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लाठी, रॉड, नुकीली तार के इस्तेमाल से छद्म युद्ध की तैयारी में लगा है चीन, भाड़े के लड़ाके दे रहे ट्रेनिंग: रिपोर्ट्स

रिपोर्ट्स के अनुसार, तिब्बत के लड़ाके लाठी-भाले, डंडा और रॉड के जरिए युद्ध करने में माहिर होते हैं। इसलिए इन्हीं के भरोसे अब चीन भारत से छद्म युद्ध करने की कोशिशों में जुटा है। तिब्बत के पठारी इलाके में रहने वाले ये लड़ाके ही चीनी सेना को नुकीली चीज या फिर लाठी व डंडों से लड़ने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

गलवान घाटी पर 14-15 जून को भारत-चीन सेना के बीच हुई झड़प के बाद लोगों के मन में कई सवाल हैं। एकतरफ सीमा पर शांति बनाने के लिए लगातार प्रयास चल रहा है। तो वहीं युद्ध की स्थिति को भाँपते हुए भारतीय सेना भी पूरी तैयारी से LAC पर तैनात है।

इसी बीच खबर आई है कि चीन अब भी अपनी हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहा। चीन लगातार सीमा पर फौजियों का जमावड़ा बढ़ा रहा है। साथ ही अपने सैनिकों को हैवान बनाने के लिए उसने एक नया तरीका ढूँढ निकाला है।

दरअसल, 1996 के एक समझौते के अनुसार, एलएसी पर दोनों देशों के सिपाही हथियार का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसलिए अब चीन एक्शन लेने के लिए अपने सैनिकों को तिब्बती लड़ाकों से ट्रेनिंग दिलवा रहा है। साथ ही उन्हें भी सेना में शामिल कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तिब्बत के लड़ाके लाठी-भाले, डंडा और रॉड के जरिए युद्ध करने में माहिर होते हैं। इसलिए इन्हीं के भरोसे अब चीन भारत से छद्म युद्ध करने की कोशिशों में जुटा है। तिब्बत के पठारी इलाके में रहने वाले ये लड़ाके ही चीनी सेना को नुकीली चीज या फिर लाठी व डंडों से लड़ने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

मतलब साफ है कि अपनी विस्तारवादी नीति को बढ़ावा देने के लिए चीन छद्म युद्ध की तैयारियों में जुटा है। जिसके लिए वह भाड़े के लड़ाकों की मदद तक ले रहा है।

याद दिला दें कि 14-15 जून को भारतीय सैनिकों पर जो चीन सेना ने धोखे से हमला किया था, उसमें भी उन्होंने लाठी-डंडे-कंटीली तारों का प्रयोग ही किया था। भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर एक वैसे ही हथियार की वायरल तस्वीर की सच्चाई बताते हुए ये भी स्पष्ट किया था कि भले ही ये हथियार वो नहीं है, जिससे हमला हुआ। लेकिन ये सच है इसी तरह के हथियारों से चीन ने भारतीय सैनिकों पर वार किया।

गौरतलब है कि साल 1996 और 2005 में भारत और चीन के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के मुताबिक ये तय हुआ कि दोनों देशों के सैनिक गश्त के दौरान आमने-सामने आने पर एक दूसरे पर गोली नहीं चला सकते। इसके अलावा एलएसी के 2 किमी के दायरे में गश्त के दौरान अपने रायफल के बैरल को भी जमीन की ओर झुकाकर रखेंगे। साथ ही बिना सूचना के LAC के 10 km के भीतर सैन्य विमान भी नहीं उड़ाएँगे।

मगर, साल 2020 में चीन ने इस समझौते का उल्लंघन किया, जिसके कारण भारत को भी प्रभावी कदम उठाने पड़े। अब भारत ने चीन की नीयत को भाँपते हुए कमांडर्स को सीमा पर स्थिति देखते हुए हथियारों का इस्तेमाल करने की आजादी दे दी है। दूसरी ओर चीन ने सीमा पर भारी हथियारों, तोप और टैंको को तैनात कर दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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