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‘इस्लाम में समलैंगिकता हराम है’: जानिए क्यों हो रहा है #WhySoProud ट्रेंड

30 जून प्राइड मंथ के रुप में संपन्न हुआ। इस दौरान इस्लामवादियों ने ट्विटर पर #WhySoProud ट्रेंड कराने के साथ ही समलैंगिकता से जुड़े ट्वीट्स को ये दावा करते हुए ट्रेंड करवाया कि यह कैसे कुरान के खिलाफ है। कुछ लोगों ने कहा कि चूँकि वो अल्लाह के प्रति जवाबदेह हैं, इसलिए उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि इस्लाम में समलैंगिकता हराम है।

कुछ अन्य लोगों ने अपने साथियों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को सिखाएँ कि समलैंगिकता का समर्थन न करें क्योंकि यह ‘सामान्य हो रहा है’।

एक इस्लामवादी ने अपने होमोफोबिक ट्वीट में बच्चों को समलैंगिकों से बचाने के लिए #save_your_children_from_gays हैशटैग भी जोड़ा।

एक इस्लामवादी ने यह भी दावा किया कि एलजीबीटी समुदाय के लोग कुरान में ‘शापित लोग’ हैं।

एक ने यह भी दावा किया कि समलैंगिकता पर संपूर्ण ग्लोबल ‘उम्मा’ में पाप होने पर आम सहमति है।

कुछ लोगों ने अल्लाह की मदद से ‘प्राइड’ को दूर करने की भी कसम खाई है।

समलैंगिकता और इस्लाम

कुरान के अनुसार, ‘लूत के लोग’ अल्लाह के ‘क्रोध’ से नष्ट हो गए थे क्योंकि पुरुष पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते थे। कुछ हदीस संग्रह भी समलैंगिकता और ट्रांसजेंडर कृत्यों की निंदा करते हैं।पुरुष समलैंगिक कृत्यों में मृत्युदंड निर्धारित है। कई इस्लामी देशों में समलैंगिकता के लिए मौत की सजा है।

आतंकी की गोली से मरा कश्मीरी, नैरेटिव बनाने की कोशिश की CRPF ने मार डाला: फैक्ट चैक

उत्तरी कश्मीर के सोपोर में बुधवार (जुलाई 01, 2020) सुबह सीआरपीएफ (CRPF) के गश्ती दल पर हुए आतंकी हमले में एक सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल की भी मौत हो गई, जबकि तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। यह हमला एक बाजार में हुआ जहाँ चहल-पहल भी थी। इसी कारण आतंकियों के हमले का शिकार एक नागरिक भी हुए। इसके बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसमें एक तीन साल का बच्चा अपने नाना जी के शव के ऊपर बैठा हुआ देखा गया।

बशीर अहमद के शव पर बैठा तीन साल का सुहैल

मृतक की पहचान 65 वर्षीय बशीर अहमद (Bashir Ahmad) के रूप में हुई। दरअसल, बशीर अहमद अपने 3 साल के नाती सोहेल को लेकर बाजार गए थे, लेकिन एनकाउंटर के बीच बशीर को आतंकवादियों की गोली लग गई और वह वहीं गिर पड़े। बशीर अहमद मुस्तफा कॉलोनी एचएमटी शहर के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, सोपोर में आतंकवादी हमले के दौरान गोलियों की चपेट में आने से पुलिस ने एक 3 साल के बच्चे को बचाया है।

इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए एक बार फिर भारतीय सेना और सुरक्षाबलों की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एक फर्जी नैरेटिव रचने का प्रयास किया जा रहा है कि बशीर अहमद की मृत्यु CRPF की गोली लगने से हुई।

एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मृतक बशीर अहमद के बेटे ने अपने पिता की मौत के लिए कथित तौर पर CRPF को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि इस वीडियो को देखने और सुनने पर पता चलता है कि उन्होंने अपने पिता की हत्या के लिए CRPF को दोषी नहीं ठहराया है।

इस वीडियो में वह कह रहे हैं – “वो सवेरे छह बजे अपने काम से सोपोर निकले थे। तो वहाँ फायरिंग स्टार्ट हो गई तो सीआरपी ने फायरिंग की, मार डाला।”

हालाँकि, वीडियो में यह कहीं भी स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया है कि मृतक के बेटे ने कहा हो कि CRPF ने उनके पिता को मार डाला। ऐसे में यह भी सम्भव है कि वह कह रहे हों कि CRPF की फायरिंग के बाद उन्हें आतंकियों की गोली ने मार डाला।

ट्विटर पर सोपोर पुलिस के अकाउंट ने इस घटना के बाद बने इस फ़ेक नैरेटिव पर ट्वीट करते हुए लिखा है – “यह खबर कुछ सोशल नेटवर्किंग साइटों पर सामने आई है कि बशीर अहमद को गाड़ी से उतारकर मार दिया गया। यह पूरी तरह से बेबुनियाद है और तथ्यों से परे है, सोपोर पुलिस खबर का खंडन करती है और झूठी रिपोर्ट और अफवाहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।” इसके साथ ही इस ट्वीट में कश्मीर पुलिस के ट्विटर अकाउंट को भी टैग किया गया है।

घटनास्थल से तीन साल के बच्चे को सुरक्षित निकालने के बाद सुरक्षाबलों के बयान का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो बता रहे हैं कि किस प्रकार सामने से होने वाली फायरिंग में नागरिक की मौत के बाद उनकी पहली प्राथमिकता बच्चे को बचाना था। जवान इसमें कह रहे हैं कि उन्होंने बच्चे की सुरक्षा के लिए गोलियों की दिशा को ब्लॉक किया और उसके बाद बच्चे को वहाँ से सुरक्षित निकाल लिया।

कश्मीर की घटनाओं को इस्लामिक रंग देने के लिए कुख्यात ‘कश्मीर वाला’ वेबसाइट ने तो यहाँ तक कहा है कि मृतक बशीर की पत्नी ने कहा कि सरकार ने खुद उन्हें मारा, फिर बच्चे को उनके शव पर बिठाया।

कुछ लोगों ने एक ऐसे सीक्रेट ग्रुप को भी इस नैरेटिव के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें इस हत्या का इल्जाम CRPF पर डालने का नैरेटिव तैयार करने की बात कही गई है। ट्विटर यूजर्स का कहना है कि उज़ैर नाम का आदमी इस फ़ेक नैरेटिव को फैला रहा है।

बताया जा रहा है कि आतंकियों ने घात लगाकर पैट्रोलिंग कर रहे जवानों पर खुलेआम फायरिंग कर दी थी। इस दौरान तीन जवानों और एक नागरिक को गोली लग गई। फिलहाल, सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ी मौके पर पहुँच गई है और पूरे इलाके को घेर लिया गया है।

आज ही जम्मू कश्मीर पुलिस के एक आईपीएस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने एक खुलासा करते हुए बताया है कि 2001 में उनकी चचेरी बहन की एक आतंकी घटना में मौत होने के बाद उनके परिवार पर लोगों द्वारा दबाव बनाया गया था कि वो इसका आरोप बीएसएफ़ (BSF) पर लगाएँ।

प्रियंका गाँधी वाड्रा को करना होगा सरकारी बंगला खाली, 1 अगस्त तक का समय है उनके पास

केंद्र सरकार ने प्रियंका गाँधी वाड्रा को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है। सरकारी नोटिस के बाद उन्हें 1 अगस्त तक अपने लोधी रोड स्थित बंगले को खाली करना है।

गत वर्ष ही गाँधी परिवार को दी गई स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा वापस ले ली गई थी और उन्हें केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) की जेड प्लस सुरक्षा दे दी गई थी। लेकिन उन्होंने सरकारी आवास खाली नहीं किया था। एसपीजी सुरक्षा सोनिया, उनके बेटे राहुल और बेटी प्रियंका के नई दिल्ली स्थित आवासों से हटा ली गई है और अब उन्हें इसी कारण सरकारी आवास भी त्यागना होगा।

जी न्यूज़ चैनल के सम्पादक सुधीर चौधरी ने आदेश की कॉपी शेयर करते हुए लिखा है – “गाँधी एक और विशेषाधिकार खो रहे हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार द्वारा प्रदान किए गए अपने लुटियंस बंगले को खाली करने के लिए नोटिस दिया। उसे बंगला इसलिए मिला था क्योंकि उन्हें एसपीजी (SPG) संरक्षण प्राप्त था। अब उसने एसपीजी कवर खो दिया है और इसलिए अब उन्हें बंगला भी छोड़ना होगा।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा एसपीजी सुरक्षा हटा लिए जाने के बाद भी दिल्ली के लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगले में जमी हुईं थीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका को यह बंगला एसपीजी, गृह मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय की सुरक्षा सलाह के बाद दिया गया था।

गौरतलब है कि कानूनी रूप से एक सामान्य नागरिक प्रियंका को वर्ष 1997 के फरवरी माह में टाइप IV का सरकारी आवास अलॉट किया गया था। जिसे अब सरकारी नोटिस के बाद उन्हें 1 अगस्त तक अपने लोधी रोड स्थित बंगले को खाली करना है।

59 चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध के बाद PM मोदी ने छोड़ा चाइनीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विबो

भारत सरकार द्वारा 59 चायनीज ऐप पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Weibo) छोड़ दिया है। चायनीज सोशल मीडिया वीबो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वेरिफाइड एकाउंट मौजूद था और तकरीबन ढाई लाख फॉलोवर्स थे। पीएम मोदी ने साल 2015 में वीबो पर अपना एकाउंट बनाया था। बुधवार को PM मोदी का यह अकाउंट ब्लैंक नजर आया है।

सरकार द्वारा 59 चायनीज ऐप, विशेषकर टिकटॉक को प्रतिबंधित करने के बाद कई लोग पीएम मोदी के विबो एकाउंट को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे थे। इसके बाद ही यह सूचना सामने आई है।

आशीष सिंह ने इसकी सूचना ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा – “ब्रेकिंग न्यूज़। पीएम मोदी ने चीनी ऐप वीबो छोड़ा। जैसे ही भारत में चीन के 59 ऐप को हटाने का फैसला लिया गया, पीएम मोदी ने फैसला किया कि वे वीबो को छोड़ देंगे, जिसे उन्होंने कुछ साल पहले ही ज्वाइन किया था। वीबो को छोड़ने के लिए वीबो की विशिष्ट प्रक्रिया होने के कारण 2 दिन का समय लगता है।”

गौरतलब है कि लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच देशभर में चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार की आवाज उठनी शुरू हुई हैं। ऐसे में भारत सरकार ने 59 चायनीज ऐप को प्रतिबंधित करने का बड़ा फैसला लिया।

भारत सरकार के इस फैसले से चीन चिंतित भी नजर आ रहा है, यही वजह है कि एक ओर जहाँ वह अपने मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के द्वारा भारत के खिलाफ कूटनीतिक एजेंडा चलाने के प्रयास कर रहा है, उसी समय चीन ने इन ऐप के बहिष्कार पर WTO (विश्व व्यापार संगठन) की शर्तों की भी दुहाई दे रहा है।

इस पर चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने भी चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध को लेकर कहा है कि चीन इस पर पूरी तरह से नजर रख रहा है और इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जता रहा है।

रोंग ने कहा कि भारत ने इन ऐप को बैन करने का जो तरीका अपनाया है वो भेदभावपूर्ण है। डब्ल्यूटीओ का हवाला देते हुए चीनी दूतावास ने बयान दिया है कि कुछ चीनी ऐप प्रतिबंधित करने के लिए जिस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया है, वो ठीक नहीं है और ये विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन भी है।

इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि इन ऐप को प्रतिबंधित करने के भारत सरकार के फैसले पर व्यापार के नियमों का हवाला वह कम्युनिस्ट देश दे रहा है, जिसने अपनी जनता के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसी किसी भी प्रकार की माइक्रोब्लॉगिंग सोशल मीडिया साइट को प्रतिबंधित किया हुआ है।

रॉबर्ट वाड्रा के करीबी आर्म्स डीलर संजय भंडारी के खिलाफ CBI ने दर्ज किया एक और मामला, ये है गंभीर आरोप

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने फरार चल रहे संजय भंडारी के खिलाफ एक और मामला दर्ज कर लिया है। संजय भंडारी हथियार डीलर है और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा का काफी करीबी है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने संजय भंडारी, दक्षिण कोरियाई कंपनी मैसर्स सैमसंग इंजीनियरिंग और ONGC / ONGO पेट्रो (OPAL) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का ताजा मामला दर्ज किया है।

जाँच एजेंसी ने आरोप लगाया कि संजय भंडारी ने लोक सेवकों को प्रभावित करने और एसईसीएल के अनुबंध को सुरक्षित करने के लिए सैमसंग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एसईसीएल) से लगभग 49,99,969 USD कमीशन के तौर पर लिए थे। यह राशि सैमसंग की तरफ से संजय भंडारी के दुबई वाले अकाउंड में जमा किया गया था।

CBI के मुताबिक साल 2008 में ONGC ने गुजरात के Dahej में ऑयल रिफाइनरी के लिए कॉन्ट्रेक्ट निकाला था, जिसके लिए बोली लगाई गई थी। उसमें SECL ने संजय भंडारी के साथ मिलकर ये कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया और बदले में कमीशन लिया। इसी आरोप के बाद CBI ने संजय भंडारी, उसकी कंपनी और SECL कंपनी, उसके अधिकारी और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है

जानकारी के मुताबिक यह डील यूपीए के शासन के दौरान हुई थी। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा लंदन में लगभग आधा दर्जन बेनामी संपत्ति को लेकर सीबीआई जाँच के दायरे में हैं।

संजय भंडारी के खिलाफ CBI ने ये दूसरा मामला दर्ज किया है। इससे पहले जून 2019 में एयरफोर्स को 75 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट दिलाने के नाम पर कमीशन लेने के आरोप का मामला दर्ज किया गया था।

आरोप था कि संजय भंडारी ने अपनी कंपनी Offset India Solutions Pvt Ltd के जरिए ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट देने वाली कंपनी Pilatus Aircrats Ltd के साथ मिलकर ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बदले में Pilatus ने संजय भंडारी को 350 करोड़ रुपए दिए।

मामला प्रकाश में तब आया था जब उपरोक्त सौदे के लिए Pilatus Aircrats Ltd की निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही दक्षिण कोरियाई कंपनी कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने पिलैटस को यह करार दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार से विरोध दर्ज कराया था। उनका दावा था कि पिलैटस की बोली के दस्तावेज़ अधूरे थे, और इसलिए उसे मिला हुआ करार रद्द होना चाहिए। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस मामले में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से बात की थी और उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला, और अंत में यह अनुबंध पिलैटस को ही दिया गया था

गौरतलब है कि 2008 से 2012 की अवधि में, हथियार डीलर संजय भंडारी कॉन्ग्रेस सरकार के तहत सक्रिय रूप से अपने ‘बिज़नेस’ के लिए वापसी कर रहे थे और दसाँ (Dassault) के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी कर रहे थे। दसाँ ने संजय भंडारी के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, भूमि सौदे को स्वीकार करते हुए, कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को भूमि के विक्रेता एचएल पाहवा के साथ संबंधों पर चुप्पी ही साध रखी है। 

आतंकवादियों को मस्जिदों का उपयोग न करने दें, J&K में 1 महीने में दूसरी बार मस्जिद से हुई गोलीबारी: IG विजय कुमार

जम्मू कश्मीर में भारतीय सशस्त्र बल आतंकियों का तेज़ी से सफाया कर रहे हैं। इससे बौखलाए आतंकी अब आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इसी बीच सीआरपीएफ (CRPF) के गश्ती दल पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें सीआरपीएफ का एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। तीन अन्य जवान घायल हो गए और एक आम नागरिक की मौत हो गई है।

कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने बताया कि आतंकियों ने सीआरपीएफ दस्ते पर मस्जिदों से गोलीबारी की थी। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में आतंकवादियों ने दूसरी बार अपने नापाक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मस्जिदों का इस्तेमाल किया है। आईजी विजय कुमार ने कहा, “मैं मस्जिद समितियों से अनुरोध करता हूँ कि आतंकवादियों को धार्मिक स्थलों का उपयोग न करने दें।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले साल जनवरी से जून के बीच 129 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए। इस साल 6 महीने में 67 युवा आतंकी बने हैं। जिसमें से 24 मारे गए हैं। 12 गिरफ्तार कर लिए गए हैं, जबकि बाकी अभी भी सक्रिय हैं। हम युवाओं के माता-पिता से अपील करते हैं कि उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कदम उठाएँ।”

बता दें कि आम नागरिक की मौत के बाद उनकी लाश के पास फँसे ती साल के बच्चे को सीआरपीएफ के जवान और जम्मू कश्मीर पुलिस ने अपनी जान पर खेल कर बचाया। बच्चे को आतंकियों की गोलियों की बौछार के बीच बचाना चुनौती भरा काम था, जिसके लिए CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपनी ज़िंदगी दाँव पर लगा दी। वायरल तस्वीरों में उक्त बच्चे को अपने नाना जी की लाश पर बैठा देखा जा सकता है। उसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान की गोद में रेस्क्यू किए गए बच्चे को देखा जा सकता है।

आईजी ने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर हुईं मुठभेड़ में हमने 121 हथियार बरामद किए हैं। जिनमें से 62 एके-47, एक एम-4 राइफल, एक पीका गन और 44 पिस्टल बरामद किए गए हैं। इस साल अबतक 22 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए गए हैं। 22 हार्डकोर आतंकी भी पकड़े गए हैं। साथ ही 309 आतंकियों के मददगारों को पकड़ने में सफलता मिली है। वहीं 15 नागरिकों की जान गई है। 

उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों में कश्मीर में 118 आतंकवादी मारे गए हैं। जिसमें से 57 हिजबुल के हैं। इस अवधि में रियाज नायकू समेत कई शीर्ष कमांडरों को मार गिराया गया है। अब हमारा लक्ष्य जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का सफाया करना है। कई शीर्ष आतंकी हमारी सूची में शामिल हैं। लश्कर के भी कई आतंकी निशाने पर हैं। आतंकी संगठनों में शामिल होने वालों की संख्या में कमी आई है। जोकि कश्मीर घाटी के लिए अच्छा संकेत है।

अपने ही घर में घिरा चीन: हॉन्गकॉन्ग में सड़क पर उतरे आक्रोशित लोग, नया कानून बना तानाशाही पर उतरा चीन

चीन के कब्जे वाले हॉन्गकॉन्ग में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। चीन ने वहाँ अपना क़ानून थोपा है, जिससे वहाँ के लोगों को गलत तरीके से फँसा कर गिरफ्तार करना उसके लिए आसान हो गया है। चीन ने इस क़ानून का ‘परीक्षण’ भी किया है, जिसके तहत एक गिरफ्तार किया गया। इसके बाद चीन के हॉन्गकॉन्ग में लोग सड़कों पर विरोध के लिए उतर आए और जम पर बवाल काटा।

चीन के ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शनकारी किसी बड़े विरोध प्रदर्शन के फ‍िराक में हैं। हालाँकि, चीन का कहना है कि उसके पुलिस की चप्‍पे-चप्‍पे पर नजर है। चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग पर थोपे गए राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर उपजे आक्रोश को लेकर हॉन्गकॉन्ग में चीन परस्त पुलिस को पूरी तरह से सतर्क कर दिया गया है। यही कारण है कि लोगों को एक जगह जुटने करने की भी इजाजत नहीं दी गई है।

लोगों को स्‍पष्‍ट आदेश जारी कर दिया गया है कि वह एक जगह पर इकठ्ठा नहीं हो सकते। यह सब घटनाएँ ऐसे वक़्त हो रही हैं जब चीन राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून को पूरी तरह अमल में लाने के लिए बेचैन दिख रहा है। हॉन्गकॉन्ग में एक व्यक्ति ने अपने प्रदेश की आज़ादी की माँग करते हुए झंडा उठा कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसे कानून का उल्लंघन मानकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद और लोग सड़कों पर उतरे

हॉन्गकॉन्ग विश्व के सबसे समृद्ध इलाक़ों में शामिल है। व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग का हब है। चीन ने हॉन्गकॉन्ग के कई ऐसे लोगों को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है, जिसे वह ख़तरे के रूप में देखता है। ये वो लोग हैं जो चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग को धीमे-धीमे पूरी तरह कब्जाने की नीति का विरोध करते रहे हैं। इलेक्शन कमिटी से लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तक, बीजिंग ने हर जगह अपने लोग बिठा रखे हैं, जिससे वहाँ की जनता ख़ुद को ठगा महसूस करती है। 

हॉन्गकॉन्ग का अपना अलग संविधान है, जिसे ‘बेसिक लॉ’ कहा जाता है। लेकिन, दिक्कत की बात यह है कि बेसिक लॉ 2047 में एक्सपायर हो जाएगा। उसके बाद क्या? क्या उसके बाद कोई भी निर्णय लेने से पहले चीन हॉन्गकॉन्ग की जनता की राय लेगा? हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव भी चीन के किसी विश्वस्त को ही बनाया जाता है और जजों की नियुक्ति में अहम रोल होने के कारण क्षेत्र की न्यायिक व्यवस्था भी कमोबेश चीन के ही प्रभाव में काम करती है।

चीन ने एक नया प्रत्यर्पण बिल लाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि हॉन्गकॉन्ग के नागरिकों को न्यायिक कार्रवाई के लिए उन्हें मेनलैंड चीन ले जाया जा सकेगा। इससे वहाँ की जनता सतर्क हो गई और उन्होंने बिल का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद पहले इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन, इसने हॉन्गकॉन्ग की जनता के भीतर की उस आग को बढ़ा दिया जो अरसे से भभक रहा था।

आतंकी हमले में मारी गई बहन की मौत के लिए BSF को दोषी बताने का बनाते थे लोग दबाव: IPS इम्तियाज हुसैन

जम्मू और कश्मीर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन (Imtiyaz Hussain) ने अपने व्यक्तिगत अनुभव से एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना को क्रूर और आक्रामक साबित करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर घाटी में रहने वाले कट्टरपंथी किस प्रकार आतंकी घटनाओं का नैरेटिव बदलकर समाज के सामने पेश करते हैं और युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं।

जम्मू और कश्मीर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने ट्विटर पर वर्ष 2001 की एक आतंकी घटना का जिक्र करते हुए ट्विटर पर लिखा है – “मई 08, 2001 को आतंकवादियों ने एक IED विस्फोट करके बीएसएफ कैंप पर हमला किया। इस हमले में कुछ बीएसएफ के जवानों और नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में मेरी एक 14 वर्षीय चचेरी बहन भी थी। डेड बॉडी में चोट के निशान थे। और उसके बाद लोगों ने मेरे परिवार को यह कहने के लिए मजबूर किया कि वह BSF द्वारा मारी गई थी। यह कश्मीर है, जहाँ शव बेचे जाते हैं।”

लेकिन ट्विटर पर इस बड़े खुलासे ने कट्टरपंथियों को आक्रोशित कर दिया और वो अपनी भावनाओं को बाहर रखने से खुद को नहीं रोक पाए। ऐसे ही शाहीद पीर नाम के एक ट्विटर यूजर ने इम्तियाज हुसैन के ट्वीट के जवाब में लिखा – “तुम बीजेपी के प्रवक्ता की तरह बात कर रहे हो, तुम कश्मीर के समर्थक नहीं हो।” हालाँकि, शाहीद पीर ने अब अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया है।

@Gangsofnewyrk नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा है – “आप पहले ही अपना विवेक खो चुके हैं। आपको आखिरात में कश्मीरी बेगुनाहों को मारकर सत्ता की चाह और व्यक्तिगत लाभ के लिए जवाब देना होगा।”

कुछ कट्टरपंथी ट्विटर एकाउंट्स ने इम्तियाज हुसैन के खुलासे से बौखलाकर उन्हें गालियाँ भी दी हैं।

एक ट्विटर यूजर ने किसी गोपनीय ग्रुप का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है कि किस तरह से कट्टरपंथी आतंकी घाटी में होने वाली मौतों का नैरेटिव बदलते हैं। इस स्क्रीनशॉट में ग्रुप का नाम है – ‘साइकोलॉजीकल वारफेयर सेंटर’

ग्रुप चैट में किसी आतंकी घटना का 10 सेकंड का वीडियो शेयर किया गया है और साथ ही लिखा गया है कि इस कॉपी को डाउनलोड करो और इसका दोष आतंकवादियों पर नहीं आना चाहिए।

इसके अलावा 60 वर्षीय बशीर अहमद की मौत की खबर को शेयर करते हुए यह भी लिखा गया है कि इसे भी इस्तेमाल करो और ऐसा नैरेटिव तैयार करो कि उन्हें CRPF के जवानों ने ही मारा।

सीक्रेट ग्रुप का स्क्रीनशॉट

ख़ास बात यह है कि ‘कश्मीर ऑब्जर्वर’ नाम की वेबसाइट पर इस घटना के विवरण में ठीक यही बात लिखी पाई गई है, यानी मृतक साठ वर्षीय बशीर अहमद के बेटे ने कहा कि उनके पिता को एक मुठभेड़ के दौरान वाहन से नीचे उतारा गया और फिर सीआरपीएफ द्वारा मार दिया गया।

यानी बेहद शातिराना तरीके से आतंकवादियों के मुखपत्र की तरह काम करने वाली इस प्रकार की वेबसाइट उस नैरेटिव को आगे बढ़ाती हैं, जो कि इन तक इनके आकाओं द्वारा पहुँचाया जाता है। और शायद यही एक कारण भी है कि कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा के साथ ही अन्य मुस्लिम समुदाय के लोग भी घाटी में मारे जाने वाले आतंकवादियों के प्रति अक्सर सहानुभूति दिखाते हुए पाए जाते हैं।

बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने TMC नेता तापस चटर्जी पर लगाया हमले का आरोप: बाल-बाल बचे, वाहन क्षतिग्रस्त

पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष पर बुधवार (जुलाई 1, 2020) को कोलकाता से सटे राजरहाट इलाके में कथित तौर पर हमला किया गया, जब वह सुबह की सैर के लिए गए थे। घोष ने दावा किया कि उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई है और सुरक्षाकर्मियों की वजह से वह बाल-बाल बच गए। घोष ने आरोप लगाया कि उनके सुरक्षाकर्मी, जो उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे थे, उन पर भी हमला किया गया

उन्होंने कहा कि राजारहाट से सटे भांगड़ के कोचपुकुर गाँव में वह एक चाय की दुकान पर थे जब तृणमूल कॉन्ग्रेस के कुछ गुंडों ने उन पर हमला किया। दिलीप घोष ने हमले के लिए स्थानीय टीएमसी नेता तापस चटर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि, चटर्जी ने दावा किया कि उन्हें फँसाया जा रहा है।

घटना के बाद दिलीप घोष ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मैं वर्तमान में राजारहाट-न्यूटाउन क्षेत्र में रह रहा हूँ। मैं हमेशा की तरह सुबह की सैर के लिए रवाना हुआ और आज मेरा पास के कोचपुकुर गाँव में एक चाय-स्टॉल पर जाने का कार्यक्रम था जहाँ हमारी पार्टी के कार्यकर्ता इंतजार कर रहे थे। इससे पहले कि मैं वहाँ पहुँच पाता, तृणमूल समर्थकों ने मुझे रोक दिया। उन्होंने मेरे साथ मारपीट की और मेरे सुरक्षा गार्डों पर भी हमला किया। इसके बाद हमलावरों ने कुर्सियाँ ​​फेंक दीं और मेरी कार में तोड़फोड़ की।”

वो आगे कहते हैं, “स्थानीय पुलिस को मेरे क्षेत्र के दौरे के बारे में पहले सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। इससे आप बंगाल के लोगों की सुरक्षा की कल्पना कर सकते हैं। मुझे नहीं पता कि तृणमूल कॉन्ग्रेस मुझसे क्यों डरती है।”

इस घटना की निंदा करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “कई लोग भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। जैसे पश्चिम बंगाल के सभी लोग टीएमसी की विचारधारा का समर्थन नहीं करते हैं। लेकिन, घोष पर हमला स्वीकार्य नहीं है।”

गौरतलब है कि 28 जून 2020 को ही पूर्वी मिदनापुर जिले के खजूरी में सत्तारुढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थकों और भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प के दौरान भाजपा के जिला सचिव को गोली मार दी गई थी। गोली भाजपा सचिव के बाएँ हाथ में लगी थी।

पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में बीजेपी नेता नारायण विश्वास की नृशंस हत्या कर दी गई। पहले मृतक को गोली मारी गई और जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए, तो हमलावरों ने धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी।

बंगाल के बीरभूम के नानूर इलाके में 47 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता शंकरी बागड़ी की 21 अक्टूबर 2019 को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। झड़प में 6 अन्य भाजपा समर्थक भी घायल हो गए थे।

आतंकियों की तरह FIR, क्या आयुर्वेद पर काम करना गुनाह है? – बाबा रामदेव ने पूछा- ‘सिर्फ कोट-टाई वाले करेंगे रिसर्च?’

अपने खिलाफ जारी ‘विच हंट’ से परेशान बाबा रामदेव ने पूछा है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है जैसा आतंकवादियों के साथ किया जाता है? कोरोनिल दवा पर उपजे विवाद के बीच ‘पतंजलि आयुर्वेद’ के सर्वेसर्वा और योगगुरु रामदेव ने अपने ख़िलाफ़ कई राज्यों में हुए FIR पर बोलते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की। हरिद्वार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबा रामदेव ने इन FIR और कोरोनिल विवाद पर जवाब दिया।

बाबा रामदेव ने कहा कि वो और उनकी टीम योग और आयुर्वेद से लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की शिक्षा दे रही है लेकिन फिर भी उन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने भी ‘पतांजलि आयुर्वेद’ के बारे में कहा है कि उसने कोविड-19 के क्षेत्र में अच्छी पहल की है। बाबा रामदेव ने कहा कि इस बयान से विरोधियों के इरादे नाकाम हो गए हैं। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोरोना से निपटने की दिशा में उन्होंने जो भी कार्य किए हैं, वो सब भविष्य में भी जारी रहेगा।

बाबा रामदेव ने जानकारी दी कि गिलोय, अश्वगंधा तुलसी की सुनिश्चित मात्रा लेकर कोरोनिल तैयार की गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि दालचीनी और अन्य से श्वासारी वटी तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि सब आधुनिक विज्ञान की प्रक्रिया के तहत हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए कई तरह के अलग-अलग लाइसेंस प्राप्त करने पड़े हैं, जिसके लिए यूनानी और आयुर्वेद मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है।

कोरोनिल पर बाबा रामदेव की ताज़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस (साभार: जी हिंदुस्तान)

बाबा रामदेव कोरोनिल को लेकर अपने खिलाफ हुए कई सारे FIR से भी व्यथित दिखे। उन्होंने पूछा कि क्या हिंदुस्तान में योग के लिए काम करना गुनाह है? उन्होंने अगला सवाल दागा कि क्या सिर्फ कोट और टाई पहनने वाले ही रिसर्च करने के हकदार हैं, धोती वाले नहीं कर सकते? बता दें कि वामपंथियों ने बाबा रामदेव व ‘पता जाली आयुर्वेद’ के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान चला रखा है। इस पर उन्होंने कहा:

मेरे खिलाफ कई FIR दर्ज कराई गई। दवा बनाकर क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया है? अगर आप सत्कार नहीं कर सकते तो कम से कम तिरस्कार तो मत कीजिए। अभी तो हमने एक कोरोना के बारे में क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल का डाटा देश के सामने रखा तो एक तूफान सा उठ गया। सारे के सारे ड्रग माफिया, मल्टीनेशनल कंपनी माफिया, भारतीय और भारत विरोधी ताकतों की जड़ें हिल गईं। जिस तरह से देशद्रोहियों के विरुद्ध मुक़दमे दर्ज होते हैं, ठीक उसी तरह मुकदमे दर्ज कराए गए। ये मानसिकता हमे कहाँ लेकर जाएगी? मैं और आचार्य बालकृष्ण पिछले 35 वर्षो से साथ मिल कर काम कर रहे है। हम दोनों सामान्य परिवार से आते हैं, इसीलिए कुछ लोगो को मिर्ची लगती है।”

बाबा रामदेव ने एक के बाद एक तर्क देकर दुष्प्रचार फैलाने वालों की बोलती बंद की। योगगुरु ने कहा कि उन्होंने पिछले 3 दशक से कई लोगों को निरोग बनने का प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर यह बात भी फैला दी गई थी कि एक हफ्ते में बाबा जेल जाने वाले हैं। बकौल बाबा रामदेव, उनकी जाति और धर्म को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। उन्होंने कहा कि ‘पतंजलि आयुर्वेद’ ने कोरोनिल दवा से जुड़ी पूरी रिसर्च आयुष मंत्रालय को सबमिट कर दी थी, जिसे कोई भी देख सकता है।

बाबा रामदेव ने जानकारी दी कि उनकी संस्था ने योग एवं आयुर्वेद पर 10 हज़ार करोड़ का ढाँचा तैयार किया है। साथ ही बताया कि सारे रिसर्च पैरामीटर के अनुरूप ही किए गए हैं। बकौल बाबा रामदेव, क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया कि चीजें कंट्रोल हो रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि जिन्हें 6 लेवल तक बीमारी बढ़ गई थी, वो लेवल एक-दो तक आ गए। उन्होंने पूछा कि क्या कुछ लोगों ने रिसर्च का ठेका ले रखा है?

इधर पतंजलि द्वारा निर्मित कोरोनिल को आयुष मंत्रालय ने बतौर इम्युनिटी बूस्टर मंगलवार (जून 30, 2020) को अप्रूव करते हुए उन्हें लाइसेंस दे दिया। हालाँकि मंत्रालय ने पतंजलि को यह स्पष्ट किया कि वह कोरोनिल को कोरोना वायरस का उपचार बताकर नहीं बेच सकते। मंत्रालय ने यह भी कहा कि बाबा रामदेव की दिव्य योग फार्मेसी कोरोनिल की पैकेजिंग पर कोरोना का उल्लेख कहीं भी नहीं कर सकती और न ही उससे संबंधित चित्र छाप सकती है।