Home Blog Page 4730

वे PM की प्रिय हैं, चूड़ी क्या सब कुछ दे सकती हैं: स्मृति ईरानी पर कॉन्ग्रेस MLA शशांक भार्गव, FIR

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक शशांक भार्गव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। भार्गव मध्य प्रदेश के विदिशा से विधायक हैं।

भार्गव ने यह टिप्पणी एक साइकिल रैली के दौरान मीडिया से बात करते हुए की थी। इस रैली का आयोजन पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ किया गया था।

इस मामले को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन और अन्य भाजपा नेताओं की ओर से विदिशा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने भाजपा नेताओं की शिकायत के आधार पर कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (अश्लीलता) और 504 (जानबूझकर अपमान करने के इरादे से बोलना) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

विधायक शशांक भार्गव ने कहा था कि कोरोना वायरस के कारण देश की अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त है। इसलिए सरकार को मूल्य वृद्धि वापस लेनी चाहिए। विधायक ने आगे कहा कि मैं आप लोगों के माध्यम से कहना चाहता हूँ कि हमारी एक केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, पहले भी जब मूल्य वृद्धि होती थी तो वह चूड़ियाँ लेकर घूमा करती थीं। वह प्रधानमंत्री मोदी जी की बेहद करीबी हैं और उनकी प्रिय हैं। चूड़ी तो क्या वे सब कुछ दे सकती हैं। उन्हें वे चूड़ियों के साथ कुछ भी भेंट कर जनता के हित में मोदी जी से निवेदन करें कि तुरंत मूल्य वृद्धि वापस लें।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बयान के बाद विदिशा स्थित कॉन्ग्रेस विधायक की एक फैक्ट्री के सामने करीब 150 भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच टकराव हो गया और भाजपा नेताओं पर फैक्ट्री में तोड़फोड़ करने का भी आरोप है।

खबर के मुताबिक विरोध कर रहे लोगों ने कारखाने के भीतर बने भार्गव के कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की गई और दो वाहनों के शीशे भी तोड़ दिए। आरोप है कि इस दौरान विधायक ने हवाई फायर भी किए।

घटना की जानकारी मिलते ही एसपी विनायक वर्मा सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँच गए। घटना के बाद विधायक शशांक भार्गव के आवास के बाहर कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था कर दी गई है।

आत्मनिर्भर प्रदेश से हासिल होगा आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य, टूटेगी चीन की कमर: वॉलेट से साजिशों को जवाब देने का अभियान

कोविड महामारी देकर संसार को आर्थिक व सामाजिक रूप से संकट में डालने और एक प्रकार का जैविक युद्ध प्रारंभ करने वाले चीन को सबक सिखाने के लिए विश्व तैयार बैठा है और इसमें भारत की भूमिका निश्चित ही महत्वपूर्ण होगी।

इस संबंध में भारत की भूमिका दोहरी है। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आह्वान किया है कि इस संकट को अवसर में परिवर्तित किया जा सकता है। भारत इसे आत्मनिर्भरता का अवसर बना सकता है और जनता के सहयोग से वॉलेट के माध्यम से भारत के विरुद्ध चीन के षड्यंत्र व शत्रुता को समुचित प्रत्युत्तर दे सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देकर आत्मनिर्भर भारत का जो अभियान प्रारंभ किया है, उसकी सफलता भारत की रणनीतिक विजय का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। इस अभियान के लिए मोदी सरकार ने अनेक कार्यक्रम शुरू किए।

नीतिपरक कार्यक्रमों व योजनाओं में बदलाव के साथ ही हाल ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाँवों में स्थायी बुनियादी ढाँचा तैयार करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया। यह अभियान देश के 6 राज्यों के 116 जिलों में 125 दिनों तक प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए मिशन मोड में चलेगा।

इस अभियान के लिए केंद्र सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपए के निधि की व्यवस्था की है। इस योजना के अंतर्गत 25 सरकारी कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है। श्रमिकों को उनके कौशल के अनुसार संबंधित कार्य में रोजगार दिया जाएगा।

यह महत्वाकांक्षी योजना कोविड महामारी से उपजी स्थिति में विभिन्न राज्यों से गृह प्रदेश वापस लौटे 30 लाख प्रवासी श्रमिकों के लिए ही नहीं, वरन् प्रदेश में ही श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने वाली उल्लेखनीय कार्ययोजना सिद्ध होगी।

केंद्र की इस योजना में उत्तर प्रदेश के 31 जनपद सम्मिलित किए गए हैं। इसी के साथ आज प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश अभियान का प्रारंभ किया।

अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करके नया रिकॉर्ड बनाने के लक्ष्य पर चल पड़े हैं। एक ही दिन एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। प्रदेश में उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत अभियान में योगदान देने के लिये 1.11 लाख लघु व मध्यम उद्यम इकाइयों के 3.51 लाख उद्यमियों को ऋण भी दिया गया, जो प्रदेश की औद्योगिक उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार सृजन भी करेगा।

उल्लेखनीय है कि जनसंख्या के आधार पर देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की घोषणा और इसकी सफलता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मानव संसाधन की प्रचुरता उत्तर प्रदेश के विकास के साथ ही देश की आत्मनिर्भरता में गति पकड़ने में वरदान सिद्ध हो सकता है।

कोविद महामारी के बाद बदली परिस्थितियों को अवसर मानते हुए इस दिशा में समग्र नीति व योजना बनाई गई है। प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने के साथ ही स्किल मैपिंग का काम कराना शुरू कर दिया गया था। आज राज्य सरकार के पास 36 लाख प्रवासी कामगारों का पूरा डेटा बैंक मैपिंग के साथ तैयार है।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान प्रदेश में औद्योगिक व अन्य संगठनों के साथ साझेदारी बनाते हुए भारत सरकार और यूपी सरकार के विस्तृत कार्यक्रमों का भाग है। इस अभियान में रोजगार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया जाएगा।

कुल मिलाकर केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अभियान और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान को समग्रता में देखा जाए और इस संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि इससे तीन मोर्चों पर सफलता मिल सकती है।

एक तो देश में उत्पादन की आत्मनिर्भरता, भारतीय उद्यमियों के उत्पादों के निर्यात को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति में लाने तथा देश में स्थानीय स्तर पर उद्यमशीलता व रोजगार के अवसर बढ़ाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने के लक्ष्य की पूर्ति एक साथ होगी।

मोदी सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने की दिशा में सरकारी ई-मार्केट प्लेस (जीईएम) पर सामान बेचने वाली कंपनियों को अब अपने सभी नए उत्पादों को पंजीकृत कराते वक्त उसे बनाने वाले देश या कंट्री ऑफ ओरिजिन के बारे में जानकारी देना अनिवार्य करना इसी लक्ष्य का भाग है।

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, जिन विक्रेताओं ने जीईएम पर इस नए फीचर के लागू होने से पहले अपने उत्पाद अपलोड किए हैं, उन्हें भी कंट्री ऑफ ओरिजिन को अपडेट करना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके उत्पादों को जीईएम से हटा दिया जाएगा।

जीईएम ने उत्पादों में स्थानीय निर्माण वाले उत्पाद का भाग का संकेत देने के लिए भी प्रावधान किया है। इसके साथ ही अब पोर्टल पर मेक इंन इंडिया फिल्टर एक्टिव कर दिया गया है। क्रेता यदि भारतीय वस्तु ही क्रय करना चाहे तो इसमें उसे केवल केवल वही उत्पाद दिखेगा, जो भारत में बना हुआ है। यदि क्रेता चाहे तो सरकारी ई-मार्केट प्लेस से केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद कर सकता है, जो कम से कम 50 फीसदी स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरा करते हैं।

इतना ही नहीं, भारतीय उद्योगों व स्थानीय कच्चा माल के उत्पाद को प्रोत्साहन देने के लिये उत्पाद निर्माण में स्थानीय सामग्री के उपयोग के प्रतिशत को भी अनिवार्य रूप से लिखने का प्रावधान कर दिया है। इससे क्रेता को पता चल सकेगा कि उत्पाद में कितना प्रतिशत भारतीय माल लगा है।

इन सारी योजनाओं का एक साथ विश्लेषण करें तो इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में मोदी सरकार मिशनरी मोड में कार्यरत है और यदि उत्तर प्रदेश सरकार की तरह अन्य सभी राज्य भी इसमें मिशन मोड में कार्य करने लगे तो यह देश में भारतीय उद्योग-धंधों के विकास के साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन को स्थापित कर क्षेत्रीय आर्थिक असंतुलन दूर करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार व व्यापारिक विकास के लक्ष्य को साकार करेगा।

इसके अतिरिक्त आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता भारत को विश्व का आपूर्ति केंद्र बनाने व उत्पादन हब बनाने की संभावना को भी मूर्त रूप प्रदान कर सकती है, जिससे भारत के आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना साकार होने के साथ ही वैश्विक बाजार में चीन के उत्पादों पर निर्भरता को कम करके संसार को चीन के कुत्सित मंशा व चालों से बचाने में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस अभियान की सफलता वैश्विक संकट काल बीत जाने के बाद भारत 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में गतिशील कदम और इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए मूलभूत संसाधन, सुविधा और आत्मविश्वास की सुदृढ़ता सुनिश्चित कर सकती है।

बिशप स्कॉट गर्ल स्कूल की प्राचार्या ने स्कूल फीस पर शिकायत पर अभिभावक से की हाथापाई, करियर खराब करने की दी धमकी

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान स्कूल फीस को लेकर स्कूलों और अभिभावकों के बीच विवाद के कई मामले सामने आए हैं। इसी तरह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे पटना का एक निजी स्कूल अभिभावकों की शिकायत पर बदसलूकी पर उतर आया।

बिहार के पटना स्थित बिशप स्कॉर्ट गर्ल्स स्कूल (Bishop Scott Girl’s school) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूल की प्राचार्या ने एक अभिभावक के साथ बदसलूकी करते हुए उनका मोबाइल छीन लिया था और उनके साथ हाथापाई भी की। जिस अभिभावक के साथ स्कूल की प्राचार्य ने बदसलूकी की, उनकी शिकायत थी कि स्कूल उनसे प्रशासन के आदेश के बाद भी स्कूल ट्रांसपोर्टेशन चार्ज ले रहा था।

इस वीडियो में, प्रिंसिपल को स्कूल फीस और परिवहन शुल्क के खिलाफ विरोध करने वाले माता-पिता की शिकायत पर बहस करते और धमकी देते हुए देखा जा सकता है। अभिभावक ने इस विवाद को अपने मोबाइल में कैद कर लिया तभी स्कूल प्रिंसिपल ने अभिभावक का मोबाइल छीन लिया और उनसे छीनाझपटी भी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वीडियो के सामने आने के बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशक रणजीत कुमार सिंह ने पटना के बिशप स्कॉर्ट गर्ल्स स्कूल के खिलाफ जाँच का आदेश देते हुए दो सदस्यीय जाँच टीम गठित कर दी है।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट कहा है कि कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के दौरान सरकार ने आदेश दिया था कि स्कूल अभिभावकों से किसी तरह का ट्रांसपोर्टेशन चार्ज नहीं लेंगे। यही नहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दौरान अभिभावकों पर स्कूल द्वारा फीस के लिए भी दवाब नहीं बनाया जाएगा।

महिला अभिभावक का एकमात्र दोष यह था कि वह सरकारी आदेश का हवाला देते हुए परिवहन, पुस्तकालय और वार्षिक शुल्क नहीं लेने का अनुरोध करते हुए स्कूल पहुँची थी। यह भी बताया गया है कि अभिभावक को धमकी भी दी गई थी कि मीडिया में यह प्रकरण उछाले जाने और वीडियो वायरल होने के बाद बच्चे का करियर खराब हो जाएगा।

ज्ञात हो कि कोरोना महामारी के कारण लगभग पूरे देश में स्कूल बंद हैं, लेकिन कई स्कूलों द्वारा अवैध रूप से फीस वसूली जा रही है। बिहार की राजधानी पटना में भी, सभी छोटे और बड़े निजी स्कूलों को तालाबंदी के दौरान बंद कर दिया गया है, लेकिन कई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को हर महीने भारी फीस देनी पड़ती है और ऑनलाइन क्लास के नाम पर स्कूल उनसे जबरन फीस की माँग कर रहे हैं। हालाँकि, इस मामले में विभाग ने साफ कहा कि शिक्षा के मंदिर में इस तरह का बर्ताव कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अब जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

अनंतनाग में आतंकियों ने 6 साल के बच्चे की ली जान, एक जवान भी बलिदान: त्राल में 3 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबेहारा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल को निशाना बनाकर हमला किया। हमले में एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। छह साल के एक बच्चे की भी मौत हो गई।

वहीं पुलवामा जिले के त्राल में मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया। मुठभेड़ गुरुवार (25 जून, 2020) देर रात को शुरू हुआ था। शुक्रवार सुबह सुरक्षाबलों ने एक के बाद एक तीन आतंकवादियों को मार गिराया।

गुरुवार शाम को त्राल स्थित अवंतिपोरा इलाके में 2-3 आतंकियों के होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर एसओजी और सीआरपीएफ की टीम ने अभियान शुरू किया।

इस बीच एक मकान में छिपे आतंकियों ने जवानों पर गोलीबारी कर दी। मुठभेड़ पूरी रात चली और सुबह जाकर सेना को सफलता मिली। इस मुठभेड़ में सेना ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया।

सेना ने तीनों आतंकियों के पास से हथियार भी बरामद किए हैं। इसी बीच जिला अनंतनाग के बिजबेहारा के जीरपोरा हाइवे पर सुरक्षाबलों के गश्ती दल पर कुछ आतंकवादियों ने हमला बोल दिया। इस हमले में एक सीआरपीएफ जवान गंभीर रूप से घायल, जबकि दूसरा जवान वीरगति को प्राप्त हो गया।

हमल में 6 वर्षीय बच्चे की मौत की खबर सामने आई है। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराकर सेना ने आतंकवादियों की तलाश में इलाके की घेराबंदी कर दी है।

पुलिस के अनुसार आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला किया है। सीआरपीएफ का एक गश्ती दल जब जीरपोरा हाइवे पर से गुजर रहा था तो आतंकी वहाँ पहले से ही हमले की फिराक में छिपे हुए थे। सीआरपीएफ का वाहन जैसे ही पास आया, आतंकवादियों ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। घटना को अंजाम देकर आतंकी मौके से फरार हो गए।

आपको बता दें कि एससे पहले आईजी विजय ने बताया था कि चार प्रमुख आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और गजवा-उल-हिंद चीफ कमांडर चार महीने के भीतर मार डाले गए हैं। ऐसा जम्मू-कश्मीर में पहली बार हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले दो हफ्ते के अंदर सुरक्षाबलों ने करीब दो दर्जन आतंकियों को जम्मू-कश्मीर मेंं ढेर कर दिया है। अगर पूरे साल की बात की जाए तो अब तक 100 से अधिक आतंकी मारे गए हैं।

PM मोदी ने लॉन्च किया आत्मनिर्भर यूपी अभियान: 31 जिले, 25 श्रेणियाँ, 1.25 करोड़ श्रमिकों को दिया जाएगा काम

पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने आत्मनिर्भर यूपी की शुरुआत कर दी है। इसके जरिए 1.25 करोड़ मजदूरों को रोजगार दिया जाएगा। पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आत्मनिर्भर यूपी का आगाज किया। इस मौके पर पीएम ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से बात भी की।

ऐसे समय में जब कोरोनावायरस के प्रकोप ने गरीबों की जिंदगी में काफी तबाही मचाई है। मजदूरों को उनके ही राज्य में रोजगार देने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की प्रकिया में भारत ने अपना कदम उठाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी शुक्रवार (26 जून, 2020 ) की सुबह 11 बजे डिजिटल माध्यम से ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ की शुरुआत की है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

पीएम मोदी ने यूपी के 6 जिलों के ग्रामीणों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। प्रदेश के सभी जिलों के ग्रामीण सहज सेवा केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बातचीत में श्रमिकों-कामगारों को भी शामिल किया। जिसमें पीएम से गोंडा की रहने वाली विनिता ने कहा कि उसने प्रशासन से सूचना मिलने के बाद महिलाओं के साथ समूह का गठन किया और एक नर्सरी शुरू की। अब एक साल में 6 लाख रुपए की बचत हो रही है।

वहीं बहराइच के तिलकराम ने बताया कि वे खेती करते हैं। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने किसान से कहा कि आपके पीछे बहुत बड़ा मकान बन रहा है। इस पर किसान ने जवाब देते हुए कहा कि ये आपका ही है। किसान ने कहा कि आवास योजना से हमें इसका फायदा मिला है। किसान तिलकराम ने कहा कि पहले झोपड़ी में रहते थे, अब मकान बन रहा है, इससे परिवार काफी खुश है।

योजना के लाभ के लिए जरूरी होंगे ये कागज़ात:

  • इस योजना का लाभ उठाने वाला नागरिक उसी राज्य का होना अनिवार्य, जहाँ योजना निकाली गई हो।
  • व्यक्ति के पास अपना आधार कार्ड होना आवश्यक है।
  • कामगारों को निवास प्रमाण पत्र दिखाना जरूरी होगा।
  • इस योजना के मुताबिक 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को ही काम दिया जाएगा।
  • कामगारों को उनके स्किल के अनुसार दिया जाएगा काम।

बता दें उत्तर प्रदेश के 31 जिलों को इस योजना के तहत शामिल किया गया है। इनमें लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशाम्बी, वाराणसी, गाजीपुर, देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर जिले शामिल हैं।

राज्य सरकार इस अवसर का उपयोग श्रमिकों के कल्याण के लिए कर रही है। 25 श्रेणियों के काम पर ध्यान देने के साथ विभिन्न विभागों को काम देने का लक्ष्य रखा गया है और 1.25 करोड़ श्रमिकों को काम मिलेगा।

गौरतलब है कि यूपी सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कई बड़ी कंपनियों से MoU साइन किया था, इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रवासी कामगारों को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देने का भी काम किया है। जिसका मकसद प्रवासी मजदूरों को उनके जिले में ही रोजगार उपलब्ध कराना था।

साथ ही, लॉकडाउन के चलते अपने प्रदेश लौटे सभी मजदूरों और ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी ने अपने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं, सामाजिक जीवन में कई तरह की कठिनाई आती हैं। किसी ने नहीं सोचा था कि पूरी दुनिया पर एक साथ इतना बड़ा संकट आएगा, ऐसा संकट जिसमें चाहकर भी लोग मदद नहीं कर पा रहे हैं।

इस घातक बीमारी के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने लोगों से कहा कि हमें नहीं पता कि इस बीमारी से कब मुक्ति मिलेगी, इसकी अभी एक ही दवाई है दो गज की दूरी, मुँह ढँकना, फेसकवर या गमछे का इस्तेमाल करना। जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं बनती, हम इसी दवा से इसे रोक सकते हैं।

हमारी सरकार ने इस बीच गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया है, इसी के तहत यूपी आत्मनिर्भर अभियान चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि योगी जी ने आपदा को अवसर में बदला है, इससे लोगों को काफी लाभ होगा।

योगी सरकार द्वारा अलग-अलग राज्यों से महामारी के दौर में सावधानी बरतते हुए मजदूरों को कुशलपूर्वक गृहराज्य लाना, लॉकडाउन का सख्ती से पालन करना, उचित प्रशासनिक व्यवस्था जैसे साहसी कदम को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यूपी ने जिस तरह से कोरोना को काबू किया है, वह तारीफ के काबिल है। योगी सरकार द्वारा उठाए गए कदम की वजह से यूपी में आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलेगा। यूपी कई देशों के मुकाबले सबसे बड़ा राज्य है। इसीलिए इसकी तरफ ध्यान देना उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि यूरोप के चार बड़े देश इंग्लैंड, फ्रांस, इटली और स्पेन की कुल आबादी 24 करोड़ है। जोकि वर्तमान में हमारे देश में अकेले यूपी की है। कोरोना महामारी ने इन चार देशों में 1 लाख 30 हजार लोगों की जान ली है। अगर इसकी तुलना उत्तरप्रदेश से करें तो यहाँ केवल 600 लोगों की जान गई। जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के साथ-साथ नागरिकों ने भी इस महामारी से सख्ती से लड़ाई की है।

वहीं पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए पीएम ने कहा कि पहले वाली सरकार होती तो अस्पताल का बहाना बनाकर, अस्पताल में बिस्तरों का बहाना बनाकर इस संकट को टाल देते। योगी जी ने हालात को समझा और इसे देखते हुए युद्ध स्तर पर काम किया। क़्वारन्टाइन सेंटर और आइसोलेशन की सुविधा तैयार करने के लिए पूरी ताकत झोंक दिया। योगी जी अपने पिताजी का स्वर्गवास होने के बावजूद वे लोगों की सेवा में जुटे रहे। मैं योगी जी को नमन करता हूँ।

हमने नहीं रोका असम का पानी, भारत के किसान हमारे मित्र: भूटान ने मीडिया रिपोर्टों को किया खारिज

चीन के साथ हालिया तनावों के बीच अधिकांश मीडिया संस्थानों ने भूटान के साथ संबंधों में खटास को लेकर खबरें प्रकाशित की थी। दावा किया था कि भूटान ने असम का पानी रोक दिया है।

खबरों में बताया गया कि भूटान ने असम के कुछ क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी देना बंद कर दिया है। इसके कारण वहाँ के लोग परेशान हैं और सड़क जाम कर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

इस खबर के फैलने के बाद तरह-तरह के सवाल उठने लगे थे। लोगों ने भूटान की मंशा पर प्रश्न चिह्न लगा दिया। लेकिन भूटान ने इस खबर को बेबुनियाद बताया है।

बयान जारी कर भूटान ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया जिनका दावा था कि भूटान ने असम के लोगों को सिंचाई पानी भेजने पर रोक लगा दी है।

भूटान ने कहा, जो मीडिया रिपोर्ट्स इस तरह का दावा कर रही हैं कि हमने असम को पानी भेजने पर रोक लगाई, वे निराधार हैं और जानबूझकर भूटान और असम के मैत्रीपूर्ण लोगों के बीच गलतफहमी पैदा करने का प्रयास है।

इसके अलावा, असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने भी मामला साफ किया है। उन्होंने बताया कि ये बिल्कुल गलत सूचना है। भूटान द्वारा पानी रोके जाने की मीडिया रिपोर्ट बिल्कुल गलत है। पानी रोका नहीं गया था बल्कि नदी को साफ किया जा रहा था ताकि भारत के सिंचाई क्षेत्रों तक प्रवाह बनी रहे। भूटान ने नदी में जमी गंदगी (ब्लॉकेज) को साफ कर भारत की मदद की है।

भूटान के वित्त मंत्री ने भी फेसबुक पोस्ट पर लिखा, “भूटान से भारतीय राज्य असम तक पानी रोका नहीं गया है। पानी का प्रवाह स्थानीय लोगों के साथ जारी है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। भारत के हमारे किसान मित्रों को दैफाम-उदलगुरी, समरंग-भंगातर, मोटोंगा-बोकाजुले और समद्रपोंगखार से पानी की निरंतर आपूर्ति की जा रही है।”

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को मीडिया में खबरें आईं थीं कि नेपाल चीन के बाद भूटान ने भी भारत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूटान ने असम के बक्सा जिले के किसानों का पानी रोक दिया है।

रिपोर्ट्स में कहा गया कि बक्सा जिले के 26 से ज्यादा गाँवों के करीब 6000 किसान सिंचाई के लिए डोंग परियोजना पर निर्भर हैं। वर्ष 1953 के बाद से किसान धान की सिंचाई भूटान की नदियों के पानी से करते रहे हैं। लेकिन अब पानी रुकने से उन्हें परेशानी आ रही है और वे विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसी बीच थिंपू में भूटान सरकार के अखबार के संपादक तेंजिंग लांगसांग ने भी मामले पर विवादित बयान दे दिया। उन्होंने हुए कहा कि भूटान ने भारत की ओर जाने वाले सिंचाई के सारे पानी को रोक लिया है।

उन्होंने कई ट्वीट करते हुए कहा कि हर साल भूटान असम के किसानों को पानी का रुख मोड़ने देता था, ताकि वह सिंचाई के लिए कुछ पानी जुटा सकें। लेकिन अब सीमाएँ सील कर दी गई हैं। बता दें, इन्हीं सब रिपोर्ट्स ने असम में किसानों की चिंता बढ़ा दी और उन्हें प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा। मगर अब स्थिति साफ हो गई है।

पाई-पाई जनता का, मौज राजीव गाँधी फाउंडेशन की: मनमोहन राज में 7 मंत्रालय, 11 PSU ने भी दिए ‘दान’

गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) को चीन की कम्युनिस्ट सरकार से लेकर PMNRF से दान मिलने के कई साक्ष्य सामने आए हैं। एक समय भारत के वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने देश के सरकारी बजट से इस फाउंडेशन के लिए अलग से धन आवंटन की माँग तक की थी।

इसके बाद एक और खुलासे में पता चला है कि देश के कई सरकारी उपक्रमों ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान किया था। इनमें गृह मंत्रालय समेत 7 मंत्रालय, सरकारी विभाग से लेकर 11 बड़े सार्वजानिक उपक्रम भी शामिल थे। यह सब ‘दान’ तब किए गए जब देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA की सरकार थी और सोनिया गाँधी ही प्रमुख ‘डिसीजन मेकर’ हुआ करती थीं।

यानी, जिस तरह से हर छोटी बड़ी संस्था के साथ-साथ चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी तक के द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में ‘वित्तीय सहायता’ दान करवाई गई है, ऐसा लगता है मानो UPA के दौरान गाँधी परिवार का पहला और एकमात्र लक्ष्य इस फाउंडेशन को धन से सींचना था।

कई सरकारी विभागों, मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने वर्ष 2005 से 2013 के बीच राजीव गाँधी फाउंडेशन को ‘दान’ दिया।

उन मंत्रालयों और सरकारी विभागों की सूची यहाँ दी गई है, जो वर्ष 2005 से 2013 तक राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान देते थे। जिस वर्ष ये विशिष्ट मंत्रालय और विभाग राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान कर रहे थे, उन्हें कोष्ठक में इंगित किया गया है –

सरकारी विभाग और मंत्रालय जो राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान करते थे

  1. गृह मंत्रालय (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09)
  2. प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय, मानव संसाधन मंत्रालय (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09)
  3. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09)
  4. पर्यावरण और वन मंत्रालय (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09)
  5. लघु उद्योग मंत्रालय (2007-08, 2008-09)
  6. राष्ट्रीय स्वरोजगार मिशन, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एक परियोजना (2008-09, 2010-11)
  7. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा सबला (2011-12, 2012-13)

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, जो राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान करते थे

  1. LIC (2005-06)
  2. सेल (2005-06)
  3. गेल (इंडिया) लिमिटेड (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09, 2009-11, 2010-11, 2011-12, 2012-13)
  4. ऑयल इंडिया लिमिटेड (2005-06, 2006-07)
  5. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (2005-06)
  6. SBI (2005-06, 2006-07, 2007-08, 2008-09, 2010-11, 2011-12, 2012-13)
  7. बैंक ऑफ महाराष्ट्र (2006-07, 2007-08, 2008-09, 2009-11)
  8. आवास और शहरी विकास निगम लिमिटेड (HUDCO) (2006-07)
  9. ONGC (2006-07, 2007-08, 2008-09, 2009-11, 2010-11, 2011-12, 2012-13)
  10. आईडीबीआई बैंक (2006-07)
  11. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (2007-08, 2008-09, 2009-11, 2010-11, 2011-12, 2012-13)

उल्लेखनीय है कि इस राजीव गाँधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं। राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम बोर्ड के सदस्य हैं।

जब ये ‘दान’ दिए गए, मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे और सोनिया गाँधी ‘सुपर पीएम’ थीं, जिनके निर्देशों पर ही सभी बड़े और छोटे फैसले लिए जाते थे। कथित तौर पर, यह सोनिया गाँधी ही थीं, जिन्होंने ये सभी निर्णय लिए और देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

यानी, जो सरकार सोनिया गाँधी द्वारा चलाई जा रही थी, उन्होंने इन विभागों और मंत्रालयों से जनता के पैसे को निजी स्वामित्व वाले ऐसे फाउंडेशन को दान कर दिए जिसकी अध्यक्ष वो स्वयं हैं, और जिसमें उनके बच्चे और गाँधी परिवार के विश्वसनीय लोग शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस के चीनी प्रेम और राजीव गॉंधी फाउंडेशन पर सरकारी दरियादिली को लेकर संपादक अजीत भारती का नजरिया

गौरतलब है कि UPA के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन की सरकार द्वारा किए गए डोनेशन ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कॉन्ग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर भारत की जमीन चीन को सौंपने का दुष्प्रचार किया जा रहा है।

ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।

राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट से चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिलने का पता चला है। इसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।

वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।

जब बजट से मनमोहन सिंह 1991-92 में ₹100 करोड़ दे रहे थे राजीव गाँधी फाउंडेशन को: खुलासा

गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन को किए गए ‘दान’ की लंबी लिस्ट देखकर यह लगता है कि अब कॉन्ग्रेस पार्टी और गाँधी परिवार द्वारा किए गए के बड़े घालमेल से पर्दा उठ सकता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गाँधी परिवार की गुपचुप मीटिंग और डोनेशन के किस्से सामने आने के बाद एक राजनीतिक तूफान पैदा हो गया है। कल ही यह खुलासा हुआ है कि चीनी सरकार ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान दिया था। अब गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले इस फाउंडेशन के मामले में एक और विवरण सामने आया है।

एक ट्वीट में, वकील और टीवी पैनलिस्ट शहजाद पूनावाला ने लिखा है कि वर्ष 1991-92 में भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय बजट से सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन को पाँच साल की अवधि में 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित करने की कोशिश की थी, और भारी हंगामे के बाद इसे रोक दिया गया था।

1991-92 में भारतीय संसद की केंद्रीय बजट की चर्चा के संग्रहीत अभिलेख के एक सेक्शन में देखा जा सकता है कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की थी, जिसपर विपक्षी दलों ने भारी हंगामा करते हुए सवाल किया कि आखिर कॉन्ग्रेस सरकार गाँधी परिवार द्वारा चलाए जाने वाले किसी फाउंडेशन के लिए धन कैसे आवंटित कर सकती है?

कॉन्ग्रेस के चीनी प्रेम और राजीव गॉंधी फाउंडेशन पर सरकारी दरियादिली को लेकर संपादक अजीत भारती का नजरिया

मनमोहन सिंह द्वारा बनाए गए 1991-92 के केंद्रीय बजट दस्तावेज में एक और प्रावधान भी था। इसमें कहा गया कि 5 साल की अवधि में राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि दान की जाएगी। यह राशि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास, साक्षरता के प्रचार, पर्यावरण की सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, दलितों के उत्थान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से संबंधित अनुसंधान और कार्रवाई कार्यक्रमों की पहल करने, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों, प्रशासनिक सुधार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका के लिए बताई गई थी।

सिर्फ 100 करोड़ ही नहीं, आवश्यकता पड़ने पर 250 करोड़ का अलग प्रबंध

यदि इसके लिए 100 करोड़ रूपए कम पड़ते, तो केंद्रीय बजट में 250 करोड़ रुपए अलग से भी रखे जाने थे। बजट दस्तावेज़ के खंड-58 में लिखा गया है, “इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्धारण के उद्देश्य से, वित्त मंत्रालय के योजना परिव्यय में लगभग 250 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान शामिल किया गया है।”

केंद्रीय बजट 1991-92

इसके बाद हुई चर्चा में, मनमोहन सिंह ने राजीव गाँधी फाउंडेशन का एक पत्र को पढ़ा था, जिसमें कहा गया था कि फाउंडेशन योगदान की सराहना करता है, लेकिन यह सोचता है कि सरकार को स्वयं उपयुक्त परियोजनाओं में धन का निवेश करना चाहिए।

संसद में चंद्रजीत यादव का वक्तव्य

‘मनमोहन सिंह संसद में कैबिनेट के प्रतिनिधि हैं या फिर शाही परिवार के’

इस निधि को लेकर हुए भारी हंगामे के बाद मनमोहन सिंह ने यह साबित करने का प्रयास किया था कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने खुद ही इतनी बड़ी राशि लेने के लिए उदारतापूर्वक मना कर दिया, (एक बड़े राजनीतिक विवाद के बाद)। इस होशियारी के लिए आजमगढ़ से जनता दल के सांसद चन्द्र जीत यादव ने मनमोहन सिंह को लताड़ा था।

चंद्रजीत यादव ने सवाल किया था कि क्या मनमोहन संसद में गाँधी परिवार के मंत्रिमंडल का प्रतिनिधित्व करते हैं। यादव ने कहा था कि वित्त मंत्री बहुत ही लापरवाही से बजट से निपट रहे हैं।

उन्होंने कहा –

“हम देश के बजट पर चर्चा कर रहे हैं और बहस अभी भी जारी है। सरकार इतने अव्यवहारिक रवैए से राजीव गाँधी फाउंडेशन के पैसे आवंटित करने और फिर इसे वापस लेने के लिए इस तरह का तरीका नहीं अपना सकती है। इससे यह प्रतीत होता है, जैसे कि राजीव गाँधी फाउंडेशन इस देश के बजट का मास्टर है। जिस क्षण फाउंडेशन से एक पत्र आता है, वित्त मंत्री सदन के सामने आते हैं और एक बयान देते हैं। मुझे नहीं पता कि वह मंत्रिमंडल की ओर से बोल रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, मुझे नहीं पता कि सरकार को इस पर चर्चा करने का अवसर मिला या नहीं। यह इस देश की संसद से पेश आने कोई तरीका नहीं है, जो कि इस देश के वित्तीय मामलों का केंद्र है।”

यादव ने यहाँ तक ​​सवाल उठाया कि क्या मनमोहन सिंह कैबिनेट की ओर से देश के वित्त मंत्री के रूप में बोल रहे थे या वे कॉन्ग्रेस के शाही परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे? उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री इस संसद को हल्के में ले रहे हैं और मैं सरकार के अव्यवहारिक तरीके का कड़ा विरोध करता हूँ।

राजीव गाँधी फाउंडेशन को लेकर हुए हैं बड़े खुलासे

राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी। भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को आरोप लगाया कि यूपीए के वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था और सार्वजनिक धन परिवार के खातों में डाइवर्ट कर दिया गया था। 

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि सार्वजनिक धन को परिवार द्वारा चलाए जाने वाले संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया और यह न केवल एक ‘धोखाधड़ी’ है, बल्कि भारत की जनता के साथ एक ‘बड़ा विश्वासघात’ भी है। यूपीए सरकार में लोग राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान करते थे, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी थीं।

UPA के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन की सरकार द्वारा किए गए डोनेशन ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कॉन्ग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर भारत की जमीन चीन को सौंपने का दुष्प्रचार किया जा रहा था।

राजीव गाँधी फाउंडेशन ने पीएमएनआरएफ से एक बार नहीं बल्कि तीन बार ‘डोनेशन’ हासिल किया था

ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किए गए इस पहली ‘सहायता’ में 10 लाख रुपए और दूसरी में 90 लाख रुपए दीए गए थे। रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस से सवाल उठाए गए थे और इसकी शुरुआत करते हुए, बीजेपी ने पूछा था कि कॉन्ग्रेस का चीन को लेकर हमेशा से ही लचीला रुख था और साथ ही गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच चीन और कॉन्ग्रेस के बीच हुए ‘व्यापारिक समझौते’ के कारण ही इस प्रकार के बयान दे रही थी।

यह पता चला है, राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की है और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।

वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। और इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।

हिन्दूघृणा की दुकान है न्यूजलॉन्ड्री: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on NewsLaundry’s Hinduphobic agenda

वैचारिक दोगलापन का गढ़ कहलाने वाली वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री लगातार अपने खासियत के अनुसार हिन्दूघृणा का जहर उगलती आई है। लगातार हिन्दुओं के खिलाफ विष-वमन करते हुए यह वेबसाइट जमीर बेचकर की जाने वाली पत्रकारिता का झंडा सबसे आगे उठाए चल रही है। एक सामान्य और सामजिक अपराध को भी सम्प्रदायिक रंग देकर रिपोर्ट करने और हर बार बिना आधार के किसी हिन्दू या हिंदूवादी संस्था पर आरोप लगाने में इसका कोई विकल्प नहीं है।

वेबसाइट के को-फाउंडर अभिनंदन सेकरी खुद हिन्दुओं को विलेन बनाकर दिखाने में सिद्धहस्त हैं और मानसिक दोगलेपन की बेशर्म हँसी इनके चेहरे पर हमेशा विराजमान रहती है। नक्सलवाद के हिमायती अभिनंदन सेकरी ने झूठ और प्रपंच फैलाकर हिन्दुओं के ख़िलाफ़ डिजिटल जिहाद का बीड़ा उठाया हुआ है और उस पूर्व नक्सली की बातों का मजाक उड़ाते हैं, जो शहरों में बुद्धिजीवियों के वेश में छुपे हुए अर्बन नक्सलों की कलई खोलता है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

UPA सरकार ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक नहीं, तीन-तीन बार PMNRF का पैसा दिया: पूरी रिपोर्ट

भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को आरोप लगाया कि यूपीए के वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था और सार्वजनिक धन परिवार के खातों में डाइवर्ट कर दिया गया था। गौरतलब है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन को परिवार द्वारा चलाए जाने वाले संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया और यह न केवल एक ‘धोखाधड़ी’ है, बल्कि भारत की जनता के साथ एक ‘बड़ा विश्वासघात’ भी है। यूपीए सरकार में लोग राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान करते थे, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी थीं।

कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा कि PMNRF का पैसा संकट के समय लोगों की मदद के लिए होता है लेकिन यूपीए के दौर में राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था। उन्होंने कहा – “PMNRF बोर्ड में कौन बैठा था? सोनिया गाँधी। RGF की अध्यक्षता कौन करता है? सोनिया गाँधी।”

ट्वीट करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह पूरी तरह से निंदनीय है, इसमें नैतिकता की अवहेलना की गई और पारदर्शिता की परवाह तक नहीं की गई है। उन्होंने आगे कहा कि धन के लिए एक परिवार की भूख ने देश का बहुत खर्च किया है। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस को अपने लाभ के लिए बेहिसाब लूट के लिए माफी माँगने को कहा है।

गौरतलब है कि UPA के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन की सरकार द्वारा किए गए डोनेशन ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कॉन्ग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर भारत की जमीन चीन को सौंपने का दुष्प्रचार किया जा रहा था।

राजीव गाँधी फाउंडेशन ने पीएमएनआरएफ से एक बार नहीं बल्कि तीन बार ‘डोनेशन’ हासिल किया था

ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किए गए इस पहली ‘सहायता’ में 10 लाख रुपए और दूसरी में 90 लाख रुपए दीए गए थे। रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस से सवाल उठाए गए थे और इसकी शुरुआत करते हुए, बीजेपी ने पूछा था कि कॉन्ग्रेस का चीन को लेकर हमेशा से ही लचीला रुख था और साथ ही गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच चीन और कॉन्ग्रेस के बीच हुए ‘व्यापारिक समझौते’ के कारण ही इस प्रकार के बयान दे रही थी।

यह पता चला है, राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की है और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।

कॉन्ग्रेस के चीनी प्रेम और राजीव गॉंधी फाउंडेशन पर सरकारी दरियादिली को लेकर संपादक अजीत भारती का नजरिया

वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। और इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।

हालाँकि, इस तरह के दान की राशि अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह निश्चित है कि वास्तव में दान किया गया था। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) वर्ष 1948 में स्थापित किया गया था। प्रारंभ में, निधि का उद्देश्य भारत के विभाजन के बाद और उसके ठीक बाद पाकिस्तान से विस्थापित लोगों को सहायता प्रदान करना था।

पीएमएनआरएफ के संसाधनों का उपयोग अब मुख्य रूप से बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को और प्रमुख दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत देने के लिए किया जाता है। इस फंड में पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय समर्थन नहीं मिलता है।

PMNRF और कॉन्ग्रेस की पारदर्शिता

इससे पहले, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के लिए पीएमएनआरएफ के बोर्ड में होना आवश्यक था। हालाँकि, बाद में इसे बदल दिया गया था और यह अनिवार्य किया गया था कि प्रधानमंत्री के विवेक पर पीएमएनआरएफ से फंड संवितरण किया जाएगा। इससे पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को किया गया ‘दान’ और अधिक संदिग्ध हो जाता है।

यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि 2005 से 2008 तक, जिस अवधि में पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान दिया गया था, तब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, जिनका सरकार पर थोड़ा बहुत ही नियंत्रण था। सोनिया गाँधी के पास ही उस दौरान सरकार का पूरा नियंत्रण था। वास्तव में, एनएसी फाइलों से पता चला था कि सोनिया गाँधी वास्तव में ‘सुपर पीएम’ थीं और मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए निर्णयों पर उनका पूरा नियंत्रण था।

यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि PMNRF में सभी धन भारत के नागरिकों द्वारा दिया गया योगदान होता है और इसका उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं और आपदाओं के दौरान किया जाता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि लोगों के धन का उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं के दौरान लोगों को राहत देने के लिए किया जाना था, जिसे सोनिया गाँधी द्वारा निजी तौर पर नियंत्रित कोष (RGF) में बदल दिया गया था।

PMNRF बनाम PM CARES फंड

ये वही सोनिया गाँधी हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस की महामारी के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए PM CARES (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) पर संदेह था और लगातार इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल करती देखी जा रहीं थीं। सोनिया गाँधी और यहाँ तक ​​कि राहुल गाँधी ने बार-बार जोर देकर कहा था कि पीएमएनआरएफ इस से कहीं अधिक पारदर्शी है और जब राष्ट्रीय आपात स्थितियों से लड़ने के लिए इस तरह के फंड मौजूद थे, तो ‘पीएम-केयर्स’ की आवश्यकता नहीं थी। पूरा ‘लिबरल’ वर्ग भी यह बताते नजर आया कि पीएम केयर्स फंड के तहत मिलने वाले फंड का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और पारदर्शी तरीके से नहीं किया जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि पीएमएनआरएफ को ट्रस्ट मानने के बाद से पीएमएनआरएफ ‘पीएमकेयर्स’ के मुकाबले काफी कम पारदर्शी है। क्योंकि आज तक किसी को भी यह नहीं पता कि पीएमएनआरएफ को संचालित करने वाले दिशानिर्देश क्या हैं।

पीएमएनआरएफ के तहत निधियों के रोजगार में पारदर्शिता की कमी अब इस बात से स्पष्ट हो गई है कि सोनिया गाँधी द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में जनता के धन को कैसे डाइवर्ट कर दिया गया और कैसे हस्तांतरित किया गया, इसकी जानकारी किसी ‘खुलासे’ के जरिए ही सामने आ सकी है।

भाजपा ने साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए। उन्होंने पूछा था कि कॉन्ग्रेस ये बताए की ये प्रेम कैसे बढ़ गया। इनके कार्यकाल में चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। कॉन्ग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?

वहीं ‘टाइम्स नाउ’ न्यूज़ चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, UPA के दौरन फ्री ट्रेड के नाम पर किए गए चीन की सरकार और गाँधी परिवार के बीच अन्य गोपनीय समझौतों के साथ ही यह वित्तीय मदद करीब 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के एक्सचेंज रेट के हिसाब से करीब 1.5 करोड़ रुपए) के आस-पास थी।

यह सब समझौते चीन के साथ खराब सम्बन्ध होने के बावजूद कॉन्ग्रेस ने गठबंधन सरकार में रहने के दौरान साइन किए थे और देश से समझौते का ब्योरा छुपाया गया। समझौते के ब्‍यौरे को सार्वजनिक नहीं किया गया।

2006 में चीन की सरकार द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में 10 लाख रूपए की वित्तीय मदद

एक और खुलासे में गाँधी परिवार के चीन के साथ अपने गोपनीय संबंधों के दावों को और मजबूती मिलती है। नए खुलासे से पता चलता है कि चीनी सरकार ने वर्ष 2006 में ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को ‘वित्तीय सहायता’ के लिए 10 लाख रुपए दान दिए थे।

चीनी दूतावास पर उपलब्ध एक दस्तावेज़ के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी (Sun Yuxi) ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रुपए दान दिए थे, जो कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा चलाया जाता है।