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श्री 420 रोज टीवी पर दिखते हैं, दिल्ली के लिए करते कुछ नहीं: केजरीवाल पर सुब्रमण्यम स्वामी

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया है। स्वामी ने रविवार (जुलाई 26, 2020) को दिल्ली में केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री को ‘श्री 420’ बताया।

सुब्रमण्यम स्वामी ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं इस बात से प्रभावित हूँ कि देश में कुल कोरोना वायरस के मामलों में गुजरात की हिस्सेदारी मात्र 1.6% है, जबकि दिल्ली में 9% हैं। श्री 420 रोजाना केवल टीवी पर दिखाई देते हैं, लेकिन दिल्ली के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।” 

सुब्रमण्यम स्वामी का इशारा अरविंद केजरीवाल की ओर था। दिल्ली में अभी तक 1.29 लाख से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में संक्रमण से अभी तक 3,806 लोगों की मौत हुई है।

बता दें कि केजरीवाल नियमित रूप से मीडिया को यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि दिल्ली में सक्रिय मामलों की संख्या में ‘सुधार’ हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अधिकतम सक्रिय मामलों के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान से 8वें स्थान पर आ गया है।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “सक्रिय मामलों की संख्या के मामले में दिल्ली 8वें स्थान पर पहुँच गया है। स्थिति कुछ दिनों पहले तक खराब थी। हम दूसरे स्थान पर थे। सावधानी बरतें और सुरक्षित रहें।”

उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कम मामले नजर आए। शनिवार को, दिल्ली में 1,500 के करीब नए मामले सामने आए, जिनमें 3,806 लोगों की मौत के साथ कुल संक्रमण बढ़कर 1.29 लाख हो गया। इसकी तुलना में, गुजरात में 1,081 नए COVID-19 मामलों की सूचना है, जिसमें 2,305 लोगों की मृत्यु के साथ कोरोना संक्रमण की कुल संख्या 54,712 थी।

इससे पहले दिल्ली कॉन्ग्रेस ने भी केजरीवाल से आरटी-पीसीआर परीक्षण कराने का आग्रह किया था। दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा था, “दिल्ली में कोरोना मामलों की सही संख्या निर्धारित करने के लिए सभी रैपिड एंटीजन-नेगेटिव परीक्षा परिणामों का परीक्षण गोल्ड स्टैंडर्ड आरटी-पीसीआर पर किया जाना चाहिए।”

दिल्ली में एसीपी को तेज रफ्तार वाहन ने कुचला, रात में ट्रैफिक की कर रहे थे निगरानी

दिल्ली में शनिवार (25 जुलाई 2020) की रात एसीपी (ट्रैफिक) संकेत कौशिक को एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने टक्कर मार दी। घटना तब हुई जब वे यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे।  उन्‍हें एम्‍स ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया। 

घटना रात के लगभग 8:30 बजे के हुई। सहायक आयुक्त संकेत कौशिक दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के रजकौरी स्थित फ़्लाइओवर के नज़दीक यातायात व्यवस्था सँभाल रहे थे। 58 साल के संकेत कौशिक मूल रूप से अजमेर, राजस्थान के रहने वाले थे। दिल्ली की यातायात पुलिस में कार्यरत थे।  

उस इलाके में जलभराव होने की वजह से यातायात व्यवस्था बिगड़ गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर संकेत कौशिक और उनकी टीम हालात सामान्य करने के लिए आगे बढ़े। वह जैसे ही रजकौरी फ़्लाइओवर के नज़दीक पहुँचे तभी एक तेज़ रफ़्तार वाहन (टाटा 407) उन्हें टक्कर मार कर गुरुग्राम की तरफ निकल गया। 

ख़बरों के मुताबिक़ इसके पीछे मेवात के अपराधियों की भूमिका हो सकती है। फिलहाल पुलिस इस पहलू से मामले की जाँच कर रही है।   

6 शहरों में कोरोना वायरस वैक्सीन शुरू, अगले 6 शहर लाइन में: डॉक्टरों ने कहा – ‘अभी तक नहीं है कोई दुष्प्रभाव’

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस का प्रसार भारत में भी बढ़ता जा रहा है। भारत लगातार कोरोना वायरस को मात देने के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटा है। इसी बीच भारत बायोटेक और जायडस कैडिला की वैक्सीन का अलग-अलग राज्यों के 6 शहरों में ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत बायोटेक और जायडस कैडिला दोनों को ही क्लिनिकल ट्रायल के फेज-1 और फेज-2 की मंजूरी दे दी गई थी। दोनों ने 15 जुलाई को स्वयसेवकों को अपनी-अपनी वैक्सीन की पहली डोज दी थी। कथित तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी एक अन्य वैक्सीन विकसित कर लिया है। इसका ह्यूमन ट्रायल भी भारत में अप्रूवल मिलने के बाद जल्द शुरू हो सकता है।

भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सीन (Covaxin) का ह्यूमन ट्रायल दिल्ली, हैदराबाद, पटना, कांचीपुरम और रोहतक में पहले ही शुरू किया जा चुका है। जल्द ही यह नागपुर, बेलगाम, गोरखपुर, कानपुर और विशाखापत्तनम में भी शुरू होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जायडस कैडिला द्वारा विकसित ZyCov-D का परीक्षण अहमदाबाद तक ही सीमित होगा। वहीं Covaxin का पहला ट्रायल 12 विभिन्न शहरों के 12 अलग-अलग अस्पतालों में होगा। इनमें 500 वॉलंटियर्स शामिल होंगे।

शामिल होने वाले वॉलंटियर्स की उम्र 18 से 55 साल के बीच निर्धारित की गई है। वैक्सीन उम्मीदवार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के बीच एक संयुक्त कोलैबोरेशन का प्रमाण होगा।

गौतलब है कि राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का इंसान पर ट्रायल शुक्रवार से शुरू हो गया है। वहीं ह्यूमन ट्रायल प्रोजेक्ट की टीम को लीड कर रहे प्रोफेसर डॉ संजय रॉय ने बताया कि जिस व्यक्ति को वैक्सीन दिया गया है, उसके शरीर में कोई बड़ा दुष्प्रभाव नहीं दिखा है।

इसके अलावा पटना एम्स के डायरेक्टर पीके सिंह ने ह्यूमन ट्रायल के दौरान बताया कि कुछ छोटे-मोटे साइड इफेक्ट दिख रहे हैं। जैसे- जहाँ इंजेक्शन लगाया जा रहा है, वहाँ की त्वचा लाल हो जा रही है, दर्द और हल्का बुखार दिख रहा है। लेकिन इससे किसी प्रकार का अन्य स्वास्थ्य समस्या नहीं उत्पन्न हो रहा है और डॉक्टर उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

टुकड़े-टुकड़े गैंग से कुत्ते अच्छे, देशद्रोह में तुंरत हो सजा: बलिदानी जवान की पत्नी ने JNU स्कॉलर को लताड़ा

बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने जेएनयू स्कॉलर साजिब बिन सईद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मॉंग की है। साजिब ने भारतीय सेना को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मल खन्ना ने कहा कि कुत्ते भी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देशद्रोह क़ानून के अंतर्गत तुरंत सज़ा दी जानी चाहिए।

बता दें कि जेएनयू स्कॉलर साजिब बिन सईद ने भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर में नरसंहार के लिए जिम्मेदार बताया था। ‘टाइम्स नाउ’ के वरिष्ठ संपादक प्रदीप दत्ता ने इसी सन्दर्भ में निर्मल खन्ना से बातचीत की। बता दें कि निहत्थे रवि खन्ना और उनके साथियों को यासीन मालिक और उसके गैंग ने तब मार डाला था जब वे लोग श्रीनगर में बस का इन्तजार कर रहे थे।

निर्मल खन्ना ने कहा कि वो एक जेएनयू स्कॉलर की तरफ से इस प्रकार के अर्थहीन बयान से बेचैनी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि साजिब बिन सईद को अपने बयान में भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए खुद पर शर्म आनी चाहिए। निर्मल खन्ना ने कहा कि ऐसे अच्छी तरह पढ़े-लिखे लोगों द्वारा देश व जनता की सुरक्षा करने वाले सेना के प्रति इस तरह के विचार रखना काफी दर्द देने वाला है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के सुरक्षा बलों के खिलाफ इस तरह का तुच्छ प्रोपेगेंडा चलते देखना उनके लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह देश की सेवा करते हुए उनके पति ने अपने जान न्योछावर कर दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये छद्म-बुद्धिजीवी जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की कुटिल हरकतों से ध्यान बँटाने के लिए और उनका बचाव करने के लिए सेना पर ऐसे आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा:

“राष्ट्र के खिलाफ बोलने के लिए ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। ऐसे लोग, जो खुलेआम देश के प्रति गद्दारी को प्रदर्शित करते हैं और भारतीय सुरक्षा बलों को बदनाम करते हैं, उनके खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। देश के खिलाफ साँठगाँठ करने वालों इन लोगों को ऐसी सज़ा दी जानी चाहिए कि ये भविष्य के लिए भी सबक हो। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। वो रहते तो हैं इस देश में लेकिन नाम पाकिस्तान का जपते रहते हैं।”

निर्मल खन्ना ने सवाल उठाया कि आखिर साजिब बिन सईद जैसे लोग उसी सेना को बदनाम करने का प्रयास करते हुए पाकिस्तान का गुण गाते हैं, जो सेना उन्हें इसी पाकिस्तान द्वारा थोपे गए आतंकवाद से बचा रही है। उन्होंने कहा कि अगर बलिदानी आत्माओं की शांति चाहिए तो ऐसे लोगों और उनके संगठनों को भारतीय सेना और देश के लिए वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाना बंद करना चाहिए।

ज्ञात हो कि अपने ट्वीट के माध्यम से नफरत फैलाने वाले जेएनयू के स्कॉलर साजिद बिन सईद पर दिल्ली पुलिस ने शिकंजा कसा है। सईद ने भारतीय सेना और आरएसएस पर ‘कश्मीरियों के विनाशकारी नरसंहार’ का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस ने सईद के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। जल्द ही दिल्ली पुलिस सईद से पूछताछ शुरू कर सकती है। सईद के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, और 153 के तहत FIR दर्ज किया गया है।

कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष साजिद बिन सईद ने ट्विटर पर पोस्ट कर कहा था, “भारतीय सेना कश्मीरियों के नरसंहार को अंजाम देती है, जो आरएसएस द्वारा तैयार किया जाता है। भाजपा सरकार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा गारंटीकृत स्व-निर्णय के लिए कश्मीरियों के अधिकार को स्वीकार करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का सही समय आ गया है।”

सुशांत सुसाइड केस में अब महेश भट्ट से पुलिस करेगी पूछताछ: महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने OK किया

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच कर रही मुंबई पुलिस सोमवार (जुलाई 27, 2020) को फिल्म निर्देशक महेश भट्ट को पूछताछ के लिए बुलाएगी। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इसकी जानकारी दी है।

अनिल देशमुख ने जोर देते हुए कहा कि निर्देशक को सुशांत की कथित आत्महत्या के संभावित कारणों की जाँच के तहत पुलिस के सामने गवाही देनी होगी।

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने रिपब्लिक टीवी के एक इंटरव्यू में सनसनीखेज दावे किए और महेश भट्ट एवं कुछ अन्य लोगों को जवाबदेह ठहराया था। उनका कहना था कि इन लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पावर से सुशांत सिंह राजपूत को डराया था।

इसके अलावा, फिल्म निर्माता करण जौहर के मैनेजर को भी तलब किया गया है। देशमुख ने कहा कि अगर जरूरत लगी तो खुद करण जौहर को भी हाजिर होने को कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जाँच से पता चलेगा कि क्या फिल्म इंडस्ट्री में समूहवाद (groupism) है, जो फिल्म उद्योग में लोगों के उत्पीड़न का कारण बनता है, जैसा कि कंगना ने आरोप लगाया है ।

इसके साथ ही कंगना रनौत ने सुशांत सिंह राजपूत और उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के रिश्ते में महेश भट्ट की भागीदारी पर भी सवाल उठाए थे।

कंगना ने कहा, “सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया ने अपने बयान में महेश भट्ट का जिक्र किया। वह उनसे कैसे संबंधित हैं? भट्ट के पहले विज्ञापन में लिखा गया है कि भट्ट किस तरह सुशांत की काउंसलिंग कर रहे थे। सुशांत के जीवन में महेश भट्ट कौन थे? महेश भट्ट रिया और सुशांत के बीच क्या कर रहे थे? यह हर कोई जानना चाहता है। मुंबई पुलिस महेश भट्ट को पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुला रही है?”

कंगना रनौत ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक बातचीत में फिल्म निर्माताओं आदित्य चोपड़ा, करण जौहर, महेश भट्ट और फिल्म समीक्षक राजीव मसंद सहित फिल्म उद्योग की शीर्ष हस्तियों के नामों का उल्लेख किया और दावा किया कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को दरकिनार कर उनकी महत्वपूर्ण में काट-छाँट की।

बता दें कि पिछले दिनों कंगना रनौत को भी इस सम्बन्ध में समन भेजा गया था। यह समन पुलिस ने उनके मनाली स्थित घर पर भेजा है, क्योंकि कंगना इस वक्त अपने परिवार के साथ वहीं पर है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद से कंगना रनौत लगातार बॉलीवुड की कुछ हस्तियों पर निशाना साध रही हैं। अपने कई बयानों में वो बॉलीवुड में फैले भाई-भतीजावाद और वशंवाद (नेपोटिज्म) पर खुलकर बोल चुकी हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा था सुशांत सुसाइड मामले में पुलिस ने बॉलीवुड के एक तबके से अभी तक पूछताछ की ही नहीं है।

कोरोना कैरियर बन भारत पर हमला करो, ज्यादा से ज्यादा कुफ़्रों को जान से मारो: भारतीय मुस्लिमों को ISIS का संदेश

पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) का ऑनलाइन प्रकाशन समूह इसकी आड़ में भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने में लगा है। ‘वॉइस ऑफ़ हिन्द’ नाम के इस ऑनलाइन प्रकाशन समूह ने समर्थकों से कहा कि वह इस महामारी को मौके की तरह इस्तेमाल करें। वे कोविड 19 का कैरियर (वाहक) बनकर भारत पर हमला कर सकते हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार वॉइस ऑफ़ हिन्द के ‘लॉकडाउन स्पेशल’ संस्करण में ज़्यादा से ज्यादा कुफ़्रों को जान से मारने के लिए लिए कहा गया है। 17 पन्नों के इस संस्करण में कहा गया है कि उनके समर्थक इस्लाम में भरोसा न रखने वालों को ख़त्म करने के लिए तैयार रहें।

लॉकडाउन स्पेशल के मुख्य पन्ने पर दिल्ली दंगों और निज़ामुद्दीन मरकज़ में शामिल होने वाले लोगों की तस्वीर लगी है। साथ ही लिखा है “Believers stand tall its time for Kuffar to fall” यानी भरोसा करने वाले (इस्लाम में) मज़बूती से खड़े रहेंगे और कुफ़्र बीमार हो जाएँगे। इसके बाद भरोसा न रखने वालों को मिटाने के तरीक़े बताए गए हैं। 

ऑनलाइन पत्रिका में कहा गया है, “हमेशा हथियार बंद रहिए और कभी ज़्यादा से ज़्यादा कुफ़्रों को जान से मारने का मौक़ा मत छोड़िए। अपने पास चेन, रस्सी और तार रखिए। जिससे उन्हें पीट-पीट कर और तड़पाकर मारा जा सके।” इसके अलावा पत्रिका में यह भी लिखा हुआ है कि कैंची और हथौड़े जैसे हथियारों की मदद से कुफ़्रों को मारने में आसानी होगी।

एक और बिंदु को अंत में रखा गया है जो सबसे हैरान कर देने वाला है, “जितने ज़्यादा से ज़्यादा कुफ़्रों के बीच कोरोना वायरस फैलाया जा सकता है, फैलाइये। इसमें ज़्यादा मेहनत नहीं लगेगी और हम ज़्यादा से ज्यादा कुफ़्रों को आसानी से मार सकते हैं।” इसमें मौलाना साद और जमात के नाम का ज़िक्र है।

इस्लामिक स्टेट का भारतीय मुस्लिमों के लिए संदेश (चित्र साभार: इंडिया टुडे )

मुस्लिमों से आग्रह किया गया था कि वह दिल्ली दंगों के मामले में हुई जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की गिरफ्तारी का बदला लें। इसके अलावा पत्रिका में मुस्लिम समुदाय के लोगों से कोरोना कैरियर बनने के लिए कहा गया है। साथ ही उन उन पुलिस वालों के बीच कोरोना फैलाने के लिए कहा गया जो लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी कर रहे।     

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने जनवरी में इस्लामिक स्टेट के तहत काम करने वाले 3 आतंकियों को दिल्ली में गिरफ्तार किया था। भारतीय खुफ़िया एजेंसी पिछले कई दिनों से केरल और कर्नाटक में जाँच अभियान चला रही हैं। उनका मानना है कि आईएस के आतंकी टेलीग्राम और सोशल मीडिया की मदद से काम कर रहे हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से भी पता चलता है कि केरल और कर्नाटक में आईएस के काफी आतंकवादी मौजूद हैं। 

हाल ही में आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में चेताया गया है कि भारतीय राज्य केरल और कर्नाटक में अच्छी-खासी संख्या में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के आतंकवादी मौजूद हैं। साथ ही खुलासा किया गया है कि ISIL की भारतीय यूनिट ‘हिन्दू विलायाह’ के भी कम से कम 180 से लेकर 200 तक आतंकी सक्रिय हैं। इस आतंकी संगठन के गठन की घोषणा मई 2019 में हुई थी।

भारत पर मुस्लिमों-ईसाइयों का हिंदुओं से ज्यादा हक: ‘द वायर’ की चिरकुटई को शशि थरूर का समर्थन

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के एक लेख में राजनीतिक विश्लेषक बद्री रैना ने अजीबोगरीब दावा किया है। ये तो सभी को ज्ञात है कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग और बुद्धिजीवियों का एक पूरा का पूरा समूह लगातार ये साबित करने में लगा हुआ है कि मुस्लिमों पर अत्याचार किया जा रहा है और वो पीड़ित हैं। लेकिन, ‘द वायर’ में बद्री रैना ने इस बार अपने समूह के सारे बुद्धिजीवियों को पीछे छोड़ते हुए अपना दिमागी दिवालियापन दिखाया है।

‘द वायर’ के इस लेख में बद्री रैना ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे ड्राइवर से मुलाकात की, जिसका शक्ल अमेरिका के दिवंगत राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से मिलती-जुलती थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के एक ट्रिप के दौरान उससे मिलने की बात कही। उस ड्राइवर के हवाले से बद्री रैना ने ‘द वायर’ में इतना अजीब दावा किया है कि ये आराम से कहा जा सकता है कि ये उनकी ही दिमाग की उपज है।

लिबरल गुट इससे पहले भी इस तरह की कलाकारियाँ करता रहा है, इसीलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। बद्री रैना को पता था कि वो खुद अगर ऐसा कहता है तो इस पर हंगामा होगा, इसीलिए उसने अपने लेख में एक नया किरदार डाल दिया और जो खुद कहना चाहता था, वो उसके मुँह से कहलवाया दिया। ‘द वायर’ के इस लेख को वास्तविकता से जोड़ने के लिए फिक्शन का सहारा लिया गया।

‘द वायर’ का अजीबोगरीब दावे वाला लेख, जिसे बद्री रैना ने लिखा है

इस पूरे लेख का सार ये है कि समुदाय विशेष के लोगों और ईसाइयों का भारत पर ज्यादा अधिकार है, क्योंकि वो अपने मृतकों को जलाते नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन में दफन करते हैं। लेख की मानें तो उक्त ड्राइवर ने कहा :

“डॉक्टर साहेब? क्या आपने कभी इस वास्तविकता के बारे में सोचा है कि जब आपकी मृत्यु होगी तो आपको जलाया जाएगा। इसके बाद आपकी अस्थियों को गंगा में बहाया जाएगा। या फिर किसी अन्य पवित्र नदी वगैरह में बहा दिया जाएगा। ये अस्थियाँ कहाँ जाएँगी? पानी इन्हें बहाते हुए समुद्र में लेकर चल जाएगा। ये भारत की जमीन से बाहर चल जाएगा। लेकिन, जब मैं मरूँगा तो मुझे दफन किया जाएगा। मैं सदा के लिए अपनी मातृभूमि की गोद में दफन रहूँगा। अब मेरा सवाल ये है कि हमारी मातृभूमि पर पहला हक किसका है?”

इस अजीबोगरीब बयान में बद्री रैना को एक तरह से पूरी दुनिया मिल गई। उन्होंने आगे लिखा है कि ये बात सुनते ही उन्हें एक प्रकार की वास्तविकता का भान हुआ और अपनी ही भूमि पर वो बाहरी की तरह महसूस करने लगे। उन्हें खुद के एक किराएदार होने की बात पता चली। उन्होंने दावा किया है कि सैकड़ों सालों से जो दावे किए जा रहे थे, उन्हें ड्राइवर की इस दलील के बाद वो सब फीके नजर आने लगे।

उन्होंने कहा कि वो सोचने लगे कि उनके माँस व हड्डियों से उनकी मातृभूमि को उर्वरा नहीं मिल पाएगी। लेकिन, उस ड्राइवर अब्दुल रशीद को ये सौभाग्य मिल जाएगा। हालाँकि, ये अजीब दावा भले ही किसी के पल्ले न पड़े लेकिन बद्री रैना के दावों को मानें तो किसानों को सारे कब्रिस्तान सौंप दिया जाना चाहिए, क्योंकि कब्रिस्तानों में ही सारी उर्वरता भरी पड़ी है। वहाँ फसलें अच्छी तरह से लहलहाएगी।

शशि थरूर ने शेयर किया ‘द वायर’ का लेख

इस लेख का उद्देश्य था कि समुदाय विशेष के लोगों द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने से इनकार करने का बचाव करना। शशि थरूर को ये विचार रास आ गया। उन्होंने भी ट्विटर पर इस लेख को शेयर करते हुए सवाल दाग दिया कि जिन लोगों के शरीर से हमारे देश की मिट्टी उर्वर बनती है, क्या उनका हमारे देश पर ज्यादा हक नहीं है? हालाँकि, थरूर का ये दावा कॉन्ग्रेस की सोच को दिखाती है, क्योंकि मनमोहन सिंह ने पीएम रहते कहा था कि समुदाय विशेष का इस देश की संपत्ति पर पहला हक है।

चीन की अलीबाबा और जैक मा को गुरुग्राम की अदालत का समन: फेक न्यूज फैलाने से जुड़ा है मामला

दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम की एक अदालत ने चीन की कंपनी अलीबाबा और उसके फाउंडर जैक मा को समन भेजा है। कोर्ट ने ये कार्रवाई यूसी न्यूज़ में काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी की शिकायत पर की है। पूर्व कर्मचारी का कहना है कि कंपनी की सेंसरशिप और फेक न्यूज फैलाने के खिलाफ बोलने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।

कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि कंपनी ऐसे कंटेंट को सेंसर करती थी, जो चीन के खिलाफ हो। साथ ही वो फेक न्यूज़ फैलाने का भी काम करती है।

यह मामला तब सामने आया जब भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज भी शामिल थे।

भारत ने ऐप पर बैन लगाने के बाद सभी प्रभावित कंपनियों से लिखित रूप से जवाब माँगा था, जिसमें उन्होंने कंटेंट सेंसर किया था या किसी विदेशी सरकार के लिए काम किया था।

20 जुलाई की इस कोर्ट की फाइलिंग के अनुसार अलीबाबा की यूसी वेब के एक पूर्व कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह परमार ने आरोप लगाया कि कंपनी चीन के खिलाफ सभी कंटेंट को सेंसर करती थी और इसके यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज ऐप फेक न्यूज चलाते थे, जिससे सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो।

इस मामले को लेकर गुरुग्राम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की सिविल जज सोनिया शेओकांड ने अलीबाबा, जैक मा और करीब दर्जन भर लोगों के खिलाफ समन जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी से 29 जुलाई को खुद पेश होकर या फिर वकील के जरिए समन का जवाब देने को कहा है। वहीं समन में कंपनी और उनके अधिकारियों को 30 दिन के अंदर लिखित जबाव भी दाखिल करने को कहा गया है।

उधर, यूसी इंडिया ने एक बयान में कहा है कि भारतीय बाजार और स्थानीय कर्मचारियों के कल्याण के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता अटूट है और उसकी नीतियाँ स्थानीय नियमों के अनुरूप हैं। हालांकि, कंपनी ने ताजा मामले को कोई भी टिप्पणी नहीं की है। बता दें अलीबाबा के प्रतिनिधियों ने चीनी कंपनी या जैक मा की ओर से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

पुष्पेंद्र सिंह परमार यूसी वेब के गुरुग्राम ऑफिस में अक्टूबर 2017 तक एसोसिएट डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं। परमार ने कंपनी से क्षतिपूर्ति के रूप में 2,68,000 डॉलर की रकम माँगी है।

भारत सरकार की ओर से बैन लगाए जाने के बाद यूसी वेब लगातार वापसी का प्रयास कर रहा था। लेकिन ताजा आरोपों के बाद कंपनी के वापसी के प्रयासों को झटका लग सकता है। वहीं अब यूसी वेब ने भारत में कुछ कर्मचारियों को कंपनी से निकलना भी शुरू कर दिया है।

एनालिटिक्स फर्म सेंसर्स टॉवर के आँकड़ों के मुताबिक, बैन से पहले 2017 और 2018 के दौरान यूसी ब्राउजर के भारत में 689 मिलियन डाउनलोड थे, जबकि यूसी न्यूज के 79.8 मिलियन डाउनलोड थे।

कोर्ट में लगाए गए आरोप

गौतलब है कि पुष्पेंद्र सिंह परमार ने 200 पेज की याचिका में यूसी न्यूज की कुछ पोस्ट की क्लिप भी लगाई है। इन क्लिप में दिखाई गई खबरों को परमार ने फर्जी बताया था।

यूसी वेब द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर सेंसर शब्दों का इस्तेमाल किया गया। जैसे कि 2017 के एक हिंदी पोस्ट का शीर्षक है ‘आज मध्यरात्रि से 2,000 रुपए के नोट बैन हो जाएँगे।’ वहीं, 2018 के एक पोस्ट की हेडलाइन में कहा गया है कि ‘अभी-अभी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया है।’ कंपनी चीन विरोधी कंटेंट को सेंसर करने के लिए “India-China border” और “Sino-India war” जैसे की-वर्ड का इस्तेमाल करती थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चायनीज मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार ने इन ऐप को लोगों की गोपनीयता के कारण आसुरक्षित बताया था।

भारत के आईटी मंत्रालय ने भी इन एप्स को भारत की संप्रभुता, अखंडता, प्रतिरक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि एंड्रायड और iOS प्लेटफॉर्म्स पर ये सारे एप्स डेटा चुराते हैं और विदेशों में स्थित सर्वर पर भेज देते हैं।

अफगानिस्तान में बचाई गई नाबालिग, गुरुद्वारे से अगवा सिख समेत 11 को भारत का वीजा, आज आएँगे दिल्ली

काबुल के शोर बाजार स्थित गुरुद्वारे पर हुए इस्लामिक स्टेट के हमले के चार महीने बाद भारतीय दूतावास ने अफगानिस्तान के 11 सिखों को शॉर्ट टर्म वीजा दिया है। अफगानिस्तान के इन सिखों की आज यानी रविवार (जुलाई 26, 2020) को दिल्ली पहुँचने की संभावना है।

अफगानिस्तान में काफी समय से आतंकियों द्वारा सिखों को निशाना बनाया जा रहा है। काबुल के गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले में 27 सिखों की मौत हुई थी। अफगानिस्तान में सिख लड़कियों की जबरन शादी के मामले भी सामने आए हैं। हाल ही में सिख समुदाय के नेता निधान सिंह सचदेवा का अपहरण हुआ था। हालाँकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल में सिख समुदाय के नेता चाबुल सिंह ने बताया कि शनिवार (जुलाई 25, 2020) को भारतीय दूतावास ने जिन लोगों को वीजा दिया है उनमें निधान सिंह भी शामिल हैं। निधान सिंह को पक्तिआ प्रांत स्थित गुरुद्वारे से पिछले महीने अगवा कर लिया गया था। निधान सिंह के अलावा 15 वर्षीय वो नाबालिग लड़की भी शामिल है, जिसे कथित जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी के प्रयास के बाद रेस्क्यू किया गया था।

काबुल में गुरुद्वारा दशमेश पीता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी दरबार कटार परवन की प्रबंध समिति के सदस्य चाबुल सिंह ने बताया, “हमें 11 लोगों का छह महीने के वीजा मिला है, जिनमें निधान सिंह भी हैं, जो अपहरण के दौरान हुए टॉर्चर के बाद से काफी बीमार हैं। निधान सिंह के साथ उनके रिश्तेदार को वीजा मिला है। इसके अलावा काबुल हमले में मारे गए दो भाइयों का परिवार भी भारत जा रहा है। उनमें से एक की बेटी जिसे जबरन शादी के चंगुल से बचाया गया, उसे भी भेजा जा रहा है।”

सिरसा ने उठाई 11 सिखों के रहने की जिम्मेदारी

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उन्होंने 11 लोगों के लिए टिकट और रहने की व्यवस्था की है, जो कि वंदे भारत मिशन के तहत फ्लाइट से रविवार को दिल्ली पहुँच रहे हैं।

सिंह ने कहा, “हमारी योजना सबसे पहले उन लोगों के परिवारों को लाने की है जिन्होंने आतंकवादी हमले में एक या एक से अधिक परिवार के सदस्यों को खो दिया। हमारी पहली सूची में लगभग 150 लोग हैं। सिख समुदाय का कोई भी व्यक्ति वहाँ रहना नहीं चाहता है।”

आतंकी हमले में मारे गए भाइयों के परिवार के एक सदस्य ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “यह बहुत दुखद और दर्दनाक है। कौन इस तरह से अपने देश को छोड़ना चाहता है लेकिन हमारे लिए कुछ भी नहीं बचा है। हम भारत में एक नई शुरुआत की उम्मीद कर रहे हैं।”

यह कदम अफगान सिख समुदाय द्वारा दूतावास से कई अपील करने और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 25 मार्च को गुरु हर राय साहिब गुरुद्वारे में हमले के बाद तत्काल निकासी और बचाव की माँग करने के बाद उठाया गया है। करीब 700 सिख और हिंदुओं ने भारत आने की अपील की है। कोरोना वायरस के प्रकोप और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के स्थगित होने के कारण अफगानिस्तान से इन लोगों को लाने की प्रकिया ठप पड़ गई थी।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार स्वतंत्रता दिवस से पहले अफगान नागरिकों को भारत लाने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर रही है। इसमें बताया गता था कि इस साल 25 मार्च को हुए गुरुद्वारा पर हमले के बाद लगभग 600 सिखों ने भारत में इतने लंबे समय के वीजा के लिए आवेदन किया था

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में सिख व्यक्ति निधान सिंह सचदेवा का 1 महीने पहले अपहरण कर लिया गया था। उन्हें शनिवार (जुलाई 18, 2020) को छोड़ दिया गया। निधान सिंह सचदेवा को अफगानिस्तान के पक्तिआ प्रान्त में स्थित एक गुरुद्वारे से अपहृत कर लिया गया था। भारत ने उनकी रिहाई के लिए अफगानिस्तान सरकार को धन्यवाद दिया था।

वहीं 17 जुलाई को एक नाबालिग लड़की को कथित रूप से काबुल में गुरुद्वारा बाबा श्री चंद से अगवा किया गया और तीन दिन बाद बचाया गया। उसके परिवार ने दावा किया कि एक स्थानीय युवक ने उसका “ब्रेनवॉश” किया था। बाद में उसे ‘जबरन शादी’ से बचाया गया था।

‘केस वापस ले लो’ – घर आकर 200 मुस्लिमों की धमकी: मृतक महादलित के बेटे का आरोप, बजरंग दल ने की न्याय की माँग

बिहार के पूर्णिया में मुस्लिम भीड़ द्वारा सर्वलाल हरिजन (माँझी) की हत्या का मामला अब पूरे राज्य में एक बड़ा मुद्दा बन कर उभर रहा है। विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल ने इस मामले में पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। सर्वलाल हरिजन की सिर्फ़ इसीलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से पूछा था कि उन लोगों ने उनके सूअर को क्यों मार डाला? इस संबंध में अब हिन्दूवादी संगठन आक्रोश में हैं।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में बजरंग दल के सह प्रांत संयोजक शुभम भारद्वाज से बात की, जिन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अगर 3 दिनों के भीतर आरोपितों पर कार्रवाई नहीं की तो उनका संगठन पूरे राज्य में सड़क पर उतरने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ध्यान रखा जाएगा लेकिन हिंदुओं पर अत्याचार पर वो चुप नहीं बैठेंगे।

भारद्वाज ने कहा कि पुलिस इस मामले में आरोपितों को गिरफ्तार करने में विफल रही है, जिस कारण लोग आक्रोशित हैं। इसीलिए, 31 जिलों के विभिन्न लोगों ने प्लाकार्ड के जारी सर्वलाल हरिजन की हत्या के मामले में न्याय की माँग की है। इन बैनरों पर लिखा है- “हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो”, सर्वलाल हरिजन को न्याय दो’ और ‘मुस्लिम तुष्टीकरण बंद करो’। इन बैनरों से लोगों ने अपना आक्रोश जताया है।

भारद्वाज ने बताया कि इस मामले में बजरंग दल बिहार के महामहिम राज्यपाल को पत्र लिख कर घटना से अवगत कराने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यपाल को पत्र लिख कर न्याय की माँग की जाएगी। इससे पहले भी विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के न्याय की माँग की थी। पुलिस ने जाँच का आश्वासन दिया था।

प्लाकार्ड के माध्यम से आक्रोश प्रदर्शन कर के न्याय की माँग करते लोग

हालाँकि, ऑपइंडिया ने जब पुलिस से संपर्क किया तो उन्होंने जाँच जारी होने की बात कही। हमने मृतक सर्वलाल हरिजन के बेटे संतोष कुमार से बात की, जिन्होंने कहा कि उनके दरवाजे पर करीब 200 मुस्लिम आए थे, जिन्होंने केस वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ आकार उन पर दबाव बना रही थी कि वो इस मामले में अपनी शिकायत वापस ले लें।

संतोष कुमार ने कहा कि उनके पास एक तो केस लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं, ऊपर से दबाव भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक पुलिस की तरफ से उनकी मदद के लिए या घटना के निरीक्षण के लिए कोई नहीं आया है। संतोष ने बताया कि परिवार अब भी डर के साए में जी रहा है। उन्हें न्याय की उम्मीद तो है लेकिन गरीबी के कारण रुपए भी नहीं हैं। उन्होंने आरोपितों की गिरफ़्तारी की माँग की।

बता दें कि बिहार के पूर्णिया में एक महादलित व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया था। ये घटना डगरुआ थाना क्षेत्र स्थित दुबैली गाँव की है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में न्याय की माँग की है। विहिप का कहना है कि सर्वलाल हरिजन (सर्वलाल माँझी) की न सिर्फ हत्या की गई बल्कि उनके घर पर भी हमला किया गया और उनके परिवार पर अत्याचार किया गया। विहिप के जिलाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार एवं जिला मंत्री रवि भूषण झा ने इस घटना से मीडिया को अवगत कराया था।

न्याय की माँग करते लोग

संतोष कुमार ने इस दौरान सबसे बड़ा आरोप ये लगाया था कि आरोपितों और उनके सहयोगियों ने उनके पिता का हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार नहीं होने दिया, जिसके बाद उन्हें अपने दरवाजे के पास ही लाश को दफनाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि चूँकि श्मशान तक जाने का रास्ता उनकी बस्तियों से होकर ही जाता है, इसीलिए उन्हें जलाने के लिए नहीं ले जाने दिया गया। इसलिए दफनाना पड़ा

एफआईआर के अनुसार, संतोष की बहन को पकड़ कर अर्धनग्न भी कर दिया गया। इसमें तहसीन, अशफाक, राशिद और सोहिब सहित कुल 14 को आरोपित बनाया गया है। इन सब पर लाठी-डंडे और बाँस से वार करने का आरोप लगाया गया है। सोहिब पर आरोप लगाया गया है कि उसने संतोष के पिता सर्वलाल को अंदरूनी चोट पहुँचा कर जख्मी कर दिया। साथ ही पत्थर चलाने का भी आरोप है।