तूतीकोरिन में पुलिस हिरासत में एक पिता और बेटे की की मौत ने तमिलनाडु में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस ने तूतीकोरिन में पी जयराज (59) और उनके बेटे जे बेनिक्स (Benicks)(फ़ेनिक्स- Fenix) (31) को निर्धारित समय के बाद भी मोबाइल की दुकान खोले रखने पर 19 जून को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उनकी हिरासत में ही मृत्यु हो गई। आरोप है कि उन्हें हिरासत में यातना दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
चेन्नई स्थित समाचार वेबसाइट ‘द फेडरल’ ने उन चश्मदीदों का जिक्र किया है, जिन्होंने यह दावा किया था कि दोनों जेल में रहते हुए यौन उत्पीड़न के शिकार हुए थे। मृतक जे फ़ेनिक्स के एक दोस्त राजकुमार ने कहा- “20 जून को सुबह 7 से 12 बजे के बीच, पिता और पुत्र ने कम से कम सात लुंगियाँ (शरीर के निचले भाग में पहना जाने वाला कपड़ा) बदली थीं, क्योंकि वे अपने मलाशय से खून बहने के कारण गीले हो गए थे।”
बेनिक्स के मित्र ने यह भी कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे दोनों को सतकुलम के सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए एक वाहन की व्यवस्था करें। फिर, पिता-पुत्र ने स्पष्ट रूप से अपने मलाशय में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें काफी खून बह रहा था और उनकी लुंगी को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बदलना पड़ा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तारी के चार दिन बाद दोनों पिता-पुत्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि तमिलनाडु पुलिस ने पिता और बेटे की हिरासत में खूब पिटाई की थी और पुलिस द्वारा की गई मारपीट और हिंसा के निशान मृतकों के शरीर पर थे। घर वालों की माँग है कि आरोपित पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
मृतक जे बेनिक्स (फ़ेनिक्स) के मित्र राजकुमार ने कहा कि पुलिस उसे जयराज समझकर 19 जून को स्टेशन पर ले गई। इसके बाद बेनिक्स ने स्टेशन पर जाकर पूछताछ की। राजकुमार के अनुसार, “जब उसने अपने पिता के खिलाफ पुलिस की बर्बरता पर सवाल उठाया, तो पुलिसकर्मियों ने उसे उसके कॉलर से पकड़ लिया और उसे दीवार की ओर धकेल दिया। सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल सहित कम से कम पाँच पुलिसकर्मियों ने उसे हमारे सामने बुरी तरह से पीटा।”
सोशल मीडिया पर लोगों का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने पिता और पुत्र के मलद्वार में लाठियाँ डालकर घुमाया और उन्हें यातनाएँ दीं। यह भी दावा किया जाता है कि पुलिस हिरासत में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई जिससे पिता-पुत्र के जननांग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।
इस वीडियो में बताया गया है कि पहले पुलिस द्वारा दोनों के घुटनों को लाठियों से तोड़ा गया। उन्हें पूरी तरह नग्न कर के दीवारों पर रगड़ा गया। उन्हें यातना देने के लिए ऐसी जगह पर ले जाया गया जहाँ CCTV कैमरा नहीं लगे थे। यहाँ उन्हें लाठियों और डंडों से बुरी तरह मारा गया। और लाठियाँ उनके मलद्वार में डाली गईं। परिजनों ने कहा कि उनके जननांगों पर बहुत ही बुरे घाव थे।
इस घटना के प्रकाश में आने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। तूतीकोरिन के कलेक्टर संदीप नंदूरी ने कहा कि ऐसी शिकायतें थीं कि वे पुलिस की पिटाई से मारे गए थे। न्यायिक जाँच के आदेश दिए गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने आश्वासन दिया है कि जाँच के निष्कर्षों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। वहीं चीन से कॉन्ग्रेस पार्टी और उनके नेताओं की निकटता और आपसी संबंधों का पता चलने के बाद पार्टी मुश्किलों से घिरती नजर आ रही है।
सबसे पहले यह सामने आया कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद एक और सच्चाई सामने आई कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से डोनेशन मिलने की बात सामने आई।
चीन के साथ पार्टी के संबंधो का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया में कई लोगों ने चीनी नेताओं के साथ कॉन्ग्रेस नेताओं की तस्वीरें पोस्ट की है।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर के जरिए सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की तस्वीर चीनी अधिकारी के साथ पोस्ट किया।
संबित पात्रा के ट्वीट से चिढ़ कर कॉन्ग्रेस नेता और मार्गरेट अल्वा के बेटे, निखिल अल्वा ने एक तस्वीर पोस्ट की। इस तस्वीर के जरिए उन्होंने चीन के साथ पीएम मोदी की अंतरंगता साबित करने की कोशिश की। इस चक्कर में तस्वीर में नजर आ रहे किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को चीनी बता दिया।
कॉन्ग्रेस का सिपाही बनने के लिए IQ लेवल कोई जरूरत नहीं होती, यह बात निखिल अल्वा ने साबित कर दिया। क्योंकि उन्होंने यह मान लिया कि मोनगोलोइड फीचर्स वाले सभी लोग चाइनीज़ होते है।
बता दे यह तस्वीर 2019 में पीएमओ के ट्विटर हैंडल से ट्वीट की गई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी को किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जीनबकोव द्वारा पारंपरिक किर्गिस्तान पोशाक भेंट की गई थी।
In Bishkek, President Jeenbekov presented PM @narendramodi a Kalpak, the traditional Kyrgyz hat, a Chapan, a traditional coat from Kyrgyzstan and a Samovar, a container to heat or boil water.
PMO ने उस समय तस्वीरों को ट्वीट कर लिखा, “बिश्केक में, राष्ट्रपति जेनबकोव ने PM @narendramodi को एक कल्पक, पारंपरिक किर्गिज़ टोपी, एक चापान, किर्गिस्तान का पारंपरिक कोट और समोवर, पानी गर्म करने के लिए एक कंटेनर भेंट किया है।”
कौन है निखिल अल्वा
निखिल अल्वा को 2018 में राहुल की सोशल मीडिया स्ट्रेटजी सॅंभालने वाली दिव्या स्पंदना की जगह जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय दिव्या को यह कह कर नौकरी से निकाल दिया गया था, कि वह कॉन्ग्रेस से परेशान थी क्योंकि उसकी भूमिका को सीमित करते हुए कॉन्ग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा को कार्यभार संभालने का जिम्मा दे दिया था।
2018 बिजनेस स्टैंडर्ड के रिपोर्ट के अनुसार, “पूर्व मीडिया उद्यमी निखिल जे अल्वा कॉन्ग्रेस के बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। कॉन्ग्रेस संगठन में 48 वर्षीय अल्वा को गाँधी के ट्विटर हैंडल के ‘गेटकीपर’ के रूप में जाना जाता है।
अपने ट्विटर एकाउंट के बायो में अल्वा ने बताया है कि वह “एक राजनीतिक कार्यकर्ता के साथ मीडिया उद्यमी है, जो एक न्यायसंगत और समान्य दुनिया का निर्माण करना चाहता है।” अल्वा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा के तीन बेटों में से एक हैं। अल्वा के साथ उनके बड़े भाई नीरत और छोटे भाई निवेदिथ भी जाने-माने मीडिया उद्यमी हैं। छोटे भाई निवेदिथ भी अब राजनीति की तरफ अपने कदम बढ़ाने शुरू किए है।
दिलचस्प बात यह है कि निखिल अल्वा पर पहले 2018 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाथा। उनके पड़ोसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर उन पर घूरने और अश्लील ईमेल भेजने का आरोप लगाया गया था।
निखिल अल्वा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में, 47 वर्षीय शिकायतकर्ता ने कहा था, “निखिल अल्वा ने जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से कई ग्रुप्स में ईमेल पोस्ट किए हैं। जिसमें अत्यधिक अनुचित और घोर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया है। मेरे बार-बार मना करने के बावजूद निखिल नहीं रुका और बाद में अश्लील मैसेज भेजने लगा।”
उसने कम से कम 14 बार अल्वा पर अपमानजनक ईमेल भेजने का आरोप लगाया था।
अल्वा के पोस्ट ने बता दिया है कि राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल से जिस तरह के पोस्ट किए जाते है, वह राहुल गाँधी और निखिल अल्वा के दिमाग के घटिया कॉम्बिनेशन का परिणाम है।
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं। बीते दिनों ‘बॉलीवुड गैंग’ को आड़े हाथों लेने के बाद अभिनेत्री ने अब चीन पर निशाना साधा है। कंगना का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह चीनी सामान का बहिष्कार करने की अपील कर रही हैं।
वीडियो की शुरूआत में कंगना कह रही हैं, “अगर कोई हमारे हाथ से हमारी ऊँगलियों को काटने की कोशिश करे या हमारी भुजाओं से हमारी हथेली काटने की कोशिश करे तो किस तरह का कष्ट होगा आपको। वही कष्ट पहुँचाया है चीन ने हमें लद्दाख पर अपनी लालची नजरें गड़ा कर। वहाँ हमारी सीमा का एक-एक इंच बचाने के लिए हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।”
वो आगे कहती हैं, “क्या आप भूल पाएँगे उनकी माँओं के आँसू, उनकी विधवाओं की चीखें और उनके बच्चों के दिए हुए बलिदान को। क्या ये मान लेना सही हैं कि सेनाओं का सरहदों पर जो युद्ध होता है वह केवल उनका होता है। वो सिर्फ सरकार का होता है। क्या हमारा उसमें कोई योगदान नहीं।”
कंगना रनौत ने कहा, “क्या हम भूल गए हैं वो वक्त जब महात्मा गाँधी जी ने कहा था कि अगर अंग्रेजों की रीढ़ तोड़नी है भारत में तो उनके बनाए गए हर उत्पादन का बहिष्कार करना होगा। क्या ये जरूरी नहीं कि हम भी इस युद्ध में हिस्सा लें क्योंकि लद्दाख सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं है। भारत की अस्मिता का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। भारत की हथेली है। हम किसी भी तरह से दुश्मनों को उनके गंदे इरादों ने सफल नहीं होने दे सकते।”
#KanganaRanaut condemns the brutal Chinese attack on the Indian Army in Ladakh & calls the nation to not forget the sacrifice of our martyrs & treat this as an attack on nation. To honour the supreme sacrifice of our bravehearts & to teach China a lesson,it’s time #अब_चीनी_बंदpic.twitter.com/jrehc8Qqwp
अभिनेत्री कहती है, “हमें चाइना के सामानों को बहिष्कार करना चाहिए। उनके जो भी सामान है, जिन कंपनियों में उन्होंने इन्वेस्ट किया है जिनसे उन्हें रेवन्यू आते हैं, संस्थाएँ हैं, उन सबका बहिष्कार करें। वे हमारे पैसों से हथियार खरीदकर हमारे सैनिकों के सीने छलनी करते हैं। क्या ये हमारा कर्तव्य नहीं है कि हम अपनी सेनाओं और सरकार का साथ दें। हम प्रतिज्ञा लेते हैं कि हम आत्मनिर्भर बनेंगे। चाइनीज सामान का बहिष्कार करेंगे और इस युद्ध में हमारे देश भारत को जिताएँगे।”
उल्लेखनीय है कि सोमवार (जून 15, 2020) की रात गलवान घाटी के पास हुए हिंसक झड़प में एक कर्नल समेत देश के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस झड़प में चीन की ओर से भी 43 सैनिक हताहत हुए थे।
गौरतलब है कि कंगना अपने बेबाक बयानों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। उन्होंने बिना गॉडफादर के फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है। उनके काम को बहुत पसंद किया जाता है। कंगना हर मुद्दे पर अपनी राय बेबाकी से मुखर होकर रखती हैं।
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान देना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है। लेकिन, इससे समुदाय विशेष के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
मुंबई में एक महिला को मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का अनुरोध भारी पड़ गया। करिश्मा भोंसले नाम की इस महिला ने ट्विटर पर अपना दर्द साझा किया है। उन्हें धमकाया गया। बकौल करिश्मा जब उन्होंने विधायक (MLA) से मदद मॉंगी तो उन्होंने उसे ही घर बदल लेने को कहा।
मानखुर्द इलाके में रहने वाली करिश्मा भोंसले के अनुसार उनके घर के पास ही मस्जिद की लाउडस्पीकर लगी है। इसलिए वे आवाज काम करने का अनुरोध लेकर मस्जिद गईं। लेकिन, मस्जिद के पास के दूसरे समुदाय के लोग करिश्मा और उनकी माँ से बहस कर उन्हें धमकाने और उनके साथ झड़प करने लगे।
यही नहीं, जब करिश्मा ने स्थानीय विधायक से इस सम्बन्ध में मदद माँगी तो उन्होंने सलाह दी कि यदि उन्हें लाउडस्पीकर की आवज से परेशानी है तो उन्हें अपना घर बदल लेना चाहिए।
करिश्मा भोंसले ने इस घटना का वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। करिश्मा ने लिखा है, “मुंबई के मानखुर्द में रहती हूँ। बहुत कम उम्मीद थी कि मेरी बात सुनी जाएगी, फिर भी मैं पास की मस्जिद में सम्बन्धित लोगों से अनुरोध करने के लिए गई कि वो उस लाउडस्पीकर (अज़ान) की आवाज कम कर दें, जो कि मेरी खिड़की के ठीक सामने लगा है। लेकिन यह प्रयास व्यर्थ रहा।”
@AskAnshul Namaskar Sir,I stay at Mankhurd ,Mumbai..i went to a nearby mosque to speak to the authorities with an expectation that my mere request of lowering the volume of loudspeaker(azaan)which is installed right in front of my window, would be heard,but in vain
इसके बाद ट्वीट की एक श्रृंखला में करिश्मा ने कुछ वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है कि जब वो सम्बन्धित लोगों से बात करने वहाँ पहुँची तो कुछ ही देर में वहाँ काफी लोग इकट्ठे हो गए।
इस वीडियो में हिजाब पहने एक महिला करिश्मा से बहस करते हुए कह रही है कि तुम्हारे मंदिर में भी तो घंटा बजता है और क्या हम स्पीकर किसी के घर में लगा रहे हैं? इस पर युवती ने जवाब दिया कि अगर मंदिर में घंटी बजती है तो उहें वहाँ जाकर अपनी बात रखनी चाहिए। लेकिन बुर्का पहने महिला युवती की बात अनसुनी कर उसे वहाँ से जाने को कहते हुए देखी जा सकती है।
अगले वीडियो में देखा जा सकता है कि एक और महिला इस युवती और उनकी माँ के साथ बदसलूकी और हाथापाई कर रही है। विवाद के बढ़ने पर वहाँ पुलिस भी पहुँच चुकी थी जो कि दोनों पक्षों को किनारे करने की कोशिश करती देखी जा रही है।
लेकिन जब पुलिस ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो दूसरे समुदाय की बड़ी भीड़ वहाँ पहुँच गई और पुलिस से भी उलझने लगी। ट्विटर पर करिश्मा भोंसले ने लिखा है कि इतनी दादागिरी है कि पुलिस तक को नहीं बख्श रहे हैं।
करिश्मा भोंसले ने ट्विटर पर एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है कि जब उन्होंने स्थानीय विधायक अबू आसिम आजमी से इस बारे में बात की तो उन्होंने जवाब दिया कि यदि अजान की आवाज से समस्या है तो उन्हें वह जगह छोड़ देनी चाहिए।
ज्ञात हो कि अबू आज़मी मानखुर्द शिवाजी नगर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, जो कुछ ही दिन पहले एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी के कारण चर्चा में आए थे।
इस व्हाट्सएप चैट में लिखा गया है कि नामूर्ख महिला ने सुन्नी नूरे इलाही मस्जिद पर आवाज उठाई, जिसे पुलिस ने भी कह दिया कि वह अजान पर पाबंदी नहीं लगा सकते हैं। इस चैट में लिखा गया है कि जब मस्जिद में अजान की आवाज को लेकर मुद्दा उठाया गया तो इलाके के समुदाय विशेष के तमाम मर्द और औरत पुलिस स्टेशन पहुँचे।
Even the MLA has spoken this way..he is asking us to leave this residence if we cant bear the high volume of azaan..who shall we rely upon then.. pic.twitter.com/s50y93bOLs
उल्लेखनीय है कि देशभर में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब लोगों ने दूसरे समुदाय द्वारा लाउडस्पीकर पर बजाई जाने वाली अजान की आवाज से होने वाली परेशानी को जाहिर किया है। ऐसे ही एक मामले पर कुछ इ माह पूर्व उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं है।
करिश्मा भोंसले द्वारा दिखाए गए इस साहस की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ भी हो रही है। वहीं, विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने ट्विटर पर बताया है कि उनके कार्यकर्ता करिश्मा के सम्पर्क में हैं और बजरंग दल के साथ ही दुर्गावाहिनी टीम ने उन्हें हर प्रकार की कानूनी सहायता देने का आश्वासन दिया है।
Our Mumbai team is in constant touch with this Brave Girl and her Mother, Our Bajrangdal Karyakartas and DurgaVahini team have spoken to them and are providing all legal and necessary support…
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार फिर से भारत के खिलाफ जहर उगलते नजर आए। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ विवादित टिप्पणियाँ की है।
शुक्रवार (जून 26, 2020) को मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी पीएम ने मोदी को ‘मनोरोगी’ (Psychopath) और ‘RSS का प्रोडक्ट’ बताया।
इमरान खान ने कहा, “नरेंद्र मोदी ने जो गुजरात में किया। उसने 3 दिन पुलिस को पीछे रखा और RSS के कातिलों ने मुस्लिमों पर जुल्म किया, कत्ल किया, रेप किया और एक लाख मुस्लिमों को उनके घरों से निकाल दिया। तभी पता चल जाना चाहिए था कि किस तरह की सोच है इस आदमी की। ये एक आम आदमी नहीं है। ये एक psychopath है। इनकी सोच हिटलर की नाजी पार्टी की तरह है। RSS उसी की पैदावार है। ये हिटलर की नाजी पार्टी को अपना रोल मॉडल समझते हैं। इसलिए ये ऐसी हरकतें करते है।”
Imran Khan calls Prime Minister @narendramodi ‘Psychopath’ while addressing a rally in Pakistan Occupied Kashmir (PoK), compares RSS with Nazis. No word on subjugation on basic political/human rights of people in PoK. No word on torture/rape by Pakistan Army in Balochistan & KPK. pic.twitter.com/EWfXMVDhUg
पाकिस्तानी पीएम ने आगे कहा, “जो काम हिटलर की नाजी पार्टी ने किया, यहूदियों की हत्या की, उनके ऊपर जुल्म किए। अब यही काम ये कर रहे हैं। सिटिजनशिप कानून लाकर उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े किए। भारत में आज जो भी मुस्लिमों के साथ हो रहा है, ये सब कुछ हिटलर ने यहूदियों के खिलाफ किया था। उसके बाद नरसंहार किया था।”
इमरान खान यहीं पर नहीं रूके। आगे उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिंसा पहले भी हो रही थी, लेकिन मोदी सरकार के अंतर्गत भारतीय सेना के पैलेट गन के इस्तेमाल के कारण कई बच्चों ने अपनी आँखें खो दी। हजारों लोगों को जेल में डाला गया, जिसमें 10-11 साल के बच्चे भी शामिल थे।
कश्मीर और भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले इमरान ने इस दौरान अपने देश में अल्पसंख्यकों पर रोजाना होने वाले अत्याचार को लेकर मुॅंह तक नहीं खोला। न ही बलूचिस्तान और पीओके में पाकिस्तानी सेना की प्रताड़ना पर कुछ कहा।
गौरतलब है कि शुक्रवार (जून 26, 2020) को ही खबर आई कि जम्मू-कश्मीर के 200 से अधिक ऐसे युवा गायब हैं जिन्हें पाकिस्तानी उच्चायोग की ओर से वीजा जारी किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि ये युवा पाकिस्तान के कब्जे में हैं और इन्हें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए वह प्रशिक्षित कर रहा है।
कुछ दिनों पहले हिजबुल कमांडर आतंकी रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी में सक्रिय टॉप-10 आतंकियों की नई लिस्ट तैयार की थी। जिसमें हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के नाम शामिल हैं। बताया गया कि कश्मीर घाटी में सक्रिय इन सभी टॉप-10 आतंकवादियों को पाकिस्तान की खुफिया इकाई आईएसआई की मदद से संचालित आतंकी शिविरों में प्रशिक्षित किया गया था।
वहीं पिछले दिनों एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की हालत बयां की गई थी। इसमें एक शख्स लाचार होकर बता रहा है कि सिंध प्रांत में प्रशासन ने हिंदू-ईसाई समुदाय के लोगों को राशन देने से मना कर दिया है। उनकी मदद नहीं की जा रही है। उन्हें खाना नहीं दिया जा रहा है। वो दाने-दाने को तरस रहे हैं।
इतना ही नहीं, ईसाई बने दलितों से भी नाले की साफ-सफाई करवाई जा रही है। और हिंदुओं का उत्पीड़न वहाँ आम बात है। लड़कियों का अपहरण, रेप, धर्म परिवर्तन और फिर जबरन निकाह का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले दिनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के पीरबक्स जरवार गाँव में 13 वर्षीय हिंदू लड़की के साथ 6 हथियारबंद युवकों ने बर्बरता से गैंगरेप किया।
पाक की मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सालाना पाकिस्तान में कम से कम 1000 गैर मुस्लिम लड़कियाँ इस्लाम कबूलती हैं। इनमें से अधिकांश सिंध में रहने वाली हिंदू समुदाय की होती हैं।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जॉंच की मॉंग तेज होती जा रही है। अब इसमें बीजेपी सांसद और अभिनेत्री रूपा गांगुली का नाम भी जुड़ गया है। सुशांत 14 जून को मुंबई के अपने आवास में मृत मिले थे।
रूपा गांगुली सोशल घटना के जरिए इस घटना को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस की जाँच पर संदेह जताया। सीबीआई जाँच की माँग करते हुए पुछा कि सुशांत सिंह की मौत के बाद भी उनके सोशल मीडिया एकाउंट लगातार एक्टिव कैसे हैं।
उन्होंने कहा, “क्या ऐड हो रहा, क्या डिलीट हो रहा किसी को नहीं पता। ये कैसे हो सकता है, कोई उसका अकाउंट ऑपरेट कर रहा है। पुलिस या कोई और? उसका इंस्टाग्राम अकाउंट ऑपरेट हो रहा है, कैसे? मुझे पहले सुनने को मिला था, यकीन नहीं हो रहा था। मैंने स्क्रीनशॉट्स जुगाड़े और मैंने खुद भी लिया। सीबीआई जॉंच कब होगी? जब सारे सबूत खत्म हो जाएँगे उसके बाद?”
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई है। उन्होंने आत्महत्या वाले एंगल को गलत करार दिया।
सांसद रूपा गांगुली ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि, हमे अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है। इस घटना को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सुशांत जैसे मेहनती और टैलेंटेड एक्टर को न्याय जरूर मिलना चाहिए, ताकि ऐसी कोई घटना फिर से कभी भविष्य में न हो।
उन्होंने अपने ट्वीट्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी टैग किया है।
उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत उनके साथियों व प्रशंसकों के लिए किसी सदमें से कम नहीं है। आज भी सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है।
पिछले दिनों अभिनेता शेखर सुमन ने भी इस मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग उठाई थी। उन्होंने कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत जैसा मजबूत इरादों वाला और प्रतिभाशाली व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है। अगर ऐसा होता तो वो कोई न कोई सुसाइड नोट ज़रूर छोड़ जाते।
उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के मामले में सीबीआई जाँच के लिए दबाव बनाने हेतु ‘जस्टिस फॉर सुशांत फोरम’ की स्थापना की है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य तानाशाही और गुटबाजी ख़त्म कर माफियाओं पर लगाम लगाना है।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का त्राल अब हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों से पूरी तरह मुक्त हो गया है। त्राल में सक्रिय हिजबुल के अंतिम तीन आतंकी भी शुक्रवार (जून 26, 2020) की सुबह मारे गए।
कश्मीर में बीते तीन दशकों से जारी आतंकी हिसा के दौर में यह पहला मौका है, जब त्राल हिजबुल के आतंकियों से पूरी तरह खाली हो गया है। घाटी में आतंकी हिसा को नया रुख देने वाला हिजबुल का पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी और अलकायदा से जुड़े अंसार गजवा उल हिंद का कमांडर जाकिर मूसा त्राल का ही रहने वाला था।
पुलिस की ओर से यह ऐलान शुक्रवार सुबह दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में त्राल के चेवा उलार इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में तीन स्थानीय आतंकियों के मारे जाने के बाद किया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि यह एक बड़ी उपलब्धि है कि दशकों के बाद क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिद्दीन की कोई उपस्थिति नहीं है।
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) June 26, 2020
कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने शुक्रवार को कहा, ‘‘आज के सफल अभियान के बाद, त्राल क्षेत्र में अब हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की मौजूदगी नहीं है। यह 1989 के बाद पहली बार हुआ है।’’ उन्होंने कहा,” त्राल जिसे कभी आतंकवाद का हॉट बेड माना जाता था, वहाँ अब आधा दर्जन से अधिक स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं, लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन से कोई नहीं बचा है।”
बता दें कि कश्मीर में आतंकवाद फैलने के बाद यहाँ हिजबुल मुजाहिदीन का दबदबा था। घाटी में उसके कई हजार कैडर थे।
After today’s successful operation, no presence of Hizbul Mujahideen terrorist in Tral area. It has happened for the first time since 1989: Kashmir Zone Police quoting IGP Kashmir https://t.co/iDSGNedK1M
गौरतलब है कि गुरुवार (जून 25, 2020) शाम को त्राल स्थित अवंतिपोरा इलाके में 2-3 आतंकियों के होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर एसओजी और सीआरपीएफ की टीम ने अभियान शुरू किया।
इस बीच एक मकान में छिपे आतंकियों ने जवानों पर गोलीबारी कर दी। मुठभेड़ पूरी रात चली और सुबह जाकर सेना को सफलता मिली। इस मुठभेड़ में सेना ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। सेना ने तीनों आतंकियों के पास से हथियार भी बरामद किए थे।
राजीव गॉंधी फाउंडेशन (RGF) के दान को लेकर नया खुलासा हुआ है। फाउंडेशन को पंजाब नेशनल बैंक में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले के अभियुक्त मेहुल चोकसी से भी दान मिला था। उसने 2014-15 में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले इस फाउंडेशन में अघोषित दान किया था।
दान नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (Naviraj Estates Private Limited) के नाम से किया गया था और मेहुल चोकसी इस कंपनी के निदेशकों में से एक है। ज्ञात हो कि पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हज़ार करोड़ रुपए के ग़बन का आरोप है। ये मामला 2018 में सामने आया था। चोकसी देश छोड़कर भाग चुका है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, चीन सरकार की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा फंडेड चीन एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कॉन्टैक्ट (CAIFC) ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन को ‘वित्तीय सहायता’ दी थी। CAIFC संयुक्त राज्य अमेरिका के एफबीआई के रडार पर भी था और यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की एक रिपोर्ट में अमेरिकी कॉन्ग्रेस में कहा गया था कि वह विदेशों में जासूसी गतिविधियों में शामिल था।
मेहुल चोकसी का नाम ऐसे समय में उभर कर सामने आया है जब विभिन्न स्रोतों का सम्बन्ध गाँधी परिवार के नेतृत्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन से जुड़े नजर आ रहे हैं, जिसमें कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किया गया दान भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं। राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम बोर्ड के सदस्य हैं।
गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) को चीन की कम्युनिस्ट सरकार से लेकर PMNRF से दान मिलने के कई साक्ष्य सामने आए हैं। एक समय भारत के वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने देश के सरकारी बजट से इस फाउंडेशन के लिए अलग से धन आवंटन की माँग तक की थी।
मनमोहन राज में 7 मंत्रालय, 11 PSU ने भी दिए ‘दान’
इसके बाद एक और खुलासे में पता चला है कि देश के कई सरकारी उपक्रमों ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान किया था। इनमें गृह मंत्रालय समेत 7 मंत्रालय, सरकारी विभाग से लेकर 11 बड़े सार्वजानिक उपक्रम भी शामिल थे। यह सब ‘दान’ तब किए गए जब देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA की सरकार थी और सोनिया गाँधी ही प्रमुख ‘डिसीजन मेकर’ हुआ करती थीं।
भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को आरोप लगाया कि यूपीए के वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था और सार्वजनिक धन परिवार के खातों में डायवर्ट कर दिया गया था।
गौरतलब है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन को परिवार द्वारा चलाए जाने वाले संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया और यह न केवल एक ‘धोखाधड़ी’ है, बल्कि भारत की जनता के साथ एक ‘बड़ा विश्वासघात’ भी है। यूपीए सरकार में लोग राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान करते थे, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी थीं।
वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।
पीएमएनआरएफ से तीन बार ‘डोनेशन’ हासिल किया था
ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किए गए इस पहली ‘सहायता’ में 10 लाख रुपए और दूसरी में 90 लाख रुपए दीए गए थे। रिपोर्ट के बाद बीजेपी ने पूछा था कि कॉन्ग्रेस का चीन को लेकर हमेशा से ही लचीला रुख था और साथ ही गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच चीन और कॉन्ग्रेस के बीच हुए ‘व्यापारिक समझौते’ के कारण ही इस प्रकार के बयान दे रही थी।
यह पता चला है, राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की है और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।
एक और खुलासे में गाँधी परिवार के चीन के साथ अपने गोपनीय संबंधों के दावों को और मजबूती मिलती है। नए खुलासे से पता चलता है कि चीनी सरकार ने वर्ष 2006 में ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को ‘वित्तीय सहायता’ के लिए 10 लाख रुपए दान दिए थे।
एक दस्तावेज़ के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी (Sun Yuxi) ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रुपए दान दिए थे।
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौते को लेकर आजकल कॉन्ग्रेस सुर्खियों में है। उसकी अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की स्वामित्व वाली राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से समय-समय पर वित्तीय मदद मिलने की बात भी सामने आई है। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के जमाने में अलग-अलग सरकारी खजाने से भी इस फाउंडेशन को ‘दान‘ देने के तथ्य सामने आए हैं।
लेकिन विदेश मुल्कों खासकर कम्युनिस्टों से पैसा लेना कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं की नई आदत नहीं है। इंदिरा गाँधी के जमाने से ऐसा धड़ल्ले से होने के तथ्य सार्वजनिक हैं। इन पन्नों को पलटने से पहले हम साठ और सत्तर के दशक में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार रहे ललित नारायण मिश्रा की बात कर लेते हैं।
मिश्रा बिहार से आते थे। इंदिरा की सरकार के कद्दावर मंत्री थे। 3 जनवरी 1975 को उनकी मौत हो गई। इससे एक दिन पहले बिहार के समस्तीपुर में उन पर बम फेंका गया था। आनंदमार्गियों को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। लेकिन, इस पर ज्यादातर लोग, जिसमें ललित बाबू के परिजन भी शामिल हैं, ने कभी यकीन नहीं किया। आज भी जब ललित नारायण मिश्रा को लेकर चर्चा होती है तो साजिशों के तमाम पन्ने उधेड़े जाते हैं। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय एक नारा भी लगा था- मिश्रा की हत्या में केजीबी का हाथ है।
केजीबी (KGB) यानी सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी कोमितेत गोसुदर्स्त्वेन्नोय बेज़ोप्स्नोस्ति। इसका गठन 13 मार्च 1954 को हुआ था और 1991 में सोवियत संघ के बिखराव तक इसका अस्तित्व बना रहा है। शीत युद्ध के दौर में कम्युनिस्ट शासन वाला सोवियत संघ केजीबी का इस्तेमाल विदेशी नेताओं को साधने के लिए भी करता था और कथित तौर उन्हें रास्ते से हटाने के लिए भी। अमेरिकी राष्ट्रपति जानएफ कैनेडी की हत्या में भी उसका नाम आया था। हालॉंकि संलिप्तता के सबूत कभी नहीं मिले।
इसी केजीबी के मार्फत इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेसी नेताओं को पैसा दिया जाता था। 2017 की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कुछ पुराने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। इससे पता चलता है कि इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेस के 40 फीसदी सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिला था। 2005 में केजीबी के ही एक पूर्व जासूस वासिली मित्रोकिन (Vasili Mitrokhin) की किताब आई थी। इसमें तो बकायदा बताया गया है कि खुद इंदिरा गाँधी को सूटकेसों में भरकर पैसे भेजे गए थे।
साभार: indiafacts.org
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने ऑपइंडिया को बताया कि जो तथ्य सार्वजनिक हैं उससे जाहिर होता है कि 1967 के आम चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस सहित देश के ज्यादातर राजनीतिक दलों को विदेश से पैसा मिला था। उन्होंने बताया कि शीत युद्ध के जमाने में कम्युनिस्ट देश जहाँ भारत में साम्यवाद के फैलाव के लिए पैसे खर्च कर रहे थे, तो पूँजीवादी देश साम्यवाद को रोकने के लिए। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का नेता ही बिकने को तैयार हो तो विदेशी ताकतों के लिए चीजें आसान हो जाती है।
किशोर ने ऐसी कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि विदेश से पैसा लेने के मामले की जाँच भी कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। जब कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे सार्वजनिक करने की माँग की तो तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री यशवंत राव चव्हाण ने संसद में कहा कि जिन दलों और नेताओं को विदेशों से धन मिले हैं, उनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे उनके हितों को नुकसान पहुँचेगा।
आप कल्पना कर सकते हैं कि यदि आज केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार नहीं होती तो राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से मिले दान और कॉन्ग्रेस से उसके समझौते की बात शायद ही सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन पातीं।
लेकिन, सालों तक जिन तथ्यों को कॉन्ग्रेस छिपाती रही उसे मित्रोकिन ने 2005 में दुनिया के सामने ला दिया। वे सोवियत संघ जमाने के हजारों गोपनीय दस्तावेज चुराकर देश से बाहर ले गए थे। बाद में इसके आधार पर क्रिस्टोफर एंड्रयू (Christopher Andrew) के साथ मिलकर किताबें लिखी। द वर्ल्ड वॉज गोइंग आवर वे (The World Was Going Our Way) नामक किताब में कहा गया है कि केजीबी ने 1970 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार के लिए फंड दिया था।
कॉन्ग्रेस के चीनी प्रेम और राजीव गॉंधी फाउंडेशन पर सरकारी दरियादिली को लेकर संपादक अजीत भारती का नजरिया
2017 में सामने आई दिसंबर 1985 की सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि सोवियत संघ ने भारतीय कारोबारियों के साथ समझौतों के जरिए कॉन्ग्रेस पार्टी को रिश्वत दी थी। सोवियत संघ का दूतावास कॉन्ग्रेस नेताओं को छिपकर रकम देने सहित कई खर्चों के लिए बड़ा रिजर्व रखता था। इसके मुताबिक कॉन्ग्रेस के अलावा सीपीआई और सीपीएम को भी सोवियत संघ से काफी पैसा मिलता था। ऐसा नहीं है कि सभी को पैसे ही दिए गए थे। कुछ के साथ तो सोवियत संघ ने बकायदा समझौता भी किया था। कुछ-कुछ वैसा ही जैसा 2008 में कॉन्ग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच होने की बात सामने आई है।
इन दस्तावेजों से पता चलता है कि केजीबी के पैसे की वजह से भारत के ढेरो नेता सोवियत संघ की मुट्ठी में थे और वे भारतीय राजनीति को अपने हितों के हिसाब से प्रभावित करते थे। मित्रोकिन की किताब में भी यह बात कही गई है। केजीबी के लीक दस्तावेजों में भारत को तीसरी दुनिया की सरकारों में केजीबी के घुसपैठ का एक मॉडल बताया गया था। इन दस्तावेजों में साफ तौर पर भारत सरकार में केजीबी के बहुत से सूत्र होने की बात कही गई थी।
ऐसा भी नहीं है कि इंदिरा के बाद विदेश से पैसा लेने की कॉन्ग्रेस की आदत छूट गई। दस्तावेज बताते हैं कि सोवियत संघ से पैसा लेने का जो सिलसिला इंदिरा गाँधी के जमाने में शुरू हुआ था वह राजीव गाँधी के जमाने में भी जारी रहा है। हालॉंकि इस दौर में सोवियत संघ का प्रभाव कुछ सीमित करने की कोशिश भी हुई थी।
साभार: indiafacts.org
ये दस्तावेज मीडिया में भी केजीबी की घुसपैठ के बारे में बताते हैं। इसके अनुसार सोवियत संघ ने अपने प्रोपेगेंडा के प्रचार के लिए भारत के बड़े मीडिया संस्थानों के साथ व्यापक पैमाने पर साँठगाँठ कर रखी थी। वे उसकी जरूरत के हिसाब से लेख लिखते थे। यहाँ तक की संपादकीय में भी सोवियत संघ की धुन बजाते थे। जिन संस्थानों का जिक्र है, उनमें से कुछ के नाम हैं- टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैन, द हिंदू वगैरह।
साभार: indiafacts.org
मित्रोकिन ने अपनी किताब में बताया है कि सोवियत संघ ने इस काम के लिए भारत में 40-50 पत्रकार रखे थे। बाद के सालों में इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 हो गई थी।
अब आप समझ गए होंगे कि मुख्यधारा की मीडिया में वामपंथी लिबरल प्रोपेगेंडा का शोर इतना क्यों सुनाई पड़ता है। सोवियत संघ के पतन के बाद इन्होंने मालिक भले बदल लिया हो, लेकिन उसके इशारे पर भारत विरोधी धुन बजाने की पुरानी आदत बनी हुई है।
चलते-चलते: कहा जाता है कि मौत से पहले ललित नारायण मिश्रा चंदा उगाही के कॉन्ग्रेसी सरगना थे। कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि वे इंदिरा के लिए ही चुनौती बन गए थे। जिंदा रहते तो प्रधानमंत्री भी बनते। आपातकाल नहीं लगने देते। वगैरह, वगैरह। आपातकाल मिश्रा के मौत के साल ही 25 जून को लगा था। इसमें भी केजीबी की भूमिका बताई जाती है। ऐसे मिश्रा की हत्या से केजीबी को क्या फायदा हुआ होगा? सोचिए!!!
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के साथ यौन प्रताड़ना की खबरें आती ही रहती है। अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें अबुल कलाम आजाद नाम का एक व्यक्ति चुनाव जीतने के बाद सार्वजनिक तौर पर एक महिला से सबके सामने चिपट गया।
घटना चटगॉंव के बंदरबन के अलीकदम की है। अबुल कलाम ने अलीकदम उपजिला चेयरमैन के पद पर चुनाव जीता है। नतीजों के बाद बधाई देने पहुॅंची एक महिला के साथ उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। इसमें वह महिला के साथ गलत तरीके से लिपटते दिख रहा है। महिला भी असहज दिख रही है।
यह महिला अल्पसंख्यक मुरुंग समुदाय से ताल्लुक रखती है। इस समुदाय को Mro, Mrucha के नाम से भी जानते हैं।
सोशल मीडिया में इन तस्वीरों को शेयर कर लोग आक्रोश जता रहे हैं। पूछ रहे हैं कि ऐसे लोगों को समाज बर्दाश्त कैसे करता है? गोपाल गोस्वामी ट्वीट कर लिखा है, “अबुल कलाम आजाद ने बधाई देने पहुँची एक महिला को जबरन गले लगाया और अनुचित ढंग से छुआ। मगर किसी ने उसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन नहीं किया।”
Abul Kalam Azad elected Upazila chairman from Alikadam, Bandarban, Chittagong hill tracts Bangladesh
forcibly hugged & inappropriately touched an indigenous MRO girl while they came to congratulate him
Mro समुदाय से ताल्लुक रखने वाली चकमा क्वीन यान ने भी इस घटना का जिक्र फेसबुक पर किया है। उन्होंने लिखा कि स्थानीय समुदाय की चुप्पी देखकर वह परेशान हैं। वे लिखती हैं कि ऐसी चीजें हर जगह गुप्त रूप से होती रहीं है। लेकिन अब यह सब सार्वजनिक, आधिकारिक और सामान्य हो गया है। वे कहती हैं कि MRO के लोग अच्छे स्वभाव के साधारण लोग होते हैं। शायद इसलिए उन्हें नहीं मालूम अबुल कलाम उनकी तरह अच्छा इंसान नहीं है।
Obviously it looks inappropriate.. Her expression tells that.. Forget about expression u can’t just with a grown-up gal no matter whoever she is n how much u close to her.. It is called “ethics”..
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर वायरल अबुल कलाम की महिला के साथ इन तस्वीरों को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालाँकि इसी बीच तस्वीर में नजर आ रही महिला ने अबुल का बचाव किया है। महिला के घरवालों का भी कहना है कि तस्वीर गलत संदेश के साथ वायरल की जा रही है।
महिला के भाई मेन रुंग MRO ने कहा कि उसकी बहन ने अबुल को जिताने के लिए बहुत मेहनत की थी। इसलिए उन्होंने उसका आभार व्यक्त किया। महिला के भाई के मुताबिक उपजिला अध्यक्ष ने कुछ नहीं गलत नहीं किया। अबुल कलाम का भी इस मामले पर कहना है कि उनके लिए वह बेहद भावुक क्षण था। उस दौरान उसने काफी लोगों का शुक्रिया अदा किया। जिसमें कुछ गलत नहीं था।
लेकिन, सोशल मीडिया में लोग अबुल कलाम के इस बर्ताव को सही मानने को तैयार नहीं हैं। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट बताती है कि कलाम इससे पहले भी यौन शोषण का आरोपित रह चुका है। साल 2010 में बीएनपी की शिरीन अख्तर, जो वर्तमान में अली कदम उपजिला की उपाध्यक्ष हैं, उन्होंने अबुल पर शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद 3 मार्च को उसे पार्टी से निष्काषित भी कर दिया गया था।