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सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पुलिस ने की यशराज के दो बड़े अधिकारियों से पूछताछ, मौत के कारणों की जाँच तेज

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने फ़िल्मी दुनिया के पीछे की ख़ौफनाक सच्चाई को जगजाहिर कर दिया हैं। जहाँ एक तरफ सुशांत के फैन इस सदमे से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया के जरिए लोग उनकी मौत को लेकर सीबीआई जाँच की माँग कर रहे है। बांद्रा पुलिस ने अब इस मामले में शुक्रवार (26 जून, 2020) को यशराज बैनर्स के दो पूर्व सीनियर अधिकारियों से पूछताछ की है।

मुम्बई मिरर के रिपोर्ट के अनुसार यशराज फिल्म के पूर्व प्रेसिडेंट आशीष सिंह और आशीष पाटिल ने साल 2012 में सुशांत सिंह राजपूत के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। पुलिस जाँच के दौरान माँगी गई यशराज फिल्म्स और सुशांत के बीच हुए पुराने कॉन्ट्रैक्ट की कॉपी को पिछले सप्ताह पुलिस को सौंप दिया गया था।

जिसमें सुशान्त के फ़िल्म एग्रीमेंट की साइन वाली कॉपी तो उन्हें दे दी गई थी। लेकिन 2015 में एग्रीमेंट को रद्द कर और उससे बाहर निकलने वाली कॉपी उनके पास नहीं भिजवाई गई थी। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को किए गए इन्वेस्टिगेशन के दौरान प्रोडक्शन हाउस के दोंनो पूर्व एग्जीक्यूटिव से ज्यादातर सवाल कॉन्ट्रैक्ट साइन करने और इससे बाहर जाने की शर्तों को लेकर ही किए गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस जिस कॉन्ट्रैक्ट कॉपी में सुशांत के साथ यशराज की तीन फिल्मों को लेकर पूछताछ कर रही है। जिसमें पहली फ़िल्म सुशांत ने यशराज फिल्म्स की ‘शुद्ध देसी रोमांस’ (2013) में काम किया था, जिसे मनीष शर्मा ने डायरेक्ट किया था। इसके अलावा दूसरी फिल्म वो ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी’ (2015) में दिखाई दिए थे, जिसे दिबाकर बैनर्जी ने डायरेक्ट किया था। बैनर के साथ उनकी तीसरी फिल्म ‘पानी’ थी, जिसका निर्देशन शेखर कपूर ने किया। हालाँकि, यशराज फिल्म्स ने कथित तौर पर इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया था।

बता दें बहुत ही कम लोग जानते है कि यशराज अक्सर नए कलाकारों के साथ सिर्फ़ तीन फिल्मों की डील करता है। फिल्मों की सफलता को देखते हुए आगे मौका देकर बढ़ाया जाता है। सुशांत के साथ तीसरी फिल्म ‘पानी’ नहीं बनाने के पीछे की वजह बजट को बताया गया है। जानकारी के मुताबिक फ़िल्म के निर्देशक शेखर कपूर ने सुशांत की इस बैनर तले बनने वाली फिल्म ‘पानी’ का बजट 150 करोड़ रुपए से ज्यादा बताया था। जोकि ज्यादा बजट करार देते हुए यशराज ने फिल्म बनाने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस सिर्फ यशराज ही नहीं बल्कि अन्य प्रॉडक्शन हाउसेस से भी पूछताछ करेगी जहाँ सुशांत ने फिल्में साइन की थीं। इसके अलावा पुलिस ने सुशांत के दोस्तों, पेशेवर परिचितों, सहयोगियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों का बयान दर्ज कर रही है। वहीं सुशांत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा। जो कि डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर 24 जुलाई को रिलीज होगी।

सुशांत से छीन कर 3 अलग एक्टर को दी गई थी फिल्में

उल्लेखनीय है कि सुशांत के मौत के बाद ऐसे कई रहस्य लोगों के सामने आए है। जिसनें आम जनता को चौका दिया है। सुशांत के मौत के पीछे उनसे 6 महीने में ही एक के बाद एक कर के उनसे 7 फ़िल्में छीन लेने की वजह को भी एक कारण बताया जा रहा है। जिनमें तीन बड़ी फिल्मों में सुशांत सिंह राजपूत को लिए जाने की चर्चा के बाद उन्हें नेपोटिज्म और गुटबाजी कारण अन्य सितारों की झोली में डाल दिया गया।

जिसमें पहली फ़िल्म हाफ गर्लफ्रेंड’ थी, जो मई 2017 में रिलीज हुई थी। उसमें सुशांत की जगह अर्जुन कपूर को बाद में कास्ट किया गया था।

इसके बाद बात ‘फितूर’ थी। इसमें भी आदित्य रॉय कपूर ने लीड रोल निभाया लेकिन पहले इसमें सुशांत सिंह राजपूत को लिए जाने की चर्चा थी। बाद में ख़बर आई कि आदित्य को सुशांत की जगह ले लिया गया है।

तीसरी बड़ी फिल्म बेफिक्रे जो उनसे छीन ली गई, वो यशराज फिल्म्स की ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक थी जिसका निर्देशन ख़ुद आदित्य चोपड़ा ने किया था। ‘बेफिक्रे’ में एन वक़्त पर सुशांत की जगह रणवीर सिंह को ले लिया गया था।

माता-पिता ने लगाया हिन्दू लड़की का अपहरण कर इस्लाम कबूल कराने का आरोप, पाक कोर्ट ने दी शौहर के साथ रहने की छूट

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का अपहरण कर उनका धर्मपरिवर्तन कराना अब आम बात हो गई है। 17 जून को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से लापता हुई एक हिंदू लड़की ने एक मुस्लिम युवक से निकाह करा दी गई। लड़की के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम व्यक्ति ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया है।

इतना ही नहीं उसकी इच्छाओं के खिलाफ उसका जबरन इस्लाम में धर्मपरिवर्तिन कराकर उससे शादी भी कर ली है। अब इस निकाह को वैध मानते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने लड़की को पति संग रहने की अनुमति दे दी है।

दरअसल, पाकिस्तान के सिंध प्रांत के गढ़ी सभ्यो इलाके की रहने वाली रेशमा नाम की हिंदू लड़की 17 जून से लापता हो गई थी। उसके लापता होने के बाद से उसके परिवार वालों ने उसे बहुत खोजा। इस बीच परिजनों ने संदेह जताया कि दिल मुराद चंदियो (Dil Murad Chandio) नाम के एक व्यक्ति ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया है और उससे शादी करने से पहले उसका इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तिन कराया गया है।

बागरी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली रेशमा इसी सप्ताह अपने शौहर के साथ डेरा अल्लायार में अदालत में पेश हुई। उसने वहाँ कहा कि वह 20 वर्ष से अधिक उम्र की है। उसने चंदियो से अपनी मर्जी के मुताबिक शादी की है। ऐसा लगभग पाकिस्तान के सभी हिन्दू लड़कियों के अपहरण और निकाह के मामले में होता है। जिसमें अक्सर लड़की को धमकी दी जाती है और उससे मनमुताबिक बयान ले लिया जाता है।

रेशमा ने अदालत में बताया कि उसने इस्लाम में जाने के बाद अपना नाम बशीरन रख लिया है। अब जिला मजिस्ट्रेट ने उसे अपने पति के साथ घर जाने की इजाजत दे दी है। रेशमा के अभिभावकों ने जकोबाबाद स्थित सद्दार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।

हिंदू कम्युनिटी के नेताओं ने इससे पहले लगातार हिंदू लड़कियों के इस्लाम में धर्म परिवर्तन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। सिंध प्रांत में ऐसे मामले ज्यादातर सामने आए हैं। उनका कहना है कि ज्यादातर मामलों में लड़कियों का अपहरण किया जाता है, फिर उनका धर्म परिवर्तन कर जबरदस्ती निकाह करा दिया जाता है।

पाकिस्तान के सिंध में बड़े पैमाने हो रहा धर्मांतरण

एक तरफ पाकिस्तान कोरोना की महामारी के जूझ रहा है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है। ऐसे कई मामले लगातार रिपोर्ट हो रहे हैं जैसे पाकिस्तान के कराची शहर में पीआईबी बस्ती का एक मामला था, जहाँ के एक हिंदू परिवार पर 12 अप्रैल, 2020 को इस्लाम धर्म अपनाने से इंकार करने के लिए हमला किया गया था। यहाँ उस्मान नाम के एक मौलवी ने हिंदू परिवार के पड़ोसी शाहिद के साथ मिलकर अल्पसंख्यकों को इस्लाम कबूल करने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट की और उनके घर में तोड़फोड़ भी की।

इससे पहले पाकिस्तान की नाबालिग महक कुमारी ने कट्टरपंथियों पर जबरन इस्लाम कबूल करवाने का आरोप लगाते हुए इस्लाम छोड़ने की बात कही। इस पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उस पर इस्लाम को बेइज्जत करने का आरोप लगाते हुए उसके लिए मौत की सजा की माँग की थी। दरअसल, महक कुमारी का सिंध प्रांत के जैकवबाबाद जिले से 15 जनवरी को अपहरण कर लिया गया था। जिसका बाद में इस्लाम में धर्मांतरण कर एक, मुस्लिम से निकाह पढ़वा दिया।

प्रोपेगंडा फैलाने के सेना के वेटरन्स का इस्तेमाल: मेजर गौरव आर्या को बदनाम करने लिए गिरे वामपंथी मीडिया संस्थान

कई मीडिया संस्थानों ने आजकल सरकार तो छोड़िए, सेना और देश को बदनाम करना शुरू कर दिया है। इन्होंने सेना सम्बन्धी ख़बरों में भी अपने हिसाब से मिर्च-मसाला लगा कर ऐसे पेश करना शुरू कर दिया है, जैसे वो बॉलीवुड से जुड़ी कोई ख़बर हो। सेना के जो जवान सीमा पर कठिनतम परिस्थितियों में हमारी रक्षा करते हैं, उन्हें लेकर भ्रामक ख़बरें फैलाई जाती हैं। कुछ ऐसा ही अब मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या और ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) संदीप थापर को लेकर किया गया।

रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या ने पत्रकार अजय शुक्ला के उस बयान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन की सेना ने गलवान में घुस कर कब्जा कर लिया है। बता दें कि ये भारत के रुख के एकदम विपरीत है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारतीय सरजमीं में किसी ने भी एक इंच कर भी कब्जा नहीं किया है। शुक्ला ने अपने बयान का आधार ‘ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स’ और सेना के अंदरूनी सूत्रों को बताया।

उन्होंने सेना के SITREP का भी हवाला दिया। ये ‘सिचुएशन रिपोर्ट’ होता है, जो काफ़ी संवेदनशील होता है और गोपनीय रखा जाता है। सबसे पहला सवाल तो यही बनता है कि आख़िर अजय शुक्ला ने इसे प्राप्त कैसे किया? ‘रिपब्लिक टीवी’ पर अर्नब गोस्वामी के शो में मेजर गौरव आर्या ने भी यही मसला उठाया। आख़िर एक गोपनीय दस्तावेज अजय के हाथ लगा कैसे, जिसके सहारे उन्होंने भारत-विरोधी प्रोपेगंडा फैलाया?

इसके अगले ही दिन संदीप थापर ने ट्वीट कर के पूछा कि गौरव आर्या का तो सेना में 5-6 साल का ही करियर रहा है, फिर उन्हें ये सब कैसे पता? उन्होंने कई चीजें लिखी थीं, जिसका जिक्र करना सही नहीं होगा क्योंकि उन्होंने अपनी ट्वीट्स डिलीट कर ली है। गौरव आर्या ने इस ट्वीट को देखा और उसका जवाब दिया, लेकिन तब वो संदीप थापर से परिचित नहीं थे और न ही उनके सेना के बैकग्राउंड के बारे में कुछ भी जानते थे।

मेजर गौरव आर्या ने समझा कि संदीप थापर कोई ट्रोल हैं और उन्होंने उसी भाषा में उसका जवाब भी दिया। उन्हें उनके ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) होने की कोई जानकारी नहीं थी। लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग (रिटायर्ड) और पत्रकार अमन सिंह चिन्ना भी इस कंवर्शेशन में थे, जिन्हें मेजर गौरव आर्या ने रिप्लाई दिया। हालाँकि, अगले 5 मिनट के बाद आर्या को थापर के बारे में पता चला और उन्होंने इसके बाद उन्हें कुछ रिप्लाई नहीं किया।

बता दें कि जैसे ही मेजर आर्या को पता चला कि संदीप थापर कौन हैं, उन्होंने अगले ही दिन कॉल कर के उनसे माफ़ी माँगी। साथ ही गौरव आर्या ने इसके बाद से उनके खिलाफ एक भी ट्वीट नहीं किया। दोनों ने बात कर के आपस में चीजों को सुलझा लिया। साथ ही दोनों ने ही एक दूसरे के खिलाफ किए गए सारे ट्वीट्स को डिलीट करने का भी निश्चय किया। थापर ने भी आर्या की क्षमा प्रार्थना स्वीकार की।

लेकिन, कुछ मीडिया संस्थानों ने ख़ून सूँघते गिद्ध की तरह मँडराते हुए इस मामले में प्रोपेगंडा का छौंक लगा कर लोगों के समक्ष पेश करने लगे। ऐसा दिखाया गया जैसे मेजर गौरव आर्या ने ब्रिगेडियर संदीप थापर का अपमान किया है। अन्य मीडिया चैनलों और वेबसाइट्स पर भी यह खबर धीरे-धीरे आने लगी, प्रोपेगंडा फैलाया गया। दोनों द्वारा मामला सुलझा कर ट्वीट डिलीट करने के बावजूद ऐसा किया गया।

असली खेल इसके अगले दिन शुरू हुआ, जब मेजर गौरव आर्या अचानक से ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे। जाहिर है कि सेना के रिटायर्ड वेटरन्स ने तो ऐसा नहीं ही किया होगा। उनके पास कुछेक सौ या हजार फॉलोवर्स हैं, जिनसे ये चीजें ट्रेंड नहीं कराई जा सकती। इसके तुरंत बाद ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने इस सम्बन्ध में लेख प्रकाशित किया। ‘जनता का रिपोर्टर’ और ‘एनडीटीवी’ उसके नक्शेक़दम पर चले।

लल्लनटॉप ने भी प्रोपेगंडा फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी

जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस के नेता सलमान निजामी ने बिना किसी सबूत के मेजर गौरव आर्या पर एक फेसबुक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी मेड का बलात्कार किया है। ये सब कुछ 48 घंटों के भीतर हुआ। इससे पहले पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर द्वारा ऑपरेट किए जाने वाले ट्विटर हैंडल्स ने इससे पहले कुछ इसी तरह के आरोप लगाए थे। यानी, कइयों ने उसी पाकिस्तानी एजेंडा को आगे बढ़ाया।

कॉन्ग्रेस आईटी सेल ने भी इसी तरह के फेक न्यूज़ उठा कर इन आरोपों को दोहराया। यहाँ सवाल ये उठता है कि आखिर एक ही तरह के आरोप पाकिस्तान और कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग क्यों लगा रहे हैं? दोनों के बीच क्या कनेक्शन है? सवाल तो ये भी बनता है कि दो आर्मी वेटरन्स के बीच ट्विटर पर कुछ वाद-विवाद हुआ, उसमें इन सारे मीडिया संस्थानों को इतनी रुचि क्यों आने लगी? क्या इसमें कॉन्ग्रेस का हाथ है?

क्योंकि हर क्षेत्र में लोगों के बीच असहमति रहती है और इसी तरह सेना के वेटरन्स में भी हो सकती है। इसे लेकर इतना हंगामा क्यों किया गया? दरअसल, मेजर गौरव आर्या के बहाने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ को निशाना बनाने की कोशिश है क्योंकि वो ‘रिपब्लिक टीवी’ के ‘स्ट्रेटेजिक अफेयर्स’ के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर हैं। कॉन्ग्रेस और उसके साथी दलों द्वारा अर्नब गोस्वामी को निशाना बनाया जाना कोई नई बात नहीं है।

जिस तरह से मुंबई में ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी को थाने बुला कर 11 घंटे पूछताछ की गई और देश भर में उनके ऊपर दसियों एफआईआर दर्ज किए गए, उससे साफ़ है कि कॉन्ग्रेस उनके पीछे हाथ धो कर पड़ी हुई है। कॉलेज के दिनों से ही मेजर गौरव आर्या अर्नब गोस्वामी के दोस्त हैं। ऐसे में उनके बहाने अर्नब गोस्वामी पर निशाना साधने के लिए आर्या और थापर की ट्वीट्स को जरिया बनाया गया।

सीधा अर्थ ये है कि इस पूरे मामले में आर्मी वेटरन्स का कॉन्ग्रेस ने इस्तेमाल किया है। उनकी ट्वीट्स को सेना को बदनाम करने और एक मीडिया संस्थान को प्रताड़ित करने के लिए जरिया बनाया है। इसमें कई वामपंथी मीडिया वेबसाइट्स ने उनका साथ दिया। ये वेबसाइट्स को मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और इसके लिए सेना को बदनाम करने से भी नहीं हिचकेंगे।

जब हमने ब्रिगेडियर थापर से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि वो इस मामले पर कुछ भी नहीं बोलना चाहते क्योंकि यह बिना बात के उछाला गया।

भारत पर दबाव बनाने के चक्कर में फँसे नेपाल के पीएम ओली: इस्तीफे के डर से कम्युनिस्ट पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में नहीं लिया हिस्सा

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नए राजनीतिक नक्शे को मंजूरी देकर भारत पर दबाव और पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते थे लेकिन उनके इस कदम ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। जिससे वो अपनी कुर्सी बचाने के लिए खुद ही पार्टी के बैठकों से गायब हो रहे हैं कि कहीं पार्टी उनसे ही इस्तीफ़ा न माँग ले।

शुक्रवार (26 जून, 2020) को ओली के आवास पर हुई कम्युनिस्ट पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में भी पीएम ओली ने हिस्सा नहीं लिया। दरअसल, नक्शा जारी करने के बाद से ओली पर दो पदों में से एक पद को छोड़ने की माँग उठने लगी है।

काठमांडू मीडिया की खबरों के मुताबिक शुक्रवार को ओली के आधिकारिक आवास पर एनसीपी की स्थाई समिति की बैठक हुई। बैठक से एक बार फिर पीएम ओली नदारद रहे। बताया जा रहा है कि पीएम ओली ने पैनल को संदेश भेजा था कि वह देरी से बैठक में हिस्सा लेंगे, लेकिन वे नहीं आए। दरअसल, पार्टी स्थाई समिति की बैठक पहले 7 मई होने थी, लेकिन 44-सदस्यीय पैनल के समर्थन में ओली ने इसे रोक दिया था।

स्थाई समिति के एक सदस्य गोकरन बिस्ट ने कहा, “अध्यक्ष का बैठक से बचना अपनी ही पार्टी की बैठक का अपमान करना है। उन्हें अपने पार्टी के नेताओं की बात सुननी चाहिए थी। दरअसल बिस्ट को प्रचंड के खेमे का व्यक्ति माना जाता है।”

खबरों के मुताबिक नेपाल के कई नेता पीएम ओली का इस्तीफा लेने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि पार्टी के बहुमत से लगता है कि ओली पर अब सरकार चलाने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है। आपको बता दें कि पीएम ओली एनसीपी के दो चेयरपर्सन में से एक हैं।

जानकारों के मुताबिक पीएम ओली को उम्मीद थी कि इस महीने संसद के माध्यम से नए राजनीतिक मानचित्र के जरिए वे खुद को एक ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में पेश करेंगे, जो अपने विशालकाय पड़ोसी को भीतर से दबाव में ढालने के लिए खड़ा हो, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

दरअसल, लंबे समय बाद बुधवार (25 जून, 2020) को हुई नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में इसका असर भी देखने को मिला। ओली की पार्टी के सह अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड से इस मसले पर तीखी तकरार हुई।

प्रचंड ने साफ़ शब्दों में ओली से ‘त्याग’ के लिए तैयार रहने को कहा। रिपोर्ट के मुताबिक दहल ने ओली पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को अपनी मर्जी के मुताबिक चला रहे हैं, जबकि उन्होंने पार्टी कामकाज में उन्हें (दहल) अधिक अधिकार दिए जाने की बात स्वीकार की थी।

पार्टी के एक नेता के मुताबिक प्रचंड ने ओली से कहा, ”या तो हमें रास्ते अलग करने होंगे या हमें सुधार करने की जरूरत है। चूँकि अलग होना संभव नहीं है, इसलिए हमें अपने तरीके में बदलाव करना होगा, जिसके लिए हमें ‘त्याग’ करने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

गौरतलब है कि हाल में भारत ने लिपुलेख से धारचूला तक सड़क बनाई थी। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया था। इसके बाद ही नेपाल की सरकार ने विरोध जताते हुए 18 मई को नया नक्शा जारी किया था। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

ओली की कैबिनेट ने नेपाल का एक नया राजनीतिक मानचित्र पेश किया है, जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया। 13 जून को नक्शे में बदलाव से जुड़ा बिल पास कर दिया गया।

मध्य प्रदेश: गोरक्षा जिला प्रमुख और विहिप नेता रवि विश्वकर्मा की गोली मार कर हत्या: वीडियो आया सामने, जाँच में जुटी पुलिस

मध्य प्रदेश होशंगाबाद जिले के पिपरिया कस्बे में शुक्रवार (26 जून, 2020) शाम को विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नेता रवि विश्वकर्मा की गोली मार के हत्या कर गई। 39 वर्ष के रवि गोरक्षा जिला प्रमुख भी थे। करीब आधा दर्जन लोगों ने उन पर हमला किया था। जब विहिप की बैठक से अपने एक साथी के साथ होशंगाबाद से वापस लौट रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह घटना तब हुई जब रवि विश्वकर्मा कार से अपने साथी बजरंग दल के प्रांत सह संगठन मंत्री राजकुमार सिंह और सुरेश पटेल के साथ विहिप के एक बैठक से वापस अपने निवास स्थान लौट रहे थे। वहीं करीब शाम के 6 बजे के आसपास पिपरिया शहर के सबसे व्यस्ततम अंडर ब्रिज को पास करते दौरान पहले से घात लगाकर बैठे 6-7 लोगों ने लाठी, राड से रवि की कार को रोक कर उनपर हमला कर दिया।

हमले का वीडियो भी सामने आ चुका है जिसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह से अज्ञात गुंडे उन पर हमला कर रहे हैं।

वहीं हमलावरों ने जख्मी हालत में रवि को गाड़ी से खींच कर बाहर निकाला और उनके सर पर बंदूक से 2 गोली मार दी। जिसकी वजह से रवि की मौके पर ही मौत हो गई। कार में बैठे अन्य लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। रवि के दम तोड़ने के बाद आरोपी मौका देख वहाँ से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही मंगलवारा थाना और स्टेशन रोड पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घटनास्थल से कार व तीन कारतूस बरामद कर लिए है। वहीं मृतक रवि के भाई ने खुद पर भी हमले की आशंका जताई है।

बता दें रवि विश्कर्मा को पहले से ही अपने ऊपर होने वाले हमले की जानकारी थी। इसीलिए उन्होंने शुक्रवार दोपहर को होशंगाबाद पुलिस स्टेशन में एएसपी एपी सिंह को एक ज्ञापन सौंपा था। जिसमें उन्होंने रसूखदार नाम के एक शख्स से अपनी जान पर खतरा होने का उल्लेख किया था। और यह भी जानकारी दी थी कि उनके मित्र राकेश रघुवंशी को झूठे आरोप में फँसाया गया है।

वहीं पुलिस ने मृतक के भाई अमित और कार में मौजूद राजकुमार सिंह तथा सुरेश पटेल के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कर लिया है। एसडीओपी शिवेन्द्रू जोशी ने बताया, रवि की पुरानी रंजिश की वजह से उस पर हमला किया गया था। और हमलावरों द्वारा सिर्फ़ उसे मारने के इरादे से वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुट गई है।

वही इस घटना के बाद शहर में गैंगवार फिर शुरू होने की चर्चा है। पिपरिया में यह कोई पहली वारदात नहीं है, इसके पहले भी इसी तरह कई विहिप के नेताओं की दिन-दहाड़े हत्याएँ हो चुकी हैं। जिसमें पिछले साल 9 अक्टूबर, 2019 मध्य प्रदेश के मंदसौर में युवराज सिंह नाम के विहिप के एक नेता की 3 गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। जब वह गीता भवन अंडरब्रिज के पास स्थित एक चाय की दुकान पर थे।

दिल्ली में कोविड-19 पर लगाम लगाने के लिए अमित शाह ने खुद संभाला मोर्चा, जानिए कौन से हैं वो बड़े फैसले

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। दिल्ली में कोरोना वायरस का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। दिल्ली में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा सँभाला है। दिल्ली में बेकाबू होते कोरोना वायरस संक्रमण और मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा रविवार (जून 14, 2020) सुबह एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई थी। 

मीटिंग में केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोरोना से लड़ाई में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया। करीब 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस बैठक में महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे सरकारी इंतजामों की समीक्षा की गई। साथ ही आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया गया।

गृहमंत्री अमित शाह की पहल पर छतरपुर स्थित राधा स्वामी सत्संग परिसर में दस हजार बेड क्षमता का कोविड केयर सेंटर बनकर लगभग तैयार है। आईटीबीपी ने 10,000 से अधिक बेड की क्षमता वाले कोविड-19 केंद्र की देखरेख का जिम्मा बुधवार (जून 24, 2020) को ही संभाल लिया था।

दिल्ली में कोरोना के बिगड़े हालात को संभालने के लिए अमित शाह ने 4 आईएएस अधिकारियों- अवनीश कुमार, मोनिका प्रियदर्शिनी, गौरव सिंह राजावत और विक्रम सिंह मलिक के COVID-19 के प्रबंधन में सहायता करने के लिए तुरंत दिल्ली में तबादले का निर्देश दिया है। इसके साथ ही गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार के दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों एससीएल दास और एसएस यादव को केंद्र के साथ जुड़ने का निर्देश दिया। 

दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को देने का निर्णय लिया। कोरोना की टेस्टिंग बढ़ाई गई।

गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुसार, 27 जून 2020 से दिल्ली में सीरोलॉजिकल सर्वे की शुरुआत हुई। दिल्ली कोराना की चपेट में किस हद तक आ चुकी है, इस सर्वे से पता चलेगा। इसमें अलग-अलग इलाकों के रैंडम सर्वे किए जाएँगे। रैंडम तरीके से घरों को चुनकर वहाँ रहने वाले लोगों के ब्लड सैंपल कलेक्ट करके उनका कोरोना टेस्ट होगा। 10 जुलाई तक दिल्ली में 20 हजार सैंपल लिए जाएँगे। इसके लिए खास किट टीम को सौंपी गई है। यह टीम डॉक्टर वी के पॉल कमिटी की सिफारिशों पर तैयार की गई है।

सर्वे से एंटीबॉडीज की जाँच करके यह पता लगाया जाएगा कि दिल्ली में कौन-कौन से ऐसे इलाके हैं और ऐसी कितनी आबादी है, जहाँ लोगों को कोरोना हुआ, मगर वो अपने आप ठीक भी हो गए। इससे वायरस के प्रसार और उसकी क्षमता का पता लगाने में भी मदद मिलेगी। अगर कोई व्यक्ति कोरोना की चपेट में आता है, लेकिन उसके अंदर कोई लक्षण नहीं उभरता है, तो ऐसे लोगों के शरीर में 5-7 दिन के अंदर अपने आप एंटीबॉडी बनना शुरू हो जाती हैं, जो वायरस को शरीर में पनपने नहीं देती हैं।

सोमवार (15 जून 2020) को शाह ने सर्वदलीय बैठक की। इसके बाद वे LNJP अस्पताल जाकर हालात का जायजा लिया। अस्पताल पहुँचे अमित शाह ने कॉन्फ्रेंस रूम में वरिष्ठ डॉक्टरों से मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टरों ने शाह को अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या, कोरोना से अभी तक होने वाली मौतें और दिल्ली से बाहर के कोरोना मरीजों की अस्पताल में संख्या के बारे में अवगत कराया। वहीं अमित शाह ने डॉक्टरों से कोरोना वायरस से होने वाली मौत और उनके ठीक होने की दर के बारे में जानकारी ली।

इसके साथ ही गृहमंत्री अमित शाह को पता चला कि टेस्टिंग कम हो रही है और रिजल्ट भी देरी से आता है। उनकी पहल पर दिल्ली में कुल 169 रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्टिंग सेंटर शुरू हुए हैं। ये सेंटर आधे घंटे में नतीजे देते हैं। अब दिल्ली में तीन गुना टेस्टिंग शुरू हुई है। गृह मंत्री ने बताया कि घर-घर स्वास्थ्य सर्वे भी 30 जून को पूरा हो जाएगा।

राजस्थान: कॉन्ग्रेस राज में ‘मजहब’ पर मेहरबान पुलिस, रेप की घटनाओं पर छाई चुप्पी

महिला सुरक्षा के नाम पर सियासत को माथे पर उठा लेने वाले, राजस्थान में रेप की बढ़ती घटनाओं पर चुप हैं। ऐसा लगता है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस शासित इस प्रदेश में महिलाओं की इज्जत-आबरू की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी खुद की या फिर उनके परिजनों की ही है।

हालिया घटनाओं पर नजर डालने से ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस आम लोगों के लिए नहीं है। यदि आरोपित समुदाय विशेष के हुए तो पुलिस और ढीली दिखाई पड़ती है। ऐसे में यदि आपने​ एक्टिविस्ट बनने जैसी कुछ चेष्टा की तो न्याय पाने की आस से पहले आप किसी पेड़ से लटके भी मिल सकते हैं।

ऐसे मामलों में पुलिस पहले पीड़ित पक्ष को ही समझाएगी। कथित तौर पर राजीनामा का दबाव बनाएगी। फिर भी नहीं माने, तो आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को कुछ दिन की मोहलत देनी होगी। मोहलत के इन दिनों में विशेषाधिकार प्राप्त समुदाय का आरोपित दबाव बनाएगा। तब भी राजीनमे की सूरत नहीं बनी तो पीड़ित के लिए कोई न कोई पेड़ की डाली तैयार है।

पहले सबसे ताजा मामले से पड़ताल शुरू करते हैं। अलवर जिले का रामगढ़ थाना क्षेत्र। जानकारी के अनुसार रामगढ़ कस्बे में हिन्दू परिवार की एक बारहवीं क्लास में पढ़ने वाली नाबालिग बालिका से समुदाय विशेष के बालौत नगर निवासी अनीश ने बलात्कार करने की कोशिश की। उसकी छेड़छाड़ की हरकतों से परेशान होकर उसने अपनी 12वीं की पढ़ाई छोड़ दी और कुएँ में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

इसके बाद पीड़िता ने रामगढ़ थाने में अनीश, तौफिक और अंजुम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन जैसा कि कथित तौर पर समुदाय विशेष के लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर लेने से प्रशासन को दंगा भड़कने की आशंका रहती है, मामला दर्ज नहीं किया गया।

पुलिस ने आरोपित तीन मुस्लिम युवकों को शांतिभंग के आरोप में जरूर पकड़ा। बाद में जब मामला मीडिया में उछल गया तब पुलिस ने 20 जून की रात मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी अनीश खान को पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार कर लिया। लेकिन उसका साथ देने वाले अन्य दो अन्य आरोपित तौफिक और अंजुम को बचाने में भी जुट गई।

पीड़िता के भाई का कहना है कि आरोपित युवक अनीश के परिवार के लोग प्रलोभन और धमकी देकर राजीनामे के लिए दबाव बना रहे हैं और पुलिस भी बदनामी की बात कहकर राजीनामा करने का दबाव बना रही है। स्थानीय भाजपा नेता ज्ञानदेव आहूजा कहते हैं कि इस मामले में पीड़ित परिवार पर राजनैतिक दबाव बनाया जा रहा है। वे आरोप लगाते हैं कि इसमें कॉन्ग्रेस के दो नेता भी शामिल हैं। इस घटना का सबसे दुखद पहलू, कुछ दिनों बाद ही पीड़िता के पिता का घर से 500 मीटर की दूरी पर पेड़ से लटका हुआ शव मिला।

इससे पहले मई महीने में टोंक जिले के पचेवर थाना क्षेत्र के बाछेड़ा गाँव में एक नाबालिग के साथ समुदाय विशेष के चार युवकों नासिर खान, सलमान, जाकिर और एक नाबालिग ने सामूहिक दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद उस पर धारदार हथियारों हमलाकर मरणासन्न हालात में छोड़कर भाग गए।

इस मामले में जनप्रतिनिधियों के सामने आने पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। लेकिन एक सरकारी महिला चिकित्सक ने पीड़िता के परिजनों पर कोर्ट से बाहर ही मामला ‘सैटल’ करने का दबाव बनाया और पीड़िता को अपमानजनक भाषा में संबोधित किया। यह पुलिस और प्रशासन का पीड़िताओं के साथ कैसा रवैया है?

मई महीने में ही अलवर के भिवाड़ी के यूआईटी फेज थर्ड थाना क्षेत्र के आलमपुर गाँव में 9वीं की छात्रा को अगवा कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और वीडियो बनाने के बाद उसके सिर को दीवार से मारकर उसे घायल करने का मामला सामने आया था।

प्रवासी परिवार की पीड़िता के साथ हुई घटना की रिपोर्ट पुलिस ने दो दिन बाद दर्ज की। पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करने के बाद पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पीड़िता के पिता के अनुसार उसमें 11 मई को यूआईटी फेज थर्ड थाने जाकर घटना के बारे में जानकारी दी, लेकिन यहाँ से पुलिस ने उसे महिला थाने भेज दिया। महिला थाने का चक्कर लगाने के बाद 13 मई को उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई। महिला अधिकारों पर आवाज बुलंद करने वाली सरकार में पुलिस संवेदनशीलता की यह पराकाष्ठा है।

अलवर के ही थानागाजी में क्षेत्र में 2019 के अप्रैल महीने में दलित महिला के साथ बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म का मामला तो पुलिस ने लोकसभा के दूसरे चरण के चुनाव संपन्न होने तक रोके रखा गया था, ताकि राजनैतिक आकाओं को किसी भी तरह का राजनैतिक नुकसान नहीं पहुँच सके।

चुरू के सरदारशहर पुलिस थाने ने तो राज्य के पुलिस और प्रशासन को गहरे कलंक में डूबो दिया था। एक दलित महिला ने थाने के पुलिसकर्मियों पर बलात्कार और बुरी तरह प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगाया। इसी तरह राजधानी जयपुर के वैशाली नगर थाने में एक दुष्कर्म पीडिता ने पुलिस की नाकामी से तंग आकर खुद को आग के हवाले कर दिया था।

उत्तरप्रदेश में बलात्कार की घटनाओं पर पूरी सियासत को सिर पर उठाने वाली उभरती महिला नेत्री को राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ होने वाली बलात्कार की घटनाओं पर मानों साँप सूँघ जाता है। महिलाओं के खिलाफ इऩ अमानवीय घटनाओं पर आंदोलन या सरकार को फटकार तो दूर, उनका एक पिद्दी सा ट्वीट भी नजर नहीं आता है। यह दोहरा रवैया क्या कहलाता है?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019 में महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के मामलों में 81.45 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2018 की तुलना में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध 50 फीसदी तक बढ़े हैं। 2019 में राजस्थान में दुष्कर्म के मामले 5997 दर्ज किए गए।

क्या महिला सुरक्षा को लेकर सरकार अपने पुलिस बल को राजनैतिक मानसिकता से मुक्त करवा पाएगी?

जमानत पर बाहर चिदंबरम चीन को पैसे लौटाने की बात कर रहे: JP नड्डा ने PMNRF को लेकर कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार पर भारत-चीन तनाव पर बयान और राजीव गाँधी फाउंडेशन के चीन से चन्दा लेने पर करारा वॉर किया है। जेपी नड्डा ने कहा कि सोनिया गाँधी कोरोना के कारण या चीन की स्थिति के कारण मूल प्रश्नों से बचने का प्रयास न करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत की सेना देश की और हमारी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित है।

बकौल जेपी नड्डा, 130 करोड़ देशवासी जानना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में रहते हुए क्या-क्या काम किया और किस तरह से आपने देश के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने बताया कि भाजपा ने कुछ दिन पहले ट्वीट करके राजीव गांधी फाउंडेशन पर प्रश्न उठाए थे, आज पी चिदंबरम कहते हैं कि फाउंडेशन पैसे लौटा देगा। देश के पूर्व वित्त मंत्री जो खुद बेल पर हों, उसके द्वारा ये स्वीकारना होगा कि देश के अहित में फाउंडेशन ने नियम की अवहेलना करते हुए फंड लिया।

जेपी नड्डा ने इस दौरान कॉन्ग्रेस को 10 सवालों का पुलिंदा भी सौंपा। उन्होंने कहा कि ठाकुर वैद्यनाथन एंड अय्यर कंपनी पीएमएनआरएफ ऑडिटर थी। रामेश्वर ठाकुर इसके फाउंडर थे। वो राज्य सभा के सांसद थे और 4 राज्यों के राज्यपाल रहे। कई दशकों तक उसके ऑडिटर रहे। उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि ऐसे लोगों को ऑडिटर बनाकर क्या सरकार करना चाह रही थी। पीएम नेशनल रिलीफ फंड में एक ट्रस्टी कॉन्ग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी है।

नड्डा ने सवाल पूछते हुए कहा कि पीएम नेशनल रिलीफ फंड जिन लोगों की सेवा और उनको राहत पहुँचाने के लिए है, उससे 2005-08 तक राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा क्यों गया? बता दें कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को पंजाब नेशनल बैंक में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले के अभियुक्त मेहुल चोकसी से भी दान मिला था। उसने 2014-15 में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले इस फाउंडेशन में अघोषित दान किया था।

दान नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (Naviraj Estates Private Limited) के नाम से किया गया था और मेहुल चोकसी इस कंपनी के निदेशकों में से एक है। ज्ञात हो कि पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हज़ार करोड़ रुपए के ग़बन का आरोप है। ये मामला 2018 में सामने आया था। चोकसी देश छोड़कर भाग चुका है। चीन सरकार की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा फंडेड चीन एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कॉन्टैक्ट (CAIFC) ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन को ‘वित्तीय सहायता’ दी थी।

CAIFC संयुक्त राज्य अमेरिका के एफबीआई के रडार पर भी था और यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की एक रिपोर्ट में अमेरिकी कॉन्ग्रेस में कहा गया था कि वह विदेशों में जासूसी गतिविधियों में शामिल था। गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) को चीन की कम्युनिस्ट सरकार से लेकर PMNRF से दान मिलने के कई साक्ष्य सामने आए हैं। एक समय भारत के वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने देश के सरकारी बजट से इस फाउंडेशन के लिए अलग से धन आवंटन की माँग तक की थी।

‘आरोप लगाने से पहले 1962 को याद करें’: राहुल गाँधी पर शरद पवार का तीखा हमला, कहा- चीन पर राजनीति ठीक नहीं

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए शनिवार (जून 27, 2020) को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाते समय यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था।

शरद पवार का इशारा कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर था, जो गलवान घाटी में चीन के साथ लद्दाख सीमा पर चल रहे गतिरोध को लेकर केंद्र पर हमला कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शरद पवार ने यह बयान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए चीनी आक्रमण के सामने आत्मसमर्पण करने के आरोप के सम्बन्ध में दिया।

कॉन्ग्रेस पार्टी अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद से केंद्र पर तंज कर रही है। उनका कहना है कि पीएम मोदी स्पष्ट करें कि चीन ने लद्दाख में भारत में घुसपैठ की है या नहीं। हालाँकि, पीएम मोदी इस सम्बन्ध में पहले ही आधिकारिक रूप से कह चुके हैं कि चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ नहीं की और हमारी सेना ने उन्हें मुँहतोड़ जवाब दिया।

इस पर राकांपा (NCP) अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि 1962 के युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब पड़ोसी देश ने भारतीय भूमि के बड़े हिस्से पर दावा किया है।

उन्होंने कहा- “हम यह नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था जब चीन ने भारत के क्षेत्र के 45,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। ये आरोप लगाते समय, किसी को यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था। यह राष्ट्रीय हित का मुद्दा है और किसी को इस पर राजनीति में नहीं करनी चाहिए।”

गौरतलब है कि शरद पवार की राकांपा (NCP) शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार में कॉन्ग्रेस के साथ उनकी सहयोगी पार्टी है। अक्साई चिन क्षेत्र के विषय में बात करते हुए राकांपा प्रमुख ने यह भी कहा कि गलवान घाटी में गतिरोध के लिए केंद्र को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा – “जब भी चीनी सैनिकों ने भारतीय जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की, हमारे सैनिकों ने चीनी सेना के जवानों को पीछे धकेलने का प्रयास किया है। यह कहना कि यह किसी एक की असफलता है या किसी रक्षा मंत्री की विफलता है, सही नहीं है। अगर हमारी सेना अलर्ट पर नहीं होती, तो हमें चीनी दावे की जानकारी नहीं होती।”

पवार ने भारत और चीन के बीच समझौते का हवाला देते हुए बताया कि दोनों राष्ट्रों ने एलएसी पर बंदूक का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया था।

उल्लेखनीय है कि गत 15 जून को भारत-चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। जिसके बाद से राहुल गाँधी निरंतर भारती सेना के नाम पर इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं।

पवार ने सर्वदलीय बैठक में भी दिया था केंद्र का साथ

गलवान घाटी में चल रहे गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट कहा था कि सीमा पर सैनिक हथियार के साथ जाते हैं या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय संधि से तय होता है और सियासी दलों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दरअसल, शरद पवार कॉन्ग्रेस की ही सरकार में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के समय रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वे 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार शुरू हुए शांति प्रयासों के अगुआ भी रहे हैं। रक्षा मंत्री के रूप में 1993 में दोनों देशों के बीच पीस एंड ट्रंक्विलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने चीन भी वही गए थे।

हरे रंग का कुर्ता, बाथरोब के टुकड़े और बिखरी पड़ी आलमारी: सामने आई सुशांत के मौत की डिटेल्स, परिवार का बयान

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में जाँच के बाद कई और चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आत्महत्या वाली जगह पर पुलिस को बाथरोब के टुकड़े भी मिले हैं। पुलिस ने शक जताया है कि शायद उन्होंने आत्महत्या के पहले बाथरूम के बाथरोब को इस्तेमाल किया था लेकिन वो टूट गया, जिसके टुकड़े वहाँ पड़े मिले। इससे निष्कर्ष निकलता है कि उन्होंने दो बार में आत्महत्या की।

पहली बार में वो कामयाब नहीं हुए थे। न्यूज़ 18 की ख़बर के अनुसार, पुलिस को सुशांत सिंह राजपूत की आलमारी में कपड़े बिखरे पड़े हुए मिले। इससे अंदेशा जताया गया है कि बाथरोब के टूट जाने पर उन्होंने अपनी आलमारी में से हरे रंग का एक कुर्ता निकाला और उसी को रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया। जब तक पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, तब तक सुशांत की बहन व अन्य लोगों ने फंदे को काट कर बॉडी नीचे उतार ली थी।

फ़िलहाल इस हरे रंग के कुर्ते को फॉरेंसिक लैब में जाँच के लिए भेजा गया है। जाँच में ये पता लगाया जाएगा कि ये कुर्ता किसी एक व्यक्ति का भार उठाने की क्षमता रखता भी है या नहीं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में लोगों द्वारा तरह-तरह के सवाल उठाते हुए सीबीआई जाँच की माँग की जा रही है। उधर परिवार ने बयान जारी कर के कई अहम घोषणाएँ की है और अपनी बात सामने रखी है।

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने जारी किया बयान

परिवार ने कहा है कि दुनिया के सुशांत सिंह राजपूत परिवार के लिए गुलशन की तरह थे। उन्हें खुले विचारों वाला, बातूनी, और अविश्वसनीय ढंग से प्रतिभाशाली बताया गया है। परिवार ने ‘ राजपूत फाउंडेशन’ की स्थापना की घोषणा की है, जिसमें सुशांत के दिल के क़रीबी क्षेत्रों सिनेमा, विज्ञान और खेल में प्रतिभावान युवाओं को मौका दिया जाएगा और उनका समर्थन किया जाएगा। परिवार ने कहा है कि उनकी लिगेसी और यादों को सजोने के लिए ऐसा किया जाएगा।

साथ ही पटना के राजीव नगर स्थित उनके घर को एक मेमोरियल में तब्दील कर दिया जाएगा, जहाँ सुशांत ने अपने बचपन के दिन गुजारे थे। हजारों किताबें, टेलिस्कोप और फ्लाइट स्टिमुलेटर सहित सुशांत की अन्य व्यक्तिगत चीजों को उनके फैंस के देखने के लिए वहाँ रखा जाएगा। साथ ही परिवार फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को भी मेंटेन करेंगे, ताकि उनकी यादों को ज़िंदा रखा जा सके।

परिवार ने कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत अपने हर एक फैन को प्यार करते थे, उन्हें सम्मान देते थे। परिवार ने कहा कि उनके जाने से एक स्थाई शून्य पैदा हो गया है जो परिवार में हमेशा रहेगा। साथ ही विज्ञान सम्बन्धी उनकी बातों को भी याद किया गया है। परिवार ने कहा कि वो लोग ये स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि वो सुशांत की हँसी फिर नहीं सुन पाएँगे। उन्होंने कहा कि सुशांत ने बिना किसी दायरे के सपने देखे और और शेर की तरह उन सपनों का पीछा किया।

सुशांत की आत्महत्या पर कंगना ने कहा था कि बॉलीवुड के लिए सुशांत ने इतनी अच्छी फिल्में कीं। मगर उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने ‘काय पो छे’ से डेब्यू किया। उन्हें डेब्यू तक का अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने 6-7 साल के अंतराल में केदारनाथ, धोनी और छिछोरे जैसी अच्छी फिल्में बनाईं। मगर, फिर भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला। कोई सराहना नहीं मिली। वहीं, गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिल जाते हैं।

फिल्म निर्देशक अभिषेक कपूर ने खुलासा किया है कि ‘केदारनाथ’ की रिलीज के बाद मीडिया ने सारा अली ख़ान को तो सिर-आँखों पर बिठा लिया था, लेकिन सुशांत सिंह राजपूत को नकार दिया था, जिससे वो बुझे-बुझे से रहते थे। इस फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक ही थे। उन्होंने ही सुशांत की लॉचिंग फिल्म ‘काई पो चे’ को भी डायरेक्ट किया था। कपूर ने बताया कि मीडिया द्वारा इस तरह का भेदभाव किए जाने के कारण सुशांत अंदर से बुझे-बुझे से रहते थे। बिहार में सलमान खान से भी लोग आक्रोशित हैं।