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‘शेख अब्दुल्ला की पार्टी सेक्युलर है’: NCERT में अनुच्छेद 370 को लेकर भ्रामक दावे, छिपाया गया सच

NCERT भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक स्वायत्त संस्था है, जो छात्रों के पाठ्यक्रम के लिए पुस्तकों को तैयार करता है। अब तक इसकी पुस्तकों मे वामपंथी लेखकों और इतिहासकारों के प्रभाव के बारे में चर्चा होती आई है। मोदी सरकार से लोग माँग कर रहे हैं कि NCERT के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए समिति गठित की जाए। अब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर पाठ्यक्रम में हुए बदलाव पर विवाद खड़ा हो गया है।

12वीं कक्षा की पुस्तक ‘स्वतंत्र भारत की राजनीति’ में NCERT ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के संबंध मे कुछ बदलाव किया है। लेकिन, बदलाव के नाम पर मोदी सरकार के इस बड़े कदम की कोई पृष्ठभूमि नहीं दी गई और सीधा बता दिया गया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। अमित शाह ने संसद में इस बारे में हर सवाल का जवाब देते हुए लंबा भाषण दिया था लेकिन NCERT उदासीन बना रहा।

‘दैनिक जागरण’ में वरिष्ठ लेखक अनंत विजय के लेख के अनुसार, इस पुस्तक के ‘क्षेत्रीय आकांक्षाएँ’ नामक अध्याय में ‘जम्मू और कश्मीर’ वाले सेक्शन में ये तो बताया गया है कि अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था लेकिन बड़ी चालाकी से ये छिपा लिया गया है कि ये एक अस्थायी प्रावधान था। वो लिखते हैं कि इस बारे में अर्धसत्य पढ़ाया जा रहा है क्योंकि इसे संविधान के बाकी प्रावधानों की तरह ही प्रदर्शित किया गया है।

उन्होंने पूछा है कि अगर बच्चों के मन मे ये शंका उठेगी कि किसी प्रदेश को मिले संवैधानिक दर्जे को क्यों खत्म किया गया, तो उन्हें कौन जवाब देगा? साथ ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के संबंध में NCERT में लिखा है कि ‘भारत दावा करता है कि इस पर गैर-कानूनी कब्जा किया गया है’। भारत के पक्ष को ‘दावे’ के रूप में दिखाने का औचित्य क्या है? सवाल ये उठता है कि क्या ये भारत से बाहर की पुस्तक है?

जब NCERT की पुस्तक में ये चर्चा की जाती है कि जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री रहे शेख अब्दुल्ला की पार्टी ‘सेक्यलर’ है तो फिर छात्रों को इस बात की भी जानकारी तो दी ही जानी चाहिए कि पहले इसका नाम ‘मुस्लिम कॉन्फ्रेंस’ क्यों था? शेख अब्दुल्ला को भारत सरकार ने 14 वर्ष के लिए जेल में रखा था, इस बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई है? इस तरह से छात्रों को भ्रमित किया जा रहा है।

साथ ही इसमें ये भी लिखा है कि जम्मू कश्मीर के बाहर के लोगों का सोचना था कि अनुच्छेद 370 के कारण ही जम्मू कश्मीर का भारत में पूर्ण एकीकरण नहीं हो पा रहा है। यहाँ जम्मू कश्मीर और वहाँ के बाहर के लोगों को अलग-अलग बता कर दिखाया गया है और ऐसा प्रदर्शित किया गया है कि दोनों की देश को लेकर सोच अलग है। पृष्ठ 155 पर लिखा है कि भारतीय संघ में जम्मू कश्मीर के दर्जे को लेकर विवाद है।

अनंत विजय ने सवाल उठाया है कि नामवर सिंह से लेकर रोमिला थापर तक NCERT की पुस्तकों के लिए नीति निर्धारण करते रहे हैं और इसका ही परिणाम है कि आज बच्चों को ये सब पढ़ाया जा रहा है। जिन पुस्तकों में ये सब दिया गया है, उन्हें केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के छात्र पढ़ते हैं। इससे ये सवाल उठता है कि आधी-अधूरी जानकारी देकर छात्रों को भ्रमित क्यों किया जा रहा है? सरकार इस पर कब विचार करेगी?

पीठ में छुरा घोंपने वाले Pak को भारत का जवाब पूरी दुनिया ने देखा: ‘मन की बात’ में PM मोदी ने किया अटल को याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कारगिल विजय दिवस के मौके पर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया और पाकिस्तान की करतूतों की याद दिलाई। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे पाकिस्तान ने बड़े-बड़े मनसूबे पालकर भारत की भूमि हथियाने और अपने यहाँ चल रहे आन्तरिक कलह से ध्यान भटकाने को लेकर दुस्साहस किया था। पीएम ने कहा कि भारत की मित्रता के जवाब में पाकिस्तान द्वारा पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश हुई थी।

बकौल पीएम मोदी, उसके बाद भारत की वीर सेना ने जो पराक्रम दिखाया, भारत ने अपनी जो ताकत दिखाई, उसे पूरी दुनिया ने देखा। ‘मन की बात’ में रविवार (जुलाई 26, 2020) को बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऊँचे पहाडों पर बैठा हुआ दुश्मन और नीचे से लड़ रही हमारी सेनाएँ, हमारे वीर जवान, लेकिन, जीत पहाड़ की ऊँचाई की नहीं – भारत की सेनाओं के ऊँचे हौंसले और सच्ची वीरता की हुई।

PM मोदी ने यह भी कहा कि कारगिल जाने और हमारे जवानों की वीरता के दर्शन का सौभाग्य उन्हें मिला और वो दिन, उनके जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि आज देश भर में लोग कारगिल विजय को याद कर रहे हैं। उन्होंने ट्विटर की चर्चा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर एक हैशटैग ‘Courage In Kargil’ के साथ लोग अपने वीरों को नमन कर रहें हैं, जो शहीद हुए हैं, उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

पीएम मोदी ने इस दौरान वेबसाइट ‘गलेंटरी अवॉर्ड्स‘ की चर्चा करते हुए लोगों को बताया कि वहाँ हमारे वीर पराक्रमी योद्धाओं के बारे में, उनके पराक्रम के बारे में, बहुत सारी जानकारियाँ प्राप्त होगी और वो जानकारियाँ, जब आप अपने साथियों के साथ चर्चा करेंगे तो उनके लिए भी प्रेरणा का कारण बनेगी। पीएम मोदी ने लोगों को सलाह दी कि वो ज़रूर इस वेबसाइट को विजिट करें, बार-बार करें। पीएम मोदी ने कहा:

“कारगिल युद्ध के समय अटल जी ने लाल किले से जो कहा था, वो, आज भी हम सभी के लिए बहुत प्रासंगिक है। अटल जी ने तब देश को गाँधी जी के एक मंत्र की याद दिलाई थी। महात्मा गाँधी का मंत्र था कि यदि किसी को कभी कोई दुविधा हो कि उसे क्या करना, क्या न करना, तो उसे भारत के सबसे गरीब और असहाय व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए। उसे ये सोचना चाहिए कि जो वो करने जा रहा है, उससे उस व्यक्ति की भलाई होगी या नहीं होगी। गाँधी जी के इस विचार से आगे बढ़कर अटल जी ने कहा था कि कारगिल युद्ध ने हमें एक दूसरा मंत्र दिया है- ये मंत्र था कि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले हम ये सोचें कि क्या हमारा ये कदम उस सैनिक के सम्मान के अनुरूप है, जिसने उन दुर्गम पहाड़ियों में अपने प्राणों की आहुति दी थी।

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युद्ध की परिस्थिति में, हम जो बात कहते हैं, करते हैं, उसका सीमा पर डटे सैनिक के मनोबल पर, उसके परिवार के मनोबल पर बहुत गहरा असर पड़ता है। ये बात हमें कभी भूलनी नहीं चाहिए और इसीलिए हमारा आचार, हमारा व्यवहार, हमारी वाणी, हमारे बयान, हमारी मर्यादा, हमारे लक्ष्य, सभी, कसौटी में ये जरूर रहना चाहिए कि हम जो कर रहे हैं, कह रहे हैं, उससे सैनिकों का मनोबल बढ़े, उनका सम्मान बढ़े।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कभी-कभी हम इस बात को समझे बिना सोशल मीडिया पर ऐसी चीजों को बढ़ावा दे देते हैं, जो हमारे देश का बहुत नुकसान करती है। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी सामग्रियाँ हम कभी-कभी जिज्ञासावश फॉरवर्ड करते रहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि आजकल युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते हैं, देश में भी कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा जाता है, और हर एक देशवासी को उसमें अपनी भूमिका तय करनी होती है।

त्योहारों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अभी कुछ दिन बाद रक्षाबंधन का पावन पर्व आ रहा है और मैं इन दिनों देख रहा हूँ कि कई लोग और संस्थाएँ इस बार रक्षाबंधन को अलग तरीके से मनाने का अभियान चला रहें हैं। कई लोग इसे ‘Vocal for local’ से भी जोड़ रहे हैं और बात भी सही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पर्व, हमारे समाज के, हमारे घर के पास ही किसी व्यक्ति का व्यापार बढ़े, उसका भी पर्व खुशहाल हो, तब, पर्व का आनंद, कुछ और ही हो जाता है। 

‘तू मेरा मंदिर अपने घर ले जा, मैं इसका अनादर नहीं देख सकती’- शमशाद के घर जाने से पहले सहेली से प्रिया की बात

किसने सोचा था कि लव जिहाद का चेहरा इतना वीभत्स होगा? किसने सोचा था कि शमशाद प्रेमी बनकर प्रिया का जीवन ठगेगा? किसे मालूम था कि डैडी-डैडी कहने वाली 11 साल की मासूम पर भी शमशाद को दया नहीं आएगी? किसको अंदाजा था कि एक दिन प्रिया और कशिश एक साथ लाश बन जाएँगी? क्या उन्हें खुद मालूम था कि जिस इंसान के साथ वह रह रही हैं, वह एक दिन उन्हें उसी घर में 8 फ़ीट गढ्ढा खोद के दफनाएगा? क्या उन्हें पता था कि उनकी लाश को गलाने के लिए उन पर 20 पैकेट नमक तक डाला जाएगा?

ये वो सवाल हैं, जो प्रिया और उनकी बेटी कशिश के साथ हुई बर्बरता देख कर अब कचोटने लगे हैं। दोनों माँ-बेटी के टुकड़े-टुकड़े निकले कंकाल की अब चहुँओर चर्चा है। हर कोई नए-नए कोण के साथ इस मामले को दिखा रहा है। हर दिन मामले में नए अपडेट आ रहे हैं। मगर, फिर भी कुछ ऐसी बाते हैं, जो अब भी मौन हैं। आज हमारी कोशिश उन्हीं बातों को आपके सामने जस का तस रखने की है।

प्रिया और 11 साल की कशिश की कहानी चंचल की जुबानी

पति राजीव से तो प्रिया पहले ही तलाक लेकर अलग हो गई थी और परिवार वाले भी उससे दूरी बना चुके थे। ऐसे में उसे अक्सर अपनी 2 साल की मासूम बेटी की चिंता सताती थी। लेकिन, वो अपने पाँव पर खड़ी एक ऐसी महिला थी, जिसने समाज की परवाह किए बिना अपनी व अपनी बेटी की जिम्मेदारी उठाई थी। राजीव से तलाक के बाद वो अकेले अपना जीवन जीने निकली थी। उसे क्या मालूम था कि शमशाद उसका जीवन तबाह करने के लिए फेसबुक पर अमित गुर्जर नाम से फर्जी आईडी बनाकर बैठा है।

साल 2012-13 में उसकी मुलाकात फेसबुक पर शमशाद यानी अमित गुर्जर हुई। दोनों में बातें शुरू हुईं। नजदीकियाँ बढ़ीं। एक दिन शमशाद ने प्रिया को मेरठ बुला लिया और फिर दोनों ने कथित तौर पर शादी कर ली। प्रिया यही समझती थी कि गुर्जरों के बीच रहने वाला उसका प्रेमी गुर्जर समुदाय का ही है। हालाँकि सच कुछ और था। 

आज प्रिया हम सबके बीच उस सच को बताने के लिए नहीं है। हमसे अपना दर्द साझा करने के लिए नहीं है। लेकिन उनकी कहानी बताने के लिए एक इंसान आज भी है, वो इंसान जिसने प्रिया और उसकी बिटिया का हर पल साथ दिया और उनके जाने के बाद भी उनको इंसाफ दिलाने के लिए दर-दर भटकी। 

प्रिया और कशिश

प्रिया की उस आखिर हमदर्द का नाम चंचल चौधरी है। चंचल, प्रिया की वो सहेली थी, जिससे उसने आखिरी दम तक बातें साझा की। उसे शमशाद के हर रवैये की खबर थी। उसे इस बात का शक था कि उसकी सहेली जिस व्यक्ति के साथ है, वह कभी भी कुछ भी कर सकता है लेकिन ये नहीं मालूम था एक दिन मार ही डालेगा और कशिश को भी नहीं छोड़ेगा।। चंचल वही लड़की है, जिसने समाज की सैंकड़ों उलाहनाओं को झेलते हुए अपनी सहेली प्रिया को इंसाफ दिलाया। उसकी निर्मम हत्या करने वाले हत्यारे को गिफ्तार करवाया। किंतु, दुखद ये है कि सब सबूत होने के बावजूद उसके लिए ये संघर्ष आसान नहीं था।

चंचल की हालिया तस्वीर

आप खुद सोचिए अचानक किसी एक घर में पुलिस लगातार आना-जाना शुरू कर दे। तो उस परिवार को समाज किस नजर से देखता है। फिर, चंचल तो एक 26 साल की लड़की है। उसने प्रिया के लिए आवाज तो उठा ली। मगर, उसके बदले में उसे अपने माता-पिता की चिंता, हर जगह से निराशा, प्रशासन की ढिलाई, बदसलूकियाँ… सब कुछ झेलना पड़ा। 

मीडिया में जब चंचल के संघर्ष की बात आई, तो हमने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। हमारी बात चंचल से हुई। चंचल ने ऑपइंडिया से बातचीत में कई ऐसे खुलासे किए, जिन्हें सुनकर आत्मा सिहर उठे और ये भ्रम टूट जाए कि लव जिहाद जैसा कुछ होता ही नहीं है।

प्रिया की दोस्त चंचल से ऑपइंडिया की बातचीत 

वैसे तो जब हमने चंचल से संपर्क किया, तो अन्य मीडिया संस्थानों की तरह हमारे पास भी कुछ सवालों की सूची थी। लेकिन, चंचल से बात करते हुए ये एहसास हुआ कि उनसे कुछ पूछने से बेहतर है कि उन्हें कहने दिया जाए। प्रिया का नाम सुनकर पहले वो बिलकुल शांत हुईं और फिर हर चीज को बताना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि साल 2012 में तलाक के बाद प्रिया उनके मोदीनगर वाले घर में किराएदार बनकर आई थी। लेकिन स्वभाव से वो इतनी अच्छी थी कि देखते ही देखते उनकी अच्छी दोस्त बन गई। रोजी-रोटी के लिए प्रिया पार्लर में काम किया करती थी। जब भी वह काम पर जाती तो 2 साल की बेटी कशिश उन लोगों के पास रहती। चंचल और उनका परिवार ही कशिश को संभालता। फिर, प्रिया आती तो कशिश अपनी माँ के पास जाती। सबको उस बच्ची से बहुत लगाव था। चंचल को थोड़ा ज्यादा था।

प्रिया और कशिश के साथ चंचल। ये तस्वीर तब की है, जब प्रिया मोदीनगर में चंचल के घर किराए पर रहती थी और दोनों की दोस्ती गहरी हो गई थी

चंचल के अनुसार, प्रिया अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थी। उसे अक्सर उसके भविष्य को लेकर चिंता होती थी। ऐसे में साल 2012 में एक दिन शमशाद अमित गुर्जर नाम से आईडी बनाकर उसके साथ फेसबुक पर जुड़ गया और दोनों में बातें होनी शुरू हो गईं। शमशाद ने इस तरह का झूठ का जाल रचा कि प्रिया बस उसमें फँसती गई और सुनहरे भविष्य को लेकर आश्वस्त होती गई। शमशाद ने उसकी नौकरी छुड़वाई और कहा, “अपनी दुकान लेंगे, वहाँ तुम पार्लर खोल लेना।”

चंचल कहती हैं कि प्रिया उनको हर बात बताती थी। तब भी जब शमशाद उनसे अमित बन कर मिला और तब भी जब उन्हें उसकी हकीकत मालूम चल गई। चंचल के मुताबिक, पहले कुछ समय सब ठीक था। वो उन्हें घुमाता फिराता था। उन्हें बाहर खाना खिलाने ले जाता था। लेकिन साल 2015 के आसपास शमशाद ने मंदिर में प्रिया से दिखावटी शादी कर ली और इसी झूठे रिश्ते के आधार पर वह अमित गुर्जर बनकर प्रिया के साथ रहने लगा।

हालाँकि, शादी के बाद धीरे-धीरे वो ज्यादा दिन अपनी हकीकत छिपा न सका। समय के साथ सभी राज खुलने लगे। प्रिया को डेढ़ साल में मालूम चल गया कि अमित के भेष में उसके साथ कोई शमशाद है। उसने ये बात चंचल को बताई और हर रोज होने वाली लड़ाइयों के बारे में भी उसे सब बताया। 

ये वो वक्त था, जब धक्का चंचल को भी लगा। लेकिन दोनों सहेलियाँ आखिर क्या करतीं! चंचल ने अपने स्तर पर शमशाद को समझाना शुरू किया कि वो ये सब क्यों करता है। मगर, हर बार शमशाद ने रोकर-गिड़गिड़ाकर उनसे माफी माँग ली और अपने परिवार की बुराई करके प्रिया को ये कहकर अपने साथ कर लेता, “मैं तुम्हारे लिए आगे कुछ करना चाहता हूँ। मेरे परिवार ने मुझे सिर्फ़ लूटा है।” 

सच्चाई जानने के बाद भी शमशाद के साथ क्यों? राज खुलने के बाद क्या हुआ प्रिया के साथ?

दरअसल, प्रिया के सच्चाई जानने के बाद भी उसके शमशाद के साथ रहने की वजह ये थी कि उसे समाज का डर था। उसे भय था कि एक तलाक के बाद अगर वो इस तरह फिर किसी पुरुष से अलग हुई तो लोग उसे क्या समझेंगे? इसका उसकी बेटी पर क्या असर पड़ेगा? लोग आगे उसे क्या-क्या बोलेंगे? उसे कौन स्वीकारेगा? चंचल के अनुसार, शादी के बाद शमशाद उन्हें कई जगह पर लेकर किराए पर रहा। लोगों ने प्रिया को समझाया कि ऐसे लोग किसी के नहीं होते। लेकिन, तब भी, प्रिया ये सोचती रही कि चलो शमशाद के रूप में उसकी बच्ची को पिता का नाम ही मिल जाएगा। 

इन सब जद्दोजहद के बीच काशीराम में प्रिया ने सस्ते दामों पर अपना घर भी खरीदा। वहाँ भी दोनों साथ थे। हालाँकि काशीराम में रहने तक शमशाद ने पूरी तरह से अपना असली चेहरा नहीं दिखाया था। लेकिन कट्टरपंथ उसके रवैये में नजर आने लगा था। उसने प्रिया का काम छुड़वाया और उससे ये कहता,”जो लड़कियाँ बाहर काम करने जाती हैं, वो धंधा करती हैं। हमारे में लड़कियाँ सिर्फ़ घरों में रहती हैं।” कशिश के कपड़ों और पढ़ाई पर भी वह उस पर सवाल उठाने लगा। वह प्रिया से कहता, “तुम इसे क्या पहनाती हो। इसे ढंग के कपड़े पहनाओ और इसे उर्दू पढ़ाओ।”

चंचल की मानें तो प्रिया ने उसे कई बार बताया था कि शमशाद दोनों माँ-बेटी पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाता था। उन्हें जमात में जाने को बोलता था। लेकिन प्रिया हर बार ये कहकर टाल देती, “कशिश का नाम तो मुस्लिमों वाला ही है। इसे बदलने की क्या जरूरत और मुझे तुम घर में प्यार से कुछ भी बुला लो।”

जमात में जाने के लिए और इस्लामी तौर तरीकों से रहने के लिए शमशाद बनाता था दबाव

शायद ये वाक्य बोलते हुए प्रिया को लगता होगा कि ऐसा कहकर वो उससे अपनी पहचान, अपना धर्म, अपना नाम बचा लेगी। लेकिन नहीं! जिस शमशाद ने उससे धोखा देकर शादी की और अपने बारे में सारी हकीकत छिपाई, उसकी ये बातें बर्दाश्त कर जाना ही शायद प्रिया की सबसे बड़ी भूल थी।

प्रिया जब तक काशीराम में रही, उसने वहाँ मंदिर स्थापित करके पूजा-पाठ किया। अपनी बेटी को शिक्षा के लिए मनमुताबिक स्कूल भेजा। लेकिन जैसे ही मेरठ के भूड़ भराल में शमशाद ने अपना घर लिया, प्रिया की जिंदगी बदल गई। बस, यहाँ भी जो नहीं बदला वो चंचल का साथ था। चंचल हर कदम पर प्रिया के साथ थी। 

चंचल कहती हैं कि इन लोगों ने इतना बड़ा घर लिया। लेकिन शमशाद ने उस घर में मंदिर को रखने की जगह नहीं दी। प्रिया पूजा-पाठ करती थी। धूप जलाती थी और जब भी उसका धुआँ शमशाद की आँखों में जाता तो वो प्रिया की पूजा पाठ पर बहुत झल्लाता। पर प्रिया को साईं बाबा पर अटूट विश्वास था, उसे अपने धर्म और भगवान से बहुत लगाव था। वो मार भी खाई होगी पर उसने अपना धर्म नहीं छोड़ा। जब वो काशीराम छोड़ने लगी तो उसने बेहद दुखी होकर कहा, “चंचल तू मेरे मंदिर को अपने घर ले जा, मैं इनका अनादर नहीं होने देना चाहती। ये हमारे भगवान का अपमान करेगा। मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। हमारी लड़ाई होगी।” 

चंचल बताती हैं, “मैं लॉकडाउन के कारण वो मंदिर मैं अपने घर नहीं ला पाई लेकिन वो आज भी काशीराम वाले घर में है। इस शमशाद ने जगह तक नहीं दी थी  भगवान को रखने की।” चंचल के अनुसार, शमशाद घर में कई गैर पुरुषों को लाता था, जिस पर प्रिया आपत्ति जताती थी और वह उस पर भी लड़ाई शुरू कर देता था।

प्रिया को अपने आखिरी दिनों में शमशाद पर कुछ तो शक रहा होगा। जो उससे जुड़े हर डॉक्यूमेंट मिलते ही वो तुरंत चंचल को फॉरवर्ड कर देती थी और शमशाद से लड़ाई के बाद कहती थी, “मुझे कुछ हुआ तो मेरी बेटी का ख्याल ये चंचल रख लेगी। लेकिन ये तुझे नहीं छोड़ेगी।”

आज चंचल अपनी सहेली की इन्हीं बातों को याद करते हुए भावुक होती हैं। वे चाहकर भी नहीं भुला पातीं उन पलों को, जिन्हें दो सहेलियों ने एक साथ गुजारे। वो शमशाद और प्रिया के डेढ़ साल पुराने झगड़े का जिक्र करते हुए कहती हैं, “…तब बात बहुत बिगड़ गई थी। हमने शिकायत भी करवाई थी। थाने भी गए थे। लेकिन तब वह सबको मनाकर ले आया। अब उस समय गलती मेरी थी या उसकी? पता नहीं। पर, अगर पहले संभल जाते तो आज वो हमारे बीच होती।”

चंचल मानती हैं कि अगर ऐसे समय में प्रिया के घरवाले उसके साथ होते तो भी ये सब कभी नहीं होता। क्योंकि कई मौके ऐसे भी आते थे कि प्रिया अपनी हर रोज की लड़ाई चंचल से साझा नहीं करती थी। उसे लगता था कि जो उसके जीवन की रोज की कहानी हो गई है, उससे अपनी दोस्त को क्यों परेशान करे। मगर, उसकी चुप्पी के बावजूद चंचल कई बातें समझ जाती थीं।

प्रिया की सहेली चंचल का यह कहना है, “शमशाद ने लॉकडाउन का पूरा फायदा उठाया। उसने हमारे बीच दूरियाँ पैदा करने की कोशिश की। मुझ पर गंदे इल्जाम लगाए। प्रिया को मेरे ख़िलाफ़ भड़काया। मुझसे मिलने से हमेशा रोका। फिर भी उसने मुझसे बातें करना बंद नहीं किया। उसे मुझ पर विश्वास था… एक बार उनका झगड़ा हुआ तो शमशाद ने मुझे बुलाया लेकिन मैंने कहा ‘तुम तो मुझे पसंद ही नहीं करते, मुझे गंदा कहते हो, मैं क्यो आऊँ’। फिर उसने कहा कि अभी प्रिया नाराज होकर कशिश के स्कूल चली गई है, तुम बस आ जाओ। वो मुझे खुद लेने आया। हालाँकि जब हम स्कूल पहुँचे तो वो जा चुकी थी। मैंने प्रिया को नहीं बताया कि मैं शमशाद के साथ थी। वरना उसे लगता कि मैं उसकी बात में आ गई। लेकिन प्रिया ने मुझे तभी पड़ोसी के घर से फोन करके बताया कि उसका फिर झगड़ा हो गया है। उसके अलावा एक आंटी ने भी मुझको ये सब बताया। इस झगड़े में भी शमशाद ने उसका हाथ मोड़ा था, गला दबाया था।”

28 मार्च 2020 से 30 मार्च 2020… माँ-बेटी की हत्या और चंचल को ऐसे हुआ शक!

चंचल के मुताबिक, पता नहीं ये सब प्री प्लॉनिंग के तहत हुआ या अचानक हुआ। लेकिन शमशाद का लॉकडाउन से पहले जो प्रिया से झगड़ा हुआ, उसमें भी वह शिकायत करने गई थी। लेकिन, उस टाइम वो उन दोनों से माफी माँगकर उन्हें वापस ले आया। फिर दोनों माँ-बेटी उसके साथ रहना शुरू हुए। मगर यहाँ, झगड़े बंद नहीं हुए। 14 दिन बाद ही एक समय ऐसा आया कि अचानक 28 मार्च को प्रिया का फोन बंद हो गया। चूँकि चंचल अपनी सहेली से लगातार संपर्क में थी। तो उसने उस दौरान खूब फोन मिलाए। दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। उसको लगा कि नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है।

प्रिया और चंचल की आखिरी बातइसके बाद उसका लास्ट सीन हमेशा के लिए 28 मार्च पर रुक गया।

आखिरी कॉल के बारे में बताते हुए चंचल कहती हैं कि प्रिया ने उन्हें बताया था कि शमशाद घर में बहुत लड़कों को लेकर आता है। वो यहाँ चक्कर काटते रहते हैं। उसने मना भी किया कि कोरोना फैल रहा है और पता नहीं कौन-कौन आता रहता है। उसने शमशाद को कहा भी कि घर में वो और कशिश अकेले रहते हैं। ये सब ठीक नहीं है। जिसे सुनकर शमशाद ने उससे लड़ाई भी की और कहा, “मेरा घर है। मैं चाहे किसी को भी लेकर आऊँ।” चंचल ने प्रिया से यह सब सुनकर उससे कहा कि वो इस बारे में अब शमशाद से सीधे बात करेगी। मगर, जब अगले दिन फोन मिलाया तो फोन बंद आया।

दोनों सहेलियों के बीच हुई आखिरी बात, 28 मार्च को हुई थी सबसे आखिर में 19 मिनट 9 सेकेंड की बातचीत

उसने बहुत कोशिशों के बाद शमशाद को फोन किया। शमशाद ने फोन तो उठाया पर ये कह दिया कि वो किसी को छोड़ने बाहर आया हुआ है घर जाकर बात करवा देगा। वह तब भी फोन मिलाने की कोशिशें करती रही। शाम को दोबारा उसने शमशाद को फोन किया। लेकिन इस बार शमशाद ने कहा कि वो उससे नाराज है, इसलिए कोई बात नहीं कर रही। आखिर में तंग होकर चंचल ने 29 या 30 मार्च को उनके पड़ोसियों के नंबर मिलाए, जिनके नंबर प्रिया ने ही उसे दिए थे ये कहकर कि कभी अगर कुछ हो तो इस नंबर पर बात करे।

चंचल और प्रिया

चंचल ने उनमें से एक नंबर पर फोन मिलाया। उसको पता चला कि दोनों घर पर ही नहीं है। बस इसके बाद उसका शक और गहरा गया। उसने फौरन पड़ोसियों से घर जाने को कहा और पड़ोसियों के फोन से ही उसने शमशाद से बात की। शायद शमशाद को लगा नहीं था कि चंचल के पास पड़ोसियों का नंबर होगा। 

वह पड़ोसियों को देख घबरा गया और फोन पर कहने लगा, “वो यहाँ से चली गई है, मुझे चाकू मार कर और रुपए भी ले गई है।” जिस पर चंचल ने कहा कि वो ये सब करके चली गई और तुम शाँत रहे। चंचल का तर्क सुनने के बाद वो उल्टा इल्जाम लगाने लगा, “ये जो तुम्हारी चाल है, मैं सब समझ रहा हूँ। तुम जो करती हो, मैं सबको बताऊँगा।” झूठी कहानी सुनकर अब तक चंचल समझ चुकी थी कि या तो उसकी सहेली और बेटी को कहीं बेचा जा चुका है या फिर मारा जा चुका है।

मैसेज के स्क्रीनशॉट

चंचल के अनुसार, शमशाद ने इतनी चालाकियाँ दिखाईं कि उसने प्रिया के फोन से उसे 31 मार्च को एक अजीब मैसेज किया। इसमें प्रिया की बेटी कशिश की ओर से उसने चंचल को लिखा, “दीदी हम लोग जहाँ भी हैं, सुरक्षित हैं। गलती से डैडी को चाकू लगने की वजह से हम लोग घर से निकल गए हैं। औ हाँ ज्यादा कट गया है। हम लोग पैसे लेकर आ गए हैं। कुछ ज्यादा मत करो नहीं तो हम लोग बुरी तरह से फँस जाएँगे।”

मतलब कुल मिलाकर ऐसा माहौल बनाया कि चंचल शांत बैठ जाए और प्रिया को संपर्क करने की भी कोशिश न करे। लेकिन चंचल यही कहती रही कि प्रिया उसकी वो सहेली है, जो दुनिया के आखिरी कोने में जाकर भी उसे जरूर फोन करेगी।

15 अप्रैल को चंचल पहुँची परतारपुर थाने

लंबे समय से प्रिया का कुछ पता न लगने के कारण चंचल बेचैन थी। आखिरकार 15 अप्रैल को उसने परतापुर थाने में  शिकायत करवाई। लेकिन थाने से उसे निराशा हाथ लगी। वहाँ से आरोपित को क्लीन चिट मिल गई। उसने कह दिया कि प्रिया कहीं चली गई है। बाद में ज्यादा आवाज उठाने पर पुलिस वाले चंचल के घर पर पूछताछ करने आने लगे और उसके परिवार पर मानसिक रूप से दबाव बनाने लगे। आस-पड़ोस के लोगों ने भी सवाल खड़ा करना शुरू किया कि आखिर पुलिस क्यों आती है, जिससे चंचल को काफी सवालों के जवाब देने पड़े। चंचल ने फिर भी हार नहीं मानी और वो मामले में एक्शन के लिए थानों के चक्कर काटती रही।

15 अप्रैल को चंचल की तहरीर

इन्हीं सबके बीच एक दिन उसने थाने में खड़ी प्रिया की स्कूटी भी देखी। उसने पुलिस को बड़ी हैरानी से बताया, “ये तो प्रिया की ही स्कूटी है, जिसकी मैं शिकायत कराने आई थी।” लेकिन, बावजूद इस प्रमाण के बाद इस मामले कोई कार्रवाई नहीं शुरू हुई। बल्कि पुलिस ये पूछने लगी कि अगर पड़ताल शुरू हुई तो उसे उनके साथ बिहार भी चलना पड़ेगा। क्या वो जाएगी? जिस पर चंचल ने कहा कि वो हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार है। अगर बिहार जाना हुआ तो वो जरूर जाएगी।

प्रिया को इंसाफ दिलाने के लिए चंचल की सक्रियता को देख कहीं न कहीं शमशाद डर गया था। उसने चंचल को बदनाम करने की कोशिश की। उसने उस पर ये इल्जाम भी लगा दिया कि वो जो धंधा करती है, उसकी हकीकत वो सबको बताएगा। लेकिन यहाँ भी चंचल इन सब चीजों से डरी नहीं। 

हर बेबुनियाद इल्जाम को उसने प्रिया के लिए सह लिया। उसने हर तरह की मानसिक प्रताड़ना से गुजरते हुए कई हिंदूवादी संगठनों से भी मदद माँगी। कुछ ने उसे मदद के लिए हर मुमकिन तरह का आश्वाशन दिया। कुछ उसे अपने साथ थाने तक ले गए। लेकिन अफसोस! हर जगह से हताशा और ढिलाई बदले में पाकर वो टूटती गई।

चंचल के व्हॉटसएप डीपी पर आज भी प्रिया और कशिश देखने को मिलती है, ये उनकी whatsapp dp है

आखिरकार, 2 जुलाई को कई दबावों के बाद उससे एक समझौते पत्र पर दस्तख्त करवाए गए कि मानसिक रूप से परेशान होने के कारण वो अब इस मामले में कार्रवाई नहीं चाहती। इस घटना के बाद प्रिया की सहेली के भीतर से उम्मीद खत्म हो गई थी। वह बस प्रार्थनाओं में प्रिया के लिए इंसाफ की चाह रखने लगी थी। 

फिर 12 जुलाई के दिन उनकी बात मनीष लोइया से हुई और उनके मन में इंसाफ की आस दोबारा जगी। फिर आगे जो भी हुआ, वो आज सबके सामने है। आज सारा सच सामने आने के बाद, अपनी सहेली के साथ हुई बर्बरता देखते हुए चंचल रातों में यही सोचती हैं कि आखिर जिसे प्रिया ने इतना प्यार दिया, अपना सब कुछ सौंप दिया, उसके साथ 5-6 साल रही, उसे अपने हाथों से खाना खिलाया, क्या उसके हाथ भी नहीं काँपे? वे सोचती हैं कि शायद उसने आखिरी टाइम उन्हें ही याद किया होगा और बस अपने आखिरी वक्त में अपनी बेटी की ओर देखा होगा।

हमसे बात करते हुए बहुत भावुक होकर चंचल ने मनीष को अपना आभार दिया और कहा कि आज ये सब उनकी वजह से मुमकिन हो पाया।

चंचल और मनीष लोइया

चंचल ने हमसे बातचीत में इतनी बार मनीष के प्रति आभार जताया कि हमने उनसे भी मामले को जानने को प्रयास किया।

ऑपइंडिया से हुई बातचीत में मनीष ने बताया कि वे लव जिहाद पर साल 2007 से काम कर रहे हैं और धर्म जागरण समन्वय से जुड़े हुए हैं। इससे पहले उनका संबंध विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से भी था। वे कहते हैं कि उनके संज्ञान में जब ये मामला आया तो उन्होंने चंचल को 12 जुलाई को संपर्क किया। 

हालाँकि पहले मिले झूठे आश्वसनों से लड़की बहुत नाराज थी और उसने बात करने से भी मना किया। लेकिन उन्होंने उसे बहन बोलकर विश्वास दिलाया वे इस मामले में उनकी हर प्रकार से मदद करेंगे। 

इसके बाद उसने अपनी सारी बातें बताईं और कहा कि कहाँ-कहाँ से उसे मदद के नाम पर ठगा गया। चंचल से बातचीत के मात्र 2 दिन बाद मनीष लोइया ने अपने अनुभवों के आधार पर इस मामले में प्रशासन से संपर्क किया और 14 जुलाई को मामला फिर दर्ज हुआ। एसएसपी ने बताया कि अब ये मामला सीओ भूपेंद्र देखेंगे और वही लीड रोल में होंगे। 

इसके बाद मनीष लगातार सीओ से संपर्क में रहे। उन्होंने हर चीज सर्विलांस पर लगाने की अपील की। साथ ही ये पता लगाने को कहा कि प्रिया का फोन कहाँ खुला था और कहाँ आखिरी बार बंद हुआ। लगातार संगठनों का दबाव देखते हुए प्रशासन को सख्त होना पड़ा। नतीजतन पुलिस ने कुछ दिन बाद शमशाद को पकड़ा पर पूछताछ करके उसे छोड़ दिया गया।

जब संगठन ने दोबारा पुलिस से अपडेट माँगा तो बताया गया कि आगे चंचल के बयान पर कार्रवाई होगी। मनीष ने सब सबूतों के साथ चंचल को तैयार किया और उसे लेकर गए। जब ऐसा लगने लगा कि किसी भी रूप में ये केस अब दबाया नहीं जा सकेगा, तब अधिकारियों ने शमशाद को बुलाकर सख्ती से पूछताछ की। इस बार उसने अपनी सारी सच्चाई उगल दी।

मनीष से जब इस संबंध में पूछा गया कि साक्ष्यों के आधार पर उनका इस मामले पर क्या कहना है, तो वे कहते हैं कि रिकॉर्डिंग आदि सुनकर ऐसा साफ लग रहा था कि वो मस्जिद जाने, नमाज पढ़ने, कुरान पढ़ने और इस्लामिक रीति रिवाज से ही रहने का दवाब बनाया हो।

मनीष कहते हैं कि उन्होंने ये भी सुना है कि शमशाद को जब शारीरिक हवस मिटानी होती थी, तभी वो नजदीक आता था। बाकी वो हमेशा ऐसी बातों पर लड़ता था। वह कहते हैं कि एक लड़की जिसने अपनी स्वतंत्रता के नाम पर अपने पति को तलाक दे दिया, उसे शमशाद ने अपने जाल में फँसाया। खुद को गुर्जर समुदाय का बताकर उससे शादी की। उसके साथ मंदिर गया। उससे करवा चौथ का व्रत रखवाया। लेकिन जब हकीकत खुली तो कहने लगा कि अब मुस्लिम रीति रिवाज से रहना होगा। वे कहते हैं कि उस दरिंदे में कोई दया नहीं थी। डैडी बोलने वाली मासूम को उसने मार डाला। मुमकिन है कि उसके साथ भी इसने जरूर कुछ किया हो।

भेद खुलने से पहले शमशाद जाता था मंदिर और रखवाता था करवा चौथ का व्रत

मनीष के अनुसार ये पूर्ण रूप से लव जिहाद का मामला है, जिसे एक सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया। अगर वाकई जिस समुदाय का नाम छिपाकर शमशाद ने पूरा खेल रचा, वो समुदाय इतना अच्छा था तो अमित गुर्जर बनने की क्या जरूर थी। क्यों असली नाम छिपाया गया और बदले में एक ऐसे समुदाय का नाम इस्तेमाल किया गया, जिसका इलाके में वर्चस्व था।

अपनी बातों के निष्कर्ष में वे कहते हैं,

“मेरा यही प्रयास है कि ऐसे ज्यादा से ज्यादा मामले उजागर हों ताकि लड़कियाँ इस प्रकार की मानसिकता वालों से सतर्क रहें। अगर उसे ऐसा लगे कि वो अकेली हो जाएगी और कहाँ जाएगी… तो भी वो इस बात को समझ ले कि उसका जीवन हमेशा खतरे में है। कोई लड़की से प्रेम के लिए अपनी पहचान नहीं छिपाता बल्कि अपने मजहब के लिए पहचान छिपाता है। बाद में जब लड़की की इज्जत से खिलवाड़ हो जाता है तो लड़की ये समझती है कि आखिर वो जाए कहाँ? आज हम महिला आजादी की बात करतें हैं और ये लोग बुर्का पहनने का दबाव बनाते हैं। हम यही चाहते हैं कि इन दोनों माँ-बेटी को इंसाफ मिल जाए और शमशाद को फाँसी हो।”

माँ-बेटी हत्याकांड मामले में अब तक का अपडेट

शमशाद की गिरफ्तारी और जाँच में सामने आए तथ्य: इस मामले में अभी तक पुलिस ने शमशाद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को उसके साले और उसकी बीवी समेत अन्य लोगों की तलाश है। आरोप है कि शमशाद ने जब घटना को अंजाम दिया तो 28 मार्च को उसका साला साथ में था। उसके साथ ही मिलकर शमशाद ने बच्ची और उसकी माँ की हत्या की। इसके बाद 29 मार्च की सुबह शमशाद ने ड्राइंगरूम में करीब 8 फीट गहरा गड्ढा खोदा और दोनों लाशों को उसमें डाल दिया। दोनों लाशों पर ऊपर से दुकान से लाए 20 नमक के पैकेट भी खोलकर डाल दिए। जिससे लाश गल जाए। ऊपर से फर्श पर प्लास्टर कर दिया जिससे किसी को शक न हो।

Love Jihad Case, Why Police Have Not Action In Double Murder Case ...

क्या हुआ उस रात: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अपने आखिरी समय में प्रिया ने खुद को बचाने की बहुत कोशिश की। उसने ना सिर्फ शमशाद को नाखूनों से नोचा था बल्कि लड़ने के लिए किचन से चाकू का इस्तेमाल भी किया। इस बीच चाकू से शमशाद की कलाई कट गई और उसने गुस्से में आकर प्रिया का गला दबा दिया, जिससे वह मौके पर ही मर गई। इसके बाद शमशाद ने बेडरूम में मासूम बच्ची कशिश की भी तकिया से गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात 28 मार्च की रात करीब 12 बजे हुई।

कैसे स्वीकारा शमशाद ने अपना गुनाह: जब पुलिस की पड़ताल शुरू हुई तो पूछताछ में पहले तो शमशाद ने अपना मुँह नहीं खोला लेकिन बीते मंगलवार देर रात शमशाद ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उसे कब तक थाने में रहना होगा। जिस पर इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि माँ बेटी की बरामदगी के बाद ही तू थाने से जाएगा। तब शमशाद ने पुलिस को बताया कि उसने माँ बेटी की हत्या कर दी है और दोनों के शव मकान के बेडरूम में ही गड्ढा खोदकर दबाए हैं।

शुरुआत में तो पुलिस को यकीन नहीं हुआ। लेकिन बार-बार बताने पर अगली सुबह करीब चार बजे पुलिस शमशाद के घर पहुँची। जहाँ गड्ढा खोदकर कंकाल टुकड़ों में बरामद हुए। पुलिस की इस कार्रवाई की एक वीडियो भी सामने आई है। जिसमें पुलिस जगह को खोदकर उनके कंकाल निकाल रही है।

फरार होने के बाद हुई कैसे गिरफ्तारी: रिपोर्ट्स बताती हैं कि आरोपित शमशाद बुधवाार को पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। पर बृहस्पतिवार को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद आरोपी शमशाद को गिरफ्तार कर लिया गया। शमशाद के दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका उपचार हुआ।।

किस बात पर बढ़ा था विवाद: अब, धीरे-धीरे इस मामले में कई नए कोण निकल कर आए हैं। जैसे शमशाद पहले से शादीशुदा था। उसकी पत्नी का नाम अफ्साना और तीन बच्चे थे, जो काफी समय से उसके बिहार न लौटने के कारण अभी कुछ समय पहले मेरठ आए थे और शमशाद की भूड़ भराल वाली जमीन पर अपना हक चाहते थे। जबकि प्रिया वो जमीन अपने सुरक्षित भविष्य के लिए अपने नाम करवाना चाहती थी।

इसी बात पर उनकी कहा सुनी होती थी और उस रात भी यही कारण था। इस जमीन की रजिस्ट्री पर 3 लाख रुपए के लेन-देन पर विवाद हुआ और रात के 10 बजे दोनों में लड़ाई बढ़ गई। इसके बाद सब्जी काटती प्रिया के साथ शमशाद ने छीनाझपटी की और हाथ कटने के बाद उसका गल घोंट दिया। जब वो मर गई तो उसे कई जगह उसने चाकू भी मारे। बाद में शव को बाथरूम में रखा। फिर डॉक्टर के यहाँ से अपने कटे हाथ पर टाँके लगवा कर आया।

शमशाद को बचाने वाला नकुल शर्मा भी गिरफ्तार: इसके अलावा शमशाद के साथ नकुल नाम का युवक भी गिरफ्तार हुआ है। नकुल की एक वीडियो वायरल होने के कारण उसे पकड़ा गया है। इस ऑडियो में वो शमशाद को छुड़ाने के लिए 1 लाख रुपए देने की बात करता सुनाई पड़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि नकुल ही इस पूरे कृत्य में पुलिस को गुमराह कर रहा था और उसी की मदद से शमशाद सभी साक्ष्यों को मिटाने में सफल हो पा रहा था। अब पुलिस ने उसे अपनी जाँच में गिरफ्तार किया है। 

चंचल को मारने की बनी प्लॉनिंग: दूसरी ओर ये भी सामने आ चुका है कि चंचल की सक्रियता देखकर शमशाद ने दो युवकों के साथ मिलकर उसे मारने की प्लानिंग बनाई थी। पुलिस ने चंचल की शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय उससे अश्लील बातें की। प्रिया को ढूँढने के बजाय उस पर ही इल्जाम लगा दिए गए। 

ढील दिखाने और उपयुक्त सुनवाई न करने पर अधिकारियों के ख़िलाफ कार्रवाई: कहा जा रहा है कि इस मामले में उक्त थाने के अधिकारियों जैसे एसएचओ, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर सबके ख़िलाफ़ जाँच बैठाई गई है। वहीं इंस्पेक्टर वीर सिंह को शुक्रवार को निलंबित किया गया है। एसएसपी ने यह बात स्पष्ट कही है कि जो-जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई होगी। वहीं शमशाद पर भविष्य में  NSA के तहत कार्रवाई होने की भी सूचना है।

बता दें कि जिस दरोगा को सस्पेंड किया गया है, उस पर यह आरोप है कि उसने चंचल की तहरीर पर कार्रवाई करने की जगह उसे रात के 12-12 बजे भी फोन किया और जब उसने मामले में एक्शन की बात की तो उससे अलग बातें शुरू कर दीं। वीर सिंह की ऑडियो भी वायरल हुई है। 

CM की कुर्सी के लिए अयोध्या को ठुकराया, अब राम मंदिर पर लहरिया लूट रहे उद्धव ठाकरे

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को होना है। एक तरफ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और कॉन्ग्रेसी कठपुतली साकेत गोखले जैसे लोग हैं जो इसमें अड़ंगा डालने के लिए कभी मुहुर्त पर सवाल उठा रहे तो कभी अदालत का दरवाजा खटखटा रहे। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे जैसे भी हैं जो इस आयोजन में किसी न किसी तरह अपनी हिस्सेदारी जता हिंदू भावनाओं पर सवार हो श्रेय लूटने की कोशिश में हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि उनकी यात्रा ने राम मंदिर की समस्या का हल निकाला।

उन्होंने कहा कि जिस साल वे अयोध्या गए उसके अगले ही साल नवंबर महीने में यह समस्या हल हो गई। इसके अलावा वह मुख्यमंत्री भी बन गए। उन्होंने कहा कि यह मेरी श्रद्धा और विश्वास है। इसे भले कोई अंधी श्रद्धा कह सकता है, लेकिन यही मेरी आस्था है और रहेगी।

उद्धव ने कहा, “फिलहाल सभी कोरोना से जूझ रहे हैं, मैं ठीक हूँ और मैं अयोध्या ज़रूर जाऊँगा। भले आज मैं मुख्यमंत्री हूँ लेकिन जब मुख्यमंत्री नहीं था तब भी मुझे वहॉं पूरा मान-सम्मान मिला। शिवसेना प्रमुख और बाला साहेब का बेटा होने की हैसियत से।”

राम मंदिर आंदोलन से शिवसेना का नाता रहा है। दिवंगत बाला साहेब ठाकरे इसके लिए अपनी पूरी जिंदगी लगे रहे। लेकिन, उनकी विरासत को उद्धव ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए खुद अपने ही ​हाथों से तिलांजलि दी थी।
बात ज्यादा पुरानी नहीं है। बीते साल 24 नवंबर को उद्धव ठाकरे को अयोध्या जाना था। महीनों पहले उन्होंने इसका बकायदा ऐलान किया था। लेकिन ऐन वक्त पर यह दौरा रद्द कर दिया गया था।

औपचारिक तौर पर इसकी वजह सुरक्षा कारण बताया गया था, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि ऐसा राजनीतिक वजहों से किया गया था।

असल में उस समय महाराष्ट्र में उद्धव भाजपा से नाता तोड़कर कॉन्ग्रेस और शिवसेना की मदद से सरकार बनाने की जुगत में लगे थे। उसके बाद से उद्धव के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार ने जिस तरह हिंदुओं से जुड़े मसलों पर अपना स्टैंड दिखाया है उससे जाहिर है कि यह दौर रद्द करने की वजह राजनैतिक मजबूरियॉं भी थी।

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब जब अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनने की बेला आ पहुॅंची है तो वे इसमें अपनी हिस्सेदारी बताने पर लौट आए हैं।

सामना को दिए इंटरव्यू में उद्धव ने महाराष्ट्र और राजस्थान के राजनीतिक हालात पर भी चर्चा की। उद्धव ठाकरे ने कहा जिस किसी को मेरी सरकार गिरानी है, वह गिरा सकता है। मैं भी देख रहा हूँ, उन्हें इंतज़ार किसका है? सरकार भले तीन पहिए की (ऑटो रिक्शा) है, इसमें पीछे दो लोग बैठे हैं। लेकिन यह ग़रीबों की गाड़ी है और इसका स्टेयरिंग मेरे हाथ में है।

ऑपरेशन लोटस के महाराष्ट्र में सफल या असफल होने के सवाल पर उद्धव ने कहा, “मैं भविष्यवाणी कैसे कर सकता हूँ? जिसे करना है वह करके देखे, जोड़-तोड़ करके देखे। राजनीतिक दलों में ऐसा क्या नहीं मिलता है जो नेताओं को दूसरे दलों में जाने की ज़रूरत पड़ती है।” इस तरह के तमाम उदाहरण हैं, ऐसे ही तोड़-फोड़ की राजनीति होती है। ऐसा कौन सा विपक्षी नेता है जो दूसरे दल में जाकर शीर्ष पद पर पहुँचता है या मुख्यमंत्री बनता है। सभी ने केवल ‘इस्तेमाल करके फेंक दो नीति अपनाई है।’

केरल सोना तस्करी का आतंकी कनेक्शन? रमीज़ से पूछताछ में हो सकते हैं कई खुलासे, बार-बार जाता था विदेश

केरल में खाड़ी देशों से सोना की तस्करी किए जाने के मामले में यूँ तो सबकी नज़र आरोपित स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर पर है लेकिन NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान रहा है और उससे पूछताछ में कई राज़ खुलने की सम्भावना है। ये मामला डिप्लोमेटिक बैगेज में सोना तस्करी का है। मल्ल्पुरम के रमीज़ केटी से पूछताछ में पता चलेगा कि इसका आतंकियों और आतंकी संगठनों से क्या सम्बन्ध है।

पिछले सप्ताह NIA कोर्ट में इस सम्बन्ध में रिपोर्ट पेश की गई है और उसमें भी इस ओर इशारा किया गया है। संदीप नायर ने भी रमीज़ की गैर-क़ानूनी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। ये ऐसी गतिविधियाँ हैं, जिसका सीधा सम्बन्ध देश की सुरक्षा व्यवस्था से हो सकता है, इसीलिए ये मामला अब संवेदनशील हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस एंगल से जाँच की जा रही है। जून 21 को फाइल की गई रिपोर्ट में NIA ने रमीज़ को इस मामले का किंगपिन बताया है।

रमीज़ ने संदीप से कहा था कि लॉकडाउन के समय ज्यादा से ज्यादा सोना तस्करी की जाए क्योंकि उसका मानना था कि इस अवधि में सुरक्षा-व्यवस्था भी उतनी चुस्त नहीं होगी और देश की वित्तीय स्थिति भी कमजोर हो रही होगी। रमीज़ हमेशा अपने साथियों के साथ चलता है और देश-विदेश में कई लोगों से उसका सम्बन्ध हैं। एक वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी का कहना है कि बार-बार विदेश यात्रा के कारण रमीज़ पहले से ही राडार पर था।

कस्टम एजेंसियों के अलावा कई विभाग ऐसे होते हैं, जो बार-बार विदेश यात्रा करने वालों के डिटेल्स मेंटेन करते हैं। सामान्यतः रमीज़ 2 महीने के लिए दुबई जाया करता था और फिर कुछ दिनों के लिए केरल वापस लौटता था। वो विजिटिंग वीजा लेकर दुबई में रुकता था। वो बिजनेस का बहाना बना कर वहाँ जाता था लेकिन जाँच में पता चला है कि वहाँ न तो उसका कोई बिजनेस है और न ही वो वहाँ कोई नौकरी करता है।

रमीज़ काफी पहले से ही सोना तस्करी में लिप्त रहा है। जब वो 20 साल का था, तभी उस पर कार्गो के जरिए सोना तस्करी के आरोप लगे थे। यूएई में भी उसकी गतिविधियों की जाँच हो रही है। वो अकेला ऐसा व्यक्ति था, जिसे सोना तस्करी के इस प्रकरण में अरब देशों से लेकर केरल तक इसमें लिप्त हर एक व्यक्ति के बारे में जानकारी थी। अगर सोना-तस्करी का फण्ड राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में जा रहा था तो रमीज़ इसकी अहम कड़ी था।

NIA जल्द ही ट्रायल कोर्ट में अर्जी देकर रमीज़ को कस्टडी में लेने की माँग करेगा। वो फ़िलहाल कस्टम कस्टडी में है, जो मंगलवार (जुलाई 28, 2020) को खत्म हो जाएगा। वालायार में हिरण का शिकार करने के मामले में फॉरेस्ट विभाग भी उसे कस्टडी में लेने का प्रयास कर रहा है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी उसे कस्टडी में लेना चाहता है। अब देखना है कि इस मामले के तार कहाँ-कहाँ जुड़ते हैं।

इधर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सनसनीखेज सोने की तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश के पास से 1 करोड़ रुपए नकद और लगभग 1 किलो सोना बरामद किया है। NIA ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में फेडरल बैंक में स्वप्ना सुरेश के बैंक लॉकर में लगभग 36.5 लाख रुपए पाए गए। एजेंसी ने यह भी कहा कि स्वप्ना से संबंधित एसबीआई लॉकर में लगभग 64 लाख रुपए नकद और 982.5 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग से सोना और पैसा जब्त करने के लिए कहा गया है। 

लालू यादव के लिए RIMS में ‘स्पेशल 18 कमरे’, जमीन पर सो रहे गरीब मरीज: मरांडी ने उठाया सवाल

राँची में यूँ तो लालू यादव कहने के लिए बिरसा मुंडा कारागार में कैद हैं लेकिन पिछले कई महीनों से बीमारी के कारण वो RIMS में ही डेरा डाले हुए हैं। झारखण्ड में जब हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव जीता था तो उन्होंने RIMS जाकर लालू यादव का आशीर्वाद लिया था। ऐसे में RIMS में लालू यादव की खातिरदारी के लिए झारखण्ड सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं, ऐसा विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है।

बताया गया है कि RIMS में पहले 100 बेड्स का कोविड वार्ड बनाया गया था। चूँकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वो जैसे ही 135 तक पहुँची, RIMS ने अपने मेडिसिन वार्ड को भी कोविड केयर में बदल दिया। इस तरह गंभीर कोरोना मरीजों के लिए 172 बेड्स रखे गए हैं। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि लालू यादव के वार्ड में एक भी मरीज नहीं है। इस पर राज्य के विपक्षी नेता खफा हैं।

यहाँ तक कि पेइंग वार्ड में भी मरीज है लेकिन लालू यादव का वार्ड खाली है। झारखण्ड के पूर्व-मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर इस सम्बन्ध में सवाल खड़ा किया है। मरांडी ने कहा कि जहाँ एक तरफ मरीजों को RIMS में बेड्स नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लालू यादव की सुरक्षा का बहाना बना कर 18 कमरों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने पूछा कि किसकी शह पर ऐसा किया जा रहा है?

उन्होंने पूछा कि 18 कमरों को बेवजह क्यों बंद रखा गया है? झारखण्ड में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस राज्य में कोरोना महामारी का संक्रमण इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा हो, वहाँ इस तरह की चीजें सही नहीं हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अगर एक कमरे में 2 मरीज भी होते तो इन कमरों में लगभग 40 मरीजों का इलाज किया जा सकता है लेकिन लालू यादव पूरी जगह खाली रखी गई है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार में कुछ लोग लालू यादव की सुरक्षा के नाम पर ये मनमानी कर रहे हैं। हालाँकि, बाबूलाल ने ये भी अंदेशा जताया कि ये सब कुछ लालू यादव को बिना बताए किया गया हो और हो सकता है कि उन्हें इसका पता चले तो वो इसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ध्यान में भी ये बात नहीं है तो उन्हें संज्ञान लेते हुए तुरंत सभी कमरों को खाली कराना चाहिए।

बता दें कि RIMS में भर्ती बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का कोरोना टेस्ट भी किया गया है, जिसके रिजल्ट्स रविवार (जुलाई 26, 2020) को आने की सम्भावना है। कोरोना वायरस संक्रमण के लिए उनका नमूना लेकर जाँच के लिए भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि लालू यादव में कोरोना के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं लेकिन एहतियात के रूप में उनका कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।

राम मंदिर भूमि पूजन करेंगे PM मोदी… लेकिन कराने वाले शख्स होंगे BHU के ये प्रोफेसर

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन तय हुआ है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल होंगे। राम मंदिर शिलान्यास के पूजन की ज़िम्मेदारी उत्तर प्रदेश, कुशीनगर के रहने वाले प्राध्यापक विनय कुमार पाण्डेय को सौंपी गई है। इसमें दो अन्य पंडित भी उनका सहयोग करने वाले हैं। रामचंद्र पाण्डेय और रामनारायण द्विवेदी उनके साथ मिल कर तैयारी कर रहे हैं। 

दैनिक जागरण से बातचीत में विनय कुमार पाण्डेय ने इस बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि शिलान्यास संबंधी पूजा का कार्य 3 घंटे लगातार चलने वाला है। लेकिन उन्होंने इसके मुहूर्त के बारे में कुछ नहीं कहा है। विनय मूल रूप से कुशीनगर के विशुनपूरा गाँव के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि जब से लोगों को पता चला है कि उन्हें इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी मिली है, तब से उनका घर-परिवार बहुत खुश है। 

प्रोफेसर विनय का इस विषय पर मानना है कि राम मंदिर का राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व है। श्रीराम पूरी सनातन संस्कृति के आराध्य हैं और उनकी जन्मभूमि सनातन संस्कृति की धरोहर है। प्रोफेसर विनय का मानना है कि भगवान श्रीराम की कृपा से प्रधानमंत्री मोदी को यह सौभाग्य मिला है। 

प्रोफेसर विनय की शुरुआती पढ़ाई गाँव के सरकारी विद्यालय से हुई थी। इसके बाद उन्होंने कठकुइया क्षेत्र स्थित सरस्वती शिशु मंदिर और गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यालय से आगे की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। फ़िलहाल वह विश्विद्यालय के अंतर्गत ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। साथ ही काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री का पद भी देख रहे हैं। 

इसके अलावा ज्योतिष, वास्तु एवं कर्मकाण्ड पर उनके 14 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और 40 राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें तीनों भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत) की लगभग एक सामान पकड़ है। वह पहले भी प्रधानमंत्री मोदी के महत्वपूर्ण अनुष्ठान कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं।    

ख़बर यह भी है कि राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट का आधिकारिक खाता भी खुलवाया जाएगा। पंजाब नेशनल बैंक में खुलवाए जा रहे इस खाते में सिर्फ विदेशी भक्त ही दान की राशि जमा कर पाएँगे। कुछ दिन पहले हुई ट्रस्ट की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि पीएनबी में ट्रस्ट का खाता खोला जाएगा। इसके पहले तक ट्रस्ट का खाता स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में ही था।  

एसबीआई के खाते में दान करने वालों को कई तरह के विकल्प दिए गए थे। ई-बैंकिंग के तमाम माध्यमों के ज़रिए दान किया जा सकता है। एसबीआई में इसके कुल 2 खाते मौजूद हैं। पिछले महीने इन्हें भी राम जन्मभूमि ट्रस्ट के खाते से जोड़ दिया गया था। सभी को मिला कर अभी तक इन खातों में कुल 12 करोड़ रुपए की राशि जमा हो चुकी है।

जिस दिन राम मंदिर भूमि पूजन, उसी दिन J&K में बड़े हमले की फिराक में आतंकी, ISIS बना रहा दबाव

जहाँ एक तरफ 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन होना है, वहीं उसी दिन अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की बरसी भी है। इस दिन इस ऐतिहासिक निर्णय के 1 वर्ष पूरे हो जाएँगे। जम्मू कश्मीर में आतंकी इस दौरान किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसके लिए जम्मू कश्मीर में प्रशिक्षित आतंकियों का एक समूह साजिश रच रहा है। राज्य में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।

बता दें कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा को भी रद्द कर दिया गया है। इसके पीछे कोरोना संक्रमण एक मुख्य वजह तो थी ही, साथ ही आतंकियों के खतरों को देखते हुए भी सरकार ने ये फैसला किया। ‘दैनिक जागरण’ ने केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों पर पाँच अगस्त को कुछ बड़ा करने के लिए दवाब बनाया जा रहा है। इससे सुरक्षा बलों के कान खड़े हो गए हैं।

इस संबंध में स्पष्ट खुफिया इनपुट मिले हैं। खुफिया सूचनाओं में कहा गया है कि फिलहाल आतंकियों की कमर टूटी हुई है, जिसके कारण वो किसी भी हमले को अंजाम देने में सक्षम नहीं हैं। लेकिन, ISIS की ओर से उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि 5 अगस्त को वो कुछ बड़ा करें। इसके लिए वो जम्मू कश्मीर में नेताओं या तैनात सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।

बता दें कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था इतनी चुस्त-दुरुस्त थी कि आतंकियों के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए थे। सुरक्षा बलों ने उस समय से लेकर अब तक 130 से भी अधिक आतंकियों को मार गिराया है। खुफिया सूचना के आधार पर कई आतंकी हमलों को विफल कर दिया गया है। इससे आतंकी बौखलाए हुए हैं। जम्मू कश्मीर में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

बता दें कि घाटी में अब 150-200 आतंकी ही सक्रिय हैं, ऐसा सेना की ओर से बताया गया है। लेकिन, ये आतंकी ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि सेना ने पाकिस्तानी आकाओं से इनके संपर्क को काटने में सफलता पाई है। नियंत्रण रेखा के पार से उन्हें हथियार मुहैया कराए जाते थे, जो अब संभव नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा बल मुस्तैद हैं, इसीलिए ये आतंकी हथियारों की कमी से जूझ रहे हैं।

बता दें कि इस बार 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भव्य भूमिपूजन भी होना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रहेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर भूमिपूजन की तैयारियों की समीक्षा करने शनिवार (जुलाई 25, 2020) को अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में हनुमान जी के दर्शन किए। इस दौरान सीएम योगी ने राम मंदिर के नक़्शे को भी देखा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लोगों के साथ बैठक कर मंदिर-निर्माण की तैयारियों का जायजा लिया। कारसेवकपुरम में उन्होंने साधु-संतों और पुजारियों के साथ बैठक की। ‘अमर उजाला’ की ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद ये 20वाँ मौक़ा था जब योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में भी 85 सीढियाँ चढ़ने के बाद आरती व पूजा-अर्चना की।

ट्वीट कर घिरे राहुल गाँधी: CM योगी ने याददाश्त को लेकर कसा तंज तो विजय रुपाणी ने कहा- ‘आईडिया चुराने वाला’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी कोरोना संकट की शुरुआत से ही ट्विटर पर ज्यादा एक्टिव नजर आते है। इधर कई महीनों से राहुल गाँधी भाजपा पर ऊँगली उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन हर बार उल्टा वही घिर जाते हैं। इस बार भी वही हुआ। शनिवार (25 जुलाई, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के एक ट्वीट पर बीजेपी ने उनपर निशाना साधा है।

गुजरात के सीएम और बीजेपी नेता विजय रूपाणी ने राहुल गाँधी के ट्वीट पर उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राहुल गाँधी हिमाचल प्रदेश के जिस ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोजेक्ट’ का आइडिया खुद का बता रहे हैं, वो गुजरात सरकार की पहल थी। रुपाणी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके राहुल पर निशाना साधा है।

दरअसल, वायनाड से एमपी राहुल गाँधी ने हिमाचल प्रदेश में चल रहे ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्लान’ को लेकर आयोजित सर्वे की सराहना एक ट्वीट के जरिए की थी। जिसमें उन्होंने इस योजना का क्रेडिट खुद को देते हुए लिखा था कि, इस योजना का सुझाव उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार को कुछ समय पहले दिया था। और कहा, इसे लागू करने के लिए मानसिकता को पूरी तरह बदलना जरूरी है।

वहीं राहुल गाँधी को सच्चाई का आइना दिखाते हुए गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “राहुल जी गुजरात की योजना को आपने कॉपी कर लिया और उसे अपना आइडिया बता रहे हैं, यह आपको शोभा नहीं देता।”

ट्वीट के जरिए रूपानी ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा, “मैं यह आशा नहीं करता कि आपको किसी भी चीज की जानकारी है, लेकिन जो आपकी स्क्रिप्ट लिखते हैं उन्हें तो पता होना चाहिए! आपके लिए ‘एक हार, एक बदलाव’ की नीति कैसी रहेगी?”

सीएम रूपाणी ने अपने ट्वीट के साथ राज्य की पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल के द्वारा किए गए ट्वीट के स्क्रीनशॉट को भी साझा किया जिसमें उन्होंने ‘वन विलेज, वन प्रोडक्ट’ की जानकारी साल 2016 में दी थी।

आनंदीबेन पटेल के ट्वीट में यह साफ दिख रहा है कि उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ को इम्प्लीमेंट करते हुए पायलट प्रोजेक्ट की तरह इसको प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की बात की थी।

सिर्फ गुजरात सीएम ही नहीं उत्तरप्रदेश के सीएम ने भी राहुल गाँधी पर निशाना साधा और उनकी याददाश्त को कमजोर बताया है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शायद उनकी याददाश्त कमजोर हो गई है। थोड़ा जोर डालेंगे तो याद आ जाए। बीजेपी के 2017 विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में हर जिले के स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। आज यह योजना छोटे उद्योगों और स्थानीय कामगारों के लिए वरदान साबित हो रही है।

सेना और RSS पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले JNU स्कॉलर साजिद बिन सईद के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

अपने ट्वीट के माध्यम से नफरत फैलाने वाले जेएनयू के स्कॉलर साजिद बिन सईद पर दिल्ली पुलिस ने शिकंजा कसा है। सईद ने भारतीय सेना और आरएसएस पर ‘कश्मीरियों के विनाशकारी नरसंहार’ का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस ने सईद के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। जल्द ही दिल्ली पुलिस सईद से पूछताछ शुरू कर सकती है।

सईद के खिलाफ आईपीसू की धारा 504, और 153 के तहत FIR दर्ज किया गया है।

कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष साजिद बिन सईद ने ट्विटर पर अपने पोस्ट में कहा, “भारतीय सेना कश्मीरियों के नरसंहार को अंजाम देती है जो आरएसएस द्वारा तैयार किया जाता है। भाजपा सरकार को अपने क्षेत्रीय लालच को रोकना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र द्वारा गारंटीकृत स्व-निर्णय के लिए कश्मीरियों के अधिकार को स्वीकार करने के लिए तैयार होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का सही समय आ गया है।”

टाइम्स नाउ के निकुंज गर्ग के अनुसार, सोशल मीडिया समाज में किसी भी तरह की परेशानी का सबसे बड़ा स्रोत है। बोलने की आज़ादी के नाम पर विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्र भारतीय सेना और सरकारी संस्थानों की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सैयद ने सेना और भाजपा सरकार के खिलाफ जहर उगला है। 12 जुलाई 2012 के अपने ट्वीट में सईद ने केंद्र पर कश्मीर में जातीय सफाई की साजिश रचने का आरोप लगाया था।

शरजील इमाम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने जेएनयू पीएचडी स्कॉलर शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया है। बता दें कि पिछले साल दिसंबर में जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुई हिंसा और इस फरवरी के दिल्ली दंगों में आरोपित है, हाल ही में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

शरजील इमाम पर दिल्ली, असम और उत्तर प्रदेश सहित पाँच राज्यों द्वारा राजद्रोह, दंगे और सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने के लिए मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शरजील ने पिछले साल दिसंबर में जामिया परिसर के बाहर एक भड़काऊ भाषण दिया था।