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‘आरोप लगाने से पहले 1962 को याद करें’: राहुल गाँधी पर शरद पवार का तीखा हमला, कहा- चीन पर राजनीति ठीक नहीं

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए शनिवार (जून 27, 2020) को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाते समय यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था।

शरद पवार का इशारा कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर था, जो गलवान घाटी में चीन के साथ लद्दाख सीमा पर चल रहे गतिरोध को लेकर केंद्र पर हमला कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शरद पवार ने यह बयान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए चीनी आक्रमण के सामने आत्मसमर्पण करने के आरोप के सम्बन्ध में दिया।

कॉन्ग्रेस पार्टी अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद से केंद्र पर तंज कर रही है। उनका कहना है कि पीएम मोदी स्पष्ट करें कि चीन ने लद्दाख में भारत में घुसपैठ की है या नहीं। हालाँकि, पीएम मोदी इस सम्बन्ध में पहले ही आधिकारिक रूप से कह चुके हैं कि चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ नहीं की और हमारी सेना ने उन्हें मुँहतोड़ जवाब दिया।

इस पर राकांपा (NCP) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि 1962 के युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब पड़ोसी देश ने भारतीय भूमि के बड़े हिस्से पर दावा किया है।

उन्होंने कहा- “हम यह नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था जब चीन ने भारत के क्षेत्र के 45,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। ये आरोप लगाते समय, किसी को यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था। यह राष्ट्रीय हित का मुद्दा है और किसी को इस पर राजनीति में नहीं करनी चाहिए।”

गौरतलब है कि शरद पवार की राकांपा (NCP) शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार में कॉन्ग्रेस के साथ उनकी सहयोगी पार्टी है। अक्साई चिन क्षेत्र के विषय में बात करते हुए राकांपा प्रमुख ने यह भी कहा कि गलवान घाटी में गतिरोध के लिए केंद्र को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा – “जब भी चीनी सैनिकों ने भारतीय जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की, हमारे सैनिकों ने चीनी सेना के जवानों को पीछे धकेलने का प्रयास किया है। यह कहना कि यह किसी एक की असफलता है या किसी रक्षा मंत्री की विफलता है, सही नहीं है। अगर हमारी सेना अलर्ट पर नहीं होती, तो हमें चीनी दावे की जानकारी नहीं होती।”

पवार ने भारत और चीन के बीच समझौते का हवाला देते हुए बताया कि दोनों राष्ट्रों ने एलएसी पर बंदूक का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया था।

उल्लेखनीय है कि गत 15 जून को भारत-चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। जिसके बाद से राहुल गाँधी निरंतर भारती सेना के नाम पर इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं।

पवार ने सर्वदलीय बैठक में भी दिया था केंद्र का साथ

गलवान घाटी में चल रहे गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट कहा था कि सीमा पर सैनिक हथियार के साथ जाते हैं या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय संधि से तय होता है और सियासी दलों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दरअसल, शरद पवार कॉन्ग्रेस की ही सरकार में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के समय रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वे 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार शुरू हुए शांति प्रयासों के अगुआ भी रहे हैं। रक्षा मंत्री के रूप में 1993 में दोनों देशों के बीच पीस एंड ट्रंक्विलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने चीन भी वही गए थे।

हरे रंग का कुर्ता, बाथरोब के टुकड़े और बिखरी पड़ी आलमारी: सामने आई सुशांत के मौत की डिटेल्स, परिवार का बयान

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में जाँच के बाद कई और चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आत्महत्या वाली जगह पर पुलिस को बाथरोब के टुकड़े भी मिले हैं। पुलिस ने शक जताया है कि शायद उन्होंने आत्महत्या के पहले बाथरूम के बाथरोब को इस्तेमाल किया था लेकिन वो टूट गया, जिसके टुकड़े वहाँ पड़े मिले। इससे निष्कर्ष निकलता है कि उन्होंने दो बार में आत्महत्या की।

पहली बार में वो कामयाब नहीं हुए थे। न्यूज़ 18 की ख़बर के अनुसार, पुलिस को सुशांत सिंह राजपूत की आलमारी में कपड़े बिखरे पड़े हुए मिले। इससे अंदेशा जताया गया है कि बाथरोब के टूट जाने पर उन्होंने अपनी आलमारी में से हरे रंग का एक कुर्ता निकाला और उसी को रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया। जब तक पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, तब तक सुशांत की बहन व अन्य लोगों ने फंदे को काट कर बॉडी नीचे उतार ली थी।

फ़िलहाल इस हरे रंग के कुर्ते को फॉरेंसिक लैब में जाँच के लिए भेजा गया है। जाँच में ये पता लगाया जाएगा कि ये कुर्ता किसी एक व्यक्ति का भार उठाने की क्षमता रखता भी है या नहीं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में लोगों द्वारा तरह-तरह के सवाल उठाते हुए सीबीआई जाँच की माँग की जा रही है। उधर परिवार ने बयान जारी कर के कई अहम घोषणाएँ की है और अपनी बात सामने रखी है।

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने जारी किया बयान

परिवार ने कहा है कि दुनिया के सुशांत सिंह राजपूत परिवार के लिए गुलशन की तरह थे। उन्हें खुले विचारों वाला, बातूनी, और अविश्वसनीय ढंग से प्रतिभाशाली बताया गया है। परिवार ने ‘ राजपूत फाउंडेशन’ की स्थापना की घोषणा की है, जिसमें सुशांत के दिल के क़रीबी क्षेत्रों सिनेमा, विज्ञान और खेल में प्रतिभावान युवाओं को मौका दिया जाएगा और उनका समर्थन किया जाएगा। परिवार ने कहा है कि उनकी लिगेसी और यादों को सजोने के लिए ऐसा किया जाएगा।

साथ ही पटना के राजीव नगर स्थित उनके घर को एक मेमोरियल में तब्दील कर दिया जाएगा, जहाँ सुशांत ने अपने बचपन के दिन गुजारे थे। हजारों किताबें, टेलिस्कोप और फ्लाइट स्टिमुलेटर सहित सुशांत की अन्य व्यक्तिगत चीजों को उनके फैंस के देखने के लिए वहाँ रखा जाएगा। साथ ही परिवार फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को भी मेंटेन करेंगे, ताकि उनकी यादों को ज़िंदा रखा जा सके।

परिवार ने कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत अपने हर एक फैन को प्यार करते थे, उन्हें सम्मान देते थे। परिवार ने कहा कि उनके जाने से एक स्थाई शून्य पैदा हो गया है जो परिवार में हमेशा रहेगा। साथ ही विज्ञान सम्बन्धी उनकी बातों को भी याद किया गया है। परिवार ने कहा कि वो लोग ये स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि वो सुशांत की हँसी फिर नहीं सुन पाएँगे। उन्होंने कहा कि सुशांत ने बिना किसी दायरे के सपने देखे और और शेर की तरह उन सपनों का पीछा किया।

सुशांत की आत्महत्या पर कंगना ने कहा था कि बॉलीवुड के लिए सुशांत ने इतनी अच्छी फिल्में कीं। मगर उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने ‘काय पो छे’ से डेब्यू किया। उन्हें डेब्यू तक का अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने 6-7 साल के अंतराल में केदारनाथ, धोनी और छिछोरे जैसी अच्छी फिल्में बनाईं। मगर, फिर भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला। कोई सराहना नहीं मिली। वहीं, गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिल जाते हैं।

फिल्म निर्देशक अभिषेक कपूर ने खुलासा किया है कि ‘केदारनाथ’ की रिलीज के बाद मीडिया ने सारा अली ख़ान को तो सिर-आँखों पर बिठा लिया था, लेकिन सुशांत सिंह राजपूत को नकार दिया था, जिससे वो बुझे-बुझे से रहते थे। इस फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक ही थे। उन्होंने ही सुशांत की लॉचिंग फिल्म ‘काई पो चे’ को भी डायरेक्ट किया था। कपूर ने बताया कि मीडिया द्वारा इस तरह का भेदभाव किए जाने के कारण सुशांत अंदर से बुझे-बुझे से रहते थे। बिहार में सलमान खान से भी लोग आक्रोशित हैं।

पदोन्नत होकर एडिशनल DCP बने अनुज कुमार, दिल्ली दंगों में जान पर खेल कर बचाई थी पुलिसकर्मियों की जान

पुलिस ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को इस बात की जानकारी दी कि पूर्वोत्तर दिल्ली के पूर्व एसीपी अनुज कुमार, जो गत फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी के पूर्वोत्तर हिस्से में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए थे, को पदोन्नत किया गया और उन्हें दक्षिण दिल्ली के अतिरिक्त डीसीपी के रूप में नियुक्त किया गया है। गत 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा के में डीसीपी शाहदरा अमित शर्मा और अनुज कुमार सहित कम से कम 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

इस हिंसा में एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल सहित कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 200 लोग घायल हो गए। अनुज कुमार ने कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी उनसे साझा की थी।

दिल्ली पुलिस के ट्रांसफर ऑर्डर की प्रति

उन्होंने उस दिन की भयावह स्थिति के बारे में बताया कि, किस तरह हिंसक मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला किया था और किन हालातों में उन्होंने डीसीपी अमित शर्मा सहित अपने सहयोगियों को बचाया था।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, एसीपी ने बताया कि गत 24 फरवरी को, शाहदरा डीसीपी अमित शर्मा चाँदबाग में हिंसक भीड़ के बीच वजीराबाद रोड के डिवाइडर के पास घायल होकर बेहोश हो गए थे। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वे डीसीपी को लेकर यमुना विहार की तरफ भागे।

उन्होंने आगे बताया कि भीड़ की तरफ से लगातार उन पर पत्थरबाजी हो रही थी। जब उनकी टीम शांति से भीड़ के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रही थी और उन्हें मुख्य सड़क के बजाय सर्विस रोड तक सीमित रहने के लिए कहा जा रहा था, उसी दौरान ऐसी अफवाह फैली कि पुलिस की गोलीबारी में कुछ महिलाएँ और बच्चे घायल हो गए। जिस कारण लोग भड़क गए और हिंसक हो गए।

इस वीभत्स घटना को याद करते हुए अनुज शर्मा ने बताया कि वहाँ कुल मिलाकर लगभग 250 की संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जबकि पथराव कर रही हिंसक भीड़ में लगभग 25,000 से 30,000 लोग शामिल थे।

उन्होंने कहा- “हम लगातार वहाँ मौजूद महिलाओं और भीड़ को मनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और ईंटें उठाकर अचानक पथराव शुरू कर दिया और स्थिति बेकाबू हो गई।” एसीपी ने बताया कि पुलिस ने भीड़ को अलग करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे लेकिन प्रदर्शनकारियों के बीच पर्याप्त दूरी होने के कारण यह कोशिश नाकाम रही।

हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की इन दंगों के दौरान ही फरवरी 24, 2020 को हत्या हो गई थी। जब वे अपने सीनियर्स के साथ गश्त पर थे तभी उन्हें दंगाइयों ने गोली मार दी थी। वहीं, पुलिस ने अपनी चार्जशीट में यह आरोप लगाया है कि 22 फरवरी को 45 लोगों के एक समूह ने एक घर के बेसमेंट में एक बैठक की थी। उसी जगह दंगों की पूरी साजिश रची गई।

साजिश के तहत 23 फरवरी को दंगाइयों ने वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को घर के अंदर रहने के लिए कहा था। क्योंकि उन्होंने उस दिन अपनी योजना के अनुसार सड़कों पर दंगा भड़काना था।

फ्रीलांसर एक्टिविस्ट स्वरा भास्कर का ‘रसभरी’ अवतार: सॉफ्ट पोर्न को लाल सलामी

Ullu TV और ALTBalaji, जिन्हें हम सस्ता PornHub भी कह सकते हैं, OTT प्लेटफॉर्म्स की दुनिया में एक अलग ही किस्म की क्रांति लेकर आए हैं। इसी क्रांति में अपनी लाल सलामी लगाने को Amazon Prime Video भी उत्सुक दिखता है।

पाताल लोक के प्रोपेगेंडा से भरपूर स्क्रीनप्ले में कुछ संवाद एवं पात्र डालने के बाद Prime Video ने सोचा कि व्हाई शुड Ullu TV ऐंड ALTBalaji हैव ऑल द फन। इसी सोच और पार्ट टाइम अदाकारा एवं फुल टाइम एक्टिविस्ट स्वरा भास्कर के साथ उसने एक कथित वेब सीरीज बना डाली है। इसका नाम है, रसभरी।

इसके भी प्री प्रोडक्शन की विधि एकदम वही है जो पाताल लोक की थी। वहॉं प्रोपेगेंडा के साथ संवाद और पात्र परोसे गए थे, यहॉं सॉफ्ट पोर्न के साथ संवाद और पात्र उतारे गए हैं।

यदि आप यूट्यूब पर जाकर रसभरी का ट्रेलर देखें (जिसमें लाइक से ज्यादा डिसलाइक्स का अनुपात चल रहा है), जो कि आप तभी करेंगे अगर आपको अपने दिन के 2GB डाटा दिमाग एवं आँखों से लगाव न हो, तो आप पाएँगे कि कहानी मेरठ शहर को मस्तिष्क में रखकर गढ़ी गई है। जैसे अब तक हर तरीके का अपराध मेरठ, मुज़फ्फरनगर, गाज़ियाबाद, अलीगढ़ या यूँ कहें कि उत्तर प्रदेश एवं बिहार में ही होता था, अब से सॉफ्ट पोर्न भी इन्हीं शहरों या प्रदेशों को दिमाग में रखकर गढ़ी जाया करेंगी।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरठ वह शहर है जहॉं से मंगल पांडे ने 1857 में स्वतंत्रता का पहला बिगुल बजाया था। आज के समय की बात करें तो यह शहर भारत के सबसे बड़े खेल समानों के बाज़ारों में से एक है। राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्रिकेट बैट्स से लेकर हॉकी स्टिक्स एवं टेनिस रैकेट्स की आपूर्ति करता है।

इसी तरह अलीगढ़ के हार्डवेयर हब और गाज़ियाबाद के एजुकेशन हब होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको कोई फ़िल्म या वेब सीरीज़ इसके इर्द-गिर्द कहानी लिखती नहीं मिलेंगी। OTT प्लेटफॉर्म्स और बॉलीवुड की नज़र में यहॉं की छवि सिर्फ यह है कि यहॉं के छात्र मध्य उम्र की अध्यापिकाओं के वक्ष स्थल एवं स्तनों को घूरते हैं।

वैसे सारी गलती इन प्लेटफॉर्म्स की भी नहीं है। वह वही दिखाते हैं जो जनता देखना चाहती है। जब आम लोग इस तरह के वेब शोज़ और फिल्मों को देखेंगे, प्रचलित करेंगे, इस तरह की घिनौनी सामग्री के लिए पसीना बहा कर कमाया हुआ पैसा खर्च करेंगे, उनके बारे में बातें करेंगे तो उन्हें इसके लिए भी तैयार रहना पड़ेगा कि उनके बच्चों, छात्रों, शहर एवं प्रदेश की छवि धूमिल होना निश्चित है।

उन्हें उसी मेरठ से आए भुवनेश्वर कुमार, प्रवीण कुमार और सुदीप त्यागी जैसों की असली कहानियॉं और संघर्ष नहीं दिखेंगे। वे आप ही के किशोर बच्चों को आपके आगे चरित्रहीन और कुत्सित मानसिकता से भरपूर दिखाकर पेश करेंगे। आप भी चटकारे लेकर यही सोच कर देख लेंगे कि ‘वाह शहर का नाम आया है फ़िल्म में, ये वाली तो ज़रूर देखेंगे’।

अगर सामाजिक स्तर से हट कर इस वेब सीरीज़ के बारे में बात करें तो ज़बरदस्ती एवं बिना मतलब का हवा से साड़ी के पल्लू का गिर जाना, छात्रों का बड़ी-बड़ी आँखें फाड़ कर अध्यापिका को घूरना, चलते हुए पीछे से अध्यापिका के वक्ष स्थल के शॉट्स, छाती के शॉट्स, होठ एवं कमर के शॉट्स से ज़्यादा इस सीरीज़ में कुछ खास नहीं है। सिनेमा की थोड़ी सी जानकारी रखने वाले लोग समझ जाएँगे कि यह हाई डेफिनेशन में में Red या Arri cams के साथ शूट हुई और अच्छी कलर ग्रेडिंग के साथ परोसी गई कांति शाह की उन 15-20 साल पुरानी घटिया C- ग्रेड फिल्मों से ज़्यादा और कुछ नहीं है।

अब सवाल यह है कि ऐसे समय में जब इंडस्ट्री में अच्छा काम भी हो रहा है एवं कुछ लोग अच्छे सिनेमा एवं कलाकारों को भी पहचान रहे हैं, वेब सीरीज़ की ही बात करें तो Pitchers एवं Permanent roommates से शुरू हुआ अच्छी लिखाई, सामग्री और अभिनय का सिलसिला ये मेरी फैमिली, कोटा फैक्ट्री और पंचायत तक जाती है, तो इस समय में इस घटिया वेब सीरीज़ की इतनी चर्चा क्यों हो रही है।

इस बात का जवाब है मार्केटिंग और एडवर्टाइजमेंट। लेकिन इसी क्रम में जब महिला सशक्तिकरण के कथित ठेकेदार और हर छोटी से छोटी बात, टिप्पणी या गाने को महिला के सम्मान से जोड़ देने वाले लोग इस सीरीज़ का ट्विटर पर प्रचार करते देखे गए तो इनके हिप्पोक्रेसी का चोला उतर गया।

जेएनयू से पढ़ी और महिला सशक्तिकरण की कथित ध्वजवाहक स्वरा भास्कर जब इस तरह की फ़ूहड़ सीरीज में महिलाओं को भोग की वस्तु की तरह पेश किए जाने पर अपनी लाल सलामी देती हैं, तो इस बात पर चर्चा करना और जरूरी हो जाता है। स्वरा ने जब रसभरी का ट्रेलर ट्विटर पर शेयर किया तो जवाब में उन्हीं के फैंस (जिनको वह इस आलोचना के बाद IT cell की उपाधि प्रदान कर देंगी) ने अपनी टिप्पणियों से निराशा जाहिर कर दी।

वैसे एक विशेष विचारधारा के लोगों में यह कुछ नया नहीं है, इनके साथी कामरेड अनुराग कश्यप यह कई सालों से करते आ रहे हैं। उनकी फिल्म या सीरीज़ की आलोचना करने वालों को वह अक्सर ‘मूर्ख’ एवं ‘आर्ट का टेस्ट’ ना रखने वालों जैसी उपाधि दे देते हैं।

मज़े की बात यह भी थी की एक विशेष विचारधारा रखने वाले सारे बॉलीवुड सहकर्मी जब इस सीरीज़ का प्रचार करने साथ में आए और उन्होंने ‘साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना’ का उदाहरण दिया तो मीम के तौर पर उसका एक बहुत मज़ेदार चित्रण देखने को मिला;

चित्र में दिखाए गए पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी जीवित एवं मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है

स्वरा के ट्वीट करते ही आपनी सुपरहिट ‘एक्शन-थ्रिलर’ फिल्म दस के सुपरहिट गाने पर अर्धनग्न अवस्था में महिलाओं को नचाने के बाद फिल्म थप्पड़ में अपने नाम के पीछे माँ का नाम लगाकर महिला सशक्तिकरण का संदेश देने वाले वाले कॉमरेड अनुभव सिन्हा का ट्वीट आया कि वह इस सीरीज़ को देखेंगे और उसके बाद स्वरा को फ़ोन करेंगे।

रांझणा के कुंदन के पुराने मित्र, ऑन स्क्रीन पंडित और ऑफ स्क्रीन भूतपूर्व AMU छात्र मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब ने भी ट्रेलर की तारीफों के पुल बॉंधते हुए ट्वीट किया और कुछ अलग शब्दों के माध्यम से स्वरा को ‘you go girl’ जैसा ही कुछ कहा।

इन सब के ट्वीट्स से प्रतीत होता है कि ये स्वरा भास्कर के वैसे मित्र हैं, जो नाई द्वारा बाल पूरे तरीके से बिगाड़ देने के बाद भी कहता है- यार कसम से बहुत सही लग रहा है, एकदम ब्रेंडन फ्रेजर। क्योंकि स्वरा के फैंस की ट्रेलर और सीरीज़ पर टिप्पणियों को देखकर कोई भी यह कह सकता है कि उन्होंने वेब सीरीज़ कर रुबिका लियाकत से CAA पर बहस करने के बाद दूसरी सबसे बड़ी भूल की है।

अब स्वरा चाहें तो हर बार की तरह टिप्पणी करने वालों को IT cell या संघी कहकर संबोधित कर सकती हैं। लेकिन, सच्चाई यही है कि इस सीरीज़ में देखने लायक सामग्री उतनी ही है, जितनी कि स्वरा की पिछली फिल्म वीरे दी वेडिंग में थी और प्रतिक्रिया भी लगभग वैसे ही मिल रही है।

रसभरी के एक्टिंग करियर का हाल देख तो स्वरा भास्कर के मित्र अनुराग कश्यप की ही एक फिल्म का संवाद याद आ रहा है;

चित्र में दिखाए गए पात्र बिल्कुल काल्पनिक नहीं हैं तथा इनका जीवित एवं मृत व्यक्तियों सेे संबंध भी है!

सूफी संत को ‘लूटेरा चिश्ती’ कहने के मामले में जर्नलिस्ट अमीश देवगन को राहत, SC ने जाँच और कार्रवाई पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में न्यूज 18 इंडिया के पत्रकार और एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर में जाँच और कार्रवाई करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही शुक्रवार (जून 26, 2020) को सुनावाई के दौरान कोर्ट ने राज्य व शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए आठ जुलाई तक जवाब माँगा है।

कोर्ट में अमीश देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने शो के दौरान अनजाने में गलती की थी। जिसके लिए उन्होंने बाद में सार्वजनिक तौर पर माफी भी माँगी थी। लेकिन पत्रकार के खिलाफ ‘जुबान फिसलने’ के कारण एफआईआर दर्ज करना अन्यायपूर्ण है और उत्पीड़न के दायरे में है।

लूथरा ने कहा कि अगर ऐसा होने लगे, जहाँ लोगों को जुबान फिसलने के कारण ऐसी समस्या का सामना करना पड़े तो क्या होगा? लोग गलती करते हैं। उन्होंने माफी भी माँगी है।

उन्होंने कहा कि देवगन के खिलाफ राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और अगर एफआईआर के सिलसिले में उन्हें देश भर में अलग-अलग जगहों पर पेश होने के लिए कहा जाता है, तो यह उनके लिए गंभीर पूर्वग्रह पैदा करेगा। लूथरा ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को भी धमकाया और परेशान किया जा रहा है।

महाराष्ट्र के दो शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा कि देवगन ने अपने शो के दौरान एक बार से ज्यादा “लुटेरा चिश्ती” शब्द का इस्तेमाल किया।

अमीश के खिलाफ शिकायतों और देश भर में एक के बाद एक एफआईआर दर्ज होने पर सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ दायर सभी एफआईआर पर रोक लगाने और उन्हें खारिज करने की माँग करते हुए एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।

गौरतलब है कि 15 जून को अपने शो ‘आर पार’ पर पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में पीआईएल के बारे में एक बहस की मेजबानी करते हुए, अमीश ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के रूप में जाना जाता है, उन्हें “हमलावर” और “लुटेरा” कहकर बुलाया था।

इसके बाद, एंकर के खिलाफ देश भर में कई पुलिस शिकायतें और एफआईआर दर्ज की गईं। विवादास्पद इस्लामिक संगठन रज़ा अकादमी, जिसे आज़ाद मैदान दंगों में शामिल होने के लिए जाना जाता है, ने भी अमीश देवगन के खिलाफ धारा 295 ए, 153 ए, 34, 120 बी और 505 (2) के तहत FIR दर्ज करवाई।

हालाँकि, अमीश देवगन ने सूफी संत को “लुटेरा” के रूप में संदर्भित करने के लिए भी माफी माँगी थी और इसे “अनजाने में हुई गलती बताया था। उन्होंने सार्वजनिक रुप से माफी माँगते हुए ट्विटर पर लिखा था, “मेरे एक डिबेट में मैंने अनजाने में खिलजी को चिश्ती कह दिया। इस गलती के लिए मैं तहेदिल से माफी माँगता हूँ। इससे सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती, जिनका मैं सम्मान करता हूँ, उनके अनुयायियों को दुख हो सकता है। मैंने इस दरगाह पर दुआएँ माँगी हैं। मुझे अपनी गलती पर खेद है।“

मगर इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर करवाए गए और कट्टरपंथियों ने तो उन्हें हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या की बात याद दिलाई।

काम केंद्र का, क्रेडिट खाने की कोशिश केजरीवाल की: दिल्ली में 10000 बेड्स के कोविड अस्पताल को लेकर AAP की राजनीति

जहाँ एक तरफ दिल्ली में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कह रहे हैं कि राजधानी में हालात काबू में है। इतना ही नहीं, जब केजरीवाल की AAP सरकार की नाकामी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मैदान में उतरे और उन्होंने कोरोना से निपटने की तैयारियों का जिम्मा सम्भाला, तब आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्यों का क्रेडिट खाने के मूड में भी है।

आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर के कहा कि राधास्वामी सत्संग ब्यास सेंटर में कोविड केयर सेंटर की स्थापना की गई है, जहाँ 10,000 बेड्स में से 2000 बेड्स को सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही पार्टी ने ये भी दावा किया कि ये दुनिया का सबसे बड़ा कोविड केयर फैसिलिटी है जिसे अरविन्द केजरीवाल सरकार ने तैयार किया है। यहाँ भी पार्टी केंद्रीय गृह मंत्रालय का क्रेडिट खाने के प्रयास से बाज नहीं आई।

भाजपा सरकार के काम की क्रेडिट लेना तो दूर की बात थी, आप नेता संजय सिंह ने तो एक क़दम और आगे बढ़ कर केंद्र सरकार द्वारा किए गए काम को लेकर केंद्र को ही कोसना शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि जहाँ लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्मृति में जहाँ भाजपा ने सबसे ऊँची प्रतिमा बनवाई, वहीं आप सरकार ने सबसे बड़ा अस्पताल बनवाया। जबकि सच्चाई ये है कि दोनों काम केंद्र सरकार ने ही कराए हैं।

बता दें कि जिस हॉस्पिटल की बात की जा रही है, वहाँ ब्यास का शेड पहले से ही तैयार था। ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो ने कई दिनों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि अभी ब्यास में अनुयायियों का कोई आवागमन नहीं हो रहा है, ऐसे में उसे कोरोना से निपटने के लिए समर्पित किया जा सकता है। इसमें केजरीवाल सरकार की कोई भूमिका नहीं थी लेकिन अभी वो क्रेडिट खा रहे हैं।

इससे पहले अमित शाह ने केजरीवाल को ट्वीट कर पहले ही कहा था कि ये पहले ही बैठक में निर्णय लिया जा चुका है कि 10,000 बेड्स का अस्पताल बनवाया जाएगा। जब सीएम केजरीवाल ने उन्हें अस्पताल के इंस्पेक्शन के लिए आमंत्रित किया था, तब शाह ने उन्हें जवाब देते हुए ये बात लिखी थी। यहाँ आईटीबीपी और सेना के डॉक्टरों की सेवाएँ भी ली जाएँगी। पूरा काम शाह की निगरानी में ही हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईटीबीपी के अनुभवी डॉक्टरों और प्रशासकों की टीम द्वारा केयर सेंटर की तैयारियाँ युद्ध स्तर पर की जा रही है। दिल्ली में बिगड़ते हालात को लेकर गृहमंत्री ने सबसे पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसके बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना वायरस की तैयारियों को देखते हुए अस्पताल का दौरा भी किया था।

केजरीवाल सरकार द्वारा टेस्टिंग बढ़ने के दावों के बाद भाजपा ने जवाब देते हुए कहा है कि दिल्ली में टेस्टिंग की संख्या मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी। साथ ही पूछा कि ‘आप’ ने इसमें क्या किया? पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में हुई भयानक स्थिति के ज़िम्मेदार सिर्फ़ ‘आप’ हैं। बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिल्ली का मोर्चा संभालना पड़ा क्योंकि ‘आप’ जनता को परेशान देखकर भी चुप बैठे रहे।

दिल्ली में बढ़ते कोरोना के आँकड़े दुनिया भर के 167 देशों से भी ज़्यादा हैं। इसके अलावा संक्रमण से हो रहीं मौतों ने भी 166 देशों को पीछे कर दिया है। ये सभी देश कम जनसंख्या वाले ही नहीं हैं। इनमें इंडोनेशिया, जापान और मिस्र जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 73,780 मामले सामने आए हैं। इनमें 26,586 एक्टिव केस हैं। 2429 लोगों की मौत हुई है। अब तक लगभग 44,765 हजार मरीज ठीक हो चुके हैं।

TikTok रखता है आईफ़ोन के ‘क्लिपबोर्ड डाटा’ पर नजर, चायनीज कम्पनी ने कहा- ऐसा एक ‘फीचर’ की वजह से होता है

चायनीज सोशल मीडिया वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप, टिकटोक लगातार विवाद का विषय रहा है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चायनीज ऐप IOS 14 (आईफ़ोन का ऑपरेटिंग सिस्टम) में एक ‘बग’ के जरिए क्लिपबोर्ड को चुपचाप एक्सेज़ कर लोगों की गोपनीय जानकारी जुटाते हुए पाया गया है।

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईफ़ोन निर्माता कंपनी एप्पल ने शुरुआत में चीनी ऐप में कमजोरियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मीडिया के हंगामे के बाद एक समाधान लेकर आया था। इस रिपोर्ट में टिकटोक उपयोगकर्ताओं को इसे अपडेट करने का आग्रह किया और यह ध्यान रखने की बात कही कि ऐप की यह अपडेट जारी होने से पहले किसी व्यक्ति के मोबाइल के क्लिपबोर्ड तक पहुँच है।

हालाँकि, सभी आरोपों को खारिज करते हुए, टिकटोक की निर्माता कंपनी ‘बाइटडांस’ ने कहा कि समस्या एक पुराने Google विज्ञापन सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) से संबंधित थी। अपने बचाव में चीनी ऐप टिकटोक ने कहा कि फोन पर क्लिपबोर्ड (जहाँ कॉपी किया गया लेख/अक्षर/शब्द सुरक्षित रहता है) का इस्तेमाल एक ‘फ़ीचर’ के कारण हुआ।

टिकटोक निर्माताओं के अनुसार यह ‘फीचर’ ऐप में दोहराव वाले स्पैम व्यवहार की पहचान करने के लिए ऐसा करता है। वहीं, फोर्ब्स ने उल्लेख किया है यह तब हो रहा है, जब कि टिकटोक ने इस ‘आक्रामक क्रियाकलाप’ को समाप्त करने की कसम खाई थी, लेकिन यह अप्रैल के अंत तक भी जारी रहा।

इमोजीपीडिया (Emojipedia) के जेरेमी बर्ज ने iOS 14 बेटा में पाया कि टिकटोक एप्लीकेशन आईफोन के क्लिपबोर्ड से जो भी टाइप करता है, उसकी प्रतिलिपि यानी कॉपी बना लेता है। उन्हें इसका पता तब लगा जब iOS 14 लगातार ‘पॉप-अप’ संदेश दिखाते हुए कह रहा था कि “टिकटॉक ने इंस्टाग्राम से जोड़ा (पेस्ट किया) है”। इसके बाद टिकटोक ने तुरंत जवाब दिया है कि वे iPhone उपयोगकर्ताओं के क्लिपबोर्ड को पढ़ना बंद कर देंगे।

IPhone ऑपरेटिंग सिस्टम में लागू नवीनतम सिक्योरिटी अपडेट iOS14, ने नोट किया कि चायनीज ऐप टिकटोक एप्लीकेशन यह जाँचता है और निगरानी करता है कि क्लिपबोर्ड पर क्या कॉपी किया गया है। जो उपयोगकर्ता iOS 14 बेटा ऐप को जाँच रहे हैं, वे देख सकते हैं कि टिकटोक जैसे ऐप लगातार क्लिपबोर्ड तक पहुँच रहे हैं, जबकि इस ऐप का उस समय उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। आईफ़ोन की निर्माता कम्पनी एप्पल के अनुसार, आप देख सकते हैं कि कोई एप्लिकेशन क्या कॉपी कर रही है, या इसकी समीक्षा कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, टिकटोक ने आश्वासन दिया कि यह समस्या ठीक हो गई है। कम्पनी ने इमेल के माध्यम से कहा- “टिकटोक को डेटा तक पहुँच नहीं मिलती है, लेकिन फिर भी हम इसे हल करने के लिए अपडेट कर रहे हैं।” हालाँकि, एप्पल के नए iOS 14 के में यह पता चला था कि चीनी ऐप अभी भी क्लिपबोर्ड संदेशों तक पहुँच रहा था, जो पहले के दावों के विपरीत था।

भारत-चीन तनाव के बीच PTI के ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग पर प्रसार भारती सख्त, करोड़ों का करार खत्म होने की संभावना

न्यूज़ एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के हालिया कवरेज से प्रसार भारती सख्त नाराज है। वह न्यूज एजेंसी को दी जाने वाली वित्तीय मदद रोकने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

ऑपइंडिया को विश्वस्त सूत्रों से प्रता चला है कि पीटीआई की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग प्रसार भारती को नागवार गुजरी है। न्यूज एजेंसी ने भारत-चीन के तनाव के बीच बीजिंग को अपने प्रोपेगेंडा का प्रचार करने के लिए मंच मुहैया करवाया था।

बता दें कि PTI को विभिन्न की फीस के रूप में प्रसार भारती से दशकों से करोड़ों रुपए प्राप्त होते रहे हैं। इस उसे भारी फायदा होता रहा है। सूत्रों के अनुसार PTI को प्रसार भारती से प्रत्येक वर्ष 9 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा PIB (प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो) से भी PTI को भारी रकम मिलती आई है। PTI की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग देख प्रसार भारती का मानना है कि इस करार के साथ आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा।

प्रसार भारती 2016-17 से ही इस करार की समीक्षा करने के पक्ष में रहा है। अब चीन के सम्बन्ध में PTI की रिपोर्टिंग के बाद समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार प्रसार भारती जल्द ही PTI को अपने निर्णय को लेकर अवगत करा देगा।

बता दें कि हाल ही में PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए।

उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।

बता दें कि गलवान में हुए संघर्ष में भले ही भारतीय सेना के जवानों की संख्या चीनियों से काफ़ी कम थी, भले ही चीनी पहले ही उचित स्थान देखकर हमले के लिए बैठे थे, भले ही चीनियों के पास जानलेवा हथियार थे, लेकिन जब बिहारी रेजिमेंट ने जवाबी कार्रवाई की तो उनके छक्के छूट गए। जवानों पर लगातार पत्थर बरस रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 3 घंटे तक चले युद्ध में  हमारे 20 जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए। हमारे कुल 100 जवान थे, जिन्होंने 350 चीनी सैनिकों को परास्त किया। उनके 43 जवान मरे।

लेकिन, PTI ने चीन को मंच देकर भारत के पक्ष को एकदम से गौण कर दिया। जबकि केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने खुलासा किया था कि भारत ने चीन के कई सैनिकों को पकड़ा था जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वीके सिंह ने गलवान घाटी संघर्ष को लेकर जानकारी दी थी कि इस झड़प में चीन के दोगुने सैनिक मारे गए थे। उन्होंने कहा था कि लेकिन चीन कभी भी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार नहीं करेगा और PTI की इंटरव्यू में भी यही हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई मौकों पर पीटीआई फेक न्यूज फैलाते पकड़ा जा चुका है। अप्रैल में उसने दावा किया था कि कोरोना संक्रमित होने के संदेह में महबूब अली की मॉब लिंचिंग कर दी गई। लेकिन, महबूब अली जिंदा निकला।

राजनीतिक मसलों पर भी न्यूज एजेंसी फेक न्यूज को हवा देती रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पीटीआई ने दावा किया था कि आप के केवल 25 फीसदी उम्मीदवारों पर ही गंभीर आपराधिक मामले हैं। असल में यह संख्या 50 फीसदी से ज्यादा थी।

अहमद पटेल के घर ₹14,500 करोड़ के फर्जीवाड़ा के बारे में पूछताछ के लिए पहुँची ED, कॉन्ग्रेस नेता ने हाजिर होने में जताई थी असमर्थता

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गाँधी के करीबी अहमद पटेल के आवास पर शनिवार (जून 27, 2020) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पूछताछ के लिए पहुँची। बताया जा रहा है कि उनसे संदेसरा बंधुओं के पीएमएलए मामले में बयान दर्ज किया किया जा रहा है। 

एजेंसी ने पटेल को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और कोविड-19 को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के कारण पूछताछ के लिए नहीं आ सकते हैं। एजेंसी के सामने हाजिर होने से एक दिन पहले कॉन्ग्रेस नेता ने ED को पत्र लिखकर कहा, “65 से ज्यादा की उम्र का हूॅं, कृपया फिलहाल माफ करें।” एजेंसी ने उसी समय कहा था कि वह पूछताछ के लिए उनके आवास पर ही आ जाएँगे। आज उनका बयान लेने के लिए ED की टीम खुद उनके घर पहुँच गई।

ED ने दावा किया है कि संदेसरा भाइयों ने भारतीय बैंको को नीरव मोदी से कहीं ज्यादा चूना लगाया है। एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि जाँच में स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड/ संदेसरा समूह और इसके मुख्य प्रमोटरों, नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा ने भारतीय बैंकों में लगभग 14,500 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया। वहीं नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक को 11,400 करोड़ रुपए का चूना लगाने का आरोप है।

आरोप है कि संदेसारा भाइयों ने अहमद पटेल के कहने पर ही दिल्ली के वसंत विहार में घर खरीदा और फिर उसे रेनोवेट करवा कर उनके दामाद इरफान सिद्दीकी को रहने के लिए दिया। ईडी ने उनके बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी से पूछताछ की थी। जिसमें दोनों ने कबूला था कि वे स्टर्लिंग बायलॉज लिमिटेड के निदेशक नितिन संदेसरा के छोटे भाई चेतन संदेसरा को जानते थे।

पिछले साल ईडी ने इस मामले की जाँच के तहत स्टर्लिंग बायोटेक की 9,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की थी। इसमें नाइजीरिया में तेल रिग, पोत, एक कारोबारी विमान और लंदन में एक आलीशान फ्लैट शामिल है।

ED के अधिकारियों ने पहले खुलासा किया था कि संदेसरा समूह के एक कर्मचारी सुनील यादव ने बताया कि सिद्दीकी और फैसल पटेल को चेतन संदेसरा द्वारा कोड नाम दिए गए थे। चेतन और गगन ने सिद्दीकी को इरफान भाई का नाम दिया था। इरफान का कोड i2 और फैसल का कोड i3 था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल का पूछताछ से बचने के लिए स्वास्थ्य का बहाना बनाना कोई नई बात नहीं है। पिछले साल भी जब पटेल को आयकर विभाग ने हवाला केस में पूछताछ के लिए बुलाया था तो उन्होंने स्वास्थ्य का हवाला दिया था। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यालय में हवाला द्वारा 400 करोड़ रुपए नकद पहुँचने का आरोप था, लेकिन उस वक्त भी कॉन्ग्रेस नेता अपनी खराब सेहत का बहाना बनाकर पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। उस समय उन्होंने साँस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी और खुद को फरीदाबाद, हरियाणा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती करवा लिया था। 

दिलबर नेगी को आग में झोंकने वाले दंगाइयों का सरगना निकला डॉ. अनवर: दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से खुलासा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान 20 वर्षीय दिलबर नेगी की हत्या मामले में दाखिल चार्जशीट से नया खुलासा हुआ है। इसमें मुस्तफाबाद में हुए दंगों का मास्टरमाइंड डॉक्टर एमए अनवर को भी बताया गया है।

पीड़ितों के इलाज का दावा करने वाला डॉक्टर अनवर, न्यू मुस्तफाबाद स्थित अल हिंद हॉस्पिटल का मालिक है। अल हिंद हॉस्पिटल फारुकिया मस्जिद और उस मिठाई दुकान से एक किलोमीटर दूर है, जहाँ दिलबर नेगी काम करता था।

आरोप-पत्र में कहा गया है कि 15 जनवरी के बाद से ही फारुकिया मस्जिद से कई वक्ताओं ने लोगों को उकसाना शुरू कर दिया था। यहाँ पर अवैध रूप से CAA और NRC का विरोध चल रहा था, जिसमें अलग-अलग तारीख में भाषण देकर लोगों को यह कहा जाता था कि NRC लागू होने के बाद उन्हें नागरिकता नहीं दी जाएगी, उन्हें डिटेंशन कैंप में डाल दिया जाएगा। 

साथ ही इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि समुदाय विशेष को केंद्र सरकार के खिलाफ उकसाया गया। 23 फरवरी को हिंसा में भाग लेने वालों और हिंसा के लिए उकसाने वालों के खिलाफ दयालपुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।

आरोप-पत्र के अनुसार फारुकिया मस्जिद में होने वाले विरोध-प्रदर्शन के आयोजक अरशद प्रधान और अल हिन्द हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर एमए अनवर थे। हालाँकि इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में अनवर का कहना है कि चार्जशीट में अपना नाम होने की उसे जानकारी नहीं है, क्योंकि वे काफी व्यस्त हैं। उसका दावा है कि उसे फँसाया जा रहा है।

पुलिस ने आरोप-पत्र में 12 लोगों को आरोपित बनाया है। ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं। इनकी पहचान मोहम्मद शाहनवाज उर्फ शानू, मोहम्मद फैजल, आजाद, अशरफ अली, राशिद उर्फ मोनू, शाहरुख, मोहम्मद शोएब, परवेज, राशिद उर्फ राजा, मोहम्मद ताहिर, सलमान और सोनू सैफी के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि दिलबर अनिल स्वीट हाउस में काम करते थे। दंगाइयों की भीड़ ने उन्हें तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था।

उत्तराखंड के रहने वाले नेगी के करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया था कि 23 फरवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। उनके साथ बिल्डिंग में उनके दो अन्य साथी भी मौजूद थे, लेकिन वो वहाँ से भाग निकलने में कामयाब रहे।

26 फरवरी को जब दुकान मालिक अनिल पाल पुलिस के साथ अपनी दुकान का हाल जानने पहुँचे तो उन्हें मृतक नेगी का शरीर दूसरी मंजिल पर सीढ़ी के पास मिला।

ऑपइंडिया से बातचीत में दिलबर नेगी के छोटे भाई देवेंद्र ने बताया था कि दिलबर का सेना में जाने की सपना था। आखिरी बार जब फ़ौज की भर्ती आई थी तो दिलबर दौड़ में सेलेक्ट भी हो गया था, लेकिन लम्बाई कम होने के कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा था।