गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी को सरेआम गोली मार दी गई, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। बुधवार (जून 22, 2020) की सुबह ख़बर आई है कि इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। वो अपनी भांजी के साथ हो रहे छेड़छाड़ का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद आरोपितों ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। उनकी बेटी के सामने ही उनके सिर में गोली मारी गई थी।
अब विक्रम जोशी के भांजे ने कहा है कि परिवार तब तक मृत शरीर को स्वीकार कर के उसका अंतिम संस्कार नहीं करेगा, जब तक सारे आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता। भांजे ने कहा कि इसी इलाक़े के कुछ लोग उसकी बहन के साथ छेड़छाड़ करते थे, कमेंट करते थे और जबरन प्रोपोज करना चाहते थे। उसने बताया कि सब कुछ ‘कमालुद्दीन के बेटे’ का किया धरा है। उसके एक साथी का नाम अभिषेक है।
मृतक विक्रम जोशी के भांजे ने कहा कि परिवार को सच चाहिए। उसने बताया कि उसकी बहन के जन्मदिन पर मामा उसे लेकर घर जा रहे थे, तभी ‘कमालुद्दीन के बेटे’ ने सिर पर जोर की रॉड मारी। इससे उसकी बहन नीचे गिर गई। इसके बाद आरोपितों ने गोली मार दी। भांजे ने ये भी आरोप लगाया कि पत्रकार को गोली मारने से पहले उनकी जम कर पिटाई की गई। भांजी और बेटी के सामने ही उन्हें मार डाला गया। उनकी हत्या हुई है।
Some boys including Kamal-ud-Din’s son used to eve-tease my sister. It was her b’day when incident occured. My uncle was coming home with her when Kamal-ud-Din’s son attacked him&shot him. We’ll not accept my uncle’s body till main accused is caught: Journalist Vikram’s nephew pic.twitter.com/IdDhXC9qnt
मृतक के भांजे ने बताया कि उन्होंने पुलिस में तहरीर भी दे रखी है लेकिन पुलिस-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विक्रम जोशी ने गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में दम तोड़ा। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि पहले तो उनके साथ मारपीट की गई है, उसके बाद गोली मारी गई। इस मामले में सम्बंधित चौकी इंचार्ज को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया।
हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वो 9 आरोपितों को गिरफ़्तार कर चुकी है। परिजनों ने 3 नामजदों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। विक्रम जोशी के परिजनों का कहना है कि उनकी भांजी पर अश्लील टिप्पणियाँ भी की जाती थीं। उन्होंने इस घटना को लेकर पहले ही विजयनगर थाने में तहरीर दे रखी थी। बताया गया है कि उनके द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराने के कारण ही आरोपित नाराज़ थे।
उत्तराखंड के हरिद्वार में एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की का अपहरण और बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया है। मामला कनखल थाना क्षेत्र का है। आरोपित मुस्लिम समुदाय का है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने न्याय की माँग करते हुए इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने थाने में भी हंगामा भी किया। जिसके बाद पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपित को पकड़ कर जेल भेज दिया गया है। दो समुदायों का मामला होने के कारण इलाके में तनाव है।
पीड़ित नाबालिग है, जो 9 जुलाई को ही लापता हो गई थी। इस मामले में पीड़ित के परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में पीड़ित परिवार ने मुस्लिम समुदाय के एक युवक पर आरोप लगाया था।
थाने में दी गई शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि उक्त आरोपित किशोरी को बहला-फुसला कर ले गया है। हिंदुवादी संगठन बजरंग दल को जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, उसके कार्यकर्ताओं ने किशोरी की बरमदगी के लिए विरोध प्रदर्शन किया।
चूँकि, ये मामला एकदम संवेदनशील था, इसीलिए पुलिस सावधानी से पीड़िता की तलाश कर रही थी। इसी दौरान पता चला कि उक्त किशोरी को मेरठ में रखा गया है, जिसके बाद पुलिस ने एक टीम गठित कर वहाँ भेजी।
पुलिस टीम ने मेरठ जाकर नाबालिग पीड़िता को बरामद किया और साथ ही आरोपित को भी गिरफ्तार किया। ‘नवभारत टाइम्स’ की ख़बर के अनुसार, थानाध्यक्ष विकास ने बताया कि पीड़िता ने बलात्कार का आरोप लगाया है।
आरोप है कि उक्त युवक ने न सिर्फ़ नाबालिग लड़की का अपहरण किया बल्कि जबरदस्ती उसके साथ शादी भी कर ली और फिर बलात्कार किया। पीड़िता के बयान के बाद पुलिस ने इस मामले में दर्ज की गई धाराएँ बढ़ा दी हैं। किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। साथ ही आरोपित युवक को भी जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में आगे की कार्रवाई में लगी हुई है।
‘लाइव हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, आरोपित युवक का नाम अनस है। उसके अब्बू का नाम अब्दुल हामिद है। 17 वर्षीय पीड़िता को उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित अनूप नगर के फाजलपुर से बरामद किया गया। स्थानीय हिंदूवादी नेताओं का आरोप है कि अनस पीड़िता को जबरन उठा कर घर से ही ले गया था। हिंदूवादी नेताओं ने इस घटना में उसके साथियों के संलिप्त होने की भी आशंका जताई है।
झारखंड में धनबाद के जोड़ापोखर थाना क्षेत्र के जियलगोरा में कुछ दिन पहले एक हिंदू महिला से छेड़खानी का मामला सामने आया। वहाँ सोमवार (जुलाई 20, 2020) के दिन शिव मंदिर जाती हुई महिला पर दूसरे समुदाय के कुछ लड़कों ने फब्तियाँ कसनी शुरू की और महिला के विरोध करने पर उसकी पिटाई भी की।
इस घटना में महिला बुरी तरह घायल हो गई। मामला दो समुदाय से जुड़ा होने के कारण इलाके में तनाव फैल गया। परिजनों व स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना जोड़ापोखर पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर लोगों को शांत कराने का पूरा प्रयास किया। घटना की शाम डीएसपी एके सिन्हा ने भी पहुँचकर थाना प्रभारी से घटना के बारे में जानकारी ली। बाद में पूरे क्षेत्र में पुलिस की तैनाती कर दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस में अभी तक जिन आरोपित युवकों के नाम शिकायत लिखी गई है, उनकी पहचान सद्दाम अंसारी, रियाज, नसरुद्दीन, मिटू अंसारी, शहादत, शाहिल, कैफ, शहबत व मोइनुद्दीन के पुत्र के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स में इनमें से कुल 4 लोगों को हिरासत में बताया जा रहा है।
हालाँकि ऑपइंडिया ने इस संबंध में जब जोड़ापोखर थाना क्षेत्र में बात की तो पुलिस ने बताया कि मामले में 8 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। जिसके बाद अभी केवल शहादत अंसारी नाम का आरोपित हिरासत में लिया गया है और बाकियों के लिए छापेमारी चल रही है। आज शहादत अंसारी को जेल भेजा जाएगा।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट की मानें तो घटना के बाद थाना प्रभारी सत्यम कुमार ने मौके पर पहुँचकर जख्मी महिला को इलाज के लिए चासनाला अस्पताल भेज दिया था। लेकिन इसके बाद दोनों तरफ से ईंट-पत्थर चलने लगे। कई लोग लाठी, डंडे लेकर घर से निकल गए। अनेक लोग चोटिल हुए। इस घटना के बाद यहाँ के दो समुदाय के लोगों में तनाव व्याप्त है।
इस मामले में दूसरे पक्ष यानी सद्दाम की माँ अनु परवीन ने थाना में ऑनलाइन मामला दर्ज करवाया है। उनका आरोप है कि उनका बेटा शिव मंदिर के पास अपने दोस्तों के साथ पबजी खेल रहा था। तभी कुछ युवक उनके खिलाफ फब्तियाँ कसने लगे।
इस दौरान उनके पुत्र ने उन युवकों का विरोध किया तो उन्हें चाकू दिखाकर मारपीट करते हुए पेट्रोल छिड़ककर जला देने की धमकी दी गई। धमकी देने वाले युवकों में राजकुमार साव, राजू साव, अमरजीत साव, सुनील साव आदि युवक शामिल थे। हालाँकि ऑपइंडिया ने जब इस काउंटर केस के बारे में पुलिस से पूछा तो उन्होंने ऐसे किसी भी केस के दर्ज होने से मना कर दिया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पीड़ित महिला गीता देवी ने भी अपना बयान दर्ज कराया है। लेकिन उनका बयान और सद्दाम की माँ की शिकायत (जिसे मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है) में बहुत अंतर है।
पीड़ित महिला ने अपने बयान में कहा है कि वो सोमवार की शाम शिव मंदिर में पूजा करने जा रही थीं। तभी दूसरे समुदाय के युवकों का समूह पीपल पेड़ के नीचे बैठा हुआ था। जो उन्हें देखकर फब्तियाँ कसते हुए गालियाँ देने लगे। विरोध करने पर उनके साथ लाठी-डंडे के साथ मारपीट की। इससे उनके सिर और कमर में गंभीर चोट आई है।
बता दें कि फिलहाल पीड़ित महिला का इलाज पीएमसीएच में चल रहा है।
बॉलीवुड में इन दिनों भाई- भतीजावाद पर बहस छिड़ी हुई है। इस मामले में सबकी अपनी अलग राय है। ऐसे में बॉलीवुड के कुछ कलाकार इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय सामने रख रहे हैं। कंगना रनौत ने इन दिनों बॉलीवुड के कई एक्टर्स और डायरेक्टर्स को निशाने पर लिया है। इस बीच अनुराग कश्यप ने कंगना रनौत को सलाह दे डाली कि लोग उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसके बाद टीम कंगना ने उन्हें ‘मिनी महेश भट्ट’ का नाम दे दिया।
So many independent-film-crusaders have turned mainstream-bollywood-flunkies now. These are the same people who used to rant 24/7 about the “system” for attention before they were given entry into the pearly gates of mainstream Bollywood. #Hypocrisy much?
अब इस मामले में रणवीर शौरी की भी एंट्री हो चुकी है। रणवीर शौरी ने बिना नाम लिए लिखा, “बॉलीवुड के कई इंडिपेंडेंट फिल्म योद्धा अब मेनस्ट्रीम बॉलीवुड के चाटुकार बन चुके हैं। ये वही लोग हैं जो 24/7 लोगों का ध्यान खींचने के लिए सिस्टम के बारे में खुलकर बातें करते थे। जब तक इन्हें चमकते गेट से बॉलीवुड में एंट्री नहीं मिली थी। कुछ ज्यादा पाखंड नहीं है?”
Do you really mean that @RanvirShorey . If you do please explain . Please say exactly what you mean and whose flunky is who? https://t.co/3NiuhFrVj7
हालाँकि, रणवीर शौरी ने इस ट्वीट में किसी का नाम तो नहीं लिखा लेकिन यूजर ने इसे अनुराग कश्यप से रिलेट करना शुरू कर दिया। जिसके बाद अनुराग कश्यप ने भी रणवीर से सवाल पूछते हुए लिखा, “क्या तुम सच में ऐसा समझते हो रणवीर शौरी? अगर हाँ तो इसे एक्सप्लेन करना। सही से बताना तुम क्या कहना चाहते हो? और कौन किसका चाटुकार बन गया है?”
I always say what I mean, @anuragkashyap72, you know that. And I don’t think what I’ve said lacks any clarity. It pretty much explains everything. As for taking names, that’s beneath me. I’m not trying to sling mud, but just reminding people where they come from. https://t.co/r4BRBH8Mwo
अनुराग कश्यप के ट्वीट का जवाब देते हुए रणवीर ने लिखा, “मैं जो भी कहता हूँ, सोच समझ कर कहता हूँ। मैंने सब कुछ लिख दिया है।” रणवीर ने आगे कहा कि वह नाम लेने और दूसरों पर कीचड़ उछालने में यकीन नहीं रखते और वह बस लोगों को ये याद दिलाना चाहते हैं कि ‘वे कहाँ से आए हैं’। इसके बाद भी रणवीर और अनुराग के बीच कई ट्वीट्स और रिट्वीट्स हुए और आखिरकार अनुराग कश्यप को ट्रोल किया जाने लगा।
So let’s talk . Right here. Whose flunky you think I am ? Dont mix the pain of your past relationship with this debate. I will say everything here .. the correction is needed in this industry like every industry . I operate alone .. bolo .
इसके बाद अनुराग कश्यप ने लिखा, “चलो बात करते हैं। यहीं पर। तुम क्या सोचते हो कि मैं किसके झाँसे में हूँ? इस बहस के साथ अपने पिछले रिश्ते के दर्द को न मिलाएँ। मैं यहाँ सब कुछ कहूँगा। हर इंडस्ट्री की तरह इस इंडस्ट्री में भी सुधार की जरूरत है। मैं अकेला काम करता हूँ।”
I think you’re making the mistake of carrying the mantle of “independent film crusader” all by yourself. Let me remind you, independent cinema has been and always will be more than you. So you be you, and let others be themselves. Don’t belittle others when they’re crying out.
रणवीर शौरी ने इसका जवाब देते हुए लिखा कि वो खुद को “स्वतंत्र फिल्म क्रुसेडर” का तमगा देने की गलती कर रहे हैं। स्वतंत्र फिल्म हमेशा से है और आगे भी रहेगा। इसलिए वो अपना काम करें और दूसरों को उनका काम करने दें। जब दूसरा तकलीफ में हो तो उसे परेशान न करें।
Oh so you weren’t talking about me? That’s incredible . Totally my fault that I misread you . Which means my replies were totally unnecessary and unwarranted . Cool . Coming to belittling – who did I belittle? Exactly ?? I thank no that one is directed at me for sure ?
फिर अनुराग कश्यप ने लिखा, “ओह, तो आप मेरे बारे में बात नहीं कर रहे हैं? यह अविश्वसनीय है। यह पूरी तरह से मेरी गलती है कि मैंने आपको गलत समझा। मेरा मतलब है कि मेरे जवाब पूरी तरह से अनावश्यक और अनुचित थे।”
How many people are you belittling when you say they are “distracting or changing the narrative”? Who are you to control the narrative? Everyone has the right to talk about their pain, just like you! And yes, your replies to me were unnecessary. I’m not here to make a spectacle. pic.twitter.com/SUUG1TLC6g
इनका ट्विटर जंग यहीं पर खत्म नहीं हुआ। रणवीर शौरी ने अनुराग कश्यप को जवाब देते हुए लिखा कि वो कौन होते हैं ये कहने वाले कि कोई नैरेटिव को बदल रहा है। और वो नैरेटिव को कंट्रोल करने वाले होते कौन हैं? शौरी ने आगे लिखा, “हर किसी को अपने दर्द-तकलीफ के बारे में बात करने का अधिकार है, जैसे आप! और हाँ, मेरे लिए आपके जवाब अनावश्यक थे। मैं यहाँ तमाशा करने के लिए नहीं हूँ।”
Again, I wasn’t mentioning any names, you are. Who is to say who is in real pain and who’s an attention seeker? I’m just defending everyone’s right to speak their own truth. Just like you do. You can agree or disagree.
इसके बाद अनुराग कश्यप ने कहा कि अगर उन्हें कंगना का चिल्लाना उनका दर्द लगता है तो ठीक है, मगर वो इससे असहमत हैं। इस पर शौरी ने कहा, “फिर से मैं किसी के नाम का उल्लेख नहीं कर रहा हूँ, आप कर रहे हैं। किसे कहना है कि कौन वास्तविक दर्द में है और कौन अटेंशन सीकर? मैं सिर्फ अपनी सच्चाई बोलने के लिए सभी के अधिकार का बचाव कर रहा हूँ, जैसे आप करते हैं। आप सहमत या असहमत हो सकते हैं।”
बता दें कि अनुराग ने कंगना पर निशाना साधते हुए कहा था, “मुझे और कुछ नहीं कहना है। कंगना क्या बकवास कर रही हैं? वो कुछ भी बिना सर-पैर की बातें बोल रही हैं। इन सब का अंत यहीं होगा। चूँकि मैं उसे बहुत मानता हूँ और यह कंगना मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही है। बाक़ी बोलें ना बोलें, मैं तो बोलूँगा क्योंकि बहुत हो गया। अगर यह तुम्हारे घर वालों को भी नहीं दिखता और तुम्हारे दोस्तों को भी नहीं दिखता तो फिर एक ही सच है कि हर कोई तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है और तुम्हारा अपना आज कोई नहीं है। बाक़ी तुम्हारी मर्ज़ी, मुझे जो गाली बकनी है बको।“
इसका जवाब देते हुए कंगना ने कश्यप को ‘मिनी महेश भट्ट’ करार दिया। कंगना ने कहा कि कश्यप समझते हैं कि वो एकदम अकेली हैं और उनके आसपास केवल फर्जी लोग हैं, जो उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन पलटवार करते हुए कंगना रनौत ने आरोप लगाया कि जैसे राष्ट्रद्रोही और अर्बन-नक्सली आतंकियों को बचाते हैं, ऐसे ही ये लोग फ़िल्मी माफिया का भी बचाव कर रहे हैं।
चीन ने पिछले कुछ समय में उइगरों का नरसंहार करते हुए नस्लभेद का सबसे डरावना चेहरा दिखाया है। कैम्पेन फॉर उइगर के एडवाइज़री बोर्ड के चेयरमैन तुर्दी होजा के मुताबिक़ चीन में लाखों उइगरों को कंसंट्रेशन कैम्प में रखा जा रहा है, जहाँ उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जिसके बारे में सोचना तक मुश्किल है।
“Campaign For Uyghurs” नाम के अपने लेख में होजा ने लिखा, “पिछले कई दशकों में चीनी सरकार खुले तौर पर उइगर और तिब्बती संस्कृति को नीचा दिखा रही है। जिससे आम लोगों में ऐसा संदेश जाए कि इससे जुड़े लोगों और रीति रिवाजों को उखाड़ फेंकने की ज़रूरत है। आज से लगभग 3 साल पहले चीन की सरकार ने उइगर समुदाय के मजहब को मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दिया।”
बता दें कि बीजिंग में होने वाले मानवाधिकार हनन के मामले में बीजिंग की वैश्विक स्तर पर आलोचना होती है। इसके लिए सीधे तौर पर शी जिनपिंग और उनकी सरकार को दोष दिया जाता है।
इसके साथ ही होजा ने इस बात का भी उल्लेख किया कि चीनी सरकार ने लगभग 30 लाख उइगरों और अन्य तुर्की बोलने वाले लोगों को कंसंट्रेशन कैम्प में बंद कर रखा है। चीन सरकार उन पर झूठा आरोप लगाती है कि उन्हें मानसिक परामर्श की ज़रूरत है, इस बहाने इलाजा का दावा कर उन्हें कंसंट्रेशन कैम्प में बंद करती है, फिर उन पर अत्याचार करती है। जबकि उसमें से कई बुद्धिजीवी और कलाकार हैं।
इसके अलावा होजा ने कहा, “जब दुनिया पूरी तरह शांत थी तब धीरे-धीरे मानवाधिकार का यह अत्याचार बड़े पैमाने पर होने वाले नरसंहार में बदल गया। चीनी सरकार का अत्याचार इतना बढ़ गया है कि पहले उइगरों को कैद किया जाता है इसके बाद उनके बच्चों को उनकी संस्कृति और मजहब से अलग करके अनाथालयों में भेज दिया जाता है।”
होजा ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जिन उइगरों की पत्नियाँ घरों में अकेली रहती हैं, चीनी लोग उनके साथ ज़्यादती करते हैं। होजा के मुताबिक़, “पहले उइगरों को कैद किया जाता है। इसके बाद उनकी पत्नियाँ अकेली हो जाती हैं और फिर चीनी लोग उनके साथ अत्याचार करते हैं। ऐसी तमाम रिपोर्ट भी सामने आई हैं जिसमें ऐसा बताया गया है कि उइगर औरतों को चीनी आदमियों के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया जाता है।”
हाल ही में आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उइगर महिलाओं की जबरन नसबंदी कर दी जाती है। जिससे उनकी आबादी और उनका वंश आगे न बढ़ पाए।
होजा का कहना था कि अब इस सूची में हॉन्गकॉन्ग का नाम भी शामिल हो चुका है। इतना ही नहीं चीन ने पिछले कुछ सालों में लगभग हर पड़ोसी देश के लिए मुश्किल खड़ी की है। इसमें जापान, ताइवान, वियतनाम, फिलिपीन्स, इंडोनेशिया, नेपाल और भारत भी शामिल हैं। चीन के इस रवैये से दुनिया का हर देश आक्रोशित है। हॉन्गकॉन्ग में पिछले साल से लोकतांत्रिक माँगों को लेकर काफी बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। जिसे दबाने के लिए चीन ने हॉन्गकॉन्ग पर ड्रैकोनियन सेक्युरिटी लॉ लागू कर दिया था।
अपनी अत्याचारी तानाशाही के चलते चीन ने सब कुछ अपने मन मुताबिक़ तय कर लिया है। चाहे वह सस्ते मजदूर हों या अपने तौर तरीके से बढ़ाया हुआ बाज़ार हो या संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद् में अपने खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को डरा धमका कर रखना हो। होजा ने कहा “दुनिया में शांति व्यवस्था और संतुलन बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है चीन जैसे देश के हाथों में सब कुछ जाने से रोका जाए।”
इसके बाद होजा ने कहा “जब दुनिया के लाखों और करोड़ों लोग एक महामारी के चलते अपने घरों में बंद हैं जिसकी शुरुआत चीन में हुई थी। ऐसे में लोगों को अपनी आँख खोल कर चीन की तरफ ध्यान से देखना चाहिए। भले कितने अलग तरह के दावे कर लिए जाएँ लेकिन सच यही है कि असल में चीन ही इस महामारी के लिए ज़िम्मेदार है। और उइगर और तिब्बती लोगों के साथ हो रहे अत्याचार के लिए भी।”
एशिया के अल्पसंख्यक समूह का सदस्य होने के नाते होजा ने कहा “मुझे नहीं लगता कि ट्रंप ने अगर इसे चीनी वायरस कहा तो वह एशिया के लोगों पर नस्लभेद का प्रचार कर रहे थे। चीन ने पूरी दुनिया से झूठ कहा जिसकी वजह से कोरोना वायरस पहले वुहान में फैला और उसके बाद पूरी दुनिया में। चीन अपनी राष्ट्रीय सीमाएँ बंद नहीं कर पाया जिसके चलते यह वायरस पूरी दुनिया में फ़ैल गया। अगर इस बार चीन से सवाल नहीं किया गया तो आने वाले समय में दुनिया के सामने इससे बड़ी चुनौतियाँ होंगी।”
इसके बाद होजा ने कहा “जब भी चीन की करतूतों का ज़िक्र होता है, दुनिया में कोई भी उसके खिलाफ बोलता हुआ नहीं नज़र आता है। यह उइगरों से बेहतर और कोई नहीं जानता है। मैं खुद साल 2017 के बाद अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पाया हूँ, ठीक ऐसे ही बचे हुए उइगर चीन के बाहर ही रह रहे हैं। चीन ने ऐसा तकनीकी सेटअप तैयार कर लिया है जिसकी वजह से पश्चिमी हिस्से में रहने वाले 15 लाख उइगरों का जीवन नर्क हो गया है।”
हाल ही में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 3:34 मिनट के वीडियो में भारत के तीन महत्वपूर्ण अंगों पर चर्चा करते हुए चीनी समस्या समझा दी। उनके अनुसार देश की विदेश नीति, आर्थिक नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंध बिल्कुल ही खराब हो चुके हैं। डोकलाम में दोनों सेनाओं के पीछे हटने के बाद राहुल गाँधी वीडियो लेकर इसलिए आए, क्योंकि ये चीनी सेना के समर्थन में हैं।
गैर भाजपा राजनीतिक पार्टियाँ उन्हीं के सुर में सुर मिलाकर बोल रही थी, तो चीन को लगा कि देश का सबसे बड़ा विपक्षी पार्टी उनके समर्थन में है तो ये उनके लिए अच्छा मौका है। ऐसा करने से भाजपा और भारतीय सेना की छवि खराब होगी और कुछ हद तक वो इसमें कामयाब भी हुए। मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद उन्होंने चीन की गोद में बैठकर भारत सरकार की असफलताओं पर ‘चर्चा’ की।
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जल्द ही मुंबई पुलिस अभिनेत्री कंगना रनौत से पूछताछ कर सकती है। कंगना रनौत को इस सम्बन्ध में नोटिस भेजा गया है। सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में पुलिस लगातार छानबीन कर रही है।
इस केस में अभी तक सुशांत के परिजनों, दोस्तों समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लगभग 38 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि अब बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत से भी पुलिस पूछताछ करेगी। आज (जुलाई 21, 2020) ही मुंबई पुलिस ने कंगना से पूछताछ के लिए उन्हें एक रिमाइंडर भेजा है। पिछले महीने पुलिस ने कंगना सहित कुछ बॉलीवुड हस्तियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था।
सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद से कंगना रनौत लगातार बॉलीवुड की कुछ हस्तियों पर निशाना साध रही हैं। अपने कई बयानों में वो बॉलीवुड में फैले भाई-भतीजावाद और वशंवाद (नेपोटिज्म) पर खुलकर बोल चुकी हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा था सुशांत सुसाइड मामले में पुलिस ने बॉलीवुड के एक तबके से अभी तक पूछताछ की ही नहीं है।
कंगना रनौत ने कहा था, “मैं बता रही हूँ कि अगर मैंने कुछ ऐसा कह दिया हो, जिसकी मैं गवाही नहीं दे सकती, जिसे मैं साबित नहीं कर सकती और जो जनता के हित में नहीं है तो मैं अपना पद्मश्री लौटा दूँगी। ऐसे में फिर मैं इस सम्मान के लायक नहीं हूँ। मैं यह नहीं कह रही कि थी कोई भी चाहता था कि सुशांत मर जाएँ, लेकिन कई चाहते थे कि वे निश्चित रूप से बर्बाद हो जाएँ। ये लोग भावनात्मक गिद्ध होते हैं। वे लोगों को मरता देखना चाहते हैं। निर्माता आदित्य चोपड़ा, फिल्म निर्माता महेश भट्ट, फिल्म निर्माता- निर्देशक करण जौहर और फिल्म समीक्षक राजीव मसंद को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाना चाहिए।”
कंगना रनौत ने आगे कहा था, “मुंबई पुलिस ने मुझे बयान देने के लिए बुलाया। मैंने उनको बताया कि अभी मैं मनाली में हूँ और क्या मेरा बयान लेने के लिए आप किसी को मेरे यहाँ भेज सकते हैं, लेकिन उनका अभी तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला।”
बता दें कि कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को हत्या बताया था। एक वीडियो में कंगना ने कहा था, “सुशांत सिंह राजपूत की हत्या के बाद कई चीजें बाहर निकल के आई हैं। मैंने कुछ इंटरव्यूज पढ़े हैं और कुछ लोगों से बात की है। उनके पिता का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में हो रही टेंशन को लेकर वह काफी परेशान थे।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंगना रनौत फिलहाल मुंबई से बाहर हैं और हिमाचल प्रदेश में अपने घर पर समय बिता रही हैं। कंगना को पिछले महीने बांद्रा पुलिस ने इंवेस्टिगेशन टीम ने नोटिस भेजा था और एक्ट्रेस की गैर-मौजूदगी में उनके एक स्टाफ के सदस्य को सौंप दिया था।
बताया जा रहा है कि कंगना रनौत से पूछा जा सकता है कि क्या उनके पास ऐसी जानकारी है जिसके जरिए ये पता लगाने का प्रयास किया जा सके कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यों की थी?
बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत के फैंस लगातार सोशल मीडिया पर उनके निधन को एक प्लान्ड मर्डर बता रहे हैं और इस केस को सीबीआई को सौंपने की माँग कर रहे हैं वही कंगना ने भी अपने हालिया इंटरव्यू में सुशांत के निधन को एक प्लान्ड मर्डर बताया था और इसका आरोप इंडस्ट्री में व्याप्त नेपोटिज्म, ग्रुपिस्म और मूवी माफिया पर लगाया था।
मुंबई पुलिस ने हाल ही में इस मामले में यशराज प्रोडक्शन्स के चैयरमेन आदित्य चोपड़ा और मशहूर डायरेक्टर संजय लीला भंसाली से भी पूछताछ की थी।
उत्तर प्रदेश स्थित संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क (Shafiqur Rahman Barq) ने नमाज़ को लेकर कहा है कि कोरोना कोई बीमारी नहीं बल्कि अल्लाह द्वारा हमारे गुनाहों की सजा है और हुकूमत द्वारा मस्जिद और ईदगाह में नमाज़ करने पर लगी पाबंदी को हटाया जाना चाहिए क्योंकि जब मुल्क के सभी लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ेंगे तभी ये मुल्क बचेगा।
सपा सांसद का कहना है कि कि ईद-उल-अज़हा के मौके पर मस्जिदों और ईदगाह में इजतेमाई नमाज़ पर पाबंदी लगाना गलत है क्योंकि हम सबको सामूहिक रूप से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा – “कोरोना वायरस का कोई इलाज अब तक नहीं पाया गया है, जिसका मतलब है कि कोरोना वायरस एक बीमारी नहीं है, बल्कि हमारे पापों के लिए अल्लाह द्वारा दंडित किया गया है। कोरोना का सबसे अच्छा इलाज यह है कि हम सभी अल्लाह से दुआ करें।”
No cure of Coronavirus has been found so far, which means Coronavirus is not a disease but punishment by God for our sins. The best cure of Corona is that we all pray to God: Shafiqur Rahman Barq, Samajwadi Party MP from Sambhal https://t.co/5lq2gZZhYe
शफीकुर्रहमान बर्क ने यह भी दावा किया है कि जब तक मुल्क के सारे लोग मस्जिदों में नमाज अदा नहीं करेंगे और अपने गुनाहों की माफ़ी नहीं माँगेंगे, तब तक कोरोना वायरस महामारी को नहीं भगाया जा सकता है।
इसके साथ ही सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ईद के मौके पर लगने वाले पशुओं के बाजार पर पाबंदी के लिए भी जिला प्रसासन से भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि ईद-उल-अज़हा समुदाय विशेष का बड़ा त्यौहार है, जब लोग जानवरों की खरीदारी नहीं कर सकेंगे तो त्यौहार कैसे मनाएँगे?
इस सम्बन्ध में उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर बकरीद के अवसर पर पहले की तरह पशु बाजार लगाए जाने की माँग की है, जिससे समुदाय के लोग कुर्बानी के लिए जानवरों को खरीद कर सकें।
सपा सांसद ने कहा, “मस्जिद में पाँच लोगों की जमात से नमाज थोड़े ही हो जाएगी? सारे लोगों को नमाज पढ़वाइए, तभी यह मुल्क बचेगा। ईद पर समुदाय के लोग गिड़गिड़ाकर अल्लाह से गुनाहों की माफी माँगेंगे और हमें उम्मीद है हमारी भीड़ से नुकसान नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत होगी।”
शिवसेना के सांसद संजय राउत ने मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को कहा कि पार्टी प्रमुख एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राम मंदिर ‘भूमि पूजन’ के लिए निश्चित तौर पर अयोध्या जाएँगे। वहीं गठबंधन के सहयोगी एनसीपी के मजीद मेमन ने शिवसेना को सलाह दी है कि उन्हें किसी विशेष धर्म की गतिविधि को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।
मजीद मेनन ने मंगलवार को इस पर अपनी आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया, “राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए आमंत्रित लोगों में उद्धव ठाकरे भी हैं। वह कोविड-19 की वजह से लागू पाबंदियों का सम्मान करते हुए अपनी निजी हैसियत से उसमें हिस्सा ले सकते हैं। एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के मुखिया को किसी खास धर्म की गतिविधियों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।”
Uddhav Thakrey is among invitees for bhoomi pujan of Ram Temple. He may participate respecting Covid 19 restrictions in his personal capacity. The head of a secular democracy should refrain from promoting a particular religious activity..
शिवसेना के मुखर प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे निश्चित रूप से समारोह में शामिल होंगे, क्योंकि उनकी पार्टी ने राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और मंदिर निर्माण में बाधाएँ दूर कीं।
बता दें कि महा विकास अघाड़ी की सरकार में बराबर अनबन की खबरें सामने आती रहती है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने महा विकास अघाड़ी में गठबंधन सहयोगियों के बीच दरार को नकारते हुए कहा कि गठबंधन के तीन राजनीतिक दलों की अलग-अलग विचारधाराएँ हैं, लेकिन वे कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर काम करते हैं।
शिवसेना नेता ने कहा, “जब गठबंधन सरकार बनती है तो एक समन्वय समिति की स्थापना होती है। इससे सरकार को काम करने में आसानी होती है। उन्होंने कहा कि हमारी तीन पार्टियों की सरकार है और तीनों की ही विचारधाराएँ अलग-अलग हैं। हमने कभी नहीं कहा कि हमारा किसी मुद्दे पर एक राय होगा। हम कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत काम करते हैं।”
इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि कुछ लोग सोचते हैं कि राम मंदिर बनाने से कोरोना खत्म हो जाएगा, अभी कोरोना वायरस से जंग लड़ने की जरूरत है।
मंदिर निर्माण को लेकर गरमाई राजनीति के बीच शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय राउत का बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था, “हमें अयोध्या जाने के लिए किसी के निमंत्रण की आवश्यकता नहीं है, हम बार-बार अयोध्या जाते रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के बीच जो भी बाधाएँ आई थीं, शिवसेना ने उन्हें रास्ते से साफ करने का काम किया है।”
गौरतलब है कि ‘भूमि पूजन’ समारोह उत्तर प्रदेश के अयोध्या में होने वाला है और पीएम मोदी के 5 अगस्त को इसमें शामिल होने की संभावना है। इस समारोह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अन्य आमंत्रित सदस्य करेंगे। हालाँकि, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने अभी तक उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं की है।
राजधानी दिल्ली में वसंत विहार स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल काफी सुर्ख़ियों में छात्रों का ब्रेनवॉश करने के लिए ‘जेंडर आइडेंटिटी पॉलिटिक्स’ पर एक सत्र का आयोजन कराया गया था, जिसमें छात्रों को एक्टिविटी के नाम पर ऐसी कलरिंग बुक दी गई हैं, जिनमें सेक्स टॉय पहने, हस्तमैथुन करती नग्न युवतियाँ दिखाई गई हैं।
जैसे ही इस सत्र की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, वैसे ही लोग हैरान रह गए। यह सत्र Nazariya- Queer Feminist Resource Group (Nazariya QFRG) नाम के समूह द्वारा आयोजित कराया गया था।
Nazariya QFRG की एक और पोस्ट से सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ी हुई है। इस विवादित पोस्ट में यह समूह बच्चों के लिए एक प्लैनर/कलरिंग बुक का विज्ञापन कर रहा था, जिसमें एक बिना कपड़ों की औरत ‘डिल्डो’ (महिलाओं के लिए सेक्स टॉय) पहन कर खड़ी है। इसके अलावा कलरिंग के निचले हिस्से में बाईं तरफ मास्टरबेट (हस्तक्रिया) करती हुई युवती नज़र आ रही है। इस तस्वीर के साथ लिखा है – “छात्रों के लिए 100 रूपए का डिस्काउंट।”
जिस तरह का डरावनी जागरूकता Nazariya QFRG फैला रहा था, हमने उसकी पृष्ठभूमि तलाशनी शुरू की। फिर हमें पता चला कि यह कोई सतही लोग नहीं हैं, बल्कि एलजीबीटी (LGBT) से जुड़े मामलों पर काम करने वाले मुख्यधारा के लोग हैं। Nazariya QFRG की शुरुआत तीन लोगों ने मिल कर की थी – ऋतुपर्णा बोरा, ऋतंभरा मेहता और पूर्णिमा गुप्ता।
इस समूह की वेबसाइट के मुताबिक, ऋतुपर्णा आईसीटी की मदद से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुस्लिम लड़कियों के लिए लीडरशिप प्रोग्राम भी चला रही हैं। इसके अलावा ऋतुपर्णा ने एनसीआरटी द्वारा प्रकाशित ‘किशोरावस्था प्रशिक्षण कार्यक्रम’ संबंधी विषयवस्तु में भी सहयोग किया है।
इतना ही नहीं, वह दिल्ली की ‘क्वीर (queer) परेड’ में भी शामिल होती हैं। वहीं, ऋतंभरा Nazariya QFRG की उपनिदेशक हैं। वह समूह के संपर्क, समूह के लिए फंड्स, नई योजनाएँ और उन्हें लागू कराने से जुड़े काम करती है। इसके अलावा पूर्णिमा, लिंग, जाति और सेक्सुअलिटी संबंधी मुद्दों पर प्रशिक्षण देती हैं।
रितुपर्णा और ऋतंभरा ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कई बातें कही थीं। उन्होंने कहा था वो तमाम कॉलेज, विश्वविद्यालय और समूहों में लिंग, सेक्सुअलिटी और एलजीबीटी समेत तमाम विषयों पर वर्कशॉप कराते हैं।
यानी, इन लोगों का मुस्लिम एलजीबीटी समुदाय से बराबर संवाद है। इसके बाद Nazariya QFRG के सदस्यों ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन और आर्थिक सहयोग करने वाले लोग छोटे स्तर पर काम करने वाले सामुदायिक समूहों के लिए आसानी से फंड इकट्ठा कर सकते हैं।”
बड़े पैमाने पर आर्थिक सहयोग करने वालों के प्रोटोकोल्स की वजह से कम संसाधनों वाले छोटे सामुदायिक समूहों के लिए चीज़ें मुश्किल हो जाती हैं। वहीँ दूसरी तरफ बड़े संपर्क वालों से आर्थिक मुनाफा भी ज़्यादा होता है। इसके बाद उन्होंने कहा- “कुछ फंडिंग करने वाले ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए लोगों के वेतन से ज़्यादा ज़रूरी कार्यक्रम होते हैं। जिसके चलते कम कर्मचारियों के साथ काम करने में परेशानी भी होती है। छोटे सामुदायिक समूहों को कई मामलों में मदद करने पर फंड को ऐसी जगहों पर ले जाना आसान हो जाता है, जहाँ इसका ज़्यादा फ़ायदा हो सके। ”
Nazariya QFRG की एलजीबीटी समुदाय में स्वीकार्यता के आधार पर एक बात और साफ़ हो जाती है, ट्वीटर पर इनके 1 लाख, 80 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं। यानी, सोशल मीडिया पर इनके पास अच्छा भला मंच है।
ट्वीट
इसके अलावा Nazariya QFRG के सदस्य अक्सर मशहूर समाचार समूहों की चर्चाओं में भी नज़र आते हैं।
इंडिया टुडे की चर्चा में नज़रिया के सदस्य
साथ ही ‘नज़रिया’ को नीति आयोग द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों में भी बुलाया जाता है।
साभार – शम्पा सेनगुप्ता
इन सारी बातों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि ‘एलजीबीटी’ के क्षेत्र में Nazariya QFRG विश्वसनीयता और मशहूर नाम है। लेकिन जिस तरह इन लोगों ने बच्चों का ब्रेनवाश करने का प्रयास किया उससे समाज में इनके खिलाफ काफी रोष व्याप्त है।
आखिर जागरूकता के नाम पर बच्चों के सामने इस तरह की चीज़ रखना किसी भी सूरत में जागरूकता नहीं कहा जा सकता है। छात्रों के सामने ऐसी तस्वीर रखना, जिसमें महिला के पास सेक्स टॉय है, इससे बच्चों का किसी भी तरह का विकास होने से रहा!
इस बात पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है कि अगर बच्चों के सामने इतनी छोटी उम्र में ऐसी चीज़ें रखी जाएँगी, तो उनके दिमाग पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? Nazariya QFRG ने उसी कलरिंग बुक में ऐसी तस्वीर भी लगाई, जिसमें एक आदमी की छाती का आकार बढ़ा हुआ था और वह एक बच्चे को दूध पिला रहा था। इस तस्वीर की भी सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है।
हमने इसके पहले भी कई अलग-अलग लेखों में बताया है कि कैसे जेंडर आइडेंटिटी पॉलिटिक्स का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। प्रदेश और राज्य दोनों सरकारों को इस मामले पर सक्रिय होकर ठोस कदम उठाने चाहिए। जिससे बच्चों के बीच इस तरह की नकारात्मक जागरूकता का प्रचार न हो।
हैरानी की बात यह है कि इस तरह की चीज़ों पर आम लोगों का ध्यान नहीं जाता है, या नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि ऐसी संस्थाओं के ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों के ब्रेनवाश की प्रक्रिया जारी है। स्कूलों पर इतने छोटे स्तर पर इस तरह के समूहों का प्रभाव की वजह से समाज की नींव बहुत कमज़ोर हो रही है।