उत्तरप्रदेश के पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग तरह की बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मकसद वाकई इस मामले में आवाज उठाकर पत्रकार के परिवार को इंसाफ दिलवाना है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो केवल इस खबर के आने के बाद अपना एजेंडा चला रहे हैं और संघ या भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। ऐसा ही एक नाम तारीक अनवर का भी है।
दरअसल, तारीक अनवर ने इस केस के सामने आने के बाद इसका जिम्मेदार संघियों और भाजपाइयों को ठहराया है। तारीक ने फेसबुक पोस्ट पर घटना से संबंधित खबर साझा करते हुए लिखा, “Sanghi बगलबच्चा और भाजपाई नेता Parvesh Verma सही कह रहा था। ये संघी और भाजपाई गुंडे घर में घुस कर बहन, बेटियों और भारत माताओं का बलात्कार करेंगे और अगर ऐसा करने मे असफल रहे तो गोली मार देंगे।”
इस पोस्ट को तारीक अनवर ने फेसबुक के दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर ग्रुप में शेयर किया है और भाजपाइयों व संघियों पर सारा इल्जाम मढ़ा है। जबकि वास्तविकता में मृतक पत्रकार के भाँजे का आरोप है कि ये सब कमालुद्दीन के बेटे (शाहनूर मंसूरी) का किया हुआ है। उसने ही विक्रम जोशी की भाँजी के सिर पर रॉड मारी और फिर पत्रकार को गोली।
मगर, बावजूद इस सच्चाई के ये भाजपा के ख़िलाफ़ अपनी नफरत निकालने वाला ये तारीक कौन हैं? इसे भी जान लीजिए। तारीक दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज के इतिहास विभाग में कार्यरत है। उनका नाम केवल मोहम्मद तारीक अनवर नहीं बल्कि ‘डॉ’ मोहम्मद तारीक अनवर है।
इनकी फोटोज देखकर मालूम चलता है कि एक पत्रकार की हत्या पर भाजपाइयों और संघियों को कोसने वाले तारीक कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं। नीचे तस्वीर में हम देख सकते हैं कि उनका नाम इंडियन नेशनल टीचर कॉन्ग्रेस में है।
इसके अलावा वह कॉन्ग्रेस से जुड़ी जानकारी भी अपने वॉल पर शेयर करते रहते हैं।
डॉ तारीक अनवर की वॉल से मालूम पड़ता है कि उन्हें तान्हाजी, पद्मावत और पानीपत जैसे फिल्मों के बॉलीवुड में दिखाए जाने से खासी नाराजगी है। वो हिंदुओं की शौर्य पर आधारित फिल्मों को इस्लामोफोबिया का हिस्सा मानते हैं।
बकरीद के दिन बकरों की कुर्बानी नही देने की बात से उन्हें गुरेज हैं। इसलिए वे ऐसे पोस्ट साझा करते हैं जिसमें हिंदुओं को मॉक किया गया हो या फिर ये कहा गया कि हिंदुत्व की आड़ में बहुत जानवरों की बलि दी जाती रही है। चाहे काली पूजा में हो या कामख्या मंदिर में। इसके अलावा वे रवीश के फैन हैं और पिंजरा तोड़ की सदस्य नताशा और देवंगाना कि रिहाई की माँग कर चुके हैं।
बता दें ऐसा पहली बार नहीं है कि तारीक अनवर ने किसी अपराध के लिए संघ को जिम्मेवार ठहराया। उनकी टाइमलाइन से लगता है उन्हें हर अपराध में केवल संघ या फिर भाजपा ही दोषी लगते हैं। अभी बीते दिनों जो वाराणसी का मामला आया था, जहाँ अरुण पाठक नाम के शिवसैनिक ने पैसे देकर एक युवक का सिर मुँडवा दिया था और झूठ फैलाया था कि वो नेपाली है। उस मामले में भी तारीक ने संघ को ही निशाना साधा था।
अमेरिका ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए चीन को अपने ह्यूस्टन स्थित महावाणिज्य दूतावास को 72 घंटे के अंदर बंद करने का आदेश दिया है। इस अमेरिकी आदेश के बाद चीनी दूतावास के कर्मचारी गोपनीय दस्तावेजों को जलाते हुए देखे गए हैं।
अमेरिका के इस कदम के बाद चीन भड़क उठा है और उसने आवश्यक जवाबी कार्यवाही की धमकी दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को बीजिंग में संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका ने यह एकतरफा पहल की है और चीन इसका जवाब जरूर देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चीनी अधिकारियों को पिछले दिनों बम हमले और हत्या की धमकी दी गई थी।
NEW VIDEO: Documents, other materials appear to be burned in courtyard of Consulate General of China in Houston, Texas; police and fire responded but its unclear it they entered property
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने चीन के साथ जारी गंभीर तनाव को देखते हुए ह्यूस्टन के महावाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया गया है। इसके लिए अमेरिका ने चीन को 72 घंटे का समय दिया है। इतने कम समय में महावाणिज्य दूतावास को खाली करने के आदेश से चीन के विदेश मंत्रालय में हड़कंप मच गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है और कहा कि अमेरिका ने इस गलत आदेश को वापस नहीं लिया तो वह ‘एक न्यायोचित और आवश्यक जवाबी कार्यवाही’ करेगा।
The US asked China to close Consulate General in Houston in 72 hours. This is a crazy move.
चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की तरफ से बताया गया है कि अमेरिका ने 72 घंटे के अंदर इस कांसुलेट से कामकाज समेटने को कहा है। अखबार के एडिटर हू जिजिन की तरफ से ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई है।
अमेरिका के आदेश के बाद चीनी दूतावास के अंदर अफरातफरी का माहौल देखा गया। यही नहीं, चीन के कर्मचारी बड़ी संख्या में गोपनीय दस्तावेजों को जलाते देखे गए हैं।
हालत यहाँ तक हो गई कि आग को देखकर ह्यूस्टन के फायर डिपार्टमेंट की गाड़ियाँ मौके पर पहुँच गईं लेकिन वे दूतावास के अंदर नहीं गईं। चीन के दूतावास से निकल रही आग की लपटों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अमेरिका के इस कदम से अब चीन के साथ उसके संबंधों के और ज्यादा तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों द्वारा वाणिज्य दूतावास के बाहर कुछ कंटेनरों में कागज जलाने की सूचना के बाद ह्यूस्टन पुलिस और दमकल के पहुँचने के कुछ घंटों बाद हू का ट्वीट आया। ह्यूस्टन क्रॉनिकल और दो स्थानीय टीवी स्टेशनों ने पुलिस के हवाले से खुले में कंटेनर में कागज जलाए जाने की खबर चलाई थी।
ह्यूस्टन की लोकल मीडिया की तरफ से जो वीडियो पोस्ट किए गए हैं उनमें नजर आ रहा है कि कंटेनर्स के अंदर से काला धुआँ निकल रहा है। फायर फाइटर्स को दूतावास की बिल्डिंग के अंदर जाने की मंजूरी नहीं थी। कुछ मिनटों बाद आग बुझ गई थी। इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। ह्यूस्टन क्रॉनिकल और दोनों चैनलों की मानें तो स्थानीय समयानुसार कांसुलेट को शुक्रवार 4 बजे तक खाली कर दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाबालिग नौकरानी से दुष्कर्म के आरोपित आबकारी उप निरीक्षक पंकज जैन की सेवाओं को समाप्त कर दिया है। पंकज जैन को मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को उज्जैन के एक होटल से गिरफ्तार किया गया था। सीएम शिवराज सिंह ने पंकज जैन की सेवाओं को बर्खास्त करते हुए फैसला सुनाया है कि इस मामले में अब कोई विभागीय जाँच नहीं होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी निर्धारित कैबिनेट बैठक से पहले कहा, “हमने नाबालिग से रेप के आरोपित एक्साइज सब इंस्पेक्टर को बर्खास्त करने का निर्णय लिया है और इस मामले में अब कोई विभागीय जाँच नहीं होगी।”
बच्ची से बलात्कार के मामले में उज्जैन के आबकारी सब इंस्पेक्टर को मुख्यमंत्री ने तत्काल सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है: मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा #MadhyaPradeshpic.twitter.com/gwY4DJygnA
बता दें पुलिस ने आबकारी उप निरीक्षक पंकज जैन को मंगलवार को उज्जैन में इंदौर रोड पर स्थित होटल मधुबन से गिरफ्तार किया था। पंकज जैन पिछले लगभग 11 महीने से अपनी नाबालिग नौकरानी का बालात्कार करता रहा और उसके वीडियो बनाता रहा। पंकज जैन उसे झूठे मुकदने में फँसाने की धमकी देता था। साथ ही कहता था कि तुम्हें पत्नी के गहने चोरी के आरोप में फँसा दूँगा। लड़की उसकी धमकियों से डर जाती थी।
लड़की का यह भी आरोप है कि वो उसे अक्सर गंदी फिल्में मोबाइल पर भेजता था और गंदी बातें भी लिखता था। पंकज की प्रताड़ना से तंग आकर लड़की ने होटल पहुँचने से पहले ही पुलिस को सूचना दे दी थी।
पुलिस के अनुसार पीड़िता आरोपित पंकज जैन के घर पर घरेलू सहायिका के रूप में काम करती है। उसने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जैन कुछ वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद उसके साथ बलात्कार कर रहा था। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपित ने उसे एक होटल में बुलाया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने होटल में जाल बिछाया और आरोपित के साथ होटल में ठहरने के बाद आबकारी अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
जैन ने होटल में अपने आने-जाने की कोई जानकारी भी दर्ज नहीं करवाई थी। इस पर पुलिस ने होटल मैनेजर और कर्मचारी को भी हिरासत में ले लिया है। पंकज जैन पर आईपीसी की धारा 376 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की अन्य संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार के आरोप के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले शिवराज सरकार ने भोपाल के रेप आरोपित पत्रकार प्यारे मियाँ से सरकारी आवास छीन लिया था। इसके साथ ही ‘अफ़कार’ अख़बार चलाने के लिए उसे मिले पत्रकार की अधिमान्यता भी रद्द कर दी गई। नाबालिग लड़कियों को पार्टी के बहाने बुला कर शराब पिला कर नचवाने वाले और फिर उनका बलात्कार करने वाले भोपाल के पत्रकार प्यारे मियाँ को जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया गया था।
घोषणा की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (अगस्त 5, 2020) को सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे और फिर राम मंदिर भूमि-पूजन में हिस्सा लेंगे। अब खबर आई है कि इस कार्यक्रम में कुल 200 लोग शिरकत करेंगे। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सोशल डिस्टेन्सिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का ध्यान रखा जाएगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया कि इनमें से 150 अतिथि होंगे।
ट्रस्ट के कोषाधिकारी स्वामी गोविन्द देव गिरी ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी। भूमि-पूजन में हिस्सा लेने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान श्रीराम का दर्शन करेंगे और अयोध्या के हनुमानगढ़ी में हनुमान जी की पूजा करेंगे। ट्रस्ट ने इस दौरान सभी मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण भेजने का निर्णय लिया है। मंदिर के डिजाइन पर भी फैसला लिया जा चुका है और इसे 2 साल में पूरा किए जाने की बात बताई गई है।
राम मंदिर तीन मंजिला होगा और इसकी ऊँचाई 161 फ़ीट होगी। मंदिर में कुल 5 शिखर होंगे। इसमें कुल 318 स्तम्भ (खम्भे) होंगे। 69 एकड़ भूमि पर 5 शिखर वाला मंदिर दुनिया में और कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। राम मंदिर के नए डिजाइन में एक मंडप भी होगा, जिसमें 50,000 श्रद्धालु बैठ सकेंगे। मंदिर ज़मीन से 17 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित होगा। राम दरबार दूसरी मंजिल पर स्थित होगा।
बताया गया है कि दोपहर 12:15 के शुभ मुहूर्त पर पीएम मोदी 32 सेकंड में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे, जिसके बाद इसका निर्माण शुरू हो जाएगा। मणिराम छावनी की तरफ से 40 किलो की रामशिला दी गई है, जिसे स्थापित किया जाएगा। काशी के 5 विद्वान पंडितों के नेतृत्व में 11 पंडितों का समूह गर्भगृह स्थल का वैदिक मंत्रोंं के साथ पूजन सुबह से ही करता रहेगा। फिर भूमि-पूजन भी यही लोग कराएँगे।
श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव का स्वागत करता हूँ ट्रस्ट का निर्णय राम भक्तों की भावनाओं के अनुरूप है जयश्रीराम pic.twitter.com/8eHUFLmX5I
पीएम मोदी काफी कम समय तक ही अयोध्या में रहेंगे और इस दौरान वो किसी जनसभा को सम्बोधित नहीं करेंगे। ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिल कर तैयारियों के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया है। इसके बाद वो भोपाल गए, जहाँ सरसंघचालक मोहन भागवत आए हुए हैं। भूमि-पूजन से 2 दिन पहले ही पंडितों द्वारा विघ्नहर्ता गणेश का आह्वान किया जाएगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजन होगा।
देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे। पाँच अगस्त को पीएम मोदी करीब 3 घंटा रामनगरी अयोध्या में रहेंगे। भूमि पूजन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी मंदिर की आधारशिलाभी रखेंगे। इस दौरान वह श्रीराम मंदिर का भूमि व शिलान्यास करने के साथ ही अयोध्या में पर्यटन पर भी कार्यक्रम देखेंगे। बीते वर्ष पाँच अगस्त को ही कश्मीर से धारा 370 हटाई गई थी।
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस किस हद तक फैला है इसे लेकर एक सर्वे किया गया था। जिसकी रिपोर्ट अब आ गई है। सर्वे से यह पता चला है कि दिल्ली की 23.48 फीसदी आबादी (जोकि 43.6 लाख लोग है) कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुकी है। वहीं एनडीटीवी के स्टार एंकर रवीश कुमार ने इस सर्वे पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए एक वीडियो जारी किया।
शो में, रवीश कुमार ने दिल्ली में चीनी महामारी से प्रभावित लोगों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने मोदी सरकार पर यह दावा करते हुए कटाक्ष किया कि, जब भी सरकार को कोरोनावायरस को निपटाने के लिए चुनौतियों का सामना पड़ा, उन्होंने अपना गोलपोस्ट बदल लिया।
अपने वीडियो में रवीश कुमार ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए दावा किया कि, कोरोना वायरस की दोगुनी बढ़ती संख्या को देखते हुए भी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सरकार ने इस मामले में अपना बचाव किया। सरकार को जब भी कोरोना वायरस की चुनौतियों का सामना करना पड़ा उन्होंने हमेशा अपना तर्क बदल दिया। और कहा कि आप ये मत देखिए कि कितना संख्या में लोग संक्रमित हो रहे है। आप ये देखिए कि कोविड-19 के मरीज की रिकवरी रेट कितनी है। जोकि यह दर्शाता है कि महामारी अभी नियंत्रण में है।
अपने बयान को जारी रखते हुए, रवीश कुमार ने अपने शो में दावा किया कि बाद में सरकार ने अपना गोल बदलते हुए एक्टिव केस को हाईलाइट करना शुरू कर दिया, जब मरीजों की रिकवरी रेट गिरने लगी।
मोदी सरकार पर हमला करने की जल्दबाजी में, एनडीटीवी के स्टार एंकर रवीश ने शो के दौरान क्या बोलना है और वो क्या बोल रहे इस बात पर भी गौर करना सही नहीं समझा। रवीश कुमार ने शो में कोरोना वायरस के ‘मृत्य दर’ का दावा करने की जगह यह कहा कि कोरोना वायरस के मरीजों की ‘फर्टिलिटी रेट’ काफ़ी कम है।
दिल्ली सीरो सर्वे रिपोर्ट
दिल्ली भर में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) द्वारा प्रकाशित किए गए नए सर्वेक्षण के अनुसार, आईजीजी एंटीबॉडीज का प्रसार 23.48 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्ति एसिम्प्टोमैटिक हैं। सर्वेक्षण 27 जून 2020 से 10 जुलाई 2020 तक आयोजित किया गया था।
महामारी के 6 महीने बीत जाने के बाद भी दिल्ली में 46 लाख लोग ही इसकी चपेट में हैं। जिनमें घनी आबादी वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। यह कहा जा रहा है कि मोदी सरकार द्वारा संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों जैसे त्वरित लॉकडाउन, कन्टेनमेंट जोन बनाने के अलावा संपर्क ट्रेसिंग और ट्रैकिंग जैसे निगरानी उपायों और नागरिकों के नियमों के अनुपालन के चलते ही प्रसार को सीमित करने में मदद मिली है।
राँची के एक क्वारंटाइन सेंटर और उसके बाद जेल में 111 दिनों से प्रशासन व पुलिस की निगरानी में रह रहीं तबलीगी जमात की 3 विदेशी महिलाएँ गर्भवती पाई गई हैं। मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को यह मामला तब सामने आया, जब तीनों तबलीगी महिलाएँ और उनके पति समेत कुल 17 विदेशी जेल से बाहर निकले।
तबलीगी जमात से जुड़े 17 विदेशियों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद गत बुधवार (जुलाई 15, 2020) को सुनवाई के बाद सभी को जमानत प्रदान करने का निर्देश दिया गया। इन्हें राँची पुलिस ने हिंदपीढ़ी की एक मस्जिद से गिरफ्तार किया था। इनमें मलेशिया, हॉलैंड, इंग्लैंड, जांबिया की चार महिला और 13 पुरुष शामिल थे।
दरअसल, राँची पुलिस ने मार्च के माह में सभी को गिरफ्तार करने के बाद खेलगाँव के क्वारंटाइन सेंटर में रखा था। इसके बाद एक विदेशी महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी। इन सभी की क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के बाद निचली अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया था।
इनमें पाँच विदेशी महिलाएँ, उनके पति और बाकी पुरुष गत 17 मार्च को दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज से होकर वापस राँची गए थे। इसके बाद, 30 मार्च को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे में लोगों का सवाल है कि क्वारंटाइन सेंटर और पुलिस हिरासत में आखिर यह कारनामा कैसे सम्भव हुआ?
— Debashish Sarkar ?? (@DebashishHiTs) July 22, 2020
अब करीब तीन माह से ज्यादा समय के बाद तीन महिलाओं के गर्भवती होने की खबर ने सबको हैरान कर दिया है। इन महिलाओं ने गत 30 मार्च से 20 जुलाई तक कुल 111 दिन पुलिस हिरासत में जेल में ही बिताए हैं। मई 20, 2020 को लगभग 50 दिनों के बाद इन सभी को खेलगाँव के क्वारंटाइन सेंटर से जेल भेज दिया गया था।
जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जेल और क्वारंटाइन सेंटर में सख्त पाबंदियों के बावजूद यह हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक महिला का गर्भ अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह से लेकर मई माह के पहले सप्ताह के बीच का बताया गया है है। जबकि, दो महिलाएँ इनसे कुछ दिनों पहले की गर्भवती हैं, लेकिन इनमें से किसी का भी गर्भ 3 माह से अधिक नहीं पाया गया है।
इनकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि इन्हें कोरोना वायरस के दौरान क्वारंटाइन सेंटर में ही गर्भ ठहरा था। रिपोर्ट के अनुसार, इन महिलाओं को जेल भेजने से पूर्व उनकी मेडिकल जाँच और प्रेगनेंसी टेस्ट की गई थी, जिसमें इन तीनों महिलाओं ने एक माह का गर्भ होने की बात कही थी। ध्यान देने की बात है कि ये महिलाएँ इससे ठीक 50 दिनों पहले क्वारंटाइन सेंटर में थीं।
उत्तर प्रदेश के मथुरा नगरी से 5 किलोमीटर दूर कल्याणपुर गाँव है। इस गाँव का एक किसान पिछले 2 साल से अपने गाँव में हुए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जानने के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है। किसान का नाम शिवशंकर शुक्ला है। जिनकी माँग बस ये है कि उन्हें उनकी आरटीआई का जवाब मिल जाए। उनके मुताबिक, उन्होंने 2 साल पहले गाँव की स्थिति को देखते हुए ये जानना चाहा था कि आखिर सरकार जो राशि ग्राम विकास के लिए लगातार भेज रही है उसका उपयोग कहाँ हो रहा है।
40 वर्षीय शिवशंकर ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान बताते हैं कि उन्होंने अपनी किसी व्यक्तिगत समस्या के लिए आवाज नहीं उठाई है। वे सम्पूर्ण ग्राम का विकास चाहते हैं और इसी की खातिर पिछले 2 साल से भटक रहे हैं। लेकिन दुख ये है कि उन्हें उनकी RTI का जवाब अब तक नहीं मिला। इसके बदले उन्हें और उनके परिवार को गाँव में आते-जाते केस को वापस लेने के लिए धमकियाँ जरूर दी जानें लगीं।
कल्याणपुर गाँव की स्थिति
उनका आरोप है कि उनका ग्राम प्रधान जगदीश प्रसाद और ग्राम विकास अधिकारी तरुण वर्मा सरकारी पैसों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और विकास के लिए आई राशि काम में नहीं लगा रहे। शिवशंकर की मानें तो, उनका ग्राम प्रधान दूसरे गाँव मदिरा मावली का है जिन्होंने कल्याणपुर में विकास कराने के नाम पर एक भी रुपया नहीं लगाया। लेकिन अपने इलाके में काम करवा लिया। वहीं ग्राम विकास अधिकारी तरुण शर्मा हैं- जो ज्यादा पूछने पर कहते हैं कि उनका इन सबसे कुछ नहीं बिगड़ेगा ज्यादा से ज्यादा बस पैसा खर्च होगा।
आरटीआई में पूछे गए सवाल
शिवशंकर के अनुसार उन्होंने इस संबंध में पहले बीडीओ स्तर पर शिकायत की थी। यहाँ से उन्हें जवाब मिला कि वो सारा लेखा-जोखा आरटीआई के जरिए जान सकते हैं। इसके बाद उन्होंने आरटीआई लगाई। पर, फिर भी मामला वैसे ही अटका रहा। उन्होंने एसडीएम और राज्यपाल तक अपनी बात पहुँचाई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों के पास लगाई गई शिकायत
गाँव की स्थिति पर बात करते हुए कल्याणपुर निवासी धीरज शुक्ला, विपिन और दशरथ भी अपनी परेशानियाँ बताते हैं। वे कहते हैं कि गाँव में जगह-जगह गंदा पानी भरा हैं और निकास के लिए भी कोई नाला नहीं है। इसके अलावा गाँव में कहीं कोई खड़ंजा तक नहीं है। मामले में आरटीआई पर पूछे जाने पर सभी ग्रामीण भी उन सभी आरोपों पर सहमति भरते हैं। साथ ही ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी की करतूतों पर भी बात रखते हैं।
अधिकारियों के पास लगाई गई शिकायत
आरटीआई लगाकर ग्राम विकास की राशि का ब्यौरा माँगने वाले शिवशंकर का केस इस समय जाँच के लिए जिला परियोजना परिवेक्षक अधिकारी पीडी बलराम कुमार के पास है। शिवशंकर कहते हैं कि इस मामले को पीडी बलराम के पास तक पहुँचे 4-5 महीने हो चुके हैं। अभी भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बड़े दुखी मन से अपनी परेशानी को साझा करते हुए शिवशंकर ये तक कह देते हैं कि अब अगर कार्रवाई नहीं हुई तो शायद वो कोई गलत कदम भी उठा लेंगे।
अपील
जाँच कर रहे अधिकारी का क्या कहना है?
वहीं इस मामले की जाँच कर रहे मथुरा के परियोजना निदेशक बलराम कुमार इस विषय पर ऑपइंडिया को जानकारी देते हैं कि उनके पास 4-5 महीने से इस मामले पर जाँच जरूर है। लेकिन लॉकडाउन के कारण इसपर एक्शन नहीं लिया गया था। अभी शिकायत के आधार पर ग्राम पंचायत को नोटिस भेजा गया है और उन पर लगे आरोपों पर 7 दिन में जवाब माँगा गया है। कुछ दिन में ये अवधि पूरी होगी। जवाब आते ही जल्द से जल्द मामले पर रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
हिंदू रक्षा सेना ने भी उठाया मामला
यहाँ बता दें कि इस मामले पर अब हिंदू रक्षा सेना के जिला प्रमुख ऋषि शर्मा ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में एक कार्यकर्ता से मालूम चला। इसके बाद उन्होंने शिवशंकर से मिलकर पूरा मामला जाना और उन्हें आश्वासन दिया कि वे लोग अपने स्तर पर उन्हें न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे।
करीब एक महीने पहले हुई मुलाकात के बाद हिंदू रक्षा सेना जिला प्रमुख इस मामले पर लगातार अधिकारियों से बात करते रहे। उन्होंने पिछले दिनों परियोजना अधिकारी से भी बात की और उन्हें इस मामले में स्पष्ट व निष्पक्ष होकर कार्रवाई करने की अपील की।
ऋषि शर्मा कहते हैं कि इस मामले में केवल कागजों को इधर से उधर फॉरवर्ड किया गया। पर, कार्रवाई कुछ नहीं हुई और जानकारी भी किसी ने कहीं से भी नहीं दी। ऐसे में संदेह तो इसी तरफ जाता है कि गाँव वाले जो बातें बोल रहे हों, वो सब सही हो।
आखिर क्यों कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। ऋषि का कहना है कि अगर आगे भी मामले में यही सब हुआ तो वे पीड़ित ग्रामीणों को लेकर सीएम के जनता दरबार तक जाएँगे।
उनके मुताबिक, इस पूरे मामले में सारा खेल ग्राम प्रधान और सचिव तरुण वर्मा खेल रहे हैं। बाकी अधिकारी केवल फाइल बढ़ा रहे हैं। अगर, इस मामले को ढंग से सुन लिया जाए तो ये एक दिन में परेशानी सुलझ जाएगी। वे कहते हैं कि उन्होंने ग्रामीणों को ये तक बोला है कि अगर बीडीओ तक पहुँचने के बाद सुनवाई नहीं हो रही तो सीधे डीएम के पास चलिए।
शिवशंकर शुक्ला का मामला क्यों है विचारणीय?
उल्लेखनीय है कि मथुरा नगर से थोड़ी दूर पर ये स्थित गाँव की हालत आज केवल इसलिए विचारणीय नही कि यहाँ पर अन्य जगहों की तरह अधिकारियों पर सरकार द्वारा भेजी राशि इधर-उधर करने का आरोप लगा है। बल्कि इसलिए विचार योग्य है क्योंकि एक किसान अपने गाँव के विकास की खातिर बुलंद आवाज बनकर सामने आया है।
जहाँ आम तौर पर ग्रामीणों को सुध ही नहीं होती कि सरकार उनके लिए क्या कर रही है, क्या नहीं? वहीं ये किसान समूचे गाँव की स्थिति पर अधिकारियों के आमने-सामने आ खड़े हुए हैं और एक जागरूक नागरिक की तरह अपने अधिकार की माँग कर रहे है। लेकिन शायद उनकी सुनवाई इसलिए नहीं है क्योंकि वे संवैधानिक रूप से हर चरणबद्ध प्रक्रिया के जरिए इंसाफ़ माँग रहे हैं।
अगर आज ऐसे में भी शिवशंकर शुक्ला जैसे लोगों की बात अधिकारियों के दफ्तर से आई-गई कर दी गई या उसे अनसुना कर दिया गया। तो क्या कोई भी पिछड़े गाँव या तबके का व्यक्ति अपनी आवाज बुलंद कर पाएगा या अपने अधिकारों के मूल्य को समझ पाएगा। शायद नहीं…इसलिए जरूरत है कि इस केस में एक्शन लेकर ग्रामीणों को संतुष्ट किया जाए।
आतंकी अजमल कसाब कैसे मरा था? देश में किसी निरक्षर व्यक्ति से भी पूछा जाए तो वो बता देगा कि उसे फाँसी की सज़ा दी गई थी। जिन्हें अधिकतर चीजों के जवाब नहीं पता, उन्हें भी पता है कि उसे पुणे के यरवदा जेल में फाँसी पर लटकाया गया था लेकिन जिसे सारे जवाब पता होते हैं, उस गूगल को लगता है कि अजमल कसाब ने आत्महत्या की थी। आखिर गूगल द्वारा ऐसा दिखाए जाने का कारण क्या है?
अजमल कसाब ने आत्महत्या की थी: गूगल निष्कर्ष
जब आप गूगल पर ‘Ajmal Kasab Death’ लिख कर सर्च करेंगे तो आप ‘मृत्यु का कारण’ वाले सेक्शन में पाएँगे कि ‘आत्महत्या’ लिखा हुआ है। लेकिन अजमल कसाब ने आत्महत्या तो नहीं ही की थी। उसके साथ मुंबई हमलों के अन्य आतंकी तो मारे गए लेकिन वो पकड़ा गया। क़रीब 4 साल तक वो जेल में रहा और सुनवाई चलती रही। उसके बाद उसने मर्सी पेटिशन भी डाला, जिसे राष्ट्रपति द्वारा नकार दिया गया था।
इसके बाद उसे फाँसी दी गई। गूगल सामान्यतः विकिपीडिया के निष्कर्षों को अपने मुख्य पृष्ठ पर दिखाता है लेकिन विकिपीडिया एक हिन्दू-विरोधी वेबसाइट है, जिस पर कट्टर इस्लामी प्रोपेगंडा फैलाया जाता रहा है, इस बारे में हमने कई लेख प्रकाशित किए हैं। तो क्या गूगल आँख बंद कर के विकिपीडिया पर भरोसा करता है? तो फिर ‘आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस’ की बड़ी-बड़ी बातों का क्या?
गूगल के हिसाब से अजमल कसाब की मौत का कारण आत्महत्या है
विकिपीडिया एक पक्षपाती वेबसाइट है क्योंकि दिल्ली में हुए दंगों को उसने हिन्दू-विरोधी मानने से इनकार कर दिया। अब जब दंगे का मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन खुद पुलिस के समक्ष स्वीकार कर रहा है कि वो ‘हिन्दुओं को सबक सिखाना चाहता था’ और अंकित शर्मा, दिलबर नेगी सहित तमाम हिन्दुओं को जिस तरह बेरहमी से मजहबी नारेबाजी करते हुए मारा गया, सब कुछ प्रत्यक्ष था। फिर भी विकिपीडिया ने इस्लामी प्रोपेगंडा क्यों फैलाया?
अगर गूगल इसी राह पर चल रहा है और विकिपीडिया के निष्कर्षों को सीधा पहले पन्ने पर जगह देकर दिखा रहा है तो उसे कम से कम इसकी छानबीन तो कर ही लेनी चाहिए न कि वो सही है भी या नहीं? कल को कोई शातिर अजमल कसाब को फ़क़ीर या इमाम बता देगा तो क्या गूगल उसे मोईनुद्दीन चिश्ती और हाजी अली के साथ एक श्रेणी में रख देगा? ऐसा नहीं होना चाहिए। तो फिर उसकी मौत को ‘आत्महत्या’ कैसे दिखाया गया?
फिर 4 सालों तक चली क़ानूनी प्रक्रिया का क्या?
अजमल कसाब 4 साल तक जेल में बिरयानी खाता रहा था और अपनी मनपसंद किताबें मँगा कर पढ़ता रहा था। उस दौरान पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई हुई। उसके सारे सीसीटीवी फुटेज अदालत के समक्ष रखे गए। फ़रवरी 25, 2009 को पुलिस ने उसके खिलाफ 11,000 पेज की चार्जशीट दायर की। कसाब ने समय काटने के लिए तो चार्जशीट की उर्दू कॉपी तक की माँग कर दी थी, जो मराठी व अंग्रेजी में था।
गवाहों ने अजमल कसाब की पहचान की। डिफेंस के लिए उसे वकील भी दिया गया। अब्बास काज़मी ने अदालत में उसका पक्ष रखा। ट्रायल कोर्ट ने उसे फाँसी की सज़ा सुनाई। वो हाईकोर्ट गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा। वो सुप्रीम कोर्ट गया। अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सज़ा बरकरार रखा। फिर राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे खारिज किया, तब जाकर उसे सज़ा मिली।
क़ानून के हिसाब से सब कुछ हुआ। 166 लोगों के हत्यारे आतंकी को इतनी छूट किस देश में मिलती है कि गूगल क़ानून-सम्मत सज़ा को ‘आत्महत्या’ कह रहा है? जनभावनाएँ तो ये थीं कि उसे पकड़े जाने के अगले ही दिन फाँसी की सज़ा दे दी जाए लेकिन सजा मिली कानून के हिसाब से।
फिर भी गूगल को लगता है कि उसने जेल में आत्महत्या कर ली। ऐसे में कल को किसी बेहूदा वेबसाइट ने लिख दिया कि ओसामा बिन लादेन PUBG खेलते हुए मारा गया था तो क्या गूगल उसे मान लेगा? या फिर बगदादी भी ज़रूर दिवाली के पटाखों के कारण मर गया होगा? कम से कम मानवाधिकार वाले तो खुश हो जाएँगे कि उन्हें हिन्दू त्यौहार के खिलाफ एक मुद्दा मिल गया। गूगल इसे भी पहले पन्ने पर दिखा दे।
तकनीकी बहाने बना कर बच नहीं सकता गूगल
अब थोड़ा समझ लेते हैं कि आखिर गूगल के पहले पृष्ठ पर सर्च निष्कर्ष आते कैसे हैं। गूगल के पास जिन वेबसाइटों के साइटमैप होते हैं, उनके रिजल्ट्स वो आसानी से शो कर सकता है। जिस वेबसाइट का नेविगेशन लिंक जितना अच्छा होगा, वो गूगल सर्च में उतना ऊपर आता है। उन साइटों के रिजल्ट्स दिखाने में ज़्यादा दिक्कत आती है जो यूआरएल पाथ या यूआरएल नाम की जगह यूआरएल पैरामीटर का इस्तेमाल करते हैं।
सवाल यह उठता है कि कसाब जैसे आतंकी की कानूनी सजा को आत्महत्या दिखाना किस नैरेटिव को समर्पित है? क्या विकिपीडिया के एक या दो लेख को, भारतीय मीडिया पोर्टलों पर दी गई तमाम रिपोर्ट्स से बेहतर मानना गूगल की गलती नहीं? अगर ये मशीनी तरीकों और अल्गोरिदम के हवाले से भी रिजल्ट आती है तो भी क्या मीडिया पोर्टल/साइट्स को नीचे दिखाना (जो सच्ची व सही जानकारी दे रहे हैं) और विकीपीडिया या किसी अन्य पोर्टल के झूठ को सबसे ऊपर दिखाना अनुचित नहीं?
पत्रकारिता की दुनिया में अक्सर उसकी सूचना को पुष्ट माना जाता है जो ग्राउंड पर हो। घटनास्थल के जो जितना नजदीक है, उसकी सूचना को उतना भरोसेमंद माना जाता है। कहीं की खबर के सही विवरण के लिए स्थानीय मीडिया और उसके पत्रकारों की बातो का भरोसा किया जाता है। क्या भारत की किसी घटना के लिए विदेशी विकिपीडिया गूगल के लिए ज्यादा भरोसेमंद है, भले ही वो गलत ही क्यों न दिखाए?
एक कारण और संभव है कि इस्लामी कट्टरपंथी या आतंकी सरगना ऐसे आतंकियों को ‘फिदायीन’ की संज्ञा देते हैं, इसीलिए गूगल कीवर्ड्स के हेरफेर के कारण इसे आत्महत्या बता रहा हो क्योंकि फिदायीन का अर्थ वो लोग होते हैं, जो खुद की जान को किसी मिशन के लिए समर्पित करने के लिए लगे होते हैं। आतंकियों का मिशन क्या है, ये छिपा नहीं है। आजकल ‘जिहाद’ और ‘फिदायीन’ शब्दों का इस्तेमाल क्यों होता है, ये छिपा नहीं है।
अजमल कसाब ने आत्महत्या की तो 11000 पन्नों की चार्जशीट में क्या है?
तो क्या गूगल ने फिदायीन का मतलब ये समझ लिया कि उसने सच में किसी ‘कॉज’ के लिए खुद की जान ‘समर्पित’ कर दी? वो ‘कॉज’ क्या था? 166 लोगों का खून कर के किसी देश को एक तरह से 3 दिन तक बंधक बनाए रखना? फिर तो कोई सनकी वेबसाइट आतंकी अफजल गुरु को सप्तऋषियों में से एक घोषित कर देगा और गूगल उसके निष्कर्षों को पहले पेज पर दिखाने लगेगा क्योंकि वो अफजल ‘गुरु’ है।
गूगल को 11,000 पेज की चार्जशीट पढ़ कर देखना चाहिए कि अजमल कसाब ने किया क्या था, वो क्या था और उसे क्यों फाँसी दी गई। अगर आतंकी खुद को ‘फिदायीन’ बोलें और सुरक्षाबलों के हाथों मारे जाएँ तो इसका मतलब ये नहीं कि उन्होंने आत्महत्या की है, इसका मतलब है कि वो ‘कुत्ते की मौत’ मारे गए। फिर कसाब को तो 4 साल खिला-पिला कर सज़ा सुनाई गई। एक-एक प्रक्रिया और उससे जुडी खबरें इंटरनेट पर हैं।
वहीं ओसामा बिन लादेन की मौत का कारण गूगल ने सही बताया है कि वो ‘Gunshot Wounds’ से मरा। फिर भारत के साथ भेदभाव क्यों? कसाब की मौत पर कोई सस्पेंस रहता और अलग-अलग वर्जन्स होते तो शायद कन्फ्यूजन की बात होती लेकिन जहाँ एक-एक छोटी-छोटी बातें भी लगातार खबरें बन रही थी, गूगल झूठ क्यों दिखा रहा है? अब देखना ये है कि वो कब तक इसे बदलता है।
जहाँ एक तरफ PETA हिन्दुओं को शाकाहार का पाठ पढ़ाता है और उनके पर्व-त्योहारों को बदनाम करने का प्रयास करता है, वहीं दूसरी तरफ वो ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु वेटिकन के पोप फ्रांसिस को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड देता है। लेखिका शेफाली वैद्य ने PETA के इस दोहरे रवैए की ओर सबका ध्यान आकृष्ट कराया है। क्या PETA ईसाई मिशनरियों के एजेंडे को प्रमोट करता है?
आखिर PETA ने माँसाहारी पोप को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड क्यों दिया? उसका कहना है कि अस्सीसी (Assisi) के संत फ्रांसिस के योगदानों को याद किया, जिन्होंने जानवरो के प्रति दया को बढ़ावा दिया था। उसका कहना है कि पोप ने 120 करोड़ रोमन कैथोलिक को कहा है कि वो जानवरों के साथ हिंसा न करें, इसीलिए उन्हें ये अवॉर्ड दिया गया है। साथ ही पोप को पर्यावरणविद भी बताया गया है।
अब हम आपको बताते हैं कि पोप खाते क्या हैं? दरअसल, पोप के ही शेफ ने बताया था कि वो सुबह-सुबह नाश्ते में अन्य चीजों के साथ कोल्ड मीट लेते हैं। 12 साल की एक बच्ची ने जब पोप को शाकाहारी बनने की चुनौती दी थी तब पोप ने उसे ‘ब्लेसिंग’ भेज दिया था लेकिन शाकाहारी बनने का आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वो बच्चों को अपनी प्रार्थनाओं में याद रखेंगे और धन्यवाद दिया।
लेकिन, यही PETA श्री श्री रविशंकर के ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के परिसर में एक कुत्ते की ‘हत्या का प्रयास’ का आरोप होने पर जाँच और कार्रवाई के लिए कर्नाटक पुलिस को पत्र लिखता है। आखिर PETA चाहता है कि सिर्फ एक ‘कुत्ते की हत्या के प्रयास का आरोप’ पर पूरे राज्य की पुलिस मशीनरी सक्रिय हो जाए? क्या ये सब श्री श्री रविशंकर को बदनाम करने के लिए नहीं किया गया क्योंकि वो हिन्दू संत हैं?
सद्गुरु ने भी एक बार कहा था कि PETA द्वारा जल्लिकट्टु का विरोध करना ठीक नहीं है। उन्होंने समझाया था कि ऐसी संस्थाएँ स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानती हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय मुद्दों और लोगों की समझ ही नहीं होती है। हालाँकि, PETA इंडिया खुद को PETA यूएस से अलग संस्था बता कर अक्सर पल्ला झाड़ लेता है लेकिन फिर दोनों का ‘लोगो’ एक क्यों है?
PETA के एक पूर्व-कर्मचारी ने बताया था कि वो ‘भारत में मुर्गों को ट्रांसपोर्ट के दौरान उनके साथ होने वाली क्रूरता को कैसे रोकें’ जैसे मुद्दों पर रणनीति बनाने के लिए बहस करते हैं। PETA के पूर्व कर्मचारी ने ये भी बताया कि JW Marriot जैसे बड़े पाँच सितारा होटलों में उनकी बैठकें होती हैं। बैठकों में मुर्गे, माँस और अन्य जानवरों के मीट ऑर्डर किए जाते हैं। बता दें कि जीवहत्या का विरोध करने वाले PETA के कर्मचारियों का 5 स्टार होटल में बैठ कर माँस खाना उनके दोहरे रवैए को उजागर करता है।
बता दें कि PETA की वेबसाइट पर जानवरों की हत्या को लेकर ख़ास समुदाय के लोगों को कई सलाह दी गई है। बताया गया है कि चाकू की धार को एकदम तेज़ कर के रखें। उसे बार-बार धार दें। उसकी लम्बाई ठीक रखें। इसकी लम्बाई 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। सलाह दी गई है कि काफी अच्छे तरीके से जानवर की हत्या करें, तीन से ज्यादा बार वार न करें और जानवर को हाथ-पाँव मारने दें, ताकि खून जल्दी-जल्दी निकल जाए।
उन्नाव दही चौकी क्षेत्र में बुधवार (जुलाई 22, 2020) सुबह दो महिलाओं के कई दिन पुराने शव बरामद हुए हैं। कई दिनों पुराने इन शवों का लखनऊ कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ढाबे के पीछे तब पता चला जब वहाँ बहुत तेज बदबू फैलने लगी। पुलिस का कहना है कि इन महिलाओं को किसी और जगह मारकर यहाँ ढाबे के पीछे फेंका गया है।
उन्नाव: लखनऊ कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ढाबा के पीछे मिला दो महिलाओं का शव, सदर कोतवाली क्षेत्र के दही चौकी के जंगल में शव मिलने से सनसनी, कई दिन पुराना शव, बदबू ने बताया शव का ठिकाना, क्षेत्राधिकारी नगर व कोतवाली प्रभारी मौके पर
इन शवों के मिलने की सूचना मिलते ही दही चौकी इंचार्ज प्रेम नारायण कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्रा, सिटी सीओ, एडिशनल एसपी, फ़ॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँची। शवों की पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि ये दोनों शव तकरीबन 15 दिन पुराने हैं।
#Unnao – जंगल में अज्ञात महिलाओं के शव मिलने से हड़कंप। शहर के दही चौकी क्षेत्र में खाना खजाना होटल के पीछे जंगल मे मिले दो महिलाओं के शव।औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी में महिलाओं की हत्या। सदर कोतवाली के दही चौकी क्षेत्र की घटना @unnaopolice@Uppolicepic.twitter.com/AJDkOkaqOT
— UttarPradesh.ORG News (@WeUttarPradesh) July 22, 2020
एएसपी सहित पुलिस बल मौके पर मौजूद है और डॉग स्कॉड फील्ड यूनिट टीम भी बुलाई गई है। उन्नाव पुलिस ने इसकी सूचना ट्विटर पर शेयर करते हुए बताया है कि घटना की सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी, क्षेत्राधिकारी नगर व थाना कोतवाली सदर पुलिस द्वारा मौके पर पहुँचकर कर दोनों अज्ञात महिलाओं के शवों को कब्जे मे लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम हेतु भेजा गया है तथा शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्नाव- जंगल मे दो महिलाओं का शव मिलने से सनसनी। कई दिन पुरानी बताई जा रही लाश। शवों की नही हो सकी शिनाख्त, पुलिस मामले की जांच में जुटी। दही चौकी क्षेत्र का मामला। @Uppolice@dgpuppic.twitter.com/qFwBWdL1Z9
इस संबन्ध में अपर पुलिस अधीक्षक ने एक वीडियो जारी कर शवों के मिलने की सूचना देते हुए कहा है कि इस पर जाँच की जा रही है और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।