 5 अगस्त को देश उत्साह में डूबा होगा और वो ऐतिहासिक होने वाला है। उन्होंने कहा कि अम्बाला में जिन राफ़ेल विमानों का अवतरण हुआ, उनकी संख्या भी 5 है। उन्होंने ‘इच्छा जताई’ कि काश 2 और 9 का जोड़ भी 5 होता तो और मजा आता। इस दौरान उनके साथ स्क्रीन पर भारतीय हिन्दू पंचांग के पन्ने नजर आते रहते हैं।

यही नहीं, रवीश कुमार ने कल शाम के अपने शो में इस बात से भी आपत्ति जताई कि भारत के मंत्री अपने देश के स्वतन्त्रता सेनानियों के जन्मदिन और उनकी पुण्यतिथि तक मनाते हैं और ट्विटर पर इस बात की चर्चा करते हैं। रवीश ने दुःख प्रकट करते हुए कहा है कि अब तो राहुल गाँधी भी हनुमान जयंती की शुभकामनाएँ देने लगे हैं। रवीश ने कहा कि लोग ट्विटर पर ऐतिहासिक दिनों को मनाते हैं।

रवीश कुमार ने 10 मिनट तक एक ही बात को दोहराते रहने के बाद कहा कि न्यूज़ चैनल के एंकर एक ही बात को बार-बार दोहराते हैं, इसलिए उनके अच्छे दिन आ गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कर के एंकर कार्यक्रम को भरते हैं।

राफ़ेल से खिसियाए रवीश कुमार ने अन्य समाचार चैनल्स के समाचार दिखाने के तरीकों पर भी नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने कहा कि लोग इन्हें देखते हैं, जबकि ‘मेहनत करने वाले पत्रकारों’ की कहानियों को लोग नहीं देखते। उन्होंने कहा कि टीवी के दर्शकों पर बहुत बोझ हो चुका है।

‘बबलू बबलू बबलू बबलू, बबलू के आगे बबलू…’

इसके अलावा रवीश कुमार की रिपोर्टिंग के इस अंदाज की एक अन्य क्लिप भी ट्विटर पर लोगों के बीच उपहास का जरिया बनी हुई है।

इसमें रवीश किसी घटना को कविता की शक्ल देते हुए कहते हैं – “बबलू भागा ही जा रहा है, बबलू आओ। पुलिस के आगे बबलू, बबलू के पीछे पुलिस। बबलू बबलू बबलू बबलू, भाग गया है देखो बबलू। जैसे बबलू खेल रहा हो अक्कड़-बक्कड़ बम्बे-बो, अस्सी-नब्बे पूरे सौ… बबलू निकल कर भागा। बबलू ने पुलिस को बबलू बना दिया है।”

रवीश कुमार द्वारा पढ़ी जा रही यह कवितानुमा रिपोर्ट, रवीश की रिपोर्टिंग के जैसे ही बिना सर-पैर और ओर-छोर के ट्विटर पर जमकर शेयर की जा रही है। फिलहाल दर्शकों को अब रवीश कुमार के अगले प्राइम टाइम का इन्तजार है। क्योंकि जिस तरह से रवीश कुमार राफ़ेल के भारत उतरने के बाद पेश आ रहे हैं, उनके चाहने वालों में राफ़ेल से ज्यादा दिलचस्पी अब रवीश को देखने में नजर आ रही है।