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‘वामपंथी सिर्फ झूठ बोलते हैं, अगर आजाद दुनिया वामपंथी चीन को नहीं बदलती तो चीन हमें बदल कर रख देगा’

वैश्विक स्तर पर जारी चीन का विरोध धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। दुनिया के तमाम देशों का रवैया चीन के लिए बेहद आलोचनात्मक है। इस कड़ी में अमेरिका की दावेदारी कहीं ज़्यादा रही है। अमेरिका के विदेश मंत्री माईक पॉम्पियो ने गुरूवार के दिन कहा ह्यूस्टन स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास जासूसी का अड्डा बन चुका है। हाल ही में अमेरिका ने इस वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था।  

पॉम्पियो ने इस बारे में कई अहम बातें कही, उनके मुताबिक़ चीन के इस काउंसलेट में कई गैर कानूनी गतिविधियाँ चल रही थीं। साथ ही तमाम अमेरिकी कंपनी के व्यापार सम्बन्धी दस्तावेज़ भी चुराए जा रहे थे।

 “अंततः हमने यह फैसला लिया है कि इस सप्ताह में चीन का यह वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया जाएगा। यहाँ जासूसी और अमेरिकी बौद्धिक विषय वस्तु (intellectual property) की चोरी के अलावा कुछ और नहीं होता है।”

इसके बाद पॉम्पियो ने चीन की वामपंथी सरकार के तौर तरीकों पर भी कई उल्लेखनीय बातें कही। उन्होंने कहा दुनिया के हर बड़े देश को चीन का सामना करने के लिए आगे आना पड़ेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा ही ऐसी है जिसके तहत वह दुनिया के नेतृत्व का सपना देखते हैं। इस सोच का आधार चीनी वामपंथ है। 

चीन के नागरिकों की स्थिति पर बोलते हुए पॉम्पियो ने कहा, “वामपंथी झूठे होते हैं। वह सिर्फ झूठ बोलते हैं लेकिन सबसे बड़ा झूठ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपने 140 करोड़ लोगों के लिए बोलती है जो हमेशा निगरानी में रहते हैं। उन्हें कुछ भी नहीं बोलने के लिए डराया और धमकाया जाता है। चीन की सरकार अपने देश के भीतर स्वभाव में पूरी तरह एथोरिटेटिव हो चुकी है और दुश्मनी के लिहाज़ से उसका रवैया लगभग सभी के लिए बेहद आक्रामक है।”  

पॉम्पियो ने आगे कहा “अगर आज़ाद दुनिया वामपंथी चीन को नहीं बदलती तो वामपंथी चीन हमें बदल कर रख देगा।”

इसके अलावा पॉम्पियो ने चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस पर भी कई बातें कही। उन्होंने कहा, “अगर चीन ने पहले ही दुनिया को महामारी के खतरे से आगाह कर दिया होता तो आज हालात सामान्य होते। दशकों तक हमारे नेताओं ने चीन के मतभेद पैदा करने वाले नेताओं के शब्दों को नज़र अंदाज़ किया है। जो कि दुनिया के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं था, आज हमें जिस तरह की शासन पद्धति का सामना करना पड़ रहा है उसका कारण यही है।” 

पॉम्पियो ने यह भी कहा हम इस चुनौती का सामना अकेले नहीं कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ, नाटो, G7, G20 और हमारी संयुक्त आर्थिक-रक्षा शक्ति के साथ इस चुनौती का सामना करना संभव होगा। शायद यही सही समय है एक तरह की सोच रखने वाले देशों के साथ आने का। दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक देशों को साथ आना होगा शायद तभी हम कुछ कर पाने में सक्षम होंगे। 

इसके अलावा पॉम्पियो ने कहा चीन ने हमारे ट्रेड सीक्रेट्स और बौद्धिक विषय वस्तु चुराए जिसके चलते लाखों अमेरिकी नागरिकों को अपनी नौकरी गँवानी पड़ी। इसलिए चीन के खिलाफ कड़ा कदम उठाना बहुत ज़रूरी हो गया था। 

अमेरिका के निक्सन पुस्तकालय में विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने अमेरिका और चीन के संबंधों पर विस्तार से अपनी राय रखी। इस पुस्तकालय का नाम रिचर्ड निक्सन के नाम पर रखा गया है जिन्होंने अमेरिका और चीन के संबंधों की नींव रखी थी। इस पहल के पहले तक चीन और अमेरिका के बीच किसी भी तरह के सम्बन्ध नहीं थे। अमेरिका और चीन के रिश्तों की नींव लगभग 4 दशक पहले 1970 में पड़ी थी। इस कोशिश के तहत अमेरिका की टेबल टेनिस टीम पहली बार चीन गई थी। 

इसके कुछ साल बाद 1972 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन 8 दिन के चीन के दौरे पर गए थे। इसे ‘पिंग पॉन्ग डिप्लोमेसी’ भी कहा जाता है। इतना कुछ होने के बाद अमेरिका और चीन के बीच पहली बार कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे। फिर अमेरिकी डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जिम कार्टर ने चीन के साथ 636 बिलियन डॉलर का समझौता किया था। यह समझौता पूरी तरह चीन के पक्ष में था।   

कॉन्ग्रेस समर्थक ने राम मंदिर भूमि पूजन पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद HC में दायर की PIL

अयोध्या राम मंदिर निर्माण हेतु ‘भूमि पूजन‘ के लिए पीएम मोदी के अयोध्या दौरे पर जारी बहस और राजनीति के बीच, दिल्ली के वकील और कॉन्ग्रेस पार्टी समर्थक साकेत गोखले ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को कोरोना वायरस के दौरान ‘अनलॉक 2.0’ दिशानिर्देशों के मद्देनजर राम मंदिर भूमि पूजन के इस आयोजन पर रोक लगाने की याचिका (PIL) दायर की है।

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले द्वारा दायर इस PIL में कहा गया है कि अनुमान के अनुसार दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए 300 लोग घटना में शामिल होंगे। यदि याचिका स्वीकार की जाती है, तो मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय की गई एक पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि साकेत गोखले सोशल मीडिया पर मोदी सरकार और इसके कामकाज को लेकर फेक और भ्रामक खबरें फैलाने के लिए जाने जाते हैं।

भूमि पूजन पर रोक की माँग को लेकर इलाहाबाद HC में PIL दायर

याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजन की अनुमति नहीं दे सकती है। ट्विटर पर साकेत गोखले ने लिखा है कि राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट और केंद्र सरकार, दोनों ही इस मुद्दे पर साथ हैं। इसके अलावा, गोखले ने गृह मंत्रालय पर एक आरटीआई भी दायर की है, जिसमें पूछा गया है कि क्या इसके लिए किसी अन्य आधार पर छूट दी गई थी?

प्रधानमंत्री मोदी शामिल होंगे भूमि पूजन में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र में 150 मेहमानों को आमंत्रित किया गया है – जिनमें शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं।

इस दौरान सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के मानदंडों का पालन किया जाएगा। ट्रस्ट ने अनुमान लगाया है कि मंदिर का निर्माण 3-3.5 वर्षों में पूरा किया जाएगा, यानी वर्ष 2023 तक यह सम्पन्न हो जाएगा।

चीन के सुधरने के नहीं नजर आ रहे आसार, सैनिकों की वापसी का मामला अटका, बैठक के बाद भी PLA सैनिक नहीं हटे पीछे: रिपोर्ट

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले करीब तीन महीने से तनाव जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ताओं का दौर चला, जिसके बाद दोनों देशों के बीच LAC से सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमति बनी। पिछले कुछ दिनों में भारत और चीन ने टकराव वाली जगहों से टुकड़ियों को पीछे भी खींचा है। हालाँकि, ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने कई जगहों पर अब भी अपनी सेना तैनात कर रखी हैं।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर मौजूदा हालात को देखते हुए चीन की चालबाजी साफ़ दिखने लगी है। पिछले दस दिनों के भीतर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के अधिकांश विवादग्रस्त इलाकों से चीनी PLA की या तो वापसी नहीं हुई है या हुई भी है तो बेहद कम। ऐसे में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (भारतीय एनएसए और चीन के विदेश मंत्री) के बीच तनाव खत्म करने के लिए सैनिकों की वापसी को लेकर जो सहमति बनी थी, उसके अनुपालन पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।

वहीं भारत ने इस हालात पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई है कि चीन की जिनपिंग सरकार पूर्व में बनी सहमति को अमल में लाएगा, क्योंकि सीमा पर शांति स्थापित किए बगैर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि चीन द्वारा की जा रही चालबाजी का असर विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों की आने वाले बैठक में भी देखने को मिलेगा। चीन जानबूझ कर तनाव का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहा है। वर्किंग मेकेनिज्म (डब्लूएमसीसी) के तहत होने वाली इस बैठक में इस मुद्दे को भी उठाए जाने की भी सम्भावना है।

सीमा पर उत्पन्न हुए तनाव को कम करने और आपस में समझौता कराने के लिए वर्किंग मेकेनिज्म की यह बैठक पहले भी दो बार हो चुकी है। कुल मिला कर हाल ही में चीन के साथ भारत की चार बैठके हो चुकी हैं। वहीं आपसी तनाव को देखते हुए दोनों देशों के अधिकारियों ने फोन के जरिए भी मामले को सुलझाने की कोशिश की थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया, “सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है। इसलिए यह हमारी उम्मीद है कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप चीनी पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से पूरी तरह हटने और तनाव कम करने तथा पूर्ण शांति एवं स्थिरता बहाली के लिए हमारे साथ ईमानदारी से काम करेगा।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि डब्लूएमसीसी की अगली बैठक जल्द होगी, जिसमें सैनिकों की वापसी से जुड़ी प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने के शुरुआती कदम के बाद स्थिति में कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दोनों ही देशों के सैनिक काफी कम फासले पर मौजूद हैं। हालाँकि, सैनिकों की संख्या जरूर घटी है। फ्लैश प्वॉइंट पैंगोंग झील के किनारे से चीन के सैनिक फिंगर 4 से फिंगर 5 तक पीछे हटे हैं। झील के पास भले ही दोनों सेनाओं की बीच की दूरी 4-5 किमी. हो, लेकिन पहाड़ी इलाके में ये सिर्फ एक किमी की बात है।

ऐसे में साफ दिख रहा है कि पिछले एक हफ्ते से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कहा जा रहा था कि काफी लंबे वक्त पहले चीनी सेना फिंगर चार तक आ गई थी, जबकि भारत का दावा फिंगर 8 तक का है। करीब 600-800 मीटर की दूरी पर अभी भी 40-50 जवान करीबी से नजर बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले समझौते के आधार पर 15 जून को जहाँ झड़प हुई थी, उस इलाके से चीन 1.5 किमी. तक पीछे हट गया था। जिसके बाद दोनों देशों के बीच की सेनाओं की दूरी तीन किमी. तक हो गई थी। ऐसी स्थिति में भारतीय सेना लंबी तैयारी कर रही है और पूरी तरह से मुस्तैद है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव को कम करने के लिए चार बार कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद डेपसांग समतल क्षेत्र और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीन के अवैध निर्माण की बात कही जा रही है। भारत ने इन गतिविधियों का मुद्दा सेना के अधिकारियों की बैठक में उठाया था। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनके चीनी समकक्ष सहित विशेष प्रतिनिधियों से एलएसी पर सैन्य निर्माण के मुद्दे को हल करने के लिए बातचीत की थी।

दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई थी। डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले भारतीय पक्ष गलवान घाटी (PP-14), PP-15, हॉट स्प्रिंग्‍स, गोगरा और फिंगर एरिया सहित चार बिंदुओं पर विस्‍थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी। 15 जून को भारत और चीनी सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद युद्ध जैसे हालात बने हुए थे जिसे आपसी बातचीत के जरिए सामान्य किया गया वहीं दोनों ही देशों की सेना के बीच तय हुआ कि, अपनी पुरानी स्थित‍ि में वापस आएँगे।

सुल्तानपुर: मंदिर के परिसर में फंदे पर लटका मिला 22 वर्षीय साधु का शव, लोगों ने जताई हत्या की आशंका

महाराष्ट्र के पालघर और यूपी के बुलंदशहर में साधुओं की हत्या के बाद अब मामला सुल्तानपुर से आया है। खबर ये है कि जिले के छतौना बाजार के पास वीर बाबा मंदिर परिसर में एक बालयोगी साधु की लाश गुरुवार (जुलाई 23, 2020) को पेड़ से लटकती हुई पाई गई जिसे देखते ही इलाके में हड़कंप मच गया।

उधर, पुलिस भी सूचना पाते ही मौके पर पहुँची। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अब पुलिस ये पता लगा रही है कि ये आत्महत्या है या फिर किसी ने साधु को मारा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज सुबह छतौना बाजार स्थित वीर बाबा मंदिर के परिसर में संदिग्ध हालात में बालयोगी सत्येंद्र आनंद सरस्वती महाराज नागा बाबा (22) का शव पेड़ से लटका पाया गया।

इसके बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते ये खबर जगह-जगह फैल गई और घटना स्थल पर काफी लोगों की भीड़ इकट्ठा होनी शुरू हो गई। लोगों ने प्रश्न उठाया कि ये आत्महत्या है या हत्या?

नवभारत टाइम्स के अनुसार, अब पुलिस भी बाल योगी आनन्द सरस्वती बाबा की लाश मिलने के बाद इसी बिंदु की जाँच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जाँच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही घटना का खुलासा हो पाएगा। यहाँ बता दें कि कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि आनन्द सरस्वती बाबा हिमाचल प्रदेश से आए हुए थे और करीब 3 सालों से चांदा थाना क्षेत्र के छतौना कला ग्राम के वीर बाबा मंदिर पर रहते थे।

सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र में साधुओं की लिंचिंग पर चुप्पी साधने वाली कॉन्ग्रेस ने भी मौका देख कर भाजपा पर निशाना साध दिया है।

यूपी कॉन्ग्रेस ने साधु की तस्वीर ट्विटर पर साझा करते हुए योगी राज को जंगल राज बताया है। उन्होंने लिखा, “सुल्तानपुर में एक पुजारी की लाश मंदिर परिसर में लटकती मिली। आस-पास के लोगों ने हत्या की आशंका जताई है।#जंगलराज।”

यहाँ बता दें कि अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में दो साधुओं की धारदार हथियारों से काटकर हत्या कर दी गई थी। तब सीएम योगी ने खुद इस मामले पर संज्ञान लिया था। लेकिन कॉन्ग्रेस ने तब भी योगी सरकार पर हमला बोला था। साथ ही शिवसेना ने भी सवाल उठाए थे।

सोनू पंजाबन को 24 साल की सजा: मासूम बच्चियों से वेश्यावृत्ति कराने के लिए उनके निजी अंग और मुँह में डालती थी मिर्च पाउडर

मासूम बच्चियों की तस्करी और उनसे जिस्मफरोशी करवाने के जुर्म में दोषी सोनू पंजाबन को दिल्ली की एक अदालत ने 24 साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उसके साथी संदीप बेडवाल को भी अपहरण, बलात्कार और नाबालिग बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए बेचने के जुर्म में 20 साल कैद की सजा सुनाई है।

सोनू पंजाबन को 2009 में एक नाबालिग लड़की को वेश्यावृत्ति में शामिल करने के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था। वहीं सोनू के साथी संदीप बेडवाल को एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। घटना के समय लड़की की उम्र महज 12 साल थी।

सजा सुनाते हुए दिल्ली की अदालत ने कहा, “सोनू पंजाबन ने न केवल नाबालिग लड़की को खरीदा था, बल्कि लड़की को वेश्यावृत्ति में धकेलने के लिए उसके साथ दरिन्दगी से भी पेश आई थी।”

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रीतम सिंह ने अपने 10 पन्नों के आदेश में कहा, “दोषी सोनू पंजाबन ने लड़की को जबरन ड्रग्स दिया ताकि वह ग्राहक (आदमी) का विरोध न कर सके, जो उसका यौन शोषण करेगा। उसमें (लड़की में) डर बैठाने के लिए उसके निजी अंगों और मुँह पर मिर्च लगाई जाती थी। ताकि वह उसके आदेश का पालन करे नहीं तो और भी क्रूरता पर उतर आती।”

प्रीतम सिंह ने कहा, कैसे एक महिला दूसरी महिला के साथ इस कदर इतनी भयावह रूप से क्रूर हो सकती है। वह भी एक नाबालिग साथ। पंजाबन ने एक महिला होकर भी सभी सीमाओं को लाँघ दिया है। वह महिला कहलाने के लायक भी नहीं है। ऐसा जुर्म करने वाले लोगों को समाज के बीच रहने का कोई अधिकार नहीं है। इन्हें जेल की सलाखों के पीछे ही रखना उचित है।

सोनू पंजाबन पूरे उत्तर भारत में देह व्यापार में सबसे कुख्यात नामों में से एक है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह 2000 की शुरुआत में दिल्ली और आसपास के राज्यों में सबसे बड़े वेश्यावृत्ति रैकेट को चलाती थी। उसके हाई-प्रोफाइल व्यवसायियों, खूंखार गैंगस्टरों, पुलिस और राजनीति में सहयोगियों के साथ संबंध थे। जिसकी वजह से वह मानव तस्करी में लिप्त होने के बावजूद कानूनी कार्रवाई से बच निकलती थी।

गैंगस्टर विजय सिंह से शादी करने के बाद सोनू पंजाबन उर्फ ​​गीता अरोड़ा ने देह व्यापार और मानव तस्करी के गोरखधंधे में प्रवेश किया था। 2003 में अपनी शादी के तुरंत बाद, सिंह उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

उसके बाद सोनू पंजाबन दीपक नाम के एक अन्य गैंगस्टर के साथ जुड़ गई। जिसे असम में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया गया था। दीपक के मरने के बाद उसके भाई गैंगस्टर हेमंत सोनू ने उससे शादी कर ली। इसी वजह से उसे सोनू पंजाबन कहा जाता है। दोहरे हत्याकांड के मामले में दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर स्पेशल सेल ने हेमंत का भी एनकाउंटर कर दिया था।

पंजाबन को पहली बार इम्मोरल ट्रैफिकिंग प्रीवेंशन के आरोपों में 2007 में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद वह कई बार गिरफ्तार हुई। 2011 में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत उस पर मुकदमा दर्ज किया गया। उसकी अंतिम गिरफ्तारी 2017 में हुई, जिसके बाद उसे तिहाड़ जेल में डाल दिया, जहाँ उसने कुछ दिन पहले आत्महत्या करने का प्रयास किया था।

पुलिस के मुताबिक, संदीप बेडवाल ने पहले नाबालिग लड़की से दोस्ती की थी। फिर शादी के बहाने सितंबर 2009 में उसे लक्ष्मी नगर में एक घर में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ बलात्कार किया। बलात्कार करने के बाद उसने उस 12 साल की नाबालिक लड़की को सीमा नाम की एक महिला को बेच दिया था।

पुलिस ने लड़की के बयान के आधार पर कहा कि सीमा ने लड़की को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया और उसे ड्रग्स का इंजेक्शन भी दिया। इतना ही नहीं सोनू की गिरफ्तारी होने से पहले लड़की को कई बार बेचा गया था।

पुलिस ने कहा कि सोनू पंजाबन ने वेश्यावृत्ति के लिए उसका कई बार इस्तेमाल किया है। लड़की को ग्राहकों के पास भेजने से पहले सोनू उसे प्रॉक्सीवॉन और एल्प्रेक्स टैबलेट जैसी दवाएँ भी देती थी। लड़की ने 9 फरवरी 2014 को नजफगढ़ पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराया था।

गौरतलब है कि 16 जुलाई को, सोनू पंजाबन को IPC की धारा 366A, 372, 373, 328, 370, 342, 120B, और इम्मोराल ट्रैफिक (रोकथाम) कानून से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। उसके साथी बेदवाल को IPC की धारा 363, 366, 366A, 372, 120B, 376 और 370 (किसी भी व्यक्ति को गुलाम के रूप में खरीदना या निपटाना) के तहत दोषी ठहराया गया था। दोनों को 22 जुलाई को 24 और 20 साल कारावास की सजा सुनाई गई।

आशिक फैयाज के साथ मिल फातिमा ने 9 साल के बेटे का किया यौन शोषण, हत्या का भी बनाया था प्लान: कोर्ट ने सुनाई सजा

हैदराबाद में एक मुस्लिम महिला को स्थानीय अदालत ने 13 साल की सजा सुनाई है। महिला पर आरोप है कि उसने अपने आशिक से अपने ही नाबालिग बेटे का यौन शोषण करवाया और इस काम में उसकी मदद भी की। इसके अलावा महिला ने अपने आशिक संग मिलकर बच्चे को बहुत यातनाएँ भी दीं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 4 वर्ष पहले संज्ञान में आया था। तब रेहान (बदला हुआ नाम) नाम के युवक ने हैदराबाद पुलिस को संपर्क किया था। रेहान ने अपनी बीवी फातिमा (बदला हुआ नाम) पर और उसके प्रेमी के खिलाफ केस किया था। अब इसी मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है।

स्थानीय कोर्ट ने फातिमा को 13 साल कैद की सजा सुनाई। वहीं उसके आशिक फ़ैयाज़ महमूद अंसारी को अदालत ने दो आजीवन कारावास और 10 साल की सजा दी है।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, रेहान के लिए साल 2016 में इस केस को दर्ज कराते टाइम सबसे ज्यादा मुश्किल ये था कि वो कैसे बताए कि उसके 9 साल के बेटे के साथ क्या-क्या हुआ और उसकी अपनी बीवी ने उनके बेटे को कैसी यातनाएँ दी।

रेहान की शिकायत के मुताबिक, उसकी बीवी और उसका आशिक दोनों मिलकर एक आलिम के कहने पर 9 साल के मासूम को प्रताड़ित करते थे। उन्होंने आगे चलकर बच्चे को मारने का प्लान भी बनाया था, क्योंकि बच्चे को दोनों के संबंधों का पता चल गया था।

रिपोर्ट की मानें तो, रेहान कुवैत में रहकर काम कर रहा था, जबकि उसकी पत्नी अपने बेटे और दो छोटी बेटियों के साथ हैदराबाद में रह रही थी। साल 2016 में जब वो त्योहार पर घर आया तो उसे इन सबके बारे में पता चला।

बता दें कि रेहान और फातिमा का निकाह साल 2006 में हुआ था। इसके बाद वो कुवैत में रहने लगे जहाँ दोनों साल 2013 तक रहे। इसके बाद फातिमा बच्चों के साथ हैदराबाद आ गई, जबकि रेहान कुवैत में रुका। वहीं साल 2016 में बकरीद पर जब वो अपने परिवार से मिलने आया तब उसे पूरी घटना का पता चला। फिर उसने इस मामले में केस दर्ज करवाया।

इस मामले में सुनवाई के दौरान स्थानीय अदालत ने कथित तौर पर फैयाज को हत्या के प्रयास, अप्राकृतिक अपराधों, व्यभिचार, आपराधिक धमकी और POCSO की धारा का दोषी पाया। फातिमा को हत्या के प्रयास, गलत तरीके से कैद रखना और आपराधिक धमकी के लिए सजा दी गई है।

उल्लेखनीय है कि बच्चे ने अपने पिता तो बताया था कि दोनों मिलकर उसे सुइयाँ चुभोते थे। उसे बाँधकर रखते थे। उसे काटते थे। उसे किसी न किसी रूप में जहर खिलाते जिससे उसकी तबीयत बिगड़ती थी। उसके निजी अंगों पर उबलता पानी और गर्म मोम डालते थे। इस दौरान उसकी माँ वहीं खड़ी रहती थी और सबको फिल्माती थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजदीप सरदेसाई ने जस्टिस अरुण के खिलाफ़ किया विवादित ट्वीट, अवमानना के डर से किया डिलीट

राजस्थान में जारी सियासी संकट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (23 जून, 2020) को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि पहले हाईकोर्ट का फैसला आ जाए, उसके बाद सोमवार को फिर इस मामले की सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट के फैसले को रद किया जाए, किसी निर्णय से पहले विधानसभा अध्यक्ष के मामले में दखल नहीं दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सचिन पायलट और 18 विधायकों की ओर से हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी से जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी।

बता दें कि राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच, राजस्थान स्पीकर ने पिछले सप्ताह सचिन पायलट और अन्य बागी विधायकों को नोटिस जारी किया था। अध्यक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि बागी स्पीकर द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका नहीं दायर कर सकते।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट शुक्रवार को बागी नेताओं की याचिका पर अपने फैसले की घोषणा कर सकता है। लेकिन अंतिम आदेश सुप्रीम कोर्ट के अधीन होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजस्थान के स्पीकर सीपी जोशी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, “विरोध की आवाज को लोकतंत्र में दबाया नहीं जा सकता है।” बता दें राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 विरोधी कॉन्ग्रेस विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने के कारणों पर सवाल उठाया था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके मीडिया इकोसिस्टम इस बात को लेकर परेशान हो गए कि कैसे कोर्ट ने उनके अनुसार आदेश नहीं दिया। अपने अनुकूल फैसला नहीं आने से नाराज लोगों ने न्यायपालिका के खिलाफ ही हमला बोल दिया।

कोर्ट के फैसले से निराश राजदीप सरदेसाई ने अपने मन की भड़ास ट्विटर पर निकाली। उन्होंने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। गौरतलब है कि जस्टिस अरुण मिश्रा ने सचिन पायलट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट बेंच की अध्यक्षता की थी। राजदीप सरदेसाई ने उनका नाम घसीटते हुए कहा कि यह वही अरुण मिश्रा है, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को ‘बहुमुखी प्रतिभा’ के रूप में वर्णित किया था।

आश्चर्यजनक है कि राजदीप सरदेसाई ने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिया कि जस्टिस अरुण द्वारा सचिन पायलट के पक्ष में निर्णय और कुछ महीने पहले पीएम मोदी के लिए उनकी प्रशंसा करना, इन दोनों का आपस में कोई मेल है। इस तरह की बयानबाजी करने से पत्रकार सरदेसाई (जिन्हें कई बार फर्जी खबरें फैलाते पकड़ा गया है) ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत की अवमानना भी ​​की है।

राजदीप सरदेसाई द्वारा न्यायपालिका पर किए गए इस हमलें को लेकर सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर आपत्ति जताई। जिसके बाद सरदेसाई को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया।

कॉन्ग्रेस के प्रति सहानुभूति रखने वाले राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट करने के बाद यह महसूस किया कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिए गए अपने फर्जी बयान की वजह से उनपर अदालत की अवमानना ​​का आरोप भी लग सकता है। अपने पुराने ट्वीट को हटाने के बाद, ‘पत्रकार’ ने जल्द ही राजस्थान के सियासी घमासान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक और पोस्ट किया। हालाँकि, इस ट्वीट में जस्टिस अरुण मिश्रा का कोई संदर्भ नहीं था।

शायद, राजदीप सरदेसाई को इस तथ्य के बारे में पता था कि उनपर न्यायपालिका पर ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करने पर मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। जैसे कि ‘अर्बन नक्सल” वरवरा राव (Varavara Rao) को लेकर न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट पोस्ट करने के लिए विवादास्पद ‘एक्टिविस्ट‘ वकील प्रशांत भूषण के साथ हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘पीआईएल एक्टिविस्ट’ प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालती की अवमानना करने का ​​नोटिस जारी किया था।

आजमगढ़: शबाब अली ने 11 साल की बच्ची से किया रेप, वीडियो बनाकर कर रहा था ब्लैकमेल

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में गुरुवार (जुलाई 23, 2020) को एक 11 साल की बच्ची से बलात्कार का मामला उजागर हुआ। पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान शबाब अली के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शबाब की गिरफ्तारी मुबारकपुर बस स्टेशन से हुई है। शबाब पर आरोप है कि उसने बच्ची के साथ बलात्कार किया। पूरी घटना की वीडियो बनाई और बाद में उसे ब्लैकमेल भी किया।

बच्ची के पिता की तहरीर के बाद हुई पुलिस ने शबाब को गिरफ्तार कर उसका फोन बरामद किया। पड़ताल में उसके फोन से वीडियो मिले हैं। पुलिस का कहना है कि शबाब ने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया है। उसने माना है कि उसने बच्ची का बलात्कार किया और उसे ब्लैकमेल भी किया।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, पुलिस अभी आरोपित युवक से पूछताछ करके अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। ऐसा संदेह है कि शबाब का हाथ ऐसे अन्य मामलों में हो सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी के मेरठ से नाबालिग लड़की को किडनैप कर रेप करने का मामला सामने आया था। आरोपित युवक मुस्लिम समुदाय का था, जिसकी गिरफ्तारी उत्तराखंड के हरिद्वार से हुई थी।

व्यक्ति पर आरोप था कि वह किशोरी को बहला-फुसला कर ले गया। हिंदुवादी संगठन बजरंग दल को जैसे ही मामले की जानकारी मिली, उसके कार्यकर्ताओं ने किशोरी की बरमदगी के लिए विरोध-प्रदर्शन किया। बाद में थानाध्यक्ष विकास ने बताया कि पीड़िता ने बलात्कार का आरोप लगाया है।

लव जिहाद और वामपंथी नैरेटिव: हिंदू नारीवादी विमर्शों से ही खतरे का मुकाबला संभव

मेरठ में माँ-बेटी के ह्रदय विहीन क़त्ल ने एक बार फिर भारत में लव जिहाद के विमर्श को हवा दी है। 30 वर्षीय शादीशुदा युवक शमशाद ने अपना नाम छुपा कर पहले तो तलाकशुदा प्रिया चौधरी को प्रेम जाल में फँसाया और बाद में उसके नमाज पढ़ने में आनाकानी करने के कारण हत्या कर दी।

वीभत्स बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की गवाह पीड़िता की पाँच साल की छोटी बेटी को भी उसकी माँ के साथ ही मोहम्मद शमशाद ने मार कर घर में दफ़न कर दिया।

दूसरी घटना पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की है, जब गीता देवनाथ को अख़बारों के हवाले से सूचना हुई कि वर्ष 2016 में घर से जरूरी काम से बाहर गई बेटी प्रज्ञा देवनाथ (नया नाम आयशा जन्नत माहुना) बांग्लादेश के सबसे खतरनाक इस्लामिक आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) में जा कर शामिल हो गई है और बांग्लादेशी एजेंसियों की गिरफ्त में आने से पहले तक वह जमात के नारी वाहिनी में काम कर रही थी।

क्या है लव जिहाद ?

मेरी नज़र में “लव जिहाद ऐसा मजहबी कृत्य है जिसमें दूसरे समुदाय वाले अपनी पहचान छुपा कर हिंदू या इसाई लड़कियों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं या करने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में आरोपित की पहचान उजागर होने के बाद हिंदू या ईसाई लड़कियों को धोखे का एहसास होता है और वह इस विषय को खुद/धार्मिक संगठन या परिवारवालों की मदद से उजागर करने का प्रयास करती हैं।”

इस विषय की पहली व्याख्या वर्ष 2009 में दुनिया के महान राजनैतिक-धार्मिक विश्लेषक स्टीफन ब्राउन ने की थी l वो लव जिहाद की व्याख्या करते हुए लिखते हैं, “The love jihad’s modus operandi involves a heartless strategy of luring vulnerable girls and young women to convert to Islam by feigned love and promises of marriage. But instead of marital bliss, the girls unwittingly trapped in its deceitful web usually wind up in the hands of Muslim fundamentalist organizations.”

उनका कहना है कि लव जिहाद उन्मादी मजहबी लक्ष्य से प्रेरित एक ऐसा कृत्य है, जिसमें गैर इस्लामिक लड़कियों का धर्म परिवर्तन के लिए युवक धोखा और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं।

लव जिहाद का सबसे खतरनाक पहलू तब सामने आता है जब हिंदू या इसाई लड़की को यह पता चलता है कि हिंदू नाम का लड़का वास्तव में समुदाय विशेष से है और उसका लक्ष्य मोहब्बत नहीं बल्कि इस्लाम में धर्म परिवर्तन है। देश में ऐसे कई मामले हैं जहाँ ऐसी कई लड़कियों का सिर्फ इसलिए बेरहमी से क़त्ल कर दिया गया, क्यूँकि उसने इस्लाम मानने से मना कर दिया। ऐसे कई मामलों में एक हिना तलरेजा का मामला भी है।

हिना तलरेजा एक हाई प्रोफाइल लड़की थी। उसकी हुक्का बार में अदनान खान नाम के एक लड़के से दोस्ती हुई। वर्ष 2017 के जुलाई महीने में अदनान खान ने अपने दो दोस्तों के साथ हिना तलरेजा का बलात्कार किया और फिर उसके माथे पर गोली मारकर हत्या करने के बाद फरार हो गया।

अभी जनवरी माह में केरल के सबसे बड़े कैथेलिक चर्च समूह सायरो-मालाबार ने अपनी गंभीर छानबीन के बाद यह पाया कि केरल लव जिहाद से बुरी तरह ग्रसित है। इस डरावने विषय पर उनका यह मानना था कि गैर इस्लामिक धर्म की लड़कियों का इस्लाम में परिवर्तन ना सिर्फ भारत के सेक्युलर ढाँचे के लिए खतरा है, बल्कि इससे सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है।

केरल के लव जिहाद का मॉडल इतना खतरनाक है कि इसमें ना सिर्फ उन्मादी लोग अपनी पहचान छुपा कर हिंदू और ईसाइयों का धर्म परिवर्तन करते हैं, बल्कि उन्हें इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों को आउटसोर्सिंग भी करते हैं। यानी हिंदू और ईसाई, लड़कियों का लव जिहाद के नाम पर इस्लामिक संगठनों के वजूद के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

निमिषा (केरल) और प्रज्ञा देवनाथ (धानीखाली, हुगली जिल्ला, पश्चिम बंगाल) इसके कई उदाहरणों में से एक उदहारण हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भले ही वामपंथी झुकाव वाले मीडिया और अकादमिक संस्थान इस मुद्दे को नकारते रहते हैं या फिर कुछ अपवाद जैसे अखिला अशोकन (केरल) के मुद्दे से वास्तविक लव जिहाद के मुद्दों को सामाजिक सौहार्द्र और गंगा-जमुनी तहजीब का हवाला देने लग जाते हैं, लेकिन समय-समय पर लव जिहाद के नाम पर उत्पीड़न के मामले, हत्या, धोखा और बलात्कार की मीडिया रिपोर्टिंग किस बात की गवाही देती है?

अब तक इस देश में लव जिहाद की लाखों घटनाएँ हो चुकी हैं और ऐसी लाखों घटनाएँ समाज में हो रही होंगी, लेकिन स्त्री अस्मिता से जुड़ा यह मुद्दा होने के बावजूद ऐसे मामले भारत की नारीवादियों के विमर्श से गायब क्यूँ हैं, जबकि लव जिहाद तो पुरुषों के मजहबी सत्ता की पराकाष्ठा है। इस कृत्य में ना सिर्फ उन्मादी पुरुष अपनी पहचान छुपा कर हिंदू और इसाई लड़कियों के साथ मानसिक, शारीरिक और सामाजिक सम्बन्ध बनाते हैं, बल्कि इन तीन तरह के समबन्धों का दुरुपयोग भी करते हैं। साथ-साथ मजहब का पटाक्षेप होने पर उन्मादी युवक उनकी हत्या, दोस्तों संग बलात्कार और सामाजिक छवि को बर्बाद भी करते हैं।

क्या यह सोचने की बात नहीं है कि लव जिहाद भारत में एक सामान्यीकृत उपलब्ध सामाजिक बुराई का स्वरुप ले चुका है। फलस्वरूप आज यह ना सिर्फ धार्मिक रूप से सहिष्णु हिन्दुओं के अस्तित्व पर संकट की स्थिति पैदा कर दी है, बल्कि इसने स्त्रियों की मर्यादा पर भी एक प्रश्न चिह्न खड़ा किया है। लेकिन सबसे दुखद बात यह है कि इतना कुछ होने के बावजूद भी अब तक यह भारतीय नारीवादी विमर्शों का विषय नहीं पाया बन पाया है।

आज भारतीय नारीवादियों को 19वीं शताब्दी के गड़े मुर्दों पर विमर्श का मौका मिल जाता है। सती प्रथा, बाल विवाह पर आत्ममुग्ध करने वाले विषयों पर सेमिनारों में जीभ नचा-नचा कर बोलने का मौका मिल जाता है। लेकिन इन कॉपी-पेस्ट और पेलेग्रजिम नारीवादी चिंतकों को लव जिहाद में स्त्री विमर्श पर बोलने का मौका कभी नहीं मिलता है।

भारतीय फेमिनिस्ट के इस अनदेखेपन से क्या हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि भारत का स्त्री विमर्श वामपंथी है? या फिर भारत के नारीवादी विमर्शों को पिंजड तोड़ जैसे समूहों ने कब्ज़ा कर लिया है जो कि शाहीन बाग़ में अराजकता फ़ैलाने के विमर्शों में व्यस्त हो गए हैं? क्या भारत के फिमेनिस्ट खुद को हिंदू धार्मिक मान्यताओं की ऐसी आत्ममुग्ध आलोचनाओं में व्यस्त रखना चाहती हैं जो कि अब या तो मिथकों का हिस्सा हो गया है या फिर यूरोपीय और अमेरिकी संस्थानों से फेमिनिस्ट स्टडी के नाम पर मिलने वाले भरी-भरकम रकम प्राप्त करने का खिलौना बन कर रह गया है?

उपरोक्त प्रश्नों का समाधान क्या है?

वस्तुतः फेमिनिज्म डिबेट पुरुषों के द्वारा अस्तित्व में लाया गया विमर्श है। पुरुष प्रधान देशों में स्त्रियों के हक की बात मुख्यत: लिबरल पुरुष ही उठाते रहे हैं। हालाँकि फेमिनिज्म का विमर्श पुरुषों ने उठाया जरूर, लेकिन इसकी व्यापक स्थापना में स्त्रियों का अमूल्य योगदान रहा है। भारत के लव जिहाद के मामले को भी मुख्यत: हिंदू पुरुष ही उठाते हैं।

केरल में भी लव जिहाद के खिलाफ आवाज ईसाई पुरुष पादरियों ने ही उठाया है। लेकिन हिंदू स्त्री या ईसाई स्त्रियों के मजहबी उत्पीड़न की बात क्या सिर्फ पुरुष ही उठाते रहेंगे? हिंदू स्त्री, लव जिहाद के नाम पर अपने मानवीय अधिकार के नाम पर कब जागरूक होंगी?

इसलिए आज जबकि भारत का नारीवाद भटका हुआ रेडिकल वामपंथी है, इस स्थिति में आज हिंदू फेमिनिज्म (Hindu feminism) विमर्श की सख्त आवयशकता है। हिंदू महिलाएँ जो लेफ्ट की शिकार हैं, उन्होंने लव जिहाद से पीड़ित लाखों हिंदू और ईसाई महिलाओं की पीड़ा समझने और उसे डिबेट में लाने में अक्षम हैं।

यह नॉलेज गैप सिर्फ हिंदू फेमिनिज्म के नए विमर्शों से ही भर पाएगा। हिंदू और ईसाई महिलाओं को आगे आकर फेमेनिज्म के इस नए विमर्श को अपने कँधे पर उठाना पड़ेगा। नहीं तो प्रिया चौधरी, हिना तलरेजा, निमिषा, प्रज्ञा देवनाथ सहित अन्य लाखों लड़कियाँ सेक्स स्लेव, हत्या, बलात्कार और अवसाद का शिकार हो कर दम तोड़ती रहेंगी। परिणामस्वरूप भारत का समाज अपना मूल स्वरुप खोकर इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा।

‘मुझे राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए अभी तक न्योता नहीं मिला, हमें भी भगवान राम का आशीर्वाद चाहिए’

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (जुलाई 23, 2020) को यह बताया कि उन्हें अभी तक 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। मीडिया से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवान राम को सभी नागरिकों और दिल्ली के लोगों को कोरोना महामारी से लड़ने के लिए आशीर्वाद देना चाहिए

उन्होंने कहा, “मुझे अभी तक आमंत्रित नहीं किया गया है। भगवान राम को हमें और दिल्लीवासियों को आशीर्वाद देना चाहिए। हम भगवान राम से हमें इस महामारी से बचाने के लिए प्रार्थना करेंगे।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त को अयोध्या जाएँगे। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद होंगे और सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेता शामिल होंगे।

मुमकिन है कि राम मंदिर के लिए इस पूरे मामले को आंदोलन में तब्दील करने वाले पूर्व उप-मुख्यमंत्री लाल कृष्ण आडवाड़ी भी इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हों।

ऐसे में सीएम केजरीवाल के इस आरोप पर कि उन्हें भूमि पूजन के लिए आमंत्रण नहीं मिला, पर भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने करार जवाब दिया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछा कि जब वह मस्जिद के मौलवियों को 18000 रुपए देने लगे तब उन्होंने मंदिर के पुजारियों के बारे में क्यों नहीं सोचा।

वे अरविंद केजरीवाल के आरोप के जवाब में ट्वीट करते हुए लिखती हैं, “जब आप मस्जिद के मौलवियों को 18000 रुपए देने लगे तब आपने क्या मंदिर के उन गरीब पुजारियों के बारे में नहीं सोचा। राज धर्म और राम राज्य सभी से समान तरीके से पेश आने के लिए कहता है, वो भी बिना भेदभाव।”