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YSR कॉन्ग्रेस ने अपने ही MP की सदस्यता खत्म करने की माँग की, आंध्र में ईसाई धर्मांतरण का किया था खुलासा

वाईएसआर (YSR) कॉन्ग्रेस के सांसद रघुराम कृष्णम राजू के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। राजू ने आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण का खुलासा किया था।

उन्होंने राज्य सरकार पर ईसाई तुष्टिकरण का आरोप भी लगाया था। प्रदेश में वाईएआर कॉन्ग्रेस की ही सरकार चल रही है। इस खुलासे के बाद राजू को धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई थी।

अब शुक्रवार को वाईएसआर कॉन्ग्रेस सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात कर राजू की सदस्यता समाप्त करने की मॉंग की। राजू आन्ध्र प्रदेश के नर्सापुरम से लोकसभा सांसद हैं।

राज्य सभा सांसद वी विजयसाईं रेड्डी ने सांसदों के इस समूह की अगुवाई करते हुए कृष्ण राजू पर अपने दल के नेताओं और आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी लिए असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका यह भी कहना था कि राजू ने संगठन की नीतियों के खिलाफ जाकर विपक्षी दल के नेताओं से बराबर संपर्क रखा है। वी विजयसाईं रेड्डी वाईएसआर कॉन्ग्रेस के महासचिव भी हैं।  

इसके अलावा विजयसाईं ने कहा कि कृष्ण राजू ने अपनी परेशानियों को लेकर पार्टी के लोगों से कभी बात नहीं की। इसके उलट हर बात सार्वजनिक रूप से कहते हैं जो दल की नीतियों के खिलाफ है। इस रवैये के कारण उन पर एंटी डीफेक्शन लॉ लागू होता है।

वाईएसआर कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता मिथुन रेड्डी ने बताया कि राजू ने कई बार नोटिस भी दिया गया, जिसका जवाब उन्होंने बेहद लचर तरीके से दिया।  

कृष्णम राजू अपनी ही पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा चुके हैं। वे केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और अजय भल्ला से भी मिल चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा में वे एक गाना भी जारी कर चुके हैंl

कृष्णम राजू ने भी विजयसाईं रेड्डी को नोटिस भेज आरोप लगाया था कि उनके तौर-तरीकों से पार्टी को नुकसान हो रहा है। पिछले महीने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिख उन्होंने पार्टी नेताओं से जान का ख़तरा भी बताया था।

उन्होंने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से भी की लेकिन वहाँ से मदद नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने केंद्र से सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी थी। पत्र में उन्होंने यहाँ तक लिखा था, “पार्टी के एक विधायक ने सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी। पिछले कुछ दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी इस तरह की चेतावनी अक्सर मिलती रहती हैl स्थानीय पुलिस से कोई मदद न मिलने के चलते मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जल्द से जल्द मुझे सुरक्षा मुहैया कराएँ।”

करीब एक महीने पहले कृष्णम राजू ने एक समाचार चैनल पर डिबेट के दौरान कहा था कि राज्य में ईसाई मिशनरी पैसे देकर बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन करा रही हैं।  उन्होंने कहा था, “रिकॉर्ड के अनुसार हमारे राज्य में ईसाइयों का प्रतिशत 2.5% से कम है, लेकिन वास्तव में यह 25% से कम नहीं होगा।” YSRCP नेता ने बताया था कि कुछ लोग ऐसे वर्ग से आते हैं, जिन्हें पहले से ही फायदा मिल रहा होता है। ऐसे में यदि वो ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो उन्हें वो फायदा मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि लोग धर्मांतरण करते हैं, मगर उसका पंजीकरण नहीं करवाते।

पुलिस ने हथकड़ी लगाई, आयरन रॉड से पीटा: डीएमके MLA के खिलाफ पोस्ट करने वाला युवक

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पी जयराज (59) और उनके बेटे जे फेनिक्स के साथ पुलिस बर्बरता के बाद एक और मामला सामने आया है। इस घटना में भी पुलिस की भूमिका संदिग्ध और संवेदनहीन नज़र आई है।

32 साल के युवक ने पुलिस पर आयरन रॉड से पीटने का आरोप लगाया है। घटना के लगभग एक महीने बाद युवक ने शिकायत दर्ज कराई है। इस दौरान वह अस्पताल में भर्ती था क्योंकि उसके पूरे शरीर में कई फ्रैक्चर हैं। 

तूतूकड़ी के तिरुचेंदूर में रहने वाले होटल मैनेजर एस मणिकंदन केरल के गुरुवायूर में काम करते हैं। जून की शुरुआत में पुलिस उन्हें गुरुवायूर से उठा कर 500 किलोमीटर दूर तिरुचेंदूर लेकर आई। मणिकंदन का कहना है कि जनवरी में उन्होंने डीएमके विधायक अनिता आर राधाकृष्णन के विरोध में एक वीडियो बना कर फेसबुक पर साझा किया था। इसके चलते उन्हें पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा।  

दरअसल मद्रास उच्च न्यायालय ने पुलिस की बर्बरता के कारण पी जयराज और जे फेनिक्स की मृत्यु होने के बाद तमिलनाडु में हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद जिला न्यायाधीश को आदेश दिया था कि वह ऐसे मामलों पर निगाह रखें। न्यायाधीश के पास मामले की सूचना आने के बाद मणिकंदन को भर्ती कराया गया था।   

इसके पहले मणिकंदन को पी सरवनन के सामने पेश किया गया था, वह मजिस्ट्रेट जिनकी भूमिका पर जयराज और फेनिक्स के मामले में काफी सवाल उठे थे। मणिकंदन पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक़ उसने अपने वीडियो में नादर समुदाय के बारे में कुछ बातें कही थीं, जिस समुदाय से डीएमके विधायक राधाकृष्णन आती हैं। तूतूकड़ी के नए पुलिस अधीक्षक का कहना है कि मणिकंदन को पूरी सुरक्षा दी जाएगी।

मामले से जुड़ी अब तक की जानकारी के मुताबिक़ जिस तरह मणिकंदन के साथ निर्दयता करके उसे गुरुवायूर से लाया गया, उससे अदालत भी हैरान है। अगर कार्यवाही करने वालों के पास वारंट था तो उन्हें स्थानीय पुलिस की मदद लेनी चाहिए थी।

वीडियो में मणिकंदन ने राधाकृष्णन पर अक्सर अपने समुदाय के लोगों का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। जैसे ही उनका वीडियो वायरल हुआ उसके ठीक कुछ समय बाद ही उन्हें और उनके घर वालों को नादर समुदाय के लोगों से धमकियाँ मिलने लगी थी।  

इतना ही नहीं 6 जून को पुलिस ने मणिकंदन के पिता (पेशे से पोस्टमास्टर) और उनके भाई को भी तलब किया। 7 जून को गुरुवायूर स्थित उनके घर पर कई लोग मौजूद थे, जिन्होंने खुद को तिरुचेंदूर में कार्यरत पुलिसकर्मी बताया था। इसके बाद उन सभी लोगों ने मणिकंदन को हथकड़ी लगाई और तिरुचेंदूर ले गएl तूतूकड़ी के नज़दीक आते ही उनके साथ मारपीट और ज़्यादती शुरू हो गई थीl 

वहाँ उनके पिता और भाई पहले से ही मौजूद थे, उन्हें मणिकंदन से बात नहीं करने दिया गया। 8 जून को मणिकंदन को बताया गया कि तिरुचेंदूर के पुलिस उपाधीक्षक पूछताछ करेंगे। इसके बाद उसे पुलिस थाने के पहले तल पर ले जाया गया और खूब पीटा गया।

मणिकंदन द्वारा की गई शिकायत के अनुसार सुबह के 3 बजे तक पुलिस वाले उसे पीटते रहे, इस दौरान दो डंडे  तक टूट गए, डंडे टूटने के बाद प्लास्टिक की पाइप से पीटने लगे। इस दौरान मणिकंदन के पैर के अंगूठे भी टूट गएl 

9 जून की शाम 5:30 बजे पुलिस ने उसका हाथ खिड़की से बाँध दिया और लोहे की रॉड से पीटने लगे। पुलिस की ऐसी बर्बरता तब तक जारी रही जब तक मणिकंदन बेहोश नहीं हो गया। इसके बाद पुलिस ने मणिकंदन को इस बारे में किसी से बात न करें की धमकी भी दी। इसके बाद तिरुचेंदूर पुलिस स्टेशन के इन्स्पेक्टर मुथूरमण और उनके सह कर्मियों ने मणिकंदन को मजिस्ट्रेट सर्वनन के सामने पेश किया। जहां मणिकंदन ने यह कहा कि उसे यह चोटें गिरने की वजह से आई हैं और फिर उसे तूतूकड़ी की पेरूरानी जेल में डाल दिया गयाl अपनी शिकायत में मणिकंदन का यह भी कहना है कि उसे जमानत पर बाहर आने के बाद पुलिस वालों से ख़तरा है।   

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर पर चला बुलडोजर, भाभी के पास मिली पिस्तौल: तलाश में पुलिस की 100 टीमें

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। एक तरफ उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है, दूसरी तरफ उसके घर पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बिठुर स्थित विकास दुबे का घर JCB से गिराया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस की 100 टीमें अलग-अलग इलाकों की तलाशी ले रही हैं, जहाँ विकास के घर वाले रहते हैं।

इसी खोजबीन के दौरान पुलिस ने लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में भी छापेमारी की। नौकर के सिवाय विकास के इंद्रलोक कॉलोनी वाले घर में कोई नहीं मिला। मगर पुलिस ने वहाँ से कुछ संदिग्ध सामानों के साथ पेन ड्राइव बरामद किया है।

उसी इलाके में रहने वाले विकास के भाई दीप के घर भी पुलिस ने दबिश दी। लेकिन वह भी घटना के बाद से ही फरार है। पुलिस को उसकी पत्नी के पास से रिवाल्वर मिली है। इसका लाइसेंस होने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही हैं।

गौरतलब है कि कानपुर में दो जुलाई को हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला किया। हमले में आठ पुलिसकर्मी की मौत हो गई। इस घटना के बहाने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस का मजाक उड़ाने की कोशिश की है।

अखिलेश ने बीबीसी का एक कार्टून शेयर किया है जिसमें यूपी पुलिस के आठ जवानों की मौत को लेकर कटाक्ष किया गया है। यहाँ यह जानना दिलचस्प है कि विकास दुबे की सपा-बसपा के कई नेताओं से करीबी रही है। उसकी पत्नी सपा के टिकट पर पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी है।

इधर पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला करने वाले कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की माँ ने बयान दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके बेटे को मुठभेड़ में मार देना चाहिए क्योंकि उसने जो किया वह गलत था।

गैंगस्टर की माँ सरला देवी ने कहा, “अच्छा होगा अगर वो खुद सरेंडर कर दे। धोखे से भागता रहा तो पुलिस उसे एनकाउंटर में मार देगी। मैं तो कहती हूँ पकड़ लो और फिर एनकाउंटर कर दो। उसने बहुत बुरा किया है।”

गैंगस्टर विकास दुबे की माँ ने कहा कि राजनेताओं के संपर्क में आने के बाद विकास दुबे अपराध की दुनिया में शामिल हो गया था। सरला देवी ने यह भी कहा कि उनके गैंगस्टर बेटे ने परिवार को बहुत शर्मिंदा किया है।

कानपुर में हुई मुठभेड़ के बाद विकास दुबे फिलहाल फरार है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है।

विकास दुबे की माँ सरला देवी ने कहा, “विकास एमएलए चुनाव जीतना चाहता था। उसने तत्कालीन भाजपा सरकार में मंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। मैं चार महीने से उनसे नहीं मिली हूँ। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ में रह रही हूँ। हमें उसकी वजह से बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।”

उल्लेखनीय है कि कानपुर स्थित चौबेपुर के बिकरू गाँव में हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को बृहस्पतिवार (जुलाई 02, 2020) की आधी रात पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया।

शुक्रवार (जुलाई 03 ,2020) को पुलिस ने बताया कि यह मुठभेड़ बृहस्पतिवार और शुक्रवार की रात चौबेपुर थाना अंतर्गत डिक्रू गाँव में 60 आपराधिक मामलों में आरोपित हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए हुई थी।

अधिकारियों ने कहा कि जब पुलिस टीम खूंखार अपराधी के ठिकाने पर पहुँचने वाली थी, तब एक बिल्डिंग की छत से उन पर गोलियों की बौछार की गई, जिससे डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा, तीन सब-इंस्पेक्टर और चार कॉन्स्टेबल मारे गए। घटना का विवरण देते हुए, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) एचसी अवस्थी ने कहा कि कुख्यात अपराधी को इस छापेमारी की भनक लग गई थी।

DGP अवस्थी ने कहा कि उसने और उसके साथियों ने पुलिसकर्मियों को उनके ठिकाने की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर रोड ब्लॉक कर रखा था। पुलिस टीम के गाँव में पहुँचते ही विकास दुबे और उसके साथियों ने घरों की छत से फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने एक इमारत की छत से उन पर नजर रखी और हमला किया जिससे पुलिसकर्मियों की मौत हो गई।

डीजीपी ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज़ किया गया था, पुलिस उसे पकड़ने गई थी। पुलिस सर्विलांस के जरिए विकास दुबे का पता लगा रही है और कई अन्य ठिकानों पर छापे मार रही है। साथ ही सभी सीमाओं को भी सील कर दिया गया है।

वर्ष 2001 में शिवली थाने के बाहर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या करने में नामजद रह चुके हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे चौबेपुर थाना क्षेत्र के गाँव बिकरू का रहने वाला है। उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

गलवान के बलिदानी जवानों का शौर्य बड़े पर्दे पर पेश करेंगे अजय देवगन, चीन ने धोखे से किया था वार

अभिनेता-निर्माता अजय देवगन लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प की पृष्ठभूमि पर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं। फिल्म के बारे में अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह भारतीय सेना के 20 जवानों के बलिदान की कहानी सुनाएगी, जिन्होंने चीनी सेना का मुकाबला किया था।

हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अजय फिल्म में अभिनय करेंगे या नहीं। कलाकारों और अन्य चीजों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है। फिल्म को अजय देवगन फिल्म्स और सेलेक्ट मीडिया होल्डिंग्स एलएलपी द्वारा निर्मित किया जाएगा।

15 जून को, पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ 20 भारतीय सैनिकों ने हिंसक हमले में अपनी जान गवाँ दी थी। यह टकराव श्योक नदी के साथ संगम से पहले, पूर्व-पश्चिम दिशा में बहने वाली नदी के दक्षिणी तट पर स्थित गलवान घाटी में हुआ था।

इस पर फिल्म बनाए जाने की जानकारी फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने ट्वीट कर दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह ऑफिशियल है कि अजय देवगन गलवान घाटी की घटना पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। अभी फिल्म का कोई शीर्षक नहीं दिया गया है। इस फिल्म के जरिए उन 20 भारतीय सेना के जवानों की कहानी दिखाई जाएगी, जिन्होंने चीनी सेना का मुकाबला किया था। इस फिल्म को अजय देवगन और सेलेक्ट मीडिया होल्डिंग्स एलएलपी प्रोड्यूस करेंगे। फिल्म की कास्ट भी अभी फाइनल नहीं हुई है।”

IT’S OFFICIAL… #AjayDevgn to make film on #GalwanValley clash… The film – not titled yet – will narrate the story of sacrifice of 20 #Indian army men, who fought the #Chinese army… Cast not finalized… Ajay Devgn FFilms and Select Media Holdings LLP will produce the film. pic.twitter.com/yaM6rPcK7Z— taran adarsh (@taran_adarsh) July 4, 2020

अजय देवगन की युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म ‘भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया’ लगभग तैयार हो चुकी है। फिल्म का प्रीमियर डिज्नी एवं हॉटस्टार पर जल्द ही किया जाएगा। फिल्म को ‘हॉटस्टार’ ने लगभग 112 करोड़ रुपए में खरीदा है। अभिषेक दुधैया के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है।

इसमें संजय दत्त, सोनाक्षी सिन्हा, नोरा फतेही, शरद केलकर, अम्मी विर्क और प्रणीत सुभाष सहित अन्य कलाकार हैं। इस फिल्म में अजय देवगन भारतीय वायुसेना स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक की भूमिका निभा रहे हैं, जो 1971 के युद्ध में भुज हवाई अड्डे के प्रभारी थे।

विजय कार्णिक, उनकी टीम और भुज की स्थानीय 300 महिलाओं की वजह से भारतीय वायु सेना की एयरस्ट्रिप की मरम्मत की जा सकी थी और पाकिस्तान को जवाब दिया जा सका। इसे भारत का ‘पर्ल हार्बर मोमेंट’ भी कहा जाता है। खास बात है कि 1971 की कहानी जेपी दत्ता की फिल्म बॉर्डर में दिखाई जा चुकी है लेकिन ये फिल्म वायुसेना के संघर्षों को सामने रखेगी।

फतवे के आगे इमरान सरकार ने घुटने टेके, इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण पर लगाई रोक

पाकिस्तान के प्रताड़ित हिंदुओं ने जिस फतवा के आगे झुकने से इनकार कर दिया था, उसके सामने इमरान खान की सरकार ने घुटने टेक दिए हैं। इस्लामाबाद में कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2020) को कानून का हवाला देते हुए कृष्णा मंदिर के निर्माण में बनने वाली चारदीवारी का कार्य रोक दिया।

पाकिस्‍तान सरकार ने अब मंदिर के संबंध में इस्‍लामिक आइडियॉलजी काउंसिल से सलाह लेने का फैसला किया है।ट्विटर के जरिए धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि वह केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों से संबंधित पूजा स्थलों को पुनर्निर्मित करने में मदद कर सकता है। नए मंदिर के निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

सीडीए के प्रवर्तन और भवन नियंत्रण विभागों की एक संयुक्त टीम शुक्रवार को एच-9/2 में मंदिर निर्माण स्थल पर पहुँची और श्रमिकों को निर्माण का काम रोकने का निर्देश दिया। सीडीए के प्रवक्ता मज़हर हुसैन ने कहा कि नागरिक प्राधिकरण के भवन नियंत्रण कानूनों ने स्पष्ट रूप से ये कहा कि जब तक इमारत के निर्माण के लिए मँजूरी नहीं मिल जाती तब तक इस जमीन पर कोई काम नहीं होगा।

सीडीए के प्रवर्तन विभाग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया कि पहली बार इस क्लॉज़ को लागू किया है। वरना हमेशा अन्य लोगों को सीमा की दीवार का निर्माण करने की अनुमति दे दी जाती थी।

मंदिर निर्माण के लिए हिंदू पंचायत इस्लामाबाद ने अब काम रोक दिया है और निर्माण शुरू करने की अनुमति लेने के लिए सोमवार को सीडीए से संपर्क करने का फैसला किया है।

पाकिस्‍तान के ह्यूमन राइट्स के संसदीय सचिव लाल चंद्र मल्‍ही ने कहा, “हम नियमों का पालन करते हैं, लेकिन बाउंड्री का निर्माण जरूरी है, क्यूंकि कुछ मदरसों से सम्बंधित लोगों ने 2018 में प्लॉट पर टेंट स्थापित कर दिया था और इस जगह को साफ करने के लिए हमें राजधानी प्रशासन की मदद पाने के लिए कई महीने लग गए थे।”

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल, 92 न्यूज एचडी प्लस ने हिंदू मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए इस्लामिक एजेंडे का हवाला दिया था।

हालाँकि बाद में इस झूठे दावे को हटा दिया गया।

कुछ मजहबी संस्थाओं ने बुधवार को मंदिर बनाने को लेकर सरकार की आलोचना की थी और इसे पाकिस्तानी विचारधारा के खिलाफ बताया था। उन्होंने इस मुद्दे को फ़ेडरल शरीअत कोर्ट ले जाने का फैसला भी किया था।

बता दें की इससे पहले पाकिस्तान में गंभीर धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले हिंदुओं ने साहसिक निर्णय लिते हुए इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य जारी रखने का फैसला किया था। इस्लामिक देश की राजधानी में अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं ने 20,000 वर्गफुट में कृष्ण मंदिर बनाने का निश्चय किया था। यह जमीन उन्हें पाकिस्तान सरकार से आवंटित हुई थी।

इस फैसले के बाद कृष्ण मंदिर को लेकर कट्टरपंथियों की लगातार धमकियाँ मिल रही थी और इस्लामिक उलेमाओं से लेकर इस्लामिक नेता तक पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे थे।

पिछले दिनों इस संबंध में इस्लामी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया के मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा था कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।

इस फतवे के अलावा इस्लामाबाद हाई कोर्ट में मंदिर निर्माण को लेकर एक याचिका भी डाली गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि यह योजना राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद के लिए तैयार मास्टर प्लान के तहत नहीं आती है।

याचिका में आग्रह किया गया था कि इस्लामाबाद के सेक्टर एच 9 में मंदिर निर्माण के लिए आवंटित भूमि को वापस लिया जाना चाहिए और मंदिर के लिए निर्माण धन भी वापस लेना चाहिए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) को नोटिस जारी किया था।

गौरतलब हो कि वैसे तो श्रीकृष्ण मंदिर इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर होगा। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले वहाँ दो और मंदिर थे। उनमें से एक को टूरिस्ट प्लेस बना दिया गया और दूसरा मुकदमेबाजी के चलते बंद पड़ा है।

अब इस श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण इस्‍लामाबाद के H-9 क्षेत्र में 20,000 वर्गफुट में किया जा रहा था। मंगलवार को मल्‍ही ने ही इस मंदिर की आधारशिला रखी थी। नींव रखे जाने के इस कार्यक्रम के दौरान वहाँ उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मल्‍ही ने जानकारी दी थी कि भारत और पाकिस्तान की आज़ादी से पहले इस्‍लामाबाद और उससे सटे हुए क्षेत्रों में कई हिंदू मंदिर हुआ करते थे।

इनमें सैदपुर गाँव और रावल झील के पास स्थित मंदिर शामिल है। हालाँकि, उन्होंने बताया कि इन मंदिरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया और कभी इस्‍तेमाल नहीं किया गया। वो पड़े रहे और प्रयोग में आए ही नहीं।

ओली की कुर्सी से संकट सोमवार तक टला, नेपाली PM को बचाने के लिए चीन-पाक ने लगा रखा है जोर

नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक सोमवार तक के लिए टाल दी गई है। इस बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य पर फैसला होना था।

पार्टी में आम राय बनाने और टूट रोकने के लिए बैठक टाली गई है। पार्टी के सह अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के प्रेस सलाहकार बिष्णु सपकोटा ने बताया, “स्थायी समिति की बैठक सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दी गई है क्योंकि पार्टी के दोनों अध्यक्ष चर्चा के लिए और समय चाहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि प्रचंड के साथ-साथ पीएम ओली भी पार्टी के अध्यक्ष हैं। इससे पहले दोनों नेता शुक्रवार को इस मसले पर सहमति बनाने में असफल रहे थे। इधर, ओली ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्टी की अन्य इकाइयों से मदद मॉंगी हैं। उन्होंने पार्टी के यूथ और स्टूडेंट विंग के नेताओं को मशविरे के लिए अपने आवास पर बुलाया था। साथ ही उन्हें विपक्षी नेपाली कॉन्ग्रेस पार्टी से भी मदद की उम्मीद है।

यदि प्रचंड और ओली आम राय बनाने में कामयाब नहीं हुए तो पार्टी में टूट तय है। भारत विरोधी रुख और चीन के बढ़ते दखल को लेकर ओली के खिलाफ पार्टी के भीतर काफी नाराजगी है। पिछले हफ्ते नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने साफ शब्दों में ओली से प्रधानमंत्री पद या पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा था।

पार्टी के भीतर अपने इस्तीफे की मॉंग उठने के बाद ओली ने इसका ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन प्रचंड ने उनकी इस टिप्पणी को अनुचित करार दिया था।

उल्लेखनीय है कि हाल में नेपाल ने एक नया नक्शा पास किया है। इसमें भारत के कुछ इलाकों को शामिल कर लिया गया है। दूसरी ओर, नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई है।

नेपाल के भारत विरोधी एजेंडे के लिए होऊ यांगी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। होऊ यांगी नेपाल में चीन की राजदूत हैं। पहले नेपाल के नए नक्शे के पीछे उनका ही हाथ बताया गया था। अब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि होऊ यांगी की दखल नेपाल के आर्मी हेडक्वार्टर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक है।

नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा का दफ्तर हो या पीएम ओली का कार्यालय, बताया जाता है कि चीनी राजदूत नेपाल के किसी भी क्षेत्र में बेरोकटोक आ-जा सकती हैं।

मॉडल की तरह दिखने वाली होऊ यांगी के रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी उनके लिए विशेष भोज की मेजबानी करती हैं। ओली कैबिनेट के सदस्य उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर खुद को धन्य समझते हैं। होऊ यांगी भी नेपाल के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें आए दिन सोशल मीडिया में शेयर करती रहती हैं।

यहॉं तक कि ओली और प्रचंड के बीच तनाव की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने भी सुलह की कोशिशें की थी। इस क्रम में उन्होंने प्रचंड से भेंट कर उन्हें आपस में नहीं लड़ने की सलाह दी थी। कुर्सी बचाने की कोशिशों के बीच प्रचंड और ओली ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की है।

बताया जाता है कि चीन के साथ-साथ पाकिस्तान भी ओली की कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय है। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस क्रम में ओली मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के संपर्क में भी हैं। दिलचस्प यह है कि नेपाल में तैनाती से पहले होऊ यांगी तीन साल पाकिस्तान में भी काम कर चुकी हैं।

ओली अध्यादेश लाकर पॉलिटिकल पार्टीज ऐक्ट में बदलाव कर सकते हैं। इससे उन्हें पार्टी को बाँटने में आसानी होगी। यह सब चीन और पाकिस्तान के समर्थन से हो रहा है।

हालॉंकि जानकारों का मानना है कि शायद ही ओली कुर्सी बचाने में कामयाब रहें। बताया जाता है कि 44 सदस्यीय स्थायी समिति में केवल 13 सदस्य ही ओली के पक्ष में हैं। पिछले सप्ताह हुई बैठक में प्रचंड ने ओली पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे नेपाल को पाकिस्तान नहीं बनने देंगे।

उन्होंने कहा था, “हमने सुना है कि सत्ता में बने रहने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश मॉडल पर काम चल रहा है। लेकिन इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। भ्रष्टाचार के नाम पर कोई हमें जेल में नहीं डाल सकता है। देश को सेना की मदद से चलाना आसान नहीं है और ना ही पार्टी को तोड़कर विपक्ष के साथ सरकार चलाना संभव है।”

तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच ओली को चीन द्वारा हनी ट्रै​पिंग में फॅंसाने की अफवाहें भी पिछले कई दिनों से चल रही है। मेजर गौरव आर्या ने भी पिछले दिनों इस संबंध में ट्वीट किया था। हालॉंकि ओली के सेक्स टेप को लेकर सोशल मीडिया में अब तक किए गए दावे निराधार ही साबित हुए हैं।

विकास दुबे को पहले ‘साइकिल’ का सहारा, अब यूपी पुलिस का मजाक बना रहे अखिलेश यादव

कानपुर में दो जुलाई को हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला किया। हमले में आठ पुलिसकर्मी की मौत हो गई। इस घटना के बहाने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस का मजाक उड़ाने की कोशिश की है।

अखिलेश ने बीबीसी का एक कार्टून शेयर किया है जिसमें यूपी पुलिस के आठ जवानों की मौत को लेकर कटाक्ष किया गया है। यहॉं यह जानना दिलचस्प है कि विकास दुबे की सपा-बसपा के कई नेताओं से करीबी रही है। उसकी पत्नी सपा के टिकट पर पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी है।

इधर पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला करने वाले कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की माँ ने बयान दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके बेटे को मुठभेड़ में मार देना चाहिए क्योंकि उसने जो किया वह गलत था।

गैंगस्टर की माँ सरला देवी ने कहा, “अच्छा होगा अगर वो खुद सरेंडर कर दे। धोखे से भागता रहा तो पुलिस उसे एनकाउंटर में मार देगी। मैं तो कहती हूँ पकड़ लो और फिर एनकाउंटर कर दो। उसने बहुत बुरा किया है।”

गैंगस्टर विकास दुबे की माँ ने कहा कि राजनेताओं के संपर्क में आने के बाद विकास दुबे अपराध की दुनिया में शामिल हो गया था। सरला देवी ने यह भी कहा कि उनके गैंगस्टर बेटे ने परिवार को बहुत शर्मिंदा किया है।

कानपुर में हुई मुठभेड़ के बाद विकास दुबे फिलहाल फरार है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है।

विकास दुबे की माँ सरला देवी ने कहा, “विकास एमएलए चुनाव जीतना चाहता था। उसने तत्कालीन भाजपा सरकार में मंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। मैं चार महीने से उनसे नहीं मिली हूँ। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ में रह रही हूँ। हमें उसकी वजह से बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।”

गौरतलब है कि कानपुर स्थित चौबेपुर के बिकरू गाँव में हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को बृहस्पतिवार (जुलाई 02, 2020) की आधी रात पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया।

कानपुर में अपराधियों के साथ मुठभेड़ में एक उप पुलिस अधीक्षक सहित कम से कम आठ उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवाई है जबकि 4 गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में एक पुलिस कर्मी की हालत गंभीर बनी हुई है। 

शुक्रवार (जुलाई 03 ,2020) को पुलिस ने बताया कि यह मुठभेड़ बृहस्पतिवार और शुक्रवार की रात चौबेपुर थाना अंतर्गत डिक्रू गाँव में 60 आपराधिक मामलों में आरोपित हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए हुई थी।

अधिकारियों ने कहा कि जब पुलिस टीम खूंखार अपराधी के ठिकाने पर पहुँचने वाली थी, तब एक बिल्डिंग की छत से उन पर गोलियों की बौछार की गई, जिससे डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा, तीन सब-इंस्पेक्टर और चार कॉन्स्टेबल मारे गए। घटना का विवरण देते हुए, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) एचसी अवस्थी ने कहा कि कुख्यात अपराधी को इस छापेमारी की भनक लग गई थी।

DGP अवस्थी ने कहा कि उसने और उसके साथियों ने पुलिसकर्मियों को उनके ठिकाने की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर रोड ब्लॉक कर रखा था। पुलिस टीम के गाँव में पहुँचते ही विकास दुबे और उसके साथियों ने घरों की छत से फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने एक इमारत की छत से उन पर नजर रखी और हमला किया जिससे पुलिसकर्मियों की मौत हो गई।

डीजीपी ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज़ किया गया था, पुलिस उसे पकड़ने गई थी। पुलिस सर्विलांस के जरिए विकास दुबे का पता लगा रही है और कई अन्य ठिकानों पर छापे मार रही है। साथ ही सभी सीमाओं को भी सील कर दिया गया है।

वर्ष 2001 में शिवली थाने के बाहर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या करने में नामजद रह चुके हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे चौबेपुर थाना क्षेत्र के गाँव बिकरू का रहने वाला है। उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

सुशांत की मौत से करियर सँवारने की कोशिश में स्वरा भास्कर, सहानुभूति पाने के लिए खुद को बताया आउटसाइडर

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से बॉलीवुड में नेपोटिज्म और आउटसाइडर को लेकर दोहरा व्यवहार चर्चा के केंद्र में है। लोग बॉलीवुड में प्रचलित नेपोटिज्म, खेमेबाजी और दिग्गज सेलिब्रिटीज की बुलिंग को सुशांत की आत्महत्या की वजह बता रहे हैं।

सुशांत के असामयिक निधन के बाद जनता में स्ट्रगल करने वाले एक्टर्स के लिए सहानुभूति उत्पन्न हो गई है। इस सहानभूति का फायदा उठाने के लिए स्वरा भास्कर ने खुद को आउटसाइडर बताया है। साथ ही लोगों से थिएटर में जा कर अपनी फिल्म देखने का अनुरोध भी किया है।

स्वरा हाल ही में आई अपनी एक वेब सीरीज रसभरी को लेकर कंट्रोवर्सी में हैं। IMDB पोर्टल में वेब सीरीज रसभरी को सब कम रेटिंग मिली है। वहीं CNN 18 में दिए एक इंटरव्यू में स्वरा ने खुद को नवाजुद्दीन सिद्दीकी, दीपक डोबरियाल, ऋचा चड्डा, जयदीप अहलावत, राजकुमार राव, जीशान अय्यूब जैसे अभिनेताओं की तरह आउटसाइडर बताया है।

स्वरा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री नेपोटिस्टिक नहीं है, सामंतवादी है। इसलिए, जब इसे एक उद्योग और कॉरपोरेट मनी का दर्जा मिला और इसमें विभिन्न प्लेटफार्म उभर आए। इसकी वजह से इसमें आपको आउटसाइडर दिखने लगे। जैसे कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव, जयदीप अहलावत, दीपक डोबरियाल, ऋचा चड्डा, हुमा कुरैशी, मैं, मोनिका डोगरा और अन्य प्रमुख भूमिकाओं में आने वाले लोग।

स्वरा भास्कर ने कहा कि स्टार किड्स के ऊपर उठने के पीछे ऑडियंस जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “मैं दर्शकों से पूछना चाहती हूँ, आपको बहुत हमदर्दी है हमसे (बाहरी लोगों)। लेकिन नवाजुद्दीन की मोतीचूर चकनाचूर का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन क्या था? इरफान खान के कारवॉं का क्या हाल हुआ? राजकुमार राव की ट्रैप्ड ने कितनी कमाई की? रिचा चड्ढा के आर्टिकल 375 का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कैसा रहा? सुशांत सिंह राजपूत की सोनचिरैया और मेरी अनारकली का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कैसा था? इनकी तुलना हीरोपंथी के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, स्टूडेंट ऑफ द ईयर की सफलता, धड़क की कमाई से करिए। ये दर्शक हैं जो स्टार किड्स को बड़े सितारे बनाते हैं। यदि आपको हमसे सहानुभूति है तो थिएटर में जाकर हमारी फिल्में देखिए।”

खुद को आउटसाइडर बोल कर स्वरा भास्कर लोगों की सहानुभूति पाना चाहती है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग है। दरअसल, स्वरा भास्कर की माँ इरा भास्कर सेंसर बोर्ड (CBFC) की सदस्य रह चुकी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि जब एक्टर रणवीर कपूर की मूवी ‘रॉकस्टार’ में उसके प्रोडूसर को ‘फ्री तिब्बत’ वाले फ्लैग को ब्लर्र करने के लिए कहा गया था, तब इरा भास्कर CBFC की सदस्य थीं। उस दौरान सीबीएफसी ने कहा था कि “फ्री तिब्बत” का नारा भारत-चीन संबंधों को नुकसान पहुँचा सकता है।

इरा भास्कर जनवरी 2015 तक CBFC की सदस्य थीं और सीबीएफसी प्रमुख लीला सैमसन के पद छोड़ने के बाद उन्होंने भी बोर्ड छोड़ने का फैसला लिया था। इरा भास्कर फिल्म इतिहासकार के साथ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सिनेमा स्टडीज़ की प्रोफेसर भी हैं।

स्वरा भास्कर का खुद को आउटसाइडर बताना कहीं न कहीं लोगों को गुमराह करना और पब्लिक की सहानुभूति पाने की कोशिश है, जबकि उनकी माँ भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय की फिल्म-प्रमाणन संस्था सेंसर बोर्ड की मेंबर रह चुकी हैं।

ऐसा कर स्वरा न केवल अपने मॉं के अतीत को छिपाना चाहती हैं बल्कि एक अभिनेता की मौत का फायदा उठा कर अपने बॉलीवुड करियर को पटरियों पर लाने की कोशिश कर रही हैं।

लद्दाख के सबसे दुर्गम स्थान पर निमू में PM मोदी ने की सिंधु पूजा, अयोध्या से भी आया बुलावा

PM नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (जुलाई 03, 2020) को 11,000 फुट की ऊँचाई पर लद्दाख के निमू पोस्ट पहुँचकर भारतीय सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने सिंधु दर्शन पूजा भी की।

इसका वीडियो और तस्वीरें आज सामने आए हैं। सिंधु नदी के तट पर 11,000 फुट की ऊँचाई पर स्थित निमू पोस्ट सबसे दुर्गम स्थानों में से एक है।

पूर्व लद्दाख स्थित गलवान घाटी क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के बीच शुक्रवार को पीएम मोदी ने अचानक लेह दौरा कर सेना के जवानों से बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी के इस दौरे ने सीमा पर भारत की दृढ़ता के संकेत दिए हैं।

लेह पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेना के अधिकारियों, जवानों और अस्पताल में भर्ती जवानों से मुलाकात की। उन्होंने सेना के जवानों को संबोधित करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लेह, लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक, यहाँ की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवान घाटी की ठंडे पानी की धारा तक हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा-जर्रा, हर कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही देते हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि हम वो लोग हैं जो बाँसुरी बजाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और हम वही लोग सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा, “मैं आज आपको प्रणाम करने आया हूँ और आपको देखकर एक ऊर्जा लेकर जाऊँगा। हम दुनिया की किसी ताकत के सामने न झुके हैं और न कभी झुकेंगे। ये बात मैं आप जैसे पराक्रमी, वीर साथियों के कारण कह पा रहा हूँ।”

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने जताई पीएम मोदी के उपस्थित होने की इच्छा

आज शनिवार (जुलाई 04, 2020) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य 18 जुलाई को अयोध्या में मिलेंगे। इस दौरान राम मंदिर निर्माण पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि पीएम मोदी एक बार अयोध्या आएँ ताकि निर्माण शुरू हो जाए।

इस ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास हैं। प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र, केंद्रीय अतिरिक्त गृह सचिव ज्ञानेश कुमार और उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी समेत कई अन्य इसके सदस्य हैं। बैठक के एजेंडा का संकेत देते हुए राय ने कहा कि मंदिर के पिलरों (स्तम्भ) की नींव रखने का मुद्दा बैठक में उठाया जा सकता है।

18 जुलाई को अयोध्या में श्री राम मंदिर न्यास की बैठक में जमीन के समतल होने के बाद परियोजना के विभिन्न चरणों पर चर्चा होगी। ज्ञात हो कि यह ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के काम की देखरेख के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत गठित किया गया है।

दिल्ली दंगों से जाकिर नाइक के भी जुड़े तार, फंड के लिए मिला था खालिद सैफी, विदेशी फंडिंग का स्पेशल सेल को मिला लिंक

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जाँच से नए विवरण सामने आए हैं। इससे पता चला है कि फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए JNU छात्रनेता उमर खालिद के करीबी खालिद सैफी की मुलाकात मलेशिया में भगोड़े इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, खालिद सैफी कथित तौर पर दिल्ली दंगों के सूत्रधारों में से एक है और JNU छात्रनेता उमर खालिद और ताहिर हुसैन का करीबी भी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, यह फंड सऊदी अरब में वापस सिंगापुर में एक एनआरआई के पास भेज दिया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच से पता चला है कि पूर्व कॉन्ग्रेस नगरपालिका पार्षद इशरत जहाँ को गाजियाबाद और महाराष्ट्र में अन्य रिश्तेदारों से संदिग्ध मार्ग से फंड मिला था। इशरत को दिल्ली पुलिस ने मार्च में दिल्ली दंगों के मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

कोरोना वायरस की महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण खालिद सैफी और इशरत जहाँ की पूछताछ अभी लंबित है। इसके अलावा, जाँच से यह बात भी सामने आई है कि खालिद सैफी को दंगों के लिए सिंगापुर के एक एनआरआई खाते के माध्यम से फंड मिला था।

यह धन भारत में एक एनजीओ को हस्तांतरित किया गया था जो उमर खालिद और उसके मेरठ के किसी पार्टनर द्वारा संचालित था, जो वर्तमान में कोरोना वायरस के चलते क्वारंटाइन है। सिंगापुर के एनआरआई की पहचान करने के लिए जाँच जारी है।

पुलिस को खालिद सैफी के मोबाइल फोन से पैसों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि खालिद सैफी के मोबाइल डेटा की जाँच बहुत जरूरी है।

खालिद सैफी के पासपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली दंगों की फंडिंग के लिए जाकिर नाइक जैसे कई लोगों से मुलाकात करने के लिए उसने कई देशों की यात्रा की थी।

आरोपित इशरत जहाँ और खालिद सैफी को सिंगापुर, सऊदी अरब सहित विदेशों और पीएफआई से बेहिसाब फंड मिला था।

सऊदी अरब सहित भारत के भी कई हिस्सों से आया था फंड

दिल्ली पुलिस ने अदालत में पेश जाँच रिपोर्ट में कहा है कि पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के लिए सऊदी अरब और देश के अलग-अलग हिस्सों से भी फंडिंग आई थी। पुलिस का कहना है कि दिल्ली में दंगे सुनियोजित साजिश और योजना के परिणामस्वरूप भड़के थे और यह अचानक नहीं था।

इससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने एक स्थानीय अदालत को बताया था कि गवाहों से पूछताछ से यह पता चला कि दिल्ली दंगों की साजिश में आरोपित शिफा उर रहमान को मध्य-पूर्व के देशों में स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व छात्र संघ के सदस्यों से फंड मिला था। इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए जामिया के पूर्व प्रेजिडेंट शिफा उर रहमान को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

पुलिस ने कहा कि रहमान का नाम इशरत जहाँ, खालिद सैफी, मीरान हैदर, सफूरा जरगर, गुल्फ़ीशा खातून, ताहिर हुसैन और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन सदस्यों से पूछताछ के दौरान सामने आया था।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अदालत से दिल्ली हिंसा की तह तक पहुँचने के लिए और आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए समय माँगा है। पुलिस ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन के कारण जाँच में देरी हुई है।

गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिवसीय दौरे पर भारत आए थे। उनके दौरे के दौरान ही उत्तरी-पूर्व दिल्ली में दंगे भड़क गए थे। दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, आईबी अफसर अंकित शर्मा की दंगाइयों ने जान ले ली थी।

दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पुलिस अलग-अलग मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है। अब तक दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के सिलसिले में 1300 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।