राजधानी दिल्ली में वसंत विहार स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल काफी सुर्ख़ियों में छात्रों का ब्रेनवॉश करने के लिए ‘जेंडर आइडेंटिटी पॉलिटिक्स’ पर एक सत्र का आयोजन कराया गया था, जिसमें छात्रों को एक्टिविटी के नाम पर ऐसी कलरिंग बुक दी गई हैं, जिनमें सेक्स टॉय पहने, हस्तमैथुन करती नग्न युवतियाँ दिखाई गई हैं।
जैसे ही इस सत्र की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, वैसे ही लोग हैरान रह गए। यह सत्र Nazariya- Queer Feminist Resource Group (Nazariya QFRG) नाम के समूह द्वारा आयोजित कराया गया था।
Nazariya QFRG की एक और पोस्ट से सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ी हुई है। इस विवादित पोस्ट में यह समूह बच्चों के लिए एक प्लैनर/कलरिंग बुक का विज्ञापन कर रहा था, जिसमें एक बिना कपड़ों की औरत ‘डिल्डो’ (महिलाओं के लिए सेक्स टॉय) पहन कर खड़ी है। इसके अलावा कलरिंग के निचले हिस्से में बाईं तरफ मास्टरबेट (हस्तक्रिया) करती हुई युवती नज़र आ रही है। इस तस्वीर के साथ लिखा है – “छात्रों के लिए 100 रूपए का डिस्काउंट।”
जिस तरह का डरावनी जागरूकता Nazariya QFRG फैला रहा था, हमने उसकी पृष्ठभूमि तलाशनी शुरू की। फिर हमें पता चला कि यह कोई सतही लोग नहीं हैं, बल्कि एलजीबीटी (LGBT) से जुड़े मामलों पर काम करने वाले मुख्यधारा के लोग हैं। Nazariya QFRG की शुरुआत तीन लोगों ने मिल कर की थी – ऋतुपर्णा बोरा, ऋतंभरा मेहता और पूर्णिमा गुप्ता।
इस समूह की वेबसाइट के मुताबिक, ऋतुपर्णा आईसीटी की मदद से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुस्लिम लड़कियों के लिए लीडरशिप प्रोग्राम भी चला रही हैं। इसके अलावा ऋतुपर्णा ने एनसीआरटी द्वारा प्रकाशित ‘किशोरावस्था प्रशिक्षण कार्यक्रम’ संबंधी विषयवस्तु में भी सहयोग किया है।
इतना ही नहीं, वह दिल्ली की ‘क्वीर (queer) परेड’ में भी शामिल होती हैं। वहीं, ऋतंभरा Nazariya QFRG की उपनिदेशक हैं। वह समूह के संपर्क, समूह के लिए फंड्स, नई योजनाएँ और उन्हें लागू कराने से जुड़े काम करती है। इसके अलावा पूर्णिमा, लिंग, जाति और सेक्सुअलिटी संबंधी मुद्दों पर प्रशिक्षण देती हैं।
रितुपर्णा और ऋतंभरा ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कई बातें कही थीं। उन्होंने कहा था वो तमाम कॉलेज, विश्वविद्यालय और समूहों में लिंग, सेक्सुअलिटी और एलजीबीटी समेत तमाम विषयों पर वर्कशॉप कराते हैं।
यानी, इन लोगों का मुस्लिम एलजीबीटी समुदाय से बराबर संवाद है। इसके बाद Nazariya QFRG के सदस्यों ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन और आर्थिक सहयोग करने वाले लोग छोटे स्तर पर काम करने वाले सामुदायिक समूहों के लिए आसानी से फंड इकट्ठा कर सकते हैं।”
बड़े पैमाने पर आर्थिक सहयोग करने वालों के प्रोटोकोल्स की वजह से कम संसाधनों वाले छोटे सामुदायिक समूहों के लिए चीज़ें मुश्किल हो जाती हैं। वहीँ दूसरी तरफ बड़े संपर्क वालों से आर्थिक मुनाफा भी ज़्यादा होता है। इसके बाद उन्होंने कहा- “कुछ फंडिंग करने वाले ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए लोगों के वेतन से ज़्यादा ज़रूरी कार्यक्रम होते हैं। जिसके चलते कम कर्मचारियों के साथ काम करने में परेशानी भी होती है। छोटे सामुदायिक समूहों को कई मामलों में मदद करने पर फंड को ऐसी जगहों पर ले जाना आसान हो जाता है, जहाँ इसका ज़्यादा फ़ायदा हो सके। ”
Nazariya QFRG की एलजीबीटी समुदाय में स्वीकार्यता के आधार पर एक बात और साफ़ हो जाती है, ट्वीटर पर इनके 1 लाख, 80 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं। यानी, सोशल मीडिया पर इनके पास अच्छा भला मंच है।
ट्वीट
इसके अलावा Nazariya QFRG के सदस्य अक्सर मशहूर समाचार समूहों की चर्चाओं में भी नज़र आते हैं।
इंडिया टुडे की चर्चा में नज़रिया के सदस्य
साथ ही ‘नज़रिया’ को नीति आयोग द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों में भी बुलाया जाता है।
साभार – शम्पा सेनगुप्ता
इन सारी बातों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि ‘एलजीबीटी’ के क्षेत्र में Nazariya QFRG विश्वसनीयता और मशहूर नाम है। लेकिन जिस तरह इन लोगों ने बच्चों का ब्रेनवाश करने का प्रयास किया उससे समाज में इनके खिलाफ काफी रोष व्याप्त है।
आखिर जागरूकता के नाम पर बच्चों के सामने इस तरह की चीज़ रखना किसी भी सूरत में जागरूकता नहीं कहा जा सकता है। छात्रों के सामने ऐसी तस्वीर रखना, जिसमें महिला के पास सेक्स टॉय है, इससे बच्चों का किसी भी तरह का विकास होने से रहा!
इस बात पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है कि अगर बच्चों के सामने इतनी छोटी उम्र में ऐसी चीज़ें रखी जाएँगी, तो उनके दिमाग पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? Nazariya QFRG ने उसी कलरिंग बुक में ऐसी तस्वीर भी लगाई, जिसमें एक आदमी की छाती का आकार बढ़ा हुआ था और वह एक बच्चे को दूध पिला रहा था। इस तस्वीर की भी सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है।
हमने इसके पहले भी कई अलग-अलग लेखों में बताया है कि कैसे जेंडर आइडेंटिटी पॉलिटिक्स का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। प्रदेश और राज्य दोनों सरकारों को इस मामले पर सक्रिय होकर ठोस कदम उठाने चाहिए। जिससे बच्चों के बीच इस तरह की नकारात्मक जागरूकता का प्रचार न हो।
हैरानी की बात यह है कि इस तरह की चीज़ों पर आम लोगों का ध्यान नहीं जाता है, या नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि ऐसी संस्थाओं के ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों के ब्रेनवाश की प्रक्रिया जारी है। स्कूलों पर इतने छोटे स्तर पर इस तरह के समूहों का प्रभाव की वजह से समाज की नींव बहुत कमज़ोर हो रही है।
IPL के अध्यक्ष बृजेश पटेल ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2020 संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित होने जा रहा है। बृजेश पटेल ने कहा, “आईपीएल 2020, जिसे कोरोना वायरस के कारण स्थगित कर दिया गया था, अब यूएई में आयोजित किया जाएगा। हमने सरकार की अनुमति के लिए आवेदन किया है।”
IPL 2020, that was postponed due to coronavirus, will now be held in the UAE. We have applied for the government’s permission. We will discuss the further course of action in IPL General Council: Brijesh Patel, IPL Chairman pic.twitter.com/aD0OndcQ1Q
गौरतलब है कि COVID-19 के कारण IPL को अपने तय समय पर नहीं खेला जा सका था। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इस साल अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तावित t-20 विश्व कप को स्थगित कर दिया है, जिससे सितंबर से नवंबर की शुरूआत तक आईपीएल के आयोजन का समय मिल गया है।
इस सम्बन्ध में आईपीएल संचालन परिषद के अध्यक्ष बृजेश पटेल ने कहा कि आईपीएल संचालन परिषद एक सप्ताह या 10 दिनों के भीतर बैठक कर अंतिम कार्यक्रम को लेकर हर तरह का फैसला ले लेगी।”
उन्होंने कहा कि अब तक की योजना यही है कि 60 मैचों वाले पूर्ण आईपीएल का आयोजन हो, इस बात की संभावना अधिक है कि इसका आयोजन यूएई में ही होगा। आईपीएल का 13वाँ संस्करण 29 मार्च से शुरू होने वाला था, लेकिन COVID-19 के प्रकोप ने इसे खेल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
इससे पहले, 20 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने कोरोना वायरस के कारणों का हवाला देते हुए पुरुषों के t-20 विश्व कप को स्थगित कर दिया था। यह इवेंट मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया में 18 अक्टूबर से 15 नवंबर तक होने वाला था।
पटेल ने कहा – “यूएई इन्फ्रास्ट्रक्चर सम्बन्धी मामलों में बेहतर है। हम वहाँ पहले भी खेल चुके हैं, इसलिए हम सुविधाओं से अवगत हैं। एशिया कप वहाँ खेला जा चुका है। यह पहले भी अन्य अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स की मेजबानी कर चुका है।”
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को अदालत की अवमानना का केस दर्ज कर लिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने भूषण के साथ-साथ ‘ट्विटर इंडिया’ पर भी मुकदमा दर्ज किया। मामले की सुनवाई कल बुधवार, 22 जुलाई को होगी।
Supreme Court initiates Suo Motu contempt of court proceedings against Advocate Prashant Bhushan & Twitter India. The matter will be heard tomorrow by a bench comprising Justices Arun Mishra, BR Gavai & Krishna Murari #SupremeCourt#SuoMotu@pbhushan1@TwitterIndia#Contempt
जस्टिस अरुण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की तीन जजों वाली बेंच 22 जुलाई को एडवोकेट प्रशांत भूषण और ट्विटर इंडिया के खिलाफ कोर्ट केस की अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगी।
SC initiates suo motu contempt proceedings against advocate Prashant Bhushan for his alleged derogatory comments against the apex court on Twitter. The proceedings are listed before a bench headed by Justice Arun Mishra on Wednesday.
हालाँकि, अवमानना कार्यवाही का सही कारण अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा किए गए कुछ अंतिम ट्वीट्स में से एक, जून 27, 2020 को किए गए उनके ट्वीट पर काफी विवाद उत्पन्न हुआ था। यह भी उल्लेखनीय है कि विवादित अधिवक्ता प्रशांत भूषण न्यायपालिका पर लगातार हमले कर रहे हैं।
When historians in future look back at the last 6 years to see how democracy has been destroyed in India even without a formal Emergency, they will particularly mark the role of the Supreme Court in this destruction, & more particularly the role of the last 4 CJIs
अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”
Supreme court initiates suo motu #contempt proceedings against adv Prashant Bhushan and #twitter. Justice Arun Mishra’s bench to hear it tomorrow pic.twitter.com/kr6HhE22Aq
हालाँकि प्रशांत भूषण के खिलाफ यह पहली अवमानना कार्यवाही नहीं है। मार्च 2019 में, भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक ‘प्रामाणिक गलती’ ट्वीट करते हुए स्वीकार किया था कि सरकार ने संभवत: अंतरिम सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति पर उच्चस्तरीय चयन पैनल के दस्तावेज तैयार किए थे।
गौरतलब है कि इससे पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने वकील प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाख़िल की थी। प्रशांत भूषण द्वारा शुक्रवार (फरवरी 1, 2019) को दिए गए बयानों को लेकर यह अवमानना याचिका दाख़िल की गई थी।
याचिका में वेणुगोपाल ने कहा था कि भूषण ने उनकी ईमानदारी पर शक जताया। बता दें कि प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि सीबीआई प्रमुख नागेश्वर राव की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया।
बिहार के पूर्णिया में एक महादलित व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। ये घटना डगरुआ थाना क्षेत्र स्थित दुबैली गाँव की है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में न्याय की माँग की है। विहिप का कहना है कि सर्वलाल हरिजन (सर्वलाल माँझी) की न सिर्फ हत्या की गई बल्कि उनके घर पर भी हमला किया गया और उनके परिवार पर अत्याचार किया गया। विहिप के जिलाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार एवं जिला मंत्री रवि भूषण झा ने इस घटना से मीडिया को अवगत कराया।
दबंगों ने सर्वलाल हरिजन को मार डाला: विहिप का आरोप
विहिप के पदाधिकारियों ने बताया कि जून 2, 2020 को सर्वलाल हरिजन का सूअर गाँव के ही एक दबंग की बाँसवाड़ी में चला गया था, जिसके बाद वो लोग उग्र हो गए। इसके बाद दबंग व्यक्ति के परिवार के लोगों ने सहयोगियों के साथ मिल कर सर्वलाल हरिजन के घर पर हमला कर दिया और उन्हें अधमरा कर दिया। उनके घर में लूटपाट की गई और फिर आग लगा दिया गया। परिवार पर भी जानलेवा हमले किए जाने की बात सामने आई है।
विहिप के पदाधिकारी द्वय ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार की महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और उनके साथ भी आरोपितों ने अभद्र व्यवहार किया। घटना के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। सर्वलाल हरिजन की स्थिति गंभीर देख उन्हें कुछ दिनों बाद बेहतर इलाज के लिए कटिहार मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया। 10 दिनों तक इलाज के बाद 5 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई।
विहिप ने पुलिस पर भी कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि पुलिस-प्रशासन ने दोषियों को पकड़ने की बजाए मृतक सर्वलाल हरिजन के परिवार पर ही धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगा कर मुकदमा दर्ज कर दिया है। मृतक की पुत्री ने बाद में हरिजन थाना पूर्णिया में मुकदमा संख्या 32/ 2020 दर्ज करवाया है। विहिप का आरोप है कि पूर्णिया हरिजन थाना के पर्यवेक्षाओं ने अभी तक घटनास्थल का दौरा नहीं किया है
ऑपइंडिया से बोले विहिप जिलाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार
विहिप और बजरंग दल ने भी पुलिस से माँग की है कि इस मामले में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ऑपइंडिया ने पूर्णिया में विहिप के जिलाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार से बातचीत की, जो पीड़त परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और जिन्होंने इस पूरी घटना को शुरू से अंत तक देखा-समझा है। उन्होंने बताया कि दुबैली पंचायत में मात्र 15 हिन्दू परिवार हैं और 500 से भी अधिक मुस्लिम घर हैं।
वहाँ जो भी मुट्ठी भर हिन्दू लोग हैं, वो महादलित हैं। पीड़ित परिवार भी इसी समुदाय से आते है, जो ‘हरिजन’ सरनेम लगाते हैं। ये लोग पशुपालन कर के अपना गुजर-बसर करते हैं और सूअर भी पालते हैं। 2 जून को असल में हुआ क्या था? इसके जवाब में उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि उस दिन सर्वलाल हरिजन के सूअर का एक बच्चा मोहम्मद सोहिब (पिता- दाऊद) के बाँसवाड़ी में चला गया था।
इसके बाद मोहम्मद सोहिब और उसके परिवार के लोगों ने सूअर के उस बच्चे को जान-बुझ कर मार डाला। उसे मारने के लिए पत्थर का इस्तेमाल किया गया। पोद्दार ने आगे बताया कि जब सूअर के बच्चे को मार डाला गया तो सर्वलाल हरिजन के परिजन सोहिब के यहाँ पहुँचे और पूछा कि उनके पशु को क्यों मारा? इसपर आरोपित और उसका परिवार महादलितों को ही भला-बुरा कहने लगा और पूछा कि अपने पशु को बाँध कर क्यों नहीं रखा?
महादलित बुजुर्ग की मौत पर स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट
आगे वाद-विवाद बढ़ाते हुए उनलोगों ने कहा कि तुम्हें भी मारेंगे। पवन कुमार पोद्दार ने बताया कि सोहिब ने मुस्लिम भीड़ के साथ पीड़ित परिवार को घर तक खदेड़ दिया और वहाँ परिवार के सभी सदस्यों को मारा। इसके बाद घर में आग लगा दी गई। उन्होंने बताया कि चूँकि पीड़ित परिवार के घर के आसपास मुस्लिमों के ही घर हैं, इसीलिए इन्हें निकलने भी नहीं दिया गया। पीड़ितों को थाने भी नहीं पहुँचने दिया गया।
बाद में पीड़ितों ने फोन कर के डगरुआ थाना पुलिस को सूचित किया। घटना के 2 घंटे बाद पुलिस पहुँची। पुलिस ने ही सारे पीड़ितों को अस्पताल पहुँचाया। बाकी पीड़ित तो ठीक हो गए लेकिन सर्वलाल हरिजन के हाथ और छाती में चोट लगने के कारण कटिहार मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहाँ कम से कम 10 दिन उनका इलाज हुआ लेकिन कोई फायदा नहीं हो पाया और उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई।
सर्वलाल हरिजन की मौत के बाद स्थानीय अखबार में प्रकाशित खबर
पोद्दार आगे बताते हैं कि इसके बाद परिजनों ने सर्वलाल हरिजन को लेकर पूर्णिया के किसी प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराना उचित समझा। प्राइवेट नर्सिंग होम में भी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और दिल्ली ले जाने को कहा। चूँकि, डॉक्टरों ने 2 लाख रुपए के खर्चे के अनुमान लगाया था और गरीब परिवार के पास इतने रुपए थे नहीं, वो सर्वलाल हरिजन को लेकर घर आ गए। उन्होंने रुपए जुटाने चाहे तो 30-40 हजार से अधिक नहीं जमा हुए।
विहिप के पूर्णिया जिलाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार ने बताया कि घर लाए जाने के 2 दिन बाद सर्वलाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद सूचना मिलते ही पुलिस आई, जिसने शव का पोस्टमॉर्टम कराया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पीड़ित परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि अब तक SC-ST थाने ने निरीक्षण नहीं किया है। वो लोग पुलिस की आगे की कार्रवाई का इन्तजार कर रहे हैं।
क्या कहते हैं सर्वलाल हरिजन के परिजन
ऑपइंडिया ने मृतक के पुत्र संतोष कुमार से संपर्क किया, जिन्होंने पवन कुमार पोद्दार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि आज भी मुस्लिम युवक रात में नकाब पहन कर उनके परिवार पर निगरानी रख रहे हैं ताकि वो लोग कुछ कर न पाएँ। साथ ही लम्बे समय से मुस्लिम समाज के लोगों पर डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने बताया कि विकास कार्यों में भी मुस्लिम जनप्रतिनिधि भेदभाव करते हैं।
संतोष कुमार ने इस दौरान सबसे बड़ा आरोप ये लगाया कि आरोपितों और उनके सहयोगियों ने उनके पिता का हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार नहीं होने दिया, जिसके बाद उन्हें अपने दरवाजे के पास ही लाश को दफनाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि चूँकि श्मशान तक जाने का रास्ता उनकी बस्तियों से होकर ही जाता है, इसीलिए उन्हें जलाने के लिए नहीं ले जाने दिया गया। इसलिए दफनाना पड़ा
संतोष ने बताया कि यहाँ ऊँची आवाज़ में गाना-बजाना होने पर भी मुस्लिम समाज के लोग आपत्ति जताते हैं, अंतिम यात्रा तो दूर की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाँव में उनके घर के सामने से सड़क भी नहीं बनवाई गई है। संतोष ने आगे आरोप लगाया कि 5 साल पहले उनलोगों के साथ ही हुई मारपीट में उनकी भाभी की भी मौत हो गई थी। वो अभी भी प्रशासन से न्याय की उम्मीद लिए बैठे हैं।
क्या कहना है पुलिस का?
ऑपइंडिया ने इस दौरान स्थानीय पूर्णिया मुख्यालय के डीएसपी पंकज कुमार से संपर्क किया। हमारी बातचीत उनके रीडर शंकर से हुई, जिन्होंने पुलिस का पक्ष हमारे सामने रखा। उन्होंने पुलिस द्वारा घटनास्थल का दौरा न करने के आरोपों को नकार दिया और कहा कि पुलिस ने मामले की जाँच की है और चूँकि सर्वलाल हरिजन की मौत की सूचना इस घटना के महीने भर बाद मिली है, पुलिस फिर से जाकर जाँच करेगी।
उन्होंने बताया कि राजकुमारी देवी नामक महिला ने एससी-एसटी थाने में केस दर्ज कराया है। वो सर्वलाल हरिजन की बेटी है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत की है कि आरोपितों द्वारा मारपीट और गाली-गलौज किया गया है लेकिन तब मौत की बात नहीं कही गई थी। इसीलिए, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद आने वाली ‘मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट’ का अध्यन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जब तक रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक ये नहीं पता चल सकता है कि उनकी मौत इसी घटना के कारण हुई है या फिर उन्हें किसी प्रकार की बीमारी थी। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि पुलिस ने उनका केस दर्ज करने में आनाकानी की। तब हत्या का मामला दर्ज नहीं हुआ था क्योंकि तब तक पीड़ित की मौत नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि तबियत खराब रहने के बावजूद डीएसपी ने जाँच की है। पुलिस फिर जाएगी।
पूर्णिया में सर्वलाल हरिजन की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट
ऑपइंडिया के पास सर्वलाल हरिजन की ‘मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट’ है, जिसमें उनका नाम ‘सरब लाल मांझी’ अंकित है। इसमें बताया गया है कि उनके शव को उनके घर के बरामदे पर जुलाई 6, 2020 को शाम 7:30 बजे पाया गया। ऊपर संलग्न की गई रिपोर्ट में आप आरक्षी अधिकारी का हस्ताक्षर भी देख सकते हैं। इसमें बताया गया है कि उनका पिछले 1 महीने से विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा था, अंत में रजा अस्पताल में मृत्यु हो गई।
इस रिपोर्ट में उन्हें अंदरूनी चोट लगने की बात स्वीकार की गई है। मृत्यु का समय रात 11 बजे बताया गया है। उनकी उम्र 65 वर्ष थी। पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद जाँच को आगे बढ़ाएगी। रीडर शंकर ने बताया कि पुलिस की टीम जब घटनास्थल पर गई थी तब लोगों से ठीक से बातचीत नहीं हो सकी थी, इसलिए इस दिशा में फिर से प्रयास किया जाएगा। पीड़ितों की बातें सुनी जाएगी।
सर्वलाल हरिजन पक्ष की एफआईआर में क्या है?
संतोष कुमार ने हरिजन पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें बताया गया है कि जो सूअर का बच्चा मुस्लिम पक्ष की खेत में गया था, वो उनकी बहन का था। इसमें मोहम्मद मिंटू और मोहम्मद इजराइल सहित 14 लोगों को आरोपित बनाया गया है। लिखा है कि जब उनकी बहन राजकुमारी देवी ने जब पूछा कि उनके बच्चे को क्यों मारा गया था दूसरे पक्ष द्वारा उन्हें भी जान से मार डालने की धमकी दी गई और साथ ही पकड़ कर छेड़छाड़ किया जाने लगा।
संतोष माँझी द्वारा दर्ज कराई गई FIR
एफआईआर के अनुसार, संतोष की बहन को पकड़ कर अर्धनग्न भी कर दिया गया। इसमें तहसीन, अशफाक, राशिद और सोहिब सहित कुल 14 को आरोपित बनाया गया है। इन सब पर लाठी-डंडे और बाँस से वार करने का आरोप लगाया गया है। सोहिब पर आरोप लगाया गया है कि उसने संतोष के पिता सर्वलाल को अंदरूनी चोट पहुँचा कर जख्मी कर दिया। साथ ही पत्थर चलाने का भी आरोप है।
इसके अलावा एक अन्य एफआईआर राजकुमारी देवी ने एससी-एसटी थाने में भी दर्ज कराई है, जिसमें मोहम्मद मिंटू और मोहम्मद नाजिम पर सूअर के बच्चे को मार डालने का आरोप लगाया गया है। आरोप लगाया गया है कि उन्होंने गाली देते हुए राजकुमारी देवी के लिए आपत्तिजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ‘डोमिन’ कहा और मार डालने की धमकी दी, साथ ही साड़ी-ब्लाउज खींच कर नग्न कर दिया।
हरिजन थाने में राजकुमारी देवी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर
पूर्णिया एससी-एसटी थाना एफआईआर केस नंबर 32/20 में सर्वलाल हरिजन की बेटी राजकुमारी देवी ने आरोप लगाया है कि जब उनके रोने-चिल्लाने पर उनके परिजन दौड़े आए तो मुस्लिम पक्ष ने भी अपने सहयोगियों और परिजनों को हथियारों के साथ बुला लिया और फिर मारपीट कर के घायल कर दिया। उन्होंने अपने पिता को घायल किए जाने की बात कही। (चूँकि पिता की मौत 1 महीने बाद हुई, इसीलिए ये एफआईआर में दर्ज नहीं है।)
मुस्लिम पक्ष की FIR में क्या है?
मुस्लिम पक्ष की तरफ से मोहम्मद सोहिब ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें सर्वलाल माँझी सहित 13 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। ऑपइंडिया ने आरोपित मोहम्मद सोहिब से भी संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनकी तरफ से किसी से बात नहीं हो पाई है। उस पक्ष से जैसे ही किसी से संपर्क होता है, हम इस रिपोर्ट को अपडेट कर आपको अवगत कराएँगे।
मुस्लिम पक्ष द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी
उसने आरोप लगाया है कि जब उसके दोनों भाई जा रहे थे तो आरोपितों ने रोक कर धक्का-मुक्की किया और गाली-गलौज किया। मुस्लिम पक्ष ने हरिजन पक्ष के एक व्यक्ति पर लोहे के रॉड से वार करने का आरोप लगाया है और साथ ही उन सब पर महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव करने का आरोप भी लगाया है। सोहिब ने लिखा है कि संतोष माँझी ने डंडे से उसकी फुआ को मारा, जिससे वो बेहोश हो गई।
मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि हरिजनों ने उनके साथ लूटपाट भी की और जान से मारने की धमकी दी। मोहम्मद सोहिब के पॉकेट से 5000 रुपए लूट लेने की बात भी एफआईआर कॉपी में दर्ज है। बताया गया है कि सर्वलाल माँझी डीलर हैं और जब से उनकी जन-वितरण प्रणाली की अनुज्ञप्ति रद्द हुई है, तब से वो बौखलाए हुए हैं। इस एफआईआर कॉपी में हरिजनों पर तलवार से वार करने का आरोप भी लगाया गया है।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लिंक वाली भारत में काम कर रही कम से कम सात चीनी कंपनियों की पहचान की गई है, जिनमें हुवाई, अलीबाबा समेत 7 बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं। ये उन 7 कंपनियों की सूची में शामिल हैं, जिनके खिलाफ भारतीय खुफिया सूत्रों ने रिपोर्ट दी है कि इन सभी के सम्बन्ध चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से जुड़े हुए हैं।
चीन के इन बड़े नामों को भारत सरकार द्वारा 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने के बाद चिन्हित किया गया है, जिसने चीन की कम्युनिस्ट सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स को एकबार फिर सरदर्द देने का काम कर दिया है और नतीजा यह है कि ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर अपने ‘लेखों’ के माध्यम से ‘रवीश रोना’ शुरू कर दिया है।
The Indian economy will suffer as New Delhi plans to sanction several Chinese companies in the country, using “military connection” as an excuse, because #India can’t find an ideal replacement from other countries: Chinese analysts https://t.co/m5WGWygxmwpic.twitter.com/02CQTFzRSL
ग्लोबल टाइम्स की मानें तो भारत की अर्थव्यवस्था को ऐसा करने से बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्लोबल टाइम्स की इस हरकत पर सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि बर्बाद भारत की अर्थव्यवस्था होगी और दर्द चीन को हो रहा है, बड़ी विडंबना है।
चीन से व्यापार को लेकर भारत के इस आक्रामक रवैए पर खिसियाए हुए ग्लोबल टाइम्स ने ‘रवीश रोना’ करते हुए लिखा है कि भारत ऐसा चीनी सेना के विरोध में नहीं बल्कि ‘घरेलू राष्ट्रवाद’ के लिए कर रहा है।
ग्लोबल टाइम्स जिस घरेलू राष्ट्रवाद का जिक्र अपने इस लेख में कर रहा है उसका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की घोषणा की ओर है। पीएम मोदी ने कहा था कि हमें कोरोना महामारी को अवसर में बदलते हुए विदेशों पर अपनी निर्भरता को कम करके स्वदेशी के महत्व पर जोर देना होगा।
ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख में प्रलाप करते हुए लिखा है कि जब चीन ने भारत से सीमा विवाद पर बात करने के प्रयास किए तो भारत ने और सेना बल झोंका और चीनी कम्पनियों का बहिष्कार करने का फैसला किया।
सरकार का कहना है कि फिलहाल इन्हें चिन्हित किया गया है और इन पर क्या एक्शन लिया जाएगा, इस सम्बन्ध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। ये सभी सातों चीनी कंपनियाँ मोबाइल और टेक सेक्टर से नहीं जुड़ी हैं, लेकिन इन्होंने भारत की विभिन्न इंडस्ट्रीज में विशाल स्तर का निवेश किया है।
इनमें अलीबाबा, टेनसेंट, हुवाई, Xindia स्टील्स लिमिटेड जैसे नाम भी शामिल हैं, जो भारत और चीन के बीच सबसे बड़े संयुक्त उपक्रमों में से एक माना जाता है। इसके अलावा, झिंगांग कैथे इंटरनेशनल ग्रुप – जिसने छत्तीसगढ़ में 1,000 करोड़ रुपए के निवेश के साथ विनिर्माण सुविधा स्थापित की है और चीन इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी समूह निगम और SAIC मोटर निगम लिमिटेड भी शामिल हैं।
अलीबाबा ने भारत के मशहूर भारतीय स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया है, जिनमें पेटीएम, जोमेटो, बिग बास्केट, स्नैप डील, एक्सप्रेसबीज आदि शामिल हैं। वहीं, टेनसेंट ने बड़ा निवेश भारतीय टेक सेक्टर में किया है, जिनमें 400 मिलियन डॉलर का निवेश ओला कैब्स में और 700 मिलियन डॉलर का निवेश फ्लिपकार्ट में शामिल है।
दरअसल, गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच भारत सरकार द्वारा चीनी सामान और चीन के बहिष्कार के मन्त्र को अब भारत के साथ ही अन्य बड़े देशों ने भी अपनाने का विचार किया है।
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने भी जून में उन 20 कंपनियों की सूची बनाई थी, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे चीन की सेना (PLA) के स्वामित्व या नियंत्रण में हैं, जिस कारण उन पर अतिरिक्त अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावना है।
चीन पर प्रतिबंध आरोपित करने के साथ ही भारत अमेरिकी कंपनियों को अपने देश लाने की कोशिशें कर रहा है। सरकार ने अप्रैल माह में 1,000 से अधिक अमेरिकी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों से संपर्क कर उन्हें चीन से कारोबारी गतिविधियों को समेटकर भारत लाने का ऑफर दिया है।
गौरतलब है कि ये कंपनियाँ 550 से अधिक उत्पाद बनाती हैं। भारत सरकार का मुख्य ध्यान मेडिकल उपकरण, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल्स, लेदर और ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनियों को आकर्षित करने पर है। यही नहीं, कोरोना वायरस की महामारी के बाद यूरोपीय संघ के सदस्य भी चीन के आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करने की योजना बना रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर में एक भाजपा नेता की नाबालिग बहन के साथ कथित तौर पर रेप के बाद हत्या के मामले में आरोपित व्यक्ति फिरोज अली की भी एक दिन बाद हत्या हो जाने के आरोप में पुलिस ने पीड़िता के पिता और दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें कि यह गिरफ्तारी आरोपित की लाश मिलने के एक दिन बाद हुई है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता के पिता ने अपनी शिकायत में जिस आरोपित का नाम दिया था, उसका शव सोमवार (जुलाई 20, 2020) को सोनारपुर इलाके के एक तालाब में मिली है। आरोपित युवक के परिवार ने पुलिस शिकायत में कहा है कि उसकी हत्या पीड़िता के परिवार ने की थी।
भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पीड़िता का बलात्कार किया और फिर हत्या कर दी गई, क्योंकि पीड़िता का परिवार भारतीय जनता पार्टी का समर्थक है। आरोपित फिरोज अली सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से जुड़ा बताया जा रहा है।
लड़की और युवक के अलग-अलग धार्मिक समुदायों से होने के बाद इलाके में तनाव बरकरार है। पीड़िता और आरोपित युवक एक ही गाँव में रहते थे और पुलिस जाँच कर रही है कि क्या दोनों के बीच संबंध थे और क्या उनके माता-पिता इसके विरोध में थे।
इस्लामपुर जिले के पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कड़ ने कहा, “हमने युवक के पिता की शिकायत के आधार पर लड़की के पिता और दो भाइयों को गिरफ्तार किया है।”
इसके अलावा पुलिस ने रविवार को आगजनी और झड़प के सिलसिले में 22 लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें पुलिस वैन और सरकारी बसों को भी आग लगा दी गई थी।
भाजपा उत्तर दिनाजपुर जिला इकाई के उपाध्यक्ष सुरजीत सेन ने कहा, “सरकार और पुलिस ने युवाओं और लड़की के बीच संबंध के बारे में मनगढ़ंत कहानी बनाई है।”
पुलिस ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक टीम को सोमवार को गाँव का दौरा करने से रोक दिया लेकिन बंगाल के पर्यटन मंत्री गौतम देब ने लड़की के परिवार से मुलाकात की।
युवक के चाचा ने आरोप लगाया कि उनके भतीजे की हत्या रविवार रात लड़की के परिवार ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों युवकों और लड़कियों को मार दिया गया है।
युवक की माँ ने कहा, “किसी ने रविवार रात 11 बजे मेरे बेटे को फोन पर बुलाया और वह घर से चला गया। बाद में उसने फोन किया और कहा कि वह तीन लोगों के साथ है और जल्द ही वापस आएगा। हमने उसे फिर कभी नहीं सुना।”
पश्चिम बंगाल पुलिस ने सोमवार को ट्विटर पर लिखा, “पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है और घटना के सभी संभावित पहलुओं पर गौर कर रही है, जिसमें सामाजिक अस्थिरता, माता-पिता का दबाव और वास्तविक घटना से ध्यान भटकाने और छिपाने में कुछ लोगों द्वारा निभाई गई भूमिका शामिल है।”
लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को युवक द्वारा नियमित रूप से परेशान किया जाता था और उसी ने बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी।
गौरतलब है कि भाजपा नेता की बहन को 19 जुलाई को कथित रूप से घर से अगवा किया गया था। इसके बाद उसकी तलाश की गई तो वो बेहोशी की अवस्था में मिली। उसे तुरंत स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जब वहाँ पर उसकी हालत में सुधार नहीं आया तो फिर उसे इस्लामपुर सब-डिविजनल अस्पताल ले जाया गया। जहाँ उसने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद कई जगह इस मामले पर प्रदर्शन भी हुए। पुलिस ने मामला गर्माने के बाद पोस्टमार्टम का हवाला दिया।
पुलिस ने कहा कि रिपोर्ट में कहीं भी यौन उत्पीड़न की कोशिश या चोट का जिक्र नहीं है। बच्ची की मौत अधिक मात्रा में जहर पीने की वजह से हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की के शरीर पर कहीं भी खरोच के निशान नहीं हैं।
अब यह मामला महिला राष्ट्रीय आयोग तक पहुँच गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस मामले को अपने ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का ध्यान आकर्षित करवाते हुए इस पर जल्द कार्रवाई की माँग की है।
दिल्ली दंगों और देशद्रोह का आरोपित शरजील इमाम कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। शरजील इमाम को पुलिस की स्पेशल सेल असम की जेल से दिल्ली ला रही थी। आज पुलिस को शरजील को लेकर दिल्ली पहुँचना था, लेकिन उसके कोविड पॉजिटिव होने से रुकना पड़ेगा।
Sharjeel Imam jailed for his alleged inflammatory speeches during the CAA & NRC protests tests Positive for #Covid19. He will be brought to Delhi from Assam only after he test negative. pic.twitter.com/nzyuVrGjOs
जानकारी के मुताबिक शरजील इमाम से पूछताछ करने के लिए स्पेशल सेल की एक टीम असम पहुँची है। जहाँ उसे हिरासत में लेने के बाद स्पेशल सेल की टीम ने उससे लंबी पूछताछ की है। पूछताछ के बाद उसे दिल्ली लाया जाना था, मगर पूछताछ से पहले स्पेशल सेल की टीम ने शरजील इमाम का कोरोना टेस्ट भी करवाया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। ऐसे में उसे दिल्ली लाने में देर हो सकती है।
बताया जा रहा है कि शरजील इमाम को अब पुलिस उसकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही दिल्ली लेकर आएगी। गौरतलब है कि शरजील इमाम पर आरोप है कि वह पिछले साल दिसंबर में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पास नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन शामिल था।
इमाम शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में भी कथित तौर पर शामिल था, लेकिन वह उस वीडियो के सामने आने के बाद सुर्खियों में आया, जिसमें उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक सभा से पहले कथित विवादास्पद टिप्पणी की, जिसके बाद उसपर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। उसके खिलाफ असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग मामले भी दर्ज हैं।
शरजील इमाम ने 16 जनवरी को CAA और NRC के खिलाफ अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देते हुए नॉर्थ-ईस्ट को भारत से अलग करने वाली बात कही थी। जिसके बाद देश के कई राज्यों में शरजील इमाम पर मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने शरजील इमाम को 19 जनवरी को बिहार से गिरफ्तार किया था और फिर असम पुलिस उसे अपने यहाँ दर्ज देशद्रोह के मामले में दिल्ली से लेकर गई थी। तभी से ही शरजील असम की जेल में बंद है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शरजील के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी। शरजील ने यह भी कबूल किया कि देश में दंगा भड़काने के लिए उसने युवाओं से सड़कों पर उतरने की अपील की थी साथ ही शरजील ने जामिया में हुई हिंसा में भी अपने साथियों के साथ हिस्सा लिया था।
इसके साथ ही देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम की सारी FIR की जाँच एक ही एजेंसी से कराने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने हलफनामा दाखिल किया था। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि शरजील इमाम के खिलाफ यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को दिल्ली, मणिपुर, असम या अरुणाचल प्रदेश में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि अलीगढ़ में उसके 16 जनवरी के भाषण ने सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ दिया।
अगले दो महीने बड़े पैमाने पर आगजनी, पथराव और पुलिस पर गोलीबारी हुई। राज्य सरकार ने कहा था कि शरजील इमाम के भाषण के बाद 31 जनवरी को, एएमयू के छात्रों सहित 500 से अधिक व्यक्तियों ने एकत्र होकर सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान भयावह स्थिति पैदा कर दी। 23 फरवरी को, 500-600 से अधिक अज्ञात व्यक्तियों ने पथराव किया, मंदिरों में दान पेटी लूटी। पुजारियों के साथ हाथापाई की। जिससे तनाव और बढ़ गया।
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद कई जानी-मानी हस्तियों ने ‘बॉलीवुड माफिया’ और ‘मीडिया लॉबी’ के ख़िलाफ़ अब मुखर होकर बोलना शुरू किया है। इनमें आज एक नाम चेतन भगत का भी शुमार हो गया। चेतन भगत ने आज ट्विटर पर सुशांत की आने वाली फिल्म ‘दिल बेचारा’ से पहले अपनी बात रखी और फिल्म समीक्षकों को सलाह दी।
चेतन भगत ने लिखा, “सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म इस हफ्ते रिलीज होगी। मैं सभी घमंडी और अभिजात्य फिल्म समीक्षकों से अब कहना चाहूँगा कि समझदारी से लिखें। ओवरस्मार्ट न बनें। बेकार चीजें न लिखें। निष्पक्ष और समझदार बनें। अपने बेकार तरीकों का इस्तेमाल न करें। आपने वैसे ही कई जिंदगियाँ बर्बाद कर दी हैं। अब रुकिए। हम लोग देख रहे हैं। “
Sushant’s last film releases this week. I want to tell the snob and elitist critics right now, write sensibly. Don’t act oversmart. Don’t write rubbish. Be fair and sensible. Don’t try your dirty tricks. You have ruined enough lives. Now stop. We’ll be watching.
इस ट्वीट के बाद कई फिल्म क्रिटिक समेत ट्विटर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने चेतन की बात पर अपनी सहमति दर्ज कराई और कुछ ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। इसी बीच भारतीय फिल्म डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा की पत्नी व फिल्म क्रिटिक अनुपमा चोपड़ा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
अनुपमा ने चेतन भगत के ट्वीट के जवाब की जगह उन पर निशाना साधा और लिखा, “जितनी बार आप सोचोगे कि बातचीत का स्तर इससे नीचे नहीं गिर सकता। उतनी बार ऐसे होता है।”
हालाँकि, अनुपमा के ट्वीट के बाद चेतन भगत चुप नहीं रहे और उन्हें जवाब भी दिया। चेतन ने अनुपमा चोपड़ा को उनकी प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए लिखा, “मैम, जब आपके पति ने मुझे सार्वजनिक रूप से धमकाया, बेशर्मी से सभी बेहतरीन कहानी पुरस्कारों (बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड) को अपने नाम पर इकट्ठा किया, मुझे मेरी कहानी का श्रेय देने से इनकार किया और मुझे आत्महत्या करने के कगार तक धकेल दिया, और आप बस देखते रहे, तब आपका ये ज्ञान कहाँ था।”
Ma’am, when your husband publicly bullied me, shamelessly collected all the best story awards, tried denying me credit for my story and drove me close to suicide, and you just watched, where was your discourse? https://t.co/CeVDT2oq47
यहाँ बता दें कि चेतन भगत ने अपने ट्वीट में अनुपमा को जिस कहानी का क्रेडिट न मिलने पर खरी-खरी सुनाई है, वो कहानी 3 इडियट्स फिल्म की थी। इस फिल्म को लेकर चेतन भगत का दावा था कि ये उनकी एक किताब की स्टोरी का प्लॉट था। मगर, जब पत्रकारों ने विधु विनोद से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही पत्रकार को बेइज्जत कर दिया और ‘शट-अप’ कहकर शांत होने को भी कहा। हालाँकि इसके बाद पत्रकारों ने विधु को माफी माँगने की बात कही पर उनकी जगह राजकुमार हिरानी ने पत्रकारों से माफी माँगी।
गौरतलब हो कि चेतन भगत ने सुशांत की फिल्म पर फिल्म क्रिटिक्स को बोलते हुए मीडिया संस्थानों पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “मीडिया संस्थानों के लिए… अभिजात्य लोगों को काम पर रखना बहुत ही भयानक रणनीति है, जिन्हें भारत समझ नहीं आता और उन्हें लगता है कि वह अन्य भारतीय से ज्यादा अच्छे हैं। ये लोग अंदर से कुछ और, बाहर से कुछ और है। जो यह जरूर सुनिश्चित करेंगे कि आपका संस्थान दिवालिया हो जाए। कई लोगों का पहले हो भी चुका है।'”
To the media organizations who hire these snob critics – it’s an awful business strategy to hire elitists who don’t understand India and think they are better than Indians. These brown outside – white inside people will ensure your organization goes bankrupt. Many have already.
20 साल के दिलबर नेगी के बूढ़े माँ-बाप आज भी अपनी तिबार से अपने बेटे के दिल्ली से लौट आने का इन्तजार कर रहे हैं। दिलबर नेगी की दो बहनें हैं, जो किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठी हैं और यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनका भाई इस रक्षाबंधन पर घर नहीं लौट सकेगा।
दिलबर नेगी के छोटे भाई देवेन्द्र का कहना है कि उन्होंने समय से समझौता कर लिया है, लेकिन वह अपने माँ और पिता जी को यही बात समझा पाने में असमर्थ है। उनकी नजर बस ‘धार’ के उस तरफ ही टिकी है, जहाँ से गाँव वालों के बच्चे हर त्यौहार से ठीक पहले अपने-अपने घर लौट आया करते हैं। इस बार भी रक्षाबंधन और ‘थौलू’ (पारम्परिक मेला) में घर से बाहर रहने वाले सभी लोग अपने गाँव लौट आए, लेकिन उन लोगों में दिलबर नेगी का नाम शामिल नहीं है।
इस साल की शुरुआत में ही पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों का शिकार हुए 20 साल के दिलबर नेगी उत्तराखंड के जिस गाँव से सम्बन्ध रखते हैं, वहाँ हर माह की संक्रांति पर त्यौहार और उत्सव मनाए जाते हैं। आषाढ़-सावन के माह गाँव से जब भी कोई आदमी शहर जाता है, तो माँ उसके पास खेतों में लगी ककड़ी और मक्की और खेतों में होने वाली लगभग हर चीज ये कहकर भेजा करती है कि उसके बेटे तक भी ये पहुँचा देना।
उत्तराखंड के लगभग हर जिले में ही हर संक्रान्ति पर त्यौहार की परम्परा है। इसमें कुछ गिने-चुने अवसर, जैसे- थौलू (मेला), जो कि बैशाखी के ही समय गाँवों में मनाया जाता है और लोग जहाँ कहीं भी हों, अपने कुल देवता के दर्शन के लिए अपने गाँव पहुँचते हैं।
दिलबर नेगी के भाई देवेन्द्र का कहना है कि उनका भाई घर से कुछ कमाने के लिए गया था, लेकिन वो यह नहीं जानता था कि वो ऐसी किसी सुनियोजित साजिश का शिकार हो जाएगा। फिर भी पूरा गाँव यही उम्मीद कर रहा है कि उनका दिलबर जहाँ कहीं भी हो, उसे न्याय जरूर मिलेगा।
तकरीबन एक माह पहले ही दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दिलबर नेगी के परिवार से दिल्ली दंगों की चार्ज शीट के सम्बन्ध में सम्पर्क किया गया था। हालाँकि, कोरोना वायरस की महामारी के कारण जारी लॉकडाउन के कारण उनके परिवार का कोई भी सदस्य दिल्ली जाने में असमर्थ था।
मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ द्वारा दिल्ली दंगों में मारे गए 20 साल के दिलबर नेगी का सपना भारतीय सेना का हिस्सा बनने का था, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उसने आजीविका के लिए दिल्ली जाने का फैसला किया था।
दिलबर नेगी के भाई देवेन्द्र का कहना है कि वो भी शुरू में अपने भाई के साथ रोजगार के लिए दिल्ली गया था लेकिन वह गाँव में अपने बूढ़े माँ-बाप के पास लौट गया था। अभी दिलबर नेगी को दिल्ली में रहते हुए लगभग 6 माह ही हुए थे, जब 24 फरवरी को एक दिन बृजपुरी-शिव विहार-मुस्तफाबाद चौराहे के पास इस्लामिक नारे लगाती मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिठाई की दुकान के गोदाम में दिलबर नेगी को जिंदा जला दिया।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र का निवासी, 20 वर्षीय नेगी बृजपुरी-शिव विहार-मुस्तफाबाद क्रॉसिंग पर स्थित अनिल स्वीट्स नामक मिठाई की दुकान पर काम करते थे। दंगों के भड़कने के दो दिन बाद ब्रजपुरी में दुकान के गोदाम की दूसरी मंजिल से उनका जला हुआ और कटा हुआ शरीर मिला था।
दरअसल, दंगाइयों की भीड़ से बचने के लिए गोदाम से भागने की कोशिश कर रहे दिलबर नेगी का दंगाइयों ने पहले हाथ-पैर काटा और फिर शरीर के बाकी हिस्से को आग में झोंक दिया था।
वहाँ से किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे दिलबर नेगी के साथियों ने जब ऑपइंडिया से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया था कि मुस्तफाबाद की ओर से लगभग 250-300 मुस्लिमों की भीड़ लाठियों, खाली बोतलों और इस तरह के हथियारों के साथ इकट्ठा होने लगी थी।
भीड़ से घबराकर दुकान के मालिक ने एक घंटे के लिए अपने कर्मचारियों के साथ शटर को बंद कर दिया और अंदर छिप गया था। 24 फरवरी, शाम 4:00- 4.30 बजे दुकान मालिक अनिल और उसके कर्मचारी वहाँ से बाख निकलने में कामयाब रहे और गोदाम के सामने वाली गली में स्थित एक डेयरी की दुकान की छत पर चले गए।
इस छत से ही मिठाई कि दुकान के मालिक अनिल और उनके भतीजे अंकित ने मिठाई की दुकान के गोदाम और राजधानी पब्लिक स्कूल के वीडियो और तस्वीरें कैप्चर की। दिलबर नेगी के साथी श्याम ने ऑपइंडिया को बताया कि भीड़ चुनिंदा हिंदू घरों में आग लगा रही थी, जो कि मिठाई की दुकान के गोदाम से सटे हुए थे और अब धुआँ उस बिल्डिंग तक पहुँच गया था जहाँ दिलबर नेगी फँस गए थे।
दुकान मालिक अनिल ने पुलिस से कहा था कि उन्होंने भीड़ को अपने गोदाम में पत्थर और पेट्रोल बम के साथ घुसते देखा। अनिल उस भीड़ में शाहनवाज उर्फ शानू (एक स्थानीय बीड़ी की दुकान के मालिक) को पहचान पाया था। इसके बाद श्याम और अनिल ने जब दिलबर के गोदाम में ही फँसे होने की बात कही तो दिलबर ने उन्हें फ़ोन पर बताया कि वो गोदाम में ही छुप गया है। दिलबर ने उनसे बताया कि वो बहुत डरा हुआ है।
इसके बाद जब अनिल, श्याम और उसके साथियों ने दिलबर नेगी को दोबारा उसका हाल जानने के लिए फ़ोन किया तो उसका नम्बर बंद आ रहा था। इस घटना के बाद दिलबर नेगी का जला हुआ आधा शरीर ही लोगों को मिल पाया था। शरीर एक राख के ढेर में तब्दील हो चुका था, जिसके हाथ और पैर गायब थे। उसके साथी दिलबर नेगी के शरीर की बनावट के आधार पर उसे पहचान पाए थे।
चार्जशीट के मुताबिक, दिलबर नेगी की हत्या का मुख्य आरोपित शाहनवाज है क्योंकि उसने ही उस दिन भीड़ का नेतृत्व किया था। शाहनवाज के साथ ही अन्य आरोपितों पर हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा करने और समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, वे न्यायिक हिरासत में हैं।
दिल्ली दंगों की भयावह याद को लोग भुला देना चाहते हैं लेकिन महज बीस साल के दिलबर नेगी के परिवार के लिए यह कितना कठिन होगा इस बात का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण इलाके से एक बीस साल का बच्चा जब अपनी खेती, पशु सम्पदा और अपने बूढ़े माँ-बाप को घर छोड़कर दिल्ली या अन्य किसी बड़े शहर आजीविका तलाशने निकलता है तो उसकी आर्थिक मजबूरी का अंदाजा लगाया जाना चाहिए। ऐसे में, उसे एक दिन हिन्दू-विरोधी षड्यंत्र का हिस्सा बनना पड़ा, दिलबर नेगी के हिस्से का बस यही एकमात्र सत्य है।
करीब पाँच माह बीत जाने के बाद भी, यही कहानी IB के कर्मचारी अंकित शर्मा और उन सभी मृतकों के परिवार वालों की है, जिन्हें एक योजनाबद्ध तरीके से सिर्फ एक विचारधारा की संतुष्टि की खातिर निर्ममता से मार दिया गया। ये सभी अपना फर्ज और अपने परिवार की जिम्मेदारियों के लिए उस दिन अपने घर से बाहर तो निकले थे, लेकिन मजहबी उन्मादियों के कारण वो वापस कभी फिर अपने घर नहीं लौट सके और बदले में एक उम्र भर का इन्तजार अपने घरवालों के लिए पीछे छोड़ गए।
रक्षाबंधन पर तमाम तथ्यों को दरकिनार कर हिन्दुओं से ‘गाय के चमड़े वाली राखी’ इस्तेमाल ना करने की भ्रामक और आधारविहीन मुहीम शुरू करने वाली संस्था PETA ने भारी विरोध के बाद अब अपनी वेबसाइट से इस लेख को हटा दिया है।
PETA की साइट पर से हटा लिया गया रक्षाबंधन से संबंधित कंटेंट
हालाँकि, PETA लगभग हर साल ही रक्षाबंधन के अवसर पर इस प्रकार की भ्रांतियाँ फैलता आया है कि राखी में गाय का चमड़ा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब तक यह संस्था सिर्फ इस बात का फायदा उठाकर यह नैरेटिव विकसित करती आ रही थी कि राखी में गाय का माँस इस्तेमाल किया जाता है। और तो और, इसके लिए PETA द्वारा ‘जागरूकता अभियान’ तक चलाए गए।
PETA की साइट पर रक्षाबंधन पर चमड़े की राखी नहीं पहन गाय को बचाने की वाली मुहिम
शैफाली वैद्य ने भी इसकी जानकारी अपनी ट्विटर अकाउंट पर दी है –
दरअसल, हाल ही में जानवरों के अधिकारों की बात करने का दावा करने वाली हिन्दूफोबिक संस्था PETA ने गाय के चित्र वाले उस बैनर से लोगों का ध्यान आकर्षित किया था, जिसमें रक्षाबंधन के दौरान राखी में चमड़े का उपयोग न करने की सलाह दी गई थी।
इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि PETA को यह तक पता नहीं कि रक्षाबंधन में चमड़े का उपयोग नहीं होता है। लोगों ने तो PETA इंडिया से बकरीद पर भी ऐसी ही एक अपील की बात कह कर अपना आक्रोश व्यक्त किया, जिस पर PETA ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं को बेहद घटिया जवाब देकर अपनी संस्था की मंशा को उजागर किया था।
इस विषय पर जब ऑपइंडिया ने PETA इंडिया के इस अभियान की कोऑर्डिनेटर राधिका सूर्यवंशी से सवाल किए तो उन्होंने कहा – “रक्षा बंधन हमारी बहनों की रक्षा का समय है, और गाय हमारी बहनें हैं। हमारी तरह, वे भी रक्त, मांस और हड्डी से बनी हैं और जीना चाहती हैं। हमारा विचार प्रतिदिन गायों की रक्षा करने का है और रक्षा बंधन एक बहुत ही अच्छा दिन है। जिसमें हम आजीवन चमड़े से मुक्त रहने का संकल्प ले सकते है।”
लेकिन, जब सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी समूहों के विरोध के बाद PETA का हिन्दूविरोधी चरित्र सामने आया तो PETA ने बिना किसी बयान और सूचना के यह लेख अब अपनी वेबसाइट से हटा दिया है।
PETA ने रक्षाबंधन पर अपने हिन्दू-विरोधी बैनर के कारण विवादों पर सवाल पूछने वालों को निशाना बनाने का भी प्रयास किया था। शेफाली वैद्य ने PETA से सवाल पूछा था कि ईद के मौके पर कोई ‘एनिमल एक्टिविस्ट’ सेलेब्रिटी ये क्यों नहीं कहता कि आप अपने इगो का त्याग करें, जानवरों को न मारें।
PETA ने माँगी ‘ग़लतफ़हमी’ के लिए माफ़ी
राखी में गाय का माँस इस्तेमाल होने के दुष्प्रचार को फैलाने पर PETA के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रहे व्यापक विद्रोह का नतीजा यह रहा है कि अब PETA ने आखिरकार अपनी गलती स्वीकार कर गाय और रक्षाबंधन से जुड़े अपने भ्रामक विज्ञापनों को हटाने और उन्हें बदलने की बात कही है। साथ ही, PETA ने कहा है कि वह ‘गलतफहमी’ के लिए माफ़ी माँगता है।
Go leather-free for life.
PETA India apologises about misunderstanding, encourages public to wear vegan with new campaign.#LeatherFree#WearVegan
PETA ने एक नवीनतम प्रकाशित लेख में कहा है कि PETA इंडिया कानपुर, भोपाल, अहमदाबाद, चंडीगढ़, जयपुर, पटना और पुणे में नए होर्डिंग लगाने की प्रक्रिया में है। इसमें अब गाय के साथ भैंस भी नजर आएगी और रक्षाबंधन वाले भ्रामक संदेश को भी हटा लिया गया है। इसमें ‘लेदर-फ्री’ का संदेश दिया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि इसमें शाकाहारी जीवन को प्रोत्साहित किया गया है। पहले के बैनर पर सफाई देते हुए ‘PETA इंडिया’ ने लिखा है कि उस संदेश से भ्रम फैला था और लोग गलतफहमी का शिकार हो गए थे।
PETA का कहना है कि उनके विज्ञापन संदेश में राखी के बारे में कुछ भी नहीं था। यहाँ पर PETA ने यह भी आरोप लगाया है कि यह विरोध कुछ लोगों द्वारा इसलिए किया गया क्योंकि PETA ने जल्लीकट्टू को खत्म करने और मंदिरों में हाथियों के इस्तेमाल को खत्म करने की मुहिम चलाई थी।