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अमित गुर्जर बन कर शादीशुदा दिलशाद ने प्रिया को फाँसा, राज खुलने पर 2 साल की बेटी सहित कर दी हत्या

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक मामला सामने आया है, जहाँ दिलशाद नामक व्यक्ति ने प्रिया नाम की महिला और उसकी मासूम बेटी की हत्या कर दी। साथ ही दोनों ही लाश घर में ही दबा दी। पुलिस ने लाशों को बरामद कर दिलशाद को गिरफ्तार कर लिया है। प्रिया गाजियाबाद की रहने वाली है। 12 साल पहले उसकी शादी मोदीनगर के खंजरपुर निवासी राजीव से हुई थी। लेकिन, 2 साल के बाद ही दोनों में तलाक हो गया।

‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित सचिन गुप्ता की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, प्रिया की दोस्ती 2013 में अमित गुर्जर नामक युवक से हुई थी। ये दोस्ती प्यार में बदल गई। अमित के बुलावे पर प्रिया अपनी 2 साल की बेटी को लेकर मेरठ भी चली गई। इसके 5 साल बाद प्रिया को कुछ ऐसा पता चला, जिससे उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई। दरअसल, अमित गुर्जर के छद्म नाम से प्रिया को फाँसने वाले का असली नाम दिलशाद था।

अपने प्रेमी के बारे में हुए इस खुलासे से प्रिया सन्न रह गई। इससे पहले ख़बर आई थी कि प्रिया और उसकी मासूम बेटी लापता है। पुलिस ने दिलशाद को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू की तो वो मामले को इधर-उधर घुमाने में लगा रहा लेकिन पुलिस को पहले ही आशंका थी कि कोई अनहोनी हो चुकी है। केस के खुलासे के लिए सीओ के नेतृत्व में पुलिस की कई टीमें लगी हुई थीं। प्रिया 2010 से ही मोदीनगर की चंचल चौधरी के साथ रहती थी।

वहीं उसने ब्यूटी पार्लर खोल रखा था। फेसबुक पर ही उसकी अमित गुर्जर नामक व्यक्ति से दोस्ती हुई। अमित ने शादी का झाँसा देकर प्रिया को मेरठ बुलाया था। यहाँ दोनों कांशीराम आवासीय कॉलोनी में रहते थे। यहाँ आने के बावजूद उसकी चंचल से बात होती रहती थी, इसीलिए चंचल को उसकी कहानी के बारे में सब कुछ पता था। दिलशाद परतापुर स्थित भूड़ बराल का निवासी है। वो प्रिया को जानबूझ कर अपने घर नहीं ले गया था।

2 साल पहले प्रिया को अमित की सच्चाई के बारे में पता चला था और उसके बाद दोनों में जम कर विवाद हुआ था। एक तो उसने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाई थी और ऊपर से वो शादीशुदा भी था। प्रिया ने 2018 में खरखौदा थाने में बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज कराया था। मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि इस मामले में दोनों के बीच समझौता हो गया था। दिलशाद का आरोप है कि युवती मुक़दमे के बाद से उससे रुपए वसूल रही थी।

चंचल ने इस मामले में 15 अप्रैल को परतापुर थाने में तहरीर दी थी। आरोप लगाया गया है कि चंचल से पुलिस ने समझौतानामा लिखवा दिया लेकिन बजरंग दल और विहिप के प्रयासों के बाद एसएसपी को इस मामले से अवगत कराया गया। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया। चंचल ने बताया कि 28 मार्च को उन दोनों के बीच आखिरी बातचीत हुई थी। जहाँ चंचल ने दिलशाद को फोन किया तो उसने बताया कि प्रिया ख़ुद कहीं चली गई है।

‘क्या यही है रामराज्य’, ‘संघियों ने मारा’ चिल्लाने वाले, ‘कमालुद्दीन के बेटे’ के हत्यारा होने पर बिलबिलाए

गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या के बाद वामपंथियों को जैसे अपना प्रोपगेंडा चलाने के लिए कोई लाइफलाइन मिल गई हो। इस समय सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से विक्रम जोशी के हत्या मामले में शामिल आरोपितों के नाम लिख-लिख कर शेयर किए जा रहे हैं और ये समझाने की कोशिश चल रही है कि उनको मारने के पीछे हाथ बहुत लोगों को था। इस कोशिश में यह भी समझाया जा रहा है कि भाजपा समर्थक, एएनआई और ऑपइंडिया ने इसमें सिर्फ़ कमालुद्दीन के बेटे का नाम हाइलाइट करके इसे गलत एंगल दे दिया।

अपने इसी प्रोपगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए वामपंथी गैंग के जाने-माने नाम विनोद कापड़ी आगे आए। कापड़ी वैसे तो झूठ का कारोबार करने के कारण लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता लगभग खो ही चुके हैं। मगर, फिर भी संबित पात्रा के ट्वीट पर जाकर उन्हें समझा रहे हैं कि अब तक हिरासत में लिए गए आरोपितों का नाम रवि, छोटू उर्फ़ शहनूर (कमालुद्दीन का लड़का),आकाश भारती, मोहित, शाकिर, दलबीर, अभिषेक, मोहित, जोगेंद्र है। लेकिन भारत की सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता को बस कमालुद्दीन का लड़का दिख रहा है।

इसके अलावा अनुराग कश्यप हैं। जो पालघर मामले में भी समुदाय विशेष से जुड़े एक व्यक्ति का नाम सुन भर लेने से अपील करने चले आए थे कि इस मामले को कम्युनल एंगल न दें। लेकिन साधुओं की हत्या पर बिलकुल चुप हो गए थे। वही अनुराग इस मामले में कमालुद्दीन के बेटे का नाम बताने पर लिए ANI की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हैं।

अनुराग, आरिफ शाह नामक यूजर के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हैं। जिसमें बताया जा रहा है कि इस केस में आरोपितों के कई सारे नाम हैं। फिर भी एएनआई केवल कमालुद्दीन के नाम के पीछे पड़ा है।

इसके बाद संजुकता बासु भी अपने ट्वीट में एएनआई की खबर को देख कर उस पर इल्जाम मढ़ती हैं कि उन्होंने इस खबर को हिंदू मुस्लिम एंगल दिया।

वे अपने ट्वीट में एएनआई की वीडियो पर बात करते हुए ऑपइंडिया की रिपोर्ट का भी जिक्र करने से नहीं चूकती और लिखती हैं कि जैसे ही एएनआई ने वीडियो डाली, वैसे ही ऑपइंडिया ने इस पर अपनी न्यूज कर ली। अपने ट्वीट में वो ऑपइंडिया को झूठी खबरें फैलाकर नफरत भड़काने वाला बताती हैं।

ऐसे ही राजदीप सरदेसाई। राजदीप अपने ट्वीट में लिखते हैं कि इस मामले में पूरे 10 लोगों पर एफआईआर हुई है। लेकिन कुछ लोग सिर्फ़ अपना नैरेटिव बढ़ाने के लिए एक-दो लोगों का नाम लेंगे। इसलिए सभी आरोपित पक़ड़े जाने चाहिए और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।

गौरतलब हो कि ये सब केवल कुछ चुनिंदा नाम हैं जो कमालुद्दीन के लड़के शाहनूर मंसूरी का नाम आ जाने के बाद से सक्रिय हैं। इनके अलावा सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों और वामपंथियों को मिलाकर ये सूची बहुत लंबी है, जो केवल एक नाम पर इतना आहत हैं कि वो बाकी 9 आरोपितों का नाम भी लिख-लिख कर बता रहे हैं। तो क्या इसको किसी की मंशा पर शक करना नहीं कहा जाएगा?

ऑपइंडिया ने तो केवल उस बयान पर रिपोर्ट की, जिसे एएनआई ने साझा किया। और एएनआई ने भी वही दर्शाया, जो पत्रकार के भांजे ने कहा। इस केस में किसी ने कमालुद्दीन के बेटे को अपनी मर्जी से आरोपित नहीं बनाया है। उसके ख़िलाफ़ उस लड़के ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसकी बहन को उसने रॉड मारी और मामा को सरेआम गोली।

इस बात से तो कोई इंकार नहीं कर रहा कि इस केस में बाकी आरोपितों का हाथ नहीं था। लेकिन लोग केवल शाहनूर का नाम उजागर कर रहे हैं क्योंकि वो पत्रकार विक्रम जोशी की भाँजी को अपने दोस्त के साथ मिलकर छेड़ता था। विक्रम जोशी ने तो इसका विरोध भी किया था।

हमारी संवेदनाएँ मृत पत्रकार के परिवार से है और हमारे भीतर भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब शिकायत की गई तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई। हमने वो वीडियो देखी है, जिसमे विक्रम की बहन अपने भाई के गम में बेसुध रोए जा रही है। हमें भी मालूम है कि बेटी के सामने पिता की हत्या सीना चीरने वाली घटना है। हम भी चाहते हैं विक्रम जोशी को इंसाफ मिले और सभी आरोपितों को सख्त से सख्त सजा हो। जो बाबू नाम का लड़का नहीं पकड़ा गया है, वो भी पकड़ा जाए और उस पर भी कार्रवाई हो।

लेकिन, इस बीच में इस बात से कैसे इंकार करें कि मृतक के भाँजे ने बाकायदा ये कहा है कि उसके मामा के साथ जो किया गया, वो सब किया धरा कमालुद्दीन के बेटे यानी शाहनूर का था। वीडियो में लड़का कह तो रहा है कि उसके साथ रवि भी था। मगर कमालुद्दीन ने ही उसकी बहन के सिर पर रॉड मारी थी और बाद में उसके मामा को गोली। फिर एएनआई से, ऑपइंडिया से या भाजपा से दिक्कत क्या है। एएनआई ने इसमें क्या और कैसे कम्युनल एंगल निकाला? या ऑपइंडिया ने इस पर रिपोर्ट की तो क्या गलत किया? क्या लड़का नहीं बोलता वीडियो में ‘कमालुद्दीन का बेटा’!

इसलिए, लिबरल भाजपा प्रवक्ता को दोष दें या आम जनता को… इस बात से मना नहीं कर सकते हैं कि लोगों ने जिस मामले को हाईलाइट किया है, वो पीड़ित परिवार की आवाज है। कोई खुद से गढ़ा गया नैरेटिव बिलकुल नहीं। अगर नैरेटिव होता तो इस नैरेटिव में शकीर का नाम भी उछलता। कहीं मिला ढूँढने पर शकीर? वो उसी सूची में है जहाँ रवि, आकाश समेत बाकी अभियुक्तों के नाम हैं।

ANI हो या ऑपइंडिया या कोई अन्य… जिन सबने इस मामले में एक भी जगह पर कमालुद्दीन के बेटे का नाम लिया है और उसे मुख्य आरोपित बताया है तो उसका आधार कहीं घृणा फैलाने का नहीं है, बल्कि घृणा फैलाने वाले का नाम उजागर करना है।

एक बात और… इस मामले में जानकारी रखिए कि उस पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है जिस पर विक्रम जोशी की तहरीर पर सुनवाई न करने का आरोप लगा। इसके वाला ये भी बात जान लीजिए कि पुलिस ने पकड़ा 9 आरोपितों को है। मगर हथियार शाहनूर के पास से बरामद हुए हैं। जिनमें .315 बोर की पिस्टल है, एक जिंदा कारतूस है और एक कारतूस का खोला है।

…आवाज लगा घर से बाहर बुलाया, फिर मंदिर ले जाकर रेत दिया जमशेदपुर में BJP नेता का गला

झारखंड के जमशेदपुर के बिरसानगर थाना क्षेत्र के एक अस्पताल के पास मंगलवार (जुलाई 21, 2020) की देर रात भाजपा नेता और अधिवक्ता प्रकाश यादव की निर्ममता से हत्या कर दी गई। प्रकाश यादव अभी हाल ही में झारखंड विकास मोर्चा छोड़कर अभय सिंह के साथ भाजपा में शामिल हुए थे।

मंगलवार की रात को करीब सवा 11 बजे तीन हत्यारे पैदल चलकर आए और प्रकाश यादव को आवाज देकर घर से बुलाया। उसके बाद बात करते हुए उन्हें हरि मंदिर चबूतरे के पास ले गए।

घर से महज 100 मीटर की दूरी पर प्रकाश यादव की निर्ममता से हत्या कर दी गई। परिवार वालों के मुताबिक दोस्तों ने फोन कर उन्हें बुलाया था और बिरसानगर हरि मंदिर के पास सात से आठ लोगों ने कुल्हाड़ी, तलवार और चाकू से हमला कर गला रेत दिया। जहाँ उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अपराधियों ने बीजेपी नेता पर चाकुओं से अनगिनत वार किया। इसके बाद उनका गला रेता और मरने तक बदमाश वहीं थे।

घटना के बाद सभी अपराधी मौके से भागने में सफल रहे। परिजनों ने बिरसानगर के जमीन माफिया अमूल्या कर्मकार और गौतम व उनके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया है।

मौके पर सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट, सिटी डीएसपी अनुदीप सिंह, टेल्को थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारी पहुँचे। बाद में आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर लोगों ने हंंगामा किया और शव उठाने से पुलिस को रोक दिया। फिर गिरफ्तारी का आश्वासन के बाद शव उठाया गया। 

सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट ने कहा कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। वारदात में शामिल किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा।

अमूल्या कर्मकार विधायक सरयू राय के करीबी माने जाते हैं, जो बिरसानगर भारतीय जन मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं। मृतक प्रकाश यादव की पत्नी चाँदनी देवी ने बताया कि उन्होंने किसी को देखा नहीं। बस बाहर से आवाज आई और प्रकाश बाहर चले गए। उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई।

बता दें कि मृतक प्रकाश के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पाँच साल का है और छोटा बेटा एक साल का है। इसके अलावा तीन साल की एक बेटी भी है।

बीजेपी नेता के मामा ने बताया कि प्रकाश यादव ने उस इलाके में जमीन माफिया के खिलाफ मोर्चा भी खोल रखा था। सरकारी जमीन का जो भी अतिक्रमण कर उसे बेचने की कोशिश करता था, प्रकाश यादव उसके खिलाफ थाने में जाकर सीधा आवेदन दे देते थे और पुलिस से कार्रवाई की माँग करते थे।

प्रकाश यादव जमीन माफिया के विरुद्ध सोशल मीडिया में लगातार पोस्ट भी डाल रहे थे, जिन्हें लेकर उनको धमकियाँ मिलती रहती थी। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता अभय सिंह ने तुरंत ही एसएसपी तमिलवानन से बात की और उनसे माँग की कि इस घटना में जो भी व्यक्ति लिप्त है, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

अभय सिंह का कहना है कि इस घटना में पर्दे के पीछे से खेल खेला गया है और बड़ी हस्ती इसमें शामिल है। बताया जा रहा बिरसा नगर इलाके के एक बीघा जमीन को लेकर विवाद हुआ था जिसमें एक बड़े अधिकारी का पैसा लगने की बात सामने आई थी।

इस मामले को लेकर प्रकाश यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट भी किया था। इसे लेकर भी तनाव बना हुआ था। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि जिस इलाके में बीजेपी नेता की हत्या हुई, उस जगह पर लोगों का आना-जाना लगा रहता था, लेकिन बदमाशों ने हत्या करने से पूर्व पूरे इलाके की लाइट बुझा दी। जिसके बाद अंधेरे में इस वारदात को अंजाम दिया गया। लोगों का कहना है कि घटना से लगभग 20 मिनट पहले ही इस पूरे इलाके में लाइट चली गई थी जबकि यहाँ से सटे दूसरे इलाके में बिजली थी।

‘अमिताभ से पहले कंगना को होना चाहिए कोरोना, वो डिजर्व करती है’ – कॉमेडियन सिद्दार्थ डुडेजा का वीडियो वायरल

सिद्दार्थ डुडेजा नाम के एक तथाकथित कॉमेडियन का मानना है कि कोरोना वायरस को अमिताभ बच्चन के परिवार से पहले कंगना रनौत को अपना शिकार बनाना चाहिए था। अभिनेत्री कंगना रनौत बॉलीवुड में व्याप्त नेपोटिज्म के खिलाफ बोलने के कारण अभी तक बॉलीवुड के ही कुछ बड़े नामों के निशाने पर थी लेकिन अब वो कुछ स्वघोषित कॉमेडियंस के भी निशाने पर हैं।

ट्विटर पर प्लाकार्ड नाम से जाने जाने वाले मधुर ने इस तथाकथित कॉमेडियन सिद्दार्थ डुडेजा का वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है – “कॉमेडियन सिद्दार्थ डुडेजा चाहता है कि कंगना रनौत को कोरोना हो जाए। ये लोग कितना नीचे गिर सकते हैं?”

दूसरे ट्वीट में मधुर ने लिखा है – “सिद्दार्थ ने इन्स्टाग्राम से यह वीडियो डिलीट कर दिया है लेकिन अगर कंगना रनौत इस पर कोई कानूनी कार्रवाई करना चाहती हैं तो सिद्दार्थ द्वारा सार्वजनिक रूप से पोस्ट किया गया यह वीडियो उनके पास मौजूद है।”

इस वीडियो में सिद्दार्थ डुडेजा कह रहा है – “नेपोटिज्म बॉलीवुड में बड़ी समस्या है। जैसे- अमिताभ ने COVID अभिषेक, ऐश्वर्या और आराध्या को दिया जबकि हम सब जानते हैं कि इसकी ज्यादा जरूरत कंगना को है और वो इसे डिजर्व करती है।”

सिद्दार्थ डुडेजा ने लोगों के विरोध के बाद अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से यह वीडियो डिलीट कर दिया है क्योंकि वह सार्वजानिक जगह पर किसी व्यक्ति के मरने या संक्रमित होने की कामना कर रहा है, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई है।

इस स्वघोषित कॉमेडियन सिद्दार्थ की ‘कॉमेडी’ की जरा सी पड़ताल करने पर पता चलता है कि हर दूसरे स्वघोषित ‘वोक-लिबरल कॉमेडियन’ की तरह ही सिद्दार्थ डुडेजा ने भी गाय और हिन्दुओं की आस्था को निशाना बनाकर कॉमेडियन कहलाने का प्रयास किया है।

सिद्दार्थ के ‘कॉमेडी शो’का शीर्षक ही इसमें की गई कॉमेडी का परिचय देता है

इस ‘कॉमेडी शो’ में वो कहता देखा जा सकते है कि भारत में गाय सरकारी नौकरी कर रही है, जबकि विदेशों में कम दूध देने वाली गाय का सेंडविच बना दिया जा सकता है। इस वीडियो में सिद्दार्थ का कहना है कि भारत की गायों में दूध कम या ज्यादा देने को लेकर कोई खौफ नहीं है जबकि स्विट्जरलैंड की गाय अपने बच्चों से कहती हैं कि उन्हें दूध देना ही होगा।

गौरतलब है कि अभिनेत्री कंगना रनौत आजकल सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में बाहरी लोगों के संघर्ष पर मुखर होकर बयान दे रही हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि वो सुशांत सिंह को लेकर कही बातों को साबित ना कर सकीं तो वो अपना पद्मश्री पुरस्कार भी लौटा देंगी।

कंगना के इन्हीं बयानों के कारण उन्हें सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड के अभिनेत्रियों द्वारा भी निशाना बनाया जा रहा है, जिनमें कि एक नया नाम तापसी पन्नू का भी है, जो कि अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने ‘बेफिटिंग रिप्लाई’ के लिए जानी जाती हैं।

अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर ED की छापेमारी: UPA काल में किसानों की सब्सिडी का खाद एक्सपोर्ट कर दिया था

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर बुधवार (जुलाई 22, 2020) को छापेमारी की है। ये मामला फर्टीलाइजर स्कैम से जुड़ा हुआ है। बुधवार को इस मामले में पूरे देश भर में कई ठिकानों पर छापेमारी चली। इसी क्रम में ED द्वारा अग्रसेन गहलोत के संदिग्ध ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। वो अशोक गहलोत के बड़े भाई हैं। उन पर 2017 में ही भाजपा ने फर्टीलाइजर स्कैम के आरोप लगाए थे।

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ के घर भी ED की एक टीम पहुँची और छापेमारी की। अग्रसेन की दुकानों और उनके प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई। उनके जोधपुर स्थित सम्पत्तियों की ईडी ने तलाशी ली। उनकी ‘अनुपम कृषि’ नाम की दुकान है, जहाँ वो 1980 से पहले से ही फर्टीलाइजर का व्यापार करते आ रहे हैं। दुकान के ऊपर ही उनके भाई अशोक गहलोत का चुनावी कार्यालय है।

चुनावों के दौरान ये कार्यालय अक्सर गुलजार रहता है क्योंकि अशोक गहलोत यहीं से नामांकन भरने जाते हैं। सामने टेंट लगाया जाता है, जहाँ समर्थकों का जुटान होता है और ऊपर से अशोक गहलोत जनता को सम्बोधित करते हैं। जोधपुर में अग्रसेन गहलोत की कई दुकानें हैं और उनका घर भी है। चूँकि, जाँच की आँच अब गहलोत परिवार तक पहुँची है, तो कॉग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि जब 2007-09 में यूपीए की सरकार थी, तब अग्रसेन गहलोत ने सब्सिडी वाले फर्टीलाइजर का एक्सपोर्ट किया था। पिछले सप्ताह भी सरकारी एजेंसियों ने कुछ ठिकानों की तलाशी ली थी। जयपुर में अशोक गहलोत के बेटे वैभव से जुड़ी कंपनी के ठिकानों को तलाशा गया था। हालाँकि, अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस इसे बदले की राजनीति बताते हुए इसके लिए भाजपा को दोषी ठहरा रहे हैं।

ऑपइंडिया ने अपनी एक ख़बर में बताया था कि जहाँ एक तरफ राहुल गाँधी किसानों के हमदर्द बन कर उभरने की कोशिश कर रहे हैं, गुजरात कॉन्ग्रेस के प्रभारी रहे अग्रसेन गहलोत के फर्टीलाइजर स्कैम का सामने आना उनकी योजनाओं पर पानी फेर सकता है। अग्रसेन ने खाद बनाने के लिए आई सामग्रियों का गलत इस्तेमाल किया जबकि ये किसानों के लिए थे। यानी, गरीब किसानों की जगह प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया।

दस्तावेजों के हवाले से हमें बताया था कि जब जयपुर मे अशोक और दिल्ली में मनमोहन राज कर रहे थे, तब बेखौफ अग्रसेन गहलोत ने किसानों के लिए आया कितने ही टन पोटास को एक्सपोर्ट कर दिया और शिपिंग बिल में इसे नमक बताया। साथ ही उसकी वैल्यू भी गलत बताई गई। साथ ही उन्होंने सारे पेमेंट्स कैश में किए, जिससे उसका रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा गया। जबकि अग्रसेन का कहना है कि बिचौलियों ने उनसे किसानों के लिए खाद खरीदा।

इसके बाद भाजपा ने भी ऑपइंडिया की ख़बर का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस पर निशान साधा था। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस किसानों की बातें करती फिरती है, वहीं दूसरी तरफ उसके नेता किसानों की सब्सिडी खा जाते हैं। उन्होंने इसे सब्सिडी की चोरी करार दिया था। उन्होंने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की भी आशंका जताई थी। अब इसकी जाँच में गहलोत फँसते दिख रहे हैं।

‘प्रशांत भूषण पर अदालत की अवमानना का केस क्यों नहीं चले?’ – सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ प्रशांत भूषण के आपत्तिजनक ट्वीट पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए। अब मामले में अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की तीन जजों वाली बेंच ने 22 जुलाई को एडवोकेट प्रशांत भूषण और ट्विटर इंडिया के खिलाफ कोर्ट केस की अवमानना याचिका पर सुनवाई की।

अपडेट: हम प्रशांत भूषण के वो ट्वीट हटा रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रकाशित करना भी परोक्ष रूप से कोर्ट की अवमानना के दायरे में ही आता है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को अदालत की अवमानना का केस दर्ज कर लिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने भूषण के साथ-साथ ‘ट्विटर इंडिया’ पर भी मुकदमा दर्ज किया था।

इसके बाद आज 22 जुलाई को इस मामले पर सुनाई हुई। सुनवाई में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को भी नोटिस जारी कर मामले में सहयोग करने को कहा गया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्विटर से पूछा कि अवमानना की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी उसने खुद से ट्वीट क्यों नहीं डिलीट किया।

इस पर ट्विटर की ओर से पेश वकील साजन पोवैया ने कहा, “अगर अदालत आदेश जारी करती है तो ही ट्वीट डिलीट हो सकता है। वो (कंपनी) अपने आप किसी ट्वीट को डिलीट नहीं कर सकता है।” कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सही पक्ष कैलिफोर्निया की ट्विटर इंक है, ट्विटर इंडिया नहीं।

उल्लेखनीय है कि अवमानना कार्यवाही का कारण वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा किए गए 2 ट्वीट हैं। ये ट्वीट 27 जून और 29 जून को किए गए थे। एक ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा था। साथ ही कहा था कि खासकर पिछले 4 मुख्य न्यायधीशों ने देश का लोकतंत्र ध्वस्त करने में अपनी भूमिका निभाई है।

वहीं दूसरे ट्वीट में वर्तमान सीजेआई की बाइक के साथ तस्वीर पर सवाल उठाए थे। इन ट्विट्स के बाद ट्विटर पर काफी विवाद उत्पन्न हुआ था। उल्लेखनीय है कि विवादित अधिवक्ता प्रशांत भूषण न्यायपालिका पर लगातार हमले कर रहे हैं।

अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

कॉन्ग्रेसी CM के हैलीकॉप्टर को शाही जीप से मारी थी टक्कर, पुलिस ने कर दी थी राजा मानसिंह की हत्या: 11 को आजीवन कारावास

जयपुर के राजा मानसिंह की हत्या मामले में मथुरा कोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों को दोषी माना है और 3 को बरी कर दिया। इस मामले में अदालत ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को दोषियों को सज़ा सुनाई। आरोपित पुलिसकर्मी फिलहाल जेल में हैं। राजा मानसिंह की हत्या 1985 में हुई थी। इस हिसाब से घटना के 35 साल बाद कोर्ट सज़ा सुनाने जा रही है। आइए, समझते हैं क्या है पूरा घटनाक्रम।

कोर्ट ने इस मामले में 11 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। 35 सालों बाद इस फेक एनकाउंटर केस में न्याय हुआ है, जिसके लिए राजा मानसिंह की बेटी और उनके दामाद संघर्ष कर रहे थे। दोषी पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास मिला है।

इसकी शुरुआत होती है फ़रवरी 20, 1985 से। राजा मानसिंह तब भरतपुर के पूर्व राजा और तत्कालीन मानद राजा थे। उन्होंने तत्कालीन राजस्थान सीएम और कॉन्ग्रेस नेता शिवचरण माथुर की हैलिकॉप्टर को अपनी शाही जीप से टक्कर मार दी थी, जिसके बाद पूरा विवाद शुरू हुआ। दरअसल, माथुर के समर्थकों ने जहाँ सीएम की सभा थी, वहाँ राजा की रियासत के झंडे उखाड़ दिए थे। ये मामला कोर्ट भी पहुँचा था।

भरतपुर के डीग में मानसिंह की अच्छी-ख़ासी धाक थी। उन्होंने जैसे ही कॉन्ग्रेसियों द्वारा अपना झंडा उखाड़े जाने की खबर सुनी, वो अपनी जोंगा जीप से सभास्थल की ओर कूच कर गए। वो सीधे वहाँ पहुँच गए जहाँ मुख्यमंत्री का हैलीकॉप्टर लगा हुआ था और जीप से उसे टक्कर मार दी। हैलीकॉप्टर जीप की टक्कर से क्षतिग्रस्त भी हो गया। हालाँकि, तब तक मुख्यमंत्री वहाँ से निकल चुके थे। वो मंच की ओर थे।

इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के मंच तक पहुँचने से पहले ही जीप से उनके मंच को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने इसके लिए सीएम के सुरक्षा घेरे को भी तोड़ दिया। इसके बाद माथुर ने टूटे जीप से ही सभा को संबोधित किया। पुलिस ने राजा मानसिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। अगले दिन वो जैसे ही कुंडा चुनाव कार्यालय से डीग थाने के सामने से गुजरे, सीओ कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र द्वारा पुलिस वाहन को जोगा जीप के सामने खड़ा कर मार्ग अवरुद्ध दिया गया।

इसके बाद लोगों को सिर्फ़ फ़ाइरिंग की आवाज सुनाई दी, क्या हुए ये किसी ने नहीं देखा। तब तक पुलिसकर्मियों ने राजा मानसिंह की हत्या कर दी थी। शाही जोगा जीप में राजा मान सिंह, सुम्मेर सिंह और हरी सिंह की लाशें पड़ी हुई मिली थीं। एसएचओ वीरेंद्र सिंह ने इस हत्याकांड के बाद उल्टा राजा के दामाद विजय सिंह सिरोही के खिलाफ धारा-307 (हत्या की कोशिश) की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।

उनके दामाद और साथी बाबूलाल को गिरफ्तार तक कर लिया गया था। हालाँकि, उसी रात उनकी जमानत भी हो गई थी। राजा का अंतिम-संस्कार भी महल के भीतर ही किया गया था। कहा जाता है कि जब उनकी हत्या की गई, तब वो कोर्ट में आत्मसमर्पण करने जा रहे थे। सिरोही ने ही अगले दिन राजा की हत्या का मामला दर्ज कराया था। जयपुर की सीबीआई अदालत में इस मामले की सुनवाई चली।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले को मथुरा हस्तांतरित कर दिया गया था। 1990 से ये मामला मथुरा में ही चल रहा है। 1985 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने थे, जब ये घटना हुई। उस समय मुख्यमंत्री को सभा बीच में भी छोड़ कर जाना पड़ा था, जिस कारण उन्होंने पुलिसकर्मियों को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। ये मामला काफी दबाव के बाद भरतपुर से निकल कर जयपुर और फिर मथुरा पहुँचा था।

जाटलैंड‘ की मानें तो मुख्यमंत्री माथुर ने राजपरिवार पर कटाक्ष किया था और साथ ही प्रतिकूल टिप्पणी करनी प्रारम्भ कर दी थी, जिससे राजा आग-बबूला हुए थे। साथ ही वो अपना झंडा-बैनर फाड़े जाने के कारण अपमानित भी महसूस कर रहे थे। मुख्यमंत्री के समर्थकों ने उन पर बेहूदा टिप्पणी की थी। इसके बाद सीएम माथुर की इतनी किरकिरी हुई थी कि उनसे आलाकमान ने इस्तीफा ले लिया।

पत्रकार विक्रम जोशी हत्याकांड: मुख्य आरोपित शाहनूर मंसूरी गिरफ्तार, पुलिस ने बरामद किया .315 बोर पिस्टल

गाजियाबाद के विजय नगर में पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या के बाद अब इस मामले में 9 लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इनमें 3 मुख्य आरोपित हैं और 6 उनके साथी हैं। एक आरोपित अब भी फरार है। कुल दस लोगों की इस मामले में संलिप्ता पाई गई है। मुख्य आरोपितों की पहचान रवि, आकाश नाथ, शाहनूर मंसूरी उर्फ छोटू के रूप में हुई है।

इन तीनों के अलावा जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके नाम शकीर, मोहित, दलवीर, अभिषेक सरोज, अभिषेक जनवाल और जोगेंद्र हैं। इनका एक बाबू नाम का साथी अभी फरार है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि कमालुद्दीन पुत्र शाहनूर मंसूरी के पास से पुलिस ने .315 बोर की एक पिस्टल बरामद की है। इसके अलावा एक जिंदा कारतूस और एक कारतूस का खाली खोला भी बरामद हुआ है।

यहाँ बता दें कि इससे पहले पत्रकार विक्रम जोशी के भांजे ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन के जन्मदिन पर उसके मामा उसे लेकर घर जा रहे थे। तभी ‘कमालुद्दीन के बेटे’ ने सिर पर जोर की रॉड मारी। इससे उसकी बहन नीचे गिर गई।

इसके बाद आरोपितों ने पत्रकार विक्रम जोशी को गोली मार दी। भांजे ने ये भी आरोप लगाया कि पत्रकार को गोली मारने से पहले उनकी जम कर पिटाई की गई। भांजी और बेटी के सामने ही उन्हें मार डाला गया। उनकी हत्या हुई है।

मृतक के भांजे ने बताया था कि बहन से छेड़छाड़ मामले में उन्होंने पुलिस में तहरीर भी दी थी, लेकिन पुलिस-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं की। विक्रम जोशी ने गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में दम तोड़ा।

इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि पहले तो उनके साथ मारपीट की गई है, उसके बाद गोली मारी गई। इस मामले में सम्बंधित चौकी इंचार्ज को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया।

जिसे दिल्ली CM दे रहे श्रद्धांजलि, उनकी माँ ने कहा – ‘मेरी बेटी की हत्या में केजरीवाल की जाँच करे CBI’

कोरोना महामारी के समय में दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कल हर घर तक राशन पहुँचाने का निर्णय लिया। अपनी मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने घर-घर राशन योजना शुरू करने का ऐलान किया।

इस घोषणा के साथ ही उन्होंने एक आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि दी। कार्यकर्ता वो, जिनका निधन साल 2013 में एक सड़क दुर्घटना के बाद हो गया था। नाम है- संतोष कोली।

दिल्ली सीएम ने अपने ट्वीट में दावा किया कि संतोष कोली पर लगातार कुछ गुंडे हमला कर रहे थे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हालाँकि संतोष की माता इस बारे में कोई और ही कहानी बताती हैं।

यहाँ बता दें कि संतोष कोली अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू किए गए परिवर्तन नाम के एनजीओ की पहली कर्मचारी थीं। उस समय वे सरकारी नौकरी करती थीं, लेकिन वे सामाजिक संगठनों के साथ जुड़कर काम भी करती थीं। उन्होंने मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल की एक दूसरी एनजीओ Public Cause Research Foundation में भी काम किया था।

संतोष कोली ने इसके अलावा न्यूज लॉन्ड्री के अभिनंदन शेखरी के साथ भी काम किया था। मगर, 7 अगस्त 2013 को वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। जिसके बाद उनके परिजन व कुछ AAP सदस्यों ने संदेह जताया कि हो सकता है कि संतोष की हत्या की गई हो।

हालाँकि साल 2017 में उनकी माता ने एक वीडियो रिलीज किया। जहाँ वह अपने हाथ में एक प्लाकार्ड लिए नजर आईं। इस प्लाकार्ड में उन्होंने अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं पर आरोप लगाया था कि वे कोली की हत्या को दुर्घटना बताकर लीपा-पोती कर रहे हैं।

वीडियो में संतोष की माँ कहती हैं कि संतोष को केजरीवाल के बारे में कुछ ऐसी बातें पता थीं, जिसके कारण वे उनसे ठीक से बात नहीं करते थे। वे आगे कहती हैं कि जिस दिन संतोष की मौत हुई, उस दिन वह ऑफिस नहीं जाना चाहती थी। मगर उसे जबरन ले जाया गया। वंदना और कुलदीप उसे ऑफिस ले गए। वो भी उसकी स्कूटी से नहीं। बल्कि कुलदीप की बाइक से, जो एक्सीडेंट में जल गई।

उनका कहना है कि उन्होंने कभी बाइक को ऐसे राख बनने तक जलते नहीं देखा। दुर्घटना में ड्राइवर भी बिन हताहत हुए भाग गया और कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं रहा। तब हर किसी ने कहा कि संतोष को मारा गया। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और गोपाल राय ने तब मामले की जाँच का वादा भी किया था। इसके बाद बहुत सारा पैसा संतोष के इलाज के नाम पर एकत्रित हुआ। पर, वो कहाँ है, ये किसी को नहीं मालूम।

आगे संतोष की माँ ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में FIR की जानकारियों से उन्हें दूर रखा गया, उनके बयान भी दर्ज नहीं हुए। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस वीडियो में संतोष की माँ दावा करती हैं कि अरविंद केजरीवाल ने उन्हें कहा था कि उनके सामने वे संतोष का नाम दोबारा न लें और जाँच से भी मना कर दिया था।

वे आरोप लगाती हैं कि उनकी बेटी की मृत्यु के बाद, परिवार को उसकी स्मृति में आयोजित शोक सभा में भाग लेने से रोक दिया गया था। वे बताती हैं, “हमारे लिए सभी दरवाजे बंद थे। आज हमारे परिवार में हर कोई मानता है कि उसकी हत्या कर दी गई थी। हम जोर देकर कहते हैं कि सीबीआई से केजरीवाल की हत्या में शामिल होने की जाँच हो।”

राष्ट्रपति भवन ने सोनिया के लिए बदला प्रोटोकॉल और बदल दी गई NDTV रिपोर्ट: वहीं के पत्रकार की किताब में खुलासा

The Indian Newsroom नाम की एक किताब है। NDTV समाचार चैनल के पूर्व कर्मचारी द्वारा लिखी गई है। इस किताब में कॉन्ग्रेस और मीडिया के बीच उस वक्त के तमाम बड़े खुलासे किए गए हैं। किताब को उस संदीप भूषण ने लिखा है, जिन्होंने इस समाचार चैनल में लम्बे समय तक काम किया है।

इस किताब में एनडीटीवी और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के बीच मधुर संबंधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। किताब यहाँ तक दावा करती है कि यह चैनल महज़ कॉन्ग्रेस का समर्थन ही नहीं करता बल्कि पार्टी के भीतर भी अच्छी भली सक्रियता रखता है।

किताब के 110वें पन्ने पर संदीप भूषण एनडीटीवी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हैं। वह लिखते हैं कि एनडीटीवी समेत इसके तमाम कर्मचारी बस वही ख़बरें चलाते थे, जिनसे कॉन्ग्रेस पार्टी को फ़ायदा होता।

जब राष्ट्रपति भवन ने सोनिया के लिए बदला प्रोटोकॉल

यूपीए-1 के दौर में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और सोनिया गाँधी पार्टी मुखिया, तभी संदीप के एक सहकर्मी ने रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में यह बताया गया था राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में हुए शपथग्रहण के दौरान प्रोटोकॉल्स ही बदल दिए गए थे, ताकि सोनिया गाँधी न सिर्फ उस कार्यक्रम का हिस्सा बन पाएँ बल्कि उन्हें पहली पंक्ति में बैठने की जगह भी मिले।

हैरानी की बात यह हुई कि इस रिपोर्ट को चैनल ने सिरे से खारिज कर दिया। जिसके बाद रिपोर्ट तैयार करने वाले संदीप के सहकर्मी ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया। हालाँकि इस एक्सक्लुसिव खबर को खारिज करने की कोई वजह तब के संपादकों ने उस रिपोर्टर को कभी नहीं बताई।

इसके अलावा संदीप भूषण ने एनडीटीवी के कई वरिष्ठ कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ वरिष्ठ पत्रकार कॉन्ग्रेस पार्टी में इतना उलझे रहते थे कि वह चुनाव के दौरान महीनों तक गाँधी परिवार के पीछे भागते हुए बिता देते थे।

नटवर सिंह को हटाने के लिए NDTV ने चलाया कैंपेन

कॉन्ग्रेस पार्टी और एनडीटीवी के बीच संबंधों पर संदीप भूषण ने कई बड़े खुलासे किए और ऐसा ही एक खुलासा था नटवर सिंह को लेकर। अपनी किताब के 117वें पन्ने पर उन्होंने दावा किया कि एनडीटीवी की ख़ास ‘वोल्कर रिपोर्ट’ की वजह से नटवर सिंह को कैबिनेट से हटाया गया। लेकिन यह ‘वोल्कर रिपोर्ट’ आम रिपोर्ट नहीं थी बल्कि इसके पीछे कॉन्ग्रेस की एक पूरी लॉबी थी।

संदीप भूषण ने किताब में लिखा है कि साल 2005 में एनडीटीवी के भीतर एक अलग टीम तैयार की गई थी। जिसकी अगुवाई सोनिया सिंह और बरखा दत्त कर रही थीं। इस टीम ने सिरे से अभियान चलाया, जिससे नटवर सिंह को कैबिनेट से बाहर निकाला जा सके। तभी ऐसी ख़बरें चलाई गईं कि वह संयुक्त राष्ट्र के ऑइल फॉर फ़ूड प्रोग्राम के अंतर्गत अवैध रूप से ईराक का कच्चा तेल बेचने में शामिल थे।

इस घटना से एक बात साफ़ हो गई थी कि एनडीटीवी सिर्फ कॉन्ग्रेस के पक्ष में ही काम नहीं कर रहा था बल्कि उसकी पार्टी के भीतर भी अहम भूमिका है।

संदीप भूषण ने लिखा है कि बही और खातों की औसत समझ और जानकारी रखने वाले एक रिपोर्टर को इसके लिए रखा गया था। बाकी के रिपोर्टर्स को भी हर दिन इससे जुड़ी ख़बर खोजने के लिए भेज दिया जाता था। किताब में इस बात का अच्छे से उल्लेख किया गया है कि कैसे हर दिन सम्पादकीय टीम की बैठक सिर्फ इस बात पर केन्द्रित होती थी कि ‘किस तरह नटवर सिंह को कैबिनेट से बाहर निकलवाया जाए।’

हद तो तब हो गई जब नटवर सिंह को कैबिनेट से निकाला गया। अमूमन किसी मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के लिए किसी मंत्री को भ्रष्टाचार मामले में रिपोर्टिंग के दम पर कैबिनेट से निकलवा देना बड़ी सफलता मानी जाती है और वो इसे सार्वजनिक (बड़ी खबर, बड़ा असर… जैसे शब्दों के साथ) भी करते हैं। लेकिन एनडीटीवी के इस कैम्पेन का नाम तो दूर, कहीं ज़िक्र तक नहीं आया।

नटवर सिंह के खिलाफ एनडीटीवी का यह कैम्पेन उस वक्त उभर कर सामने आया, जब यहाँ के एक सम्पादक ने इस मामले को तूल दिया। यही सम्पादक नटवर सिंह की बहू नताशा से जुड़े आत्महत्या के मामले की तहकीकात में भी शामिल थे।

नटवर सिंह ने अपनी आत्मकथा “One Life is not enough” में उन ताकतों को दोष देते हैं, जो उनके साथ हुए गलत व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार थे। वह अपनी किताब में लिखे हैं, “मीडिया ने पहले ही तय कर लिया था कि मैं दोषी हूँ, यह पंक्ति उनके ज़हन में कुछ दिग्गज मंत्रियों के द्वारा भरी गई थी।”

जब राजदीप ने बोला – बदल दो रिपोर्ट

इसके अलावा संदीप भूषण ने राजदीप सरदेसाई पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि राजदीप सरदेसाई किसी रिपोर्टर को कॉन्ग्रेस से जुड़ी निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता करने का मौक़ा ही नहीं देते थे। एक बार तो खुद संदीप की रिपोर्ट राजदीप ने बदलवाई थी।

संदीप भूषण ने लिखा है, “मुझे याद है कि साल 2005 के दौरान मैं सोनिया गाँधी के आवास पर एक लाइव शो कर रहा था। उस रिपोर्ट में इस बात की जानकारी थी कि झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल सिब्ते राज़ी ने संविधान की अवहेलना की। जिसे देखते ही राजदीप सरदेसाई ने पूरी तरह बदलने का निर्देश दे दिया। और तो और, राजदीप सरदेसाई ने ठीक मेरे पीछे खड़े होकर अंत तक निगरानी रखी कि मैं उनके बताए हुए बदलाव कर रहा हूँ या नहीं।”