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क्यों ढह रहा सलमान खान का गढ़: ‘सुशांत भैया’ की मौत से आक्रोशित बिहार, CBI जाँच से कम मंजूर नहीं

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बिहार में सलमान खान के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पटना में इसका सबसे ज्यादा असर दिखा है, जहाँ सिनेमा हॉल्स तो छोड़िए ख़ुद सलमान खान की कंपनी ‘बीइंग ह्यूमन’ की दुकान के सामने से अभिनेता के पोस्टर्स हटाने पड़े। सलमान खान को माँ की गाली देते हुए गाना भी बना है, जो ख़ासा वायरल हो रहा है। नेपोटिज्म और गुटबाजी के लिए लोग सलमान को दोषी मान रहे हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी भी चर्चा थी कि नेपोटिज्म को बढ़ावा देने वाले सलमान खान ने सुशांत सिंह राजपूत को नज़रअंदाज़ किया और सूरज पंचोली को प्रमोट करने के लिए हर तिकड़म आजमाया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पंचोली के कारण उन्होंने सुशांत को खरी-खोटी भी सुनाई थी। हम इन ख़बरों की सच्चाई का दावा तो नहीं करते लेकिन बिहार की जनता ज़रूर इसके कारण सलमान खान से नाराज़ है।

बिहार के कॉमेडियन शेखर सुमन ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें इस बात पर यकीन नहीं है कि सुशांत सिंह राजपूत जैसा मजबूत इरादों वाला और प्रतिभाशाली व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो वो कोई न कोई सुसाइड नोट ज़रूर छोड़ जाते। शेखर सुमन ने गुटबाजों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के सारे शेर बनने वाले कायर सुशांत के चाहने वालों के कहर से चूहे बन कर बिल में घुस गए हैं, उनके मुखौटे गिर गए हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की हत्या के बाद सलमान खान ने ट्वीट करके उन्हें श्रद्धांजलि दी थी और कहा था कि वो याद किए जाएँगे लेकिन इसके बाद जब उनकी कथित करतूतों की बात करते हुए लोगों ने विरोध शुरू किया तो सलमान ने इसे ‘फैनवॉर’ का रूप समझ लिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वो अपने फैंस को सुशांत के फैंस के साथ खड़े रहने की अपील करते हैं और जिस तरह की बहसः का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे दिल पर न लेते हुए उसके पीछे की भावनाओं को समझने का निवेदन करते हैं।

उन्होंने लिखा कि अपने किसी प्रियजन को खोना हमेशा काफ़ी दुःखद होता है, इसीलिए उनके फैंस सुशांत सिंह राजपूत के प्रशंसकों और परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहें। लेकिन, असल डैमेज इतना बड़ा था कि ये ‘डैमेज कण्ट्रोल’ भी काम नहीं आया। सुशांत सिंह राजपूत बिहार से थे, पूर्णिया में उनका पैतृक घर है- इसीलिए बिहारियों की नाराज़गी इससे शांत नहीं हुई। उन्होंने सलमान खान के बॉयकॉट का निर्णय लिया।

इसीलिए, बिहार में गायकों ने सलमान खान को माँ की गाली देते हुए गाना बनाया। हालाँकि, ये आपत्तिजनक और अश्लील है और इसका समर्थन नहीं किया जाना चाहिए लेकिन इससे लोगों के गुस्से के स्तर को तो पता चलता ही है। विकाश गोपी नामक गायक ने ‘माधर#@ सलमान खान’ नाम से गाना बनाया। इस गाने में सलमान खान, अभिनेत्री आलिया भट्ट और फिल्म निर्देशक करण जौहर के मुर्दाबाद के नारे लगाए गए हैं।

गायक ने इस गाने में ये भी कहा है कि बिहार की राजधानी पटना ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में सलमान खान की कोई भी फिल्म रिलीज नहीं होने देनी चाहिए। उसने ‘सुशांत भइया’ की मौत के लिए सलमान खान को ही जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही अपील की गई है कि अगर आप बिहारी हैं तो इस गाने को ज़रूर सुनें। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है क्योंकि बिहार जैसे राज्य में सलमान खान का विरोध होना बड़ी बात है।

बॉक्स ऑफिस की बात करें तो बिहार सर्किट हमेशा से सलमान खान का गढ़ रहा है। ‘बॉक्स ऑफिस इंडिया’ के अनुसार, यहाँ सबसे ज्यादा कमाई करने वाली शीर्ष 20 फिल्मों में 7 अकेले सलमान खान की है। यहाँ तक कि उनकी ‘भारत’ और ‘रेस 3’ जैसी फिल्मों ने भी बिहार में काफी अच्छा कारोबार किया था। ऐसे में पब्लिक सेंटीमेंट का उनके ख़िलाफ़ होना बताता है कि मामला बड़ा है।

पटना में राजपूत समाज ने भी सलमान खान के पोस्टर्स जलाए। लोगों ने सलमान, करण और आलिया को ‘नेपोटिज्म गैंग’ का वाहक मान लिया है। गुरुवार (जून 18, 2020) को राजपूत समाज लोगों ने ‘बीइंग ह्यूमन’ का कपड़ों की दुकान की तरफ गए और मैनेजर पर दबाव डाल कर दुकान को बंद करवाया। इनमें राजपूत समाज के साथ अन्य लोग भी शामिल थे। इस विरोध प्रदर्शन को पूरा समर्थन मिला।

सलिल मिश्रा नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सलमान खान को बिहार में कुछ भी नहीं करने दिया जाएगा, न तो उनकी फ़िल्में यहाँ रिलीज होगी और न ही उनकी कम्पनी के प्रोडक्ट्स को यहाँ बेचने की अनुमति दी जाएगी। सलमान खान का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें सुशांत सिंह राजपूत का नाम आने पर वो उन्हें पहचानने से इनकार कर देते हैं और पूछते हैं कि ये कौन है? इस वीडियो ने आग में घी का काम किया है।

बिहार के फिल्म वितरक रौशन सिंह ने ‘बॉलीवुड हंगामा’ को बताया कि सलमान ही नहीं बल्कि सुशांत की मृत्यु के बाद तीनों खानों के खिलाफ बिहार में भावनाएँ भड़की हुई हैं। उनका कहना है कि दशकों से मुंबई में बिहार के लोगो के साथ कई बार भेदभाव की जो ख़बरें आती रही हैं, उसके कारण नाराज़ लोगों को अपना गुस्सा जाहिर करने का जरिया भी मिल गया है। वो नेपोटिज्म को प्रोमोट करने के लिए तीनों खान से आक्रोशित हैं।

बॉलीवुड में एक अदद रोल के लिए कभी फुटपाथ पर सोकर या दिन भर में बस एक बार खाना खा कर गुजारा कर के रह चुके अभिनेता पंकज त्रिपाठी कहते हैं कि बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद और गुटबाजी या तरफदारी जैसी चीजें नई नहीं हैं और उन्होंने 18 साल संघर्ष कर के इन सबको झेला है। उन्होंने बताया कि उन्हें ड्राइवर या गार्ड वगैरह के रोल दिए जाते थे। बॉलीवुड में बिहारियों के लिए यही सम्मान है।

आज पंकज त्रिपाठी नेटफ्लिक्स के ‘सेक्रेड गेम्स’ और ‘मिर्जापुर’ जैसे सीरीज में काम कर के नाम कमा रहे हैं। 80 के दशक में बॉलीवुड के शीर्ष सितारों में शुमार रहे शत्रुघ्न सिन्हा यूँ तो मानते हैं कि बिहार के लोगों में फिलहाल गुस्सा व्याप्त है लेकिन साथ ही वो सलमान खान को दोषी ठहराए जाने को सही नहीं मानते। वैसे उनकी बेटी सोनाक्षी सिन्हा को सलमान खान 2010 में ‘दबंग’ फिल्म से लॉन्च किया था। इस सीरीज की तीनों फिल्मों में उनका किरदार है।

पटना के टेलीविजन एक्टर मनीष झा कहते हैं कि ये गुस्सा अस्थाई है। हाल ही में कॉमेडियन सुनील ग्रोवर ने सलमान खान का सोशल मीडिया पर खुला समर्थन किया और विरोध करने वालों को ‘पेड ट्रॉल्स’ करार दिया। बता दें कि वो जिस कपिल शर्मा के शो में काम कर चुके हैं, उनके शो के प्रोड्यूसरों में सलमान खान भी हैं। ऐसे में उन्हें ख़ुश रखना उनकी अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए भी एक तरीका हो सकता है।

शुक्रवार (जून 19, 2020) को पटना के कारगिल चौक पर कई प्रदर्शनकारियों ने सलमान खान के पुतले जलाए। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन ‘जन अधिकार छात्र परिषद’ ने किया था। वहाँ लोगों का कहना था कि पिछले 6 महीनों में सुशांत की एक के बाद एक के बाद एक फ़िल्में छीन की गईं, जिसके वजह गुटबाजी और भाई-भतीजावाद है। परिषद के अध्यक्ष विशाल कुमार का सीधा कहना है कि इस आत्महत्या के पीछे बॉलीवुड के बड़े नाम शामिल हैं।

विशाल का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत किसी बड़े फ़िल्मी हस्ती के परिवार से नहीं थे, इसीलिए उनके साथ भेदभाव हुआ। उन्होंने कहा कि जिनलोगों ने भी सुशांत सिंह राजपूत को प्रताड़ित किया है, उनके खिलाफ मामला दर्ज कर ले सज़ा दी जानी चाहिए। वहीं एक अन्य छात्र नेता नीतीश ने कहा कि सुशांत की आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब सीबीआई जाँच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले।

जब सलमान ने पूछा था- कौन सुशांत?

बिहार के मुजफ्फरपुर में अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बॉलीवुड के बड़े नामों के खिलाफ मामला दर्ज कराया और उन्हें आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। इनमें सलमान खान, एकता कपूर, करण जौहर, संजय लीला भंसाली शामिल हैं। उन्होंने आपराधिक साजिश का केस दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि इन आरोपितों ने सुशांत सिंह राजपूत को आत्महत्या के लिए मजबूर किया, जो हत्या की श्रेणी में आता है।

हालाँकि, एकता कपूर इन सबको ‘कांस्पीरेसी थ्योरी’ बताती हैं और कहती हैं कि वो इन सबसे अपसेट हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को शोकाकुल परिवार और प्रशंसकों को शांति से छोड़ देना चाहिए और इस तरह का काम नहीं करना चाहिए। एकता ने दावा किया कि उन्होंने ही सुशांत को लॉन्च किया था। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ‘पवित्र रिश्ता’ नामक टीवी सीरियल से तभी घर-घर में लोकप्रिय हो गए थे, जब उन्होंने फिल्मों में क़दम भी नहीं रखा था।

चाहे कोई भी राजनीतिक पार्टी के नेता हों, वो बिहार में सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या को लेकर विरोध कर रहे हैं। बिहार यूथ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और फिल्म सेंसर बोर्ड एडवाइजरी कमिटी के सदस्य ललन कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की सीबीआई जाँच कराने की सलाह दी हैख़बरों के अनुसार, उनसे ‘हाफ गर्लफ्रेंड’, ‘बेफिक्रे” और ‘फितूर’ जैसी 3 बड़ी फ़िल्में छीन ली गईं।

ललन का कहना है कि जिस तरह से सुशांत सिंह राजपूत ने इतने कम समय में बॉलीवुड में आकर अपने लिए जगह बना ली, उससे इंडस्ट्री का एक हिस्सा उनसे नाराज़ हो गया। उनका कहना है कि अगर 15 दिनों के भीतर सीबीआई जाँच का आदेश नहीं आया तो उन्हें कोर्ट जाने को मजबूर होना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने सलमान खान और करण जौहर की फिल्मों को बिहार में बैन कराने की भी चेतावनी दी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने भी सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की सीबीआई जाँच कराने की माँग की थी। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष रहे मनोज तिवारी ने उनके परिजनों से मुलाकात के बाद इसी प्रकार की माँग की थी। बिहार के सभी दलों के नेताओं द्वारा ऐसे बयान देने का मतलब है कि उन्होंने जनता की नब्ज को पहचाना है और जनता सुशांत की मौत से सच में व्यथित है।

सोशल मीडिया में भले करण ने सुशांत की मौत पर दुःख जताया हो, लोग उन्हें भी इसके लिए जिम्मेदार बता रहे

वहीं कंगना ने कहा था कि बॉलीवुड के लिए सुशांत ने इतनी अच्छी फिल्में कीं। मगर उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने ‘काय पो छे’ से डेब्यू किया। उन्हें डेब्यू तक का अवॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने 6-7 साल के अंतराल में केदारनाथ, धोनी और छिछोरे जैसी अच्छी फिल्में बनाईं। मगर, फिर भी उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं मिला। कोई सराहना नहीं मिली। वहीं, गली बॉय जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिल जाते हैं।

फिल्म निर्देशक अभिषेक कपूर ने खुलासा किया है कि ‘केदारनाथ’ की रिलीज के बाद मीडिया ने सारा अली ख़ान को तो सिर-आँखों पर बिठा लिया था, लेकिन सुशांत सिंह राजपूत को नकार दिया था, जिससे वो बुझे-बुझे से रहते थे। इस फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक ही थे। उन्होंने ही सुशांत की लॉचिंग फिल्म ‘काई पो चे’ को भी डायरेक्ट किया था। कपूर ने बताया कि मीडिया द्वारा इस तरह का भेदभाव किए जाने के कारण सुशांत अंदर से बुझे-बुझे से रहते थे।

DU के प्रिंसिपल मसरूर अहमद बेग पर साहित्यिक चोरी का आरोप, पदोन्नति के लिए चुराया मशहूर अर्थशास्त्री का काम

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज के प्रिंसिपल (शाम के) मसरूर अहमद बेग  (Masroor Ahmed Beg) के खिलाफ साहित्यिक चोरी के आरोप को लेकर यूजीसी के चेयरमैन और दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर के पास शिकायत दर्ज की गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक कॉन्ग्रेस और दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद के सदस्यों ने यूजीसी को एक शिकायत भेजी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मसरूर अहमद बेग ने कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में पदोन्नत होने के लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और यूजीसी के पूर्व चेयरपर्सन सुखदेव थोराट (Sukhadeo Thorat) के कार्य और अध्ययनों को चोरी किया था। यह शिकायत कई वर्तमान और पूर्व शैक्षणिक परिषद और कार्यकारी परिषद के सदस्यों द्वारा 20 जून को दर्ज की गई थी।

गौरतलब है कि यूजीसी के निर्देशों के अनुसार, प्रिंसिपल के पद पर चयन के लिए, अभ्यर्थी को कम से कम 400 एपीआई स्कोर प्राप्त करने होते हैं। हालाँकि, साथी प्रोफेसरों का आरोप है कि बेग ने अपने काम में हेरफेर करते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में नियुक्ति पाने के लिए उल्लेख या क्रेडिट दिए बिना अन्य लेखकों के पूरे कामों की नकल की है। शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेग ने ‘बेईमानी और धोखेबाजी से’ ये अंक प्राप्त किए हैं।

शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2015 में आरोपित सुखदेव थोराट ने एमयू के प्रोफेसर मशकूर अहमद (सह लेखक) के साथ इस पेपर को तैयार किया था, जिसका शीर्षक था ‘अल्पसंख्यक और गरीबी: कुछ अल्पसंख्यक दूसरों की तुलना में अधिक गरीब क्यों हैं?’

बेग ने इसी पेपर को कॉपी कर के वर्ष 2018 में ‘जरनल ऑफ सोशल इंक्लूजन स्टडीज’ (Journal of Social Inclusion Studies) में प्रकाशित किया, जहाँ इसका शीर्षक ‘बहुसंख्यकों के सन्दर्भ में भारतीय अल्पसंख्यकों की गरीबी का तुलनात्मक विश्लेषण’ दिया गया था।

डीयू कॉलेजों के डीन बलराम पाणि, ने पुष्टि की है कि विश्वविद्यालय को इस घटना के संबंध में शिकायत मिली थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले को देख रहा है और आवश्यक कार्रवाई करेगा।

वहीं डीयू AC मेंबर नवीन गौड़ ने सोमवार को यूजीसी को एक और पत्र लिखा। इस पत्र में कहा है कि ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा एवं साहित्यिक चोरी रोकथाम को प्रोत्साहन विनियम 2018’ के तहत डीयू को आरोपों की जाँच के लिए विभागीय अकादमिक एकता पैनल और संस्थागत अकादमिक एकता पैनल का गठन करना चाहिए।

दिल्ली: गृहमंत्री अमित शाह ने 10,000 बेड वाले राधा स्वामी सत्संग व्यास COVID-19 केंद्र की जिम्मेदारी ITBP को सौंपी

आईटीबीपी की टीम ने नई दिल्ली स्थित राधास्वामी व्यास छतरपुर में 10,000 से भी ज्यादा बिस्तरों वाले प्रस्तावित कोविड केयर सेंटर में तैयारियों के साथ और 26 जून से प्रारंभ होने वाले राजधानी के इस विशालतम कोविड केयर सेंटर के संचालन की नोडल एजेंसी के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। 

आईटीबीपी के अनुभवी डॉक्टरों और प्रशासकों की टीम ने आज (जून 24, 2020) सुबह नई दिल्ली के राधा स्वामी ब्यास छतरपुर में आकर तैयारियाँ युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर दी है। आइटीबीपी की टीमों ने दिल्ली सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारियों और आश्रम के विभिन्न अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें भी कीं। 

आईटीबीपी कर्मियों की कई टीमों सहित मेडिकल और सहायक कर्मचारियों ने आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्टेकहोल्डर्स से कई चर्चाएँ भी की। यह भवन भारत की सबसे बड़ी कोविड केयर फैसीलिटी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना वायरस मरीजों के लिए समर्पित इस केयर सेंटर में फिलहाल 2000 बेड उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही इसमें 10,000 बेड की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस केयर सेंटर में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य सीएपीएफ सहित 1000 से अधिक आईटीबीपी कर्मियों को तैनात किया जाएगा।

दिल्ली सीएम को जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार (24 जून, 2020) को बताया कि 10,000 बेड वाले कोविड-19 देखभाल केंद्र स्थापित करने का काम जोरों पर है और आईटीबीपी को जल्द से जल्द इस सेंटर को सौंप दिया जाएगा।

अमित शाह ने ट्विटर के जरिए यह जानकारी दी, “केजरीवाल जी, तीन दिन पहले ही हमारी बैठक में यह कुछ बातें पहले ही तय हो चुकी थी। गृह मंत्रालय ने दिल्ली के राधा स्वामी ब्यास में 10 हजार बेड के कोविड सेंटर के संचालन का काम आइटीबीपी को सौंपा है। इसका बड़ा हिस्सा 26 जून तक चालू हो जाएगा।”

बता दें गृह मंत्री ने यह जवाब तब दिया जब सीएम अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर उन्हें छतरपुर में कोरोना वायरस के इलाज के बनाए जा रहें 10,000 बेड वाले सेंटर का निरीक्षण करने का अनुरोध किया था। राधा स्वामी सत्संग ब्यास परिसर में अस्थायी सुविधा लगभग 10,000 की बेड क्षमता वाली दिल्ली में सबसे बड़ी कोविड-19 सुविधा होगी।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे है। दिल्ली में कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर अब केंद्र गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा सँभाल लिया था। दिल्ली के हालात को लेकर गृहमंत्री ने सबसे पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसके बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना वायरस की तैयारियों को देखते हुए अस्पताल का दौरा भी किया था।

कथित तौर पर शाह ने कोरोना वायरस के चलते मरने वाले मरीजों के आँकड़े, महामारी से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या और भी अन्य जानकरियों को लेकर पूछताछ की थी।

इस वक़्त महाराष्ट्र के बाद दिल्ली सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के प्रकोप को झेल रहा है। राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 62,655 तक पहुँच गई है। वहीं इस घातक महामारी से 2,233 लोग अपनी जान गँवा चुके है।

फैक्ट चेक: क्या हॉन्गकॉन्ग ने चीन के कब्जे वाले अक्साई क्षेत्र और तिब्बत को बताया भारत का हिस्सा? जानिए सच

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कुछ दिनों से कई तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही है। जिनमें यह दावा किया गया कि हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग ने एक ट्वीट के जरिए बताया कि ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ एक नए नक्शे को मंजूरी देने जा रहा है, जिसमें चीनी-अधिकृत अक्साई चिन, ठग ला रिज, खिनज़मान और तिब्बत ऑटोनोमस क्षेत्रों को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत भारत के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।

अलग-अलग सोशल मीडिया यूज़र्स ने ट्विटर के जरिए इस फर्जी पोस्ट को शेयर करते हुए यह दावा किया कि रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग ने अपने देश का एक नया नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने भारत के हिस्से के रूप में चीनी-अधिकृत क्षेत्रों को मंजूरी दी है।

बता दें ये सारी पोस्ट ऐसे समय में वायरल हुए थे जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत और चीन के बीच गतिरोध चल रहा था, जिसके कारण दोनों देशों में 15 जून को हिंसक झड़प हुई थीं।

वहीं एक यूजर ने दावा किया कि ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ ने एक नए नक्शे को मंजूरी दे दी है। जहाँ अक्साई चिन, ठग ला रिज, खिनज़मान और तिब्बत ऑटोनोमस क्षेत्रों को भारत के रूप में लद्दाख के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। साथ ही यूजर ने यह भी कहा कि ऐसे समय में भारत चीन से हॉन्गकॉन्ग की स्वतंत्रता का समर्थन करता है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने भी एक इसी तरह की खबर को शेयर किया, जिसमें यह दावा किया गया कि हॉन्गकॉन्ग की सरकार ने इस नए नक्शे को मंजूरी दे दी है जिनमें चीनी-अधिकृत क्षेत्र शामिल हैं।

फैक्ट चेक

बता दें हॉन्गकॉन्ग की तरफ से नए नक्शे जारी करने का दावा गलत है। हॉन्गकॉन्ग सरकार ने ऐसे किसी भी नए नक्शे को मंजूरी नहीं दी है, जिसमें चीन के कब्जे वाले क्षेत्र को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया हो।

हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग द्वारा हस्ताक्षर किए गए अध्यादेश की तस्वीरें नए नक्शे से संबंधित नहीं हैं, बल्कि इस महीने की शुरुआत में हॉन्गकॉन्ग के विधान परिषद द्वारा पारित राष्ट्रीय गान अध्यादेश से संबंधित हैं। तस्वीरों में चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग राष्ट्रीय गान अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर रही है, न कि नए नक्शे पर।

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीरों के पड़ताल करने पर यह मालूम पड़ा कि यह इमेज हॉन्गकॉन्ग सरकार के द्वारा की गई एक प्रेस रिलीज से संबंधित थी। जो कि चीफ एग्जीक्यूटिव द्वारा साइन किया गया राष्ट्रीय गान अध्यादेश है। यह अध्यादेश हॉन्गकॉन्ग में चीन के राष्ट्रीय गान के प्रचार और संरक्षण के लिए पेश किया गया था।

गौरतलब है कि कई समाचार रिपोर्टों ने भी इसी तरह की तस्वीरों को राष्ट्रीय गान अध्यादेश से जोड़ते हुए साझा किया था।

जिस सोशल मीडिया एकाउंट से इन तस्वीरों को शेयर किया गया था वो हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव के कैरी लैम चेंग नाम के नाम पर बनाया गया एक फर्जी अकाउंट है। दरअसल हॉन्गकॉन्ग सीई का आधिकारिक ट्विटर एकाउंट नहीं है। 2014 में, इसी फर्जी अकाउंट से भारत से ट्वीट पोस्ट किए थे। हैंडल पर उपलब्ध पुराने सारे ट्वीट भारत से संबंधित हैं और भारत से ही किए गए हैं।

इस प्रकार फैक्ट चैक में यह बात साबित होता है कि हॉन्गकॉन्ग के समाचारों में नए नक्शे को मंजूरी देने वाली खबर जिसमें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तहत भारत के हिस्से के रूप में चीन के कब्जे वाले क्षेत्र को शामिल किया है, सरासर गलत हैं।

इसके अलावा कोई ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ नहीं हैं। हॉन्गकॉन्ग एक विशेष मेट्रोपोलिटन क्षेत्र है जो वर्तमान में चीन के प्रशासन के अधीन है। इसकी एक विधान परिषद है जिसके चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग हैं। यह शहर 1997 तक ब्रिटेन के शासन में था, लेकिन चीन को उनके समझौते के अनुसार इसको सौंप दिया गया था। जिसके चलते अब हॉन्गकॉन्ग के लोग चीन से इसे पूर्ण लोकतंत्र की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

‘अन्नपूर्णा योजना’ अब ‘इंदिरा रसोई’: अशोक गहलोत ने BJP सरकार की योजनाओं को किया इंदिरा-राजीव के नाम

कॉन्ग्रेस में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार कॉन्ग्रेस हाईकमान को खुश करने के लिए किस तत्परता से जुटी हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हाल ही में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं को इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस की वर्तमान अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के पति राजीव गाँधी के नाम पर कर दिया है। ख़ास बात यह है कि अशोक गहलोत ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की योजनाओं का ही नामकरण कर उन्हें ‘गाँधी परिवार’ के रंग में रंग दिया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नगरीय क्षेत्रों में ‘इंदिरा रसोई योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अशोक गहलोत ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ का ही नाम बदलकर ‘इंदिरा रसोई योजना’ कर दिया है।

इस बारे में भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट करते हुए लिखा है- “नाम बदल कर ही सही, आख़िर जनता की माँग पर हमारी अन्नपूर्णा रसोई योजना को शुरू करना ही पड़ा। नाम नहीं अपने आप को भी बदलो सरकार। नहीं तो जनता सब कुछ बदल डालेगी।”

इसी तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना’ का नाम बदलकर ‘राजीव गाँधी जल स्वावलंबन योजना’ कर दिया है।

अशोक गहलोत सरकार ने करीब पौने दो साल के कार्यकाल में पिछली वसुंधरा राजे सरकार की एक दर्जन योजनाओं के नाम बदले हैं। यह देखना दिलचस्प है कि अचानक से ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इतिहास की किताबों में महाराणा प्रताप के शौर्य के किस्सों को हटाने के साथ ही भाजपा के कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं का नाम गाँधी परिवार के नाम पर करने का काम किया है।

अक्सर कॉन्ग्रेस शासित राज्य के मुख्यमंत्री अपने हाईकमान को संतुष्ट करने के लिए इसी शैली में काम करते नजर आते हैं, जिसमें इतिहास के पन्नों में बदलाव कर हिन्दू राजाओं को कमतर बताना, अकबर और टीपू सुलतान का गुणगान करना और राज्य की योजनाओं का नामकरण नेहरू से लेकर राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी तक कर देना शामिल है। राजस्थान की सत्ता में आते ही अशोक गहलोत ने सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर हटा दी थी।

भीड़ को सड़कों पर उतारने के लिए CAA विरोधियों ने ही फैलाई थी अफवाह, कपिल मिश्रा ने किया इंडियन एक्सप्रेस की फर्जी रिपोर्ट का खंडन

पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को लेकर मीडिया में दावा किया जा रहा है कि एक चार्जशीट में इस बात का जिक्र है कि उपद्रवियों के बीच जानबूझकर ये अफवाह फैलाई गई थी कि कपिल मिश्रा के लोगों ने एंटी सीएए (CAA) प्रोटेस्ट के पंडाल में आग लगा दी है, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई थी। वहीं, दिल्ली पुलिस के अनुसार ये अफवाह जानबूझकर उपद्रवियों ने ही फैलाई थी, ताकि उपद्रवी भीड़ को सड़कों पर उतारा जा सके।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी मीडिया के दावे को झूठ बताते हुए अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा है कि मीडिया द्वारा चलाई जा रही चार्जशीट की बातें भ्रामक और अफवाह हैं।

वास्तव में जिस ‘गवाह’ के नाम पर सोशल मीडिया पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दोषी साबित करने का प्रपंच किया जा रहा है, वह इस खबर का मात्र एक ही हिस्सा है, जबकि पुलिस द्वारा किए गए नए खुलासे, जिसमें की इस अफवाह को उपद्रवियों की ही करामात बताया गया है, की बात इसमें छिपाई जा रही हैं।

कपिल मिश्रा ने NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान को झूठा बताते हुए ट्विटर पर लिखा – “प्रिय निधि राजदान आप झूठ बोल रही हैं या NDTV झूठ बोल रहा है? झूठ तो आपस मे मिलकर बोल लिया करो।”

दरअसल, NDTV की ही रिपोर्ट में एक और खुलासे का जिक्र किया गया है, जिसमें यह स्पष्ट लिखा गया है कि दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि चाँदबाग इलाके में उपद्रवियों के बीच ये अफवाह जानबूझकर फैलाई गई थी कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के लोगों ने एंटी सीएए प्रोटेस्ट के पंडाल में आग लगा दी है, जिसके बाद भीड़ हिंसक हुई थी।

मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट जिसमें पुलिस के खुलासे का स्पष्ट जिक्र किया गया है

लेकिन NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने NDTV के बजाए इन्डियन एक्सप्रेस की खबर को ट्वीट करते हुए इंडियन एक्सप्रेस के ‘गवाह’ का ही जिक्र करते हुए कपिल मिश्रा पर आरोप लगाया है।

‘इन्डियन एक्सप्रेस’ का गवाह नजम उल हसन; जिसने देखा नहीं, बस सुना

इन्डियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हिस्सा

‘इन्डियन एक्सप्रेस’ की मानें तो नजम उल हसन नाम का गवाह उस दौरान विरोध प्रदर्शन में मौजूद था, लेकिन उसने 24 फरवरी को हुई कथित घटना को ‘नहीं देखा’, और केवल दूसरों को इसके बारे में चिल्लाते हुए सुना।

इन्डियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ इस गवाह यानी, नजम उल हसन को ‘महत्वपूर्ण गवाहों’ के बीच आरोप पत्र में सूचीबद्ध किया गया है, जो चाँदबाग में विरोध प्रदर्शनों की ‘साजिश और योजना के बारे में पूरी तरह से अवगत थे’।

पत्रकार दीपक चौरसिया ने भी ट्वीट में लिखा है – “CAA के खिलाफ प्रदर्शन और दिल्ली दंगों पर अब नया खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक उपद्रवियों के बीच जानबूझकर ये अफवाह फैलाई गई कि कपिल मिश्रा के लोगों ने नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शन के पंडाल में आग लगा दी है, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई थी। भीड़ को सड़कों पर निकालने के लिए ये अफ़वाह फैलाई गई।”

दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में अलग से करीब 1100 पेज की चार्जशीट दाखिल हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य चार्जशीट में भाजपा नेता कपिल मिश्रा का कहीं कोई जिक्र नहीं है।

वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की हत्या के मामले में दायर चार्जशीट में कपिल मिश्रा के खिलाफ नज़म उल हसन नाम के एक गवाह के बयान को भी शामिल किया गया है। इस गवाह ने दावा किया है कि 24 फरवरी को कपिल मिश्रा के लोगों को उस पंडाल को आग लगाने के बारे में बात करते सुना था, जहाँ कुछ लोग नागरिकता कानून को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

NDTV में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “‘सूत्रों’ का कहना है कि दिल्ली दंगों में मारे गए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल मामले में पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि दिल्ली स्थित चाँदबाग इलाके में दंगाइयों के बीच ये अफवाह जानबूझकर फैलाई गई थी कि कपिल मिश्रा के लोगों ने एंटी-सीएए प्रोटेस्ट के पंडाल में आग लगा दी है, जिसके बाद भीड़ हिंसक हुई थी।”

हालाँकि, NDTV की ही रिपोर्ट में यह भी बात कही गई है कि दिल्ली पुलिस के अनुसार यह अफवाह दंगाइयों ने ही जानबूझकर फैलाई थी ताकि उपद्रवियों की भीड़ को सड़कों पर निकाला जा सके।

सोनिया और राहुल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 2008 में चीन से हुए ‘गुप्त’ समझौते पर NIA जाँच की माँग

चीन से गतिरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है। वकील शशांक शेखर झा की ओर से दायर इस याचिका में 2008 में यूपीए सरकार और चीनी सरकार के बीच हुए समझौते के संबंध में जानकारी माँगी गई है। 

साथ ही सुप्रीम कोर्ट से माँग की गई है कि वो राष्‍ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से इस मामले की जाँच गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत कराने के संबंध में आदेश या निर्देश जारी करे।

याचिकाकर्ता शशांक शेखर झा और सेवियो रॉड्रिग्स ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह जनहित याचिका दायर करके कॉन्ग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के बीच समझौते के विस्तृत डिटेल को उजागर करने की माँग की है। शशांक शेखर झा पेशे से वकील हैं, जबकि रॉड्रिग्स गोवा क्रॉनिकल के एडिटर-इन-चीफ हैं। 

बुधवार (जून 24, 2020) को दायर याचिका में में यह भी कहा गया है कि पार्टी ने इस समझौते की बारीकियों से देश को अंधेरे में रखा। राष्ट्रहित से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं हुई। लिहाजा NIA जाँच जरूरी है।

याचिका में कॉन्ग्रेस और चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच 2008 में हुए करार के संबंध में जानकारी देने की माँग की गई है। इस करार के तहत दोनों के बीच हाई लेवल जानकारी का आदान प्रदान और सहयोग शामिल है।

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने भी गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत समझौते की एनआईए जाँच की माँग की थी।

उल्लेखनीय है कि दोनों पार्टियों ने महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर एक दूसरे से परामर्श लेने और उच्च स्तरीय संपर्क को सुलभ बनाने के लिए 2008 में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। बता दें कि 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान UPA चेयरपर्सन सोनिया गाँधीऔर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी चीन गए थे। इसी दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच समझौता हुआ था। ये समझौता शी जिनपिंग की मौजूदगी में हुआ था।

बता दें कि बात सिर्फ़ इस समझौते ज्ञापन की नहीं है। राहुल के संबंध चीन के साथ कुछ समय पहले डोकलाम विवाद पर भी उजागर हुए थे। जब उन्होंने चीन के साथ एक नहीं दो बार गुप्त बैठकें की थी।

पहली मीटिंग 2017 में हुई थी, जब उन्होंने चीनी राजदूत लुओ झाओहुई के साथ उस समय बैठक की थी, जब भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद छिड़ा था। इसके बाद कैलाश मानसरोवर मामले पर चीन के नेताओं से हुई गुप्त बैठक के बारे में तो राहुल गाँधी ने खुद ही खुलासा कर दिया था। राहुल उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। जिसके कारण उनका इस तरह चीन अधिकारियों व नेताओं से बैठक करने ने कई सवाल खड़े कर दिए थे।

लिबरलमैन: देखें लिबरलों-वामपंथियों के पाखंडों की पोल खोलती वायरल हो रही ये 5 वीडियो क्लिप

इन दिनों सोशल मीडिया पर लिबरलमैन नाम का एक कैरेक्टर काफी वायरल हो रहा है। हालाँकि यह कैरेक्टर काल्पनिक है, मगर इससे देश के उन लोगों के पाखंड को आइना दिखाने की जरूरत है, जो खुद को ‘उदारवादी’ कहते हैं, मगर वास्तव में उनका इससे कोई लेना देना नहीं होता है, वो इससे कोसों दूर होते हैं।

सोशल मीडिया पर The Daily Switch नाम के राजनीतिक, मीडिया और कल्चर वेबसाइट ने विश्व के नए सुपरहीरो ‘लिबरलमैन’ और ‘उदारवादियों’ की हरकतों को शेयर किया है।

वायरल वीडियो में से एक में एक बिल्डिंग जल रहा होता है, जिसमें एक 4 साल का बच्चा फँसा होता है। बिल्डिंग के बाहर दो एनिमेटेड कैरेक्टर बच्चे के पेरेंट्स के रूप में असहाय खड़े होते हैं। तभी उन्हें ऊपर से सुपरपावर के साथ ‘लिबरलमैन’ उड़ता हुआ दिखाई दिया। उनके अंदर उम्मीद जगी कि सुपरहीरो उनके बच्चे को बचा लेगा। हालाँकि लिबरलमैन ने ‘मदद’ के लिए कुछ नियम व शर्तें रखीं।

जब पेरेंट्स ने बताया कि उनकी चार साल की बच्ची बिल्डिंग के अंदर आग में फँसी है, तो लिबरलमैन उसकी सहायता के लिए ये कहते हुए सहमत हो जाता है वो जरूर सेक्सिज्म का शिकार हुई होगी। इसके बाद वो मदद के नाम पर कैंडललाइट मार्च, ‘dafli of doom‘ और कुदरती बिरयानी का विकल्प देता है। जाहिर है, लिबरलमैन की अपनी प्राथमिकताएँ हैं।

एक अन्य वीडियो में ‘लिबरलमैन’ शुरू में इस बात से सहमत था कि सोनू सूद ने प्रवासियों को उनके गृहनगर तक पहुँचाने की दिशा में काफी अच्छा काम किया। मगर जैसे ही एक वीडियो में सोनू सूद ने कहा कि वह पीएम मोदी के प्रशंसक हैं, तो लिबरल का कहना था कि सोनू सूद गैर-जिम्मेदार थे क्योंकि प्रवासियों को वापस भेजने से गाँवों में कोरोना वायरस फैल सकता है। साथ उसने सोनू सूद को ‘हत्यारा’ बताते हुए उनसे ‘अज़ादी’ की भी माँग की।

जिनकी कॉमेडी पर कोई नहीं हँसता या फिर जिन्हें फिल्मों में रोल मिलना बंद हो गया हो, भारत में ‘उदारवादियों’ के पास उनके करियर को फिर से शुरू करने का एक उपाय है। और वो है प्लेकार्ड और वोक मैसेज कॉम्बिनेशन। हो सकता है कि यह उन्हें कॉमेडियन व बना पाए, लेकिन कम से कम यह उन्हें फेमस तो बना ही देगा। इसमें ‘विक्टिम कार्ड’ स्वीकार्य होने की भी बात कही गई है।

एक अन्य वीडियो में दिखाया गया है कि जब तक आप लिबरलों से सहमत नहीं हैं, आप ‘आईटी सेल’ से हैं या फिर आरएसएस से। एक सच्चा उदारवादी कभी भी पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में किसी भी अधिकार से सहमत नहीं होगा।

इसी तरह एक वीडियो में दिखाया गया है कि देश जब कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, तो इस समय विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र किस तरह से काम कर रहे हैं। इसमें एम्स, आईआईटी, आईआईएम और जेएनयू के छात्र होते हैं। जहाँ एम्स, आईआईटी और आईआईएम के छात्र कोरोना को लेकर उनके द्वारा किए जा रहे शोध के बारे में बताते हैं, वहीं जेएनयू का छात्र कोरोना को फासिस्ट बताते हुए डफली बजाकर आजादी की माँग करता है।

इस तरह की और भी वीडियो देखने के लिए आप The Daily Switch को फॉलो कर सकते हैं।

वार्निंग की बत्ती जलती रही, पाकिस्तानी पायटल कोरोना पर चर्चा करते रहे, प्लेन क्रैश से पहले बोले: मैनेज कर लूँगा

कराची में हुए प्लेन हादसे की जाँच रिपोर्ट पेश करते हुए पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री सरवर खान ने कहा कि पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस में 40% पायलटों के पास फर्जी लाइसेंस हैं और इस हादसे के वक्त पायलट कोरोना वायरस पर चर्चा कर रहे थे।

पाकिस्तान के दक्षिणी बंदरगाह शहर कराची में पिछले महीने 22 मई को हुए विमान हादसे में में 98 लोगों की मौत के लिए पायलट और हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) जिम्मेदार पाए गए हैं। पाकिस्तान की संसद में अंतरिम रिपोर्ट पेश करते हुए, वहाँ के उड्डयन मंत्री गुलाम सरवर खान ने कहा कि जाँच बोर्ड द्वारा की गई निष्पक्ष जाँच में पता चला है कि कि हवाई दुर्घटना मानवीय भूल के कारण हुई थी।

उन्होंने कहा कि इस प्लेन क्रैश के लिए पायलट, केबिन क्रू और एटीसी जिम्मेदार हैं। क्रैश के पहले पायलट कोरोना वायरस पर चर्चा कर रहे थे। रिपोर्ट पेश करते हुए सरवर खान ने कहा कि इसकी रिकॉर्डिंग उनके पास है।

सरवर खान ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट को पूरा होने में एक साल लगेगा। उन्होंने संसद में कहा – “विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। यह उड़ान के लिए पूरी तरह से फिट था। पायलट और को-पायलट, जो दोनों चिकित्सकीय रूप से फिट और अनुभवी थे, ने पूरे उड़ान में एटीसी के लिए किसी भी तकनीकी गलती का उल्लेख नहीं किया।

‘हमारी सरकारी एयरलाइंस में 40% पायलट ऐसे हैं जो फर्जी लाइसेंस से एयरक्राफ्ट उड़ा रहे हैं’

पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री सरवर खान ने पाकिस्तान एयरलाइंस (पीआईए) पर हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा, “हमारी सरकारी एयरलाइंस में 40% पायलट ऐसे हैं जो फर्जी लाइसेंस से एयरक्राफ्ट उड़ा रहे हैं। इन लोगों ने न तो कभी एग्जाम दिया और न इनके पास फ्लाइंग एक्सपीरिएंस है। इनकी भर्ती में सियासी दखलंदाजी होती है। 4 पायलट्स की तो डिग्री भी जाली पाई गईं हैं।”

उल्लेखनीय है कि पिछले माह की 22 मई को, पाकिस्तान के पूर्वोत्तर शहर लाहौर से उड़ान भरने वाली पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार 99 यात्री और चालक दल के लोग सवार थे। इस दुर्घटना में कुल 97 यात्री और जमीन पर मौजूद एक लड़की की मौत हो गई, जबकि दो यात्री बच गए।

संसद में पेश की गई जाँच रिपोर्ट के अनुसार, सरवर खान ने कहा कि विमान जब हवाई अड्डे से 10 समुद्री मील दूर था, तो वह आवश्यक 2,500 फीट की ऊँचाई के मुकाबले 7,220 फीट की ऊँचाई पर था।

संसद में सरवर खान ने कहा, “पायलट ओवर कॉन्फिडेंट थे। उन्होंने एयरक्राफ्ट पर ध्यान नहीं दिया। एटीसी ने उनसे प्लेन की ऊँचाई बढ़ाने को कहा। जवाब में एक पायलट ने कहा कि वो सब संभाल लेगा। पूरी फ्लाइट के दौरान दोनों पायलट कोरोना वायरस से परिवार को बचाने के बारे में बातचीत करते रहे।”

उन्होंने कहा कि एटीसी ने पायलट को ऊँचाई के मुद्दे को बार-बार बताया लेकिन ‘उन्होंने चेतावनी नहीं दी।’

सरवर खान के अनुसार – “दुर्भाग्य से, पायलट कुछ ज्यादा ही आत्मविश्वास में था और उसका ध्यान केंद्रित नहीं था। उसने आखिर तक भी एटीसी की चेतावनियों को कई बार नजरअंदाज किया। लैंडिंग के पहले असफल प्रयास के बाद विमान के इंजन में आग लग गई, लेकिन एटीसी ने दूसरी लैंडिंग के लिए रवाना होने से पहले पायलट को सतर्क नहीं किया। पायलट्स ने तीन बार लैंडिंग गियर खोले बिना उतरने की कोशिश की। इससे प्लेन के इंजिन खराब हो गए।”

आजादी के बाद PAK की राजधानी इस्लामाबाद में 20,000 वर्गफुट में बनेगा पहला कृष्ण मंदिर, सरकार देगी ₹10 करोड़

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए पहला मंदिर बनने जा रहा है। इसकी आधारशिला मंगलवार को रख दी गई। इस मंदिर को इस्लामाबाद के H-9 इलाके में 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाया जाएगा। इसका नाम श्री कृष्ण मंदिर होगा। इसे बनाने में लगभग 10 करोड़ रुपयों का खर्चा आएगा। ये सभी खर्चा इमरान सरकार उठाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल में इस्लामाबाद के एच-9 सेक्टर क्षेत्र में एक सादा समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर पहले हिंदू मंदिर को बनाने के लिए चार कनाल भूमि आवंटित की गई। इस समारोह को आयोजित करने वाले मानवाधिकार मामलों के संसदीय सचिव लाल चंद मल्ही थे।

लाल चंद मल्ही ने मंदिर की आधारशिला रखते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में राजधानी में हिंदू आबादी काफी बढ़ी है, जिससे उनके पूजा करने के लिए मंदिर बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय लंबे समय से मंदिर बनाने की माँग कर रहा है। यहाँ कई हिंदू मंदिर खंडहर की हालत में हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद में कोई श्मशान घाट नहीं है।

मल्ही ने आयोजन में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि साल 1947 से पहले इस्‍लामाबाद और उससे सटे हुए इलाकों में कई हिंदू मंदिर थे। इसमें सैदपुर गाँव और रावल झील के पास स्थित मंदिर शामिल है।

हालाँकि, बाद में उन्‍हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया और कभी इस्‍तेमाल नहीं किया गया। उन्‍होंने इस बात पर भी दुख जताया कि इस्‍लामाबाद में अल्‍पसंख्‍यकों के अंतिम संस्‍कार के लिए जगह बहुत कम है।

वहीं, धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने भी इसका ऐलान किया कि सरकार इस मंदिर के निर्माण पर आने वाला 10 करोड़ रुपए का खर्च वहन करेगी।

उन्‍होंने कहा कि मंदिर के लिए व‍िशेष सहायता देने की अपील प्रधानमंत्री इमरान खान से की गई है। इस्‍लामाबाद हिंदू पंचायत ने इस मंदिर का नाम श्रीकृष्‍ण मंदिर रखा है। इस मंदिर के लिए वर्ष 2017 में जमीन दी गई थी।

बता दें, इस मंदिर को लेकर माँग बहुत समय से की जा रही थी। लेकिन कुछ औपचारिकताओं, जैसे मंदिर निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद सीडीए और अन्य अधिकारियों द्वारा साइट मानचित्र की मंजूरी आदि के कारण ये मामला 3 साल लटक गया।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इस मंदिर परिसर में एक अंतिम संस्कार स्थल भी होगा और अन्य हिंदू मान्यताओं के लिए अलग जगह बनाई जाएगी।

ध्यान रहे कि एक ओर जहाँ पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्‍तान अल्‍पसंख्‍यकों के लिए नरक बन चुका है और यहाँ आए दिन हिंदू समुदाय की बच्चियों का अपहरण करके उन्‍हें इस्लाम कबूलने पर मजबूर किया जाता है।

वहीं मंदिर निर्माण की खबर उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान सरकार भारत की आलोचना करके ये जाहिर करने की कोशिश करती रही है कि भारत में समुदाय विशेष के लिए मस्जिदों के दरवाजें बंद हो रहे हैं और मस्जिदों की जगहों पर हिंदू मंदिर बनाने की बात हो रही है।