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‘जब ऑक्सफोर्ड बना था तब सुल्तान मकबरा बना रहे थे’: मुस्लिम शासकों पर IAS अधिकारी के कमेंट से लिबरल और इस्लामी सुलगे

IAS अधिकारी सोमेश उपाध्याय ने शताब्दियों तक भारत पर राज करने वाले इस्लामी अक्रांताओं को लेकर ट्विटर पर टिप्पणी की। इससे भन्नाया लिबरल और इस्लामी गैंग उन पर टूट पड़ा।

उपाध्याय ने ट्वीट किया कि जब ऑक्सफोर्ड की स्थापना हुई थी तब हमारे सुल्तान मकबरा बनाने में लगे थे। लेकिन इस्लामी कट्टरपंथियों और लिबरल्स को यह सच हजम नहीं हुआ।

माहिर अब्बास ने लिखा, “सुल्तानों और मुग़लों ने देश में तमाम मदरसे बनवाए थे, जिनसे उस वक्त के बेहद शिक्षित और बुद्धिजीवी लोग निकले थे।” लेकिन अब्बास यह लिखना भूल गया कि इन्हीं सुल्तानों ने दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन शैक्षणिक केंद्र ‘नालंदा’ को ध्वस्त कर दिए थे। आज की तारीख में उसी मदरसे से इस्लामी आतंकवादी निकलते हैं। 

टीए रिज़वी ने ट्वीट का कहा कि सुल्तानों ने ताजमहल, लाल किला और क़ुतुब मीनार भी बनवाए।  

एक इस्लामी कट्टरपंथी ने कॉन्ग्रेस को सुल्तान बता दिया। 

कुछ लिबरल्स ने यहाँ तक कह दिया कि इस आलोचना के बाद सोमेश उपाध्याय की पदोन्नति पक्की है। 

कुछ सोमेश उपाध्याय पर जातिगत टिपण्णी करने से भी बाज नहीं आए। 

एक व्यक्ति ने उनके ‘ब्राह्मण होने’ पर ही आलोचना शुरू कर दी। 

एक स्वघोषित इतिहासकार ट्विटर पर ही सोमेश को इतिहास का पाठ पढ़ाने लगीं। 

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना भले उस वक्त न हुई हो जब भारत पर मुग़ल शासकों का राज था। लेकिन यह बात पूरी तरह सच है कि मुग़ल शासक भारत को लूटने में ज़रूर व्यस्त थे।  महमूद गज़नवी ने 1024 AD में पहली बार भारत पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर को लूटा। इसके ठीक पाँच साल बाद ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। इसके बाद 1175 एडी में महमूद गोरी ने भारत पर हमला किया था। 

इसके बाद स्वघोषित इतिहासकार ने क़ुतुब परिसर में बने मदरसे का ज़िक्र किया। जबकि यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में इस बात का उल्लेख है कि 20 ब्राह्मण मंदिरों से निकले सामान की मदद से 2 मंदिर बनाए गए थे। हालांकि इसे कुछ इस तरह कहना ज्यादा बेहतर होगा ‘हिन्दू मंदिरों को तोड़ कर।’ 

ब्रिटिश पुस्तकालय के अनुसार दक्षिणी दिल्ली स्थित क़ुतुब परिसर की शुरुआत कुतुब-उद्दीन-एबक ने कराई थी। जिसे दिल्ली का पहला सुल्तान कहा जाता था। पहले यह राय पिथौड़ा मंदिर की जगह थी जिसे 27 हिन्दू और जैन मंदिर के अवशेषों से बनाया गया था। वहाँ की मस्जिद पर हिन्दू सभ्यता से जुड़ी कई तरह की नक्काशी और नमूने मिल जाते हैं। इससे यह बात साफ़ होती है कि उसका निर्माण मंदिर के अवशेषों से ही हुआ था और उसके ऊपर अरबी भाषा में क़ुरान से जुड़ी चीज़ें लिख दी गईं।

इतना कुछ होने के बाद सोमेश उपाध्याय ने एक बार फिर ट्वीट किया। तंज कसते हुए कहा वही लिबरल और बुद्धिजीवी जो खुद को अभिव्यक्ति की आज़ादी का पुरोधा कहते नहीं थकते, कितनी दमदारी से अपने अधिकार का सदुपयोग कर रहे हैं। 

पुजारी, तू ये लाउडस्पीकर बंद कर दे, नहीं तो बोरी में बंद करके फिंकवा दिया जाएगा: नगला ब्राह्मण गाँव में समुदाय विशेष ने दी धमकी

मथुरा के नागल ब्राहम्ण गाँव के बाहर हिंदू मंदिर के पुजारी को लाउडस्पीकर पर भजन बजाने पर दूसरे समुदाय द्वारा धमकाने व मारपीट करने का मामला सामने आया है। मंदिर के पुजारी बाबा पागलदास का आरोप है कि कुछ दिन पहले कुछ युवक उनके पास आए और उन्हें धमकाया कि वो आजान के समय भजन बजाना लाउडस्पीकर पर बंद कर दें वरना वे उन्हें काटेंगे और बोरी में भरकर सिल देंगे।

राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी ने ऑपइंडिया को बताई सच्चाई

इस संबंध में ऑपइंडिया ने राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी बाबा पागलदास से संपर्क किया। बाबा ने मामले की पुष्टि करते हुए हमें बताया कि उनके मंदिर के प्रांगण में कोई लाउडस्पीकर नहीं था। इसलिए एक भक्त ने उनसे एक दिन पूछा कि मंदिर में भजन में कीर्तन के लिए कोई मशीन नहीं है, तो क्या एक लाउडस्पीकर भेंट दे दूँ? व्यक्ति की बात सुनकर बाबा ने उन्हें हाँ कर दी और लाउडस्पीकर मिलने के बाद उसे मंदिर के ऊपर लगवा दिया। जिसे वह सुबह शाम कीर्तन आरती के टाइम बजाने लगे। 

एक दिन ऐसा हुआ कि कुछ युवक बाइक से निकल रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के लड़कों ने उन्हें रोका और धमकाया कि या तो इसे बंद करो, नहीं तो हम कुछ उपाय करेंगे। बाबा को यह बात पता लगी तो उन्होंने इस मामले पर बहुत ध्यान नहीं दिया। उन्हें लगा लड़कों ने ऐसे ही कह दिया होगा। मगर, कहीं न कहीं समुदाय विशेष की बातों में गंभीरता को आँकते हुए उन्होंने सुरक्षा लिहाज से उसे दो दिन बंद कर दिया। 

मंदिर के पुजारी पागलदास

लाउडस्पीकर को लगातार दो दिन बंद देखकर दूसरे ग्रामीणों ने बाबा से पूछा कि आखिर वे भजन के समय उसे चालू क्यों नहीं करते? तो बाबा ने उन्हें बात बताई और कहा- निष्कर्ष निकलने तक देखते हैं क्या होगा। लेकिन, इससे पहले इस मामले पर कोई सोच-विचार होता। तीसरे दिन यानी 20 जुलाई को समुदाय विशेष के लोग बाबा को धमकाने उनके पास ही आ गए। 

बाबा बताते हैं कि उन्होंने उनसे कहा, “बाबा तू या तो ये लाउडस्पीकर बंद कर दो नहीं तो बोरी में बंद करके फिंकवा दिया जाएगा।” अब बाबा ने मामले में अति देखते हुए इसी बात को अन्य ग्रामीणों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार आगे काम नहीं चलेगा। ये पूरे गाँव, समाज और हिंदू का मसला है। मामले को समझकर ग्रामीणों ने कई हिंदू संगठनों के साथ मिलकर इसके समाधान पर बैठक की। इस पर महाराणा प्रताप युवा सेना संगठन ने भी संज्ञान लिया और हिंदू रक्षा सेना भी आगे आई।

ऐसे हाल रहे तो साम्प्रदायिकता भड़क सकती है- महाराणा प्रताप युवा सेना संगठन अध्यक्ष ठाकुर भरत

महाराणा प्रताप युवा सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भरत ने इस मामले पर ऑपइंडिया को बताया कि गाँव में केवल 60 घर हैं। इनमें 40 दूसरे समुदाय के हैं और 20 हिंदुओं के। वहाँ जो राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी के साथ हुआ। उसके बारे में घटना की शाम मालूम चला। इसके बाद उन्होंने इसके बारे में पता लगाया और सोशल मीडिया आदि पर इसे शेयर किया। 

शेयर किया गया फेसबुक पोस्ट

बाद में घटना के विरोध में और मामले का समाधान ढूँढने के लिए उनके साथ भारी तादाद में कार्यकर्ताओं की भीड़ गाँव में पहुँची और मंदिर पर बैठक की। इसी बीच प्रशासन की गाड़ी आ गई और उन्होंने वहीं उनकी तहरीर भी लिखी। तहरीर में बाबा के साथ हुई बदसलूकी का उल्लेख किया गया और आरोपितों में गाँव में रहने वाले बनी पुत्र असगर, इरफान, अंसार, आजाद, इब्राहिम, मो रफीक आदि दबंगों का नाम लिखवाया।

ग्रामीणों की शिकायत
ग्रामीणों की शिकायत

महिलाओं पर भी दूसरे समुदाय के पुरुष कसते हैं फब्तियाँ

गाँव की स्थिति पर बात करते हुए ठाकुर भरत हमसे बताते हैं कि गाँव में दूसरे समुदाय की ये दबंगई बहुत समय से चली आ रही है। उन्होंने कुछ बातों का जिक्र किया जो वाकई बेहद चिंताजनक थी।

उन्होंने बताया कि इस गाँव की लड़कियाँ मीठे पानी को भरने गाँव से बाहर जाती है। मगर, वहाँ दूसरे समुदाय के युवक एक झिन्नी जैसे कपड़े को लपेटकर नहाते हैं और अर्धनग्न अवस्था में लड़कियों पर फब्तियाँ कसते हैं। उनसे अश्लील बातें करते हैं।

ठाकुर भरत के अनुसार, गाँव में इतना तनाव है कि दंगे जैसे स्थिति है क्योंकि मंदिर हिंदुओं का है और आसपास हिंदू बहुल गाँव हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इन सब मामलों पर पुलिस को अवगत कराया है। मगर, कार्रवाई फिलहाल कुछ नहीं हुई है।

वे बताते हैं, प्रशासन के सामने भी गाँव वालों ने इस बात को रखा था कि वो एक साल पहले भी इन घटनाओं पर शिकायत करने जा रहे थे। उस समय एक रास्ते से जाते हिंदू युवक को रोक लिया गया और उसका हाथ-पाँव तोड़ने का प्रयास हुआ। हालाँकि, तब दूसरे गाँव के लोगों ने उस युवक को बचा लिया था। पर, अब ये वारदातें वहाँ होती रहती हैं।

बैठक

एक और उदहारण देते हुए महाराणा प्रताप युवा सेना के अध्यक्ष कहते हैं कि कुछ दिन पहले दूसरे गाँव के लड़के दूध लेकर जा रहे थे। तब भी यहाँ के कुछ लोगों ने उन्हें जबरन पीटा। जब एक ब्राहम्ण परिवार उसे बचाने आगे आए तो उनको माँ-बहन की गाली दी और इतना धमकाया कि उन्होंने पलायन करने की ठान ली। 

हालाँकि, बाद में उनके संगठन समेत अन्य लोगों ने समाधान ढूँढने की बात कहकर किसी तरह उन्हें गाँव में रहने को ही मनाया। राधा कृष्ण मंदिर पर पुजारी पागलदास के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए वह कहते हैं कि फिलहाल इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि गाँव का दबंग बनी पुत्र असगर पर पहले से 60 मामले दर्ज हैं। वो हिस्ट्रीशीटर है।

पुलिस की कार्रवाई?

हमने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई जानने की कोशिश की। पुलिस ने हमें बताया कि मामले में एफआईआर हो गई है। एक गिरफ्तार हो गया। हालाँकि, जब हमने गिरफ्तार युवक का नाम पूछना चाहा तो पुलिस ने हमसे बाद में संपर्क करने को कहा और उसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। गाँव वालों का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में हिंदू पक्ष के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया। दबंगों की ओर से अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ग्रामीणों का स्थिति पर क्या कहना है?

ऑपइंडिया ने इस केस में कुछ ग्रामीणों से बात करके भी वहाँ की स्थिति को जानने का प्रयास किया। हमारा संपर्क 22 वर्षीय कन्हैया और 46 वर्षीय यादराम शर्मा से हुआ। कन्हैया ने गाँव में दूसरे समुदाय की दबंगई की सारी बातों को दोहराया और बताया कि केवल लाउडस्पीकर को बजाते 8 दिन हुए थे। फिर, एक दिन गाँव के दूसरे मजहब के दबंग परिवार के मुखिया ने मंदिर में आरती करवाने आए दो लोगों को अपने घर जाते टाइम रोक लिया।

पहले इन लोगों ने उन युवकों से पूछा कि तुम ये लाउडस्पीकर बंद करोगे या नहीं? इसके बाद धमकी दी कि जब हमारी अजान होती है तब इसे बंद कर लिया करो, नहीं तो हमारे पास और भी तरीके हैं। फिर लड़कों से दबंगों ने पूछा कि ये मंदिर किसका है? जिसपर लड़कों ने कहा मंदिर किसी एक का नहीं होता। ये मंदिर पूरे गाँव का है।

बाद में, यही बात युवकों ने कन्हैया के दोस्त की माता से बोली। कन्हैया के अनुसार, लड़कों ने उनके दोस्त की माँ को भी धमकाया कि इस बाबा से बोलो ये बंद कर दे। लेकिन माँ ने जवाब दिया कि भजन ही तो हो रहा है, इसमें समस्या क्या है। जिस पर लड़कों ने कहा इसका कोई टाइम टेबल होता है। 

कन्हैया कहते हैं, “हमारे गाँव में मस्जिद मंदिर दोनों है। मस्जिद में आजान इतने सालों से दी जाती है। हमने कभी कुछ नहीं बोला। रमजान में तो रात से ही ये सब शुरू हो जाता है। तब भी हम सब मिलकर रहे। लेकिन आज जैसे ही मंदिर में लाउडस्पीकर पर भजन शुरू हुआ तो धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। हमारे गाँव के हिंदुओं ने तो कभी इतने सालों में ऐसा नहीं किया। हमें लगता था ये अपनी अजान देते हैं, हम अपना भजन करते हैं। हमें क्या आपत्ति इनसे?”

कन्हैया बताते हैं कि इस मामले के हिंदू संगठनों के संज्ञान में आने के बाद इस पर बातचीत हुई। वे कहते हैं कि घटना सुनकर संगठनों में गुस्सा तो बहुत था। मगर, हमारी बात मानते हुए किसी ने भी गाँव में हुड़दंग नहीं किया और कानूनी कार्रवाई का समर्थन किया।

कन्हैया यहाँ ठाकुर भरत की बताई बात की पुष्टि करते हुए हमसे बताते हैं कि ये सब सच है। गाँव के दूसरे मजहब वालों ने अपने नल केवल अपनी महिलाओं के लिए आरक्षित किया हुआ है और सबको कहा है कि उनके नल पर उनकी औरते पानी भरेंगी कोई नहाने नहीं जाए। जबकि दूसरे यानी हिंदुओं के नल पर समुदाय विशेष के सभी लोग केवल पतले कपड़े को पहनकर नहाते हैं जब हिंदू महिलाएँ पानी भरने जाती हैं तो अश्लील हरकतें करते हैं। जब कोई विरोध करता है तो लड़ाई पर उतर आते हैं।

कन्हैया के मुताबिक, जिस परिवार के 20-25 लोगों ने मिलकर ये सब किया है। उन पर पहले भी लूटपाट आदि के 42 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। एक बार पुलिस इन्हें पकड़ने आई भी लेकिन पूरे परिवार ने मिलकर पुलिस पर ही हमला कर दिया और उनके हथियार रख लिए। ये सब 2-3 साल पुरानी बात है।

हालिया मामला एक दूध वाले का देते हुए वह बताते हैं कि दूध की कैन छू जाने से उसे दबंगों ने पीटा था और जब एक प्रत्यक्षदर्शी ने इसका विरोध किया तो उसी बेटी के साथ गलत काम करने की धमकी दी। जिससे वह आदमी डर गया और घर चला गया। लेकिन दबंगों ने उसका पीछा घर तक किया। कन्हैया के अनुसार अभी हाल में इन लोगों ने मामले के तूल पकड़ने के बाद फायरिंग भी की है।

ग्रामीण यादराम शर्मा

इसके बाद 46 वर्षीय यादराम भी ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान गाँव की तनावपूर्ण स्थिति को हमसे साझा करते हैं। वे मंदिर में पुजारी के साथ हुई घटना की पुष्टि करते हैं। साथ ही अपने साथ हुई घटना भी बताते हैं। वे कहते हैं कि अभी कल वह अपनी पत्नी उर्मिला के साथ खेत में चारा काटने गए थे। जहाँ दोनों आपस में बात करने लगे। तभी उन दबंगों की नजर उन पर चली गई जो बैठक देखकर भाग गए थे।

यादराम शर्मा कहते हैं कि यहाँ उनसे दबंगों ने गाली गलौच की और धमकी दी। दंबगों ने कहा, “तुम्हें तो हम कभी भी देख लेंगे। हमें सिर्फ़ प्रशासन से डर लग रहा है।” ग्रामीण के मुताबिक इसके बाद उन लोगों ने नाम गिनवाकर बताया कि वो 2-3 दिन में इन लोगों को मार देंगे और तुम्हें भी नहीं छोड़ेगे।

हालाँकि, इस बीच उनके हाथ में चारा काटने का दरात था। उन्होंने उससे उन्हें डराया और उनकी पत्नी भी आगे आ गई। दोनों ने किसी तरह उन्हें अपनी ओर से दूर किया। लेकिन, तब भी दूसरी ओर से लोगों की संख्या बढ़ती गई। यादराम की मानें तो, दबंग अभी भी शांत नहीं हुए हैं। उन लोगों की जान को खतरा है। गाँव में भी तनाव का माहौल है।

पाकिस्तान में फिर नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण और धर्मपरिवर्तन: मनजिंदर सिंह सिरसा ने की इमरान से कार्रवाई की अपील

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति देखते हुए अब इमरान सरकार की चुप्पी पर भारतीय राजनेता सवाल उठाने लगे हैं। हाल में इमरान सरकार पर सवाल उठाने वाले अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा है। सिरसा ने सिंध में एक धर्म परिवर्तन के मामले को प्रकाश में लाते हुए पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान से पूछा है कि आखिर वो ऐसे मामलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कब करेंगे।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने हालिया ट्वीट में बताया कि पाकिस्तान में ढेलर के पास 14 साल की नसीबन भील नामक लड़की का पहले अपहरण किया गया और फिर डार समुदाय के लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन करवा दिया। इस कृत्य में मौलवी ने कट्टरपंथियों का साथ दिया और धर्म परिवर्तन सर्टिफिकेट में उसकी उम्र 18 दिखाई। सिरसा ने ट्वीट में पूछा, “इमरान खान जी आप कार्रवाई कब करेंगे।”

गौरतलब है कि पाकिस्ताम में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की घटनाएँ बेहद आम हैं। हिंदू लड़कियों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की खबरें मीडिया में आए दिन आती रहती हैं। ऐसी घटनाओं पर सरकार और प्रशासन की चुप्पी भी कोई नई बात नहीं है।

वहाँ भले ही इमरान सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है। मगर, वास्तविकता यही है कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों का दमन धड़ल्ले से जारी है। आलम ये है कि अब पाकिस्तान के हालातों से पूरा विश्व वाकिफ हो गया है कि पाकिस्तान वो देश है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता में किसी के जबरन धर्मांतरण का अधिकार भी निहित है।

पाक की मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में सालाना कम से कम 1000 लड़कियाँ इस्लाम कबूलती हैं। इनमें से अधिकांश सिंध में रहने वाली हिंदू समुदाय की होती हैं।

सैकड़ों अपहरण और जबरन धर्मपरिवर्तन के मामले आने के बाद भी पाकिस्तान सरकार का इन मामलों पर कोई एक्शन नहीं है। साल 2016 और 2019 में एक विधेयक लाने की बात जरूर सामने आई थी। जिसमें किसी भी धर्म की आयु सीमा 18 साल तक करने की बात थी। साथ ही उसमें यह भी प्रावधान था कि अगर कोई इसके बाद भी दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भेजा जाएगा और पीड़ित को 21 दिन का समय दिया जाएगा कि वह स्वतंत्र होकर अपना फैसला ले।

मगर, साल 2016 में इस बिल को खारिज करते हुए सिंध के गवर्नर सईदुज्जमां सिद्दीकी ने तर्क दिया कि जब हज़रत अली (सुन्नी संप्रदाय में चौथा ख़लीफ़ा और शिया के लिए पहला इमाम) कम उम्र में परिवर्तित हो सकते हैं (9 वर्ष) तो हिंदू लड़कियाँ क्यों नहीं कर सकती हैं?

यहाँ बता दें इससे पहले सिंध के जकोबाबाद से एक मामला सामने आया था। वहाँ दरअसल, 18 जून को एक नाबालिग हिंदू लड़की का वजीर हुसैन ने अपहरण किया और फिर जबरन धर्मपरिवर्तन करवाकर उससे निकाह भी कर लिया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद, आरोपित पक्ष ने पीड़िता पर दबाव बनाकर एक हलफनामा भी दायर करवाया।जिसमें लड़की की तरफ से कहा गया कि वह 19 साल की है और उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूला है

कॉन्ग्रेस की नगमा के मीम का टीम कंगना ने किया पोस्टमार्टम, कहा- रितिक के साथ जबरन कराई गई थी कृष 3

अभिनेत्री कंगना रनौत खुद सोशल मीडिया पर नहीं हैं। लेकिन उनकी डिजिटल टीम लगातार पोस्ट करती रहती है। अब टीम कंगना रनौत (@KanganaTeam) ने अभिनेत्री से कॉन्ग्रेस नेत्री बनी नगमा के एक मीम के जवाब में सिलसिलेवार ट्वीट किए हैं।

कंगना हाल में बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बेहद मुखर रही हैं। नगमा ने अपने ट्वीट में भाई-भतीजावाद के उनके आरोपों का मखौल बनाया था। इसके जवाब में टीम कंगना ने सिलसिलेवार ट्वीट किए गए। बताया कि आदित्य पंचोली उनके बॉयफ्रेंड नहीं थे।

टीम कंगना ने कहा, “पंचोली कंगना के बॉयफ्रेंड नहीं थे। वह (कंगना) इस बात को कई बार साफ कर चुकी हैं कि शुरू में उनसे वादा किया गया था कि पंचोली उनके मेंटर बनेंगे। लेकिन बाद में वही कंगना को परेशान करने लगे। कंगना जब भी ऑडिशन या फिल्म की शूटिंग के लिए जाती थीं तो वह पीटते थे।”

अगले ट्वीट में कहा गया, “आदित्य पंचोली ने कंगना को अनुराग बसु से नहीं मिलवाया था। यहॉं तक कि अनुराग बसु पंचोली को जानते भी नहीं थे। कंगना ने जब गैंगस्टर फिल्म के लिए ऑडिशन दिया था तब वहॉं नेपोटिजम नहीं था। कंगना का करियर तब बर्बाद हो गया जब काइट्स में उन्हें बैकग्राउंड ऐक्टर बना दिया गया। इसका कारण यह था कि वह कृष नहीं करना चाहती थीं, जिसके लिए उन्हें मजबूर किया गया।”

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में टीम कंगना ने बताया, “कंगना को कोई भी एजेंसी हायर नहीं करना चाहती थी, क्योंकि वह उन शादियों में जाकर नहीं नाचती थीं, जहॉं लोग नोट उड़ाते हैं। वह फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन नहीं करती थीं। इसके बाद रंगोली ने कंगना की डेट्स सॅंभालना शुरू कर दिया जो मुश्किल से अंग्रेजी बोलना भी नहीं जानती थीं। उन्हें इस काम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए उन्होंने वही किया जो एक बहन कर सकती थी। झूठ फैलाना बंद कीजिए।”

इसके पहले कंगना ने रिपब्लिक टीवी में साक्षात्कार के दौरान बॉलीवुड के हालात पर खुल कर बात की थी। उन्होंने जावेद अख्तर, महेश भट्ट, आदित्य चोपड़ा, करन जौहर समेत कई मशहूर बॉलीवुड हस्तियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। महेश भट्ट पर सवाल करते हुए कंगना ने कहा, “वह (महेश भट्ट) क्यों सुशांत की काउंसलिंग कर रहे थे? किसने उन्हें ऐसे बात करने का अधिकार दिया, तुम्हारा अंत नज़दीक है। अगर उन्हें पता था कि सुशांत सिंह अच्छा महसूस नहीं कर रहा है तो उन्होंने इस बारे में सुशांत के पिता को क्यों नहीं बताया? वह रिया और सुशांत के बीच क्या कर रहे थे? सभी जानना चाहते हैं। मुंबई पुलिस महेश भट्ट से सवाल क्यों नहीं कर रही है?”

कंगना ने बताया कि उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ ठुकराने पर आदित्य चोपड़ा ने धमकी दी थी। कंगना ने कहा, “मैंने जैसे ही सलमान खान की सुल्तान के लिए ना कहा, आदित्य ने कहा इसके बाद वह कभी मेरे साथ काम नहीं करेंगे।”

इसके अलावा साक्षात्कार के दौरान कंगना ने एक और अहम बात कही थी। उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस ने उन्हें समन भेजा। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें बताया कि मैं मनाली में हूँ। वह किसी को भेज कर मेरा बयान दर्ज करा सकते हैं लेकिन इसके बाद मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया। मैं खुद स्पष्ट करना चाहती हूँ अगर मैंने कुछ सार्वजनिक रूप से कहा है और मैं इसे साबित नहीं कर सकी तो अपना पद्मश्री लौटा दूँगी।”

अमित शाह का PA बन राजस्थान के मंत्री से माँगी नौकरी, गर्लफ्रेंड के नाम पर सिम लेकर कर रहा था फर्जीवाड़ा

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (23 जुलाई, 2020) को राजस्थान के अलवर जिले से गृह मंत्री अमित शाह के एक नकली पीए को हिरासत में लिया है। संदीप चौधरी नाम का यह शख्स गृहमंत्री का फर्जी पीए बनकर कॉल कर रहा था। अपनी गर्लफ्रेंड के नाम से सिम निकलवा कर नौकरी की जुगाड़ में लगा था।

संदीप चौधरी ने राजस्थान के लेबर मिनिस्टर टीकाराम को अमित शाह का पीए बनकर फोन किया था। उसने एक शख्स को नौकरी पर दोबारा रखवाने के लिए पैरवी की थी। आरोपित ने किसी और कि नहीं बल्कि खुद की ही पैरवी की थी। संदीप एक नामी निजी कंपनी में काम करता था और लॉकडाउन में उसकी नौकरी चली गई थी।

इतना ही नहीं इससे पहले संदीप ने हरियाणा के श्रम मंत्री अनूप धनक को भी फर्जी पीए बन कर फोन किया था। फोन कर के संदीप ने उनसे हरियाणा में अपनी जॉब लगवाने की सिफारिश की थी।

अमित शाह के पीए द्वारा कॉल आने पर, राजस्थान के श्रम मंत्री के कार्यालय से संदीप के बारे में अमित शाह के कार्यालय को जानकारी दी गई। पता चला है कि गृह मंत्री के कार्यालय से ऐसा कोई फोन नहीं किया गया है। फर्जी कॉल की बात पता चलने के बाद अमित शाह के दफ्तर से दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को शिकायत दी गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया और तलाश में जुट गई, जिसके बाद आरोपी को अलवर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

संदीप ने पूछताछ के दौरान बताया कि कोरोना की वजह से उसकी नौकरी चली गई थी। वह बेरोजगार हो गया था। इसके बाद उसने कॉल करने के लिए गर्लफ्रेंड के नाम से MTNL का एक सिम लिया और फिर उसी नंबर से मंत्रियों को कॉल करने लगा। पुलिस ने उसके पास से एक स्मार्टफोन और एक सिम बरामद किया है।

बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी मत दो: समुदाय विशेष से नहीं कह पाया PETA, पुलिस से बकरी बचाने की अपील

पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने हाल ही में गायों के चर्म को हिन्दुओं के त्योहार रक्षाबंधन से जोड़ने की नीचता दिखाई थी। इस षड्यंत्र के नाकामयाब होने के बाद अब अपनी फजीहत छुपाने के लिए बकरीद से पहले जानवरों की हत्या रोकने के लिए ट्विटर पर अभियान चलाया है।

PETA इंडिया के ब्लॉग के अनुसार, संगठन ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखकर, बकायदा ईद तक अवैध परिवहन और जानवरों की हत्या को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया है। पत्र में जानवरों की बलि के बारे में दो बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला गया है।

PETA द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यह कदम निश्चित रूप से इस्लामिक विचारधारा वालों को खुश करने और हाल ही में अपने कारनामों से खोई हुई विश्वसनीयता को फिर से बनाने के लिए किया गया प्रयास मात्र है। दरअसल, कुछ ही दिन पहले PETA ने रक्षाबंधन पर अभियान शुरू किया, जिसमें लोगों से आग्रह किया गया था कि वो गाय के चमड़े की राखी ना पहनें।

हालाँकि, PETA ने अभी भी समुदाय विशेष को माँस छोड़ने के लिए स्पष्ट आग्रह करने की हिम्मत नहीं दिखाई है। जबकि हिंदुओं के विषय में यही PETA अपने त्योहारों को मनाने के तरीके बताता रहता है। अब बकरीद पर अपने नए कैम्पेन में वह ‘अवैध’ परिवहन और हत्या को रोकने के लिए कह रहे हैं।

PETA के इस अस्पष्ट संदेश से साफ़ झलकता है कि उसमें अभी भी इतनी हिम्मत नहीं है कि वह समुदाय विशेष के समक्ष अपने पशु-प्रेम के संदेश को स्पष्ट रूप से रख सके और वह समुदाय विशेष से जानवरों को मारने से रोकने के लिए कह सके।

PETA के ट्वीट के एक रिप्लाई का स्क्रीनशॉट

PETA इंडिया के इस भय पर शेफाली वैद्य, जिन्हें कि हाल ही में PETA द्वारा सिर्फ इस वजह से निशाना बनाया गया था क्योंकि उन्होंने PETA के पूर्वग्रहों को उजागर किया था, ने ट्विटर पर लिखा है कि PETA ‘पुलिस’ की मदद माँग रही है, लेकिन वह अभी तक इतना साहस नहीं जुटा पाया है कि मुस्लिमों से यह स्पष्ट तौर पर कह सके कि इस ईद पर बकरियों की रक्षा करें।

उल्लेखनीय है कि PETA इंडिया पिछले सप्ताह भर हिन्दू धर्म और त्योहारों पर अपने ‘पशु-प्रेम’ को लेकर चर्चा में बना रहा, जिस कारण उसकी खूब फजीहत भी हुई। हिन्दूफोबिक संस्था PETA ने गाय के चित्र वाले उस बैनर से लोगों का ध्यान आकर्षित किया था, जिसमें रक्षाबंधन के दौरान राखी में चमड़े का उपयोग न करने की सलाह दी गई थी।

इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि PETA को यह तक पता नहीं कि रक्षाबंधन में चमड़े का उपयोग नहीं होता है। लोगों ने तो PETA इंडिया से बकरीद पर भी ऐसी ही एक अपील की बात कह कर अपना आक्रोश व्यक्त किया, जिस पर PETA ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं को बेहद घटिया जवाब देकर अपनी संस्था की मंशा को उजागर किया था।

इस विषय पर जब ऑपइंडिया ने PETA इंडिया के इस अभियान की कोऑर्डिनेटर राधिका सूर्यवंशी से सवाल किए तो उन्होंने कहा, “रक्षा बंधन हमारी बहनों की रक्षा का समय है, और गाय हमारी बहनें हैं। हमारी तरह, वे भी रक्त, मांस और हड्डी से बनी हैं और जीना चाहती हैं। हमारा विचार प्रतिदिन गायों की रक्षा करने का है और रक्षा बंधन एक बहुत ही अच्छा दिन है। जिसमें हम आजीवन चमड़े से मुक्त रहने का संकल्प ले सकते है।”

लेकिन, जब सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी समूहों के विरोध के बाद PETA का हिन्दूविरोधी चरित्र सामने आया तो PETA ने बिना किसी बयान और सूचना के यह लेख अब अपनी वेबसाइट से हटा दिया है।

PETA ने रक्षाबंधन पर अपने हिन्दू-विरोधी बैनर के कारण विवादों पर सवाल पूछने वालों को निशाना बनाने का भी प्रयास किया था। शेफाली वैद्य ने PETA से सवाल पूछा था कि ईद के मौके पर कोई ‘एनिमल एक्टिविस्ट’ सेलेब्रिटी ये क्यों नहीं कहता कि आप अपने इगो का त्याग करें, जानवरों को न मारें।

PETA ने माँगी ‘ग़लतफ़हमी’ के लिए माफ़ी

राखी में गाय का माँस इस्तेमाल होने के दुष्प्रचार को फैलाने पर PETA के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रहे व्यापक विरोध का नतीजा यह रहा है कि अब PETA ने आखिरकार अपनी गलती स्वीकार कर गाय और रक्षाबंधन से जुड़े अपने भ्रामक विज्ञापनों को हटाने और उन्हें बदलने की बात कही है। साथ ही, PETA ने कहा है कि वह ‘गलतफहमी’ के लिए माफ़ी माँगता है।

PETA की करतूत पर ऑपइंडिया से शैफाली वैद्य की बातचीत

ऑपइंडिया के साथ शेफाली वैद्य की बातचीत में उन्होंने कहा कि PETA को गाय और रक्षाबंधन में सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि राखियाँ गाय के चमड़े से बनती ही नहीं हैं। इसके साथ ही शेफाली वैद्य ने कहा कि हिन्दुओं के खिलाफ एक बेबुनियाद कैम्पेन चलाने वाले PETA को वास्तविक तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए मुस्लिमों से इस ईद पर बकरी की सुरक्षा करने वाले अभियान चलाने चाहिए। लेकिन PETA ऐसा करने से बच रहा है।

उन्होंने कहा कि PETA इंडिया उनके चैलेंज पर काम करने के बजाए उन्हें ट्रोल करना बेहतर समझा। शेफाली ने PETA पर हिन्दू संस्कृति से जुड़े त्योहारों पर अभियान चलाने के प्रयास किए हैं, जबकि ईद के मौके पर बकरियों के लिए बेहद सावधानी से ‘अवैध’ शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऑपइंडिया सम्पादक अजीत भारती के साथ शेफाली वैद्य के साथ बातचीत इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं –

मनोरजंन के नाम पर हिंदू पहचान और मान्यताओं पर प्रहार: इस मानसिक युद्ध का प्रतिकार जरूरी

सनातनी चेतना को खंडित करने के षड्यंत्र के अंतर्गत घात लगाकर हिन्दू समाज पर प्रहार किया जा रहा है। सनातनी वंशजों के मन मस्तिष्क को प्रभावित किया जा रहा है। आधुनिक युग के विस्मयकारी मोहित करने वाले वस्त्र में छुपा कर सनातनी संस्कृति की चेतना में विषयुक्त सुई निरंतर चुभोई जा रही है। जिससे धीमा-धीमा विष सारी सनातनी चेतना को जड़वत कर दे एवं घाव कभी न भर सके। अंततः प्रहार का प्रतिकार करने की योग्यता ही समाप्त कर दी जाए।

इस षड्यंत्र में प्रहार के भिन्न-भिन्न रूप हैं। सबसे प्रमुख मनोरंजन जगत का घात है। सिनेमा आधुनिक जगत का विलासितापूर्ण उपभोग का साधन है। यह हमारे नाट्य कला एवं मंचन विधा से पूर्णता भिन्न है। आधुनिक सिनेमा भारतीय नाट्य कला एवं मंचन विधा का विकल्प कदापि नहीं हो सकता, क्योकि भारतीय कला एवं मंचन विधा के उद्देश्य, गुणसूत्र, नियम, आचार विहार, सैद्धांतिक मूल्य सभी कुछ भिन्न हैं।

सिनेमा प्रमुख रूप से चार प्रकार के उत्पादों से जनमानस के विचार को प्रभावित करता है। 1. चलचित्र 2. धारावाहिक 3. विज्ञापन 4. आभासीलोक के मकड़जाल से निकले: यूट्यूब , प्राइम चैनल्स, नेटफिल्क्स आदि।सिनेमा के इन सभी माध्यमों का अपना अपना बड़ा दर्शक वर्ग है। बारम्बार एक ही प्रकार के विचार का दृश्यांकन हमारे मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालते हैं। हमारी दैनिक दिनचर्या, अचार-विचार में वह विशेष विचार प्रतिबिम्बित होने लगता है।

एक प्रचलित कहावत है कि सिनेमा समाज का आइना होता है। सामान्य समझ से कहे तो समाज में जो होता है सिनेमा वो ही दिखाता है। परन्तु इस कहावत का प्रभाव ठीक इसके उल्ट है। यहाँ हमे यह समझने की आवश्कयता है कि प्रतिबिम्ब आभासी होता है न की वास्तविक। यह कहावत कुशलता के साथ प्रचारित की गई, जिससे आप विरोधियों द्वारा दिए गए झूठे विचार को सच्चाई समझकर, उसे ही सत्य समझे। आभास एवं वास्तविकता के मध्य दूरी सुप्त दृष्टि से देखने पर अदृश्य लगती है, परन्तु जागृत दृष्टि से देखने पर दोनों का भेद स्पष्ट रूप से समझ आता है।

सिनेमा एक माध्यम मात्र है उसे संचालित एवं प्रभावित करने वाली शक्तियों में हिन्दू विरोधी, देश विरोधी तत्व बैठे हैं। वे सिनेमा के दर्पण को झूठे प्रतिबिम्ब खड़े करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। उन्ही झूठे प्रतिबिम्बों को हम हमारे समाज का प्रतिबिम्ब बता रहे हैं। यह अत्यंत जटिल षड्यंत्र है, जो हिन्दू समाज के मूल्यों को नष्ट करने के लिए रचा जा रहा है।

चलचित्र में कथा, नायक, नायिका एवं खलनायक मूल स्तंभ होते हैं। आप स्वयं निरीक्षण कीजिए सिनेमा के प्रारंभिक काल से वर्तमान समय तक आए परिवर्तन का, तब से अब तक आधुनिकता के आवरण में छुपा कर किस प्रकार सनातनी मूल्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। लेकिन परिवर्तन के नाम पर अपनी मूल पहचान एवं मूल्यों से समझौता कैसे किया जा सकता है। मूल पहचान एवं सनातनी मूल्यों को उसके मूल स्वरुप में ही अगली पीढ़ी को सौंपन हमारा दायित्व है।
लिहाजा, कुछ उदाहरणों से समझते हैं कि कैसे मनोरजंन के नाम पर हमारे मूल्यों को निशाना बनाया जा रहा है।

धारावाहिक: ये जादू है जिन्न का

दृश्यांकन: शर्मा जी के लड़के का मित्र बंटी नायिका को छेड़ता है। हिंसा करने के उद्देश्य से उस पर धावा करता है। उसका पीछा करता है। परन्तु नायक आकर उससे बचा लेता है।

सवाल: जब पूरा धारावाहिक एक विशेष पंथ की पृष्ठभूमि (जो की हिन्दू नहीं है) पर आधारित है, जिसमें हिन्दू का दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं। उसमें ‘शर्मा जी का लड़का’ चरित्र क्यों लेना पड़ा, वह भी नकारात्मक भूमिका से बॅंधा हुआ।

साजिश: ब्राह्मण जाति को नकारात्मक दिखाना, एक विशेष पंथ को सकारात्मक दिखाना।

धारावाहिक: कहाँ तुम, कहाँ हम

दृश्यांकन: एक पागल प्रेमी विवाहित नायिका को अपना बनाने के लिए षड्यंत्र करता है। उस पागल प्रेमी का नाम ‘महेश’ है। उसके कंठ में रुद्राक्ष एवं हाथ पर ॐ का गोदना है। नायिका का मैनेजर जिसका नाम ‘अखिल खान’ है, वह स्त्रियों के साथ सभ्य आचरण करता हुआ दिखाया जाता है। वह एक वाक्य बोलता है “क्या करे अब पंजाबी मॉम को मुस्लिम डैड से प्यार हो गया तो इसलिए ऐसा नाम “अखिल खान”। एक हिन्दू अविवाहित युवती, एक विवाहित युवक के साथ अनैतिक सम्बन्ध रखती है।

सवाल: पागल प्रेमी का नाम हिन्दुओं के देव महादेव के नाम पर ही क्यों रखा गया? उसे हिन्दू चिह्नों से चित्रित क्यों किया गया? अंतरपंथीय विवाह के रूप में, पागल प्रेमी की साधारण कहानी में लव जिहाद को प्रचारित क्यों किया गया? जौहर एवं सतीत्व वाली पतिव्रता स्त्री शक्ति के राष्ट्र में, एक हिन्दू युवती को ही क्यों अनैतिक सम्बन्ध में दिखाया गया? अगर आप इतने ही पंथनिरपेक्ष हैं तो वह लड़की “ग़ैर” हिन्दू क्यों नहीं हो सकती, जबकि एक समुदाय में एक साथ 4-4 बीबी रखने का रिवाज है।

साजिश: लव जिहाद को प्रसारित करना। महादेव के प्रति हिन्दू आस्था पर प्रहार करना। हिन्दू कन्याओं के सनातनी मूल्यों पर प्रहार करना।

धारावाहिक: बेहद

दृश्यांकन: एक बड़ा हिन्दू व्यवसायी जो माँ दुर्गा का भक्त है, कम से कम 4-5 लड़कियों का शारीरिक शोषण करता है। एक श्री कृष्ण की भक्त, हिन्दू व्यवसायी द्वारा शोषित हिन्दू नायिका प्रतिशोध लेने के लिए षड्यंत्र करती है। नायिका हर अपराध का षडयंत्र रचते समय, गीता के श्लोक बोल कर स्वयं को सही जताने की कोशिश करती है। श्री कृष्ण की शनि देव जैसी काली प्रतिमा का पूजन मोमबत्ती से करती है। उस बड़े हिन्दू व्यवसायी से प्रतिशोध लेने के लिए, नायिका उसी के बड़े बेटे के साथ षड्यंत्र के अंतर्गत विवाह करती है और सच्चे प्रेम को दर्शाती है। बाद में उस हिन्दू व्यवसायी और नायिका के दृश्य, बहु एवं ससुर की भॉंति तो सहज नहीं होते। नायिका अपने देवर को भी प्रेम पाश में बाँधती है, उसे आत्महत्या पर विवश करती है। हिन्दू व्यवसायी की पत्नी सब कुछ जानती है, लेकिन उसके लिए मात्र पैसा और रुतबा मायने रखता है। हिन्दू व्यवसायी का सबसे विश्वासपात्र एक “ग़ैर” हिन्दू नाम वाला “आमिर” है।

सवाल: हलाला जैसे प्रथा की पृष्ठभूमि वाली कहानी को हिन्दू आवरण क्यों पहनाया गया? गैर हिन्दू नाम “आमिर” ही विश्वासपात्र क्यों लिया गया? सतीत्व वाली पतिव्रता स्त्री एवं यशोदा माँ जैसे स्त्री शक्ति के राष्ट्र में, एक हिन्दू माँ एवं स्त्री को क्यों इतना “रुतबा” प्रेमी दिखाया गया, जो अनैतिक सम्बन्ध भी स्वीकार कर लेती है? श्री कृष्णा का पूजन दीपक के स्थान पर मोमबत्ती से कब से होने लगा, ये तो ग़ैर हिन्दू, जो क्रॉस को मानते हैं उनकी रीति है। यौन शोषक माँ दुर्गा का भक्त क्यों?

साजिश: हलाला प्रथा की स्वीकारोक्ति बढ़ाना, हिन्दू मूल्यों के प्रति झूठ प्रचारित करना। माँ दुर्गा, श्री कृष्णा के प्रति हिन्दू आस्था पर प्रहार करना। हिन्दू स्त्रियों के सनातनी मूल्यों पर प्रहार करना। “आमिर” के समुदाय को सकारात्मक दिखाना।

धारावाहिक: गुड्डन तुमसे ना हो पायेगा

दृश्यांकन: फिल्म का अधेड़ नायक 18 वर्ष की एक कन्या का पिता है, लेकिन एक 21 वर्ष की नायिका से विवाह करता है। एक और अधेड़ हिन्दू चरित्र कलवा और रुद्राक्ष माला हाथ में पहन मदिरा पान करता है। नायक की 18 वर्षीया बेटी अपने ही परिवार के विरोध षड्यंत्र करती है। पिता के अधेड़ मित्र पर रेप का आरोप लगाकर उससे विवाह रचाती है। घर पर पत्रकार बुला कर परिवार का तिरस्कार करती है।

सवाल: अपवाद को छोड़े तो सामान्य परिस्थिति में इतनी आयु अंतर का विवाह हिन्दू धर्मानुसार कदापि नहीं है। एक “ग़ैर” हिन्दू समुदाय विशेष में 12-13 वर्ष की बच्ची के साथ निकाह का प्रचलन जरूर है। हिन्दू चिह्नों के साथ नकारात्मक किरदार क्यों, जबकि हिन्दू नायक कभी ऐसे चिह्नों के साथ नहीं दिखता।

साजिश: हिन्दू समाज और मूल्यों पर प्रहार करना। अतार्किक अनुपयुक्त अस्वीकार्य आयुभेद के विवाह का हिन्दू समाज में प्रचार करना।

धारावाहिक: पटियाला बेब्स

दृश्यांकन: पंजाबी पृष्ठभूमि की कहानी है। एक स्त्री को उसका पति धोखा देता है। विदेश में दूसरा विवाह कर लेता है। सम्बन्ध विछेद होता है, वो फिर स्वाभिमान से खड़ी होती है। इसमें एक नइबी नामक “ग़ैर” हिन्दू पड़ोसी दादी का चरित्र है। वह स्वभाव से बहुत अच्छी है और हरसंभव सहायता करती है। जबकि अपनी हिंदू सास पुत्र मोह में साथ देने में विलंबर करती है। मोहल्ले की अन्य हिन्दू स्त्रियॉं भी नायिका पर ताने मारती रहती हैं।

सवाल: जब पंजाबी पृष्ठभूमि की कहानी है, तो उसमे नइबी नामक “ग़ैर” हिन्दू चरित्र क्यों गढ़ा गया?

साजिश: हिन्दू अवचेतन मस्तिष्क में “ग़ैर” हिन्दू चरित्र को सकारात्मकता के साथ जोड़ना।

धारावाहिक: नाटी पिंकी की लम्बी लव स्टोरी

दृश्यांकन: एक ब्राह्मण समाज का अध्यक्ष जो हर क्षण मर्यादा सम्मान की बात करता है, अपने परिवार की किसी भी स्त्री को अधिकार नहीं देता। यहाँ तक की अपनी माँ को भी नहीं। परिवार की स्त्रियों से अपेक्षा रखता है कि वो हमेशा एक प्रकार के बॅंधे हुए आचरण में ही जिए। अपनी बेटी का विवाह अपनी जाति के एक अवैध सम्बन्ध रखने वाले लालची परिवार के लड़के से करता है। अपनी बड़ी स्वर्गवासी बेटी को घर से निकाल देता है, जब वो एक दूसरी जाति के मद्रासी लड़के से प्रेम विवाह कर लेती है, कभी नहीं अपनाता।

सवाल: इसकी पृष्ठभूमि ब्राह्मण ही क्यों चुनी गई। क्या सामाजिक सम्मान “ग़ैर” ब्राह्मण या “ग़ैर” हिन्दू समुदाय में प्रतिष्ठा विषय नहीं होता। मद्रास में ब्राह्मण नहीं होते हैं क्या। “ग़ैर” हिन्दू पंथ में जहाँ फ़ोन पर सन्देश से ही तलाक दे दिया जाता है, उस पर चुप्पी क्यों। यहाँ तक की बहु बेगम धारवाहिक में दो निकाह को भावुकता के आवरण से सिद्ध किया गया है।

साजिश: ब्राह्मण समाज को नकारात्मक रूप में दिखाना। उत्तर भारत–दक्षिण भारत में जाति के नाम पर द्वेष बढ़ाना। पितृसत्ता का भ्रम बनाना।

धारावाहिक: दिल जैसे धड़के धड़कने दो

दृश्यांकन: देवगुरु नामक चरित्र देवी को तलाश रहा। उसे अपनी देवी एक छोटी बच्ची में मिलती है। वह देवी मंत्र का छाती पर गोदना बनाकर घूमता है। एक चालाक स्त्री उसकी अनुयायी है, जो दान का दुरुपयोग करती है। उसके अधिकतर भक्त पढ़े लिखे उच्च पद के लोग हैं। देवगुरु मासिकस्त्राव वाली स्त्री को पारम्परिक नियमों को तोड़ने के लिए बढ़ावा देता है। एक मित्र उस देवगुरु को मानसिक बीमार मानता हैं। देवगुरु छोटी बच्ची को सन्यांसी देवी बनाने को आतुर है। छोटे बच्चों का एक जोड़ा ऐसे दर्शाया जा रहा है जैसे बचपन से प्रेम का अंकुर फूट रहा है।

सवाल: देवगुरु का चरित्र सद्गुरु से मिलता जुलता ही क्यों लिया गया। हमारे तप साधना के नियम, अचार विहार आदि को इतने निम्न स्तर पर चालाकी से दिखाया गया कि ज्ञान के आभाव में दर्शक उन्हें ही सत्य मान ले। बालरूप में देवी बनाने की प्रथा जो अब समाप्त हो चुकी है उसे क्यों दिखाया जा रहा है, उस परंपरा के मूल सिद्धांत को समझे बिना ही। बच्चों के जोड़े में भाई बहन का प्रेम क्यों नहीं दिखाया जा सकता? हिन्दू मंत्रों के उच्चारण का नियम तरीका होता है, उन्हें “पॉप” गीत की भॉंति क्यों बजाना?

साजिश: हिन्दू संत गुरुजन को मानसिक बीमार दिखाना। चालक चोर या राजनीति करनेवाला बता कर हिन्दू समाज में भ्रम बढ़ाना। भारतीय मूल्यों–परम्पराओं को उल्टा-सीधा प्रस्तुत कर उनका महत्व कम करना।

ये तो महज कुछ उदाहरण हैं सनातनी समाज की चेतना पर घात करने के। इस मानसिक युद्ध का प्रतिकार बेहद जरूरी है, क्योंकि हमारे हिन्दू समाज के एक अत्यंत छोटे धड़े में इसके लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। नासूर बनने से पूर्व ही समय पर इसकी चिकित्सा अत्यंत आवश्यक है।

वीभत्स वीडियो: घर के अंदर की वो जगह जहाँ शमशाद ने हिंदू माँ-बेटी को गाड़ दिया, अपने रिस्क पर देखें!

उत्तर प्रदेश के मेरठ से डबल मर्डर का एक मामला सामने आया है। यहाँ शमशाद (कल तक मीडिया रिपोर्ट में दिलशाद लिखा गया था) नामक व्यक्ति ने प्रिया नाम की महिला और उसकी मासूम बेटी की हत्या कर दोनों ही लाश घर में ही दबा कर फरार हो गया था।

इस मामले में पुलिस ने आरोपित शमशाद पर 25000 हज़ार रुपए का इनाम रखा था। पुलिस ने अब उसे गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है उसने पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश की तो पुलिस ने आरोपित शमशाद को मुठभेड़ के बाद फिर से धर दबोचा है।

रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (22 जुलाई, 2020) को पकड़े जाने के बाद शमशाद किसी तरह पुलिस हिरासत से बच निकला था। जिसके बाद पुलिस को सुबह 3.30 बजे शमशाद को लेकर सूचना मिली। पुलिस ने तुरंत इस पर कार्रवाई करते हुए ब्रह्मपुरी के नूर नगर के मोड़ पर आरोपित शमशाद को घेर लिया। पुलिस से घिरता देख शमशाद ने उन पर गोली चला दी।

मुठभेड़ में शमशाद घायल हो गया। पुलिस ने घायल हत्या आरोपित को गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। साथ ही पुलिस ने उसके पास से एक बाइक, पिस्टल और कारतूस बरामद किया है। वहीं यूपी पुलिस ने अब आरोपित का घर भी बुलडोजर से ढहा दिया है।

घटनास्थल पर पुलिस ने जब माँ और बेटी की लाश को आरोपित के घर से बरामद किया था, उस वक्त की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह वीडियो वीभत्स है, इसलिए इसे अपने रिस्क पर ही देखें।

वॉर्निंग: नीचे 2 मिनट 9 सेकंड का वीडियो है, वीभत्स है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला यह है कि प्रिया गाजियाबाद की रहने वाली थी। 12 साल पहले उसकी शादी मोदीनगर के खंजरपुर निवासी राजीव से हुई थी। लेकिन, 2 साल के बाद ही दोनों में तलाक हो गया। प्रिया की दोस्ती 2013 में अमित गुर्जर नामक युवक से हुई थी। ये दोस्ती प्यार में बदल गई।

अमित के बुलावे पर प्रिया अपनी 2 साल की बेटी को लेकर मेरठ भी चली गई। इसके 5 साल बाद प्रिया को कुछ ऐसा पता चला, जिससे उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई। दरअसल, अमित गुर्जर के छद्म नाम से प्रिया को फाँसने वाले का असली नाम शमशाद था। अपने प्रेमी के बारे में हुए इस खुलासे से प्रिया सन्न रह गई।

गौरतलब है कि पीड़िता प्रिया किस तरह से शमशाद के झाँसे में आई, इस बारे रिपोर्ट के अनुसार यह सामने आया है कि प्रिया 2010 से ही मोदीनगर की चंचल चौधरी के साथ रहती थी। वहीं उसने ब्यूटी पार्लर खोल रखा था। यहीं फेसबुक पर उसकी अमित गुर्जर नामक व्यक्ति से दोस्ती हुई।

इसके बाद अमित ने शादी का झाँसा देकर प्रिया को मेरठ बुलाया था। यहाँ दोनों कांशीराम आवासीय कॉलोनी में रहते थे। यहाँ आने के बावजूद उसकी चंचल से बात होती रहती थी, इसीलिए चंचल को उसकी कहानी के बारे में सब कुछ पता था। शमशाद (अमित गुर्जर) परतापुर स्थित भूड़ बराल का निवासी है। वो प्रिया को जानबूझ कर अपने घर नहीं ले गया था।

2 साल पहले प्रिया को अमित की सच्चाई के बारे में पता चला था और उसके बाद दोनों में जम कर विवाद हुआ था। एक तो उसने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाई थी और ऊपर से वो शादीशुदा भी था।

प्रिया ने 2018 में खरखौदा थाने में बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज कराया था। मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि इस मामले में दोनों के बीच समझौता हो गया था। शमशाद का आरोप है कि युवती मुक़दमे के बाद से उससे रुपए वसूल रही थी।

चंचल ने इस मामले में 15 अप्रैल को परतापुर थाने में तहरीर दी थी। आरोप लगाया गया था कि चंचल से पुलिस ने समझौतानामा लिखवा दिया लेकिन बजरंग दल और विहिप के प्रयासों के बाद एसएसपी को इस मामले से अवगत कराया गया था।

हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया था। चंचल ने बताया कि 28 मार्च को उन दोनों के बीच आखिरी बातचीत हुई थी। उसके बाद चंचल ने शमशाद को फोन किया तो उसने बताया कि प्रिया ख़ुद कहीं चली गई है।

RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने बैंकिंग गड़बड़ी के लिए UPA सरकार को ठहराया दोषी: आने वाली किताब कई खुलासे की उम्मीद

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने ‘ओवरड्राफ्ट: सेविंग द इंडियन सेवर’ नामक एक किताब लिखी है, जो इस महीने (24 july, 2020) को रिलीज़ होगी। इस किताब के जरिए उर्जित पटेल ने पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) पर आए संकट के लिए यूपीए सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार रिस्क कंट्रोल बनाने या पर्याप्त प्रबंधन सुनिश्चित करने में विफल रही है।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने अपनी नई किताब में लिखा है, “सरकार उन बैंकों के लिए पर्याप्त पूँजी सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार है जो स्थाई /सस्टेनेबल आधार के दायरे में हैं। 2014 से पहले के डॉमिनेंट ओनर ने डिविडेंड के लालच में सरकारी बैंकों में जोखिम को काबू करने को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया। हालात इतने खराब थे कि कई सरकारी बैंकों में वरिष्ठ प्रबंधन तक नहीं था। जिसके चलते उन्हें गवर्नेंस की कमी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे लिखा कि यह नौकरशाही जड़ता और राजनीतिक मध्यस्थता के कारण एक निरंतर कमी बनी रही।

2016 में आरबीआई गवर्नर के रूप में नियुक्त किए गए उर्जित पटेल को विशेष रूप से पब्लिक सेक्टर बैंकों में बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते एनपीए की वजह से जबरदस्त चुनौती का सामना करना पड़ा था। वित्त वर्ष 2014 में जो ग्रॉस एनपीए 3.8 प्रतिशत पर था। वो बढ़ते हुए वित्त वर्ष 2018 में 10.5 प्रतिशत पहुँच गया था।

उर्जित पटेल ने आरबीआई की भूमिका पर भी किया सवाल

आरबीआई के पूर्व गवर्नर पटेल ने अपनी किताब में, 2014 से पहले बुरे ऋणों की पहचान करने में आरबीआई की विफलता पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा कि 2014 तक रिजर्व बैंक की ओर से बैंकिंग सिस्टम में बढ़ते एनपीए को मॉनिटर करने और उसे कंट्रोल करने में पूरी तरह से फेल रहा। उन्होंने कहा कि उस वक्त आरबीआई बैंकिंग लेवल पर बढ़ते स्ट्रेस को बता पाने में पूरी तरह से विफल रहा।

उन्होंने आगे लिखा कि स्केल ऑफ एक्सपोज़ या रिस्क बिल्ड-अप – पर्याप्त रूप से काम नहीं किया गया। इसके साथ नियामक द्वारा लोन के मानदंडों को प्रभावी ढंग से कमजोर भी किया गया। ये उन्होंने बढ़ती पूंजीगत आवश्यकताओं से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर रिस्क वेट बढ़ाकर किया।

वे लिखते हैं, “सेंट्रल बैंक ने बिल्ड-अप रिस्क की पहचान की थी, उदाहरण के लिए, विभिन्न क्षेत्रों को आवंटित रिस्क रेट को बढ़ाते हुए, यह कर्ज देने के मानदंडों को सख्त कर सकता था।”

अपनी नई किताब में, उर्जित पटेल ‘9R रणनीति’ के बारे में लिखा है। जो जमाकर्ताओं की बचत की रक्षा करेगा, बैंकों को बचाएगा और उन्हें “अनस्क्रुपलस रैकेटियर” से बचाएगा। साथ ही प्रकाशक की वेबसाइट पर दिया गया एक नोट यह भी कहता है, “उर्जित पटेल ने एनपीए की गड़बड़ी को साफ कर दिया होता, अगर उन्हें रोका नहीं जाता।”

पटेल ने 11 दिसंबर, 2018 को निजी कारणों का हवाला देते हुए RBI गवर्नर का पद छोड़ दिया था। बता दें, उन्हें हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है।

ईसाई बन रहे रोहिंग्या और अफगान मुस्लिम, पर क्या मिलेगा CAA का फायदा, बन जाएँगे भारतीय नागरिक?

भारत में रह रहे अफगान और रोहिंग्या मुस्लिम नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का फायदा लेने के मकसद से ईसाई बन रहे हैं। उनका मानना है कि इससे भारतीय नागरिकता लेने की उनकी राह आसान हो जाएगी।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम से वाकिफ केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार को अवगत कराया है कि अफगान मुस्लिमों के ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लगभग 25 मामले हाल में सामने आए हैं।

दक्षिणी दिल्ली में एक अफगान चर्च के प्रमुख, आदिब अहमद मैक्सवेल ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि सीएए के बाद, धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले अफगान मुस्लिमों की संख्या में तेजी आई है।

CAA रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय नागरिक नहीं बनाता

यहाँ यह बताना आवश्यक है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ था। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धार्मिक उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता प्रदान करता है।

चूँकि, रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं, जिन्होंने बांग्लादेश के माध्यम से भारतीय भूमि में प्रवेश किया है, इसलिए भारत सरकार ने उन्हें स्वीकार करने और उन्हें भारतीय नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। इस प्रकार से भारत रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से भी बाध्य नहीं है।

पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक (जो कि अब अधिनियम बन चुका है) बहस के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने देश में रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून भारत पर एक संप्रभु देश के रूप में बाध्यकारी नहीं होंगे।

भारत रोहिंग्या मुस्लिमों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है

भारत शरणार्थियों पर हुए 1951 के कन्वेंशन, और न ही 1967 के किसी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। इसलिए, कोई भी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। इसके बावजूद कि भारत अंतरराष्ट्रीय समझौतों को ध्यान में रखता है। रोहिंग्या आर्थिक लाभ हेतु भारत पहुँचने के लिए बांग्लादेश को एक सुरक्षित ठिकाने की तरह इस्तेमाल करते आए हैं। इस प्रकार, यह स्पष्ट रूप से, भारत में प्रवेश करने पर उन्हें आर्थिक प्रवासी बनाता है, ना कि अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़ित प्रवासी।

अफगान मुस्लिम और रोहिंग्या भारत में अवैध रूप से रहते आए हैं

चूँकि इन अवैध अप्रवासियों को पता है कि उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी, इसलिए वे अब ईसाई धर्म अपना रहे हैं। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 150,000-160,000 अफगान मुस्लिम रहते हैं।

इसके अलावा, आधिकारिक अनुमान बताते हैं कि लगभग 40,000 रोहिंग्या मुस्लिम पूरे भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या जम्मू और कश्मीर में है। इन प्रवासियों की एक बड़ी तादाद 2012 से पहले भारत में रह रही है और अब ईसाई धर्म अपनाते हुए बांग्लादेश से होने का दावा कर रही है।